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Hello Hello !! .... My reader log kaafi time hogaya kaafi saare personal reasons ki wajah so i guess ab wapas aajana chahiye 

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Great update and awesome storyUpdate no....25
मैं अभी जानवी और उसकी दोस्त के लिए खाना लेकर अस्पताल जा रहा था और गाडी चलाते हुए एक ही बात मेरे दिमाग में थी एक तरफ जानवी है जिसने मुझे रोड से ना केवल अस्पताल पहुंचाया बल्कि खून की कमी होने पर मुझे खून भी दिया बगेर एहसान जताए जबकि वो अंजान थी ।
और जब मेरी अंजान बनकर कुछ करने की बारी आई तो मैंने क्या किया उसका घर छीन लिया , उसके मा बाप छीन लिए और इज्जत भी उसके पास नहीं रही भले ही मैं सीधे तौर पर इसमें शामिल था मुझे ये भी पता था अगर मेरा इस सब से कुछ लेना देना ना होता तो भी बलवीर जानवी के साथ यही सब करता पर अब ऐसा नहीं था मैं इस सब में शामिल था और ये सब रोक भी सकता था पर मैंने ऐसा कुछ नहीं किया जबकि जब मेरी जान पर बात आई तो उस लडकी ने अस्पताल के फार्म में रिशता बहन का लिख दिया।
ये सब सोचते हुए मैं अस्पताल पहुंचा तो जानवी की दोस्त को होश आ गया था और वो ठीक भी थी बस गुम शुम बैठी हुई थी जबकी जानवी अभी भी नर्स और डाक्टर की निगरानी में थी। मैं कमरे गया और उसके सामने खाना रखा।
मयंक -"तुम्हारा नाम क्या है?"
इस सवाल पर उसने नजर उठाकर मुझे देखा जिस पर मेरी नज़रें झुक गई।
"रीत सिंह"....... उसने धीमी आवाज में कहा।
"रीत ये खाना लेकर आया हूं"...... मैंने खाने को उसकी तरफ करते हुए कहा।
रीत-"मुझे भूख नहीं है"
मयंक -"मुझे पता है की तुम्हें भूख नहीं है पर तुम्हारे बेहोश होने की वजह कमजोरी थी इस वजह से खाना बहुत जरूरी है...... मैं मानता हूं तुम मुझे देखना भी पसंद नहीं कर रही हो इस समय पर प्लीज़ अब जानवी का तुम्हारे अलावा कोई नहीं है उसका ध्यान रखना है तो तुम्हें भी ठीक रहना होगा "
रीत-"मयंक जी मैं आपको दोशी नहीं मानती पर अफसोस इस बात का है की आप बचा सकते थे हमें और जानवी को जब पता चला की कोई उसकी मदद कर सकता है तो वो बहुत खुश थी और जब उस घर में आपको देखा तो उसको यकीन हो गया की आप उसकी मदद करोगे क्योंकि उसने भी की थी आपकी पर फिर भी उसने अपने एहसान के बदले कुछ नहीं मांगा ......."
इतना कहते ही उसकी आंखें फिर भीगने लगी मैं भी कमरे से बहार आ गया। पर ये तो अब पक्का था की बलवीर और उसका लडका कुत्ते की मौत मरने वाले थे।
"रुक क्यूं गया गांडू"........जब मैंने कहना बंद किया तो राजीव ने पूछा।
मयंक -"तूने पूछा कौन बहन तो बता दिया कौन बहन और कैसे बनी बहन अब क्या है "
राजीव -"अरे वो तो समझ गया पर ये बता बलवीर का क्या किया तूने "
मयंक -"बलवीर जिंदा है और उसका बैठा मार दिया मैंने और अब मुंह मत खोलना पूछने के लिए समझा बस जो बताना था बता दिया "
राजीव -"और जानवी कहां है "
मयंक -"वो ******* शहर में है"
राजीव -"ठीक है "
अब कहानी के वर्तमान में........
इफ्तिका का बर्ताव मेरी समझ से परे था पहले कभी उसने ऐसा बर्ताव नहीं किया था जब भी हम मिले तो बहुत तबीयत से पेश आई थी मुझसे वो पर आज जाने क्या हुआ उसको खैर मैं बरसात में भीगते हुए ही घर पहुंचा और जैसे ही घर में घुसा।
साक्षी -"तुमको अकल है या बेचकर मूंगफली खा ली बरसात में कोई घूमने जाता है वो भी पैदल और अब चले गये तो लौटते हुए छतरी भी नहीं है "
मयंक -"अरे इतना क्यूं घबरा रही हो?"
साक्षी -"वही तो घबराना तुमको चाहिए और घबरा मैं रही हूं अभी पूरे शरीर में जगह जगह पर मलहम या पट्टी लगी हुई हैं बरसात में सब भीग गई "
साक्षी की इस बात से मुझे भी गलती का एहसास हुआ पर क्या फायदा।
"साॅरी"......अगर मैं ये शब्द नहीं बोलता तो जाने कितनी देर और भाषण चलता ।
"अच्छा चलो मैं पट्टियां बदल देती हूं आओ"....... उसके बाद डाक्टर साक्षी ने अपना काम किया और रात का खाना खाकर मैं सोने चला गया ।
अगले दिन उठा तो शरीर का दर्द कम था तो सोचा एक्सरसाइज कर लूं।
"गांड फटे तो फटे पर नबाबी ना घटे थोडा सही से चलना क्या शूरु हुआ एक्सरसाइज करने का मन होने लगा"......मेरे दिमाग ने आज बहुत दिन बाद मुझसे बात की थी।
"चल ना चूतिए पुस अप्स तो मार ही सकता हूं".......इतना कहते ही सुबह की प्रक्रिया निपटा कर पुस अप्स मारी और कमरे में गया।
आज डाक्टर ने बुलाया था। तो वहां गया राजीव आ गया था लेने उसके साथ जाकर पट्टी बगेरा हठवा ली उन्होंने कहा की अब थोडे बहुत चोट है तो उनको खुला ही रखना था वापस घर आया और आराम करने लेट गया।
रात का समय था मैं अभी बाथरूम गया था और लौट कर आया तब ही कमरे में आंटी आई
आंटी-"चलो मयंक खाना लग चुका है"
मयंक -"जी आंटी "
इतना कहते ही मैं उनके साथ हो लिया आंटी ने सलवार कमीज़ पहन रखी थी और उनकी गांड बहुत ही शानदार लग रही थी क्या थिरकन थी वहां देखकर लंड में जान आ गई मेरा पूरा ध्यान वहीं था की तब ही एक दम से आंटी का पेर मुडा और वो आगे को गिरने लगी और जल्दी से मैने उनकी कमर को पकडा और खींचा जिससे वो मेरी तरफ तो हो गई पर मेरे ऊपर ही गिरती चली गई और मैं सीधे धरती पर मेरा एक हाथ उनकी मुलायम गांड पर था और दूसरा उनको रोकते वक्त कंधे पर रखना चाहा जो सीधा उनके मम्मों पर पहुंच गया और अब कुछ ऐसा था मैं धरती पर चित लेटा हुआ था और वो मेरे ऊपर जब मेरी आंखें खुली और आंटी से मिली तो मैंने देखा उनकी आंखें जैसे बहुत कुछ कहना चाह रही थी पर ये मेल मिलाप ज्यादा देर ना चला और जल्द ही मैं और वो अलग हो चुके थे।
"साॅरी मयंक वो मेरा पैर फिसला इसलिए संभल नहीं पाई"...... आंटी ने अपनी कमीज़ ठीक करते हुए कहा।
मयंक-"कोई बात नहीं होता है कभी कभी"
रोमा-"चलो फिर नीचे खाना तैयार रखा हुआ है "
कुछ देर बाद हम सब रात का खाना खा रहे थे खाते वक्त मैंने आंटी को एक दो बार देखा तो उनकी नजर मुझ पर ही थी वहीं दूसरी तरफ साक्षी शांत बैठी खाना खा रही थी दिन में काफी गुस्सा हुई थी वो बारिश में भीगने की वजह से....
"क्या हुआ साक्षी फिर से मुंह फुला लिया यार ".........जब साक्षी रात को पानी रखने के लिए आई तब मैंने पूछा।
साक्षी-"मैंने तो ऐसा कुछ नहीं किया"
मयंक -"फिर कोई बात नहीं की दोपहर से तुमने"
साक्षी -"मेरा मन "
मयंक -"अच्छा गुस्सा नहीं हो तो ठीक .....फिर रात को तैयार रहना अच्छी सी ड्रेस पहनकर "
साक्षी -"क्यूं!?"......उसने चौंकते हुए पूछा।
"अब मैं कुछ नहीं बताने वाला बस तैयार रहना"........इतना कहते हुए मैंने उसको लगभग कमरे बहार भेज दिया और ऐसा होते ही उसका चेहरा और फूल गया और गुस्से में पैर पटकते हुए वो चली गई।
Gayab ka update tha boss. Sakai ko bhi to Janani me diwani hona hai bhai bhavnao ko samjho.Update.......26
"साक्षी.... साक्षी उठो .........उठो साक्षी यार सो रही हो मैंने पहले ही बोला था तैयार रहना "
............सुबह के 3:40 बज रहे थे और मयंक इस वक्त साक्षी को उसके कमरे में उठाने आया था।
"मां अभी तो सोई थी मैं और जगाने भी आ गई"........ साक्षी ने अंगड़ाई लेते हुए कहा।
"3:40 हो गये साक्षी और आंटी नहीं मैं मयंक हूं मैंने साढे तीन बजे बहार आने को कहा था मैं आधे घंटे से बहार इंतजार कर रहा था"...... मयंक ने हाथ बांधते हुए कहा।
"क्या है यार पहले तो रात की बोला था फिर 12 बजे आकर कहते हो अभी नहीं जा रहे सुबह चलेंगे बड़े आए आधे घंटे से इंतजार कर रहा था "......... साक्षी ने मयंक की नकल उतारते हुए कहा।
"हां ठीक है चलो अब दस मिनट है तुम्हारे पास.....और ऐसे कमरे में आने के लिए साॅरी "....... मयंक ने कमरे के दरवाजे की तरफ बढ़ते हुए कहा।
"मुझे आर्डर दे रहे हो दस मिनट है तुम्हारे पास बोलकर ..... मैंने बोला नहीं था जाने के लिए बल्कि मैंने कुछ भी नहीं बोला मैं तो बात भी नहीं कर रही थी......
"बस बस माफ करदो और तैयार हो जाओ जितना टाइम लगाना है लगाओ बस आ जाओ "........ जैसे ही मयंक को लगा साक्षी को गुस्सा आ रहा है तो उसने उसकी बात बीच में रोकते हुए कहा मयंक को ऐसे देखकर साक्षी के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
और ये सब बोलकर मयंक बहार आ गया और अगले बीस मिनट तक इंतजार करता रहा उसके बाद साक्षी बहार आई उसने एक नीला टाइट जींस और ऊपर एक नेवी ब्लू कलर का टोप पहना हुआ था और वो उस पर बहुत जच रहा था जैसे ही साक्षी ने देखा की मयंक उसको सरहाना की नजर से देख रहा है तो उसका दिल एक दम से तेज चलने लगा पर जब तक स्पीड पकडता तब तक मयंक मुडकर बहार की तरफ जाने लगाऔर उसके पीछे साक्षी।
"हम कहां जा रहे हैं मयंक "....... मौसम बहुत अच्छा था और सुबह की हल्की ठंडी हवा उसको और अच्छा बना रही जिससे साक्षी भी चेहकने लगी थी तब ही उसने ये सवाल किया।
"टेंशन मत लो मैं लेकर जा रहा हूं तो किसी मुश्किल में नही पडने वाले "......... मयंक ने मजाक करते हुए कहा उसने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि जब साक्षी जिद करके ले गई तब ही उन गुंडों ने हमला किया था।
"पता नहीं क्यूं मैं बार बार तुमसे बात करने लगती हूं......चलो मान लिया की मेरी वजह से तुम बहुत परेशानी मैं फस गये और उसके लिए मुझे दुख भी है"........ साक्षी ने बिल्कुल रुंआसी आवाज में कहा।
मयंक -"अरे मैं बस ऐसी बोला था साक्षी तुम हर बात ऐसे दिल पर लेती हो इसलिए गुस्सा हो जाती है और फिर जब समझ आता है कि सामने वाले ने कुछ गलत नहीं किया तो खुद को ही दुख होता है।"
"सबसे के साथ नहीं सिर्फ तुम्हारे साथ होता है तुम बहुत गंदा मजाक करते हो वो भी बिना सोचे समझे "....... साक्षी ने हल्के से मयंक को मारते हुए कहा।
"काम ऐसे करो की लोग तुम्हारे साथ भी ना रहना चाहे और तुम्हारे बगैर भी "........ मयंक ने अपने दोनों हाथ फैलाते हुए कहा।
"गिर जाएंगे मयंक क्या करते हो यार "......... जैसे ही मयंक ने अपने हाथ हैंडल से हटाए तो साक्षी एक दम से डर गई उसकी ऐसी हालत को देखते हुए मयंक ने बाइक को तो संभाल लिया पर अब उसकी हसी साक्षी को चिढ़ाने का काम कर रही थी।
"मयंक तुमको प्यार हुआ है या कोई ऐसा जिसको कभी खोना नहीं चाहते ".........एक दम से साक्षी ने सवाल किया मयंक से जिसका असर ये हुआ की मयंक की हंसी रुक गई।
"हां मैं अपने परिवार और अनिल अंकल के परिवार को कभी खोना नहीं चाहता कभी अपने आप से दूर नहीं करना चाहता "...... मयंक ने सहज आवाज में कहा।
"अरे मैं फैमिली की बात नहीं कर रही .....हम काॅलेज फर्स्ट इयर में है मैं ये पूछ रही हूं कोई लडकी पसंद है क्या ".........
ये सवाल सुनते ही मयंक समय में पीछे चला गया वो चेहरा एक बार फिर उसके जहन में उमड आया गोल मुंह पैनी आंखें होंठों के ऊपर का छोटा सा काला तिल .....
"मयंक "........ मयंक को खोया देख साक्षी ने उसको आवाज दी जिसको सुनकर वापस आया ।
"एकदम से ये सवाल करने की कोई खास वजह "........ मयंक ने हलका सा पीछे मुड़कर साक्षी से पूछा।
"क्यूं पूछ नहीं सकती तुमने ही दोस्ती करने की कहा था.....याद है ना"........
मयंक -"हम्म कहा तो था ".......मैन रोड पर बाइक घुमाते हुए कहा।
यूं ही बात करते हुए ये लोग इंदौर से लगभग 17 कि मी निकल आए
"कितनी अच्छी जगह है ये मयंक "........ साक्षी ने खुश होते हुए कहा आसमान में हल्का हल्का उजाला होने लगा था और उस रोशनी में जब साक्षी की नजर आसपास पडी तो उस प्राकृतिक सौंदर्य को देखकर वो बहुत खुश थी।
"अभी तो तुम्हें बहुत कुछ देखना है"......
लगभग दो किलोमीटर दूर आकर जब मयंक ने बुलट रोकी तो साक्षी हवा की स्पीड से उससे उतरी और लगभग दौडती हुए एक दिशा में बढ़ने लगी ।
सामने का नजारा इतधा खूबसूरत था की कोई भी उसको देखता तो बस उस नजारे को भीतर समेटना चाहता वो भगवान से यी कहता की हर सुबह उसकी इसी जगह हो सामने क्षितिज तक सिर्फ पानी और धरती से मिलती सूरज की लालीमा ......
(Real image of the place)
"कैसा लगा "....... साक्षी तो इस यशवंत सागर बांध की सुंदरता में खो चुकी थी और जब मयंक अपने हाथ में कुछ लेकर पहुंचा तो साक्षी बस अपने पांव पानी में डालकर उस उगते सूर्य को देख रही थी।
"बस कुछ कहा नहीं जा रहा मयंक ...... बहुत सुंदर है ये पापा यहां कभी लेकर नहीं आए तुम तो रहते ही नहीं यहां फिर कैसे पता चला इस जगह का ".......पानी में पांव बहार निकालकर खडे होते हुए साक्षी ने पूछा।
मयंक -"बस सुंदर चीजें मुझे खुद ढूंढ लेती है".......
साक्षी -"अच्छा!......ऐसा है?........ वैसे अभी इस बात हो सकती है लेकिन मुझे तुम्हारे हाथ में कुछ दिख रहा है क्या लाए हो?".......
"ये हैं 'भुट्टे की खीस' और ये है गरम जलेबी "........दो पैकट खोलते हुए मयंक ने कहा।
खाने को देखते ही साक्षी की खुशी दुगनी हो गई। अब इन दोनों को यहां इंजोए करने देते हैं जब तक हम चलते हैं दूसरी तरफ पर उससे पहले मैं एक बात साफ बता देता हूं कि बलवीर और द्ददा दोनों अलग है दद्दा की कहानी अब तक शुरू भी नहीं हुई और बलवीर की कहानी का एक हिस्सा आप जान चुके हैं। इसलिए दोनों को एक इंसान समझने की ग़लती ना करें।
**********
"हैलो"....... दद्दा ने आज बलवीर को फोन लगाया था।
बलवीर -"प्रणाम दद्दा"
दद्दा -"प्रणाम.....जो काम करने बोला था उसका क्या हुआ।"
बलवीर -"मयंक को ढूंढने जिस आदमी को लगाया था उसका कुछ दिनों से फोन बंद है और कुछ पता नहीं चल रहा है"
दद्दा -"तो तू खुद क्यों नहीं गया इतना ही आसान होता तो मैं अपने आदमी भेज देता तुझे फोन नहीं करता समझा उज्जैन और इंदौर है ही कितनी दूर"
बलवीर -"जी दद्दा आप फिकर मत करो..... जितनी जल्दी आपको है उतनी ही मुझे भी है "
इसके बाद इनकी बात थोडी देर और चली और जिसके लिए ये लोग परेशान हो रहे हैं वो पूरे दो घंटे साक्षी के साथ बिताने के बाद उसको लिए वापस इंदौर आ चला था । जहां मयंक के लिए ये छोटी सी ट्रिप साक्षी के साथ एक नई दोस्ती की निशानी थी वहीं साक्षी के मन मयंक के लिए प्यार के अंकुर फूटने लगे थे ।
साक्षी को डर ये था कि जल्द बाजी में कहीं वो घर और घाट दोनों की नहीं रही तो क्या होगा और फिर मयंक ने अपनी तरफ से एक पल के लिए भी साक्षी को ये महसूस नहीं होने दिया कि वो उसकी तरफ आकर्षित भी है। धीरे धीरे उसकी हालत उस परवाने की तरह होती जा रही थी जो समा को चाहता तो बहुत है पर समा के पास जाते ही उसका जलना भी तय है।
देखते है साक्षी के मन में उठ रही इस खलिश का नतीजा क्या होगा किस ओर जाकर इस खलिश का अंत होगा क्या साक्षी के लिए मयंक के मन में प्यार आएगा या
Great and awesomeUpdate 28
"सब तैयारी हो गई चौबे जी ?"........अनिल ने दफ्तर में घुसते हुए अपने सहकर्मी से पूछा।
"हां साहब जी सब तैयारी है जैसा आपने कहा था चार पांच दिन के हिसाब से सारा सामान रखवा दिया है जिप्सी में और जिन आफिसर की लिस्ट दी थी वो सब भी तैयार हैं"....... चौबे ने कहा।
अनिल -"बहुत बढ़िया चलिए फिर "
अभी ये लोग गाड़ियों के पास पहुंचे ही थे की तब ही अनिल का फोन बजा......
