UPDATE 17
शाम का वक्त सेमेंथा मंदिर आई थी कि तभी उसे जगन्नाथ बाबा मिले उन्हें देखते ही सेमेंथा उनके पास तेजी से गई और जाते ही...
सेमेंथा – बाबा वो बाबा वो...
जगन्नाथ बाबा – (हल्का मुस्कुरा के) पुत्री शांत करो अपने मन को हम जानते है तुम क्या कहना चाहती हो परन्तु पुत्री तुम्हे भी इतना गुस्सा करने की जरूरत नहीं थी और ना ही वो सब करने की...
सेमेंथा – लेकिन बाबा वो कैसे...
जगन्नाथ बाबा – (बीच में) पुत्री (एक तरफ इशारा करके) उस देवी को देख रही हो....
सेमेंथा – हा बाबा वर्षों से मै मा को देख रही हूँ शिव जी की आराधना करते हुए....
जगन्नाथ बाबा – पुत्री इतने वर्षों से वो देवी तपस्या कर रही है सिर्फ अपने बेटे के लिए इस इंतजार में की उसका पुत्र एक दिन यहां आएगा और उस दिन इस देवी की तपस्या पूरी होगी , पुत्री सिर्फ अपने बेटे के लिए वो कितने वर्षों से तप कर रही है सोचो क्या तुम्हे लगता है तुम्हारी बेचैनी उस देवी की बेचैनी से ज्यादा बड़ी है....
सेमेंथा – नहीं बाबा...
जगन्नाथ बाबा – हम्ममम इसलिए संयम रखो पुत्री जल्द बाजी में ऐसा काम ना करो जिससे इस देवी की वर्षों की तपस्या भंग हो जाय....
सेमेंथा – मै समझ गई बाबा मै ध्यान रखूंगी इस बात का....
जगन्नाथ बाबा – हम्ममम अब जाओ उस देवी से भी मिल आओ तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही है वो....
सेमेंथा – जी बाबा...
बोल के सेमेंथा मंदिर के अन्दर चली गई सुनंदा के पास जो शिव की मूर्ति के सामने आंख बंद करके बैठी थी और सेमेंथा उसके पीछे से आ रही थी तभी....
सुनंदा – (बिना पलटे) तू आ गई पुत्री...
सेमेंथा – (मुस्कुरा के सुनंदा के पास आके) मां आपको कैसे पता चला कि ये मै हूँ...
सुनंदा – (हल्का मुस्कुरा के) जब तू छोटी सी थी तब से पाल रही हूँ तुझे कैसे नहीं पहचानूंगी मेरी बच्ची....
सेमेंथा – (मुस्कुरा के) आप ही के कारण मै सम्भल पाई हूँ मां वर्ना जाने क्या होता मेरा...
सुनंदा – ऐसा कुछ भी सोचने की जरूरत नहीं है तुझे मेरी बच्ची खेर ये बता आज तू इतनी खुश क्यों है...
सेमेंथा – (खुश होके अपने हाथ में लगी मेंहदी दिखा के) मा ये उन्होंने लगाई है मुझे खुद और आज वो मुझे सबसे मिलवाने वाले है...
सुनंदा – (मुस्कुरा के) तू खुश है ना अब...
सेमेंथा – हा मा आज मै सच में बहुत खुश हूँ बस जल्दी...
सुनंदा – (मुस्कुरा के बीच में सेमेंथा से) हर चीज का एक वक्त होता है मेरी बच्ची जल्दी ही वो वक्त भी आएगा चल अब जा तुझे देर नहीं हो रही इंतजार कर रहा होगा वो तेरा और एक बात ध्यान रखना सेमेंथा वो जो बोले करने को वो करना...
सेमेंथा – (शर्म के साथ मुस्कुरा के) जी मां...
बोल के सेमेंथा चली गई वहां से जबकि इस तरफ आज धीरेन्द्र की हवेली रोशनी से जगमगा रही थी क्योंकि कल दिन में धीरेन्द्र की बेटी निधि की शादी होने वाली थी और आज सगाई साथ में एक पार्टी होने थी जिसकी तैयारी पूरी हो चुकी थी इस वक्त धीरेन्द्र का परिवार और मेहमान तैयार होने में लगे थे इस बीच कमल जो पहले तैयार होके निकल आया था दादी के पास....
कमल – दादी सारी तैयारी हो चुकी है बस जब मै आपको इशारा करू तब आप साहिल को बोल देना गाने के लिए...
दादी – (मुस्कुरा के) ठीक है मै बोल दूंगी....
जबकि इस तरफ जैसे ही साहिल तैयार होके कमरे से बाहर आया तभी सामने से किसी से टकरा गया इससे पहले वो गिरता साहिल ने उसे पकड़ लिया गिरने वाला कोई और नहीं कविता थी साहिल की बहन अचानक से हुई टक्कर से दोनों कुछ समझ न पाए तभी साहिल ने कविता की कमर में हाथ डाल उसे गिरने से बचा लिया लेकिन जैसे ही साहिल की नजर पड़ी कविता पर जो..
इस रूप में कयामत ढा रही थी बेचारा साहिल क्या करता अब कविता को इस रूप में देख उसे देखता रह गया सब कुछ भूल के जैसे उसमें खो गया हो यही हाल कुछ कविता का भी था दोनों एक दूसरे को देखने में इतना खो गए थे जैसे दोनों भाई बहन ना होके बिछड़े प्रेमी हो तभी कमरे से तैयार होके निकली शिवानी ने आवाज लगाई कविता को...
शिवानी – कविता मेरा चुन्नी कहा है कितने देर लगाएगी लाने में...
तभी साहिल और कविता जैसे होश के आए दोनों अलग हो गए तब...
कविता – (हड़बड़ा के) गलती से टकरा गई sorry...
बोल के कविता चली गई जबकि...
साहिल – (मन में – ये मै क्या कर रहा था कविता को इस तरह से क्यों देख रहा था मै अपनी ही बहन को इस तरह से देखना नहीं नहीं शायद अचानक से टक्कर होने से ऐसा हुआ हो)...
अपने दिमाग से ये बात हटा के साहिल चला गया हवेली के बाहर जहां पार्टी शुरू होने वाली थी जबकि इस तरफ...
कविता –(अपने मन में – साहिल भाई आज कितने हैंडसम लग रहे है कितना अच्छा लग रहा था जब वो मुझे पकड़े हुए थे लग रहा था के वक्त बस यही थम जाए , ये मै क्या सोच रही हूँ वो मेरा भाई है उनके बारे में इस तरह सोचना नहीं नहीं लेकिन आज सुबह सपने में भी तो देखा था मैने उनको मै दुल्हन बनी मंडप में बैठी थी तब साहिल दूल्हे के रूप में आ रहे थे वो क्या था फिर , लगता है मै कुछ ज्यादा ही सोच रही हूँ इस बारे में)....
ये सब बाते सोचते हुए कविता भी निकल गई सबके साथ पार्टी की तरफ जबकि इस तरफ पार्टी में परिवार की सभी लड़कियों और औरते...
सुमन
सुनैना
सुनीता
अमृता
शिवानी
सुरभि
शबनम
पायल
सोनम
पूनम
खुशी
रचना
अवनी
आज कुछ इस तैयार होके आई थी उन्हें देख ऐसा लगता था कि वो दुलहन की भतीजी , नंनद , भांजी ना होके उनकी बहन हो पार्टी में आए कुछ ही मेहमान ने देखा था क्योंकि पार्टी में ज्यादा तर गांव के लोग थे उनके लिए हवेली की महिलाओं को इस तरह तैयार देखना नया था जिस वजह से वो हवेली की औरतों को इस अवतार में देखते रह गए थे जहां एक तरफ सभी औरते और लड़कियां एक साथ खड़ी थी पूरे परिवार के साथ वही उनसे अलग थोड़ी दूरी पर साहिल और कमल एक साथ खड़े थे जैसे किसी की राह देख रहे हो तब...
कमल – (साहिल से) अबे और कितना इंतजार करना पड़ेगा यार कब आएगी वो जिसके बारे में बताया था तूने...
साहिल – आती होगी यार उसने बोला था वक्त पे आ जाएगी वो...
