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Thriller शतरंज की चाल

Riky007

उड़ते पंछी का ठिकाना, मेरा न कोई जहां...
22,649
45,596
259
#अपडेट ४


अब तक आपने पढ़ा -


कुछ देर बाद दरवाजा खुला और जो भी अंदर आया उसे देख कर मेरे दिल में एक हलचल सी होने लगी....


अब आगे -


काली साड़ी में लिपटी वो...


दूध में केसर घोल दी गई हो जैसे, वैसा रंग, जो काली साड़ी में और कहर ढा रहा था, छरहरा बदन, जो हर उस हिस्से पर सुडौल था, जहां होना चाहिए था, दरम्याना कद और चेहरे पर मासूमियत और आकर्षक मुस्कान लिए वो मीटिंगरूम में आई, और मुझे लगा जैसे एक सेकंड के लिए मेरे दिल की धड़कन रुक गई हो।


अंदर आते ही उसने चारों ओर देखा और मेरी तरफ ही देख कर आने लगी, मेरी नजरें उस बला से हट ही नहीं रही थी। ये क्या हो गया मुझे?


वो मेरी तरफ आ कर करण के पास वाली सीट पर बैठ गई और उसे सर झुका कर अभिवादन किया। मैं ये देख कर सोच में पड़ गया कि क्या ये मेरे ही डिपार्टमेंट में है? तो पहले देखा क्यों नहीं कभी इसे?


तभी मीटिंग रूम का दरवाजा फिर से एक बात खुला और मित्तल सर अंदर आए, सारे लोग अपनी कुर्सी छोड़ कर खड़े हो गए। ये हलचल देख मेरे भी होश वापस आए और मैने अभी फिलहाल उसकी ओर देखने लगभग बंद ही कर दिया।


सर ने आते ही मीटिंग चालू कर दी।


"गुड मॉर्निंग ऑल, सबसे पहले आइए मिलते हैं अपनी टीम में नई ज्वाइन हुई नेहा वर्मा से, ये HFC बैंक से आई हैं और वहां क्लाइंट रिलेशन की सीनियर मैनेजर थी, अभी 15 दिन पहले ही ज्वाइन किया है। यहां पर ये AGM बैंकिंग होंगी, करण अब से DGM बैंकिंग का कार्यभार संभालेगा।"


सब लोग नेहा को ग्रीट करते हैं। मेरे मन में तो लड्डू फूटने लगा कि ये तो मेरे ही डिपार्टमेंट में हैं।



"जैसा आप सब जानते हैं कि ये मीटिंग नई ऑटोमेटेड ब्रांच के भविष्य को देश के अन्य शहरों में देखने के बारे में है। तो इसके लिए श्रेयन ने कुछ योजनाएं बनाई है। श्रेयन इस बारे में आप बताइए।"


श्रेयन, "मैने इस बारे में 2 तरह का प्लान सोचा है, पहला एक प्रिंट और टीवी विज्ञापन जो पूरे देश में चलेगा। और दूसरा, हम कुछ ग्राउंड लेवल पर संपर्क करके इसके भविष्य को देखें कि देश के किन शहरों में इसे पहले खोला जा सकता है। हालांकि मुझे लगता है कि पहले हमें दूसरे प्लान से शुरू करना चाहिए, जिससे हमें एक आइडिया लग जाय, और उसके बाद ही हम प्रिंट और टीवी विज्ञापन पर खर्च करें।"


मित्तल सर, "बढ़िया, मैं भी यही कहने वाला था कि पहले हमें ग्राउंड वर्क ही करना चाहिए, मेरे खयाल से इसमें भी तुमने कोई प्लान बनाया होगा?"


"जी बिलकुल, मेरे खयाल से हमे 2 2 के ग्रुप में देश के हर हिस्से में अपनी एक टीम भेजनी चाहिए जो देश के लगभग हर बड़े शहर में इसके पोटेंशियल को देखे जाने। चूंकि अपनी ब्रांचेस लगभग हर शहर में हैं तो वहां पर संपर्क साधने में दिक्कत नहीं आएगी। इसके लिए मेरे खयाल से प्रिया और करण साउथ में, शिविका और महेंद्र, DGM real estate को पूर्वी भारत में, मनीष और राघव, DGM finance को नॉर्थ में, और मैं और नेहा पश्चिम में जा कर कुछ शहरों में मीटिंग रखे, और वहां के लोगों को इसके कॉन्सेप्ट से परिचित करवाएं, जिससे पता चले कि वह लोग किस हद तक इसे पसंद करते हैं।"