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"गुड मॉर्निंग सर "..........अनिल जैसे ही गाड़ी से उतरा तो इस तीस साल के आसपास की औरत ने अनिल से हाथ मिलाते हुए कहा।
हुआ कुछ यूं की जब अनिल जंगल के राउंड के लिए जाने ही लगा था की तब ही उसका फोन बजा जो की कमिश्नर का था जब बात की तो पता चला कि इंदौर के एक घर में कल रात ब्लास्ट हुआ जब पुलिस वहां पहुंची तो IB की एक आफिसर ने उन्हें वहां जाने से रोक लिया और जब कमिश्नर और आफिसर की बात हुई तो पता चला कि वो ये केस अनिल को सौंपना चाहती है पर कमिश्नर ने इससे साफ इंकार कर दिया क्योंकि केस साफ तौर पुलिस का था और अनिल फोरेस्ट डिपार्टमेंट से है लेकिन उस IB आफिसर ने अपने बड़े अधिकारी से बात करके कमिश्नर को राजी किया और इसलिए अनिल तुरंत वहां पहुंचा और आते ही ये लेडी आफिसर से अनिल मुखातिब हुई।
अनिल -"मिस कामना राइट"
"जी ".......
अनिल -"कहिए मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूं"
कामना -"मैं पहले आप को पूरी परिस्थिति से वाकिफ कराती हूं तो बात ये है की ये जो घर है जहां धमाका हुआ वो इंदौर के ***** इलाके में है ....इस घर में कोई आम नागरिक नहीं थे जो दो लाशें इसमें आपको तहकीकात में मिलेंगी वो मेरे ही डिपार्टमेंट से थे और इनके यहां रहने का कारण एक केस के सिलसिले से जुड़ा है जो की टेरर फंडिंग से ताल्लुक रखता है..... मुझे लगता है आपको क्यूं बुलाया है ये समझ गये है मिस्टर अनिल?
अनिल -"carry on मिस कामना अपनी बात पूरी किजिए मेरी राय हम बाद में जान लेंगे"
कामना -"जरुर....तो जब हमको इंदौर में हो रही टेरर फंडिंग का पता चला तो हमने शक वाली जगहों पर अपने एजेंट दो की जोड़ी में तीन अलग जगह पहुंचा दिए उनमें से एक जगह यही घर था जहां कल रात ब्लास्ट हुआ कल सुबह मुझे इन्हीं दो एजेंट में से एक का फोन आया कि उन्हें कुछ जानकारी मिली है जो मुझे आज मिलने वाला था पर कल रात ही ये ब्लास्ट वाली घटना हो गई ।
अनिल -"ये आपके एजेंट क्या बन कर रह रहे थे ...मेरा मतलब है क्या रिश्ता था दोनों का?"
कामना -"जोया और तरुण दोनों पति पत्नी के भेस में थे और साथ ही जोया ने अपनी भतीजी को भी दोनों की लड़की बना कर रखा था ताकि उनपर कोई थोड़ा भी शक ना कर सके.....और उस लड़की की के बारे में जोया ने सिर्फ मुझे बताया था लेकिन अब यही सबसे बड़ी दिक्कत है क्योंकि मैं उस लड़की को अपने साथ रख नहीं सकती और अकेले वो रहेगी कैसे?"
अनिल -"उस लड़की को मैं अपने पास रखुंगा उसकी चिंता ना करें आप ...... मुझे ये बताओ मिस कामना आपको कैसे पता चला कि ये मारे जा चुके हैं क्योंकि आपका कोई सीधा contact तो रहा नहीं होगा एजेंटस के साथ और जैसा मुझे बताया गया आप यहां रात से ही है बल्कि आप मीडिया से भी पहले यहां आ गई थी।
कामना -"मुझे जोया की भतीजी ने बताया"
अनिल -"नाम और उम्र क्या है उस लड़की का?"
कामना -"उसकी उम्र 5 साल है और उसका नाम अवनी "
अनिल -"कहां है अवनी?"
इतना सुनते ही कामना अपने से कुछ दूर खड़ी गाड़ी की तरफ बढ़ गई और जैसे ही गेट खोला तो एक लड़की लाल कलर की फ्रोक पहने हुए उसके साथ अनिल के पास आ गई और इस बार कामना के हाथ में एक फाइल भी थी जो उसने अवनी के उतरते ही गाड़ी से निकाली थी ।
"ये वो फाइल है एजेंट से रिलेटेड इसमें उनकी फोटो और उनसे जुड़ी जानकारी है और ये है अवनी"...... कामना ने फाइल आगे बढ़ाते हुए कहा।
अनिल -"हैलो अवनी"
"मेरा नाम अवनी ध्वनी नहीं है मेरा नाम अवनि है अंकल".....उस छोटी सी लड़की ने ये कुछ ऐसे कहा कि कामना और अनिल दोनों के चेहरे पर ही मुस्कान आ गई।
कामना -"मिस्टर अनिल मेरे पास आपका नंबर है और मेरा नंबर भी आपके पास पहुंच जाएगा इसलिए कुछ और जानकारी चाहिए हो तो कआॅल कर लेना हमारा यहां ज्यादा देर मिलना आपके लिए मुश्किल बढ़ा सकता है"
"हैलो!.... मिस कामना मेरी टीम में जो एजेंट मेरे साथ रहेंगे उनके बारे में तो बताओ ये किसी चिंदी चोर का केस नहीं है टेररिस्ट का है और मेरी जानकारी में मेरे पास शक्तिमान जैसी शक्ति भी नहीं है "
कामना -"जितना मुझे बताया गया है मैंने वही किया बाकी खुराना सर से आप बात करें..... क्योंकि जिसने ब्लास्ट किया अगर उसको एजेंट की जानकारी है तो जाहिर है वो मुझे भी जान गया होगा और शायद मेरी टीम को भी और जितना मैं सोच पा रही हूं यही वो वजह जिसके कारण पुलिस या IB की जगह ये केस आपके हिस्से आया है और आप अपने डिपार्टमेंट में से भी किसी को नहीं ले जा सकते
इसलिए मुझे जाने की इजाजत दीजिए सर "
अनिल -"तुम्हारी रैंक मुझसे हर मायने में ऊपर है तो मुझे मेम कहना चाहिए ना की तुम्हे सर"
कामना -"सर ये फोरेस्ट डिपार्टमेंट आपने दो साल पहले जाॅइन किया है राइट?..... उससे पहले आप क्या थे ?"
इतना कहते ही कामना अपनी कार की तरफ बढ़ गई जय हिन्द बोलती हुई।
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"बाजी आप हमारे साथ हर बार यही करती है एक बार फिर बेइमानी की है आपने हमारे साथ"........इफ्तिका ने इकरा से नाराज़गी भरे लहजे में कहा।
इकर -"मैंने कहां बेइमानी की है मेरी अनारकली हीही..."
"चीटिंग तो आपने की है मोहतरमा.....और चीटिंग की सजा बहुत भयानक मिलती है "..........इस रोबदार आवाज ने दोनों बहनों का ध्यान बैठक के दरवाजे की तरफ किया।
"दादू".......इतना कहते ही दोनों बहनें इस रोबदार सकसियत की तरफ लगभग दौड़ते हुए आईं।
आदिश मिर्जा......ये है इफ्तिका और इकरा के दादाजी है फौज से Lt. Colonel की पोस्ट से रिटायर है और एक बार सांसद भी रहे चुके हैं फिलहाल समाजसेवी है और अपनी पार्टी के प्रमुख सलाहकार भी।
"लगता है दोनों ने काफी याद किया है हमें"...... दोनों का सर दुलारते हुए दादा ने कहा।
इफ्तिका -"हां तो भला कोई 15 दिन के लिए अपने घर को छोड़कर जाता है"......
"और आपको ये तो सोचना चाहिए ना दादू की आपके अलावा हमारा है ही कौन ".......इकरा ने बड़े ही संजीदा लहजे से कहा।
दादू -"आप दोनों भी कमाल है जब जा रहा था तो बड़ा हंस हंसकर कहे रही थी आराम से जाओ दादू हमारी चिंता मत करना आराम से आना काम खत्म करके और अब जब एक दिन पहले आ गया तो इतनी शिकायत हुं"...... इतना कहते ही दादू हंसने लगे।
"चलिए अगर आपको हमसे माफी चाहिए फिर अपनी सजा के लिए तैयार हो जाएं"....... इफ्तिका ने बड़ा ही इतराते हुए कहा।
दादू -"क्या सजा है co साहब बताएं ये सैनिक आपकी सेवा में हाजिर है"
"वो क्या है ना दादू रेशमा आंटी के हाथ का खाना खाकर हम तक गये है आज अपने गार्डन में सिगडी जलाओ और अपनी फौजी स्टाइल का कुछ बढ़िया सा खिलाओ".......इकरा ने भी इफ्तिका का साथ देते हुए कहा।
"चलिए फिर यही सही हम चेंज करके आते हैं"........इतना कहते ही दादू अपने कमरे की तरफ चल दिए।
Nice update....Update 33
"चट्टटटाक्ककक"........इस भयंकर थप्पड की आवाज अचानक से शांत हुए वातावरण में फेल गई जो की राजीव ने बंदूक संभाल रही इस लड़की को मारा था।
यही वो लड़की थी जो गाड़ी से सबसे पहले उतर कर पुलिस वैन के दूसरी तरफ जा पहुंची थी और मयंक ने जब टक्कर मारी तो मयंक के पीछे की तरफ से इसने ही गोली चलाई पर ठीक गोली चलाते वक्त ही राजीव की लात इस लड़की के हाथ पर लगी जिस वजह से गोली अपने निशाने से चूकती हुई ट्रेक्टर के टायर में जा फसी और खुद को संभाल कर ये लडकी बंदूक इस बार राजीव की तरफ उठती उससे पहले ही ये थप्पड़ पड चुका था।
अब तक जो एकाद पुलिस वाले वाले छुपकर गोली चलाने का प्रयास कर रहे थे वे सामने आते हुए उन आतंकियों की तरफ बढ़ गये जो दो टाटा सूमो की बीच में और नीचे दबे हुए थे मयंक ने जब गोली चलने की आवाज सुनी तो तुरंत पीछे घूमा और जो चेहरा पीछे देखा तो फिर बस मुंह से बस एक ही शब्द निकला।
"******".....(सोचो कितना गन्दा शब्द होगा जो मैं यहां भी नहीं लिख रहा )
मयंक तुरंत नीचे उतरा..... जब तक राजीव अपनी बंदूक कमर पर ठूंसता हुआ उस लड़की की बंदूक लेकर उसके दोनों हाथों को पकड़ चुका था ।
"देख रहा है रज्जो(राजीव )यहां बहनचो इसकी चिंता में दिमाग फटा जा रहा था की कहां होगी किडनैप तो नहीं हो गई मर तो नहीं गई और ये देवी जी मुझ पर ही गोली चला रही है "....... मयंक ने उस लड़की के चेहरे को घोर से देखते हुए कहा जैसे यकीन ही नहीं हो रहा था।
"जोया जी सच कह रहा हुं जब पापा ने आपकी फोटो दिखाई थी तो सोचा था आपको बचाकर इंप्रेस करूंगा और बिहा रचाउंगा पर आपने ने तो दिल तोड दिया मेरा "......... राजीव ने जोया के हाथ को थोड़ा और मोड़ते हुए कहा।
"छोड़ो मुझे मैं जानती हूं तुम दोनों को..... तुम्हारी वजह से हमारा इतना अच्छा प्लान फेल हुआ है सजा तो मिलेगी ".......जोया ने खुद को छुड़ाने की कोशिश करते हुए कहा।
जोया की बात सुनकर मयंक और राजीव ने एक दूसरे की आंखों में देखा जैसे एक दूसरे से कह रही हों इसको तो मैं ही मारुंगा।
पर तब ही मयंक का फोन बजा और वो उसको हाथ में पकड़ता हुआ रोड के किनारे की तरफ बढ़ गया वहीं राजीव और जोया की तरफ पुलिस वाले आने लगे जो राजीव से बात करने लगे जैसे उससे उसका परिचय मांग रहे हों
"मयंक यार तू कह रहा था वैसा कुछ नहीं था पर यहां ये लोग सोना चुराने ही आए थे और हमने इनको आसानी से पकड़ भी लिया है गिनती के छः थे ।".......... फोन उठते ही अनिल ने मयंक से कहा।
"चाचा यहां ****रोड पर तुम्हारा ये बेटा मरते बचा है आ जाओ जल्दी से........और हां जरा इन पुलिस वालों को बोलो जब तक आप यहां नहीं आते बकचोदी ना करें"......... मयंक भले ही अनिल से बात कर रहा था पर उसकी नजर बराबर उन पुलिस वालों पर थी जो राजीव से बातचीत या शायद पूछताछ कर रहे थे ।
जिसके बाद उस दो सितारा अफसर को फोन थमाते हुए मयंक ने बात करने के लिए कहा और एक पुलिस वाले से जोया को पकड़ने का कहा ।
वहीं जब उस पुलिस वाले की अनिल से बात हो गई तो वो मयंक और राजीव से बात करने लगा बड़ा ही समझ रखने वाला था जिसने बिना किसी परेशानी के ही कोपरेट किया और तुरंत ही उन लोगों को गाड़ियों के नीचे से निकल लिया जिसमें से एक कम घायल हुआ वहीं दो गहरी चोट वाले थे और बाकी सब स्वर्ग सिधार चुके थे जिनमें दोनों गाड़ियों के ड्राइवर सहित गाड़ी से लगकर खड़े सब उपद्रवी शामिल थे ।
बात करने के पच्चीस मिनट के भीतर ही अनिल यहां मौजूद था और इस बार उसके साथ और भी लोग थे जो साब सिविल ड्रेस में IB के एजेंट ही रहे होंगे इन लोगों के आने के कुछ सेकंड बाद ही यहां एंबुलेंस भी आ चुकी थी जिसमें उन सब को भेजा गया और एंबुलेंस के साथ ही कुछ सिपाही और तीन एजेंट भेजे गये ।
"हुआ क्या है यहां मयंक और तू ठीक है ना कुछ हुआ तो नहीं?" मयंक और राजीव को गहनता से देखते हुए अनिल उनके पास आते हुए कहा।
"अरे चाचा मेरी छोड़ो आओ मैं आपको एक चीज दिखाता हूं "......ये कहता हुए मयंक ने अनिल को जब जोया के सामने खड़ा किया तो उससे कुछ ना कहते बना और ना करते।
"जोया !!!......हुआ क्या है यहां"........ अनिल ने कहा ।
राजीव -"पापा पहले आप मिस कामना को बुलाओ यहां "
अनिल -"वो आ रही है यहां मेरी रास्ते में बात हुई उनसे जब तक मुझे तुम लोग सब कुछ बताओ "
जिसके बाद राजीव ने सब अनिल को बताया अनिल कुछ कहता उससे पहले ही एक गाड़ी यहां आकर रुकी और ड्राइविंग सीट से कामना इनकी तरफ ही आती हुई दिखाई दी जब उन्होंने भी जोया को देखा तो उनका हाल भी कुछ अलग नहीं था । जिसके बाद उन्हें सब बताया गया।
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"बोलो भी जोया मेरे गुस्से का इंमतिहान मत ल़ो"......कामना ने जोया के मुंह को कस के पकड़ते हुए कहा।
जिस पर जोया के मुंह पर एक मुस्कान आ गई जैसे वो कामना का मज़ाक़ बना रही हो क्योंकि वहां मयंक और राजीव को धमकी देने के बाद से उसने मुंह नहीं खोला था।
"अगर तुमने अब कुछ नहीं बोला तो तुम तो मारी जाओगी ही साथ में अवनी भी तुम्हारे साथ जाएगी"....... कामना ने गुस्से में आकर ये कह दिया और साथ ही अपनी बंदूक जोया के माथे पर रख दी।
"ठीक है बताती हूं.....पहले पानी पिलाओ"........जोया ने इतना कहना था की कामना ने तुरंत अपने एक साथी को इशारा किया और जोया को पानी पिलाने के बाद सब उसको घूरने लगे जहां राजीव और मयंक एक टेबल के सहारे खड़े थे वहीं कामना ठीक जोया के सामने कुर्सी पर बैठी थी अनिल अभी एक्सिडेंट को हैंडल कर रहा था वो भी अंदर आता हुआ एक कुर्सी पर बैठ गया।
अपने आप को ऐसे घूरता पाकर जोया ने एक लंबी सांस छोड़ी और बोलना शुरू किया -
"आज से ठीक दस दिन पहले मुझे एक टेक्स्ट मैसेज आया जिसमें लिखा था की ******* पार्क के गेट पर मिलो मेरे पास टेरर फंडिंग से रिलेटेड जानकारी है।.......जब मैं वहां पहुंची तो मेरी मुलाकात करीम से हुई"
अनिल -"कौन करीम ?"
