• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Incest माँ और बेटे ने घर बसाया(सच्ची घटनाओं पर आधारित)

Esac

Maa ka diwana
315
1,879
124
d-index-button-click-here-block-text-over-white-background-91877897

Update 45 Posted
Next update soon...


if anyone have any ideas, they want me explore you are allowed to tell them


Note :- "Writer is busy that's why he was not able to update

Updates will be coming as soon as he gets time.
No one other than the writer is allowed to post updates on this thread. If you want to write, or feel you can write better than this writer, start your own thread and post updates there, not here. Everyone is free to write their own stories, but this thread is solely the domain of its writer. "

"लेखक अभी व्यस्त हैं, इसलिए वे अपडेट नहीं दे पाए हैं।
जैसे ही उन्हें समय मिलेगा, अपडेट आ जाएँगे।
इस थ्रेड पर लेखक के अलावा किसी और को अपडेट पोस्ट करने की अनुमति नहीं है। अगर आप लिखना चाहते हैं, या आपको लगता है कि आप इस लेखक से बेहतर लिख सकते हैं, तो अपना अलग थ्रेड शुरू करें और वहाँ अपडेट पोस्ट करें, यहाँ नहीं। हर कोई अपनी कहानियाँ लिखने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन यह थ्रेड पूरी तरह से इसके लेखक का ही क्षेत्र है।"
 
Last edited:

Esac

Maa ka diwana
315
1,879
124
Update 14

मुझे वहां खड़े खड़े उनके जाने की दिशा में देखते हुए महसुस होने लगा की अगले 16 दीन.... अब 16 दिन नही, बल्की 16 साल जैसे लगने लगे. नानाजी पण्डित जी से शादी की डेट पता करके आये है. वह शुभ मुहूर्त आज से 16 दिन बाद है.
अब हालत ऐसी है की इतना कुछ होने के बाद अब 16 दिन रहेंगे कैसे. अब मुझे एक भी पल मां को छोड़के रहने का मन नहीं कर रहा था.

पर हां...तब मुझे पता नहीं था की इन 16 दिनों में बहुत कुछ होगा, बहुत कुछ मिलेगा हमे, जो हमारे आगे की ज़िन्दगी जीने का रास्ता सहज कर देगा और साथ में मुझे एक नई चीज़ भी मिलेगी, जो आज तक मेरे जीवन में नहीं हुआ था कुछ दिन के लिए मुझे अपनी ही होने वाली बीवी के साथ छुप छुप के प्यार करने का मौका भी मिल गया था.

सुबह एमपी पहुँच के ,जल्दी फ्रेश होकर साइट की दौड़ लगाई आज का दिन बहुत भारी था पूरा दिन साइट पे बिताके शाम को जब वापस आया. घर आके बिस्तर पे लेट गया. दिन भर की थकावट के साथ साथ पिछले कुछ दिन से नीद भी कम हो रही थी आज उसी का असर एकसाथ पड़ गया.

तेज भूख लग रही थी याद आया जो आदमी टिफ़िन सप्लाई करता है, आज उसने दिन में ही फ़ोन करके बता दिया था की आज रात को खाना दे नहीं पायेगा. मैं किचन में गया फ्रिज में केवल अंडा मिला. संडे रहने के कारण न दूध न ब्रेड कुछ नही था. उस अंडे और मैगी को बनाने लगा. मुझे बस इतना ही पकाना आता है कभी माँ ने किचन में जाने ही नहीं दिया. अचानक मन में आया की अरे अब तो मेरी बैचलर लाइफ ही ख़तम होने जा रही है. अब तो फैमिली मेन बनने जा रहा हुँ. कुछ ही दिन में मुझे फिर से माँ के हाथ का खाना खाने का सौभाग्य मिलेगा


IMG-20240425-180558-844

लेकिन यहाँ मुझे माँ का नही, मेरी पत्नी का, शादी कि हुई बीवी के हाथ का खाना मिलेगा. मैं मैगी बनाते बनाते कल के बारे में सोच रहा था माँ को मालूम था की में बैग लेने के लिए रूम मै जाऊंगा. इसलिए वह जल्दी से नानी के हाथ टिफ़िन बॉक्स भेजकर , फटा फट पीछे के बरामदे से मेरे रूम में चली गयी और मेरा इंतज़ार करती रही. यह सब सोच के मन में एक ख़ुशी का आवेश आने लगा. माँ ने कल मुझे समझा दिया की वह हमारे नए रिश्ते के लिए अब कितनी खुश है. वह मुझे दिल से चाहती है मुझे अपने पति के रूप में प्यार करना शुरू कर दिया है. यह सब उनकी हरकतों ने और उनकी नज़रों ने मुझे समझा दिया. वह चाहती थी की मेरे मन में जो दुविधा, संकोच और सवालों का तूफ़ान चल रहा था इस बार एमपी आने से पहले वह सब क्लियर हो जाये. तो लास्ट मोमेंट में खुद आके वो सब कुछ जताके गयी. अब मैं उनको बीवी के रूप में सोंचू यह बात भी उन्होंने समझा दी. जाने क्यों, अब मुझे उनको मेरी बांहों में भरके, आँखों में आँखे डालके उनके चेहरे की तरफ बस देखते रहने का मन हो रहा था..

