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Incest प्यासे दिल के अरमान

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Pyase Dil Ke Armaan

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अपडेट - 17
अनिता की बात सुनकर मैं होश में आया वो अपने नीचे के होठ को दांतों तले दबाएं मेरे जवाब का इंतेज़ार कर रही थी मैने कहा ठीक है अगर आपको कोई आपत्ति नहीं तो मैं तैयार हूं।मेरी बात सुनकर वो मुस्कुराने लगी, मैं आगे चलकर उसके करीब आया और ऊपर की तरफ देखा तो लकड़ी का एक बड़ा सा शेल्फ बना हुआ था ताकि अच्छे बीजों को चूहों या कीड़ों से बचाया जा सके,अनिता मेरे करीब आई और मेरी आंखों में देखने लगी, पसीने से तरबतर उसका जिस्म मेरे सामने खड़ा था।

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मैने उसको कमर से कपड़ा और एक झटके के साथ उसे ऊपर उठा लिया जिससे मेरे हाथों को उसकी चिकनी कमर का एहसास होने लगा पर उसको कमर से पकड़ने की वजह से वो कुछ ही feet हवा में ऊपर उठी थी जिसकी वजह से उसका हाथ ऊपर तक नहीं पहुंच रहा था,"विशाल बाबु लगता है इतने से काम नहीं बनेगा आपको थोड़ा ओर ऊपर उठाना पड़ेगा" वो हाथ मारते हुए पहुंचने की विफ़ल कोशिश कर रही थी,उसको इस तरह उठाने से उसके बड़े स्तन मेरी नजरों को सामने थे।

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उसके ब्लाउज से आती वो मादक खुशबू से मेरा लिंग शॉर्ट्स के अंदर अपना उभार बढ़ाने लगा था,मेरे तेज़ चल रहे सांसों की गर्मी अब उसे अपने छाती पर महसूस होने लगे थी पर उसने इसका विरोध नहीं जताया जिसकी वजह से मैंने अपनी जीभ निकालकर उसके उरोजो की गहराई से बह रहे पसीने की बूंद को होठों से लगा लिया,मेरे होठों के स्पर से उसका बदन सिहर उठा। 'आआआहहाहह्.......ईईइइससहह्........' उसकी सिसकी निकल गई।

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मैं बारी बारी से उसके दोनों बूब्स को अपने होठ घुमा रहा था और इस एहसास से अनिता की आंखे बंद होने लगी थी पर तभी मेरी पकड़ छुटी ओर अनिता जमीन पर आ गई,हम दोनों एक दूसरे पे बिल्कुल पास खड़े थे वो अभी भी अपनी नजरे झुकाएं इस एहसास में खो गई थी कि आखिर अभी ये क्या हुआ? पर मैं कुछ कदम पीछे हुआ और मैने अपने बदन से टीशर्ट उतारकर साइड में रख दी,मेरे कसे हुए बदन को वो अपनी आंखो से निहार रही थी साथ ही उसका ध्यान मेरे शॉर्ट्स में खड़े लिंग पर भी गया,मैं उसके पास आया और उसके कान के हिस्से को दांतों से हल्का दबाते हुए कहा,"एक बार फिर ट्राई करे?" उसकी नजरे शर्म के मारे झुकी हुई थी इसलिए मै थोड़ा नीचे झुका और अपने हाथ उसकी गांड़ पर रखकर उसे कसकर पकड़ लिया।

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उसकी गांड़ को पकड़ने के बाद उसने नीचे पेंटी नहीं पहनी है इस बात एहसास हुआ जिसके चलते मैंने नीचे देखा तो उसकी चूत ने उत्तेजना के मारे उसके पेटीकोट को भिगोना शुरू कर दिया था, मैने एक जोरदार झटका लगाया जिससे अनिता के कमर का हिस्सा मेरे मुंह से ऊपर उठ गया,उसने जल्दी से बीज की थैली को उतारकर नीचे सूखे घास में फेंक दिया पर उसकी चूत का हिस्सा बिल्कुल मेरे पास था जिससे उसके चूत से निकलते पानी को मैं अपने मुंह पर महसूस कर रहा था,एक झटके से अनिता को उठाने की वजह से उसका पेटीकोट नीचे सरक गया था जिससे उसके भरावदार गांड़ की गोलाई बाहर दिख रही थी,जिसको मैंने अपने दोनों हाथों में जकड़ा हुआ था।अपनी पकड़ को मजबूत करते हुए मैंने उसकी गांड़ को थोड़ा फैला दिया।

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अनिता को अपनी पेटीकोट के ऊपर से ही मेरे रूक्ष होठों का एहसास उसकी चूत पर हुआ, मैं उसकी चूत के पानी को अपने होठों से पीने लगा जिससे उसकी सिसकी पूरे कमरे में गूंज उठी 'आआहहह्......उउममहह्........सीईईइइह्.....'
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इसके साथ ही उसके बदन ने जोर से झटका मारा जिससे मेरा बैलेंस बिगड़ा और हम दोनों पीछे पड़े हुए सूखे घास के ढेर पर गिर पड़े। मैं अनिता के ऊपर गिरा हुआ था,गिरने की वजह से उसके दो बड़े उरोज ब्लाउज से उछलकर बाहर आ गए थे और उसका पेटीकोट फिसलकर उसकी जांघ तक नीचे उतर गया था,एक तरह से अनिता का नग्न जिस्म मेरे समाने पड़ा था।

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नीचे गिरते ही मेरा चेहरा अनिता के पेट के ऊपर था जिससे उसके नाभि की गहराई मेरी आंखों के सामने थी,मेरे जुबान के गीलेपन से नई उसकी नाभि को तरबतर करने लगा,पूरे कमरे की गर्मी के साथ हम दोनों के जिस्मों की कामाग्नि शरीर को भिगो रही थी,जिससे अनिता का बदन चांद की तरह चमक रहा था।

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उसकी नाभि की चूमते हुए मैं उसके पेटीकोट की नीचे उतार कर उसे पूरा नंगा कर दिया था,किसी मुलायम गुब्बारे की तरह बड़े दो उरोज शरीर की हर हरकत के साथ हिल रहे थे,उसकी नाभि की चूमते हुए मैं थोड़ा नीचे गया और उसकी दोनों टांगों को पकड़कर चौड़ा किया जिससे बालों से घिरे हुई उसकी योनि के दर्शन हो गए,उसके आसपास थोड़ा कालापन था पर उसके बीच गुलाबी चूत का दाना किसी मोती की तरह चमक रहा था जो पूरी तरह पानी से भीगा हुआ था, मैंने नीचे झुककर अपने होठों से उसके यौवन को रिझाना शुरू किया,वो अपना सर हिलाते हुए इस कामुक सफर का आनंद ले रही थी।
'आआऊउचच्........ आआहाहाआहहह्....... हां ऐसे ही.....ऊउउफफफ्....... और जोर से चूसो विशाल बाबु.......... ओओहहहह्........मांमाआआआ........उउफफ्.......ऊउउफफ्.......आआहह्........ आआआहह्.........Harderrrrr........'

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उसके सिसकियों को आवाज पूरे गोदाम में फैल गई थी, मैं उसकी चूत के ऊपरी हिस्से की चाटते हुए उसकी चूत के दाने को मसल रहा था,जिससे उसका पूरा बदन सिहरने लगता,उसकी चूत का नमकीन पानी अब मेरे मुंह को भिगोने लगा था,अनिता को देखकर लग रहा था कि जैसे माधवेन्द्र कभी उसको पूर्णतः यौन संतुष्टि नहीं दे पाया होगा।

मैंने योनि के ऊपरी हिस्से को चूसने के बाद अपनी जीभ को उसकी चूत के अंदर घुसा दिया,उसके योनि के अंदर की गर्माहट मुझे अपने मुंह पर महसूस होने लगी,अपनी जीभ को गोल घुमाते हुए मैं उसकी योनि के दीवारों को भिगो रहा था,मैने एक हाथ को नीचे गांड़ के पास ले गया और अपनी एक उंगली को उसके गांड़ के छेद में डाल दिया,उसके योनिजल को पीते हुए मैं अपनी उंगली अंदर-बाहर कर रहा था।


