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Adultery खलिश

Hell Strom

🦁
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Dono hi updates behad shandar he Hell Strom Bhai,

Joya to badi hi paise ki bhukhi ladki nikli, paise ki khatir apne payr aur apne desh dono se hi gaddari kar gayi................aur uska njam bhi gaddaro wala hi hua.........

Rabi madam to padosan nikali....usne to mayank aur sakhshi ki maa ko bhi dekha he chumma cahti karte huye....................lagta he mayank ke liye ek aur aunti ka intezam ho gaya........

Sakshi pyar to mayank se karti he lekin use propose karne me dar jati he..........mayank thoda thoda samjhne to laga he sakshi ke pyar ko................lekin use wo ek frank dost jayada lag rahi he abhi tak.............

Keep posting Bhai
Mayank or sakshi ka kya hota hai dekhte hain :D.......or rabi mam ke saath ab mja aanewala hai ......



Thanks ajju bhai :dost:
 

park

Well-Known Member
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Update -: 35






"दद्दा मयंक का पता चल गया "...... बलवीर ने दद्दा को आज जल्दबाजी में फोन लगाया था और सामने से जैसे ही फोन उठा तो बलवीर ने ये बात बताई ....







दद्दा - " ये बहुत अच्छी खबर सुनाई हैं तूने बलवीर "






बलवीर-"दद्दा पर उसको पकडना आसान नहीं होगा "





दद्दा -"क्यूं. .....एक लडके को पकडने में भी फट रही है तेरी अब"






बलवीर -"अनिल उसके साथ ही रहता है दद्दा और आप जानते हो की विष्णु और अनिल कुछ ज्यादा अलग नहीं है "






दद्दा -"अच्छा तो ये अनिल के साथ रह रहा है मेरी माने तो बस इस पर नजर रखवा कुछ दिन इसके अलावा कुछ नही '






बलवीर -"जैसा आप कहो दद्दा ....."






इसके बाद इन दोनो की बात होती रहीं और जब बात खतम हुई तो बलवीर ने अपने एक आदमी को बुलाकर मयंक पर नजर रखने के लिए कह दिया .......





..............





"आंटी आप कहां जा रही हैं ?"........ मयंक जो अभी कोचिंग से घर लौट कर आया था उसने घर आते ही देखा की रोमा अपना बैग सोफे पर रखे हुए इंतजार कर रही थी की कब मयंक और साक्षी कब कोचिंग से आएंगे पर साक्षी तो इफ्तिका के साथ उसके घर ही जा चुकी थी |






रोमा -" देखो मयंक मैं अपने पीहर जा रही हूं चूंकि मेरी दादी का देहांत हो गया है तो मैं तुम्हारा और साक्षी का ही इंतजार कर रही थी "






मयंक -"लेकिन साक्षी तो इफ्तिका के घर है आंटी"





रोमा -"ये लडकी भी ना "





मयंक -"लेकिन आंटी आप और साक्षी अकेले जाएंगे?"







रोमा -"नहीं मयंक तुम्हारे अंकल आते ही होंगे मेरे पीहर वो ****** से निकल चुके हैं तो बस तुम्हें हमको बस स्टॉप पर छोड़ना होगा "







मयंक -"आप चिंता मत करो आंटी मैं आपको और साक्षी को आपके घर तक ही छोड़ दुंगा और साक्षी भी आ जाएगी मुझे दस मिनट दो "........





मयंक ने तुरंत राजीव को फोन किया .....





मयंक -"रज्जो यार जितनी जल्दी हो सके अपनी गाड़ी ले आ साक्षी के घर और साथ ही इफ्तिका के घर से साक्षी को भी पिक कर लियो "





राजीव -"कोई दिक्कत?"






मयंक -"वो आंटी को अर्जेंटली पीहर जाना पड़ रहा है उनकी दादी का निधन हो गया है"






राजीव -"आ रहा हूं दस मिनट में"......






अगले पंद्रह मिनट में ही राजीव साक्षी के घर था साक्षी को साथ लाते हुए जब तक मयंक भी चेंज कर चुका था और रोमा ने भी साक्षी का सारा सामान पैक कर दिया था।







राजीव के आते ही मयंक रोमा और साक्षी को लेकर निकल गया और राजीव मयंक की बाइक लेकर वापस अपने घर चला गया।
.
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मयंक को लगभग एक घंटा लगा था साक्षी के मामा के यहां पहुंचने में पर उसने अंदर जाना ठीक नहीं समझा जब वो वहां किसी को जानता तक नहीं था और फिर आशीष उसको बहार ही मिल गया था। तो फिर उसने वहां से लौट कर आना ही था । और ठीक 40 मिनट में वो वापस इंदौर आ चुका था और नहाने के तुरंत बाद ही
चल दिया राजीव के घर क्योंकि भूख कुछ ज्यादा तेज हो गई थी।






"चाची"........ राजीव के घर पहुंचते ही मयंक ने आवाज लगाई।







चाची -"क्या हुआ क्यूं चीख रहा है आ जा तेरे लिए तेरी मन पसंद का खाना बनाया है.....बैठ जल्दी में लेकर आई।





मयंक -"वाह! माते आपको कैसे पता चला मुझे भूख लगी है कहीं कोई शक्ति तो नहीं आ गई आपके भीतर







चाची -"कोई शक्ति नहीं है रे वो तो राजीव ने बताया तू रोमा और साक्षी को कोचिंग से आते ही छोड़ने चला गय तो खाना तो खाया नहीं होगा तूने इसलिए पता था मुझे सीधा यहीं आएगा.....अब चुप चाप खाना खा ज्यादा पूछताछ ना कर "






"जैसा आप कहे माते "...... मयंक ने हंसते हुए कहा।






"ओए छोटी छिपकली आज बड़ी चुप है तू"....... मयंक ने दीदी के कमरे आते ही अवनी से कहा जो किताबों को बड़े ध्यान से देख रही थी।






"मैं छिपकली नहीं हूं"....... अवनी ने अपने प्यारे से चेहरे पर गुस्सा लाते हुए कहा।






"हां वही तो तू छिपकली नहीं छोटी छिपकली है"...... मयंक ने उसके गाल पकड़ते हुए कहा।






"क्यूं परेशान कर रहा है उसको"........दीदी ने कमरे आते ही मयंक के सर पर मारते हुए कहा।