मित्तल सर, "परफेक्ट प्लान है श्रेयन, बस मनीष के साथ नेहा को भेजो और राघव को तुम अपने साथ रखो, क्योंकि मनीष और राघव दोनों का कस्टमर रिलेशन में ज्यादा experience नहीं है, वहीं नेहा का एक्सपीरियंस इसी फील्ड में है।"


श्रेयन, "जी ये सही रहेगा, इस बारे में मैने ध्यान नहीं दिया। मनीष के साथ नेहा और मेरे साथ राघव जाएंगे फिर।"


मित्तल सर, "चलो फिर हर जोन में कुछ शहरों को भी चुन लेते हैं कि कहां कहां इसके टारगेट कस्टमर्स मिल सकते हैं।"


फिर सारे लोगों ने देश के कई शहरों की लिस्ट बनानी शुरू कर दी, और अंत में हर जोन से 5 शहरों को चुना गया। मेरे हिस्से में लखनऊ, दिल्ली, चंडीगढ़, देहरादून और शिमला आए।


सारी टीम को हर शहर में 2 से 3 दिन दिए गए और लगभग 15 दिन का टूर बना।


श्रेयन, "आज 15 दिसंबर है और हम सब यहां से 22 दिसंबर को निकलेंगे। शिविका सारी टीम का अरेंजमेंट कर दो।"


शिविका ने फौरन अपने डिपार्टमेंट में इसकी सूचना दे दी।


मित्तल सर, "मनीष, अब तुम अपनी प्रेजेंटेशन एक बार दे कर सबको बता दो कि वहां क्या क्या बताना है, और आप लोग इस पर जितने भी सवाल हो सकते हैं वो पूछ लीजिए, ताकि वहां प्रेजेंटेशन देते समय आपको की दिक्कत न आए।"


फिर मैने बैंक के बारे में प्रेजेंटेशन दी, और सबने कई तरह के सवाल किए और मैने उनका जवाब दिया, जिसे सब लोगों ने नोट कर लिया।


अब मीटिंग खत्म हो गई थी और सब लोग धीरे धीरे बाहर निकलने लगे थे।


नेहा ने मेरे पास आ कर, "गुड मॉर्निंग सर, मुझे लगा मनीष मित्तल कोई मिडिल एज के होंगे, मैने नहीं सोचा था कि इस उम्र में आप इतना बड़ा अचीवमेंट कर लेंगे।"


मैने भी मुस्कुराते हुए कहा, "ये कोई इतनी बड़ी बात भी नहीं है, वैसे भी पूरी टीम ही young और energetic है साथ ही साथ मित्तल सर और महेश सर का एक्सपीरियंस भी है हम सबके साथ।" ये बोलते हुए मेरी दिल की धड़कन तेज हुई जा रही थी। आज हो क्या रहा था मेरे साथ ये?


नेहा, "अच्छा सर मैं अब चलती हूं।"


मैं उसे जाता देख रहा था।




"वैसे दिखने में तो बढ़िया है न?"


मैने हड़बड़ा कर पीछे देखा, ये शिविका थी, अपनी चिरपरिचित मुस्कान के साथ उसने मुझे आंख भी मारी।


"क्या प्लान बना है! खास कर तुम्हारा मनीष, ये उत्तर भारत की ठंड का मौसम, और ऐसी लोकेशंस, ऐसा लग रहा है ये बिजनेस टूर नहीं अंकल ने तुम्हे हनीमून टूर दिया है।"


मैने उसे आंख दिखाई।


"वैसे मजे करना।"


ये बोल कर वो भी निकल गई। और मैं भी अपने केबिन में आ गया। अब कुछ काम नहीं था मुझे तो मैने इंटरकॉम पर सर से बात की


"सर, क्या आज मैं जल्दी चला जाऊं?"


"बिलकुल मनीष, चाहो तो कल भी मत आना, वैसे भी पिछले 3 महीनों से आराम नहीं किया है तुमने।"


मैं ऑफिस से घर आ गया, शाम हो चली थी, फ्रेश हो कर मैं क्लब चला गया।


ये वापी का सबसे अच्छा क्लब था, जहां लगभग सारे इनडोर गेम्स के लिए एक बड़ा हॉल था, जिसे नेट लगा कर अलग अलग सेक्शन में बांटा गया था। हाल ऐसा था कि एक कोने से दूसरे कोने तक सब दिखाता था, उसी हाल के एक साइड स्विमिंग पूल और बार एंड रेस्टुरेंट थे। बिल्डिंग के पीछे समुद्र की तरफ गोल्फ कोर्स था।


