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Adultery खलिश

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Ajju Landwalia

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Update -: 46





"कल हम लोग निकलेंगे गांव के लिए सब अपने हिसाब से सामान पैक कर लेना दस दिन के हिसाब से"....... राजीव ने सबको देखते हुए कहा जिस पर साक्षी, इफ्तिका और मयंक ने गर्दन हां में हिला दी।







अभी इस वक्त सब एक शानदार दुकान में मौजूद थे जो कुछ हद तक एक कैफे की तरह थी सबके सामने एक मग मौजूद था मयंक को छोडकर जो इस वक्त किसी उलझन में मालूम पड रहा था।






राजीव -"क्या हुआ मयंक क्या सोच रहा है....तुझे गांव जाने की खुशी नहीं है ?"






मयंक -"ऐसा कुछ नहीं है रज्जो"





और मयंक की बात को सुनते ही इफ्तिका और साक्षी मयंक को घूर रहे थे क्योंकि मयंक ने राजीव का जो नाम अभी लिया था वो अक्सर अकेले में ही बोला करता था।






राजीव -"फिर क्या हुआ?"






मयंक -"मुझे क्या होता सामने तो हूं तेरे अच्छा भला "





राजीव को भले ही मयंक ने कुछ बताया ना हो पर राजीव मयंक को बहुत अच्छे से जानता था और जितना अच्छे से मयंक को वह जानता था शायद सी कोई जानता हो ...... मयंक भी कोशिश पूरी कर रहा था छुपाने की पर वह जानता था की राजीव से वह ज्यादा दिन तक नहीं छुपा पाएगा आखिर में उसको बताना ही पड़ेगा।






इफ्तिका -"राजीव वैसे क्या क्या है उधर हम कभी गये नहीं गांव हमेशा से ही इंदौर में रहे हैं"






राजीव -"अरे गांव में सुख है,चैन है, सुकून की नींद है, अच्छे और सच्चे लोग हैं और भी बहुत कुछ है सच कहूं तो गांव ही सब कुछ है"






साक्षी-"बिल्कुल फिल्मी इंट्रोडक्शन है"..... साक्षी ने हंसते हुए कहा।






इसके बाद ये लोग कुछ देर और रहे यहां जिसके बाद सब लोग राजीव की जिप्सी में बैठकर अपने अपने घर पहुंच गये..... आखिर इन्हें कल गांव भी तो जाना था ।
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"हां भाई अपनी चोंच खोल और जो भी है सच सच बोल"...... राजीव ने मयंक के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।






मयंक -"क्या जानना है तुझे?"





राजीव -"चल क्या रहा है काफी दिनों से दे रहा हूं बोला इसलिए नहीं मुझे लगा खुद संभल जाए और अब लग रहा है नहीं होगा तो पूछ रहा हूं "







राजीव ने जब जोर दिया और मयंक का जो भ्रम था की वह राजीव से छुपा लेगा वो टूटता हुआ दिखा तो बस फिर मयंक को भी लगा आखिर वो छुपाना भी किस से छा रहा है उससे जिसके साथ बचपन से रहा है तो फिर सब बताना ही ठी लगा और रीत वाली बात से लेकर साक्षी तक सब कुछ बता दिया ......






"चल तेरी मुसिबत और बढाता हूं".......पूरी बात सुनने के बाद राजीव ने कहा।






मयंक -"अबे साले!! .....कम करने के लिए बताया था बढ़ाने के लिए नहीं"






"अरे सुन तो बाद में पता चलेगा फिर उसके लिए अपना सर अलग से पीटेगा तो एक बार में ही जान ले .... इफ्तिका भी तुझसे प्यार करती है"......ये एक नया बंब फोड दिया राजीव ने मयंक पर जहां इफ्तिका को मयंक दोस्त समझ रहा था वहां भी गलत साबित होता हुआ दिख रहा था ।







"कुछ भी मत बोल यार .... साक्षी की आंखों में देखता हूं तो ऐसा लगता है जैसे उसकी आत्मा को मैंने अपने हाथों से मार दिया हो और भाई रीत की ना के बाद मुझे अंदाजा है की असलियत में इंसान जिंदा होता है बस जान नहीं रहती "........ मयंक ने एक लंबी सांस छोड़ते हुए कहा।







राजीव -"वैसे इफ्तिका के मामले में दिक्कत नहीं होगी तुझे"






