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Romance भंवर (पूर्ण)

nain11ster

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update 14



teri kab se ho gayi :?:


:lol: abe use heartattack deni ki sochi hai.. :slap:


:approve:


:lol: phir se na shuru ho jana
abhi ek se ubhari bhi na hai hai tum dusre bar pilane ki baat kar rahe ho


pichli baar wale dose mein kiya tumne kya kiya tha yaad kar lo :D


ye bhi koi baat huyi
tumne hi chalu kiya tha kiss karna :blush1:


sach hi bol do saachi..jaldi line par ho jayengi :D

apsyu itni behas kyu kar raha hai.. :slap:
kitne pyaar se bol rahi hai :love:

chalo ye dono ko to pyaar ka rog lag gaya hai..
ab ye lavni kab line pe aayengi :rondu:
main to waiting se mar jaunga :verysad:


:reading: next
To fir kiski hai Lavni .. ab khud ki naam mat le lena :D

Na dhire dhire chhote chhote dhakke ke baad dil majboot jo jayega don't worry

Plan to aisa hi tha bus pilane wala dur baita hai so...

Baki sare sawalon ke jawab update me mil gaya thankoo for posting awesome revoo :hug:
 

nain11ster

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Update:-38



रविवार की सुबह थी, वर्कआउट के बाद तीनों भाई बहन हॉल में ही हल्ला-गुल्ला मचा रहे थे। आपस में इतने मशगूल थे कि किसी को घर की घंटी भी नहीं सुनाई दी। नंदनी ने जैसे ही दरवाजा खोला सामने कुछ मेहमान थे। कुछ जाने पहचाने चेहरे तो कुछ अनजान चेहरे… "जी हम अंदर अा सकते हैं क्या?"

सामने पूरी मिश्रा फैमिली थी। नंदनी सबका स्वागत करती सबको हॉल में लेे अाई। एयरपोर्ट के बाद यह पहला अवसर था जब राजीव आरव को देख रहा था। इधर तीनों भाई बहन आपस में ही लगे थे तभी कुंजल की नजर सामने आए मेहमानों पर गई और वो तेजी से भागकर अपने कमरे में चली गई।

इधर कुछ पल बाद अपस्यु और अराव को भी पता चला की घर में मेहमान आए हुए हैं तो वो भी वहां से अपने कमरे कि ओर तेजी से निकले। इसी क्रम में जब अपस्यु साची के पास से गुजरा तब साची ने पलट कर उसे आंख मेरी और होंठों से हवा में एक चुम्मा उसकी ओर भेज दिया।

अपस्यु अपना सिर पीट कर कहने लगा…. "आज ये सबके सामने बवाल करवाएगी।"….. "मुझे तो लगता है यहां शादी की बातचीत शुरू करवाएगी।".. आरव ने हंसते हुए तंज कसा।

"आप का हॉल तो बहुत बड़ा है, यहां क्रिकेट भी खेला जा सकता है।" अनुपमा ने नंदनी से मज़ाक करती हुई कहीं।

हॉल में फिर सभी का जमावड़ा हुआ। तीन भाई बहन भी अपने कपड़े बदल कर हॉल में ही पहुंच चुके थे।"… कुछ औपचारिक परिचय के बाद, बातों का सिलसिला जब शुरू हुआ तब राजीव ने ही सबसे पहले मोर्चा संभल लिया और अपना पुराना गुस्सा निकालना शुरू कर दिया। आरव की बदतमीजियों का गुणगान बढ़-चढ़ कर करने लगा। सुलेखा भी इसमें उसका पूरा साथ दे रही थीं।

हालांकि अनुपमा ने दोनों को रोकने की नाकाम कोशिश तो की, लेकिन एक बार जब फ्लो और पिकअप पकड़ लिए तो बस पकड़ लिए। इसी क्रम में बेचारे आरव को नंदनी के हाथ का पहला झन्नाटेदार तमाचा लगा। आरव कुछ बोलने को हुआ, लेकिन जैसे ही उसने अपना मुंह खोला दूसरे गाल पर फिर से पाचों उंगलियों के निशान छाप दिए नंदनी ने और बिल्कुल शांत रहने के लिए बोल दी।

