• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

komaalrani

Well-Known Member
25,049
68,776
304
छुटकी - होली दीदी की ससुराल में - भाग ११६ पृष्ठ १२०३

बुच्ची और बुआ की लावा भुजाइ

अपडेट पोस्टेड, कृपया पढ़ें, लाइक करें और कमेंट जरूर करें
 
Last edited:

pprsprs0

Well-Known Member
4,291
6,497
159
साँड़ चढ़ा बछिया (बुच्चिया) पर


Girl-Y-fc5a0f716a1bef41146b3ff50663bd0e.jpg



जो हफ्ते भर बाद नयी आयी दुलहिनिया के साथ जेठानियाँ करतीं. ... ये काम अभी से मंजू भाभी और रामपुर वाली के जिम्मे था,....

वो अभी बुच्ची के साथ हो रहा था।


Bride-IMG-20230329-163313.jpg


नयकी दुलहिनिया को सूरजु के पास भेजने के पहले, दुलहिनिया की जेठानियाँ मिल के उसका लहंगा, पेटीकोट उठा देतीं।

वो पढ़ी लिखी थी , दर्जा दस का इम्तहान दिया था, तो दो चार सूरजु की भौजाइयां गाँव की छाप लेतीं दबा के समझा बुझा के और,


एक जेठानी मंजू. नीचे की दोनों फांक फैला देतीं, बोलती, तोहरे भले के लिए कर रहे हैं, और रामपुर वाली टप टप कडुआ तेल की बूँद बूँद चुआ देती,नयकी दुलहिनिया की दोनों फांको को फैला के. घर के कोल्हू का पेरा, कम से कम आधा पाव ( १२५ ग्राम )।

उसी तरह इमरतिया बुच्ची की दोनों टाँगे उठा के कडुवा तेल की बोतल सीधे उसकी बुरिया के मुंह पे लगा के, धीरे धीरे तेल उड़ेल रही थी दस पांच बूँद अंदर जाता फिर हथेली से बुर रगड़ देती, हंसती खिलखिलाती बुच्ची भी चूतड़ हिला हिला के घोंट रही थी। पांच दस बार डालने के बाद बाद हथेली से कस कस बुच्ची की बुर रगड़ घिस कर के हाथ में जो तेल बचा था, वो सूरजु के खड़े खूंटे पे लगा के चिढ़ाते हुए बोली,

" तोहार दुलहिनिया, तोहरे हवाले , पेला कस के अपनी बहिनिया के फाड़ आज ओकर चूत, ....देखाय दा असल भाई हो। "

जितनी प्यास बुच्ची की बिल में थी उससे ज्यादा बुच्ची की, सूरजु की छुटकी बहिनिया की आँख में थी,

बाहें फैला के उसने अपने भाई को बुलाया,भाई बहन दोनों मदमाते हो रहे थे, जवानी की मस्ती में चूर .

और इमरतिया देख रही थी, उसका चेला आज दंगल में हरा पाता है अपनी बहिनिया को की नहीं.

उसने देवर को समझा दिया था, उसे अपनी दुल्हनिया मान के पेले। अरे पहली रात को चोद तो हर लड़का देता है अपनी बीबी को, मरद वो याद किया जाता है जो उसको कचर के रख दे।

बुच्ची के चूतड़ के नीचे, तौलिया, तकिया रखके इमरतिया ने पहले ही तेल लगाते समय उसकी फूली फूली गुझिया नौ इंच ऊपर कर दी थी।



उसके देवर ने अपनी दर्जा नौ वाली कच्ची उमर की बहिनिया की दोनों टाँगे उठा के अपने कन्धों पर रख दी, और मीठी मीठी निगाह से अपनी छोटी बहन को देख रहा था।

बहन भी मीठा मीठा मुस्करा रही थी, खुद उसने अपनी जाँघे फैला दी, और उसकी बड़ी बड़ी कजरारी आँखे जैसे निहोरा कर रही हों, करो न भैया। सूरजु ने एक हाथ से अपना मोटा खूंटा पकड़ा और दूसरे से बहन की कमर और हलके हलके गीली चूत पे रगड़ने लगा, वो घुसाने की जरा भी कोशिश नहीं कर रहा था, सिर्फ दोनों फूले फूले होंठों पर रगड़ रहा था।

जीवन में चूत रानी को लंड का पहला स्पर्श नसीब हुआ था, वो फड़फड़ाने लगीं, खुलने बंद होने लगीं।

fucking-cu-ftop-ru-134283.jpg


पर वो बहन को तड़पाता रहा, उसे देख के मुस्कराता रहा और जब बुच्ची ने खुद चूतड़ उछाल के इशारा किया, तो कौन भाई होगा जो बहन की ये बात नहीं मानेगा।

बस अब कमर छोड़कर हाथ भगोष्ठों पर आ गया, तेल से भीगी एक ऊँगली से सूरजु ने हलके से बुच्ची की दरार फैलाई, पूरी ऊँगली लिटा के उसमे रगड़ घिस की और दोनों हाथों से पूरी ताकत लगा के बुर खोल दी,



सुपाड़ा फंस गया,



इमरतिया मुस्करा पड़ी, बस यही तो वो चाहती थी। अब गाँव की कोई कुँवारी बिन फटी चूत उसके देवर से नहीं बचेगी। लेकिन जितना बाकी लोगों का पूरा लंड होता है, उतना तो इसका सुपाड़ा था।



और इमरतिया देख भी नहीं पायी, जैसे दस सांड का बल आ गया हो सूरजु की कमर में, जिस ताकत और तेजी से उसने धक्का मारा, बरछी अंदर घुस गयी थी।

बुच्ची दर्द से तड़प रही थी, दाएं-बाएं कर रही थी, मुट्ठी भींच रही थी।

पर सुपाड़ा अभी आधा करीब घुसा होगा, और सूरजु ने कस कस पूरी ताकत से अंदर घुसे सुपाडे को धकेलना, ठेलना शुरू कर दिया।

बिन चुदी चूत, वो भी दर्जा नौ वाली की, पर सूरजु ने कस के अपनी बहन की दोनों कलाइयां पकड़ रखी थीं, चार चूड़ियां चरचरा के टूट गयीं। बुच्ची होंठों को दबाकर दर्द पी रही थी। सुपाड़ा धीरे धीरे सरक रहा, इमरतिया भौजी ने जो तेल अंदर कुप्पी में भर दिया था, उससे भी थोड़ा सरक के अंदर घुस रहा था,

Fucking-cu-15216065.jpg


सूरजु रुक गया।

बस थोड़ा सा सुपाड़ा बाहर था।


बुच्ची ने मुट्ठी ऐसा मोटा सुपाड़ा लील लिया था। दर्द से वो दुहरी हो रही थी, आँखों में आँसू तैर रहे थे। पर वो असली बहन थी जो भाई के मजे के लिए कुछ भी करने को तैयार रही है। और दूसरे वो ये भी जानती थी की भाई उसका इतना बौरहा है , झूठे भी उसने निकालने को कहा, तो वो सच में निकाल लेगा, फिर करेगा भी नहीं,... की तुझ बहुत दर्द हो रहा है, रहने दे।