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अनिता अपनी हाथों की उंगलियां दांतों तले दबाकर अपनी सांसों को काबू कर रही थी तभी उसके बदन से एक झटका मारा और उसका वीर्य निकलकर मेरे मुंह में समा गया,मेरा पूरा मुंह उसके वीर्य से भर गया था, मैंने उठकर उसके बूब्स के पास गया और उसके दोनों बूब्स को उस वीर्य से भिगोने लगा,उसके Brown निप्पल से बहते हुए उसका कामरस बहते हुए नीचे गिरने लगा
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मैने दोनों हाथ उसके स्तन पर रखे और उसके स्तनों पर कामरस की मालिश करने लगा, मैं उसके चेहरे पर पास गया जो पूरा लाल हो चुका था पर उसके मुख पर जिस्म की प्यास अभी भी झलक रही थी जिसकी वजह से उसके होठ थरथरा रहे थे,मेरे मुंह में अभी भी कुछ Sperm बचा हुआ था इसलिए मैंने उसके होठों को चूमकर अपनी जीभ उसके मुंह में घुसाकर उसका रसपान कराने लगा,उसने दोनों हाथों से मेरे सर को पकड़ा हुआ था साथ ही मैं अपने दोनों हाथों से उसके स्तन मसल रहा था।वो पूरे जोश के साथ मेरे होठों को चूम रही थी जैसे उसे वो दोबारा नहीं मिलेगा तभी उसने धक्का देकर मुझे साइड पर गिरा दिया चेहरे पर मुस्कान लिए मेरे शॉर्ट्स के पास बैठ गई,मैने नीचे अंडरवियर नहीं पहनी थी इसलिए मेरे लंड का उभार शॉर्ट्स के ऊपर से नजर आ रहा था,मेरे लंड को देखने की जिज्ञासा लिए उसने मेरा शॉर्ट्स उतार दिया,जिससे मेरा 9 इंच लंबा लिंग उसके सामने फुंफकार मारते हुए खड़ा था।
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वो मेरे लिंग की लंबाई को हैरानी भरी नजरों से देख रही थी,शायद इतना बड़ा लंड उसने पहले कभी नहीं देखा था इसलिए उसने अपने दाएं हाथ से मेरे लिंग की मोटाई को महसूस करने लगी,जैसे ही उसने लंड को छुआ तभी उसके कोमल हाथों के स्पर्श से वो एक झटका खा गया।मेरा लंड उसके एक हाथ में नहीं समा रहा था इसलिए उसने दोनों हाथों से उसे पकड़ लिए,जैसे वो मेरे लंड के पास आई तो उसकी एक मादक खुशबू उसे महसूस हुई,उसने धीरे से अपना मुंह खोला लंड के टोपे को अपने मुंह में भर लिया,उसके मुंह की मुलायम दीवारों से टकराते हुए लंड उसके गले तक पहुंच गया, मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक ही बारी में वो इसे इतना अंदर ले सकेंगी,मेरे लंड को उसके दांत न चुभे इस तरह संभालकर वो अपने होठों को रगड़ते हुए उसे अंदर बाहर कर रही थी।
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जैसे ही वो उसके मुंह में जाता वो लंड के सुपाड़े पर अपनी जीभ गोल घुमाती और उसे अपने गले से ज्यादा अंदर तक निगलने लगती,मेरी मॉम अश्विनी की बाद ऐसा blowjob आज तक रुचि भी नहीं दे पाईं थी, मेरी मॉम का ख्याल दिमाग़ में आते ही वो ज्यादा सख्त हो गया क्योंकि वो कामुकता, सुंदरता और लचीलेपन का पूर्ण संगम थी।
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मैने अनिता के चेहरे पर आए बालों को दूर किया और आंखे बंद करके उसका मजा लेने लगा,उसने धीरे-धीरे लंड के ¾ हिस्से को अपने मुंह भर लिया था जिसकी वजह से मेरे नीचे के हिस्से पर खिंचाव बढ़ने लगा।
'ओओहहह् भाभी मैने सोचा नहीं था आप इसे इतना अच्छे से चूस लोगी......हाआआअ्......हाआअ्....... ओओहहहह्........Fuuckkk........Bitch......ये काफी बढ़िया है........ आआआहहाहह्........."


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जैसे मुझे लगा मेरा माल निकलने वाला है मैने उसके सर को कसकर दबा दिया,जिससे पूरा माल उसके गले से नीचे उतर गया,मेरा वीर्य निकलने के बाद वो जोरो से सांसे ले रही थी,मैं धीरे से घास के ढेर से खड़ा हुआ हम दोनों के बदन पर पसीने की वजह से घास चिपकी हुई थी पर अनिता का पैर उसके ब्लाउज पर पड़ गया वो उसे उठाने ले लिए पीछे मुड़कर नीचे झुकी तो उसकी काली गांड़ की दरार में भूरा छेद मुझे नजर आ गया,वो जैसे ही ऊपर उठती उसे अपनी गांड़ की दरार में जीभ का गीलापन महसूस हुआ जिससे से चौक उठी,"आआआहह्.......बाबूजी ये क्या कर रहे है,छोड़िए वो हिस्सा अभी साफ नहीं है...... आआहाहाआहहह्......."
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मैने उसके गांड के बालों हो थोड़ा हटाया और उसके गांड़ को चाटने हुए कहा,"अनु अभी तुम्हे बहुत कुछ सीखना बाकी है,कोई भला इतनी मदमस्त गांड को कैसे छोड़ सकता है?" मेरे चाटने की वजह से वो ज्यादा देर खड़ी न रह पाई इसलिए उसने घुटनों के बल बैठता हुए अपना चेहरा जमीन पर रख दिया और अपनी गांड़ ऊपर कर दी, मैं उसकी गांड़ में उंगली डालकर उसके छेद को चौड़ा करता और उसमें अपनी जुबान डालकर उसे चाटने लगता,विशाल के चाटने की वजह से "उममहहह्......हाआआआं.....सीईईपप्......चपप्.......सुऊउपप्........"

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जैसी आवाजें आ रही थी,अनिता के लिए तो जैसे ये किसी सपने की तरह था,शादी के इतने सालों में आज तक उसका पति भी उसे इतना मजा नहीं दे पाया था,एक जवान मर्द का साथ कैसा होता है ये उसे आज पता चला था,"हाआआंहह्.......बाबूजी,इस प्यासी गांड़ में अपना लंड डालकर इसे ओर गहरा बना दीजिए.....आआऊंउचच........"

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मैने 2 उंगलियों को उसकी गांड़ में उतार दिया,इतना बड़ा लिंग देखने के बाद भी गांड़ में देने को कहने वाली औरत को मैने पहली बार देखा था।मैने अपना लंड देखा जिसे अनिता ने चूसकर चिकना कर दिया था इसलिए मैंने उसकी गांड़ पर सुपाड़े को रखा और हल्का सा धक्का देकर उसकी गांड़ में उतार दिया।

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अनिता के मुंह से हल्की सिसकी के साथ आनेवाले पल की बैचेनी साफ़ नजर आने लगी,उसकी गांड़ का छेद काफी कसा हुआ था जिसे देखकर मुझे हैरानी हुई पर जैसे ही मैं धक्का लगाने वाला था कि बाहर खेतों की तरफ हमे कुछ आवाजें सुनाई दी जिसे सुनकर दोनों चौक्कना हो गए और गोदाम के खिड़की से बाहर देखा तो दूरी से माधवेन्द्र चलते हुए घर की तरफ ही आ रहा था।



आगे के अपडेट्स में कहानी जारी रहेगी इसलिए नीचे Comment करके अपने प्रतिभाव जरूर Share करे ताकि मैं जल्द से जल्द अगला अपडेट आपके सामने पेश कर सकूं।
 
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बाहर खेतों से आवाज सुनते ही हम दोनों सतर्क हो गए और गोदाम की खिड़की से बाहर झांककर देखा तो सभी जानवर भाग चुके थे इसका मतलब माधवेन्द्र थोड़ी देर में घर की तरह आ जाएगा,हम दोनों बाहर देख रहे थे तब अनिता बिल्कुल मेरे आगे खड़ी थी और हम दोनों के जिस्म एक दूसरे से चिपके हुए थे,जिससे मेरा मोटा लिंग उसकी गांड़ की दरार में धंसा हुआ था।
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उसकी ध्यान इस वक्त मुझे पर नहीं था तभी अचानक मैंने दोनों हाथों से उसको कमर से पकड़ा और एक तेज धक्का लगाया Fwwooppp की आवाज ले साथ मेरा आधा लंड उसकी गांड़ की दीवार को चीरते हुए अंदर घुस गया
'आआआहाहाहहहह्........... ऊउउममममहहह्...........ऊंऊउन्न्ननहहह्........'