अपस्यु ने भी आखों से इशारा कर उसे शांत रहने कहा और खुद मामले को हाथ में लेते हुए कहने लगा… "उंकल इसने बदतमीजी की इसे थप्पड पड़ी। हवालात में भी डाला गया। भड़े एयरपोर्ट पर भी बैज्जती की गईं। क्या आप खुद की सजा जस्टिफाई कर सकते है, जब आपने आरव को बिना जाने, कॉलेज के फॉर्म जमा करने वाले दिन, गंदा खून और गंदी नाली का कीड़ा कहा था।…

अनुपमा क्या सोच कर यहां अाई थी और ये क्या होने लगा। नंदनी ने भी इस बात को भाप लिया और वो उठकर इस बार अपस्यु को एक थप्पड जड़ दी… "माफ़ कीजियेगा आप लोग। बच्चे हैं ना अभी उतनी समझदारी नहीं आई है। तुमलोग जाओ अपने-अपने कमरे दिखाओ अपने दोस्तों को, स्टडी की बातें करो… अब जाओ यहां खड़े मत रहो।

अनुपमा, नंदनी की समझदारी पर उसे मन ही मन धन्यवाद करने लगी। इधर गुस्से में लाल-पीला होते हुए आरव ने अपस्यु से कहा…. "जब बता ही रहे थे तो ये भी बता देते की मुझे मारने के लिए उसने गुंडे भी भेजे थे।"

अराव इतने गुस्से में था की उसे ये भी समझ में नहीं आया कि उसके साथ-साथ कुंजल, लावणी और साची भी चल रही थी। अब तक ये लोग चलते-चलते हॉल के दूसरे हिस्से में अा चुके थे…. जैसे ही ये बात सबके कानो में गई एक ही वक़्त पर एक साथ सबकी प्रतिक्रिया अा चुकी थी….

अपस्यु:- तू गुस्से में है मेरे भाई थोड़ा शांत हो जा।
कुंजल:- इतनी बड़ी बात और मुझे पता तक नहीं।
लावणी:- क्या मेरे पापा ने ऐसा करवाया था?
साची:- ये झूट बोल रहा है

सब अपनी-अपनी बात कहकर एक दूसरे का मुंह देखने लगे। तभी साची, अपस्यु के करीब पहुंचकर कहने लगी…. "ये लोग इतिहास वाले लोग है बीती बातों का अध्यन करेंगे, हम चलते हैं तुम्हारे कमरे। मैं भी देखना चाहूंगी एक साहित्य भक्त का कमरा कैसा दिखता है।"

अपस्यु, को साची की बात कुछ हद ठीक लगी, यहां रुके तो बातें बढ़ेगी इसलिए वो दोनों चल दिए। इधर आरव, लावणी से कहने लगा… "तुम इतिहास कि स्टूडेंट हो ना तो चलो, हम दोनों मेरे कमरे में चलकर तुम्हारे पापा ने ऐसा क्यों किया उसपर चर्चा करते है।" आरव की बात सुनकर लावणी को हंसी अा गई और वो दोनों भी निकल लिए।

हॉल के उस हिस्से में अकेली खड़ी रह गई कुंजल… खड़ी होकर खुद से ही कहने लगी…. "काश इन दोनों बहनों का कोई भाई यहां होता, मैं भी उसे अपना कमरा दिखाने लेे जाती। कोई नहीं बहन कि सेवा बहुत कर ली मेरे भाइयों ने अब उनके साथ भी थोड़ा वक़्त बीता लें, तबतक मैं ट्रेनिंग एरिया ही हो आती हूं।"

आरव और लावणी…

दोनों कमरे के अंदर आते ही, आरव ने लावणी को जोड़ से गले लगा लिया। लावणी कसमसाती हुई उस पीछे धकेलती…. "अराव प्लीज़ नहीं ना।"

