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Incest प्यासे दिल के अरमान

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INDEX


Pyase Dil Ke Armaan

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दोस्तो, माफी चाहता हूं इतने दिनों बाद अपडेट देने के लिए पर Job और निजी जिंदगी में थोड़ा उलझ गया था।
बारिश का मौसम धीरे-धीरे विदा ले रहा है और मौसम में शीतलता पहुंचाने वाली सर्दी दरवाज़े पर खड़ी है जो पूरे बदन को तरोताजा करती है,ऐसे मौसम में बदन को गर्म करनेवाली कोई कहानी मिल जाएं तो उसका मजा दुगना हो जाता है,बस आपकी यही जरूरत को पूरा करने के लिए मैं अपडेट लेकर हाजिर हूं।

अब बहन रुचि को जी भरकर भोगने के बाद ये कहानी मां बेटे के संबद्ध कर केंद्रित होगी और आगे कहानी के कुछ नए पात्र भी होंगे तो चलिए शुरू करते है।


अपडेट - 15

रुचि के कमरे के जाने बाद भी उसका वो अक्श मेरी नजरों के समाने तैरता रहा,उसके बाद में उठकर Wardrobe की तरफ गया और उसमें से एक टीशर्ट और लोवर निकालकर पहन लिया और नीचे हॉल में आ गया,मैने किचन में देखा तो रुचि ने पिंक कलर का टॉप और स्कर्ट पहना हुआ था,होठों पे हल्की लाल लिपस्टिक और माथे पे बिंदी चांद की तरफ चमक रही थी,उसकी स्कर्ट से गांड़ का उभार स्पष्ट नज़र आ रहा था,रुचि के जिस्म की महक पूरे किचन में फैली हुई थी

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इन बीते दिनों मैने उसे नग्न की देखा था पर पता नहीं क्यों इस कपड़ो से अर्ध उजागर अंग कुछ ज्यादा ही उत्तेजना प्रदान कर रहे थे,उसे इस तरह देखकर मेरे मुंह से कुछ शब्द निकल पड़े।


'लत ही ऐसी लगी है तेरे जिस्म की,जिसका नशा सरेआम होगा
मेरे जिस्म से निकलती प्यार की बूंद पर तेरा ही नाम होगा'


मेरी बात सुनकर उसने अपने चेहरा हल्का बाई ओर घुमाकर कहा,"Wow भैया आज आप इतनी सुबह काफी रोमांटिक नजर आ रहे हैं।"
"जिसके पास तुम्हारे जैसी खूबसूरत बहन हो तो वो भला कैसे रोमांटिक नहीं होगा" मेरे इस बात से वो मुस्कुराने लगी,मै चलते हुए उसके पास गया और उसके कंधे पर अपना सर रख दिया,जिससे मेरी गर्म सांसे उसके गले को छू रही थी।मैने देखा तो वो Bowl में इक्कठे उस चॉकलेटी लिक्विड से लस्सी बना रही थी।


तेरे जवानी के जामों को होठों से ली लूं,
तेरे जिस्म को अपने आगोश में समा लूं,
तुम्हारी हर एक सांस पर मेरा ही नाम हो,
मेरी हर सुहानी रात को तुम्हारे जिस्म का साथ हो।


मैने अंडरवियर नहीं पहना था इसलिए मेरे लंड का उभार वो अपनी गांड़ पर महसूस कर रही थी,मैने उसके कपड़ो के ऊपर से ही उसके बूब्स का मसलना शुरू किया,ब्रा में कैद उसके बूब्स काफी बड़े लग रहे थे और उसकी क्लीवेज गर्दन तक पहुंच रही थी,मैने अपने लंड को उसकी गांड़ की दरार में रखकर मसलने लगा और उसके होठों को चूसने लगा।कुछ देर बाद मैने अपना वीर्य लस्सी और उस Fruit Bowl में डाल दिया,रुचि ने मेरी ओर देखकर कहा,"You are so Mean"
"I know" कहकर मैने उसके गाल पर किस किया और हॉल में टीवी देखने चला गया।


कुछ देर बाद रुचि के बुलाने पर डाइनिंग टेबल पास पहुंचा तो देखा उसके काफी सारी चीजें बनाई हुई थी, टेबल पर Bread, Sprouts, Fruit Salad के साथ उस लिक्विड से उसने लस्सी, डेजर्ट और चॉकलेट क्रीम बनाकर एक छोटी केक भी बनाई हुई थी,यह सब चीजे देखकर मैने कहा,"Wow मुझे नहीं पता था कि तुम्हे इतनी सारी Varieties बनाना आता है।"
"Well,There are many things you don't know about me."
"Ohhh..... Really!!?"
"तुम शुरू करो मैं 10 मिनिट आती हूं" इतना कहकर वो किचन में चली गई,मुझे कुछ अजीब लगा पर इस बात पर जायदा ध्यान ना देकर मैं नाश्ता करने लगा,कई दिनों बाद Sprouts,Bread और Fruits का स्वाद महसूस होते है मैं उसपर टूट पड़ा।थोड़ी देर में मैंने सब खत्म कर दिया तभी रुचि मुझे किचन से आती हुई दिखाई दी,मेरे पास आकर उसने टेबल पर वो लस्सी का ग्लास रख दिया और मेरी गोद में आकर बैठ गई,उसके बैठते ही मुझे कुछ गीलापन महसूस हुआ,मैने देखा तो उसने पेंटी नहीं पहनी थी और उसकी चूत वीर्य के कुछ बूंद लगी हुई थी