"क्यूं"..... मयंक ने खुश‌ होते हुए कहा।






राजीव -"अरे उनके यहां तो शोहर चार शादियां कर सकता है ना "






मयंक ने जैसे ही ये बात सुनी एक मुक्का राजीव की जांग पर जड दिया ।






"भोसडीके तुझे मजाक सूझ रहा है शादी तो मैं रीत से ही करूंगा या फिर किसी से नहीं चाहे कुंवारा ही मर जाऊं"...... मयंक ने राजीव की गर्दन दबाते हुए कहा।







"अरे तू टेंशन ना ले कुंवारा नहीं मरने दुंगा चाहे मुझे तुझको अपनी दुल्हनिया बनाना पडे ....हाहहा".......ये कहते ही राजीव हंसने लगा।







मयंक -"भाई हस मत यार साले अगर तू जो कह रहा है वो सच है तो मैं इफ्तिका से दूर दूर ही रहुंगा अब तो "






"मतलब अपनी अर्थी की तैयारी जल्दी करना चाहता है"..... राजीव ने कहा।






मयंक -"बहनचो सीधे ना बोला जाता तेरे ते"







राजीव -"मतलब ये की जब इंसान को पता चले की उसका प्यार दूर जा रहा है तब ही वो बेचैन होता है तो अगर इफ्तिका को लगा की तू उसकी अनदेखी कर रहा है या उससे दूर जा रहा है तो पहले उसको गुस्सा आए गी और जब लगेगा तू उससे हमेशा के लिए दूर हो जाएगा तो वह तुझसे अपने प्यार का इजहार कर देगी मतलब जिस चीज से तू बचना चाह रहा है वो पहले तो पास आ रही थी पर उससे दूर जाने के चक्कर में वो तेरीतरफ दौडकर आना शुरू कर देगी।"








मयंक -"तो क्या करूं.....साला मैं ही मर जाता हूं "






"भोसडीके फिर मेरी लुगाई कौन बनेगा?"....... राजीव ने कहा।






मयंक ने राजीव की इस बात पर अपना माथा पकड लिया .....






"ठेके पे लेले "....... मयंक ने इतना कहा और अपना सर सीट पर टिका लिया।
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"दादू आपकी पैकिंग हो गई?"...... इफ्तिका ने अपने दादू के कमरे में आते हुए कहा पर जैसे ही उसने देखा दादू फोन पर बात कर रहे हैं तो वह छुप हो गई और खडी रही......






"बडी खुश लग रही हो क्या बात है"....... दादू ने फोन रखते हुए इफ्तिका से कहा।






"आपकी पैकिंग हो गई दादू?".... इफ्तिका ने फिर एक बार सवाल दोहराया।






दादू -"हम नहीं जा रहे बेटा एक काम की वजह से"






"पर आपने कहा था की आप तैयार हैं और छुट्टियां भी तो है यहां घर में रहकर क्या करेंगे "...... इफ्तिका का तो मुंह ही उतर गया था अपने दादूकी बात सुनकर।







"अरे हम से हमारा मतलब मैं है तुम नहीं मेरा जाना मुमकिन नहीं इसका मतलब ये तो नहीं की तुम भी ना जाओ "....... दादू ने आपने पोती के मासूम लटके चेहरे को देखकर कहा।







इफ्तिका ने इस बात अपने दादू से खुशी जाहिर की और वापिस अपने कमरे में चली गई शायद अपनी दोस्त साक्षी को इस बात की खबर देने ।




***********




"ठीक है कल मिलते हैं"...... साक्षी ने इफ्तिका के साथ दस मिनट बात की जहां उसे इफ्तिका ने बताया की दादू नहीं जा रहे हैं जिसके बाद और भी सामान को लेकर बातचीत होती रही।







"हो गई सारी तैयारी ?".......रोमा ने साक्षी के फोन रखते ही उससे पूछा।






"हां मम्मा "...... साक्षी ने भी मुस्कुराकर कहा और अपने रूम में चली गई।







"आज कितने दिन बाद साक्षी के चेहरे पर खुशी देखी है जब से नानी के यहां गई थी बोलना ही छोड दिया था इस लड़की ने"......रोमा ने आशीष से कहा जो इस वक्त एक फिइल पकडे हुए सोफे पर बैठा था।






आशीष -"मुझे भी ऐसा लग रहा था की साक्षी को एक ट्रिप की जरूरत है बहुत ही बुझी बुझी रहने लगी थी "







"सही कहा आपने घूम आएगी तो ठीक रहेगा"........






