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Incest माँ और बेटे ने घर बसाया(सच्ची घटनाओं पर आधारित)

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Update 6


3 महिने भी कट गए । मैं लगभग रोज़ मां को याद करके मूठ मरता था इसी बीच मेरा फाइनल एग्जाम का रिजल्ट भी आगया। और मेरा जॉब ज्वाइन करने का टाइम भी आगया।

पहली बार में घर से दूर जाके रहने वाला हू। आज तक कभी नाना नानी और माँ को छोड़ के कहीं नही गया । लेकिन मुझे डर नहीं लगा। पर एक दुःख मुझे खाये जा रहा है..की मुझे मेरी माँ को बिना देखे वहां रहना पडेगा। नानाजी का स्ट्रिक्ट इंस्ट्रक्शन है की हर शनिवार वापस आना पड़ेगा और फिर मंडे ऑफिस ज्वाइन करना है। लेकिन बीच का 6 दिन मेरे पास 6 साल लगने लगा। जब माँ हर रात सोने से पहले मेरे पास आके मेरे बालो में उगलियाँ फिराती है, और मेरे तरफ प्यार भरी नज़र से देख के स्माइल करती है वह पल के लिए मै बेताब रहता था रोज। पर अब वह चीज़ से मुझे दूर हो गई है। माँ ऐसे तो बोलती कम है बस देखती ऐसे है की जैसे आँखों में ही सब को कुछ बोल देती है।
अब मेरा जाने का वक़्त नज़दीक आने लगा तो वह और भी चुप हो गई। बस नानीजी को किचन में हेल्प कर रही है, घर का बाकि काम कर रही है, टीवी देख रही है, मेरा जाने के लिए सब ज़रूरी चीज़ों को रेडी करके मेरे रूम में रख रही है। पर कभी कभी मायुस नज़र से मुझे एक पल देख के फिर चली जाती है।

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उनको भी तकलीफ हो रही होगी। मां मेरे बगैर कभी नही रही । मेरे लिए ही उन्होंने ज़िन्दगी की सब खुशियां विसर्जित कर दी थी। पिछले कई साल से मैं उनसे और वो मुझसे अटैच है । उनके प्यार मे मेने मेरे अंदर एक अलग ही आदमी को जनम दे दिया है. जो आदमी माँ से प्यार करता है. उनके साथ एक अलग दुनिया में ही जीता है. लेकिन उसको भी मालूम है की शायद यह मन की बात केवल मन में ही रहेगी पूरी ज़िंदगी.


देखते देखते वह दिन भी आगया जिस दिन में कंपनी जाने के लिए ट्रैन स्टेशन पे खड़ा था। माँ, नानाजी, नानीजी सब आये है. कंपनी मुझे वहां रहने के लिए फिलहाल एक जगह प्रोवाइड कर रहा है. ज्वाइन करने के बाद में धीरे धीरे अपना रहने का बंदोबस्त खुद की करूंगा. इस लिए नानाजी मेरे साथ चल रहे है. नानीजी बार बार नानाजी को क्या क्या करना है वह याद दिला रही है. मुझे वहां कोई तकलीफ न हो, इस लिए सब बंदोबस्त सही तरीके से करने के लिए उनको बार बार सब चीज़ों को एक एक करके बता रही है. माँ मेरे पास मेरी सीट पे बैठ के मेरा एक हाथ उनके दोनों हाथो में थाम के चुप चाप बैठी है और नाना नानी की बाते सुन रही है. माँ ने एक बार मेरी तरफ देखा. उनकी आंखे नम है.

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मन में कष्ट हो रहा है उनको . वह उस फीलिंग को दबा रही है सब के सामने. मुझे मालूम है माँ घर जाके रूम लॉक करके बहुत रोयेगी. मैं इतने सालों से उनको थोड़ा बहुत जानता तो था. उनकी हर हरकत, हर अदा का क्या मीनिंग है वह मैं साफ समझ सकता था मैने भी माँ को देखा. उनका मासूम फेस मुझे हमेशा से अजीब फीलिंग्स देता है. वह मुझ से धीरे से बोली ' तुम मुझे रोज फ़ोन करना'. मेने स्माइल करके धीरे से गर्दन हाँ में हिलाई . अचानक ट्रैन ने एक झटका खाया. टाइम हो चुका है. इस लिए सब उतरने लगे. नानीजी ने मेरा सर चूमा और उतरने लगी. माँ ने मेरा हाथ जो उनके हाथों में था वह मुह के सामने लाक़े चुमा और मेरे गाल पे उनका दाया हाथ रख के एक बार फिराया और गिली आँखों से स्माइल किया. इस का मतलब मुझे मालूम है. मुझे ठीक से रहना है, ठीक टाइम पे खाना है, सोना है, ठीक से काम करना है, अपना ख्याल रखना है ..यह सब बाते वह बिना कुछ बोले मुझे समझा गयी. . वह बाहर जाके खिड़की के पास खड़ी हो गयी. और ट्रैन चलने लगी. नानी और माँ धिरे धिरे दूर होने लगी. ऐसा लगा की मेरा कुछ यहाँ रह गया और. क्या रह गया वह कह नहीं सकता. मेरा मन भारी हो गया. और ट्रैन रफ़्तार पकड़ने लगी.
बडा ही मस्त लाजवाब और शानदार अपडेट है भाई मजा आ गया
 
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Update 7


ऑफिस में पहला दिन थोड़ा डर लग रहा था सब बड़े बड़े इंजिनिअर्स और ऑफिसर्स के साथ परिचय हुआ. सब के बीच मुझे नर्वस फील हुआ. सब मेरे हालत समझ गये थे इस लिए वह लोग मेरे साथ कम्फर्टेबले तरीके से घुलने मिलने लगे की एक ही दिन में मुझे इनिशियल हेसिटेशन और डर भूल के कॉन्फिडेंस आने लगा. लेकिन एक बात है.. कोई यकीन नहीं कर रहा था की में 20 साल का था और जस्ट कॉलेज से पास आउट हुआ हूं. मुझे देख के इतना मचुर्ड समज रहे थे।

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जब मेने असलियत बताई तब सब हसके मुझे गले लगाने लगे. मैं गुजरात से हू पर वह लोग मेरी अच्छी हिंदी सुनके मेरी तारीफ भी करने लगे. एक दिन ऐसे ही बीत गया पर मेरे मन में मेरे हर वक़्त की ख़ुशी की ज्योति मां की तस्वीर के रूप में, हमेशा के लिए जल रही थी. आँख बंध करते ही वह पूरे तन मन में छा जाती थी. पर कुछ कर नहीं सकते क्यों की मैं बाथरूम में जाके नही हिलाता था. मुझे तो मेरा कम्फर्टेबल प्लेस ही चाहिए होता है.
उपर से मैं रोज की तरह माँ की उंगलिया फ़िरने का सुख, प्यार भरी नज़र और उनकी स्वीट स्माइल बहुत मिस कर रहा था. मैं चेयर पे बैठ के आँख बंध कर के मेरी प्यारी माँ को याद कर रहा था, अचानक याद आया की माँ ने मुझे रोज फ़ोन करने के लिए कही था.
मैं झट से चेयर छोड़ के उठा और मेरा मोबाइल उठाया. अब रात 11 बज चुके है. माँ इस टाइम तक सो जाती है. फिर भी मेने एकबार ट्राय करने के लिए सोचा.
बालकनी में आया और माँ को फ़ोन लगाया. एक बार रिंग होते ही उन्होंने फ़ोन उठा लिया. मेरे दिमाग में फ्रैक्शन ऑफ़ सेकंड में ये खयाल आया की माँ जरूर मेरे फ़ोन के इंतज़ार में बैठी थी. इस लिए इतनी जल्दी रिसीव कर लिया और इतनी रात को भी जागी हुई है. मैंने बोला
'' हल्लो...माँ...''.
माँ के तरफ से कुछ रिप्लाई नहीं आई. मैं फिर से बोला
'' माँ...कैसी हो .
फिर से सन्नाटा. मैं भी चुप होकर समझने की कोशिश कर रहा था की आखिर हुआ क्या. मैं फिर बोला
'' क्या हुआ माँ...आप ठीक तो होना?'' मेरा आवाज़ में चिंता थी अब माँ थोड़ी देर बाद बोली
" कल तुमने फ़ोन क्यों नहीं किया?"
माँ की आवाज़ में न जाने क्या था जो मेरे कान में आते ही मेरा पूरा बदन एक अनजानी फीलिंग से कांप उठा. दिल की धड़कन तेज हो गई. मुझे यह भी तसल्ली मिली की वह सही सलामत है. मेने खुद को संभाल कर जबाब दिया
" सॉरी माँ..कल सब कुछ करते करते बहुत रात हो गई थी और आज ऑफिस में पहला दिन......"
मेरी बात ख़तम होने से पहले ही उन्होंने मुझे रोक दिया और बोल ने लगी
" बस बेटा...इतनी सफाई की जरुरत नही"
फिर थोड़ा रुक के बोलने लगी
"यह बताओ ..वहां तुम्हे कुछ प्रॉब्लम तो नहीं हो रही है ना?
"नही माँ...नानाजी साथ में है ना.. . आप तो उनको जानती हो. सब वही देख रहे है"
लेकिन में यह बता नहीं सकता की माँ आप से दूर रहके मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लग रहा है.
तभी माँ बोली
" और आज पहला दिन ऑफिस में कैसा रहा..?"
" ठीक था माँ. सब ने मुझसे अच्छे से बात कि और मेरा जो बॉस है मुझसे अपने कोई पहचान वाले जैसे बात कर रहा था. सब बहुत अच्छे लोग है. लेकिन...."
मैन चुप हो गया तो माँ ले पूछा
"लेकिन क्या?"
"सब मुझे देख के मेरी उम्र ज़ादा सोच रहे थे. पर मेरी सही उम्र जान के सब हस पडे." ऐसी बहुत सारी बाते माँ से होती रही.
एक प्यारी माँ अपने बेटे के लिए ढेर सारा प्यार उड़ेल रही थी. अंत में माँ ने गुड नाईट बोलके फ़ोन काट दिया. मैं कभी माँ से बत्तमीजी से पेश नहीं आया, ना ही माँ के साथ कभी लूस टॉक कि, ना हीं कभी उनको ज़बर्दस्ती पकड़के हग किया या गाल चुम कर प्यार दिखाया. मेरा परवरिश ही ऐसा था हमारे घर में हम सब के बीच गहरे प्यार का बंधन है . मेरे मन में माँ के लिए पिछले 6 साल से एक अजीब और अद्भुत फीलिंग है, पर मेने कभी उनसे सेक्स रिलेटेड या डबल मीनिंग बात या बिना कारण उनको टच करने की कोशिश नही की.... मैं उनसे प्यार करता हूं रेस्पेक्ट भी करता हू पर वह प्यार मैं भाषा में बयां नहीं कर पाऊंगा. जो इंसान ये फील करता है, केवल वो ही उसको समझ सकता है.

एक हफ्ता गुजर गया. ऑफिस में मै थोड़ा खुल चुका था मुझे काम करने के लिए रिस्पांसिबिलिटी भी सौपा गया. और मेने ख़ुशी से वह करना भी शूरु कर दिया. इधर नानाजी ने मेरे लिए एक घर किराये पर ले लिया फिर नानाजी अहमदाबाद जाने के लिए निकल पड़े और मैं ऑफिस के लिये. उस दिन ऑफिस में एक कलीग की शादी थी सब लोग शाम को वहां जाने वाले थे. मुझे भी जाने के लिए कहा, मेने मना किया तो उन लोग ने बताया की मेरा भी इनविटेशन है.

