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Incest मजबूरी या जरूरत

rohnny4545

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मनीषा की खूबसूरती को संजू पहले दिन ही अपनी आंखों से भांप लिया था उसका दूध जैसा गोरा बदन पहले दिन से ही उसकी आंखों में बस गया था और वह भी पहली बार जिस अवस्था में होने जा रही थी उसे देखकर उसके लौड़े ने ठुनकी मारना शुरू कर दिया था,,, और वह भी संजू की किस्मत इतनी अच्छी थी कि वह पहली बार में ही मनीषा को केवल एक छोटी सी टीशर्ट और पेंटी में देखा था जिसमें मनीषा गजब की कयामत लग रही थी,,, वह तो उस दिन संजू अपनी मौसी को चोदने के इरादे से आया था इसलिए मनीषा के ऊपर ज्यादा ध्यान दिया नहीं था,,, उस दिन से आज जाकर उसे मौका मिला था मनीषा से मुलाकात करने का और अब तो उसकी किस्मत में चार चांद लग गया था क्योंकि वह मनीषा के साथ कोचिंग का क्लास जो शुरू करने जा रहा था इसी सिलसिले में वह‌मनीषा के घर आया था,,,।

संजू मनीषा के बिस्तर पर बैठा हुआ था और मनीषा कुर्सी पर बैठ कर पढ़ाई कर रही थी,,, मनीषा आज संजू को देख कर खुश नजर आ रही थी लेकिन यही मनीषा उस दिन संजू के ऊपर मन ही मन बहुत गुस्सा कर रही थी जब वह उसे पेंट और टीशर्ट में देखा था और अपनी मां पर भी उसे गुस्सा आया था कि किसी को भी उसके कमरे में ले कर चली आती है,,,,, दोनों बैठे हुए थे बिस्तर पर समझी और कुर्सी पर मनीषा बात की शुरुआत कैसे करनी है मनीषा को समझ में नहीं आ रहा था और संजू था कि तिरछी नजरों से मनीषा की खूबसूरती के मादक रस को अपनी आंखों से पी रहा था,,, संजू टी शर्ट में झांकती है उसकी गोलाईयों को तिरछी नजरों से देख कर मन ही मन खुश हो रहा था,,, उसे इतना तो समझ में आ ही गया था कि जब गोडाउन मैं बेहतरीन माल है तो शोरूम आले दर्जे का तो होगा ही होगा,,,, मनीषा ही बात की शुरुआत करते हुए बोली,,,।

और संजू क्या हाल है,,,(किताबों को एक तरफ रखते हुए बोली)

एकदम ठीक है मनीषा दीदी,,,


तुमको मम्मी ने तो सब कुछ बता ही दी होगी,,,


जी दीदी मौसी ने मुझे सब कुछ बता दि‌ है और मैं तैयार हूं इसीलिए तो बात करने के लिए आया था,,,

चलो इस बात की मुझे खुशी है कि तुम तैयार तो हो,,, पढ़ा तो लोगे ना,,,

जी हां दीदी पड़ा लूंगा और वैसे भी अगर नहीं समझ में आएगा तो तुम तो हो ना,,,


हां यह बात सही है जहां पर तुम्हारा काम फंसे वहां पर मुझसे पूछ लेना,,,


शुरू कब से करना है दीदी,,,

कल ही से शाम को,,,।(बालों के लटको अपनी नाजुक ऊगलियों से पकड़ कर उसे अपने कान के पीछे ले जाते हुए बोली और यही अदा,, संजू के तन बदन में आग लगा रही थी,,,)

जी दीदी में पहुंच जाऊंगा,,,,

(इतना सुनते ही मनीषा जोर जोर से हंसने लगी उसके हंसने की वजह को संजू समझ नहीं पा रहा था लेकिन हंसती हुई मनीषा स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा से कम नहीं लग रही थी,,,)

क्या हुआ हंस क्यों रही हो,,,

अरे हंसु नहीं तो और क्या करूं,,,

क्यो,,,?(संजू आश्चर्य जताते हुए बोला)


अरे बुद्धू तुम्हें पता है कि कोचिंग क्लास कहां पर है,,,


नहीं तो,,,


तब कैसे पहुंच जाओगे बताओ,,,,


अरे हां,,,,, कहां पर है कोचिंग क्लास,,,,




अरे बताती हूं,,,, तुम्हें अभी ले चलती हूं थोड़ी देर रुको तो सही,,,,,।(इतना कहने के साथ फिर से हंसने लगी उसकी हंसी संजीव को बहुत ही मनमोहक लग रही थी और हंसते हुए उसके बदन के साथ-साथ उसके दोनों संतरे इस टीशर्ट में उछल रहे थे जिसे देखकर संजू के तन बदन में आग लग रही थी और उसे उछलता हुआ देखकर संजू समझ गया था कि मनीषा टी-शर्ट के अंदर ब्रा नहीं पहनी है जोकि कभी-कभी उसकी दोनों चूचियों की कड़ी निप्पल टी-शर्ट में भाले की नोक की तरह उभर कर नजर आने लगती थी,,,,,, संजू तुरंत ही अपने मन में कल्पना करने लगा कि बिना टीशर्ट की मनीषा की चूचियां कैसी नजर आती होगी,,,, वह मन ही मन मनीषा की सूचियों की तुलना अपनी मौसी की बड़ी-बड़ी चुचियों से करने लगा था जो कि वह जानता था कि मौसी की चूचियां फुटबॉल के साइज की थी और वही मनीषा की चूचियां टेनिस के गेंद से थोड़ी बड़ी बड़ी थी,,, थोड़ी देर में फिर से कमरे में सन्नाटा फैल गया,,, मनीषा अपने कमरे में एक जवान लड़के की उपस्थिति में थोड़ा असहज महसूस कर रही थी और वह भी इसलिए कि ईसी लड़के ने उस दिन उसे केवल टी शर्ट और पेंटी में देख लिया था,,, इसलिए संजू के सामने उसे थोड़ा अजीब लग रहा था,,, वह फिर से बात की शुरुआत करते हुए बोली,,,।)

तुम उस दिन आए थे ना संजू लेकिन मैं तुमसे बात नहीं कर पाई थी,,।

वो हां दीदी उस दिन,,, के लिए मैं थोड़ा शर्मिंदा हूं,,,

क्यों,,,?


वह उस दिन मौसी तुम्हारे कमरे में लेकर आ गई थी ना और तुम केवल पेंटी,,,,,


अरे हां कोई बात नहीं,,,(संजू के मुंह से पेंटी शब्द सुनते ही मनीषा के गोरे गोरे गाल शर्म के मारे लाल होने लगे) तुम जानबूझकर थोड़ी आए थे,,, कोई बात नहीं उस दिन के लिए मेरे मन में कोई गिला शिकवा नहीं है,,,

चलो तब तो ठीक है दीदी उसी वजह से मैं तुम्हारे से मिलने में थोड़ा सा घबरा रहा था कि तुम मुझे क्या बोलोगी क्या समझोगी,,,


अगर तुम्हारे लिए मेरे मन में गिला शिकवा होता तो मैं मम्मी से तुम्हारे लिए कोचिंग क्लास ज्वाइन करने के लिए नहीं कहलाती,,,,,,
(अभी दोनों बात ही कर रहे थे कि किचन में से आवाज आई,,,)

मनीषा चाय तैयार हो गई है,,, ले ले कर जा,,,
(अपनी मां की आवाज सुनते ही मनीषा बोली)

तुम यही बैठो मैं चाय लेकर आती हूं,,,,(इतना कह कर मनीषा कुर्सी पर से उठने वाली थी कि तुरंत संजू बिस्तर पर से उठा और अपना हाथ मनीषा के कंधे पर रखकर उसे हल्के से दबाते हुए उसे बैठने का इशारा करते हुए बोला,,,)

तुम बैठो दीदी मैं लेकर आता हूं,,,


अरे नहीं नहीं मैं लेकर आ रही हूं ना,,,


अरे दीदी मैं कोई मेहमान थोड़ी हूं जो मेरी मौसी का ही घर है ना इसलिए मेरी भी जिम्मेदारी बनती है और वैसे भी तुम मेरी बड़ी दीदी हो तुम मेरे लिए चाय लेकर आओ ही अच्छा थोड़ी लगता है,,, तुम बैठो मैं लेकर आता हूं,,,,।
( इतना कहने के साथ ही संजू मनीषा के कमरे से बाहर निकल गया और मनीषा उसे जाते हुए देखती रह गई,, जिस अदा से उसने उसके कंधे पर रखकर उसे बैठने का इशारा किया था मनीषा पूरी तरह से उसके इस अदा से कायल हो चुकी थी,,, मनीषा पहली बार संजू को गौर से देख रही थी एक जवान लड़की के लिए ऐसा खूबसूरत नौजवान लड़का ही उसका बॉयफ्रेंड बनने के लायक था ऐसा मन में ख्याल आते ही उसके तन बदन में अजीब सी झुर्झुरी सी फैल गई,,, मनीषा संजू के खूबसूरत मासूम चेहरे को देखकर उसके ऊपर मोहित हो चुकी थी वह कुर्सी पर बैठे बैठे मन ही मन मुस्कुरा रही थी और संजू था कि जानबूझकर मनीषा को ही बैठने के लिए बोल कर खुद चाय लेने के लिए गया था ताकि रसोई घर में जाकर वहां अपनी मौसी के साथ थोड़ी मस्ती कर सके,,,,,

मनीषा अपने कमरे में कुर्सी पर बैठकर संजू की मासूमियत के बारे में सोच रही थी वहीं दूसरी तरफ संजू किचन में पहुंच गया था मनीषा की मां के साथ मस्ती करने के लिए किचन में घुसने से पहले अपनी चारों तरफ नजर घुमाकर देखकर तसल्ली कर लेने के बाद वह रसोई घर में प्रवेश किया जहां पर उसकी मां दरवाजे की तरफ पीठ करके प्लेट में नाश्ता लगा रही थी और तुरंत संजू जाकर पीछे से उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया,,, और अपने दोनों हाथों को ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी चुचियों पर रखकर दबाने लगा एकाएक हुए इस हमले से साधना एकदम से चौंक गई लेकिन जब उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसे बाहों में कसने वाला संजू है तो उसकी जान में जान आई लेकिन इस बात से वह घबरा गई कि कहीं कोई देख ना ले,,, इसलिए वह संजू की पकड़ से छूटने का प्रयास करते हुए बोली,,।

छोड़ संजू कोई देख लेगा तो गजब हो जाएगा,,,

अरे मौसी तुम खामखा डरती हो कोई देखने वाला नहीं है मैं पूरी तसल्ली कर लेने के बाद ही तुम्हें इस तरह से पकड़ा हूं ,,,(संजू बोलते हुए लगातार साधना की चूचियों को दबा रहा था,, और अपनी मौसी के इजाजत के बिना ही वह जल्दबाजी दिखाते हुए अपनी मौसी के ब्लाउज के बटन को खोलने लगा था तो साधना उसका हाथ पकड़ते हुए बोली,,,)

पागल हो गया क्या संजू अरे कुछ तो सब्र कर अगर मनीषा ने देख ली तो हम दोनों का जीना मुश्किल हो जाएगा,,,


अरे कुछ नहीं होगा मौसी तुम खामखा कर रही हो,,,,


अरे सच में तू पागल हो गया है रात भर तो लिया है फिर भी तेरा मन नहीं भर रहा है,,,


क्या करूं मौसी तुम्हारे ये खूबसूरत बदन जब भी मेरे करीब रहता है तो मुझे चैन नहीं मिलता,,,(इतना कहते हुए संजू अपनी मौसी के ब्लाउज का एक बटन खोलने में कामयाब हो गया,,, इसलिए साधना उसके हाथ को पकड़कर हटाते हुए अपने ब्लाउज का बटन बंद करते हुए बोली,,)