अब मैं माँ का स्पर्श पाने के लिए, उनके दिल की धड़कने महसुस करने के लिए और उनकी मिठी आवाज़ सुनने के लिए बेताब हो रहा था मैने मोबाइल लिया. इस वक्त पौने दस बज रहे थे मैं सोच रहा था की अब इतनी रात को क्या वो जागी होगी!! फिर भी आज मेरा लक ट्राय करने लगा. मैने मोबाइल के मेसेज ऑप्शन में जाके एक एसएमएस टाइप किया "मुझे अभी तुमसे बात करने के लिए मन कर रहा है. जब मैने वापस पढ़ा, मुझे खुद को बेवकूफाना लगा. फिर कुछ टाइम सोचा और डिलीट करके केवल 'हाय' लिखा. पिछले एक हफ्ते से उनसे मेरा कोई डायरेक्ट कन्वर्सेशन नही हुआ और अब तो सिचुएशन एकदम अलग है. मैने यही सोचा और माँ को भेज दिया. कल माँ ने खुद को मेरे पास सरेंडर करके, मेरे लिए उनका प्यार जता दिया था, फिर भी मेरे मन की सब भावनाए और संकोच अभी तक पूरी तरह दूर नहीं हुआ. हम एक रिश्ते को भूल के दूसरे नए रिश्ते में जुड़ने जा रहे है. समय के साथ साथ वह नए रिश्ते हमारे बीच स्ट्रांग होते रहेंगे. मुझे मालूम है की खुद को मेरे पास सरेंडर करने के बाद भी माँ को भी टाइम लगेगा सब कुछ एडजस्ट करने के लिए. इन्ही सब भावनाओं के बीच मेरा खाना हो गया था पर मेरा मन बार बार मोबाइल पे जा रहा था. अब तक कोई रिप्लाई नहीं आया.

शायद वह सो गई है. मैने सोचा उनको कॉल करूं फिर लगा की अगर उनको उठने में टाइम लगा तो नाना नानी को भी वह आवाज़ सुनाई देगी. अगर उन्होंने सुन लिया तो समझ जायेंगे इतनी रात को किसका फ़ोन है. क्योंकि की माँ को ज्यादा कोई फ़ोन नही करता है, मैं ही हूं जो करता है. पहले होता तो ठीक था लेकिन अब मुझे एक शर्म आने लगी. मैं निराश हो गया. मैं बाउल और स्पून लेके किचन जाने के लिए जैसे ही उठा एक sms आया.

मैंने तुरंत sms देखा. माँ ने भेजा है, उन्होंने भी केवल 'हम्म' भेजा. मेरे होठो पे मुस्कुराहट आ गई. मैं समझ गया वह जागी हुई है अब जब उन्होंने मुझसे बात शुरू कर दि है, तभी सब बातें मेरे मन के अंदर दौड़ने लगी. मैं सही शब्द ढूँढने लगा. कुछ समझ न आने के बाद लिख दिया 'मां तुम अभी भी जागी हो?'. मैं सेंड करने ही वाला था की मैं रुक गया और टेक्स्ट करेक्शन किया. "क्या तुम अभी भी जागी हो?" भेजने के बाद मै मोबाइल स्क्रीन पे नज़र लगा के बैठा रहा पर दिमाग मैं कुछ और चल रहा था. मैं इस बार अहमदाबाद जाके भी उनको माँ कह के बुला रहा था पर कल के बाद मुझे लगा की मुझे अब जल्दी पूरी तरह से नए रिश्ते को अपनाना पडेगा. बिप बिप माँ ने रिप्लाई भेजा है 'हममम'.

शायद उनको इस सवाल का जवाब देने में शर्म आई होगी. क्युकी इतना ही लिखने में बहुत टाइम लगा दिया. मेरा मन ख़ुशी से भर रहा है, अभी भी जागी है !! मेरे दोनों हाथो के थंब अब मेरे मोबाइल कीपैड के ऊपर नाच रहे है. मन में तूफ़ान और दिमाग में संकोच. समझ नहीं आ रहा क्या करूँ--कैसे करूँ या डायरेक्ट फ़ोन लगाऊं. मैं ने टाइप किया “क्या मैं तुम्हे फ़ोन कर सकता हूं?". पहली बार अपनी माँ से इस तरह बात कर रहा हुँ. आज हम दोनों ज़िन्दगी की राहों में ऐसे एक मोड़ पे खड़े है, की कुछ भी करने से पहल, बोलने से पहले मन में दुविधा आ रही है. जैसे हम दो अनजान इंसान है. इतने सालों का सब कुछ अचानक बदल गया और हम अब नाप तोल के सब कुछ करने में लगे है. अब से हम को दूसरे तरीके से एक दूसरे को जानना शुरू करना पड़ेगा. अब एक दूसरे के दिल का दरवाजा, जो दरवाजा केवल ज़िन्दगी में अपने जीवनसाथी के लिए ही खुलता है, उसको खोलना पड़ेगा. टाइम निकल गया, पर रिप्लाई आया नही. शायद अभी माँ फ़ोन पे डायरेक्ट बात करने में शर्मा रही है.