मैं सीधे बैडमिंटन कोर्ट में पहुंचा जहां २ लोग पहले से ही खेल रहे थे। मैं बैठ कर मैच देखने लगा।


अभी बैठे कुछ देर ही हुई थी कि एक हाथ मेरे कंधे पर पड़ा, "आज फुर्सत मिल ही गई जीएम साहब को यहां आने की।"


ये समर सिंह था, वापी का ASP और कंपनी के बाहर मेरा इकलौता दोस्त।


"तुझे पता ही है कि मैं कहां बिजी था।"


"मुझे तो लगा कि मेरी भाभी ढूंढ ली है तुमने, और अब मुझे खुद ही मिलने आना पड़ेगा।"


हम ऐसे ही कुछ इधर उधर की बाते करते रहे, तब तक उन दिनों का मैच भी पूरा हो गया था। फिर हम चारों ने एक डबल खेल, जिसमे मैं और समर एक तरफ और वो दोनों दूसरी तरफ थे। ये मैच हमने 21-10 से जीता। उसके बाद वो दोनों चले गए।


समर,"देखा कैसे हराया मैने दोनों को।"


"तुमने? या मैने?"


"हाहाहा, चलो पता करते हैं। बेस्ट ऑफ थ्री।"


और इसी के साथ हम दोनो ने अपना मैच स्टार्ट कर दिया, और पहला मैच मैने बड़ी आसानी से 21-8 से जीता।


"देखा ASP साहब, किसने वो मैच जितवाया था!"


"बेस्ट ऑफ थ्री की बात हुई है GM साहब।"



और फिर दूसरा मैच शुरू हुआ और पहले 5 पॉइंट मैने आसानी से बनाए। फिर मेरी नजर समर के पीछे टेनिस कोर्ट पर पड़ी और....
 
Last edited:

Riky007

उड़ते पंछी का ठिकाना, मेरा न कोई जहां...
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मै 13 से स्टार्ट करुँगी. मतलब कल से. लोट ऑफ़ थैंक्स Riky

Bhai Bohot achcha likh rahe ho aap... mazedaar story hai.... set up and build up bohot achcha banaya hai.....
bas idhar udhar typo dekha kuch jagah baaki sab changa.....

Keep writing bhai...

Nic story

Awesome update and nice story

Bhai wah gajab ki story likh rhe ho aap read karne se he pata chal rha kafi Intresting story hone wali hai ye
.
Story me ab tak Monu urf Manish Mittal ne abhi tak sirf apne Mittal sir ke bare me kafi jankari batay hai
.
Or ab Mittal ki family najar aa rhe hai lagta hai ab story or bhi Jada Intresting hone wali hai
.
Keep It Up Riky007 bhai Superb update

Bohot badhiya👌🏻👌🏻 suruwati update hone ke naate kafi achi bhoomika banai hai, writing mistake per bhi dhyan do mitra,
Rahi baat story ka to great going brother👌🏻👌🏻

Awesome update
Ek behtrin kahani ki ruprekha teyar ho rahi hai,
Abhi tak ki kahani me ek aanath aur lawaris ladke ke ek rahis dildar Ameer se goud lene ke bad uske tarkki krne ka safar badiya dikhaya hai ,
Ab aage ke new ghatnakaram par sab rhega aage kya hota hai is kahani me

Bahut hi badhiya update diya hai Riky007 bhai....
Nice and beautiful update....

' शतरंज की चाल ' शिर्षक यही इशारे कर रहा है कि एल एन ग्रूप की अगाध धन संपदा की इनहेरिटेंस और लिगेसी के लिए चाल और षड्यंत्र की कहानी है यह ।
मित्तल फैमिली मे मनीष साहब की एन्ट्री दूध मे पड़े मक्खी की तरह है जिसे परिवार के कुछ लोग बर्दाश्त नही कर सकते । रजत मित्तल साहब ने मनीष को पावर देकर अवश्य कुछ अपनों के दिल पर हथौड़ा चलाया होगा । अब वह व्यक्ति रजत साहब के बड़े भाई महेश मित्तल साहब हैं या उनके साहबजादे या कोई कंपनी का पुराना कर्मचारी , यह देखना है ।
मनीष साहब इस कहानी के हीरो है इसमे जरा भी संदेह नही है लेकिन उनकी हीरोइन कौन है यह भी देखने लायक बात होगी ।
वह हीरोइन प्रिया मैडम या फिर शिविका मैडम या फिर वह आगंतुक लड़की होगी जिसे देखते ही मनीष साहब के दिल मे हलचल मच गया ।