जोया -"जिसकी आवाज आप लोगों ने मेरे फोन पर सुनी जो की हमारी ही साज़िश थी जिससे आप लोगों का पूरा ध्यान सोने पर केंद्रित हो सके"
कामना -"आगे बोलो "
जोया -"करीम ने मुझे उनके साथ मिलने का अवसर दिया उसके बदले में मुझे 20 लाख रुपये भी दे रहे थे जिसके बदले में मुझे IB में रहकर उनका काम करना था पर मैंने उसको ठुकरा दिया दो दिन तक कोई बात नहीं हुई हमारी तीसरे दिन करीम का फोन फिर आया मैंने फोन नहीं उठाया जिस पर उसका मैसेज आया जिसमें लिखा था की वो मुझे 50 लाख रुपये देंगे बस एक काम करना होगा पहले मुझे बहुत गुस्सा आया पर जब मैंने इस बात पर ध्यान दिया साथ ही थोड़ा सोचा तो लगा एक ही तो काम है और फिर पचास लाख कम तो नहीं थे मेरी ईमानदारी के लिए अगर काम के बाद किसी को शक नहीं हुआ तो IB में ही रहुंगी और अगर शक हुआ भी तो पचास लाख इतने रुपये थे की मैं दुनिया के किसी भी कोने में रह सकती थी। दो दिन मैंने सोचा और उसी दिन फिर करीम का फोन आया जिस पर मैंने हां कह दिया पर मैंने शर्त रखी कि पैसे मैं पहले लूंगी दो दिन बाद ही मेरे घर एक आदमी आया रुपये लेकर पर मैं और तरुण केस की वजह से घर पर नहीं थे लेकिन जब पहुंचे तो पड़ोसी ने तरूण के सामने आकर ही बताया कि एक आदमी हमें ढूंढ रहा था जिस पर शायद तरूण को शक हुआ क्योंकि हमारे रिश्तेदारों का तो सवाल ही नहीं था पर मैंने बात को बहुत घुमाया और शायद तरुण मान भी गया था। अगले दिन वह आदमी फिर आया रूपयों का बैग लेकर किसमत से उस दिन तरूण अकेला गया और वो बैग मुझे मिल गया जब मैंने इतने सारे रुपये देंगे तो खुद संभाल नहीं पाई और सब नोटों को निकाल कर उनको गिन ने लगी और इसमें ये भी ध्यान नहीं रहा की अवनी उसी वक्त स्कूल से वापस आती है और उसने मेरी इस हरकत को देख लिया पहले मैं बहुत घबरा गई थी पर फिर लगा बच्ची है वो लेकिन तरुण के साथ खेलते वक्त उसने ये बात उसको बता दी जब तरूण ने मुझे पूछा तो एक फिर मैंने बात को घुमा दिया "
अनिल -"तरुण कोई बच्चा तो नहीं था जो इतनी आसानी से तुम्हारी बातों में आ जाए?"
इस बात पर जोया कुटिलता से मुस्कुराई और फिर कामना की तरफ देखकर बोली......
जोया -"आपको पता है इस दुनिया में सबसे भोला जीव कौनसा होता है मैडम ?"
कामना -"बात मत घुमाओ सिर्फ जबाब दो या फिर कहानी आगे बढ़ाओ "
जोया -"अरे आप नाराज क्यूं होती है मैं बताती हूं आपको इस दुनिया में सबसे मासूम जीव होता है 'प्यार में पागल आदमी' ....बिचारा तरुण प्यार करता था मुझसे और प्यार पर शक थोड़ी किया जाता है एक आंसू बर्दास्त नहीं था मेरी आंखों में, फिर सच छुपाने के लिए उस दिन तो मैं बहुत रोई थी "
जोया की बात पूरी होते ही एक दम से वहां शांति छा गई....
"लगता है आगे की कहानी नहीं सुननी कोई बात नहीं मैं सुना देती हूं भले ही उस रात में एक बार फिर सच गई पर शायद तरुण को शक हो गया था। पर उसी रात तरुण मुझे एक केस से जुड़ी लीड दी जिसमें हमको पता चल गया था की कौन कौन है जो टेररिस्ट को फंडिंग में मदद कर रहा है जिस पर मेरे दिमाग में एक और आईडिया आया और मैंने तरूण और अवनी को बहार गार्डन में खेलने भेज दिया और करीम को फोन लगाकर कहा कि मुझे केस से जुड़ी बात पता लगी तो उसने कहा बीस लाख रुपये और देगा पर तरुण को मारना होगा मैंने तुरंत हां कर दी और करीम से एक ब्लास्ट करने के लिए बोम मांगा और साथ ही जो काम मुझे करना था उसकी जानकारी भी लेकिन जो काम मुझे करना था उसको फोन पर सुनने से मना किया कहा कि बोम के साथ ही कागज पर लिखकर भेजें लेकिन अरेबिक भाषा में क्योंकि कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी मैं दो घंटे बाद ही ठीक रात को 11 बजे वो आदमी मेरे घर के बहार था मैंने उस कागज से काम को पढ़कर वहीं गार्डन में फाड़कर फेंक दिया और बोमब को छुपाकर भीतर ले गई। और तरूण से कहा कि हमें जब केस के बारे में सब पता चल चुका है तो घर खाली कर देना चाहिए जिस पर उसने कहा कि कामना मेम से बात करनी होगी पर फिर बात तो मेरी उसको मान नी ही थी मैंने उसको ऊपर कमरे में कपड़े पैक करने को कहा और नीचे आकर मैंने अपना रुपये वाला बैग निकाला अवनी को गार्डन में भेजा अपने आने का बोलकर और बोम को सीढ़ियों पर फिट किया लेकिन उसको नीचे बुलाना था तो बस एक बार नकली चीख निकाली और खुद पीछे वाले गेट से निकल गई जिसके बाद शायद वो मेरी चीख सुनकर सब कुछ भूलकर दौड़ते हुए नीचे आया होगा और ठीक सबसे आखरी सीढ़ी पर आकर बोम के साथ उड़ गया होगा ।"
कामना -"शर्म आनी चाहिए तुम्हें जोया ".......जोया अपनी बात खत्म करके हंसने लगी जिस पर कामना ने चिल्लाकर कहा ।
अनिल -"उस कागज पर क्या लिखा था और घर से फरार होकर कहां गई तुम?"
जोया -"मेरे हाथ खोल़ो फिर बताउंगी ..........टेंशन मत लो भागने नहीं वाली "
अनिल ने राजीव को हां कहा और राजीव ने जोया के हाथ खोल दिए ।
जोया -"मै जैसे ही घर से निकली तो करीम से बात की और वो मुझे लेने आ गया जिसके बाद मैं उसके घर गई वहां जाते ही उसने और बीस लाख मुझे दिए लेकिन कहा कि वो काम हमको कल(ये कल आज ही है जिस दिन ये कांड हुआ)ही करना होगा मैंने पूछा तो उसने बताया कि अगर हमको हमारा काम करना है तो तुम लोगों का ध्यान बांटना होगा और उसके लिए हमें जरिया मिला सोने के तौर पर इस लिए करीम ने मेरे फोन से अपने साथी को फोन किया और बात की जिससे तुम लोग को पता चले कि हम सोना आज चुराने वाले हैं लेकिन हमारा असली काम था हमारे भाईयों को बचाना जो आज ***** जेल से शिफ्ट होकर**** जेल जाने वाले थे हमारा प्लान सफल हो गया था पर ना जाने कहां से ये दोनों (मयंक और राजीव)आ गए और हम कामयाब नही हो सके।"
अनिल -"करीम कहां है इस वक्त?"
जोया -"करीम को छोड़ो मैं आप लोगों को राज की बात बताती हूं..... तुम लोगों को लग रहा होगा की ये सब मैं तुम्हें अवनी की वजह से बता रही हूं पर ऐसा नहीं है मुझे उससे कोई मतलब नहीं है और रही बात करीम की तो वो तो मैं नहीं बताने वाली "
अपनी बात खत्म करते ही जोया का हाथ अपने सीने की तरफ जाने लगा जिसको देखते ही राजीव का दिमाग ठनका और वो जोया की तरफ बड़ा पर जब तक वह उसके पास पहुंचता जोया अपने गले में लटके लोकेट जो कुछ कैपसूल जैसा दिखता था उसे अपने दांतों से दबा चुकी थी कामना ने जैसे ही ये देखा तो उसने तुरंत उसका हाथ पकडना चाहा पर दांत का जोर पड़ते ही वह कैपसूल फूट गया और जहर जोया के मुंह में जा चुका था जो यकीनन उसको मिनट के भीतर ही मारने वाला था ।
एकदम से कमरे का माहौल बदल चुका था सब अचंभित थे उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था की ये हो जाएगा उन्हें लगा था की जोया की मदद से वह करीम तक पहुंच ही जाएंगे पर अब जोया भी इस दुनिया में नहीं थी ।
जोया को तुरंत अस्पताल भेजा गया पर अभी भी कामना और अनिल के मन में सवाल थे पर इस बार जबाब मयंक और राजीव को देना था।
कामना -"मयंक और राजीव तुम दोनों वहां कैसे पहुंचे?"
राजीव -"मयंक का मन नहीं मान रहा था की बात सिर्फ सोने तक की है इस वजह से हमने उस घर में द्वारा जाने का सोची क्योंकि सोने को बचाने के लिए पापा अपनी टीम के साथ जा रहे थे और जब दोबारा हम उस घर में पहुंचे तो मयंक को वह कागज फटा हुआ मिला पर उस पर जो कुछ भी था हमारी समझ से परे था मैंने तो सोचा यूं होगा पर इसने कहा कि एक बार जानना तो है इस क्या लिखा है और हम उस कागज को लेकर लाइब्रेरी गये वहां जब हमने पढ़ा तो उस पर लिखा था
"जोया हम तुमसे सिर्फ ये चाहते हैं की हमारे भाई जो इस वक्त**** जेल में हैं उनको दूसरी जगह सिफ्ट किया जा रहा है तुम उनको बचा सकती हो सिर्फ तुम और जब ये काम हो जाएगा फिर तुम बिल्कुल पहले की तरह हमसे अंजान हो जाओगी"
जब हमने ये पढ़ा तो तुरंत पापा को फोन किया ये पता लगाने की कब ये लोग सिफ्ट होंगे और पापा ने बताया कि आज ही ये काम होना है तो हम पहुंच गए और उसके बाद की सारी घटना राजीव ने कहा सुनाई।
कामना -"मयंक और राजीव तुम दोनों नहीं जानते तुमने कितना बड़ा काम किया है मैं जरूर तुम दोनों को ईनाम दिलवाऊंगा और कल के पेपर में दोनों का नाम फ्रंट पेज पर होगा।"
मयंक -"बिल्कुल नहीं मैडम मैं यहां इंदौर अपना नाम न्यूज पेपर में छपावाने नहीं आया हूं बल्कि एक तरह से लोगों से बचकर रहने आया हूं और ये मैं कतई नहीं चाहता की मेरा नाम पेपर में आए हां आप ये सारा क्रेडिट राजीव को दे सकती है "
राजीव ने मयंक की बात सुनकर बिना किसी की परवाह किए एक मुक्का मयंक में जड़ दिया और कामना की तरफ घूमते हुए कहा।
"जब किया ही नहीं तो क्रेडिट कैसा और मैं अपनी जिंदगी में कोई आफ़त नहीं चाहता मिस मेरे पास पहले से ही मयंक नाम की मौजूद है आप और पापा इसके सबसे सही हकदार है और आप लोगों का नाम ही आना चाहिए "
कुछ और बात करने के बाद मयंक और राजीव यहां से निकल चलें मयंक की बाइक लेकर जो रात को अनिल का पीछा करते वक्त लिए थे और यहां से निकलते वक्त टाइम रात के आठ हो रहा था मयंक ने बाइक पर बैठते हुए अपना फोन चालू किया तो उसकी स्क्रीन पर 15 मिस्ड कॉल और बीस के आस पास मैसेज थे जिसमें से आधे साक्षी के और रोमा के घर वाले नंबर के थे उसने मैसेज में बता दिया कि वह अनिल के साथ है और कल ही आएगा और एक बार फिर फोन को बंद कर दिया ।
***********
"यार मैंने तो सुना था प्यार से बढ़कर इस दुनिया में कुछ नहीं पर तूने देखा जोया ने अपने चाहने वाले को बीस लाख रुपये के लिए मार दिया तूने देखी थी ना लास तरूण की प्यार करने का नतीजा कितना बुरा मिला उसको पैर कहीं तो शरीर कहीं चिथड़े उड़ गये थे उसके शरीर के ".......... राजीव ने Kingfisher लिखी उस बोतल से एक घूंट पीते हुए कहा।
अनिल के यहां से निकलते ही दोनों एक ढाबे पर पहुंचे थे और वहां पर खाना खाने के बाद राजीव ने बाइक ठेके पर रोक कर छः ठंडी बीयर ली और साथ ही कुछ खाने के लिए भी चिप्स बघेरा मयंक को राजीव ने ही पहली बार घर पर बीयर टेस्ट कराई थी और उसके बाद आज राजी हुआ था पीने के लिए।
"तेरी तरह ही कोई दूसरा होगा जिसे लगता होगा पैसा प्यार से ज्यादा जरुरी है जैसे जोया थी .....वहीं मैं ये मानता हूं की इस दुनिया में कोई भी चीज या इंसान सबसे ऊपर है नहीं क्योंकि देख अगर मैं प्यार को इस दुनिया की सबसे अनमोल चीज बताता हूं तो फिर शायद जो गरीब और अनाथ इस दुनिया में हैं वो नहीं होते .....जाने कितने ऐसे होंगे जो अपने सपने छोड़कर बस इस लगन में जी रहे हैं किसी तरह उनका परिवार सुखी रहें कितने लोग हैं जो अपने प्यार को दुनिया के सामने इसलिए नहीं मान सकते क्योंकि अगर प्यार जग जाहिर हुआ तो फिर शायद उन्हें घर को छोड़ना होगा पर सिर्फ प्यार के भरोसे तो छोड़ नहीं सकते ना क्योंकि घर छूटा तो परिवार छूटा फिर खाना कौन खिलाएगा और जब भूख लगेगी तो प्यार याद थोड़ी आएगा ........
मैंने बहुत से लोग देखे हैं जो अपनी कहानियां सुनाते हैं की बचपन में ही प्यार हो गया था और जबसे ही साथ हैं अब उस लड़के को कौन बताए कि उसके मन में प्यार इसलिए आया क्योंकि जो प्यार के अलावा चीजें थीं जैसे रहने के लिए छत खाने के लिए खाना सोने के लिए बिस्तर वहीं जब वो लड़का प्यार कर रहा होगा दूसरी तरफ एक दूसरा लड़का होगा जो सुबह जागने के साथ ही निकल जाता है कुछ ऐसे सामान की तलाश में जिसको बेचकर वो दो दाने अपने परिवार को खिला सके उसको प्यार क्यूं नहीं हुआ क्योंकि उसके मन में प्यार आता उससे पहले रहेगा कहां उसकी चिंता आ गई, खायगा क्या उसकी चिंता आ गई तो अगर इस हिसाब से देखा जाए तो प्यार एक फालतू चीज महसूस होती नजर आती है
वहीं अब दूसरे पहलू में चलते हैं जहां बड़ी बड़ी संपत्ति हैं और उन संपत्तियों के मालिक पर अफसोस की बात ये है की मालिक का परिवार उस संपत्ति को बचाने के चक्कर में ही स्वर्ग सिधार गया और उसी मालिक के घर की बगल से एक घर बना है जिसमें दस लोग रहते हैं दादा दादी पापा मां चाचा चाची और चार भाई बहन अब जब भी वो अमीर आदमी अपनी सबसे महंगी गाड़ी में बैठ कर उस घर से गुजरता होगा तो उसको वो सारा पैसा पानी जैसा लगता होगा ।
राजीव -"चल मानी तेरी बात पर अगर दोनों द्रष्टिकोंण में कुछ ना कुछ तो बड़ा है ना गरीब के लिए पैसा और अमीर के लिए प्यार"
मयंक -"हाहाहा अच्छा अगर ऐसा है तो फिर साधू संत फकीर है वो क्या है उनके लिए तो ना पैसा मायने रखता ना प्यार बस कुछ मायने रखता है तो मन की शांति जिसके लिए कितने सालों तक बिना किसी परिवार , प्यार और संपत्ति के रहते हैं "
राजीव -"चल मानी तेरी बात तो फिर प्यार और पैसे से ऊपर मन की शांति हुई ना "
मयंक -"अगर मन की शांति सबसे ऊपर होती तो क्यूं कई साधू जो मन की शांति होने पर भी समय से पहले भगवान को पाना चाहते हैं "
राजीव -"तो भगवान सबसे ऊ
पर है ये तो मानेगा "
मयंक -"पर भगवान तो कहते हैं इंसानियत ही मायने रखती है इस दुनिया में उससे बढ़कर कुछ नहीं जो हमें धर्म में रहना सिखाती है "
"भाग भोसडीके बीयर पीकर जो हल्का हल्का सुरूर चढ़ा वो सब छु मंतर हो गया "........ राजीव ने मयंक को लात मारते हुए कहा।
"ठीक है फिर मैं चला "...... मयंक ने हंसते हुए कहा।
"कहां चला साले बैठ चुपचाप "...... जैसे ही मयंक जाने लगा तो राजीव ने उसको पकड़ते हुए कहा।
और फिर एक बार इनकी ये शाम आबाद होने लगी।.........
Yahi Maine bhi soch.?? Ki ye update mujhe se Kab cahoot gayaAur ye sakshi Roma kab mar gayi![]()
Awesome updateUpdate - 32
रात को रोमा के साथ तीन बार मिलन करने के बाद मयंक ना जाने किस सोच के साथ सुबह सात बजे एक बार फिर अवनी के पास था जैसे कुछ ना कुछ तो उससे छूट रहा है भले ही जो कुछ भी उस घर में हुआ हो कुछ ना कुछ सबुत तो मिलेगा ही जो बताएगा कि आखिर उस रात उस घर में हुआ क्या ........