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जैसे ही मेरा ध्यान ग्लास में गया तो सब समझ गया उसने अपना वीर्य मेरे कामरस के साथ लस्सी में मिलाया था।उसने लस्सी का एक सीप दिया और मेरा मुंह खोलकर थोड़े ऊपर से अपनी लार के साथ मुझे लस्सी पिलाने लगी, दही, चॉकलेट और वीर्य के मिश्रण से उसका गाढ़ापन मेरे मुंह में समा रहा था,दूसरी बार उसने अपना पूरा मुंह भर लिया और मेरे होठ से मिलकर पिलाने लगी,जिसकी वजह से कुछ चॉकलेट मेरे मुंह के साइड से निकलकर हमारे मुंह पर लगने लगी,हमारे किस करने की वजह से "चपप्......चपपप्......सीईईइइपप्...... उउममहहह्........"


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जैसी आवाज़ आ रही थी,रुचि की किस करते हुए मैने लोवर से अपना लंड बाहर निकाला और उसकी गांड़ में उंगली डालकर उसको एक धक्के मेरे पूरा अंदर उतार दिया "उउमम्......उउममम्.......ऊऊउपप्........ उउममममहहह्........"
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वो मेरी गोद में छटपटाने लगीं पर मैने कसकर उसे पकड़ लिया और उसकी जुबान से खेलने लगा, कोई भी धक्का लगाए बिना हम उसकी गर्मी को महसूस कर रहे थे,इस बार मैने सीप लेकर अपना मुंह खुला रख दिया,रुचि जैसे समझ गई थी कि उसके क्या करना है इसलिए उसने Fruit Salad को थोड़ा चबाया और मेरे मुंह में रखकर फिर उसका स्वाद लेने लगे,हम ने हर एक चीजों के अपने मुंह में घोलकर नाश्ता खत्म किया, इतना करते हुए हम दोनों एक बार फिर कामरस की प्राप्ति कर चुके थे,उसके बाद मै उठकर अपने रूम में आ गया और रुचि सब बर्तन साफ करने लगी।


रूम में पहुंचकर मैने अपना मुंह और अन्य अंगों को साफ किया और लैपटॉप लेकर बेड पर आकर बैठ गया तभी मेरा ध्यान कैमरा पर गया जिसे देखकर मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गई।मेरे पास DJI का 4K पॉकेट कैमरा थाइसलिए इसकी Sound और Video Quality काफी अच्छी थी,मैने वीडियो कैमरा लेकर उसमें से Chip निकलकर Laptop से Connect कर दी,Chip Insert करते ही एक Pop up सामने आया और एक वीडियो Play कर दिया जिसमें मैं और रुचि एक दूसरे में खोकर पूरी तरह नंगे होकर सेक्स कर रहे थे,सुबह से लेकर रात तक जो हमने किया था उसके साथ रुचि के चीखने और सिसकियों की आवाज तक इसमें अच्छे से Record हो गई थी।
उसका उत्तेजक लाल चेहरा,उरोजो से निकलता दूध और मेरे वीर्य को अपने होठों से लालायित होकर पीते हुए देखकर मेरे बदन में सिरहन दौड़ गई


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तभी मेरे दिमाग में एक ख्याल आया और मैने उस वीडियो को छोटे हिस्सों में Edit करके एक 15 मिनिट का वीडियो बना दिया,अभी वीडियो Cut हो रहा था की रुचि मेरे कमरे में आई और मेरे बगल में आकर बैठ गई।
"ये क्या कर रहे हो आप?" उसने आते ही सवाल पूछ लिया, मैंने उसका कोई जवाब नहीं दिया क्योंकि वीडियो बनकर Ready हो चुका था इसलिए मैने आवाज Full करके Video Play कर दिया।


आआआहह्......आआ...आआआ..... आआआहहाहह्........भैया धीरे करो......हां....हाहांआ.......... आआआहहहह्......मर गई मै आज..... ओओहहहह्........उन्न्नहहहहहह्......ऐसे हीहहईईइइ.......Yessss....... Ohhhh.......Fuck.....Fuck......Fuck Me Harder........ Ohhhhhh

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रुचि अपनी सिसकियां लेती हुई आवाज सुनकर हैरान रह गई,उसने स्क्रीन पर देखा तो ये वीडियो उसी वक्त का था जब मैं पहली बार उसकी चुदाई कर रहा था जिसकी वजह से मेरे लंड के साथ पूरी बेडशीट उसके खून से सनी हुई थी।
"What the Fuck is this?!!? ये वीडियो आपने कब उतारा?"
"जब हम दोनों कमरे आए तो मैंने कैमरा ऑन करके रख दिया था, हमारे मिलन के पलो को ऐसे ही कैसे जायर कर सकता हूं? इसीलिए मैंने सभी यादों को इसमें रिकॉर्ड करके रखा है" वो एक तक होकर बस मेरी बात को सुन रही थी।मैने उसके चेहरे को थामकर कहा,"तुम्हारे जिस्म को मैं पूरी दुनिया को दिखाना चाहता हूं,ऐसा जिस्म जो कोई मर्द 7 जन्मों में भी नहीं पा सकता।" इतना कहकर मैं उसके होठ चूमने लगा।
"अगर आप यही चाहते है तो ठीक हैं इस जिस्म को तो मैने आपके हवाले कर दिया है" उसकी ये प्यारी बातें सुनकर मैंने उसे अपनी बाहों में समा लिया। मैंने फिर लैपटॉप ऑन किया और हमारे चेहरों को Blur करने लगा की तभी रुचि ने मुझे रोकते हुए कहा,"जब सब दिखा ही रही है तो यह मुखौटा क्यों, मैं अपने शरीर के हर एक अंग को सबके सामने रखना चाहती हूं।" उसकी बात सुनकर मैंने हम दोनों के Face वैसे ही रहने दिया।