ऑफिस कलीग्स सब एक जगह बैठे है. दूल्हा यानि की मेरे कलीग ने दुलहन से परिचय कराया वापसी के समय ऑफिस के एक दूसरे कलीग ने उसकी गाड़ी में मुझे घर छोड़ दिया. मुझे अंदर आते ही एक अजीब फीलिंग् हुई. यह घर आज से मेरा है. यहां मेरा ही रूल चलेगा. जो भी करु, जैसे भी करू, कोई नहीं है रोकने के लिये. किसी से डरके कुछ करने की भी जरुरत नही. मेरे दिमाग में आया की मैं भी इस तरह एक दिन शादी करूंगा. मुझे ऐसी एक लड़की दुल्हन के रूप में मिलेगी. सब मेरी शादी पे आयेंगे. फिर मेरी खुद की फॅमिली बनेगी. यह सब सोचते सोचते मेने फ्रेश होके , कपड़े चेंज करके मेरा कम्प्यूटर ऑन किया. एक हफ्ते बाद मुझे आज एकांत में मेरे पीसी के साथ टाइम मिला. मैं मोबाइल उठाके माँ से बात करने लगा और आज का दिन कैसे गया बताया. शादी पे गया था , वह बात भी बताया.. माँ भी ऐसे ही इधर उधर की बात पूछ रही थी. मैं मेरे पीसी का सीक्रेट फोल्डर खोल के माँ की तस्वीर देख रहा था और साथ में माँ से बात कर रहा था. मुझे अच्छा लग रहा था. जैसे उनसे में फेस टू फेस बात कर रहा हू. कुछ भी बोलते समय कैसे उनकी अदा या पोस्चर होता है, मुह, आंख, नाक कैसे रियेक्ट करते है , मैं सब जनता था और उनकी बात सुनते सुनते में वैसे पिक्स देख रहा था. इस लिए मुझे लाइव कन्वर्सेशन जैसा महसुस हुआ. मैं एक सकुन और ख़ुशी की फीलिंग में डुबा हुआ था. थोड़ी देर बाद मेरे मन में एक अजीब प्यार आने लगा माँ के लिए पर मैं उस को दबा के माँ से बात कंटिन्यू करने लगा. उनके सामने वह ज़ाहिर नहीं कर सकता था किसी भी हाल में. सो मेरा बदन सिरसिर करने लगा और तभी माँ ने बात ख़तम करके गुड नाईट कहके फोन काट दिया.

मुझे एक नशा लग गया. आज इतने दिन बाद मेरी माँ के सुन्दर चेहरे का फोटोज और हर पोज़ में उनकी अलग अलग अदा देख के में धीरे धीरे उत्तेजित होने लगा. 7 दिन का इमोशन आज भर भर के रोम रोम में छाने लगा. मैं सपनो की एक दुनिया में पहुंच गया और माँ की तस्वीर गौर से देखने लगा. अचानक शाम को देखी हुई दुल्हन का चेहरा मेरी नज़र के सामने आने लगा. मैं माँ को देखते देखते उस दुल्हन की कल्पना करने लगा।

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मेरा पूरा बदन कापने लगा. मैं जोर जोर से सांस छोड़ने लगा. मेरे राईट हैंड ने न जाने कब मेरे लन्ड को हिलना शुरू कर दिया. मैं माँ की एक मुस्कुराती हुई फोटो को नज़दीक जाके देखने लगा और ऐसे लगा की मेरी माँ ही उस दुल्हन के रूप में है. वह दुल्हन की तरह सज धज के मेरी तरफ देख के मुस्कुरा रही है.

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मेरे लोड़े का टोपा अभी से एकदम फूल के गोल हो गया. मेने चेयर पर सीधे बैठ दोनों पेरो को फैला. सामने माँ की फोटो और दिमाग में दुल्हन के रूप में माँ की कल्पना करके मेरा ओर्गास्म चरम सीमा पर आ गया. मेने आँख बांध कर लि और गरम सांसे छोड़ने लगा. मैं माँ को दुल्हन के रूप में कल्पना करके मेरे ओर्गास्म तक पहूंच गया और मैं फुल स्ट्रोक के साथ साथ फूले हुये टोपे को मुठ्ठी में ले लेके जोर जोर से हिलने लगा. जब मेरा सीमेन निकलने वाला था तब मेरे मुह से केवल ''मंजू.....मंजू...मंजू..." शब्द निकलने लगा. और अचानक मेरा दिमाग में अँधेरा हो गया मेरा गरम गरम सीमेन चिरक चिरक के निकलने लगा.

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Update 8


१५ दिन बाद २ण्ड वीकेंड में में अहमदाबाद गया. माँ बेसब्री से मेरा इंतज़ार कर रही थी. कल रात फ़ोन पे वह मुझे बार बार पूछ रही थी की में कितने बजे का ट्रैन से आउंगा. कब पहुँचूंगा अहमदाबाद और ढेर सारे सवाल. तभी मुझे एह्सास हुआ की ज़िन्दगी में पहली बार १५ दिन तक में माँ से और माँ मुझसे दूर है. नानी जी ने दरवाजा खोलके मुझे वहीं गले लगा लिया. पीछे नाना जी खड़े थे. वह भी ख़ुश होकर मुझसे बात करने लगे. मैं अंदर आया. और अपना बैग कन्धे से उतार के नीचे रखा. माँ उन सब के पीछे खड़े होक मुझे देख रही थी. उनकी प्यार भरी नज़रों से जो अपना बेटे के लिए उदबेग और ख़ुशी नज़र आया, वह देख के मेरा दिल पिघल ने लगा. वह ऐसी एक सुंदरता और शान्ति की मूर्ति है, जिसको में ज़िन्दगी भर बिना पलक झपकाये देख सकता हू. माँ हमेशा घर पे साड़ी ही पहनती है.

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उनकी इनोसेंट फेस और नाक, पीछे का सुडौल गर्दन, एल्बो से नीचे का हाथ का हिसा, दोनों हाथ में दो सोने का चूडि, और लंबी लंबी गोल गोल उँगलियाँ , उन्होंने लेफ्ट हाथ की उँगलियाँ में हल्का सा लाइट कलर नेल पोलिश,पेट् नीचे जाके पतली कमर और साथ में स्लिम बॉडी होने के कारन उनका उम्र कभी पता नहीं लगता था. कोई भी देखता था तोह उनको २० - २२ साल की लड़की सोचता था. कोई नहीं बिस्वास करता था की वह मेरा माँ है . उनका पैर मुझे सबसे ज़ादा आकर्षित करता था.

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ऐसा सुन्दर छोटी छोटी मुलायम पैर और हल्का नेल पोलिश वाली उंगलिया देखके मुझे हमेशा एक नशा आजाता है. इस औरत को में जितना देखता हू, उतना कम है .यह सबकुछ उनके लिए मेरे दिल में प्यार और रेस्पेक्ट बढा देता है. हमेशा उनके लिए एक अलग अनुभुति मेरे मन में छा जाता है. नाना-नानी पैर पढ़ने के बाद में माँ के पास गया . मैं भी उनसे मिलने के लिए बेताब था. मैं उनके पैर छुये. मैं जैसे ही खड़ा हुआ वह मुझको पकड़ के मेरे गले लगना चाही . पर उनका सर मेरे शोल्डर पे टिक गया. और दोनों हाथ से वह मुझे पीछे से बेडी लगाके कसके पकड़ली.

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वह इतने दिन की दूरि मुझसे ऐसे गले लगा के पूरी कर रही है. नाना - नानी हास्के बोलने लगे की "क्य मंजू...बेटे को और जाने नहीं देगी क्या?" माँ मेरे नज़्दीक रहकर, उनका ही हिस्सा, उनका ही खून, जो आज एक नौजवान पुरुष बन गया, उस को मेहसुस कर रही है एक अपने स्नेह के साथ.

रात को डिनर के टाइम हमेशा की तरह सब लोग खाने बैठे. हमारे परिवार में सब डिनर एकसाथ करते थे. माँ जनरली सर्व करती है पर कभी कभी वह भी साथ में बैठ जाती थी और सेल्फ सर्विस चलता था. सब हसि मज़ाक़ और मस्ती के साथ वह पल बिताते है. आज भी सब लोग बैठे. माँ सर्व कर रही है. मैं पिछला ५ घंटे से आया. तब से सब लोग मेरे पीछे पड़ गये. मेरा शरीर और हालत १५ दिन में सुख सा गया, ऐसा लगा उन लोगों को. उनको लगता है में खाना नहीं खाया इन १५ दिन. बार बार पूछ रहे है ऑफिस में क्या खता हूण. वह खाना सप्लाई करनेवाला आदमी ठीक से खाना देता है क्य, में उसको ठीक से खाता हुन या नही. एक लौता पोता और एक लौते बेटे के लिये.. सब चिन्ता थी, यह में मेहसुस कर रहा था.

ऐसेही ही ज़िन्दगी चल्ने लगा. वीकडेस में सब से दूर रहके काम करना. अपनी देख भाल खुद ही करना. माँ से फोन पे बात करना ..यह सब एक रूटीन बन रहा था. फिर वीकेंड में घर जाने में एक ख़ुशी महल बन जाता था. फिर सब का प्यार , सनेह और मेरे बारे में उनलोगों का चिंता के साथ दो दिन बिताके फिर वापस आना. ऑफिस में धीरे धीरे काम का प्रेशर बढ़ ने लगा. इस्स लिए शायद सच मुछ मेरे शरीर पे इस का प्रभाव पड़ने लगा. फिर से वीकेंड आया और में घर वापस आया. मेरी हालत देखके सब परेशान हो गए. माँ केवल पूछा में खाना खता हु क्या टाइम पे. उनके आँखों में एक चिन्ता दिखा. नाना नानी ज़ादा सोच में पड़ गये.
नाना नानी इतना परेशान था मेरा हालत को लेके की उन लोगों ने मेरा इस प्रॉब्लम का सलूशन ढूँढ़ना सुरु कर दिया. वह दोनों रात में सोटे टाइम आपस में बात करने लगा. पहले यह तय किया की मेरी माँ मेरा पास जायेगी और मेरे साथ रहके मेरा देख भाल करेंगे. माँ को भी प्रॉब्लम नहीं होना चाहिए क्यों की वह हमेशा अपने बेटे के लियेही सब कुछ छोड़के आज ऐसा एक ज़िन्दगी चुना. तोह वह भी इस में खुश होके मेरे पास रहना पसंद करेंगे. फिर वह लोग सोचे की में अब २० साल का हो गया. बाकि सेम उम्र के लड़कों से में थोड़ा म्याचूर्ड भी दीखता हूण. साथ में जॉब करता हूण. अच्छा सैलरी भी मिल रहा है. साथ में नानाजी का सब कुछ मेरा ही है. और कोई वारिस नहीं मेरी माँ छोडकर. सो आखिर सब कुछ मेरे पास ही आयेगा. सो यह सब काउंट करेंगे तोह मेरे लिए आच्छे घर की एक अच्छी सुन्दर सुशिल लड़की मिल जाएगी. नाना नानी यह सोचे की जब ज़िन्दगी में शादी करवाना है और अब इस प्रॉब्लम का हल ढूँढ़ना है , तब क्यों ना अभी उसके लिए लड़की ढुंडके शादी न करवा दिया जाए. यह तरीका उनको सही लगा. पर जब नानी जी थोड़ा टाइम चुप रह, कुछ बोल नहीं रही थी तब नाना जी पूछे उनको की क्या कोई गलत सोचा वह लोग? नानी जी तब बोलने लगी की नहीं गलत कुछ नही. पर आज हीतेश का शादी करवाके उसका लाइफ सेट हो तो जाएगा. पर हम और कितने दिन जियेंगे? नानाजी ६० क्रॉस कर चुके है और नानीजी भी दो चार साल में ६० टच कर लेगी. वह लोग और जीतना दिन है, तब तक ठीक है. पर वह लोग जानेके बाद उनकी बेटी मंजु बिलकुल अकेली हो जाएगी. हीतेश है एक सहारा. पर बीवी आनेके बाद सब बेटा बीवी का ही हो जाता है. बीवी की ही सुनता है. तब माँ का प्यारा , माँ का ओबीडियन्ट बेटा बनके रहने में बहुत सारा झमेला आजाता है. बीवी अपने पति के ऊपर और किसी का अधिकार सह नहीं सकती. बीवी हमेशा अपनी फॅमिली की लग़ाम अपनेहि हाथ में रखना चाहती है. अपनी सास, जो उसका पति को पाल पोश के आज इस लायक बनाया, उनको भी वहां घुसना पसंद नहीं करती. बेटा कितना भी चाहे, अपनी बीवी के खिलाफ जाना मतलब अपनी ही पैर में कुल्हाड़ी मारना यह समझ जाता है. पर जो औरत अपने बेटे के लिए पूरी ज़िन्दगी विसर्जन दि, दोबारा अपनी ज़िन्दगी में सब कुछ पाने के मौके को अपने ही हाथ से गवाया केवल अपने बेटे का मुह देखके, जो अपनि पूरी जिंदगी की ख़ुशी अपने बेटे में ही ढूंडा--उस औरत के साथ अगर ऐसा होगा तोह इस दुनिया में अकेली कैसे जी पाएंगी?