मैं जानता हूं उनको टाइम की जरुरत है. एक रूप से दूसरे रूप में आने के लिए, अपने तन मन को अपने होने वाले पति के पास पूरी तरह सोंपने के लिए. मैं उन्हे पति का प्यार देके, उनके साथ पूरी ज़िन्दगी गुजारना चाहता हुँ. उन्हे दुनिया की सबसे ज्यादा खुशनसीब पत्नी बनाना चाहता हुँ. कभी भी उनको ज़रा सा दुःख नहीं पहुचाना चाहता. मैं चाहता हु की अगले 7 जन्मों तक वह मेरी पत्नी बनके रहे. इसबार फिलहाल मैं अपने मन के ऊपर पत्थर रखके अपना बाउल उठाके किचन में चला. जैसे ही किचन में पंहुचा बीप बीप आवाज़ सुनाई दि. मैं दौड़ के बेड रूम में आया और मोबाइल उठाके चेक किया. माँ ने रिप्लाई दिया 'okey'. फिर से मन कांपने लगा. बिस्तर पे बैठके तुरंत माँ को फ़ोन लगाया और जैसे ही रिंग होना चालू किया, माँ ने फ़टाक से रिसीव कर लिया. मैं उनके हेलो का इंतज़ार करने लगा पर उन्होंने कुछ बोला नही. लेकिन मैं उनकी उपस्थिति महसुस कर पा रहा था. ऐसे तो रात है, चारो तरफ सन्नाटा है , कोई आवाज़ नही. मुझे उनकी सांसो की आवाज़ भी सुनाई दे रही है. मुझे एक हलकी हलकी कम्पन होने लगी यह सोच के की फ़ोन के उस तरफ मेरी होने वाली बीवी है. मैं उसकी मीठी आवाज़ सुनने के लिए उसके बोलने का इंतज़ार कर रहा था असल में हम दोनों ही खामोश थे और हम हमारे बीच की ख़ामोशी की भाषा पड़ने की कोशिश कर रहे थे पर जब उनकी तरफ से कुछ भी नहीं आया तो में बोला. मेरे दिल का दरवाजा उनके लिए खोल दिया. मैने धीरे से पूछा
"नानाजी नानीजी सो गए?"
उन्होंने कुछ टाइम बाद धीरे से कहा
"हा"
उनकी मिठी आवाज़ में साफ़ साफ़ शर्म झलक रही है. मेरा मन ख़ुशी से झूम उठा.


Picsart-24-04-25-19-03-47-318

फिर भी यह सब उनको महसुस नही करने दिया बात घुमा कर हल्की हंसी के साथ बोला
"मैंने अभी अभी डिनर किया"
वह थोड़ा चुप हो गई और आवाज़ में थोड़ा चिंता मिला के साथ पुछी
"इतने लेट क्यों?"
मैं नार्मल रहके बोलते रहा
"वो एक्चुअली आज साइट पे दौड़ भाग की वजह से लेट हो गया था।"
बोलके थोड़ा रुका और जैसे कुछ याद आया, फिर से बोला
"और आज वह टिफ़िन वाला भी खाना नहीं लाया."
मैं समझ रहा था की अभी भी शर्म और संकोच मां को सहज होने में रोक रहा है. लेकिन इस बार वह टाइम न लेके तुरंत पुछी
" क्यूँ?"
" पता नही, उसका कुछ काम था इसलिए आज नही आया" मैंने कहा.
वह थोड़ा टाइम चुप हो रही. फिर थोड़ा चिंतित होकर
"तो खाना कैसे हुआ?"
मैं हस्ते हस्ते बोला
" मुझे जो बनाने आता है, वही बनाया-मैगी और अंडा"
उन्होंने कुछ सोचा और बोली
"बाहर होटल में तो खाना मिलता है"
जैसे की मेरी ग़लती पकडी गई, सफाई देते हुए कहा
" हा...मिलता तो है. पर अभी..इतनी रात मे... जाने का मन नहीं किया"
और सोचते हुए बोल दिया
"और अब से नहीं करुँगा."
फिर क्या पता कैसे, में बोलते रहा
"बस कुछ दिन और, उसके बाद तो फिर हमेशा तुम्हारे हाथ का ही...."
बोलके में रुक गया पूरा नहीं कर पाया. पहली बार इस तरह की बात निकल गई मुंह से. मुझे शर्म आने लगी. हमारी शादी के बारे में हमने एक दूसरे से आज तक कुछ जिक्र नहीं किया. उधऱ माँ भी चुप हो गयी. इस बात से एक चीज़ हुआ वो ये की अब तक मेरे और माँ के बीच हमारे नए रिश्ते को लेके जो अदृश्य दीवार थी वह धीरे धीरे गिरना शुरू हो गई. मैने मेरे दिल का द्वार पूरा खोल दिया और उनके लिए मेरा प्यार बाहर निकलने लगा. मेरे गले से एक हलकी कपकपाती हुई आवाज़ निकल के बोली
"
I Love You"
 
