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Hello Hello !! .... My reader log kaafi time hogaya kaafi saare personal reasons ki wajah so i guess ab wapas aajana chahiye 

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For completed 100 pages on your story thread......इतना ज्ञान सर के ऊपर से निकल गयाUpdate 36
'जीव'......यह शब्द हर उस प्राणी के लिए प्रयोग होता है जिसमें जीवन है.....पर इस जीवन को छोड़कर क्या जीवों में और कोई समानता है मेरे हिसाब से तो नहीं....... इन्हीं विविधताओं की वजह से इन जीवों को अलग अलग नाम दिए अगल अलग प्रजाति दी जैसे मनुष्य जानवर और पौधे और इस वर्गीकरण से भी संतुष्ट ना होकर मनुष्य ने खुद को धर्मों औरमदद गा जातियों में बांट लिया।
जानवरों को शाकाहारी और मांसाहारी बना दिया तो वहीं पौधे भी इससे बच ना सके यह वर्गीकरण समय के साथ साथ बढ़ता गया और आज तक बढ़ रहा है और हर एक वर्ग खुद को दूसरे से महान और बड़ा बनाने में लगा है पर कभी विचार किया है क्यूं इन जीवों में इतनी विविधताएं है ????
शायद मेरे उत्तर से बहुत लोग संतुष्ट ना हों पर फिर भी बताने की कोशिश करता हूं।.....एक तालाब है जिसमें अनकों प्रकार के जीव निवाश करते हैं बड़े छोटे कुछ तो इतने छोटे की आंखों से देखे भी ना जा सके कुछ अधिक छोडे तो कुछ लंबे और अब हुआ यूं की मौसम बदलने लगा और वातावरण में गरमी बढ़ने लगी जिससे उस तालाब का पानी भी पहले की अपेक्षा में गर्म रहने लगा पर उस तालाब में कुछ ऐसे भी जीव थे जिन्हें गर्मी बर्दाश्त नहीं और वह सब धीरे धीरे मरने लगे तो उस तालाब में रहा कौन जो उजाला ठगर्मी सहन कर सके और जब ग्रीष्म ऋतु समाप्त हुई तो आई सर्द ऋतु और जो जीव सर्दी में ना सह सके तो वह इस मौसम में मर गये लेकिन फिर भी तालाब खाली तो नहीं हुआ क्योंकि उसमें ऐसे भी जीव थे जो हर मौसम को सहने की क्षमता रखते थे और वही शाश्वत रहे।
यहां अगर अलग दृष्टिकोण से देखें तो जीव मरे पर जो अमर था वो था जीवन इसी तरह एक मनुष्य दूसरे को मारे या खुद मरे जो शाश्वत है वो मानवता जिस दिन मानवता खत्म उस दिन मनुष्य का अस्तित्व भी नहीं रहगा । तालाब में अगर हर मौसम को सहने वाले जीव ना होते तो गर्मी में आधे मरते और सर्दी में बचे हुए फिर कुछ बचता तो वो था तालाब का वह पानी जो जीवित की गणना में नहीं आता।.....
एक्शन टाइम.........................
समय : 9:30 pm
स्थान : अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट, इंदौर
कैप्टन ने फलाइट उड़ान भरने वाली है उसकी घोषणा कर दी थी। और इसको सुनने के बाद उस जहाज में बैठे सब के चेहरे पर खुशी के भाव थे मयंक को छोड़कर कारण मयंक भी समझने में असमर्थ था की आखिर उसके मन के भीतर चल क्या रहा है।
जब जानवी का फोन कटा तब ही मयंक ने सोच लिया था वह उसी वक्त जानवी के पास जा रहा है उसको सर्पराज देने..... जानवी की याददाश्त जा चुकी थी और अब उसका सब कुछ मयंक ही था और ऐसा पहली बार हुआ था की फोन काटते वक्त फोन जानवी के पास नहीं था। और जानवी के पास जाने की उसको दिल से खुशी थी।
पर जो चीज उसके दिल में असमंजस पैदा कर रही थी वह थी साक्षी हुआ कुछ यूं जब मयंक रोमा के घर पहुंचा तो गाडी से उतरते वक्त साक्षी ने उसको एक कागज थमाया था और कहा था इसका जबाब वो नानी के यहां से आने के बाद लेगी। मयंक ने उसको रख लिया पर जब एयरपोर्ट पर जाने के लिए कपड़े बदल रहा था तब वो कागज घिर गया और जब उसने उस कागज को पढा तो पहले तो उसको विश्वास नहीं हुआ पर ऐसा तो था नहीं की वह सपना देख रहा था।
साक्षी ने उस कागज में अपने मन में उमडे सारे विचार छाप दिए थे और वह चाहती थी मयंक और वो दोस्त ना रहकर प्रेमी बन जाए मयंक के साथ ऐसा पहली बार हुआ था चूंकि वह शुरू से ही बाॅयस स्कूल में पढा गांव में भी या तो घर या लडाई झगडा लड़कियों से बात करना तक उसको ठीक से नहीं आता था । अब उसको समझ नहीं आ रहा था की वह क्या करे जब वो खुद किसी और से प्यार करता था .......पर वो इतना ना समझ नहीं था की सीधे ना बोलकर उसका दिल दुखाए क्योंकि वह जानता था अगर उसका प्यार मना करेगा तब कैसा लगेगा पर वह जानता था कि कितनी हिम्मत चाहिए किसी को अपने भाव बताना और ये हिम्मत खुद मयंक नहीं कर पाया था।
ये सारे विचार उसके मन में चलते रहे और पता भी नहीं चला कब दो घंटे बीत गये और उसकी फलाइट का लेंडिंग का समय भी आ गया खैर वह ग्वालियर पहुंच चुका था और एयरपोर्ट से निकलने में उसको आधा घंटा और लगा टर्मिनल से निकलते ही उसने टैक्सी पकडी और टैक्सी वाले को ***** नगर की तरफ चलने के लिए कहा आखरी बार मयंक यहां इंदौर आने से पहले आया था जानवी और रीत से मिलने उसके बाद आज इस शहर को देख रहा था।
ये शहर मयंक के गांव से सिर्फ 50 km दूर था तो एक तरह से वह इंदौर से अपने घर ही आ गया था और इस शहर में भी उसका घर था और ठीक घर के सामने टैक्सी रुकी और उसका किराया देने के बाद वह घर की तरफ बढ़ गया बेल बजाने के पांच मिनट बाद प्रहरी बहार आया तो मयंक को देख कर उसको विश्वास ही नहीं हुआ पर उसको सोने का बोलकर मयंक अंदर चला गया वह चाहता तो जानवी और रीत को इस घर में रख सकता था पर यहां रखना ना मुमकिन था क्योंकि विष्णु को जरूर पता चलता और फिर बलवीर के बेटे के मरने के बाद से ही वह जानवी को ढूंढ रहा था क्योंकि वह अपने बेटे की मौत का जिम्मेदार जानवी को मानता है तो बलवीर से भी बचाव करना था इसलिए इस घर के पास में ही एक सोसाइटी थी वहीं एक फ्लैट में जानवी और रीत को रखा गया था।
अब चूंकि आधी रात हो रही थी तो इस वक्त मयंक ने जाना ठीक नहीं समझा और अपने घर में ही सो गया।
*************
दो घंटे पहले......