आशीष -"और तब तक आप चलेंगी हमारे साथ काम करते करते मजा नहीं आता अगर आप होगीं तो हमारा भी मन लगा रहेगा "

Bahut hi badhiya update he Hell Strom Bhai,

Mayank ki to lagi padi he....................logo ke love triangle hote he.............mayank ka to love square ho gaya he...............

Ajeeb si uljhan me fansta ja rahe mayank, kisko apnaye aur kisko chhode...............

Keep posting Bhai
 
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Hell Strom

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"सब लोग आ गये ?".......अनिल ने मयंक और राजीव की तरफ देखते हुए पूछा ।





मयंक -"हां चाचाजी सब आ चुकें हैं"





इस समय चारों लोग मयंक, राजीव, इफ्तिका और साक्षी स्टेशन पर मौजूद थे कुछ ही देर में इनकी ट्रेन आने वाली थी अनिल और आशीष ही सब बच्चों को छोड़ने आए थे इफ्तिका के दादा जी आशीष को जानते थे तो वह भी निश्चित थे इफ्तिका के जाने से.....







अनिल -"ध्यान से जाना और कोई ऐसी शरारत नहीं जिसका परिणाम गलत हो बाकी ज्यादा भाषण देकर तुम लोग की नजरों में खडूस नहीं बनना चाहता .....टेक केयर ! "






इतना कहने के बाद अनिल आशीष को लिए हुए स्टेशन से निकल चला .....






"आजा कुछ खाने पीने का सामान लेकर आते हैं"...... राजीव ने मयंक से कहा।






मयंक -"तू रुक मैं लेकर आता हूं"






मयंक कोशिश यही कर रहा था की जितना हो सके साक्षी और इफ्तिका से दूर ही रहे कल रात राजीव ने मयंक को बहुत समझाया था और राजीव को सब बताकर मयंक के मन का बोझ भी कम हो गया था। जिसमें पूरी मदद उन आठ ठंडी बीयर की बोतलों ने भी की थी जो अभी शायद किसी कूड़ेदान में खाली पडी होंगी ।






"वैसे तुम्हारे गांव के आसपास कुछ घूमने लायक है?"....... साक्षी ने राजीव से पूछा।






"ये तो सामने वाले पर निर्भर करता है साक्षी यूं तो कुछ लोग सात अजूबों में शामिल ताजमहल को भी कुछ नहीं मानते और कुछ टूटे फ़ूटे खंडहरों में ही सब कुछ ढूंढ कर खुश हो जाते हैं वैसे है तो बहुत कुछ हमारे संभाग में पुराने समय की कालाजादू की यूनिवर्सिटी हमारे गांव से बीस किमी. है और एक मंदिर भी है जिसमें सीमेंट कील आदि चीजों का कोई इस्तेमाल नहीं बस पत्थर पर पत्थर रखकर बनाया है वो भी तीस फुट ऊंचा.......और तो और रायसेन की भीमबेटका जितनी पुरानी चीजें भी मिली हैं हमारे यहां और भी बहुत कुछ है बताने को पर देखने में और अच्छा लगेगा"........







इफ्तिका -"हम तो जरूर देखेंगे चाहे जो हो"





साक्षी -"हां यार सुनने में ही कितना एक्साइटिंग है"






"बिल्कुल देखना आखिर हम जा ही किस लिए रहें है इसी लिए ना "...... राजीव ने हसते हुए कहा।







अबतक मयंक भी सारा सामान लेकर आ चुका था कुछ चिप्स और कोल्डड्रिंक की बोतल ले आया था वो इनकी ट्रेन में ज्यादा समय नहीं था इसलिए ये लोग भी इस हाॅल नुमा जगह से निकल कर अपनी निर्धारित जगह पर जाने लगे थे जहां इनके रिजर्वेशन वाला डिब्बा आकर रुकना था।
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"उस घटना के बाद मैं काफी घबरा गया था यार "....... आशीष ने एक नई बात छेड़ते हुए अनिल से कहा।







अनिल -"घबराने वाली बात थी भाई कोई भी होता तो घबरा ही जाता "