कमल – अबे एक बात बता तूने आज के लिए बोल था या कल के लिए क्योंकि शादी कल है समझा...
साहिल – नहीं बे आज और कल दोनों के लिए बोल है मैने उसे....
कमल – जाने कितना इंतजार करना पड़ेगा यार...
तभी कमल दूसरी तरफ देखता है जहां पर परिवार की सभी औरते खड़ी होती है उसमें अवनी को देख के...
कमल – wow क्या बात है...
साहिल – क्या wow बे किसे बोल रहा है तू...
कमल – (एक तरफ इशारा करके) उधर देख...
कमल की बात सुन जब साहिल देखता है जहां सभी औरते खड़ी थी परिवार की उनको देखता रह जाता है और जब कविता पे नजर जाती है तो साहिल को कुछ देर पहले जो हुआ वो नजारा याद आ जाता है उसे तब अपना सिर झटक के...
साहिल – छोड़ बे जिसके लिए यहां खड़े है वो जाने कहा रह गई है...
ये लोग आपस में बात कर रहे होते है तभी दादी इनके पास आती है....
दादी – (दोनों से) तुम दोनों यहां क्या कर रहे हो...
साहिल – (पलट के दादी को देखता है तब) wow दादी आप तो कमाल के लग रहे हो आज...
दादी – (मुस्कुरा के) चुप कर ज्यादा न बोल...
कमल – अरे हा दादी कसम से इन कपड़ों में आज आप बहुत सुंदर दिख रहे हो आज तो पार्टी में हर कोई सिर्फ आपको देखता रह जाएगा...
दादी – चुप कर बदमाश तू भी शुरू हो गया अब चल ये बता क्या कर रहे हो तुम दोनों यहां पर...
साहिल – अरे कुछ नहीं दादी बस ऐसे ही खड़े है यहां पर आप बताओ कोई काम था आपको....
दादी – मुझे कोई काम नहीं चलो तुम दोनों उस तरफ पार्टी वहां पर है और तुम दोनों यहां अकेले खड़े हो चलो...
बोल के दादी अपने साथ दोनों को लेके निकल गई...
कमल – (धीरे से साहिल से) अबे दादी को बताया क्यों नहीं बे...
साहिल – (धीरे से) चुप कर मै सरप्राइस देना चाहता हूँ दादी को...
कमल – (मुस्कुरा के) ठीक है...
आगे जाके दादी दोनों को सभी के पास ले आई तब कमल की नजर जैसे ही अवनी पर पड़ी...
कमल –(इशारे से अवनी को बोला) कमाल की लग रही हो...
अवनी – (कमल के इशारे को समझ हल्का मुस्कुरा के) थैंक यूं....
जबकि साहिल चुप चाप खड़ा देख रहा था ईन दोनों को जबकि परिवार की सभी लड़कियों ने आज की पार्टी के लिए गाने पे नाचने की पहले से प्रैक्टिस की थी तब DJ पर शिवानी और शबनम गई दोनों एक गाने पर नाचने लगी...
SONG...
कलाइयां कलाइयां...तू लेया दे मेनू गोल्डन झुमके...मैं कन्ना विच पावां चुम चुम के...मन जा वे मैनु शॉपिंग करा दे....मन जा वे रोमांटिक पिक्चर दिखा दे...रिक्विस्टाँ पाईआं वे....चिटीयां कलाइयां वे...ओह बेबी मेरी चिट्ठियां कलाइयां वे...चिटीयां कलाइयां वे...ओ बेबी मेरी वाइट कलाइयां वे...चिटीयां कलाइयां वे...ओ बेबी मेरी तेरी हिस्से आईआं वे...चिटीयां कलाइयां वे...ओह बेबी मेरी चिटीयां कलाइयां वे...ओह मैनु चढिया है रंग रंग...मैं ख्वाबां दे संग संग आज उडदी फिरां...मैं सारी रात उडदी फिरां...ओह बदले जिंदड़ी दे रंग ढंग...मेरी नींदें भी तंग तंग आज उडदी फिरां...मैं सारी रात उडदी फिरां....मन जा वे गुलाबी चुन्नी दिवा दे...मन जा वे कलरफुल चूड़ी पवा दे...रिक्विस्टाँ पाईआं वे....चिटीयां कलाइयां वे...ओ बेबी मेरी चिटीयां कलाइयां वे....चिटीयां कलाइयां वे...ओ बेबी मेरी वाइट कलाइयां वे....चिटीयां कलाइयां वे...ओ बेबी मेरी तेरी हिस्से आईआं वे....चिटीयां कलाइयां वे....ओह बेबी मेरी चिटीयां कलाइयां वे....घुमड़े फिरदे सारे सीटियां मिल्कियाँ....चिटीयां कलाइयां वे कलाइयां वे ...तेरे हाथां नु चुमदा रेह्न्दा...फब तू ले लियां, ओह चिटीयां वे....ओह चिटीयां वे....मन जा वे मैनु शॉपिंग करा दे...मन जा वे रोमांटिक पिक्चर दिखा दे...रिक्विस्टाँ पाईआं वे...चिटीयां कलाइयां वे...ओह बेबी मेरी चिटीयां कलाइयां वे...चिटीयां कलाइयां वे...ओ बेबी मेरी वाइट कलाइयां वे...चिटीयां कलाइयां वे...ओ बेबी मेरी तेरी हिस्से आईआं वे...चिटीयां कलाइयां वे...ओह बेबी मेरी चिटीयां कलाइयां वे
उनके नाचने के बाद सभी ने जोर से तालिया बजाई जिसके बाद पायल और सुरभि की बारी आई नाचने की दोनों DJ पर गई नाचने....
SONG....
दिलबर, दिलबर..हाँ, दिलबर, दिलबर...दिलबर, दिलबर..हाँ, दिलबर, दिलबर...होश ना ख़बर है, ये कैसा असर है?...होश ना ख़बर है, ये कैसा असर है?...तुम से मिलने के बाद, दिलबर...तुम से मिलने के बाद, दिलबर...दर्द है, चुभन है, क्या दीवानापन है?...दर्द है, चुभन है, क्या दीवानापन है?...तुम से मिलने के बाद, दिलबर...हाँ, तुम से मिलने के बाद,...दिलबर..दिलबर, दिलबर...हाँ, दिलबर, दिलबर...दिलबर, दिलबर....हाँ, दिलबर, दिलबर...तू मेरा ख़्वाब है, तू मेरे दिल का क़रार...तू मेरा ख़्वाब है, तू मेरे दिल का क़रार...देख ले, जान-ए-मन, देख ले बस एक बार...चूम ले जिस्म को, हमनशीं, पास आ...चैन खो गया है, कुछ तो हो गया है...चैन खो गया है, कुछ तो हो गया है...तुम से मिलने के बाद, दिलबर...हाँ, तुम से मिलने के बाद, दिलबर...दिलबर, दिलबर...हाँ, दिलबर, दिलबर...दिलबर, दिलबर..हाँ, दिलबर, दिलबर...इश्क़ बेताब है, हुस्न की महकी बहार...इश्क़ बेताब है, हुस्न की महकी बहार...दूरियाँ किस लिए? किस लिए अब इंतज़ार?...टूटता है बदन, क्या हुआ? क्या पता...प्यास में ढली हूँ, रात-दिन जली हूँ...प्यास में ढली हूँ, रात-दिन जली हूँ...तुम से मिलने के बाद, दिलबर...हाँ, तुम से मिलने के बाद, दिलबर...होश ना ख़बर है, ये कैसा असर है?..होश ना ख़बर है, ये कैसा असर है?...तुम से मिलने के बाद, दिलबर...हाँ, तुम से मिलने के बाद, दिलबर...दर्द है, चुभन है, क्या दीवानापन है?...दर्द है, चुभन है, क्या दीवानापन है?...तुम से मिलने के बाद, दिलबर...हाँ, तुम से मिलने के बाद, दिलबर
जिसके बाद सभी ने उनके लिए भी तालिया बजाई अब बारी आई राघव और रागिनी की बेटी की वो भी नाचने गई DJ की गाने में...
SONG...