अराव:- क्या नहीं ना।
लावणी:- वहीं गले लगाना।
अराव:- लेकिन मेरा मन है बेबी।
लावणी:- अभी नहीं पहले मुझे ये बताओ जो तुमने कहा क्या वो सच था?
आरव:- क्या तुमने अपने पापा को उस दिन एयरपोर्ट पर नहीं सुना था।
लावणी:- क्या सच में आरव।
आरव:- मुझे गले लगा कर दिलाशा दो ना लावणी। मेरे ससुर जी ने मेरे साथ ऐसा करवाया इस बात से हताश हूं मै।
लावणी:- मुझे नहीं सुनना अब इस बारे में, तुमने भी गलती कि और उन्होंने भी। हालांकि उनकी गलती कुछ ज्यादा ही बड़ी थी। सो अब बात को खत्म करो।
आरव:- उसकी फीस लगेगी, एक किस।

लावणी आरव के चेहरे को देखती हुई थोड़ी मायूस होकर कहने लगी…. "जानते हो कभी-कभी ऐसा लगता है तुम बहुत दूर किसी ख्वाब कि तरह हो आरव। डर हमेशा इस बात का सताता रहता है कि तुम जैसा टॉल, हैंडसम और रिच लड़का जिसके पीछे दिल्ली की कोई भी हॉट लड़की अा सकती है उसका रिश्ता मुझ जैसी एवरेज लड़की के साथ कितने दिन चलेगा"

आरव उसे अपने बिस्तर के किनारे बिठा कर खुद घुटनों के बल फर्श पर बैठ गया। उसके हाथों को अपने हाथों में थामते हुए कहने लगा…. "तुम्हारे साथ मुस्कुराते हुए मैं हर वक़्त काट लूंगा बाकी मुझे बातें नहीं बनानी आती है करूंगा, वो करूंगा, चांद तारे तोड़ कर क़दमों में रख दूंगा। चलो अब ये अपना सिकुड़ा हुए चेहरे पर हंसी की फुलझड़ी जलाओ"

लावणी, अपने माथे को आरव के माथे से टिकाकर कहने लगी…. "ये बड़ी-बड़ी बातें करते हुए तुम बिल्कुल अच्छे नहीं लगते आरव। तुम मुझे छेड़ने, और इधर उधर छूने वाले आरव ही बने रहो"….

एक दूसरे को मेहसूस करते हुए दोनों के होंठ जुड़ते चले गए। प्रेम रस में डूबकर दोनों एक दूसरे को उत्सुकता के साथ चूमते चले जा रहे थे। …. "आव…." लावणी मीठे दर्द में थोड़ा चिल्लाई और आरव को धक्का देकर खुद से अलग करती हुई कहने लगी…. "बेशर्म कहीं के, कुछ तो शर्म करो, पूरा परिवार नीचे बैठा है।" …. शादी के बाद यही पूरा परिवार इसी बिस्तर को सजाकर मुझे तुम्हारे पास भेजेगा लावणी।"..… "तुम से तो बात करना ही बेकार है। बेशर्म थे और हमेशा बेशर्म ही रहोगे।"…

खिलखिलाती हंसी के साथ छेड़-छाड़ इन दोनों के बीच चलती ही रही। इधर अपस्यु और साची जैसे ही दोनों अंदर आए, साची उसके कमरे को देखती हुई कहने लगी…. "किसी ने आज तक तुमसे कहा है क्या की तुम बहुत गहरे इंसान हो जो रहता डार्क में है लेकिन ताकता उजाले को है।"

अपस्यु, हैरानी से उसका चेहरा देखते हुए…. "तुम कौन हो"
साची:- मैं समझी नहीं?
अपस्यु:- मेरे कमरे की एक झलक तो देखी तुमने और इस दीवार पर लगे पेंट की कहानी पढ़ ली। तुम कोई साधारण मनुष्य तो नहीं लगती।
साची:- ऐसा तो कोई भी कर सकता है।