"हैलो"....... बलवीर ने अपना फोन उठाते हुए कहा।
"सहाब जैसा आपने कहा था मैंने उस लड़के का पीछा किया "..... सामने से आवाज आई।
बलवीर -"हां तो क्या हुआ "
"सहाब वो तो हवाईअड्डे पर आया है अपना सामान लेकर और शायद कही जाने वाला है".......
बलवीर -"क्या ?......"......बलवीर जो बैठा हुआ शराब पी रहा था वो ये सुनते ही खडा हो गया।
"हां साहब "........
बलवीर -"तू एक काम कर वहां एयरपोर्ट पर पता कर की अभी दो घंटे में कौन-कौन सी जगह के लिए फलाइट उड़ान भरेंगी"
"जी सहाब अभी फोन करता हूं आपको ".......इतना कहते ही सामने से फोन कट गया।
पांच मिनट बाद.......
बलवीर -"हां बोल"
"सहाब बस एक ही है ग्वालियर के लिए "........
बलवीर -"ठीक है "
इतना कहते ही बलवीर ने फोन काट दिया और जल्दी से एक और फोन लगाया ।
"हैलो दद्दा "...... सामने से फोन उठते ही बलवीर ने कहा।
दद्दा -"क्या हुआ बलवीर बड़े दिनों बाद तेरी आवाज में खुशी झलक रही है "
बलवीर -"बात ही ऐसी है दद्दा जिस शिकार को हम यहां इंदौर में ढूंढ रहे थे वो खुद अपने पास आ रहा है "
दद्दा -"देख बलवीर साफ साफ बोल क्या कहना चाहता है "
बलवीर -"दद्दा मयंक ग्वालियर आ रहा है "
दद्दा -"क्या ?.......सच कह रहा है ना "
बलवीर -"बिल्कुल सच कह रहा हूं ठीक दो घंटे बाद फ्लाइट ग्वालियर पहुंच जाएगी "
दद्दा -"फलाइट ?.....ये क्या हैं "
बलवीर -"दद्दा हवाई जहाज की कह रहा हूं तो अपने आदमियों को भेज दो ग्वालियर पचास मिनट तो उनको भी लग जाने है"
दद्दा -"ठीक है साले को वहीं से उठवा लेंगे "
बलवीर -"नहीं दद्दा कोई चांस नहीं है मयंक के बहुत चाहने वाले है ग्वालियर में और हो ना हो वो जरूर जानते होगे की मयंक वहां आ रहा है हमें पहले ये पता करना होगा की वो ग्वालियर में आ क्यूं रहा है मुझे लगता है कि जरूर मयंक उस लड़की से मिलने जा रहा है और अगर ये बात सही है तो अपना काम और आसान होगा वो भी बिन लडे हम अगर उस लडकी का पता चला तो उसको पकड़ेंगे जो आसान होगा और उस लडको पकडा तो मयंक भी मिल जाएगा और मयंक के साथ विष्णु भी खिंचा चला आएगा।"
दद्दा -"वाह बलवीर..... बहुत आसान होगा फिर तो हमारे लिए सीधे मयंक पर हाथ डालते तो बहुत खून बहता "
इन दोनों का ये नामर्दों वाला प्लान कितना सफल होगा ये तो नहीं पता पर इसकी शुरुआत हो चुकी थी क्योंकि मयंक के ग्वालियर पहुंचते ही उसके पीछे तीन लोग लगे हुए थे।पर ये तीन लोग अकेले नहीं थे ये तो पक्का था देखते हैं आगे क्या होता है.......
Wahh bhai bohot badhiyaUpdate 36
'जीव'......यह शब्द हर उस प्राणी के लिए प्रयोग होता है जिसमें जीवन है.....पर इस जीवन को छोड़कर क्या जीवों में और कोई समानता है मेरे हिसाब से तो नहीं....... इन्हीं विविधताओं की वजह से इन जीवों को अलग अलग नाम दिए अगल अलग प्रजाति दी जैसे मनुष्य जानवर और पौधे और इस वर्गीकरण से भी संतुष्ट ना होकर मनुष्य ने खुद को धर्मों औरमदद गा जातियों में बांट लिया।
जानवरों को शाकाहारी और मांसाहारी बना दिया तो वहीं पौधे भी इससे बच ना सके यह वर्गीकरण समय के साथ साथ बढ़ता गया और आज तक बढ़ रहा है और हर एक वर्ग खुद को दूसरे से महान और बड़ा बनाने में लगा है पर कभी विचार किया है क्यूं इन जीवों में इतनी विविधताएं है ????
शायद मेरे उत्तर से बहुत लोग संतुष्ट ना हों पर फिर भी बताने की कोशिश करता हूं।.....एक तालाब है जिसमें अनकों प्रकार के जीव निवाश करते हैं बड़े छोटे कुछ तो इतने छोटे की आंखों से देखे भी ना जा सके कुछ अधिक छोडे तो कुछ लंबे और अब हुआ यूं की मौसम बदलने लगा और वातावरण में गरमी बढ़ने लगी जिससे उस तालाब का पानी भी पहले की अपेक्षा में गर्म रहने लगा पर उस तालाब में कुछ ऐसे भी जीव थे जिन्हें गर्मी बर्दाश्त नहीं और वह सब धीरे धीरे मरने लगे तो उस तालाब में रहा कौन जो उजाला ठगर्मी सहन कर सके और जब ग्रीष्म ऋतु समाप्त हुई तो आई सर्द ऋतु और जो जीव सर्दी में ना सह सके तो वह इस मौसम में मर गये लेकिन फिर भी तालाब खाली तो नहीं हुआ क्योंकि उसमें ऐसे भी जीव थे जो हर मौसम को सहने की क्षमता रखते थे और वही शाश्वत रहे।
यहां अगर अलग दृष्टिकोण से देखें तो जीव मरे पर जो अमर था वो था जीवन इसी तरह एक मनुष्य दूसरे को मारे या खुद मरे जो शाश्वत है वो मानवता जिस दिन मानवता खत्म उस दिन मनुष्य का अस्तित्व भी नहीं रहगा । तालाब में अगर हर मौसम को सहने वाले जीव ना होते तो गर्मी में आधे मरते और सर्दी में बचे हुए फिर कुछ बचता तो वो था तालाब का वह पानी जो जीवित की गणना में नहीं आता।.....
