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Adultery खलिश

Hell Strom

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जोया तो सच में पूरी बेवकूफ थी, किसने इससे आईबी में भर्ती किया?

एजेंसी वाले छोड़ देते क्या इसको, अगर जो ये किसी और देश में जा कर बस जाती।

खैर लालच में आदमी की बुद्धि चरने चली जाती है। इतना दिमाग एजेंसी के लिए लगती तो जिंदा भी रहती और नाम भी कमा लेती।
:laughing:
Bahut hi badhiya update diya hai Hell Strom bhai.....
Nice and beautiful update.....
Thanks Parkash bhai :five:
Nice and lovely update.....
:thanks:
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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andyking302

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:welcome: back Andy bhai ......thanks for the wonderful reviews accha lga aapko kahani acchi lag rhi hai :dost:
❤️U bro.....

Story ekdam mast hey......
 

Hell Strom

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Update -: 34





"उठ साले "......... राजीव ने मयंक को नींद से उठाते हुए कहा।








मयंक राजीव की आवाज से उठा और आंखें खोलकर आसपास देखा तो समझ आया कि राजीव के घर के गार्डन में सोया हुआ था पर देखने के बाद फिर आंखें बंद करके सो गया। रात को 2 बजे ये घर पर आए थे इसलिए चाची को नहीं उठाया और बहार वाला गेट खोल कर गार्डन में ही सो गये थे अभी सुबह के छः बज रहे थे। वैसे तो इनमें से कोई भी नहीं उठने वाला था पर अवनी ...जो सुबह सुबह गार्डन में आई थी उसने राजीव को उठाया और राजीव ने मयंक को।









"ऐसे नहीं उठेंगे ये अभी बताती हूं"........इतना कहने के साथ ही अवनी दौड़ी और गार्डन में लगे नल को चालू किया और पाइप का मुंह मयंक की तरफ जैसे ही पानी आया तो मयंक हड़बड़ा कर उठा भयंकर गुस्से में पर जैसे ही अवनी के हंसने की आवाज कानों में पड़ी तो फिर वो भी हंसने लगा।








मयंक खड़े होते ही अवनी की तरफ दौड़ा और उसको पकड़कर गुदगुदी करने लगा और उस पर भी पानी चला दिया अवनी भी उसके साथ खेलने लगी ......








"ओफ्फो भईया ये क्या कर दिया आपने मुझे पूरा भिगो दिया ".....अवनी ने अपने दोनों हाथ कमर पर रखते हुए कहा।








"अच्छा जो आपने मेरे साथ किया वो उसका क्या होते हुए आदमी को कोई ऐसे जगाता है क्या ?"....... मयंक ने अपने टी-शर्ट को निचोड़ते हुए कहा जो की पूरी भीग गई थी।








"हीही पर मैं छोटी हूं......अब आपको इसकी सजा मिलेगी"..... अवनी ने अपनी निश्छल मुस्कान दिखाते हुए कहा जैसे कहना चाह रही हो अब मजा आएगा बच्चू ।








"ये क्या हाल बना‌ रखा है तुम लोगो ने.....और तू बिना कपड़ों के क्यूं खड़ा है चल जाकर नहा और कपड़े पहन और अवनी ये क्या है बेटा इतना उधम करना अच्छी बात नहीं चलो आप भी ड्रेस चेंज करो।".......... चाची ने गार्डन में आते ही सबकी क्लास लगा दी सब चुप चाप अंदर जाने लगे तब ही अवनी दौड़ते हुए राजीव के पास गई और उससे बोली।








"मजा आया ना राजीव भईया मयंक भईया को पूरा नहला दिया ना अब अपना वादा नहीं भूलना एक पैकेट चाहिए चाॅकलेट का "...... अवनी ने अपना हाथ आगे करते हुए कहा जिसपर ताली मार कर राजीव को हां कहना था ।








"वाह छिपकली बहुत चालाक है तू तो यार मेरे से अलग गिफ्ट मयंक से अलग गिफ्ट सही है सही है "...... राजीव ने अवनी के हाथ पर ताली मारते हुए कहा।








"मैं छिपकली नहीं हूं"....... अवनी ने गुस्से से कहा।







"अच्छा फिर क्या है"....... राजीव ने उसको गोदी में उठाते हुए कहा।






अवनी और राजीव की बातचीत चलती रही तब तक मयंक नहा चुका था और राजीव के कपड़े पहनकर ही बहार आया ।








"कितने पुराने कपड़े है तेरे रज्जो अगर शरीर टाइट किया तो बाज़ू से फट जायेगी ये शर्ट "...... मयंक ने शर्ट का सबसे ऊपर वाला बटन लगाते हुए कहा वैसे तो शर्ट सही थी पर Biceps पर बुरी तरह से कसी हुई थी।







"शर्ट का साईज तो सही है पर तेरे biceps का साइज़ ज्यादा है"..... राजीव ने तोलिया उठाते हुए कहा।








मयंक -"चल ठीक है मैं जा रहा हूं और एक घंटे बाद आता हूं लेने तुझे कोचिंग भी जाना है हमको"








राजीव -"ओके"







इसके बाद मयंक निकल गया पर जाने से पहले अवनी ने उसको बैठाकर अपनी फरमाइश बताई थी जिसपर मयंक खुशी से हां करता हुआ निकल चला साक्षी के घर।








"गुड मॉर्निंग आंटी"........ मयंक ने रोमा के सामने सोफे पर बैठते हुए कहा जो अखबार पढ़ रही थी।








रोमा -"कल रात को कहां थे?.....और तो और फोन भी बंद "







मयंक -"चाचा के साथ था आंटी और फोन चार्ज नहीं था तो इसलिए बात नहीं हो पाई पर जैसे ही चार्ज किया तो मैंने साक्षी को मैसेज ड्रोप कर दिया था ।"








रोमा -"अब से ऐसा नहीं करना पहले ही बताया करो चलो तुम बैठो मैं नाश्ता लेकर आती हूं साक्षी भी तैयार हो गई होगी वो भी आती होगी ।"








मयंक -"जी आंटी "







इतना कहते ही रोमा किचिन की तरफ बढ़ गई और साक्षी अपने कमरे से बहार आई जिसने आज सूट पहन रखा था हल्के नीले रंग का बाल खुले हुए बहुत ही सुंदर लग रही थी ना जाने कैसे पर मयंक के दिमाग में सबसे पहले दिन वाली साक्षी की झलक आ गई जो जीन्स और टॉप के साथ तीन किलो गुस्सा पहने हुए थी तीन हफ्तों में ही इतना बदलाव।








"आज सलवार सूट कोई खास वजह ?"....... साक्षी जैसे ही मयंक के पास आई तो उसने मज़ाक़ करते हुए पूछा।








साक्षी -"क्यूं सूट पहनना गुनाह है क्या ?"..... साक्षी ने हंसकर पूछा







मयंक -"नहीं नहीं बिल्कुल गुनाह नहीं है बस ये डर बना रहता है कि सामने वाला गुस्ताखी ना करदे"








साक्षी -"मुझसे कहे रहे हो और जो खुद आज टाइट शर्ट पहन रखी है लगता है तुम्हें भी इंदौर की हवा लग गई डोले शोले दिखाने जा रहे हो "








"अरे इसका तो याद ही नहीं रहा मैं अभी आया वो क्या है ना ये मेरे कपड़े नहीं है राजीव के है मैं अभी आया बदल कर ".......इतना कहने के साथ ही मयंक अपने कमरे की तरफ बढ़ गया।