अवनी -"अब बोलो छिपकली फिर बताती हूं आपको अकेला समझ कर परेशान कर रहे थे ना "........ अवनी ने जीव निकालते हुए कहा।







"बड़ी चालाक है ये छिपकली तो "......ये कहते हुए मयंक कमरे से बहार दौड़ लिया।






"दीदी भईया को छोड़ना नहीं है चलो"........ अवनी ने सीया का हाथ पकड़ते हुए कहा।






मयंक थोड़ी देर बाद राजीव के घर से निकल गया साक्षी के घर के लिए और घर पहुंचते ही उसका फोन बजा और फोन की स्क्रीन देखते ही उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई।






मयंक -"हैलो"






"क्या हैलो भईया कितने दिन हो गये आपने एक बार भी फोन नहीं किया और उस दिन भी आपने बीच में ही फोन काट दिया था।" .....जानवी ने शिकायत जाहिर करते हुए कहा जो की लाजमी भी था जब उस दिन अस्पताल के कांड के बाद से मयंक ने एक बार भी जानवी को फोन नहीं किया था।







मयंक -"साॅरी जानवी पर टाइम ही नहीं मिला ..... लेकिन अब ऐसा नहीं होगा पक्का वादा है ये मेरा "






जानवी-"अच्छा जबसे आप इंदौर गये है तब से गिनती की तीन बार बात हुई है हमारी भईया "






मयंक -"अच्छा फिर बताओ कैसे कैसे माफी मिलेगी "





जानवी -"या तो आप मेरे पास आओ या फिर मैं आपके पास आती हूं कितने दिन हो गये आपको देखे हुए "






मयंक -"याद तो मुझे भी आती है तुम्हारी जानवी ....अच्छा मैं वादा करता हूं की जल्द से जल्द तुम्हारे पास आउंगा।"






"वो तो चली गई मयंक गुस्सा होकर "........ सामने से रीत की आवाज आई।






मयंक -"रीत उसको समझाओ ना नहीं आ सकता अभी मैं"







रीत -"अभी जब गुस्सा शांत होगा तो फिर खुद दुखी होगी ....पर उसका कहना ठीक ही तो है उस हादसे के बाद उसको अपना कुछ भी पुराना याद नहीं वो सिर्फ यही जानती है की इस दुनिया में उसका एक भाई है तो गु
स्सा होना तो लाजमी है"







रीत की बात सुनते ही मयंक का दिमाग एक बार फिर वहीं पुराने समय में चला गया।






"हैलो मयंक"......जब सामने से कुछ जबाब नहीं आया तो रीत ने कहा।






मयंक -"ह्हहआं रीत .....म्मम मैं बाद में बात करता हूं "....





इतना कहते ही मयंक ने फोन काट दिया और वहीं सोफे पर पसर गया आंख बंद करते हुए.........
Nice and superb update....
 

Pagal king

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Update -: 35






"दद्दा मयंक का पता चल गया "...... बलवीर ने दद्दा को आज जल्दबाजी में फोन लगाया था और सामने से जैसे ही फोन उठा तो बलवीर ने ये बात बताई ....







दद्दा - " ये बहुत अच्छी खबर सुनाई हैं तूने बलवीर "






बलवीर-"दद्दा पर उसको पकडना आसान नहीं होगा "





दद्दा -"क्यूं. .....एक लडके को पकडने में भी फट रही है तेरी अब"






बलवीर -"अनिल उसके साथ ही रहता है दद्दा और आप जानते हो की विष्णु और अनिल कुछ ज्यादा अलग नहीं है "






दद्दा -"अच्छा तो ये अनिल के साथ रह रहा है मेरी माने तो बस इस पर नजर रखवा कुछ दिन इसके अलावा कुछ नही '






बलवीर -"जैसा आप कहो दद्दा ....."






इसके बाद इन दोनो की बात होती रहीं और जब बात खतम हुई तो बलवीर ने अपने एक आदमी को बुलाकर मयंक पर नजर रखने के लिए कह दिया .......





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"आंटी आप कहां जा रही हैं ?"........ मयंक जो अभी कोचिंग से घर लौट कर आया था उसने घर आते ही देखा की रोमा अपना बैग सोफे पर रखे हुए इंतजार कर रही थी की कब मयंक और साक्षी कब कोचिंग से आएंगे पर साक्षी तो इफ्तिका के साथ उसके घर ही जा चुकी थी |






रोमा -" देखो मयंक मैं अपने पीहर जा रही हूं चूंकि मेरी दादी का देहांत हो गया है तो मैं तुम्हारा और साक्षी का ही इंतजार कर रही थी "






मयंक -"लेकिन साक्षी तो इफ्तिका के घर है आंटी"





रोमा -"ये लडकी भी ना "





मयंक -"लेकिन आंटी आप और साक्षी अकेले जाएंगे?"







रोमा -"नहीं मयंक तुम्हारे अंकल आते ही होंगे मेरे पीहर वो ****** से निकल चुके हैं तो बस तुम्हें हमको बस स्टॉप पर छोड़ना होगा "







मयंक -"आप चिंता मत करो आंटी मैं आपको और साक्षी को आपके घर तक ही छोड़ दुंगा और साक्षी भी आ जाएगी मुझे दस मिनट दो "........





मयंक ने तुरंत राजीव को फोन किया .....





मयंक -"रज्जो यार जितनी जल्दी हो सके अपनी गाड़ी ले आ साक्षी के घर और साथ ही इफ्तिका के घर से साक्षी को भी पिक कर लियो "





राजीव -"कोई दिक्कत?"






मयंक -"वो आंटी को अर्जेंटली पीहर जाना पड़ रहा है उनकी दादी का निधन हो गया है"






राजीव -"आ रहा हूं दस मिनट में"......






