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Incest भाँजा लगाए तेल, मौसी करे खेल (Completed)

vakharia

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vakharia

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जब मेरा यौन जीवन शुरू हुआ तब मैं एक अठारह साल का किशोर था. और वह भी मेरी सगी मौसी के साथ. अब मैं एक बड़ी कंपनी में ऊंचे ओहदे पर हूँ और हर तरह का मनचाहा संभोग कर सकने की स्थिति में हूँ. मुझ में सेक्स के प्रति इतनी आस्था और चाहत जगाने का श्रेय मेरी प्यारी प्रिया मौसी को जाता है और बाद में यह मीठी आग हमारे पूरे परिवार में लगी उसका कारण भी प्रिया मौसी से सेक्स के बाद मैं ही बना.

अपने बारे में कुछ बता दूँ. मैं बचपन में एक दुबला पतला, छरहरा, गोरा चिकना किशोर था. मेरे गोरे चिकने छरहरे रूप को देख कर सभी यह कहते कि गलती से लड़का बन गया, इसे तो लड़की होना चाहिये था!

मुझे बाद में मौसी ने बताया कि मैं ऐसा प्यारा लगता था कि किसी को भी मुझे बाँहों में भर कर चूम लेने की इच्छा होती थी. खास कर औरतों को. इसीलिये शायद मेरे रिश्ते की सब बड़ी औरतें मुझे देखकर ही बड़ी ममता से मुझे पास लेकर अक्सर प्यार से बाँहों में ले ले ती थीं. मुझे तो इस की आदत हो गयी थी. बाद में मौसी से यह भी पता चला कि सिर्फ़ ममता ही नहीं, कुछ वासना का भी उसमें पुट था.

मेरी माँ की छोटी बहन प्रिया मौसी मुझे बचपन से बहुत अच्छी लगती थी. माँ के बजाय मैं उसी से लिपटा रहता था. उसकी शादी के बाद मिलना कम हो गया था. बस साल में एक दो बार मिलते. पर यह बचपन का प्यार बिलकुल भोला भाला था. मौसी थी भी खूबसूरत. गोरी और ऊंची पूरी, काली कजरारी आँखें, लम्बे बाल जिन्हें वह अक्सर उस समय के फ़ैशन में याने दो वेणियो में गूँथती थी, और एक स्वस्थ कसा शरीर.

अब मैं किशोर हो गया था तो स्त्रियो के प्रति मेरा आकर्षण जाग उठा था. खास कर उम्र में बड़ी नारियों के प्रति. मेरी कुछ टीचर्स और कुछ मित्रों की माँओ के प्रति मैं अब बहुत आकर्षित होने लगा था. अकेले में उनके सपने देखते हुए हस्तमैथुन करने की भी आदत लग गयी थी. प्रिया मौसी के प्रति मेरा यौन आकर्षण अचानक पैदा हुआ.

एक शादी के लिये सारे रिश्तेदार जमा हुए थे. सिर्फ़ अजय अंकल, प्रिया मौसी के पति, मेरे मौसाजी, नहीं आये थे. प्रिया मौसी से एक साल बाद मिल रहा था. वे अब अडतीस उन्तालीस साल की थीं और उसी उम्र के औरतें मुझे अब बहुत अच्छी लगती थीं. शादी के हॉल में बड़ी भीड थी और कपड़े बदलने के लिये एक ही कमरा था. जल्दी तैयार होकर सब चले गये और सिर्फ़ मैं और प्रिया मौसी बचे.

प्रिया मौसी सिर्फ़ पेटीकोट और ब्रा पहने टोवेल लपेटकर बाथरूम में से बाहर आई. मुझे तो वह बेटे जैसा मानती थी इसलिये बेझिझक टोवेल निकालकर कपड़े पहनने लगी. मैंने जब काली ब्रा में लिपटे उनके फ़ूले उरोज और नंगी चिकनी पीठ देखी तो सहसा मुझे महसूस हुआ कि चालीस के करीब की उम्र के बावजूद मौसी बड़ी आकर्षक और जवान लगती थी. टाइट ब्रा के पट्टे उनके गोरे माँसल बदन में चुभ रहे थे और उनके दोनों ओर का माँस बड़े आकर्षक ढंग से फ़ूल गया था.

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मेरे देखने का ढंग ही उसकी इस मादक सुंदरता से बदल गया और सहसा मैंने महसूस किया कि मेरा लंड खड़ा हो गया है. झेंप कर मैं मुड गया जिससे मेरी पेन्ट में से मौसी को लंड का उभार न दिख जाए. मैं भी तैयार हुआ और हम शादी के मंडप की ओर चले.

इसके बाद उन दो दिनों में मैं छुप छुप कर मौसी को घूरता और अपने लंड को सहलाता हुआ उसके शरीर के बारे में सोचता. रात को मैंने हॉल में सोते समय चादर ओढ. कर मौसी के नग्न शरीर की कल्पना करते हुए पहली बार मुठ्ठ मारी. मुझे लगा कि उसे मेरी इस वासना के बारे में पता नहीं चलेगा पर बाद में पता चला कि मौसी ने उसी दिन सब भांप लिया था और इसलिये बाद में खुद ही पहल करके मुझे प्रोत्साहित किया. वह भी मेरी तरफ़ बहुत आकर्षित थी.