"आज कह ही दूंगी फिर चाहे जो हो ..... लेकिन अगर दोस्ती भी ना रही फिर क्या होगा पता नहीं क्या हो रहा है मेरे साथ "....... साक्षी मयंक को जाता हुआ देख रही थी और खुद से ही बातें कर रही थी अंत में अपने ख्यालों को नकारते हुए खड़ी हुई और खाने की टेबल की तरफ बढ़ गई।









दस मिनट बाद ही सब लोग खाने की टेबल पर थे और सबने नास्ता किया और तब तक इफ्तिका भी आ गई जिसके साथ स्कूटी पर साक्षी कोचिंग के लिए निकल गई और मयंक अपनी बुलट से राजीव के घर ।








"क्या यार रज्जो तू फिर लेट करवाएगा क्या साले आज वो ज्योग्राफी वाली मार लेगी अपनी "........पता नहीं क्यूं पर मयंक आज राजीव पर गुस्सा हो रहा था भले ही झूठा ही सही।








"भाई ना है मेरा ....अपनी रज्जो की बात मान लें बस दस मिनट लेट होगा तू मुझे लाइब्रेरी के बहार छोड़ दियो अब तुझसे छुपाने का फायदा नहीं उस दिन तूने सुना था ना मैंने उसको बेबी कहा था तो अब जब तुझे पता चल गया है तो मदद करदे आज प्लान है हमारा उधर बाइक आ जाएगी मेरे लिए फिर उसको ले जाउंगा बस लाइब्रेरी तक की ही तो बात है।"..... राजीव ने मयंक को मनाते हुए कहा।









मयंक-"साले तूने पहले क्यूं नहीं बताया कि भाभी भी ढूंढ ली तूने"






राजीव -"मेरे भाई उसकी शादी हुए एक साल हो चला "..... राजीव ने हंसते हुए कहा।






मयंक -"क्या !... मै सोच रहा था की ज्यादा गहरा प्यार होगा तुम दोनों में पर ये तो हवस है "









राजीव -"अब क्या है ये कहानी बाद में सुनाता हूं अब तू जा नहीं तो बीस मिनट लेट होगा और साले गडबड ना करियो आज कोई संभालने वाला नहीं होगा तेरे साथ " लाइब्रेरी के बहार उतरते हुए राजीव ने कहा।







मयंक -"देखी जाएगी .....तू मजे कर "







और राजीव को छोड़कर मयंक भी कोचिंग की तरफ हो लिया ....







" मै आए कम इन मेम"....... क्लास के गेट पर आते हुए मयंक ने कहा।







"कम इन एंड सिटी डाउन कुआइटली"......आज मयंक को देखते हुए आज पता नहीं क्यूं आज ज्योग्राफी वाली मेम ने कुछ कहा नहीं और उसको चुपचाप अंदर आने दिया।







मयंक पहले तो चौंक गया पर फिर बिना कुछ कहे अंदर आ गया अंदर आते ही चारों तरफ नजर घुमाई तो एक भी सीट खाली नहीं थी सब पर तीन तीन लोग बैठे हुए थे।








"क्या हुआ मयंक आज मैंने खड़े होने की सजा नहीं दी है तो तुम बैठो सकते हो"....... मयंक को जब मैडम ने खड़ा हुआ देखा तो उससे पूछा।








"मिस सीट ही खाली नहीं है कोई"...... मयंक मैडम की तरफ घूमते हुए कहा।








"वो देखो इफ्तिका और साक्षी दो ही बैठे हैं उस सीट पर बैठो उधर जाके "......मैडम ने एक तरफ








मयंक -"मिस वो लड़कियों की Row है फिर मैं कैसे?"







मैडम -"अब लड़कों के साथ बैठाओ तो झगड़ा करते हो फिर एक ही रास्ता है हमारे पास "






अब मयंक को समझ आया कि क्यों मैडम ने बिना कुछ कहे उसको अंदर आने दिया था। खैर वो जाकर बैठ गया इफ्तिका के बगल से।







"आज राजीव जी नहीं आए मयंक जी "........ इफ्तिका ने मयंक के बैठते ही सवाल किया।









"सिर्फ मयंक ही बोला करो इफ्तिका और राजीव को कुछ काम आ गया तो वो वहां चला गया "........ मयंक ने धीरे से कहा सामने देखते हुए जिससे मैडम को ना‌ लगे वो बात कर रहा है।








ये दिन बहुत ही मुश्किल से कटा था। मयंक का पर वो बिना कुछ कहे बैठा रहा राजीव के बिना उसका मन नहीं लग रहा था क्लास में आज उसने उन दोनों चूतियों को भी इग्नोर किया जो मयंक को चिढ़ाने की कोशिश कर रहे थे किसी स्कूल के बच्चे की तरह और आखिर में क्लास खत्म हुई और सब बहार जाने लगे और मयंक ने भी ब आर आकर जैसे ही अपनी बाइक चालू की तो साक्षी उसके सामने खड़ी थी।







"क्या हुआ साक्षी"........ मयंक ने साक्षी को सामने खड़ा देख गाड़ी बंद करते हुए कहा।







साक्षी -""आज तुम अकेले हो फिर दोनों साथ में ही चलते हैं आखिर जाना तो हमें एक ही घर में हैं।"







मयंक -"आओ‌ बैठो".....किक मारते हुए मयंक ने कहा।





साक्षी तुरंत ही पीछे बैठ गई।







साक्षी -"अब तुम्हारा घाव कैसा है मयंक दर्द होता है क्या ?"







मयंक -"हां अब दर्द नहीं होता और घाव भी भर गया है आज पट्टी उतारनी है बस यही आखरी है टेबलेट तो मैं खाता ही नहीं "







"टेबलेट तो कोई जब खाएगा जब टेबलेट पास होंगी होस्पिटल से आने के बाद तुमने आराम किया ही कितना है और मुझे विश्वास है पूरा की घाव सही नहीं हुआ होगा झूठ बोल रहे हो तुम "....... जैसे ही साक्षी ने मयंक के मुंह से टेबलेट ना खाने वाली बात सुनी तो एकदम से उसको गुस्सा आ गया।








मयंक -"यार गुस्सा क्यूं हो रही हो ठीक है अब "







साक्षी -"अच्छा ठीक है फिर मैं ही हटाऊंगी पट्टी और खुद चैक कर लूंगी ......पर तुम्हें पता है राबी मेम ने कहा है कि मैं और इफ्तिका कोचिंग के बाद भी उनसे डाउट पूछने उनके घर जा सकते हैं।"






मयंक -"ये राबी मेम कौन है?"








साक्षी -"वाह जिसकी रोज डांट खाते हो उसका नाम तो जान लिया होता हीही "








मयंक -"ज्योग्राफी वाली मेम का नाम राबी है......पर तुम उनके घर जाओगी डाउट पूछने अपने घर के पास ही रहती है क्या?"







साक्षी -"घर के पास नहीं घर के सामने बुधू"







"भोसडीके तुझसे बोला था थोड़ा सब्र करना सीख खुद को कन्ट्रोल करना सीख पर नहीं अब हो गया ना मोए मोए और मान उस गांडु दिल की बात "....... मयंक के दिमाग ने उस पर हंसते हुए कहा।








"तुम टेंशन मत लो मयंक भाई कुछ नहीं होगा .....तू गांड़ू किसको बोल रहा है चूतिए"......दिल ने अपनी बेज्जती सुनते ही जबाब दिया ।







दिमाग -"क्या घंटा सही होगा अब तो बस घंटा बजेगा "







दिल -"चुप साले "






"हैलो हैलो सुन रहे हो मयंक".........एक जानी-पहचानी आवाज मयंक को सुनाई दी







मयंक -"यार तुम दोनों लड़ना बाद में पहले कोई इलाज ढूंढो इस विपदा का और बहनचो तुम दोनों की आवाज को क्या हुआ?"