मयंक ने एक बार फिर अवनी से सब कुछ सुना और शायद उन सब बातों पर गौर करने के बाद भले ही ना के बराबर हो पर कुछ तो उसको समझ आ रहा था । पर एक बार और बुलवाने के लिए उसको अवनी को बाजार ले जाकर नाश्ता करवाने का प्रोमिस किया।
"हो गई तैयार आओ चलो जल्दी"........ अवनी एक प्यारी सी फ्रोक में बड़ी ही प्यारी लग रही थी जब अवनी कमरे से बहार आई तो मयंक ने उसकी उंगली पकड़ते हुए कहा।
"इतनी जल्दी क्या है बच्चू मैं अकेले नहीं जाउंगी ".......अवनी ने उंगली खींचते हुए कहा।
मयंक -"अकेली नहीं जाउंगी से क्या मतलब है"
"मतलब ये है की मैं भी जाउंगी "......दीदी ने बहार आते हुए कहा।
इतने ही समय में अवनी और दीदी की साझेदारी बहुत अच्छी हो गई थी और मयंक ने भी बात मानते हुए दोनों को ले जाना ही ठीक समझा और जब एक घंटे बाद ये लौटे तो राजीव का फोन आ गया ।
राजीव -"जल्दी आ बल्ली चाचा के यहां बड़ी लीड मिली है"
मयंक -"15 बस आया ".......इतना कहते हुए मयंक ने फोन काट दिया और निकल चला बल्ली के घर ।
****************
"तो जैसा मैंने कहा था की मैं पता लगवाता हूं कोई बड़ी डील तो नहीं हो रही है शहर में तो मेरा शक सही निकला आज दोपहर बारह बजे लगभग 125 kg सोना इंदौर आने वाला है हो ना हो ये लोग इसी को लूटने की प्लानिंग कर रहे हैं "........ अनिल ने मयंक के आते ही उसको सब कुछ बताया ।
"हम्मम चाचा यार कुछ तो गडबड है मेरा दिल कह नहीं रहा की हम सही दिशा में जा रहे हैं पर हम इस लीड को भी नहीं नकार सकते और अब मुश्किल से दो घंटे है हमारे पास तो आप लोग जल्दी से जल्दी प्लान बनाओ क्या करना है।"
"प्लान तैयार है और अब हमें जब पता है कि क्या प्लान है उनका तो हम पुलिस की मदद भी ले सकते हैं मैं DSP आफिस जा रहा हूं अब तुम लोग फ्री हो बल्ली को लेकर चला जाउंगा मैं "....... अनिल ने मयंक के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा जैसे अब तक की मदद के लिए धन्यवाद कह रहा हो ।
कुछ देर और बात करने के बाद अनिल बल्ली और मयंक राजीव साथ ही बल्ली के घर से निकले बल्ली और अनिल जीप में और ये दोनों अनिल की जिप्सी में थे ।
"रज्जो (राजीव) गाडी उस घर की तरफ मोड़ ले "....... मैंने राजीव से कहा।
राजीव -"क्यूं "
मयंक -"अरे भोसडीके बकचोदी ना कर मन में तेरे भी है और मेरे भी एक बार और उस घर को चैक करने की इसलिए जल्दी चल अब टाइम कम बचा है ऐसा मुझे लग रहा है "
राजीव -"तूरा मेरा सच्चा आंड है साले "
इतना कहते ही गाड़ी को राजीव ने गाड़ी को उस घर की तरफ मोड़ लिया और पंजे पर दबा भी अब कुछ अधिक था।
"तू भीतर देख मैं बहार देखता हूं"...... मयंक ने राजीव से कहा ।
मयंक ने उस घर के गार्डन को अच्छे से चैक किया और जब इस बार उसने गेंदें के फूल वाली जगह को अच्छे से देखा तो कुछ लिफाफा जैसा फटा हुआ डला था चूंकि फूल काफी घने थे जो दिखता नहीं था जब तक उनको हटाकर ना देखा जाए ।
"ये क्या है साले"....... मयंक गार्डन में गली एक मेज पर उस फटे हुए लेफाफे को जोड़ रहा था उस लेफाफे के भीतर एक सफेद कागज भी था जो की कवर के साथ ही फट गया था।
"बहनचोद यो कौन सी भाषा है".......जब उस सफेद कागज के सारे हिस्से जोड़े तो उस पर किसी अलग सी भाषा में एक लाइन लिखी हुई थी ।
मयंक -"अब ये कागज ही बता सकता है कि उन लोगों का असली प्लान क्या है"
राजीव -"ये भाषा कौन सी है पता लग सकता है भाई "
"कैसे "...... मयंक ने कहा।
"चल मेरे साथ "....... राजीव ने मयंक से कहा और लगभग दौडता हुआ गाड़ी की तरफ बढ़ गया ।
मयंक भी राजीव के साथ गाड़ी में बैठ गया और अगले बीस मिनट तक गाड़ी चलती रही और जब रुकी तो सामने एक पुरानी सी बिल्डिंग थी जिस पर बड़े बड़े अक्षरों में लिखा था।
"Govt. Ahilya Centeral Library , Indore "
मयंक समझ गया और राजीव के पीछे पीछे दौड़ चला उस इमारत के भीतर .......
"हैलो सर मिस प्रिती किस सेक्शन में होगी इस वक्त ?"....... राजीव ने रिसेप्शन पर बैठ एक अधेड व्यक्ति से पूछा।
जब तक मयंक यहां तक आता राजीव उस आदमी का जबाब सुनते ही फिर दौड़ लिया और सामने बनी सीढियां जो दूसरी मंजिल पर जाती थी उन पर चढ़ने लगा मयंक ने भी उसके पीछे जाना ही ठीक समझा जबकि रिसेप्शन पर बैठे व्यक्ति ने मयंक को टोका और एंट्री कराने के लिए कहा।
"बिल्लू बकचोद एड्रेस आमपुरा जांटौली डाल देना autograph फिर कभी "........ मयंक जो पहले से ही राजीव पर गुस्सा था क्योंकि लाख पुछने पर भी उसने मयंक को नहीं बताया था की वह कहां जा रहा है और अब जगह पर पहुंच गये तो रुक नहीं रहा है इसलिए वो गुस्सा रिसेप्शन वाले पर उतर गया और खुद भी एक सीढ़ी छोड़ता हुआ दूसरी मंजिल पर पहुंच गया जहां बड़ी बड़ी बुक रखने की रैक बनी हुई थी तीन छोटी गलियों को पार करने के बाद चौथी गली में राजीव एक सुंदर सी लडकी के गले मिल रहा था ।
"अच्छा डार्लिंग सुनो एक काम है "...... मयंक जब उनके पास पहुंचा तो राजीव के मुंह से ये सुना
"आप को क्या चाहिए मिस्टर "......उस लड़की ने जब मयंक को उन दोनों के पास जाने लगा तो लड़की ने मयंक से पूछा।
"वो मेरे साथ ही है"...... राजीव ने उस लड़की से कहा जिसपर उस लड़की ने मयंक को सॉरी बोला।
"हां राजीव बताओ क्या काम था "....... प्रीति ने राजीव से कहा
राजीव -"ज्यादा कुछ नहीं एक लाइन पढ़नी है तुम्हें जो हमें समझ नहीं आ रही".....
इतना कहते ही राजीव ने मयंक को इशारा किया जैसे वो कागज मांग रहा हो। मयंक ने उस कागज को राजीव को दिया और प्रीति जिस किताब को पकड़े हुए थी उसी पर उसको जोड़कर कर लगा दिया ।
"ये तो Arabic है".......उस लड़की ने उन अक्षर की बनावट पहचानते हुए कहा।
"क्या लिखा है वो बताओ ना जानू"....... राजीव ने जिस तरह से उस लड़की को कहा था वो लड़की दुगने जोश से भर गई जो उसके चेहरे पर आई मुस्कान बता रही थी।
"रुको ... ज्यादा हार्ड शब्द मुझे भी पढ़ना नहीं आते Dictionary की मदद लेनी पड़ेगी ".......ये कहते हुए वो दौड़ते हुए गई और दो मिनट बाद एक किताब ले आई वहीं धरती पर बैठ कर उन शब्दों का मतलब ढूंढने लगी और पांच मिनट बाद जो उसने बताया तो दोनों राजीव और मयंक के चेहरे पीले पड़ने लगे ।
मयंक तो लगभग दौड़ते हुए नीचे आया वहीं राजीव वो कागज के टुकड़े लेकर उस लड़की के गाल पर किस करना नहीं भूला जब मयंक गेट के पास पहुंचा तो अब वो रिसेप्शन वाला गेट पर ही खड़ा हो गया ।
"पहले एंट्री नहीं कराई और तो और शौर शराबा कर रहे हो वो अलग फाइन .......वो बिचारा कुछ और कह पाता उससे पहले ही मयंक ने पीछे कमर से एक पिस्तौल निकाली और उस आदमी का मुंह पकड़ कर उसके मुंह में रख दी ।
"अबे चूतिए आदमी के चेहरे को पढ़ना सीख ले और साथ ही सही समय पर सही बात करना भी नहीं तो सही उम्र से पहले ही सही जगह पहुंच जाएगा "....... मयंक ने इतना कहा था की उस आदमी के पेंट से धार बहने लगी वो मुहावरा सुना ही होगा पतलून गीली होना .....
"कहे तो बताऊं"...... मयंक और कुछ कहता उससे पहले राजीव आ गया जिसने मयंक को उस से दूर किया और उसको नीचे वाले फ्लोर पर ही एक दिशा में ले चला
"पापा से पूछा मैंने वो बताने वाले हैं अभी "...... राजीव ने इतना कहा कि तब ही राजीव का फोन बजा ।
"सही कहा था राजीव अभी आधे घंटे में ठीक उसी समय जब सोना आएगा तब ही उन लोग को ***** जेल से **** जेल ले जाएंगे पुलिस वाले "........ अनिल ने जो बताया वो दोनों ने सुना चूंकि फोन का स्पीकर चालू था।
"जल्दी मैप लेकर आ इस रुट का रज्जो"......... मयंक ने कहा और एक टेबल जिस पर कुछ किताबें थीं उनको हटाकर जगह बनाने लगा वहीं राजीव भी मैप ले आया ।
"जल्दी से ****जेल से ****जेल का रुट दिखा "........ मयंक ने कहा
"देख ज्यादा बड़ा रस्ता नहीं है पर ये गांव पड़ेगा रास्ते में जिसके एक किलोमीटर पहले तक ये रोड खाली रहती उसके अलावा पूरा रुट व्यस्त रहता है तो हो ना हो यहीं कांड करेंगे।"........ राजीव ने उस मेज पर मैप रखकर सब समझाते हुए कहा।
"चल जल्दी फिर इंतजार किसका है "...... मयंक ने कहा और गाड़ी की तरफ दौड़ लगा दी इस बार रिसेप्शन टेबल खाली मिली ।
"बहनचोद ये तो हमने सोचा भी ना था "...... मयंक ने गाड़ी चलाते माफी उड़ाते हुए कहा।
इसके बाद ये लोग बात करते रहे और गाड़ी चलती रही लगभग बीस मिनट बाद ये उस गांव वाली रोड पर थे यहां जैसे ही एक मोड़ आया तो मयंक ने गाड़ी धीरे की
"गाड़ी रोक साले "...... राजीव ने मयंक के हाथ को पकड़ते हुए कहा।
मयंक राजीव के ऐसे हाथ पकड़े जाने पर हड़बड़ा गया और एक दम से ब्रेक लगा दी
"क्या है"..... मयंक ने कहा
"सामने देख कर गाड़ी चलाता तो मुझसे ना पूछता "..... राजीव ने इतना कहा
मयंक ने सामने देखा तो पुलिस की वैन जिसमें कैदियों को ले जाया जाता है वो और एक जीप को दो टाटा सूमो ने रोक रखा था वो गाड़ियां ऐसे खड़ी थी जैसे पुलिस की वैन को उन सूमो गाड़ियों ने लेफ्ट साइड से टक्कर मारी हो और अब उन गाड़ियों के गेट खुले तो दोनों में से एक एक बंदा निकला जिनके हाथों में इन थी और ऐसे ही दोनों गाड़ियों में से पांच पांच आदमी गन लेकर निकले ये सारा नजारा मयंक और राजीव लगभग 200m पीछे खड़े देख रहे थे।
तब ही दोनों आइडिया सोचने लगे क्योंकि ऐसे सीधे जिप्सी से हीरो गीली दिखाते तो दोनों में कितनी गोलियां पड़ती अंदाजा भी नहीं था वहीं पुलिस और उन मास्क पहने आदमियों में फायरिंग शुरू हो गई।
तब ही मयंक को एक तरीका सूजा और ड्राइविंग सीट से उतरते हुए वो वापस उसी सड़क पर भागने लगा जिस पर से ये लोग आ रहे थे राजीव ने उसको आवाज़ दी पर मयंक ने नहीं सुनी राजीव को समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे तो उसने अपनी कमर से बंदूक निकाली और रोड के किनारे किनारे आगे बढ़ने लगा ।
वहीं मयंक जब रुका तो एक ट्रेक्टर के पास था जो की उस मोड़ से कुछ पीछे खड़ा था पता नहीं क्या सोच रखा था उसने ट्रेक्टर की बैटरी के तार इंजन में जहां लगे थे वहां से हटाते हुए उनको दांतों से छीला और एक और जगह के तार हटाए और उस जगह बैटरी के तार लगाए तो ट्रेक्टर आवाज के साथ चालू हो गया।
मयंक ने सबसे पहले ट्रोली और ट्रेक्टर को जोड़ने वाले नाके को हटाया और ट्रेक्टर की सीट पर बैठते हुए किलच दबाकर गीयर को neutral से हटाया और "चईंचचचचच" की आवाज के साथ पहला गीयर डाला और हाथ से रेस को खोलता हुआ फुल स्पीड में आगे बड़ा दिया ।
मयंक एक मिनट के भीतर उस मोड़ पर था और ट्रेक्टर चौथे गीयर में भयंकर आवाज करता हुआ उस मोड़ से घूमकर जब उस सड़क पर आया तो पलटते हुए बचा अगर यहां मयंक स्पीड कम करता तो यकीनन गाड़ियों तक पहुंचते हुए टाइम लगा और उन गुंडों को टाइम मिलता पर ऐसा हुआ नहीं और मयंक ने उस रोड पर आते ही एक बार फिर किलच दबाया और एक गीयर उतारता हुए रेस पूरी खोल दी ट्रेक्टर और आवाज करते हुए भयंकर गयी से आगे बढ़ा ।
यहां ट्रेक्टर असंतुलित हो चुका था पर मयंक को इसकी शायद प्रवाह ही नहीं थी।
"धम्मममम ".......इस भयंकर आवाज के साथ वो ट्रेक्टर पहले खड़ी सूमो गाड़ी से टकराया और वो गुंडे जो दोनों गाड़ी के बीच थे वो इस टकराव की वजह से पहले से टकराए और दूसरी गाड़ी से जा लगे ।
वहीं गाड़ी में टक्कर लगते हुए ट्रेक्टर जैसे ही कुछ धीमा हुआ तो मयंक ने एक बार फिर गीयर उतारते हुए रेस खींच दी जिसका प्रभाव ये हुआ वो ट्रेक्टर उस पहली गाड़ी को डक्का देता हुआ दूसरी से जा लगा और दूसरी वाली गाड़ी पलटी गई जबकि पहली वाली के चिथड़े उड़ चुके थे मयंक ने ट्रेक्टर को रिवर्स गीयर में डाला और एक बार फिर गीयर चेंज करते हुए टक्कर मारी और चूंकि पहली टक्कर में आगे वाली गाड़ी पिचक सी गई थी इस बार ट्रेक्टर उस गाड़ी पर ही चड़ गया जिससे मयंक को भयंकर जटका लगा और आवाज करता हुआ बंद हो गया ।
"धआंएएए".......तब ही गोली की आवाज उस वातावरण में गूंज गई जो की मयंक की तरफ ही चली थी वो भी उसके पीछे से......