दोनों भाई-बहन एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे, मुस्कुरा रहे थे, चूम रहे थे।

और जब सूरजु ने चूमने के लिए होंठ बढ़ाये तो बुच्ची ने अपने होंठ फैला दिए, मुंह खोल दिया, जैसे कोई गुलाब की कली, भौंरे को देख कर खिल गयी। सूरजु अपनी भौजी का सिखाया पढ़ाया, अपनी जीभ बहन की मुंह में डाल दिया और बहन उसे चूसने लगी, जैसे थोड़ी देर पहले अपने भैया का लंड चूस रही थी। देवर को इमरतिया ने सिखाया था तो,.... ननद को भी उसकी भौजाइयों ने, मुन्ना बहू और मंजू भाभी ने रात रात भर सिखाया था, गाजर खीरे से प्रैक्टिस कराई थी।

सूरजु ने अपने होंठों से बुच्ची के दोनों होठ सील कर दिए , एक हाथ जोबन पे और दूसरा कमर पे, फिर क्या करारे धक्के मारे।


सुपाड़ा अच्छी तरह फँसा था, तो अब निकलने का डर नहीं था। हाँ चूत बहुत टाइट थी , लेकिन सूरजु के कमर में दस सांड की ताकत भी थी, दरेरते, रगड़ते, फैलाते फाड़ते मोटा मूसल घुस रहा था। गिन के सात-आठ धक्के पूरी ताकत से मारे , और बुच्ची अब तड़प रही थी, छूटने की कोशिश कर रही थी। चीख उस मुँह में ही घुटकर रह जा रही थी क्योंकि बेरहम भाई ने कसकर जीभ मुंह में घुसेड़ रखी थी।

होंठों को अपने होंठों से न उसने सिर्फ सील कर रखा था, बल्कि काट भी रहा था।


fucking-MOT-IMG-20230531-134631.gif


इमरतिया को लगा की अब झिल्ली फटेगी, खून खच्चर होगा, लेकिन सूरजु एक समझदार, वो तड़पा तड़पा के मारना चाहता था। सुपाडे के बाद भी करीब एक दो इंच घुसा था।

सुपाड़ा झिल्ली पे ही अटका था।

सूरजु ने टाँगे कंधे से उतार दी, पर उन्हें अच्छी तरह फैला के अब वो बुच्ची के ऊपर अच्छी तरह लेट गया, दोनों की देह चिपट गयी थी, लता की तरह बहन भाई से लिपट गयी, सूरजु ने जीभ बाहर निकाल लिया और बुच्ची खुद सूरजु के होंठों को कभी चूमती कभी चूसती कभी दोनों हाथो से पकड़ के उसके चेहरे पर चुम्मो की बारिश कर देती, सूरजु के दोनों हाथ उन कच्ची अमियों को सहला रहे थे, दबा रहे थे, मसल रहे थे , और कुछ देर में एक हाथ बुच्ची की किशोर गोरी मखमली जाँघों को सहला रही थी और दूसरा हाथ कबूतर के चोंचों को पकड़ कर नोच रहा था।

बुच्ची मजे से सिसकती, कस के अपने हाथों से भाई की पीठ दबा देती, नाखुनो ने कंधो को खरोच रही थी और बुदबुदा रही थी

" हाँ भैया, हां, बहुत अच्छे हो तूम भैया, ओह्ह कब से मेरा मन कर रहा था तुझसे करवाने को '
==
Girl-Y-8a971a011f45d9768c693be6c27dece1.jpg

=
" तो करवा न, रोज करवा न, दिन में दो बार,... चार बार, जितनी बार मन करे. मन तो यार मेरा भी करता है तुझे देख के,कब से मन कर रहा था कब पाऊं कब पेल दूँ।" "

हँसते हुए भाई बोला, एकदम उस गाँव के बाकी बहनरखनी भाइयों की तरह।

और फिर कस के निपल चूसने लगा और बुच्ची उसके बाल खींचती गरियाती बोली

" बदमाश, दुष्ट, कोई इतना इन्तजार करवाता है अपनी छोटी बहन को, अब रोज करवाउंगी, दुनो जून करवाउंगी, भौजी आ जाएंगी तो भी करवाउंगी, और पूरा लूंगी "


बस इतना कहना था की सूरजु ने बुच्ची को दुहरा कर दिया, जाँघे दोनों फटने की हद तक फैली, चूतड़ पूरी तरह उठा, लंड करीब करीब धीरे धीरे बाहर निकाल लिया और होंठों से फिर उसके होंठ सील करने को बढ़ा लेकिन इमरतिया ने सर ना में हिलाया।

भौजी के कान में ननद की चीख से बढ़िया मीठी आवाज कुछ नहीं होती, झिल्ली फट रही हो, भाई फाड़ रहा हो और चीख पुकार रोई रोहट भी न हो,

फिर सिर्फ इमरतिया क्यों बाकी भौजाई भी, मुन्ना बहु, अहिराने वाली दोनों जो आज गर्दा उड़ा रही थी , भरौटी वाली जो बुच्ची का हाथ पकड़ के कस कस के उसके भैया के लंड पे हल्दी लगवा रही थी, और मंजू भौजी और रामपुर वाली,ये चीख तो आज सब की कान में जाना चाहिए और सबसे बढ़के बड़की ठकुराइन के कान में की उनके पूत ने अपनी बहिनिया की झिल्ली फाड़ दी, आखिर इशारा तो उन्होंने ही मुन्ना बहू और इमरतिया को बुच्ची को दिखा के किया था,

MOT-Love-IMG-7423.jpg


बुच्ची सहम गयी, उसने आँखे मूँद ली, उसकी ककड़ी सी नरम कलाई उसके भाई ने पकड़ ली, और धीरे धीरे, धीरे धीरे अंदर घुसा लंड बाहर खींचने लगा और जब करीब करीब पूरा बाहर निकल आया तो वो पल भर के लिए रुक गया और फिर, ….

उईईई जबरदस्त चीख



इमरतिया उठी, उसने खिड़की खोल दी।

खिड़की उसी ओर खुलती थी जहाँ घर के पिछवाड़े मैदान में लावा भूजने की रस्म कांति बूआ, बुच्ची की बड़ी सगी, मौसी कर रही थीं और सब भौजाइयां उनको जोर जोर से गरिया रही थीं।

पर इमरतिया जानती थी, गारी के बीच भी सब भौजाइयां कान पारे होंगी, और चीख तो गानों की आवाज से भी ऊपर, पक्का सुनाई देगी, बल्कि अहिरौटी, भरौटी तक

ओह्ह्ह, उईईई नहीं, भैया नहीं, उफ्फ्फ बहुत दर्द हो रहा है , अरे माँ जान निकल गयी , उईईई नहीं नहीं रुक जा न, ओह्ह्ह

fucking-ruff-14169509.gif


बुच्ची अब जोर जोर से चिल्ला रही थी, छटपटा रही थी, छूटने की कोशिश कर रही थी, बार बार सर दाएं से बाएं, बाएं से दाएं कर रही थी, लेकिन सूरजु ने एकदम पक्के खिलाड़ी की तरह अपनी कमर का पूरा वजन पूरी ताकत से उस दर्जा नौ वाली बारी छोरी पे डाल दिया था और जैसे अखाड़े में किसी गिरे पहलवान को पूरे ताकत से दबाता था, उसी जोर से बुच्ची को दबाये हुए था, दोनों हाथों से उसकी कलाई पकड़ के ठेल रहा था, धकेल रहा था, करीब करीब बित्ता बार बांस अंदर चला गया था ,