Last edited:

red_devil_98

Member
464
637
93
Update 14

मुझे वहां खड़े खड़े उनके जाने की दिशा में देखते हुए महसुस होने लगा की अगले 16 दीन.... अब 16 दिन नही, बल्की 16 साल जैसे लगने लगे. नानाजी पण्डित जी से शादी की डेट पता करके आये है. वह शुभ मुहूर्त आज से 16 दिन बाद है.
अब हालत ऐसी है की इतना कुछ होने के बाद अब 16 दिन रहेंगे कैसे. अब मुझे एक भी पल मां को छोड़के रहने का मन नहीं कर रहा था.

पर हां...तब मुझे पता नहीं था की इन 16 दिनों में बहुत कुछ होगा, बहुत कुछ मिलेगा हमे, जो हमारे आगे की ज़िन्दगी जीने का रास्ता सहज कर देगा और साथ में मुझे एक नई चीज़ भी मिलेगी, जो आज तक मेरे जीवन में नहीं हुआ था कुछ दिन के लिए मुझे अपनी ही होने वाली बीवी के साथ छुप छुप के प्यार करने का मौका भी मिल गया था.

सुबह एमपी पहुँच के ,जल्दी फ्रेश होकर साइट की दौड़ लगाई आज का दिन बहुत भारी था पूरा दिन साइट पे बिताके शाम को जब वापस आया. घर आके बिस्तर पे लेट गया. दिन भर की थकावट के साथ साथ पिछले कुछ दिन से नीद भी कम हो रही थी आज उसी का असर एकसाथ पड़ गया.

तेज भूख लग रही थी याद आया जो आदमी टिफ़िन सप्लाई करता है, आज उसने दिन में ही फ़ोन करके बता दिया था की आज रात को खाना दे नहीं पायेगा. मैं किचन में गया फ्रिज में केवल अंडा मिला. संडे रहने के कारण न दूध न ब्रेड कुछ नही था. उस अंडे और मैगी को बनाने लगा. मुझे बस इतना ही पकाना आता है कभी माँ ने किचन में जाने ही नहीं दिया. अचानक मन में आया की अरे अब तो मेरी बैचलर लाइफ ही ख़तम होने जा रही है. अब तो फैमिली मेन बनने जा रहा हुँ. कुछ ही दिन में मुझे फिर से माँ के हाथ का खाना खाने का सौभाग्य मिलेगा


IMG-20240425-180558-844

लेकिन यहाँ मुझे माँ का नही, मेरी पत्नी का, शादी कि हुई बीवी के हाथ का खाना मिलेगा. मैं मैगी बनाते बनाते कल के बारे में सोच रहा था माँ को मालूम था की में बैग लेने के लिए रूम मै जाऊंगा. इसलिए वह जल्दी से नानी के हाथ टिफ़िन बॉक्स भेजकर , फटा फट पीछे के बरामदे से मेरे रूम में चली गयी और मेरा इंतज़ार करती रही. यह सब सोच के मन में एक ख़ुशी का आवेश आने लगा. माँ ने कल मुझे समझा दिया की वह हमारे नए रिश्ते के लिए अब कितनी खुश है. वह मुझे दिल से चाहती है मुझे अपने पति के रूप में प्यार करना शुरू कर दिया है. यह सब उनकी हरकतों ने और उनकी नज़रों ने मुझे समझा दिया. वह चाहती थी की मेरे मन में जो दुविधा, संकोच और सवालों का तूफ़ान चल रहा था इस बार एमपी आने से पहले वह सब क्लियर हो जाये. तो लास्ट मोमेंट में खुद आके वो सब कुछ जताके गयी. अब मैं उनको बीवी के रूप में सोंचू यह बात भी उन्होंने समझा दी. जाने क्यों, अब मुझे उनको मेरी बांहों में भरके, आँखों में आँखे डालके उनके चेहरे की तरफ बस देखते रहने का मन हो रहा था..