दिमाग -"ये हमारी नहीं साक्षी की आवाज है चूतिए"






ये सुनते ही मयंक होस में आया

"ह ह्हह हां साक्षी क्या बोल रही थी"...... मयंक ने साक्षी से पूछा।






साक्षी -"कहां खोए हुए हो यार मैं कह रही थी तुम और राजीव भी चलना हमारे साथ वो सिर्फ ज्योग्राफी नहीं हिस्ट्री और पोलिटी भी पढ़ाती है"







मयंक -"म्मम मैं.... मैं क्या करूंगा वहां जाकर तुम ही जाना चाहिए तो राजीव को ले जाना "






"क्या करूंगा से क्या मतलब है पढ़ने के लिए जाएंगे तो पढ़ना हमारे साथ और तुम जाओगे हमारे साथ ये पक्का है"...... साक्षी ने आगे झुकते हुए कहा।







"देखुंगा".....बस इतना ही कहा मयंक ने वो अब तक घर आ चुके थे।






************





"बस अब नहीं सह पाऊंगा जो होगा देखा जाएगा।"...... पिछले बीस मिनट से मयंक अपने कमरे के बिस्तर पर लेटा हुआ था आंख बंद किए हुए उसने अपने कपड़े भी नहीं बदले थे अंत में उसने फैसला किया जो होगा देखा जाएगा वो खड़ा होते हुए बाथरूम की तरफ जा ही रहा था की तब ही।







"टक्क ठख ठख"....... दरवाजे पर दस्तक हुई।






"खुला है"...... मयंक ने कहा ।







"तुमने कपडे नहीं बदले चलो अच्छा है पहले पट्टी उतार देती हूं फिर चेंज कर लेना उतारो शर्ट"...... साक्षी ने कमरे में आते हुए कहा।






साक्षी -"अरे अब तो हम दोस्त हैं अब भी शर्मा रहे हो मुझसे"....जब मयंक ने अपनी शर्ट नहीं उतारी तो साक्षी ने एक बार और कहा।







"ऐसी बात नहीं है साक्षी"....... मयंक ने अपनी शर्ट उतारते हुए कहा।







उसके बाद मयंक बिस्तर पर बैठ गया और साक्षी उसकी पट्टी निकालने लगी।






"मयंक एक बात बताओ तुम्हारी गर्लफ्रेंड हैं कोई या लड़की पसंद है"....... साक्षी ने एकदम से ऐसा सवाल पूछा मयंक को कतई इसकी आशंका नहीं थी पहले तो वह चौंका फिर सहज होते हुए बोला।






"और ये तुम क्यूं पूछ रही हो"






साक्षी -"अरे दोस्त हूं तुम्हारी तो तुम्हारे बारे में सब खबर तो होनी चाहिए ना"






मयंक -"ये भी ठीक है....मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है यार "






साक्षी -"अरे इतने हैंडसम हो कोन्फीडेंट हो फिर भी"





मयंक -"boys स्कूल में पढ़ा हूं बात करना नहीं आता मुझे तुम गर्लफ्रेंड की बात कर रही हो"






साक्षी -"मुझसे भी तो बात करते हो "






मयंक -"अब हम तो दोस्त हैं ना और ऐसा नहीं है की लड़की कभी आई नहीं जिंदगी में बस मैं ही दूर दूर भागता रहा "






साक्षी -"कोई पसंद तो होगी?"






मयंक -"मेरी जिंदगी में लव स्टोरी को बताने के लिए सबसे अच्छा उदाहरण है सोलर सिस्टम "







साक्षी -"अच्छा जरा मुझे भी समझाओ वो कैसे "







मयंक -"मानलो मैं सूरज हूं और लड़कियां प्लेनेट तो ऐसा है पहले तो वो मेरे आस-पास आना चाहती हैं और जब पता चलता है की दूर देखने पर चमकने वाला सूरज पास से देखने पर जलता हुआ महसूस होता है तो बस गर्मी सहन ना कर पाने के चलते दूर चली जाती हैं"








"हमम ये तो बहुत गंभीर समस्या है "...... साक्षी ने अपने चेहरे पर झूठी हंसी लाते हुए कहा।








"पर तुम्हें पता है साक्षी पिछले कुछ संज्ञेय से मेरी हालत Pluto जैसी हो गई है सूरज से ज्यादा"..... मयंक ने हंसते हुए कहा।







"फिर कभी बताऊंगा.....अभी मुझे कपड़े चेंज करने है और हेल्प के लिए थैंक्स"....... मयंक ने खड़े होते हुए कहा।






"थैंक्स नहीं चाहिए एक बार और चले क्या फालूदा खाने ?"..... साक्षी ने हंसते हुए कहा।







"पहली बार की निशानी मिटी नहीं है अभी "..... मयंक ने भी हंसकर कहा और बाथरूम में चला गया उसके जाते ही साक्षी ने एक लंबी सांस छोड़ी और कमरे से बहार जाने लगी।






 

Hell Strom

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जोया तो सच में पूरी बेवकूफ थी, किसने इससे आईबी में भर्ती किया?

एजेंसी वाले छोड़ देते क्या इसको, अगर जो ये किसी और देश में जा कर बस जाती।

खैर लालच में आदमी की बुद्धि चरने चली जाती है। इतना दिमाग एजेंसी के लिए लगती तो जिंदा भी रहती और नाम भी कमा लेती।

Bahut hi badhiya update diya hai Hell Strom bhai.....
Nice and beautiful update.....

Nice and lovely update.....


Nice and superb update....

Bara hi majedaar update tha bhai ekdamm lallantop 👌👌👌👌👌👌👌👌👌👍👍👍👍👍👍👍

Nice update.....

Nice update.....


Ola-vristhi bhaiya. Agley update ka besabri se intjaar rahega. :ball:

❤️U bro.....

Story ekdam mast hey......
Update posted :dost:
 

Riky007

उड़ते पंछी का ठिकाना, मेरा न कोई जहां...
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Update -: 34





"उठ साले "......... राजीव ने मयंक को नींद से उठाते हुए कहा।








मयंक राजीव की आवाज से उठा और आंखें खोलकर आसपास देखा तो समझ आया कि राजीव के घर के गार्डन में सोया हुआ था पर देखने के बाद फिर आंखें बंद करके सो गया। रात को 2 बजे ये घर पर आए थे इसलिए चाची को नहीं उठाया और बहार वाला गेट खोल कर गार्डन में ही सो गये थे अभी सुबह के छः बज रहे थे। वैसे तो इनमें से कोई भी नहीं उठने वाला था पर अवनी ...जो सुबह सुबह गार्डन में आई थी उसने राजीव को उठाया और राजीव ने मयंक को।









"ऐसे नहीं उठेंगे ये अभी बताती हूं"........इतना कहने के साथ ही अवनी दौड़ी और गार्डन में लगे नल को चालू किया और पाइप का मुंह मयंक की तरफ जैसे ही पानी आया तो मयंक हड़बड़ा कर उठा भयंकर गुस्से में पर जैसे ही अवनी के हंसने की आवाज कानों में पड़ी तो फिर वो भी हंसने लगा।








मयंक खड़े होते ही अवनी की तरफ दौड़ा और उसको पकड़कर गुदगुदी करने लगा और उस पर भी पानी चला दिया अवनी भी उसके साथ खेलने लगी ......