....................
समय : 9:30 pm
स्थान : अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट, इंदौर
कैप्टन ने फलाइट उड़ान भरने वाली है उसकी घोषणा कर दी थी। और इसको सुनने के बाद उस जहाज में बैठे सब के चेहरे पर खुशी के भाव थे मयंक को छोड़कर कारण मयंक भी समझने में असमर्थ था की आखिर उसके मन के भीतर चल क्या रहा है।
जब जानवी का फोन कटा तब ही मयंक ने सोच लिया था वह उसी वक्त जानवी के पास जा रहा है उसको सर्पराज देने..... जानवी की याददाश्त जा चुकी थी और अब उसका सब कुछ मयंक ही था और ऐसा पहली बार हुआ था की फोन काटते वक्त फोन जानवी के पास नहीं था। और जानवी के पास जाने की उसको दिल से खुशी थी।
पर जो चीज उसके दिल में असमंजस पैदा कर रही थी वह थी साक्षी हुआ कुछ यूं जब मयंक रोमा के घर पहुंचा तो गाडी से उतरते वक्त साक्षी ने उसको एक कागज थमाया था और कहा था इसका जबाब वो नानी के यहां से आने के बाद लेगी। मयंक ने उसको रख लिया पर जब एयरपोर्ट पर जाने के लिए कपड़े बदल रहा था तब वो कागज घिर गया और जब उसने उस कागज को पढा तो पहले तो उसको विश्वास नहीं हुआ पर ऐसा तो था नहीं की वह सपना देख रहा था।
साक्षी ने उस कागज में अपने मन में उमडे सारे विचार छाप दिए थे और वह चाहती थी मयंक और वो दोस्त ना रहकर प्रेमी बन जाए मयंक के साथ ऐसा पहली बार हुआ था चूंकि वह शुरू से ही बाॅयस स्कूल में पढा गांव में भी या तो घर या लडाई झगडा लड़कियों से बात करना तक उसको ठीक से नहीं आता था । अब उसको समझ नहीं आ रहा था की वह क्या करे जब वो खुद किसी और से प्यार करता था .......पर वो इतना ना समझ नहीं था की सीधे ना बोलकर उसका दिल दुखाए क्योंकि वह जानता था अगर उसका प्यार मना करेगा तब कैसा लगेगा पर वह जानता था कि कितनी हिम्मत चाहिए किसी को अपने भाव बताना और ये हिम्मत खुद मयंक नहीं कर पाया था।
ये सारे विचार उसके मन में चलते रहे और पता भी नहीं चला कब दो घंटे बीत गये और उसकी फलाइट का लेंडिंग का समय भी आ गया खैर वह ग्वालियर पहुंच चुका था और एयरपोर्ट से निकलने में उसको आधा घंटा और लगा टर्मिनल से निकलते ही उसने टैक्सी पकडी और टैक्सी वाले को ***** नगर की तरफ चलने के लिए कहा आखरी बार मयंक यहां इंदौर आने से पहले आया था जानवी और रीत से मिलने उसके बाद आज इस शहर को देख रहा था।
ये शहर मयंक के गांव से सिर्फ 50 km दूर था तो एक तरह से वह इंदौर से अपने घर ही आ गया था और इस शहर में भी उसका घर था और ठीक घर के सामने टैक्सी रुकी और उसका किराया देने के बाद वह घर की तरफ बढ़ गया बेल बजाने के पांच मिनट बाद प्रहरी बहार आया तो मयंक को देख कर उसको विश्वास ही नहीं हुआ पर उसको सोने का बोलकर मयंक अंदर चला गया वह चाहता तो जानवी और रीत को इस घर में रख सकता था पर यहां रखना ना मुमकिन था क्योंकि विष्णु को जरूर पता चलता और फिर बलवीर के बेटे के मरने के बाद से ही वह जानवी को ढूंढ रहा था क्योंकि वह अपने बेटे की मौत का जिम्मेदार जानवी को मानता है तो बलवीर से भी बचाव करना था इसलिए इस घर के पास में ही एक सोसाइटी थी वहीं एक फ्लैट में जानवी और रीत को रखा गया था।
अब चूंकि आधी रात हो रही थी तो इस वक्त मयंक ने जाना ठीक नहीं समझा और अपने घर में ही सो गया।
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दो घंटे पहले......
"हैलो"....... बलवीर ने अपना फोन उठाते हुए कहा।
"सहाब जैसा आपने कहा था मैंने उस लड़के का पीछा किया "..... सामने से आवाज आई।
बलवीर -"हां तो क्या हुआ "
"सहाब वो तो हवाईअड्डे पर आया है अपना सामान लेकर और शायद कही जाने वाला है".......
बलवीर -"क्या ?......"......बलवीर जो बैठा हुआ शराब पी रहा था वो ये सुनते ही खडा हो गया।
"हां साहब "........
बलवीर -"तू एक काम कर वहां एयरपोर्ट पर पता कर की अभी दो घंटे में कौन-कौन सी जगह के लिए फलाइट उड़ान भरेंगी"
"जी सहाब अभी फोन करता हूं आपको ".......इतना कहते ही सामने से फोन कट गया।
पांच मिनट बाद.......
बलवीर -"हां बोल"
"सहाब बस एक ही है ग्वालियर के लिए "........
बलवीर -"ठीक है "
इतना कहते ही बलवीर ने फोन काट दिया और जल्दी से एक और फोन लगाया ।
"हैलो दद्दा "...... सामने से फोन उठते ही बलवीर ने कहा।
दद्दा -"क्या हुआ बलवीर बड़े दिनों बाद तेरी आवाज में खुशी झलक रही है "
बलवीर -"बात ही ऐसी है दद्दा जिस शिकार को हम यहां इंदौर में ढूंढ रहे थे वो खुद अपने पास आ रहा है "
दद्दा -"देख बलवीर साफ साफ बोल क्या कहना चाहता है "
बलवीर -"दद्दा मयंक ग्वालियर आ रहा है "
दद्दा -"क्या ?.......सच कह रहा है ना "
बलवीर -"बिल्कुल सच कह रहा हूं ठीक दो घंटे बाद फ्लाइट ग्वालियर पहुंच जाएगी "
दद्दा -"फलाइट ?.....ये क्या हैं "
बलवीर -"दद्दा हवाई जहाज की कह रहा हूं तो अपने आदमियों को भेज दो ग्वालियर पचास मिनट तो उनको भी लग जाने है"
दद्दा -"ठीक है साले को वहीं से उठवा लेंगे "
बलवीर -"नहीं दद्दा कोई चांस नहीं है मयंक के बहुत चाहने वाले है ग्वालियर में और हो ना हो वो जरूर जानते होगे की मयंक वहां आ रहा है हमें पहले ये पता करना होगा की वो ग्वालियर में आ क्यूं रहा है मुझे लगता है कि जरूर मयंक उस लड़की से मिलने जा रहा है और अगर ये बात सही है तो अपना काम और आसान होगा वो भी बिन लडे हम अगर उस लडकी का पता चला तो उसको पकड़ेंगे जो आसान होगा और उस लडको पकडा तो मयंक भी मिल जाएगा और मयंक के साथ विष्णु भी खिंचा चला आएगा।"
दद्दा -"वाह बलवीर..... बहुत आसान होगा फिर तो हमारे लिए सीधे मयंक पर हाथ डालते तो बहुत खून बहता "
इन दोनों का ये नामर्दों वाला प्लान कितना सफल होगा ये तो नहीं पता पर इसकी शुरुआत हो चुकी थी क्योंकि मयंक के ग्वालियर पहुंचते ही उसके पीछे तीन लोग लगे हुए थे।पर ये तीन लोग अकेले नहीं थे ये तो पक्का था देखते हैं आगे क्या होता है.......