शुरुआत बहुत ही बेहतरीन है । आउटस्टैंडिंग अपडेट रिकी भाई ।

अच्छी कहानी है, और थ्रिलर प्रीफिक्स में मेरी पहली कहानी भी पढ़ने ले लिए।

मनीष को मित्तल साहब के रूप में एक फरिश्ता मिला, जिसने उसकी जिंदगी को फर्श से अर्श तक पहुंचा दिया। लेकिन अच्छाई सबको पसंद नहीं आती। मनीष को ऐसे बढ़ते देखकर कई लोग खुश नहीं होंगे। अब ये कौन कौन है ये तो आगे ही पता चलेगा। कहानी का नाम भी ऐसा ही इशारा करता है।

बाकी अभी सिर्फ एक परिचय ही हुआ है पात्रों का तीन अपडेट में तो बाकी बातें आगे कही जाएंगी।
🙂🙂
अपडेट पोस्टेड 🙏🏼
 

khalid999

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Rekha rani

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अब तक आपने पढ़ा -


कुछ देर बाद दरवाजा खुला और जो भी अंदर आया उसे देख कर मेरे दिल में एक हलचल सी होने लगी....


अब आगे -


काली साड़ी में लिपटी वो...


दूध में केसर घोल दी गई हो जैसे, वैसा रंग, जो काली साड़ी में और कहर ढा रहा था, छरहरा बदन, जो हर उस हिस्से पर सुडौल था, जहां होना चाहिए था, दरम्याना कद और चेहरे पर मासूमियत और आकर्षक मुस्कान लिए वो मीटिंगरूम में आई, और मुझे लगा जैसे एक सेकंड के लिए मेरे दिल की धड़कन रुक गई हो।


अंदर आते ही उसने चारों ओर देखा और मेरी तरफ ही देख कर आने लगी, मेरी नजरें उस बला से हट ही नहीं रही थी। ये क्या हो गया मुझे?


वो मेरी तरफ आ कर करण के पास वाली सीट पर बैठ गई और उसे सर झुका कर अभिवादन किया। मैं ये देख कर सोच में पड़ गया कि क्या ये मेरे ही डिपार्टमेंट में है? तो पहले देखा क्यों नहीं कभी इसे?


तभी मीटिंग रूम का दरवाजा फिर से एक बात खुला और मित्तल सर अंदर आए, सारे लोग अपनी कुर्सी छोड़ कर खड़े हो गए। ये हलचल देख मेरे भी होश वापस आए और मैने अभी फिलहाल उसकी ओर देखने लगभग बंद ही कर दिया।


सर ने आते ही मीटिंग चालू कर दी।


"गुड मॉर्निंग ऑल, सबसे पहले आइए मिलते हैं अपनी टीम में नई ज्वाइन हुई नेहा वर्मा से, ये HFC बैंक से आई हैं और वहां क्लाइंट रिलेशन की सीनियर मैनेजर थी, अभी 15 दिन पहले ही ज्वाइन किया है। यहां पर ये AGM बैंकिंग होंगी, करण अब से DGM बैंकिंग का कार्यभार संभालेगा।"


सब लोग नेहा को ग्रीट करते हैं। मेरे मन में तो लड्डू फूटने लगा कि ये तो मेरे ही डिपार्टमेंट में हैं।



"जैसा आप सब जानते हैं कि ये मीटिंग नई ऑटोमेटेड ब्रांच के भविष्य को देश के अन्य शहरों में देखने के बारे में है। तो इसके लिए श्रेयन ने कुछ योजनाएं बनाई है। श्रेयन इस बारे में आप बताइए।"


श्रेयन, "मैने इस बारे में 2 तरह का प्लान सोचा है, पहला एक प्रिंट और टीवी विज्ञापन जो पूरे देश में चलेगा। और दूसरा, हम कुछ ग्राउंड लेवल पर संपर्क करके इसके भविष्य को देखें कि देश के किन शहरों में इसे पहले खोला जा सकता है। हालांकि मुझे लगता है कि पहले हमें दूसरे प्लान से शुरू करना चाहिए, जिससे हमें एक आइडिया लग जाय, और उसके बाद ही हम प्रिंट और टीवी विज्ञापन पर खर्च करें।"


मित्तल सर, "बढ़िया, मैं भी यही कहने वाला था कि पहले हमें ग्राउंड वर्क ही करना चाहिए, मेरे खयाल से इसमें भी तुमने कोई प्लान बनाया होगा?"