शादी के बाद भी रिश्तेदारों की बहुत भीड थी जो अब हमारे घर में आ गयी. सोने का इंतेजाम करना मुश्किल हो गया. एक बिस्तर पर दो को सोना पड़ा. मौसी ने प्यार से कहा कि मैं उसके पास सो जाऊँ. मेरा दिल धडकने लगा. थोड़ा डर भी लगा कि मौसी के पास सोने से उसे मेरे नाजायज आकर्षण के बारे में पता तो नहीं चलेगा.

पर मैं इतना थका हुआ था कि दस बजे ही मच्छरदानी लगाकर रजाई लेकर सो गया. पास ही एक दूसरे पलंग पर भी दो संबंधी सो रहे थे. मौसी आधी रात के बाद गप्पें खतम होने के बाद आई और रजाई में मेरे साथ घुस गई. मच्छरदानी लगी होने से अंधेरे में किसी को कुछ दिखने वाला नहीं था और मौसी ने इस मौके का फ़ायदा उठा लिया.

किसी के स्पर्श से मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि मौसी ने प्यार से मुझे बाँहों में समेट लिया है. पास से उसके जिस्म की खुशबू और नरम नरम उरोजों के दबाव से मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया. मैंने घबराकर अपने आप को छुड़ाने का प्रयास किया कि करवट बदल लूँ; कहीं पोल न खुल जाए.

पर मौसी भी बड़ी चालू निकली. मेरे खड़े लंड का दबाव अपने शरीर पर महसूस करके उसने मुझे और जोर से भींच लिया और एक टांग उठाकर मेरे शरीर पर रख दी. रजाई पूरी ओढ. ली और फ़िर कान में फ़ुसफ़ुसा कर बोली. "विजय, तू इतना बदमाश होगा मुझे पता नहीं था, अपनी सगी मौसी को देख कर ही एक्साइट हो गया? परसों से देख रही हूँ कि तू मेरी ओर घूर घूर कर देखता रहता है! और यह तेरा शिश्न देख कैसा खड़ा है!"

मैं घबरा कर बोला. "सॉरी मौसी, अब नहीं करूंगा. पर तुम इतनी सुंदर दिखती हो, मेरा बस नहीं रहा अपने आप पर." मेरे आश्चर्य और खुशी का ठिकाना न रहा जब वह प्यार से बोली. "अरे इसमें सॉरी की क्या बात है? इस उम्र में भी मैं तेरे जैसे जवान लडके को इतनी भा गई, मुझे बहुत अच्छा लगा. और तू भी कुछ कम नहीं है. बहुत प्यारा है."

और मौसी ने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिये और मुझे चूमने लगी. उसके मुंह का स्वाद इतना मीठा और नशीला था कि मैं होश खो बैठा और उसे बतहाशा चूमने लगा. चूमते चूमते मौसी ने अपना ब्लाउज़ उतार दिया. मेरा चुम्मा लेते लेते अब मौसी अपनी ब्रा के हुक खोल रही थी. चुंबन तोड कर उसने मेरे सिर को झुका कर अपनी छातियों में दबा लिया. दो मोटे मोटे कोमल मम्मे मेरे चेहरे पर आ टिके और दो कड़े खजूर मेरे गालों में गडने लगे. मैं समझ गया कि ये मौसी के निप्पल हैं और मुंह खोल कर मैंने एक निप्पल मुंह में ले लिया और बच्चे जैसा चूसने लगा.

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मौसी मस्ती से आहें भरने लगी और मुझे डर लगा कि कहीं कोई सुन न ले पर रजाई से पूरा ढका होने से कोई आवाज बाहर नहीं जा रही थी. मौसी अब बहुत कामुक हो गयी थी और उसे अपनी वासनापूर्ति के सिवाय कुछ नहीं सूझ रहा था इसलिये उसने फ़टाफ़ट मेरे पायजामे से मेरा लंड निकाल लिया. मौसी के कोमल हाथ का स्पर्श होते ही मुझे लगा कि मैं झड जाऊंगा पर किसी तरह मैंने अपने आप को संभाला.

मौसी अपने दूसरे हाथ से कुछ कर रही थी जो अंधेरे में दिख नही रहा था. बाद में मैं समझ गया कि वह अपनी चड्डी उतार रही थी. अपनी टांगें खोल कर मौसी ने मेरा लंड अपनी तपी हुई गीली चूत में घुसेड़ लिया. उसकी बुर इतनी गीली थी कि बिना किसी रुकावट के मेरा पूरा शिश्न उसमें एक बार में ही समा गया. प्रिया मौसी ने अपनी टांगों के बीच मेरे बदन को जकड लिया था. फ़िर एकाएक पलट कर उसने मुझे नीचे किया और मेरे ऊपर लेट गई. उसका निप्पल मेरे मुंह में था ही, अब उसने और जोर लगा कर आधी चूची मेरे मुंह में ठूंस दी और फ़िर मुझे चुपचाप बिना कोई आवाज निकाले चोदने लगी. पलंग अब हौले हौले चरमराने लगा पर उसकी परवाह न किये हुए मौसी मुझे मस्ती से चोदती रही.

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मैं मौसी के बदन के नीचे पूरा दबा हुआ था पर उस नरम तपे चिकने बदन के वजन का मुझे कोई गिला नहीं था. इस पहली मीठी चुपचाप अंधेरे में की जारी चुदाई से मेरा लंड इस कदर मचला कि मैं दो मिनट की चुदाई में ही झड गया. मुंह में मौसी का स्तन भरा होने से मेरी किलकारी नहीं निकली, सिर्फ़ गोम्गिया कर रह गया. मौसी समझ गई कि मैं झड गया हूँ पर बिना ध्यान दिये वह मुझे चोदती रही जैसे उसे कोई फ़रक न पडता हो.