उसके बाद Chrome खोलकर Only Fans Website Open की और उसमें रुचि के नाम का Account बना दिया, Brazzers और Vixen जैसी Website पर Process की काफी झंझट थी इसलिए मैने Local Website Use करना सही समझा साथ ही ज्यादा लोगों का रिस्पॉन्स भी मिलेगा, Account बन चुका था और मैंने Registration भी Complete कर लिया था पर प्रोफाइल फोटो के साथ कुछ फोटोस भी अपलोड करनी थी।ये देखते ही रुचि ने अपना टॉप उतार दिया और मेरे सामने नंगी खड़ी हो गई,रुचि इतनी जल्दी समझ जाएगी ये मुझे लगा नहीं था इसलिए मैं कैमरा लेकर आया और उसकी कई Angels से तस्वीरें ली जैसे मेरा लिंग चूसते हुए,अपनी चूत मसलते हुए,अपनी आंखे बंद करके लिंग को अंदर महसूस करते हुए और वीडियो के साथ अपलोड का Process शुरू कर दिया,वीडियो अपलोड होने तक मैने रुचि को बेड पर पटका और उसके साथ संभोग करता रहा।
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आगे के अपडेट्स में कहानी जारी रहेगी,तब तक नीचे Comment करके अपने प्रतिभाव जरूर से लिखे,मैने आगे के 3 अपडेट तैयार कर लिए है बस ये आपके प्रतिभाव पर निर्भर करता है।
 
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Pasand toh hume dono hi hai pr sabse pehle hero ki maa ki chudai aur fir ruchi ki maa ki tab jayada badia lagega
Bravo Brother,mai bhi yahi karne vala tha,ab hero ki mom par pura focus hoga🔥
 
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अपडेट - 16
जितनी देर तक हम दोनों का sex चलता रहा तब तक वीडियो अपलोड हो चुका था,मैने रुचि के मुंह में अपना वीर्य छोड़ा और थोड़ी देर एक दूसरे के आलिंगन में रहने के बाद हम दोनों नीचे आ गए।

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मैने अभी भी ट्रैक पेंट ही पहना हुआ था,रुचि किचन में सब सामान ठीक से रखने में लगी हुईं थी जिसकी वजह से उसका पूरा ध्यान काम में लगा हुआ था, मैं साइड में खड़े हुए उसके चेहरे के को निहार रहा था, मैंने उसके होठ देखे जिस पर अभी कुछ देर पहले लिपस्टिक लगी हुई थी वो गायब थी शायद हमारे किस करके की वजह से मिट गई थी।

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जिसे देखकर मैं हल्का सा मुस्कुरा दिया।मैने थोड़ा नीचे झुककर Cupboard खोला जिसमें मैं Sporut Salad के लिए Beans रखता था,आज सुबह खाने के बाद वो खत्म हो गए थे।मैने शॉपिंग बेग उठाते हुए कहा,"रुचि में बस थोड़ी देर में आता हूं।"
मेरे अचानक कहते ही उसने मेरी तरफ देखते हुए पूछा,"अरे इतनी सुबह कहा जा रहे हो?"
"वो Beans खत्म हो गए है तो बस यही पास में ही लेने जा रहा हूं थोड़ी देर में आ जाऊंगा" मेरी बात सुनकर उसने बस हां में गर्दन हिलाई और मैं चलते हुए घर से बाहर आ गया,बसंत का मौसम, फाल्गुन का महीना जिसकी वजह से चारों ओर सुनहरी धूप बिखरी हुई थी,जिससे रोड पर चलते हुए मेरे बदन को रोशन कर रहीं थी।


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होली का त्योहार नजदीक आ रहा था,जिसकी महक अभी से हवा में झलकने लगी थी।मेरे घर से करीब 1.5 km दूर माधवेन्द्र का खेत पड़ता था,जो खुद खेती के व्यवसाय से जुड़ा हुआ था जिसकी वजह से उसके पास कई अलग तरह के अच्छी Quality के Beans मिल जाया करते थे।जब मैं उसके खेत पर पहुंचा तो वो वहीं मौजूद था।