"अगर मयंक नहीं होता तो शायद साक्षी मेरे साथ ना होती भगवान का लाख लाख शुक्र है की दोनों को कुछ नहीं हुआ पर मयंक की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है बिना जान की परवाह किए ही उसने हमारी मदद की जिसके चलते दो हफ्तों तक वो ठीक से चल भी ना सका था "......... आशीष उस घटना को याद करते हुए आज दिल से मयंक का शुक्रिया अदा कर रहा था।








अनिल -"वो वाकई में ऐसा ही है बचपन से और समझदार भी बहुत है पर तुझे मुझसे जिक्र तो करना था कि तूने उस्मानी का सामान पकड लिया है तो शायद हम इतनी बडी मुश्किल में ना पडते खैर पुरानी बातें सिर्फ पश्चाताप लाती है सब ठीक है बस यही बहुत है "








"वैसे एक बात बता उस घटना के बाद मैंने सुना उस्मानी विदेश भाग गया अपनी सारी जायदाद अनाथ आलय और स्कूल के लिए दान करके "...... आशीष के बताने का ढंग ये साफ जाहीर कर रहा था की वह इस अफवाह से कत ई सहमत नहीं हैं।








अनिल -"ये अफवाह नहीं है भाई सच ही है की अब सैफ उस्मानी नाम का कोई भी शख्स नीमच में मौजूद नहीं.....बस पूरा सच ये है कि वो इस दुनिया में ही नहीं है "







अनिल की बात सुनकर आशीष उसे ऐसे घूर रहा था मानो उसने जो सुना उस पर यकीन ना हो।







"मुझे पता है की तुझे यकीन नहीं है पर मेरे बेटे पर जानलेवा हमला करके कोई शख्स जिंदा रहे तो अच्छा नहीं लगेगा ना और फिर उसने तो तुझसे बदला लेने के लिए साक्षी को निशाना बनाया जो मेरे लिए अपनी बेटी से कम नहीं और एक बार के लिए मयंक और राजीव के लिए छोड भी देता पर बात बेटी पर आती है तो उस्मानी क्या कोई भी आए उसका यही हश्र होगा।" ....... अनिल ने अपनी बात खत्म की तो अब आशीष के चेहरे पर एक मुस्कान थी जो बताती थी की वह कितना खुश हैं पर अंदर ही अंदर वह ये भी जानता था की उस्मानी मैन संदिग्ध नहीं था उस मामले का आखिर आशीष ने उस मामले की तहकीकात बहुत की तो इतना सब पता होना लाजमी था।







आशीष -"पर अनिल मुझे लगता है की अकेला उस्मानी ही नहीं शामिल था उस मामले में बल्कि असली मालिक तो कोई और ही था।"







अनिल -"मैं जानता हूं आशीष बल्ली ने चस इंस्पेक्टर को भी धर दबोचा था जो उस्मानी का साथ हरकाले काम में दिया करता था जिससे हमने बहुत कुछ उगल वाया और बहुत सी जानकारियां मिली जहां पता चला की उस्मानी के तार लंदन तक जुड़े थे और ये अफीम की तस्करी लंदन तक होती रही है जो बहुत चिंता का विषय है "








आशीष का ये सुनकर सर ही घूम गया था जो अनिल ने भी महसूस किया और उसको टेंशन ना लेने की सलह थी और साथ ही हिदायत भी की बड़े अपराधी खास कर जो प्रशासन से हाथ मिलाए बैठे हैं उनसे बचकर रहे .......

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"जितना मुझे पता चला है भईया उस हिसाब से बहुत कुछ घटा है यहां गांव में आपके जाने के बाद और बहुत मेहनत के बाद ये भी सामने आया है की मयंक बाबू का इसमें सीधा हाथ था तह तक जाना अभी बाकी है पर लगभग बीस लोगों की जान गई थी उन दिनों और तो और बलवीर ऐसे गायब हुआ अपने गांव से मानो वो कभी इस गांव में मौजूद ही नहीं था और ये तो इप भी जानते हैं आपके और अनिल भईया के बाद उसका ही नाम था गांव में..... सबसे चौंकाने वाली बात ये है की गांव में कोई भी इस बात का ज़िक्र तक नहीं करता और पूछे जाने पर सामने वाले को ही लताड दिया जाता है "........ये आदमी लगभग 27 साल का र आ होगा जो इस वक्त विष्णु के कहे अनुसार सब जानकारी लाकर उसे बता रहा था ।







विष्णु -"बताओ अब अपने बेटे की जानकारी निकलवाना तक इतना कठिन हो गया है क्या योगेश ..... ?"