Avni hai hi pyaariFabulous excellent update bhai....
Ab mayank ka pata bhi chal gaya hey balver ko ab khali najar rakhne keliye kaha hey dada ne usko...
Ab dekhte hey kya inhee pata chalta hey ki ki uspar najar rakhi ja rahi hey....
Ye choti avani ki choti bate bhi kahani mey alg hi maja lata hey......
Hell Strom
![]()

Romanchak. Pratiksha agle rasprad update ki
Nice update
Sukriya ajju bhaiBahut hi badhiya update he Hell Strom Bhai,
Dadda ko mayank ke thikane ka pata to chal gaya lekin usne balvir ko sirf nazar rakhne ke liye bola he.............
Ab Roma aunty aur sakshi dono hi ghar par nahi he............Ab mayank ka madam ke sath kuch scene ban sakta he...........
Keep posting Bhai
......keep supporting 
Nice and superb update....Update 36
'जीव'......यह शब्द हर उस प्राणी के लिए प्रयोग होता है जिसमें जीवन है.....पर इस जीवन को छोड़कर क्या जीवों में और कोई समानता है मेरे हिसाब से तो नहीं....... इन्हीं विविधताओं की वजह से इन जीवों को अलग अलग नाम दिए अगल अलग प्रजाति दी जैसे मनुष्य जानवर और पौधे और इस वर्गीकरण से भी संतुष्ट ना होकर मनुष्य ने खुद को धर्मों औरमदद गा जातियों में बांट लिया।
जानवरों को शाकाहारी और मांसाहारी बना दिया तो वहीं पौधे भी इससे बच ना सके यह वर्गीकरण समय के साथ साथ बढ़ता गया और आज तक बढ़ रहा है और हर एक वर्ग खुद को दूसरे से महान और बड़ा बनाने में लगा है पर कभी विचार किया है क्यूं इन जीवों में इतनी विविधताएं है ????
शायद मेरे उत्तर से बहुत लोग संतुष्ट ना हों पर फिर भी बताने की कोशिश करता हूं।.....एक तालाब है जिसमें अनकों प्रकार के जीव निवाश करते हैं बड़े छोटे कुछ तो इतने छोटे की आंखों से देखे भी ना जा सके कुछ अधिक छोडे तो कुछ लंबे और अब हुआ यूं की मौसम बदलने लगा और वातावरण में गरमी बढ़ने लगी जिससे उस तालाब का पानी भी पहले की अपेक्षा में गर्म रहने लगा पर उस तालाब में कुछ ऐसे भी जीव थे जिन्हें गर्मी बर्दाश्त नहीं और वह सब धीरे धीरे मरने लगे तो उस तालाब में रहा कौन जो उजाला ठगर्मी सहन कर सके और जब ग्रीष्म ऋतु समाप्त हुई तो आई सर्द ऋतु और जो जीव सर्दी में ना सह सके तो वह इस मौसम में मर गये लेकिन फिर भी तालाब खाली तो नहीं हुआ क्योंकि उसमें ऐसे भी जीव थे जो हर मौसम को सहने की क्षमता रखते थे और वही शाश्वत रहे।
यहां अगर अलग दृष्टिकोण से देखें तो जीव मरे पर जो अमर था वो था जीवन इसी तरह एक मनुष्य दूसरे को मारे या खुद मरे जो शाश्वत है वो मानवता जिस दिन मानवता खत्म उस दिन मनुष्य का अस्तित्व भी नहीं रहगा । तालाब में अगर हर मौसम को सहने वाले जीव ना होते तो गर्मी में आधे मरते और सर्दी में बचे हुए फिर कुछ बचता तो वो था तालाब का वह पानी जो जीवित की गणना में नहीं आता।.....