Nice and superb update....Update 33
"चट्टटटाक्ककक"........इस भयंकर थप्पड की आवाज अचानक से शांत हुए वातावरण में फेल गई जो की राजीव ने बंदूक संभाल रही इस लड़की को मारा था।
यही वो लड़की थी जो गाड़ी से सबसे पहले उतर कर पुलिस वैन के दूसरी तरफ जा पहुंची थी और मयंक ने जब टक्कर मारी तो मयंक के पीछे की तरफ से इसने ही गोली चलाई पर ठीक गोली चलाते वक्त ही राजीव की लात इस लड़की के हाथ पर लगी जिस वजह से गोली अपने निशाने से चूकती हुई ट्रेक्टर के टायर में जा फसी और खुद को संभाल कर ये लडकी बंदूक इस बार राजीव की तरफ उठती उससे पहले ही ये थप्पड़ पड चुका था।
अब तक जो एकाद पुलिस वाले वाले छुपकर गोली चलाने का प्रयास कर रहे थे वे सामने आते हुए उन आतंकियों की तरफ बढ़ गये जो दो टाटा सूमो की बीच में और नीचे दबे हुए थे मयंक ने जब गोली चलने की आवाज सुनी तो तुरंत पीछे घूमा और जो चेहरा पीछे देखा तो फिर बस मुंह से बस एक ही शब्द निकला।
"******".....(सोचो कितना गन्दा शब्द होगा जो मैं यहां भी नहीं लिख रहा )
मयंक तुरंत नीचे उतरा..... जब तक राजीव अपनी बंदूक कमर पर ठूंसता हुआ उस लड़की की बंदूक लेकर उसके दोनों हाथों को पकड़ चुका था ।
"देख रहा है रज्जो(राजीव )यहां बहनचो इसकी चिंता में दिमाग फटा जा रहा था की कहां होगी किडनैप तो नहीं हो गई मर तो नहीं गई और ये देवी जी मुझ पर ही गोली चला रही है "....... मयंक ने उस लड़की के चेहरे को घोर से देखते हुए कहा जैसे यकीन ही नहीं हो रहा था।
"जोया जी सच कह रहा हुं जब पापा ने आपकी फोटो दिखाई थी तो सोचा था आपको बचाकर इंप्रेस करूंगा और बिहा रचाउंगा पर आपने ने तो दिल तोड दिया मेरा "......... राजीव ने जोया के हाथ को थोड़ा और मोड़ते हुए कहा।
"छोड़ो मुझे मैं जानती हूं तुम दोनों को..... तुम्हारी वजह से हमारा इतना अच्छा प्लान फेल हुआ है सजा तो मिलेगी ".......जोया ने खुद को छुड़ाने की कोशिश करते हुए कहा।
जोया की बात सुनकर मयंक और राजीव ने एक दूसरे की आंखों में देखा जैसे एक दूसरे से कह रही हों इसको तो मैं ही मारुंगा।
पर तब ही मयंक का फोन बजा और वो उसको हाथ में पकड़ता हुआ रोड के किनारे की तरफ बढ़ गया वहीं राजीव और जोया की तरफ पुलिस वाले आने लगे जो राजीव से बात करने लगे जैसे उससे उसका परिचय मांग रहे हों
"मयंक यार तू कह रहा था वैसा कुछ नहीं था पर यहां ये लोग सोना चुराने ही आए थे और हमने इनको आसानी से पकड़ भी लिया है गिनती के छः थे ।".......... फोन उठते ही अनिल ने मयंक से कहा।
"चाचा यहां ****रोड पर तुम्हारा ये बेटा मरते बचा है आ जाओ जल्दी से........और हां जरा इन पुलिस वालों को बोलो जब तक आप यहां नहीं आते बकचोदी ना करें"......... मयंक भले ही अनिल से बात कर रहा था पर उसकी नजर बराबर उन पुलिस वालों पर थी जो राजीव से बातचीत या शायद पूछताछ कर रहे थे ।
जिसके बाद उस दो सितारा अफसर को फोन थमाते हुए मयंक ने बात करने के लिए कहा और एक पुलिस वाले से जोया को पकड़ने का कहा ।
वहीं जब उस पुलिस वाले की अनिल से बात हो गई तो वो मयंक और राजीव से बात करने लगा बड़ा ही समझ रखने वाला था जिसने बिना किसी परेशानी के ही कोपरेट किया और तुरंत ही उन लोगों को गाड़ियों के नीचे से निकल लिया जिसमें से एक कम घायल हुआ वहीं दो गहरी चोट वाले थे और बाकी सब स्वर्ग सिधार चुके थे जिनमें दोनों गाड़ियों के ड्राइवर सहित गाड़ी से लगकर खड़े सब उपद्रवी शामिल थे ।
बात करने के पच्चीस मिनट के भीतर ही अनिल यहां मौजूद था और इस बार उसके साथ और भी लोग थे जो साब सिविल ड्रेस में IB के एजेंट ही रहे होंगे इन लोगों के आने के कुछ सेकंड बाद ही यहां एंबुलेंस भी आ चुकी थी जिसमें उन सब को भेजा गया और एंबुलेंस के साथ ही कुछ सिपाही और तीन एजेंट भेजे गये ।
"हुआ क्या है यहां मयंक और तू ठीक है ना कुछ हुआ तो नहीं?" मयंक और राजीव को गहनता से देखते हुए अनिल उनके पास आते हुए कहा।
"अरे चाचा मेरी छोड़ो आओ मैं आपको एक चीज दिखाता हूं "......ये कहता हुए मयंक ने अनिल को जब जोया के सामने खड़ा किया तो उससे कुछ ना कहते बना और ना करते।
"जोया !!!......हुआ क्या है यहां"........ अनिल ने कहा ।
राजीव -"पापा पहले आप मिस कामना को बुलाओ यहां "
अनिल -"वो आ रही है यहां मेरी रास्ते में बात हुई उनसे जब तक मुझे तुम लोग सब कुछ बताओ "
जिसके बाद राजीव ने सब अनिल को बताया अनिल कुछ कहता उससे पहले ही एक गाड़ी यहां आकर रुकी और ड्राइविंग सीट से कामना इनकी तरफ ही आती हुई दिखाई दी जब उन्होंने भी जोया को देखा तो उनका हाल भी कुछ अलग नहीं था । जिसके बाद उन्हें सब बताया गया।
********
"बोलो भी जोया मेरे गुस्से का इंमतिहान मत ल़ो"......कामना ने जोया के मुंह को कस के पकड़ते हुए कहा।
जिस पर जोया के मुंह पर एक मुस्कान आ गई जैसे वो कामना का मज़ाक़ बना रही हो क्योंकि वहां मयंक और राजीव को धमकी देने के बाद से उसने मुंह नहीं खोला था।
"अगर तुमने अब कुछ नहीं बोला तो तुम तो मारी जाओगी ही साथ में अवनी भी तुम्हारे साथ जाएगी"....... कामना ने गुस्से में आकर ये कह दिया और साथ ही अपनी बंदूक जोया के माथे पर रख दी।
"ठीक है बताती हूं.....पहले पानी पिलाओ"........जोया ने इतना कहना था की कामना ने तुरंत अपने एक साथी को इशारा किया और जोया को पानी पिलाने के बाद सब उसको घूरने लगे जहां राजीव और मयंक एक टेबल के सहारे खड़े थे वहीं कामना ठीक जोया के सामने कुर्सी पर बैठी थी अनिल अभी एक्सिडेंट को हैंडल कर रहा था वो भी अंदर आता हुआ एक कुर्सी पर बैठ गया।
अपने आप को ऐसे घूरता पाकर जोया ने एक लंबी सांस छोड़ी और बोलना शुरू किया -
"आज से ठीक दस दिन पहले मुझे एक टेक्स्ट मैसेज आया जिसमें लिखा था की ******* पार्क के गेट पर मिलो मेरे पास टेरर फंडिंग से रिलेटेड जानकारी है।.......जब मैं वहां पहुंची तो मेरी मुलाकात करीम से हुई"
अनिल -"कौन करीम ?"
जोया -"जिसकी आवाज आप लोगों ने मेरे फोन पर सुनी जो की हमारी ही साज़िश थी जिससे आप लोगों का पूरा ध्यान सोने पर केंद्रित हो सके"
कामना -"आगे बोलो "
जोया -"करीम ने मुझे उनके साथ मिलने का अवसर दिया उसके बदले में मुझे 20 लाख रुपये भी दे रहे थे जिसके बदले में मुझे IB में रहकर उनका काम करना था पर मैंने उसको ठुकरा दिया दो दिन तक कोई बात नहीं हुई हमारी तीसरे दिन करीम का फोन फिर आया मैंने फोन नहीं उठाया जिस पर उसका मैसेज आया जिसमें लिखा था की वो मुझे 50 लाख रुपये देंगे बस एक काम करना होगा पहले मुझे बहुत गुस्सा आया पर जब मैंने इस बात पर ध्यान दिया साथ ही थोड़ा सोचा तो लगा एक ही तो काम है और फिर पचास लाख कम तो नहीं थे मेरी ईमानदारी के लिए अगर काम के बाद किसी को शक नहीं हुआ तो IB में ही रहुंगी और अगर शक हुआ भी तो पचास लाख इतने रुपये थे की मैं दुनिया के किसी भी कोने में रह सकती थी। दो दिन मैंने सोचा और उसी दिन फिर करीम का फोन आया जिस पर मैंने हां कह दिया पर मैंने शर्त रखी कि पैसे मैं पहले लूंगी दो दिन बाद ही मेरे घर एक आदमी आया रुपये लेकर पर मैं और तरुण केस की वजह से घर पर नहीं थे लेकिन जब पहुंचे तो पड़ोसी ने तरूण के सामने आकर ही बताया कि एक आदमी हमें ढूंढ रहा था जिस पर शायद तरूण को शक हुआ क्योंकि हमारे रिश्तेदारों का तो सवाल ही नहीं था पर मैंने बात को बहुत घुमाया और शायद तरुण मान भी गया था। अगले दिन वह आदमी फिर आया रूपयों का बैग लेकर किसमत से उस दिन तरूण अकेला गया और वो बैग मुझे मिल गया जब मैंने इतने सारे रुपये देंगे तो खुद संभाल नहीं पाई और सब नोटों को निकाल कर उनको गिन ने लगी और इसमें ये भी ध्यान नहीं रहा की अवनी उसी वक्त स्कूल से वापस आती है और उसने मेरी इस हरकत को देख लिया पहले मैं बहुत घबरा गई थी पर फिर लगा बच्ची है वो लेकिन तरुण के साथ खेलते वक्त उसने ये बात उसको बता दी जब तरूण ने मुझे पूछा तो एक फिर मैंने बात को घुमा दिया "
अनिल -"तरुण कोई बच्चा तो नहीं था जो इतनी आसानी से तुम्हारी बातों में आ जाए?"
इस बात पर जोया कुटिलता से मुस्कुराई और फिर कामना की तरफ देखकर बोली......
जोया -"आपको पता है इस दुनिया में सबसे भोला जीव कौनसा होता है मैडम ?"
कामना -"बात मत घुमाओ सिर्फ जबाब दो या फिर कहानी आगे बढ़ाओ "
जोया -"अरे आप नाराज क्यूं होती है मैं बताती हूं आपको इस दुनिया में सबसे मासूम जीव होता है 'प्यार में पागल आदमी' ....बिचारा तरुण प्यार करता था मुझसे और प्यार पर शक थोड़ी किया जाता है एक आंसू बर्दास्त नहीं था मेरी आंखों में, फिर सच छुपाने के लिए उस दिन तो मैं बहुत रोई थी "
जोया की बात पूरी होते ही एक दम से वहां शांति छा गई....
"लगता है आगे की कहानी नहीं सुननी कोई बात नहीं मैं सुना देती हूं भले ही उस रात में एक बार फिर सच गई पर शायद तरुण को शक हो गया था। पर उसी रात तरुण मुझे एक केस से जुड़ी लीड दी जिसमें हमको पता चल गया था की कौन कौन है जो टेररिस्ट को फंडिंग में मदद कर रहा है जिस पर मेरे दिमाग में एक और आईडिया आया और मैंने तरूण और अवनी को बहार गार्डन में खेलने भेज दिया और करीम को फोन लगाकर कहा कि मुझे केस से जुड़ी बात पता लगी तो उसने कहा बीस लाख रुपये और देगा पर तरुण को मारना होगा मैंने तुरंत हां कर दी और करीम से एक ब्लास्ट करने के लिए बोम मांगा और साथ ही जो काम मुझे करना था उसकी जानकारी भी लेकिन जो काम मुझे करना था उसको फोन पर सुनने से मना किया कहा कि बोम के साथ ही कागज पर लिखकर भेजें लेकिन अरेबिक भाषा में क्योंकि कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी मैं दो घंटे बाद ही ठीक रात को 11 बजे वो आदमी मेरे घर के बहार था मैंने उस कागज से काम को पढ़कर वहीं गार्डन में फाड़कर फेंक दिया और बोमब को छुपाकर भीतर ले गई। और तरूण से कहा कि हमें जब केस के बारे में सब पता चल चुका है तो घर खाली कर देना चाहिए जिस पर उसने कहा कि कामना मेम से बात करनी होगी पर फिर बात तो मेरी उसको मान नी ही थी मैंने उसको ऊपर कमरे में कपड़े पैक करने को कहा और नीचे आकर मैंने अपना रुपये वाला बैग निकाला अवनी को गार्डन में भेजा अपने आने का बोलकर और बोम को सीढ़ियों पर फिट किया लेकिन उसको नीचे बुलाना था तो बस एक बार नकली चीख निकाली और खुद पीछे वाले गेट से निकल गई जिसके बाद शायद वो मेरी चीख सुनकर सब कुछ भूलकर दौड़ते हुए नीचे आया होगा और ठीक सबसे आखरी सीढ़ी पर आकर बोम के साथ उड़ गया होगा ।"
कामना -"शर्म आनी चाहिए तुम्हें जोया ".......जोया अपनी बात खत्म करके हंसने लगी जिस पर कामना ने चिल्लाकर कहा ।
अनिल -"उस कागज पर क्या लिखा था और घर से फरार होकर कहां गई तुम?"
जोया -"मेरे हाथ खोल़ो फिर बताउंगी ..........टेंशन मत लो भागने नहीं वाली "
अनिल ने राजीव को हां कहा और राजीव ने जोया के हाथ खोल दिए ।
जोया -"मै जैसे ही घर से निकली तो करीम से बात की और वो मुझे लेने आ गया जिसके बाद मैं उसके घर गई वहां जाते ही उसने और बीस लाख मुझे दिए लेकिन कहा कि वो काम हमको कल(ये कल आज ही है जिस दिन ये कांड हुआ)ही करना होगा मैंने पूछा तो उसने बताया कि अगर हमको हमारा काम करना है तो तुम लोगों का ध्यान बांटना होगा और उसके लिए हमें जरिया मिला सोने के तौर पर इस लिए करीम ने मेरे फोन से अपने साथी को फोन किया और बात की जिससे तुम लोग को पता चले कि हम सोना आज चुराने वाले हैं लेकिन हमारा असली काम था हमारे भाईयों को बचाना जो आज ***** जेल से शिफ्ट होकर**** जेल जाने वाले थे हमारा प्लान सफल हो गया था पर ना जाने कहां से ये दोनों (मयंक और राजीव)आ गए और हम कामयाब नही हो सके।"
अनिल -"करीम कहां है इस वक्त?"
जोया -"करीम को छोड़ो मैं आप लोगों को राज की बात बताती हूं..... तुम लोगों को लग रहा होगा की ये सब मैं तुम्हें अवनी की वजह से बता रही हूं पर ऐसा नहीं है मुझे उससे कोई मतलब नहीं है और रही बात करीम की तो वो तो मैं नहीं बताने वाली "
अपनी बात खत्म करते ही जोया का हाथ अपने सीने की तरफ जाने लगा जिसको देखते ही राजीव का दिमाग ठनका और वो जोया की तरफ बड़ा पर जब तक वह उसके पास पहुंचता जोया अपने गले में लटके लोकेट जो कुछ कैपसूल जैसा दिखता था उसे अपने दांतों से दबा चुकी थी कामना ने जैसे ही ये देखा तो उसने तुरंत उसका हाथ पकडना चाहा पर दांत का जोर पड़ते ही वह कैपसूल फूट गया और जहर जोया के मुंह में जा चुका था जो यकीनन उसको मिनट के भीतर ही मारने वाला था ।
एकदम से कमरे का माहौल बदल चुका था सब अचंभित थे उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था की ये हो जाएगा उन्हें लगा था की जोया की मदद से वह करीम तक पहुंच ही जाएंगे पर अब जोया भी इस दुनिया में नहीं थी ।
जोया को तुरंत अस्पताल भेजा गया पर अभी भी कामना और अनिल के मन में सवाल थे पर इस बार जबाब मयंक और राजीव को देना था।
कामना -"मयंक और राजीव तुम दोनों वहां कैसे पहुंचे?"
राजीव -"मयंक का मन नहीं मान रहा था की बात सिर्फ सोने तक की है इस वजह से हमने उस घर में द्वारा जाने का सोची क्योंकि सोने को बचाने के लिए पापा अपनी टीम के साथ जा रहे थे और जब दोबारा हम उस घर में पहुंचे तो मयंक को वह कागज फटा हुआ मिला पर उस पर जो कुछ भी था हमारी समझ से परे था मैंने तो सोचा यूं होगा पर इसने कहा कि एक बार जानना तो है इस क्या लिखा है और हम उस कागज को लेकर लाइब्रेरी गये वहां जब हमने पढ़ा तो उस पर लिखा था
"जोया हम तुमसे सिर्फ ये चाहते हैं की हमारे भाई जो इस वक्त**** जेल में हैं उनको दूसरी जगह सिफ्ट किया जा रहा है तुम उनको बचा सकती हो सिर्फ तुम और जब ये काम हो जाएगा फिर तुम बिल्कुल पहले की तरह हमसे अंजान हो जाओगी"
जब हमने ये पढ़ा तो तुरंत पापा को फोन किया ये पता लगाने की कब ये लोग सिफ्ट होंगे और पापा ने बताया कि आज ही ये काम होना है तो हम पहुंच गए और उसके बाद की सारी घटना राजीव ने कहा सुनाई।
कामना -"मयंक और राजीव तुम दोनों नहीं जानते तुमने कितना बड़ा काम किया है मैं जरूर तुम दोनों को ईनाम दिलवाऊंगा और कल के पेपर में दोनों का नाम फ्रंट पेज पर होगा।"
मयंक -"बिल्कुल नहीं मैडम मैं यहां इंदौर अपना नाम न्यूज पेपर में छपावाने नहीं आया हूं बल्कि एक तरह से लोगों से बचकर रहने आया हूं और ये मैं कतई नहीं चाहता की मेरा नाम पेपर में आए हां आप ये सारा क्रेडिट राजीव को दे सकती है "
राजीव ने मयंक की बात सुनकर बिना किसी की परवाह किए एक मुक्का मयंक में जड़ दिया और कामना की तरफ घूमते हुए कहा।
"जब किया ही नहीं तो क्रेडिट कैसा और मैं अपनी जिंदगी में कोई आफ़त नहीं चाहता मिस मेरे पास पहले से ही मयंक नाम की मौजूद है आप और पापा इसके सबसे सही हकदार है और आप लोगों का नाम ही आना चाहिए "
कुछ और बात करने के बाद मयंक और राजीव यहां से निकल चलें मयंक की बाइक लेकर जो रात को अनिल का पीछा करते वक्त लिए थे और यहां से निकलते वक्त टाइम रात के आठ हो रहा था मयंक ने बाइक पर बैठते हुए अपना फोन चालू किया तो उसकी स्क्रीन पर 15 मिस्ड कॉल और बीस के आस पास मैसेज थे जिसमें से आधे साक्षी के और रोमा के घर वाले नंबर के थे उसने मैसेज में बता दिया कि वह अनिल के साथ है और कल ही आएगा और एक बार फिर फोन को बंद कर दिया ।
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"यार मैंने तो सुना था प्यार से बढ़कर इस दुनिया में कुछ नहीं पर तूने देखा जोया ने अपने चाहने वाले को बीस लाख रुपये के लिए मार दिया तूने देखी थी ना लास तरूण की प्यार करने का नतीजा कितना बुरा मिला उसको पैर कहीं तो शरीर कहीं चिथड़े उड़ गये थे उसके शरीर के ".......... राजीव ने Kingfisher लिखी उस बोतल से एक घूंट पीते हुए कहा।
अनिल के यहां से निकलते ही दोनों एक ढाबे पर पहुंचे थे और वहां पर खाना खाने के बाद राजीव ने बाइक ठेके पर रोक कर छः ठंडी बीयर ली और साथ ही कुछ खाने के लिए भी चिप्स बघेरा मयंक को राजीव ने ही पहली बार घर पर बीयर टेस्ट कराई थी और उसके बाद आज राजी हुआ था पीने के लिए।
"तेरी तरह ही कोई दूसरा होगा जिसे लगता होगा पैसा प्यार से ज्यादा जरुरी है जैसे जोया थी .....वहीं मैं ये मानता हूं की इस दुनिया में कोई भी चीज या इंसान सबसे ऊपर है नहीं क्योंकि देख अगर मैं प्यार को इस दुनिया की सबसे अनमोल चीज बताता हूं तो फिर शायद जो गरीब और अनाथ इस दुनिया में हैं वो नहीं होते .....जाने कितने ऐसे होंगे जो अपने सपने छोड़कर बस इस लगन में जी रहे हैं किसी तरह उनका परिवार सुखी रहें कितने लोग हैं जो अपने प्यार को दुनिया के सामने इसलिए नहीं मान सकते क्योंकि अगर प्यार जग जाहिर हुआ तो फिर शायद उन्हें घर को छोड़ना होगा पर सिर्फ प्यार के भरोसे तो छोड़ नहीं सकते ना क्योंकि घर छूटा तो परिवार छूटा फिर खाना कौन खिलाएगा और जब भूख लगेगी तो प्यार याद थोड़ी आएगा ........
