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Incest प्यासे दिल के अरमान

p696r

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INDEX


Pyase Dil Ke Armaan

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p696r

Human Minds have no Limitations
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We are waiting for the banger.
And yes new characters are needed to run but they should be sideways, central character should be there throughout.
Sahi kaha bro, Story Progress ke liye New Character Introduction jaroori hai varna itne time se vahi repetitive characters ki vajah se story ka maja kharab ho jayega.
Par Jo Characters Ayenge Wo Family Related hi honge jisse Family Sex ka maja. Kharab na ho.
 
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Ristrcted

Now I am become Death, the destroyer of worlds
Staff member
Sr. Moderator
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Hello dear :hello:

This message is sent on behalf of XF admin team.
You are one of the best writers of XFORUM. And your story is also going very well. So we have got you an opportunity to win
Prizes Worth upto 15000 Rupees. We are here request you to write a short story for USC.
I hope aapki mehnat aur imagination is contest mein Char Chand laga degi aur XFORUM ke deewano ki list din doguni aur raat chauguni badhati rahegi, aur hum XF ko ek next level tak lekar jaayenge. Isiliye is baar bhi winners k liye
Exciting Prizes hain so make sure you write a masterpiece.

Jaise ki aap sabhi Jante Hain is baar Hum USC contest chala rahe hain aur Kuch Din pahle hi Humne Rules & Queries Thread ka announce kar diya tha aur ab Ultimate Story Contest ka Entry Thread air kar diya hai jo 2nd April ko open hoga aur 25th April 2026, 11.59 PM ko band ho jaaega. All times are in IST.

Khair ab main point par aate hain, jaisa ki entry thread aired ho chuka hai isliye aap sabhi readers aur writers se meri personally request hai ki is contest mein aap jarur participate kare aur apni kalpnao ko shabdon ka rasta dikha ke yaha pesh kare ho sakta hai log use pasand kare.
Aur jo readers nahi likhna chahte wo bakiyo ki story padhke review de sakte hai mujhe bahut khushi hogi agar aap is contest mein participate lekar agar Review likhenge.

Ye aap sabhi ke liye ek bahut hi sunhara avsar hai isliye aage bade aur apni kalpanao ko shabdon mein likhkar duniya ko dikha de.

Ye ek short story contest hai jisme Minimum 700 words aur maximum 7000 words tak allowed hai itne hi words mein apni story complete karni hogi, Aur ek hi post mein complete karna hai aur Entry Thread mein post karna hai.

I hope you will not disappoint me and participate in this ultimate story contest and write your story.


Apni story post karne ke liye is thread ka use kare ~ Entry Thread
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Rules check karne ke liye is thread ko dekho ~ Rules & Queries Thread
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Kisi bhi story par apna review post karne ke liye is thread ka use kare ~ Review Thread
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Story se related koi doubt hai to iske liye is thread ka use kare ~ Chit Chat Thread
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Aur aapne jo story likhi hai uske words count karne ke liye is tool ka use kare ~ Characters Tool


Prizes

Position​
Benifits​
Winner​
6000 Rupees + Award + 10000 Likes + 30 days sticky Thread (Stories)​
1st Runner-Up​
2500 Rupees + Award + 7000 Likes + 15 day Sticky thread (Stories)​
2nd Runner-UP​
1000 Rupees + 5000 Likes + 7 Days Sticky Thread (Stories)
3rd Runner-Up​
5 Months Prime Membership + 3000 Likes​
Best Supporting Reader (top 3)​
3 Months Prime Membership each
+ Reader Award + 3000 Likes​
Members reporting CnP Stories with Valid Proof​
500 Likes for each report​


______________________________________________________________

:thanks:
On Behalf of Admin Team
Regards - XForum Staff.
 

p696r

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अपडेट लिख के Ready है Guys,बस अब जल्द ही Edit करके Upload कर दूंगा और इस बार जो तबियत से बजाई है,भौकाल कायम हो गया......सही में मां ही चोद दिए, भैयाजी:what2:

maa chod diye ho bhai ji
 
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Pk8566

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अपडेट लिख के Ready है Guys,बस अब जल्द ही Edit करके Upload कर दूंगा और इस बार जो तबियत से बजाई है,भौकाल कायम हो गया......सही में मां ही चोद दिए, भैयाजी:what2:

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p696r

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अपडेट - 27
( Threesome Special )

रगो में उठे एक तूफान से जिस्मों की गर्मी इतनी बढ़ी कि जिसमें सारे रिश्ते जलकर राख बन गए, अपनी मां होने का दावा करती आंटी को देखकर विशाल की भावनाएं बेकाबू हो जाती हैं और वो उसकी गांड़ में अपना लंड पेलने लगता है साथ ही वो वाइब्रेटर को भी ऑन कर देता है,वेदिका मिन्नते करते हुए उसे मना करती है पर वो उसकी बात नहीं सुनता आखिर में शरीर में उठे कंपन में उसकी बेटी रुचि एक मरहम बनकर आती है और वो तीनों कमरे में बंद हो जाते है।