झड कर भी मेरा लंड खड़ा रहा, मेरी कमसिन जवानी का यह जोश था. मौसी को यह मालूम था और उसकी चूत अभी भी प्यासी थी. उसकी सांस अब जोर से चल रही थी और वह बड़ी मस्ती से मुझे खिलौने के गुड्डे की तरह चोद रही थी. पाँच मिनट में मेरा लंड मौसी की चूत के घर्षण से फ़िर तन कर खड़ा हो गया था. इस बार मैंने अपने आप पर काबू रखा और तब तक अपने लंड को झडने नहीं दिया जब तक एक दबी सिसकारी छोड कर मौसी स्खलित नहीं हो गई.

मौसी ने करवट बदली और मुझे प्यार से चूम लिया. वह हाँफ रही थी, ठंड में भी उसे पसीना छूट गया था. उसके पसीने के खुशबू भी बड़ी मादक थी. मेरे कान में धीमी आवाज में उसने पूछा कि चुदाई पसंद आई? मैंने जब शर्मा कर उसे चूम कर उसकी छातियों में अपना सिर छुपा लिया तो उसने मुझे कस कर बाहों में भींच लिया और पूछा. "विजय बेटे, कल मैं चली जाऊँगी, तेरी बहुत याद आयेगी." मैंने उससे प्रार्थना की कि मुझे अपने साथ ले जाये. वह हंस कर मेरे बाल सहलाती हुई बोली कि मैं गर्मी की छुट्टी तक रुकूँ, फ़िर वह माँ से कह कर मुझे अपने यहाँ बुला लेगी.

हम थक गये थे और कुछ ही देर में गहरे सो गए. मौसी ने मेरा लंड अपनी चूत में कैद करके रखा और रात भर मेरे ऊपर ही सोई रही. मौसी के माँसल गदराये शरीर का काफ़ी वजन था पर मैं चुपचाप रात भर उसे सहता रहा. सुबह मौसी ने मुझे एक बार और चोदा और फ़िर मुझे एक चुम्मा दे कर वह उठ गई. थकान और तृप्ति से मैं फ़िर सो गया. मौसी के नग्न बदन की सुंदरता को मैं अंधेरे में नहीं देख पाया, यह मुझे बहुत बुरा लगा.

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दुसरे दिन मौसी ने माँ को मना लिया कि गर्मी की छुट्टी में मुझे उसके यहाँ भेज दे. फ़िर मेरी ओर देखकर मौसी मुस्कराई. उसकी आँखों में एक बड़ी कामुक खुमारी थी और मुझे बहुत अच्छा लगा कि मेरी सगी मौसी को मैं इतना अच्छा लगता हूँ कि वह इस तरह मुझ से संभोग की भूखी है.

पर जाते जाते मौसी मुझे जता गई कि अगर मुझे कम मार्क्स मिले तो वह मुझे नहीं बुलाएगी. मैंने भी जी जान लगा दिया और अपनी क्लास में तीसरा आया. मौसी को फ़ोन पर जब यह बताया तो वह बहुत खुश हुई और मुझे बोली. "तू जल्दी से आजा बेटे, देख तेरे लिये क्या मस्त इनाम तैयार रखा है" और फ़िर फ़ोन पर ही उसने एक चुम्मे की आवाज की. मेरा लंड खड़ा हो गया और माँ से उसे छिपाने के लिये मैं मुड कर मौसी से आगे बातें करने लगा.
 

vakharia

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प्रथम प्रतिभाव के लिए शुक्रिया avty57
 

Ajju Landwalia

Well-Known Member
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जब मेरा यौन जीवन शुरू हुआ तब मैं एक अठारह साल का किशोर था. और वह भी मेरी सगी मौसी के साथ. अब मैं एक बड़ी कंपनी में ऊंचे ओहदे पर हूँ और हर तरह का मनचाहा संभोग कर सकने की स्थिति में हूँ. मुझ में सेक्स के प्रति इतनी आस्था और चाहत जगाने का श्रेय मेरी प्यारी प्रिया मौसी को जाता है और बाद में यह मीठी आग हमारे पूरे परिवार में लगी उसका कारण भी प्रिया मौसी से सेक्स के बाद मैं ही बना.

अपने बारे में कुछ बता दूँ. मैं बचपन में एक दुबला पतला, छरहरा, गोरा चिकना किशोर था. मेरे गोरे चिकने छरहरे रूप को देख कर सभी यह कहते कि गलती से लड़का बन गया, इसे तो लड़की होना चाहिये था!

मुझे बाद में मौसी ने बताया कि मैं ऐसा प्यारा लगता था कि किसी को भी मुझे बाँहों में भर कर चूम लेने की इच्छा होती थी. खास कर औरतों को. इसीलिये शायद मेरे रिश्ते की सब बड़ी औरतें मुझे देखकर ही बड़ी ममता से मुझे पास लेकर अक्सर प्यार से बाँहों में ले ले ती थीं. मुझे तो इस की आदत हो गयी थी. बाद में मौसी से यह भी पता चला कि सिर्फ़ ममता ही नहीं, कुछ वासना का भी उसमें पुट था.

