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Adultery खलिश

Hell Strom

🦁
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Update -: 46





"कल हम लोग निकलेंगे गांव के लिए सब अपने हिसाब से सामान पैक कर लेना दस दिन के हिसाब से"....... राजीव ने सबको देखते हुए कहा जिस पर साक्षी, इफ्तिका और मयंक ने गर्दन हां में हिला दी।







अभी इस वक्त सब एक शानदार दुकान में मौजूद थे जो कुछ हद तक एक कैफे की तरह थी सबके सामने एक मग मौजूद था मयंक को छोडकर जो इस वक्त किसी उलझन में मालूम पड रहा था।






राजीव -"क्या हुआ मयंक क्या सोच रहा है....तुझे गांव जाने की खुशी नहीं है ?"






मयंक -"ऐसा कुछ नहीं है रज्जो"





और मयंक की बात को सुनते ही इफ्तिका और साक्षी मयंक को घूर रहे थे क्योंकि मयंक ने राजीव का जो नाम अभी लिया था वो अक्सर अकेले में ही बोला करता था।






राजीव -"फिर क्या हुआ?"






मयंक -"मुझे क्या होता सामने तो हूं तेरे अच्छा भला "





राजीव को भले ही मयंक ने कुछ बताया ना हो पर राजीव मयंक को बहुत अच्छे से जानता था और जितना अच्छे से मयंक को वह जानता था शायद सी कोई जानता हो ...... मयंक भी कोशिश पूरी कर रहा था छुपाने की पर वह जानता था की राजीव से वह ज्यादा दिन तक नहीं छुपा पाएगा आखिर में उसको बताना ही पड़ेगा।






इफ्तिका -"राजीव वैसे क्या क्या है उधर हम कभी गये नहीं गांव हमेशा से ही इंदौर में रहे हैं"






राजीव -"अरे गांव में सुख है,चैन है, सुकून की नींद है, अच्छे और सच्चे लोग हैं और भी बहुत कुछ है सच कहूं तो गांव ही सब कुछ है"






साक्षी-"बिल्कुल फिल्मी इंट्रोडक्शन है"..... साक्षी ने हंसते हुए कहा।






इसके बाद ये लोग कुछ देर और रहे यहां जिसके बाद सब लोग राजीव की जिप्सी में बैठकर अपने अपने घर पहुंच गये..... आखिर इन्हें कल गांव भी तो जाना था ।
.
.
.
.
"हां भाई अपनी चोंच खोल और जो भी है सच सच बोल"...... राजीव ने मयंक के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।






मयंक -"क्या जानना है तुझे?"





राजीव -"चल क्या रहा है काफी दिनों से दे रहा हूं बोला इसलिए नहीं मुझे लगा खुद संभल जाए और अब लग रहा है नहीं होगा तो पूछ रहा हूं "







राजीव ने जब जोर दिया और मयंक का जो भ्रम था की वह राजीव से छुपा लेगा वो टूटता हुआ दिखा तो बस फिर मयंक को भी लगा आखिर वो छुपाना भी किस से छा रहा है उससे जिसके साथ बचपन से रहा है तो फिर सब बताना ही ठी लगा और रीत वाली बात से लेकर साक्षी तक सब कुछ बता दिया ......






"चल तेरी मुसिबत और बढाता हूं".......पूरी बात सुनने के बाद राजीव ने कहा।






मयंक -"अबे साले!! .....कम करने के लिए बताया था बढ़ाने के लिए नहीं"






"अरे सुन तो बाद में पता चलेगा फिर उसके लिए अपना सर अलग से पीटेगा तो एक बार में ही जान ले .... इफ्तिका भी तुझसे प्यार करती है"......ये एक नया बंब फोड दिया राजीव ने मयंक पर जहां इफ्तिका को मयंक दोस्त समझ रहा था वहां भी गलत साबित होता हुआ दिख रहा था ।







"कुछ भी मत बोल यार .... साक्षी की आंखों में देखता हूं तो ऐसा लगता है जैसे उसकी आत्मा को मैंने अपने हाथों से मार दिया हो और भाई रीत की ना के बाद मुझे अंदाजा है की असलियत में इंसान जिंदा होता है बस जान नहीं रहती "........ मयंक ने एक लंबी सांस छोड़ते हुए कहा।







राजीव -"वैसे इफ्तिका के मामले में दिक्कत नहीं होगी तुझे"






"क्यूं"..... मयंक ने खुश‌ होते हुए कहा।






राजीव -"अरे उनके यहां तो शोहर चार शादियां कर सकता है ना "






मयंक ने जैसे ही ये बात सुनी एक मुक्का राजीव की जांग पर जड दिया ।






"भोसडीके तुझे मजाक सूझ रहा है शादी तो मैं रीत से ही करूंगा या फिर किसी से नहीं चाहे कुंवारा ही मर जाऊं"...... मयंक ने राजीव की गर्दन दबाते हुए कहा।







"अरे तू टेंशन ना ले कुंवारा नहीं मरने दुंगा चाहे मुझे तुझको अपनी दुल्हनिया बनाना पडे ....हाहहा".......ये कहते ही राजीव हंसने लगा।







मयंक -"भाई हस मत यार साले अगर तू जो कह रहा है वो सच है तो मैं इफ्तिका से दूर दूर ही रहुंगा अब तो "






"मतलब अपनी अर्थी की तैयारी जल्दी करना चाहता है"..... राजीव ने कहा।






मयंक -"बहनचो सीधे ना बोला जाता तेरे ते"







राजीव -"मतलब ये की जब इंसान को पता चले की उसका प्यार दूर जा रहा है तब ही वो बेचैन होता है तो अगर इफ्तिका को लगा की तू उसकी अनदेखी कर रहा है या उससे दूर जा रहा है तो पहले उसको गुस्सा आए गी और जब लगेगा तू उससे हमेशा के लिए दूर हो जाएगा तो वह तुझसे अपने प्यार का इजहार कर देगी मतलब जिस चीज से तू बचना चाह रहा है वो पहले तो पास आ रही थी पर उससे दूर जाने के चक्कर में वो तेरीतरफ दौडकर आना शुरू कर देगी।"








मयंक -"तो क्या करूं.....साला मैं ही मर जाता हूं "






"भोसडीके फिर मेरी लुगाई कौन बनेगा?"....... राजीव ने कहा।






मयंक ने राजीव की इस बात पर अपना माथा पकड लिया .....