विशाल : നമസ്കാരം, മാധവേന്ദ്രാ, സുഖമാണോ? (नमस्ते,कैसे हो माधवेन्द्र?)
माधवेन्द्र : ഹേ മാസ്റ്റർ ജി, എങ്ങനെയുണ്ട് ഇവിടെ? (अरे मास्टर जी! आप यहां कैसे?
मेरे अचानक वहां पहुंचने से माधवेन्द्र जरा चौंक गया,मैने लोहे का छोटा सा गेट खोला और चेहरे पर मुसकान लिए उसके पास जाने लगा,वो कटी हुई फसल का हिसाब लगा रहा था, माधवेन्द्र का अपना एक बड़ा खेत था,जिसके वजह से उसके बगल में ही उसने अपना 2 मंजिला घर बनाया था,जिससे फसल की भी अच्छे से देखभाल हो सके,एक बार शहर से लौटते हुए माधवेन्द्र की बाइक खराब हो गई थी तब मैंने उसकी बाइक ठीक की थी,उसके बाद से ही हमारी जान पहचान बढ़ी और मै अकसर उससे यहां जाता रहता हूं।

माधवेन्द्र का घर बड़ा होने के साथ काफी खूबसूरत भी था,उसने घर के आगे एक बड़ा आंगन बनाया था जिसको उसने कई अलग-अलग किस्म के पौधों और फूलों से सजाया हुआ था,जिसकी बिखरती महक पूरे आंगन में फैल गई थी


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मै चलते हुए उसके पास जाकर उसके सामने रखी कुर्सी पर बैठ गया, मुझे अपने घर पर आए हुए देखकर उसने मुस्कुराने हुए कहा,"लगता है फिर बिज़ खत्म हो गए होंगे तभी तो हमे आपके दर्शन हुए।"
उसकी बात सुनकर मैं मुस्कुरा दिया,"अरे,ऐसा थोड़ी है की जब काम हो तभी मैं यहां आता हूं।"
माधवेन्द्र : अच्छा ऐसा है तो बताईए आप बिना काम के कब हमारे यहां आए थे?
उसकी बात सुनकर मैने कुछ नहीं कहा क्योंकि एक तरह से उसकी बात सही थी।मेरे चुप रहने पर वो फिर बोल पड़ा,"देखा मेरा कहना सही था तभी तो तुम चुप हो।"
विशाल : वैसे बात तो आपकी ठीक है पर काम की वजह से टाइम ही कम मिलता है तो कैसे मैं मिलने आता?
"वैसे काम में तो हर कोई व्यस्त रहता है पर जो अपना हो उसके लिए तो इंसास समय निकाल ही लेता है।" एक मधुर सी आवाज मेरे कानों में पड़ी तो देखा माधवेन्द्र की पत्नी Anitha ताड़ के रस का ग्लास लिए खड़ी हुईं थी।


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माधवेन्द्र की उम्र 45 साल थी पर उसकी पत्नी और उसके बीच 11 साल का Difference था इसलिए अनिता की उम्र 34 साल थी,अनिता के घर के आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से भौतिक सुख की लालच से उसके पिता ने उसकी शादी माधवेन्द्र के साथ कर दी थी,उम्र का अंतर उनकी निजी जिंदगी पर भी दिख रहा था क्योंकि दोनों की कोई संतान नहीं थी,जहां माधवेन्द्र की उम्र अब ढलने लगी थी वहीं पर अनिता का यौवन अपने चरम पर खिला हुआ था,अनिता माधवेन्द्र का खेती के काम में हाथ बंटाती थी जिससे उसके शरीर का रंग थोड़ा सांवला था पर उसके गुलाबी होंठ, ब्लाउज के अंदर कसे हुए बड़े उरोज,हिरनी सी लचकती कमर के साथ उसके पेट की नाभि की गहराई उसके शरीर को उद्दीपक (भड़काऊ) बनाता था,'उउऊऊफफफ्.......क्या माल लग रही थी,मेरा बस चलता तो मैं उसे यही चोद लेता।"

रसीले दूध से भरे उन्नत उरोज

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हिरनी सी लचीली कमर
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उसके साथ उसकी गांड़ का उभार और मोटाव उसके कामुक शरीर को संपूर्ण करता था।उसने मेरे पास आकर ताड़ी का ग्लास टेबल पर रख दिया और माधवेन्द्र के पास खड़ी हो गई।

विशाल : अरे भाभी इन सब की क्या जरुरत थी, मैं तो बस थोड़े से काम के लिए आया था।
माधवेन्द्र : ऐसे कैसे नहीं तुम हमारे दोस्त और मेहमान हो तो हम कैसे खातिरदारी में कमी रख सकते है?
अनिता : वैसे भी ताड़ का रस शरीर में एक नई ऊर्जा और ताक़त भर देता है जो हर जवान लड़कों के लिए काफी जरूरी होती है। यह कहते हुए उसकी आंखों में एक चमक सी छा गई।
माधवेन्द्र : वो सब तो ठीक है पर विशाल बाबु कुछ बीज़ लेने के लिए आए है तो तुम अंदर जाकर उन्हें वो अच्छी गुणवत्ता वाले बीज़ निकाल दो। माधवेन्द्र की बात सुनकर अनिता अंदर चली गई।मै जाते हुए उसकी मचलती गांड़ को देख रहा था। माधवेन्द्र को शक ना हो इसलिए मैने तुरंत अपनी नजरे घुमा ली।अनिता के बात ही माधवेन्द्र ने कहा।
माधवेन्द्र : वैसे उस दवाई के लिए तुम्हारा शुक्रिया जिसकी वजह से में 2 घंटे तक चुदाई का मजा ले पाया।
विशाल : अरे इसमें शुक्रिया कहने की क्या जरूरत है? एक तरफ दोस्त कहते है और उसरी तरफ शुक्रियादा करते है।
माधवेन्द्र : वैसे तुम इस सब चीजों के बारे में पक्के खिलाड़ी लगते है तभी आपको सब चीजों को जानकारी होती है।उनकी बात सुनकर मैने हंसते हुए जवाब दिया।
विशाल : औरत भोगने की वस्तु से कही ज्यादा है अगर पुरुष को इन सब चीजों के बार में पता हो तो यौन संबंध बनाते समय आनंद की चरम सीमा से कही अधिक मिलता है।
माधवेन्द्र : वाह क्या खूब कही,आपकी बाते किसी प्रतिष्ठित लेखक की तरह लग रही है।