उसके नाचने के बाद सभी ने जोर दार ताली बजाई अब अगली बारी के लिए कोई जाता तभी DJ वाले ने बोला...
DJ – माफ करिएगा पता नहीं क्या बता है DJ का Music System काम नहीं कर रहा है कुछ खराबी आ गई है...
ये बात सुन कई लोगों का मूड खराब हो गया तभी कमल ने दादी को धीरे से इशारा किया जिसे समझ के....
दादी – (साहिल से) बेटा शायद DJ में कोई खराबी आ गई है अब उसके बिना सब बोर हो जाएंगे...
साहिल – हा दादी लगता है सारी मेहनत बेकार गई हमारी कल से लगे थे इस काम के लिए और आज ये भी धोखा दे गया...
दादी – (मुस्कुरा के) एक काम कर तू जाके गाना सुना सबको अपना...
साहिल – क्या नहीं दादी मै नहीं सबके सामने मै नहीं कर पाऊंगा....
दादी – क्यों क्या हुआ वैसे तो तू गाना गाता रहता है आज मेरे कहने पर नहीं गाएगा गाना....
साहिल – लेकिन दादी सबके सामने मै कैसे गऊ गाना...
दादी – मतलब मेरी बात नहीं मानेगा आज तू मुझे मना कर रहा है किसी चीज के लिए...
साहिल – (जिसने कभी अपनी दादी को किसी बात के लिए मना नहीं किया और दादी की ये बात सुन के) अच्छा ठीक है दादी लेकिन आपको मेरे साथ नाचना पड़ेगा...
दादी – पागल है मै कैसे नाचूंगी...
साहिल – (मुस्कुरा के) उसकी आप चिंता मत करो मै आपको ब्रेकडांस थोड़ी ना करने को बोल रहा हूँ....
दादी – (मुस्कुरा के) चल ठीक है अब जा शुरू हो जा पहले....
जैसे ही साहिल DJ पे गया वहां जाके पहले DJ वाले से कुछ बात की उसके बाद माइक और गिटार लेके वापस आया कुछ बोलने को हुआ था तभी साहिल की नजर पड़ी एक तरफ जहां उसने सेमेंथा को आते देखा...
सेमेंथा
जो आज बहुत खूबसूरत लग ही थी उसे देखते ही जाने क्या आया साहिल के दिल में तभी....
Song
Whoa, whoa, oh...Whoa, whoa, oh...Whoa, whoa, oh...Whoa, whoa, oh...
मैंने जानी इश्क़ की गली...बस तेरी आहटें मिली....मैंने चाहा चाहूँ ना तुझे....पर मेरी एक ना चली...
इश्क़ में निगाहों को मिलती हैं बारिशें...फिर भी क्यूँ कर रहा दिल तेरी ख़्वाहिशें?...
दिल मेरी ना सुने...दिल की मैं ना सुनूँ...दिल मेरी ना सुने...दिल का मैं क्या करूँ?....
लाया कहाँ मुझको ये मोह तेरा?....रातें ना अब मेरी, ना मेरा सवेरा....जान लेगा मेरी ये इश्क़ मेरा....
इश्क़ में निगाहों को मिलती हैं बारिशें....फिर भी क्यूँ कर रहा दिल तेरी ख़्वाहिशें?...
दिल मेरी ना सुने....दिल की मैं ना सुनूँ....दिल मेरी ना सुने....दिल का मैं क्या करूँ?....
दिल तो है दिल का क्या? गुस्ताख़ है ये....डरता नहीं पागल, बेबाक है ये....है रक़ीब ख़ुद का ही, इत्तिफ़ाक़ है ये....
इश्क़ में निगाहों को मिलती हैं बारिशें...फिर भी क्यूँ कर रहा दिल तेरी ख़्वाहिशें?....
दिल मेरी ना सुने...दिल की मैं ना सुनूँ...दिल मेरी ना सुने...दिल का मैं क्या करूँ?...
दिल मेरी ना सुने...दिल की मैं ना सुनूँ...दिल मेरी ना सुने...दिल का मैं क्या करूँ?
गाना गाने लगा इस बीच साहिल सेमेंथा के चारों तरफ घूम के गाना गा रहा था जिसे देख सेमेंथा खुश हो रही थी तभी गाना खत्म हुआ जबकि सब तालिया बजा रहे थे लेकिन कविता को जाने कैसी जलन सी हो रही थी सेमेंथा से क्यों कि साहिल गाना गाते वक्त सेमेंथा के चारों तरफ घूमते देख रहा था उसे इस वजह से जबकि कविता के साथ सुमन गौर से देख रही थी सेमेंथा को जाने क्यों सुमन को सेमेंथा का साहिल के साथ देख इसे अजीब बेचैनी सी लग रही थी जबकि दादी को साहिल का सेमेंथा साथ देख कुछ समझ नहीं आ रहा था कि ये लड़की कौन है जिसे साहिल देख इतना खुश हो रहा है जबकि परिवार के लगभग कई लोग हैरान थे सेमेंथा को देख के क्योंकि सेमेंथा देखने में बिल्कुल भी गांव की नहीं लग रही थी और न ही परिवार में उसे कोई जनता था , इन सब बातों से बेखबर साहिल बहुत खुश नजर आ रहा था आज सेमेंथा के वहां होने से साहिल की ये खुशी दादी के साथ कमल से छुपी नहीं थी लेकिन दादी अंजान थी अभी भी सेमेंथा से जबकि कमल समझ गया था सेमेंथा को देख के की साहिल इसी का इंतजार कर रहा था तब साहिल DJ से उतर के जाने लगा था तभी...
कमल – अबे कहा जा रहा है बे अभी तो मजा आने लगा है पार्टी में और तू भागे जा रहा है (दादी की तरफ इशारा करके) दादी इशारे से तेरे को गाना गाने के लिए बोल रही है...
साहिल – अबे अभी गाया तो गाना यार अब क्या मै DJ बन जाऊं....
कमल – ठीक है जा तेरी मर्जी वैसे भी ये पहली बार है जब तू दादी की बात नहीं मान रहा है....
इससे पहले साहिल कुछ बोलता कमल को तभी कमल पलट के चला गया DJ से मुस्कुराते हुए जिसका मतलब था कि साहिल को गाना गाने के लिए मजबूर कर दिया कमल ने दादी का बहाना बना के जिसका नतीजा ये कि साहिल वापस DJ पर गया उससे कुछ बोल के आया तभी एक धुन बजने लगी जिसमें साहिल ने गाना गाया....
SONG
मैं वहाँ जहाँ पे तू है...मेरा इश्क़ तो जुनूँ है...ओ जाना...हर वक्त तू ही तू है...हर सिम्त तू ही तू है....ओ जाना...तू साथ मेरे हरदम...चाहे कहीं भी हूँ....ओ जाना....मैं वहाँ जहाँ पे तू है...मेरा इश्क़ तो जुनूँ है...ओ जाना...ला ला ला ला ला ला....दिन-रात सोचता हूँ....तुझे इतना प्यार मैं दूँ....जो कभी उतर ना पाए....तुझे वो खुमार मैं दूँ....मुझे ऐसे तू कुछ मिला है...जैसे की कोई दुआ है....तुझपे कोई आँच आए....तो मैं खुद को भी जला लूँ....हर दिन मुझी में तू है....हर शब मुझी में तू है...हर दिन मुझी में तू है...हर शब मुझी में तू है...ओ जाना....मैं वहाँ जहाँ पे तू है....मेरा इश्क़ तो जुनूँ है...ओ जाना...ओ जाना...हर पल तुझे संभालूँ....तेरे सारे गम उठा लूँ...मेरा दिल तो ये ही चाहे...तुझे रूह में सजा लूँ...तेरा अक्स नूर सा है...तू एक सुरूर सा है...दिलकश तेरी अदा का....हर लम्हा मैं चुरा लूँ....हरदम खुदी में तू है...मेरी बेखुदी में तू है...हरदम खुदी में तू है...मेरी बेखुदी में तू है...ओ जाना...मैं वहाँ जहाँ पे तू है...मेरा इश्क़ तो जुनूँ है...ओ ओ ओ ओ...ओ जाना
गाना गाते वक्त साहिल की नजर सेमेंथा पर जमी हुई थी जबकि इस गाने पर कमल , खुशी , अवनी , शबनम , शिवानी , सुरभि और पायल एक साथ नाच रहे थे साथ में कविता को भी ये लोग लेके आए DJ पर नाचने के लिए लेकिन कविता साथ में आके पीछे हट गई क्योंकि गाना गाते वक्त साहिल मुस्कुराते हुए सिर्फ सेमेंथा को देख रहा था और ये बात कविता को चुभ रही थी दिल पे काटे की तरह जबकि गाना खत्म होते ही कमल ने जोर से सीटी बजाई साथ में सभी ने जोर दार ताली बजाई तभी कमल ने साहिल से माइक लेके एनाउंस कर दिया...