उफ्फ्फ, ओह्ह्ह बहुत दर्द हो रहा है, नहीं भैया, उईईई ओह्ह्ह उफ्फ्फ रुक जा न , उईईई


बुच्ची चीख रही थी, निहोरा कर रही थी, गुहार लगा रही थी,

उसकी चीख खुली खिड़की से बाहर जहाँ बुआ लावा भूज रही थीं, सब भौजाइयां लड़कियां बैठीं थी, वहां तो पूरी तेजी से जा रही थी, पास के टोलो में भी,

इमरतिया ने पहले से ही बुच्ची के चूतड़ के नीचे एक बड़ा सफ़ेद तौलिया बिछा दिया था। एक बूँद खून धीरे धीरे रिसता हुआ, फिर टप टप

खून तौलिया पर फैल रहा था, तौलिया लाल हो रहा था। बुच्ची की जाँघों के पास भी खून लग रहा था,

pussy-blood-ruptured-467139896.jpg


और जब फिर से चुदाई शुरू करने के लिए लंबा भाला जब बुच्ची के भैया ने बाहर निकाला तो लग रहा था लाल स्याही की दवात से किसी ने कलम डुबो के निकाल की हो, पूरा लाल,

एक पल के लिए इमरतिया भी दहस गई। समझ तो वो गयी, एक तो उमरिया की बारी, दूसरे लगता है उसकी झिल्ली थोड़ी मोटी भी थी, पर जब उसने सूरजु के चेहरे की ओर देखा तो उसके मन में ख़ुशी दौड़ गयी।

खून खच्चर, सूरजु ने भी देख लिया था, पर बजाय हदसने के, घबड़ाने के उसके चेहरे पर खूब ख़ुशी थी, जैसे कोई फर्स्ट डिवीजन पास हो गया, बड़ा दंगल जीत लिया। पहली बार झिल्ली फाड़ी थी उसने।

Fuck-blood-first-time-images-16.jpg


और इमरतिया ने मन ही मन तय कर लिया,

' जियो मेरे देवर, रगड़ के चोदो अपनी बहन को, बहन महतारी कोई नहीं बचनी चाहिए फिर देख तुझे आधा दर्जन बिन चुदी दिलवाऊंगी। "

Teej-Gao-desktop-wallpaper-amarapalli-dubey-bhojpuri-actress-traditional-thumbnail.jpg


सूरजु ने बदमाशी शुरू कर दी , बचपन में जैसे बुच्ची को तंग करता था, पेला उसने लेकिन मोटे सुपाडे से बार बार उसी जगह पे रगड़ रहा था जहाँ झिल्ली फटी थी, चमड़ी छिली थी। जैसे मुंह के अंदर छाले पड़े हों और कोई तेज मिर्च वहां लग जाए, बस वही हालत बुच्ची की हो रही थी

वो उछल रही थी, चीख रही थी, सूरजु का बाल पकड़ के अपनी ओर खींच रही थी,

" बदमाश, दुष्ट, बचपन से मुझे तंग करते हो, क्या करते हो यार लगता है। ओह्ह नहीं, उफ़ रुक यार "

पर अब उसके चेहरे पर दर्द नहीं, मस्ती थी। चुदाई तेजी से चल रही थी और जब सुपाडे का हथोड़ा बुच्ची के बच्चेदानी पे पड़ा, वो तूफान के पत्ते की तरह काँप उठी। आँखे मजे से बंद हो गईं। कस के उसने भैया को भींच लिया , उसे लगा लड़की हो के जनमना सुफल हो गया।

सुपाड़ा एकदम बच्चेदानी से लगा था, ९ इंच का मूसल पूरा अंदर था और भाई बहन दोनों कस के एक दूसरे को भींचे थे।
Fucking-MOT-2ae385a85e1435876d638e93437d7878493fef5c.gif

बुच्ची जैसे छिपकली दीवाल से चिपकती है, वैसे अपने भैया से खूब प्यार से चिपकी थी, कस के दोनों हाथों से उसकी पीठ पकडे हुए थी, कुछ देर में मुस्करा के कस कस के अपने भाई के पीठ पर मुक्के बरसाने
“”

भौजी के कान में ननद की चीख से बढ़िया मीठी आवाज कुछ नहीं होती, झिल्ली फट रही हो, भाई फाड़ रहा हो और चीख पुकार रोई रोहट भी न हो,

“”
 

pprsprs0

Well-Known Member
4,291
6,497
159
साँड़ चढ़ा बछिया (बुच्चिया) पर


Girl-Y-fc5a0f716a1bef41146b3ff50663bd0e.jpg



जो हफ्ते भर बाद नयी आयी दुलहिनिया के साथ जेठानियाँ करतीं. ... ये काम अभी से मंजू भाभी और रामपुर वाली के जिम्मे था,....

वो अभी बुच्ची के साथ हो रहा था।


Bride-IMG-20230329-163313.jpg


नयकी दुलहिनिया को सूरजु के पास भेजने के पहले, दुलहिनिया की जेठानियाँ मिल के उसका लहंगा, पेटीकोट उठा देतीं।

वो पढ़ी लिखी थी , दर्जा दस का इम्तहान दिया था, तो दो चार सूरजु की भौजाइयां गाँव की छाप लेतीं दबा के समझा बुझा के और,


एक जेठानी मंजू. नीचे की दोनों फांक फैला देतीं, बोलती, तोहरे भले के लिए कर रहे हैं, और रामपुर वाली टप टप कडुआ तेल की बूँद बूँद चुआ देती,नयकी दुलहिनिया की दोनों फांको को फैला के. घर के कोल्हू का पेरा, कम से कम आधा पाव ( १२५ ग्राम )।

उसी तरह इमरतिया बुच्ची की दोनों टाँगे उठा के कडुवा तेल की बोतल सीधे उसकी बुरिया के मुंह पे लगा के, धीरे धीरे तेल उड़ेल रही थी दस पांच बूँद अंदर जाता फिर हथेली से बुर रगड़ देती, हंसती खिलखिलाती बुच्ची भी चूतड़ हिला हिला के घोंट रही थी। पांच दस बार डालने के बाद बाद हथेली से कस कस बुच्ची की बुर रगड़ घिस कर के हाथ में जो तेल बचा था, वो सूरजु के खड़े खूंटे पे लगा के चिढ़ाते हुए बोली,

" तोहार दुलहिनिया, तोहरे हवाले , पेला कस के अपनी बहिनिया के फाड़ आज ओकर चूत, ....देखाय दा असल भाई हो। "

जितनी प्यास बुच्ची की बिल में थी उससे ज्यादा बुच्ची की, सूरजु की छुटकी बहिनिया की आँख में थी,

बाहें फैला के उसने अपने भाई को बुलाया,भाई बहन दोनों मदमाते हो रहे थे, जवानी की मस्ती में चूर .

