मेरी तीनो रंडिया मुझसे चिपक गयी थी। क्युकी प्राची की कामुक चुदाई सुनकर तीनो गरम हो गयी थी। फिर मैंने कहा की चलो अपनी रंग रलियो वाला खेल शुरू करते है। तीनो पीढ़िया (जनरेशन ) तो इसी इंतज़ार में थी ही। मैंने फिर कहा पहले मेरे लुंड को अच्छे से चुसो शीतल तुम शुरुवात करो।
शीतल निचे बैठी और मेरे लण्ड को मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी , वो सिर्फ लण्ड के सुपाड़ी से थोड़ा ज्यादा लण्ड मुँह में लेती और बहार निकालती। इतना कह सकते है की वो अभी नयी खिलाडी थी इस खेल की। पर उसकी तेजी तो किसी भी मर्द का पानी निकलवा देती।
15 मिनट लण्ड चुसवाने के बाद मैंने कहा "चल अब तेरी माँ की बारी है लण्ड चूसने की "
इतना सुनते ही दीदी निचे बैठी और शीतल वह से हाथ गयी , बैठते ही दीदी ने मेरे लण्ड को पकड़ा अपनी जीभ से मेरे लण्ड के सुपडे को चाटा और उसे में मुँह में लिया, फिर लण्ड मुँह से निकालकर लण्ड को चाटी और फिर से मुँह में ली। मेरे बहन तो शातिर खिलाडी थी उसकी बेटी को बहुत कुछ सीखना बाकि था अभी।
मुझे बहुत मजा दे रही थी मेरे दीदी। मैंने शीतल को कहा भी " सीख ले अपनी माँ से बहुत काम आएगा तेरे , कितना मस्त चुसती है मेरी दीदी , कही ससुराल वाले ये ना बोले की बहु को चूसना सिखाया ही नहीं। "
मेरी माँ बोली " तो क्या तू ये चाहता है की ससुराल के सरे मर्दो को लण्ड ये चूसेगी जाकर "
शीतल " जो चुसवायेगा उसका चूस लुंगी नानी , उसमे कौन सा मेरा मुँह घिस जायेगा या छोटा हो जायेगा "
मेरी दीदी लण्ड चूसते हुए बोल उठी " इसके रंडीपना के लक्षण अभी से दिख रहे है "
मैंने कहा " रंडी वाली हरकते तो मेरी माँ की ही है अब देखो कैसे चूसेगी वो मेरा लण्ड "
माँ तो बस मेरे इसी बात का इंतज़ार कर रही थी।
वो बैठकर मेरे लण्ड को प्यार करने लगी। वो मेरे लण्ड के सुपाडे की जड़ को जीभ से चाट रही थी थी वो भी जल्दी जल्दी। उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ क्या फीलिंग आ रही थी। फिर इसी तरह सुपाडे को चारो तरफ से चाटते हुए मेरे लण्ड को मुँह में लेकर चुसती । कहा जाता है ना "ओल्ड इज गोल्ड" मेरी माँ तो इन सबसे कही बढ़कर ही थी उसकी लण्ड चुसाई जवान से लेकर बूढ़े तक का पानी मिनटों में निकाल दे। लण्ड चूसने में एक नंबर है वो। मैंने बोलै भी " मा तुम्हारी तरह तो कोई भी लण्ड नहीं चुसता, मुझे तुम्हारी लण्ड चुसाई सबसे ज्यादा पसंद है "
शीतल बोली " सिर्फ लण्ड ही चुसवाओगे या चुदाई भी होगी "
मैंने कहा "हाँ होगी, अभी शुरु करता हु, सबसे पहले मुँह पेलाई होगी। सबकी मुँह चुदेगी अब " ऐसा कहकर मैंने माँ के दोनों हाथ ऊपर उठाकर पकड़ लिए और उन्हें दीवाल का सहारा दे दिया मेरा लण्ड तो उनके मुँह में अभी भी था।
और फिर मैंने अपने कमर से धक्के लगाना शुरू किया और अपनी माँ की मुँह चोदने लगा मेरे मोटे लण्ड के धक्को से माँ की आँखों तक में आंसू आ गए।
दीदी बोली " माँ आपकी तो मुँह चुदाई से ही आँखों में आंसू आ गए " और हसने लगी। मै बोला " अभी तुम्हारी बारी बाकि है मेरी बहन "