कमरे में आते ही मां बेटी के होठों का विक्षेप होता है और वो उनसे कुछ दूरी पर खड़ी रह जाती है,जहां रुचि सहमे हुए तेज़ सांसों के साथ सामने का नज़ारा देख रही थी जैसे उसे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा हो क्योंकि सामने ही उसकी मां किसी बाजारू रंडी की तरह चुद रही थी,विशाल ने वेदिका को खड़े हुए आगे से झुकाकर रखा था,उसके दोनों हाथों को पकड़कर पूरे जोर के साथ धक्के लगाए जा रहा था जिससे वेदिका का बदन तूफान में किसी पत्ते की तरह हिल जाता था।वेदिका का चेहरा पूरा आंसुओं और पसीने में भीग चुका था,वो रोते हुए विशाल को रुकने के लिए कह रही थी पर उसकी इस हरकत से विशाल ज्यादा Wild हो जाता था।
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वेदिका : Nooooo......Nooo.......plzzzz........बेटू........ आआहहहह्.........Stooppp Thiiisss........मेरी बेटी के सामने ही तुम मुझे कैसे........Snifff........I beg you.......God Sake........ओओओहहहह्............
रुचि : Momm.......आप ऐसे!!?.........भैया के साथ........ क्यूं!!!?.........
वेदिका : Uummhh........नहीं बेटा मत देखो......... ओओओहहहह्अअअ..........तुम बाहर चली जाओ..........आआआअअ्.........आआआहह्........... हांहाआ....हाअअहह्.......हाहांहाहाआआआआहाहाहहह्..............Ohhhh Fucckkk..........

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विशाल ने पीछे से वेदिका के बालों को पकड़ा और उससे खींचकर अपने पास लाते हुए कहा,"क्यों बे छिनार,अभी थोड़ी देर पहले तो घरवालों को आपस में ही चुदाई करनी चाहिए ऐसा बोल रही थी और अब मना करते हुए चुदने का मजा ले रही है।" इतना कहकर वेदिका की कनपटी के पास एक थप्पड़ जड़ दिया।अपनी मां को ऐसे चुदते हुए देखकर रुचि की उत्तेजना सर चढ़ने लगी थी जिससे वो उसने अपने कपड़े उतारकर अपनी चूत मसल रही थी तभी विशाल ने उसे अपने पास आने का इशारा किया जिससे वशीभूत होकर गांड़ की लचक के साथ उसकी ओर बढ़ने लगी।
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वेदिका सहमते हुए : नहीं बेटू,ऐसा मत करो.......ऊंऊउन्न्ननहहह्........मुझे जितने चाहे उतना चोद लो पर उसे इन सब में मत घसीटो........
वेदिका अभी इतना बोला रही थी कि तभी रुचि उसके चेहरे के बिलकुल पास पहुंच गई और उसे होठों को हल्के से चूम लिया और अपनी मां को बाहों में लेते हुए कहा,"I'm Sorry Mom" अब वेदिका दोनों के बीच खड़ी थी जिससे रुचि ने अपना मुंह वेदिका के कंधे पर रख दिया और विशाल सामने से उसके होठों को चूमने लगा,दोनों जिस्मों की गर्माहट अब वेदिका के सौम्य बदन को मेहसूस हो रही थी,साथ ही वो हैरान नजरों से इस लम्हे को देख रही थी।

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जिस्मों की मदहोशी से बाहर आते ही वेदिका दोनों से अलग हुई और दौड़कर बेड पर जाकर बैठ गई, तेज़ सांसे, पसीने में भीगा बदन और आंखों में सवाल लिए वो सामने की तरफ देख रही थी,उसे अभी भी अपने सामने के नजारे पर विश्वास नहीं हो रहा था,आंटी के हट जाने से हम पर इसका कोई असर नहीं हुआ,हम जैसे प्यासे परवानों की तरह एक दूसरे के जिस्मों पर अपना प्यार लूटा रहे थे।यह मंजर आंटी की आंखों को ज्यादा गवारा नहीं हुआ इसलिए वो अपने मुंह पर हाथ देकर रोने लगी।

वेदिका : Snniifff.....क....कैसे!!?.......क्यों?.......तुम दोनों भाई बहन होने बावजूद ऐसा कैसे कर सकते हो?!!.....रुक जाओ.......plzzz....... माना जिस्मानी आवेश में आकर मुझसे ग़लती हो गई पर एक विधवा होने के नाते अकेलेपन में मुझसे ये हो गया पर तुमने ऐसा क्यों किया.......जवाब दो।
वेदिका की बात सुनकर दोनों के होठ थम गए,दोनों के जिस्म एक दूसरे से लिपटे हुए थे और विशाल की उंगलियां अब भी रुचि की चूत में थी जिसे वो हल्के से सहला रहा था।
रुचि : आआहह्........आपने हमारी यह गलती तो दिख रही है पर आपने एक पल के लिए भी ये सोचा कि मैंने ऐसा क्यों किया? बचपन से में अकेली रही हूँ और जब डैड गुजरे तब उसका सदमा मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ तब विशाल ने ही मुझे संभाला,मुझे उस गम के सागर से बाहर निकाला तो मैं कैसे किसी बाहर वाले पर भरोसा कर बैठती,वक्त के साथ हमारी नजदीकियां बढ़ी और यह एहसास प्यार में बदल गया।इतना कहकर वो नीचे बैठी और विशाल के लंड को अपने मुंह में भरकर चूसने लगी।