तू तो मुझे मरवाएगा,,,


मरवाएगा नहीं,,, बल्कि तुम्हारी मारूंगा,,,


किसी और समय मार लेना,,, अभी मैं तुझे कुछ नहीं करने दूंगी,,,


ऐसा गजब मत करो मौसी मेरा इस समय तुम्हें चोदने का बहुत मन कर रहा है,,,(साधना की गांड पर अपने लंड को धंसाते हुए बोला,,, संजू की हरकत से साधना के तन बदन में भी चुदास की लहर दौड़ रही थी उसकी भी चुत गीली होने लगी थी,,,, फिर भी अपने आप पर काबू रखते हुए वह बोली,,,)

नहीं अभी बिल्कुल भी नहीं,,, बाद में कर लेना,,,


नहीं मौसी ऐसा कसम मत करो,,,(इतना कहने के साथ ही संजू फुर्ति दिखाता हुआ आगे से अपनी मौसी की साड़ी को ऊपर की तरफ उठाते हुए,,, उसकी पेंटी में हाथ डालकर उसकी चुत को दबोचने लगा,,,,)

आहहह क्या कर रहा है रे,,,


अब तो मान जाओ मौसी तुम्हारी चुत भी पानी छोड़ रही है,,,

इस तरह की हरकत करेगा तो पानी तो छोड़ेगी ही,,, चल हट मनीषा किसी भी वक्त आ जाएगी बहुत देर हो गई है,,,

(संजू समझ गया था कि इस समय उसकी मौसी मानने वाली बिल्कुल भी नहीं है इसलिए अपने मन को ही मनाने के लिए वह बोला,,,)

अच्छा कोई बात नहीं मौसी चोदने ना सही लेकिन एक बार अपनी चुत को चाटने तो दो-चार से पहले तुम्हारी चुत का स्वाद मिल जाएगा तो मजा आ जाएगा,,,

अब देख संजू तेरी ये जीद अच्छी नहीं है हम दोनों का भंडा फुट सकता है,,,(साधना चिंता व्यक्त करते हुए बोली )


नहीं नहीं मौसी ऐसा कुछ भी नहीं होगा जैसा तुम सोच रही हो वैसा कुछ भी नहीं होगा तुम्हें बिल्कुल डरने की जरूरत नहीं है यहां कोई नहीं आने वाला और बस 2 मिनट का ही तो है,,,,,


तू सच में मुझे फंसा देगा,,,,
(अब साधना के पास बोलने के लिए शब्द नहीं थे क्योंकि राजू की हरकत की वजह से उसका भी मन करने लगा था लेकिन उसके पास इतना समय नहीं था कि संजू के लंड को अपनी चुत में ले सके,,, संजू अपनी मौसी के चेहरे के भाव को देखकर समझ गया था कि उसकी मौसी तैयार है इसलिए बिना कुछ बोले वह अपनी मौसी की साड़ी आगे से पकड़कर उसे एक झटके में ऊपर की तरफ उठा दिया और साधना खुद अपनी साड़ी को कमर तक पकड़ कर खड़ी हो गई और संजू एक बार दरवाजे की तरफ देखकर घुटनों के बल बैठ गया और अपने हाथों से अपनी मौसी की पेंटी को खींचकर घुटनों तक ले आया और इसके बाद अपने प्यासे होठों को अपनी मौसी की पनीआई चुत पर रख कर चाटना शुरू कर दिया,,, पल भर में ही साधना मदहोशी में सिहर उठी संजू की जीभ अपना कमाल दिखा रही थी,,, साधना की सांस अटकने लगी थी उसके पेट वाला भाग मादक तरीके से ऊपर नीचे हो रहा था और उत्तेजना के मारे उसकी चुत कचोरी की तरफ फूल गई थी,,,, संजू अच्छी तरह से जानता था कि उसके पास समय ज्यादा नहीं है इसलिए जितना हो सकता था उतना जीभ को अपनी मौसी की चुत की गहराई में डालकर उसकी मलाई को चाट रहा था,,,

ओहहहह संजू तूने तो फिर से मेरे बदन में आग लगा दिया रे,,,,आह हहहहहहह,,,,ऊममममम,,,,,
(साधना मस्त होकर गरमा गरम सिसकारी लेना शुरू कर दी थी संजू का मन तो कर रहा था कि अभी इसी वक्त अपने लंड को निकालकर उसकी चुत में डालकर उसकी चुदाई कर दे,, लेकिन ऐसा करने का समय बिल्कुल भी नहीं था इसलिए वह अपनी जीभ से ही मजा ले रहा था,,, साधना की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी क्योंकि वह अपने चरम सुख के बेहद करीब पहुंच गई थी कि तभी दरवाजा खुलने की आवाज आई और वह दोनों एकदम से सकपका गए,,,। कदमों की आहट किचन के करीब आ रही थी इसलिए दोनों के पास बिल्कुल भी समय नहीं था संजू तो तुरंत उठ कर खड़ा हो गया और कोने में रखी फ्रिज के पास जाकर फ्रिज खोलकर पानी की बोतल निकालने लगा,,, साधना के पास अपनी पेंटी को ऊपर करके पहनने का बिल्कुल भी समय नहीं था इसलिए वह कमर तक पकड़ी हुई अपनी साड़ी को तुरंत नीचे छोड़ दी और धीरे से नाश्ते की प्लेट के पास पहुंचकर नाश्ता लगाने का नाटक करने लगी तब तक,,, मनीषा वहां पर आ गई,,,।


क्या मम्मी कितनी देर लग गई,,,

वो हां,,,, कहना कि संजू को अदरक वाली चाय पसंद है और मैंने अदरक डाली नहीं थी इसलिए वापस अदरक डालकर पका रही थी,,,


हां दीदी बिना अदरक की चाय मुझे बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती,,,(फ्रिज में से पानी की बोतल निकाल कर उसके ढक्कन को खोलते हुए वह बोला)


कोई बात नहीं लेकिन अब तो तैयार हो गई है ना जल्दी से मम्मी हम दोनों को चाय नाश्ता दे दो मुझे इसे कोचिंग क्लास भी दिखाने जाना है,,,


हां तैयार हो गया है,,,, मैं अभी लेकर आती हूं,,,


तुम तैयार कर दो मैं लेकर जाता हूं मौसी,,,।
(संजू की बात सुनकर मनीषा मुस्कुरा कर वापस अपने कमरे की तरफ चली गई और उसके जाते ही दोनों की जान में जान आई,,, साधना संजू की तरफ देखकर थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,)

देख लिया ना अगर तेरी में मनमानी करने दी होती तो आज हम दोनों सच में पकड़े जाते,,,

चलो पकड़े तो नहीं गए ना लेकिन मौसी मजा बहुत आया तुम्हारी चुत बहुत नमकीन है,,,

धत्,,,, अब अपनी बकवास बंद कर और यह चाय नाश्ता लेकर जा,,,

जो आज्ञा मैडम जी,,,

(और इतना कहने के साथ ही संजू चाय का कप और नाश्ते की प्लेट लेकर मनीषा के कमरे में पहुंच गया थोड़ी देर में दोनों नाश्ता करके कोचिंग क्लास देखने के लिए निकल गए,,,)
 
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Ajju Landwalia

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मनीषा की खूबसूरती को संजू पहले दिन ही अपनी आंखों से भांप लिया था उसका दूध जैसा गोरा बदन पहले दिन से ही उसकी आंखों में बस गया था और वह भी पहली बार जिस अवस्था में होने जा रही थी उसे देखकर उसके लौड़े ने ठुनकी मारना शुरू कर दिया था,,, और वह भी संजू की किस्मत इतनी अच्छी थी कि वह पहली बार में ही मनीषा को केवल एक छोटी सी टीशर्ट और पेंटी में देखा था जिसमें मनीषा गजब की कयामत लग रही थी,,, वह तो उस दिन संजू अपनी मौसी को चोदने के इरादे से आया था इसलिए मनीषा के ऊपर ज्यादा ध्यान दिया नहीं था,,, उस दिन से आज जाकर उसे मौका मिला था मनीषा से मुलाकात करने का और अब तो उसकी किस्मत में चार चांद लग गया था क्योंकि वह मनीषा के साथ कोचिंग का क्लास जो शुरू करने जा रहा था इसी सिलसिले में वह‌मनीषा के घर आया था,,,।

संजू मनीषा के बिस्तर पर बैठा हुआ था और मनीषा कुर्सी पर बैठ कर पढ़ाई कर रही थी,,, मनीषा आज संजू को देख कर खुश नजर आ रही थी लेकिन यही मनीषा उस दिन संजू के ऊपर मन ही मन बहुत गुस्सा कर रही थी जब वह उसे पेंट और टीशर्ट में देखा था और अपनी मां पर भी उसे गुस्सा आया था कि किसी को भी उसके कमरे में ले कर चली आती है,,,,, दोनों बैठे हुए थे बिस्तर पर समझी और कुर्सी पर मनीषा बात की शुरुआत कैसे करनी है मनीषा को समझ में नहीं आ रहा था और संजू था कि तिरछी नजरों से मनीषा की खूबसूरती के मादक रस को अपनी आंखों से पी रहा था,,, संजू टी शर्ट में झांकती है उसकी गोलाईयों को तिरछी नजरों से देख कर मन ही मन खुश हो रहा था,,, उसे इतना तो समझ में आ ही गया था कि जब गोडाउन मैं बेहतरीन माल है तो शोरूम आले दर्जे का तो होगा ही होगा,,,, मनीषा ही बात की शुरुआत करते हुए बोली,,,।

और संजू क्या हाल है,,,(किताबों को एक तरफ रखते हुए बोली)

एकदम ठीक है मनीषा दीदी,,,


तुमको मम्मी ने तो सब कुछ बता ही दी होगी,,,


जी दीदी मौसी ने मुझे सब कुछ बता दि‌ है और मैं तैयार हूं इसीलिए तो बात करने के लिए आया था,,,

चलो इस बात की मुझे खुशी है कि तुम तैयार तो हो,,, पढ़ा तो लोगे ना,,,

जी हां दीदी पड़ा लूंगा और वैसे भी अगर नहीं समझ में आएगा तो तुम तो हो ना,,,


हां यह बात सही है जहां पर तुम्हारा काम फंसे वहां पर मुझसे पूछ लेना,,,


शुरू कब से करना है दीदी,,,

कल ही से शाम को,,,।(बालों के लटको अपनी नाजुक ऊगलियों से पकड़ कर उसे अपने कान के पीछे ले जाते हुए बोली और यही अदा,, संजू के तन बदन में आग लगा रही थी,,,)

जी दीदी में पहुंच जाऊंगा,,,,

(इतना सुनते ही मनीषा जोर जोर से हंसने लगी उसके हंसने की वजह को संजू समझ नहीं पा रहा था लेकिन हंसती हुई मनीषा स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा से कम नहीं लग रही थी,,,)

क्या हुआ हंस क्यों रही हो,,,

अरे हंसु नहीं तो और क्या करूं,,,

क्यो,,,?(संजू आश्चर्य जताते हुए बोला)


अरे बुद्धू तुम्हें पता है कि कोचिंग क्लास कहां पर है,,,


नहीं तो,,,


तब कैसे पहुंच जाओगे बताओ,,,,


अरे हां,,,,, कहां पर है कोचिंग क्लास,,,,


अरे बताती हूं,,,, तुम्हें अभी ले चलती हूं थोड़ी देर रुको तो सही,,,,,।(इतना कहने के साथ फिर से हंसने लगी उसकी हंसी संजीव को बहुत ही मनमोहक लग रही थी और हंसते हुए उसके बदन के साथ-साथ उसके दोनों संतरे इस टीशर्ट में उछल रहे थे जिसे देखकर संजू के तन बदन में आग लग रही थी और उसे उछलता हुआ देखकर संजू समझ गया था कि मनीषा टी-शर्ट के अंदर ब्रा नहीं पहनी है जोकि कभी-कभी उसकी दोनों चूचियों की कड़ी निप्पल टी-शर्ट में भाले की नोक की तरह उभर कर नजर आने लगती थी,,,,,, संजू तुरंत ही अपने मन में कल्पना करने लगा कि बिना टीशर्ट की मनीषा की चूचियां कैसी नजर आती होगी,,,, वह मन ही मन मनीषा की सूचियों की तुलना अपनी मौसी की बड़ी-बड़ी चुचियों से करने लगा था जो कि वह जानता था कि मौसी की चूचियां फुटबॉल के साइज की थी और वही मनीषा की चूचियां टेनिस के गेंद से थोड़ी बड़ी बड़ी थी,,, थोड़ी देर में फिर से कमरे में सन्नाटा फैल गया,,, मनीषा अपने कमरे में एक जवान लड़के की उपस्थिति में थोड़ा असहज महसूस कर रही थी और वह भी इसलिए कि ईसी लड़के ने उस दिन उसे केवल टी शर्ट और पेंटी में देख लिया था,,, इसलिए संजू के सामने उसे थोड़ा अजीब लग रहा था,,, वह फिर से बात की शुरुआत करते हुए बोली,,,।)

तुम उस दिन आए थे ना संजू लेकिन मैं तुमसे बात नहीं कर पाई थी,,।

वो हां दीदी उस दिन,,, के लिए मैं थोड़ा शर्मिंदा हूं,,,

क्यों,,,?