अपस्यु उसके जवाब पर थोड़ा मुस्कुराया और कहने लगा…. "तुम में जितनी नादानियां है, उतनी ही संजीदगी भी हैं। या फिर वो रंग जो तुम्हारे गहराइयों में है कहीं, उसी का प्रयोग करके तुम सुनिश्चित करती हो की किसके साथ कैसे पेश आना है। एक ही वक़्त पर तुम गंभीर और मजाकिया दोनों हो सकती हो बस अलग-अलग पहलुओं में तुम्हारा अलग-अलग रंग दिखेगा.. फिर भी एक कमी है… गुस्सा तीव्र है और भाषा में शब्दों के प्रयोग पर नियंत्रण नहीं है इसलिए शायद जब गुस्से में होती हो तो कुछ भी बोल जाती हो…

साची, अपस्यु को धक्का देकर दीवाल में चिपका दी और अपने दोनों हाथ उसके सिर के आजू-बाजू टीका कर…. "जब मेरे बारे में बोलते हो तो अच्छा लगता है। हां ये कहना ग़लत नहीं होगा तुम में शेरलॉक होल्म्स, जम्स बोंड और बहुत से जासूसी किरदारों के साथ-साथ कई सारे बाबाओं कि आत्मा भी समाई है। मेरे एक छोटे से ऑब्जर्वेशन पर इतना बड़ा लैक्चर दे डाला।"….

अपनी बात कहती हुई साची धीरे-धीरे आगे भी बढ़ती जा रही थी। अपस्यु जो पहले से दीवार से चिपका था वो और कहां से पीछे जाता… हालांकि कोई बड़ी बात नहीं थी उसका यहां से निकालना, बस थोड़े जोड़ लगाने कि देर थी और साची किनारे। लेकिन अपस्यु शायद साची को अलग करने की हिम्मत ही नहीं जुटा पा रहा था। बेबस, बस पीछे हटने की कोशिश कर तो रहा था, लेकिन अब दीवार तो वो खिस्का नहीं सकता था इसलिए श्वास रोक कर पेट को ही पीठ से चिपकाने कि कोशिश में जुटा हुआ था… और साची आगे आते-आते इतना उसके ऊपर अा चुकी थी कि बस उसके होंठ से होंठ नहीं मिले थे, क्योंकि वो अभी बोल रही थी वरना शरीर तो पूरा उसी के ऊपर था…

साची अब भी आगे बढ़ती हुई बोल ही रही थी… मेरे एक छोटे से ऑब्जर्वेशन पर इतना बड़ा लैक्चर दे डाला।"…. ये सब तो मैं बर्दास्त कर लूंगी। लेकिन ये जो तुम मुझे पप्पी देने ने कंजूसी करते हो ना ये मुझसे बर्दास्त नहीं होता…

साची चूमने के लिए अपने होंठ आगे बढ़ा ही रही होती है कि पीछे से कुंजल के गले की खराश की आवाज़ आती है… साची अब भी अपने होंठ आगे बढ़ाए जा रही थी…

अपस्यु, कुंजल की आवाज़ सुनकर अपना चेहरा उसकी ओर घुमाते हुए अपने मुंह से कुछ बोलने की कोशिश की, जो सुनने में कुछ इस तरह से निकलकर अाई……"कूं .. अा .. है।"… साची उसके बाएं घूमे गर्दन को बिल्कुल मध्य में करती हुई…. "आज तो ये किस हो ही जाने दो बेबी"…. अपस्यु अपना गला साफ करते हुए जोर से बोला… "कुंजल अाई है"…

साची अपना एक हाथ नीचे ले जाकर उंगली के इशारे से कुंजल को बिस्तर पर बैठने के लिए कहीं.. वहीं सामने देखते हुए अपस्यु से कहने लगी… उसके सामने जब मैं तुम्हे अपनी नफरत दिखा सकती हूं तो प्यार क्यों नहीं।"

अपस्यु उसे धक्के देकर किनारे किया और वो कमरे से नजरें चुरा कर भागने लगा। तभी कुंजल उसे रोकती हुई फोन आगे बढ़ा दी और कहने लगी… "सिन्हा अंकल का बार-बार कॉल अा रहा था। कुछ जरूरी होगा बात कर लो। अपस्यु कॉल लगाते हुए भागा वहां से….