और इमरतिया देख रही थी, उसका चेला आज दंगल में हरा पाता है अपनी बहिनिया को की नहीं.

उसने देवर को समझा दिया था, उसे अपनी दुल्हनिया मान के पेले। अरे पहली रात को चोद तो हर लड़का देता है अपनी बीबी को, मरद वो याद किया जाता है जो उसको कचर के रख दे।

बुच्ची के चूतड़ के नीचे, तौलिया, तकिया रखके इमरतिया ने पहले ही तेल लगाते समय उसकी फूली फूली गुझिया नौ इंच ऊपर कर दी थी।



उसके देवर ने अपनी दर्जा नौ वाली कच्ची उमर की बहिनिया की दोनों टाँगे उठा के अपने कन्धों पर रख दी, और मीठी मीठी निगाह से अपनी छोटी बहन को देख रहा था।

बहन भी मीठा मीठा मुस्करा रही थी, खुद उसने अपनी जाँघे फैला दी, और उसकी बड़ी बड़ी कजरारी आँखे जैसे निहोरा कर रही हों, करो न भैया। सूरजु ने एक हाथ से अपना मोटा खूंटा पकड़ा और दूसरे से बहन की कमर और हलके हलके गीली चूत पे रगड़ने लगा, वो घुसाने की जरा भी कोशिश नहीं कर रहा था, सिर्फ दोनों फूले फूले होंठों पर रगड़ रहा था।

जीवन में चूत रानी को लंड का पहला स्पर्श नसीब हुआ था, वो फड़फड़ाने लगीं, खुलने बंद होने लगीं।

fucking-cu-ftop-ru-134283.jpg


पर वो बहन को तड़पाता रहा, उसे देख के मुस्कराता रहा और जब बुच्ची ने खुद चूतड़ उछाल के इशारा किया, तो कौन भाई होगा जो बहन की ये बात नहीं मानेगा।

बस अब कमर छोड़कर हाथ भगोष्ठों पर आ गया, तेल से भीगी एक ऊँगली से सूरजु ने हलके से बुच्ची की दरार फैलाई, पूरी ऊँगली लिटा के उसमे रगड़ घिस की और दोनों हाथों से पूरी ताकत लगा के बुर खोल दी,



सुपाड़ा फंस गया,



इमरतिया मुस्करा पड़ी, बस यही तो वो चाहती थी। अब गाँव की कोई कुँवारी बिन फटी चूत उसके देवर से नहीं बचेगी। लेकिन जितना बाकी लोगों का पूरा लंड होता है, उतना तो इसका सुपाड़ा था।



और इमरतिया देख भी नहीं पायी, जैसे दस सांड का बल आ गया हो सूरजु की कमर में, जिस ताकत और तेजी से उसने धक्का मारा, बरछी अंदर घुस गयी थी।

बुच्ची दर्द से तड़प रही थी, दाएं-बाएं कर रही थी, मुट्ठी भींच रही थी।

पर सुपाड़ा अभी आधा करीब घुसा होगा, और सूरजु ने कस कस पूरी ताकत से अंदर घुसे सुपाडे को धकेलना, ठेलना शुरू कर दिया।

बिन चुदी चूत, वो भी दर्जा नौ वाली की, पर सूरजु ने कस के अपनी बहन की दोनों कलाइयां पकड़ रखी थीं, चार चूड़ियां चरचरा के टूट गयीं। बुच्ची होंठों को दबाकर दर्द पी रही थी। सुपाड़ा धीरे धीरे सरक रहा, इमरतिया भौजी ने जो तेल अंदर कुप्पी में भर दिया था, उससे भी थोड़ा सरक के अंदर घुस रहा था,

Fucking-cu-15216065.jpg


सूरजु रुक गया।

बस थोड़ा सा सुपाड़ा बाहर था।


बुच्ची ने मुट्ठी ऐसा मोटा सुपाड़ा लील लिया था। दर्द से वो दुहरी हो रही थी, आँखों में आँसू तैर रहे थे। पर वो असली बहन थी जो भाई के मजे के लिए कुछ भी करने को तैयार रही है। और दूसरे वो ये भी जानती थी की भाई उसका इतना बौरहा है , झूठे भी उसने निकालने को कहा, तो वो सच में निकाल लेगा, फिर करेगा भी नहीं,... की तुझ बहुत दर्द हो रहा है, रहने दे।

दोनों भाई-बहन एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे, मुस्कुरा रहे थे, चूम रहे थे।

और जब सूरजु ने चूमने के लिए होंठ बढ़ाये तो बुच्ची ने अपने होंठ फैला दिए, मुंह खोल दिया, जैसे कोई गुलाब की कली, भौंरे को देख कर खिल गयी। सूरजु अपनी भौजी का सिखाया पढ़ाया, अपनी जीभ बहन की मुंह में डाल दिया और बहन उसे चूसने लगी, जैसे थोड़ी देर पहले अपने भैया का लंड चूस रही थी। देवर को इमरतिया ने सिखाया था तो,.... ननद को भी उसकी भौजाइयों ने, मुन्ना बहू और मंजू भाभी ने रात रात भर सिखाया था, गाजर खीरे से प्रैक्टिस कराई थी।

सूरजु ने अपने होंठों से बुच्ची के दोनों होठ सील कर दिए , एक हाथ जोबन पे और दूसरा कमर पे, फिर क्या करारे धक्के मारे।


सुपाड़ा अच्छी तरह फँसा था, तो अब निकलने का डर नहीं था। हाँ चूत बहुत टाइट थी , लेकिन सूरजु के कमर में दस सांड की ताकत भी थी, दरेरते, रगड़ते, फैलाते फाड़ते मोटा मूसल घुस रहा था। गिन के सात-आठ धक्के पूरी ताकत से मारे , और बुच्ची अब तड़प रही थी, छूटने की कोशिश कर रही थी। चीख उस मुँह में ही घुटकर रह जा रही थी क्योंकि बेरहम भाई ने कसकर जीभ मुंह में घुसेड़ रखी थी।

होंठों को अपने होंठों से न उसने सिर्फ सील कर रखा था, बल्कि काट भी रहा था।


fucking-MOT-IMG-20230531-134631.gif


इमरतिया को लगा की अब झिल्ली फटेगी, खून खच्चर होगा, लेकिन सूरजु एक समझदार, वो तड़पा तड़पा के मारना चाहता था। सुपाडे के बाद भी करीब एक दो इंच घुसा था।

सुपाड़ा झिल्ली पे ही अटका था।

सूरजु ने टाँगे कंधे से उतार दी, पर उन्हें अच्छी तरह फैला के अब वो बुच्ची के ऊपर अच्छी तरह लेट गया, दोनों की देह चिपट गयी थी, लता की तरह बहन भाई से लिपट गयी, सूरजु ने जीभ बाहर निकाल लिया और बुच्ची खुद सूरजु के होंठों को कभी चूमती कभी चूसती कभी दोनों हाथो से पकड़ के उसके चेहरे पर चुम्मो की बारिश कर देती, सूरजु के दोनों हाथ उन कच्ची अमियों को सहला रहे थे, दबा रहे थे, मसल रहे थे , और कुछ देर में एक हाथ बुच्ची की किशोर गोरी मखमली जाँघों को सहला रही थी और दूसरा हाथ कबूतर के चोंचों को पकड़ कर नोच रहा था।