मैंने बहुत से लोग देखे हैं जो अपनी कहानियां सुनाते हैं की बचपन में ही प्यार हो गया था और जबसे ही साथ हैं अब उस लड़के को कौन बताए कि उसके मन में प्यार इसलिए आया क्योंकि जो प्यार के अलावा चीजें थीं जैसे रहने के लिए छत खाने के लिए खाना सोने के लिए बिस्तर वहीं जब वो लड़का प्यार कर रहा होगा दूसरी तरफ एक दूसरा लड़का होगा जो सुबह जागने के साथ ही निकल जाता है कुछ ऐसे सामान की तलाश में जिसको बेचकर वो दो दाने अपने परिवार को खिला सके उसको प्यार क्यूं नहीं हुआ क्योंकि उसके मन में प्यार आता उससे पहले रहेगा कहां उसकी चिंता आ गई, खायगा क्या उसकी चिंता आ गई तो अगर इस हिसाब से देखा जाए तो प्यार एक फालतू चीज महसूस होती नजर आती है
वहीं अब दूसरे पहलू में चलते हैं जहां बड़ी बड़ी संपत्ति हैं और उन संपत्तियों के मालिक पर अफसोस की बात ये है की मालिक का परिवार उस संपत्ति को बचाने के चक्कर में ही स्वर्ग सिधार गया और उसी मालिक के घर की बगल से एक घर बना है जिसमें दस लोग रहते हैं दादा दादी पापा मां चाचा चाची और चार भाई बहन अब जब भी वो अमीर आदमी अपनी सबसे महंगी गाड़ी में बैठ कर उस घर से गुजरता होगा तो उसको वो सारा पैसा पानी जैसा लगता होगा ।
राजीव -"चल मानी तेरी बात पर अगर दोनों द्रष्टिकोंण में कुछ ना कुछ तो बड़ा है ना गरीब के लिए पैसा और अमीर के लिए प्यार"
मयंक -"हाहाहा अच्छा अगर ऐसा है तो फिर साधू संत फकीर है वो क्या है उनके लिए तो ना पैसा मायने रखता ना प्यार बस कुछ मायने रखता है तो मन की शांति जिसके लिए कितने सालों तक बिना किसी परिवार , प्यार और संपत्ति के रहते हैं "
राजीव -"चल मानी तेरी बात तो फिर प्यार और पैसे से ऊपर मन की शांति हुई ना "
मयंक -"अगर मन की शांति सबसे ऊपर होती तो क्यूं कई साधू जो मन की शांति होने पर भी समय से पहले भगवान को पाना चाहते हैं "
राजीव -"तो भगवान सबसे ऊ
पर है ये तो मानेगा "
मयंक -"पर भगवान तो कहते हैं इंसानियत ही मायने रखती है इस दुनिया में उससे बढ़कर कुछ नहीं जो हमें धर्म में रहना सिखाती है "
"भाग भोसडीके बीयर पीकर जो हल्का हल्का सुरूर चढ़ा वो सब छु मंतर हो गया "........ राजीव ने मयंक को लात मारते हुए कहा।
"ठीक है फिर मैं चला "...... मयंक ने हंसते हुए कहा।
"कहां चला साले बैठ चुपचाप "...... जैसे ही मयंक जाने लगा तो राजीव ने उसको पकड़ते हुए कहा।
और फिर एक बार इनकी ये शाम आबाद होने लगी।.........
Bara hi majedaar update tha bhai ekdamm lallantopUpdate 33
"चट्टटटाक्ककक"........इस भयंकर थप्पड की आवाज अचानक से शांत हुए वातावरण में फेल गई जो की राजीव ने बंदूक संभाल रही इस लड़की को मारा था।
यही वो लड़की थी जो गाड़ी से सबसे पहले उतर कर पुलिस वैन के दूसरी तरफ जा पहुंची थी और मयंक ने जब टक्कर मारी तो मयंक के पीछे की तरफ से इसने ही गोली चलाई पर ठीक गोली चलाते वक्त ही राजीव की लात इस लड़की के हाथ पर लगी जिस वजह से गोली अपने निशाने से चूकती हुई ट्रेक्टर के टायर में जा फसी और खुद को संभाल कर ये लडकी बंदूक इस बार राजीव की तरफ उठती उससे पहले ही ये थप्पड़ पड चुका था।
अब तक जो एकाद पुलिस वाले वाले छुपकर गोली चलाने का प्रयास कर रहे थे वे सामने आते हुए उन आतंकियों की तरफ बढ़ गये जो दो टाटा सूमो की बीच में और नीचे दबे हुए थे मयंक ने जब गोली चलने की आवाज सुनी तो तुरंत पीछे घूमा और जो चेहरा पीछे देखा तो फिर बस मुंह से बस एक ही शब्द निकला।
"******".....(सोचो कितना गन्दा शब्द होगा जो मैं यहां भी नहीं लिख रहा )
मयंक तुरंत नीचे उतरा..... जब तक राजीव अपनी बंदूक कमर पर ठूंसता हुआ उस लड़की की बंदूक लेकर उसके दोनों हाथों को पकड़ चुका था ।
"देख रहा है रज्जो(राजीव )यहां बहनचो इसकी चिंता में दिमाग फटा जा रहा था की कहां होगी किडनैप तो नहीं हो गई मर तो नहीं गई और ये देवी जी मुझ पर ही गोली चला रही है "....... मयंक ने उस लड़की के चेहरे को घोर से देखते हुए कहा जैसे यकीन ही नहीं हो रहा था।
"जोया जी सच कह रहा हुं जब पापा ने आपकी फोटो दिखाई थी तो सोचा था आपको बचाकर इंप्रेस करूंगा और बिहा रचाउंगा पर आपने ने तो दिल तोड दिया मेरा "......... राजीव ने जोया के हाथ को थोड़ा और मोड़ते हुए कहा।
"छोड़ो मुझे मैं जानती हूं तुम दोनों को..... तुम्हारी वजह से हमारा इतना अच्छा प्लान फेल हुआ है सजा तो मिलेगी ".......जोया ने खुद को छुड़ाने की कोशिश करते हुए कहा।
जोया की बात सुनकर मयंक और राजीव ने एक दूसरे की आंखों में देखा जैसे एक दूसरे से कह रही हों इसको तो मैं ही मारुंगा।
पर तब ही मयंक का फोन बजा और वो उसको हाथ में पकड़ता हुआ रोड के किनारे की तरफ बढ़ गया वहीं राजीव और जोया की तरफ पुलिस वाले आने लगे जो राजीव से बात करने लगे जैसे उससे उसका परिचय मांग रहे हों
"मयंक यार तू कह रहा था वैसा कुछ नहीं था पर यहां ये लोग सोना चुराने ही आए थे और हमने इनको आसानी से पकड़ भी लिया है गिनती के छः थे ।".......... फोन उठते ही अनिल ने मयंक से कहा।
"चाचा यहां ****रोड पर तुम्हारा ये बेटा मरते बचा है आ जाओ जल्दी से........और हां जरा इन पुलिस वालों को बोलो जब तक आप यहां नहीं आते बकचोदी ना करें"......... मयंक भले ही अनिल से बात कर रहा था पर उसकी नजर बराबर उन पुलिस वालों पर थी जो राजीव से बातचीत या शायद पूछताछ कर रहे थे ।
जिसके बाद उस दो सितारा अफसर को फोन थमाते हुए मयंक ने बात करने के लिए कहा और एक पुलिस वाले से जोया को पकड़ने का कहा ।
वहीं जब उस पुलिस वाले की अनिल से बात हो गई तो वो मयंक और राजीव से बात करने लगा बड़ा ही समझ रखने वाला था जिसने बिना किसी परेशानी के ही कोपरेट किया और तुरंत ही उन लोगों को गाड़ियों के नीचे से निकल लिया जिसमें से एक कम घायल हुआ वहीं दो गहरी चोट वाले थे और बाकी सब स्वर्ग सिधार चुके थे जिनमें दोनों गाड़ियों के ड्राइवर सहित गाड़ी से लगकर खड़े सब उपद्रवी शामिल थे ।
बात करने के पच्चीस मिनट के भीतर ही अनिल यहां मौजूद था और इस बार उसके साथ और भी लोग थे जो साब सिविल ड्रेस में IB के एजेंट ही रहे होंगे इन लोगों के आने के कुछ सेकंड बाद ही यहां एंबुलेंस भी आ चुकी थी जिसमें उन सब को भेजा गया और एंबुलेंस के साथ ही कुछ सिपाही और तीन एजेंट भेजे गये ।
"हुआ क्या है यहां मयंक और तू ठीक है ना कुछ हुआ तो नहीं?" मयंक और राजीव को गहनता से देखते हुए अनिल उनके पास आते हुए कहा।
"अरे चाचा मेरी छोड़ो आओ मैं आपको एक चीज दिखाता हूं "......ये कहता हुए मयंक ने अनिल को जब जोया के सामने खड़ा किया तो उससे कुछ ना कहते बना और ना करते।
"जोया !!!......हुआ क्या है यहां"........ अनिल ने कहा ।
राजीव -"पापा पहले आप मिस कामना को बुलाओ यहां "
अनिल -"वो आ रही है यहां मेरी रास्ते में बात हुई उनसे जब तक मुझे तुम लोग सब कुछ बताओ "
जिसके बाद राजीव ने सब अनिल को बताया अनिल कुछ कहता उससे पहले ही एक गाड़ी यहां आकर रुकी और ड्राइविंग सीट से कामना इनकी तरफ ही आती हुई दिखाई दी जब उन्होंने भी जोया को देखा तो उनका हाल भी कुछ अलग नहीं था । जिसके बाद उन्हें सब बताया गया।
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"बोलो भी जोया मेरे गुस्से का इंमतिहान मत ल़ो"......कामना ने जोया के मुंह को कस के पकड़ते हुए कहा।
जिस पर जोया के मुंह पर एक मुस्कान आ गई जैसे वो कामना का मज़ाक़ बना रही हो क्योंकि वहां मयंक और राजीव को धमकी देने के बाद से उसने मुंह नहीं खोला था।
"अगर तुमने अब कुछ नहीं बोला तो तुम तो मारी जाओगी ही साथ में अवनी भी तुम्हारे साथ जाएगी"....... कामना ने गुस्से में आकर ये कह दिया और साथ ही अपनी बंदूक जोया के माथे पर रख दी।
"ठीक है बताती हूं.....पहले पानी पिलाओ"........जोया ने इतना कहना था की कामना ने तुरंत अपने एक साथी को इशारा किया और जोया को पानी पिलाने के बाद सब उसको घूरने लगे जहां राजीव और मयंक एक टेबल के सहारे खड़े थे वहीं कामना ठीक जोया के सामने कुर्सी पर बैठी थी अनिल अभी एक्सिडेंट को हैंडल कर रहा था वो भी अंदर आता हुआ एक कुर्सी पर बैठ गया।
अपने आप को ऐसे घूरता पाकर जोया ने एक लंबी सांस छोड़ी और बोलना शुरू किया -
"आज से ठीक दस दिन पहले मुझे एक टेक्स्ट मैसेज आया जिसमें लिखा था की ******* पार्क के गेट पर मिलो मेरे पास टेरर फंडिंग से रिलेटेड जानकारी है।.......जब मैं वहां पहुंची तो मेरी मुलाकात करीम से हुई"
अनिल -"कौन करीम ?"
जोया -"जिसकी आवाज आप लोगों ने मेरे फोन पर सुनी जो की हमारी ही साज़िश थी जिससे आप लोगों का पूरा ध्यान सोने पर केंद्रित हो सके"
कामना -"आगे बोलो "
जोया -"करीम ने मुझे उनके साथ मिलने का अवसर दिया उसके बदले में मुझे 20 लाख रुपये भी दे रहे थे जिसके बदले में मुझे IB में रहकर उनका काम करना था पर मैंने उसको ठुकरा दिया दो दिन तक कोई बात नहीं हुई हमारी तीसरे दिन करीम का फोन फिर आया मैंने फोन नहीं उठाया जिस पर उसका मैसेज आया जिसमें लिखा था की वो मुझे 50 लाख रुपये देंगे बस एक काम करना होगा पहले मुझे बहुत गुस्सा आया पर जब मैंने इस बात पर ध्यान दिया साथ ही थोड़ा सोचा तो लगा एक ही तो काम है और फिर पचास लाख कम तो नहीं थे मेरी ईमानदारी के लिए अगर काम के बाद किसी को शक नहीं हुआ तो IB में ही रहुंगी और अगर शक हुआ भी तो पचास लाख इतने रुपये थे की मैं दुनिया के किसी भी कोने में रह सकती थी। दो दिन मैंने सोचा और उसी दिन फिर करीम का फोन आया जिस पर मैंने हां कह दिया पर मैंने शर्त रखी कि पैसे मैं पहले लूंगी दो दिन बाद ही मेरे घर एक आदमी आया रुपये लेकर पर मैं और तरुण केस की वजह से घर पर नहीं थे लेकिन जब पहुंचे तो पड़ोसी ने तरूण के सामने आकर ही बताया कि एक आदमी हमें ढूंढ रहा था जिस पर शायद तरूण को शक हुआ क्योंकि हमारे रिश्तेदारों का तो सवाल ही नहीं था पर मैंने बात को बहुत घुमाया और शायद तरुण मान भी गया था। अगले दिन वह आदमी फिर आया रूपयों का बैग लेकर किसमत से उस दिन तरूण अकेला गया और वो बैग मुझे मिल गया जब मैंने इतने सारे रुपये देंगे तो खुद संभाल नहीं पाई और सब नोटों को निकाल कर उनको गिन ने लगी और इसमें ये भी ध्यान नहीं रहा की अवनी उसी वक्त स्कूल से वापस आती है और उसने मेरी इस हरकत को देख लिया पहले मैं बहुत घबरा गई थी पर फिर लगा बच्ची है वो लेकिन तरुण के साथ खेलते वक्त उसने ये बात उसको बता दी जब तरूण ने मुझे पूछा तो एक फिर मैंने बात को घुमा दिया "
अनिल -"तरुण कोई बच्चा तो नहीं था जो इतनी आसानी से तुम्हारी बातों में आ जाए?"
इस बात पर जोया कुटिलता से मुस्कुराई और फिर कामना की तरफ देखकर बोली......
जोया -"आपको पता है इस दुनिया में सबसे भोला जीव कौनसा होता है मैडम ?"
कामना -"बात मत घुमाओ सिर्फ जबाब दो या फिर कहानी आगे बढ़ाओ "
जोया -"अरे आप नाराज क्यूं होती है मैं बताती हूं आपको इस दुनिया में सबसे मासूम जीव होता है 'प्यार में पागल आदमी' ....बिचारा तरुण प्यार करता था मुझसे और प्यार पर शक थोड़ी किया जाता है एक आंसू बर्दास्त नहीं था मेरी आंखों में, फिर सच छुपाने के लिए उस दिन तो मैं बहुत रोई थी "
जोया की बात पूरी होते ही एक दम से वहां शांति छा गई....
"लगता है आगे की कहानी नहीं सुननी कोई बात नहीं मैं सुना देती हूं भले ही उस रात में एक बार फिर सच गई पर शायद तरुण को शक हो गया था। पर उसी रात तरुण मुझे एक केस से जुड़ी लीड दी जिसमें हमको पता चल गया था की कौन कौन है जो टेररिस्ट को फंडिंग में मदद कर रहा है जिस पर मेरे दिमाग में एक और आईडिया आया और मैंने तरूण और अवनी को बहार गार्डन में खेलने भेज दिया और करीम को फोन लगाकर कहा कि मुझे केस से जुड़ी बात पता लगी तो उसने कहा बीस लाख रुपये और देगा पर तरुण को मारना होगा मैंने तुरंत हां कर दी और करीम से एक ब्लास्ट करने के लिए बोम मांगा और साथ ही जो काम मुझे करना था उसकी जानकारी भी लेकिन जो काम मुझे करना था उसको फोन पर सुनने से मना किया कहा कि बोम के साथ ही कागज पर लिखकर भेजें लेकिन अरेबिक भाषा में क्योंकि कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी मैं दो घंटे बाद ही ठीक रात को 11 बजे वो आदमी मेरे घर के बहार था मैंने उस कागज से काम को पढ़कर वहीं गार्डन में फाड़कर फेंक दिया और बोमब को छुपाकर भीतर ले गई। और तरूण से कहा कि हमें जब केस के बारे में सब पता चल चुका है तो घर खाली कर देना चाहिए जिस पर उसने कहा कि कामना मेम से बात करनी होगी पर फिर बात तो मेरी उसको मान नी ही थी मैंने उसको ऊपर कमरे में कपड़े पैक करने को कहा और नीचे आकर मैंने अपना रुपये वाला बैग निकाला अवनी को गार्डन में भेजा अपने आने का बोलकर और बोम को सीढ़ियों पर फिट किया लेकिन उसको नीचे बुलाना था तो बस एक बार नकली चीख निकाली और खुद पीछे वाले गेट से निकल गई जिसके बाद शायद वो मेरी चीख सुनकर सब कुछ भूलकर दौड़ते हुए नीचे आया होगा और ठीक सबसे आखरी सीढ़ी पर आकर बोम के साथ उड़ गया होगा ।"
कामना -"शर्म आनी चाहिए तुम्हें जोया ".......जोया अपनी बात खत्म करके हंसने लगी जिस पर कामना ने चिल्लाकर कहा ।
अनिल -"उस कागज पर क्या लिखा था और घर से फरार होकर कहां गई तुम?"
जोया -"मेरे हाथ खोल़ो फिर बताउंगी ..........टेंशन मत लो भागने नहीं वाली "
अनिल ने राजीव को हां कहा और राजीव ने जोया के हाथ खोल दिए ।
जोया -"मै जैसे ही घर से निकली तो करीम से बात की और वो मुझे लेने आ गया जिसके बाद मैं उसके घर गई वहां जाते ही उसने और बीस लाख मुझे दिए लेकिन कहा कि वो काम हमको कल(ये कल आज ही है जिस दिन ये कांड हुआ)ही करना होगा मैंने पूछा तो उसने बताया कि अगर हमको हमारा काम करना है तो तुम लोगों का ध्यान बांटना होगा और उसके लिए हमें जरिया मिला सोने के तौर पर इस लिए करीम ने मेरे फोन से अपने साथी को फोन किया और बात की जिससे तुम लोग को पता चले कि हम सोना आज चुराने वाले हैं लेकिन हमारा असली काम था हमारे भाईयों को बचाना जो आज ***** जेल से शिफ्ट होकर**** जेल जाने वाले थे हमारा प्लान सफल हो गया था पर ना जाने कहां से ये दोनों (मयंक और राजीव)आ गए और हम कामयाब नही हो सके।"
अनिल -"करीम कहां है इस वक्त?"