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वेदिका : पर इस रिश्ते को ये समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा,तुम्हारी कोई पहचान नहीं होगी,पूरी जिंदगी ज़िल्लत मैं बितानी पड़ेगी।
विशाल : तो मैने कब कहा कि हम दोनों इस रिश्ते को कोई नाम देनेवाले है। विशाल की इस बात से वेदिका फिर चौंक गई।
विशाल : हम दोनों ने सब चीज़ों के बारे में सोचकर ही यह संबद्ध बनाया है,हमारा रिश्ता प्यार से अधिक वासना पर टीका है इसलिए ख़ुदसे प्रामाणिक होकर हमने खुदकी जिस्मानी जरूरत पूरी करने के लिए ही इसे अपनाया है, मैं रुचि के अलावा भी कई औरतों के साथ संबद्ध बना सकता हूं इस लिए रुचि मेरे लिए एक रखैल के बराबर है।


एक रखैल जो सिर्फ चोदने के लिए होती है
(मेरे घर की Personal रंडी)
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विशाल की इस बात से वेदिका पर जैसे आसमान टूट पड़ा हो,एक भाई अपनी ही बहन को एक रखैल का दर्ज़ा दे रहा है और उस लड़की ने अपना मान-सम्मान भुलाकर इसे स्वीकार भी कर लिया,उसका दिमाग़ इन्हीं सब बातों के बारे में सोचकर फट रहा था इसलिए वो अपना सर पकड़कर बैठ गई,विशाल ने रुचि को रुकने को कहा और वो बेड पर वेदिका के पास जाकर बैठ गया।विशाल को पास बैठे देखकर वेदिका ने उसकी तरफ देखा,प्यारे से चेहरे पर आंखों में आंसू सुबह की ओस समान लग रहे थे जिसपर किसी को भी प्यार उमड़ आए।
वेदिका : मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा, तुम दोनों इस हद तक कैसे पहुंच सकते हो?
विशाल : इसे लफ्जों में बयां करना मुश्किल है मॉम,रिश्ते नाते,सही गलत सब भूल जाईए,सिर्फ अपने जिस्म की पुकार सुनिए की वो क्या चाहता है?अंदर की उस उत्तेजना को महसूस कीजिए, वासना ही सब कुछ है और हवस ही इसका स्त्रोत है।
यह कहते हुए विशाल वेदिका की गर्दन,योनि और स्तन के हिस्सों को हल्के से मसलने लगता है।

Sneha 20
इसके साथ इस भाव में लीन होकर वेदिका का विरोध भी टूटने लगता है,उसकी आँखें बंद होती हैं और दोनों के लब्ज़ एक हो जाते है,विशाल अपनी आंटी की चूमते हुए गोद में उठाता है जिससे वेदिका एक बच्चे की तरह उससे लिपट जाती है,उसकी गांड़ से गाढ़े वीर्य की कुछ बूंदे फिसल रही थी जिसे विशाल ने भी महसूस किया इसलिए उसने वहां अपना लिंग रखा और हल्के से वेदिका की गांड़ में उतार दिया,इसके साथ उसने हल्के से धक्के लगाने शुरू कर दिए।
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रुचि कुछ पल देखती रही उसके बाद वो खड़े होकर हमारे पास आ गई, मैं आंटी के साथ गहरे किसिंग में खोया हुआ था इसलिए उसने अपनी जुबान निकाली और हमारे मुंह के पास आते हुए हमारे होठों के बीच रख दिया,हम दोनों को होश आया और रुचि की जीभ को चूमते हुए अपने होठ मिलाने लगे।उसके बाद सभी अपनी जुबान मिलाकर उसका थूक एक-दूसरे के मुंह में लेकर उसका स्वाद लेते रहे।
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रुचि ने अपनी उंगली वेदिका की गांड़ के छेद के पास रखी और उस पर हल्के से घुमाते हुए अंदर डाल दी जहां मैं अभी भी धक्के लगाए जा रहा था।
रुचि ने वेदिका के गाल चूमते हुए पूछा,"भैया मैं देख रही हूँ कि आप कब से मां की सिर्फ गांड़ ही मारे जा रहे है।" रुचि के पूछने पर मैंने उसे सारी बात बताई,जिसे सुनकर रुचि ने वेदिका के सिने पर सर रखते हुए कहा,"मां आपकी इस मुश्किल मैं होने के नाते हम बच्चों का फर्ज हैं की हम आपकी मदद करे।"
वेदिका के मुंह पर पसीने और थूक लगा हुआ था,"पर बेटा इसकी को......ऊऊउमम्हहह्........." वो आगे बोलने वाली थी कि तभी रुचि ने होठों से उसका मुंह बंद कर दिया कुछ पल बाद वो अलग हुई और जल्दी से अपने कमरे से एक बेल्ट पहनकर आ गई, यह बेल्ट कमर के साथ उसके चूत के हिस्से से होकर पीछे गांड़ के ऊपर कमर तक लगता था और उसके चूत के हिस्से के हिस्सा खाली था जहां किसी भी साइज़ का डिल्डो फिट हो सकता था,वो बेड के पास पड़े वेदिका के बेड के पास गई और उसमें से एक 8 इंच लंबा और 2 इंच जितना बड़ा डिल्डो निकालकर उसे फिट कर दिया।