"ठेके पे लेले "....... मयंक ने इतना कहा और अपना सर सीट पर टिका लिया।
.
.
.
.
"दादू आपकी पैकिंग हो गई?"...... इफ्तिका ने अपने दादू के कमरे में आते हुए कहा पर जैसे ही उसने देखा दादू फोन पर बात कर रहे हैं तो वह छुप हो गई और खडी रही......






"बडी खुश लग रही हो क्या बात है"....... दादू ने फोन रखते हुए इफ्तिका से कहा।






"आपकी पैकिंग हो गई दादू?".... इफ्तिका ने फिर एक बार सवाल दोहराया।






दादू -"हम नहीं जा रहे बेटा एक काम की वजह से"






"पर आपने कहा था की आप तैयार हैं और छुट्टियां भी तो है यहां घर में रहकर क्या करेंगे "...... इफ्तिका का तो मुंह ही उतर गया था अपने दादूकी बात सुनकर।







"अरे हम से हमारा मतलब मैं है तुम नहीं मेरा जाना मुमकिन नहीं इसका मतलब ये तो नहीं की तुम भी ना जाओ "....... दादू ने आपने पोती के मासूम लटके चेहरे को देखकर कहा।







इफ्तिका ने इस बात अपने दादू से खुशी जाहिर की और वापिस अपने कमरे में चली गई शायद अपनी दोस्त साक्षी को इस बात की खबर देने ।




***********




"ठीक है कल मिलते हैं"...... साक्षी ने इफ्तिका के साथ दस मिनट बात की जहां उसे इफ्तिका ने बताया की दादू नहीं जा रहे हैं जिसके बाद और भी सामान को लेकर बातचीत होती रही।







"हो गई सारी तैयारी ?".......रोमा ने साक्षी के फोन रखते ही उससे पूछा।






"हां मम्मा "...... साक्षी ने भी मुस्कुराकर कहा और अपने रूम में चली गई।







"आज कितने दिन बाद साक्षी के चेहरे पर खुशी देखी है जब से नानी के यहां गई थी बोलना ही छोड दिया था इस लड़की ने"......रोमा ने आशीष से कहा जो इस वक्त एक फिइल पकडे हुए सोफे पर बैठा था।






आशीष -"मुझे भी ऐसा लग रहा था की साक्षी को एक ट्रिप की जरूरत है बहुत ही बुझी बुझी रहने लगी थी "







"सही कहा आपने घूम आएगी तो ठीक रहेगा"........






आशीष -"और तब तक आप चलेंगी हमारे साथ काम करते करते मजा नहीं आता अगर आप होगीं तो हमारा भी मन लगा रहेगा "










 

Hell Strom

🦁
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Bahut hi badhiya update diya hai Hell Strom bhai.....
Nice and beautiful update....

Nice and superb update....

Nice update....

Very nice update... But Bhai shayad apne junbujh kr ya anjane me typing glt hui wording agey pichhe hai.. Kai jagah to smjh hi nhi aya

Mayank shakshi ke liye kya mayne rakhta hai yeh pata chalta hai. Pratiksha agle rasprad update ki


Nice update....

Nice update

waiting for the next update....

बहुत ही बढ़िया अपडेट भाई

Hell Strom hellu mere bhoi update :bat1:

Behad shadar update he Hell Strom Bhai,

Mayank aur sakshi ki prem kahani me cheez common he..............dono jise chahte he wo unhe nahi chahta...........

Agli update ke besabri se intezar rahega Bhai

बहुत ही बढ़िया अपडेट भाई ❤️

Hell Strom bhai next update kab tak aayega?

Wait for next update Bhai

sarkar ..... update mast hai ...... :happy:

thoda speed badha ne ki jarurat hai :winkiss:

Hell Strom bhai next update kab tak aayega?
Update posted exam khatam bhailog ab mere paas koi bahana nhi hai update na dene ka :runaway: .....To agla late ho to bhar bhar ke gali dene ka :declare:
 

dhparikh

Well-Known Member
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Update -: 46





"कल हम लोग निकलेंगे गांव के लिए सब अपने हिसाब से सामान पैक कर लेना दस दिन के हिसाब से"....... राजीव ने सबको देखते हुए कहा जिस पर साक्षी, इफ्तिका और मयंक ने गर्दन हां में हिला दी।







अभी इस वक्त सब एक शानदार दुकान में मौजूद थे जो कुछ हद तक एक कैफे की तरह थी सबके सामने एक मग मौजूद था मयंक को छोडकर जो इस वक्त किसी उलझन में मालूम पड रहा था।






राजीव -"क्या हुआ मयंक क्या सोच रहा है....तुझे गांव जाने की खुशी नहीं है ?"






मयंक -"ऐसा कुछ नहीं है रज्जो"





और मयंक की बात को सुनते ही इफ्तिका और साक्षी मयंक को घूर रहे थे क्योंकि मयंक ने राजीव का जो नाम अभी लिया था वो अक्सर अकेले में ही बोला करता था।






राजीव -"फिर क्या हुआ?"






