Update:- 158
"पागल".. अपस्यु इतना कहकर ऐमी की आखों में देखने लगा और ऐमी मुस्कुराती हुई… "क्या देख रहे हो।"..
अपस्यु ऐमी के होंठ को एक बार चूमकर अलग होते.. "तुम्हारा बचपना।"..
अपस्यु की बात सुनकर ऐमी हंस दी, फिर आंख मारती हुई पूछने लगी… "और क्या देखना चाहते हो।"
अपस्यु:- बचपन से शुरू हो गया, अब जवानी तक के दर्शन करवा दो।
ऐमी मुस्कुराती हुई होंठ से होंठ लगाकर चूमने लगे। अपस्यु जल्दी में उसके टॉप निकालने लगा… "बेबी रुको तो, कितने उतावले हो रहे हो.. आहह ! नाखून से छिल दिए ना पीठ।"..
अपस्यु अपने होंठ ऐमी के गले से लगाते… "तुम जवानी दर्शन बोलकर मुझसे मेहनत करवाओगी तो यही होगा।"…
ऐमी कूदकर उसके गोद में चढ़ती, होंठ से होंठ लगाकर चूमती हुई… "डायनिंग टेबल पर चलो।"
अपस्यु उसे गोद में उठाए डाइनिंग टेबल पर गया। चादर खींच सामान नीचे गिराते, ऐमी को डायनिंग टेबल पर लिटाया और और उसके जीन्स के बटन खोलना लगा। ऐमी अपना हाथ बटन के ऊपर डालती उसे खोंलने से रोकी और खुद नीचे उतारकर अपस्यु जो धक्के देती डाइनिंग टेबल पर लिटाई। तेजी से उसके पैंट और अंडरवियर को खोलकर नीचे फेक दी।
ऐमी के सामने अपस्यु का अर्द्ध विकसित लिंग था, जिसे वो अपने हाथो में लेकर मूठियाने लगी। अपस्यु पर मस्ती का पूरा सुरूर चढ़ने लगा। देखते ही देखते ऐमी ने लिंग को मुंह में के लिया और अपस्यु मजे में तेज तेज श्वांस लेने लगा।
इतने में ही ऐमी ने लिंग को मुंह से निकाल दीया। ऐमी के अलग होते ही अपस्यु अपनी श्वांस सामान्य करने लगा, इधर जबतक ऐमी डाइनिंग टेबल पर चढ़ी और अपस्यु के कमर के दोनों ओर पाऊं करती, हाथ पीछे ले जाकर अपने ब्रा के हुक को खोल दी।
अपने कमाल के स्तन को, ब्रा की कैद से आजाद करके, ब्रा को अपस्यु के मुंह पर फेकी। फिर अपने जीन्स के बटन खोलकर अपनी जिसने निकालकर उसके मुंह पर फेंक दी। उफ्फ क्या आदा से कमर को पीछे करके ऐमी ने अपने पैंटी को निकालकार अपस्यु के मुंह पर फेका.… अपस्यु उसे अपने हाथ में लेकर तेज श्वांस खींचा, और खो गया। ऐमी यह देख हर "ही ही".. करी और आराम से अपस्यु के कमर पर बैठ गई। लिंग योनि के ऊपर घिस रहा रहा था, ऐमी के स्तन अपस्यु के सीने में दबे हुए थे और ऐमी, अपने हाथ से अपस्यु के बाल को ऊपर करती, उसके आखों मै आखें डालकर देखती हुई अपने होंठ आगे बढ़ा दी।
अपस्यु उसके होंठ के रसपान में पुरा डूब गया और अपने हाथ नीचे ले जाकर, लिंग को उसके योनि में डाला और एक जोरदार झटका मारा। ऐमी होंठ को अलग कर लंबी सिसकारी भारी और ठंडी ठंडी श्वांस लेने लगी। अपस्यु अपने दोनो हाथ मजबूती से नितम्बों को दबोचे थे और उसकी दसों उंगलियां दरार में अंदर घुसी थी।
अपस्यु उत्तेजना में आकर अपनी उंगली गुदा मार्ग के इर्द गिर्द चलाने लगा। उंगलियों का ये स्पर्श ऐमी को गुदगुदी और उत्तेजना दे रही थी और इसी उत्तेजना में ऐमी ने अपस्यु के होंठ को अपने दांतों के भींचकर उसका रसपान करने लगी और अपने कमर पूरे उत्तेजना के साथ हिलाने लगी।
दोनो मस्ती में चूर एक दूसरे के साथ पुरा एन्जॉय करते रहे। और अंत में खाली होकर एक दूसरे से लिपटकर सो गए।ए
8 नवंबर 2014..