मेरी माँ की छोटी बहन प्रिया मौसी मुझे बचपन से बहुत अच्छी लगती थी. माँ के बजाय मैं उसी से लिपटा रहता था. उसकी शादी के बाद मिलना कम हो गया था. बस साल में एक दो बार मिलते. पर यह बचपन का प्यार बिलकुल भोला भाला था. मौसी थी भी खूबसूरत. गोरी और ऊंची पूरी, काली कजरारी आँखें, लम्बे बाल जिन्हें वह अक्सर उस समय के फ़ैशन में याने दो वेणियो में गूँथती थी, और एक स्वस्थ कसा शरीर.

अब मैं किशोर हो गया था तो स्त्रियो के प्रति मेरा आकर्षण जाग उठा था. खास कर उम्र में बड़ी नारियों के प्रति. मेरी कुछ टीचर्स और कुछ मित्रों की माँओ के प्रति मैं अब बहुत आकर्षित होने लगा था. अकेले में उनके सपने देखते हुए हस्तमैथुन करने की भी आदत लग गयी थी. प्रिया मौसी के प्रति मेरा यौन आकर्षण अचानक पैदा हुआ.

एक शादी के लिये सारे रिश्तेदार जमा हुए थे. सिर्फ़ अजय अंकल, प्रिया मौसी के पति, मेरे मौसाजी, नहीं आये थे. प्रिया मौसी से एक साल बाद मिल रहा था. वे अब अडतीस उन्तालीस साल की थीं और उसी उम्र के औरतें मुझे अब बहुत अच्छी लगती थीं. शादी के हॉल में बड़ी भीड थी और कपड़े बदलने के लिये एक ही कमरा था. जल्दी तैयार होकर सब चले गये और सिर्फ़ मैं और प्रिया मौसी बचे.

प्रिया मौसी सिर्फ़ पेटीकोट और ब्रा पहने टोवेल लपेटकर बाथरूम में से बाहर आई. मुझे तो वह बेटे जैसा मानती थी इसलिये बेझिझक टोवेल निकालकर कपड़े पहनने लगी. मैंने जब काली ब्रा में लिपटे उनके फ़ूले उरोज और नंगी चिकनी पीठ देखी तो सहसा मुझे महसूस हुआ कि चालीस के करीब की उम्र के बावजूद मौसी बड़ी आकर्षक और जवान लगती थी. टाइट ब्रा के पट्टे उनके गोरे माँसल बदन में चुभ रहे थे और उनके दोनों ओर का माँस बड़े आकर्षक ढंग से फ़ूल गया था.

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मेरे देखने का ढंग ही उसकी इस मादक सुंदरता से बदल गया और सहसा मैंने महसूस किया कि मेरा लंड खड़ा हो गया है. झेंप कर मैं मुड गया जिससे मेरी पेन्ट में से मौसी को लंड का उभार न दिख जाए. मैं भी तैयार हुआ और हम शादी के मंडप की ओर चले.

इसके बाद उन दो दिनों में मैं छुप छुप कर मौसी को घूरता और अपने लंड को सहलाता हुआ उसके शरीर के बारे में सोचता. रात को मैंने हॉल में सोते समय चादर ओढ. कर मौसी के नग्न शरीर की कल्पना करते हुए पहली बार मुठ्ठ मारी. मुझे लगा कि उसे मेरी इस वासना के बारे में पता नहीं चलेगा पर बाद में पता चला कि मौसी ने उसी दिन सब भांप लिया था और इसलिये बाद में खुद ही पहल करके मुझे प्रोत्साहित किया. वह भी मेरी तरफ़ बहुत आकर्षित थी.

शादी के बाद भी रिश्तेदारों की बहुत भीड थी जो अब हमारे घर में आ गयी. सोने का इंतेजाम करना मुश्किल हो गया. एक बिस्तर पर दो को सोना पड़ा. मौसी ने प्यार से कहा कि मैं उसके पास सो जाऊँ. मेरा दिल धडकने लगा. थोड़ा डर भी लगा कि मौसी के पास सोने से उसे मेरे नाजायज आकर्षण के बारे में पता तो नहीं चलेगा.

पर मैं इतना थका हुआ था कि दस बजे ही मच्छरदानी लगाकर रजाई लेकर सो गया. पास ही एक दूसरे पलंग पर भी दो संबंधी सो रहे थे. मौसी आधी रात के बाद गप्पें खतम होने के बाद आई और रजाई में मेरे साथ घुस गई. मच्छरदानी लगी होने से अंधेरे में किसी को कुछ दिखने वाला नहीं था और मौसी ने इस मौके का फ़ायदा उठा लिया.

किसी के स्पर्श से मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि मौसी ने प्यार से मुझे बाँहों में समेट लिया है. पास से उसके जिस्म की खुशबू और नरम नरम उरोजों के दबाव से मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया. मैंने घबराकर अपने आप को छुड़ाने का प्रयास किया कि करवट बदल लूँ; कहीं पोल न खुल जाए.

पर मौसी भी बड़ी चालू निकली. मेरे खड़े लंड का दबाव अपने शरीर पर महसूस करके उसने मुझे और जोर से भींच लिया और एक टांग उठाकर मेरे शरीर पर रख दी. रजाई पूरी ओढ. ली और फ़िर कान में फ़ुसफ़ुसा कर बोली. "विजय, तू इतना बदमाश होगा मुझे पता नहीं था, अपनी सगी मौसी को देख कर ही एक्साइट हो गया? परसों से देख रही हूँ कि तू मेरी ओर घूर घूर कर देखता रहता है! और यह तेरा शिश्न देख कैसा खड़ा है!"