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इतनी बड़ी चीज़ अचानक अंदर जाने की वजह से उसकी चीख निकल गई पर मैंने तभी एक हाथ से उसके मुंह को दबोच लिया,अनिता के खड़े होने की वजह से गांड़ की कसावट बहुत ज्यादा लग रही थी जो मेरे लिंग को अंदर दबोच रही थी,जिसे महसूस करके मेरी समझ में आ गया कि माधवेन्द्र का लिंग कभी भी इतनी गहराई तक नहीं पहुंचा होगा, मैंने अनिता के कानों के पास जाकर धीरे से कहा,"समय के अभाव के कारण मैं तुम्हारे शरीर को अच्छे भोग नहीं पाया परंतु जाने से पहले इस दर्द के रूप में मेरी याद तुम्हारे जिस्म में छोड़कर जा रहा हूँ।" इतना कहकर मैंने दूसरे ज़ोरदार धक्के के साथ अपना लिंग उसकी गांड़ में उतार दिया जो सीधा जाकर उसकी गांड़ की दीवार से टकराया।
'ऊउउममममहहह्........ईईईइहहहह्........ ऊऊउउफफफ्........ऊंउउममहहह्............. ऊंऊउन्न्ननहहह्........'

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रुचि की चीख उसके मुंह में ही दब गई और उसकी आँखों से आंसुओं की कुछ बूंदे छलक आई,वो दीवार का सहारा लिए आगे झुककर काफी थी,उसके दो बड़े उरोज हवा में झूल रहे थे और पीछे से उसकी बड़ी सी गांड़ नजर आ रही थी, जिसका छेद मेरे लिंग की वजह से थोड़ा फैल गया था।
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इस नजारे को देखकर मेरी उत्तेजना ओर बढ़ गई और मैंने उसके मुंह से अपना हाथ हटाकर उसकी गांड़ का जोरदार दो चमाट लगा दी,मेरे ऐसा करते ही उसकी गांड़ का छेद ज्यादा कस गया और खून की एक बूंद बाहर आ गई,यह देखकर मैने लंड को बाहर निकाला जो थोड़ा खून से सना हुआ था और एक बारी में उसे वापस अंदर डाल दिया,मैंने ऐसे दो-तीन धक्के लगा दिए जिससे अनिता का पूरा बदन हिल गया।
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उसके बाद मैने लंड को बाहर निकाल लिया,मैने उसका चेहरा देखा जो पसीने से भीगा हुआ था पर आंखों की नमी,चेहरे के लाली और मुंह से निकलती लार की वजह से बहुत प्यारा लग रहा था,उसने अपनी ऊंगली को गांड़ के छेद पर रखा जो थोड़ा सूझ गया था,उंगली छेद पर पड़ते ही उसके मुंह से सिसकी निकल गई इसलिए उसने मेरी तरफ देखकर कहा,"बाबूजी अचानक से इतना बड़ा मूसल डालकर आपने तो मेरी जान ही निकाल ली"
मैने मुस्कुराकर उसके चेहरे को देखकर कहा,"मेरी जान यौन सुख का हसीन सफर का रास्ता दर्द से ही होकर गुजरता है" यह कहकर मैने अपना लिंग उसके सामने रखा जो योनि के रस और गांड के खून से सना हुआ था,उसने मुस्कुराते हुए उसे मुंह में भरा और अच्छे से साफ कर दिया,उसके बाद हम दोनों से अपने बदन को ठीक किया और उसे फिर कपड़ों उसे ढक लिया।

मैने सामने की तरफ देखा जो उसके घनी जुल्फों को बांध रही थी पर उसके बावजूद बालों की एक लट उसके चेहरे पर आ गई थी जो बहुत प्यारी लग रही थी, मैंने तेजी से उसके चेहरे के पास गया और उसके चेहरे को पकड़ कर उसके दोनों रसीले होठों को चूस लिया,कुछ सेकेंड्स के होठों के इस घर्षण के बाद हम दोनों अलग हुए पर उसकी नर्म बाहों ने अभी भी मुझे पकड़ रखा था।


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जिससे मैंने उसकी आंखों में देखकर कहा,"अभी तो मैं तुम्हारी प्यास को बुझाए बिना अधूरा छोड़कर जा रहा हूं पर मैं वादा करता हूं कि थोड़े दिन बाद मैं आपस आऊंगा और इस समागम को पूर्ण करूंगा।"
"आपसे ज्यादा मुझे इस पल का इंतेज़ार रहेगा" हमारी इतनी बातचीत के बाद उसने बेग को बीज से भर दिया और मैं बाहर आंगन मैं आकर बैठ गया पर अनिता मेरे लिए चाय बनाने के लिए चली गई।अभी मुझे बाहर आए कुछ ही पल बीते थे कि तभी खेत के रास्ते से माधवेन्द्र आ गया जो मेरे पास कुर्सी पर आकर बैठ गया,उसका बदन पसीने से भीगा हुआ था साथ ही वो थोड़ा हाफ रहा था,उसे इस तरह देखकर मैंने उससे पूछा,"क्या हुआ जानवर गए या नहीं?"
उसने एक लंबी सांस छोड़ते हुए कहा,"मत पूछो यार,सालों ने बहुत परेशान कर दिया,वो अच्छा हुआ बगल के खेत वालों ने जल्दी बुला लिया इसलिए फसल का ज्यादा नुकसान नहीं हुआ पर इनका जल्द ही कोई रास्ता निकालना पड़ेगा।"
विशाल : वैसे मेरी मानो तो खेत के चारों तरफ Electric Fencing क्यूं नहीं करवा देते?"
माधवेन्द्र : क्या मतलब??!!
विशाल : अरे सरल भाषा में कहूं तो खेत के चारों तरह लोहे की तार लगी होती है जिसमें से 24 घंटे बिजली गुजरती रहती है जिससे कोई भी बाहरी जानवर को खेत में आने से रोकती है।


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माधवेन्द्र : हां यार,वैसे आइडिया तो अच्छा हैं,ये पहले मेरे दिमाग़ में क्यों नहीं आया?" उसकी बात पर मैं मुस्कुरा दिया।
माधवेन्द्र : वैसे हमारे मास्टर जी स्कूल के साथ खेतों का भी ज्ञान रखते है...हां!!?
विशाल : अरे इसमें क्या नया है आज कल की किताब में या वीडियो में इन सभी चीजों के बारे में अच्छे से जानकारी दी जाती है।
माधवेन्द्र : कुछ भी कहो पर बात आपने 100 पते की कही है
इतना कहकर वो एक पल खामोश हो गया और आसपास देखने लगा और पूछा,"वैसे आप अकेले बैठे हो अनिता कहां है?"
विशाल : वो मेरे कई बार मना करने के बावजूद भाभी जी चाय बनाने चली गई,मेरी बात सुनकर वो हंसने लगा।
माधवेन्द्र : आखिर पत्नी किसकी है,आपकी खातिरदारी में क्या कोई कमी रख सकती है?
विशाल ( मन में ) : मैंने भी खूब खातिरदारी करवाई है अगर तू नहीं आता तो मैंने तेरी बीवी की भोस का भर्ता बना दिया होता।
यह सोचकर उसके मुंह पर मुस्कान बिखर जाती है और वो माधवेन्द्र से कहता है,"बिलकुल इसमें कोई शक नहीं"


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अभी वो दोनों बात कर रहे थे कि तभी सामने से अनिता हाथों में चाय की ट्रे लिए चेहरे पर मुस्कान बिखरे उनकी तरफ ही आ रही थी पर वो हल्के सा चलते हुए लड़खड़ा रही थी।उसने चाय की ट्रे टेबल पर रखी और माधवेन्द्र के बगल वाली कुर्सी पर बैठ गई,उसके बैठते ही माधवेन्द्र ने अपना सवाल कर दिया,"क्या हुआ तुम लड़खड़ाते हुए क्यों चल रही थी" यह सवाल सुनकर उसने मेरी तरफ देखा जिससे उसके गाल हल्के से लाल पद गए उसके बाद उसने कहा,"वो ताज़ा बीज आपने गोदाम में ऊपर की तरफ रख दिए थे जिसे उतारते वक्त थोड़ा पैर मूड गया और हल्की सी मोच आ गई।"
माधवेन्द्र : तुमने अकेले चढ़ने के बजाए मास्टर जी को मदद के लिए बुला लिया होता तो वो तुम्हारी मदद कर देते।
अनिता : जैसा आपने कहा ये हमारे मेहमान है तो इन्हें मैं तकलीफ कैसे देती वैसे भी इनका ध्यान रखना तो हमारा फ़र्ज़ है" यह बात उसने इस मादक तरीके से कही कि मेरे रोंगटे खड़े हो गए,उसके बाद हम सभी ने हंसी-मजाक करते हुए चाय नाश्ता किया और उसके बाद मैं अपने घर की तरफ चल दिया।



आगे के अपडेट्स में कहानी जारी रहेगी,जिन लोगों ने अभी तक Support किया है उन सब का दिल से धन्यवाद और अगर आपको कहानी पसंद आ रही है तो नीचे अपना प्रतिभाव जरूर से लिखे,आगे ले अपडेट में कहानी इससे ज्यादा गर्म होने वाली है तो इस पर अपना प्यार दिखाए और Stay Tuned.....
 