अगले पंद्रह मिनट में ही राजीव साक्षी के घर था साक्षी को साथ लाते हुए जब तक मयंक भी चेंज कर चुका था और रोमा ने भी साक्षी का सारा सामान पैक कर दिया था।







राजीव के आते ही मयंक रोमा और साक्षी को लेकर निकल गया और राजीव मयंक की बाइक लेकर वापस अपने घर चला गया।
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मयंक को लगभग एक घंटा लगा था साक्षी के मामा के यहां पहुंचने में पर उसने अंदर जाना ठीक नहीं समझा जब वो वहां किसी को जानता तक नहीं था और फिर आशीष उसको बहार ही मिल गया था। तो फिर उसने वहां से लौट कर आना ही था । और ठीक 40 मिनट में वो वापस इंदौर आ चुका था और नहाने के तुरंत बाद ही
चल दिया राजीव के घर क्योंकि भूख कुछ ज्यादा तेज हो गई थी।






"चाची"........ राजीव के घर पहुंचते ही मयंक ने आवाज लगाई।







चाची -"क्या हुआ क्यूं चीख रहा है आ जा तेरे लिए तेरी मन पसंद का खाना बनाया है.....बैठ जल्दी में लेकर आई।





मयंक -"वाह! माते आपको कैसे पता चला मुझे भूख लगी है कहीं कोई शक्ति तो नहीं आ गई आपके भीतर







चाची -"कोई शक्ति नहीं है रे वो तो राजीव ने बताया तू रोमा और साक्षी को कोचिंग से आते ही छोड़ने चला गय तो खाना तो खाया नहीं होगा तूने इसलिए पता था मुझे सीधा यहीं आएगा.....अब चुप चाप खाना खा ज्यादा पूछताछ ना कर "






"जैसा आप कहे माते "...... मयंक ने हंसते हुए कहा।






"ओए छोटी छिपकली आज बड़ी चुप है तू"....... मयंक ने दीदी के कमरे आते ही अवनी से कहा जो किताबों को बड़े ध्यान से देख रही थी।






"मैं छिपकली नहीं हूं"....... अवनी ने अपने प्यारे से चेहरे पर गुस्सा लाते हुए कहा।






"हां वही तो तू छिपकली नहीं छोटी छिपकली है"...... मयंक ने उसके गाल पकड़ते हुए कहा।






"क्यूं परेशान कर रहा है उसको"........दीदी ने कमरे आते ही मयंक के सर पर मारते हुए कहा।






अवनी -"अब बोलो छिपकली फिर बताती हूं आपको अकेला समझ कर परेशान कर रहे थे ना "........ अवनी ने जीव निकालते हुए कहा।







"बड़ी चालाक है ये छिपकली तो "......ये कहते हुए मयंक कमरे से बहार दौड़ लिया।






"दीदी भईया को छोड़ना नहीं है चलो"........ अवनी ने सीया का हाथ पकड़ते हुए कहा।






मयंक थोड़ी देर बाद राजीव के घर से निकल गया साक्षी के घर के लिए और घर पहुंचते ही उसका फोन बजा और फोन की स्क्रीन देखते ही उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई।






मयंक -"हैलो"






"क्या हैलो भईया कितने दिन हो गये आपने एक बार भी फोन नहीं किया और उस दिन भी आपने बीच में ही फोन काट दिया था।" .....जानवी ने शिकायत जाहिर करते हुए कहा जो की लाजमी भी था जब उस दिन अस्पताल के कांड के बाद से मयंक ने एक बार भी जानवी को फोन नहीं किया था।







मयंक -"साॅरी जानवी पर टाइम ही नहीं मिला ..... लेकिन अब ऐसा नहीं होगा पक्का वादा है ये मेरा "






जानवी-"अच्छा जबसे आप इंदौर गये है तब से गिनती की तीन बार बात हुई है हमारी भईया "






मयंक -"अच्छा फिर बताओ कैसे कैसे माफी मिलेगी "





जानवी -"या तो आप मेरे पास आओ या फिर मैं आपके पास आती हूं कितने दिन हो गये आपको देखे हुए "






मयंक -"याद तो मुझे भी आती है तुम्हारी जानवी ....अच्छा मैं वादा करता हूं की जल्द से जल्द तुम्हारे पास आउंगा।"






"वो तो चली गई मयंक गुस्सा होकर "........ सामने से रीत की आवाज आई।






मयंक -"रीत उसको समझाओ ना नहीं आ सकता अभी मैं"







रीत -"अभी जब गुस्सा शांत होगा तो फिर खुद दुखी होगी ....पर उसका कहना ठीक ही तो है उस हादसे के बाद उसको अपना कुछ भी पुराना याद नहीं वो सिर्फ यही जानती है की इस दुनिया में उसका एक भाई है तो गु
स्सा होना तो लाजमी है"







रीत की बात सुनते ही मयंक का दिमाग एक बार फिर वहीं पुराने समय में चला गया।






"हैलो मयंक"......जब सामने से कुछ जबाब नहीं आया तो रीत ने कहा।






मयंक -"ह्हहआं रीत .....म्मम मैं बाद में बात करता हूं "....





इतना कहते ही मयंक ने फोन काट दिया और वहीं सोफे पर पसर गया आंख बंद करते हुए.........

💯💯💯💯💯
 

kas1709

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"दद्दा मयंक का पता चल गया "...... बलवीर ने दद्दा को आज जल्दबाजी में फोन लगाया था और सामने से जैसे ही फोन उठा तो बलवीर ने ये बात बताई ....







दद्दा - " ये बहुत अच्छी खबर सुनाई हैं तूने बलवीर "






बलवीर-"दद्दा पर उसको पकडना आसान नहीं होगा "





दद्दा -"क्यूं. .....एक लडके को पकडने में भी फट रही है तेरी अब"






बलवीर -"अनिल उसके साथ ही रहता है दद्दा और आप जानते हो की विष्णु और अनिल कुछ ज्यादा अलग नहीं है "






दद्दा -"अच्छा तो ये अनिल के साथ रह रहा है मेरी माने तो बस इस पर नजर रखवा कुछ दिन इसके अलावा कुछ नही '






बलवीर -"जैसा आप कहो दद्दा ....."






इसके बाद इन दोनो की बात होती रहीं और जब बात खतम हुई तो बलवीर ने अपने एक आदमी को बुलाकर मयंक पर नजर रखने के लिए कह दिया .......





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"आंटी आप कहां जा रही हैं ?"........ मयंक जो अभी कोचिंग से घर लौट कर आया था उसने घर आते ही देखा की रोमा अपना बैग सोफे पर रखे हुए इंतजार कर रही थी की कब मयंक और साक्षी कब कोचिंग से आएंगे पर साक्षी तो इफ्तिका के साथ उसके घर ही जा चुकी थी |






रोमा -" देखो मयंक मैं अपने पीहर जा रही हूं चूंकि मेरी दादी का देहांत हो गया है तो मैं तुम्हारा और साक्षी का ही इंतजार कर रही थी "






मयंक -"लेकिन साक्षी तो इफ्तिका के घर है आंटी"





रोमा -"ये लडकी भी ना "





मयंक -"लेकिन आंटी आप और साक्षी अकेले जाएंगे?"