मैं घबरा कर बोला. "सॉरी मौसी, अब नहीं करूंगा. पर तुम इतनी सुंदर दिखती हो, मेरा बस नहीं रहा अपने आप पर." मेरे आश्चर्य और खुशी का ठिकाना न रहा जब वह प्यार से बोली. "अरे इसमें सॉरी की क्या बात है? इस उम्र में भी मैं तेरे जैसे जवान लडके को इतनी भा गई, मुझे बहुत अच्छा लगा. और तू भी कुछ कम नहीं है. बहुत प्यारा है."

और मौसी ने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिये और मुझे चूमने लगी. उसके मुंह का स्वाद इतना मीठा और नशीला था कि मैं होश खो बैठा और उसे बतहाशा चूमने लगा. चूमते चूमते मौसी ने अपना ब्लाउज़ उतार दिया. मेरा चुम्मा लेते लेते अब मौसी अपनी ब्रा के हुक खोल रही थी. चुंबन तोड कर उसने मेरे सिर को झुका कर अपनी छातियों में दबा लिया. दो मोटे मोटे कोमल मम्मे मेरे चेहरे पर आ टिके और दो कड़े खजूर मेरे गालों में गडने लगे. मैं समझ गया कि ये मौसी के निप्पल हैं और मुंह खोल कर मैंने एक निप्पल मुंह में ले लिया और बच्चे जैसा चूसने लगा.

suck2
मौसी मस्ती से आहें भरने लगी और मुझे डर लगा कि कहीं कोई सुन न ले पर रजाई से पूरा ढका होने से कोई आवाज बाहर नहीं जा रही थी. मौसी अब बहुत कामुक हो गयी थी और उसे अपनी वासनापूर्ति के सिवाय कुछ नहीं सूझ रहा था इसलिये उसने फ़टाफ़ट मेरे पायजामे से मेरा लंड निकाल लिया. मौसी के कोमल हाथ का स्पर्श होते ही मुझे लगा कि मैं झड जाऊंगा पर किसी तरह मैंने अपने आप को संभाला.

मौसी अपने दूसरे हाथ से कुछ कर रही थी जो अंधेरे में दिख नही रहा था. बाद में मैं समझ गया कि वह अपनी चड्डी उतार रही थी. अपनी टांगें खोल कर मौसी ने मेरा लंड अपनी तपी हुई गीली चूत में घुसेड़ लिया. उसकी बुर इतनी गीली थी कि बिना किसी रुकावट के मेरा पूरा शिश्न उसमें एक बार में ही समा गया. प्रिया मौसी ने अपनी टांगों के बीच मेरे बदन को जकड लिया था. फ़िर एकाएक पलट कर उसने मुझे नीचे किया और मेरे ऊपर लेट गई. उसका निप्पल मेरे मुंह में था ही, अब उसने और जोर लगा कर आधी चूची मेरे मुंह में ठूंस दी और फ़िर मुझे चुपचाप बिना कोई आवाज निकाले चोदने लगी. पलंग अब हौले हौले चरमराने लगा पर उसकी परवाह न किये हुए मौसी मुझे मस्ती से चोदती रही.

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मैं मौसी के बदन के नीचे पूरा दबा हुआ था पर उस नरम तपे चिकने बदन के वजन का मुझे कोई गिला नहीं था. इस पहली मीठी चुपचाप अंधेरे में की जारी चुदाई से मेरा लंड इस कदर मचला कि मैं दो मिनट की चुदाई में ही झड गया. मुंह में मौसी का स्तन भरा होने से मेरी किलकारी नहीं निकली, सिर्फ़ गोम्गिया कर रह गया. मौसी समझ गई कि मैं झड गया हूँ पर बिना ध्यान दिये वह मुझे चोदती रही जैसे उसे कोई फ़रक न पडता हो.

झड कर भी मेरा लंड खड़ा रहा, मेरी कमसिन जवानी का यह जोश था. मौसी को यह मालूम था और उसकी चूत अभी भी प्यासी थी. उसकी सांस अब जोर से चल रही थी और वह बड़ी मस्ती से मुझे खिलौने के गुड्डे की तरह चोद रही थी. पाँच मिनट में मेरा लंड मौसी की चूत के घर्षण से फ़िर तन कर खड़ा हो गया था. इस बार मैंने अपने आप पर काबू रखा और तब तक अपने लंड को झडने नहीं दिया जब तक एक दबी सिसकारी छोड कर मौसी स्खलित नहीं हो गई.

मौसी ने करवट बदली और मुझे प्यार से चूम लिया. वह हाँफ रही थी, ठंड में भी उसे पसीना छूट गया था. उसके पसीने के खुशबू भी बड़ी मादक थी. मेरे कान में धीमी आवाज में उसने पूछा कि चुदाई पसंद आई? मैंने जब शर्मा कर उसे चूम कर उसकी छातियों में अपना सिर छुपा लिया तो उसने मुझे कस कर बाहों में भींच लिया और पूछा. "विजय बेटे, कल मैं चली जाऊँगी, तेरी बहुत याद आयेगी." मैंने उससे प्रार्थना की कि मुझे अपने साथ ले जाये. वह हंस कर मेरे बाल सहलाती हुई बोली कि मैं गर्मी की छुट्टी तक रुकूँ, फ़िर वह माँ से कह कर मुझे अपने यहाँ बुला लेगी.