वह उस दिन मौसी तुम्हारे कमरे में लेकर आ गई थी ना और तुम केवल पेंटी,,,,,


अरे हां कोई बात नहीं,,,(संजू के मुंह से पेंटी शब्द सुनते ही मनीषा के गोरे गोरे गाल शर्म के मारे लाल होने लगे) तुम जानबूझकर थोड़ी आए थे,,, कोई बात नहीं उस दिन के लिए मेरे मन में कोई गिला शिकवा नहीं है,,,

चलो तब तो ठीक है दीदी उसी वजह से मैं तुम्हारे से मिलने में थोड़ा सा घबरा रहा था कि तुम मुझे क्या बोलोगी क्या समझोगी,,,


अगर तुम्हारे लिए मेरे मन में गिला शिकवा होता तो मैं मम्मी से तुम्हारे लिए कोचिंग क्लास ज्वाइन करने के लिए नहीं कहलाती,,,,,,
(अभी दोनों बात ही कर रहे थे कि किचन में से आवाज आई,,,)

मनीषा चाय तैयार हो गई है,,, ले ले कर जा,,,
(अपनी मां की आवाज सुनते ही मनीषा बोली)

तुम यही बैठो मैं चाय लेकर आती हूं,,,,(इतना कह कर मनीषा कुर्सी पर से उठने वाली थी कि तुरंत संजू बिस्तर पर से उठा और अपना हाथ मनीषा के कंधे पर रखकर उसे हल्के से दबाते हुए उसे बैठने का इशारा करते हुए बोला,,,)

तुम बैठो दीदी मैं लेकर आता हूं,,,


अरे नहीं नहीं मैं लेकर आ रही हूं ना,,,


अरे दीदी मैं कोई मेहमान थोड़ी हूं जो मेरी मौसी का ही घर है ना इसलिए मेरी भी जिम्मेदारी बनती है और वैसे भी तुम मेरी बड़ी दीदी हो तुम मेरे लिए चाय लेकर आओ ही अच्छा थोड़ी लगता है,,, तुम बैठो मैं लेकर आता हूं,,,,।
( इतना कहने के साथ ही संजू मनीषा के कमरे से बाहर निकल गया और मनीषा उसे जाते हुए देखती रह गई,, जिस अदा से उसने उसके कंधे पर रखकर उसे बैठने का इशारा किया था मनीषा पूरी तरह से उसके इस अदा से कायल हो चुकी थी,,, मनीषा पहली बार संजू को गौर से देख रही थी एक जवान लड़की के लिए ऐसा खूबसूरत नौजवान लड़का ही उसका बॉयफ्रेंड बनने के लायक था ऐसा मन में ख्याल आते ही उसके तन बदन में अजीब सी झुर्झुरी सी फैल गई,,, मनीषा संजू के खूबसूरत मासूम चेहरे को देखकर उसके ऊपर मोहित हो चुकी थी वह कुर्सी पर बैठे बैठे मन ही मन मुस्कुरा रही थी और संजू था कि जानबूझकर मनीषा को ही बैठने के लिए बोल कर खुद चाय लेने के लिए गया था ताकि रसोई घर में जाकर वहां अपनी मौसी के साथ थोड़ी मस्ती कर सके,,,,,

मनीषा अपने कमरे में कुर्सी पर बैठकर संजू की मासूमियत के बारे में सोच रही थी वहीं दूसरी तरफ संजू किचन में पहुंच गया था मनीषा की मां के साथ मस्ती करने के लिए किचन में घुसने से पहले अपनी चारों तरफ नजर घुमाकर देखकर तसल्ली कर लेने के बाद वह रसोई घर में प्रवेश किया जहां पर उसकी मां दरवाजे की तरफ पीठ करके प्लेट में नाश्ता लगा रही थी और तुरंत संजू जाकर पीछे से उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया,,, और अपने दोनों हाथों को ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी चुचियों पर रखकर दबाने लगा एकाएक हुए इस हमले से साधना एकदम से चौंक गई लेकिन जब उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसे बाहों में कसने वाला संजू है तो उसकी जान में जान आई लेकिन इस बात से वह घबरा गई कि कहीं कोई देख ना ले,,, इसलिए वह संजू की पकड़ से छूटने का प्रयास करते हुए बोली,,।

छोड़ संजू कोई देख लेगा तो गजब हो जाएगा,,,

अरे मौसी तुम खामखा डरती हो कोई देखने वाला नहीं है मैं पूरी तसल्ली कर लेने के बाद ही तुम्हें इस तरह से पकड़ा हूं ,,,(संजू बोलते हुए लगातार साधना की चूचियों को दबा रहा था,, और अपनी मौसी के इजाजत के बिना ही वह जल्दबाजी दिखाते हुए अपनी मौसी के ब्लाउज के बटन को खोलने लगा था तो साधना उसका हाथ पकड़ते हुए बोली,,,)

पागल हो गया क्या संजू अरे कुछ तो सब्र कर अगर मनीषा ने देख ली तो हम दोनों का जीना मुश्किल हो जाएगा,,,


अरे कुछ नहीं होगा मौसी तुम खामखा कर रही हो,,,,


अरे सच में तू पागल हो गया है रात भर तो लिया है फिर भी तेरा मन नहीं भर रहा है,,,


क्या करूं मौसी तुम्हारे ये खूबसूरत बदन जब भी मेरे करीब रहता है तो मुझे चैन नहीं मिलता,,,(इतना कहते हुए संजू अपनी मौसी के ब्लाउज का एक बटन खोलने में कामयाब हो गया,,, इसलिए साधना उसके हाथ को पकड़कर हटाते हुए अपने ब्लाउज का बटन बंद करते हुए बोली,,)


तू तो मुझे मरवाएगा,,,


मरवाएगा नहीं,,, बल्कि तुम्हारी मारूंगा,,,


किसी और समय मार लेना,,, अभी मैं तुझे कुछ नहीं करने दूंगी,,,


ऐसा गजब मत करो मौसी मेरा इस समय तुम्हें चोदने का बहुत मन कर रहा है,,,(साधना की गांड पर अपने लंड को धंसाते हुए बोला,,, संजू की हरकत से साधना के तन बदन में भी चुदास की लहर दौड़ रही थी उसकी भी चुत गीली होने लगी थी,,,, फिर भी अपने आप पर काबू रखते हुए वह बोली,,,)

नहीं अभी बिल्कुल भी नहीं,,, बाद में कर लेना,,,


नहीं मौसी ऐसा कसम मत करो,,,(इतना कहने के साथ ही संजू फुर्ति दिखाता हुआ आगे से अपनी मौसी की साड़ी को ऊपर की तरफ उठाते हुए,,, उसकी पेंटी में हाथ डालकर उसकी चुत को दबोचने लगा,,,,)

आहहह क्या कर रहा है रे,,,


अब तो मान जाओ मौसी तुम्हारी चुत भी पानी छोड़ रही है,,,

इस तरह की हरकत करेगा तो पानी तो छोड़ेगी ही,,, चल हट मनीषा किसी भी वक्त आ जाएगी बहुत देर हो गई है,,,

(संजू समझ गया था कि इस समय उसकी मौसी मानने वाली बिल्कुल भी नहीं है इसलिए अपने मन को ही मनाने के लिए वह बोला,,,)

अच्छा कोई बात नहीं मौसी चोदने ना सही लेकिन एक बार अपनी चुत को चाटने तो दो-चार से पहले तुम्हारी चुत का स्वाद मिल जाएगा तो मजा आ जाएगा,,,

अब देख संजू तेरी ये जीद अच्छी नहीं है हम दोनों का भंडा फुट सकता है,,,(साधना चिंता व्यक्त करते हुए बोली )


नहीं नहीं मौसी ऐसा कुछ भी नहीं होगा जैसा तुम सोच रही हो वैसा कुछ भी नहीं होगा तुम्हें बिल्कुल डरने की जरूरत नहीं है यहां कोई नहीं आने वाला और बस 2 मिनट का ही तो है,,,,,


तू सच में मुझे फंसा देगा,,,,
(अब साधना के पास बोलने के लिए शब्द नहीं थे क्योंकि राजू की हरकत की वजह से उसका भी मन करने लगा था लेकिन उसके पास इतना समय नहीं था कि संजू के लंड को अपनी चुत में ले सके,,, संजू अपनी मौसी के चेहरे के भाव को देखकर समझ गया था कि उसकी मौसी तैयार है इसलिए बिना कुछ बोले वह अपनी मौसी की साड़ी आगे से पकड़कर उसे एक झटके में ऊपर की तरफ उठा दिया और साधना खुद अपनी साड़ी को कमर तक पकड़ कर खड़ी हो गई और संजू एक बार दरवाजे की तरफ देखकर घुटनों के बल बैठ गया और अपने हाथों से अपनी मौसी की पेंटी को खींचकर घुटनों तक ले आया और इसके बाद अपने प्यासे होठों को अपनी मौसी की पनीआई चुत पर रख कर चाटना शुरू कर दिया,,, पल भर में ही साधना मदहोशी में सिहर उठी संजू की जीभ अपना कमाल दिखा रही थी,,, साधना की सांस अटकने लगी थी उसके पेट वाला भाग मादक तरीके से ऊपर नीचे हो रहा था और उत्तेजना के मारे उसकी चुत कचोरी की तरफ फूल गई थी,,,, संजू अच्छी तरह से जानता था कि उसके पास समय ज्यादा नहीं है इसलिए जितना हो सकता था उतना जीभ को अपनी मौसी की चुत की गहराई में डालकर उसकी मलाई को चाट रहा था,,,

ओहहहह संजू तूने तो फिर से मेरे बदन में आग लगा दिया रे,,,,आह हहहहहहह,,,,ऊममममम,,,,,
(साधना मस्त होकर गरमा गरम सिसकारी लेना शुरू कर दी थी संजू का मन तो कर रहा था कि अभी इसी वक्त अपने लंड को निकालकर उसकी चुत में डालकर उसकी चुदाई कर दे,, लेकिन ऐसा करने का समय बिल्कुल भी नहीं था इसलिए वह अपनी जीभ से ही मजा ले रहा था,,, साधना की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी क्योंकि वह अपने चरम सुख के बेहद करीब पहुंच गई थी कि तभी दरवाजा खुलने की आवाज आई और वह दोनों एकदम से सकपका गए,,,। कदमों की आहट किचन के करीब आ रही थी इसलिए दोनों के पास बिल्कुल भी समय नहीं था संजू तो तुरंत उठ कर खड़ा हो गया और कोने में रखी फ्रिज के पास जाकर फ्रिज खोलकर पानी की बोतल निकालने लगा,,, साधना के पास अपनी पेंटी को ऊपर करके पहनने का बिल्कुल भी समय नहीं था इसलिए वह कमर तक पकड़ी हुई अपनी साड़ी को तुरंत नीचे छोड़ दी और धीरे से नाश्ते की प्लेट के पास पहुंचकर नाश्ता लगाने का नाटक करने लगी तब तक,,, मनीषा वहां पर आ गई,,,।