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रुचि ठीक अपनी मां के पास आकर खड़ी हो गई उसे इस तरह खड़े देखकर विशाल समझ गया कि उसके मन में क्या चल रहा है,यह देखकर उसके चेहरे पर मुस्कान उभर गई। वेदिका की नजर विशाल की तरफ होने की वजह से रूचि क्या करना चाहती है यह वो नहीं समझ पाई।विशाल के अभी झड़ने की वजह से उसने अपना लंड गांड़ से बाहर निकाल दिया था।
वेदिका (लंबी सांसे लेते हुए) : बस बेटा,अब मुझे नीचे उतार दो तुम कब से मुझे उठाकर खड़ हो।
विशाल : अरे इतने से क्या होगा,मेरा बस चले तो मैं जिंदगी भरे ऐसे ही अपनी गोद में उठाए रखूं।
वेदिका : ओहोहह्......तो मेरे बेटे मैं इतना दम है?!
विशाल : क्यूं अब भी कोई शक है क्या?
वेदिका विशाल के टोपे पर जोर लगाते हुए,"चलो फिर एक बार फिर हो जाएं जरा मैं भी तो देखूं।"

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अभी विशाल के लंड ने उसे गांड़ की छुआ था कि उसे साथ ही उसे एक ओर लंड महसूस हुआ जिसके छूते ही उसने पीछे देखा तो रुचि खड़ी थी वो चौंकते हुए कुछ बोलने जा रही थी कि विशाल के इशारे पर दोनों ने एक तेज़ धक्का लगाते हुए आधा लंड उसकी गांड़ में उतार दिया।

एक दर्द की तेज़ लहर गांड़ के छेद से निकलते हुए बिजली की गति से पूरे बदन से गुजरते हुए सिर तक पहुंच गई,उसे लगा जैसे उसके जिस्म को बीच से किसीने चीर दिया हो,एक पल के लिए सहमते हुए उसकी आँखें खुली रह गई और अगले ही पल............आआआआआआआआआहाहांहाहाहहह्आआआआहाहाहाहाहहहह्अअअअअआअअ................ ओओओओओऐओओहहह्हह्हह्हह्अअअअअ्...................ऊंऊउउउउन्न्नन्नन्नहहहहहह्................. ओओहहहहअअअअअ्..............
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बुरी तरह चिल्लाते हुए वो छटपटाने लगी क्योंकि एक साथ 2 मोटे लंड उसकी गांड़ में उतर गए थे जिसकी वजह से गांड़ का छेद 5 इंच जितना चौड़ा हो गया था,विशाल के साथ हुए संभोग से उसका दर्द जैसे-तैसे कम ही हुआ था कि दोनों ने मिलकर फिर से अंदर की दीवारों को चीर दिया था जिससे खून की धार बहकर नीचे जमीन पर गिर रही थी और वेदी बुरी तरह रोते बिलखते हुए विशाल को मुक्के मार रही थी।
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वेदिका : .........मादरचोदो........चूतियों......तुम लोगो के मां की चूत
...........भोसड़ीवालो ऐसा करनें के लिए किसने कहा था!!??........बोल बहनचोद........ किससे पूछकर तूने ये कदम उठाया हरामखोर..........
विशाल : प्लीज़ मां शांत हो जाओ.......रुक जाओ........ मैं समझता हूं..........मेरी बात तो सुनो..........पर वेदिका फिर भी नहीं रुकती,वेदिका के ज्यादा हिलने की वजह से तीनों का बैलेंस बिगड़ने लगता है,विशाल को लगा अब वो शांत नहीं होगी इसलिए वो रुचि को बेड की तरफ इशारा करता है जिसमें वो हां में सर हिलाती है और तीनों बेड पर गिर पड़ते है,गिरने के साथ ही विशाल अपनी आंटी का पैर थोड़ा ऊपर उठा लेता है जिससे उन्हें कुछ राहत मेहसूस हो,रुचि वेदिका के चेहरे को घुमाकर उसके होठों को चूमने लगती है और विशाल उसके स्तनों को मुंह में भर लेता है,भाई-बहन दोनों तरफ से उसे अपनी बाहों में भर लेते है।