हम थक गये थे और कुछ ही देर में गहरे सो गए. मौसी ने मेरा लंड अपनी चूत में कैद करके रखा और रात भर मेरे ऊपर ही सोई रही. मौसी के माँसल गदराये शरीर का काफ़ी वजन था पर मैं चुपचाप रात भर उसे सहता रहा. सुबह मौसी ने मुझे एक बार और चोदा और फ़िर मुझे एक चुम्मा दे कर वह उठ गई. थकान और तृप्ति से मैं फ़िर सो गया. मौसी के नग्न बदन की सुंदरता को मैं अंधेरे में नहीं देख पाया, यह मुझे बहुत बुरा लगा.

899F118
दुसरे दिन मौसी ने माँ को मना लिया कि गर्मी की छुट्टी में मुझे उसके यहाँ भेज दे. फ़िर मेरी ओर देखकर मौसी मुस्कराई. उसकी आँखों में एक बड़ी कामुक खुमारी थी और मुझे बहुत अच्छा लगा कि मेरी सगी मौसी को मैं इतना अच्छा लगता हूँ कि वह इस तरह मुझ से संभोग की भूखी है.

पर जाते जाते मौसी मुझे जता गई कि अगर मुझे कम मार्क्स मिले तो वह मुझे नहीं बुलाएगी. मैंने भी जी जान लगा दिया और अपनी क्लास में तीसरा आया. मौसी को फ़ोन पर जब यह बताया तो वह बहुत खुश हुई और मुझे बोली. "तू जल्दी से आजा बेटे, देख तेरे लिये क्या मस्त इनाम तैयार रखा है" और फ़िर फ़ोन पर ही उसने एक चुम्मे की आवाज की. मेरा लंड खड़ा हो गया और माँ से उसे छिपाने के लिये मैं मुड कर मौसी से आगे बातें करने लगा.

Ek aur kamukta bhare safar me hame sathi banane ke liye bahut bahut dhanywad vakharia Bhai,

Agli updates ka besabri se intezar rahega
 

Roy monik

I love sex
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जब मेरा यौन जीवन शुरू हुआ तब मैं एक अठारह साल का किशोर था. और वह भी मेरी सगी मौसी के साथ. अब मैं एक बड़ी कंपनी में ऊंचे ओहदे पर हूँ और हर तरह का मनचाहा संभोग कर सकने की स्थिति में हूँ. मुझ में सेक्स के प्रति इतनी आस्था और चाहत जगाने का श्रेय मेरी प्यारी प्रिया मौसी को जाता है और बाद में यह मीठी आग हमारे पूरे परिवार में लगी उसका कारण भी प्रिया मौसी से सेक्स के बाद मैं ही बना.

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मुझे बाद में मौसी ने बताया कि मैं ऐसा प्यारा लगता था कि किसी को भी मुझे बाँहों में भर कर चूम लेने की इच्छा होती थी. खास कर औरतों को. इसीलिये शायद मेरे रिश्ते की सब बड़ी औरतें मुझे देखकर ही बड़ी ममता से मुझे पास लेकर अक्सर प्यार से बाँहों में ले ले ती थीं. मुझे तो इस की आदत हो गयी थी. बाद में मौसी से यह भी पता चला कि सिर्फ़ ममता ही नहीं, कुछ वासना का भी उसमें पुट था.

मेरी माँ की छोटी बहन प्रिया मौसी मुझे बचपन से बहुत अच्छी लगती थी. माँ के बजाय मैं उसी से लिपटा रहता था. उसकी शादी के बाद मिलना कम हो गया था. बस साल में एक दो बार मिलते. पर यह बचपन का प्यार बिलकुल भोला भाला था. मौसी थी भी खूबसूरत. गोरी और ऊंची पूरी, काली कजरारी आँखें, लम्बे बाल जिन्हें वह अक्सर उस समय के फ़ैशन में याने दो वेणियो में गूँथती थी, और एक स्वस्थ कसा शरीर.

अब मैं किशोर हो गया था तो स्त्रियो के प्रति मेरा आकर्षण जाग उठा था. खास कर उम्र में बड़ी नारियों के प्रति. मेरी कुछ टीचर्स और कुछ मित्रों की माँओ के प्रति मैं अब बहुत आकर्षित होने लगा था. अकेले में उनके सपने देखते हुए हस्तमैथुन करने की भी आदत लग गयी थी. प्रिया मौसी के प्रति मेरा यौन आकर्षण अचानक पैदा हुआ.

एक शादी के लिये सारे रिश्तेदार जमा हुए थे. सिर्फ़ अजय अंकल, प्रिया मौसी के पति, मेरे मौसाजी, नहीं आये थे. प्रिया मौसी से एक साल बाद मिल रहा था. वे अब अडतीस उन्तालीस साल की थीं और उसी उम्र के औरतें मुझे अब बहुत अच्छी लगती थीं. शादी के हॉल में बड़ी भीड थी और कपड़े बदलने के लिये एक ही कमरा था. जल्दी तैयार होकर सब चले गये और सिर्फ़ मैं और प्रिया मौसी बचे.