रोमा -"नहीं मयंक तुम्हारे अंकल आते ही होंगे मेरे पीहर वो ****** से निकल चुके हैं तो बस तुम्हें हमको बस स्टॉप पर छोड़ना होगा "







मयंक -"आप चिंता मत करो आंटी मैं आपको और साक्षी को आपके घर तक ही छोड़ दुंगा और साक्षी भी आ जाएगी मुझे दस मिनट दो "........





मयंक ने तुरंत राजीव को फोन किया .....





मयंक -"रज्जो यार जितनी जल्दी हो सके अपनी गाड़ी ले आ साक्षी के घर और साथ ही इफ्तिका के घर से साक्षी को भी पिक कर लियो "





राजीव -"कोई दिक्कत?"






मयंक -"वो आंटी को अर्जेंटली पीहर जाना पड़ रहा है उनकी दादी का निधन हो गया है"






राजीव -"आ रहा हूं दस मिनट में"......






अगले पंद्रह मिनट में ही राजीव साक्षी के घर था साक्षी को साथ लाते हुए जब तक मयंक भी चेंज कर चुका था और रोमा ने भी साक्षी का सारा सामान पैक कर दिया था।







राजीव के आते ही मयंक रोमा और साक्षी को लेकर निकल गया और राजीव मयंक की बाइक लेकर वापस अपने घर चला गया।
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मयंक को लगभग एक घंटा लगा था साक्षी के मामा के यहां पहुंचने में पर उसने अंदर जाना ठीक नहीं समझा जब वो वहां किसी को जानता तक नहीं था और फिर आशीष उसको बहार ही मिल गया था। तो फिर उसने वहां से लौट कर आना ही था । और ठीक 40 मिनट में वो वापस इंदौर आ चुका था और नहाने के तुरंत बाद ही
चल दिया राजीव के घर क्योंकि भूख कुछ ज्यादा तेज हो गई थी।






"चाची"........ राजीव के घर पहुंचते ही मयंक ने आवाज लगाई।







चाची -"क्या हुआ क्यूं चीख रहा है आ जा तेरे लिए तेरी मन पसंद का खाना बनाया है.....बैठ जल्दी में लेकर आई।





मयंक -"वाह! माते आपको कैसे पता चला मुझे भूख लगी है कहीं कोई शक्ति तो नहीं आ गई आपके भीतर







चाची -"कोई शक्ति नहीं है रे वो तो राजीव ने बताया तू रोमा और साक्षी को कोचिंग से आते ही छोड़ने चला गय तो खाना तो खाया नहीं होगा तूने इसलिए पता था मुझे सीधा यहीं आएगा.....अब चुप चाप खाना खा ज्यादा पूछताछ ना कर "






"जैसा आप कहे माते "...... मयंक ने हंसते हुए कहा।






"ओए छोटी छिपकली आज बड़ी चुप है तू"....... मयंक ने दीदी के कमरे आते ही अवनी से कहा जो किताबों को बड़े ध्यान से देख रही थी।






"मैं छिपकली नहीं हूं"....... अवनी ने अपने प्यारे से चेहरे पर गुस्सा लाते हुए कहा।






"हां वही तो तू छिपकली नहीं छोटी छिपकली है"...... मयंक ने उसके गाल पकड़ते हुए कहा।






"क्यूं परेशान कर रहा है उसको"........दीदी ने कमरे आते ही मयंक के सर पर मारते हुए कहा।






अवनी -"अब बोलो छिपकली फिर बताती हूं आपको अकेला समझ कर परेशान कर रहे थे ना "........ अवनी ने जीव निकालते हुए कहा।







"बड़ी चालाक है ये छिपकली तो "......ये कहते हुए मयंक कमरे से बहार दौड़ लिया।






"दीदी भईया को छोड़ना नहीं है चलो"........ अवनी ने सीया का हाथ पकड़ते हुए कहा।






मयंक थोड़ी देर बाद राजीव के घर से निकल गया साक्षी के घर के लिए और घर पहुंचते ही उसका फोन बजा और फोन की स्क्रीन देखते ही उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई।






मयंक -"हैलो"






"क्या हैलो भईया कितने दिन हो गये आपने एक बार भी फोन नहीं किया और उस दिन भी आपने बीच में ही फोन काट दिया था।" .....जानवी ने शिकायत जाहिर करते हुए कहा जो की लाजमी भी था जब उस दिन अस्पताल के कांड के बाद से मयंक ने एक बार भी जानवी को फोन नहीं किया था।







मयंक -"साॅरी जानवी पर टाइम ही नहीं मिला ..... लेकिन अब ऐसा नहीं होगा पक्का वादा है ये मेरा "






जानवी-"अच्छा जबसे आप इंदौर गये है तब से गिनती की तीन बार बात हुई है हमारी भईया "






मयंक -"अच्छा फिर बताओ कैसे कैसे माफी मिलेगी "





जानवी -"या तो आप मेरे पास आओ या फिर मैं आपके पास आती हूं कितने दिन हो गये आपको देखे हुए "






मयंक -"याद तो मुझे भी आती है तुम्हारी जानवी ....अच्छा मैं वादा करता हूं की जल्द से जल्द तुम्हारे पास आउंगा।"






"वो तो चली गई मयंक गुस्सा होकर "........ सामने से रीत की आवाज आई।






मयंक -"रीत उसको समझाओ ना नहीं आ सकता अभी मैं"







रीत -"अभी जब गुस्सा शांत होगा तो फिर खुद दुखी होगी ....पर उसका कहना ठीक ही तो है उस हादसे के बाद उसको अपना कुछ भी पुराना याद नहीं वो सिर्फ यही जानती है की इस दुनिया में उसका एक भाई है तो गु
स्सा होना तो लाजमी है"







रीत की बात सुनते ही मयंक का दिमाग एक बार फिर वहीं पुराने समय में चला गया।






"हैलो मयंक"......जब सामने से कुछ जबाब नहीं आया तो रीत ने कहा।






मयंक -"ह्हहआं रीत .....म्मम मैं बाद में बात करता हूं "....