कमल – (माइक लेके एनाउंस करते हुए सबको) हा तो मजा आया सबको गाने में बोलने की जरूरत नहीं अच्छे से जनता हूँ सबको बहुत मजा आया है...
कमल की बात सुन सभी मेहमान जोर से हंसने लगे तब...
कमल – तो आप सब जानते है कि आज हमारी निधि बुआ की सगाई है इस खुशी के मौके पर निधि बुआ अपने होने वाले पति देव के साथ एक डांस करेगी साहिल के गाने पर इतना बोलते ही पार्टी में सभी लोग तालिया बजाने लगे जबकि साहिल गुस्से में कमल को देखते हुए पास जाके धीरे से...
साहिल – (धीरे से कमल को) क्यों बे मेरे नाम की सुपारी लेके आया है क्या तू जो बार बार मुझे फंसा रहा है गाना गाने के लिए....
कमल – (हस्ते हुए धीरे से) मै नहीं दादी अब तेरी मर्जी भले मत गा गाना ज्यादा से ज्यादा दादी यही कहेगी कि अब तो तू इतना बड़ा हो गया कि मेरी बात को मना करने लगा है...
बोल के कमल चला गया मुस्कुराते हुए जबकि साहिल बेचारा कमल की बात पर गुस्से में अपने दात पिसते रह गया DJ पर खड़ा इसके बाद DJ वाले को गाने का समझा के फिर गाना गाने लगा साहिल....
Song
मेरा चाँद मुझे आया है नज़र..ए रात ज़रा थम थम के गुजर...छाया है नशा मेरी आँखो पर...ए रात ज़रा थम थम के गुजर मेरा चाँद मुझे आया है नज़र...मेरे दिल में है अरमा कई कई मेरी चाहत है अभी नयी नयी रह जाये न प्यासा प्यार मेरा मेरी बाहों में भर दे यार मेरा इतना सा करम तू कर मुझ पर ए रात ज़रा थम थम के गुजर मेरा चाँद मुझे आया है नज़र अभी लबों को लबों ने छुआ नहीं अरमा कोई पूरा हुआ नहीं अभी आस का गुलशन खिलना है अभी दो जिस्मों को मिलना है देखूगा अभी मैं वो मंजर ए रात ज़रा थम थम के गुजर मेरा चाँद मुझे आया है नज़र आया है नज़र
इस गाने पर निधि और उसका होने वाला पति एक साथ (Couple Dance) नाच रहे थे जिसे वहां हर कोई मुस्कुराते हुए देख रहा था गाना खत्म होते ही एक बार फिर से तालिया बजने लगी जबकि इस तरफ मेहमानों में लाला भी आया था अपने परिवार के साथ जिसमें उसका बेटा विजय उसकी बीवी राधिका और दोनों बच्चे आनंद और सिमी , नाच गाने वाले इस प्रोग्राम को देख...
लाला – (अपने बेटे विजय से) देख रहे हो बेटा रनवीर की बीवी को इसकी वजह से ही रनवीर ने हमारे साथ...
विजय – (अपने पिता लाला के कंधे पर हाथ रख के) सब कुछ याद है मुझे पिता जी कुछ नहीं भूला हूँ मै लेकिन इस बार किस्मत को भी हमारा साथ देना होगा क्योंकि इस बार वो अकेली नहीं उसकी बेटी भी साथ है (एक तरफ इशारा करके) वो देखो बिल्कुल अपनी मां की तरह लगती है और रनवीर का सपोला भी बस कल की बात और है पिता जी उसके बाद की सारी तैयारी मैने कर ली है...
लाला – हा इस बार हम वो करेंगे जो उस रात नहीं हुआ था और रनवीर सपने में भी नहीं जान पाएगा इस बारे में...
विजय – एक बात तो बताए पिता जी मैने सुना है रनवीर की बीवी के बारे में कहते है कि वो देवकन्या है...
लाला – (मुस्कुराते हुए) उससे हमे क्या फर्क पड़ेगा बेटा वैसे भी अगर वो देवकन्या है तो और भी अच्छा है दोनों मा बेटी को अच्छे से स्वर्ग की सैर कराएंगे हम...
बात बोल दोनों मुस्कुराने लगे जबकि दूसरी तरफ विजय का बेटा आनंद जो गांव के अपने आवारा 5 दोस्तों के साथ अलग खड़ा होके बात कर रहा था....
दोस्त 1 – यार यहां तो जैसे अप्सराओं का मेला लगा हुआ है यार क्या तो एक से बढ़कर आइटम है यहां पर...
दोस्त 2 – शहर में रहना का असर यही होता है रे....
दोस्त 3 – यार आनंद तेरे तो मजे ही मजे है तू तो ज्यादा तर शहर में रहता है...
दोस्त 4 – छोड़ यार इन बातों को (आनंद से) यार आनंद कुछ तो इंतजाम कर यार इन आइटमों को देख के मन कर रहा है साली को कूतीया बना के मजा लेने का....
आनन्द – चुप करो बे ज्यादा ब्रेक डांस मत करो तुम लोग जानते हो ना किसके हवेली में खड़े हो इस वक्त सालों जैसे भी है मेहमान है वो सब और धीरेन्द्र दादा है मेरे , मेरी मां (राधिका) पिता की तरह मानती है उनको और तुम लोग एसी बाते कर रहे हो....
दोस्त 5 – यार तू तो ऐसी बाते कर रहा है जैसे तेरे लिए सब पुराना है ये सब....
आनंद – पागल है क्या तू मजा तो मुझे बहुत आ रहा है (सेमेंथा को देख के) वैसे ये है कौन बड़ा मस्त मॉल लग रहा है यार....
दोस्त 2 – होगी इनके परिवार से कोई यार...
आनंद – हम्ममम जाने दे बे दादा (धीरेन्द्र) के मेहमान है सब फालतू की सिर दर्द नहीं लेने का....
दोस्त 5 – (मुस्कुरा के) यार तू तो बड़ा शरीफ बन रहा है....
आनंद – साला तुम सबका कुछ नहीं हो सकता है फालतू की कोई हरकत मत करना समझा बस आंखों से बलात्कार करते रहो तुम सब...
बोल के आनंद निकल गया वहां से जबकि उसके बाकी दोस्त सब हंसने लगे आनंद की बात पर लेकिन इस तरफ साहिल DJ से उतरने लगा तभी कमल उसके पास आके...
कमल – अबे कहा जा रहा है बे तू...
साहिल – चल बे अब बहुत हो गया अब नहीं गाने वाला मै...
कमल – (धीरे से) अबे हरामखोर बात सुन मेरी अभी तक तूने दादी के कहें पे गाना गया फिर लेकिन दादी को नचाया नहीं अबे अब एक ऐसा गाना गा दादी के लिए देख कब से बैठी हुई है बेचारी सिर्फ तुझे गाना गाता देख रही है समझा कुछ...
साहिल – (मुस्कुरा के) समझ गया बे अब देख तू...
जिसके बाद कमल निकल गया तभी साहिल ने DJ वाले से कुछ कहा और वापस DJ में आके खड़ा हो गया के तभी सारी लाइट बंद हो गई जिस वजह से सब हैरान होके बाते करने लगे तभी एक लाइट शुरू हुई जो दादी पर पड़ रही थी फिर एक और लाइट शुरू हुई जो साहिल पर पड़ रही थी तब साहिल चलते हुए दादी के पास आया उसके साथ लाइट भी चलती रही दादी के पास आके अपना हाथ आगे कर मुस्कुरा के दादी का हाथ अपने हाथ में लेके उन्हें अपने साथ DJ पर लेके जाने लगा उसके साथ लाइट भी जा रही थी तब DJ पर आते ही गिटार के धुन बजने लगी तब साहिल ने गाना गाना शुरू किया...