इस बात पर हम दोनों ही हंसने लगे तभी अंदर से अनिता की आवाज सुनाई दी "जरा सुनिए गोदाम में बीज काफी ऊपर रखे है क्या आप मेरी मदद कर सकते है?
माधवेन्द्र : लीजिए बुलावा आ गया,आप थोड़ी देर यहां बैठिए तब तक मैं हमारी मोहतरमा की मदद करके आता हूं।
वो अभी निकलने ही वाले थे कि तभी खेतों की तरफ से काफी शोर सुनाई दिया हम दोनों ने खाद होकर देखा तो एक कुछ पालतू जानवर खेतों में घुस गए थे, अगर ये ज्यादा अंदर घुस गए तो फसल को काफी नुकसान पहुंचा देंगे,जिसे देखकर माधवेन्द्र तुरंत ही अपनी लाठी उठाकर खेतों की ओर चलने लगा।
विशाल : रुकिए आपका अकेले जाना ठीक नहीं मैं भी आपके साथ चलता हूं।
माधवेन्द्र : नहीं,वहां पर ज्यादा खतरा है इसलिए तुम्हारा चलना ठीक नहीं,तुम अंदर जाकर अनिता की मदद करो तब तक मैं आता हूं।
इतना कहकर वो तेजी से खेतों की तरफ चला गया, मैं घर के अंदर जाने लगा,अंदर जाते हुए मैं घर को निहार रहा था,घर को खास Interior या Designs नहीं बनाया था पर घर के Colours और उसकी सजावट उसको खास बनाती थी


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घर में सफाई के साथ हर चीज अच्छे से रखी गई थी तभी अनिता की फिर से आवाज आई,"मैं इस तरफ पीछे गोदाम में हूँ" घर के पीछे एक दरवाजा पड़ता था जो पीछे गोदाम की तरफ खुलता था इसलिए मैं गोदाम में चला गया।

पीछे गोदाम में पहुंचा तो देखा वो काफी बड़ा था और वो दो हिस्सों में बंटा हुआ था,जहां एक तरफ गेहूं ही थोड़ी बोरिया,कुछ खेती साधन रखे थे तो वही दूसरे कमर में जमीन में बोने के लिए बीज रखे हुए थे, मैं चलते हुए उस कमरे में पहुंचा तो हैरान रह गया,अनिता अपनी पीठ मेरी तरफ करके खड़ी हुई थी पर ताज्जुब की बात यह थी कि उसने अपनी साड़ी निकालकर एक तरफ रख दी थी और अब वो सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी,


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उसकी नंगी पीठ से बहता पसीना उसके पेटीकोट को भिगो रहा था,साथ ही पेटीकोट का कुछ हिस्सा गांड की दरार में घुस गया था पर जैसे वो पीछे मुड़ी वो हैरान हो गई,"आप यहां! मेरे पति कहा है?" उसने कहते हुए एक हाथ से अपने उरोज को ढक लिया।
विशाल : आप गलत मत समझिए,वो खेतों में कुछ पालतू जानवर घुस गए है तो वो उन्हें ही भगाने गए है।
मेरी बात सुनकर उसने शांत होकर कहा,"माफ़ करना वो गर्मी कुछ ज्यादा थी इसलिए मैने ऐसे कपड़े पहने है,मुझे शायद मेरे पति आयेंगे पर......." उसकी बात सही थी क्योंकि यह कमरा अंदर होने की वजह से हवा ज्यादा नहीं पहुंचती थी जिसकी वजह से यहां दूसरे कमरों के मुकाबले ज्यादा गर्मी थी। जिसकी वजह से मेरा टीशर्ट भी भीगने लगा था तभी मेरी नजर उसकी छाती पर टिक गई,उसके उरोजो की कसावट और गोलाई कमाल की थी जिससे उसकी Clevage काफी ऊपर तक उभरी हुई थी,उसके मोटाई को देखकर यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि उसमें काफी रस भरा होगा।


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माधवेन्द्र अपनी उमर की वजह से उसके यौवन का पूरा रसपान नहीं कर पाया था जिससे अभी भी उसकी प्यास अधूरी थी,मुझे अपनी छाती को घूरते हुए देखकर उसकी आंखों की चमक बढ़ गई और उसने अपने हाथ छाती से हटा दिए और बढ़ती सांसों से उसकी छाती ऊपर नीचे होने लगी,अब मेरे सामने ब्लाउज में कैद पसीने से भीगते बड़े से उरोज थे