नानीजी ने बोला की जब तक हम इस दुनिया में है तब तक ठीक है. पर हमारे जाने के बाद कौन देखेगा उसको उसके बुढ़ापे मे. वह लोग जानता है हीतेश ऐसा लड़का नही. उसका परवरिश भी उस तरह हुआ नही. बचपन से वह सब कुछ देखते आया. हमारा प्यार, बॉन्डिंग वह अछि तरह से मेहसुस करते आया. वह कभी अपनी माँ को दुःख देगा नही. बिना बाप की ज़िन्दगी में वह अपनी माँ से जो प्यार उसको मिला है उसमे कभी बाप की कमी शायद मेहसुस नहीं किया होगा. पर है तो वह एक लौता. उसी से ही इस खानदान की अगली पीढी आयेगा. इस्स लिए उसको शादी भी करना पडेगा. उसको अपने लिए बीवी भी चुननी पड़ेगी. आज कल की लड़की होते भी सब ऐसेही. अपना पति और अपने बच्चो को ही अपना दुनिया मानता है. परिवार के बाकि सब को लेके जो एक फॅमिली बनता है, और उसमे जो सुख मिलता है , वह सब आज कल की लड़की लोगों की मानसिकता में नहीं है.नाना नानी यह सोच के मायुस हुआ की अगर वह लोग तभी माँ का न सुनके अगर उनका शादी फिर से करवा देते तोह आज यह दुश्चिंता उनलोगो को सताता नहीं . यह सब सोच के उनकी बेटी अपना ज़िन्दगी का सब ख़ुशी अपने ही हाथ से दूर फ़ेक दिया. और आज वह घडी आगया फिर से वैसे एक परिस्थिति आनेका. आज एक लड़की इस फॅमिली में बहु बनके आयेगा. वह आके कैसे बर्ताव करेगी अपने सास से, अपने पति के नाना नानी से, यह सब सोच ते उनको दिल पे काला मेघ छा ने लगता है. लेकिन करे तो करे कया. शायद एहि दुनिया का नियम. आप जीस प्रॉब्लम से दूर भागते हो, वह प्रॉब्लम आगे आपके लिए वेट कर रहा है आपसे गले लगाने के लिये. यह सब चिंता में से वह लोग डूबे रहते थे. और हर रोज सोने के टाइम दो बूढ़ा बूढी एहि डिस्कुस करने लगे. ऐसे ही एक दिन उनलोगों के दिमाग में यह सब के अलावा और एक सोलुशन नज़र आया. पहले वह लोग खुद ही थोड़ा आचर्यचकित हो गए थे. बाद में बातों बातों में सब कुछ सही लगा. लगा के, सब ठीक विचार करके, सब का भलाई सोचके, सब का फ्यूचर का कुछ प्लानिंग ठीक करके धीरे धीरे एक फैसले में पहुच चुके. आखिर में उस बारे में बहुत उँछनिछ बाते होने के बाद नाना नानी एक डिसिशन पे पहुचे. लेकिन तब भी वह लोग भी नहीं जानते थे की सच में यह मुमकीन होगा या नही. और होगा भी तो उस के लिए किसको क्या क्या करना पड़ेगा, क्या सैक्रिफाइस करना पड़ेगा , या किस तरीके से मुमकीन होगा यह वह लोग बिलकुल नहीं जानते थे.
बहुत ही शानदार लाजवाब और अद्भुत मनमोहक अपडेट हैं भाई मजा आ गया
 
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Update 9


आज नाना जी और नानी जी ड्राइंग रूम में बैठके टीवी देख रेहे थे. माँ नहा के फ्रेश होकर , भीगे बालों में एक टॉवल लपेट के किचन में काम कर रही थी. लंच के लिए सब्जिअं काट रही थी. नाना - नानी टीवी देख रहे थे, फिर देख भी नहीं रहे थे. आज उनलोगों को देख के ऐसा लगने लगा की वह लोग टीवी के तरफ देख के और कुछ सोच रहे थे. एक समय नानाजी नानीजी की तरफ मुड़के देखा. नानीजी उनको देख के कुछ समझि और फिर से दोनों टीवी देखने लगे. थोड़ी देर बाद नानीजी वहां से उठ के किचन के तरफ चली गई. किचन में माँ को काम में हेल्प करने के लिए उनके साथ हाथ बटाने लग गयी
. थोड़ी देर इधर उधर की बात होने के बाद नानी जी मेरा बात लेके वह उनका चिंता जताते रहे. मैं कितना प्रॉब्लम फेस कर रहा हू अकेला रहके. माँ भी समझती थी मेरी प्रॉब्लम क्यों की वह भी कुछ दिन से परेशान थी इस को लेके. सो नानी जी की बातों में माँ भी साथ देणे लगी. तब नानी जी बोलने लगी की अब हीतेश भी बड़ा हो गया है तो उसका शादी करवा देते है. यह सुन के माँ नानी की तरफ देख के हॅसने लागी. माँ हस्ते हस्ते बोली
" अब.....शादी... हीतेश की?"
नानी बोली
" हा...कयूं नहीं?"
" मम्मी ... अब तो वह बच्चा है"
" हीतेश २० साल का हो चुका है... नौकरी भी करता है.... और उसको देख के कौन सा बच्चा लगता है तुझे?"
मां मुस्कुराके सब्जी काटने लगी... उनको भी यह सब मालूम है. तब नानी बोली
" हर माँ को उनके बेटा-बेटी हमेशा बच्चा ही लगता है..जब की वह कितना भी बड़ा हो जाए"
सब्जी काट ते काट ते माँ बोली
" तो अब हीतेश को एकबार पुछ लेते है..."
नानी नमकिन का पैकेट्स काट के छोटा छोटा बरनि में भरते हुए कहा
" उससे क्या पूछना है..."
फिर माँ के ऊपर एक नज़र दाल के देखि. माँ नानी की तरफ बैक होक खडी है सब्जी काट ते हुए किचन स्लैब के पास . फिर अपनी हाथ में पकडे बरनि की तरफ देख के नानी बोली
" घर पे हम उसके बड़े है. क्या हम उसकी भलाई बुराई नहीं समझ ते है क्या?.... और वह भी ऐसा नही... हमेशा हमारी बात सुनता है"
मा का सब्जी काटना ख़त्म हो गया था वह मुड के नानी को देखते हुए किचन का दूसरा तरफ जाने लगी.
वह वहां रखा आटे का डिब्बा खोल रहे थे और बोली
" उसके लिए तो अब एक अच्छी लड़की ढूंढ़नी पड़ेगी मम्मी"
नानी अब बरनि का ढक्कन बंद करते हुए कही
" हाँ... यह एक बड़ा काम है. एक अच्छी लड़की ही तो चहिये"
नानी ढक्कन टाइट करते करते माँ की तरफ देखि और कहने लगी
" जो हीतेश का ठीक से देख भाल कर सके. अकेली हाथों से संसार बांध सके. बच्चे का देख भाल कर सके. और हमारे साथ मिलके हमारी एक फॅमिली जैसी बनके रहे...."
मा थोडी चिंतित दिख रही थी. वह आटा निकालते निकालते नानी को देख के बोली
" सही कहा तुमने मम्मी.."
फिर अपने काम की तरफ नज़र फिराके बोलने लगि
" ऐसी ही लड़की चाहिए हमारे हीतेश के लिये. जो हम सब को अपना सोच के हमारे तरह एक साथ रहे पर...."
नानी ने नोटिस किया माँ कुछ सोच में है. तो उन्होंने चुप्पी तोड़ के बोली
" और तो और देखने में भी अच्छी होनी चहिये...हमारे हीतेश के साथ
बिलकुल मैच हो पाये"
मा उठके एके आटे की थाली किचन स्लैब के ऊपर रखि. और उसमे पाणी ड़ालने लगी और बोली
" ऐसी लड़की मिले तब ना मम्मी...."
नानी को थोड़ा होसला मिला. माँ की साइड प्रोफाइल नानी को नज़र आ रही है. उन्होंने माँ से नज़र ना हटाके बोलते रहि
" हम भी एहि सोच रहे थे. आज कल जो लड़की लोगों को देखती हू, उनसे मन ही उठ जाता है. तेरा पापा के साथ इसको लेके बहुत बात हुइ. हम भी परेशान हो गए थे. कहाँ मिलेगी ऐसी लड़की. कौन खबर करेंगा. बहुत सारि बात चित होने के बाद हम यह तय किये की हम इतना क्यों सोच रहे.क्यों की हम सबकी भलाई के लिए ही चिंतित है. हमारे सब की भविष्य के बारे में सोच के चलना पड़ेगा. सब ठीक विचार करके हम ने सोचा की..हाँ है न... ऐसी ही लड़की है....जैसे हम सब को चहिये"

मां आटा गुंथते गुंथते रूक गई..और नानी की तरफ मुड़के आँखों में एक हैरत के साथ और होंठो पे मुस्कराहट लेके पूछि
" क्या मम्मी.... आप लोगों ने लड़की ढूंढ भी निकाली!!"
नानी अब एक स्माइल के साथ उठ के माँ जहाँ खडी थी स्लैब के पास वहां आने लगी. तब माँ फिर से पूछि
" कहाँ से ढुंडके निकाली मम्मी?"
नानी माँ के पास पहुछि और उनके सामने खडी होगई. नानी माँ का चेहरा गौर से देखने लगी. माँ भी थोड़ा एक्साइटेड हो रहे थी. नानी की आँखों में एक ममता और प्यार भरी मुस्कराहट छा गई. माँ फिर से पुछी
" कौन है वह लड़की मम्मी...और कहाँ की है?"
नानी देखा माँ नहाके फ्रेश होकर एक लाइट कलर की प्रिंटेड साड़ी में आज बहुत सुन्दर दिख रही है. उनके सर के बाल पे एक टॉवल लपेटा हुआ है. एक दो बाल टॉवल से निकल के उनकी फोरहेड के ऊपर पड़ा है. नानी अपने दोनो हाथ से माँ का वह बाल प्यार से फोरहेड से हटाके उनका चिन पकड़के बोली
" बाहर कहाँ ढूंढू ऐसी लड़की....जब हमारे ही घर में एक ऐसी सुन्दर लड़की है तो" बोलके नानी एक चौड़ी स्माइल करते रही.

मा इस बात को ठीक से समझ नहीं पाई. वह कोशिश कर रही है समझने की और जैसे की कुछ याद कर रही है. उन्होंने एक बड़ा सा पलक झपका के नानी को पुछी
" मलताब....कोन है मम्मी?"
नानी अपनी स्माइल बरक़रार रख के..आँखोँ में और प्यार और ममता लेके बोली
" क्यूँ !!.... हमारी मंजु सुन्दर नहीं है क्या?"
मा कुछ पल नानी को देखते रही और उनको कुछ समझ के. उनके फेस पे जो चमक थी वह ग़ायब हो गई अचनाक. उनकी आंख स्थिर हो गई ,जगह के उपर. वह बिलकुल स्तब्ध हो गई. वह नानी को एक दृष्टि से देख के बोली
" कैसी बात कर रही हो मम्मी!