"भईया अगर सख्त लहजे का इस्तेमाल किया जाए तो...







विष्णु -"नहीं योगेश बिल्कुल नहीं गांव वाले मेरे लिए परिवार जैसे हैं और वो कोई दोषी नहीं जो उनके सर पर कट्टा रखकर पता लगा लें अगर हम गांव में सबसे बडा ओदा रखते हैं त़ो इससे हमें इस बात का लाइसेंस नहीं मिलता किसी से भी कुछ करवा लें और अपने मतलब के लिए तो बिल्कुल नहीं"







"फिर क्या करें भईया"







यहां ये लोग जिसकी वजह से परेशान थे वो इस वक्त ट्रेन के सबसे अच्छे डिब्बे में मौजूद था और फिलहाल एकांत में फोन से बात कर रहा था वहीं इसके साथी एक कोच में आराम से बात चीत कर रहे थे असल में बातचीत तो इफ्तिका और साक्षी ही कर रहे थे राजीव तो बस उन बातों को सुनकर भगवान से प्रार्थना कर रहा था की उसकी सुनने की शक्ति भगवान उससे लेले ........ मयंक ने फोन तो काट दिया जानवी से बात करके पर अफसोस इस बात का था की उसकी गलती की वजह से रीत से जो बात हो जाया करती थी उसकी आवाज सुनकर जो मन खिल उठता था वो भी अब मुमकिन नहीं था । क्योंकि रीत कोई ना कोई बहाना करके जानवी से फोन नहीं लेती थी जिससे उसे मयंक से बात ना करनी पडे ।




 

Hell Strom

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Nice update....

Bahut hi shaandar update diya hai Hell Strom bhai.....
Nice and lovely update....

Awesome update 👌🏻 mind blowing writing ✍️ and jabardast story my dear hellu. Mayank ki 3no anguli cht me hai per sala chutia hai🤣. Wo reet ko chahta hai per reet use nahi chahti. Saksi or iftika use chahti hai per wo unko nahi chahta. Lagta hai sale ko funsi ho gai hai galat jagah :D: Dekhte hai aage kya hota hai. Majedar update per chota tha👍👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥

Nice update

Bahut badiya update

Bas Bhai raat ka wait hai agar nhi aya update to subah hote hi apki इच्छापूर्ति ho jayegi :declare:

Nice update

Nice update....

Romanchak.Ab jaldi jaldi update dena. Pratiksha agle rasprad update ki

❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖
Update 47

Hell Strom hellu lag ja kaam pe. Apne ko tabad tod update mangta hai abb :bigboss:

Bahut hi badhiya update he Hell Strom Bhai,

Mayank ki to lagi padi he....................logo ke love triangle hote he.............mayank ka to love square ho gaya he...............

Ajeeb si uljhan me fansta ja rahe mayank, kisko apnaye aur kisko chhode...............

Keep posting Bhai
Update posted guys :declare: ..... Do give ur reviews :dost:
 

parkas

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"सब लोग आ गये ?".......अनिल ने मयंक और राजीव की तरफ देखते हुए पूछा ।





मयंक -"हां चाचाजी सब आ चुकें हैं"





इस समय चारों लोग मयंक, राजीव, इफ्तिका और साक्षी स्टेशन पर मौजूद थे कुछ ही देर में इनकी ट्रेन आने वाली थी अनिल और आशीष ही सब बच्चों को छोड़ने आए थे इफ्तिका के दादा जी आशीष को जानते थे तो वह भी निश्चित थे इफ्तिका के जाने से.....







अनिल -"ध्यान से जाना और कोई ऐसी शरारत नहीं जिसका परिणाम गलत हो बाकी ज्यादा भाषण देकर तुम लोग की नजरों में खडूस नहीं बनना चाहता .....टेक केयर ! "






इतना कहने के बाद अनिल आशीष को लिए हुए स्टेशन से निकल चला .....