इतना कहते ही मयंक ने फोन काट दिया और वहीं सोफे पर पसर गया आंख बंद करते हुए.........
Nice update....
 

dhparikh

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Update -: 35






"दद्दा मयंक का पता चल गया "...... बलवीर ने दद्दा को आज जल्दबाजी में फोन लगाया था और सामने से जैसे ही फोन उठा तो बलवीर ने ये बात बताई ....







दद्दा - " ये बहुत अच्छी खबर सुनाई हैं तूने बलवीर "






बलवीर-"दद्दा पर उसको पकडना आसान नहीं होगा "





दद्दा -"क्यूं. .....एक लडके को पकडने में भी फट रही है तेरी अब"






बलवीर -"अनिल उसके साथ ही रहता है दद्दा और आप जानते हो की विष्णु और अनिल कुछ ज्यादा अलग नहीं है "






दद्दा -"अच्छा तो ये अनिल के साथ रह रहा है मेरी माने तो बस इस पर नजर रखवा कुछ दिन इसके अलावा कुछ नही '






बलवीर -"जैसा आप कहो दद्दा ....."






इसके बाद इन दोनो की बात होती रहीं और जब बात खतम हुई तो बलवीर ने अपने एक आदमी को बुलाकर मयंक पर नजर रखने के लिए कह दिया .......





..............





"आंटी आप कहां जा रही हैं ?"........ मयंक जो अभी कोचिंग से घर लौट कर आया था उसने घर आते ही देखा की रोमा अपना बैग सोफे पर रखे हुए इंतजार कर रही थी की कब मयंक और साक्षी कब कोचिंग से आएंगे पर साक्षी तो इफ्तिका के साथ उसके घर ही जा चुकी थी |






रोमा -" देखो मयंक मैं अपने पीहर जा रही हूं चूंकि मेरी दादी का देहांत हो गया है तो मैं तुम्हारा और साक्षी का ही इंतजार कर रही थी "






मयंक -"लेकिन साक्षी तो इफ्तिका के घर है आंटी"





रोमा -"ये लडकी भी ना "





मयंक -"लेकिन आंटी आप और साक्षी अकेले जाएंगे?"







रोमा -"नहीं मयंक तुम्हारे अंकल आते ही होंगे मेरे पीहर वो ****** से निकल चुके हैं तो बस तुम्हें हमको बस स्टॉप पर छोड़ना होगा "







मयंक -"आप चिंता मत करो आंटी मैं आपको और साक्षी को आपके घर तक ही छोड़ दुंगा और साक्षी भी आ जाएगी मुझे दस मिनट दो "........





मयंक ने तुरंत राजीव को फोन किया .....





मयंक -"रज्जो यार जितनी जल्दी हो सके अपनी गाड़ी ले आ साक्षी के घर और साथ ही इफ्तिका के घर से साक्षी को भी पिक कर लियो "





राजीव -"कोई दिक्कत?"






मयंक -"वो आंटी को अर्जेंटली पीहर जाना पड़ रहा है उनकी दादी का निधन हो गया है"






राजीव -"आ रहा हूं दस मिनट में"......






अगले पंद्रह मिनट में ही राजीव साक्षी के घर था साक्षी को साथ लाते हुए जब तक मयंक भी चेंज कर चुका था और रोमा ने भी साक्षी का सारा सामान पैक कर दिया था।







राजीव के आते ही मयंक रोमा और साक्षी को लेकर निकल गया और राजीव मयंक की बाइक लेकर वापस अपने घर चला गया।
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मयंक को लगभग एक घंटा लगा था साक्षी के मामा के यहां पहुंचने में पर उसने अंदर जाना ठीक नहीं समझा जब वो वहां किसी को जानता तक नहीं था और फिर आशीष उसको बहार ही मिल गया था। तो फिर उसने वहां से लौट कर आना ही था । और ठीक 40 मिनट में वो वापस इंदौर आ चुका था और नहाने के तुरंत बाद ही
चल दिया राजीव के घर क्योंकि भूख कुछ ज्यादा तेज हो गई थी।






"चाची"........ राजीव के घर पहुंचते ही मयंक ने आवाज लगाई।







चाची -"क्या हुआ क्यूं चीख रहा है आ जा तेरे लिए तेरी मन पसंद का खाना बनाया है.....बैठ जल्दी में लेकर आई।





मयंक -"वाह! माते आपको कैसे पता चला मुझे भूख लगी है कहीं कोई शक्ति तो नहीं आ गई आपके भीतर







चाची -"कोई शक्ति नहीं है रे वो तो राजीव ने बताया तू रोमा और साक्षी को कोचिंग से आते ही छोड़ने चला गय तो खाना तो खाया नहीं होगा तूने इसलिए पता था मुझे सीधा यहीं आएगा.....अब चुप चाप खाना खा ज्यादा पूछताछ ना कर "






"जैसा आप कहे माते "...... मयंक ने हंसते हुए कहा।






"ओए छोटी छिपकली आज बड़ी चुप है तू"....... मयंक ने दीदी के कमरे आते ही अवनी से कहा जो किताबों को बड़े ध्यान से देख रही थी।






"मैं छिपकली नहीं हूं"....... अवनी ने अपने प्यारे से चेहरे पर गुस्सा लाते हुए कहा।






"हां वही तो तू छिपकली नहीं छोटी छिपकली है"...... मयंक ने उसके गाल पकड़ते हुए कहा।






"क्यूं परेशान कर रहा है उसको"........दीदी ने कमरे आते ही मयंक के सर पर मारते हुए कहा।






अवनी -"अब बोलो छिपकली फिर बताती हूं आपको अकेला समझ कर परेशान कर रहे थे ना "........ अवनी ने जीव निकालते हुए कहा।







"बड़ी चालाक है ये छिपकली तो "......ये कहते हुए मयंक कमरे से बहार दौड़ लिया।






"दीदी भईया को छोड़ना नहीं है चलो"........ अवनी ने सीया का हाथ पकड़ते हुए कहा।






मयंक थोड़ी देर बाद राजीव के घर से निकल गया साक्षी के घर के लिए और घर पहुंचते ही उसका फोन बजा और फोन की स्क्रीन देखते ही उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई।






मयंक -"हैलो"