मयंक -"मुझे क्या होता सामने तो हूं तेरे अच्छा भला "





राजीव को भले ही मयंक ने कुछ बताया ना हो पर राजीव मयंक को बहुत अच्छे से जानता था और जितना अच्छे से मयंक को वह जानता था शायद सी कोई जानता हो ...... मयंक भी कोशिश पूरी कर रहा था छुपाने की पर वह जानता था की राजीव से वह ज्यादा दिन तक नहीं छुपा पाएगा आखिर में उसको बताना ही पड़ेगा।






इफ्तिका -"राजीव वैसे क्या क्या है उधर हम कभी गये नहीं गांव हमेशा से ही इंदौर में रहे हैं"






राजीव -"अरे गांव में सुख है,चैन है, सुकून की नींद है, अच्छे और सच्चे लोग हैं और भी बहुत कुछ है सच कहूं तो गांव ही सब कुछ है"






साक्षी-"बिल्कुल फिल्मी इंट्रोडक्शन है"..... साक्षी ने हंसते हुए कहा।






इसके बाद ये लोग कुछ देर और रहे यहां जिसके बाद सब लोग राजीव की जिप्सी में बैठकर अपने अपने घर पहुंच गये..... आखिर इन्हें कल गांव भी तो जाना था ।
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"हां भाई अपनी चोंच खोल और जो भी है सच सच बोल"...... राजीव ने मयंक के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।






मयंक -"क्या जानना है तुझे?"





राजीव -"चल क्या रहा है काफी दिनों से दे रहा हूं बोला इसलिए नहीं मुझे लगा खुद संभल जाए और अब लग रहा है नहीं होगा तो पूछ रहा हूं "







राजीव ने जब जोर दिया और मयंक का जो भ्रम था की वह राजीव से छुपा लेगा वो टूटता हुआ दिखा तो बस फिर मयंक को भी लगा आखिर वो छुपाना भी किस से छा रहा है उससे जिसके साथ बचपन से रहा है तो फिर सब बताना ही ठी लगा और रीत वाली बात से लेकर साक्षी तक सब कुछ बता दिया ......






"चल तेरी मुसिबत और बढाता हूं".......पूरी बात सुनने के बाद राजीव ने कहा।






मयंक -"अबे साले!! .....कम करने के लिए बताया था बढ़ाने के लिए नहीं"






"अरे सुन तो बाद में पता चलेगा फिर उसके लिए अपना सर अलग से पीटेगा तो एक बार में ही जान ले .... इफ्तिका भी तुझसे प्यार करती है"......ये एक नया बंब फोड दिया राजीव ने मयंक पर जहां इफ्तिका को मयंक दोस्त समझ रहा था वहां भी गलत साबित होता हुआ दिख रहा था ।







"कुछ भी मत बोल यार .... साक्षी की आंखों में देखता हूं तो ऐसा लगता है जैसे उसकी आत्मा को मैंने अपने हाथों से मार दिया हो और भाई रीत की ना के बाद मुझे अंदाजा है की असलियत में इंसान जिंदा होता है बस जान नहीं रहती "........ मयंक ने एक लंबी सांस छोड़ते हुए कहा।







राजीव -"वैसे इफ्तिका के मामले में दिक्कत नहीं होगी तुझे"






"क्यूं"..... मयंक ने खुश‌ होते हुए कहा।






राजीव -"अरे उनके यहां तो शोहर चार शादियां कर सकता है ना "






मयंक ने जैसे ही ये बात सुनी एक मुक्का राजीव की जांग पर जड दिया ।






"भोसडीके तुझे मजाक सूझ रहा है शादी तो मैं रीत से ही करूंगा या फिर किसी से नहीं चाहे कुंवारा ही मर जाऊं"...... मयंक ने राजीव की गर्दन दबाते हुए कहा।







"अरे तू टेंशन ना ले कुंवारा नहीं मरने दुंगा चाहे मुझे तुझको अपनी दुल्हनिया बनाना पडे ....हाहहा".......ये कहते ही राजीव हंसने लगा।







मयंक -"भाई हस मत यार साले अगर तू जो कह रहा है वो सच है तो मैं इफ्तिका से दूर दूर ही रहुंगा अब तो "






"मतलब अपनी अर्थी की तैयारी जल्दी करना चाहता है"..... राजीव ने कहा।






मयंक -"बहनचो सीधे ना बोला जाता तेरे ते"







राजीव -"मतलब ये की जब इंसान को पता चले की उसका प्यार दूर जा रहा है तब ही वो बेचैन होता है तो अगर इफ्तिका को लगा की तू उसकी अनदेखी कर रहा है या उससे दूर जा रहा है तो पहले उसको गुस्सा आए गी और जब लगेगा तू उससे हमेशा के लिए दूर हो जाएगा तो वह तुझसे अपने प्यार का इजहार कर देगी मतलब जिस चीज से तू बचना चाह रहा है वो पहले तो पास आ रही थी पर उससे दूर जाने के चक्कर में वो तेरीतरफ दौडकर आना शुरू कर देगी।"








मयंक -"तो क्या करूं.....साला मैं ही मर जाता हूं "






"भोसडीके फिर मेरी लुगाई कौन बनेगा?"....... राजीव ने कहा।






मयंक ने राजीव की इस बात पर अपना माथा पकड लिया .....






"ठेके पे लेले "....... मयंक ने इतना कहा और अपना सर सीट पर टिका लिया।
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"दादू आपकी पैकिंग हो गई?"...... इफ्तिका ने अपने दादू के कमरे में आते हुए कहा पर जैसे ही उसने देखा दादू फोन पर बात कर रहे हैं तो वह छुप हो गई और खडी रही......