SONG
जब कोई बात बिगड़ जाए...जब कोई मुश्क़िल पड़ जाए...तुम देना साथ मेरा, ओ हमनवा....ना कोई है, ना कोई था, ज़िंदगी में तुम्हारे सिवा...तुम देना साथ मेरा, ओ हमनवा....तुम देना साथ मेरा, ओ हमनवा...
)....
गाने के बीच में दादी इशारे से कविता को अपनी जगह बुलाती है लेकिन जैसे ही दादी साहिल का हाथ छोड़ कविता को देने वाली होती है तभी...
Song
साहिल – हो, चाँदनी जब तक रात, देता है हर कोई साथ....तुम अगर अँधेरों में न छोड़ना मेरा हाथ...जब कोई बात बिगड़ जाए...जब कोई मुश्क़िल पड़ जाए...तुम देना साथ मेरा ओ हमनवा....ना कोई है, ना कोई था, ज़िंदगी में तुम्हारे सिवा...तुम देना साथ मेरा, ओ हमनवा..
उसीवक्त कमल अपने साथ सेमेंथा को साथ लेके DJ में आया आते ही उसके साथ नाचने लगा तभी दादी कमल के पास आके नाचने लगी और सेमेंथा , साहिल के साथ तब...
Song
सेमेंथा – वफ़ादारी की वो रश्में, निभाऐंगे हम-तुम क़समें...एक भी साँस ज़िंदगी की, जब तक हो अपने बस में...जब कोई बात बिगड़ जाए...जब कोई मुश्क़िल पड़ जाए...तुम देना साथ मेरा, ओ हमनवा...ना कोई है, ना कोई था, ज़िंदगी में तुम्हारे सिवा...तुम देना साथ मेरा, ओ हमनवा....
साहिल – दिल को मेरे हुआ यक़ीं, हम पहले भी मिले कहीं...सिलसिला ये सदियों का, कोई आज की बात नहीं...दिल को मेरे हुआ यक़ीं, हम पहले भी मिले कहीं सिलसिला ये सदियों का, कोई आज की बात नहीं...जब कोई बात बिगड़ जाए...जब कोई मुश्क़िल पड़ जाए...तुम देना साथ मेरा, ओ हमनवा...ना कोई है, ना कोई था, ज़िंदगी में तुम्हारे सिवा...तुम देना साथ मेरा, ओ हमनवा...तुम देना साथ मेरा, ओ हमनवा
गाना खत्म होते ही सभी तालिया बजाने लगे तब सेमेंथा मुस्कुराते हुए आगे चली गई उसके पीछे साहिल भी निकल गया साथ में कमल भी पहुंच गए दादी के पास साहिल , कमल और सेमेंथा उसी जगह बैठे बाते कर रहे थे जहां साहिल ने सेमेंथा को मिलाया कमल से साथ में दादी से कुछ देर बात करने के बाद परिवार की सभी औरते दादी के पास आ गई थी लेकिन तब तक साहिल और सेमेंथा वहां से दूसरी जगह चले गए टहलते हुए तब...
दादी – (कमल से) तेरे काम का क्या हुआ...
कमल – कुछ समझ नहीं आ रहा है दादी क्या करू कैसे करूं मै....
दादी – क्यों क्या हो गया जैसा तूने कहा था वैसा ही हुआ ना सब कुछ....
कमल – हा दादी लेकिन आज साहिल को सालों के बाद मैने इतना खुश देखा है आज से पहले साहिल खुश था लेकिन ऐसे लगता था जैसे दिखावा कर रहा हो लेकिन आज उसे देख के कोई भी कह सकता है कि साहिल आज बहुत खुश है बस डर इस बात है कि कही माफी वाली बात से फिर से साहिल का मन ना खराब हो जाएं....
दादी – (मुस्कुरा के) ऐसा क्यों सोचता है पगले अच्छा सोचेगा तो अच्छा ही होगा बेटा यकीन कर अपने आप पर अगर सफलता हासिल करनी है तो....
कमल – हा दादी....
जबकि इधर लड़कियों की तरफ....
कविता – (गुस्से में शिवानी , सुरभि, शबनम , रचना और पायल से) कौन है ये देख रही हूँ जब से ये (सेमेंथा) यहां आई है तब से साहिल भाई का ध्यान उसपे ही है....
रचना – पता नहीं मैने तो इसे आज पहली बार देखा है गांव में...
शिवानी – मानना पड़ेगा है तो ये बहुत खुबसूरत शायद इसने अपनी खूबसूरती और मीठी बातों के जाल में फंसाया होगा साहिल को तभी तो साहिल गाना गाते वक्त इसपर ज्यादा ध्यान दे रहा था...
कविता – (गुस्से में) अभी जाके पता करती हु कौन है ये चुड़ैल...
बोल के कविता गुस्से में साहिल की तरफ जाने लगी जबकि इस तरफ जब साहिल और सेमेंथा ये दोनों दादी के बगल से उठ के दूसरी तरफ जा रहे थे
तब परिवार की बाकी औरते दादी के पास आई थी लेकिन उसमें सुमन नहीं थी वो साहिल को वहां से जाता देख जो लड़की का हाथ अपने हाथ में पकड़े जा रहा था उसके पास चली गई थी तब...
सुमन – (साहिल से) सुनो...
साहिल – (अपने पीछे सुमन को देख) बोलिए कोई काम था...
सुमन – (क्या बोले बात कुछ समझ ना आते हुए हड़बड़ी में) वो मै ये कह रही थी कि खाना खा लो....
साहिल – बाद में खा लूंगा मै...
बोल के साहिल आगे जाने लगा सेमेंथा के साथ तब...
सुमन – (साहिल से) ये कौन है मुझसे नहीं मिलवाओगे....
साहिल – (बिना किसी रिएक्शन से) सेमेंथा इनसे मिलो इनका नाम मिस सुमन है जिस घर में मै परसो जा रहा हूँ वो इनका घर है बस 2 से 3 साल के लिए रहना पड़ेगा इनके घर में मुझे....
सुमन – (मुस्कुरा के) घर सिर्फ मेरा नहीं हम सबका है और दादी ने तो हमेशा के लिए...
साहिल – (बीच में) जब तक मेरी पढ़ाई चल रही है तब तक के लिए बस (सुमन से) आपको कोई काम था मुझसे...
सुमन – (साहिल के इस तरह बोलें से हड़बड़ाहट में) मै आपको खाने के लिए बुलाने आई थी...
साहिल – अभी मेरी इच्छा नहीं है बाद में....
बोल के साहिल आगे निकल गया सेमेंथा के साथ तभी जब ये हो रहा था तब कविता आ गई जिसे सुमन ने रोक लिया तब...
सुमन – कहा जा रही है तू....
कविता – बात करने जा रही हूँ मै इस चुडैल से है कौन है ये जब से आई है पार्टी में तब से देख रही हूँ इसे साहिल भाई पर जाने क्या जादू कर दिया है इस चुडैल ने...
सुमन – ये तू क्या बोले जा रही है होश में तो है ना तू...
सुमन की बात सुन कविता तो तब समझ आया कि वो गुस्से में क्या करने जा रही थी तब अपने मन को शांत कर सुमन से बोली...
कविता – ये है कौन मां....
सुमन – पता नहीं कौन है ये लड़की जब से मै भी देख रही हूँ इसको पार्टी में आई है तब से साहिल के ध्यान इसपर ही है वही जानने आई थी मै लेकिन यहां तो साहिल दूसरी बात बोलने लगा....
कविता – दूसरी कौन सी बात मा....
सुमन – यही की जब तक साहिल की पढ़ाई चल रही है तब तक रहेगा साहिल घर में....
कविता – ऐसा नहीं हो सकता मां दादी ने तो कहा था हमेशा के लिए घर आयेंगे भाई फिर ये बात क्यों बोली उन्होंने....