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साथ ही मेरी नजर उसके तने हुए निपल्स पर गई मतलब उसने अंदर ब्रा नहीं पहनी हुई थी।
'आआआहह्......ये गर्मीईईइ्....... उउफफफ्.......' कहते हुए
उसने ब्लाउज के 2 ओर बटन खोल दिए जिससे उसके ब्लाउज पर पड़ रहा दबाव कम हुआ और दोनों आधे से ज्यादा बूब्स बाहर झलकने लगे।यह नजारा देखकर मेरी हालत खराब होने लगी थी भले ही अनिता के स्तन पूरी तरह से बाहर नहीं आए थे पर अब ज्यादा अंदर भी नहीं थे,उसके Dark Brown Nipple आधा बाहर झलकने लगा था।

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ये नजारा देखकर मेरी हालत खराब होने लगी थी क्योंकि मुझे समझ नहीं आ रहा था कि अनिता आखिर करना क्या चाहती है? तभी उसकी आवाज ने मेरा ध्यान तोड़ा,"वो बीज ऊपर रखे हुए है और आसपास सीढ़ी या स्टूल नहीं है क्या आप मुझे उठाएंगे तो मैं उसे उतार सकती हूँ।"



आगे के अपडेट्स में कहानी जारी रहेगी,तब तक नीचे Comment करके अपने प्रतिभाव जरूर से लिखे।
 
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जितनी देर तक हम दोनों का sex चलता रहा तब तक वीडियो अपलोड हो चुका था,मैने रुचि के मुंह में अपना वीर्य छोड़ा और थोड़ी देर एक दूसरे के आलिंगन में रहने के बाद हम दोनों नीचे आ गए।

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मैने अभी भी ट्रैक पेंट ही पहना हुआ था,रुचि किचन में सब सामान ठीक से रखने में लगी हुईं थी जिसकी वजह से उसका पूरा ध्यान काम में लगा हुआ था, मैं साइड में खड़े हुए उसके चेहरे के को निहार रहा था, मैंने उसके होठ देखे जिस पर अभी कुछ देर पहले लिपस्टिक लगी हुई थी वो गायब थी शायद हमारे किस करके की वजह से मिट गई थी।

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जिसे देखकर मैं हल्का सा मुस्कुरा दिया।मैने थोड़ा नीचे झुककर Cupboard खोला जिसमें मैं Sporut Salad के लिए Beans रखता था,आज सुबह खाने के बाद वो खत्म हो गए थे।मैने शॉपिंग बेग उठाते हुए कहा,"रुचि में बस थोड़ी देर में आता हूं।"
मेरे अचानक कहते ही उसने मेरी तरफ देखते हुए पूछा,"अरे इतनी सुबह कहा जा रहे हो?"
"वो Beans खत्म हो गए है तो बस यही पास में ही लेने जा रहा हूं थोड़ी देर में आ जाऊंगा" मेरी बात सुनकर उसने बस हां में गर्दन हिलाई और मैं चलते हुए घर से बाहर आ गया,बसंत का मौसम, फाल्गुन का महीना जिसकी वजह से चारों ओर सुनहरी धूप बिखरी हुई थी,जिससे रोड पर चलते हुए मेरे बदन को रोशन कर रहीं थी।


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होली का त्योहार नजदीक आ रहा था,जिसकी महक अभी से हवा में झलकने लगी थी।मेरे घर से करीब 1.5 km दूर माधवेन्द्र का खेत पड़ता था,जो खुद खेती के व्यवसाय से जुड़ा हुआ था जिसकी वजह से उसके पास कई अलग तरह के अच्छी Quality के Beans मिल जाया करते थे।जब मैं उसके खेत पर पहुंचा तो वो वहीं मौजूद था।

विशाल : നമസ്കാരം, മാധവേന്ദ്രാ, സുഖമാണോ? (नमस्ते,कैसे हो माधवेन्द्र?)
माधवेन्द्र : ഹേ മാസ്റ്റർ ജി, എങ്ങനെയുണ്ട് ഇവിടെ? (अरे मास्टर जी! आप यहां कैसे?
मेरे अचानक वहां पहुंचने से माधवेन्द्र जरा चौंक गया,मैने लोहे का छोटा सा गेट खोला और चेहरे पर मुसकान लिए उसके पास जाने लगा,वो कटी हुई फसल का हिसाब लगा रहा था, माधवेन्द्र का अपना एक बड़ा खेत था,जिसके वजह से उसके बगल में ही उसने अपना 2 मंजिला घर बनाया था,जिससे फसल की भी अच्छे से देखभाल हो सके,एक बार शहर से लौटते हुए माधवेन्द्र की बाइक खराब हो गई थी तब मैंने उसकी बाइक ठीक की थी,उसके बाद से ही हमारी जान पहचान बढ़ी और मै अकसर उससे यहां जाता रहता हूं।

माधवेन्द्र का घर बड़ा होने के साथ काफी खूबसूरत भी था,उसने घर के आगे एक बड़ा आंगन बनाया था जिसको उसने कई अलग-अलग किस्म के पौधों और फूलों से सजाया हुआ था,जिसकी बिखरती महक पूरे आंगन में फैल गई थी