"क्या हैलो भईया कितने दिन हो गये आपने एक बार भी फोन नहीं किया और उस दिन भी आपने बीच में ही फोन काट दिया था।" .....जानवी ने शिकायत जाहिर करते हुए कहा जो की लाजमी भी था जब उस दिन अस्पताल के कांड के बाद से मयंक ने एक बार भी जानवी को फोन नहीं किया था।







मयंक -"साॅरी जानवी पर टाइम ही नहीं मिला ..... लेकिन अब ऐसा नहीं होगा पक्का वादा है ये मेरा "






जानवी-"अच्छा जबसे आप इंदौर गये है तब से गिनती की तीन बार बात हुई है हमारी भईया "






मयंक -"अच्छा फिर बताओ कैसे कैसे माफी मिलेगी "





जानवी -"या तो आप मेरे पास आओ या फिर मैं आपके पास आती हूं कितने दिन हो गये आपको देखे हुए "






मयंक -"याद तो मुझे भी आती है तुम्हारी जानवी ....अच्छा मैं वादा करता हूं की जल्द से जल्द तुम्हारे पास आउंगा।"






"वो तो चली गई मयंक गुस्सा होकर "........ सामने से रीत की आवाज आई।






मयंक -"रीत उसको समझाओ ना नहीं आ सकता अभी मैं"







रीत -"अभी जब गुस्सा शांत होगा तो फिर खुद दुखी होगी ....पर उसका कहना ठीक ही तो है उस हादसे के बाद उसको अपना कुछ भी पुराना याद नहीं वो सिर्फ यही जानती है की इस दुनिया में उसका एक भाई है तो गु
स्सा होना तो लाजमी है"







रीत की बात सुनते ही मयंक का दिमाग एक बार फिर वहीं पुराने समय में चला गया।






"हैलो मयंक"......जब सामने से कुछ जबाब नहीं आया तो रीत ने कहा।






मयंक -"ह्हहआं रीत .....म्मम मैं बाद में बात करता हूं "....





इतना कहते ही मयंक ने फोन काट दिया और वहीं सोफे पर पसर गया आंख बंद करते हुए.........
Nice update....
 

parkas

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Update -: 35






"दद्दा मयंक का पता चल गया "...... बलवीर ने दद्दा को आज जल्दबाजी में फोन लगाया था और सामने से जैसे ही फोन उठा तो बलवीर ने ये बात बताई ....







दद्दा - " ये बहुत अच्छी खबर सुनाई हैं तूने बलवीर "






बलवीर-"दद्दा पर उसको पकडना आसान नहीं होगा "





दद्दा -"क्यूं. .....एक लडके को पकडने में भी फट रही है तेरी अब"






बलवीर -"अनिल उसके साथ ही रहता है दद्दा और आप जानते हो की विष्णु और अनिल कुछ ज्यादा अलग नहीं है "






दद्दा -"अच्छा तो ये अनिल के साथ रह रहा है मेरी माने तो बस इस पर नजर रखवा कुछ दिन इसके अलावा कुछ नही '






बलवीर -"जैसा आप कहो दद्दा ....."






इसके बाद इन दोनो की बात होती रहीं और जब बात खतम हुई तो बलवीर ने अपने एक आदमी को बुलाकर मयंक पर नजर रखने के लिए कह दिया .......





..............





"आंटी आप कहां जा रही हैं ?"........ मयंक जो अभी कोचिंग से घर लौट कर आया था उसने घर आते ही देखा की रोमा अपना बैग सोफे पर रखे हुए इंतजार कर रही थी की कब मयंक और साक्षी कब कोचिंग से आएंगे पर साक्षी तो इफ्तिका के साथ उसके घर ही जा चुकी थी |






रोमा -" देखो मयंक मैं अपने पीहर जा रही हूं चूंकि मेरी दादी का देहांत हो गया है तो मैं तुम्हारा और साक्षी का ही इंतजार कर रही थी "






मयंक -"लेकिन साक्षी तो इफ्तिका के घर है आंटी"





रोमा -"ये लडकी भी ना "





मयंक -"लेकिन आंटी आप और साक्षी अकेले जाएंगे?"







रोमा -"नहीं मयंक तुम्हारे अंकल आते ही होंगे मेरे पीहर वो ****** से निकल चुके हैं तो बस तुम्हें हमको बस स्टॉप पर छोड़ना होगा "







मयंक -"आप चिंता मत करो आंटी मैं आपको और साक्षी को आपके घर तक ही छोड़ दुंगा और साक्षी भी आ जाएगी मुझे दस मिनट दो "........





मयंक ने तुरंत राजीव को फोन किया .....





मयंक -"रज्जो यार जितनी जल्दी हो सके अपनी गाड़ी ले आ साक्षी के घर और साथ ही इफ्तिका के घर से साक्षी को भी पिक कर लियो "





राजीव -"कोई दिक्कत?"






मयंक -"वो आंटी को अर्जेंटली पीहर जाना पड़ रहा है उनकी दादी का निधन हो गया है"






राजीव -"आ रहा हूं दस मिनट में"......






अगले पंद्रह मिनट में ही राजीव साक्षी के घर था साक्षी को साथ लाते हुए जब तक मयंक भी चेंज कर चुका था और रोमा ने भी साक्षी का सारा सामान पैक कर दिया था।







राजीव के आते ही मयंक रोमा और साक्षी को लेकर निकल गया और राजीव मयंक की बाइक लेकर वापस अपने घर चला गया।
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मयंक को लगभग एक घंटा लगा था साक्षी के मामा के यहां पहुंचने में पर उसने अंदर जाना ठीक नहीं समझा जब वो वहां किसी को जानता तक नहीं था और फिर आशीष उसको बहार ही मिल गया था। तो फिर उसने वहां से लौट कर आना ही था । और ठीक 40 मिनट में वो वापस इंदौर आ चुका था और नहाने के तुरंत बाद ही
चल दिया राजीव के घर क्योंकि भूख कुछ ज्यादा तेज हो गई थी।






"चाची"........ राजीव के घर पहुंचते ही मयंक ने आवाज लगाई।







चाची -"क्या हुआ क्यूं चीख रहा है आ जा तेरे लिए तेरी मन पसंद का खाना बनाया है.....बैठ जल्दी में लेकर आई।





मयंक -"वाह! माते आपको कैसे पता चला मुझे भूख लगी है कहीं कोई शक्ति तो नहीं आ गई आपके भीतर