"आज शाम 7 बजे से मेरे ऑफिस में मीटिंग है। सहर के बड़े-बड़े लोग होंगे और मुद्दा है तीन दिन पहले हुए कांड का… कोई चूक ना हो और तैयारी पूरी रहे। समय पर अा जाना।"… सिन्हा जी ने दूसरी ओर से सूचना दे दी।

इधर कमरे के अंदर साची और कुंजल रह गए थे। अपस्यु के जाते ही कुंजल बस चंद सेकंड वहां रुकी और साची से बिना कोई बात किए वह उठकर जाने लगी… उसे जाते हुए देख साची मायूस होती कहने लगी….

यूं तो बुरे हम भी नहीं, बस वक़्त बुरा हुआ कुछ इस कदर
अब तो गर रोते भी है तो, उसमें भी ज़हर नजर आता है ।
 

Naina

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"हेल्लो.. साची.. हेल्लो" और कॉल डिस्कनेक्ट हो गया।………

रात में तकरीबन 12.30 बजे, अपस्यु हॉस्पिटल के मुख्य द्वार पर खड़ा इंतजार ही कर रहा था…. स्कूटी सड़क के किनारे लगी और साची साइड स्टैंड पर उसे खड़ी कर अपस्यु की ओर चली अा रही थी…. "हाय !!!!!"

चेहरे की रौनक और उस चेहरे पर ये किया मेकअप कातिलाना था, और ऊपर से ये हल्के गुलाबी रंग के होंठ.. उफ्फ !!… कानो की बड़ी-बड़ी बालियां, जब-जब गालों से टकराती ऐसा लगता जैसे कोई होंठ प्यार से इन गालों को स्पर्श कर रहा हो। गहरे नीला रंग का लहंगा जिसपर सुनहरे रंग की जड़ी का काम किया गया था, कमर पर ऐसे बंधी थी कि नजरें कमर के उस हिस्से पर जम जाए। हाथ की उंगलियां फरफरा उठे मात्र एक स्पर्श के लिए।

ऊपर बंधी वो तंग चोली जो कमर से लेकर ऊपर तक के अाकर को ऐसे निखार रहा हो मानो एक कोई गृतवाकर्षण है जो अपनी ओर खींच रहा हो। उसपर से पीछे का वो लगभग बैकलेस नजारा जो कमर कि गहराई से शुरू होकर ऊपर की ओर आती जो बीच में मात्र चोली कि चौड़ी पट्टी से ढकी थी, मन को विचलित कर रही थी। ऊपर बंधी डोरियां जब कंधो के बीच से पीठ पर टकराती, दिल में जलन पैदा कर जाती। काश मैं ही डोरी बन जाता।

"तुम्हारे लिए ही इतनी मेहनत की है। कहो तो मैं बैठ जाती हूं, तुम आराम से निहारते रहना।"… चेहरे पर खुशी और आखों में शरारत, साची अपनी ही अदा से अपस्यु को चिढाती हुई कहने लगी।

"इतनी रात में इतना बन संवर निकली हो, ऊपर से स्कूटी लेे अाई, किसी ने रोका नहीं।" अपस्यु अपने बेईमान नजरों को चुराते हुए बोला।

"तुम उसकी चिंता छोड़ो, चालो वॉक करते-करते बातें करते हैं।" चेहरे पर एक अलग ही खुशी और होठों पर अलग ही मुस्कान..

"पता नहीं तुम्हारे दिमाग में क्या चल रहा है लेकिन इस बदले रूप को देखकर मैं बहुत ही संशय (कॉफ्यूजन) में पर गया हूं।"… अपस्यु कदम से कदम मिलाते हुए अपनी बात कही।

"देखो… कैसी लग रही हूं मै".. साची 2 कदम आगे जाकर सामने खड़ी हो गई और दोनों हाथ फैलाकर खुद को दिखाने लगी।

"आज पक्का तुमने कोई नशा किया है जो ऐसी हरकतें कर रही हो।"… अपस्यु ने हंसते हुए कहा…

"खुल कर जीना और बिंदास होकर अपनी बात कहना भी तो एक नशा ही है"
….. शरारत भरी मुस्कान के साथ साची ने जवाब दिया।

अपस्यु:- वैसे तुम्हे कुछ जवाब चाहिए था ना।

"वो फोन पर चाहिए था, लेकिन तुम्हे देखने के बाद मेरा अब मूड बदल गया है।"… साची अपनी खुशी का इजहार करती हुई वहीं सड़क पर अपनी बाहें फैला कर गोल-गोल घुमती हुई जवाब दी।

अपस्यु:- बात क्या है साची ..