"जी बिलकुल, मेरे खयाल से हमे 2 2 के ग्रुप में देश के हर हिस्से में अपनी एक टीम भेजनी चाहिए जो देश के लगभग हर बड़े शहर में इसके पोटेंशियल को देखे जाने। चूंकि अपनी ब्रांचेस लगभग हर शहर में हैं तो वहां पर संपर्क साधने में दिक्कत नहीं आएगी। इसके लिए मेरे खयाल से प्रिया और करण साउथ में, शिविका और महेंद्र, DGM real estate को पूर्वी भारत में, मनीष और राघव, DGM finance को नॉर्थ में, और मैं और नेहा पश्चिम में जा कर कुछ शहरों में मीटिंग रखे, और वहां के लोगों को इसके कॉन्सेप्ट से परिचित करवाएं, जिससे पता चले कि वह लोग किस हद तक इसे पसंद करते हैं।"


मित्तल सर, "परफेक्ट प्लान है श्रेयन, बस मनीष के साथ नेहा को भेजो और राघव को तुम अपने साथ रखो, क्योंकि मनीष और राघव दोनों का कस्टमर रिलेशन में ज्यादा experience नहीं है, वहीं नेहा का एक्सपीरियंस इसी फील्ड में है।"


श्रेयन, "जी ये सही रहेगा, इस बारे में मैने ध्यान नहीं दिया। मनीष के साथ नेहा और मेरे साथ राघव जाएंगे फिर।"


मित्तल सर, "चलो फिर हर जोन में कुछ शहरों को भी चुन लेते हैं कि कहां कहां इसके टारगेट कस्टमर्स मिल सकते हैं।"


फिर सारे लोगों ने देश के कई शहरों की लिस्ट बनानी शुरू कर दी, और अंत में हर जोन से 5 शहरों को चुना गया। मेरे हिस्से में लखनऊ, दिल्ली, चंडीगढ़, देहरादून और शिमला आए।


सारी टीम को हर शहर में 2 से 3 दिन दिए गए और लगभग 15 दिन का टूर बना।


श्रेयन, "आज 15 दिसंबर है और हम सब यहां से 22 दिसंबर को निकलेंगे। शिविका सारी टीम का अरेंजमेंट कर दो।"


शिविका ने फौरन अपने डिपार्टमेंट में इसकी सूचना दे दी।


मित्तल सर, "मनीष, अब तुम अपनी प्रेजेंटेशन एक बार दे कर सबको बता दो कि वहां क्या क्या बताना है, और आप लोग इस पर जितने भी सवाल हो सकते हैं वो पूछ लीजिए, ताकि वहां प्रेजेंटेशन देते समय आपको की दिक्कत न आए।"


फिर मैने बैंक के बारे में प्रेजेंटेशन दी, और सबने कई तरह के सवाल किए और मैने उनका जवाब दिया, जिसे सब लोगों ने नोट कर लिया।


अब मीटिंग खत्म हो गई थी और सब लोग धीरे धीरे बाहर निकलने लगे थे।


नेहा ने मेरे पास आ कर, "गुड मॉर्निंग सर, मुझे लगा मनीष मित्तल कोई मिडिल एज के होंगे, मैने नहीं सोचा था कि इस उम्र में आप इतना बड़ा अचीवमेंट कर लेंगे।"


मैने भी मुस्कुराते हुए कहा, "ये कोई इतनी बड़ी बात भी नहीं है, वैसे भी पूरी टीम ही young और energetic है साथ ही साथ मित्तल सर और महेश सर का एक्सपीरियंस भी है हम सबके साथ।" ये बोलते हुए मेरी दिल की धड़कन तेज हुई जा रही थी। आज हो क्या रहा था मेरे साथ ये?


नेहा, "अच्छा सर मैं अब चलती हूं।"


मैं उसे जाता देख रहा था।




"वैसे दिखने में तो बढ़िया है न?"


मैने हड़बड़ा कर पीछे देखा, ये शिविका थी, अपनी चिरपरिचित मुस्कान के साथ उसने मुझे आंख भी मारी।


"क्या प्लान बना है! खास कर तुम्हारा मनीष, ये उत्तर भारत की ठंड का मौसम, और ऐसी लोकेशंस, ऐसा लग रहा है ये बिजनेस टूर नहीं अंकल ने तुम्हे हनीमून टूर दिया है।"


मैने उसे आंख दिखाई।


"वैसे मजे करना।"


ये बोल कर वो भी निकल गई। और मैं भी अपने केबिन में आ गया। अब कुछ काम नहीं था मुझे तो मैने इंटरकॉम पर सर से बात की


"सर, क्या आज मैं जल्दी चला जाऊं?"