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कुछ मिनिट तक ऐसा करने के बाद उनकी मेहनत रंग लाती है और आखिर ने वेदिका शांत हो जाती है,जब वो अपने बच्चों की तरफ देखती है तो वो दोनों बड़े प्यार से उसे देख रहे थे,साथ ही उसने देखा तो विशाल को मारने की वजह से उसके नाखून विशाल के सीने पर लगे थे।उनके बीच फैली अजीब सी खामोशी को विशाल ने तोड़ते हुए कहा,"मां तुम्हारी गांड़ में फंसे डिल्डो को निकालने का हमें यही सबसे आसान तरीका लगा इसके लिए तुम हमे चाहो तो सज़ा दे सकती हो।" विशाल की बात सुनकर वेदिका कुछ नहीं बोली,वो नाराज़ थी इसलिए उसने ज्यादा कुछ नहीं कहा अपनी नज़रे उनसे हटाकर अपने पांवों को थोड़ा फैला दिया।दोनों भाई बहन ने इस बात को उसकी सहमति जताकर एक साथ धीरे से धक्के लगाते हुए लंड अंदर डालने लगे,कमरे में वेदिका के सिसकने की और कराहने की दर्दभरी आवाजें गूंजने लगी।
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दोनों एक लय के साथ धीरे-धीरे लंड को बाहर निकालते और अंदर डालते ऐसा करने से शुरुआत में थोड़ा खून निकला उसके बाद गांड़ की दीवारें खुल जाने की वजह से उन्हें आराम मिल गया अब वक्त के साथ धक्कों की रफ्तार भी बढ़ती जा रही थी जिसकी वजह से दोनों का लंड गांड़ के कोने तक पहुंचता।अब दीवारें खुल जाने की वजह से वाइब्रेटर कोने से फ़िलसते हुए नीचे आने लगा जिसे सबने महसूस किया,रुचि अपनी मां के स्तनों को दबाते हुए उनकी पीठ को चूम रही थी और विशाल गर्दन पर अपने होठ घुमा रहा था,इस एहसास में वेदिका का जिस्म फिर डूबने लगा जिससे उसकी चूत के साथ गांड़ भी पानी से भीगने लगी।अब कमरे में..........Faaachhh.........Fffaaachhh.........Puuchhhh.........Frruuuchhhh..........Taappp.......Taappp........ Taaapppp.........Fwwoookkk....... Fwwwoopp.........
Sneha-Double-check
जैसी पड़छंद आवाजें पड़ रही थीं।रुचि के बेल्ट डिल्डो में चूत के पास एक Section Pump जैसा छोटा हिस्सा था और उसने जो डिल्डो लगाया था उसमें पुरुष के लिंग जैसा छोटा हॉल बना हुआ था जिससे चूत से निकलता पानी और वीर्य सीधा बाहर आ सके।इस वक्त दोनों चरम सीमा पर थे और आखिर में वेदिका को चूमते हुए उसकी गांड़ में झड़ने लगे। तीनों के सांसों की गर्मी आपस में मिल रही थी।

अब फिर शुरू करने से पहले रुचि ने कहा कि वेदिका के मुंह को उसकी तरफ रखे इसलिए रुचि पहले बेड पर लेट गई,उसके ऊपर वेदिका को लेटाया और उसके पीछे विशाल चढ़ गया तीनों अब Sandwich Postion में आ गए थे,रुचि की नजरे अपनी मां के कमल से गुलाबी चेहरे पर ठहरी जिसके लब अब भी थरथरा रहे थे,दोनों के अंदर भावनाओं का सैलाब आया और सीने के उभार मिलकर लब्जों के साथ दोनों एक हो गए।
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I'm Sorry Mom.........ऊंऊउमम्हहह्..........ससीईइइइपपप्....... ऊंऊउन्न्ननहहह्..........Snniifff........ कोई बात नहीं मेरी बच्ची........आआहहहह्.........ममम्म्महहह्...........श्शश्शशशहहह्............आआआहह्.........आआहह्........... ओओहहहह्...........
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दोनों मां बेटी की भावनाएं होठों के जरिए बया हो रही थी,रुचि क्यों वेदिका को अपनी तरफ करने को कह रही थी मुझे अब समझ आया था ताकि वो उनके मन के अंदर की रंजिश निकाल सके।अब मुझे माहौल थोड़ा ठीक लगा इसलिए हम दोनों ने फिर लंड पेलकर उनकी चुदाई शुरू कर दी।आंटी की सिसकियां सुनकर पता चला कि अब वो भी खुलकर चुदाई का मजा लें रही है।
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वेदिका : आ..आआ....आआ......आआआहह्........तुम दोनों ऐसे चोद रहे है जैसे मैं कोई बाजार की दो टके की रांड हूँ,उनकी बात सुनकर मैंने उनकी गांड़ पर चमाट बजाने लगा।
विशाल : बाहर बड़ी संस्कारी बनती है छिन्नार और अब अपने बच्चों से ही चूद रही है।
वेदिका : जरा धीरे मार बहन के लौड़े,इसे अपनी प्राइवेट प्रॉपर्टी समझा है क्या?
विशाल : थोड़ी देर पहले तो रो रही थीं अब रौब तो देखो चुदक्कड़ का,साली तू हमारे लिए रांड ही रहेगी।
रुचि (चूचे दबाकर) : बाहर के मर्दों को बड़ा पिलाया है जरा अपने बच्चों का भी भला कर दे,इतने दूध का पनीर बनायेगी क्या?
वेदिका : एक लौड़ा कम था तो ये भोसड़ीवाली दूसरा भी ले आई और वो भी इतना बड़ा की गांड़ में ठीक से फिट भी नहीं आता।
विशाल : जुबान संभाल के बात कर रंडी,अगर हम चले गए तो तेरी गांड़ की प्यास बुझाने कोई बाहर वाला नहीं आयेगा।
वेदिका : अबे जा,तू क्या समझता है कि सिर्फ तू एक ही मर्द है,इस उम्र में भी अगर ब्लाउज का एक बटन भी खोल दूं तो खड़े-खड़े ही जवान क्या बूढ़ों का भी पानी निकल जाए।
विशाल (बाल खींचकर) : इतना गुरूर है हरामी कि औलाद,लगता है तेरी मां की किसी जमाने में कोठे की रांड होगी।
वेदिका : सिर्फ बातों से ही तेवर दिखाएगा क्या,दम नहीं है नामर्द कही के.........जोर से चोद ना.......... आआआआहाहांहाहाआआआआहाहाहहह्..........फाआआडडड् देनानाआआहह्.........मेरी फुद्दी.........ओओओओओफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्........... Fuuuaacckkkk........ it's so Haarrdddd..........Yeeessasss...............