सुमन – मुझे खुद समझ नहीं आ रही ये बात फिलहाल इन सब बातों के लिए अभी बहुत वक्त है कविता मै जी जान लगा दूंगी लेकिन साहिल को कही जाने नहीं दूंगी....
कविता – मै साथ हूँ मा कही नहीं जाने देगे हम भाई को चाहे कुछ भी करना पड़े....
साहिल की तरफ...
सेमेंथा – तुमने ऐसा क्यों कहा उनसे की पढ़ाई के बाद चले जाओगे वापस...
साहिल – क्या करूंगा वहा पर यार वैसे भी मै सिर्फ दादी के लिए जा रहा हूं 2 से 3 साल बाद कही दूसरी जगह एडमिशन लेलुंगा क्योंकि वहां पे भी ये लोग ज्यादा दिन रहने थोड़ी देगे मुझे....
सेमेंथा – ऐसा नहीं है साहिल लोग बदलते भी है भले कोई मुझे देख नहीं सकता था आज से पहले तक लेकिन इतने वक्त पे मैने देखा है ये सब....
साहिल – जाने दो इन बातों को यार कल के लिए हम आज क्यों सोचे कल की कल देखेंगे....
सेमेंथा – हम्ममम सही कहा तुमने चलो अब मै चलती हूं खाने का वक्त हो गया है सबका तुम भी जाओ...
साहिल – कहा जाओगी तुम...
सेमेंथा – (मुस्कुरा के) जाना कहा है मुझे रहूंगी यहीं बस तुम्हारे इलावा कोई देख नहीं पाएगा मुझे....
साहिल – (मुस्कुरा के) ठीक है जल्दी मिलता हूँ फिर बाते करेंगे...
बोल के सेमेंथा हवेली से बाहर चली गई बाहर आते ही चारों तरफ देख सेमेंथा गायब हो गई वहां से इधर साहिल निकल गया सबके पास खाने के लिए जबकि अभी भी काफी मेहमान थे वहां पर धीरेन्द्र और राघव उनके साथ लगे हुए थे तभी दादी ने साहिल को अपने पास बुलाया तब...
दादी – (साहिल से) वो कौन थी...
साहिल – (मुस्कुरा के) दोस्त थी दादी...
दादी – अच्छा कैसी दोस्त थी वो और कब बनी तेरी दोस्त मुझे बताया नहीं तूने...
साहिल – वो दादी जब गांव आए थे हम तब मै मिला था उससे बहुत अच्छी लड़की है वो...
दादी – (मुस्कुरा के) हम्ममम देखा मैने कैसे तू बाते कर रहा था उससे...
दादी की बात से साहिल शर्मा गया तब....
दादी – तूने मिला तो दिया लेकिन अच्छे से बात ही नहीं कर पाई उससे हा उसका नाम बड़ा प्यार है , फिर कब मिलवा रहा है सेमेंथा से...
साहिल – जब शहर चलेंगे तब वो भी एडमिशन लेने वाली है उसी कॉलेज में जहां पर मै लूंगा...
दादी – ओह हो तो बात यहां तक आ गई है हम्ममम...
साहिल –(शर्मा के) दादी आप भी न...
दादी – चल चलके खाना खाते है बहुत थक गए है आज सब चल जल्दी से सोते है कल भी जल्दी उठना है कल दिन में शादी है...
बोल के दोनों चले गए खाना खाने सबके साथ तब...
कमल – (खाना खाते वक्त साहिल से) क्यों बे तूने बताया सेमेंथा को कल शादी के बाद हम सब जाने वाले है यहां से शहर में...
साहिल – हा बता दिया उसे और वो भी शहर में आएगी पड़ने हमारे साथ कॉलेज....
कमल – अबे साला तूने पहले से तैयारी कर ली बे और मुझे कब बताने वाला था तू....
साहिल – बताया तो बे अभी तुझे ये सब छोड़ ये बता अकेले खाना खा रहा है अवनी नहीं खा रही तेरे साथ खाना...
कमल – हा यार खाने के साथ जब तक भेजा ना खाने को मिले मेरा पेट कहा भरता है....
साहिल – अच्छा मेरा भेजा खा के ही पेट भरता है तेरा....
कमल – क्या करू तूने आदत बिगाड़ दी है मेरी...
साहिल – कमीना साला...
बोल के हंसने लगे तभी सबका खाना हो गया था तब सब हवेली के अन्दर जाने लगे अपने कमरे की तरफ सोने के लिए कमल और साहिल एक साथ जा रहे थे सबसे आखिर में हवेली के अन्दर तब पीछे से एक लड़की ने साहिल हाथ पकड़ लिया....
लड़की – (साहिल का हाथ पकड़ के) साहिल सुनो...
साहिल – (पलट के अपने सामने रचना को देख) हा बोलिए....
साहिल का इतना बोलना था कि रचना तुरंत गले लग गई साहिल के....
साहिल – (रचना को इस तरह देख) अरे ये क्या आप ऐसे दूर रहिए आप मुझसे कही बदबू ना आने लगे आपसे...
इसके बाद भी रचना अलग न हुई तब....
साहिल –(थोड़ा रुक के) परेशानी क्या है आपकी अगर दिक्कत हो रही मेरे यहां होने से तो चला जाता हु मै....
रचना – (साहिल से अलग हो उसका कॉलर पकड़ के) क्यों जाओगे तुम यहां से जिसको जाना चाहिए था उसे जाने से रोक दिया तुमने जिसने गलत किया उसे तुमने कोई सजा नहीं दी फिर हमे क्यों सजा दे रहे हो तुम...
साहिल – भला मै कौन होता हूँ किसी को सजा देने वाला मैने तो कुछ कहा नहीं किसी को भी (कमल से) क्यों कमल क्या मैने किसी से कुछ बोला है अभी तक...
रचना – (आंख में आंसू लिए) तो क्यों सजा दे रहा है हमें मानती हूँ गलती हुईं है मुझसे अनजाने में....
साहिल – (मुस्कुरा के रचना के आंसू को अपने हाथ से पोछ के) सच कहा आपने 12 सालों से अनजाने में ही गलती हो रही है सबसे और पिछले 12 सालों से अनजाने में ही तो एक बच्चे ने परिवार के होते हुए भी उनके बिना सजा काट रहा है और जब भी उस बच्चे को कोई याद करता है तो सिर्फ गालियों में या कातिल के नाम से और ये सब अनजाने में ही तो हो रहा है लेकिन आपकी क्या गलती इसमें आपने थोड़े कुछ किया मेरे साथ बस गटर छाप ही कहा था आपने कोई बात नहीं जानता हूँ अनजाने में बोला था आपने ठीक है माफ किया मैने आपको जाइए आराम कीजिए अब...
बोल के साहिल जाने लगा जबकि साहिल द्वारा रचना को कही ये बात दूसरी तरफ खड़ी शिवानी , सुरभि , पायल और शबनम चारों ने सुन ली जिसके बाद किसी की हिम्मत नहीं हुई आगे आके साहिल से बात करने की जबकि साहिल की कही बात से रचना रोने के सिवा कुछ नहीं कर पाई तब चारों रचना के पास आके उसे चुप करा के कमरे में ले गए इस तरफ साहिल और कमल अपने कमरे में आके गैलरी में खड़े होके सिगरेट पीने लगे थे तब...
कमल – तू ठीक है....
साहिल – हा मुझे क्या होगा बे...
कमल – रचना बुआ से बात कर रहा था तभी पूछा तेरे से....