क्या मम्मी कितनी देर लग गई,,,

वो हां,,,, कहना कि संजू को अदरक वाली चाय पसंद है और मैंने अदरक डाली नहीं थी इसलिए वापस अदरक डालकर पका रही थी,,,


हां दीदी बिना अदरक की चाय मुझे बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती,,,(फ्रिज में से पानी की बोतल निकाल कर उसके ढक्कन को खोलते हुए वह बोला)


कोई बात नहीं लेकिन अब तो तैयार हो गई है ना जल्दी से मम्मी हम दोनों को चाय नाश्ता दे दो मुझे इसे कोचिंग क्लास भी दिखाने जाना है,,,


हां तैयार हो गया है,,,, मैं अभी लेकर आती हूं,,,


तुम तैयार कर दो मैं लेकर जाता हूं मौसी,,,।
(संजू की बात सुनकर मनीषा मुस्कुरा कर वापस अपने कमरे की तरफ चली गई और उसके जाते ही दोनों की जान में जान आई,,, साधना संजू की तरफ देखकर थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,)

देख लिया ना अगर तेरी में मनमानी करने दी होती तो आज हम दोनों सच में पकड़े जाते,,,

चलो पकड़े तो नहीं गए ना लेकिन मौसी मजा बहुत आया तुम्हारी चुत बहुत नमकीन है,,,

धत्,,,, अब अपनी बकवास बंद कर और यह चाय नाश्ता लेकर जा,,,

जो आज्ञा मैडम जी,,,

(और इतना कहने के साथ ही संजू चाय का कप और नाश्ते की प्लेट लेकर मनीषा के कमरे में पहुंच गया थोड़ी देर में दोनों नाश्ता करके कोचिंग क्लास देखने के लिए निकल गए,,,)

Shandar update Rohnny Bhai,

Ab Manisha ka bhi number lagne wala he.......lekin Sanju ki daring din ba din abdhti ja rahie he apnu mausi ke sath...

Maja aa gaya Bhai, keep posting
 

Kammy sidhu

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मनीषा की खूबसूरती को संजू पहले दिन ही अपनी आंखों से भांप लिया था उसका दूध जैसा गोरा बदन पहले दिन से ही उसकी आंखों में बस गया था और वह भी पहली बार जिस अवस्था में होने जा रही थी उसे देखकर उसके लौड़े ने ठुनकी मारना शुरू कर दिया था,,, और वह भी संजू की किस्मत इतनी अच्छी थी कि वह पहली बार में ही मनीषा को केवल एक छोटी सी टीशर्ट और पेंटी में देखा था जिसमें मनीषा गजब की कयामत लग रही थी,,, वह तो उस दिन संजू अपनी मौसी को चोदने के इरादे से आया था इसलिए मनीषा के ऊपर ज्यादा ध्यान दिया नहीं था,,, उस दिन से आज जाकर उसे मौका मिला था मनीषा से मुलाकात करने का और अब तो उसकी किस्मत में चार चांद लग गया था क्योंकि वह मनीषा के साथ कोचिंग का क्लास जो शुरू करने जा रहा था इसी सिलसिले में वह‌मनीषा के घर आया था,,,।

संजू मनीषा के बिस्तर पर बैठा हुआ था और मनीषा कुर्सी पर बैठ कर पढ़ाई कर रही थी,,, मनीषा आज संजू को देख कर खुश नजर आ रही थी लेकिन यही मनीषा उस दिन संजू के ऊपर मन ही मन बहुत गुस्सा कर रही थी जब वह उसे पेंट और टीशर्ट में देखा था और अपनी मां पर भी उसे गुस्सा आया था कि किसी को भी उसके कमरे में ले कर चली आती है,,,,, दोनों बैठे हुए थे बिस्तर पर समझी और कुर्सी पर मनीषा बात की शुरुआत कैसे करनी है मनीषा को समझ में नहीं आ रहा था और संजू था कि तिरछी नजरों से मनीषा की खूबसूरती के मादक रस को अपनी आंखों से पी रहा था,,, संजू टी शर्ट में झांकती है उसकी गोलाईयों को तिरछी नजरों से देख कर मन ही मन खुश हो रहा था,,, उसे इतना तो समझ में आ ही गया था कि जब गोडाउन मैं बेहतरीन माल है तो शोरूम आले दर्जे का तो होगा ही होगा,,,, मनीषा ही बात की शुरुआत करते हुए बोली,,,।

और संजू क्या हाल है,,,(किताबों को एक तरफ रखते हुए बोली)

एकदम ठीक है मनीषा दीदी,,,


तुमको मम्मी ने तो सब कुछ बता ही दी होगी,,,


जी दीदी मौसी ने मुझे सब कुछ बता दि‌ है और मैं तैयार हूं इसीलिए तो बात करने के लिए आया था,,,

चलो इस बात की मुझे खुशी है कि तुम तैयार तो हो,,, पढ़ा तो लोगे ना,,,

जी हां दीदी पड़ा लूंगा और वैसे भी अगर नहीं समझ में आएगा तो तुम तो हो ना,,,


हां यह बात सही है जहां पर तुम्हारा काम फंसे वहां पर मुझसे पूछ लेना,,,


शुरू कब से करना है दीदी,,,

कल ही से शाम को,,,।(बालों के लटको अपनी नाजुक ऊगलियों से पकड़ कर उसे अपने कान के पीछे ले जाते हुए बोली और यही अदा,, संजू के तन बदन में आग लगा रही थी,,,)

जी दीदी में पहुंच जाऊंगा,,,,

(इतना सुनते ही मनीषा जोर जोर से हंसने लगी उसके हंसने की वजह को संजू समझ नहीं पा रहा था लेकिन हंसती हुई मनीषा स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा से कम नहीं लग रही थी,,,)

क्या हुआ हंस क्यों रही हो,,,

अरे हंसु नहीं तो और क्या करूं,,,

क्यो,,,?(संजू आश्चर्य जताते हुए बोला)


अरे बुद्धू तुम्हें पता है कि कोचिंग क्लास कहां पर है,,,


नहीं तो,,,


तब कैसे पहुंच जाओगे बताओ,,,,


अरे हां,,,,, कहां पर है कोचिंग क्लास,,,,


अरे बताती हूं,,,, तुम्हें अभी ले चलती हूं थोड़ी देर रुको तो सही,,,,,।(इतना कहने के साथ फिर से हंसने लगी उसकी हंसी संजीव को बहुत ही मनमोहक लग रही थी और हंसते हुए उसके बदन के साथ-साथ उसके दोनों संतरे इस टीशर्ट में उछल रहे थे जिसे देखकर संजू के तन बदन में आग लग रही थी और उसे उछलता हुआ देखकर संजू समझ गया था कि मनीषा टी-शर्ट के अंदर ब्रा नहीं पहनी है जोकि कभी-कभी उसकी दोनों चूचियों की कड़ी निप्पल टी-शर्ट में भाले की नोक की तरह उभर कर नजर आने लगती थी,,,,,, संजू तुरंत ही अपने मन में कल्पना करने लगा कि बिना टीशर्ट की मनीषा की चूचियां कैसी नजर आती होगी,,,, वह मन ही मन मनीषा की सूचियों की तुलना अपनी मौसी की बड़ी-बड़ी चुचियों से करने लगा था जो कि वह जानता था कि मौसी की चूचियां फुटबॉल के साइज की थी और वही मनीषा की चूचियां टेनिस के गेंद से थोड़ी बड़ी बड़ी थी,,, थोड़ी देर में फिर से कमरे में सन्नाटा फैल गया,,, मनीषा अपने कमरे में एक जवान लड़के की उपस्थिति में थोड़ा असहज महसूस कर रही थी और वह भी इसलिए कि ईसी लड़के ने उस दिन उसे केवल टी शर्ट और पेंटी में देख लिया था,,, इसलिए संजू के सामने उसे थोड़ा अजीब लग रहा था,,, वह फिर से बात की शुरुआत करते हुए बोली,,,।)

तुम उस दिन आए थे ना संजू लेकिन मैं तुमसे बात नहीं कर पाई थी,,।

वो हां दीदी उस दिन,,, के लिए मैं थोड़ा शर्मिंदा हूं,,,

क्यों,,,?


वह उस दिन मौसी तुम्हारे कमरे में लेकर आ गई थी ना और तुम केवल पेंटी,,,,,


अरे हां कोई बात नहीं,,,(संजू के मुंह से पेंटी शब्द सुनते ही मनीषा के गोरे गोरे गाल शर्म के मारे लाल होने लगे) तुम जानबूझकर थोड़ी आए थे,,, कोई बात नहीं उस दिन के लिए मेरे मन में कोई गिला शिकवा नहीं है,,,

चलो तब तो ठीक है दीदी उसी वजह से मैं तुम्हारे से मिलने में थोड़ा सा घबरा रहा था कि तुम मुझे क्या बोलोगी क्या समझोगी,,,


अगर तुम्हारे लिए मेरे मन में गिला शिकवा होता तो मैं मम्मी से तुम्हारे लिए कोचिंग क्लास ज्वाइन करने के लिए नहीं कहलाती,,,,,,
(अभी दोनों बात ही कर रहे थे कि किचन में से आवाज आई,,,)

मनीषा चाय तैयार हो गई है,,, ले ले कर जा,,,
(अपनी मां की आवाज सुनते ही मनीषा बोली)

तुम यही बैठो मैं चाय लेकर आती हूं,,,,(इतना कह कर मनीषा कुर्सी पर से उठने वाली थी कि तुरंत संजू बिस्तर पर से उठा और अपना हाथ मनीषा के कंधे पर रखकर उसे हल्के से दबाते हुए उसे बैठने का इशारा करते हुए बोला,,,)

तुम बैठो दीदी मैं लेकर आता हूं,,,


अरे नहीं नहीं मैं लेकर आ रही हूं ना,,,


अरे दीदी मैं कोई मेहमान थोड़ी हूं जो मेरी मौसी का ही घर है ना इसलिए मेरी भी जिम्मेदारी बनती है और वैसे भी तुम मेरी बड़ी दीदी हो तुम मेरे लिए चाय लेकर आओ ही अच्छा थोड़ी लगता है,,, तुम बैठो मैं लेकर आता हूं,,,,।
( इतना कहने के साथ ही संजू मनीषा के कमरे से बाहर निकल गया और मनीषा उसे जाते हुए देखती रह गई,, जिस अदा से उसने उसके कंधे पर रखकर उसे बैठने का इशारा किया था मनीषा पूरी तरह से उसके इस अदा से कायल हो चुकी थी,,, मनीषा पहली बार संजू को गौर से देख रही थी एक जवान लड़की के लिए ऐसा खूबसूरत नौजवान लड़का ही उसका बॉयफ्रेंड बनने के लायक था ऐसा मन में ख्याल आते ही उसके तन बदन में अजीब सी झुर्झुरी सी फैल गई,,, मनीषा संजू के खूबसूरत मासूम चेहरे को देखकर उसके ऊपर मोहित हो चुकी थी वह कुर्सी पर बैठे बैठे मन ही मन मुस्कुरा रही थी और संजू था कि जानबूझकर मनीषा को ही बैठने के लिए बोल कर खुद चाय लेने के लिए गया था ताकि रसोई घर में जाकर वहां अपनी मौसी के साथ थोड़ी मस्ती कर सके,,,,,