"बडी खुश लग रही हो क्या बात है"....... दादू ने फोन रखते हुए इफ्तिका से कहा।






"आपकी पैकिंग हो गई दादू?".... इफ्तिका ने फिर एक बार सवाल दोहराया।






दादू -"हम नहीं जा रहे बेटा एक काम की वजह से"






"पर आपने कहा था की आप तैयार हैं और छुट्टियां भी तो है यहां घर में रहकर क्या करेंगे "...... इफ्तिका का तो मुंह ही उतर गया था अपने दादूकी बात सुनकर।







"अरे हम से हमारा मतलब मैं है तुम नहीं मेरा जाना मुमकिन नहीं इसका मतलब ये तो नहीं की तुम भी ना जाओ "....... दादू ने आपने पोती के मासूम लटके चेहरे को देखकर कहा।







इफ्तिका ने इस बात अपने दादू से खुशी जाहिर की और वापिस अपने कमरे में चली गई शायद अपनी दोस्त साक्षी को इस बात की खबर देने ।




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"ठीक है कल मिलते हैं"...... साक्षी ने इफ्तिका के साथ दस मिनट बात की जहां उसे इफ्तिका ने बताया की दादू नहीं जा रहे हैं जिसके बाद और भी सामान को लेकर बातचीत होती रही।







"हो गई सारी तैयारी ?".......रोमा ने साक्षी के फोन रखते ही उससे पूछा।






"हां मम्मा "...... साक्षी ने भी मुस्कुराकर कहा और अपने रूम में चली गई।







"आज कितने दिन बाद साक्षी के चेहरे पर खुशी देखी है जब से नानी के यहां गई थी बोलना ही छोड दिया था इस लड़की ने"......रोमा ने आशीष से कहा जो इस वक्त एक फिइल पकडे हुए सोफे पर बैठा था।






आशीष -"मुझे भी ऐसा लग रहा था की साक्षी को एक ट्रिप की जरूरत है बहुत ही बुझी बुझी रहने लगी थी "







"सही कहा आपने घूम आएगी तो ठीक रहेगा"........






आशीष -"और तब तक आप चलेंगी हमारे साथ काम करते करते मजा नहीं आता अगर आप होगीं तो हमारा भी मन लगा रहेगा "
Nice update....
 

parkas

Well-Known Member
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"कल हम लोग निकलेंगे गांव के लिए सब अपने हिसाब से सामान पैक कर लेना दस दिन के हिसाब से"....... राजीव ने सबको देखते हुए कहा जिस पर साक्षी, इफ्तिका और मयंक ने गर्दन हां में हिला दी।







अभी इस वक्त सब एक शानदार दुकान में मौजूद थे जो कुछ हद तक एक कैफे की तरह थी सबके सामने एक मग मौजूद था मयंक को छोडकर जो इस वक्त किसी उलझन में मालूम पड रहा था।






राजीव -"क्या हुआ मयंक क्या सोच रहा है....तुझे गांव जाने की खुशी नहीं है ?"






मयंक -"ऐसा कुछ नहीं है रज्जो"





और मयंक की बात को सुनते ही इफ्तिका और साक्षी मयंक को घूर रहे थे क्योंकि मयंक ने राजीव का जो नाम अभी लिया था वो अक्सर अकेले में ही बोला करता था।






राजीव -"फिर क्या हुआ?"






मयंक -"मुझे क्या होता सामने तो हूं तेरे अच्छा भला "





राजीव को भले ही मयंक ने कुछ बताया ना हो पर राजीव मयंक को बहुत अच्छे से जानता था और जितना अच्छे से मयंक को वह जानता था शायद सी कोई जानता हो ...... मयंक भी कोशिश पूरी कर रहा था छुपाने की पर वह जानता था की राजीव से वह ज्यादा दिन तक नहीं छुपा पाएगा आखिर में उसको बताना ही पड़ेगा।






इफ्तिका -"राजीव वैसे क्या क्या है उधर हम कभी गये नहीं गांव हमेशा से ही इंदौर में रहे हैं"






राजीव -"अरे गांव में सुख है,चैन है, सुकून की नींद है, अच्छे और सच्चे लोग हैं और भी बहुत कुछ है सच कहूं तो गांव ही सब कुछ है"






साक्षी-"बिल्कुल फिल्मी इंट्रोडक्शन है"..... साक्षी ने हंसते हुए कहा।






इसके बाद ये लोग कुछ देर और रहे यहां जिसके बाद सब लोग राजीव की जिप्सी में बैठकर अपने अपने घर पहुंच गये..... आखिर इन्हें कल गांव भी तो जाना था ।
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"हां भाई अपनी चोंच खोल और जो भी है सच सच बोल"...... राजीव ने मयंक के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।






मयंक -"क्या जानना है तुझे?"





राजीव -"चल क्या रहा है काफी दिनों से दे रहा हूं बोला इसलिए नहीं मुझे लगा खुद संभल जाए और अब लग रहा है नहीं होगा तो पूछ रहा हूं "







राजीव ने जब जोर दिया और मयंक का जो भ्रम था की वह राजीव से छुपा लेगा वो टूटता हुआ दिखा तो बस फिर मयंक को भी लगा आखिर वो छुपाना भी किस से छा रहा है उससे जिसके साथ बचपन से रहा है तो फिर सब बताना ही ठी लगा और रीत वाली बात से लेकर साक्षी तक सब कुछ बता दिया ......






"चल तेरी मुसिबत और बढाता हूं".......पूरी बात सुनने के बाद राजीव ने कहा।






मयंक -"अबे साले!! .....कम करने के लिए बताया था बढ़ाने के लिए नहीं"






"अरे सुन तो बाद में पता चलेगा फिर उसके लिए अपना सर अलग से पीटेगा तो एक बार में ही जान ले .... इफ्तिका भी तुझसे प्यार करती है"......ये एक नया बंब फोड दिया राजीव ने मयंक पर जहां इफ्तिका को मयंक दोस्त समझ रहा था वहां भी गलत साबित होता हुआ दिख रहा था ।







"कुछ भी मत बोल यार .... साक्षी की आंखों में देखता हूं तो ऐसा लगता है जैसे उसकी आत्मा को मैंने अपने हाथों से मार दिया हो और भाई रीत की ना के बाद मुझे अंदाजा है की असलियत में इंसान जिंदा होता है बस जान नहीं रहती "........ मयंक ने एक लंबी सांस छोड़ते हुए कहा।