अब मैं माँ का स्पर्श पाने के लिए, उनके दिल की धड़कने महसुस करने के लिए और उनकी मिठी आवाज़ सुनने के लिए बेताब हो रहा था मैने मोबाइल लिया. इस वक्त पौने दस बज रहे थे मैं सोच रहा था की अब इतनी रात को क्या वो जागी होगी!! फिर भी आज मेरा लक ट्राय करने लगा. मैने मोबाइल के मेसेज ऑप्शन में जाके एक एसएमएस टाइप किया "मुझे अभी तुमसे बात करने के लिए मन कर रहा है. जब मैने वापस पढ़ा, मुझे खुद को बेवकूफाना लगा. फिर कुछ टाइम सोचा और डिलीट करके केवल 'हाय' लिखा. पिछले एक हफ्ते से उनसे मेरा कोई डायरेक्ट कन्वर्सेशन नही हुआ और अब तो सिचुएशन एकदम अलग है. मैने यही सोचा और माँ को भेज दिया. कल माँ ने खुद को मेरे पास सरेंडर करके, मेरे लिए उनका प्यार जता दिया था, फिर भी मेरे मन की सब भावनाए और संकोच अभी तक पूरी तरह दूर नहीं हुआ. हम एक रिश्ते को भूल के दूसरे नए रिश्ते में जुड़ने जा रहे है. समय के साथ साथ वह नए रिश्ते हमारे बीच स्ट्रांग होते रहेंगे. मुझे मालूम है की खुद को मेरे पास सरेंडर करने के बाद भी माँ को भी टाइम लगेगा सब कुछ एडजस्ट करने के लिए. इन्ही सब भावनाओं के बीच मेरा खाना हो गया था पर मेरा मन बार बार मोबाइल पे जा रहा था. अब तक कोई रिप्लाई नहीं आया.

शायद वह सो गई है. मैने सोचा उनको कॉल करूं फिर लगा की अगर उनको उठने में टाइम लगा तो नाना नानी को भी वह आवाज़ सुनाई देगी. अगर उन्होंने सुन लिया तो समझ जायेंगे इतनी रात को किसका फ़ोन है. क्योंकि की माँ को ज्यादा कोई फ़ोन नही करता है, मैं ही हूं जो करता है. पहले होता तो ठीक था लेकिन अब मुझे एक शर्म आने लगी. मैं निराश हो गया. मैं बाउल और स्पून लेके किचन जाने के लिए जैसे ही उठा एक sms आया.

मैंने तुरंत sms देखा. माँ ने भेजा है, उन्होंने भी केवल 'हम्म' भेजा. मेरे होठो पे मुस्कुराहट आ गई. मैं समझ गया वह जागी हुई है अब जब उन्होंने मुझसे बात शुरू कर दि है, तभी सब बातें मेरे मन के अंदर दौड़ने लगी. मैं सही शब्द ढूँढने लगा. कुछ समझ न आने के बाद लिख दिया 'मां तुम अभी भी जागी हो?'. मैं सेंड करने ही वाला था की मैं रुक गया और टेक्स्ट करेक्शन किया. "क्या तुम अभी भी जागी हो?" भेजने के बाद मै मोबाइल स्क्रीन पे नज़र लगा के बैठा रहा पर दिमाग मैं कुछ और चल रहा था. मैं इस बार अहमदाबाद जाके भी उनको माँ कह के बुला रहा था पर कल के बाद मुझे लगा की मुझे अब जल्दी पूरी तरह से नए रिश्ते को अपनाना पडेगा. बिप बिप माँ ने रिप्लाई भेजा है 'हममम'.

शायद उनको इस सवाल का जवाब देने में शर्म आई होगी. क्युकी इतना ही लिखने में बहुत टाइम लगा दिया. मेरा मन ख़ुशी से भर रहा है, अभी भी जागी है !! मेरे दोनों हाथो के थंब अब मेरे मोबाइल कीपैड के ऊपर नाच रहे है. मन में तूफ़ान और दिमाग में संकोच. समझ नहीं आ रहा क्या करूँ--कैसे करूँ या डायरेक्ट फ़ोन लगाऊं. मैं ने टाइप किया “क्या मैं तुम्हे फ़ोन कर सकता हूं?". पहली बार अपनी माँ से इस तरह बात कर रहा हुँ. आज हम दोनों ज़िन्दगी की राहों में ऐसे एक मोड़ पे खड़े है, की कुछ भी करने से पहल, बोलने से पहले मन में दुविधा आ रही है. जैसे हम दो अनजान इंसान है. इतने सालों का सब कुछ अचानक बदल गया और हम अब नाप तोल के सब कुछ करने में लगे है. अब से हम को दूसरे तरीके से एक दूसरे को जानना शुरू करना पड़ेगा. अब एक दूसरे के दिल का दरवाजा, जो दरवाजा केवल ज़िन्दगी में अपने जीवनसाथी के लिए ही खुलता है, उसको खोलना पड़ेगा. टाइम निकल गया, पर रिप्लाई आया नही. शायद अभी माँ फ़ोन पे डायरेक्ट बात करने में शर्मा रही है.