बुच्ची मजे से सिसकती, कस के अपने हाथों से भाई की पीठ दबा देती, नाखुनो ने कंधो को खरोच रही थी और बुदबुदा रही थी

" हाँ भैया, हां, बहुत अच्छे हो तूम भैया, ओह्ह कब से मेरा मन कर रहा था तुझसे करवाने को '
==
Girl-Y-8a971a011f45d9768c693be6c27dece1.jpg

=
" तो करवा न, रोज करवा न, दिन में दो बार,... चार बार, जितनी बार मन करे. मन तो यार मेरा भी करता है तुझे देख के,कब से मन कर रहा था कब पाऊं कब पेल दूँ।" "

हँसते हुए भाई बोला, एकदम उस गाँव के बाकी बहनरखनी भाइयों की तरह।

और फिर कस के निपल चूसने लगा और बुच्ची उसके बाल खींचती गरियाती बोली

" बदमाश, दुष्ट, कोई इतना इन्तजार करवाता है अपनी छोटी बहन को, अब रोज करवाउंगी, दुनो जून करवाउंगी, भौजी आ जाएंगी तो भी करवाउंगी, और पूरा लूंगी "


बस इतना कहना था की सूरजु ने बुच्ची को दुहरा कर दिया, जाँघे दोनों फटने की हद तक फैली, चूतड़ पूरी तरह उठा, लंड करीब करीब धीरे धीरे बाहर निकाल लिया और होंठों से फिर उसके होंठ सील करने को बढ़ा लेकिन इमरतिया ने सर ना में हिलाया।

भौजी के कान में ननद की चीख से बढ़िया मीठी आवाज कुछ नहीं होती, झिल्ली फट रही हो, भाई फाड़ रहा हो और चीख पुकार रोई रोहट भी न हो,

फिर सिर्फ इमरतिया क्यों बाकी भौजाई भी, मुन्ना बहु, अहिराने वाली दोनों जो आज गर्दा उड़ा रही थी , भरौटी वाली जो बुच्ची का हाथ पकड़ के कस कस के उसके भैया के लंड पे हल्दी लगवा रही थी, और मंजू भौजी और रामपुर वाली,ये चीख तो आज सब की कान में जाना चाहिए और सबसे बढ़के बड़की ठकुराइन के कान में की उनके पूत ने अपनी बहिनिया की झिल्ली फाड़ दी, आखिर इशारा तो उन्होंने ही मुन्ना बहू और इमरतिया को बुच्ची को दिखा के किया था,

MOT-Love-IMG-7423.jpg


बुच्ची सहम गयी, उसने आँखे मूँद ली, उसकी ककड़ी सी नरम कलाई उसके भाई ने पकड़ ली, और धीरे धीरे, धीरे धीरे अंदर घुसा लंड बाहर खींचने लगा और जब करीब करीब पूरा बाहर निकल आया तो वो पल भर के लिए रुक गया और फिर, ….

उईईई जबरदस्त चीख



इमरतिया उठी, उसने खिड़की खोल दी।

खिड़की उसी ओर खुलती थी जहाँ घर के पिछवाड़े मैदान में लावा भूजने की रस्म कांति बूआ, बुच्ची की बड़ी सगी, मौसी कर रही थीं और सब भौजाइयां उनको जोर जोर से गरिया रही थीं।

पर इमरतिया जानती थी, गारी के बीच भी सब भौजाइयां कान पारे होंगी, और चीख तो गानों की आवाज से भी ऊपर, पक्का सुनाई देगी, बल्कि अहिरौटी, भरौटी तक

ओह्ह्ह, उईईई नहीं, भैया नहीं, उफ्फ्फ बहुत दर्द हो रहा है , अरे माँ जान निकल गयी , उईईई नहीं नहीं रुक जा न, ओह्ह्ह

fucking-ruff-14169509.gif


बुच्ची अब जोर जोर से चिल्ला रही थी, छटपटा रही थी, छूटने की कोशिश कर रही थी, बार बार सर दाएं से बाएं, बाएं से दाएं कर रही थी, लेकिन सूरजु ने एकदम पक्के खिलाड़ी की तरह अपनी कमर का पूरा वजन पूरी ताकत से उस दर्जा नौ वाली बारी छोरी पे डाल दिया था और जैसे अखाड़े में किसी गिरे पहलवान को पूरे ताकत से दबाता था, उसी जोर से बुच्ची को दबाये हुए था, दोनों हाथों से उसकी कलाई पकड़ के ठेल रहा था, धकेल रहा था, करीब करीब बित्ता बार बांस अंदर चला गया था ,

उफ्फ्फ, ओह्ह्ह बहुत दर्द हो रहा है, नहीं भैया, उईईई ओह्ह्ह उफ्फ्फ रुक जा न , उईईई


बुच्ची चीख रही थी, निहोरा कर रही थी, गुहार लगा रही थी,

उसकी चीख खुली खिड़की से बाहर जहाँ बुआ लावा भूज रही थीं, सब भौजाइयां लड़कियां बैठीं थी, वहां तो पूरी तेजी से जा रही थी, पास के टोलो में भी,

इमरतिया ने पहले से ही बुच्ची के चूतड़ के नीचे एक बड़ा सफ़ेद तौलिया बिछा दिया था। एक बूँद खून धीरे धीरे रिसता हुआ, फिर टप टप

खून तौलिया पर फैल रहा था, तौलिया लाल हो रहा था। बुच्ची की जाँघों के पास भी खून लग रहा था,

pussy-blood-ruptured-467139896.jpg


और जब फिर से चुदाई शुरू करने के लिए लंबा भाला जब बुच्ची के भैया ने बाहर निकाला तो लग रहा था लाल स्याही की दवात से किसी ने कलम डुबो के निकाल की हो, पूरा लाल,

एक पल के लिए इमरतिया भी दहस गई। समझ तो वो गयी, एक तो उमरिया की बारी, दूसरे लगता है उसकी झिल्ली थोड़ी मोटी भी थी, पर जब उसने सूरजु के चेहरे की ओर देखा तो उसके मन में ख़ुशी दौड़ गयी।

खून खच्चर, सूरजु ने भी देख लिया था, पर बजाय हदसने के, घबड़ाने के उसके चेहरे पर खूब ख़ुशी थी, जैसे कोई फर्स्ट डिवीजन पास हो गया, बड़ा दंगल जीत लिया। पहली बार झिल्ली फाड़ी थी उसने।

Fuck-blood-first-time-images-16.jpg


और इमरतिया ने मन ही मन तय कर लिया,

' जियो मेरे देवर, रगड़ के चोदो अपनी बहन को, बहन महतारी कोई नहीं बचनी चाहिए फिर देख तुझे आधा दर्जन बिन चुदी दिलवाऊंगी। "