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मै चलते हुए उसके पास जाकर उसके सामने रखी कुर्सी पर बैठ गया, मुझे अपने घर पर आए हुए देखकर उसने मुस्कुराने हुए कहा,"लगता है फिर बिज़ खत्म हो गए होंगे तभी तो हमे आपके दर्शन हुए।"
उसकी बात सुनकर मैं मुस्कुरा दिया,"अरे,ऐसा थोड़ी है की जब काम हो तभी मैं यहां आता हूं।"
माधवेन्द्र : अच्छा ऐसा है तो बताईए आप बिना काम के कब हमारे यहां आए थे?
उसकी बात सुनकर मैने कुछ नहीं कहा क्योंकि एक तरह से उसकी बात सही थी।मेरे चुप रहने पर वो फिर बोल पड़ा,"देखा मेरा कहना सही था तभी तो तुम चुप हो।"
विशाल : वैसे बात तो आपकी ठीक है पर काम की वजह से टाइम ही कम मिलता है तो कैसे मैं मिलने आता?
"वैसे काम में तो हर कोई व्यस्त रहता है पर जो अपना हो उसके लिए तो इंसास समय निकाल ही लेता है।" एक मधुर सी आवाज मेरे कानों में पड़ी तो देखा माधवेन्द्र की पत्नी Anitha ताड़ के रस का ग्लास लिए खड़ी हुईं थी।


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माधवेन्द्र की उम्र 45 साल थी पर उसकी पत्नी और उसके बीच 11 साल का Difference था इसलिए अनिता की उम्र 34 साल थी,अनिता के घर के आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से भौतिक सुख की लालच से उसके पिता ने उसकी शादी माधवेन्द्र के साथ कर दी थी,उम्र का अंतर उनकी निजी जिंदगी पर भी दिख रहा था क्योंकि दोनों की कोई संतान नहीं थी,जहां माधवेन्द्र की उम्र अब ढलने लगी थी वहीं पर अनिता का यौवन अपने चरम पर खिला हुआ था,अनिता माधवेन्द्र का खेती के काम में हाथ बंटाती थी जिससे उसके शरीर का रंग थोड़ा सांवला था पर उसके गुलाबी होंठ, ब्लाउज के अंदर कसे हुए बड़े उरोज,हिरनी सी लचकती कमर के साथ उसके पेट की नाभि की गहराई उसके शरीर को उद्दीपक (भड़काऊ) बनाता था।

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उसके साथ उसकी गांड़ का उभार और मोटाव उसके कामुक शरीर को संपूर्ण करता था।उसने मेरे पास आकर ताड़ी का ग्लास टेबल पर रख दिया और माधवेन्द्र के पास खड़ी हो गई।

विशाल : अरे भाभी इन सब की क्या जरुरत थी, मैं तो बस थोड़े से काम के लिए आया था।
माधवेन्द्र : ऐसे कैसे नहीं तुम हमारे दोस्त और मेहमान हो तो हम कैसे खातिरदारी में कमी रख सकते है?
अनिता : वैसे भी ताड़ का रस शरीर में एक नई ऊर्जा और ताक़त भर देता है जो हर जवान लड़कों के लिए काफी जरूरी होती है। यह कहते हुए उसकी आंखों में एक चमक सी छा गई।
माधवेन्द्र : वो सब तो ठीक है पर विशाल बाबु कुछ बीज़ लेने के लिए आए है तो तुम अंदर जाकर उन्हें वो अच्छी गुणवत्ता वाले बीज़ निकाल दो। माधवेन्द्र की बात सुनकर अनिता अंदर चली गई।मै जाते हुए उसकी मचलती गांड़ को देख रहा था। माधवेन्द्र को शक ना हो इसलिए मैने तुरंत अपनी नजरे घुमा ली।अनिता के बात ही माधवेन्द्र ने कहा।
माधवेन्द्र : वैसे उस दवाई के लिए तुम्हारा शुक्रिया जिसकी वजह से में 2 घंटे तक चुदाई का मजा ले पाया।
विशाल : अरे इसमें शुक्रिया कहने की क्या जरूरत है? एक तरफ दोस्त कहते है और उसरी तरफ शुक्रियादा करते है।
माधवेन्द्र : वैसे तुम इस सब चीजों के बारे में पक्के खिलाड़ी लगते है तभी आपको सब चीजों को जानकारी होती है।उनकी बात सुनकर मैने हंसते हुए जवाब दिया।
विशाल : औरत भोगने की वस्तु से कही ज्यादा है अगर पुरुष को इन सब चीजों के बार में पता हो तो यौन संबंध बनाते समय आनंद की चरम सीमा से कही अधिक मिलता है।
माधवेन्द्र : वाह क्या खूब कही,आपकी बाते किसी प्रतिष्ठित लेखक की तरह लग रही है।

इस बात पर हम दोनों ही हंसने लगे तभी अंदर से अनिता की आवाज सुनाई दी "जरा सुनिए गोदाम में बीज काफी ऊपर रखे है क्या आप मेरी मदद कर सकते है?
माधवेन्द्र : लीजिए बुलावा आ गया,आप थोड़ी देर यहां बैठिए तब तक मैं हमारी मोहतरमा की मदद करके आता हूं।
वो अभी निकलने ही वाले थे कि तभी खेतों की तरफ से काफी शोर सुनाई दिया हम दोनों ने खाद होकर देखा तो एक कुछ पालतू जानवर खेतों में घुस गए थे, अगर ये ज्यादा अंदर घुस गए तो फसल को काफी नुकसान पहुंचा देंगे,जिसे देखकर माधवेन्द्र तुरंत ही अपनी लाठी उठाकर खेतों की ओर चलने लगा।
विशाल : रुकिए आपका अकेले जाना ठीक नहीं मैं भी आपके साथ चलता हूं।
माधवेन्द्र : नहीं,वहां पर ज्यादा खतरा है इसलिए तुम्हारा चलना ठीक नहीं,तुम अंदर जाकर अनिता की मदद करो तब तक मैं आता हूं।
इतना कहकर वो तेजी से खेतों की तरफ चला गया, मैं घर के अंदर जाने लगा,अंदर जाते हुए मैं घर को निहार रहा था,घर को खास Interior या Designs नहीं बनाया था पर घर के Colours और उसकी सजावट उसको खास बनाती थी