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समय : 9:30 pm
स्थान : अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट, इंदौर
कैप्टन ने फलाइट उड़ान भरने वाली है उसकी घोषणा कर दी थी। और इसको सुनने के बाद उस जहाज में बैठे सब के चेहरे पर खुशी के भाव थे मयंक को छोड़कर कारण मयंक भी समझने में असमर्थ था की आखिर उसके मन के भीतर चल क्या रहा है।
जब जानवी का फोन कटा तब ही मयंक ने सोच लिया था वह उसी वक्त जानवी के पास जा रहा है उसको सर्पराज देने..... जानवी की याददाश्त जा चुकी थी और अब उसका सब कुछ मयंक ही था और ऐसा पहली बार हुआ था की फोन काटते वक्त फोन जानवी के पास नहीं था। और जानवी के पास जाने की उसको दिल से खुशी थी।
पर जो चीज उसके दिल में असमंजस पैदा कर रही थी वह थी साक्षी हुआ कुछ यूं जब मयंक रोमा के घर पहुंचा तो गाडी से उतरते वक्त साक्षी ने उसको एक कागज थमाया था और कहा था इसका जबाब वो नानी के यहां से आने के बाद लेगी। मयंक ने उसको रख लिया पर जब एयरपोर्ट पर जाने के लिए कपड़े बदल रहा था तब वो कागज घिर गया और जब उसने उस कागज को पढा तो पहले तो उसको विश्वास नहीं हुआ पर ऐसा तो था नहीं की वह सपना देख रहा था।
साक्षी ने उस कागज में अपने मन में उमडे सारे विचार छाप दिए थे और वह चाहती थी मयंक और वो दोस्त ना रहकर प्रेमी बन जाए मयंक के साथ ऐसा पहली बार हुआ था चूंकि वह शुरू से ही बाॅयस स्कूल में पढा गांव में भी या तो घर या लडाई झगडा लड़कियों से बात करना तक उसको ठीक से नहीं आता था । अब उसको समझ नहीं आ रहा था की वह क्या करे जब वो खुद किसी और से प्यार करता था .......पर वो इतना ना समझ नहीं था की सीधे ना बोलकर उसका दिल दुखाए क्योंकि वह जानता था अगर उसका प्यार मना करेगा तब कैसा लगेगा पर वह जानता था कि कितनी हिम्मत चाहिए किसी को अपने भाव बताना और ये हिम्मत खुद मयंक नहीं कर पाया था।
ये सारे विचार उसके मन में चलते रहे और पता भी नहीं चला कब दो घंटे बीत गये और उसकी फलाइट का लेंडिंग का समय भी आ गया खैर वह ग्वालियर पहुंच चुका था और एयरपोर्ट से निकलने में उसको आधा घंटा और लगा टर्मिनल से निकलते ही उसने टैक्सी पकडी और टैक्सी वाले को ***** नगर की तरफ चलने के लिए कहा आखरी बार मयंक यहां इंदौर आने से पहले आया था जानवी और रीत से मिलने उसके बाद आज इस शहर को देख रहा था।
ये शहर मयंक के गांव से सिर्फ 50 km दूर था तो एक तरह से वह इंदौर से अपने घर ही आ गया था और इस शहर में भी उसका घर था और ठीक घर के सामने टैक्सी रुकी और उसका किराया देने के बाद वह घर की तरफ बढ़ गया बेल बजाने के पांच मिनट बाद प्रहरी बहार आया तो मयंक को देख कर उसको विश्वास ही नहीं हुआ पर उसको सोने का बोलकर मयंक अंदर चला गया वह चाहता तो जानवी और रीत को इस घर में रख सकता था पर यहां रखना ना मुमकिन था क्योंकि विष्णु को जरूर पता चलता और फिर बलवीर के बेटे के मरने के बाद से ही वह जानवी को ढूंढ रहा था क्योंकि वह अपने बेटे की मौत का जिम्मेदार जानवी को मानता है तो बलवीर से भी बचाव करना था इसलिए इस घर के पास में ही एक सोसाइटी थी वहीं एक फ्लैट में जानवी और रीत को रखा गया था।
अब चूंकि आधी रात हो रही थी तो इस वक्त मयंक ने जाना ठीक नहीं समझा और अपने घर में ही सो गया।
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दो घंटे पहले......
"हैलो"....... बलवीर ने अपना फोन उठाते हुए कहा।
"सहाब जैसा आपने कहा था मैंने उस लड़के का पीछा किया "..... सामने से आवाज आई।
बलवीर -"हां तो क्या हुआ "
"सहाब वो तो हवाईअड्डे पर आया है अपना सामान लेकर और शायद कही जाने वाला है".......
बलवीर -"क्या ?......"......बलवीर जो बैठा हुआ शराब पी रहा था वो ये सुनते ही खडा हो गया।
"हां साहब "........
बलवीर -"तू एक काम कर वहां एयरपोर्ट पर पता कर की अभी दो घंटे में कौन-कौन सी जगह के लिए फलाइट उड़ान भरेंगी"
"जी सहाब अभी फोन करता हूं आपको ".......इतना कहते ही सामने से फोन कट गया।
पांच मिनट बाद.......
बलवीर -"हां बोल"
"सहाब बस एक ही है ग्वालियर के लिए "........
बलवीर -"ठीक है "
इतना कहते ही बलवीर ने फोन काट दिया और जल्दी से एक और फोन लगाया ।
"हैलो दद्दा "...... सामने से फोन उठते ही बलवीर ने कहा।
दद्दा -"क्या हुआ बलवीर बड़े दिनों बाद तेरी आवाज में खुशी झलक रही है "
बलवीर -"बात ही ऐसी है दद्दा जिस शिकार को हम यहां इंदौर में ढूंढ रहे थे वो खुद अपने पास आ रहा है "
दद्दा -"देख बलवीर साफ साफ बोल क्या कहना चाहता है "
बलवीर -"दद्दा मयंक ग्वालियर आ रहा है "
दद्दा -"क्या ?.......सच कह रहा है ना "
बलवीर -"बिल्कुल सच कह रहा हूं ठीक दो घंटे बाद फ्लाइट ग्वालियर पहुंच जाएगी "
दद्दा -"फलाइट ?.....ये क्या हैं "
बलवीर -"दद्दा हवाई जहाज की कह रहा हूं तो अपने आदमियों को भेज दो ग्वालियर पचास मिनट तो उनको भी लग जाने है"
दद्दा -"ठीक है साले को वहीं से उठवा लेंगे "
बलवीर -"नहीं दद्दा कोई चांस नहीं है मयंक के बहुत चाहने वाले है ग्वालियर में और हो ना हो वो जरूर जानते होगे की मयंक वहां आ रहा है हमें पहले ये पता करना होगा की वो ग्वालियर में आ क्यूं रहा है मुझे लगता है कि जरूर मयंक उस लड़की से मिलने जा रहा है और अगर ये बात सही है तो अपना काम और आसान होगा वो भी बिन लडे हम अगर उस लडकी का पता चला तो उसको पकड़ेंगे जो आसान होगा और उस लडको पकडा तो मयंक भी मिल जाएगा और मयंक के साथ विष्णु भी खिंचा चला आएगा।"
दद्दा -"वाह बलवीर..... बहुत आसान होगा फिर तो हमारे लिए सीधे मयंक पर हाथ डालते तो बहुत खून बहता "
इन दोनों का ये नामर्दों वाला प्लान कितना सफल होगा ये तो नहीं पता पर इसकी शुरुआत हो चुकी थी क्योंकि मयंक के ग्वालियर पहुंचते ही उसके पीछे तीन लोग लगे हुए थे।पर ये तीन लोग अकेले नहीं थे ये तो पक्का था देखते हैं आगे क्या होता है.......
Wah Hell Strom Bhai, kya gazab ki vyakhya ki he aapne Jeev aur Jivan ki..............Update 36
'जीव'......यह शब्द हर उस प्राणी के लिए प्रयोग होता है जिसमें जीवन है.....पर इस जीवन को छोड़कर क्या जीवों में और कोई समानता है मेरे हिसाब से तो नहीं....... इन्हीं विविधताओं की वजह से इन जीवों को अलग अलग नाम दिए अगल अलग प्रजाति दी जैसे मनुष्य जानवर और पौधे और इस वर्गीकरण से भी संतुष्ट ना होकर मनुष्य ने खुद को धर्मों औरमदद गा जातियों में बांट लिया।
जानवरों को शाकाहारी और मांसाहारी बना दिया तो वहीं पौधे भी इससे बच ना सके यह वर्गीकरण समय के साथ साथ बढ़ता गया और आज तक बढ़ रहा है और हर एक वर्ग खुद को दूसरे से महान और बड़ा बनाने में लगा है पर कभी विचार किया है क्यूं इन जीवों में इतनी विविधताएं है ????