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नानी अब एकदम शांत आवाज़ में लेकिन प्यार से कहने लगि
" देख मंजू.. मैं और तेरे पापा इस बारे में बहुत सोचे. हमको यह भी मालूम है इस के लिए हम सब को न जाने क्या क्या सैक्रिफाइस और एडजस्टमेंट करना पड़ेगा. न जाने क्या क्या असुबिधा झेल ना पड़ेगा. लेकिन इस में ही सब का भलाई है. सब का भविष्य हम को ही तो सोचना पड़ेगा मंजू. ......"
नानी इस तरह फिर से वहि सब बात बताने लगी. आज वह है तोह ठीक है. कल जब वह लोग नहीं रहेंगे तब क्या मंजु अकेली जी पायेगी? हीतेश और किसीसे शादी करेगा तोह क्या गारंटी की वह लड़की हमारे जैसी ही होगी. मंजु को वह कैसे ट्रीट करेगी उसकी गारंटी कौन देगा. फिर वहि पुरानी चिंता
नानीजी यह भी बताई की खुद की भलाई और खुद की लाइफ सिक्योर्ड बनाने के लिए अगर समाज से थोड़ा दूर जाके एक अलग दुनिया बनाके हम खुश रहे , तोह इसमें कोई बुराई नहीं है. माँ एकदम हैरत से सब सुन रही थी. जैसे की उनको बिस्वास नहीं हो रहा है की नानी जी कुछ बोल रही है. वह खुद कुछ भी बोल नहीं पा रही थी. असल में उनका मुह तक कुछ आ नहीं रहा है बोलने के लिये. अन्दर ही अंदर एक तूफ़ान मचा हुआ है. भला , बुरा , पाप, पुण्य , न्याय, निती, समाज ,संस्कार सब ने उनके मन में भीड़ कर के उनका बोलना बंध करवाया था. वह केवल नानी को देखे जा रही है. उनकी आँख धीरे धीरे नम होके गिला हो रहा है. बहुत टाइम बाद जब नानी की बात धीरे धीरे कम होने लगा तब वह नानी की आँखों में आँखें डाल के, एक स्थिर दृस्टि होकर, एक शांत और कठिन आवाज़ से पूछि
" क्या यह सब हीतेश को भी बता दिया आप लोगों ने?"

नानी अब एक माँ का प्यार और ममता भरी आवाज़ से बोली
" नहीं बेटा... यह बात तुम्हारे बूढे माँ बाप, अपनी एक लौती बेटी के अपने एक मात्र पोते के, और अपनी फॅमिली की भलाई के लिए ही सोचे है. इस में अब सब कुछ तुम्हारे डिसिशन के ऊपर डेपेंट करता है बेटा."
मा नानी को कुछ पल देख ते रही और जब आँखों से आसूं गिरने का वक़्त आगया तब मुड़के वहां से दौड़के अपने रूम में चलि गयी.

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माँ किचन से दौर के , अपने रूम के जाके डोर लॉक कर दिया. दोपहर लंच करने भी बाहर नहीं आई. नानीजी जाकर बुलाई, दरवाज़ा खटखटायी, पर माँ खाने के लिए स्ट्रैट मना कर दि. जब रात में नाना नानी सब डिनर करके सो गए थे, उसके बाद माँ उठके किचन में गई और फ्रिज से कुछ खाना निकल के चुपचाप खाके फिर से रूम में चले गई. नाना नानी सोच में पड़गये. उनलोगों ने यह एक्सपेक्ट ही किया नहीं की सुरु में ही ऐसा रिएक्शन देखने को मिलेगा उन्को. उनलोग ने सोचा की शायद वह लोग यह एक बिलकुल गलत स्टेप लेने जा रहे थे. इस में उनकी बेटी इतनी हर्ट होगी. न जाने बेचारी को कितना दुःख पंहुचा होगा.
बहुत ही सुंदर लाजवाब और अद्भुत मनमोहक अपडेट हैं भाई मजा आ गया
 
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Update 10

नेक्स्ट डे नानीजी खुद घर का सब काम करने लगी. माँ को बिलकुल डिस्टर्ब करना उचित नहीं समझी. उनको थोड़ा टाइम अकेले छोडना सही समझा . लंच में फिर नानीजी ने माँ को बुलाया पर माँ डोर खोल के बाहर नही आई. वह लोग लंच करके अपने रूम में आराम करने चले गए तो माँ किचन में आके अकेली खाना खा लिया. आवाज़ से नाना नानी को मालूम पडता है पर वह लोग भी अब सामने आके माँ को अनवांटेड सिचुएशन में डालना नहीं चाहते थे. ऐसे तीन दिन कट गए अगला दिन थर्सडे था. सुबह सुबह नानीजी नाश्ता बनाने में जुटी हुई थी. अचानक माँ किचन में आके नानी को कहती है " मैं बनाती हूँ " ये बोल कर माँ खुद काम में लग गयी. माँ कि आवाज़ ठण्डी और तेज थी, जिससे नानीजी ने कुछ बोलने का साहस नहीं किया. वह चुप-चाप माँ को देखने लगी .

माँ बिलकुल एक साइलेंट और फ़ीलिंगलेस फेस लेके काम करे जा रहे थी.. नानीजी चुप चाप वहां से निकल गईं माँ ने घर का काम-काज करना शुरू कर दिया, पर किसी से कोई बात नहीं कर रही थी. माँ अपना काम करके फिर से अपने रूम में जाके लॉक लगा के अंदर रहती थी. रात को नाना नानी सोते टाइम बोलने लगे की शायद उन लोगों की बातों से उनकी बेटी का मन में एक गहरी चोट लगी है. अगले दिन यानि की फ्राइडे के दिन सुबह नानी खुद किचन में आके माँ से बात करने की कोशिश करने लगी. माँ पहले मुंह से जवाब न देके, नानी जो माँगती है या करने को कहती है, वह सब चुप चाप करके एक साइलेंट जवाब दे ने लगी. नानी ने सोचा गम थोड़ा हल्का हो रहा है. नाश्ता करके नाना नानी जब टीवी पे न्यूज़ देख रहे थे , तब उन लोगो ने देखा की माँ पहले की तरह डाइनिंग टेबल पे आके, लेकिन अकेले बैठके नाश्ता कर रही है. जब लंच बनाने में नानी आके माँ का हाथ बटाने लगी , तब माँ बेटी में धीरे धीरे डायरेक्टली बात चित शूरु हुआ. आज माँ की आवाज़ काफी नार्मल थी. लेकिन आज उन्होंने फिर से सब का खाना होने के बाद अकेले टेबल पे बैठके खाना खाया नाना नानी दोपहर के समय अपने रूम में रेस्ट कर रहे थे. आज उन लोगों को थोडी खुश हुई क्यूँकी जो परिस्थिति क्रिएट हुआ था , अब उसका काला मेघ इस घर से हट गया था. शाम के टाइम नानीजी किचन में गई माँ अकेली चुप चाप किचन स्लैब के ऊपर हाथ रख के खड़े खड़े चाय का उबाल देख रही थी. नानी की एंट्री से वह हिली नही जैसे कुछ सोच में है. नानी इधर उधर कुछ करके, माँ को एक टक देखती रही. और फिर माँ के पास आके स्लैब के ऊपर एक हाथ टीका के खड़ी हो गयी.

नानी चुप्पी तोड़के माँ के तरफ देख के बोली
नानीजी -" मंजू.........बेटा...... हर माँ बाप अपने बच्चों की ख़ुशी के बारे में सोचते है. हमने शायद कुछ ज्यादा सोच लिया था........"
माँ -"आप लोग अकेले कैसे रहेंगे!!"
अचानक यह सुन के नानी ने झटके से अपना मुँह उठाके माँ की तरफ देखा. माँ नानी का लुक फील करती है और अपना सर थोड़ा झुका के अपनी पैरों की तरफ देखने लगी

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नानी को समझने में थोड़ा वक़्त लगा. फिर उनके होठो पे एक स्माइल खील गयी. उनकी अंख में ख़ुशी झलक उठी, धिरे से माँ के और नज़्दीक आई और माँ का चिन पकड़ के अपनी तरफ मोड़ ने की कोशिस की. माँ जैसे खड़ी थी, उनकी बॉडी की पोजीशन हिली नहीं , लेकिन उनका फेस नानी के तरफ मूड गया. उनकी आँख झुकि ही है. उन्होंने कोशिश करके भी उनके फेस पे शर्म आनी छुपा नहीं पाई नानी पूरी बात समझ गयी फिर भी प्यार से फुसफुसा के पूछी
"सच ?"
माँ नानी की तरफ मुड़के उनके कंधो में अपना मुह छुपा ली.

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और उन्होंने नानी को दोनों हाथों से बेडी लगा के पकड़ लिया. नानी हसके उनकी एक हाथ से उनके बाल और पीठ सहलाने लगी एक माँ अपनी बेटी को परम ममता से प्यार कर रही है. नानी हस्ते हस्ते बोली
" अरे पगली....इस में शर्माने का क्या है. हम थोड़ी कोई अन्जान लोग है.....और नहीं तू किसी और घर कहां जा रही है...सब तो तेरे अपने हि लोग है..."
मा ने और शर्मा के नानी की छाती में मुह छूपा लीया.


मै शनिवार को अहमदाबाद पहुच गया. शाम हो गइ थी. नाना नानी ने मेरा हर बार की तरह स्माइल के साथ ही स्वागत किया. लेकिन इस बार माँ वहां दिखाइ नहीं दि. मेंने अंदर आके अपना बैग रखा. पर मुझे समझ नहीं आ रहा था की यह लोग इतने खुश दिख रहे है तो , गड़बड़ तो नहीं है घर पर. फिर माँ मेरे साथ ऐसे क्यों कर रही है. मेरी कौन सी ग़लती पे माँ मुझ पर नाराज हो गयी!! क्या मेंने उनको अन्जाने में दुःख पहुंचाया!!! माँ जनरली घर पर ही रहती है. और आज तो मेरा आने का दिन है. आज तो वह रहती ही है. तोह फिर क्यों वह मुझसे मिलने सामने नहीं आई..
नानाजी मेरे तरफ देख के बोले
" बेटा.. तुमसे कुछ बात करना है." मैं शांति से बोला
" कहिए नानाजी"
उनहोने एक बार नानीजी को देख, फिर मेरी तरफ देख के थोड़ा स्माइल के साथ बोले
" इतना अर्जेंट भी नहीं है. तुम फ्रेश हो जाओ. खाना वाना खाके आराम से बैठ के बाते करेंगे."
मैं मेरे रूम में जाकर फ्रेश होने लगा. नानाजी न जाने क्या बात करना चाहते है. लेकिन में माँ को लेके ज्यादा चिंतित था. बहुत सारी चिंता से मन भरी था, कुछ अच्छा नहीं लग रहा था. दिल बोल रहा था की दौड़ के जाके से माँ पुछु की क्या गुनाह है मेरा. जैसे ही बाहर ड्राइंग रूम में आया, तब नानी ने डिनर के लिए बुलाया.
मुझे मालूम था की पहले जैसे आज सब कुछ नहीं था. नानी सर्व करने लगी. लेकिन में किचन में माँ की उपस्थिति फील कर रहा था और एक दो बार तो नानी से बात भी करते हुए सुना. मुझे गुस्सा आया, सब तो ठीक ही है. तोह क्या में ही गुन्हेगार हूँ!! और नाना नानी को भी माँ का इस तरह से व्यवहार करना, या इस तरह से मेरे सामने पेश होना, जरूर नज़र आ रहा होगा. फिर भी कोई किसी को कुछ बोल भी नहीं रहा है.