मैं जानता हूं उनको टाइम की जरुरत है. एक रूप से दूसरे रूप में आने के लिए, अपने तन मन को अपने होने वाले पति के पास पूरी तरह सोंपने के लिए. मैं उन्हे पति का प्यार देके, उनके साथ पूरी ज़िन्दगी गुजारना चाहता हुँ. उन्हे दुनिया की सबसे ज्यादा खुशनसीब पत्नी बनाना चाहता हुँ. कभी भी उनको ज़रा सा दुःख नहीं पहुचाना चाहता. मैं चाहता हु की अगले 7 जन्मों तक वह मेरी पत्नी बनके रहे. इसबार फिलहाल मैं अपने मन के ऊपर पत्थर रखके अपना बाउल उठाके किचन में चला. जैसे ही किचन में पंहुचा बीप बीप आवाज़ सुनाई दि. मैं दौड़ के बेड रूम में आया और मोबाइल उठाके चेक किया. माँ ने रिप्लाई दिया 'okey'. फिर से मन कांपने लगा. बिस्तर पे बैठके तुरंत माँ को फ़ोन लगाया और जैसे ही रिंग होना चालू किया, माँ ने फ़टाक से रिसीव कर लिया. मैं उनके हेलो का इंतज़ार करने लगा पर उन्होंने कुछ बोला नही. लेकिन मैं उनकी उपस्थिति महसुस कर पा रहा था. ऐसे तो रात है, चारो तरफ सन्नाटा है , कोई आवाज़ नही. मुझे उनकी सांसो की आवाज़ भी सुनाई दे रही है. मुझे एक हलकी हलकी कम्पन होने लगी यह सोच के की फ़ोन के उस तरफ मेरी होने वाली बीवी है. मैं उसकी मीठी आवाज़ सुनने के लिए उसके बोलने का इंतज़ार कर रहा था असल में हम दोनों ही खामोश थे और हम हमारे बीच की ख़ामोशी की भाषा पड़ने की कोशिश कर रहे थे पर जब उनकी तरफ से कुछ भी नहीं आया तो में बोला. मेरे दिल का दरवाजा उनके लिए खोल दिया. मैने धीरे से पूछा
"नानाजी नानीजी सो गए?"
उन्होंने कुछ टाइम बाद धीरे से कहा
"हा"
उनकी मिठी आवाज़ में साफ़ साफ़ शर्म झलक रही है. मेरा मन ख़ुशी से झूम उठा.


Picsart-24-04-25-19-03-47-318

फिर भी यह सब उनको महसुस नही करने दिया बात घुमा कर हल्की हंसी के साथ बोला
"मैंने अभी अभी डिनर किया"
वह थोड़ा चुप हो गई और आवाज़ में थोड़ा चिंता मिला के साथ पुछी
"इतने लेट क्यों?"
मैं नार्मल रहके बोलते रहा
"वो एक्चुअली आज साइट पे दौड़ भाग की वजह से लेट हो गया था।"
बोलके थोड़ा रुका और जैसे कुछ याद आया, फिर से बोला
"और आज वह टिफ़िन वाला भी खाना नहीं लाया."
मैं समझ रहा था की अभी भी शर्म और संकोच मां को सहज होने में रोक रहा है. लेकिन इस बार वह टाइम न लेके तुरंत पुछी
" क्यूँ?"
" पता नही, उसका कुछ काम था इसलिए आज नही आया" मैंने कहा.
वह थोड़ा टाइम चुप हो रही. फिर थोड़ा चिंतित होकर
"तो खाना कैसे हुआ?"
मैं हस्ते हस्ते बोला
" मुझे जो बनाने आता है, वही बनाया-मैगी और अंडा"
उन्होंने कुछ सोचा और बोली
"बाहर होटल में तो खाना मिलता है"
जैसे की मेरी ग़लती पकडी गई, सफाई देते हुए कहा
" हा...मिलता तो है. पर अभी..इतनी रात मे... जाने का मन नहीं किया"
और सोचते हुए बोल दिया
"और अब से नहीं करुँगा."
फिर क्या पता कैसे, में बोलते रहा
"बस कुछ दिन और, उसके बाद तो फिर हमेशा तुम्हारे हाथ का ही...."
बोलके में रुक गया पूरा नहीं कर पाया. पहली बार इस तरह की बात निकल गई मुंह से. मुझे शर्म आने लगी. हमारी शादी के बारे में हमने एक दूसरे से आज तक कुछ जिक्र नहीं किया. उधऱ माँ भी चुप हो गयी. इस बात से एक चीज़ हुआ वो ये की अब तक मेरे और माँ के बीच हमारे नए रिश्ते को लेके जो अदृश्य दीवार थी वह धीरे धीरे गिरना शुरू हो गई. मैने मेरे दिल का द्वार पूरा खोल दिया और उनके लिए मेरा प्यार बाहर निकलने लगा. मेरे गले से एक हलकी कपकपाती हुई आवाज़ निकल के बोली
"
I Love You"
🔥🔥🔥🔥🔥Super duper update 👌
 