राजस्थान का जोधपुर महल को दुल्हन की तरह सजाया गया था। होम मिनिस्टर ने कुछ खास लोगों की मौजूदगी में अपने बेटे के सगाई का कार्यक्रम रखा था, जहां ज्यादातर मेहमान दोनो ही पक्षों के ओर से सामान्य थे। दिग्गज राजनेता, प्रमुख उद्योगपति और बड़े बड़े सरकारी अधिकारी।
महल के रास्ते से लेकर उस इलाके के चप्पे चप्पे में जैसे पुरा छावनी बना हुआ था। कलिका पूरी तरह से सज धज कर अपनी मां अनुप्रिया के साथ में बैठी हुई थी और उसके भाई बाहर लोगो से मिल रहे थे और पार्टी का लुफ्त उठा रहे थे।
शाम के 7.30 बजे सौरव और कलिका ने एक दूसरे को अंगूठी पहनाई और उसके बाद पार्टी का माहौल शुरू हो गया। आमुमन लगभग सभी कॉमन गेस्ट थे, और बचे हुए लोगो के साथ जान पहचान जारी थी। तभी सौरव और कलिका अपस्यु और ऐमी के सामने हुए। कुछ लम्हे के लिए कलिका और अपस्यु की नजर एक दूसरे पर ठहर गई, और उसके बाद अपस्यु उन पर ध्यान ना देकर ऐमी से बात करने लगा…
कलिका:- ये क्यूट सा बच्चा कौन है सौरव हमारी पार्टी में, इससे जान पहचान नहीं करवाओगे।…
सौरव:- मेरे पिताजी के कारन जिंदा बचा हुए लड़का है ये कलिका, इनसे पहचान कि जरूरत नहीं।
कलिका:- हमारे गेस्ट है ये सौरव, इतना रूड ना बनो।
सौरव:- तुम जान पहचान करो, मै 2 मिनट में आया।
कलिका अपना हाथ आगे बढ़ती हुई… "हेल्लो लिटिल ब्रदर, आई एम् कलिका।"..