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मैं माधवेन्द्र के घर से चाय नाश्ता करके निकला, जाने से पहले मेरी नज़र अनिता से मिली तो मुझे उसमें एक अधूरे पन का एहसास दिखा, मैं भी हालात के आगे मजबूर था इसलिए एक मीठा सा दर्द उसके जहन में छोड़कर जा रहा था।

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मैं करीब 12 बजे माधवेन्द्र के घर से निकला था यानि घर पहुंचने में मुझे 20 मिनिट लग जाएंगे, अनिता के साथ किए समागम के बाद मेरा पूरा बदन पसीने से भीग चुका था जिसकी वजह से मुझे एक ठंडे शॉवर की सख्त जरूरत थी जो मुझे तरोताजा कर सके, मैंने टीशर्ट को थोड़ा आगे खींचकर अपनी नाक रखी तो मेरे सांसों में हम दोनों के जिस्मों की ख़ुशबू समा रही थी।

दूसरी तरफ घर में रुचि ने सब बर्तन धोकर प्लेटफॉर्म साफ रही थी तब उसे घर के बाहर आंगन से कुछ आवाज़ सुनाई दी उसे लगा शायद उसका वहम होगा तभी घर के डोरबेल की आवाज़ पूरे हॉल में गुंज उठी,उसने घड़ी देखी तो 11 बज रहे थे उसे लगा विशाल वापस आ गया होगा यह सोचते हुए उसने डोर खोला तो सामने बैग्स के साथ चेहरे पर मुस्कान लिए उसकी मां वेदिका खड़ी थी।

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उसने बाहर देखा तो माधवेन्द्र टैक्सी वाले को पैसे दे रहा था यानि थोड़ी देर पहले उसने जो आवा सुनी वो टेक्सी की थी।

वेदिका ने अंदर आकर हॉल में अपना बैग रखा और रुचि को अपने गले से लगाते हुए कहा,"ओहह्.....मेरी बच्ची,कितने दिनों बाद तुमसे मिल रही हूं,कैसी हो तुम?" तभी मनोहर ने हॉल के सोफे पर बैठते हुए कहा,"अरे उसे भला क्या होगा? आप तो ऐसे पूछ रही है जैसे वो इतने दिनों से किसी पराए के घर पे ठहरी हो" उनकी बात सुनकर हम तीनों हंसने लगे।
"आप दोनों बैठिए, मैं आप दोनों के लिए पानी लेकर आती हूँ" इतना कहकर रुचि फ्रीज से एक बोतल लेकर आई और पानी भरकर दोनों ग्लास उनको थमा दिए,मनोहर ने पानी का ग्लास ख़त्म करके एक लंबी सांस छोड़ते हुए कहा,"कुछ भी कहो पर अब बढ़ते उम्र की वजह से Travelling में बहुत थकान होती है।"
"वैसे ये बात तो आपने ठीक कही मेरा भी बदन दर्द कर रहा है......हांहाहाआआहहह्........." वेदिका ने अंगड़ाई लेते हुए अपनी बात कही,जिससे उसके दो बड़े स्तनों के उभार साड़ी के ऊपर से भी झलकने लगे और साइड से साड़ी का पल्लू हटने से उनकी गदराई कमर भी नजर आने लगी।


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मनोहर ने एक पल के लिए उस मादक दृश्य को देखा और सोफे से उठते हुए कहा,"मैं अपने कमरे में सोने जा रहा हूं और रुचि बेटा थकान की वजह से मेरा खाना खाने का मन नहीं है इसीलिए बेकार में बनाने तकलीफ मत करना।" इतना कहकर वो अपने रूम में चले गए और कमरे का दरवाजा उन्होंने बंध कर लिया।

मनोहर के जाने के बाद रुचि पानी की बोतल लिए वेदिका के सामने ही खड़ी थी इसलिए ना चाहते हुए भी उसका ध्यान रुचि के बदन पर चला गया था।रुचि के बदन की कसावट,रसीले स्तन,गांड़ का उभार और उसके चेहरे से झलक रहा निखार वेदिका की आंखों से छुप नहीं पाया क्योंकि शरीर का यह बदलाव शादी के बाद किए गए सहवास से यह निखार उभरता है पर यह बदलाव रुचि में अचानक से आ गया था।


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वेदिका को अपनी तरफ घूरते हुए देखकर रुचि ने पुछा,"मॉम क्या हुआ?आप मुझे ऐसे क्यों घूर नहीं हो?"
वेदिका : लगता है तुम्हे तुम्हारी आंटी के घर का खाना कुछ ज्यादा ही पसंद आ गया है तभी तो तुम्हारे बदन काफी भरा हु लग रहा है।अपनी मां के मुंह से यह बात सुनकर रुचि के अपने बूब्स पर अपना एक हाथ रख दिया और शर्माते हुए कहा,"नहीं तो,ऐसी कोई बात नहीं है।" रुचि की बात सुनकर वेदिका हंसने लगी,"अरे मैं तो मजाक कर रही थी, यहां आकर बैठो।"
अपनी मां की बात सुनकर रुचि उनके बगल में सोफे पर जाकर बैठ गई,वेदिका ने रुचि के स्वभाव में भी एक बदलाव देखा जो रुचि अपने पापा के गुजरने के ग़म में खामोश रहती थी अब वो यहां आकर नॉर्मल होने लगी थे इसलिए उसने रुचि के सर पर प्यार से अपना हाथ रखते हुए कहा,"मैं बहुत खुश हूं कि तुम यहां सब लोगों से इतनी घूम-मिल गई हो।" वेदिका की बात सुनकर रुचि कुछ ना कह सकी और वो अपनी मां के गले लग गई,जिससे वेदिका को रुचि के स्तनों का उभार अपनी छाती पर महसूस हुआ इसलिए उसने रुचि को पीछे करके थोड़ा सीरियस होते हुए कहा,"रुचि पर तुम्हारी एक बात से नाराज हूं" वैदिक की बात सुनकर रुचि सवालों भरी निगाहों से उसे देखने लगी,वेदिका ने रुचि के बूब्स पर अपना एक हाथ रखा जिससे वो थोड़ा सिहर गई,"जरा देखो खुद को,अब तुम जवान हो गई हो इसलिए तुम्हे मर्यादा को समझते हुए अपने शरीर के हिसाब से कपड़े पहनने चाहिए।"


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रुचि ने वेदिका की बात सुनी तो वो समझ गई कि उसकी मां क्या कहना चाहती है दरअसल रुचि ने इस वक्त Halter Neck Bikini Top पहना हुआ था जो उसके Thighs तक ही पहुंचता था,जिसमें रुचि के आधे से ज्यादा बूब्स बाहर निकल रहे थे और इसकी Strips छोटी होने की वजह से इसमें ब्रा भी नहीं पहन सकते थे पर रुचि ने बिन घबराएं अपना जवाब दिया,"मां मैं आपको नाराजगी समझ सकती हूं पर आंटी को आप जानती है तो वो पहले से ही खुले विचारों वाली औरत है,ऊपर से बढ़ती गर्मी की वजह से वो खुद इस तरह कपड़े पहन लेती है जिसकी वजह से अंकल और विशु को भी इन सबकी आदत हो गई है और वैसे भी ये घर शहर से दूर है तो किसी के आने का डर भी नहीं।"