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आंटी की बात सुनकर मैने पास में पड़ा बेल्ट उठाया और उसे आधा Bend करके उनकी पीठ पर मारने लगा,हर वार के साथ उनकी गांड़ सिकुड़ जाती और चूत पानी छोड़ने लगती।कुछ पल ये सब चलते रहा आखिर में मैं उनके ऊपर झुक गया और उनके पेट पर दोनों हाथ लपेटकर धक्के लगाते हुआ कहा,"रुचि मेरा। छूटने वाला है........Oooffffff..........."
रुचि : Haannn........भैया मेरा भी.......... I'm Cumming.........Ooohhh Yeeaahhh..........
वेदिका : भर दो मेरी पूरी गांड़..........Filll Me from Behind.........Aaaahhhhhhhhhh.............Mooommmm............

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हम तीनों की एक साथ चीखें दीवार से टकराई और सभी का पानी निकल गया,तीनों ने काफी टाइम बाद ऐसा Orgasam मेहसूस किया था,आज के दिन आंटी ने कई बार चरमसुख प्राप्त किया था इसीलिए उनका शरीर कांपने लगा था,हम दोनों के लंड बाहर निकलते ही Tuuaapp की आवाज के आवाज वाईब्रेटर बाहर गिर पड़ा,हमने देखा तो आंटी के जांघ का पूरा हिस्सा चूत के पानी में भीग चुका था,आखिर में आंटी बेड पर आंखे बंध करके लेट गई और हम दोनों स्तनपान करने लगे।
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आज वर्षो बाद उनके चेहरे पर एक शांति थी क्योंकि उनके दोनों बच्चे उसका दूध पी रहे थे।कुछ देर आराम करने के बाद मेरी नजर दरवाजे के पास पड़े केक पर पड़ी जिसे देखकर मेरे दिमाग में ख्याल आया और मैं उसे उठाकर बेड पर ले आया।
विशाल : मॉम, आप पीठ ऊपर करके उल्टा लेट जाओ और अपने जिस्म को कमर के हिस्से से ऊपर रखना।
वेदिका : इतना करने के बाद भी अब कुछ बचा है??!
रुचि : भैया ऐसे मानने वाले नहीं है मॉम,चुदाई के मामले में यह शातिर खिलाड़ी है।यह सुनकर आंटी ने मेरी तरफ देखा और उल्टा लेट गई।

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मैंने उनकी गांड़ के हिस्से को देखा जो नीचे से लेकर पेट तक सूज गया था इसलिए मैने केक को हल्के हाथों से छेद के आसपास लगाना शुरू किया, शुरुआत में तो उनको दर्द हुआ पर उसके बाद उनको हल्की राहत महसूस हुई,केक के क्रीम को थोड़ा ऊपर लगाने के बाद केक को धीरे-धीरे उसके गांड़ के अंदर डालने लगा,आधे से ज्यादा केक उसकी गांड़ में समा गया।

वो उठकर बेड पर बैठ गई तो उन्हें अंदर काफी भरा हुआ महसूस हुआ,वो सवालों भरी नजरों से मेरी ओर देखा तो मैं बेड पर सर रखकर लेट गया,मुझे ऐसा करते हुए देख उन्होंने कुछ सोचा और जैसे उन्हें समझ आया वो थोड़ा शर्मा गई।
वेदिका : बेटा तुम बहुत शैतान हो,आखिर तुम्हारे दिमाग में यह सब ख्याल कैसे आते है?
विशाल : क्या मॉम इसमें क्या शर्माना,अब आ भी जाओ
मेरी बात सुनकर वो खड़ी हुई और मेरे चेहरे के पास आकर दोनों टांगे फैलाकर बैठ गई जिससे उनकी गांड़ ठीक मेरे मुंह पर आकर रुकी।