"ओफ्फो भईया ये क्या कर दिया आपने मुझे पूरा भिगो दिया ".....अवनी ने अपने दोनों हाथ कमर पर रखते हुए कहा।








"अच्छा जो आपने मेरे साथ किया वो उसका क्या होते हुए आदमी को कोई ऐसे जगाता है क्या ?"....... मयंक ने अपने टी-शर्ट को निचोड़ते हुए कहा जो की पूरी भीग गई थी।








"हीही पर मैं छोटी हूं......अब आपको इसकी सजा मिलेगी"..... अवनी ने अपनी निश्छल मुस्कान दिखाते हुए कहा जैसे कहना चाह रही हो अब मजा आएगा बच्चू ।








"ये क्या हाल बना‌ रखा है तुम लोगो ने.....और तू बिना कपड़ों के क्यूं खड़ा है चल जाकर नहा और कपड़े पहन और अवनी ये क्या है बेटा इतना उधम करना अच्छी बात नहीं चलो आप भी ड्रेस चेंज करो।".......... चाची ने गार्डन में आते ही सबकी क्लास लगा दी सब चुप चाप अंदर जाने लगे तब ही अवनी दौड़ते हुए राजीव के पास गई और उससे बोली।








"मजा आया ना राजीव भईया मयंक भईया को पूरा नहला दिया ना अब अपना वादा नहीं भूलना एक पैकेट चाहिए चाॅकलेट का "...... अवनी ने अपना हाथ आगे करते हुए कहा जिसपर ताली मार कर राजीव को हां कहना था ।








"वाह छिपकली बहुत चालाक है तू तो यार मेरे से अलग गिफ्ट मयंक से अलग गिफ्ट सही है सही है "...... राजीव ने अवनी के हाथ पर ताली मारते हुए कहा।








"मैं छिपकली नहीं हूं"....... अवनी ने गुस्से से कहा।







"अच्छा फिर क्या है"....... राजीव ने उसको गोदी में उठाते हुए कहा।






अवनी और राजीव की बातचीत चलती रही तब तक मयंक नहा चुका था और राजीव के कपड़े पहनकर ही बहार आया ।








"कितने पुराने कपड़े है तेरे रज्जो अगर शरीर टाइट किया तो बाज़ू से फट जायेगी ये शर्ट "...... मयंक ने शर्ट का सबसे ऊपर वाला बटन लगाते हुए कहा वैसे तो शर्ट सही थी पर Biceps पर बुरी तरह से कसी हुई थी।







"शर्ट का साईज तो सही है पर तेरे biceps का साइज़ ज्यादा है"..... राजीव ने तोलिया उठाते हुए कहा।








मयंक -"चल ठीक है मैं जा रहा हूं और एक घंटे बाद आता हूं लेने तुझे कोचिंग भी जाना है हमको"








राजीव -"ओके"







इसके बाद मयंक निकल गया पर जाने से पहले अवनी ने उसको बैठाकर अपनी फरमाइश बताई थी जिसपर मयंक खुशी से हां करता हुआ निकल चला साक्षी के घर।








"गुड मॉर्निंग आंटी"........ मयंक ने रोमा के सामने सोफे पर बैठते हुए कहा जो अखबार पढ़ रही थी।








रोमा -"कल रात को कहां थे?.....और तो और फोन भी बंद "







मयंक -"चाचा के साथ था आंटी और फोन चार्ज नहीं था तो इसलिए बात नहीं हो पाई पर जैसे ही चार्ज किया तो मैंने साक्षी को मैसेज ड्रोप कर दिया था ।"








रोमा -"अब से ऐसा नहीं करना पहले ही बताया करो चलो तुम बैठो मैं नाश्ता लेकर आती हूं साक्षी भी तैयार हो गई होगी वो भी आती होगी ।"








मयंक -"जी आंटी "







इतना कहते ही रोमा किचिन की तरफ बढ़ गई और साक्षी अपने कमरे से बहार आई जिसने आज सूट पहन रखा था हल्के नीले रंग का बाल खुले हुए बहुत ही सुंदर लग रही थी ना जाने कैसे पर मयंक के दिमाग में सबसे पहले दिन वाली साक्षी की झलक आ गई जो जीन्स और टॉप के साथ तीन किलो गुस्सा पहने हुए थी तीन हफ्तों में ही इतना बदलाव।








"आज सलवार सूट कोई खास वजह ?"....... साक्षी जैसे ही मयंक के पास आई तो उसने मज़ाक़ करते हुए पूछा।








साक्षी -"क्यूं सूट पहनना गुनाह है क्या ?"..... साक्षी ने हंसकर पूछा







मयंक -"नहीं नहीं बिल्कुल गुनाह नहीं है बस ये डर बना रहता है कि सामने वाला गुस्ताखी ना करदे"








साक्षी -"मुझसे कहे रहे हो और जो खुद आज टाइट शर्ट पहन रखी है लगता है तुम्हें भी इंदौर की हवा लग गई डोले शोले दिखाने जा रहे हो "








"अरे इसका तो याद ही नहीं रहा मैं अभी आया वो क्या है ना ये मेरे कपड़े नहीं है राजीव के है मैं अभी आया बदल कर ".......इतना कहने के साथ ही मयंक अपने कमरे की तरफ बढ़ गया।








"आज कह ही दूंगी फिर चाहे जो हो ..... लेकिन अगर दोस्ती भी ना रही फिर क्या होगा पता नहीं क्या हो रहा है मेरे साथ "....... साक्षी मयंक को जाता हुआ देख रही थी और खुद से ही बातें कर रही थी अंत में अपने ख्यालों को नकारते हुए खड़ी हुई और खाने की टेबल की तरफ बढ़ गई।









दस मिनट बाद ही सब लोग खाने की टेबल पर थे और सबने नास्ता किया और तब तक इफ्तिका भी आ गई जिसके साथ स्कूटी पर साक्षी कोचिंग के लिए निकल गई और मयंक अपनी बुलट से राजीव के घर ।








"क्या यार रज्जो तू फिर लेट करवाएगा क्या साले आज वो ज्योग्राफी वाली मार लेगी अपनी "........पता नहीं क्यूं पर मयंक आज राजीव पर गुस्सा हो रहा था भले ही झूठा ही सही।








"भाई ना है मेरा ....अपनी रज्जो की बात मान लें बस दस मिनट लेट होगा तू मुझे लाइब्रेरी के बहार छोड़ दियो अब तुझसे छुपाने का फायदा नहीं उस दिन तूने सुना था ना मैंने उसको बेबी कहा था तो अब जब तुझे पता चल गया है तो मदद करदे आज प्लान है हमारा उधर बाइक आ जाएगी मेरे लिए फिर उसको ले जाउंगा बस लाइब्रेरी तक की ही तो बात है।"..... राजीव ने मयंक को मनाते हुए कहा।









मयंक-"साले तूने पहले क्यूं नहीं बताया कि भाभी भी ढूंढ ली तूने"






राजीव -"मेरे भाई उसकी शादी हुए एक साल हो चला "..... राजीव ने हंसते हुए कहा।






मयंक -"क्या !... मै सोच रहा था की ज्यादा गहरा प्यार होगा तुम दोनों में पर ये तो हवस है "









राजीव -"अब क्या है ये कहानी बाद में सुनाता हूं अब तू जा नहीं तो बीस मिनट लेट होगा और साले गडबड ना करियो आज कोई संभालने वाला नहीं होगा तेरे साथ " लाइब्रेरी के बहार उतरते हुए राजीव ने कहा।







मयंक -"देखी जाएगी .....तू मजे कर "







और राजीव को छोड़कर मयंक भी कोचिंग की तरफ हो लिया ....