रुचि की बात सुनकर वेदिका बस उसको देखे जा रही थी वो कुछ कहने वाली थी तभी रुचि की हरकत से वो सिहर उठी,रुचि ने आगे बढ़कर वेदिका के साड़ी के पल्लू को पकड़कर एक तरफ कर दिया और उसने दोनों हाथों से उसके बूब्स को पकड़ते हुए कहा,"वैसे मॉम तो सिर्फ घर में ऐसे कपड़े पहनती हूं पर आप तो अंकल के साथ इस तरफ के कपड़े पहनकर आई है।" दरअसल वेदिका ने भी Deep Neck Paded Blouse पहना था जिसके साथ ब्रा नहीं पहना सकते और इस Blouse में Pads इस तरह से लगे हुए होते है कि बूब्स ज्यादा Tight और आकर्षक लग सके पर वेदिका के बूब्स रुचि से भी बड़े थे इसलिए उसकी Cleavage गर्दन के थोड़ा नीचे तक पहुंचती थी।


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रुचि ने जैसे ही बूब्स के नीचे दोनों हाथ रखकर थोड़ा धक्का मारा तो वेदिका के थन उछलकर बाहर आ गए, ऊतक और ग्रंथियों की वो श्वेत गोलाकार बनावट के ऊपर Brown के साथ हल्के गुलाबी निपल्स कहर ढा रहे थे,उस बनावट को देखकर रुचि भी मंत्रमुग्ध हो गई,वो अपने मन में सोचने लगी,"अब पता चला भैया मां के इतने दीवाने क्यूं है" यह सोचकर उसकी हल्की हंसी छूट गई।

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"बेटा यह क्या कर रही हो कोई........ आआहहममम्......" वेदिका की सिसकी निकल गई पर उसने अपने मुंह पर हाथ रख दिया था,उसे अपने स्तन पर रुचि का दो ठंडे हाथ महसूस हुआ जिससे उसके पूरे बदन के रोंगटे खड़े हो गए,रुचि ज्यादा देर तक पानी की बोतल पकड़ रखी थी जिससे उसके हाथ ठंडे हो गए थे।रुचि ने निप्पल के आसपास अपने हाथों को घुमाया और धीरे से दोनों उरोज को हल्के से दबा दिया, जिसकी वजह से वेदिका का बदन गर्म होने लगा,रुचि के इस तरह के बर्ताव को देखकर वेदिका हैरान रह गई थी,मां बेटी के बीच अक्सर हल्की मस्ती होती थी पर आज से पहले रुचि ने ऐसा बर्ताव कभी नहीं किया था।
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रुचि के ठंडे हाथ पड़ने की वजह से वेदिका के निप्पल सख्त हो गए थे,उसके नर्म स्तनों को रगड़ते हाथों से उसके जिस्म में एक मीठा सा एहसास दौड़ रहा था जिससे उसकी आँखें बंद हो गई तभी उसे अपने बाए उरोज पर गर्म सांसे महसूस हुई तो उसने अपनी आंखे खोलकर देखा तो रुचि उसके बाएं निप्पल पर अपने होठ गड़ाए उसके स्तन का रसपान कर रही थीं।
"बेटा रुक जाओ तुम ये क्यायाअअ्.....आआहहहह्...... ऊंउउममहहह्.......ईईइससससस्......."

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बचपन के बाद इतने साल बाद उसकी बेटी स्तनपान कर रही थी पर इसमें कुछ अलग था,रुचि उसके निप्पल पर अपनी जीभ गोल घुमाती,उसे दांतों से हल्का दबाती और उसे बाद उसे होठों से चूसने लगती,रुचि ने अपनी मां के निप्पल को चूसकर लाल कर दिया था,वेदिका जोरो से सांसे ले रही थी और रुचि इस वक्त उसके सामने नीचे जमीन पर बैठी थी,रुचि ने धीरे से अपना हाथ वेदी के कमर पर घुमाया और उसके पेटीकोट को ढीला करके उसके अंदर डाल दिया,वेदिका जैसे इस एहसास में कही खो गई थी उसके जिस्म को अब यह एहसास अच्छा लगने लगा था तभी उसे अपनी चूत पर दो उंगलियों का एहसास हुआ,जिससे वो होश में आ गई और जल्दी से रुचि को दूर करते हुए कहा,"बस बेटा अब बहुत हो गया।"

रुचि ने देखा तो वेदिका की साड़ी बिखर चुकी थी,उसके तेज चलते सांसों को वजह से उसकी छाती ऊपर नीचे हो रही थी।


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उसके चेहरा हल्का लाल पड़ चुका था और उसके आंखों की पलके थोड़ी भीगी हुई थी,"रुचि तुम्हे यह अचानक क्या हो गया था? तुम अपनी मां के साथ ही ऐसा कैसे?!!!" कहते हुए उसने अपना ब्लाउज ठीक किया।रुचि ने वेदिका के पास बैठते हुए कहा,"डेड के जाने के बाद हम दोनों अकेले हो गए थे जिसका असर हमारे दिल और दिमाग़ पर भी पड़ा था पर वक्त के साथ वो सारे गम हम भूलने लगे, मैं तो अभी जवान हूं इसलिए मेरी जिंदगी में एक मर्द की कमी पूरी हो जाएंगी पर आप उस शारीरिक सुख से वंचित रही है।" रुचि की बात सुनकर वेदिका उसकी ओर देखने लगी, उसके अभी भी साड़ी ठीक से नहीं पहनी थी जिससे उसके स्तन प्रदेश उजागर हो रहा था साथ ही उसका पेटीकोट अब भी ढीला था।

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"मेरी ज़िंदगी में इस सदमे का काफी गहरा असर हुआ था पर जब मुझे अकेले रहकर सोचने का मौका मिला तब मुझे यह समझ आया कि आप किस मनोस्थिति से गुजर रही होगी इसलिए किसी दूसरे शख्स से उम्मीद लगाने से अच्छा मैं ही आपका वो सहारा बन जाऊ।" इतना कहते हुए रुचि ने अपनी नजर झुका ली,वेदिका ने देखा तो रुचि की आंख से एक आंसू बाहर आ गया था तभी उसके रुचि के चेहरे को पकड़कर अपने सीधे से लगाते हुए कहा,"मैंने कभी सोचा नहीं था मेरी बेटी इतनी जल्दी बड़ी हो जाएंगी" रुचि का चेहरा इस वक्त वेदिका के दोनों बूब्स के बीच में था इसलिए रुचि कसकर उससे लिपट गई,"अपनी मां को माफ करना बेटा मैं तुम्हे गलत समझ बैठी।"
रुचि ने वेदिका की आंखों से देखकर कहा,"कोई बात नहीं मां आप मेरे साथ हो बस यही मेरे लिए बहुत है।" रुचि की इस बात पर जैसे उसे प्यार उमड़ आया उसने रुचि के चेहरे को पकड़ा और अपने रसीले होठों को रुचि के नाजुक होठ से मिला दिए।

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अपनी मां की इस हरकत से रुचि चौंक उठी ,उसे अपनी मां के तरफ से इस तरह के प्रतिभाव की बिल्कुल उम्मीद नहीं थी,कुछ पल तक दोनों के होठ मिलने से उनका गठबंधन चलता रहा तभी रुचि ने अपनी मां के हाथ को पकड़कर ऊपर विशाल के कमरे में ले आई और बेड पर पटकते हुए रूम का दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया,रुचि ने सामने देखा तो उसके मां की साड़ी पूरी तरह से निकल चुकी थी, अब वो बस बेड पर पड़े ब्लाउज और पेटीकोट में अपनी नशीली आंखों से अपनी बेटी की तरफ देख रही थी पर उससे पहले रुचि ने टेबल पर जाकर एक बटन को दबाया जिससे Video की Recording स्टार्ट हो गई।



आगे के अपडेट्स में कहानी जारी रहेगी तब तक नीचे Comment Section में अपने प्रतिभाव जरूर लिखे।
It's Time for Some Lesbian Sex
 
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यह आखिरी अपडेट था जिसे मैने Advance में लिख कर रखा था अब इसके बाद मैं थोड़ा ब्रेक ले रहा था हूं और Recent Updates पर कैसा Response आता है उसे देखकर मैं आगे लिखना Start करूंगा या शायद आप सभी के लिए Dilwali Special Mega Update भी आ सकता है बस अपना प्यार बनाएं रखना।