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घर में सफाई के साथ हर चीज अच्छे से रखी गई थी तभी अनिता की फिर से आवाज आई,"मैं इस तरफ पीछे गोदाम में हूँ" घर के पीछे एक दरवाजा पड़ता था जो पीछे गोदाम की तरफ खुलता था इसलिए मैं गोदाम में चला गया।

पीछे गोदाम में पहुंचा तो देखा वो काफी बड़ा था और वो दो हिस्सों में बंटा हुआ था,जहां एक तरफ गेहूं ही थोड़ी बोरिया,कुछ खेती साधन रखे थे तो वही दूसरे कमर में जमीन में बोने के लिए बीज रखे हुए थे, मैं चलते हुए उस कमरे में पहुंचा तो हैरान रह गया,अनिता अपनी पीठ मेरी तरफ करके खड़ी हुई थी पर ताज्जुब की बात यह थी कि उसने अपनी साड़ी निकालकर एक तरफ रख दी थी और अब वो सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी,


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उसकी नंगी पीठ से बहता पसीना उसके पेटीकोट को भिगो रहा था,साथ ही पेटीकोट का कुछ हिस्सा गांड की दरार में घुस गया था पर जैसे वो पीछे मुड़ी वो हैरान हो गई,"आप यहां! मेरे पति कहा है?" उसने कहते हुए एक हाथ से अपने उरोज को ढक लिया।
विशाल : आप गलत मत समझिए,वो खेतों में कुछ पालतू जानवर घुस गए है तो वो उन्हें ही भगाने गए है।
मेरी बात सुनकर उसने शांत होकर कहा,"माफ़ करना वो गर्मी कुछ ज्यादा थी इसलिए मैने ऐसे कपड़े पहने है,मुझे शायद मेरे पति आयेंगे पर......." उसकी बात सही थी क्योंकि यह कमरा अंदर होने की वजह से हवा ज्यादा नहीं पहुंचती थी जिसकी वजह से यहां दूसरे कमरों के मुकाबले ज्यादा गर्मी थी। जिसकी वजह से मेरा टीशर्ट भी भीगने लगा था तभी मेरी नजर उसकी छाती पर टिक गई,उसके उरोजो की कसावट और गोलाई कमाल की थी जिससे उसकी Clevage काफी ऊपर तक उभरी हुई थी,उसके मोटाई को देखकर यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि उसमें काफी रस भरा होगा।


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माधवेन्द्र अपनी उमर की वजह से उसके यौवन का पूरा रसपान नहीं कर पाया था जिससे अभी भी उसकी प्यास अधूरी थी,मुझे अपनी छाती को घूरते हुए देखकर उसकी आंखों की चमक बढ़ गई और उसने अपने हाथ छाती से हटा दिए और बढ़ती सांसों से उसकी छाती ऊपर नीचे होने लगी,अब मेरे सामने ब्लाउज में कैद पसीने से भीगते बड़े से उरोज थे

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साथ ही मेरी नजर उसके तने हुए निपल्स पर गई मतलब उसने अंदर ब्रा नहीं पहनी हुई थी।
'आआआहह्......ये गर्मीईईइ्....... उउफफफ्.......' कहते हुए
उसने ब्लाउज के 2 ओर बटन खोल दिए जिससे उसके ब्लाउज पर पड़ रहा दबाव कम हुआ और दोनों आधे से ज्यादा बूब्स बाहर झलकने लगे।यह नजारा देखकर मेरी हालत खराब होने लगी थी भले ही अनिता के स्तन पूरी तरह से बाहर नहीं आए थे पर अब ज्यादा अंदर भी नहीं थे,उसके Dark Brown Nipple आधा बाहर झलकने लगा था।

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ये नजारा देखकर मेरी हालत खराब होने लगी थी क्योंकि मुझे समझ नहीं आ रहा था कि अनिता आखिर करना क्या चाहती है? तभी उसकी आवाज ने मेरा ध्यान तोड़ा,"वो बीज ऊपर रखे हुए है और आसपास सीढ़ी या स्टूल नहीं है क्या आप मुझे उठाएंगे तो मैं उसे उतार सकती हूँ।"


आगे के अपडेट्स में कहानी जारी रहेगी,तब तक नीचे Comment करके अपने प्रतिभाव जरूर से लिखे।
Bahut hi bahetrin lakhen 👍👍👍👍
 
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Reactions: Napster and p696r

p696r

Human Minds have no Limitations
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Bahut hi bahetrin lakhen 👍👍👍👍
धन्यवाद,अगर ऐसे ही लोगों का Support बना रहा तो जल्द ही एक गर्मा गरम अपडेट मिलेंगे।
 
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