मनीषा अपने कमरे में कुर्सी पर बैठकर संजू की मासूमियत के बारे में सोच रही थी वहीं दूसरी तरफ संजू किचन में पहुंच गया था मनीषा की मां के साथ मस्ती करने के लिए किचन में घुसने से पहले अपनी चारों तरफ नजर घुमाकर देखकर तसल्ली कर लेने के बाद वह रसोई घर में प्रवेश किया जहां पर उसकी मां दरवाजे की तरफ पीठ करके प्लेट में नाश्ता लगा रही थी और तुरंत संजू जाकर पीछे से उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया,,, और अपने दोनों हाथों को ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी चुचियों पर रखकर दबाने लगा एकाएक हुए इस हमले से साधना एकदम से चौंक गई लेकिन जब उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसे बाहों में कसने वाला संजू है तो उसकी जान में जान आई लेकिन इस बात से वह घबरा गई कि कहीं कोई देख ना ले,,, इसलिए वह संजू की पकड़ से छूटने का प्रयास करते हुए बोली,,।

छोड़ संजू कोई देख लेगा तो गजब हो जाएगा,,,

अरे मौसी तुम खामखा डरती हो कोई देखने वाला नहीं है मैं पूरी तसल्ली कर लेने के बाद ही तुम्हें इस तरह से पकड़ा हूं ,,,(संजू बोलते हुए लगातार साधना की चूचियों को दबा रहा था,, और अपनी मौसी के इजाजत के बिना ही वह जल्दबाजी दिखाते हुए अपनी मौसी के ब्लाउज के बटन को खोलने लगा था तो साधना उसका हाथ पकड़ते हुए बोली,,,)

पागल हो गया क्या संजू अरे कुछ तो सब्र कर अगर मनीषा ने देख ली तो हम दोनों का जीना मुश्किल हो जाएगा,,,


अरे कुछ नहीं होगा मौसी तुम खामखा कर रही हो,,,,


अरे सच में तू पागल हो गया है रात भर तो लिया है फिर भी तेरा मन नहीं भर रहा है,,,


क्या करूं मौसी तुम्हारे ये खूबसूरत बदन जब भी मेरे करीब रहता है तो मुझे चैन नहीं मिलता,,,(इतना कहते हुए संजू अपनी मौसी के ब्लाउज का एक बटन खोलने में कामयाब हो गया,,, इसलिए साधना उसके हाथ को पकड़कर हटाते हुए अपने ब्लाउज का बटन बंद करते हुए बोली,,)


तू तो मुझे मरवाएगा,,,


मरवाएगा नहीं,,, बल्कि तुम्हारी मारूंगा,,,


किसी और समय मार लेना,,, अभी मैं तुझे कुछ नहीं करने दूंगी,,,


ऐसा गजब मत करो मौसी मेरा इस समय तुम्हें चोदने का बहुत मन कर रहा है,,,(साधना की गांड पर अपने लंड को धंसाते हुए बोला,,, संजू की हरकत से साधना के तन बदन में भी चुदास की लहर दौड़ रही थी उसकी भी चुत गीली होने लगी थी,,,, फिर भी अपने आप पर काबू रखते हुए वह बोली,,,)

नहीं अभी बिल्कुल भी नहीं,,, बाद में कर लेना,,,


नहीं मौसी ऐसा कसम मत करो,,,(इतना कहने के साथ ही संजू फुर्ति दिखाता हुआ आगे से अपनी मौसी की साड़ी को ऊपर की तरफ उठाते हुए,,, उसकी पेंटी में हाथ डालकर उसकी चुत को दबोचने लगा,,,,)

आहहह क्या कर रहा है रे,,,


अब तो मान जाओ मौसी तुम्हारी चुत भी पानी छोड़ रही है,,,

इस तरह की हरकत करेगा तो पानी तो छोड़ेगी ही,,, चल हट मनीषा किसी भी वक्त आ जाएगी बहुत देर हो गई है,,,

(संजू समझ गया था कि इस समय उसकी मौसी मानने वाली बिल्कुल भी नहीं है इसलिए अपने मन को ही मनाने के लिए वह बोला,,,)

अच्छा कोई बात नहीं मौसी चोदने ना सही लेकिन एक बार अपनी चुत को चाटने तो दो-चार से पहले तुम्हारी चुत का स्वाद मिल जाएगा तो मजा आ जाएगा,,,

अब देख संजू तेरी ये जीद अच्छी नहीं है हम दोनों का भंडा फुट सकता है,,,(साधना चिंता व्यक्त करते हुए बोली )


नहीं नहीं मौसी ऐसा कुछ भी नहीं होगा जैसा तुम सोच रही हो वैसा कुछ भी नहीं होगा तुम्हें बिल्कुल डरने की जरूरत नहीं है यहां कोई नहीं आने वाला और बस 2 मिनट का ही तो है,,,,,


तू सच में मुझे फंसा देगा,,,,
(अब साधना के पास बोलने के लिए शब्द नहीं थे क्योंकि राजू की हरकत की वजह से उसका भी मन करने लगा था लेकिन उसके पास इतना समय नहीं था कि संजू के लंड को अपनी चुत में ले सके,,, संजू अपनी मौसी के चेहरे के भाव को देखकर समझ गया था कि उसकी मौसी तैयार है इसलिए बिना कुछ बोले वह अपनी मौसी की साड़ी आगे से पकड़कर उसे एक झटके में ऊपर की तरफ उठा दिया और साधना खुद अपनी साड़ी को कमर तक पकड़ कर खड़ी हो गई और संजू एक बार दरवाजे की तरफ देखकर घुटनों के बल बैठ गया और अपने हाथों से अपनी मौसी की पेंटी को खींचकर घुटनों तक ले आया और इसके बाद अपने प्यासे होठों को अपनी मौसी की पनीआई चुत पर रख कर चाटना शुरू कर दिया,,, पल भर में ही साधना मदहोशी में सिहर उठी संजू की जीभ अपना कमाल दिखा रही थी,,, साधना की सांस अटकने लगी थी उसके पेट वाला भाग मादक तरीके से ऊपर नीचे हो रहा था और उत्तेजना के मारे उसकी चुत कचोरी की तरफ फूल गई थी,,,, संजू अच्छी तरह से जानता था कि उसके पास समय ज्यादा नहीं है इसलिए जितना हो सकता था उतना जीभ को अपनी मौसी की चुत की गहराई में डालकर उसकी मलाई को चाट रहा था,,,

ओहहहह संजू तूने तो फिर से मेरे बदन में आग लगा दिया रे,,,,आह हहहहहहह,,,,ऊममममम,,,,,
(साधना मस्त होकर गरमा गरम सिसकारी लेना शुरू कर दी थी संजू का मन तो कर रहा था कि अभी इसी वक्त अपने लंड को निकालकर उसकी चुत में डालकर उसकी चुदाई कर दे,, लेकिन ऐसा करने का समय बिल्कुल भी नहीं था इसलिए वह अपनी जीभ से ही मजा ले रहा था,,, साधना की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी क्योंकि वह अपने चरम सुख के बेहद करीब पहुंच गई थी कि तभी दरवाजा खुलने की आवाज आई और वह दोनों एकदम से सकपका गए,,,। कदमों की आहट किचन के करीब आ रही थी इसलिए दोनों के पास बिल्कुल भी समय नहीं था संजू तो तुरंत उठ कर खड़ा हो गया और कोने में रखी फ्रिज के पास जाकर फ्रिज खोलकर पानी की बोतल निकालने लगा,,, साधना के पास अपनी पेंटी को ऊपर करके पहनने का बिल्कुल भी समय नहीं था इसलिए वह कमर तक पकड़ी हुई अपनी साड़ी को तुरंत नीचे छोड़ दी और धीरे से नाश्ते की प्लेट के पास पहुंचकर नाश्ता लगाने का नाटक करने लगी तब तक,,, मनीषा वहां पर आ गई,,,।


क्या मम्मी कितनी देर लग गई,,,

वो हां,,,, कहना कि संजू को अदरक वाली चाय पसंद है और मैंने अदरक डाली नहीं थी इसलिए वापस अदरक डालकर पका रही थी,,,


हां दीदी बिना अदरक की चाय मुझे बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती,,,(फ्रिज में से पानी की बोतल निकाल कर उसके ढक्कन को खोलते हुए वह बोला)


कोई बात नहीं लेकिन अब तो तैयार हो गई है ना जल्दी से मम्मी हम दोनों को चाय नाश्ता दे दो मुझे इसे कोचिंग क्लास भी दिखाने जाना है,,,


हां तैयार हो गया है,,,, मैं अभी लेकर आती हूं,,,


तुम तैयार कर दो मैं लेकर जाता हूं मौसी,,,।
(संजू की बात सुनकर मनीषा मुस्कुरा कर वापस अपने कमरे की तरफ चली गई और उसके जाते ही दोनों की जान में जान आई,,, साधना संजू की तरफ देखकर थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,)

देख लिया ना अगर तेरी में मनमानी करने दी होती तो आज हम दोनों सच में पकड़े जाते,,,

चलो पकड़े तो नहीं गए ना लेकिन मौसी मजा बहुत आया तुम्हारी चुत बहुत नमकीन है,,,

धत्,,,, अब अपनी बकवास बंद कर और यह चाय नाश्ता लेकर जा,,,

जो आज्ञा मैडम जी,,,

(और इतना कहने के साथ ही संजू चाय का कप और नाश्ते की प्लेट लेकर मनीषा के कमरे में पहुंच गया थोड़ी देर में दोनों नाश्ता करके कोचिंग क्लास देखने के लिए निकल गए,,,)
Wah bhai maja aa gaya too much romantic update bro and continue story
 

sunoanuj

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Bahut hi behtarin updates…
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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मनीषा की खूबसूरती को संजू पहले दिन ही अपनी आंखों से भांप लिया था उसका दूध जैसा गोरा बदन पहले दिन से ही उसकी आंखों में बस गया था और वह भी पहली बार जिस अवस्था में होने जा रही थी उसे देखकर उसके लौड़े ने ठुनकी मारना शुरू कर दिया था,,, और वह भी संजू की किस्मत इतनी अच्छी थी कि वह पहली बार में ही मनीषा को केवल एक छोटी सी टीशर्ट और पेंटी में देखा था जिसमें मनीषा गजब की कयामत लग रही थी,,, वह तो उस दिन संजू अपनी मौसी को चोदने के इरादे से आया था इसलिए मनीषा के ऊपर ज्यादा ध्यान दिया नहीं था,,, उस दिन से आज जाकर उसे मौका मिला था मनीषा से मुलाकात करने का और अब तो उसकी किस्मत में चार चांद लग गया था क्योंकि वह मनीषा के साथ कोचिंग का क्लास जो शुरू करने जा रहा था इसी सिलसिले में वह‌मनीषा के घर आया था,,,।

संजू मनीषा के बिस्तर पर बैठा हुआ था और मनीषा कुर्सी पर बैठ कर पढ़ाई कर रही थी,,, मनीषा आज संजू को देख कर खुश नजर आ रही थी लेकिन यही मनीषा उस दिन संजू के ऊपर मन ही मन बहुत गुस्सा कर रही थी जब वह उसे पेंट और टीशर्ट में देखा था और अपनी मां पर भी उसे गुस्सा आया था कि किसी को भी उसके कमरे में ले कर चली आती है,,,,, दोनों बैठे हुए थे बिस्तर पर समझी और कुर्सी पर मनीषा बात की शुरुआत कैसे करनी है मनीषा को समझ में नहीं आ रहा था और संजू था कि तिरछी नजरों से मनीषा की खूबसूरती के मादक रस को अपनी आंखों से पी रहा था,,, संजू टी शर्ट में झांकती है उसकी गोलाईयों को तिरछी नजरों से देख कर मन ही मन खुश हो रहा था,,, उसे इतना तो समझ में आ ही गया था कि जब गोडाउन मैं बेहतरीन माल है तो शोरूम आले दर्जे का तो होगा ही होगा,,,, मनीषा ही बात की शुरुआत करते हुए बोली,,,।