प्रिया मौसी सिर्फ़ पेटीकोट और ब्रा पहने टोवेल लपेटकर बाथरूम में से बाहर आई. मुझे तो वह बेटे जैसा मानती थी इसलिये बेझिझक टोवेल निकालकर कपड़े पहनने लगी. मैंने जब काली ब्रा में लिपटे उनके फ़ूले उरोज और नंगी चिकनी पीठ देखी तो सहसा मुझे महसूस हुआ कि चालीस के करीब की उम्र के बावजूद मौसी बड़ी आकर्षक और जवान लगती थी. टाइट ब्रा के पट्टे उनके गोरे माँसल बदन में चुभ रहे थे और उनके दोनों ओर का माँस बड़े आकर्षक ढंग से फ़ूल गया था.

towel2
मेरे देखने का ढंग ही उसकी इस मादक सुंदरता से बदल गया और सहसा मैंने महसूस किया कि मेरा लंड खड़ा हो गया है. झेंप कर मैं मुड गया जिससे मेरी पेन्ट में से मौसी को लंड का उभार न दिख जाए. मैं भी तैयार हुआ और हम शादी के मंडप की ओर चले.

इसके बाद उन दो दिनों में मैं छुप छुप कर मौसी को घूरता और अपने लंड को सहलाता हुआ उसके शरीर के बारे में सोचता. रात को मैंने हॉल में सोते समय चादर ओढ. कर मौसी के नग्न शरीर की कल्पना करते हुए पहली बार मुठ्ठ मारी. मुझे लगा कि उसे मेरी इस वासना के बारे में पता नहीं चलेगा पर बाद में पता चला कि मौसी ने उसी दिन सब भांप लिया था और इसलिये बाद में खुद ही पहल करके मुझे प्रोत्साहित किया. वह भी मेरी तरफ़ बहुत आकर्षित थी.

शादी के बाद भी रिश्तेदारों की बहुत भीड थी जो अब हमारे घर में आ गयी. सोने का इंतेजाम करना मुश्किल हो गया. एक बिस्तर पर दो को सोना पड़ा. मौसी ने प्यार से कहा कि मैं उसके पास सो जाऊँ. मेरा दिल धडकने लगा. थोड़ा डर भी लगा कि मौसी के पास सोने से उसे मेरे नाजायज आकर्षण के बारे में पता तो नहीं चलेगा.

पर मैं इतना थका हुआ था कि दस बजे ही मच्छरदानी लगाकर रजाई लेकर सो गया. पास ही एक दूसरे पलंग पर भी दो संबंधी सो रहे थे. मौसी आधी रात के बाद गप्पें खतम होने के बाद आई और रजाई में मेरे साथ घुस गई. मच्छरदानी लगी होने से अंधेरे में किसी को कुछ दिखने वाला नहीं था और मौसी ने इस मौके का फ़ायदा उठा लिया.

किसी के स्पर्श से मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि मौसी ने प्यार से मुझे बाँहों में समेट लिया है. पास से उसके जिस्म की खुशबू और नरम नरम उरोजों के दबाव से मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया. मैंने घबराकर अपने आप को छुड़ाने का प्रयास किया कि करवट बदल लूँ; कहीं पोल न खुल जाए.

पर मौसी भी बड़ी चालू निकली. मेरे खड़े लंड का दबाव अपने शरीर पर महसूस करके उसने मुझे और जोर से भींच लिया और एक टांग उठाकर मेरे शरीर पर रख दी. रजाई पूरी ओढ. ली और फ़िर कान में फ़ुसफ़ुसा कर बोली. "विजय, तू इतना बदमाश होगा मुझे पता नहीं था, अपनी सगी मौसी को देख कर ही एक्साइट हो गया? परसों से देख रही हूँ कि तू मेरी ओर घूर घूर कर देखता रहता है! और यह तेरा शिश्न देख कैसा खड़ा है!"

मैं घबरा कर बोला. "सॉरी मौसी, अब नहीं करूंगा. पर तुम इतनी सुंदर दिखती हो, मेरा बस नहीं रहा अपने आप पर." मेरे आश्चर्य और खुशी का ठिकाना न रहा जब वह प्यार से बोली. "अरे इसमें सॉरी की क्या बात है? इस उम्र में भी मैं तेरे जैसे जवान लडके को इतनी भा गई, मुझे बहुत अच्छा लगा. और तू भी कुछ कम नहीं है. बहुत प्यारा है."

और मौसी ने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिये और मुझे चूमने लगी. उसके मुंह का स्वाद इतना मीठा और नशीला था कि मैं होश खो बैठा और उसे बतहाशा चूमने लगा. चूमते चूमते मौसी ने अपना ब्लाउज़ उतार दिया. मेरा चुम्मा लेते लेते अब मौसी अपनी ब्रा के हुक खोल रही थी. चुंबन तोड कर उसने मेरे सिर को झुका कर अपनी छातियों में दबा लिया. दो मोटे मोटे कोमल मम्मे मेरे चेहरे पर आ टिके और दो कड़े खजूर मेरे गालों में गडने लगे. मैं समझ गया कि ये मौसी के निप्पल हैं और मुंह खोल कर मैंने एक निप्पल मुंह में ले लिया और बच्चे जैसा चूसने लगा.

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मौसी मस्ती से आहें भरने लगी और मुझे डर लगा कि कहीं कोई सुन न ले पर रजाई से पूरा ढका होने से कोई आवाज बाहर नहीं जा रही थी. मौसी अब बहुत कामुक हो गयी थी और उसे अपनी वासनापूर्ति के सिवाय कुछ नहीं सूझ रहा था इसलिये उसने फ़टाफ़ट मेरे पायजामे से मेरा लंड निकाल लिया. मौसी के कोमल हाथ का स्पर्श होते ही मुझे लगा कि मैं झड जाऊंगा पर किसी तरह मैंने अपने आप को संभाला.