राजीव -"वैसे इफ्तिका के मामले में दिक्कत नहीं होगी तुझे"






"क्यूं"..... मयंक ने खुश‌ होते हुए कहा।






राजीव -"अरे उनके यहां तो शोहर चार शादियां कर सकता है ना "






मयंक ने जैसे ही ये बात सुनी एक मुक्का राजीव की जांग पर जड दिया ।






"भोसडीके तुझे मजाक सूझ रहा है शादी तो मैं रीत से ही करूंगा या फिर किसी से नहीं चाहे कुंवारा ही मर जाऊं"...... मयंक ने राजीव की गर्दन दबाते हुए कहा।







"अरे तू टेंशन ना ले कुंवारा नहीं मरने दुंगा चाहे मुझे तुझको अपनी दुल्हनिया बनाना पडे ....हाहहा".......ये कहते ही राजीव हंसने लगा।







मयंक -"भाई हस मत यार साले अगर तू जो कह रहा है वो सच है तो मैं इफ्तिका से दूर दूर ही रहुंगा अब तो "






"मतलब अपनी अर्थी की तैयारी जल्दी करना चाहता है"..... राजीव ने कहा।






मयंक -"बहनचो सीधे ना बोला जाता तेरे ते"







राजीव -"मतलब ये की जब इंसान को पता चले की उसका प्यार दूर जा रहा है तब ही वो बेचैन होता है तो अगर इफ्तिका को लगा की तू उसकी अनदेखी कर रहा है या उससे दूर जा रहा है तो पहले उसको गुस्सा आए गी और जब लगेगा तू उससे हमेशा के लिए दूर हो जाएगा तो वह तुझसे अपने प्यार का इजहार कर देगी मतलब जिस चीज से तू बचना चाह रहा है वो पहले तो पास आ रही थी पर उससे दूर जाने के चक्कर में वो तेरीतरफ दौडकर आना शुरू कर देगी।"








मयंक -"तो क्या करूं.....साला मैं ही मर जाता हूं "






"भोसडीके फिर मेरी लुगाई कौन बनेगा?"....... राजीव ने कहा।






मयंक ने राजीव की इस बात पर अपना माथा पकड लिया .....






"ठेके पे लेले "....... मयंक ने इतना कहा और अपना सर सीट पर टिका लिया।
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"दादू आपकी पैकिंग हो गई?"...... इफ्तिका ने अपने दादू के कमरे में आते हुए कहा पर जैसे ही उसने देखा दादू फोन पर बात कर रहे हैं तो वह छुप हो गई और खडी रही......






"बडी खुश लग रही हो क्या बात है"....... दादू ने फोन रखते हुए इफ्तिका से कहा।






"आपकी पैकिंग हो गई दादू?".... इफ्तिका ने फिर एक बार सवाल दोहराया।






दादू -"हम नहीं जा रहे बेटा एक काम की वजह से"






"पर आपने कहा था की आप तैयार हैं और छुट्टियां भी तो है यहां घर में रहकर क्या करेंगे "...... इफ्तिका का तो मुंह ही उतर गया था अपने दादूकी बात सुनकर।







"अरे हम से हमारा मतलब मैं है तुम नहीं मेरा जाना मुमकिन नहीं इसका मतलब ये तो नहीं की तुम भी ना जाओ "....... दादू ने आपने पोती के मासूम लटके चेहरे को देखकर कहा।







इफ्तिका ने इस बात अपने दादू से खुशी जाहिर की और वापिस अपने कमरे में चली गई शायद अपनी दोस्त साक्षी को इस बात की खबर देने ।




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"ठीक है कल मिलते हैं"...... साक्षी ने इफ्तिका के साथ दस मिनट बात की जहां उसे इफ्तिका ने बताया की दादू नहीं जा रहे हैं जिसके बाद और भी सामान को लेकर बातचीत होती रही।







"हो गई सारी तैयारी ?".......रोमा ने साक्षी के फोन रखते ही उससे पूछा।






"हां मम्मा "...... साक्षी ने भी मुस्कुराकर कहा और अपने रूम में चली गई।







"आज कितने दिन बाद साक्षी के चेहरे पर खुशी देखी है जब से नानी के यहां गई थी बोलना ही छोड दिया था इस लड़की ने"......रोमा ने आशीष से कहा जो इस वक्त एक फिइल पकडे हुए सोफे पर बैठा था।






आशीष -"मुझे भी ऐसा लग रहा था की साक्षी को एक ट्रिप की जरूरत है बहुत ही बुझी बुझी रहने लगी थी "







"सही कहा आपने घूम आएगी तो ठीक रहेगा"........






आशीष -"और तब तक आप चलेंगी हमारे साथ काम करते करते मजा नहीं आता अगर आप होगीं तो हमारा भी मन लगा रहेगा "
Bahut hi shaandar update diya hai Hell Strom bhai.....
Nice and lovely update....
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Update -: 46





"कल हम लोग निकलेंगे गांव के लिए सब अपने हिसाब से सामान पैक कर लेना दस दिन के हिसाब से"....... राजीव ने सबको देखते हुए कहा जिस पर साक्षी, इफ्तिका और मयंक ने गर्दन हां में हिला दी।







अभी इस वक्त सब एक शानदार दुकान में मौजूद थे जो कुछ हद तक एक कैफे की तरह थी सबके सामने एक मग मौजूद था मयंक को छोडकर जो इस वक्त किसी उलझन में मालूम पड रहा था।






राजीव -"क्या हुआ मयंक क्या सोच रहा है....तुझे गांव जाने की खुशी नहीं है ?"