और संजू क्या हाल है,,,(किताबों को एक तरफ रखते हुए बोली)

एकदम ठीक है मनीषा दीदी,,,


तुमको मम्मी ने तो सब कुछ बता ही दी होगी,,,


जी दीदी मौसी ने मुझे सब कुछ बता दि‌ है और मैं तैयार हूं इसीलिए तो बात करने के लिए आया था,,,

चलो इस बात की मुझे खुशी है कि तुम तैयार तो हो,,, पढ़ा तो लोगे ना,,,

जी हां दीदी पड़ा लूंगा और वैसे भी अगर नहीं समझ में आएगा तो तुम तो हो ना,,,


हां यह बात सही है जहां पर तुम्हारा काम फंसे वहां पर मुझसे पूछ लेना,,,


शुरू कब से करना है दीदी,,,

कल ही से शाम को,,,।(बालों के लटको अपनी नाजुक ऊगलियों से पकड़ कर उसे अपने कान के पीछे ले जाते हुए बोली और यही अदा,, संजू के तन बदन में आग लगा रही थी,,,)

जी दीदी में पहुंच जाऊंगा,,,,

(इतना सुनते ही मनीषा जोर जोर से हंसने लगी उसके हंसने की वजह को संजू समझ नहीं पा रहा था लेकिन हंसती हुई मनीषा स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा से कम नहीं लग रही थी,,,)

क्या हुआ हंस क्यों रही हो,,,

अरे हंसु नहीं तो और क्या करूं,,,

क्यो,,,?(संजू आश्चर्य जताते हुए बोला)


अरे बुद्धू तुम्हें पता है कि कोचिंग क्लास कहां पर है,,,


नहीं तो,,,


तब कैसे पहुंच जाओगे बताओ,,,,


अरे हां,,,,, कहां पर है कोचिंग क्लास,,,,


अरे बताती हूं,,,, तुम्हें अभी ले चलती हूं थोड़ी देर रुको तो सही,,,,,।(इतना कहने के साथ फिर से हंसने लगी उसकी हंसी संजीव को बहुत ही मनमोहक लग रही थी और हंसते हुए उसके बदन के साथ-साथ उसके दोनों संतरे इस टीशर्ट में उछल रहे थे जिसे देखकर संजू के तन बदन में आग लग रही थी और उसे उछलता हुआ देखकर संजू समझ गया था कि मनीषा टी-शर्ट के अंदर ब्रा नहीं पहनी है जोकि कभी-कभी उसकी दोनों चूचियों की कड़ी निप्पल टी-शर्ट में भाले की नोक की तरह उभर कर नजर आने लगती थी,,,,,, संजू तुरंत ही अपने मन में कल्पना करने लगा कि बिना टीशर्ट की मनीषा की चूचियां कैसी नजर आती होगी,,,, वह मन ही मन मनीषा की सूचियों की तुलना अपनी मौसी की बड़ी-बड़ी चुचियों से करने लगा था जो कि वह जानता था कि मौसी की चूचियां फुटबॉल के साइज की थी और वही मनीषा की चूचियां टेनिस के गेंद से थोड़ी बड़ी बड़ी थी,,, थोड़ी देर में फिर से कमरे में सन्नाटा फैल गया,,, मनीषा अपने कमरे में एक जवान लड़के की उपस्थिति में थोड़ा असहज महसूस कर रही थी और वह भी इसलिए कि ईसी लड़के ने उस दिन उसे केवल टी शर्ट और पेंटी में देख लिया था,,, इसलिए संजू के सामने उसे थोड़ा अजीब लग रहा था,,, वह फिर से बात की शुरुआत करते हुए बोली,,,।)

तुम उस दिन आए थे ना संजू लेकिन मैं तुमसे बात नहीं कर पाई थी,,।

वो हां दीदी उस दिन,,, के लिए मैं थोड़ा शर्मिंदा हूं,,,

क्यों,,,?


वह उस दिन मौसी तुम्हारे कमरे में लेकर आ गई थी ना और तुम केवल पेंटी,,,,,


अरे हां कोई बात नहीं,,,(संजू के मुंह से पेंटी शब्द सुनते ही मनीषा के गोरे गोरे गाल शर्म के मारे लाल होने लगे) तुम जानबूझकर थोड़ी आए थे,,, कोई बात नहीं उस दिन के लिए मेरे मन में कोई गिला शिकवा नहीं है,,,

चलो तब तो ठीक है दीदी उसी वजह से मैं तुम्हारे से मिलने में थोड़ा सा घबरा रहा था कि तुम मुझे क्या बोलोगी क्या समझोगी,,,


अगर तुम्हारे लिए मेरे मन में गिला शिकवा होता तो मैं मम्मी से तुम्हारे लिए कोचिंग क्लास ज्वाइन करने के लिए नहीं कहलाती,,,,,,
(अभी दोनों बात ही कर रहे थे कि किचन में से आवाज आई,,,)

मनीषा चाय तैयार हो गई है,,, ले ले कर जा,,,
(अपनी मां की आवाज सुनते ही मनीषा बोली)

तुम यही बैठो मैं चाय लेकर आती हूं,,,,(इतना कह कर मनीषा कुर्सी पर से उठने वाली थी कि तुरंत संजू बिस्तर पर से उठा और अपना हाथ मनीषा के कंधे पर रखकर उसे हल्के से दबाते हुए उसे बैठने का इशारा करते हुए बोला,,,)

तुम बैठो दीदी मैं लेकर आता हूं,,,


अरे नहीं नहीं मैं लेकर आ रही हूं ना,,,


अरे दीदी मैं कोई मेहमान थोड़ी हूं जो मेरी मौसी का ही घर है ना इसलिए मेरी भी जिम्मेदारी बनती है और वैसे भी तुम मेरी बड़ी दीदी हो तुम मेरे लिए चाय लेकर आओ ही अच्छा थोड़ी लगता है,,, तुम बैठो मैं लेकर आता हूं,,,,।
( इतना कहने के साथ ही संजू मनीषा के कमरे से बाहर निकल गया और मनीषा उसे जाते हुए देखती रह गई,, जिस अदा से उसने उसके कंधे पर रखकर उसे बैठने का इशारा किया था मनीषा पूरी तरह से उसके इस अदा से कायल हो चुकी थी,,, मनीषा पहली बार संजू को गौर से देख रही थी एक जवान लड़की के लिए ऐसा खूबसूरत नौजवान लड़का ही उसका बॉयफ्रेंड बनने के लायक था ऐसा मन में ख्याल आते ही उसके तन बदन में अजीब सी झुर्झुरी सी फैल गई,,, मनीषा संजू के खूबसूरत मासूम चेहरे को देखकर उसके ऊपर मोहित हो चुकी थी वह कुर्सी पर बैठे बैठे मन ही मन मुस्कुरा रही थी और संजू था कि जानबूझकर मनीषा को ही बैठने के लिए बोल कर खुद चाय लेने के लिए गया था ताकि रसोई घर में जाकर वहां अपनी मौसी के साथ थोड़ी मस्ती कर सके,,,,,

मनीषा अपने कमरे में कुर्सी पर बैठकर संजू की मासूमियत के बारे में सोच रही थी वहीं दूसरी तरफ संजू किचन में पहुंच गया था मनीषा की मां के साथ मस्ती करने के लिए किचन में घुसने से पहले अपनी चारों तरफ नजर घुमाकर देखकर तसल्ली कर लेने के बाद वह रसोई घर में प्रवेश किया जहां पर उसकी मां दरवाजे की तरफ पीठ करके प्लेट में नाश्ता लगा रही थी और तुरंत संजू जाकर पीछे से उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया,,, और अपने दोनों हाथों को ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी चुचियों पर रखकर दबाने लगा एकाएक हुए इस हमले से साधना एकदम से चौंक गई लेकिन जब उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसे बाहों में कसने वाला संजू है तो उसकी जान में जान आई लेकिन इस बात से वह घबरा गई कि कहीं कोई देख ना ले,,, इसलिए वह संजू की पकड़ से छूटने का प्रयास करते हुए बोली,,।

छोड़ संजू कोई देख लेगा तो गजब हो जाएगा,,,

अरे मौसी तुम खामखा डरती हो कोई देखने वाला नहीं है मैं पूरी तसल्ली कर लेने के बाद ही तुम्हें इस तरह से पकड़ा हूं ,,,(संजू बोलते हुए लगातार साधना की चूचियों को दबा रहा था,, और अपनी मौसी के इजाजत के बिना ही वह जल्दबाजी दिखाते हुए अपनी मौसी के ब्लाउज के बटन को खोलने लगा था तो साधना उसका हाथ पकड़ते हुए बोली,,,)

पागल हो गया क्या संजू अरे कुछ तो सब्र कर अगर मनीषा ने देख ली तो हम दोनों का जीना मुश्किल हो जाएगा,,,


अरे कुछ नहीं होगा मौसी तुम खामखा कर रही हो,,,,


अरे सच में तू पागल हो गया है रात भर तो लिया है फिर भी तेरा मन नहीं भर रहा है,,,


क्या करूं मौसी तुम्हारे ये खूबसूरत बदन जब भी मेरे करीब रहता है तो मुझे चैन नहीं मिलता,,,(इतना कहते हुए संजू अपनी मौसी के ब्लाउज का एक बटन खोलने में कामयाब हो गया,,, इसलिए साधना उसके हाथ को पकड़कर हटाते हुए अपने ब्लाउज का बटन बंद करते हुए बोली,,)


तू तो मुझे मरवाएगा,,,


मरवाएगा नहीं,,, बल्कि तुम्हारी मारूंगा,,,


किसी और समय मार लेना,,, अभी मैं तुझे कुछ नहीं करने दूंगी,,,


ऐसा गजब मत करो मौसी मेरा इस समय तुम्हें चोदने का बहुत मन कर रहा है,,,(साधना की गांड पर अपने लंड को धंसाते हुए बोला,,, संजू की हरकत से साधना के तन बदन में भी चुदास की लहर दौड़ रही थी उसकी भी चुत गीली होने लगी थी,,,, फिर भी अपने आप पर काबू रखते हुए वह बोली,,,)

नहीं अभी बिल्कुल भी नहीं,,, बाद में कर लेना,,,


नहीं मौसी ऐसा कसम मत करो,,,(इतना कहने के साथ ही संजू फुर्ति दिखाता हुआ आगे से अपनी मौसी की साड़ी को ऊपर की तरफ उठाते हुए,,, उसकी पेंटी में हाथ डालकर उसकी चुत को दबोचने लगा,,,,)

आहहह क्या कर रहा है रे,,,


अब तो मान जाओ मौसी तुम्हारी चुत भी पानी छोड़ रही है,,,

इस तरह की हरकत करेगा तो पानी तो छोड़ेगी ही,,, चल हट मनीषा किसी भी वक्त आ जाएगी बहुत देर हो गई है,,,

(संजू समझ गया था कि इस समय उसकी मौसी मानने वाली बिल्कुल भी नहीं है इसलिए अपने मन को ही मनाने के लिए वह बोला,,,)

अच्छा कोई बात नहीं मौसी चोदने ना सही लेकिन एक बार अपनी चुत को चाटने तो दो-चार से पहले तुम्हारी चुत का स्वाद मिल जाएगा तो मजा आ जाएगा,,,

अब देख संजू तेरी ये जीद अच्छी नहीं है हम दोनों का भंडा फुट सकता है,,,(साधना चिंता व्यक्त करते हुए बोली )


नहीं नहीं मौसी ऐसा कुछ भी नहीं होगा जैसा तुम सोच रही हो वैसा कुछ भी नहीं होगा तुम्हें बिल्कुल डरने की जरूरत नहीं है यहां कोई नहीं आने वाला और बस 2 मिनट का ही तो है,,,,,