"बात जो तुम समझकर भी समझना नहीं चाहते अपस्यु".. बिल्कुल सामने खड़े हो इंच भर फासले की दूरी से अपनी बात कहती साची।

अपस्यु उसके बांह को पकड़ कर उसे झकझोरते हुए…. "साची तुम्हे हुआ क्या है"

"मुझे किस करो, फिर मै बताऊंगी"… साची, अपस्यु के आखों में झांकती हुई कहने लगी।

"तुम्हारा आज पक्का दिमाग खराब हो गया है"… साची को किनारे कर, अपस्यु दो कदम आगे बढ़ते हुए कहने लगा।

"ए… ए… रूको रुको.. जो भी बातें करनी है मेरे सामने खड़े होकर मेरी आखों में आखें डाल कर कहो।" साची झटककर अपस्यु के आगे बढ़ती हुई, उसका रास्ता रोककर कहने लगी।

"मेरी आखों में आई फ्लू हो गया है। आखों में आखें डाल कर मैं बात नहीं कर सकता।"… अपस्यु फिर आगे बढ़ते हुए जवाब दिया।

"ये कैसे आज मुर्गी कि तरह, नहीं सॉरी, मुर्गे की तरह "पक-पक" करते इधर से उधर फुदक रहे हो। एक जगह खड़े होकर बात करों ना।" .. साची फिर उसका रास्ता रोकते कहने लगी।

"तुम्हारा भेजा आज सटक गया है साची"… अपस्यु गंभीर होते हुए कहा।

"ओह हो !! बेबी थोड़ा सीरियस दिख रहे है, क्या बात हो गई जानू"… साची ने उसके गालों पर उंगली फिराती हुई कहने लगी।

" हाय कितनी प्यारी और दिलकश लग रही है, जी करता है अभी बाहों में भर लूं"… अपस्यु साची के अदा पर फिदा होते हुए सोचने लगा…

"मेरी आखों में देख कर कहो जो भी अभी सोच रहे हो"… साची सभी फासले मिटाती अपस्यु के बिल्कुल करीब अा चुकी थी।

इतने करीब की श्वास चेहरे से टकराने लगे थे। होंठ बिल्कुल रत्ती भर फासले से दूर थे। नज़रे इतनी करीब थी कि अब एक दूसरे के आखों में झांकने के सिवाय कहीं और नहीं देखा जा सकता था। किनारे से दोनों की उंगलियां एक दूसरे को स्पर्श कर रही थी। साची के वक्ष, अपस्यु के सीने पर ऐसे स्पर्श होने लगी कि दोनों के सीने में एक चुभन सी पैदा कर रही थी, जो उन्हें श्वास लेने से रोकने लगे। अपने श्वास की कमी को पूरा करने के लिए दोनों अंदर तक पूरी श्वास खींच रहे थे। नजरें अब बोझिल सी होने लगी थी और वो धीरे-धीरे बंद होती जा रही थी। कमर का वो हिस्सा जहां अपस्यु की उंगलियां स्पर्श करने के लिए व्याकुल थी अब दोनों हाथों से थामे था। होंठ जैसे सुख चुके थे और वो करीब आते हुए एक दूसरे के होठों को सौम्या स्पर्श दे रहे थे…

"तेरे बिना तेरे बिना, दिल नइयो लगदा, मेरा दिल नइयो लगदा"

उफ्फ !… और साची अपने सीने पर हाथ रखकर, चौंकने के कारण अचानक से तेज हुई धड़कन को हंसती हुई काबू में करने लगी। अपस्यु भी मुस्कुराते हुए अपने सिर पर एक हाथ मारा और अपनी श्वास सामान्य करने लगा।