मयंक -"ऐसा कुछ नहीं है रज्जो"





और मयंक की बात को सुनते ही इफ्तिका और साक्षी मयंक को घूर रहे थे क्योंकि मयंक ने राजीव का जो नाम अभी लिया था वो अक्सर अकेले में ही बोला करता था।






राजीव -"फिर क्या हुआ?"






मयंक -"मुझे क्या होता सामने तो हूं तेरे अच्छा भला "





राजीव को भले ही मयंक ने कुछ बताया ना हो पर राजीव मयंक को बहुत अच्छे से जानता था और जितना अच्छे से मयंक को वह जानता था शायद सी कोई जानता हो ...... मयंक भी कोशिश पूरी कर रहा था छुपाने की पर वह जानता था की राजीव से वह ज्यादा दिन तक नहीं छुपा पाएगा आखिर में उसको बताना ही पड़ेगा।






इफ्तिका -"राजीव वैसे क्या क्या है उधर हम कभी गये नहीं गांव हमेशा से ही इंदौर में रहे हैं"






राजीव -"अरे गांव में सुख है,चैन है, सुकून की नींद है, अच्छे और सच्चे लोग हैं और भी बहुत कुछ है सच कहूं तो गांव ही सब कुछ है"






साक्षी-"बिल्कुल फिल्मी इंट्रोडक्शन है"..... साक्षी ने हंसते हुए कहा।






इसके बाद ये लोग कुछ देर और रहे यहां जिसके बाद सब लोग राजीव की जिप्सी में बैठकर अपने अपने घर पहुंच गये..... आखिर इन्हें कल गांव भी तो जाना था ।
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"हां भाई अपनी चोंच खोल और जो भी है सच सच बोल"...... राजीव ने मयंक के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।






मयंक -"क्या जानना है तुझे?"





राजीव -"चल क्या रहा है काफी दिनों से दे रहा हूं बोला इसलिए नहीं मुझे लगा खुद संभल जाए और अब लग रहा है नहीं होगा तो पूछ रहा हूं "







राजीव ने जब जोर दिया और मयंक का जो भ्रम था की वह राजीव से छुपा लेगा वो टूटता हुआ दिखा तो बस फिर मयंक को भी लगा आखिर वो छुपाना भी किस से छा रहा है उससे जिसके साथ बचपन से रहा है तो फिर सब बताना ही ठी लगा और रीत वाली बात से लेकर साक्षी तक सब कुछ बता दिया ......






"चल तेरी मुसिबत और बढाता हूं".......पूरी बात सुनने के बाद राजीव ने कहा।






मयंक -"अबे साले!! .....कम करने के लिए बताया था बढ़ाने के लिए नहीं"






"अरे सुन तो बाद में पता चलेगा फिर उसके लिए अपना सर अलग से पीटेगा तो एक बार में ही जान ले .... इफ्तिका भी तुझसे प्यार करती है"......ये एक नया बंब फोड दिया राजीव ने मयंक पर जहां इफ्तिका को मयंक दोस्त समझ रहा था वहां भी गलत साबित होता हुआ दिख रहा था ।







"कुछ भी मत बोल यार .... साक्षी की आंखों में देखता हूं तो ऐसा लगता है जैसे उसकी आत्मा को मैंने अपने हाथों से मार दिया हो और भाई रीत की ना के बाद मुझे अंदाजा है की असलियत में इंसान जिंदा होता है बस जान नहीं रहती "........ मयंक ने एक लंबी सांस छोड़ते हुए कहा।







राजीव -"वैसे इफ्तिका के मामले में दिक्कत नहीं होगी तुझे"






"क्यूं"..... मयंक ने खुश‌ होते हुए कहा।






राजीव -"अरे उनके यहां तो शोहर चार शादियां कर सकता है ना "






मयंक ने जैसे ही ये बात सुनी एक मुक्का राजीव की जांग पर जड दिया ।






"भोसडीके तुझे मजाक सूझ रहा है शादी तो मैं रीत से ही करूंगा या फिर किसी से नहीं चाहे कुंवारा ही मर जाऊं"...... मयंक ने राजीव की गर्दन दबाते हुए कहा।







"अरे तू टेंशन ना ले कुंवारा नहीं मरने दुंगा चाहे मुझे तुझको अपनी दुल्हनिया बनाना पडे ....हाहहा".......ये कहते ही राजीव हंसने लगा।







मयंक -"भाई हस मत यार साले अगर तू जो कह रहा है वो सच है तो मैं इफ्तिका से दूर दूर ही रहुंगा अब तो "






"मतलब अपनी अर्थी की तैयारी जल्दी करना चाहता है"..... राजीव ने कहा।






मयंक -"बहनचो सीधे ना बोला जाता तेरे ते"







राजीव -"मतलब ये की जब इंसान को पता चले की उसका प्यार दूर जा रहा है तब ही वो बेचैन होता है तो अगर इफ्तिका को लगा की तू उसकी अनदेखी कर रहा है या उससे दूर जा रहा है तो पहले उसको गुस्सा आए गी और जब लगेगा तू उससे हमेशा के लिए दूर हो जाएगा तो वह तुझसे अपने प्यार का इजहार कर देगी मतलब जिस चीज से तू बचना चाह रहा है वो पहले तो पास आ रही थी पर उससे दूर जाने के चक्कर में वो तेरीतरफ दौडकर आना शुरू कर देगी।"








मयंक -"तो क्या करूं.....साला मैं ही मर जाता हूं "






"भोसडीके फिर मेरी लुगाई कौन बनेगा?"....... राजीव ने कहा।






मयंक ने राजीव की इस बात पर अपना माथा पकड लिया .....






"ठेके पे लेले "....... मयंक ने इतना कहा और अपना सर सीट पर टिका लिया।
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"दादू आपकी पैकिंग हो गई?"...... इफ्तिका ने अपने दादू के कमरे में आते हुए कहा पर जैसे ही उसने देखा दादू फोन पर बात कर रहे हैं तो वह छुप हो गई और खडी रही......