डिनर के बाद नानाजी मुझे टेरेस पे लेके गये. गर्मी का टाइम था. सो टेरेस पे अच्छा फील हो रहा था. थोड़ी हवा भी आ रही थी बीच बीच मे. आस पास के एरिया में ऐसे ही सब प्राइवेट मकान है. नानाजी ने किनारे के तरफ जाकर , टेरेस की फेंसिंग में टेक लगाके एक सिगरेट निकाली. और बोलने लगे " तुम्हारी नानी यहाँ नहीं है अब... तोह ठीक है...." बोलके हॅसने लगे और माचिस निकालकर सिगरेट जला लि. मेंने बोला
" नानाजी... डॉक्टर ने आप को स्मोक करने में मना किया है"
उन्होंने एक कस लगाके धुआं छोड़के बोला
" एक आध पिने से कुछ नहीं होता है..."
नानाजी हस्ते हस्ते ऐसे बाते सुनाने लगे. कुछ समय ऐसे ही बीत गया. पर मेरा मन अभी भी परेशान था . मुझे बार बार यह चिंता सता रही है की नानाजी आखिर मुझे क्या बताना चाहते है. इस सब सोच के बीच नानीजी ने आवाज़ लगाई. हम नीचे गये. मैं नज़र घुमाके माँ को देख नहीं पाया. किचन में लाइट ऑफ है. माँ शायद डिनर करके अपने रूम में चली गयी. मुझे बहुत ग़ुस्सा आया माँ के उपर. मैंने क्या ग़लती कि की वो मुझे ऐसी सजा दे रही है. नानाजी मुझे उनके कमरे में आने को कहे. नानीजी भी आ गई. नानाजी ने आकर दरवाज़ा थोड़ा बंध कर दिया.

मैं बेड के पास रखी कुरसी पे बैठा. नाना नानी बेड पे आराम से बैठे. मेरा टेंशन बढ़ रहा है. आखिर क्या कहेंगे, और उससे माँ का क्या ताल्लुक है. इन सब हज़ारों चिंताओ ने जब मेरे दिमाग में भीड़ किया तब नानाजी ने बोलना शूरु किया.
"बेटा...हमने तुम्हारी परवरिश में कोई कमी नहीं रखी है. बचपन से सब कुछ देते आए और आज तक तुम्हारी सबसे ज्यादा चिंता हम करते है लेकिन अब तुम बड़े हो गये हो. जॉब कर रहे हो. हमे छोड़के दूर जाकर अकेले रहने लगे हो. मालूम है वहां तुमको अकेले रहने में कुछ परेशानी फेस भी करना पडती है. फिर भी... इस सब से हमे बहुत ख़ुशी होती है. तुम अब तुम्हारी जिंदगी खुद जीने जा रहे हो और हम भी और कितना दिन रहेंगे. हमारे जाने के बाद भी तुम को अच्छी तरह ज़िन्दगी जीना है. अपनी फेमिली बनानी है. तो अब हम सोच रहे है की तुम्हारी शादी करवा देनी चाहीये." नानाजी चुप हो गए. शायद मेरा रिएक्शन परख रहे है. मेरे दिमाग में दूसरा कैलकुलेशन चल रहा है. अब मुझे लगा की शायद इस बात से माँ दुखी है और मुझसे शायद नाराज भी है. मेने मन में सोचा की अगर उनकी ख़ुशी के लिए मुझे शादी न भी करनी पडे, तो मुझे कोई खेद नहीं है. उनको ज़िन्दगी भर खुश रखना चाहता हुं.
नानाजी फिर बोले
"देखो बेटे ..तुम्हारी लाइफ में कोई आकर तुम्हारे पास खड़ी हो जाए, तुम्हारे हर इमोशन को समझे, हर उतार चढ़ाव में तुम्हारे साथ रहके ज़िन्दगी की राहों में चलना आसान कर दे. इसलिए सब के लाइफ में बीवी की जरूरत पड़ती है."


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" हमने आज तक तुमहारा सब भला बुरा सोच के ही काम किया. अब यह लास्ट ड्यूटी भी ठीक से पूरी हो जाये तो मैं चैन से मर सकता हु."
मैं माँ के बारे में सोच के बोलने लगा
" नानाजी....आपकी बात ठीक है... लेकिन ......."
मै रुक गया. मुझे पहले माँ से जानना है , क्या इस बात को लेके वह दुखी है !!. इस लिए मुझसे गुस्सा होके दूर है!! लेकिन नानाजी शायद मेरी द्विधा समझ गए और मेरी बात पकड़ के बोले.
" बेटा पहले में जो बोल रहा हु ..पुरा सुन लो. फिर तुम आराम से सोच समझ के मुझे बताना. अगर तुमको लगे की यह हमारी भलाई के लिए है, तो सोच के बताना, नहीं तो जो मन में डिसाईड करोगे , हम वो ही करेंगे
यह बोलके नानाजी नानीजी को देखे. नानीजी ने भी सहमत होकर अपना सर हिलके मुझे आश्वसन दिलाया.
नानाजी ने फिर से बोलना शुरू किया
" बेटा...हमने तुम्हे सब चीज़ दिया, जो हर कोई बच्चे को मिलता है, लेकिन एक चीज़ कभी नहीं दे पाये"
मैं नानाजी के तरफ देख के सुनने लगा
" हर बच्चे का नसीब में किसी को 'पापा' कहके बुलाने का सुख है, वह हम कभी तुम्हे प्राप्त करने का सौभाग्य नहीं दे पाए. और अब तुम्हारी शादी हो जाये तो तुम्हे एक नए मम्मी पापा भी मिलेंगे."
" मैं सब का भलाई सोच कर ही यह सब कर रहा हु.........अगर तुम्हे बोलू...मतलब...क्या तुम मुझे 'पापा' बोल कर बुलाना पसंद करोगे?"
बहुत ही मस्त लाजवाब और जबरदस्त अपडेट हैं भाई मजा आ गया
 
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बहुत ही शानदार लाजवाब और जबरदस्त मदमस्त अपडेट है भाई मजा आ गया
 

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Update 12


अगला दिन शनिवार था मुझे अब एक नई अनुभुति होने लगी. मेरा डिसीजन अब माँ भी जान चुकी होगी और घर पर सब को मालूम है की इस रिश्ते के लिए हम दोनों ने ही मंजूरी दे दि है. तो अब मैं सोचने लगा की अब कैसे इन सब को फेस करूंगा.
पहले की तरह इस बार भी मुझे घर पे वार्म वेलकम मिला. नाना नानी ने इस तरह मेरा स्वागत किया जैसे में कोई बाहर का रेस्पेक्टेड आदमी हूं. मैं यह सोच के थोड़ा शर्मा गया की वह लोग ऐसा शायद इसलिए कर रहे है क्युकी मैं कुछ दिन में उन लोगों का दमाद बनने जा रहा हु.. मैने माँ के रूम की तरफ देखा. यह सोच के रोमाँचित हो गया की मेरी होने वाली बीवी मेरे आस पास ही घूम रही है. मुझे माँ से मिलने की एक चाहत होने लगी पर अभी शायद वह नानी के साथ ही होगी. सो मैं सोचने लगा की उनसे कैसे, कहाँ थोड़ा अकेले में मिल पाऊंगा.
मै ड्राइंग रूम में आके नाना जी के पास बैठ के न्यूज़ देखने लगा. तभी नानी जी एक प्लेट में कुछ मिठाई मेरे सामने वाली सेंटर टेबल पे रखदी. अचानक आज इस तरह से मिठाई की प्लेट देख के मैने ऐसे ही कह दिया
" यह क्या.... अभी यह मिठाई-फिटाई कौन खायेगा नानी जी ?"
नानीजी पानी का गिलास आराम से रखते हुए बोली
" क्यूं....तुम खाओगे"

मैं केसुअली बोला
"अरे नानीजी मुझे यह मिठाई नही...अब एक गरम चाय चाहिए"
नानी मेरे तरफ देखके मुस्कुराके बोली
"चाय भी पिलायेंगे लेकिन उससे पहले यह खालो. अब यह घर तुम्हारा अपने घर के साथ साथ तुम्हारा ससुराल भी बनने जा रहा है तो शुरुवात मीठा खाके करोगे तो रिश्ते में मिठास बनी रहेंगी" बोलके चेहरे पे एक मुस्कराहट फैल गई. मैं एक दम ऐसे खुल्लम खुल्ला बाते सुनक, थोड़ा शरमाने लगा. नानाजी मेरे तरफ देखके स्माइल करके बोले
"खा लो"
मैं इस बात को यही समेटने ने के लिए चुप चाप प्लेट उठाके खाने लगा और टीवी की तरफ नज़र टीकाके सिचुएशन सहज करने की कोशिश करने लगा. .

कुछ देर बाद नानी फिर से आई और आके नाना के पास बैठ गयी फिर नानाजी टीवी ऑफ करके मुझसे बात करने लगे. वह लोग धीरे धीरे सीरियस होने लगे और मुझसे बहुत सारी चीज़ों में मेरी राय पुछने लगे. जैसे की शादी का प्रोग्राम कहाँ , कैसे किया जाए. हमारे ज्यादा रिश्तेदार नहीं थे और जो भी थे पिछले कुछ सालों मे न मिलने के कारण, सब बिछड गए सो उसमे कोई प्रॉब्लम नहीं है. प्रॉब्लम है हमारा मुहल्ला, पड़ोसी और कुछ दोस्तो को लेके. इन लोगों से हमें बचके सब कुछ करना पड़ेगा. इसलिए तय हुआ की यहाँ नही और कहीं जाके शादी का प्रोग्राम बनाना पड़ेगा. यानि की कोई दूर जगह जाके, जहाँ हमारे रिलेटिव्स वगेरा को कुछ भी मालूम न चले. तब नानी को याद आया की कुछ साल पहले नाना जी के बिज़नेस के कोई दोस्त की बेटी की शादी हम लोगो ने मिलके अटेंड कि थी मुंबई मे (एक्चुअली वो जगह मुंबई सिटी के अंदर नहीं था).


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मुंबई से कुछ किलोमीटर्स दूरी पे, मुंबई-गुजरात हाईवे के साइड में एक रिसोर्ट में शादी हुआ था. वहाँ की खास बात यह थी की वो जगह एकदम अकेले में है और शादी अटेंड करने वाले सब को रहने का आवास भी प्रदान करता है. साथ में जो सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है यानि की शादी की रसम का अरेंजमेंट--पंडित से लेके रजिस्टर्ड साहब तक, सब वह लोग देते है.

इन सब बातों के बीच मेरे दिमाग में यह चल रहा था की कैसे भी करके माँ से एक बार मुलाकात करनी है. मुझे यह भी मालूम था की माँ से ऐसे आसानी से मुलाकात नहीं हो पायेगा वह जानबूझ के मुझसे दूर रह रही है. बिलकुल कोई मौका नहीं दे रही है आमने सामने आने का इसलिए मैं उनका चेहरा ठीक से देख भी नहीं पा रहा हु. शादी की प्लानिंग तक शुरु हो गई और अभी तक दूल्हा और दुल्हन की एक बार बात भी नहीं हो पाई मुझे एक बार उनसे बात करनी है.

डिनर टेबल पे शादी को लेके कोई बात नहीं हुई बस मैं जो खाना पसंद करता हु वही चीजे नानी जी मुझे ज्यादा से ज्यादा दे रही है. मैं जानता था यह सब माँ ने मेरे लिए ही बनाया. आज वह सामने आने में शर्मा रही है, इसलिए नानी के हाथों से सब बार बार भेज रही है. मैं मना कर रहा हूं , पर नानी जी केवल बोल रही है "तुम्हारे लिए ही बनाई गयी है. क्यूँ नहीं खाओगे?" और फिर मेरे तरफ देखकर मुस्कुरा रही है.
"बस और कुछ दिन..... नानी के हाथ का खाना खा लो... फिर तो तुम्हे साँस के हाथ का खाना खाना पड़ेगा." बोल के थोड़ा हंस के किचन के तरफ चली गई. नाना जी भी इस बात से हसने लगे. मैं शर्म के मारे अंदर घुसे जा रहा था.

मैं डिनर के बाद नाना जी के रूम में बैठ के बात कर रहा था. नानाजी ने पूछा की अब मुझे नए घर पर शिफ़्ट करना है की उसी घर में रहना है, मैंने बताया की यह घर ही फिलहाल ठीक है. नानी जी बोलने लगी की अब तक तो मैं अकेला था, सब चल जाता था. लेकिन अब फेमिली रहेगी. तो उसके लिए सारे सामान का भी बंदोबस्त करना पडेगा. मैंने बोला की उस बात की कोई चिंता न करें वो सब मैं खुद ही संभल सकता हूं. मैं फ़टाफ़ट डिस्कशन को एन्ड करके नाना जी के रूम से बाहर आ गया और जैसे ही मैं ड्राइंग रूम की तरफ जाने लगा तब मुझे मेरे रूम की लाइट चालू दिखाई दि. मेरी छाती में झट से एक ऐसी फीलिंग हुई की जैसे मेरी छाती से कुछ निकल ने लगा हो और अचानक मेरी बॉडी हल्की हो गई.