साची अपना फोन उठाते…. "हां मम्मी, कहिए"
अनुपमा:- शादी से सब लौट आए बेटा तू कहां रह गई।
साची:- मां पनौती ही पनौती लगी थी। वहां तबीयत बिगड़ी और रास्ते में गाड़ी।
अनुपमा:- अरे ! कहां है बेटा, हम अा रहे हैं।
साची:- चिंता नहीं कीजिए मम्मी, अपस्यु है साथ मेरे।
अनुपमा:- अपस्यु ? वो कहां मिल गया तुझे…

साची:- एक तो मैं अकेली लड़की रात के 12.30 बजे वीराने में फस गई थी, उसकी आपको चिंता नहीं, बस अपस्यु के नाम से चौंक रही है। उसकी बहन कुंजल हॉस्पिटल में है और मेरी स्कूटी उसी हॉस्पिटल के थोड़े पीछे खराब हो गई। जब मैं स्कूटी खींच कर ला रही थी तभी अपस्यु मिल गया। और कुछ जानना है, या नहीं यदि शक दूर करना है तो अा जाओ यहीं।

अनुपमा:- कितनी झल्ली है तू साची। उसके सामने ही सबकुछ बोल दी पागल। सुनेगा तो क्या सोचेगा।
साची:- सॉरी मम्मी, ये तो सोची ही नहीं।
अनुपमा:- पागल, दे उसे फोन…
साची अपस्यु के ओर फोन बढ़ती हुई कहने लगी…. "लो मम्मी तुमसे बात करेंगी"
अपस्यु :- जी आंटी नमस्ते।
अनुपमा:- हां नमस्ते बेटा। माफ़ करना बेटा उसमे थोड़ी समझदारी कि कमी है। मैंने उससे बस चिंता में पूछी और उसने ना जाने क्या-क्या कह दिया।
अपस्यु :- कोई बात नहीं है आंटी। आप को इतना सोचने कि कोई जरूरत नहीं।
अनुपमा:- थैंक्स बेटा। साची कह रही थी तुम्हारी बहन हॉस्पिटल में एडमिट है। कोई चिंता का विषय तो नहीं।
अपस्यु :- नहीं आंटी कोई चिंता की बात नहीं है। वो आज कल की लड़कियों में फ़ैशन सा नहीं अा गया है जीरो फिगर वाला बस उसी का चक्कर है सब।

अनुपमा:- बताओ ! मैं सोचती थी मेरे घर का ही ये हाल है यहां तो सब पगलाई है। पता नहीं लकड़ी वाला फिगर पाकर, कौन सा तीर मार लेंगी। मैं इतनी मोटी हो गई हूं, लेकिन आज भी मेरे हसबैंड की शायरी इसी फिगर को देखकर निकलती है। ये लोग भी ना केवल दिखावे में जी रही हैं। ओह ! सॉरी बेटा मै भी ना तुम्हे बस सुनाए ही जा रही हूं।

अपस्यु :- कोई बात नहीं आंटी, आप को सुनने के बाद लगता है किसी दिन पूरा सुन लूं।

अनुपमा:- बहुत प्यारी बातें करते हो बेटा। अच्छी परवरिश हुई हैं तुम्हारी। अच्छा सुनो बेटा रात बहुत हो गई है क्या तुम साची को घर तक छोड़ दोगे।
अपस्यु :- जी बिल्कुल आंटी। बस 5 मिनट का तो रास्ता है।

कॉल डिस्कनेक्ट हुआ और अपस्यु ने साची को उसका फोन देते हुए कहा… "तो मैडम शादी अटेंड करने गई थी।

साची, अपस्यु को ध्यान से देखती हुई…. "आज की बात अधूरी रह गई, यहां से फुर्सत हो जाओ फिर हम इस अधूरी बात को पूरा करेंगे। और हां सही कहा था तुमने जो मज़ा आमने-सामने की बातों का है वो फोन कॉल पर कभी नहीं हो सकती। अब चले सर"