चाची -"कोई शक्ति नहीं है रे वो तो राजीव ने बताया तू रोमा और साक्षी को कोचिंग से आते ही छोड़ने चला गय तो खाना तो खाया नहीं होगा तूने इसलिए पता था मुझे सीधा यहीं आएगा.....अब चुप चाप खाना खा ज्यादा पूछताछ ना कर "






"जैसा आप कहे माते "...... मयंक ने हंसते हुए कहा।






"ओए छोटी छिपकली आज बड़ी चुप है तू"....... मयंक ने दीदी के कमरे आते ही अवनी से कहा जो किताबों को बड़े ध्यान से देख रही थी।






"मैं छिपकली नहीं हूं"....... अवनी ने अपने प्यारे से चेहरे पर गुस्सा लाते हुए कहा।






"हां वही तो तू छिपकली नहीं छोटी छिपकली है"...... मयंक ने उसके गाल पकड़ते हुए कहा।






"क्यूं परेशान कर रहा है उसको"........दीदी ने कमरे आते ही मयंक के सर पर मारते हुए कहा।






अवनी -"अब बोलो छिपकली फिर बताती हूं आपको अकेला समझ कर परेशान कर रहे थे ना "........ अवनी ने जीव निकालते हुए कहा।







"बड़ी चालाक है ये छिपकली तो "......ये कहते हुए मयंक कमरे से बहार दौड़ लिया।






"दीदी भईया को छोड़ना नहीं है चलो"........ अवनी ने सीया का हाथ पकड़ते हुए कहा।






मयंक थोड़ी देर बाद राजीव के घर से निकल गया साक्षी के घर के लिए और घर पहुंचते ही उसका फोन बजा और फोन की स्क्रीन देखते ही उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई।






मयंक -"हैलो"






"क्या हैलो भईया कितने दिन हो गये आपने एक बार भी फोन नहीं किया और उस दिन भी आपने बीच में ही फोन काट दिया था।" .....जानवी ने शिकायत जाहिर करते हुए कहा जो की लाजमी भी था जब उस दिन अस्पताल के कांड के बाद से मयंक ने एक बार भी जानवी को फोन नहीं किया था।







मयंक -"साॅरी जानवी पर टाइम ही नहीं मिला ..... लेकिन अब ऐसा नहीं होगा पक्का वादा है ये मेरा "






जानवी-"अच्छा जबसे आप इंदौर गये है तब से गिनती की तीन बार बात हुई है हमारी भईया "






मयंक -"अच्छा फिर बताओ कैसे कैसे माफी मिलेगी "





जानवी -"या तो आप मेरे पास आओ या फिर मैं आपके पास आती हूं कितने दिन हो गये आपको देखे हुए "






मयंक -"याद तो मुझे भी आती है तुम्हारी जानवी ....अच्छा मैं वादा करता हूं की जल्द से जल्द तुम्हारे पास आउंगा।"






"वो तो चली गई मयंक गुस्सा होकर "........ सामने से रीत की आवाज आई।






मयंक -"रीत उसको समझाओ ना नहीं आ सकता अभी मैं"







रीत -"अभी जब गुस्सा शांत होगा तो फिर खुद दुखी होगी ....पर उसका कहना ठीक ही तो है उस हादसे के बाद उसको अपना कुछ भी पुराना याद नहीं वो सिर्फ यही जानती है की इस दुनिया में उसका एक भाई है तो गु
स्सा होना तो लाजमी है"







रीत की बात सुनते ही मयंक का दिमाग एक बार फिर वहीं पुराने समय में चला गया।






"हैलो मयंक"......जब सामने से कुछ जबाब नहीं आया तो रीत ने कहा।






मयंक -"ह्हहआं रीत .....म्मम मैं बाद में बात करता हूं "....





इतना कहते ही मयंक ने फोन काट दिया और वहीं सोफे पर पसर गया आंख बंद करते हुए.........
Bahut hi badhiya update diya hai Hell Strom bhai.....
Nice and beautiful update.....
 

Riky007

उड़ते पंछी का ठिकाना, मेरा न कोई जहां...
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Update -: 35






"दद्दा मयंक का पता चल गया "...... बलवीर ने दद्दा को आज जल्दबाजी में फोन लगाया था और सामने से जैसे ही फोन उठा तो बलवीर ने ये बात बताई ....







दद्दा - " ये बहुत अच्छी खबर सुनाई हैं तूने बलवीर "






बलवीर-"दद्दा पर उसको पकडना आसान नहीं होगा "





दद्दा -"क्यूं. .....एक लडके को पकडने में भी फट रही है तेरी अब"






बलवीर -"अनिल उसके साथ ही रहता है दद्दा और आप जानते हो की विष्णु और अनिल कुछ ज्यादा अलग नहीं है "






दद्दा -"अच्छा तो ये अनिल के साथ रह रहा है मेरी माने तो बस इस पर नजर रखवा कुछ दिन इसके अलावा कुछ नही '






बलवीर -"जैसा आप कहो दद्दा ....."






इसके बाद इन दोनो की बात होती रहीं और जब बात खतम हुई तो बलवीर ने अपने एक आदमी को बुलाकर मयंक पर नजर रखने के लिए कह दिया .......





..............





"आंटी आप कहां जा रही हैं ?"........ मयंक जो अभी कोचिंग से घर लौट कर आया था उसने घर आते ही देखा की रोमा अपना बैग सोफे पर रखे हुए इंतजार कर रही थी की कब मयंक और साक्षी कब कोचिंग से आएंगे पर साक्षी तो इफ्तिका के साथ उसके घर ही जा चुकी थी |






रोमा -" देखो मयंक मैं अपने पीहर जा रही हूं चूंकि मेरी दादी का देहांत हो गया है तो मैं तुम्हारा और साक्षी का ही इंतजार कर रही थी "






मयंक -"लेकिन साक्षी तो इफ्तिका के घर है आंटी"





रोमा -"ये लडकी भी ना "





मयंक -"लेकिन आंटी आप और साक्षी अकेले जाएंगे?"







रोमा -"नहीं मयंक तुम्हारे अंकल आते ही होंगे मेरे पीहर वो ****** से निकल चुके हैं तो बस तुम्हें हमको बस स्टॉप पर छोड़ना होगा "







मयंक -"आप चिंता मत करो आंटी मैं आपको और साक्षी को आपके घर तक ही छोड़ दुंगा और साक्षी भी आ जाएगी मुझे दस मिनट दो "........