" मै आए कम इन मेम"....... क्लास के गेट पर आते हुए मयंक ने कहा।







"कम इन एंड सिटी डाउन कुआइटली"......आज मयंक को देखते हुए आज पता नहीं क्यूं आज ज्योग्राफी वाली मेम ने कुछ कहा नहीं और उसको चुपचाप अंदर आने दिया।







मयंक पहले तो चौंक गया पर फिर बिना कुछ कहे अंदर आ गया अंदर आते ही चारों तरफ नजर घुमाई तो एक भी सीट खाली नहीं थी सब पर तीन तीन लोग बैठे हुए थे।








"क्या हुआ मयंक आज मैंने खड़े होने की सजा नहीं दी है तो तुम बैठो सकते हो"....... मयंक को जब मैडम ने खड़ा हुआ देखा तो उससे पूछा।








"मिस सीट ही खाली नहीं है कोई"...... मयंक मैडम की तरफ घूमते हुए कहा।








"वो देखो इफ्तिका और साक्षी दो ही बैठे हैं उस सीट पर बैठो उधर जाके "......मैडम ने एक तरफ








मयंक -"मिस वो लड़कियों की Row है फिर मैं कैसे?"







मैडम -"अब लड़कों के साथ बैठाओ तो झगड़ा करते हो फिर एक ही रास्ता है हमारे पास "






अब मयंक को समझ आया कि क्यों मैडम ने बिना कुछ कहे उसको अंदर आने दिया था। खैर वो जाकर बैठ गया इफ्तिका के बगल से।







"आज राजीव जी नहीं आए मयंक जी "........ इफ्तिका ने मयंक के बैठते ही सवाल किया।









"सिर्फ मयंक ही बोला करो इफ्तिका और राजीव को कुछ काम आ गया तो वो वहां चला गया "........ मयंक ने धीरे से कहा सामने देखते हुए जिससे मैडम को ना‌ लगे वो बात कर रहा है।








ये दिन बहुत ही मुश्किल से कटा था। मयंक का पर वो बिना कुछ कहे बैठा रहा राजीव के बिना उसका मन नहीं लग रहा था क्लास में आज उसने उन दोनों चूतियों को भी इग्नोर किया जो मयंक को चिढ़ाने की कोशिश कर रहे थे किसी स्कूल के बच्चे की तरह और आखिर में क्लास खत्म हुई और सब बहार जाने लगे और मयंक ने भी ब आर आकर जैसे ही अपनी बाइक चालू की तो साक्षी उसके सामने खड़ी थी।







"क्या हुआ साक्षी"........ मयंक ने साक्षी को सामने खड़ा देख गाड़ी बंद करते हुए कहा।







साक्षी -""आज तुम अकेले हो फिर दोनों साथ में ही चलते हैं आखिर जाना तो हमें एक ही घर में हैं।"







मयंक -"आओ‌ बैठो".....किक मारते हुए मयंक ने कहा।





साक्षी तुरंत ही पीछे बैठ गई।







साक्षी -"अब तुम्हारा घाव कैसा है मयंक दर्द होता है क्या ?"







मयंक -"हां अब दर्द नहीं होता और घाव भी भर गया है आज पट्टी उतारनी है बस यही आखरी है टेबलेट तो मैं खाता ही नहीं "







"टेबलेट तो कोई जब खाएगा जब टेबलेट पास होंगी होस्पिटल से आने के बाद तुमने आराम किया ही कितना है और मुझे विश्वास है पूरा की घाव सही नहीं हुआ होगा झूठ बोल रहे हो तुम "....... जैसे ही साक्षी ने मयंक के मुंह से टेबलेट ना खाने वाली बात सुनी तो एकदम से उसको गुस्सा आ गया।








मयंक -"यार गुस्सा क्यूं हो रही हो ठीक है अब "







साक्षी -"अच्छा ठीक है फिर मैं ही हटाऊंगी पट्टी और खुद चैक कर लूंगी ......पर तुम्हें पता है राबी मेम ने कहा है कि मैं और इफ्तिका कोचिंग के बाद भी उनसे डाउट पूछने उनके घर जा सकते हैं।"






मयंक -"ये राबी मेम कौन है?"








साक्षी -"वाह जिसकी रोज डांट खाते हो उसका नाम तो जान लिया होता हीही "








मयंक -"ज्योग्राफी वाली मेम का नाम राबी है......पर तुम उनके घर जाओगी डाउट पूछने अपने घर के पास ही रहती है क्या?"







साक्षी -"घर के पास नहीं घर के सामने बुधू"







"भोसडीके तुझसे बोला था थोड़ा सब्र करना सीख खुद को कन्ट्रोल करना सीख पर नहीं अब हो गया ना मोए मोए और मान उस गांडु दिल की बात "....... मयंक के दिमाग ने उस पर हंसते हुए कहा।








"तुम टेंशन मत लो मयंक भाई कुछ नहीं होगा .....तू गांड़ू किसको बोल रहा है चूतिए"......दिल ने अपनी बेज्जती सुनते ही जबाब दिया ।







दिमाग -"क्या घंटा सही होगा अब तो बस घंटा बजेगा "







दिल -"चुप साले "






"हैलो हैलो सुन रहे हो मयंक".........एक जानी-पहचानी आवाज मयंक को सुनाई दी







मयंक -"यार तुम दोनों लड़ना बाद में पहले कोई इलाज ढूंढो इस विपदा का और बहनचो तुम दोनों की आवाज को क्या हुआ?"







दिमाग -"ये हमारी नहीं साक्षी की आवाज है चूतिए"






ये सुनते ही मयंक होस में आया

"ह ह्हह हां साक्षी क्या बोल रही थी"...... मयंक ने साक्षी से पूछा।






साक्षी -"कहां खोए हुए हो यार मैं कह रही थी तुम और राजीव भी चलना हमारे साथ वो सिर्फ ज्योग्राफी नहीं हिस्ट्री और पोलिटी भी पढ़ाती है"







मयंक -"म्मम मैं.... मैं क्या करूंगा वहां जाकर तुम ही जाना चाहिए तो राजीव को ले जाना "






"क्या करूंगा से क्या मतलब है पढ़ने के लिए जाएंगे तो पढ़ना हमारे साथ और तुम जाओगे हमारे साथ ये पक्का है"...... साक्षी ने आगे झुकते हुए कहा।







"देखुंगा".....बस इतना ही कहा मयंक ने वो अब तक घर आ चुके थे।






************





"बस अब नहीं सह पाऊंगा जो होगा देखा जाएगा।"...... पिछले बीस मिनट से मयंक अपने कमरे के बिस्तर पर लेटा हुआ था आंख बंद किए हुए उसने अपने कपड़े भी नहीं बदले थे अंत में उसने फैसला किया जो होगा देखा जाएगा वो खड़ा होते हुए बाथरूम की तरफ जा ही रहा था की तब ही।







"टक्क ठख ठख"....... दरवाजे पर दस्तक हुई।






"खुला है"...... मयंक ने कहा ।







"तुमने कपडे नहीं बदले चलो अच्छा है पहले पट्टी उतार देती हूं फिर चेंज कर लेना उतारो शर्ट"...... साक्षी ने कमरे में आते हुए कहा।