  • Like
Reactions: Napster and Esac

sunoanuj

Well-Known Member
5,166
12,872
189
Bahut hi behtarin updates… bhavanaon ko bhaut hi jabardast tarike se vayakt kiya hai in update main …
 
  • Like
Reactions: Napster and Esac
167
594
94
Update 13


अगले दिन मैं जब ड्राइंग रूम में आया, वहां नाना नानी के साथ माँ कुछ बात कर रही थी. पर जैसे ही मैं ड्राइंग रूम में एंट्री लेता हूं वह आंखे उठा कर एकबार मुझे देखती है और शर्मा के फिर से नानी के तरफ देखके कुछ बोली और तुरंत वहां से जाने लगी और किचन के तरफ के डोर से निकल गयी. मैं समझ गया माँ भी मेरी जैसी सिचुएशन में है. शायद उनका भी मन चाह रहा होगा की वह मुझसे मिले, बातें करे, पर उनके अंदर की भावनाएं और संकोच वह सब करने से रोक रहा है. अब तक जो उनका बेटा था अपना खुन था जिसको बचपन से पाल-पोस के एक नौजवान लड़का बनाया, जिसे माँ की ममता, प्यार और स्नेह देकर बड़ा किया है, उस नौजवान लड़के को अब उनके पति के रूप में मान ना पड़ेगा. उसको पति का अधिकार देना पडेगा. अपना तन मन उसको सोंपना पड़ेगा. एक नये पवित्र रिश्ते में उससे जुड़ना पड़ेगा. उनको देख के यह पता चल रहा है की वह इस सब सोच और संकोच से निकलने की कोशिश कर रही है. क्यूँ की उनकी नज़र में, उनके चलन में, और उनके इशारे में साफ़ साफ़ पता चल रहा है की वह अब एक माँ की तरह नहीं, बल्कि वह खुद को एक लड़की के तरह महसुस कर रही है. जिस की अभी शादी होनेवाली है और वह अपने होनेवाले पति से शर्मा रही है.


मैं ड्राइंग रूम में बैठ के टीवी देख रहा था लेकिन मेरा मन चाह रहा था माँ के साथ बैठ के बात कर सकूं, उनका ख़ूबसूरत चेहरा अपने हाथों में पकड़ के, आँखों में आँखे डालके देखने की चाहत हो रही थी. पर यह सम्भव नहीं हो पा रहा है. हालाकि हम सब जानते है की इस रिश्ते के लिए दोनों ही राज़ी है, और बस कुछ ही दिनों में हम पति पत्नी के पवित्र बंधन में जुड़ने जा रहे है.
नानी माँ को किचन में अकेला छोड़के मेरे साइड में रखे सोफा पर बैठी. मेरे साथ माँ के इस नये रिश्ते से नानी जी बहुत खुश है. उनकी एकलौती बेटी की ज़िन्दगी केवल दुःख से भरी है. अब ज़िन्दगी उनको एक दूसरा मौका दे रहा है. पति के प्यार के साथ एक नई फैमिली बनाकर ज़िन्दगी जीने का सपना पूरा होने जा रहा है. नानी जी भावुक हो गयी उनकी आँखें गिली होने लगी. वह मेरा हाथ उनके हाथ से पकड़ के कहने लगी
"बेटा , मैं तुम दोनों को दिल भरके आशीर्वाद देती हुँ. तुम लोग एक दूसरे को ज़िंदगी भर प्यार करते रहना. हँसी, खुशी, आनंद और शांति के साथ जीते रहना. अपनी फैमिली, अपने बच्चों के साथ एक नई दुनिया बनाके खुश रहना...."
नानी के आँखों में पानी आने लगा. "बेटा, हम सब की भलाई के लिये, तुम्हारी अपने फैमिली के लिये, तुम आज जो कर रहे हो, इस के लिए मैं कैसे तुम्हें......"
नानी और बोल नहीं पायी उनका गला बंध होने लगा. बस वह मेरे तरफ एक प्यार और ममता भरी, कृतज्ञता की नज़र से देख रही थी. मैं भी भावुक हो गया मैंने उनका हाथ मेरे हाथ में लेके, मेरी स्वीकृति जताई और बोला


images-1-2

"नानी जी...आप बिलकुल परेशान मत होइए. आप की बेटी को मैं खुश रखुंगा और हम सब मिलके खुश रहेंगे"
नानी जी के होठो पे एक मुस्कराहट आने लगी और फिर थोड़ा हंसके मेरे गाल पे प्यार से एक हल्का सा चाटा मारके बोली
"पागल लड़का...मुझे अब नानी नहीं !!!....मम्मी तो बोल"
वह हसने लगी और मैं शर्म में डुबा जा रहा था.