साची, अपस्यु के साथ कार में बैठ गई। दोनों के बीच पूरे रास्ते खामोशी ही रही लेकिन बार-बार एक दूसरे को देखना और देख कर प्यार से मुस्कुरा देना अपनी अलग ही छाप छोड़ रही थी, जिसमें शायद शब्दों का कोई काम ही नही। अनुपमा पहले से ही बाहर खड़ी थी, उसने अपस्यु को अपना आभार व्यक्त की और दोनों मां-बेटी अंदर चले गए।

कुंजल को वहां 2 दिन और रुकना पड़ गया। डिस्चार्ज से पहले डॉक्टर ने खुद मुलाकात कि अपस्यु से और उन्होंने समझते हुए कहा…. "आने वाला एक महीना बहुत ही भारी होगा कुंजल के लिए। वो खुद तो कोशिश कर ही रही है लेकिन ऐसे केस में फैमिली कि बहुत इंपॉर्टेंस होती है इसलिए इसका अच्छे से ख्याल रखना। दवाई टाइम से देते रहना और केस अगर ना संभले तो बेहतर होगा रेहबिलेशन सेंटर भेज देना।"

अपस्यु ने डॉक्टर को धन्यवाद कहा और हॉस्पिटल से निकलने से पहले अराव को सूचित कर दिया। अपस्यु और कुंजल कुछ ही देर में घर के दरवाजे पर थे। कुंजल ने जैसे ही हॉल में अपना कदम रखा .. बूम-बूम धमाके की आवाज हुई .. चारो ओर लाल हरी चमकीली बारिश होने लगी.. सामने लगी बड़ी सी स्क्रीन पर कुंजल की प्यारी तस्वीर आने लगी। उसपर बड़े और बोल्ड अक्षोरों में लिखा आने लगा…. "Welcome Back, The Real Hero Of This House"

अगले कुछ दिनों तक सबने जैसी छुट्टी ले रखी हो, कोई घर से बाहर ही नहीं निकला। सुबह के 4 बजे से दिन शुरू होता, वर्कआउट फिर से अपनी रूटीन में शुरू हो चुकी थी। उसके बाद सरा दिन फैमिली के साथ मस्ती मज़ाक और ढेर सारी बातें। इस बीच अराव और लावणी की थोड़ी बहुत बातें होती रही, उसने भी खुशी के साथ ये कह दी थी "अभी पूरा समय उधर ही देना"। लेकिन हॉस्पिटल के उस रात के बाद साची ने अबतक अपस्यु से एक बार भी संपर्क नहीं किया था।

रविवार की सुबह थी, वर्कआउट के बाद तीनों भाई बहन हॉल में ही हल्ला-गुल्ला मचा रहे थे। आपस में इतने मशगूल थे कि किसी को घर की घंटी भी नहीं सुनाई दी। नंदनी ने जैसे ही दरवाजा खोला सामने कुछ मेहमान थे। कुछ जाने पहचाने चेहरे तो कुछ अनजान चेहरे… "जी हम अंदर अा सकते हैं क्या?"
Oh toh kunjal bapachi ho gayi...
Ab aisa kuch chamatkar ho jaye... crazy boy ke sath kunjal ki dosti ho jaye... phir ishq...
Dono yahin soche nischay aur jivu ki tarah thodi risk hai par yeh ishq hai yeh .
Let's see what happens next :D
Brilliant update... Great going :applause: :applause:
 

Naina

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Kunjal ke liye maine ladka dhund rakha hai pahle se :dazed: .. crazy boy ke liye kunjal ko pahle fb par aana hoga...
toh laiye... bas ek baari chuglibaz crazy boy inki life aa jaye fir toh moujja hi moujja..dhunwa aur aag dono ek sath dekhne ko milegi :D
 

rgcrazyboy

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Kunjal ke liye maine ladka dhund rakha hai pahle se :dazed: .. crazy boy ke liye kunjal ko pahle fb par aana hoga...
mere liye kise ko kaha ane ki jarut kaha hai.
apun ke liye to pari he kafi par tum ne vaha kuch hone na diya ab or kise ki tamana bhi na hai :dazed:
 
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