साक्षी -"अरे अब तो हम दोस्त हैं अब भी शर्मा रहे हो मुझसे"....जब मयंक ने अपनी शर्ट नहीं उतारी तो साक्षी ने एक बार और कहा।







"ऐसी बात नहीं है साक्षी"....... मयंक ने अपनी शर्ट उतारते हुए कहा।







उसके बाद मयंक बिस्तर पर बैठ गया और साक्षी उसकी पट्टी निकालने लगी।






"मयंक एक बात बताओ तुम्हारी गर्लफ्रेंड हैं कोई या लड़की पसंद है"....... साक्षी ने एकदम से ऐसा सवाल पूछा मयंक को कतई इसकी आशंका नहीं थी पहले तो वह चौंका फिर सहज होते हुए बोला।






"और ये तुम क्यूं पूछ रही हो"






साक्षी -"अरे दोस्त हूं तुम्हारी तो तुम्हारे बारे में सब खबर तो होनी चाहिए ना"






मयंक -"ये भी ठीक है....मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है यार "






साक्षी -"अरे इतने हैंडसम हो कोन्फीडेंट हो फिर भी"





मयंक -"boys स्कूल में पढ़ा हूं बात करना नहीं आता मुझे तुम गर्लफ्रेंड की बात कर रही हो"






साक्षी -"मुझसे भी तो बात करते हो "






मयंक -"अब हम तो दोस्त हैं ना और ऐसा नहीं है की लड़की कभी आई नहीं जिंदगी में बस मैं ही दूर दूर भागता रहा "






साक्षी -"कोई पसंद तो होगी?"






मयंक -"मेरी जिंदगी में लव स्टोरी को बताने के लिए सबसे अच्छा उदाहरण है सोलर सिस्टम "







साक्षी -"अच्छा जरा मुझे भी समझाओ वो कैसे "







मयंक -"मानलो मैं सूरज हूं और लड़कियां प्लेनेट तो ऐसा है पहले तो वो मेरे आस-पास आना चाहती हैं और जब पता चलता है की दूर देखने पर चमकने वाला सूरज पास से देखने पर जलता हुआ महसूस होता है तो बस गर्मी सहन ना कर पाने के चलते दूर चली जाती हैं"








"हमम ये तो बहुत गंभीर समस्या है "...... साक्षी ने अपने चेहरे पर झूठी हंसी लाते हुए कहा।








"पर तुम्हें पता है साक्षी पिछले कुछ संज्ञेय से मेरी हालत Pluto जैसी हो गई है सूरज से ज्यादा"..... मयंक ने हंसते हुए कहा।







"फिर कभी बताऊंगा.....अभी मुझे कपड़े चेंज करने है और हेल्प के लिए थैंक्स"....... मयंक ने खड़े होते हुए कहा।






"थैंक्स नहीं चाहिए एक बार और चले क्या फालूदा खाने ?"..... साक्षी ने हंसते हुए कहा।







"पहली बार की निशानी मिटी नहीं है अभी "..... मयंक ने भी हंसकर कहा और बाथरूम में चला गया उसके जाते ही साक्षी ने एक लंबी सांस छोड़ी और कमरे से बहार जाने लगी।
कहीं न फिर देर हो जाए....

साक्षी की जल्दी करो, वरना अपना हीरो का


दिल जिस पे आ गया, वो तेरी ही है सहेली


😜😜


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"उठ साले "......... राजीव ने मयंक को नींद से उठाते हुए कहा।








मयंक राजीव की आवाज से उठा और आंखें खोलकर आसपास देखा तो समझ आया कि राजीव के घर के गार्डन में सोया हुआ था पर देखने के बाद फिर आंखें बंद करके सो गया। रात को 2 बजे ये घर पर आए थे इसलिए चाची को नहीं उठाया और बहार वाला गेट खोल कर गार्डन में ही सो गये थे अभी सुबह के छः बज रहे थे। वैसे तो इनमें से कोई भी नहीं उठने वाला था पर अवनी ...जो सुबह सुबह गार्डन में आई थी उसने राजीव को उठाया और राजीव ने मयंक को।









"ऐसे नहीं उठेंगे ये अभी बताती हूं"........इतना कहने के साथ ही अवनी दौड़ी और गार्डन में लगे नल को चालू किया और पाइप का मुंह मयंक की तरफ जैसे ही पानी आया तो मयंक हड़बड़ा कर उठा भयंकर गुस्से में पर जैसे ही अवनी के हंसने की आवाज कानों में पड़ी तो फिर वो भी हंसने लगा।








मयंक खड़े होते ही अवनी की तरफ दौड़ा और उसको पकड़कर गुदगुदी करने लगा और उस पर भी पानी चला दिया अवनी भी उसके साथ खेलने लगी ......








"ओफ्फो भईया ये क्या कर दिया आपने मुझे पूरा भिगो दिया ".....अवनी ने अपने दोनों हाथ कमर पर रखते हुए कहा।








"अच्छा जो आपने मेरे साथ किया वो उसका क्या होते हुए आदमी को कोई ऐसे जगाता है क्या ?"....... मयंक ने अपने टी-शर्ट को निचोड़ते हुए कहा जो की पूरी भीग गई थी।








"हीही पर मैं छोटी हूं......अब आपको इसकी सजा मिलेगी"..... अवनी ने अपनी निश्छल मुस्कान दिखाते हुए कहा जैसे कहना चाह रही हो अब मजा आएगा बच्चू ।








"ये क्या हाल बना‌ रखा है तुम लोगो ने.....और तू बिना कपड़ों के क्यूं खड़ा है चल जाकर नहा और कपड़े पहन और अवनी ये क्या है बेटा इतना उधम करना अच्छी बात नहीं चलो आप भी ड्रेस चेंज करो।".......... चाची ने गार्डन में आते ही सबकी क्लास लगा दी सब चुप चाप अंदर जाने लगे तब ही अवनी दौड़ते हुए राजीव के पास गई और उससे बोली।








"मजा आया ना राजीव भईया मयंक भईया को पूरा नहला दिया ना अब अपना वादा नहीं भूलना एक पैकेट चाहिए चाॅकलेट का "...... अवनी ने अपना हाथ आगे करते हुए कहा जिसपर ताली मार कर राजीव को हां कहना था ।








"वाह छिपकली बहुत चालाक है तू तो यार मेरे से अलग गिफ्ट मयंक से अलग गिफ्ट सही है सही है "...... राजीव ने अवनी के हाथ पर ताली मारते हुए कहा।








"मैं छिपकली नहीं हूं"....... अवनी ने गुस्से से कहा।







"अच्छा फिर क्या है"....... राजीव ने उसको गोदी में उठाते हुए कहा।






अवनी और राजीव की बातचीत चलती रही तब तक मयंक नहा चुका था और राजीव के कपड़े पहनकर ही बहार आया ।








"कितने पुराने कपड़े है तेरे रज्जो अगर शरीर टाइट किया तो बाज़ू से फट जायेगी ये शर्ट "...... मयंक ने शर्ट का सबसे ऊपर वाला बटन लगाते हुए कहा वैसे तो शर्ट सही थी पर Biceps पर बुरी तरह से कसी हुई थी।







"शर्ट का साईज तो सही है पर तेरे biceps का साइज़ ज्यादा है"..... राजीव ने तोलिया उठाते हुए कहा।








मयंक -"चल ठीक है मैं जा रहा हूं और एक घंटे बाद आता हूं लेने तुझे कोचिंग भी जाना है हमको"








राजीव -"ओके"







इसके बाद मयंक निकल गया पर जाने से पहले अवनी ने उसको बैठाकर अपनी फरमाइश बताई थी जिसपर मयंक खुशी से हां करता हुआ निकल चला साक्षी के घर।