शायद मेरे उत्तर से बहुत लोग संतुष्ट ना हों पर फिर भी बताने की कोशिश करता हूं।.....एक तालाब है जिसमें अनकों प्रकार के जीव निवाश करते हैं बड़े छोटे कुछ तो इतने छोटे की आंखों से देखे भी ना जा सके कुछ अधिक छोडे तो कुछ लंबे और अब हुआ यूं की मौसम बदलने लगा और वातावरण में गरमी बढ़ने लगी जिससे उस तालाब का पानी भी पहले की अपेक्षा में गर्म रहने लगा पर उस तालाब में कुछ ऐसे भी जीव थे जिन्हें गर्मी बर्दाश्त नहीं और वह सब धीरे धीरे मरने लगे तो उस तालाब में रहा कौन जो उजाला ठगर्मी सहन कर सके और जब ग्रीष्म ऋतु समाप्त हुई तो आई सर्द ऋतु और जो जीव सर्दी में ना सह सके तो वह इस मौसम में मर गये लेकिन फिर भी तालाब खाली तो नहीं हुआ क्योंकि उसमें ऐसे भी जीव थे जो हर मौसम को सहने की क्षमता रखते थे और वही शाश्वत रहे।
यहां अगर अलग दृष्टिकोण से देखें तो जीव मरे पर जो अमर था वो था जीवन इसी तरह एक मनुष्य दूसरे को मारे या खुद मरे जो शाश्वत है वो मानवता जिस दिन मानवता खत्म उस दिन मनुष्य का अस्तित्व भी नहीं रहगा । तालाब में अगर हर मौसम को सहने वाले जीव ना होते तो गर्मी में आधे मरते और सर्दी में बचे हुए फिर कुछ बचता तो वो था तालाब का वह पानी जो जीवित की गणना में नहीं आता।.....
....................
समय : 9:30 pm
स्थान : अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट, इंदौर
कैप्टन ने फलाइट उड़ान भरने वाली है उसकी घोषणा कर दी थी। और इसको सुनने के बाद उस जहाज में बैठे सब के चेहरे पर खुशी के भाव थे मयंक को छोड़कर कारण मयंक भी समझने में असमर्थ था की आखिर उसके मन के भीतर चल क्या रहा है।
जब जानवी का फोन कटा तब ही मयंक ने सोच लिया था वह उसी वक्त जानवी के पास जा रहा है उसको सर्पराज देने..... जानवी की याददाश्त जा चुकी थी और अब उसका सब कुछ मयंक ही था और ऐसा पहली बार हुआ था की फोन काटते वक्त फोन जानवी के पास नहीं था। और जानवी के पास जाने की उसको दिल से खुशी थी।
पर जो चीज उसके दिल में असमंजस पैदा कर रही थी वह थी साक्षी हुआ कुछ यूं जब मयंक रोमा के घर पहुंचा तो गाडी से उतरते वक्त साक्षी ने उसको एक कागज थमाया था और कहा था इसका जबाब वो नानी के यहां से आने के बाद लेगी। मयंक ने उसको रख लिया पर जब एयरपोर्ट पर जाने के लिए कपड़े बदल रहा था तब वो कागज घिर गया और जब उसने उस कागज को पढा तो पहले तो उसको विश्वास नहीं हुआ पर ऐसा तो था नहीं की वह सपना देख रहा था।
साक्षी ने उस कागज में अपने मन में उमडे सारे विचार छाप दिए थे और वह चाहती थी मयंक और वो दोस्त ना रहकर प्रेमी बन जाए मयंक के साथ ऐसा पहली बार हुआ था चूंकि वह शुरू से ही बाॅयस स्कूल में पढा गांव में भी या तो घर या लडाई झगडा लड़कियों से बात करना तक उसको ठीक से नहीं आता था । अब उसको समझ नहीं आ रहा था की वह क्या करे जब वो खुद किसी और से प्यार करता था .......पर वो इतना ना समझ नहीं था की सीधे ना बोलकर उसका दिल दुखाए क्योंकि वह जानता था अगर उसका प्यार मना करेगा तब कैसा लगेगा पर वह जानता था कि कितनी हिम्मत चाहिए किसी को अपने भाव बताना और ये हिम्मत खुद मयंक नहीं कर पाया था।
ये सारे विचार उसके मन में चलते रहे और पता भी नहीं चला कब दो घंटे बीत गये और उसकी फलाइट का लेंडिंग का समय भी आ गया खैर वह ग्वालियर पहुंच चुका था और एयरपोर्ट से निकलने में उसको आधा घंटा और लगा टर्मिनल से निकलते ही उसने टैक्सी पकडी और टैक्सी वाले को ***** नगर की तरफ चलने के लिए कहा आखरी बार मयंक यहां इंदौर आने से पहले आया था जानवी और रीत से मिलने उसके बाद आज इस शहर को देख रहा था।
ये शहर मयंक के गांव से सिर्फ 50 km दूर था तो एक तरह से वह इंदौर से अपने घर ही आ गया था और इस शहर में भी उसका घर था और ठीक घर के सामने टैक्सी रुकी और उसका किराया देने के बाद वह घर की तरफ बढ़ गया बेल बजाने के पांच मिनट बाद प्रहरी बहार आया तो मयंक को देख कर उसको विश्वास ही नहीं हुआ पर उसको सोने का बोलकर मयंक अंदर चला गया वह चाहता तो जानवी और रीत को इस घर में रख सकता था पर यहां रखना ना मुमकिन था क्योंकि विष्णु को जरूर पता चलता और फिर बलवीर के बेटे के मरने के बाद से ही वह जानवी को ढूंढ रहा था क्योंकि वह अपने बेटे की मौत का जिम्मेदार जानवी को मानता है तो बलवीर से भी बचाव करना था इसलिए इस घर के पास में ही एक सोसाइटी थी वहीं एक फ्लैट में जानवी और रीत को रखा गया था।
अब चूंकि आधी रात हो रही थी तो इस वक्त मयंक ने जाना ठीक नहीं समझा और अपने घर में ही सो गया।
*************
दो घंटे पहले......
"हैलो"....... बलवीर ने अपना फोन उठाते हुए कहा।
"सहाब जैसा आपने कहा था मैंने उस लड़के का पीछा किया "..... सामने से आवाज आई।
बलवीर -"हां तो क्या हुआ "
"सहाब वो तो हवाईअड्डे पर आया है अपना सामान लेकर और शायद कही जाने वाला है".......
बलवीर -"क्या ?......"......बलवीर जो बैठा हुआ शराब पी रहा था वो ये सुनते ही खडा हो गया।
"हां साहब "........