मयंक ने तुरंत राजीव को फोन किया .....





मयंक -"रज्जो यार जितनी जल्दी हो सके अपनी गाड़ी ले आ साक्षी के घर और साथ ही इफ्तिका के घर से साक्षी को भी पिक कर लियो "





राजीव -"कोई दिक्कत?"






मयंक -"वो आंटी को अर्जेंटली पीहर जाना पड़ रहा है उनकी दादी का निधन हो गया है"






राजीव -"आ रहा हूं दस मिनट में"......






अगले पंद्रह मिनट में ही राजीव साक्षी के घर था साक्षी को साथ लाते हुए जब तक मयंक भी चेंज कर चुका था और रोमा ने भी साक्षी का सारा सामान पैक कर दिया था।







राजीव के आते ही मयंक रोमा और साक्षी को लेकर निकल गया और राजीव मयंक की बाइक लेकर वापस अपने घर चला गया।
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मयंक को लगभग एक घंटा लगा था साक्षी के मामा के यहां पहुंचने में पर उसने अंदर जाना ठीक नहीं समझा जब वो वहां किसी को जानता तक नहीं था और फिर आशीष उसको बहार ही मिल गया था। तो फिर उसने वहां से लौट कर आना ही था । और ठीक 40 मिनट में वो वापस इंदौर आ चुका था और नहाने के तुरंत बाद ही
चल दिया राजीव के घर क्योंकि भूख कुछ ज्यादा तेज हो गई थी।






"चाची"........ राजीव के घर पहुंचते ही मयंक ने आवाज लगाई।







चाची -"क्या हुआ क्यूं चीख रहा है आ जा तेरे लिए तेरी मन पसंद का खाना बनाया है.....बैठ जल्दी में लेकर आई।





मयंक -"वाह! माते आपको कैसे पता चला मुझे भूख लगी है कहीं कोई शक्ति तो नहीं आ गई आपके भीतर







चाची -"कोई शक्ति नहीं है रे वो तो राजीव ने बताया तू रोमा और साक्षी को कोचिंग से आते ही छोड़ने चला गय तो खाना तो खाया नहीं होगा तूने इसलिए पता था मुझे सीधा यहीं आएगा.....अब चुप चाप खाना खा ज्यादा पूछताछ ना कर "






"जैसा आप कहे माते "...... मयंक ने हंसते हुए कहा।






"ओए छोटी छिपकली आज बड़ी चुप है तू"....... मयंक ने दीदी के कमरे आते ही अवनी से कहा जो किताबों को बड़े ध्यान से देख रही थी।






"मैं छिपकली नहीं हूं"....... अवनी ने अपने प्यारे से चेहरे पर गुस्सा लाते हुए कहा।






"हां वही तो तू छिपकली नहीं छोटी छिपकली है"...... मयंक ने उसके गाल पकड़ते हुए कहा।






"क्यूं परेशान कर रहा है उसको"........दीदी ने कमरे आते ही मयंक के सर पर मारते हुए कहा।






अवनी -"अब बोलो छिपकली फिर बताती हूं आपको अकेला समझ कर परेशान कर रहे थे ना "........ अवनी ने जीव निकालते हुए कहा।







"बड़ी चालाक है ये छिपकली तो "......ये कहते हुए मयंक कमरे से बहार दौड़ लिया।






"दीदी भईया को छोड़ना नहीं है चलो"........ अवनी ने सीया का हाथ पकड़ते हुए कहा।






मयंक थोड़ी देर बाद राजीव के घर से निकल गया साक्षी के घर के लिए और घर पहुंचते ही उसका फोन बजा और फोन की स्क्रीन देखते ही उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई।






मयंक -"हैलो"






"क्या हैलो भईया कितने दिन हो गये आपने एक बार भी फोन नहीं किया और उस दिन भी आपने बीच में ही फोन काट दिया था।" .....जानवी ने शिकायत जाहिर करते हुए कहा जो की लाजमी भी था जब उस दिन अस्पताल के कांड के बाद से मयंक ने एक बार भी जानवी को फोन नहीं किया था।







मयंक -"साॅरी जानवी पर टाइम ही नहीं मिला ..... लेकिन अब ऐसा नहीं होगा पक्का वादा है ये मेरा "






जानवी-"अच्छा जबसे आप इंदौर गये है तब से गिनती की तीन बार बात हुई है हमारी भईया "






मयंक -"अच्छा फिर बताओ कैसे कैसे माफी मिलेगी "





जानवी -"या तो आप मेरे पास आओ या फिर मैं आपके पास आती हूं कितने दिन हो गये आपको देखे हुए "






मयंक -"याद तो मुझे भी आती है तुम्हारी जानवी ....अच्छा मैं वादा करता हूं की जल्द से जल्द तुम्हारे पास आउंगा।"






"वो तो चली गई मयंक गुस्सा होकर "........ सामने से रीत की आवाज आई।






मयंक -"रीत उसको समझाओ ना नहीं आ सकता अभी मैं"







रीत -"अभी जब गुस्सा शांत होगा तो फिर खुद दुखी होगी ....पर उसका कहना ठीक ही तो है उस हादसे के बाद उसको अपना कुछ भी पुराना याद नहीं वो सिर्फ यही जानती है की इस दुनिया में उसका एक भाई है तो गु
स्सा होना तो लाजमी है"







रीत की बात सुनते ही मयंक का दिमाग एक बार फिर वहीं पुराने समय में चला गया।






"हैलो मयंक"......जब सामने से कुछ जबाब नहीं आया तो रीत ने कहा।






मयंक -"ह्हहआं रीत .....म्मम मैं बाद में बात करता हूं "....





इतना कहते ही मयंक ने फोन काट दिया और वहीं सोफे पर पसर गया आंख बंद करते हुए.........
तो दद्दा को मयंक का पता चल गया, लेकिन अभी भी सीधे वार करने में फटी हुई है उसकी और बलबीर दोनो की।


और जाह्नवी अपनी यादाश्त खो चुकी है ये जान कर बड़ा दुख हुआ, भगवान (लेखक) भी कभी कभी कितना जुल्म कर देता है।

चलो अब आगे शायद एक्शन भी हो या शायद भूगोल मैडम का कल्याण करवा दे लेखक महोदय।
 
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