अपडेट - 20

विशाल के घर में नीचे मनोहर गहरी नींद में जा। चुका था वहीं ऊपर विशाल के कमरे में वेदिका आंखों में एक नशा लिए अपनी बेटी की तरफ देख रही थी,वेदिका का बदन अब गर्म होने लगा था, जिसका असर उसके चेहरे पर छाई लालिमा से नज़र आ रहा था,रुचि थोड़ा आगे आकर उसकी दोनों टांगों के बीच बैठ गई और थोड़ा आगे झुकी जिससे उसके दो उन्नत उरोज की गहराई उसकी मां के सामने आ गई,वेदिका ने ये देखते ही रुचि के झूलते हुए स्तनों को पकड़ा और उसके टॉप से बाहर निकाल दिया।

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इस तरफ रुचि ने भी उसके मां के सीने पर लगी परत को हटा दिया था,अब रुचि अपने पूरे बदन को वेदिका के जिस्म पर ढालते हुए उसके होठों को चूमने लगी,रुचि के होठ पर की गुलाबी और वेदिका के होठ पर लगी लाल लिपस्टिक से मिलाकर दोनों एक नए रंग को उभारने में लग गए।
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दोनों के जिस्मों के घर्षण की वजह से उनके स्तन आपस में मिल गए थे जिससे उनके निपल्स की सख्ती उनके सीने पर महसूस हो रहीं थी,इस तरफ रुचि अपने मां के चेहरे को सहलाते हुए उसके दोनों होठों से अच्छे से चूस रही थी,वही वेदिका भी उसकी बेटी के मुंह के रस को गले से नीचे उतार रही थी।
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वेदिका पहली बार इस एहसास को महसूस का रही थी जो किसी मर्द के साथ संबद्ध बनाने से काफी अलग था,अब वो उसकी उत्तेजना को बेकाबू बना रही थी तभी दोनों ने अभी जीभ बाहर निकालकर एक-दूसरे की नर्माहट को महसूस करने लगे।
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रुचि का थूक अब लगातार जीभ के माध्यम से वेदिका के मुंह में गिर रहा था उसके आगे झुकने की वजह से रुचि का टॉप पीछे से उतर गया था जिससे उसकी गांड़ पूरी तरह से खुल गई थी,वेदिका ने रुचि को उसकी गांड़ से पकड़कर पूरा ऊपर खींच लिया और उसके गांड़ के चिकने पन को महसूस करके दोनों हाथ की दो-दो उंगलियां अंदर डाल दी।
245939-sअभी भी दोनों के होठों का खेल खत्म नहीं हुआ था ऐसा लग रहा था मानो दो हवस की देवियां अपने काममय क्षण का आनंद ले रही हो जिससे पूरे कमरे में उनकी आवाजें गूंज रही थी।

"ऊंऊउउउमममहहह्...... हांहाआआआहह्.........सुसुऊऊउउपप्........ आआआहाहाहाआहहहह्हह्.........ऊउफ्......ऊउउफफ्......Ohhhh......Yeaaahh.......I wanntt Moreee Mommyyy........Yesss My babyyyyy......."


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कहते हुए दोनों पागलों की तरह एक-दूसरे को चूम रही थी जिससे पूरा बेड हिलने लगा था,देखते ही देखते दोनों ने अपने शरीर के सारे कपड़े उतार दिए थे पर तभी वेदिका ने रुचि को एक तरफ लिटाया और उसके ऊपर आते हुए कहा,"जरा मैं भी अपनी बेटी के स्तनों का रस पीकर देखूं कैसा स्वाद आता है?" इतना कहकर वेदिका रुचि के स्तनों के मसलते हुए उसके दोनों थनों को चूसने और काटने लगी।
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रुचि ने अपने मुंह में ब्लाउज दबा दिया था ताकि उसकी ज्यादा चीखे ना सुनाई दे पर वेदिका उसके निप्पल को मुंह ने भरकर हवा को अंदर खींचती जिससे उसका निप्पल पर खिंचाव बढ़कर अपन रस छोड़ने लगता,"आआआहाहाअअहह्ह्.......शशससईईअअअ्........ उममहहह्.........धीरे से चूसो मांअअ्....... आआऊंउउचच्......... ऊउउफफफ्......ऊउफफ्....... ओओहहहहहह्........ Yeassss.........हां ऐसे ही.......Lick Me Morreee..........Yeaahhhh.......हांहाहांआआआहहह्............ ओओअअहहहहह्..........."
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वो मुंह में उंगलियां दबाएं अपना सर इधर-उधर घुमाते हुए रुचि जोरो से सिसकियां ले रही थी,कुछ देर तक रुचि के दोनों स्तनों को चूसकर पूरे लाल रंग के कर दिए और रुचि के चेहरे के पास आते हुए कहा,"बेटा कितने मुलायम और रसीले बूब्स है तुम्हारे,आखिर तुम्हारे शरीर में मेरे Genes का कुछ तो अच्छा असर दिखा।" आपकी बार रुचि ने वेदिका के ऊपर आते हुए कहा,"हां बेटी तो मैं आपकी ही हूं तो फिर ये बदन का ये नशीलापन भी आप ही से मिला है" यह कहकर रुचि अपना मुंह वेदिका से मिला दिया और दूसरे हाथ से उसकी चूत रगड़ने लगी जो पूरी तरह पनिया गई थी,अपनी दोनों उंगलियों को वेदिका के चूत पर घुमाते हुए उसके दाने को अच्छे से मसलने लगी जिससे वेदिका का पूरा बदन झटके मारने लगा पर रुचि ने अपने मां की सिसकियों को दबा रखा था भले ही मनोहर सो रहा था पर रुचि पूरी तरह सावधानी बरत रही थी,आखिर उसने दो उंगलियां उसके चूत मे उतार कर उसे अंदर-बाहर करने लगी।
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रुचि की इस हरकत से उसके अंदर का लावा उमड़ने लगा,जिससे उत्तेजना के मारे उसने रुचि के बूब्स को कसकर पकड़ लिया था,आखिर जब वो उत्तेजना आपे से बाहर हो गई तो उसका पूरा बदन कांप उठा और एक मादक गर्म रस उसकी योनि से निकला Spppurraattt जिसने रुचि के हाथ को भिगो दिया।

"ऊऊउउफफफ्....... ऊंऊउन्न्ननहहह्........ आआआहाहाहाआहहहह्हह्.........सीईइइइइ....... ईईइइइससससहहह्......... मैं छूटने वाली हूँ बेटा........ हांहाआआआहह्..........."

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रुचि ने उस उंगलियों को वेदिका के मुंह में घुसा दिया जिससे वो भी वीर्यपान कर सके, इतने सालों में आज तक वेदिका ने इतना अच्छा वीर्य स्खलन का आनंद नहीं महसूस किया था,वेदिका ने उसकी उंगलियों को चूसकर पूरा साफ कर दिया पर रुचि नीचे उसकी योनि के पास गई यह कुछ बाल थे जिसे एक तरफ करके उंगलियों को घुमाया तो एक गुलाबी सी परत दिख गई,जिससे अभी भी कुछ बूंदे बाहर आ रही थी इसलिए अपने को वहा रखकर उस ताज़े रस का आनंद लेने लगी,अपनी जीभ से रुचि ने उसकी चूत को चाटकर साफ करने लगी,जिससे वेदिका ने दोनों हाथों से उसका से अपनी टांगें के बीच दबा रखा था,"Yeeesssss.......Myyyy Babbyyyy..........Justtt Lick Ittttt........Ohhhhh Fucckkkk Yeessss.........Givee me Moorrreee..........."