"गुड मॉर्निंग आंटी"........ मयंक ने रोमा के सामने सोफे पर बैठते हुए कहा जो अखबार पढ़ रही थी।








रोमा -"कल रात को कहां थे?.....और तो और फोन भी बंद "







मयंक -"चाचा के साथ था आंटी और फोन चार्ज नहीं था तो इसलिए बात नहीं हो पाई पर जैसे ही चार्ज किया तो मैंने साक्षी को मैसेज ड्रोप कर दिया था ।"








रोमा -"अब से ऐसा नहीं करना पहले ही बताया करो चलो तुम बैठो मैं नाश्ता लेकर आती हूं साक्षी भी तैयार हो गई होगी वो भी आती होगी ।"








मयंक -"जी आंटी "







इतना कहते ही रोमा किचिन की तरफ बढ़ गई और साक्षी अपने कमरे से बहार आई जिसने आज सूट पहन रखा था हल्के नीले रंग का बाल खुले हुए बहुत ही सुंदर लग रही थी ना जाने कैसे पर मयंक के दिमाग में सबसे पहले दिन वाली साक्षी की झलक आ गई जो जीन्स और टॉप के साथ तीन किलो गुस्सा पहने हुए थी तीन हफ्तों में ही इतना बदलाव।








"आज सलवार सूट कोई खास वजह ?"....... साक्षी जैसे ही मयंक के पास आई तो उसने मज़ाक़ करते हुए पूछा।








साक्षी -"क्यूं सूट पहनना गुनाह है क्या ?"..... साक्षी ने हंसकर पूछा







मयंक -"नहीं नहीं बिल्कुल गुनाह नहीं है बस ये डर बना रहता है कि सामने वाला गुस्ताखी ना करदे"








साक्षी -"मुझसे कहे रहे हो और जो खुद आज टाइट शर्ट पहन रखी है लगता है तुम्हें भी इंदौर की हवा लग गई डोले शोले दिखाने जा रहे हो "








"अरे इसका तो याद ही नहीं रहा मैं अभी आया वो क्या है ना ये मेरे कपड़े नहीं है राजीव के है मैं अभी आया बदल कर ".......इतना कहने के साथ ही मयंक अपने कमरे की तरफ बढ़ गया।








"आज कह ही दूंगी फिर चाहे जो हो ..... लेकिन अगर दोस्ती भी ना रही फिर क्या होगा पता नहीं क्या हो रहा है मेरे साथ "....... साक्षी मयंक को जाता हुआ देख रही थी और खुद से ही बातें कर रही थी अंत में अपने ख्यालों को नकारते हुए खड़ी हुई और खाने की टेबल की तरफ बढ़ गई।









दस मिनट बाद ही सब लोग खाने की टेबल पर थे और सबने नास्ता किया और तब तक इफ्तिका भी आ गई जिसके साथ स्कूटी पर साक्षी कोचिंग के लिए निकल गई और मयंक अपनी बुलट से राजीव के घर ।








"क्या यार रज्जो तू फिर लेट करवाएगा क्या साले आज वो ज्योग्राफी वाली मार लेगी अपनी "........पता नहीं क्यूं पर मयंक आज राजीव पर गुस्सा हो रहा था भले ही झूठा ही सही।








"भाई ना है मेरा ....अपनी रज्जो की बात मान लें बस दस मिनट लेट होगा तू मुझे लाइब्रेरी के बहार छोड़ दियो अब तुझसे छुपाने का फायदा नहीं उस दिन तूने सुना था ना मैंने उसको बेबी कहा था तो अब जब तुझे पता चल गया है तो मदद करदे आज प्लान है हमारा उधर बाइक आ जाएगी मेरे लिए फिर उसको ले जाउंगा बस लाइब्रेरी तक की ही तो बात है।"..... राजीव ने मयंक को मनाते हुए कहा।









मयंक-"साले तूने पहले क्यूं नहीं बताया कि भाभी भी ढूंढ ली तूने"






राजीव -"मेरे भाई उसकी शादी हुए एक साल हो चला "..... राजीव ने हंसते हुए कहा।






मयंक -"क्या !... मै सोच रहा था की ज्यादा गहरा प्यार होगा तुम दोनों में पर ये तो हवस है "









राजीव -"अब क्या है ये कहानी बाद में सुनाता हूं अब तू जा नहीं तो बीस मिनट लेट होगा और साले गडबड ना करियो आज कोई संभालने वाला नहीं होगा तेरे साथ " लाइब्रेरी के बहार उतरते हुए राजीव ने कहा।







मयंक -"देखी जाएगी .....तू मजे कर "







और राजीव को छोड़कर मयंक भी कोचिंग की तरफ हो लिया ....







" मै आए कम इन मेम"....... क्लास के गेट पर आते हुए मयंक ने कहा।







"कम इन एंड सिटी डाउन कुआइटली"......आज मयंक को देखते हुए आज पता नहीं क्यूं आज ज्योग्राफी वाली मेम ने कुछ कहा नहीं और उसको चुपचाप अंदर आने दिया।







मयंक पहले तो चौंक गया पर फिर बिना कुछ कहे अंदर आ गया अंदर आते ही चारों तरफ नजर घुमाई तो एक भी सीट खाली नहीं थी सब पर तीन तीन लोग बैठे हुए थे।








"क्या हुआ मयंक आज मैंने खड़े होने की सजा नहीं दी है तो तुम बैठो सकते हो"....... मयंक को जब मैडम ने खड़ा हुआ देखा तो उससे पूछा।








"मिस सीट ही खाली नहीं है कोई"...... मयंक मैडम की तरफ घूमते हुए कहा।








"वो देखो इफ्तिका और साक्षी दो ही बैठे हैं उस सीट पर बैठो उधर जाके "......मैडम ने एक तरफ








मयंक -"मिस वो लड़कियों की Row है फिर मैं कैसे?"







मैडम -"अब लड़कों के साथ बैठाओ तो झगड़ा करते हो फिर एक ही रास्ता है हमारे पास "






अब मयंक को समझ आया कि क्यों मैडम ने बिना कुछ कहे उसको अंदर आने दिया था। खैर वो जाकर बैठ गया इफ्तिका के बगल से।







"आज राजीव जी नहीं आए मयंक जी "........ इफ्तिका ने मयंक के बैठते ही सवाल किया।









"सिर्फ मयंक ही बोला करो इफ्तिका और राजीव को कुछ काम आ गया तो वो वहां चला गया "........ मयंक ने धीरे से कहा सामने देखते हुए जिससे मैडम को ना‌ लगे वो बात कर रहा है।








ये दिन बहुत ही मुश्किल से कटा था। मयंक का पर वो बिना कुछ कहे बैठा रहा राजीव के बिना उसका मन नहीं लग रहा था क्लास में आज उसने उन दोनों चूतियों को भी इग्नोर किया जो मयंक को चिढ़ाने की कोशिश कर रहे थे किसी स्कूल के बच्चे की तरह और आखिर में क्लास खत्म हुई और सब बहार जाने लगे और मयंक ने भी ब आर आकर जैसे ही अपनी बाइक चालू की तो साक्षी उसके सामने खड़ी थी।







"क्या हुआ साक्षी"........ मयंक ने साक्षी को सामने खड़ा देख गाड़ी बंद करते हुए कहा।







साक्षी -""आज तुम अकेले हो फिर दोनों साथ में ही चलते हैं आखिर जाना तो हमें एक ही घर में हैं।"







मयंक -"आओ‌ बैठो".....किक मारते हुए मयंक ने कहा।





साक्षी तुरंत ही पीछे बैठ गई।







साक्षी -"अब तुम्हारा घाव कैसा है मयंक दर्द होता है क्या ?"