मैंने डोर के पास जाते हि वो प्रजेंस फील कर ली. वह मेरे तरफ पीठ करके, थोड़ा झुक के, मच्छर दानी सही से चारो तरफ बिस्तर के साइड में घुसा रहे थी. मेरे आते ही वह अचानक वह सब बंद करके खड़ी हो गई उनका फुल बैक साइड मेरी तरफ है, मैं अपने रूम की तरफ चलने लगा. मुझे मालूम था जब मैं नहीं होता हूं तब माँ आके मेरा बिस्तर ठीक करके जाती है और इसलिए मैं डिनर करके नानाजी के रूम में उस मौके का इंतज़ार कर रहा था. मैं उनके जितना नजदीक जा रहा था, उतना ही नर्वस भी हो रहा था. एक अजीब अनुभुति भी हो रही थी और एक नशा भी. उनको देखके मैं कैसे रियेक्ट करूँगा या वह कैसे रियेक्ट करेंगी फिर भी मैं उनको एकबार सामने से देखना चाहता हु उनसे बात करना चाहता हु.




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एक हलके येलो कलर की प्रिंटेड साड़ी और मैचिंग ब्लाउज पहनी हुई थी. ब्लाउज के ऊपर गोरी गोरी, मुलायम और सुडौल गर्दन तथा पीठ का ऊपरी भाग नज़र आ रहा था साथ में बाल खुले थे. उनके बॉडी कर्व्स ढ़लान लेके दोनों साइड से आके उनकी पतली कमर में मिल रहे है. उनकी गान्ड उभरी हुई नजर आ रही है. आज तक जो चीज़ मेरी फेंटेसी की दुनिया में होती थी, आज पहली बार हकीकत में हो रही है. उनको देख कर उनके सामने ही, पजामे के अंदर मेरा लौड़ा सख्त होने लगा.
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मां उनके राईट हैंड से पलंग का स्टैंड पकड़ के स्थिर हो गयी. उनको सर झुका के खड़ी होते देख अचानक मेरे अंदर की सब घबराहट ग़ायब होने लगी और एक अजीब मदहोशी मुझमें छाने लगी. जो प्यार मैं उनके लिए पिछले कई सालों से छुपाके रखा था, आज वह प्यार, वह अनुभुति पहली बार मेरे दिल में इस वास्तव दुनिया में आने लगी. दिनभर बहुत कुछ सोचा था माँ के लिए, लेकिन अब जब वह सामने खड़ी है तो मैं सब कुछ भूल गया. केवल मेरे छाती में तरंग जैसे कुछ बहने लगी. मैं रूम के अंदर गया वह अपने राईट हैंड की थंब नेल से पलंग के स्टैंड के उप्पर रब करने लगी. मैंने उनको देखते हुए कहा


"मां...... एक्चुअली....... मैं तुमसे सच में बहुत प्यार करता हूं"
ये सुनते ही माँ शायद थोड़ा काँप उठी. फिर खुद को कंट्रोल करके वहां खड़ी रही. मैं धीरे धीरे चलके मेरे स्टडी टेबल के पास गया. वहाँ से उनका साइड प्रोफाइल नज़र आ रहा था उनके चेहरा पे शर्म छाई हुई है. नज़र झुकि हुई है. यहाँ से मुझे उनके पेट् का नज़र आ रहा है


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जो एक दम फ्लैट है. मैं उनके पेट को देख के सोचने लगा की इस पेट के अंदर से ही एक दिन मेरा बच्चा आएगा. मैं यह सोच के और भी रोमाँचित हो गया और पाजामे के अंदर मेरा लौड़ा सख्त हो गया. जैसे ही मैं डोर छोड़के अंदर आया मां फट से मुड़के तेज़ी से रूम से निकल गई. मैं उनका जाना देखने लगा. ऐसी एक सुन्दर औरत, जिसको में प्यार भी करता हु, रेस्पेक्ट भी करता हु, चाहता भी हु, उनके साथ ही में पूरी ज़िन्दगी बिताने वाला हु यह सोच के मेरे मन में खुशी छा गईं.

उस रात मैं आँखे बंध करके माँ के किये हुए बिस्तर में सोके उनका स्पर्श महसुस कर रहा था. लग रहा था जैसे वह मेरे एकदम पास, एक दम करीब है. बस कुछ दिन का फासला है. फिर वह सुन्दर, नरम, प्यारी औरत, हर रात मेरी बाँहों में रहेगी और में उनको बहुत प्यार करूंगा. मैं उनको कभी कुछ भी दुःख महसुस करने नहीं दूंगा. हमेशा उनका मुस्कुराता हुआ चेहरा देखने चाहता हु. मैं एक अच्छे पति का धर्म निभाते हुए दुनिया की हर ख़ुशी उनके सामने लाकर दुंगा. उनके तन मन को हमेशा आनंद में रखुंगा. मैं इन सब बातों से गरम हो गया था. फिर भी मन ही मन कसम खाइ की आज से मेरे तन मन की हर ख़ुशी भी उनके साथ ही शेयर करूंगा. तो उस रात में मूठ मारके अकेले वह सुख लेना नहीं चाह रहा था अब मैं सब कुछ बस उनके साथ ही करना चाहता हु और मैं हमारी सुहागरात में उनको परिपूर्ण संतुष्टि देना चाहता हु. येे सब सोच के मेरी आंखो में नीद कब आकर मुझे एक ख़ुशी के सागर में बहाके ले गई, मुझे पता नहीं चला.



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my other story :- Maa meri ho gayi
बहुत ही मस्त और शानदार मदमस्त अपडेट है भाई मजा आ गया
 
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Update 13


अगले दिन मैं जब ड्राइंग रूम में आया, वहां नाना नानी के साथ माँ कुछ बात कर रही थी. पर जैसे ही मैं ड्राइंग रूम में एंट्री लेता हूं वह आंखे उठा कर एकबार मुझे देखती है और शर्मा के फिर से नानी के तरफ देखके कुछ बोली और तुरंत वहां से जाने लगी और किचन के तरफ के डोर से निकल गयी. मैं समझ गया माँ भी मेरी जैसी सिचुएशन में है. शायद उनका भी मन चाह रहा होगा की वह मुझसे मिले, बातें करे, पर उनके अंदर की भावनाएं और संकोच वह सब करने से रोक रहा है. अब तक जो उनका बेटा था अपना खुन था जिसको बचपन से पाल-पोस के एक नौजवान लड़का बनाया, जिसे माँ की ममता, प्यार और स्नेह देकर बड़ा किया है, उस नौजवान लड़के को अब उनके पति के रूप में मान ना पड़ेगा. उसको पति का अधिकार देना पडेगा. अपना तन मन उसको सोंपना पड़ेगा. एक नये पवित्र रिश्ते में उससे जुड़ना पड़ेगा. उनको देख के यह पता चल रहा है की वह इस सब सोच और संकोच से निकलने की कोशिश कर रही है. क्यूँ की उनकी नज़र में, उनके चलन में, और उनके इशारे में साफ़ साफ़ पता चल रहा है की वह अब एक माँ की तरह नहीं, बल्कि वह खुद को एक लड़की के तरह महसुस कर रही है. जिस की अभी शादी होनेवाली है और वह अपने होनेवाले पति से शर्मा रही है.


मैं ड्राइंग रूम में बैठ के टीवी देख रहा था लेकिन मेरा मन चाह रहा था माँ के साथ बैठ के बात कर सकूं, उनका ख़ूबसूरत चेहरा अपने हाथों में पकड़ के, आँखों में आँखे डालके देखने की चाहत हो रही थी. पर यह सम्भव नहीं हो पा रहा है. हालाकि हम सब जानते है की इस रिश्ते के लिए दोनों ही राज़ी है, और बस कुछ ही दिनों में हम पति पत्नी के पवित्र बंधन में जुड़ने जा रहे है.
नानी माँ को किचन में अकेला छोड़के मेरे साइड में रखे सोफा पर बैठी. मेरे साथ माँ के इस नये रिश्ते से नानी जी बहुत खुश है. उनकी एकलौती बेटी की ज़िन्दगी केवल दुःख से भरी है. अब ज़िन्दगी उनको एक दूसरा मौका दे रहा है. पति के प्यार के साथ एक नई फैमिली बनाकर ज़िन्दगी जीने का सपना पूरा होने जा रहा है. नानी जी भावुक हो गयी उनकी आँखें गिली होने लगी. वह मेरा हाथ उनके हाथ से पकड़ के कहने लगी
"बेटा , मैं तुम दोनों को दिल भरके आशीर्वाद देती हुँ. तुम लोग एक दूसरे को ज़िंदगी भर प्यार करते रहना. हँसी, खुशी, आनंद और शांति के साथ जीते रहना. अपनी फैमिली, अपने बच्चों के साथ एक नई दुनिया बनाके खुश रहना...."
नानी के आँखों में पानी आने लगा. "बेटा, हम सब की भलाई के लिये, तुम्हारी अपने फैमिली के लिये, तुम आज जो कर रहे हो, इस के लिए मैं कैसे तुम्हें......"
नानी और बोल नहीं पायी उनका गला बंध होने लगा. बस वह मेरे तरफ एक प्यार और ममता भरी, कृतज्ञता की नज़र से देख रही थी. मैं भी भावुक हो गया मैंने उनका हाथ मेरे हाथ में लेके, मेरी स्वीकृति जताई और बोला


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"नानी जी...आप बिलकुल परेशान मत होइए. आप की बेटी को मैं खुश रखुंगा और हम सब मिलके खुश रहेंगे"
नानी जी के होठो पे एक मुस्कराहट आने लगी और फिर थोड़ा हंसके मेरे गाल पे प्यार से एक हल्का सा चाटा मारके बोली
"पागल लड़का...मुझे अब नानी नहीं !!!....मम्मी तो बोल"
वह हसने लगी और मैं शर्म में डुबा जा रहा था.



मैं खाना खा रहा था अचानक मेरी नज़र उन लोगों के पीछे किचन डोर पे पड़ी. मैने देखा की माँ किचन डोर के पीछे छुप कर सीधा मुझे गौर से देख रही है.


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उनकी आँखों में जो ख़ुशी की झलक थी, और होठो पे प्यार भरी मुस्कान, वह मुझे दिख गयी. पर जैसे ही उनके साथ मेरी नज़र मिली , वह झट से अंदर छुप गयी. जैसे कोई टीनएज गर्ल अपने प्रेमी को देख के शर्म से छुपती है. मेरी छाती में तरंग जैसी कोई एक अनुभुति मेरे दिल को अंदर से छुने लगी.
नाना नानी ड्राइंगरूम में बैठे थे मेरे जाने का टाइम हो गया. मैं उठके अपने रूम की तरफ चला बैग लाने के लिये. मेरे दिमाग में बहुत कुछ चल रहा था मैं मेरे रूम में जैसे ही एंट्री करता हूं, मैं चौंक गया. स्टडी टेबल के पास माँ खड़ी है.


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मेरी नज़र उनपे टीकी हुई है. उनकी आँखो में पहली बार वह प्यार दिखाई दिया जो एक लड़के के लिए एक लड़की के मन में होता है, एक प्रेमी के लिए उनके प्रेमिका के दिल में होता है. उनके गुलाबी होंठों पे एक मुस्कराहट झलक रही है. साथ ही साथ उनके पतले होठ एक अद्भुत आवेश में थोड़ा थोड़ा कांप रहा है. पूरा चेहरा शर्म से लाल हो गया है. मैं उनसे नज़र मिलाके देखे जा रहा हु और अंदर ही अंदर बहुत कुछ बोले जा रहा हुँ. पर एक भी बात ज़बान तक नही आई ना हीं कुछ कर पा रहा हुँ. अचानक उन्होंने नज़र झुका ली.