Teej-Gao-desktop-wallpaper-amarapalli-dubey-bhojpuri-actress-traditional-thumbnail.jpg


सूरजु ने बदमाशी शुरू कर दी , बचपन में जैसे बुच्ची को तंग करता था, पेला उसने लेकिन मोटे सुपाडे से बार बार उसी जगह पे रगड़ रहा था जहाँ झिल्ली फटी थी, चमड़ी छिली थी। जैसे मुंह के अंदर छाले पड़े हों और कोई तेज मिर्च वहां लग जाए, बस वही हालत बुच्ची की हो रही थी

वो उछल रही थी, चीख रही थी, सूरजु का बाल पकड़ के अपनी ओर खींच रही थी,

" बदमाश, दुष्ट, बचपन से मुझे तंग करते हो, क्या करते हो यार लगता है। ओह्ह नहीं, उफ़ रुक यार "

पर अब उसके चेहरे पर दर्द नहीं, मस्ती थी। चुदाई तेजी से चल रही थी और जब सुपाडे का हथोड़ा बुच्ची के बच्चेदानी पे पड़ा, वो तूफान के पत्ते की तरह काँप उठी। आँखे मजे से बंद हो गईं। कस के उसने भैया को भींच लिया , उसे लगा लड़की हो के जनमना सुफल हो गया।

सुपाड़ा एकदम बच्चेदानी से लगा था, ९ इंच का मूसल पूरा अंदर था और भाई बहन दोनों कस के एक दूसरे को भींचे थे।
Fucking-MOT-2ae385a85e1435876d638e93437d7878493fef5c.gif

बुच्ची जैसे छिपकली दीवाल से चिपकती है, वैसे अपने भैया से खूब प्यार से चिपकी थी, कस के दोनों हाथों से उसकी पीठ पकडे हुए थी, कुछ देर में मुस्करा के कस कस के अपने भाई के पीठ पर मुक्के बरसाने लगी,



इमरतिया उठी, उसने खिड़की खोल दी।

खिड़की उसी ओर खुलती थी जहाँ घर के पिछवाड़े मैदान में लावा भूजने की रस्म कांति बूआ, बुच्ची की बड़ी सगी, मौसी कर रही थीं और सब भौजाइयां उनको जोर जोर से गरिया रही थीं।

पर इमरतिया जानती थी, गारी के बीच भी सब भौजाइयां कान पारे होंगी, और चीख तो गानों की आवाज से भी ऊपर, पक्का सुनाई देगी, बल्कि अहिरौटी, भरौटी तक

ओह्ह्ह, उईईई नहीं, भैया नहीं, उफ्फ्फ बहुत दर्द हो रहा है , अरे माँ जान निकल गयी , उईईई नहीं नहीं रुक जा न, ओह्ह्ह






Uffff kya mahool banaya hai
 

pprsprs0

Well-Known Member
4,291
6,497
159
साँड़ चढ़ा बछिया (बुच्चिया) पर


Girl-Y-fc5a0f716a1bef41146b3ff50663bd0e.jpg



जो हफ्ते भर बाद नयी आयी दुलहिनिया के साथ जेठानियाँ करतीं. ... ये काम अभी से मंजू भाभी और रामपुर वाली के जिम्मे था,....

वो अभी बुच्ची के साथ हो रहा था।


Bride-IMG-20230329-163313.jpg


नयकी दुलहिनिया को सूरजु के पास भेजने के पहले, दुलहिनिया की जेठानियाँ मिल के उसका लहंगा, पेटीकोट उठा देतीं।

वो पढ़ी लिखी थी , दर्जा दस का इम्तहान दिया था, तो दो चार सूरजु की भौजाइयां गाँव की छाप लेतीं दबा के समझा बुझा के और,


एक जेठानी मंजू. नीचे की दोनों फांक फैला देतीं, बोलती, तोहरे भले के लिए कर रहे हैं, और रामपुर वाली टप टप कडुआ तेल की बूँद बूँद चुआ देती,नयकी दुलहिनिया की दोनों फांको को फैला के. घर के कोल्हू का पेरा, कम से कम आधा पाव ( १२५ ग्राम )।

उसी तरह इमरतिया बुच्ची की दोनों टाँगे उठा के कडुवा तेल की बोतल सीधे उसकी बुरिया के मुंह पे लगा के, धीरे धीरे तेल उड़ेल रही थी दस पांच बूँद अंदर जाता फिर हथेली से बुर रगड़ देती, हंसती खिलखिलाती बुच्ची भी चूतड़ हिला हिला के घोंट रही थी। पांच दस बार डालने के बाद बाद हथेली से कस कस बुच्ची की बुर रगड़ घिस कर के हाथ में जो तेल बचा था, वो सूरजु के खड़े खूंटे पे लगा के चिढ़ाते हुए बोली,

" तोहार दुलहिनिया, तोहरे हवाले , पेला कस के अपनी बहिनिया के फाड़ आज ओकर चूत, ....देखाय दा असल भाई हो। "

जितनी प्यास बुच्ची की बिल में थी उससे ज्यादा बुच्ची की, सूरजु की छुटकी बहिनिया की आँख में थी,

बाहें फैला के उसने अपने भाई को बुलाया,भाई बहन दोनों मदमाते हो रहे थे, जवानी की मस्ती में चूर .

और इमरतिया देख रही थी, उसका चेला आज दंगल में हरा पाता है अपनी बहिनिया को की नहीं.

उसने देवर को समझा दिया था, उसे अपनी दुल्हनिया मान के पेले। अरे पहली रात को चोद तो हर लड़का देता है अपनी बीबी को, मरद वो याद किया जाता है जो उसको कचर के रख दे।

बुच्ची के चूतड़ के नीचे, तौलिया, तकिया रखके इमरतिया ने पहले ही तेल लगाते समय उसकी फूली फूली गुझिया नौ इंच ऊपर कर दी थी।



उसके देवर ने अपनी दर्जा नौ वाली कच्ची उमर की बहिनिया की दोनों टाँगे उठा के अपने कन्धों पर रख दी, और मीठी मीठी निगाह से अपनी छोटी बहन को देख रहा था।

बहन भी मीठा मीठा मुस्करा रही थी, खुद उसने अपनी जाँघे फैला दी, और उसकी बड़ी बड़ी कजरारी आँखे जैसे निहोरा कर रही हों, करो न भैया। सूरजु ने एक हाथ से अपना मोटा खूंटा पकड़ा और दूसरे से बहन की कमर और हलके हलके गीली चूत पे रगड़ने लगा, वो घुसाने की जरा भी कोशिश नहीं कर रहा था, सिर्फ दोनों फूले फूले होंठों पर रगड़ रहा था।

जीवन में चूत रानी को लंड का पहला स्पर्श नसीब हुआ था, वो फड़फड़ाने लगीं, खुलने बंद होने लगीं।

fucking-cu-ftop-ru-134283.jpg


पर वो बहन को तड़पाता रहा, उसे देख के मुस्कराता रहा और जब बुच्ची ने खुद चूतड़ उछाल के इशारा किया, तो कौन भाई होगा जो बहन की ये बात नहीं मानेगा।