"आजा कुछ खाने पीने का सामान लेकर आते हैं"...... राजीव ने मयंक से कहा।






मयंक -"तू रुक मैं लेकर आता हूं"






मयंक कोशिश यही कर रहा था की जितना हो सके साक्षी और इफ्तिका से दूर ही रहे कल रात राजीव ने मयंक को बहुत समझाया था और राजीव को सब बताकर मयंक के मन का बोझ भी कम हो गया था। जिसमें पूरी मदद उन आठ ठंडी बीयर की बोतलों ने भी की थी जो अभी शायद किसी कूड़ेदान में खाली पडी होंगी ।






"वैसे तुम्हारे गांव के आसपास कुछ घूमने लायक है?"....... साक्षी ने राजीव से पूछा।






"ये तो सामने वाले पर निर्भर करता है साक्षी यूं तो कुछ लोग सात अजूबों में शामिल ताजमहल को भी कुछ नहीं मानते और कुछ टूटे फ़ूटे खंडहरों में ही सब कुछ ढूंढ कर खुश हो जाते हैं वैसे है तो बहुत कुछ हमारे संभाग में पुराने समय की कालाजादू की यूनिवर्सिटी हमारे गांव से बीस किमी. है और एक मंदिर भी है जिसमें सीमेंट कील आदि चीजों का कोई इस्तेमाल नहीं बस पत्थर पर पत्थर रखकर बनाया है वो भी तीस फुट ऊंचा.......और तो और रायसेन की भीमबेटका जितनी पुरानी चीजें भी मिली हैं हमारे यहां और भी बहुत कुछ है बताने को पर देखने में और अच्छा लगेगा"........







इफ्तिका -"हम तो जरूर देखेंगे चाहे जो हो"





साक्षी -"हां यार सुनने में ही कितना एक्साइटिंग है"






"बिल्कुल देखना आखिर हम जा ही किस लिए रहें है इसी लिए ना "...... राजीव ने हसते हुए कहा।







अबतक मयंक भी सारा सामान लेकर आ चुका था कुछ चिप्स और कोल्डड्रिंक की बोतल ले आया था वो इनकी ट्रेन में ज्यादा समय नहीं था इसलिए ये लोग भी इस हाॅल नुमा जगह से निकल कर अपनी निर्धारित जगह पर जाने लगे थे जहां इनके रिजर्वेशन वाला डिब्बा आकर रुकना था।
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"उस घटना के बाद मैं काफी घबरा गया था यार "....... आशीष ने एक नई बात छेड़ते हुए अनिल से कहा।







अनिल -"घबराने वाली बात थी भाई कोई भी होता तो घबरा ही जाता "







"अगर मयंक नहीं होता तो शायद साक्षी मेरे साथ ना होती भगवान का लाख लाख शुक्र है की दोनों को कुछ नहीं हुआ पर मयंक की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है बिना जान की परवाह किए ही उसने हमारी मदद की जिसके चलते दो हफ्तों तक वो ठीक से चल भी ना सका था "......... आशीष उस घटना को याद करते हुए आज दिल से मयंक का शुक्रिया अदा कर रहा था।








अनिल -"वो वाकई में ऐसा ही है बचपन से और समझदार भी बहुत है पर तुझे मुझसे जिक्र तो करना था कि तूने उस्मानी का सामान पकड लिया है तो शायद हम इतनी बडी मुश्किल में ना पडते खैर पुरानी बातें सिर्फ पश्चाताप लाती है सब ठीक है बस यही बहुत है "








"वैसे एक बात बता उस घटना के बाद मैंने सुना उस्मानी विदेश भाग गया अपनी सारी जायदाद अनाथ आलय और स्कूल के लिए दान करके "...... आशीष के बताने का ढंग ये साफ जाहीर कर रहा था की वह इस अफवाह से कत ई सहमत नहीं हैं।








अनिल -"ये अफवाह नहीं है भाई सच ही है की अब सैफ उस्मानी नाम का कोई भी शख्स नीमच में मौजूद नहीं.....बस पूरा सच ये है कि वो इस दुनिया में ही नहीं है "