मैं खाना खा रहा था अचानक मेरी नज़र उन लोगों के पीछे किचन डोर पे पड़ी. मैने देखा की माँ किचन डोर के पीछे छुप कर सीधा मुझे गौर से देख रही है.


Picsart-24-04-24-01-16-54-997

उनकी आँखों में जो ख़ुशी की झलक थी, और होठो पे प्यार भरी मुस्कान, वह मुझे दिख गयी. पर जैसे ही उनके साथ मेरी नज़र मिली , वह झट से अंदर छुप गयी. जैसे कोई टीनएज गर्ल अपने प्रेमी को देख के शर्म से छुपती है. मेरी छाती में तरंग जैसी कोई एक अनुभुति मेरे दिल को अंदर से छुने लगी.
नाना नानी ड्राइंगरूम में बैठे थे मेरे जाने का टाइम हो गया. मैं उठके अपने रूम की तरफ चला बैग लाने के लिये. मेरे दिमाग में बहुत कुछ चल रहा था मैं मेरे रूम में जैसे ही एंट्री करता हूं, मैं चौंक गया. स्टडी टेबल के पास माँ खड़ी है.


IMG-20240422-003047-759

मेरी नज़र उनपे टीकी हुई है. उनकी आँखो में पहली बार वह प्यार दिखाई दिया जो एक लड़के के लिए एक लड़की के मन में होता है, एक प्रेमी के लिए उनके प्रेमिका के दिल में होता है. उनके गुलाबी होंठों पे एक मुस्कराहट झलक रही है. साथ ही साथ उनके पतले होठ एक अद्भुत आवेश में थोड़ा थोड़ा कांप रहा है. पूरा चेहरा शर्म से लाल हो गया है. मैं उनसे नज़र मिलाके देखे जा रहा हु और अंदर ही अंदर बहुत कुछ बोले जा रहा हुँ. पर एक भी बात ज़बान तक नही आई ना हीं कुछ कर पा रहा हुँ. अचानक उन्होंने नज़र झुका ली.

tumblr-c1cb31ffe4417b74bffa5b676bb371eb-a7bf725c-250

मेरी नज़र नीचे होते हुए उनके गले के नीचे छाती पर और मख़्खन जैसे मुलायम क्लीवेज एरिया में आके टिक गई.


Picsart-24-04-22-01-24-42-972

तभी माँ ने दौड़कर आके मेरी छाती में उनका मुंह घुसा दिया और दोनों हाथ पीछे ले जाके पीठ के ऊपर रखके मुझे कसके पकड़ लिया.

68747470733a2f2f73332e616d617a6f6e6177732e636f6d2f776174747061642d6d656469612d736572766963652f53746f

उनका पूरा शरीर मेरे शरीर से चिपका हुआ है. मां ने पहली बार इस तरह मुझे हग किया है. एक माँ की तरह नही, एक नई नवेली बीवी की तरह मुझे पकड़ रखा है. उनके नरम नरम बूब्स मेरे छाती के पर चिपके हुये है. उनका प्राइवेट एरिया मेरा थाई के साथ चिपका हुआ है. उनका फ्लैट पेट मेरे प्राइवेट एरिया के साथ चिपका हुआ है. मेरा तना हुआ लौड़ा जो मेरी जीन्स के ऊपर से अपने पेट ने महसुस किया होगा.

68747470733a2f2f73332e616d617a6f6e6177732e636f6d2f776174747061642d6d656469612d736572766963652f53746f

मैं उनके बालों में अपना मुंह घूसा के, उनको अपने दोनों हाथों से पकड़ के ज़ोर से मेरे साथ चिपकाने लगा. हममें से कोई कुछ नहीं बोल रहा था, केवल एक दूसरे को महसुस कर रहे थे. ऐसा करके मुझे जो कहना था वह कह दिया और मुझे जो कुछ पुछना था उसका जवाब भी मिल गया. अचानक उनकी ग्रिप लूज हो गई और उन्होंने अपना चेहरा मेरी छाती से अलग करने का संकेत दिया. मैंने मेरी पकड़ छोड़ दि. उन्होंने मेरे से थोड़ा अलग होकर मेरे सामने बस कुछ मोमेंट्स खड़ी होकर नज़र नीचे करके, फिर तेजी से दौड के अपने रूम में चली गयी.
Shandar lajawab 💥💥💥
 
Top