बस अब कमर छोड़कर हाथ भगोष्ठों पर आ गया, तेल से भीगी एक ऊँगली से सूरजु ने हलके से बुच्ची की दरार फैलाई, पूरी ऊँगली लिटा के उसमे रगड़ घिस की और दोनों हाथों से पूरी ताकत लगा के बुर खोल दी,



सुपाड़ा फंस गया,



इमरतिया मुस्करा पड़ी, बस यही तो वो चाहती थी। अब गाँव की कोई कुँवारी बिन फटी चूत उसके देवर से नहीं बचेगी। लेकिन जितना बाकी लोगों का पूरा लंड होता है, उतना तो इसका सुपाड़ा था।



और इमरतिया देख भी नहीं पायी, जैसे दस सांड का बल आ गया हो सूरजु की कमर में, जिस ताकत और तेजी से उसने धक्का मारा, बरछी अंदर घुस गयी थी।

बुच्ची दर्द से तड़प रही थी, दाएं-बाएं कर रही थी, मुट्ठी भींच रही थी।

पर सुपाड़ा अभी आधा करीब घुसा होगा, और सूरजु ने कस कस पूरी ताकत से अंदर घुसे सुपाडे को धकेलना, ठेलना शुरू कर दिया।

बिन चुदी चूत, वो भी दर्जा नौ वाली की, पर सूरजु ने कस के अपनी बहन की दोनों कलाइयां पकड़ रखी थीं, चार चूड़ियां चरचरा के टूट गयीं। बुच्ची होंठों को दबाकर दर्द पी रही थी। सुपाड़ा धीरे धीरे सरक रहा, इमरतिया भौजी ने जो तेल अंदर कुप्पी में भर दिया था, उससे भी थोड़ा सरक के अंदर घुस रहा था,

Fucking-cu-15216065.jpg


सूरजु रुक गया।

बस थोड़ा सा सुपाड़ा बाहर था।


बुच्ची ने मुट्ठी ऐसा मोटा सुपाड़ा लील लिया था। दर्द से वो दुहरी हो रही थी, आँखों में आँसू तैर रहे थे। पर वो असली बहन थी जो भाई के मजे के लिए कुछ भी करने को तैयार रही है। और दूसरे वो ये भी जानती थी की भाई उसका इतना बौरहा है , झूठे भी उसने निकालने को कहा, तो वो सच में निकाल लेगा, फिर करेगा भी नहीं,... की तुझ बहुत दर्द हो रहा है, रहने दे।

दोनों भाई-बहन एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे, मुस्कुरा रहे थे, चूम रहे थे।

और जब सूरजु ने चूमने के लिए होंठ बढ़ाये तो बुच्ची ने अपने होंठ फैला दिए, मुंह खोल दिया, जैसे कोई गुलाब की कली, भौंरे को देख कर खिल गयी। सूरजु अपनी भौजी का सिखाया पढ़ाया, अपनी जीभ बहन की मुंह में डाल दिया और बहन उसे चूसने लगी, जैसे थोड़ी देर पहले अपने भैया का लंड चूस रही थी। देवर को इमरतिया ने सिखाया था तो,.... ननद को भी उसकी भौजाइयों ने, मुन्ना बहू और मंजू भाभी ने रात रात भर सिखाया था, गाजर खीरे से प्रैक्टिस कराई थी।

सूरजु ने अपने होंठों से बुच्ची के दोनों होठ सील कर दिए , एक हाथ जोबन पे और दूसरा कमर पे, फिर क्या करारे धक्के मारे।


सुपाड़ा अच्छी तरह फँसा था, तो अब निकलने का डर नहीं था। हाँ चूत बहुत टाइट थी , लेकिन सूरजु के कमर में दस सांड की ताकत भी थी, दरेरते, रगड़ते, फैलाते फाड़ते मोटा मूसल घुस रहा था। गिन के सात-आठ धक्के पूरी ताकत से मारे , और बुच्ची अब तड़प रही थी, छूटने की कोशिश कर रही थी। चीख उस मुँह में ही घुटकर रह जा रही थी क्योंकि बेरहम भाई ने कसकर जीभ मुंह में घुसेड़ रखी थी।

होंठों को अपने होंठों से न उसने सिर्फ सील कर रखा था, बल्कि काट भी रहा था।


fucking-MOT-IMG-20230531-134631.gif


इमरतिया को लगा की अब झिल्ली फटेगी, खून खच्चर होगा, लेकिन सूरजु एक समझदार, वो तड़पा तड़पा के मारना चाहता था। सुपाडे के बाद भी करीब एक दो इंच घुसा था।

सुपाड़ा झिल्ली पे ही अटका था।

सूरजु ने टाँगे कंधे से उतार दी, पर उन्हें अच्छी तरह फैला के अब वो बुच्ची के ऊपर अच्छी तरह लेट गया, दोनों की देह चिपट गयी थी, लता की तरह बहन भाई से लिपट गयी, सूरजु ने जीभ बाहर निकाल लिया और बुच्ची खुद सूरजु के होंठों को कभी चूमती कभी चूसती कभी दोनों हाथो से पकड़ के उसके चेहरे पर चुम्मो की बारिश कर देती, सूरजु के दोनों हाथ उन कच्ची अमियों को सहला रहे थे, दबा रहे थे, मसल रहे थे , और कुछ देर में एक हाथ बुच्ची की किशोर गोरी मखमली जाँघों को सहला रही थी और दूसरा हाथ कबूतर के चोंचों को पकड़ कर नोच रहा था।

बुच्ची मजे से सिसकती, कस के अपने हाथों से भाई की पीठ दबा देती, नाखुनो ने कंधो को खरोच रही थी और बुदबुदा रही थी

" हाँ भैया, हां, बहुत अच्छे हो तूम भैया, ओह्ह कब से मेरा मन कर रहा था तुझसे करवाने को '
==
Girl-Y-8a971a011f45d9768c693be6c27dece1.jpg

=
" तो करवा न, रोज करवा न, दिन में दो बार,... चार बार, जितनी बार मन करे. मन तो यार मेरा भी करता है तुझे देख के,कब से मन कर रहा था कब पाऊं कब पेल दूँ।" "

हँसते हुए भाई बोला, एकदम उस गाँव के बाकी बहनरखनी भाइयों की तरह।

और फिर कस के निपल चूसने लगा और बुच्ची उसके बाल खींचती गरियाती बोली

" बदमाश, दुष्ट, कोई इतना इन्तजार करवाता है अपनी छोटी बहन को, अब रोज करवाउंगी, दुनो जून करवाउंगी, भौजी आ जाएंगी तो भी करवाउंगी, और पूरा लूंगी "


बस इतना कहना था की सूरजु ने बुच्ची को दुहरा कर दिया, जाँघे दोनों फटने की हद तक फैली, चूतड़ पूरी तरह उठा, लंड करीब करीब धीरे धीरे बाहर निकाल लिया और होंठों से फिर उसके होंठ सील करने को बढ़ा लेकिन इमरतिया ने सर ना में हिलाया।