अपस्यु हाथ मिलाते… "सिस्टर मुझसे रिश्ता जोड़कर लगता है होने वाले जीजाजी को तुमने नाराज कर दिया।"…
कलिका अपस्यु को हैरान करती उसे गले से लगा ली और धीमे से हंसती हुई कहने लगी…. "तुम्हारे जीजाजी को तो मै संभाल लुंगी, लेकिन जिस जगह तुम खड़े हो लिटल ब्रदर वहां पहुंचने के लिए लोग सालो मेहनत करते है और खुद को बनाए रखने के लिए तो उससे भी ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।"
अपस्यु:- सिस्टर डोंट वरी, मै सेल्फ मेड हूं और ये नामचिहन लोगो की महफिल में खुद को बनाए रखने के लिए मैंने भी अपना एक मुकाम हासिल किया है।
कलिका, अपस्यु से अलग होती उसकी आंखो में घुरकार देखती… "मुकाम पर बने रहो ऐसी मै प्राथना करूंगी। वैसे ये दिखता केवल सहर है, लेकिन है पुरा जंगल, अपना ख्याल रखना लिटल ब्रदर।
अपस्यु:- ये यदि जंगल है तो मै इस जंगल का शेर हूं सिस्टर। सियार कितना भी झुंड बनाकर मेरे शिकार की योजना क्यों ना बना ले, जंगल का तो एक ही बाप रहेगा। शायद अभी आपको जीजाजी के पास जाना चाहिए, बेचारे मेरा गुस्सा शराब पीकर निकाल रहे।
कलिका वहां से तुरंत सौरव के पास पहुंची, उसके जाते ही ऐमी… "भाई को पहचान गई बहना लेकिन वर्षों के बिछड़े भाई से मिलने का तरीका भी बिल्कुल निराला था।
अपस्यु:- जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन तैसी।
ऐमी:- जी गुरुजी समझ गई।
इधर कलिका सौरव के पास पहुंचकर… "तुम मेरे साथ आओ।"
सौरव:- नहीं जाओ तुम भी मेरे बाप की तरह मेरे दुश्मन की फैन हो जाओ। पहली ही मुलाकात में भाई बहन का प्यार जाग गया।
कलिका:- सभी गेस्ट को आपस में बात करने दो, तुम मेरे साथ आओ तुम्हे कुछ दिखाना है।
सौरव छोटा सा मुंह बनाए उसके साथ कमरे में पहुंचा… कलिका जबतक दरवाजा लॉक कर रही थी, सौरव शराब का एक पेग खिंचते… "दिखाओ क्या दिखाना है।"
कलिका मुस्कुराती हुई अपने लहंगे की डोर को खींचकर उसे जमीन में गिरने दी… "तुम्हे भी तो इन्हे रात भर मस्ती में देखना है ना।"
सौरव अपनी बड़ी आखों से उसके सुडौल टांगो के पुरा दर्शन करते तेजी के साथ उसके पास पहुंचा और बैठकर पैंटी के ऊपर अपना मुंह डालते… "क़यामत हो तुम कलिका, बस ऐसे ही गुस्सा शांत कर दिया करो।"..
कुछ ही देर में गद्देदार बिस्तर हुच हूच के आवाज़ के साथ ऊपर नीचे होने लगी। सौरव तेज तेज झटके मारते उसके बड़े बड़े स्तन को अपने दोनो हाथ में दबोचे हुए था और जैसे ही छुटने वाला हुआ कलिका बैठकर उसके लिंग को आगे पीछे करती अपना चेहरा सामने ले आयी।
सौरव की आखें पूरी बंद हो गई और पुरा कम कलिका के चेहरे पर फ़ैल गया।.. कलिका हंसती हुई कहने कहीं… "पुरा विदेशी वाली फीलिंग थी ना।"…
सौरव कलिका के दोनो निप्पल को अंगूठे में फसाकर पुरा खींचा… "आह सौरव, दर्द हो रहा है।"..
सौरव:- आज तो पूरी रात इन विदेशियों को फेल करने वाले आसान होंगे।
कलिका अपना चेहरा साफ करती हुई बिस्तर मै नंगी लेट गई… "सौरव कुछ ड्राई फ्रूट्स लेकर बिस्तर में आराम करो और वो सेक्स पॉवर वाली गोली कुछ देर बाद खा लेना। अभी पूरी रात बाकी है।"..