जोया -"करीम को छोड़ो मैं आप लोगों को राज की बात बताती हूं..... तुम लोगों को लग रहा होगा की ये सब मैं तुम्हें अवनी की वजह से बता रही हूं पर ऐसा नहीं है मुझे उससे कोई मतलब नहीं है और रही बात करीम की तो वो तो मैं नहीं बताने वाली "
अपनी बात खत्म करते ही जोया का हाथ अपने सीने की तरफ जाने लगा जिसको देखते ही राजीव का दिमाग ठनका और वो जोया की तरफ बड़ा पर जब तक वह उसके पास पहुंचता जोया अपने गले में लटके लोकेट जो कुछ कैपसूल जैसा दिखता था उसे अपने दांतों से दबा चुकी थी कामना ने जैसे ही ये देखा तो उसने तुरंत उसका हाथ पकडना चाहा पर दांत का जोर पड़ते ही वह कैपसूल फूट गया और जहर जोया के मुंह में जा चुका था जो यकीनन उसको मिनट के भीतर ही मारने वाला था ।
एकदम से कमरे का माहौल बदल चुका था सब अचंभित थे उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था की ये हो जाएगा उन्हें लगा था की जोया की मदद से वह करीम तक पहुंच ही जाएंगे पर अब जोया भी इस दुनिया में नहीं थी ।
जोया को तुरंत अस्पताल भेजा गया पर अभी भी कामना और अनिल के मन में सवाल थे पर इस बार जबाब मयंक और राजीव को देना था।
कामना -"मयंक और राजीव तुम दोनों वहां कैसे पहुंचे?"
राजीव -"मयंक का मन नहीं मान रहा था की बात सिर्फ सोने तक की है इस वजह से हमने उस घर में द्वारा जाने का सोची क्योंकि सोने को बचाने के लिए पापा अपनी टीम के साथ जा रहे थे और जब दोबारा हम उस घर में पहुंचे तो मयंक को वह कागज फटा हुआ मिला पर उस पर जो कुछ भी था हमारी समझ से परे था मैंने तो सोचा यूं होगा पर इसने कहा कि एक बार जानना तो है इस क्या लिखा है और हम उस कागज को लेकर लाइब्रेरी गये वहां जब हमने पढ़ा तो उस पर लिखा था
"जोया हम तुमसे सिर्फ ये चाहते हैं की हमारे भाई जो इस वक्त**** जेल में हैं उनको दूसरी जगह सिफ्ट किया जा रहा है तुम उनको बचा सकती हो सिर्फ तुम और जब ये काम हो जाएगा फिर तुम बिल्कुल पहले की तरह हमसे अंजान हो जाओगी"
जब हमने ये पढ़ा तो तुरंत पापा को फोन किया ये पता लगाने की कब ये लोग सिफ्ट होंगे और पापा ने बताया कि आज ही ये काम होना है तो हम पहुंच गए और उसके बाद की सारी घटना राजीव ने कहा सुनाई।
कामना -"मयंक और राजीव तुम दोनों नहीं जानते तुमने कितना बड़ा काम किया है मैं जरूर तुम दोनों को ईनाम दिलवाऊंगा और कल के पेपर में दोनों का नाम फ्रंट पेज पर होगा।"
मयंक -"बिल्कुल नहीं मैडम मैं यहां इंदौर अपना नाम न्यूज पेपर में छपावाने नहीं आया हूं बल्कि एक तरह से लोगों से बचकर रहने आया हूं और ये मैं कतई नहीं चाहता की मेरा नाम पेपर में आए हां आप ये सारा क्रेडिट राजीव को दे सकती है "
राजीव ने मयंक की बात सुनकर बिना किसी की परवाह किए एक मुक्का मयंक में जड़ दिया और कामना की तरफ घूमते हुए कहा।
"जब किया ही नहीं तो क्रेडिट कैसा और मैं अपनी जिंदगी में कोई आफ़त नहीं चाहता मिस मेरे पास पहले से ही मयंक नाम की मौजूद है आप और पापा इसके सबसे सही हकदार है और आप लोगों का नाम ही आना चाहिए "
कुछ और बात करने के बाद मयंक और राजीव यहां से निकल चलें मयंक की बाइक लेकर जो रात को अनिल का पीछा करते वक्त लिए थे और यहां से निकलते वक्त टाइम रात के आठ हो रहा था मयंक ने बाइक पर बैठते हुए अपना फोन चालू किया तो उसकी स्क्रीन पर 15 मिस्ड कॉल और बीस के आस पास मैसेज थे जिसमें से आधे साक्षी के और रोमा के घर वाले नंबर के थे उसने मैसेज में बता दिया कि वह अनिल के साथ है और कल ही आएगा और एक बार फिर फोन को बंद कर दिया ।
***********
"यार मैंने तो सुना था प्यार से बढ़कर इस दुनिया में कुछ नहीं पर तूने देखा जोया ने अपने चाहने वाले को बीस लाख रुपये के लिए मार दिया तूने देखी थी ना लास तरूण की प्यार करने का नतीजा कितना बुरा मिला उसको पैर कहीं तो शरीर कहीं चिथड़े उड़ गये थे उसके शरीर के ".......... राजीव ने Kingfisher लिखी उस बोतल से एक घूंट पीते हुए कहा।
अनिल के यहां से निकलते ही दोनों एक ढाबे पर पहुंचे थे और वहां पर खाना खाने के बाद राजीव ने बाइक ठेके पर रोक कर छः ठंडी बीयर ली और साथ ही कुछ खाने के लिए भी चिप्स बघेरा मयंक को राजीव ने ही पहली बार घर पर बीयर टेस्ट कराई थी और उसके बाद आज राजी हुआ था पीने के लिए।
"तेरी तरह ही कोई दूसरा होगा जिसे लगता होगा पैसा प्यार से ज्यादा जरुरी है जैसे जोया थी .....वहीं मैं ये मानता हूं की इस दुनिया में कोई भी चीज या इंसान सबसे ऊपर है नहीं क्योंकि देख अगर मैं प्यार को इस दुनिया की सबसे अनमोल चीज बताता हूं तो फिर शायद जो गरीब और अनाथ इस दुनिया में हैं वो नहीं होते .....जाने कितने ऐसे होंगे जो अपने सपने छोड़कर बस इस लगन में जी रहे हैं किसी तरह उनका परिवार सुखी रहें कितने लोग हैं जो अपने प्यार को दुनिया के सामने इसलिए नहीं मान सकते क्योंकि अगर प्यार जग जाहिर हुआ तो फिर शायद उन्हें घर को छोड़ना होगा पर सिर्फ प्यार के भरोसे तो छोड़ नहीं सकते ना क्योंकि घर छूटा तो परिवार छूटा फिर खाना कौन खिलाएगा और जब भूख लगेगी तो प्यार याद थोड़ी आएगा ........
मैंने बहुत से लोग देखे हैं जो अपनी कहानियां सुनाते हैं की बचपन में ही प्यार हो गया था और जबसे ही साथ हैं अब उस लड़के को कौन बताए कि उसके मन में प्यार इसलिए आया क्योंकि जो प्यार के अलावा चीजें थीं जैसे रहने के लिए छत खाने के लिए खाना सोने के लिए बिस्तर वहीं जब वो लड़का प्यार कर रहा होगा दूसरी तरफ एक दूसरा लड़का होगा जो सुबह जागने के साथ ही निकल जाता है कुछ ऐसे सामान की तलाश में जिसको बेचकर वो दो दाने अपने परिवार को खिला सके उसको प्यार क्यूं नहीं हुआ क्योंकि उसके मन में प्यार आता उससे पहले रहेगा कहां उसकी चिंता आ गई, खायगा क्या उसकी चिंता आ गई तो अगर इस हिसाब से देखा जाए तो प्यार एक फालतू चीज महसूस होती नजर आती है
वहीं अब दूसरे पहलू में चलते हैं जहां बड़ी बड़ी संपत्ति हैं और उन संपत्तियों के मालिक पर अफसोस की बात ये है की मालिक का परिवार उस संपत्ति को बचाने के चक्कर में ही स्वर्ग सिधार गया और उसी मालिक के घर की बगल से एक घर बना है जिसमें दस लोग रहते हैं दादा दादी पापा मां चाचा चाची और चार भाई बहन अब जब भी वो अमीर आदमी अपनी सबसे महंगी गाड़ी में बैठ कर उस घर से गुजरता होगा तो उसको वो सारा पैसा पानी जैसा लगता होगा ।
राजीव -"चल मानी तेरी बात पर अगर दोनों द्रष्टिकोंण में कुछ ना कुछ तो बड़ा है ना गरीब के लिए पैसा और अमीर के लिए प्यार"
मयंक -"हाहाहा अच्छा अगर ऐसा है तो फिर साधू संत फकीर है वो क्या है उनके लिए तो ना पैसा मायने रखता ना प्यार बस कुछ मायने रखता है तो मन की शांति जिसके लिए कितने सालों तक बिना किसी परिवार , प्यार और संपत्ति के रहते हैं "
राजीव -"चल मानी तेरी बात तो फिर प्यार और पैसे से ऊपर मन की शांति हुई ना "
मयंक -"अगर मन की शांति सबसे ऊपर होती तो क्यूं कई साधू जो मन की शांति होने पर भी समय से पहले भगवान को पाना चाहते हैं "
राजीव -"तो भगवान सबसे ऊ
पर है ये तो मानेगा "
मयंक -"पर भगवान तो कहते हैं इंसानियत ही मायने रखती है इस दुनिया में उससे बढ़कर कुछ नहीं जो हमें धर्म में रहना सिखाती है "
"भाग भोसडीके बीयर पीकर जो हल्का हल्का सुरूर चढ़ा वो सब छु मंतर हो गया "........ राजीव ने मयंक को लात मारते हुए कहा।
"ठीक है फिर मैं चला "...... मयंक ने हंसते हुए कहा।
"कहां चला साले बैठ चुपचाप "...... जैसे ही मयंक जाने लगा तो राजीव ने उसको पकड़ते हुए कहा।
और फिर एक बार इनकी ये शाम आबाद होने लगी।.........
Awesomeupdate bhai.
Lagta hai dhisum-2 hone Wali Hai
Waah kya baat hai
Bhai bohot badhiya update tha. Per flash back ahura reh gaya?
Bhai bohot badhiya update tha. Per flash back adhura reh gaya?
Shandaar update. Dumdaar lekhan Kushal or interesting kahani. Bas is se jyada nahi bol sakta moda.![]()
Bohot khoob bhai. Bojot hi kamuk update. Ola-vrasti wale bhaiya.
Or ye update ke ant me kon mahasay aaye the Vishnu se milne ye bhi Janna chahenge.
Awesome![]()
![]()
Bohot khoob bhai. Bojot hi kamuk update. Ola-vrasti wale bhaiya.
Or ye update ke ant me kon mahasay aaye the Vishnu se milne ye bhi Janna chahenge.
Awesome![]()
Awesome update and great writing![]()
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Great update and awesome story
Bas Manvi or uske pariwar ke liye dukh hua.
Kahi na kahi mayank uska dosi hai.
Gayab ka update tha boss. Sakai ko bhi to Janani me diwani hona hai bhai bhavnao ko samjho.
️
️
️
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️
Great and awesomeupdate
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Anil kya cheers hai bhai. Aapne lagbhag saare hi carecter chupaa rakhe hai
Yahi Maine bhi soch.?? Ki ye update mujhe se Kab cahoot gaya
Aapke saare comments padhe Raj bhai thanks for the wonderful reviewsAwesome update![]()
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Lagta hai mayank ke pa's kafi jigra hai. bina soche Bhide gaya.

Nice update.....Update 33
"चट्टटटाक्ककक"........इस भयंकर थप्पड की आवाज अचानक से शांत हुए वातावरण में फेल गई जो की राजीव ने बंदूक संभाल रही इस लड़की को मारा था।
यही वो लड़की थी जो गाड़ी से सबसे पहले उतर कर पुलिस वैन के दूसरी तरफ जा पहुंची थी और मयंक ने जब टक्कर मारी तो मयंक के पीछे की तरफ से इसने ही गोली चलाई पर ठीक गोली चलाते वक्त ही राजीव की लात इस लड़की के हाथ पर लगी जिस वजह से गोली अपने निशाने से चूकती हुई ट्रेक्टर के टायर में जा फसी और खुद को संभाल कर ये लडकी बंदूक इस बार राजीव की तरफ उठती उससे पहले ही ये थप्पड़ पड चुका था।
अब तक जो एकाद पुलिस वाले वाले छुपकर गोली चलाने का प्रयास कर रहे थे वे सामने आते हुए उन आतंकियों की तरफ बढ़ गये जो दो टाटा सूमो की बीच में और नीचे दबे हुए थे मयंक ने जब गोली चलने की आवाज सुनी तो तुरंत पीछे घूमा और जो चेहरा पीछे देखा तो फिर बस मुंह से बस एक ही शब्द निकला।
"******".....(सोचो कितना गन्दा शब्द होगा जो मैं यहां भी नहीं लिख रहा )
मयंक तुरंत नीचे उतरा..... जब तक राजीव अपनी बंदूक कमर पर ठूंसता हुआ उस लड़की की बंदूक लेकर उसके दोनों हाथों को पकड़ चुका था ।
"देख रहा है रज्जो(राजीव )यहां बहनचो इसकी चिंता में दिमाग फटा जा रहा था की कहां होगी किडनैप तो नहीं हो गई मर तो नहीं गई और ये देवी जी मुझ पर ही गोली चला रही है "....... मयंक ने उस लड़की के चेहरे को घोर से देखते हुए कहा जैसे यकीन ही नहीं हो रहा था।
"जोया जी सच कह रहा हुं जब पापा ने आपकी फोटो दिखाई थी तो सोचा था आपको बचाकर इंप्रेस करूंगा और बिहा रचाउंगा पर आपने ने तो दिल तोड दिया मेरा "......... राजीव ने जोया के हाथ को थोड़ा और मोड़ते हुए कहा।
"छोड़ो मुझे मैं जानती हूं तुम दोनों को..... तुम्हारी वजह से हमारा इतना अच्छा प्लान फेल हुआ है सजा तो मिलेगी ".......जोया ने खुद को छुड़ाने की कोशिश करते हुए कहा।
जोया की बात सुनकर मयंक और राजीव ने एक दूसरे की आंखों में देखा जैसे एक दूसरे से कह रही हों इसको तो मैं ही मारुंगा।
पर तब ही मयंक का फोन बजा और वो उसको हाथ में पकड़ता हुआ रोड के किनारे की तरफ बढ़ गया वहीं राजीव और जोया की तरफ पुलिस वाले आने लगे जो राजीव से बात करने लगे जैसे उससे उसका परिचय मांग रहे हों
"मयंक यार तू कह रहा था वैसा कुछ नहीं था पर यहां ये लोग सोना चुराने ही आए थे और हमने इनको आसानी से पकड़ भी लिया है गिनती के छः थे ।".......... फोन उठते ही अनिल ने मयंक से कहा।
"चाचा यहां ****रोड पर तुम्हारा ये बेटा मरते बचा है आ जाओ जल्दी से........और हां जरा इन पुलिस वालों को बोलो जब तक आप यहां नहीं आते बकचोदी ना करें"......... मयंक भले ही अनिल से बात कर रहा था पर उसकी नजर बराबर उन पुलिस वालों पर थी जो राजीव से बातचीत या शायद पूछताछ कर रहे थे ।
जिसके बाद उस दो सितारा अफसर को फोन थमाते हुए मयंक ने बात करने के लिए कहा और एक पुलिस वाले से जोया को पकड़ने का कहा ।
वहीं जब उस पुलिस वाले की अनिल से बात हो गई तो वो मयंक और राजीव से बात करने लगा बड़ा ही समझ रखने वाला था जिसने बिना किसी परेशानी के ही कोपरेट किया और तुरंत ही उन लोगों को गाड़ियों के नीचे से निकल लिया जिसमें से एक कम घायल हुआ वहीं दो गहरी चोट वाले थे और बाकी सब स्वर्ग सिधार चुके थे जिनमें दोनों गाड़ियों के ड्राइवर सहित गाड़ी से लगकर खड़े सब उपद्रवी शामिल थे ।
बात करने के पच्चीस मिनट के भीतर ही अनिल यहां मौजूद था और इस बार उसके साथ और भी लोग थे जो साब सिविल ड्रेस में IB के एजेंट ही रहे होंगे इन लोगों के आने के कुछ सेकंड बाद ही यहां एंबुलेंस भी आ चुकी थी जिसमें उन सब को भेजा गया और एंबुलेंस के साथ ही कुछ सिपाही और तीन एजेंट भेजे गये ।
"हुआ क्या है यहां मयंक और तू ठीक है ना कुछ हुआ तो नहीं?" मयंक और राजीव को गहनता से देखते हुए अनिल उनके पास आते हुए कहा।
"अरे चाचा मेरी छोड़ो आओ मैं आपको एक चीज दिखाता हूं "......ये कहता हुए मयंक ने अनिल को जब जोया के सामने खड़ा किया तो उससे कुछ ना कहते बना और ना करते।
"जोया !!!......हुआ क्या है यहां"........ अनिल ने कहा ।
राजीव -"पापा पहले आप मिस कामना को बुलाओ यहां "
अनिल -"वो आ रही है यहां मेरी रास्ते में बात हुई उनसे जब तक मुझे तुम लोग सब कुछ बताओ "
जिसके बाद राजीव ने सब अनिल को बताया अनिल कुछ कहता उससे पहले ही एक गाड़ी यहां आकर रुकी और ड्राइविंग सीट से कामना इनकी तरफ ही आती हुई दिखाई दी जब उन्होंने भी जोया को देखा तो उनका हाल भी कुछ अलग नहीं था । जिसके बाद उन्हें सब बताया गया।
********
"बोलो भी जोया मेरे गुस्से का इंमतिहान मत ल़ो"......कामना ने जोया के मुंह को कस के पकड़ते हुए कहा।
जिस पर जोया के मुंह पर एक मुस्कान आ गई जैसे वो कामना का मज़ाक़ बना रही हो क्योंकि वहां मयंक और राजीव को धमकी देने के बाद से उसने मुंह नहीं खोला था।
"अगर तुमने अब कुछ नहीं बोला तो तुम तो मारी जाओगी ही साथ में अवनी भी तुम्हारे साथ जाएगी"....... कामना ने गुस्से में आकर ये कह दिया और साथ ही अपनी बंदूक जोया के माथे पर रख दी।
"ठीक है बताती हूं.....पहले पानी पिलाओ"........जोया ने इतना कहना था की कामना ने तुरंत अपने एक साथी को इशारा किया और जोया को पानी पिलाने के बाद सब उसको घूरने लगे जहां राजीव और मयंक एक टेबल के सहारे खड़े थे वहीं कामना ठीक जोया के सामने कुर्सी पर बैठी थी अनिल अभी एक्सिडेंट को हैंडल कर रहा था वो भी अंदर आता हुआ एक कुर्सी पर बैठ गया।
अपने आप को ऐसे घूरता पाकर जोया ने एक लंबी सांस छोड़ी और बोलना शुरू किया -
"आज से ठीक दस दिन पहले मुझे एक टेक्स्ट मैसेज आया जिसमें लिखा था की ******* पार्क के गेट पर मिलो मेरे पास टेरर फंडिंग से रिलेटेड जानकारी है।.......जब मैं वहां पहुंची तो मेरी मुलाकात करीम से हुई"
अनिल -"कौन करीम ?"