भौजी के कान में ननद की चीख से बढ़िया मीठी आवाज कुछ नहीं होती, झिल्ली फट रही हो, भाई फाड़ रहा हो और चीख पुकार रोई रोहट भी न हो,

फिर सिर्फ इमरतिया क्यों बाकी भौजाई भी, मुन्ना बहु, अहिराने वाली दोनों जो आज गर्दा उड़ा रही थी , भरौटी वाली जो बुच्ची का हाथ पकड़ के कस कस के उसके भैया के लंड पे हल्दी लगवा रही थी, और मंजू भौजी और रामपुर वाली,ये चीख तो आज सब की कान में जाना चाहिए और सबसे बढ़के बड़की ठकुराइन के कान में की उनके पूत ने अपनी बहिनिया की झिल्ली फाड़ दी, आखिर इशारा तो उन्होंने ही मुन्ना बहू और इमरतिया को बुच्ची को दिखा के किया था,

MOT-Love-IMG-7423.jpg


बुच्ची सहम गयी, उसने आँखे मूँद ली, उसकी ककड़ी सी नरम कलाई उसके भाई ने पकड़ ली, और धीरे धीरे, धीरे धीरे अंदर घुसा लंड बाहर खींचने लगा और जब करीब करीब पूरा बाहर निकल आया तो वो पल भर के लिए रुक गया और फिर, ….

उईईई जबरदस्त चीख



इमरतिया उठी, उसने खिड़की खोल दी।

खिड़की उसी ओर खुलती थी जहाँ घर के पिछवाड़े मैदान में लावा भूजने की रस्म कांति बूआ, बुच्ची की बड़ी सगी, मौसी कर रही थीं और सब भौजाइयां उनको जोर जोर से गरिया रही थीं।

पर इमरतिया जानती थी, गारी के बीच भी सब भौजाइयां कान पारे होंगी, और चीख तो गानों की आवाज से भी ऊपर, पक्का सुनाई देगी, बल्कि अहिरौटी, भरौटी तक

ओह्ह्ह, उईईई नहीं, भैया नहीं, उफ्फ्फ बहुत दर्द हो रहा है , अरे माँ जान निकल गयी , उईईई नहीं नहीं रुक जा न, ओह्ह्ह

fucking-ruff-14169509.gif


बुच्ची अब जोर जोर से चिल्ला रही थी, छटपटा रही थी, छूटने की कोशिश कर रही थी, बार बार सर दाएं से बाएं, बाएं से दाएं कर रही थी, लेकिन सूरजु ने एकदम पक्के खिलाड़ी की तरह अपनी कमर का पूरा वजन पूरी ताकत से उस दर्जा नौ वाली बारी छोरी पे डाल दिया था और जैसे अखाड़े में किसी गिरे पहलवान को पूरे ताकत से दबाता था, उसी जोर से बुच्ची को दबाये हुए था, दोनों हाथों से उसकी कलाई पकड़ के ठेल रहा था, धकेल रहा था, करीब करीब बित्ता बार बांस अंदर चला गया था ,

उफ्फ्फ, ओह्ह्ह बहुत दर्द हो रहा है, नहीं भैया, उईईई ओह्ह्ह उफ्फ्फ रुक जा न , उईईई


बुच्ची चीख रही थी, निहोरा कर रही थी, गुहार लगा रही थी,

उसकी चीख खुली खिड़की से बाहर जहाँ बुआ लावा भूज रही थीं, सब भौजाइयां लड़कियां बैठीं थी, वहां तो पूरी तेजी से जा रही थी, पास के टोलो में भी,

इमरतिया ने पहले से ही बुच्ची के चूतड़ के नीचे एक बड़ा सफ़ेद तौलिया बिछा दिया था। एक बूँद खून धीरे धीरे रिसता हुआ, फिर टप टप

खून तौलिया पर फैल रहा था, तौलिया लाल हो रहा था। बुच्ची की जाँघों के पास भी खून लग रहा था,

pussy-blood-ruptured-467139896.jpg


और जब फिर से चुदाई शुरू करने के लिए लंबा भाला जब बुच्ची के भैया ने बाहर निकाला तो लग रहा था लाल स्याही की दवात से किसी ने कलम डुबो के निकाल की हो, पूरा लाल,

एक पल के लिए इमरतिया भी दहस गई। समझ तो वो गयी, एक तो उमरिया की बारी, दूसरे लगता है उसकी झिल्ली थोड़ी मोटी भी थी, पर जब उसने सूरजु के चेहरे की ओर देखा तो उसके मन में ख़ुशी दौड़ गयी।

खून खच्चर, सूरजु ने भी देख लिया था, पर बजाय हदसने के, घबड़ाने के उसके चेहरे पर खूब ख़ुशी थी, जैसे कोई फर्स्ट डिवीजन पास हो गया, बड़ा दंगल जीत लिया। पहली बार झिल्ली फाड़ी थी उसने।

Fuck-blood-first-time-images-16.jpg


और इमरतिया ने मन ही मन तय कर लिया,

' जियो मेरे देवर, रगड़ के चोदो अपनी बहन को, बहन महतारी कोई नहीं बचनी चाहिए फिर देख तुझे आधा दर्जन बिन चुदी दिलवाऊंगी। "

Teej-Gao-desktop-wallpaper-amarapalli-dubey-bhojpuri-actress-traditional-thumbnail.jpg


सूरजु ने बदमाशी शुरू कर दी , बचपन में जैसे बुच्ची को तंग करता था, पेला उसने लेकिन मोटे सुपाडे से बार बार उसी जगह पे रगड़ रहा था जहाँ झिल्ली फटी थी, चमड़ी छिली थी। जैसे मुंह के अंदर छाले पड़े हों और कोई तेज मिर्च वहां लग जाए, बस वही हालत बुच्ची की हो रही थी

वो उछल रही थी, चीख रही थी, सूरजु का बाल पकड़ के अपनी ओर खींच रही थी,

" बदमाश, दुष्ट, बचपन से मुझे तंग करते हो, क्या करते हो यार लगता है। ओह्ह नहीं, उफ़ रुक यार "

पर अब उसके चेहरे पर दर्द नहीं, मस्ती थी। चुदाई तेजी से चल रही थी और जब सुपाडे का हथोड़ा बुच्ची के बच्चेदानी पे पड़ा, वो तूफान के पत्ते की तरह काँप उठी। आँखे मजे से बंद हो गईं। कस के उसने भैया को भींच लिया , उसे लगा लड़की हो के जनमना सुफल हो गया।

सुपाड़ा एकदम बच्चेदानी से लगा था, ९ इंच का मूसल पूरा अंदर था और भाई बहन दोनों कस के एक दूसरे को भींचे थे।
Fucking-MOT-2ae385a85e1435876d638e93437d7878493fef5c.gif

बुच्ची जैसे छिपकली दीवाल से चिपकती है, वैसे अपने भैया से खूब प्यार से चिपकी थी, कस के दोनों हाथों से उसकी पीठ पकडे हुए थी, कुछ देर में मुस्करा के कस कस के अपने भाई के पीठ पर मुक्के बरसाने लगी,
Bahut garam 🔥🔥🔥
 
Top