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Erotica आर्काइवड थ्रेड (डीलीटेड)

Vachanpremi

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वखारीया जी
आपने कहानी बड़े ही रोचक ढंग से लिखी है,फिर भी कहानी अंत मुझे अच्छा नहीं लगा। जो बेगुनेगार उसे ही आपने मार दिया ओ भी बदचलन पति के हात सेट.
वैसे भी काम कथा मे दुखद बाते नहीं होना चाहिए।
 

vakharia

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वखारीया जी
आपने कहानी बड़े ही रोचक ढंग से लिखी है,फिर भी कहानी अंत मुझे अच्छा नहीं लगा। जो बेगुनेगार उसे ही आपने मार दिया ओ भी बदचलन पति के हात सेट.
वैसे भी काम कथा मे दुखद बाते नहीं होना चाहिए।
प्रिय पाठक

सब से पहले तो कहानी पढ़ने और आपकी प्रतिक्रिया देने के लिए धन्यवाद

कहानी का अंत, शीर्षक की यथार्थता दर्शाता है। कर्म की गति बड़ी ही न्यारी है। सामान्य तर्क के विरुद्ध कई ऐसी वास्तविकताऐं घटती है जो हमारे समझ से मेल नहीं खाती। ईमानदार को दंड और भ्रष्ट को लाभ परापूर्व से चलता आया है और उन्हीं जीवन के संकीर्ण रंगों को शब्दों के माध्यम से इस कहानी के रूप में पेश करने की एक कोशिश की है।

आप मेरी अन्य कहानियाँ भी पढ़कर आपकी अनमोल प्रतिक्रिया दे ऐसी मेरी गुज़ारिश है

फिर से एक बार धन्यवाद 🙏

वखारिया
 
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Reactions: kamdev99008

vakharia

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वखारीया जी
आपने कहानी बड़े ही रोचक ढंग से लिखी है,फिर भी कहानी अंत मुझे अच्छा नहीं लगा। जो बेगुनेगार उसे ही आपने मार दिया ओ भी बदचलन पति के हात सेट.
वैसे भी काम कथा मे दुखद बाते नहीं होना चाहिए।
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Hector_789

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प्रिय लेखक भाई, यह एक अच्छी कहानी है लेकिन मैं आपसे कहना चाहता हूं कि इस कहानी का लिखित पैटर्न कई पाठकों के लिए उपयुक्त नहीं है क्योंकि इसको पढ़ने के लिए बार बार ज़ूम करना पड़ता है, क्षमा करें अगर मैंने आपकी भावनाओं को ठेस पहुंचाई है,
 
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