सौरव कलिका की बात मानते हुए बिस्तर से टिक कर बैठ गया और अपने हाथ से उसके स्तन को सहलाते हुए कहने लगा… "कितना अच्छा तो तुम उसे मारने कि योजना बना रही थी, फिर ऐसे उसके साथ प्यार जताने की क्या जरूरत थी। मै तो सुलग गया, मुझे ऐसा लगा जैसे कहीं तुम भी उसकी फैन हो गई तो वो कमीना अपस्यु फिर ना कहीं बच जाए।"
कलिका:- हा हा हा हा.. तुम अंदर की बहुत सी कहानी नहीं जानते सौरव.. इसलिए इतना पैनिक हो गए।
सौरव:- पैनिक ना हो जाऊं तो और क्या रहूं। एक तो उसके ऊपर की चिढ़, ऊपर से मुझे क्या पता तुम सबके दिमाग में क्या चल रहा है। मेरा बस चले तो इसे मारने के लिए तबतक लोगो को भेजता रहता जबतक कि ये मर ना जाए।
कलिका:- वो हमने भी कोशिश की थी लेकिन ये है बहुत दिमाग का तेज। लेकिन क्या करे कभी-कभी हम हारकर भी जीत जाते है और जितने की आदत रखने वाला खिलाड़ी अपनी जीत में यह भुल जाता है कि आज के जंग में मिली जीत मात्र एक दिखावा था, ये परखने के लिए की वो कितना सक्षम है।
सौरव नीचे झुककर स्तन के निप्पल के ऊपर वाले गुदाज मांस पर जोड़ से डांट काटते हुए… "सीधा सीधा बताओ जो दिल को सुकून दे, वरना बताओ ही नहीं। मुझे अपने मज़े करने दो।"
कलिका उसका बल पकड़कर उसका चेहरे अपने चेहरे के पास लाई और उसके होंठ को चूमती हुई, उसका सर अपने दोनो पाऊं के बीच रखती उसके मुंह को योनि के ऊपर दबाकर अपनी कमर हिलाने लगी… "हमने 40 लोग मारने भेजे थे, जो इसे खत्म कर दे, ताकि ये हवाला वाला प्लान के पहले ही इसकी कहानी खत्म। क्योंकि कौन फालतू में इंतजार करे की ये कब 2 लाख करोड़ जमा करेगा या कर भी पाएगा की नहीं।"..
सौरव उसके क्लीट के साथ खेलते… "वो तो जिंदा है ना, फिर क्या बच्चो को मारने भेजी थी।"..
कलिका:- हां वो जिंदा बच गया क्योंकि सोच से भी पड़े उसका मैनेजमेंट है। वो हमारे 40 लोगों को तो क्या, बल्कि आधे लोग को भी ना संभाल पाए। हमारे 40 लोगो को गायब करने वाला और कोई नहीं बल्कि हमारे पुराने एक दुश्मन (लोकेश) की टीम थी। खैर ये भी अच्छा हुआ। इस से 2 बात पता चली..
सौरव:- क्या ?
कलिका:- पहली ये की वो हमेशा स्ट्रॉन्ग बैकअप अपने पास रखता है और दूसरा ये की लड़ाई में घायल मेरे सभी आदमी को वो बंदी बनाया, जिसके हथियार पर सर्विलेंस कैमरा था। इसी वजह से मुझे अपस्यु के स्ट्रॉन्ग बैकअप का पता भी चला और उम्मीद है कल से वो हमारे लिए काम करे।
सौरव योनि के ऊपर से उठा और टेबल ओर पड़ी टैबलेट खाते हुए उसके सीने के इर्द गिर्द, अपना पाऊं दोनो ओर रखकर अपने सोए लिंग को उसके गाल से लेकर चेहरे कर घिसने लगा… "मै तो कहता हूं अपस्यु के साथ मेरे बाप को भी खत्म कर दो। साला बहुत दिमाग खाता है, मुझे आगे बढ़ने नहीं देता और उस कुत्ते अपस्यु के लिए पुरा मरता है। ये बाप मेरा कभी नहीं होगा।
दोनो के बीच सेक्स और बातचीत का दौर काफी लंबा चलता रहा और जब फाइनली दोनो सोने के लिए अपनी आखें मूंद रहे थे, दोनो ही एक दूसरे के विचार और पूर्व में किए काम से लेकर भविष्य कि योजनाओं तक हर काम में संतुष्ट होकर सोए।