तू सच में मुझे फंसा देगा,,,,
(अब साधना के पास बोलने के लिए शब्द नहीं थे क्योंकि राजू की हरकत की वजह से उसका भी मन करने लगा था लेकिन उसके पास इतना समय नहीं था कि संजू के लंड को अपनी चुत में ले सके,,, संजू अपनी मौसी के चेहरे के भाव को देखकर समझ गया था कि उसकी मौसी तैयार है इसलिए बिना कुछ बोले वह अपनी मौसी की साड़ी आगे से पकड़कर उसे एक झटके में ऊपर की तरफ उठा दिया और साधना खुद अपनी साड़ी को कमर तक पकड़ कर खड़ी हो गई और संजू एक बार दरवाजे की तरफ देखकर घुटनों के बल बैठ गया और अपने हाथों से अपनी मौसी की पेंटी को खींचकर घुटनों तक ले आया और इसके बाद अपने प्यासे होठों को अपनी मौसी की पनीआई चुत पर रख कर चाटना शुरू कर दिया,,, पल भर में ही साधना मदहोशी में सिहर उठी संजू की जीभ अपना कमाल दिखा रही थी,,, साधना की सांस अटकने लगी थी उसके पेट वाला भाग मादक तरीके से ऊपर नीचे हो रहा था और उत्तेजना के मारे उसकी चुत कचोरी की तरफ फूल गई थी,,,, संजू अच्छी तरह से जानता था कि उसके पास समय ज्यादा नहीं है इसलिए जितना हो सकता था उतना जीभ को अपनी मौसी की चुत की गहराई में डालकर उसकी मलाई को चाट रहा था,,,

ओहहहह संजू तूने तो फिर से मेरे बदन में आग लगा दिया रे,,,,आह हहहहहहह,,,,ऊममममम,,,,,
(साधना मस्त होकर गरमा गरम सिसकारी लेना शुरू कर दी थी संजू का मन तो कर रहा था कि अभी इसी वक्त अपने लंड को निकालकर उसकी चुत में डालकर उसकी चुदाई कर दे,, लेकिन ऐसा करने का समय बिल्कुल भी नहीं था इसलिए वह अपनी जीभ से ही मजा ले रहा था,,, साधना की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी क्योंकि वह अपने चरम सुख के बेहद करीब पहुंच गई थी कि तभी दरवाजा खुलने की आवाज आई और वह दोनों एकदम से सकपका गए,,,। कदमों की आहट किचन के करीब आ रही थी इसलिए दोनों के पास बिल्कुल भी समय नहीं था संजू तो तुरंत उठ कर खड़ा हो गया और कोने में रखी फ्रिज के पास जाकर फ्रिज खोलकर पानी की बोतल निकालने लगा,,, साधना के पास अपनी पेंटी को ऊपर करके पहनने का बिल्कुल भी समय नहीं था इसलिए वह कमर तक पकड़ी हुई अपनी साड़ी को तुरंत नीचे छोड़ दी और धीरे से नाश्ते की प्लेट के पास पहुंचकर नाश्ता लगाने का नाटक करने लगी तब तक,,, मनीषा वहां पर आ गई,,,।


क्या मम्मी कितनी देर लग गई,,,

वो हां,,,, कहना कि संजू को अदरक वाली चाय पसंद है और मैंने अदरक डाली नहीं थी इसलिए वापस अदरक डालकर पका रही थी,,,


हां दीदी बिना अदरक की चाय मुझे बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती,,,(फ्रिज में से पानी की बोतल निकाल कर उसके ढक्कन को खोलते हुए वह बोला)


कोई बात नहीं लेकिन अब तो तैयार हो गई है ना जल्दी से मम्मी हम दोनों को चाय नाश्ता दे दो मुझे इसे कोचिंग क्लास भी दिखाने जाना है,,,


हां तैयार हो गया है,,,, मैं अभी लेकर आती हूं,,,


तुम तैयार कर दो मैं लेकर जाता हूं मौसी,,,।
(संजू की बात सुनकर मनीषा मुस्कुरा कर वापस अपने कमरे की तरफ चली गई और उसके जाते ही दोनों की जान में जान आई,,, साधना संजू की तरफ देखकर थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,)

देख लिया ना अगर तेरी में मनमानी करने दी होती तो आज हम दोनों सच में पकड़े जाते,,,

चलो पकड़े तो नहीं गए ना लेकिन मौसी मजा बहुत आया तुम्हारी चुत बहुत नमकीन है,,,

धत्,,,, अब अपनी बकवास बंद कर और यह चाय नाश्ता लेकर जा,,,

जो आज्ञा मैडम जी,,,

(और इतना कहने के साथ ही संजू चाय का कप और नाश्ते की प्लेट लेकर मनीषा के कमरे में पहुंच गया थोड़ी देर में दोनों नाश्ता करके कोचिंग क्लास देखने के लिए निकल गए,,,)
Awesome Update Ruhan bhai 👌🏻👌🏻👌🏻💥💥🔥
 

Sanju@

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आराधना को रात भर नींद नहीं आई थी,,, रात भर उसकी आंखों के सामने उसकी बड़ी बहन और उसके जवान बेटे की संभोग लीला नजर आती रही,,, उसे अपनी आंखों पर अभी भी यकीन नहीं हो रहा था लेकिन जो कुछ भी उसने देखी थी उसमें झूठलाने वाली कोई भी बात नहीं थी,,,,,, उसे अपने बेटे से इस तरह की हरकत की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी उम्मीद तो उसे अपनी बड़ी दीदी से भी नहीं थी,,,,,,, जिस तरह का दृश्य उसने अपनी आंखों से देखी थी उस दृश्य को देखकर आराधना खुद ही अपने हाथ का सहारा लेकर अपनी प्यास को बुझाने की नाकाम कोशिश की थी क्योंकि पल भर के लिए तो उसे ऐसा ही लगा था कि जैसे वह भी तृप्त हो गई है और वह भी केवल अपनी उंगली से लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था गया तो एक शुरुआत थी ,,, बार-बार उसे वही दृश्य नजर आ रहा था कितना मजा लेकर उसकी बड़ी दीदी उसके बेटे के मोटे लंबे लंड को अपनी चुत में लेकर सिसकारी ले रही थी इस तरह से तो आराधना ने कभी भी अपने पति से नहीं चुदवाई थी,,,,,एक औरत होने के नाते आराधना को इतना तो समझ में आ रहा था कि उसकी बड़ी दीदी को कितना मजा आ रहा होगा,,,,लेकिन उसे यह बात समझ में नहीं आ रही थी कि घर में पति होने के बावजूद भी उसकी बड़ी दीदी को इस तरह से अपने ही भतीजे के साथ शारीरिक संबंध बनाने की क्या जरूरत पड़ गई,,,,,,, आराधना को अपनी सवाल का जवाब इसलिए नहीं मिल रहा था क्योंकि आराधना दूसरी औरतों की तरह बिल्कुल भी नहीं थी,,,, अपनी शारीरिक जरूरत को वह एक तरफ रख कर अपनी गृहस्थी को आगे बढ़ाने में लगी रह गई लेकिन वह यह नहीं जानती थी कि उसकी तरह दूसरी औरतें बिल्कुल भी नहीं है दूसरी ओर से अपनी शारीरिक जरूरत को भी अच्छी तरह से समझती थी और उसे अहमियत देती थी,,,जिसका उदाहरण उसकी आंखों के सामने था कि उसकी बड़ी बहन घर में पति होने के बावजूद जवान लड़के के साथ शारीरिक संबंध बनाकर तृप्त हो रही थी,,,, संजू के द्वारा लगाया गया एक एक धक्काआराधना को याद आ रहा था उसकी हर एक जबरजस्ते धक्के पर उसकी बड़ी दीदी की बड़ी बड़ी गांड पानी की तरह लहरा उठती थी,,,उसी दृश्य को देखकर तुम अपने आप पर काबू नहीं कर पाई थी और अपनी प्यास बुझाने के लिए अपनी उंगलियों का सहारा ली थी,,,,,।
Aradhna


आराधना को यह समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी बड़ी दीदी इतनी समझदार होने के बावजूद भी इस तरह की हरकत करने पर मजबूर कैसे हो गई ऐसा तो बिल्कुल भी नहीं था कि संजू उसकी बड़ी दीदी को ऐसा करने के लिए जोर दिया होगा क्योंकि वह अपनी बड़ी दीदी के व्यक्तित्व से अच्छी तरह से परिचित थी वह कभी भी किसी से डरती नहीं थी ना ही किसी दबाव में आती थी इसका मतलब साफ था कि वह अपनी मर्जी से अपने ही भतीजे के साथ शारीरिक संबंध बनाई थी,,,, लेकिन राजू कैसे तैयार हो गया अपनी ही मौसी को चोदने के लिए यह उसे समझ में नहीं आ रहा था लेकिन फिर अपने ही सवाल का जवाब अपने आप से ही ढूंढते हुए वह अपने मन में बोली,,, शायद जवान लड़के इस उम्र में अपने आप पर काबू नहीं रख पाते और कोई भी औरत या लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाने के सपने देखते रहते हैं फिर वह पहले चाहे उनके परिवार की ही क्यों ना हो,,, इसका अनुभव खुद आराधना को हो चुका था उसे समझ में आ गया था कि उसका बेटा एक औरत की संगत के लिए कितना तड़प रहा था और शायद इसीलिए वह अपनी मौसी के साथ चुदाई करने के लिए तैयार हो गया,,,,,,,, यही सब सोचते सोचते ना जाने उसे कब नींद आ गई सुबह जब आंख खुली तो बगल में साधना बड़ी गहरी नींद में सो रही थी,,, आराधना बड़े गौर से अपनी बड़ी दीदी के चेहरे को देख रही थी सोते समय साधना कितनी मासूम लग रही थी उसके चेहरे का भोलापन उसकी शादी की आराधना को हमेशा से अपनी तरफ आकर्षित करती थी लेकिन वह कभी सपने में भी नहीं सोच सकती थी कि उसकी दूरी अपने मासूम चेहरे के साथ ही अपने ही भतीजे के साथ अपना मुंह काला करवाएंगी,,,,कभी-कभी तो आराधना का मन करता था कि अपनी दीदी से चीख चीख कर रात वाली बात बताएं,,, उसकी बेशर्मी भरी बातों को उससे ही कह कर उसे शर्मिंदा करें और फिर कभी अपने घर पर आने की उसकी हिम्मत ना हो ऐसा जरूर करें लेकिन फिर सोचने लग जाती थी कि उसकी दीदी उसका कितना मदद करती हैं उसकी मुसीबत को उसकी परेशानियों का चित्र से समझती हैं और इन मौके पर पैसों की मदद करके उसे बड़ी मुसीबत से बचाई भी थी और उसके ही बदौलत उसे जॉब करने की प्रेरणा भी मिली थी और एक अच्छी जॉब भी जिसके चलते वह अपने घर परिवार को अच्छी तरह से लेकर चल रही थी,,,,, इन्हीं सब के चलते वहां अपनी बड़ी दीदी को जलील नहीं करना चाहती थी,,,,।
Sadhna or sanju


रात वाली बात को भूलने की कोशिश करते हुए आराधना बिस्तर पर से उठी और दिनचर्या में लग गई बर्तन की खतर पटर की आवाज सुनकर साधना की भी नींद खुल गई और वह भी आलस मरोड़ते हुए बिस्तर पर उठ कर बैठ गई,,, और रात वाली बात को याद करके मुस्कुराने लगी,,,,संजू की मर्दानगी से वह अच्छी तरह से वाकिफ हो चुकी थी संजू जिस तरह की चुदाई करता था उस तरह की उसने तो कभी कल्पना भी नहीं की थी,,,,, चूत की अंदरूनी दीवारों पर संजू के लंड की रगड़ अभी भी उसे साफ महसूस हो रही थी अपनी चूत में उसे मीठा मीठा दर्द हो रहा था जो कि राजू के मोटे तगड़े लंड की जबरदस्त धक्के की वजह से हो रहा था,,,,,,।