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मैंने उसे दोनों हाथों से पकड़ा,दोपहर से मैंने उनकी गांड़ में काफी वीर्य स्खलन किया था जिससे वो केक के साथ मिलकर अब बाहर आ रहा था,वेदिका गांड़ से थोड़ा जोर लगाते ही वो स्वादिष्ट मिश्रण वीर्य में घुलकर बाहर आने लगा, मैंने अपनी जुबान से गांड़ को साफ करते हुए चॉकलेट के साथ वीर्य का मिलजुला स्वाद लेने लगा।कुछ देर बाद मैं खड़ा हुआ और रुचि ने भी अपनी भूख शांत की।
वेदिका : पेट भर गया मेरे बच्चों का,अब खुश?? पर तुम दिनों को ऐसे खाते हुए देखकर मुझे प्यास लगने लगी और यहां पानी भी नहीं है।
मॉम की बात सुनकर हम दोनों एक दूसरे की तरफ देखकर मुस्कुराए,इस मुस्कान को देखकर वो समझ गई कि हमारे खुराफ़ाती दिमाग़ में फिर कुछ चल रहा है और वहीं हुआ मॉम को बेड पर मैने अपना लंड रुचि की चूत में डाला और हम दोनों का क्षार रूपी गर्म पानी हमारे गुप्तांग से बाहर आने लगा जो उनके मुंह में गिर रहा था, एयरकंडीशन से ठंडे हो चुके इस कमरे में यह मिश्र द्रव्य पीकर उनके गले को काफी राहत मिली,हमारे संभोग समारोह के पूर्ण होते ही हम तीनों बाथरूम में चले गए,जहां जिस्मों के घर्षण के बीच मैने अपने यूरिन से आंटी की गांड़ को अंदर तक साफ किया और दोनों मां बेटी ने मेरे लंड को अपने मुंह से स्खलित किया, इसी के साथ हम तीनों बाहर आ गए।

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मैं तैयार होकर बाल्कनी में पहुंचा तो सूरज ढल चुका था,सूरज आसमान में अपनी केसरी परत छोड़कर दूसरी तरफ अंधेरा क्षितिज में फैलने लगा था, मैंने घड़ी देखी तो 7:30 बज चुके थे इसलिए मैने Zomato ओपन करके सब के लिए बाहर से खाना ऑर्डर कर दिया,बाहर आने के बाद आंटी का मूड थोड़ा बदला हुआ लग रहा था और उनसे ठीक से चला भी नहीं जा रहा था फिर भी वो रुचि के साथ मिलकर मेरा कमरा ठीक करने लगी,सब कुछ ठीक करके हम सब जब नीचे हॉल में पहुंचे तो देखा कि मेरे पापा अब तक सो रहे थे,यह बात हम सबको अजीब लगी इसलिए मैने कहा।
विशाल : अजीब बात है सुबह आने के बाद पापा एक बार भी नहीं उठे।
वेदिका : हां बेटा,मुझे भी अजीब लग रहा है कही उनकी तबियत तो खराब नहीं?
हमारी बात सुनकर रुचि मंद-मंद मुस्कुरा रही थी जिसे आंटी ने देख लिया इसलिए उन्होंने उसके कान खींचते हुए कहा,"लगता है यह सब इसीका किया धरा है,बदमाश बता क्या किया है तूने?"
रुचि : Oouch......Ouuchh.......बताती हूं पर पहले मेरा कान तो छोड़ो।यह सुनकर आंटी ने कान छोड़ दिया।वो सुबह जब आप लोग आए थे तब मैंने अंकल को जो पानी का गिलास दिया था उसमें मैने नींद की दवाई मिला दी थी।

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वेदिका : ऐसा क्यों किया तूने?
रुचि : वो हम दोनों के रिलेशन के बारे में पता चलने पर आप नाराज़ होती इसलिए यह जरूरी था कि भैया के साथ आपकी नजदीकियां बढ़े ताकि आप मेरी फीलिंग्स समझ सके।रुचि की बात सुनकर आंटी कुछ पल उसे घूरती रही फिर उन्होंने कहा।
वेदिका : देखो एक बात मैं साफ़ बता दूं कि यह संबद्ध बनाने से पहले की मैने विशु को कह दिया था कि अगर वो चाहता है की मैं उसके साथ पूरे मन से सेक्स करूं तो कमरे के बाहर जाकर हमारी निजी जिंदगी में इस बात का कोई असर पड़ना नहीं चाहिए और उसके बाद हम सब वो भूल जायेंगे क्योंकि यह पहली और आखिरी बार होगा।