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कहते हुए वेदिका ने एक ओर झटका मारा जिससे उसकी योनि में बचा गाढ़ापन पूरी तरह से बाहर आकर रुचि के मुंह में समा गया,वो दोनों निढाल होकर एक-दूसरे की बाहों में समा गई,सफेद सेज पर सजा बिना कपड़ों का श्वेत बदन इस वक्त सौंदर्य की देवी जैसा प्रतीत हो रहा था,जिस पर उनके प्यार की कुछ निशानियां लगी हुई थी।

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"आज तुमने मुझे यह आनंद देकर मेरे जिस्म को पूरी तरह संतुष्ट कर दिया है, ये एहसास इतना अविस्मरणीय था जिसे मैं शब्दों से बया नहीं कर सकती।" कहते हुए वेदिका रुचि के बालों में अपना हाथ फेरने लगी।
"मैं आपके दर्द को कम करने लायक बन पाई यह सुनकर मैं बहुत खुश हूं,जिस प्यार और साथी की तलाश आप कर रही थी वो मेरे सामने ही थी यह सोचकर अब थोड़ा अजीब लगता है,पर आप मेरे साथ हो तो मैं आपको हर एक तरीके से प्यार करूंगी जिससे बीती जिंदगी की परछाई हमारी जिंदगी में दोबारा ना पड़ सके।" रुचि की ये बात सुनकर वेदिका ने फिर उसके होठ चूम लिए ।

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और फिर खड़े होते हुए कहा,"अब मैं ऊपर जाकर थोड़ा फ्रेश हो जाती हूं,वैसे भी सफर की वजह से बहुत थकान लग रही है।"
रुचि : चलो ना मां,मै भी आपके साथ चलती हूं,आपके हर एक अंग को अच्छे से साफ कर दूंगी।
इस बात पर उसने रुचि के सर पर हल्का मारते हुए कहा,"अभी थोड़ी देर पहले ही अपने मां के जिस्म को पूरा निचोड़ लिया फिर भी तुम्हारा मन नहीं भरा।"
यह सुनकर रुचि ने वेदिका के दोनों निपल्स पकड़कर कहा,"मेरे लिए तो ये सेक्स के पहले करने वाले Precum की तरह है" कहकर वेदिका के गले को चूमने लगी,"अभी तो ये सिर्फ शुरुआत है जब हम घर जाएंगे तो देखना आपके जिस्म को पूरे अपने रंग में रंग दूंगी,जहां सिर्फ हम दोनों होंगे।" रुचि की ये बात सुनकर वेदिका का बदन झटका खा गया,रुचि उसके गले पर किस कर रही थी पर रुचि का स्पर्श हर बार उसे कुछ ज्यादा ही उत्तेजित कर देता था।

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रुचि पीछे से वेदिका के कान के हिस्से पर अपने होठों की गर्मी छोड़ रही थी,इसके साथ ही उसका एक हाथ अपनी मां की चूत को रगड़ रहा था तो दूसरा उनके गांड़ के उभार को सहला रहा था,उसने धीरे से वेदिका को आगे झुकाया,जिस्मों के इस खेल में वेदिका अपनी बेटी के संग अब खोने लगी थी,वेदिका के आगे झुकने से रुचि ने Egg Vibrator निकालकर उसकी गांड़ में डाल दिया।

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"आआअह्ह्ह् बेटा क्या कर रही हो?" इतना सुनकर रुचि ने वेदिका को आगे किया और उसके दोनों हाथ कसकर पकड़ लिए जैसे उसे पता था आगे क्या होनेवाला है उसने रिमोट लेकर नॉर्मल स्पीड पर वाइब्रेटर ऑन कर दिया जिसकी झनझनाहट वेदिका को चूत तक महसूस होने लगी,"आआआहहहह्हह्......... उउममहहह्........ ईईइइइससहहह्.......यह क्या है बेटा!!??........Yesss.......Ohhh Fucckkk......" वो बोलते हुए छटपटा रही थी पर रुचि ने उसे अपनी बाहों में कसकर पकड़ रखा था,साथ ही वो अपनी मां की चूत को रगड़ रही थी जो दोबारा गीली होने लगी थी।वेदिका ने बड़ी मशक्कत से रुचि के हाथ से रिमोट छीनकर वाइब्रेटर बंध किया,वो खड़े होकर तेज सांसे ले रही थी,उसकी ये हालत देखकर रुचि नीचे बैठकर हंस रही थी,उसने वाइब्रेटर निकालने के लिए हाथ पीछे लिया पर रुचि ने उसका हाथ पकड़कर कहा,"नहीं मॉम प्लीज इसे मेरे खातिर अंदर ही रहने दीजिए।"
"नहीं आज तुम्हे बहुत शरारत सूज रही है इसलिए मैं......ऊउउपपप्...... ऊउउममममहहह्......"


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रुचि ने उसके होठ चूम लिए और एक बहुत ही वाइल्ड किस करने लगी पर वेदिका ने रुचि को दोनों कंधों से पकड़कर थोड़ा पीछे कर दिया,"बस बेटा एक तो मैं सफर की वजह से पहले ही थकी हुई हूं अब अगर दोबारा शुरू हो गई तो तुम मेरे जिस्म की पूरी तरह से निचोड़ लोगी।" यह बात सुनकर रुचि हंस पड़ी,उसने एक नजर अपने मां के जिस्म पर डाली तो इस उम्र में भी उनका बदन काफी भरा हुआ था,थोड़ी देर पहले किए संभोग के कारण उनका हल्का पसीने में भीगा चेहरा,बिखरे काले बाल,गुलाबी होंठ,कसे हुए स्तनों पर लाल हो चुके निपल्स काफी आकर्षक लग रहे थे।
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रुचि ने वेदिका पर झपटते हुए कहा,"मां अगर में लड़का होती तो आपका ये जिस्म देखकर तो आपकी गांड़ अभी के अभी अपना लंड डाल देती।"
वेदिका : अच्छा तो मेरी बच्ची को अपनी मां पर इतना प्यार आ रहा है।
रुचि : हद से ज्यादा कहकर उसने वेदिका के गांड़ पर हल्की चपेट लगा दी जिससे उसकी गांड़ हिल गई और उसके अंदर का वाइब्रेटर फिर झटका मार गया,उसकी यह हरकत पर वेदिका सहम गई पर फिर उसने मुस्कराते हुए कहा,"चल अब मुझे नहाने जाने दे हम लोग कबसे यही पर है।"
रुचि : अरे हा वैसे भी विशाल के आने का भी टाइम हो गया है।
वेदिका : वो सब तो ठीक है,पर विशाल कहां है? जब से आई हूं तब से वो मुझे कही नहीं नजर आया।" अपनी मां की बात सुनकर रुचि ने घड़ी देखी तो 12 बज रहे थे इसलिए उसने कहा,"वो बस कुछ सामान लेने गया है बस आता ही होगा।"
वेदिका : ठीक है तो फिर उसके आने से पहले में फ्रेश हो जाती हूँ। इतना कहकर वो बाथरूम की तरफ चलने लगी,कमरे में दोनों अभी भी बिना कपड़ों के ही खड़े हुए थे,जिससे रुचि पीछे से अपनी मां की मचलती गांड़ को देख रही थी,क्या क़यामत मत लग रही थी इसे देखकर तो रुचि को भी उसे निचोड़ने मन कर रहा था।


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जिसके बीच में हल्के से गुलाबी रंग का छेद नजर आ रहा था,"आखिर मेरी पहली कोशिश Successful रही,लगता है भैया का डबल बेड भी अब छोटा पड़ने वाला है अगर मॉम का यही मूड रहा तो कुछ दिनों में दोनों मां-बेटी भैया के बिस्तर में होंगी यानी जल्द ही रिश्तों के नाम बदलने वाले है जिसकी मैंने शुरुआत कर दी है आगे सब भैया के उपर है।"



मां-बेटी के इस रिश्ते में कैसा मोड आएगा ये तो कहानी के आगे के अपडेट्स में पता चलेगा

तब तक आप नीचे Comment करके बताईए कि ये पार्ट आपको कैसा लगा?
 
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Well-Known Member
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Congratulations and mast update
प्यार.........दुनिया मै प्यार के बारे में लोगों के कई अलग तरह के मायने है,जिसे प्यार होता है वो उसे अपनी तरह से निभता है पर कुछ लोग इन्हीं सामाजिक रिवाजों से बढ़कर उसे पाने की ख्वाहिश रखते है,उनके लिए फिर इन बंधनों के कोई मोल नहीं होता।बस इसी Incent, Errotic और Hard Core Sex से गर्म कर देनेवाली कहानी मै आपके सामने रख रहा हूं,मै समाज के सभी रिश्तों की इज़्ज़त करता हूं इसलिए इसे केवल मनोरंजन की दृष्टि से देखे।
इस कहानी को मजेदार बनाने के लिए मैने कई Unnatural चीजें add की है, जिसे आप आगे पढ़ोगे तो समझ जाओगे,जिस्म को प्यास बुझाने के लिए दो लोग किस अलग-अलग तरीके से Sex करते है यह पढ़कर आपको मजा आएगा,शायद कुछ लोगों को यह घिलौना लग सकता है पर तरीका जितना गंदा उसमें मजा भी उतना दुगना मिलता है,चलिए फिर कहानी को शुरू करते है।