"बडी खुश लग रही हो क्या बात है"....... दादू ने फोन रखते हुए इफ्तिका से कहा।






"आपकी पैकिंग हो गई दादू?".... इफ्तिका ने फिर एक बार सवाल दोहराया।






दादू -"हम नहीं जा रहे बेटा एक काम की वजह से"






"पर आपने कहा था की आप तैयार हैं और छुट्टियां भी तो है यहां घर में रहकर क्या करेंगे "...... इफ्तिका का तो मुंह ही उतर गया था अपने दादूकी बात सुनकर।







"अरे हम से हमारा मतलब मैं है तुम नहीं मेरा जाना मुमकिन नहीं इसका मतलब ये तो नहीं की तुम भी ना जाओ "....... दादू ने आपने पोती के मासूम लटके चेहरे को देखकर कहा।







इफ्तिका ने इस बात अपने दादू से खुशी जाहिर की और वापिस अपने कमरे में चली गई शायद अपनी दोस्त साक्षी को इस बात की खबर देने ।




***********




"ठीक है कल मिलते हैं"...... साक्षी ने इफ्तिका के साथ दस मिनट बात की जहां उसे इफ्तिका ने बताया की दादू नहीं जा रहे हैं जिसके बाद और भी सामान को लेकर बातचीत होती रही।







"हो गई सारी तैयारी ?".......रोमा ने साक्षी के फोन रखते ही उससे पूछा।






"हां मम्मा "...... साक्षी ने भी मुस्कुराकर कहा और अपने रूम में चली गई।







"आज कितने दिन बाद साक्षी के चेहरे पर खुशी देखी है जब से नानी के यहां गई थी बोलना ही छोड दिया था इस लड़की ने"......रोमा ने आशीष से कहा जो इस वक्त एक फिइल पकडे हुए सोफे पर बैठा था।






आशीष -"मुझे भी ऐसा लग रहा था की साक्षी को एक ट्रिप की जरूरत है बहुत ही बुझी बुझी रहने लगी थी "







"सही कहा आपने घूम आएगी तो ठीक रहेगा"........






आशीष -"और तब तक आप चलेंगी हमारे साथ काम करते करते मजा नहीं आता अगर आप होगीं तो हमारा भी मन लगा रहेगा "
Awesome update 👌🏻 mind blowing writing ✍️ and jabardast story my dear hellu. Mayank ki 3no anguli cht me hai per sala chutia hai🤣. Wo reet ko chahta hai per reet use nahi chahti. Saksi or iftika use chahti hai per wo unko nahi chahta. Lagta hai sale ko funsi ho gai hai galat jagah :D: Dekhte hai aage kya hota hai. Majedar update per chota tha👍👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥
 

only_me

I ÂM LÕSÉR ẞŪT.....
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Update -: 46





"कल हम लोग निकलेंगे गांव के लिए सब अपने हिसाब से सामान पैक कर लेना दस दिन के हिसाब से"....... राजीव ने सबको देखते हुए कहा जिस पर साक्षी, इफ्तिका और मयंक ने गर्दन हां में हिला दी।







अभी इस वक्त सब एक शानदार दुकान में मौजूद थे जो कुछ हद तक एक कैफे की तरह थी सबके सामने एक मग मौजूद था मयंक को छोडकर जो इस वक्त किसी उलझन में मालूम पड रहा था।






राजीव -"क्या हुआ मयंक क्या सोच रहा है....तुझे गांव जाने की खुशी नहीं है ?"






मयंक -"ऐसा कुछ नहीं है रज्जो"





और मयंक की बात को सुनते ही इफ्तिका और साक्षी मयंक को घूर रहे थे क्योंकि मयंक ने राजीव का जो नाम अभी लिया था वो अक्सर अकेले में ही बोला करता था।






राजीव -"फिर क्या हुआ?"






मयंक -"मुझे क्या होता सामने तो हूं तेरे अच्छा भला "





राजीव को भले ही मयंक ने कुछ बताया ना हो पर राजीव मयंक को बहुत अच्छे से जानता था और जितना अच्छे से मयंक को वह जानता था शायद सी कोई जानता हो ...... मयंक भी कोशिश पूरी कर रहा था छुपाने की पर वह जानता था की राजीव से वह ज्यादा दिन तक नहीं छुपा पाएगा आखिर में उसको बताना ही पड़ेगा।






इफ्तिका -"राजीव वैसे क्या क्या है उधर हम कभी गये नहीं गांव हमेशा से ही इंदौर में रहे हैं"






राजीव -"अरे गांव में सुख है,चैन है, सुकून की नींद है, अच्छे और सच्चे लोग हैं और भी बहुत कुछ है सच कहूं तो गांव ही सब कुछ है"






साक्षी-"बिल्कुल फिल्मी इंट्रोडक्शन है"..... साक्षी ने हंसते हुए कहा।






इसके बाद ये लोग कुछ देर और रहे यहां जिसके बाद सब लोग राजीव की जिप्सी में बैठकर अपने अपने घर पहुंच गये..... आखिर इन्हें कल गांव भी तो जाना था ।
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"हां भाई अपनी चोंच खोल और जो भी है सच सच बोल"...... राजीव ने मयंक के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।






मयंक -"क्या जानना है तुझे?"





राजीव -"चल क्या रहा है काफी दिनों से दे रहा हूं बोला इसलिए नहीं मुझे लगा खुद संभल जाए और अब लग रहा है नहीं होगा तो पूछ रहा हूं "







राजीव ने जब जोर दिया और मयंक का जो भ्रम था की वह राजीव से छुपा लेगा वो टूटता हुआ दिखा तो बस फिर मयंक को भी लगा आखिर वो छुपाना भी किस से छा रहा है उससे जिसके साथ बचपन से रहा है तो फिर सब बताना ही ठी लगा और रीत वाली बात से लेकर साक्षी तक सब कुछ बता दिया ......