थोड़ी ही देर में नाश्ता तैयार हो चुका था,,,सब लोग साथ में ही नाश्ता कर रहे थे आराधना अपने बेटे से मैसेज नहीं मिला पा रही थी अपने बेटे की तरफ देखने में उसे शर्म महसूस हो रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके सामने उसका बेटा नहीं बल्कि कोई अनजान आदमी बैठा हुआ है जो रात भर उसकी बड़ी दीदी की चुदाई करके उसे तृप्त कर चुका था,,,,,,,,अपने बेटे की तरफ देखे बिना ही वह चाय की चुस्की नहीं रही थी अपनी बड़ी दीदी से भी बात करने में शर्म महसूस हो रही थी कल रात को ही आराधना ने अपने बेटे के मोटे तगड़े लंबे लंड की अपनी आंखों से दर्शन की थी,,, अपने बेटे की कामुक हरकतों को वह महसूस कर चुकी थी,,,,उसके बेटे के द्वारा उसे अपनी बाहों में लेकर कसके पकड़ना उसकी गांड को दबाना और बरसात वाली शाम को जिस तरह की हरकत संजू ने किया था उससे तो आराधना को यही लग रहा था कि उसका बेटा उसकी चूत में अपना लंड डाल देना लेकिन ऐन मौके पर वह अपने आप को,,, संभाल ले गई थी,, लेकिन इतना सब होने के बावजूद भी आराधना ने सिर्फ अपने बेटे के लंड को अपनी गांड पर नाश्ता हुआ महसूस की थी उसकी लंबाई चौड़ाई मोटाई को लेकर कभी भी कल्पना नहीं की थी,,,,,,,लेकिन कल रात को अपने बेटे के दर्द को अपनी आंखों से देखकर वह दंग रह गई थी आश्चर्य से उसकी आंखें फटी की फटी रह गई थी ना चाहते हुए भी वह अपनी बेटी के लंड की तुलना अपने पति से करने लगी थी जो कि उसके लंड के आगे आधा भी नहीं था और जिस तरह से वह अपनी मौसी की चुदाई कर रहा था उसकी ताकत को देखकर हैरान रह गई थी क्योंकि अशोक ज्यादा से ज्यादा 2 या 3 मिनट तक ठहर पाता था इसके बाद चारों खाने चित हो जाता था पता ही नहीं चलता था की चुदाई किसे कहते हैं लेकिन कल रात के दृश्य में उसकी जिंदगी में सब कुछ बदल कर रख दिया था,,,।


अरे क्या सोच रही है नाश्ता तो कर,,,(साधना की बात सुनते ही जैसे उसकी तंद्रा भंग हुई हो वह एकदम से चौक गई,,, और हडबढ़ाते हुए बोली,,,)

जी जी दीदी,,,,(पर इतना कहने के साथ ही वह भी प्लेट में से ब्रेड का एक टुकड़ा लेकर खाने लगी,,,,)

संजू बहुत अच्छा लड़का है,,,,(चाय की चुस्की लेते हुए) और समझदार भी है पढ़ने लिखने में तेज ही है इसीलिए तो मनीषा ने इसे क्लास ज्वाइन करने के लिए बोली है,,,, देखना आराधना तेरा बेटा तेरी बहुत मदद करेगा,,,


ज़ी दीदी,,,(अपनी बड़ी बहन की बात पर आराधना हामी तो भर रहे थे लेकिन अपने मन में यही कह रही थी कि अभी तो यह तुम्हारी मदद कर रहा है दीदी,,,)

रात को तुम्हें परेशानी तो नहीं हुई थी मौसी,,,,(संजू चाय की चुस्की लेते हुए अपनी मौसी से बोला)


नहीं-नहीं परेशानी कैसी बेटा मुझे तो एकदम आराम था,,,

(साधना की बात सुनकर आराधना अपने मन नहीं बोली इतना मोटा लंबा नंदिनी चूत में लोगी तो आराम ही रहेगा ना)

मेरा तो मन करता है कि हर सप्ताह में एक रात यहां पर ही गुजारु,,,,

(और रात भर मेरे बेटे से चुदवाओ,,,, आराधना अपने मन में बोली,,,,)


मौसी बहुत अच्छी है मम्मी मेरा बहुत ख्याल रखती है,,,
(हां रात भर तुझे जो अपनी चूत चोदने के लिए दे देती हूं और मैं तेरा इस तरह से ख्याल नहीं रख सकती,,,)


मेरा भी,,,(मोहिनी भी मुस्कुराते हुए बोली तो संजु उसके सर पर हाथ रखते हुए बोला,,,)

तेरा ख्याल तो मैं रखता हूं मोहिनी,,,,
(मोहिनी अपने भाई के कहने का मतलब को अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए बिना कुछ बोले चाय की चुस्की लेने लगी,,,,,, थोड़ी ही देर में सब लोग ने नाश्ता कर लिए और साधना जाने की तैयारी करने लगी,,,, संजू अपनी मौसी के साथ ही खड़ा था ना जाने क्यों आराधना को अब यह बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था कि उसका बेटा साधना के साथ खड़े रहे ना जाने क्यों उसे अब साधना के साथ संजू का खड़ा रहना अच्छा नहीं लगता था एक तरह से उसे साधना से जलन सी होने लगी थी,,,,,,,, आराधना साधना और संजू को तिरछी नजरों से ही देख रही थी मन तो कर रहा था कि वह अपने बेटे का हाथ पकड़कर साधना के बगल में से अपनी तरफ खींच ले और बोल देगी आज से तुम मेरे घर पर कभी मत आना लेकिन ऐसा आराधना बिल्कुल भी नहीं कर सकती थी वह अपने दीदी का दिल नहीं दुखाना चाहती थी,,,,)

अच्छा आराधना अब मैं चलती हूं,,,,,( साथ में लाई हुई थैली को हाथ में लेते हुए) और आराधना तुझे मैं एक औरत होने के नाते जाति तौर पर तुझे एक सलाह देना चाहती हूं,,,, तुझे भी अपनी जिंदगी में अपनी जरूरतों का ख्याल रखना चाहिए सज संवर कर रहना चाहिए,,,, खुश रहना चाहिए,,,, तू एक औरत होते हुए भी एक औरत की जरूरत को अपने अंदर ही अंदर मार रही है,,,,,, मुझे देख हमेशा खुश रहती हूं ऐसा नहीं है कि मुझे अपने पति से सुख ही मिल रहा है दुख भी मिलता है उन्हें अपने काम से फुर्सत नहीं मिलती और मैं अपने काम में मस्त रहती हूं,,,, इसलिए कहती हूं तू भी मेरी तरह एकदम बिंदास जिया कर अशोक की चिंता बिल्कुल भी मत किया कर क्योंकि जितनी भी तु अशोक की चिंता करेगी उतना ही तू अपने आप को कमजोर करेगी,,,(अपनी तरह बिंदास जीने के मतलब को आराधना अच्छी तरह से समझ रही थी वह अपनी दीदी की बिंदास जीवन शैली को रात को ही देख चुकी थी) अच्छा तो मैं चलती हूं,,,,
(इतना कहने के साथ ही साधना घर से बाहर निकली वैसे ही ना चाहते हुए भी आराधना के मुंह से इतना निकल गया,,,)


अरे संजू स्कूटी पर अपनी मौसी को घर तक छोड़ दें,,,

अरे हां आराधना यह तो और भी अच्छा है आज ही संजू मनीषा से मुलाकात भी कर लेगा और कोचिंग के बारे में सब कुछ समझ भी लेगा,,,


हां मम्मी मौसी ठीक कह रही है,,, मैं मनीषा दीदी से कोचिंग के बारे में सब कुछ समझ सकूंगा,,,,


हां यह भी ठीक है,,,,।
(इजाजत देने के बाद आराधना का दिल जोरों से धड़क रहा था,,,क्योंकि अब उसे साधना से डर लगने लगा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें अब वह अपने बेटे को रोबिन सकती थी आराधना किस बात का डर था कि अपने घर ले जाकर साधना कहीं फिर से उसके बेटे से चुदवाना ना शुरू कर दे,,,,आराधना यह सब सोच ही रही थी कि संजू तुरंत स्कूटी की चाबी लेकर आया और घर से बाहर निकल कर स्कूटी को स्टार्ट कर दिया और साधना अपनी बड़ी बड़ी गांड लेकर मुस्कुराते हुए संजू के कंधे पर हाथ रखकर पिछली सीट पर बैठ गई और संजू एक्सीलेटर देकर स्कूटी को आगे बढ़ा दिया,,,, आराधना अपने मन को किसी भी हाल में काबू नहीं कर पा रही थी उसके मन में ढेर सारे ख्याल आ रहे थे वह जानबूझकर घर के काम में अपने आप को व्यस्त करने लगी और थोड़ी ही देर में संजू साधना के घर पहुंच गया,,,, घर पर पहुंचते ही,,,, साधना संजू से मुस्कुराते हुए बोली,,,)

यहां पर भी मौका मिल जाता तो कितना मजा आता,,,


मैं भी यही सोच रहा हूं मौसी तुम्हारी बड़ी बड़ी गांड मेरा लंड खड़ा कर देती है,,,।

सहहह,,, धीरे बोल बगल वाले कमरे में मनीषा पढ़ाई कर रही है और हां तु जाकर उससे मिल‌ ले तब तक मैं कुछ खाने को बना देती हूं,,,।

(इतना कहने के साथ ही साधना किचन की तरफ चले गए और संजय मनीषा के कमरे के बाहर खड़ा हो गया,,,और अपने मन में सोचने लगा कि आज कमरे के अंदर मनीषा किस हालत में होगी उस दिन तो केवल एक पतली सी टीशर्ट और छोटी सी चड्डी में थी चड्डी नहीं पेंटी में थी इतना सोचते ही उसके तन बदन में आग लगने लगी वह अपने मन में सोचने लगा कि कमरे के अंदर मनीषा दीदी एकदम नंगी मिल जाती तो कितना मजा आता इसलिए,,, दरवाजे पर बिना नोक किए,,,वह दरवाजे को धक्का देकर खोने लगा क्योंकि वह पहले ही देख चुका था कि दरवाजा खुला हुआ था दरवाजा के खुलते ही,,,, उसे मनीषा सामनेकुर्सी पर बैठकर पढ़ती हुई नजर आ गई जो कि दरवाजा खोलने पर दरवाजे की तरफ देख रही थी ऐसे में दोनों की नजर आपस में टकरा गई,,, लेकिन संजू के उम्मीद से नाकामी ही प्राप्त हुई थी क्योंकि इस समय मनीषा टी-शर्ट और पतले से पजामे में बैठे हुई थी लेकिन टी-शर्ट के अंदर उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां अपनी मदमस्त गोलाई लिए हुए उभरकर नजर आ रही थी,,,, मनीषा एकदम गोरी चिट्टी बला की खूबसूरत थी इसलिए संजू उसे देखता ही रह गया,,,, तो उसकी तंद्रा को भंग करते हुए मनीषा ही बोली,,,।


अरे संजु तु ,,, कब आया,,आ इधर आ कर बैठ,,,।
(इतना सुनते ही संजू नमस्ते दीदी कहकर कमरे में प्रवेश किया और पास में ही बिस्तर पर जाकर बैठ गया)
शानदार अपडेट है
आराधना मन ही मन अपनी दीदी से जल रही है साधना जब संजू के साथ चिपक कर खड़ी थी तो आराधना को जलन हो रही थी साधना और संजू की चुदाई देखकर उसका भी मन कर रहा है लेकिन अपनी भावनाएं दबाएं हुए हैं देखते हैं कब तक अपनी भावना छुपाती है वही साधना के घर जाने पर संजू मनीषा को उस दिन वाले कपड़ों में देखना चाहता है लेकिन आज उसे वह देखने को नहीं मिलता है देखते हैं क्या अब संजू मनीषा को चोद पाएगा या नहीं
 
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