मयंक -"हां अब दर्द नहीं होता और घाव भी भर गया है आज पट्टी उतारनी है बस यही आखरी है टेबलेट तो मैं खाता ही नहीं "







"टेबलेट तो कोई जब खाएगा जब टेबलेट पास होंगी होस्पिटल से आने के बाद तुमने आराम किया ही कितना है और मुझे विश्वास है पूरा की घाव सही नहीं हुआ होगा झूठ बोल रहे हो तुम "....... जैसे ही साक्षी ने मयंक के मुंह से टेबलेट ना खाने वाली बात सुनी तो एकदम से उसको गुस्सा आ गया।








मयंक -"यार गुस्सा क्यूं हो रही हो ठीक है अब "







साक्षी -"अच्छा ठीक है फिर मैं ही हटाऊंगी पट्टी और खुद चैक कर लूंगी ......पर तुम्हें पता है राबी मेम ने कहा है कि मैं और इफ्तिका कोचिंग के बाद भी उनसे डाउट पूछने उनके घर जा सकते हैं।"






मयंक -"ये राबी मेम कौन है?"








साक्षी -"वाह जिसकी रोज डांट खाते हो उसका नाम तो जान लिया होता हीही "








मयंक -"ज्योग्राफी वाली मेम का नाम राबी है......पर तुम उनके घर जाओगी डाउट पूछने अपने घर के पास ही रहती है क्या?"







साक्षी -"घर के पास नहीं घर के सामने बुधू"







"भोसडीके तुझसे बोला था थोड़ा सब्र करना सीख खुद को कन्ट्रोल करना सीख पर नहीं अब हो गया ना मोए मोए और मान उस गांडु दिल की बात "....... मयंक के दिमाग ने उस पर हंसते हुए कहा।








"तुम टेंशन मत लो मयंक भाई कुछ नहीं होगा .....तू गांड़ू किसको बोल रहा है चूतिए"......दिल ने अपनी बेज्जती सुनते ही जबाब दिया ।







दिमाग -"क्या घंटा सही होगा अब तो बस घंटा बजेगा "







दिल -"चुप साले "






"हैलो हैलो सुन रहे हो मयंक".........एक जानी-पहचानी आवाज मयंक को सुनाई दी







मयंक -"यार तुम दोनों लड़ना बाद में पहले कोई इलाज ढूंढो इस विपदा का और बहनचो तुम दोनों की आवाज को क्या हुआ?"







दिमाग -"ये हमारी नहीं साक्षी की आवाज है चूतिए"






ये सुनते ही मयंक होस में आया

"ह ह्हह हां साक्षी क्या बोल रही थी"...... मयंक ने साक्षी से पूछा।






साक्षी -"कहां खोए हुए हो यार मैं कह रही थी तुम और राजीव भी चलना हमारे साथ वो सिर्फ ज्योग्राफी नहीं हिस्ट्री और पोलिटी भी पढ़ाती है"







मयंक -"म्मम मैं.... मैं क्या करूंगा वहां जाकर तुम ही जाना चाहिए तो राजीव को ले जाना "






"क्या करूंगा से क्या मतलब है पढ़ने के लिए जाएंगे तो पढ़ना हमारे साथ और तुम जाओगे हमारे साथ ये पक्का है"...... साक्षी ने आगे झुकते हुए कहा।







"देखुंगा".....बस इतना ही कहा मयंक ने वो अब तक घर आ चुके थे।






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"बस अब नहीं सह पाऊंगा जो होगा देखा जाएगा।"...... पिछले बीस मिनट से मयंक अपने कमरे के बिस्तर पर लेटा हुआ था आंख बंद किए हुए उसने अपने कपड़े भी नहीं बदले थे अंत में उसने फैसला किया जो होगा देखा जाएगा वो खड़ा होते हुए बाथरूम की तरफ जा ही रहा था की तब ही।







"टक्क ठख ठख"....... दरवाजे पर दस्तक हुई।






"खुला है"...... मयंक ने कहा ।







"तुमने कपडे नहीं बदले चलो अच्छा है पहले पट्टी उतार देती हूं फिर चेंज कर लेना उतारो शर्ट"...... साक्षी ने कमरे में आते हुए कहा।






साक्षी -"अरे अब तो हम दोस्त हैं अब भी शर्मा रहे हो मुझसे"....जब मयंक ने अपनी शर्ट नहीं उतारी तो साक्षी ने एक बार और कहा।







"ऐसी बात नहीं है साक्षी"....... मयंक ने अपनी शर्ट उतारते हुए कहा।







उसके बाद मयंक बिस्तर पर बैठ गया और साक्षी उसकी पट्टी निकालने लगी।






"मयंक एक बात बताओ तुम्हारी गर्लफ्रेंड हैं कोई या लड़की पसंद है"....... साक्षी ने एकदम से ऐसा सवाल पूछा मयंक को कतई इसकी आशंका नहीं थी पहले तो वह चौंका फिर सहज होते हुए बोला।






"और ये तुम क्यूं पूछ रही हो"






साक्षी -"अरे दोस्त हूं तुम्हारी तो तुम्हारे बारे में सब खबर तो होनी चाहिए ना"






मयंक -"ये भी ठीक है....मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है यार "






साक्षी -"अरे इतने हैंडसम हो कोन्फीडेंट हो फिर भी"





मयंक -"boys स्कूल में पढ़ा हूं बात करना नहीं आता मुझे तुम गर्लफ्रेंड की बात कर रही हो"






साक्षी -"मुझसे भी तो बात करते हो "






मयंक -"अब हम तो दोस्त हैं ना और ऐसा नहीं है की लड़की कभी आई नहीं जिंदगी में बस मैं ही दूर दूर भागता रहा "






साक्षी -"कोई पसंद तो होगी?"






मयंक -"मेरी जिंदगी में लव स्टोरी को बताने के लिए सबसे अच्छा उदाहरण है सोलर सिस्टम "







साक्षी -"अच्छा जरा मुझे भी समझाओ वो कैसे "







मयंक -"मानलो मैं सूरज हूं और लड़कियां प्लेनेट तो ऐसा है पहले तो वो मेरे आस-पास आना चाहती हैं और जब पता चलता है की दूर देखने पर चमकने वाला सूरज पास से देखने पर जलता हुआ महसूस होता है तो बस गर्मी सहन ना कर पाने के चलते दूर चली जाती हैं"








"हमम ये तो बहुत गंभीर समस्या है "...... साक्षी ने अपने चेहरे पर झूठी हंसी लाते हुए कहा।








"पर तुम्हें पता है साक्षी पिछले कुछ संज्ञेय से मेरी हालत Pluto जैसी हो गई है सूरज से ज्यादा"..... मयंक ने हंसते हुए कहा।







"फिर कभी बताऊंगा.....अभी मुझे कपड़े चेंज करने है और हेल्प के लिए थैंक्स"....... मयंक ने खड़े होते हुए कहा।






"थैंक्स नहीं चाहिए एक बार और चले क्या फालूदा खाने ?"..... साक्षी ने हंसते हुए कहा।







"पहली बार की निशानी मिटी नहीं है अभी "..... मयंक ने भी हंसकर कहा और बाथरूम में चला गया उसके जाते ही साक्षी ने एक लंबी सांस छोड़ी और कमरे से बहार जाने लगी।






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