"चल तेरी मुसिबत और बढाता हूं".......पूरी बात सुनने के बाद राजीव ने कहा।






मयंक -"अबे साले!! .....कम करने के लिए बताया था बढ़ाने के लिए नहीं"






"अरे सुन तो बाद में पता चलेगा फिर उसके लिए अपना सर अलग से पीटेगा तो एक बार में ही जान ले .... इफ्तिका भी तुझसे प्यार करती है"......ये एक नया बंब फोड दिया राजीव ने मयंक पर जहां इफ्तिका को मयंक दोस्त समझ रहा था वहां भी गलत साबित होता हुआ दिख रहा था ।







"कुछ भी मत बोल यार .... साक्षी की आंखों में देखता हूं तो ऐसा लगता है जैसे उसकी आत्मा को मैंने अपने हाथों से मार दिया हो और भाई रीत की ना के बाद मुझे अंदाजा है की असलियत में इंसान जिंदा होता है बस जान नहीं रहती "........ मयंक ने एक लंबी सांस छोड़ते हुए कहा।







राजीव -"वैसे इफ्तिका के मामले में दिक्कत नहीं होगी तुझे"






"क्यूं"..... मयंक ने खुश‌ होते हुए कहा।






राजीव -"अरे उनके यहां तो शोहर चार शादियां कर सकता है ना "






मयंक ने जैसे ही ये बात सुनी एक मुक्का राजीव की जांग पर जड दिया ।






"भोसडीके तुझे मजाक सूझ रहा है शादी तो मैं रीत से ही करूंगा या फिर किसी से नहीं चाहे कुंवारा ही मर जाऊं"...... मयंक ने राजीव की गर्दन दबाते हुए कहा।







"अरे तू टेंशन ना ले कुंवारा नहीं मरने दुंगा चाहे मुझे तुझको अपनी दुल्हनिया बनाना पडे ....हाहहा".......ये कहते ही राजीव हंसने लगा।







मयंक -"भाई हस मत यार साले अगर तू जो कह रहा है वो सच है तो मैं इफ्तिका से दूर दूर ही रहुंगा अब तो "






"मतलब अपनी अर्थी की तैयारी जल्दी करना चाहता है"..... राजीव ने कहा।






मयंक -"बहनचो सीधे ना बोला जाता तेरे ते"







राजीव -"मतलब ये की जब इंसान को पता चले की उसका प्यार दूर जा रहा है तब ही वो बेचैन होता है तो अगर इफ्तिका को लगा की तू उसकी अनदेखी कर रहा है या उससे दूर जा रहा है तो पहले उसको गुस्सा आए गी और जब लगेगा तू उससे हमेशा के लिए दूर हो जाएगा तो वह तुझसे अपने प्यार का इजहार कर देगी मतलब जिस चीज से तू बचना चाह रहा है वो पहले तो पास आ रही थी पर उससे दूर जाने के चक्कर में वो तेरीतरफ दौडकर आना शुरू कर देगी।"








मयंक -"तो क्या करूं.....साला मैं ही मर जाता हूं "






"भोसडीके फिर मेरी लुगाई कौन बनेगा?"....... राजीव ने कहा।






मयंक ने राजीव की इस बात पर अपना माथा पकड लिया .....






"ठेके पे लेले "....... मयंक ने इतना कहा और अपना सर सीट पर टिका लिया।
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"दादू आपकी पैकिंग हो गई?"...... इफ्तिका ने अपने दादू के कमरे में आते हुए कहा पर जैसे ही उसने देखा दादू फोन पर बात कर रहे हैं तो वह छुप हो गई और खडी रही......






"बडी खुश लग रही हो क्या बात है"....... दादू ने फोन रखते हुए इफ्तिका से कहा।






"आपकी पैकिंग हो गई दादू?".... इफ्तिका ने फिर एक बार सवाल दोहराया।






दादू -"हम नहीं जा रहे बेटा एक काम की वजह से"






"पर आपने कहा था की आप तैयार हैं और छुट्टियां भी तो है यहां घर में रहकर क्या करेंगे "...... इफ्तिका का तो मुंह ही उतर गया था अपने दादूकी बात सुनकर।







"अरे हम से हमारा मतलब मैं है तुम नहीं मेरा जाना मुमकिन नहीं इसका मतलब ये तो नहीं की तुम भी ना जाओ "....... दादू ने आपने पोती के मासूम लटके चेहरे को देखकर कहा।







इफ्तिका ने इस बात अपने दादू से खुशी जाहिर की और वापिस अपने कमरे में चली गई शायद अपनी दोस्त साक्षी को इस बात की खबर देने ।




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"ठीक है कल मिलते हैं"...... साक्षी ने इफ्तिका के साथ दस मिनट बात की जहां उसे इफ्तिका ने बताया की दादू नहीं जा रहे हैं जिसके बाद और भी सामान को लेकर बातचीत होती रही।







"हो गई सारी तैयारी ?".......रोमा ने साक्षी के फोन रखते ही उससे पूछा।






"हां मम्मा "...... साक्षी ने भी मुस्कुराकर कहा और अपने रूम में चली गई।







"आज कितने दिन बाद साक्षी के चेहरे पर खुशी देखी है जब से नानी के यहां गई थी बोलना ही छोड दिया था इस लड़की ने"......रोमा ने आशीष से कहा जो इस वक्त एक फिइल पकडे हुए सोफे पर बैठा था।






आशीष -"मुझे भी ऐसा लग रहा था की साक्षी को एक ट्रिप की जरूरत है बहुत ही बुझी बुझी रहने लगी थी "







"सही कहा आपने घूम आएगी तो ठीक रहेगा"........






आशीष -"और तब तक आप चलेंगी हमारे साथ काम करते करते मजा नहीं आता अगर आप होगीं तो हमारा भी मन लगा रहेगा "
Nice update
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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