बलवीर -"तू एक काम कर वहां एयरपोर्ट पर पता कर की अभी दो घंटे में कौन-कौन सी जगह के लिए फलाइट उड़ान भरेंगी"
"जी सहाब अभी फोन करता हूं आपको ".......इतना कहते ही सामने से फोन कट गया।
पांच मिनट बाद.......
बलवीर -"हां बोल"
"सहाब बस एक ही है ग्वालियर के लिए "........
बलवीर -"ठीक है "
इतना कहते ही बलवीर ने फोन काट दिया और जल्दी से एक और फोन लगाया ।
"हैलो दद्दा "...... सामने से फोन उठते ही बलवीर ने कहा।
दद्दा -"क्या हुआ बलवीर बड़े दिनों बाद तेरी आवाज में खुशी झलक रही है "
बलवीर -"बात ही ऐसी है दद्दा जिस शिकार को हम यहां इंदौर में ढूंढ रहे थे वो खुद अपने पास आ रहा है "
दद्दा -"देख बलवीर साफ साफ बोल क्या कहना चाहता है "
बलवीर -"दद्दा मयंक ग्वालियर आ रहा है "
दद्दा -"क्या ?.......सच कह रहा है ना "
बलवीर -"बिल्कुल सच कह रहा हूं ठीक दो घंटे बाद फ्लाइट ग्वालियर पहुंच जाएगी "
दद्दा -"फलाइट ?.....ये क्या हैं "
बलवीर -"दद्दा हवाई जहाज की कह रहा हूं तो अपने आदमियों को भेज दो ग्वालियर पचास मिनट तो उनको भी लग जाने है"
दद्दा -"ठीक है साले को वहीं से उठवा लेंगे "
बलवीर -"नहीं दद्दा कोई चांस नहीं है मयंक के बहुत चाहने वाले है ग्वालियर में और हो ना हो वो जरूर जानते होगे की मयंक वहां आ रहा है हमें पहले ये पता करना होगा की वो ग्वालियर में आ क्यूं रहा है मुझे लगता है कि जरूर मयंक उस लड़की से मिलने जा रहा है और अगर ये बात सही है तो अपना काम और आसान होगा वो भी बिन लडे हम अगर उस लडकी का पता चला तो उसको पकड़ेंगे जो आसान होगा और उस लडको पकडा तो मयंक भी मिल जाएगा और मयंक के साथ विष्णु भी खिंचा चला आएगा।"
दद्दा -"वाह बलवीर..... बहुत आसान होगा फिर तो हमारे लिए सीधे मयंक पर हाथ डालते तो बहुत खून बहता "
इन दोनों का ये नामर्दों वाला प्लान कितना सफल होगा ये तो नहीं पता पर इसकी शुरुआत हो चुकी थी क्योंकि मयंक के ग्वालियर पहुंचते ही उसके पीछे तीन लोग लगे हुए थे।पर ये तीन लोग अकेले नहीं थे ये तो पक्का था देखते हैं आगे क्या होता है.......
Bahut hi shaandar update diya hai Hell Strom bhai.....Update 36
'जीव'......यह शब्द हर उस प्राणी के लिए प्रयोग होता है जिसमें जीवन है.....पर इस जीवन को छोड़कर क्या जीवों में और कोई समानता है मेरे हिसाब से तो नहीं....... इन्हीं विविधताओं की वजह से इन जीवों को अलग अलग नाम दिए अगल अलग प्रजाति दी जैसे मनुष्य जानवर और पौधे और इस वर्गीकरण से भी संतुष्ट ना होकर मनुष्य ने खुद को धर्मों औरमदद गा जातियों में बांट लिया।
जानवरों को शाकाहारी और मांसाहारी बना दिया तो वहीं पौधे भी इससे बच ना सके यह वर्गीकरण समय के साथ साथ बढ़ता गया और आज तक बढ़ रहा है और हर एक वर्ग खुद को दूसरे से महान और बड़ा बनाने में लगा है पर कभी विचार किया है क्यूं इन जीवों में इतनी विविधताएं है ????
शायद मेरे उत्तर से बहुत लोग संतुष्ट ना हों पर फिर भी बताने की कोशिश करता हूं।.....एक तालाब है जिसमें अनकों प्रकार के जीव निवाश करते हैं बड़े छोटे कुछ तो इतने छोटे की आंखों से देखे भी ना जा सके कुछ अधिक छोडे तो कुछ लंबे और अब हुआ यूं की मौसम बदलने लगा और वातावरण में गरमी बढ़ने लगी जिससे उस तालाब का पानी भी पहले की अपेक्षा में गर्म रहने लगा पर उस तालाब में कुछ ऐसे भी जीव थे जिन्हें गर्मी बर्दाश्त नहीं और वह सब धीरे धीरे मरने लगे तो उस तालाब में रहा कौन जो उजाला ठगर्मी सहन कर सके और जब ग्रीष्म ऋतु समाप्त हुई तो आई सर्द ऋतु और जो जीव सर्दी में ना सह सके तो वह इस मौसम में मर गये लेकिन फिर भी तालाब खाली तो नहीं हुआ क्योंकि उसमें ऐसे भी जीव थे जो हर मौसम को सहने की क्षमता रखते थे और वही शाश्वत रहे।
यहां अगर अलग दृष्टिकोण से देखें तो जीव मरे पर जो अमर था वो था जीवन इसी तरह एक मनुष्य दूसरे को मारे या खुद मरे जो शाश्वत है वो मानवता जिस दिन मानवता खत्म उस दिन मनुष्य का अस्तित्व भी नहीं रहगा । तालाब में अगर हर मौसम को सहने वाले जीव ना होते तो गर्मी में आधे मरते और सर्दी में बचे हुए फिर कुछ बचता तो वो था तालाब का वह पानी जो जीवित की गणना में नहीं आता।.....