साहिल – तो तू क्या चाहता है क्या करू मै , अच्छे से जनता है कल के बाद जरूरी नहीं के हम सब मिले कभी दोबारा और वैसे भी जब इतने सालों में नहीं सोचा किसी ने की मै जिंदा हूँ या मर गया तो आज किस लिए और क्यों पड़े है मेरे पीछे इस तरह से , क्या मैं इंसान नहीं हूँ मेरी कोई फीलिंग्स नहीं है , क्या इन 12 सालों में मुझे तकलीफ नहीं हुई , इस बात से की मेरे अपने होते हुए भी किसी ने भी मुझसे मिलने की कोशिश नहीं की क्या मै नहीं चाहता था कि मेरा जन्मदिन धूम धाम से मने पूरे परिवार के साथ क्या मै नहीं चाहता था कि मै भी सबकी तरह अपने परिवार के साथ घूमूं और कहा थे उस वक्त ये लोग जब हर साल ये लोग पूरे परिवार के साथ पिकनिक मनाने जाते थे अलग अलग शहरों में और विदेश में कौन था मेरे साथ इन सब में से , कौन था मेरे साथ इन सब में जब मुझे अटैक आते थे कोई नहीं था कमल कोई नहीं सिर्फ दादी थी और तू था हर वक्त साथ मेरे और कोई नहीं...
कमल – छोड़ तू गुस्सा मत हो यार जाने दे ये सब....
साहिल – नहीं यार मै गुस्सा नहीं हूँ इस वक्त किसी से भी बस आज मैं इन लोगों में एक तड़प देख रहा हूँ वही तड़प जो 12 साल पहले मेरे अन्दर थी मै तो धीरे धीरे सम्भल गया था क्योंकि मेरे साथ तू है दादी है और इनके साथ तो पूरा परिवार है (हंसके) मुझे नहीं लगता इनको 12 दिन भी लगेगे संभलने में देखना भूल जाएंगे जल्दी ये लोग सब कुछ क्योंकि अभी कुछ दिन बाद फिर से ये इनका पूरा परिवार जा रहा है घूमने...
बोल के हंसने लगा साहिल जिसे कमल सिर्फ देख रहा था चुप चाप...
कमल – हम्ममम चल सोते है यार....
बोल के दोनों सोने चले गए बेड में जहां साहिल बेड में लेटते आंख बंद कर ली थी उसने दूसरी तरफ कमल सिर्फ गौर से देख रहा था साहिल को काफी देर तक देखता रहा तब...
कमल – (साहिल को हिलाते हुए) साहिल ओह साहिल...
लेकिन साहिल गहरी नींद में सो गया था तब कमल बेड से उठ के बाल्कनी में चला गया बाहर आते ही कमल सीधा गया निधि वाले कमरे की तरफ जहां सुमन अभी भी बाल्कनी में खड़ी थी तब से जब साहिल और कमल सिगरेट पी रहे थे तब कमल ने देख लिया था सुमन को जो बाल्कनी में एक तरफ खड़ी थी साहिल को देख रही थी तब कमल गया सुमन के पास जाके...
कमल – (सुमन से) आप सोए नहीं अभी तक...
सुमन – (हल्का मुस्कुरा के) बस जा रही थी सोने और तुम सोए क्यों नहीं अभी तक...
कमल – ऐसे ही नींद नहीं आ रही थी मुझे और मै जनता हूँ की आप हम दोनों को देख रही थी क्योंकि मैने आपको देख लिया था इसीलिए आपके पास आ गया...
सुमन – साहिल सो गया...
कमल – हा सो गया साहिल मुझे आपसे एक बात कहनी है....
सुमन – हा बोलो ना...
कमल – मै जनता हूँ आपने हमारी सारी बाते सुनी है मै बस ये कहने आया हूं कि साहिल का दिल बेचैन है इस वक्त , वो अभी कुछ भी समझ नहीं पा रहा है इन सब बातों को , वो चाहे कुछ भी बोल दे लेकिन सच ये है वो कभी भूला ही नहीं अपने परिवार को बस इस बात को एक्सेप्ट नहीं कर पा रहा है साहिल , आप समझ रही है ना बात मेरी इस वक्त साहिल के लिए ये सिर्फ एक सपने जैसा है उसे लगता है जब वो जागेगा तो ये सपना टूट जाएगा शायद इसीलिए वो ये सब कर रहा है....
सुमन – कमल मुझसे बेहतर तुम जानते हो साहिल को तुम्ही कुछ बताओ ऐसा क्या करू मै साहिल के लिए जिससे उसे यकीन हो कि ये सच है सपना नहीं....
कमल – अगर आप साहिल के लिए कुछ करना चाहते हो तो उसे जो करना है करने दीजियेगा न उसे रोकिए न टोकिये क्योंकि साहिल चाहे जैसा भी है वो किसी को दर्द में नहीं देख सकता है कभी , बाकी अब सब आपके ऊपर है आप कैसे उसे हैंडल करते हो....
बोल के कमल जाने लगा कमरे में...
जबकि इस तरफ जब कमल कमरे से गया था सुमन से मिलने तब उसके जाते ही रचना , शिवानी , पायल , शबनम और सुरभि आ गए साहिल के कमरे में जहां साहिल बेड में आंख बंद करके सो रहा था तब रचना साहिल के पास आके उसके सिर पे हाथ फेर रही थी तब उसकी आंख से आंसू निकल गिर गया साहिल के चेहरे पर तभी साहिल की नींद खुल गई अपने सामने सभी लड़कियों को देख उठने जा रहा था तभी....
रचना – (साहिल के सिर पे रथ रख के) लेटा रह चुप चाप कुछ मत बोलना बस सिर्फ एक बार सुन ले बात मेरी...
जिसके बाद साहिल कुछ नहीं बोलता बस चुप रहता है तब...
रचना – जब तू छोटा सा था तब भाभी अक्सर यहां आती थी उस वक्त मै तुझे अपनी गोद में लेके पूरी हवेली घुमाया करती थी उस वक्त तू बहुत शरारती था हर वक्त बस मेरी गोद में रहता था जब भी भाभी की गोद में जाता तो रोने लगता था जनता है उस वक्त तेरे दादा मुझे बहुत प्यार करते थे अपनी बेटी की तरह बिल्कुल जब कभी मेरे पिता से मै किसी चीज के लिए जिद करती वो नहीं दिलाते तो तेरे दादा जी मुझे दिलाते थे वो सब मै भी उनसे बहुत प्यार करती थी अपने पिता से भी ज्यादा जब वो यहां आते मै हर वक्त उनके साथ रहती खाना खाती गांव घूमती थी सब कुछ अच्छा चल रहा था फिर एक दिन की बात है रात के वक्त फोन आया हमारे घर में उस वक्त मैंने फोन उठाया तब पता चला मुझे बाबू जी के बारे में हम फौरन निकल गए शहर के लिए वहां जाते ही मैने बाबू जी...
बोल के रोने लगी रचना जिसे देख जाने साहिल को क्या हुआ उसने अपना हाथ आगे कर उसके आसू पोछे जिसे देख रचना ने साहिल का हाथ पकड़ के चूमने लगी साथ रोने लगी....
साहिल – फिर क्या हुआ....
रचना – (रोते हुए) बाबू जी जा चुके थे हमें छोड़ के...
MINI FLASH BACK
उसके बाद सारा क्रिया कर्म होने के बाद एक दिन सभी की बाते हो रही थी तब घर में पुलिस आई तब तेरे पापा (रनवीर) उनसे कुछ बोलने जा रहे थे तभी तेरे बड़े पाप (राजेश) ने बीच में आ गए और पुलिस वालो को अलग ले जाके बात करने लगे उसके बाद पुलिस चली गई तब तेरे बड़े पापा हम सबके पास आए तब...
रनवीर – (राजेश से) आपने मुझे क्यों रोका भइया बात करने देते मुझे पुलिस से उनको भी पता चलता किसने किया ये सब....
राजेश – दिमाग खराब है क्या तुम्हारा जानते भी हो इसके बाद क्या होता कितनी बदनामी होती हमारी और किस किस को सफाई देते फिरते हम....
रनवीर – तो आप क्या चाहते है ये जानते हुए भी कि किसने मारा है पिता जी को उसे छोड़ दे....
राजेश – होश में आओ रनवीर भूलो मत वो तुम्हारा बेटा है हमारे घर का बच्चा है वो...
रनवीर – मर गया मेरे लिए वो कोई नहीं है मेरा बेटा मेरी सिर्फ एक बेटी है कोई बेटा नहीं है मेरा...
साहिल को देख जो अपनी दादी के साथ बैठा था गुमसुम उसके पास जाके एक खींच के चाटा मारा उसे तब राजेश कुछ बोलने जा रहा था के अचानक से दादी गुस्से में अपनी जगह से खड़ी होके....