अनिल की बात सुनकर आशीष उसे ऐसे घूर रहा था मानो उसने जो सुना उस पर यकीन ना हो।







"मुझे पता है की तुझे यकीन नहीं है पर मेरे बेटे पर जानलेवा हमला करके कोई शख्स जिंदा रहे तो अच्छा नहीं लगेगा ना और फिर उसने तो तुझसे बदला लेने के लिए साक्षी को निशाना बनाया जो मेरे लिए अपनी बेटी से कम नहीं और एक बार के लिए मयंक और राजीव के लिए छोड भी देता पर बात बेटी पर आती है तो उस्मानी क्या कोई भी आए उसका यही हश्र होगा।" ....... अनिल ने अपनी बात खत्म की तो अब आशीष के चेहरे पर एक मुस्कान थी जो बताती थी की वह कितना खुश हैं पर अंदर ही अंदर वह ये भी जानता था की उस्मानी मैन संदिग्ध नहीं था उस मामले का आखिर आशीष ने उस मामले की तहकीकात बहुत की तो इतना सब पता होना लाजमी था।







आशीष -"पर अनिल मुझे लगता है की अकेला उस्मानी ही नहीं शामिल था उस मामले में बल्कि असली मालिक तो कोई और ही था।"







अनिल -"मैं जानता हूं आशीष बल्ली ने चस इंस्पेक्टर को भी धर दबोचा था जो उस्मानी का साथ हरकाले काम में दिया करता था जिससे हमने बहुत कुछ उगल वाया और बहुत सी जानकारियां मिली जहां पता चला की उस्मानी के तार लंदन तक जुड़े थे और ये अफीम की तस्करी लंदन तक होती रही है जो बहुत चिंता का विषय है "








आशीष का ये सुनकर सर ही घूम गया था जो अनिल ने भी महसूस किया और उसको टेंशन ना लेने की सलह थी और साथ ही हिदायत भी की बड़े अपराधी खास कर जो प्रशासन से हाथ मिलाए बैठे हैं उनसे बचकर रहे .......

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"जितना मुझे पता चला है भईया उस हिसाब से बहुत कुछ घटा है यहां गांव में आपके जाने के बाद और बहुत मेहनत के बाद ये भी सामने आया है की मयंक बाबू का इसमें सीधा हाथ था तह तक जाना अभी बाकी है पर लगभग बीस लोगों की जान गई थी उन दिनों और तो और बलवीर ऐसे गायब हुआ अपने गांव से मानो वो कभी इस गांव में मौजूद ही नहीं था और ये तो इप भी जानते हैं आपके और अनिल भईया के बाद उसका ही नाम था गांव में..... सबसे चौंकाने वाली बात ये है की गांव में कोई भी इस बात का ज़िक्र तक नहीं करता और पूछे जाने पर सामने वाले को ही लताड दिया जाता है "........ये आदमी लगभग 27 साल का र आ होगा जो इस वक्त विष्णु के कहे अनुसार सब जानकारी लाकर उसे बता रहा था ।







विष्णु -"बताओ अब अपने बेटे की जानकारी निकलवाना तक इतना कठिन हो गया है क्या योगेश ..... ?"






"भईया अगर सख्त लहजे का इस्तेमाल किया जाए तो...







विष्णु -"नहीं योगेश बिल्कुल नहीं गांव वाले मेरे लिए परिवार जैसे हैं और वो कोई दोषी नहीं जो उनके सर पर कट्टा रखकर पता लगा लें अगर हम गांव में सबसे बडा ओदा रखते हैं त़ो इससे हमें इस बात का लाइसेंस नहीं मिलता किसी से भी कुछ करवा लें और अपने मतलब के लिए तो बिल्कुल नहीं"







"फिर क्या करें भईया"







यहां ये लोग जिसकी वजह से परेशान थे वो इस वक्त ट्रेन के सबसे अच्छे डिब्बे में मौजूद था और फिलहाल एकांत में फोन से बात कर रहा था वहीं इसके साथी एक कोच में आराम से बात चीत कर रहे थे असल में बातचीत तो इफ्तिका और साक्षी ही कर रहे थे राजीव तो बस उन बातों को सुनकर भगवान से प्रार्थना कर रहा था की उसकी सुनने की शक्ति भगवान उससे लेले ........ मयंक ने फोन तो काट दिया जानवी से बात करके पर अफसोस इस बात का था की उसकी गलती की वजह से रीत से जो बात हो जाया करती थी उसकी आवाज सुनकर जो मन खिल उठता था वो भी अब मुमकिन नहीं था । क्योंकि रीत कोई ना कोई बहाना करके जानवी से फोन नहीं लेती थी जिससे उसे मयंक से बात ना करनी पडे ।
Bahut hi badhiya update diya hai Hell Strom bhai.....
Nice and beautiful update....
 
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