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आंटी की बात ने जैसे रुचि को एक बड़ा झटका दे दिया था क्योंकि जहां उसे पहले लग रहा था कि वो अपने मकसद मैं कामयाब रही है, वहीं पर इसके विरुद्ध आंटी यह सब भूल जाने को कह रही है।
वेदिका : तुम दोनों के बीच जो कुछ हुआ उसे मुझे कोई एतराज नहीं है पर अब यह सब कभी नहीं होगा क्योंकि रुचि कल मेरे साथ घर चल रही है और दोबारा यहां कभी नहीं आयेगी।
आंटी की ये सब बातें सुनकर रुचि के दिल में जैसे किसीने खंजर घोप दिया हो,आखिर इतने दुखों के बाद उसे किसीका साथ मिला था,उसने कुछ हसीन लम्हे बिताए थे जो उसके लिए बहुत एहमियत रखते है और उन्हीं सब बातों को उसकी मां भूल जाने को कह रही है, आखिर वो इतनी कठोर कैसे हो सकती है क्या थोड़ी देर पहले बिताए लम्हे ही उनके लिए सब दिखावा था यह सोचकर उसकी आँखें भर आई,वो कुछ बोलने वाली थी की तभी कमरे का दरवाजा खुला और पापा उबासी लेते हुए बाहर निकले जिससे हम तीनों का ध्यान उस तरफ गया।
मनोहर : अरे रात हो गई!!? पता नहीं मैं कितनी देर से सोया था पर बहुत अच्छी नींद आई,अरे तुम तीनों यहां क्यों बैठे हो??!!
विशाल : बस ऐसे ही बातें कर रहे थे कि तभी आप जाग गए।
मनोहर : हां, ट्रैवलिंग की वजह से ज्यादा थक गया था बहुत भूख भी लगी है,खाने के लिए कुछ है या नहीं?
विशाल : मैंने खाना ऑर्डर कर दिया है,डिलीवरी बॉय आता ही होगा,हम दोनों को बाहर का खाने का मन था और आंटी भी ज्यादा थक गई थी इसीलिए वो पूरी दोपहर आराम करती रही इसलिए उन्हें परेशान करना ठीक नहीं समझा।यह बात मैंने आंटी की तरफ देखकर कही जिससे वो नजरे चुराने लगी।

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मनोहर : चलो अच्छा काम किया। अभी हम बात कर रहे थे कि तभी डोरबेल बजी और मैने जाकर ऑर्डर के लिया उसके बाद हम सबने साथ में बैठकर खाना खाया पर रुचि पूरे वक्त गुमसुम सी रही इसलिए पापा ने उसकी तरफ देखकर पूछा।

मनोहर : अरे रुचि बेटा,क्या हुआ?!! खाना पसंद नहीं आया क्या?
रुचि : नहीं अंकल ऐसी बात नहीं है।
वेदिका (मुस्कुराते हुए) : वो कल सुबह हम वापस घर जा रहे है इसलिए थोड़ी उदास है।
मनोहर : अरे इतनी जल्दी कैसे,उसका मन है तो उसे यहां रहने दो ना और आप भी रुक जाओ।
वेदिका : नहीं-नहीं,आखिर कब तक यहां रहेगी,कभी तो वापस घर लौटना ही होगा ना और वैसे भी कोई लड़का ढूंढना होगा,इसकी शादी की उम्र भी हो गई है।आंटी की बात सुनकर रुचि खांसने लगी इसीलिए वो जल्दी से खड़ी होकर किचन में चली गई,उसे इस तरह खांसते हुए देखकर मैं उसके पीछे गया तो देखा वो वाशबेसिन के पास रो रही थी,उसके झर झर करते आंसू बह रहे थे और साथ ही उसने अपना मुंह दबा रखा था ताकि उसकी आवाज बाहर ना जाएं।

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मैं उसके पास पहुंचा और उसके कंधे पर अपना हाथ रखा उसने भीगी आंखों से मेरी तरफ देखा और मुझसे कसकर लिपट गई,उसकी पकड़ इतनी मजबूत थी जैसे वो जता रही हो कि वो मुझे दूर नहीं रह सकती, मैंने उसे किसी तरह शांत कराया और हम दोनों फिर टेबल पर आकर बैठ गए,,आखिर मैं हम सबने खाना खत्म किया और अपने अपने कमरों में सोने के लिए चले गए।

रात के 11 बज रहे थे अरबमैं कमरे में अपने बेड पर लेटकर आज की घटनाओं के बारे में सोच रहा था, जहां इसी बिस्तर पर आंटी ने एक मां बनकर हम दोनों को इतना प्यार दिया था वहां उन्हीं की वजह से घर में एक सूनापन छा गया था जिसका भारीपन सबके दिलों पर महसूस हो रहा था,बाल्कनी का दौर खुला था इसलिए बाहर से आती हवाएं पर्दो को अपने साथ एक लय में उड़ा रही थी,आंखों से सामने रुचि का वहीं आंसुओं ने भीगा चेहरा नजर आया और मेरे चेहरे पर सख्त भाव उमड़ आए कुछ पल विचार करने के बाद मैं नींद ने कही खो गया।
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So Guys, इस अपडेट में कहानी एक भावात्मक मोड़ पर आकर रुकती हैं,विशाल अब क्या फ़ैसला लेगा यह आगे के अपडेट में पता चलेगा,यह अपडेट पहले ही बहुत लंबा हो चुका है इसलिए आपको यह कैसा लगा नीचे Comment करके जरूर बताईए।
 
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दोस्तों,रुचि के Character के लिए मैं नीचे दिखाई गई 2 Actresses के Photos का Use करूंगा,जो हालात और Emotions के हिसाब से बेस्ट होगा वो फोटो में Post करूंगा आगे जाकर ज्यादा Confusion ना हो इसलिए इस बात को पहले ही Clear कर देना सही समझा।

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