दादी – (गुस्से में रनवीर से) बहुत हो गया तेरा तमाशा रनवीर अब अगर मेरे बच्चे पे हाथ उठाया या एक शब्द भी किसी ने बोला साहिल के लिए तो मै भूल जाऊंगी तुम सब कौन हो , रही बात साहिल की नहीं जरूरत है इसे किसी की , मेरे बच्चे को मै पालूंगी नहीं जरूरत है मुझे किसी के सहारे की प्रताप सिंह की बीवी हूँ मै आज से साहिल मेरा पोता नहीं मेरा बेटा है प्रताप सिंह का बेटा समझे...
इतना बोल दादी ने तुरंत साहिल का हाथ पकड़ के उसे अपने साथ अपने कमरे में ले जाने लगी तभी बीच में रुक...
दादी – (सबको देख के) और एक बात कान खोल के सुन लो सब अगर कभी गलती से भी मेरे बच्चे की तरफ आंख उठा के देखा या उसे हाथ भी लगाया तुममें से किसी ने तो ढूंढ लेना अपने लिए एक नया घर समझे...
FLASH BACK END
रचना – इतना बोल के दादी तुझे कमरे में ले गई और दरवाजा बंद कर दिया उसके बाद सभी आपस में बात करने लगे तभी सभी को पता चला कि तूने मारा बाबूजी को...
बोल के रचना कुछ सेकंड चुप रही फिर....
रचना – उसके बाद से आज इतने सालों बाद मै मिली सभी से जब मेरी शादी हुई थी तब तेरे परिवार से कोई नहीं आया था सिर्फ (शिवानी , सुरभि , पायल और शबनम को तरफ इशारा करके) ये लोग आए थे अपनी फैमिली के साथ और दादी तब पता चला मुझे की बाकी के लोग फैमिली टूर पर गए है ये उनका हर साल का था प्रोग्राम सिर्फ दादी को छोड़ के क्यों की जब सब चले जाते थे तब दादी तेरे पास आ जाती थी मेरी शादी जल्द बाजी में हुई थी तब किसी को पता नहीं था इस बात का सिर्फ दादी आई थी तब मेरी शादी में (अपने छोटे बच्चे को शिवानी से अपनी गोद में लेके) साहिल मै अपने बच्चे के सिर पर हाथ रख के कसम खाती हूँ मानती हूँ मैने तुझसे या किसी से उस दिन के बाद संपर्क नहीं किया मानती हूँ मै तुझसे भी नहीं मिली लेकिन मैने सपने में भी कभी तुझे गलत नहीं बोला हा जब तू उस दिन मिला मुझे तब मुझे बाबू जी की याद आगई बस इसलिए मैं बिना बात किए चली गई वहां से तुझसे कुछ बोले ये भी मानती हूँ उस दिन गलती से मेरे मू से तेरे लिए वो सब निकल गया लेकिन मैने कभी तुझसे नफरत नहीं की साहिल कभी नहीं...
बोल के रोने लगी रचना तब साहिल बेड से उठ के रचना के बेटे को अपनी गोद में लेके...
साहिल – (छोटे बच्चे को देख जो सो रहा था मुस्कुरा के) बहुत प्यार है आपका बेटा बुआ बिल्कुल आप पर गया है...
इतना सुन रचना ने साहिल को गले लगा लिया....
रचना – माफ कर दे मुझे साहिल अकल की आंधी थी मै इतने सालों से तुझसे दूर रही इतना कुछ तेरे साथ हुआ उसके बाद भी तुझे अपनी नफरत एक तरफ करके पहले परिवार के बच्चों के बारे में सोचा तू सच में बहुत अच्छा है साहिल तेरे सामने हम सब बेकार है गटर छाप है हम तू नहीं तू बिल्कुल सही है साहिल....
साहिल – बस करो रो मत देखो आपका बेटा उठा जाएगा ऐसे तो मत रो आप प्लीज मै नाराज नहीं हूं आपसे बुआ सालों बाद तो मुझे पता चला कि परिवार क्या होता है कैसा होता है उसका प्यार अगर दादा जी मुझे यहां नहीं लाते तो मै कभी ना जान पता इस बात को , आपने कोई गलती नहीं की बुआ भूल जाओ उसे एक बुरा सपना समझ के....
रचना – तू भी बिल्कुल अपने दादा की तरह है साहिल वो भी पहले दूसरों के बारे में सोचते थे और तू भी (चुप होके) साहिल मेरी तरह ये चारों भी बहुत प्यार करते है तुझसे कसम खा के कहती हूँ साहिल इनके दिल में कोई नफरत नहीं है तेरे लिए अगर सच में तूने मुझे माफ कर दिया तो प्लीज अपनी इस बुआ के लिए इन्हें भी माफ कर दे...
साहिल – बुआ मेरे दिल में आपके और इनके लिए कभी कुछ था ही नहीं तो नफरत कैसी उल्टा मै आपसे और इनसे पहली बार मिला हूँ बुआ मेरे दिल में इनके लिए कभी कोई मैल था ही नहीं...
इतना सुनना था कि चारों लड़कियां रोते हुए साहिल के गले लग गई एक साथ...
शिवानी – मेरा इतना प्यार करने वाला प्यारा भाई है मुझे पता नहीं था वर्ना मैं कब का तुझे अपने पास रख लेती मेरे भाई....
पायल – साहिल भाई मै कसम खाती हूँ अपने भाई का साथ मरते दम तक निभाऊंगी चाहे कोई कुछ बोले...
सुरभि – हा भाई हम आपका साथ कभी नहीं छोड़ेंगे....
साहिल – चलिए ठीक है अब आप सब आराम करिए रात बहुत हो गई है कल सुबह जल्दी उठना है शादी है दिन की....
रचना – हा ठीक है , साहिल एक बात बोलूं....
साहिल – हा बोलो ना बुआ....
रचना – मुझे पता है कल शादी के बाद तू सबके साथ शहर जा रहा है अगर तेरा मन ना लगे वहां तो तू मेरे पास आ जाना और इस बारे में कुछ भी बोलने की जरूरत नहीं अगर सच में बुआ मानता है मुझे तो मान जाना मेरी बात...
साहिल – (मुस्कुरा के) ठीक है बुआ अगर ऐसा हुआ तो आपके पास आ जाऊंगा....
बोल के सभी मुस्कुराते हुए जाने लगे थे तभी सबकी नजर कमल पर पड़ी जो बाल्कनी में खड़ा सबको देख रहा था मुस्कुराते हुए तब...
रचना – (कमल के गले लग के) थैंक यूं कमल...
बोल के अलग हो गई मुस्कुराते हुए...
कमल – कोई बात नहीं बुआ...
जिसके बाद बाकी चारों भी कमल के गले लग के उसका शुक्रिया अदा किया तब....
पायल – (कमल से) मैने एक भाई मंगा था ऊपर वाले से उसने मुझे आज दो भाई दे दिए थैंक यूं कमल...
बोल के सभी चले गए अपने कमरे में आराम करने तब....
साहिल – क्यों बे तू इस वक्त कहा चला गया था अपनी गांड़ मराने के लिए कही अवनी के पास...
कमल – (मुस्कुरा के) अबे नहीं बे इंतजाम करने गया तेरी गाड़ की खुजली दूर करने के लिए...
साहिल – क्या मतलब है बे...
कमल – मै कही नहीं गया नींद नहीं आ रही थी इसीलिए बाल्कनी में आया था तभी देखा ये सब आ रही है तेरे पास तो मै एक जगह छुप गया था बे ये सब छोड़ अब बता क्या बाते हो रही थी...
फिर साहिल सारी बात बताता है कमल को...
कमल – अच्छी बात है यार अच्छा लगा मुझे तेरे लिए तू खुश तो है ना...
साहिल – हम्ममम खुश हूँ यार....
कमल – (साहिल के इस जवाब को समझ के) देख अभी से आगे के बारे में मत सोच जो है उसमें खुश रह तू बस आगे का आगे देखेंगे हम दोनों ठीक है...
साहिल – ठीक है...बोल के दोनों सो गए....
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जारी रहेगा