"बिलकुल मनीष, चाहो तो कल भी मत आना, वैसे भी पिछले 3 महीनों से आराम नहीं किया है तुमने।"


मैं ऑफिस से घर आ गया, शाम हो चली थी, फ्रेश हो कर मैं क्लब चला गया।


ये वापी का सबसे अच्छा क्लब था, जहां लगभग सारे इनडोर गेम्स के लिए एक बड़ा हॉल था, जिसे नेट लगा कर अलग अलग सेक्शन में बांटा गया था। हाल ऐसा था कि एक कोने से दूसरे कोने तक सब दिखाता था, उसी हाल के एक साइड स्विमिंग पूल और बार एंड रेस्टुरेंट थे। बिल्डिंग के पीछे समुद्र की तरफ गोल्फ कोर्स था।


मैं सीधे बैडमिंटन कोर्ट में पहुंचा जहां २ लोग पहले से ही खेल रहे थे। मैं बैठ कर मैच देखने लगा।


अभी बैठे कुछ देर ही हुई थी कि एक हाथ मेरे कंधे पर पड़ा, "आज फुर्सत मिल ही गई जीएम साहब को यहां आने की।"


ये समर सिंह था, वापी का ASP और कंपनी के बाहर मेरा इकलौता दोस्त।


"तुझे पता ही है कि मैं कहां बिजी था।"


"मुझे तो लगा कि मेरी भाभी ढूंढ ली है तुमने, और अब मुझे खुद ही मिलने आना पड़ेगा।"


हम ऐसे ही कुछ इधर उधर की बाते करते रहे, तब तक उन दिनों का मैच भी पूरा हो गया था। फिर हम चारों ने एक डबल खेल, जिसमे मैं और समर एक तरफ और वो दोनों दूसरी तरफ थे। ये मैच हमने 21-10 से जीता। उसके बाद वो दोनों चले गए।


समर,"देखा कैसे हराया मैने दोनों को।"


"तुमने? या मैने?"


"हाहाहा, चलो पता करते हैं। बेस्ट ऑफ थ्री।"


और इसी के साथ हम दोनो ने अपना मैच स्टार्ट कर दिया, और पहला मैच मैने बड़ी आसानी से 21-8 से जीता।


"देखा ASP साहब, किसने वो मैच जितवाया था!"


"बेस्ट ऑफ थ्री की बात हुई है GM साहब।"



और फिर दूसरा मैच शुरू हुआ और पहले 5 पॉइंट मैने आसानी से बनाए। फिर मेरी नजर समर के पीछे टेनिस कोर्ट पर पड़ी और....
Awesome update
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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अब तक आपने पढ़ा -


कुछ देर बाद दरवाजा खुला और जो भी अंदर आया उसे देख कर मेरे दिल में एक हलचल सी होने लगी....


अब आगे -


काली साड़ी में लिपटी वो...


दूध में केसर घोल दी गई हो जैसे, वैसा रंग, जो काली साड़ी में और कहर ढा रहा था, छरहरा बदन, जो हर उस हिस्से पर सुडौल था, जहां होना चाहिए था, दरम्याना कद और चेहरे पर मासूमियत और आकर्षक मुस्कान लिए वो मीटिंगरूम में आई, और मुझे लगा जैसे एक सेकंड के लिए मेरे दिल की धड़कन रुक गई हो।


अंदर आते ही उसने चारों ओर देखा और मेरी तरफ ही देख कर आने लगी, मेरी नजरें उस बला से हट ही नहीं रही थी। ये क्या हो गया मुझे?


वो मेरी तरफ आ कर करण के पास वाली सीट पर बैठ गई और उसे सर झुका कर अभिवादन किया। मैं ये देख कर सोच में पड़ गया कि क्या ये मेरे ही डिपार्टमेंट में है? तो पहले देखा क्यों नहीं कभी इसे?


तभी मीटिंग रूम का दरवाजा फिर से एक बात खुला और मित्तल सर अंदर आए, सारे लोग अपनी कुर्सी छोड़ कर खड़े हो गए। ये हलचल देख मेरे भी होश वापस आए और मैने अभी फिलहाल उसकी ओर देखने लगभग बंद ही कर दिया।


सर ने आते ही मीटिंग चालू कर दी।


"गुड मॉर्निंग ऑल, सबसे पहले आइए मिलते हैं अपनी टीम में नई ज्वाइन हुई नेहा वर्मा से, ये HFC बैंक से आई हैं और वहां क्लाइंट रिलेशन की सीनियर मैनेजर थी, अभी 15 दिन पहले ही ज्वाइन किया है। यहां पर ये AGM बैंकिंग होंगी, करण अब से DGM बैंकिंग का कार्यभार संभालेगा।"