प्यासे दिल के अरमान
अपडेट – 1


केरल.....अपने अन्दर प्राकृतिक सुंदरता समाए यह State दुनिया भर मै अपने चाय के बाग,पहाड़ों और beach की वजह से काफी मशहूर है,उसी केरल मै स्थित एक city कोट्टयम जो उसी खूबसूरती को प्रतिबिंब करता है।
सुबह के 6 बज रहे थे,अपने पश्चिमी घाट की पहाड़िया और घने पेड़-पौधों की वजह से पूरे मौसम मै काफी ठंड फैली हुई थी,इसी मौसम का लुफ्त उठाते हुए मैं अपने घर की छत पर अपना Routine Workout कर रहा था।मेरा नाम विशाल है, उम्र 23 साल,मेरी हाइट 6 फीट और रंग थोड़ा सांवला है,Arts मैं Master करके मैने यही पर Lecturar की जॉब ले ली है।मै एक Middle Class Family से Belong करता हूं इसलिए मैं Gym का खर्चा Afford नहीं कर सकता,जिसकी वजह से मै घर पर ही Daily Exercise करता हूं,इसके रिजल्ट में मेरी बॉडी काफी Fit हो गई है।April का महीना था,सर्दी का मौसम तो जा चुका था पर आसमान से गिरती ओस की वजह से सूरज निकलने मै अभी देर थी इसीलिए मैं Squats,Pushup और दंड कर रहा था।
इन सब Exercise की वजह से मेरा पूरा शरीर पसीने से तरबतर हो चुका था, खुले मौसम मै चल रही ठंडी हवाएं पसीने की बूंदों को छूकर एक अलग ही शीतलता दे रही थी तभी नीचे से Mummy की आवाज़ आई,'बेटा 7:30 बज चुके है,जरा जाकर रुचि को उठा दे,उसे कुछ काम था इसलिए उसने मुझे जल्दी उठाने को कहा था।'
मै अपने मम्मी पापा के साथ रहता हूं,हमारी 3 लोगों की छोटी सी फैमिली है,मेरे पापा मनोहर शर्मा के बड़े भाई आदित्य शर्मा की एक कार Accident मै मौत हो गई थी,अब बस उसने परिवार में मेरी आंटी और रुचिका ही बचे थे,रुचिका 24 साल की थी,उनका घर हमसे कुछ ही दुरी पर था।बचपन से ही मेरी और रुचिका की बहुत बनती थी और ऐसा हादसा होने की वजह से उसे अकेला ना लगे इसलिए वो ज्यादातर हमारे घर पर ही रहती थी,हम दोनों भाई बहन से ज्यादा एक अच्छे दोस्त थे जो हर बात शेयर किया करते थे।आप रुचि को ऐसे imagine कर सकते है।


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मै छत से उतरकर दूसरी मंजिल पर आ गया,उस मंजिल पर एक मेरा रूम और उसके बगल में ही Guest Room बना हुआ था,जब भी रुचि आती थी तब वो उसी रूम मै सोती थी,मैंने धीरे से दरवाजा खोलकर उसके रूम मै चला गया,कमरे मै बड़े कदमों से चलते हुए मै पर्दो के पास आ गया और उसे खींचकर पूरा खोल दिया जिसकी वजह से सुबह के सूरज की रोशनी रुचि के गोरे बदन पर पड़ने लगी,जो उस रोशनी मै किसी चांद की तरह चमक रहा था,रुचि का रंग दूध जैसा सफेद था,29 की कमर, काली नशीली आंखे,गुलाबी होठ और कमल जैसे नाज़ुक गाल,सोते हुए उसकी छाती ऊपर नीचे हो रही थी,जिसपर उसके 35D की size के बूब्स मचल रहे थे,


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बचपन मै तो मैने रुचि पर इतना ध्यान नहीं दिया था पर जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ी और हम जवान हुए में उसके तरफ एक खिंचाव महसूस करने लगा, उम्र के साथ उसके बूब्स में अचानक काफी उभार निखर आया था।रुचि वो लड़की थी जिसे हर मर्द अपने सपनो मै पाने की ख्वाहिश रखता है।मै थोड़ी देर ऐसे ही उसके मासूम चेहरे हो देखता रहा।
उसने व्हाइट कलर की सफेद पतली सी टीशर्ट पहनी हुई थी उसमें से उसके काले रंग की ब्रा साफ दिख रही थी और नीचे उसने एक शॉर्ट्स पहन रख था जो पूरी तरह उसकी गांड़ से चिपका हुआ था,सामने का यह नजारा देखकर मेरे पजामे के अंदर मेरा लंड मचलने लगा,मेरा लंड 9 इंच लंबा और 2 इंच मोटा है, जिसकी वजह से पजामे के ऊपर तंबू बना हुआ था,मैने अंदर हाथ डालकर थोड़ा adjust किया तो थोड़ी देर बाद वो नॉर्मल हुआ,मैने रुचि के पास जाकर कहा,'Come on रुचि अब उठ भी जाओ पूरे दिन सोने का इरादा है क्या?'
मेरी बात सुनकर उसने कहा,'उउहह.....बस 5 मिनिट'
मै उसके बेड पर बैठ गया और फिर उसके कंधे को धीरे से हिलाते हुए कहा,'अब ऐसे ही सोते रहोगी तो काम अपने आप हो जाएगा क्या? फिर मेरे पास आकर शिकायत मत करना।'

मैने अभी इतना ही कहा था कि उसने मुझे पकड़कर अपने पास लिया दिया और मुझसे लिपटकर सो गई,'बस कुछ देर ऐसे ही सोने दो।' उसके बूब्स मेरी छाती को छू रहे थे और उसने अपना एक पैर मेरे ऊपर डाल रखा था जिसकी वजह से मेरा लंड उसके चूत के हिस्से को छू रहा था।मैंने उसे अपनी बाहों में ले लिया जिससे उसकी तेज चल रही सांसे मेरे चेहरे को छू रही थी,मैने लंड को थोड़ा adjust करके थोड़ा धक्का मारा तो उसके मुंह से सिसकी निकल गई,'सीसीईईई.......आआहहह........'


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हम दोनों कुछ देर तक ऐसे ही लेते रहे तभी नीचे से मम्मी की फिर आवाज़ आई,'अरे विशाल उतनी देर क्यों लग रही है?' यह बात सुनकर रुचि जट से खड़ी हो गई और उसने मुस्कुराते हुए मेरी ओर देखकर कहा,'आज के लिए इतना बहुत है' इतना बोलकर वो बेड से नीचे उतरी,उसकी पीठ मेरी तरफ थी,उसने धीरे से अपनी टीशर्ट और ब्रा उतारकर फर्श पर फेंक दी,अब वो सिर्फ शॉर्ट मै खड़ी थी और उसकी नंगी पीठ मेरी तरफ थी।उसने अपनी गर्दन हल्की मेरी ओर घुमाई और कहा,'वैसे vishu मेरी होने वाली भाभी बहुत लकी है।'
यह सुनकर मे सीधा उसकी और बढ़ा,'तेरी तो......' वो हंसते हुए सीधा बाथरूम में घुस गई।
'यार रुचि सुबह सुबह यह क्या लगा रखा है? This is not Fair' तभी अंदर से उसकी चहचहाती हुई आवाज आई,'बस इतते मै ही थक गए अभी तो बहुत कुछ बाकी है,तुम लड़कों में सब्र बिल्कुल नहीं होता।'
'ओ हेलो मिस Drama Queen जल्दी से तैयार होकर नीचे आ जाना मै Breakfast मै तुम्हारा इंतेज़ार करूंगा।' रुचि के पिता के गुजरने के बाद हम दोनों के बीच नजदीकिया काफी बढ़ गई थी क्योंकि उस टाइम पर मैं हमेशा उसके साथ रहा था।
मै कमरे से बाहर निकलने वाला था कि तभी पीछे से आवाज़ आई,'अरे तुम तो बुरा मान गए रुको' इतना कहकर उसके बाथरूम कर हलका दरवाजा खोला,उसने अपना एक पैर बाहर निकाला तो उसने नीचे पेंटी नहीं पहनी थी,उसने अपनी लंबी टांग बाहर निकाली बस उसके चूत के हिस्सा को ही दरवाजे के पीछे ढक रख था।उसने अपनी पेंटी निकलकर मेरी ओर फेंकी जो मेरे चेहरे पर आ गिरी,उसके चूत से आती खुश्बू से मेरा लंड फिर खड़ा हो गया और मेरे खड़े लंड को देखकर उसने फिर मुस्कुराते हुए दरवाजा बंद कर दिया शावर से गिरते पानी की आवाज़ कमरे में फैल गई।


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