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समय : 9:30 pm
स्थान : अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट, इंदौर
कैप्टन ने फलाइट उड़ान भरने वाली है उसकी घोषणा कर दी थी। और इसको सुनने के बाद उस जहाज में बैठे सब के चेहरे पर खुशी के भाव थे मयंक को छोड़कर कारण मयंक भी समझने में असमर्थ था की आखिर उसके मन के भीतर चल क्या रहा है।
जब जानवी का फोन कटा तब ही मयंक ने सोच लिया था वह उसी वक्त जानवी के पास जा रहा है उसको सर्पराज देने..... जानवी की याददाश्त जा चुकी थी और अब उसका सब कुछ मयंक ही था और ऐसा पहली बार हुआ था की फोन काटते वक्त फोन जानवी के पास नहीं था। और जानवी के पास जाने की उसको दिल से खुशी थी।
पर जो चीज उसके दिल में असमंजस पैदा कर रही थी वह थी साक्षी हुआ कुछ यूं जब मयंक रोमा के घर पहुंचा तो गाडी से उतरते वक्त साक्षी ने उसको एक कागज थमाया था और कहा था इसका जबाब वो नानी के यहां से आने के बाद लेगी। मयंक ने उसको रख लिया पर जब एयरपोर्ट पर जाने के लिए कपड़े बदल रहा था तब वो कागज घिर गया और जब उसने उस कागज को पढा तो पहले तो उसको विश्वास नहीं हुआ पर ऐसा तो था नहीं की वह सपना देख रहा था।
साक्षी ने उस कागज में अपने मन में उमडे सारे विचार छाप दिए थे और वह चाहती थी मयंक और वो दोस्त ना रहकर प्रेमी बन जाए मयंक के साथ ऐसा पहली बार हुआ था चूंकि वह शुरू से ही बाॅयस स्कूल में पढा गांव में भी या तो घर या लडाई झगडा लड़कियों से बात करना तक उसको ठीक से नहीं आता था । अब उसको समझ नहीं आ रहा था की वह क्या करे जब वो खुद किसी और से प्यार करता था .......पर वो इतना ना समझ नहीं था की सीधे ना बोलकर उसका दिल दुखाए क्योंकि वह जानता था अगर उसका प्यार मना करेगा तब कैसा लगेगा पर वह जानता था कि कितनी हिम्मत चाहिए किसी को अपने भाव बताना और ये हिम्मत खुद मयंक नहीं कर पाया था।
ये सारे विचार उसके मन में चलते रहे और पता भी नहीं चला कब दो घंटे बीत गये और उसकी फलाइट का लेंडिंग का समय भी आ गया खैर वह ग्वालियर पहुंच चुका था और एयरपोर्ट से निकलने में उसको आधा घंटा और लगा टर्मिनल से निकलते ही उसने टैक्सी पकडी और टैक्सी वाले को ***** नगर की तरफ चलने के लिए कहा आखरी बार मयंक यहां इंदौर आने से पहले आया था जानवी और रीत से मिलने उसके बाद आज इस शहर को देख रहा था।
ये शहर मयंक के गांव से सिर्फ 50 km दूर था तो एक तरह से वह इंदौर से अपने घर ही आ गया था और इस शहर में भी उसका घर था और ठीक घर के सामने टैक्सी रुकी और उसका किराया देने के बाद वह घर की तरफ बढ़ गया बेल बजाने के पांच मिनट बाद प्रहरी बहार आया तो मयंक को देख कर उसको विश्वास ही नहीं हुआ पर उसको सोने का बोलकर मयंक अंदर चला गया वह चाहता तो जानवी और रीत को इस घर में रख सकता था पर यहां रखना ना मुमकिन था क्योंकि विष्णु को जरूर पता चलता और फिर बलवीर के बेटे के मरने के बाद से ही वह जानवी को ढूंढ रहा था क्योंकि वह अपने बेटे की मौत का जिम्मेदार जानवी को मानता है तो बलवीर से भी बचाव करना था इसलिए इस घर के पास में ही एक सोसाइटी थी वहीं एक फ्लैट में जानवी और रीत को रखा गया था।
अब चूंकि आधी रात हो रही थी तो इस वक्त मयंक ने जाना ठीक नहीं समझा और अपने घर में ही सो गया।
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दो घंटे पहले......
"हैलो"....... बलवीर ने अपना फोन उठाते हुए कहा।
"सहाब जैसा आपने कहा था मैंने उस लड़के का पीछा किया "..... सामने से आवाज आई।
बलवीर -"हां तो क्या हुआ "
"सहाब वो तो हवाईअड्डे पर आया है अपना सामान लेकर और शायद कही जाने वाला है".......
बलवीर -"क्या ?......"......बलवीर जो बैठा हुआ शराब पी रहा था वो ये सुनते ही खडा हो गया।
"हां साहब "........
बलवीर -"तू एक काम कर वहां एयरपोर्ट पर पता कर की अभी दो घंटे में कौन-कौन सी जगह के लिए फलाइट उड़ान भरेंगी"
"जी सहाब अभी फोन करता हूं आपको ".......इतना कहते ही सामने से फोन कट गया।
पांच मिनट बाद.......
बलवीर -"हां बोल"
"सहाब बस एक ही है ग्वालियर के लिए "........
बलवीर -"ठीक है "
इतना कहते ही बलवीर ने फोन काट दिया और जल्दी से एक और फोन लगाया ।
"हैलो दद्दा "...... सामने से फोन उठते ही बलवीर ने कहा।
दद्दा -"क्या हुआ बलवीर बड़े दिनों बाद तेरी आवाज में खुशी झलक रही है "
बलवीर -"बात ही ऐसी है दद्दा जिस शिकार को हम यहां इंदौर में ढूंढ रहे थे वो खुद अपने पास आ रहा है "
दद्दा -"देख बलवीर साफ साफ बोल क्या कहना चाहता है "
बलवीर -"दद्दा मयंक ग्वालियर आ रहा है "
दद्दा -"क्या ?.......सच कह रहा है ना "
बलवीर -"बिल्कुल सच कह रहा हूं ठीक दो घंटे बाद फ्लाइट ग्वालियर पहुंच जाएगी "
दद्दा -"फलाइट ?.....ये क्या हैं "
बलवीर -"दद्दा हवाई जहाज की कह रहा हूं तो अपने आदमियों को भेज दो ग्वालियर पचास मिनट तो उनको भी लग जाने है"
दद्दा -"ठीक है साले को वहीं से उठवा लेंगे "
बलवीर -"नहीं दद्दा कोई चांस नहीं है मयंक के बहुत चाहने वाले है ग्वालियर में और हो ना हो वो जरूर जानते होगे की मयंक वहां आ रहा है हमें पहले ये पता करना होगा की वो ग्वालियर में आ क्यूं रहा है मुझे लगता है कि जरूर मयंक उस लड़की से मिलने जा रहा है और अगर ये बात सही है तो अपना काम और आसान होगा वो भी बिन लडे हम अगर उस लडकी का पता चला तो उसको पकड़ेंगे जो आसान होगा और उस लडको पकडा तो मयंक भी मिल जाएगा और मयंक के साथ विष्णु भी खिंचा चला आएगा।"
दद्दा -"वाह बलवीर..... बहुत आसान होगा फिर तो हमारे लिए सीधे मयंक पर हाथ डालते तो बहुत खून बहता "
इन दोनों का ये नामर्दों वाला प्लान कितना सफल होगा ये तो नहीं पता पर इसकी शुरुआत हो चुकी थी क्योंकि मयंक के ग्वालियर पहुंचते ही उसके पीछे तीन लोग लगे हुए थे।पर ये तीन लोग अकेले नहीं थे ये तो पक्का था देखते हैं आगे क्या होता है.......