सब लोग नेहा को ग्रीट करते हैं। मेरे मन में तो लड्डू फूटने लगा कि ये तो मेरे ही डिपार्टमेंट में हैं।



"जैसा आप सब जानते हैं कि ये मीटिंग नई ऑटोमेटेड ब्रांच के भविष्य को देश के अन्य शहरों में देखने के बारे में है। तो इसके लिए श्रेयन ने कुछ योजनाएं बनाई है। श्रेयन इस बारे में आप बताइए।"


श्रेयन, "मैने इस बारे में 2 तरह का प्लान सोचा है, पहला एक प्रिंट और टीवी विज्ञापन जो पूरे देश में चलेगा। और दूसरा, हम कुछ ग्राउंड लेवल पर संपर्क करके इसके भविष्य को देखें कि देश के किन शहरों में इसे पहले खोला जा सकता है। हालांकि मुझे लगता है कि पहले हमें दूसरे प्लान से शुरू करना चाहिए, जिससे हमें एक आइडिया लग जाय, और उसके बाद ही हम प्रिंट और टीवी विज्ञापन पर खर्च करें।"


मित्तल सर, "बढ़िया, मैं भी यही कहने वाला था कि पहले हमें ग्राउंड वर्क ही करना चाहिए, मेरे खयाल से इसमें भी तुमने कोई प्लान बनाया होगा?"


"जी बिलकुल, मेरे खयाल से हमे 2 2 के ग्रुप में देश के हर हिस्से में अपनी एक टीम भेजनी चाहिए जो देश के लगभग हर बड़े शहर में इसके पोटेंशियल को देखे जाने। चूंकि अपनी ब्रांचेस लगभग हर शहर में हैं तो वहां पर संपर्क साधने में दिक्कत नहीं आएगी। इसके लिए मेरे खयाल से प्रिया और करण साउथ में, शिविका और महेंद्र, DGM real estate को पूर्वी भारत में, मनीष और राघव, DGM finance को नॉर्थ में, और मैं और नेहा पश्चिम में जा कर कुछ शहरों में मीटिंग रखे, और वहां के लोगों को इसके कॉन्सेप्ट से परिचित करवाएं, जिससे पता चले कि वह लोग किस हद तक इसे पसंद करते हैं।"


मित्तल सर, "परफेक्ट प्लान है श्रेयन, बस मनीष के साथ नेहा को भेजो और राघव को तुम अपने साथ रखो, क्योंकि मनीष और राघव दोनों का कस्टमर रिलेशन में ज्यादा experience नहीं है, वहीं नेहा का एक्सपीरियंस इसी फील्ड में है।"


श्रेयन, "जी ये सही रहेगा, इस बारे में मैने ध्यान नहीं दिया। मनीष के साथ नेहा और मेरे साथ राघव जाएंगे फिर।"


मित्तल सर, "चलो फिर हर जोन में कुछ शहरों को भी चुन लेते हैं कि कहां कहां इसके टारगेट कस्टमर्स मिल सकते हैं।"


फिर सारे लोगों ने देश के कई शहरों की लिस्ट बनानी शुरू कर दी, और अंत में हर जोन से 5 शहरों को चुना गया। मेरे हिस्से में लखनऊ, दिल्ली, चंडीगढ़, देहरादून और शिमला आए।


सारी टीम को हर शहर में 2 से 3 दिन दिए गए और लगभग 15 दिन का टूर बना।


श्रेयन, "आज 15 दिसंबर है और हम सब यहां से 22 दिसंबर को निकलेंगे। शिविका सारी टीम का अरेंजमेंट कर दो।"


शिविका ने फौरन अपने डिपार्टमेंट में इसकी सूचना दे दी।


मित्तल सर, "मनीष, अब तुम अपनी प्रेजेंटेशन एक बार दे कर सबको बता दो कि वहां क्या क्या बताना है, और आप लोग इस पर जितने भी सवाल हो सकते हैं वो पूछ लीजिए, ताकि वहां प्रेजेंटेशन देते समय आपको की दिक्कत न आए।"


फिर मैने बैंक के बारे में प्रेजेंटेशन दी, और सबने कई तरह के सवाल किए और मैने उनका जवाब दिया, जिसे सब लोगों ने नोट कर लिया।


अब मीटिंग खत्म हो गई थी और सब लोग धीरे धीरे बाहर निकलने लगे थे।


नेहा ने मेरे पास आ कर, "गुड मॉर्निंग सर, मुझे लगा मनीष मित्तल कोई मिडिल एज के होंगे, मैने नहीं सोचा था कि इस उम्र में आप इतना बड़ा अचीवमेंट कर लेंगे।"


मैने भी मुस्कुराते हुए कहा, "ये कोई इतनी बड़ी बात भी नहीं है, वैसे भी पूरी टीम ही young और energetic है साथ ही साथ मित्तल सर और महेश सर का एक्सपीरियंस भी है हम सबके साथ।" ये बोलते हुए मेरी दिल की धड़कन तेज हुई जा रही थी। आज हो क्या रहा था मेरे साथ ये?