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मेरी नज़र नीचे होते हुए उनके गले के नीचे छाती पर और मख़्खन जैसे मुलायम क्लीवेज एरिया में आके टिक गई.


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तभी माँ ने दौड़कर आके मेरी छाती में उनका मुंह घुसा दिया और दोनों हाथ पीछे ले जाके पीठ के ऊपर रखके मुझे कसके पकड़ लिया.

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उनका पूरा शरीर मेरे शरीर से चिपका हुआ है. मां ने पहली बार इस तरह मुझे हग किया है. एक माँ की तरह नही, एक नई नवेली बीवी की तरह मुझे पकड़ रखा है. उनके नरम नरम बूब्स मेरे छाती के पर चिपके हुये है. उनका प्राइवेट एरिया मेरा थाई के साथ चिपका हुआ है. उनका फ्लैट पेट मेरे प्राइवेट एरिया के साथ चिपका हुआ है. मेरा तना हुआ लौड़ा जो मेरी जीन्स के ऊपर से अपने पेट ने महसुस किया होगा.

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मैं उनके बालों में अपना मुंह घूसा के, उनको अपने दोनों हाथों से पकड़ के ज़ोर से मेरे साथ चिपकाने लगा. हममें से कोई कुछ नहीं बोल रहा था, केवल एक दूसरे को महसुस कर रहे थे. ऐसा करके मुझे जो कहना था वह कह दिया और मुझे जो कुछ पुछना था उसका जवाब भी मिल गया. अचानक उनकी ग्रिप लूज हो गई और उन्होंने अपना चेहरा मेरी छाती से अलग करने का संकेत दिया. मैंने मेरी पकड़ छोड़ दि. उन्होंने मेरे से थोड़ा अलग होकर मेरे सामने बस कुछ मोमेंट्स खड़ी होकर नज़र नीचे करके, फिर तेजी से दौड के अपने रूम में चली गयी.
बहुत ही सुंदर लाजवाब और अद्भुत रमणिय अपडेट है भाई मजा आ गया
 
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Update 14

मुझे वहां खड़े खड़े उनके जाने की दिशा में देखते हुए महसुस होने लगा की अगले 16 दीन.... अब 16 दिन नही, बल्की 16 साल जैसे लगने लगे. नानाजी पण्डित जी से शादी की डेट पता करके आये है. वह शुभ मुहूर्त आज से 16 दिन बाद है.
अब हालत ऐसी है की इतना कुछ होने के बाद अब 16 दिन रहेंगे कैसे. अब मुझे एक भी पल मां को छोड़के रहने का मन नहीं कर रहा था.

पर हां...तब मुझे पता नहीं था की इन 16 दिनों में बहुत कुछ होगा, बहुत कुछ मिलेगा हमे, जो हमारे आगे की ज़िन्दगी जीने का रास्ता सहज कर देगा और साथ में मुझे एक नई चीज़ भी मिलेगी, जो आज तक मेरे जीवन में नहीं हुआ था कुछ दिन के लिए मुझे अपनी ही होने वाली बीवी के साथ छुप छुप के प्यार करने का मौका भी मिल गया था.

सुबह एमपी पहुँच के ,जल्दी फ्रेश होकर साइट की दौड़ लगाई आज का दिन बहुत भारी था पूरा दिन साइट पे बिताके शाम को जब वापस आया. घर आके बिस्तर पे लेट गया. दिन भर की थकावट के साथ साथ पिछले कुछ दिन से नीद भी कम हो रही थी आज उसी का असर एकसाथ पड़ गया.

तेज भूख लग रही थी याद आया जो आदमी टिफ़िन सप्लाई करता है, आज उसने दिन में ही फ़ोन करके बता दिया था की आज रात को खाना दे नहीं पायेगा. मैं किचन में गया फ्रिज में केवल अंडा मिला. संडे रहने के कारण न दूध न ब्रेड कुछ नही था. उस अंडे और मैगी को बनाने लगा. मुझे बस इतना ही पकाना आता है कभी माँ ने किचन में जाने ही नहीं दिया. अचानक मन में आया की अरे अब तो मेरी बैचलर लाइफ ही ख़तम होने जा रही है. अब तो फैमिली मेन बनने जा रहा हुँ. कुछ ही दिन में मुझे फिर से माँ के हाथ का खाना खाने का सौभाग्य मिलेगा


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लेकिन यहाँ मुझे माँ का नही, मेरी पत्नी का, शादी कि हुई बीवी के हाथ का खाना मिलेगा. मैं मैगी बनाते बनाते कल के बारे में सोच रहा था माँ को मालूम था की में बैग लेने के लिए रूम मै जाऊंगा. इसलिए वह जल्दी से नानी के हाथ टिफ़िन बॉक्स भेजकर , फटा फट पीछे के बरामदे से मेरे रूम में चली गयी और मेरा इंतज़ार करती रही. यह सब सोच के मन में एक ख़ुशी का आवेश आने लगा. माँ ने कल मुझे समझा दिया की वह हमारे नए रिश्ते के लिए अब कितनी खुश है. वह मुझे दिल से चाहती है मुझे अपने पति के रूप में प्यार करना शुरू कर दिया है. यह सब उनकी हरकतों ने और उनकी नज़रों ने मुझे समझा दिया. वह चाहती थी की मेरे मन में जो दुविधा, संकोच और सवालों का तूफ़ान चल रहा था इस बार एमपी आने से पहले वह सब क्लियर हो जाये. तो लास्ट मोमेंट में खुद आके वो सब कुछ जताके गयी. अब मैं उनको बीवी के रूप में सोंचू यह बात भी उन्होंने समझा दी. जाने क्यों, अब मुझे उनको मेरी बांहों में भरके, आँखों में आँखे डालके उनके चेहरे की तरफ बस देखते रहने का मन हो रहा था..

अब मैं माँ का स्पर्श पाने के लिए, उनके दिल की धड़कने महसुस करने के लिए और उनकी मिठी आवाज़ सुनने के लिए बेताब हो रहा था मैने मोबाइल लिया. इस वक्त पौने दस बज रहे थे मैं सोच रहा था की अब इतनी रात को क्या वो जागी होगी!! फिर भी आज मेरा लक ट्राय करने लगा. मैने मोबाइल के मेसेज ऑप्शन में जाके एक एसएमएस टाइप किया "मुझे अभी तुमसे बात करने के लिए मन कर रहा है. जब मैने वापस पढ़ा, मुझे खुद को बेवकूफाना लगा. फिर कुछ टाइम सोचा और डिलीट करके केवल 'हाय' लिखा. पिछले एक हफ्ते से उनसे मेरा कोई डायरेक्ट कन्वर्सेशन नही हुआ और अब तो सिचुएशन एकदम अलग है. मैने यही सोचा और माँ को भेज दिया. कल माँ ने खुद को मेरे पास सरेंडर करके, मेरे लिए उनका प्यार जता दिया था, फिर भी मेरे मन की सब भावनाए और संकोच अभी तक पूरी तरह दूर नहीं हुआ. हम एक रिश्ते को भूल के दूसरे नए रिश्ते में जुड़ने जा रहे है. समय के साथ साथ वह नए रिश्ते हमारे बीच स्ट्रांग होते रहेंगे. मुझे मालूम है की खुद को मेरे पास सरेंडर करने के बाद भी माँ को भी टाइम लगेगा सब कुछ एडजस्ट करने के लिए. इन्ही सब भावनाओं के बीच मेरा खाना हो गया था पर मेरा मन बार बार मोबाइल पे जा रहा था. अब तक कोई रिप्लाई नहीं आया.

शायद वह सो गई है. मैने सोचा उनको कॉल करूं फिर लगा की अगर उनको उठने में टाइम लगा तो नाना नानी को भी वह आवाज़ सुनाई देगी. अगर उन्होंने सुन लिया तो समझ जायेंगे इतनी रात को किसका फ़ोन है. क्योंकि की माँ को ज्यादा कोई फ़ोन नही करता है, मैं ही हूं जो करता है. पहले होता तो ठीक था लेकिन अब मुझे एक शर्म आने लगी. मैं निराश हो गया. मैं बाउल और स्पून लेके किचन जाने के लिए जैसे ही उठा एक sms आया.

मैंने तुरंत sms देखा. माँ ने भेजा है, उन्होंने भी केवल 'हम्म' भेजा. मेरे होठो पे मुस्कुराहट आ गई. मैं समझ गया वह जागी हुई है अब जब उन्होंने मुझसे बात शुरू कर दि है, तभी सब बातें मेरे मन के अंदर दौड़ने लगी. मैं सही शब्द ढूँढने लगा. कुछ समझ न आने के बाद लिख दिया 'मां तुम अभी भी जागी हो?'. मैं सेंड करने ही वाला था की मैं रुक गया और टेक्स्ट करेक्शन किया. "क्या तुम अभी भी जागी हो?" भेजने के बाद मै मोबाइल स्क्रीन पे नज़र लगा के बैठा रहा पर दिमाग मैं कुछ और चल रहा था. मैं इस बार अहमदाबाद जाके भी उनको माँ कह के बुला रहा था पर कल के बाद मुझे लगा की मुझे अब जल्दी पूरी तरह से नए रिश्ते को अपनाना पडेगा. बिप बिप माँ ने रिप्लाई भेजा है 'हममम'.

शायद उनको इस सवाल का जवाब देने में शर्म आई होगी. क्युकी इतना ही लिखने में बहुत टाइम लगा दिया. मेरा मन ख़ुशी से भर रहा है, अभी भी जागी है !! मेरे दोनों हाथो के थंब अब मेरे मोबाइल कीपैड के ऊपर नाच रहे है. मन में तूफ़ान और दिमाग में संकोच. समझ नहीं आ रहा क्या करूँ--कैसे करूँ या डायरेक्ट फ़ोन लगाऊं. मैं ने टाइप किया “क्या मैं तुम्हे फ़ोन कर सकता हूं?". पहली बार अपनी माँ से इस तरह बात कर रहा हुँ. आज हम दोनों ज़िन्दगी की राहों में ऐसे एक मोड़ पे खड़े है, की कुछ भी करने से पहल, बोलने से पहले मन में दुविधा आ रही है. जैसे हम दो अनजान इंसान है. इतने सालों का सब कुछ अचानक बदल गया और हम अब नाप तोल के सब कुछ करने में लगे है. अब से हम को दूसरे तरीके से एक दूसरे को जानना शुरू करना पड़ेगा. अब एक दूसरे के दिल का दरवाजा, जो दरवाजा केवल ज़िन्दगी में अपने जीवनसाथी के लिए ही खुलता है, उसको खोलना पड़ेगा. टाइम निकल गया, पर रिप्लाई आया नही. शायद अभी माँ फ़ोन पे डायरेक्ट बात करने में शर्मा रही है.