फिर मैंने माँ को छोड़ा और अपनी सीमा दीदी की तरफ मुड़ा, वो मेरे लण्ड को मुँह में रखते ही अपनी सर को आगे सरका कर लण्ड मुँह में पुअरा लेकर फिर सर पीछे करि वो खुद ही मुँह चुदवा रही थी मै सिर्फ उनके बाल पकड़कर हल्का झटका देता था जब २ इंच जितना लण्ड बाहर रहता था ताकि पूरा लण्ड घुसाकर उसकी मुँह पेलाई हो।
दीदी का मुँह चोदने के बाद मैंने शीतल की तरफ अपना रुख किया। वो भी घुटनो के बल बैठ कर मेरा लण्ड मुँह में ले रही थी मै उसका सर पकड़कर उससे धक्के लगवा रहा था। जब वो लण्ड अपने मुँह के अंदर बाहर करती उसका पूरा शरीर हिलता था। उसकी गांड भी क्या ऊपर निचे होती थी उफ्फ्फ्फ़ ।
फिर मैंने तीनो रंडियो को बिस्टेर पर लेटने को कहा. मेरी दीदी अपनी माँ के कमर पर पैर रखकर लेटी और मेरी भांजी अपनी माँ के। तीनो पीढ़ियों के बुर इतने पास मुझे दिख रहे थे जिसकी मैंने कभी उम्मीद भी नहीं की थी, सपने में भी नहीं ।
सबसे पहले मैंने शीतल के ऊपर हाथ रखा तो वो सीधी लेट गयी और मैंने उसके दोनों पैरो को फैलाकर उठाया और उनके बिच में आया मेरा लण्ड शीतल के बुर के ऊपर था। मेरी माँ और दीदी मेरी दोनों तरफ आकर मेरी छाती चूमे लगे और दीदी की बेटी और माँ की नतिनी को चोदने लगा।
मै दीदी को बोला " दीदी तेरी बेटी तेरे सामने चुद रही है "
दीदी भी काम भावना में आकर उत्तेजित होते हुए बोली " चोद डाल मेरी बेटी को , फाड् दे उसकी बुर "
मै भी जोश में आ गया और तेज झटके लगाने लगा जिससे शीतल की आहे निकल रही थी। मैंने शीतल से कहा " शीतल , तू जिस बिस्तर पर जिस जगह चुद रही है वही तेरी माँ और उसकी भी माँ चोदूगा "मै उसी पोजीशन में शीतल को तब तक छोड़ा जब तक वो झाड़ ना गयी। वो बोली " बस हो गया मामा "
मेरा तो माल अभी नहीं निकला था तो मैंने दीदी को बिस्तर पर पटक दिया , शीतल थोड़े साइड में खिसक गयी तो दीदी खुद ब खुद उस जगह पहुंच गयी जहा उसका भाई बहनचोद वाला काम करता।
मै अपने लण्ड जो की अपनी सही जगह जाने के राह पर था एक दम चमक था उसे पकड़कर कहा " शीतल तेरी माँ चुदने वाली है "
यह सुनकर तो दीदी भी मुस्कुरा दी और माँ बोली " हाँ और मेरी बेटी मेरे आँखों के सामने चुद जाएगी एक बहनचोद से "
यह गाली गलौज का माहौल हम सबको और उत्तेजित कर रहा था।
दीदी भी बोल रही थी " नीरज .........आअह्हह्ह्ह्ह ........ बहनचोद........ माधरचोद......आअह्हह्ह्ह्ह ........ इतना बड़ा.......आअह्हह्ह्ह्ह ........मोटा लण्ड......आअह्हह्ह्ह्ह ........फाड् डाला रे
"
दीदी चुत की प्यास को मैंने अच्छी तरह बुझाया, उनका पानी निकाल कर और फिर अपने वायदे के मुताबिक मैंने शीतल की माँ की माँ को भी उसी बिस्तर पर उसी जगह पटका चोदने के लिए।
मैंने कहा " दीदी अब तो मेरी माँ चुद जाएगी "
उसके जवाब में शीतल बोल उठी " माँ आपकी माँ चुदने वाली है "
माँ भी बोल उठी " हाँ माधरचोद चोद ले अपनी माँ को "
फिर क्या था मैंने भी उसी तरीके से अपनी माँ छोड़ने में लग गया जैसे मेरी बहन चूड़ी थी और मेरी भांजी।
अपनी माँ की बुर में लण्ड जाता देखने के लिए दीद मेरे पास खड़ी थी और मै भी एक हाथ से उसकी एक चुची दबा रहा था और अपने काले मोटे लण्ड से उसकी माँ चोद रहा था
अपनी माँ चोदने के बाद मै भी झाड़ गया और अपना पानी माँ की चुत में ही छोड़ दिया।