जोया -"जिसकी आवाज आप लोगों ने मेरे फोन पर सुनी जो की हमारी ही साज़िश थी जिससे आप लोगों का पूरा ध्यान सोने पर केंद्रित हो सके"
कामना -"आगे बोलो "
जोया -"करीम ने मुझे उनके साथ मिलने का अवसर दिया उसके बदले में मुझे 20 लाख रुपये भी दे रहे थे जिसके बदले में मुझे IB में रहकर उनका काम करना था पर मैंने उसको ठुकरा दिया दो दिन तक कोई बात नहीं हुई हमारी तीसरे दिन करीम का फोन फिर आया मैंने फोन नहीं उठाया जिस पर उसका मैसेज आया जिसमें लिखा था की वो मुझे 50 लाख रुपये देंगे बस एक काम करना होगा पहले मुझे बहुत गुस्सा आया पर जब मैंने इस बात पर ध्यान दिया साथ ही थोड़ा सोचा तो लगा एक ही तो काम है और फिर पचास लाख कम तो नहीं थे मेरी ईमानदारी के लिए अगर काम के बाद किसी को शक नहीं हुआ तो IB में ही रहुंगी और अगर शक हुआ भी तो पचास लाख इतने रुपये थे की मैं दुनिया के किसी भी कोने में रह सकती थी। दो दिन मैंने सोचा और उसी दिन फिर करीम का फोन आया जिस पर मैंने हां कह दिया पर मैंने शर्त रखी कि पैसे मैं पहले लूंगी दो दिन बाद ही मेरे घर एक आदमी आया रुपये लेकर पर मैं और तरुण केस की वजह से घर पर नहीं थे लेकिन जब पहुंचे तो पड़ोसी ने तरूण के सामने आकर ही बताया कि एक आदमी हमें ढूंढ रहा था जिस पर शायद तरूण को शक हुआ क्योंकि हमारे रिश्तेदारों का तो सवाल ही नहीं था पर मैंने बात को बहुत घुमाया और शायद तरुण मान भी गया था। अगले दिन वह आदमी फिर आया रूपयों का बैग लेकर किसमत से उस दिन तरूण अकेला गया और वो बैग मुझे मिल गया जब मैंने इतने सारे रुपये देंगे तो खुद संभाल नहीं पाई और सब नोटों को निकाल कर उनको गिन ने लगी और इसमें ये भी ध्यान नहीं रहा की अवनी उसी वक्त स्कूल से वापस आती है और उसने मेरी इस हरकत को देख लिया पहले मैं बहुत घबरा गई थी पर फिर लगा बच्ची है वो लेकिन तरुण के साथ खेलते वक्त उसने ये बात उसको बता दी जब तरूण ने मुझे पूछा तो एक फिर मैंने बात को घुमा दिया "
अनिल -"तरुण कोई बच्चा तो नहीं था जो इतनी आसानी से तुम्हारी बातों में आ जाए?"
इस बात पर जोया कुटिलता से मुस्कुराई और फिर कामना की तरफ देखकर बोली......
जोया -"आपको पता है इस दुनिया में सबसे भोला जीव कौनसा होता है मैडम ?"
कामना -"बात मत घुमाओ सिर्फ जबाब दो या फिर कहानी आगे बढ़ाओ "
जोया -"अरे आप नाराज क्यूं होती है मैं बताती हूं आपको इस दुनिया में सबसे मासूम जीव होता है 'प्यार में पागल आदमी' ....बिचारा तरुण प्यार करता था मुझसे और प्यार पर शक थोड़ी किया जाता है एक आंसू बर्दास्त नहीं था मेरी आंखों में, फिर सच छुपाने के लिए उस दिन तो मैं बहुत रोई थी "
जोया की बात पूरी होते ही एक दम से वहां शांति छा गई....
"लगता है आगे की कहानी नहीं सुननी कोई बात नहीं मैं सुना देती हूं भले ही उस रात में एक बार फिर सच गई पर शायद तरुण को शक हो गया था। पर उसी रात तरुण मुझे एक केस से जुड़ी लीड दी जिसमें हमको पता चल गया था की कौन कौन है जो टेररिस्ट को फंडिंग में मदद कर रहा है जिस पर मेरे दिमाग में एक और आईडिया आया और मैंने तरूण और अवनी को बहार गार्डन में खेलने भेज दिया और करीम को फोन लगाकर कहा कि मुझे केस से जुड़ी बात पता लगी तो उसने कहा बीस लाख रुपये और देगा पर तरुण को मारना होगा मैंने तुरंत हां कर दी और करीम से एक ब्लास्ट करने के लिए बोम मांगा और साथ ही जो काम मुझे करना था उसकी जानकारी भी लेकिन जो काम मुझे करना था उसको फोन पर सुनने से मना किया कहा कि बोम के साथ ही कागज पर लिखकर भेजें लेकिन अरेबिक भाषा में क्योंकि कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी मैं दो घंटे बाद ही ठीक रात को 11 बजे वो आदमी मेरे घर के बहार था मैंने उस कागज से काम को पढ़कर वहीं गार्डन में फाड़कर फेंक दिया और बोमब को छुपाकर भीतर ले गई। और तरूण से कहा कि हमें जब केस के बारे में सब पता चल चुका है तो घर खाली कर देना चाहिए जिस पर उसने कहा कि कामना मेम से बात करनी होगी पर फिर बात तो मेरी उसको मान नी ही थी मैंने उसको ऊपर कमरे में कपड़े पैक करने को कहा और नीचे आकर मैंने अपना रुपये वाला बैग निकाला अवनी को गार्डन में भेजा अपने आने का बोलकर और बोम को सीढ़ियों पर फिट किया लेकिन उसको नीचे बुलाना था तो बस एक बार नकली चीख निकाली और खुद पीछे वाले गेट से निकल गई जिसके बाद शायद वो मेरी चीख सुनकर सब कुछ भूलकर दौड़ते हुए नीचे आया होगा और ठीक सबसे आखरी सीढ़ी पर आकर बोम के साथ उड़ गया होगा ।"
कामना -"शर्म आनी चाहिए तुम्हें जोया ".......जोया अपनी बात खत्म करके हंसने लगी जिस पर कामना ने चिल्लाकर कहा ।
अनिल -"उस कागज पर क्या लिखा था और घर से फरार होकर कहां गई तुम?"
जोया -"मेरे हाथ खोल़ो फिर बताउंगी ..........टेंशन मत लो भागने नहीं वाली "
अनिल ने राजीव को हां कहा और राजीव ने जोया के हाथ खोल दिए ।
जोया -"मै जैसे ही घर से निकली तो करीम से बात की और वो मुझे लेने आ गया जिसके बाद मैं उसके घर गई वहां जाते ही उसने और बीस लाख मुझे दिए लेकिन कहा कि वो काम हमको कल(ये कल आज ही है जिस दिन ये कांड हुआ)ही करना होगा मैंने पूछा तो उसने बताया कि अगर हमको हमारा काम करना है तो तुम लोगों का ध्यान बांटना होगा और उसके लिए हमें जरिया मिला सोने के तौर पर इस लिए करीम ने मेरे फोन से अपने साथी को फोन किया और बात की जिससे तुम लोग को पता चले कि हम सोना आज चुराने वाले हैं लेकिन हमारा असली काम था हमारे भाईयों को बचाना जो आज ***** जेल से शिफ्ट होकर**** जेल जाने वाले थे हमारा प्लान सफल हो गया था पर ना जाने कहां से ये दोनों (मयंक और राजीव)आ गए और हम कामयाब नही हो सके।"
अनिल -"करीम कहां है इस वक्त?"
जोया -"करीम को छोड़ो मैं आप लोगों को राज की बात बताती हूं..... तुम लोगों को लग रहा होगा की ये सब मैं तुम्हें अवनी की वजह से बता रही हूं पर ऐसा नहीं है मुझे उससे कोई मतलब नहीं है और रही बात करीम की तो वो तो मैं नहीं बताने वाली "
अपनी बात खत्म करते ही जोया का हाथ अपने सीने की तरफ जाने लगा जिसको देखते ही राजीव का दिमाग ठनका और वो जोया की तरफ बड़ा पर जब तक वह उसके पास पहुंचता जोया अपने गले में लटके लोकेट जो कुछ कैपसूल जैसा दिखता था उसे अपने दांतों से दबा चुकी थी कामना ने जैसे ही ये देखा तो उसने तुरंत उसका हाथ पकडना चाहा पर दांत का जोर पड़ते ही वह कैपसूल फूट गया और जहर जोया के मुंह में जा चुका था जो यकीनन उसको मिनट के भीतर ही मारने वाला था ।
एकदम से कमरे का माहौल बदल चुका था सब अचंभित थे उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था की ये हो जाएगा उन्हें लगा था की जोया की मदद से वह करीम तक पहुंच ही जाएंगे पर अब जोया भी इस दुनिया में नहीं थी ।
जोया को तुरंत अस्पताल भेजा गया पर अभी भी कामना और अनिल के मन में सवाल थे पर इस बार जबाब मयंक और राजीव को देना था।
कामना -"मयंक और राजीव तुम दोनों वहां कैसे पहुंचे?"
राजीव -"मयंक का मन नहीं मान रहा था की बात सिर्फ सोने तक की है इस वजह से हमने उस घर में द्वारा जाने का सोची क्योंकि सोने को बचाने के लिए पापा अपनी टीम के साथ जा रहे थे और जब दोबारा हम उस घर में पहुंचे तो मयंक को वह कागज फटा हुआ मिला पर उस पर जो कुछ भी था हमारी समझ से परे था मैंने तो सोचा यूं होगा पर इसने कहा कि एक बार जानना तो है इस क्या लिखा है और हम उस कागज को लेकर लाइब्रेरी गये वहां जब हमने पढ़ा तो उस पर लिखा था
"जोया हम तुमसे सिर्फ ये चाहते हैं की हमारे भाई जो इस वक्त**** जेल में हैं उनको दूसरी जगह सिफ्ट किया जा रहा है तुम उनको बचा सकती हो सिर्फ तुम और जब ये काम हो जाएगा फिर तुम बिल्कुल पहले की तरह हमसे अंजान हो जाओगी"
जब हमने ये पढ़ा तो तुरंत पापा को फोन किया ये पता लगाने की कब ये लोग सिफ्ट होंगे और पापा ने बताया कि आज ही ये काम होना है तो हम पहुंच गए और उसके बाद की सारी घटना राजीव ने कहा सुनाई।
कामना -"मयंक और राजीव तुम दोनों नहीं जानते तुमने कितना बड़ा काम किया है मैं जरूर तुम दोनों को ईनाम दिलवाऊंगा और कल के पेपर में दोनों का नाम फ्रंट पेज पर होगा।"
मयंक -"बिल्कुल नहीं मैडम मैं यहां इंदौर अपना नाम न्यूज पेपर में छपावाने नहीं आया हूं बल्कि एक तरह से लोगों से बचकर रहने आया हूं और ये मैं कतई नहीं चाहता की मेरा नाम पेपर में आए हां आप ये सारा क्रेडिट राजीव को दे सकती है "
राजीव ने मयंक की बात सुनकर बिना किसी की परवाह किए एक मुक्का मयंक में जड़ दिया और कामना की तरफ घूमते हुए कहा।
"जब किया ही नहीं तो क्रेडिट कैसा और मैं अपनी जिंदगी में कोई आफ़त नहीं चाहता मिस मेरे पास पहले से ही मयंक नाम की मौजूद है आप और पापा इसके सबसे सही हकदार है और आप लोगों का नाम ही आना चाहिए "
कुछ और बात करने के बाद मयंक और राजीव यहां से निकल चलें मयंक की बाइक लेकर जो रात को अनिल का पीछा करते वक्त लिए थे और यहां से निकलते वक्त टाइम रात के आठ हो रहा था मयंक ने बाइक पर बैठते हुए अपना फोन चालू किया तो उसकी स्क्रीन पर 15 मिस्ड कॉल और बीस के आस पास मैसेज थे जिसमें से आधे साक्षी के और रोमा के घर वाले नंबर के थे उसने मैसेज में बता दिया कि वह अनिल के साथ है और कल ही आएगा और एक बार फिर फोन को बंद कर दिया ।
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"यार मैंने तो सुना था प्यार से बढ़कर इस दुनिया में कुछ नहीं पर तूने देखा जोया ने अपने चाहने वाले को बीस लाख रुपये के लिए मार दिया तूने देखी थी ना लास तरूण की प्यार करने का नतीजा कितना बुरा मिला उसको पैर कहीं तो शरीर कहीं चिथड़े उड़ गये थे उसके शरीर के ".......... राजीव ने Kingfisher लिखी उस बोतल से एक घूंट पीते हुए कहा।
अनिल के यहां से निकलते ही दोनों एक ढाबे पर पहुंचे थे और वहां पर खाना खाने के बाद राजीव ने बाइक ठेके पर रोक कर छः ठंडी बीयर ली और साथ ही कुछ खाने के लिए भी चिप्स बघेरा मयंक को राजीव ने ही पहली बार घर पर बीयर टेस्ट कराई थी और उसके बाद आज राजी हुआ था पीने के लिए।
"तेरी तरह ही कोई दूसरा होगा जिसे लगता होगा पैसा प्यार से ज्यादा जरुरी है जैसे जोया थी .....वहीं मैं ये मानता हूं की इस दुनिया में कोई भी चीज या इंसान सबसे ऊपर है नहीं क्योंकि देख अगर मैं प्यार को इस दुनिया की सबसे अनमोल चीज बताता हूं तो फिर शायद जो गरीब और अनाथ इस दुनिया में हैं वो नहीं होते .....जाने कितने ऐसे होंगे जो अपने सपने छोड़कर बस इस लगन में जी रहे हैं किसी तरह उनका परिवार सुखी रहें कितने लोग हैं जो अपने प्यार को दुनिया के सामने इसलिए नहीं मान सकते क्योंकि अगर प्यार जग जाहिर हुआ तो फिर शायद उन्हें घर को छोड़ना होगा पर सिर्फ प्यार के भरोसे तो छोड़ नहीं सकते ना क्योंकि घर छूटा तो परिवार छूटा फिर खाना कौन खिलाएगा और जब भूख लगेगी तो प्यार याद थोड़ी आएगा ........
मैंने बहुत से लोग देखे हैं जो अपनी कहानियां सुनाते हैं की बचपन में ही प्यार हो गया था और जबसे ही साथ हैं अब उस लड़के को कौन बताए कि उसके मन में प्यार इसलिए आया क्योंकि जो प्यार के अलावा चीजें थीं जैसे रहने के लिए छत खाने के लिए खाना सोने के लिए बिस्तर वहीं जब वो लड़का प्यार कर रहा होगा दूसरी तरफ एक दूसरा लड़का होगा जो सुबह जागने के साथ ही निकल जाता है कुछ ऐसे सामान की तलाश में जिसको बेचकर वो दो दाने अपने परिवार को खिला सके उसको प्यार क्यूं नहीं हुआ क्योंकि उसके मन में प्यार आता उससे पहले रहेगा कहां उसकी चिंता आ गई, खायगा क्या उसकी चिंता आ गई तो अगर इस हिसाब से देखा जाए तो प्यार एक फालतू चीज महसूस होती नजर आती है
वहीं अब दूसरे पहलू में चलते हैं जहां बड़ी बड़ी संपत्ति हैं और उन संपत्तियों के मालिक पर अफसोस की बात ये है की मालिक का परिवार उस संपत्ति को बचाने के चक्कर में ही स्वर्ग सिधार गया और उसी मालिक के घर की बगल से एक घर बना है जिसमें दस लोग रहते हैं दादा दादी पापा मां चाचा चाची और चार भाई बहन अब जब भी वो अमीर आदमी अपनी सबसे महंगी गाड़ी में बैठ कर उस घर से गुजरता होगा तो उसको वो सारा पैसा पानी जैसा लगता होगा ।
राजीव -"चल मानी तेरी बात पर अगर दोनों द्रष्टिकोंण में कुछ ना कुछ तो बड़ा है ना गरीब के लिए पैसा और अमीर के लिए प्यार"
मयंक -"हाहाहा अच्छा अगर ऐसा है तो फिर साधू संत फकीर है वो क्या है उनके लिए तो ना पैसा मायने रखता ना प्यार बस कुछ मायने रखता है तो मन की शांति जिसके लिए कितने सालों तक बिना किसी परिवार , प्यार और संपत्ति के रहते हैं "
राजीव -"चल मानी तेरी बात तो फिर प्यार और पैसे से ऊपर मन की शांति हुई ना "
मयंक -"अगर मन की शांति सबसे ऊपर होती तो क्यूं कई साधू जो मन की शांति होने पर भी समय से पहले भगवान को पाना चाहते हैं "
राजीव -"तो भगवान सबसे ऊ
पर है ये तो मानेगा "
मयंक -"पर भगवान तो कहते हैं इंसानियत ही मायने रखती है इस दुनिया में उससे बढ़कर कुछ नहीं जो हमें धर्म में रहना सिखाती है "
"भाग भोसडीके बीयर पीकर जो हल्का हल्का सुरूर चढ़ा वो सब छु मंतर हो गया "........ राजीव ने मयंक को लात मारते हुए कहा।
"ठीक है फिर मैं चला "...... मयंक ने हंसते हुए कहा।
"कहां चला साले बैठ चुपचाप "...... जैसे ही मयंक जाने लगा तो राजीव ने उसको पकड़ते हुए कहा।
और फिर एक बार इनकी ये शाम आबाद होने लगी।.........