नेहा, "अच्छा सर मैं अब चलती हूं।"


मैं उसे जाता देख रहा था।




"वैसे दिखने में तो बढ़िया है न?"


मैने हड़बड़ा कर पीछे देखा, ये शिविका थी, अपनी चिरपरिचित मुस्कान के साथ उसने मुझे आंख भी मारी।


"क्या प्लान बना है! खास कर तुम्हारा मनीष, ये उत्तर भारत की ठंड का मौसम, और ऐसी लोकेशंस, ऐसा लग रहा है ये बिजनेस टूर नहीं अंकल ने तुम्हे हनीमून टूर दिया है।"


मैने उसे आंख दिखाई।


"वैसे मजे करना।"


ये बोल कर वो भी निकल गई। और मैं भी अपने केबिन में आ गया। अब कुछ काम नहीं था मुझे तो मैने इंटरकॉम पर सर से बात की


"सर, क्या आज मैं जल्दी चला जाऊं?"


"बिलकुल मनीष, चाहो तो कल भी मत आना, वैसे भी पिछले 3 महीनों से आराम नहीं किया है तुमने।"


मैं ऑफिस से घर आ गया, शाम हो चली थी, फ्रेश हो कर मैं क्लब चला गया।


ये वापी का सबसे अच्छा क्लब था, जहां लगभग सारे इनडोर गेम्स के लिए एक बड़ा हॉल था, जिसे नेट लगा कर अलग अलग सेक्शन में बांटा गया था। हाल ऐसा था कि एक कोने से दूसरे कोने तक सब दिखाता था, उसी हाल के एक साइड स्विमिंग पूल और बार एंड रेस्टुरेंट थे। बिल्डिंग के पीछे समुद्र की तरफ गोल्फ कोर्स था।


मैं सीधे बैडमिंटन कोर्ट में पहुंचा जहां २ लोग पहले से ही खेल रहे थे। मैं बैठ कर मैच देखने लगा।


अभी बैठे कुछ देर ही हुई थी कि एक हाथ मेरे कंधे पर पड़ा, "आज फुर्सत मिल ही गई जीएम साहब को यहां आने की।"


ये समर सिंह था, वापी का ASP और कंपनी के बाहर मेरा इकलौता दोस्त।


"तुझे पता ही है कि मैं कहां बिजी था।"


"मुझे तो लगा कि मेरी भाभी ढूंढ ली है तुमने, और अब मुझे खुद ही मिलने आना पड़ेगा।"


हम ऐसे ही कुछ इधर उधर की बाते करते रहे, तब तक उन दिनों का मैच भी पूरा हो गया था। फिर हम चारों ने एक डबल खेल, जिसमे मैं और समर एक तरफ और वो दोनों दूसरी तरफ थे। ये मैच हमने 21-10 से जीता। उसके बाद वो दोनों चले गए।


समर,"देखा कैसे हराया मैने दोनों को।"


"तुमने? या मैने?"


"हाहाहा, चलो पता करते हैं। बेस्ट ऑफ थ्री।"


और इसी के साथ हम दोनो ने अपना मैच स्टार्ट कर दिया, और पहला मैच मैने बड़ी आसानी से 21-8 से जीता।


"देखा ASP साहब, किसने वो मैच जितवाया था!"


"बेस्ट ऑफ थ्री की बात हुई है GM साहब।"



और फिर दूसरा मैच शुरू हुआ और पहले 5 पॉइंट मैने आसानी से बनाए। फिर मेरी नजर समर के पीछे टेनिस कोर्ट पर पड़ी और....
Or fir tumhari najar samar ke peeche padhi or wahi ladki dikhi, jise dekhte hi game haar gaye :D
Badhiya update bhai :good:
 

Riky007

उड़ते पंछी का ठिकाना, मेरा न कोई जहां...
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Or fir tumhari najar samar ke peeche padhi or wahi ladki dikhi, jise dekhte hi game haar gaye :D
Badhiya update bhai :good:
Thanks bhai, waise likha aur tha, par delete ho gaya, to yahan par hi khatam kar diya iss update ko.
 
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