मौसी अपने दूसरे हाथ से कुछ कर रही थी जो अंधेरे में दिख नही रहा था. बाद में मैं समझ गया कि वह अपनी चड्डी उतार रही थी. अपनी टांगें खोल कर मौसी ने मेरा लंड अपनी तपी हुई गीली चूत में घुसेड़ लिया. उसकी बुर इतनी गीली थी कि बिना किसी रुकावट के मेरा पूरा शिश्न उसमें एक बार में ही समा गया. प्रिया मौसी ने अपनी टांगों के बीच मेरे बदन को जकड लिया था. फ़िर एकाएक पलट कर उसने मुझे नीचे किया और मेरे ऊपर लेट गई. उसका निप्पल मेरे मुंह में था ही, अब उसने और जोर लगा कर आधी चूची मेरे मुंह में ठूंस दी और फ़िर मुझे चुपचाप बिना कोई आवाज निकाले चोदने लगी. पलंग अब हौले हौले चरमराने लगा पर उसकी परवाह न किये हुए मौसी मुझे मस्ती से चोदती रही.

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मैं मौसी के बदन के नीचे पूरा दबा हुआ था पर उस नरम तपे चिकने बदन के वजन का मुझे कोई गिला नहीं था. इस पहली मीठी चुपचाप अंधेरे में की जारी चुदाई से मेरा लंड इस कदर मचला कि मैं दो मिनट की चुदाई में ही झड गया. मुंह में मौसी का स्तन भरा होने से मेरी किलकारी नहीं निकली, सिर्फ़ गोम्गिया कर रह गया. मौसी समझ गई कि मैं झड गया हूँ पर बिना ध्यान दिये वह मुझे चोदती रही जैसे उसे कोई फ़रक न पडता हो.

झड कर भी मेरा लंड खड़ा रहा, मेरी कमसिन जवानी का यह जोश था. मौसी को यह मालूम था और उसकी चूत अभी भी प्यासी थी. उसकी सांस अब जोर से चल रही थी और वह बड़ी मस्ती से मुझे खिलौने के गुड्डे की तरह चोद रही थी. पाँच मिनट में मेरा लंड मौसी की चूत के घर्षण से फ़िर तन कर खड़ा हो गया था. इस बार मैंने अपने आप पर काबू रखा और तब तक अपने लंड को झडने नहीं दिया जब तक एक दबी सिसकारी छोड कर मौसी स्खलित नहीं हो गई.

मौसी ने करवट बदली और मुझे प्यार से चूम लिया. वह हाँफ रही थी, ठंड में भी उसे पसीना छूट गया था. उसके पसीने के खुशबू भी बड़ी मादक थी. मेरे कान में धीमी आवाज में उसने पूछा कि चुदाई पसंद आई? मैंने जब शर्मा कर उसे चूम कर उसकी छातियों में अपना सिर छुपा लिया तो उसने मुझे कस कर बाहों में भींच लिया और पूछा. "विजय बेटे, कल मैं चली जाऊँगी, तेरी बहुत याद आयेगी." मैंने उससे प्रार्थना की कि मुझे अपने साथ ले जाये. वह हंस कर मेरे बाल सहलाती हुई बोली कि मैं गर्मी की छुट्टी तक रुकूँ, फ़िर वह माँ से कह कर मुझे अपने यहाँ बुला लेगी.

हम थक गये थे और कुछ ही देर में गहरे सो गए. मौसी ने मेरा लंड अपनी चूत में कैद करके रखा और रात भर मेरे ऊपर ही सोई रही. मौसी के माँसल गदराये शरीर का काफ़ी वजन था पर मैं चुपचाप रात भर उसे सहता रहा. सुबह मौसी ने मुझे एक बार और चोदा और फ़िर मुझे एक चुम्मा दे कर वह उठ गई. थकान और तृप्ति से मैं फ़िर सो गया. मौसी के नग्न बदन की सुंदरता को मैं अंधेरे में नहीं देख पाया, यह मुझे बहुत बुरा लगा.

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दुसरे दिन मौसी ने माँ को मना लिया कि गर्मी की छुट्टी में मुझे उसके यहाँ भेज दे. फ़िर मेरी ओर देखकर मौसी मुस्कराई. उसकी आँखों में एक बड़ी कामुक खुमारी थी और मुझे बहुत अच्छा लगा कि मेरी सगी मौसी को मैं इतना अच्छा लगता हूँ कि वह इस तरह मुझ से संभोग की भूखी है.

पर जाते जाते मौसी मुझे जता गई कि अगर मुझे कम मार्क्स मिले तो वह मुझे नहीं बुलाएगी. मैंने भी जी जान लगा दिया और अपनी क्लास में तीसरा आया. मौसी को फ़ोन पर जब यह बताया तो वह बहुत खुश हुई और मुझे बोली. "तू जल्दी से आजा बेटे, देख तेरे लिये क्या मस्त इनाम तैयार रखा है" और फ़िर फ़ोन पर ही उसने एक चुम्मे की आवाज की. मेरा लंड खड़ा हो गया और माँ से उसे छिपाने के लिये मैं मुड कर मौसी से आगे बातें करने लगा.
Mst update intzar rahega agle update ka
 
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