मैं जानता हूं उनको टाइम की जरुरत है. एक रूप से दूसरे रूप में आने के लिए, अपने तन मन को अपने होने वाले पति के पास पूरी तरह सोंपने के लिए. मैं उन्हे पति का प्यार देके, उनके साथ पूरी ज़िन्दगी गुजारना चाहता हुँ. उन्हे दुनिया की सबसे ज्यादा खुशनसीब पत्नी बनाना चाहता हुँ. कभी भी उनको ज़रा सा दुःख नहीं पहुचाना चाहता. मैं चाहता हु की अगले 7 जन्मों तक वह मेरी पत्नी बनके रहे. इसबार फिलहाल मैं अपने मन के ऊपर पत्थर रखके अपना बाउल उठाके किचन में चला. जैसे ही किचन में पंहुचा बीप बीप आवाज़ सुनाई दि. मैं दौड़ के बेड रूम में आया और मोबाइल उठाके चेक किया. माँ ने रिप्लाई दिया 'okey'. फिर से मन कांपने लगा. बिस्तर पे बैठके तुरंत माँ को फ़ोन लगाया और जैसे ही रिंग होना चालू किया, माँ ने फ़टाक से रिसीव कर लिया. मैं उनके हेलो का इंतज़ार करने लगा पर उन्होंने कुछ बोला नही. लेकिन मैं उनकी उपस्थिति महसुस कर पा रहा था. ऐसे तो रात है, चारो तरफ सन्नाटा है , कोई आवाज़ नही. मुझे उनकी सांसो की आवाज़ भी सुनाई दे रही है. मुझे एक हलकी हलकी कम्पन होने लगी यह सोच के की फ़ोन के उस तरफ मेरी होने वाली बीवी है. मैं उसकी मीठी आवाज़ सुनने के लिए उसके बोलने का इंतज़ार कर रहा था असल में हम दोनों ही खामोश थे और हम हमारे बीच की ख़ामोशी की भाषा पड़ने की कोशिश कर रहे थे पर जब उनकी तरफ से कुछ भी नहीं आया तो में बोला. मेरे दिल का दरवाजा उनके लिए खोल दिया. मैने धीरे से पूछा
"नानाजी नानीजी सो गए?"
उन्होंने कुछ टाइम बाद धीरे से कहा
"हा"
उनकी मिठी आवाज़ में साफ़ साफ़ शर्म झलक रही है. मेरा मन ख़ुशी से झूम उठा.


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फिर भी यह सब उनको महसुस नही करने दिया बात घुमा कर हल्की हंसी के साथ बोला
"मैंने अभी अभी डिनर किया"
वह थोड़ा चुप हो गई और आवाज़ में थोड़ा चिंता मिला के साथ पुछी
"इतने लेट क्यों?"
मैं नार्मल रहके बोलते रहा
"वो एक्चुअली आज साइट पे दौड़ भाग की वजह से लेट हो गया था।"
बोलके थोड़ा रुका और जैसे कुछ याद आया, फिर से बोला
"और आज वह टिफ़िन वाला भी खाना नहीं लाया."
मैं समझ रहा था की अभी भी शर्म और संकोच मां को सहज होने में रोक रहा है. लेकिन इस बार वह टाइम न लेके तुरंत पुछी
" क्यूँ?"
" पता नही, उसका कुछ काम था इसलिए आज नही आया" मैंने कहा.
वह थोड़ा टाइम चुप हो रही. फिर थोड़ा चिंतित होकर
"तो खाना कैसे हुआ?"
मैं हस्ते हस्ते बोला
" मुझे जो बनाने आता है, वही बनाया-मैगी और अंडा"
उन्होंने कुछ सोचा और बोली
"बाहर होटल में तो खाना मिलता है"
जैसे की मेरी ग़लती पकडी गई, सफाई देते हुए कहा
" हा...मिलता तो है. पर अभी..इतनी रात मे... जाने का मन नहीं किया"
और सोचते हुए बोल दिया
"और अब से नहीं करुँगा."
फिर क्या पता कैसे, में बोलते रहा
"बस कुछ दिन और, उसके बाद तो फिर हमेशा तुम्हारे हाथ का ही...."
बोलके में रुक गया पूरा नहीं कर पाया. पहली बार इस तरह की बात निकल गई मुंह से. मुझे शर्म आने लगी. हमारी शादी के बारे में हमने एक दूसरे से आज तक कुछ जिक्र नहीं किया. उधऱ माँ भी चुप हो गयी. इस बात से एक चीज़ हुआ वो ये की अब तक मेरे और माँ के बीच हमारे नए रिश्ते को लेके जो अदृश्य दीवार थी वह धीरे धीरे गिरना शुरू हो गई. मैने मेरे दिल का द्वार पूरा खोल दिया और उनके लिए मेरा प्यार बाहर निकलने लगा. मेरे गले से एक हलकी कपकपाती हुई आवाज़ निकल के बोली
"
I Love You"
बहुत ही शानदार लाजवाब और अद्भुत मनमोहक अपडेट हैं भाई मजा आ गया
 
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Update 15



जैसे ही मैंने ये कहा, मैं फ़ोन के उसपार से माँ की तेज़ सांसों की आवाज़ सुनने लगा. मेरे इस तरह इमोशन्स के साथ वो शब्द कहने से शायद माँ कांप उठी. इसलिए कुछ टाइम तक वह चुप ही रही. हम दोनों ही फ़ोन पकड़ के बैठे थे. जैसे वो मेरे प्यार को महसूस कर रही हो. थोडे टाइम बाद वह खुद को थोड़ा कंट्रोल में लाकर धीरे धीरे अपने दिल का दरवाजा भी खोलने लगी और यह मुझे तब पता चला, जब उन्होंने अपनी कपकपाती आवाज़ से फुसफुसाते हुए कहा.

" I Love You 2"

माँ ने पहली बार खुद से मेरे लिए प्यार जताया और ये सुनके मैं ख़ुशी से पागल हो गया. मेरा खुन तेजी से दौड़ने लगा. मैं इमोशनल होकर आँख बंद करके थोड़ा पीछे होकर अपने सिर को दिवार पर टेक लगा दिया. ऐसे फील हुआ जैसे की मैं हवा में बादलो के साथ भागे जा रहा हु. मैं प्यार भरी आवाज़ से धीरे धीरे, लगभग फुसफुसाके बोलने लगा.
"मैं हमेशा से ये विश करता आया हूं की मुझे एक खूबसूरत बीवी मिले.... और आज दुनिया की सबसे खुबसुरत, सबसे प्यारी लड़की..... मेरी बीवी बनने जा रही है. इससे ज्यादा मुझे कुछ नहीं चाहिए"
और मैं चुप हो गया. थोड़ी देर बाद माँ ने रुक रुक के कहा.

"इससे पहले.... और एक बार.......सोच लेना चाहिए"

" क्या?.....किस बारे में?"

" पापा मम्मी हमारे बीच......जो रिश्ता चाहते है"

" क्यों?"

इस बार मां थोड़ा टाइम चुप रही. फिर कहने लगी

" हर जवान लड़का एक जवान लड़की को ही पसंद करता है"

अब मुझे समझ आया माँ की दुविधा क्या है. वह सोच रही है की मैं इस रिश्ते के लिए नाना नानी की बातों में आके राज़ी हुआ हूं. लेकिन मैं उनको कैसे समझाऊं की मैं कब से उनसे प्यार करते आ रहा हुँ, उनको चाहता आ रहा हुँ. तो मैंने अपनी आवाज़ में प्यार भर के कहा.
" मुझे ना कभी कोई जवान लड़की दिखी, जिसको मैं चाहूं, न कोई है, जो तुम जैसी प्यारी और खुबसुरत हो. मेरे दिल में बस एक ही लड़की है...और हमेशा वो ही रहेगी.........वो हो..तुम"
वह कुछ सोच के बोली

" लेकिन ...मुझमे भी .....बहुत सारी खामियां है"

" मतलब... क्या?"

मैं सुनने के लिए बेताब हुँ की वह क्या बोलना चाहती है. कुछ वक्त बाद वह धीरे से बोली

" मैं 36 की हुँ......."

मैं तुरंत जवाब दिया

" तो भी मैं आपको प्यार दूंगा, ख़ुशी दूंगा, जो देना चाहता हुँ और जिंदगी भर चाहूंगा."

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शायद मेरी बात उनको अच्छा लगी. लेकिन फिर वह बिलकुल खोई हुई आवाज़ से संकोच करते करते बोली

"और अब.......अगर....अगर....मैं दोबारा माँ नहीं बन पाई तो!!"

मैंने जैसे ही इस बात का मतलब समझा, अचानक मेरे प्राइवेट एरिया में एक अद्भुत सनसनी होने लगी. जिसके फल स्वरुप मेरे लोड़े के अंदर खुन दौड़ने लगा पर यह परिस्थिति उसके लिए नहीं है इसलिए मैने खुद को कंट्रोल किया.

मां नहीं चाहती है उनके प्यारे बेटे की लाइफ कुछ गलत डिसीजन से ख़तम हो जाए. इस रिश्ते को अपनाने के बाद किसी भी कारण से पछतावा न हो.

मैने बोलना शूरु किया.

" मैं बचपन से जिनके साथ खुशियां बाटता आ रहा हु, जिनके साथ मेरा हर ग़म शेयर करता हुँ. मेरा हर सुख, दुख, हंसी, आनंद, शान्ति सब कुछ उनके साथ ही जुड़ा हुआ है. मेरे लिए जो मेरी दोस्त, मेरी प्रेरणा स्त्रोत है, उनको अपना जीवन साथी बनाकर ज़िन्दगी गुजार ने में जो ख़ुशी है, उससे ज्यादा मुझे कुछ नहीं चाहिए."

मैं कुछ पल रुक के फिर से बोलने लगा
"अगर हमारे नसीब में होगा, तो उसका हँसते हुए स्वागत करेंगे, अगर कुछ नहीं लिखा है तो भी उसे हँसते हुए स्वीकार करेंगे."
मैं चुप हो गया. मुझे खुद भी मालूम नहीं था मैं इतनी सारी बातें बोल पाऊंगा. पर ये बोलके दिल को सुकून मिल रहा था. मैं कभी किसी से प्यार का इज़हार नहीं किया और आज मेरी होने वाली बीवी को बोल दिया. मैं उस तरफ़ की भावनाएं जानने के लिए गौर से सुनने लगा की वह क्या कहती है. लेकिन वो सब चुप है. अचानक मुझे सिसकी लेने की आवाज़ मिली. मैं समझ नहीं पाया. मैं परेशान सा होने लगा. कुछ समझ नहीं आ रहा था पर थोड़े टाइम बाद जैसे ही सब कुछ क्लियर हुआ, मेरी छाती में पानी की तरंग दौड़ गई. मेरा दिल पिघलना शुरू हो गया. माँ उस तरफ रो रही है. मुझे मालूम है, मेरी बातों से उनको यह आँसू बहाने पड़ रहे है.


मैंने उनको कुछ कहना चाहा. पर कुछ समझ नहीं आ रहा था. केवल एक इच्छा मन में दौड़ने लगी
मन कर रहा है इस वक़्त मैं उनके पास जाकर, उनको बाँहों में लेके, अपने शरीर के साथ मिलाके, उनकी जिन प्यार भरी सुन्दर नाज़ुक आँखों से आंसू आ रहा है, उसको चूमता रहूं और उन आंसुओ को मैं पी जाऊ. मैने धीरे से बोलना चाहा और मेरी ग़लती के लिए माफ़ी माँगना चाही. पर मैं हमेशा उनको माँ कहके पुकारता था अब इस परिस्थिति में क्या और कैसे बुलाना है, यह सोच कर भी कुछ फैसला नहीं कर पा रहा था. पति अगर पत्नी को नाम से बुलाए तो स्वाभाविक है. पर यहाँ पत्नी उमर में भी बडी और रेस्पेक्ट से भी. इसलिए उनको नाम से बुलाना थोड़ा अजीब लगा. जब उस तरफ थोड़ी शांति हुई, कुछ न पुकार धीरे से उनको बोला

" मुझे माफ़ कर दो"

वो जान गयी की मैं समझ गया उस तरफ क्या हो रहा है. सो वह खुद को संभालते हुए आवाज़ में थोडी हंसी के साथ प्यार से कहने लगी.

" क्यों?"

मैं चुप था उनके मन की भवनाओ को समझने की कोशिश कर रहा था. फिर अपनी ग़लती को सुधारने का प्रयास करते हुए कहा

" मैं आयिंदा कभी नहीं रुलाऊंगा"

मां इस बार थोडी हंस पडी और एक परम तृप्ति के साथ कहा.


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" बुद्धु....कोई भी लड़की ऐसे आंसू बार बार बहाने के लिए खुद को सौभाग्यशाली मानेगी. मैं आज इतने दिन बाद खुद को सौभाग्यशाली महसुस कर रही हुं...क्यों की....."

"क्यों की?"

वह कपकपाती हुई मीठी स्वर में बोली

" मुझे तु... मुझे आप जैसा पति मिल रहा है"
बडा ही शानदार लाजवाब और अद्भुत रमणिय अपडेट है भाई मजा आ गया
 
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