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Hello Hello !! .... My reader log kaafi time hogaya kaafi saare personal reasons ki wajah so i guess ab wapas aajana chahiye 

Last edited:

wah wahhh... wah wahhh..."कर चुका हूं मैं बंद कश्ती का वो सुराख
पर आज अपनी जान बचाने का मन नहीं,
इक रोग है जो तुझ को बताना नहीं कभी
इक जख्म हैं जो तुझको दिखाने का मन नहीं।"
Update - 31
रात के करीब 12 बजे थे कि तब ही अनिल का फोन बजने लगा।
"हैलो"........अनिल ने फोन कान से लगाते हुए कहा।
"सर अभी अभी जोया का फोन चलू हुआ है और उस फोन से काॅल लगाया जा रहा है आप यहां आ जाएं ।"......... सामने से इतना कहने के साथ फोन कट गया जैसे ये फोन भी बहुत जल्दी में लगाया है।
जैसे ही सामने से अनिल ने ये सुना वो जल्दी से बिस्तर से खड़ा हुआ और अपना हुलिया ठीक करता हुआ लोवर टी-शर्ट में ही जिप्सी चालू करता हुआ घर से निकल चला ।
"क्या बात हुई और किस से"......... अनिल ने इस खंडर जैसी बिल्डिंग में आकर हेडफोन लगाए बैठे आदमी से पूछा।
"सर हुआ ये की जैसा आप ने हमसे कहा था दोनों एजेंट के फोन टेप करने है तो उसी वक्त से मैं कनेक्ट करने की कोशिश कर रहा था पर दोनों ही फोन थे जिस वजह से ना उनकी लोकेशन पता थी और ना ही उनके टेप कर सकते थे पर अभी कुछ देर पहले में जब ये सब बंद करके सोने जा रहा था तो सोचा आखरी बार और ट्राई करता हूं तो पहले तरुण का फोन चेक किया तो वहीं परिणाम था पर जैसे ही जोया के नंबर को टेप किया तो वह चालू था और तो और उससे किसी को फोन लगाया जा रहा था "........उस व्यक्ति की आंखें बड़ी मुश्किल से खुल रही थी पर उसने जिस तरह से अनिल को सब बता रहा था की वो अपनी ड्यूटी के लिए जज्बा रखता है।
"रिकोर्डिंग की"...... अनिल ने उस रेडियो जैसे उपकरण को देखते हुए सिर्फ इतना ही पूछा।
"जी सर"....... उस आदमी ने कहा इतना सुनते ही अनिल ने उसका कंधा थपथपाया और उसको सोने के लिए भेजता हुआ खुद उस कुर्सी पर बैठते हुए हेडफोन जैसे उपकरण को कान पर लगाता हुआ उस रेडियो जैसे उपकरण का एक खास बटन दबाया इसी के साथ वो रिकॉर्डिंग अनिल को सुनाई देने लगी।
(यहां जो आदमी जोया के फोन से बात कर रहा है उसको '1' और दूसरे को '2' लगाउंगा)
1 -"कैसे हो जनाब "
2-"सब खैरियत अपना बताएं"
"बस आपको इंतलआ करना था जो काम हम कल करने जा रहे हैं उससे हमारी काफी मदद हो जाने वाली है इसलिए कल की एक ग़लती हमारे मैं काम को टाल सकती है जो हमारे बोस को मंजूर नहीं होगा "
२ -"पर आपने आज इस नंबर से फोन क्यूं किया"
1 -"ये फोन उसका है जो लोगों के लिए इस दुनिया में अब मौजूद नहीं और हमारे फोन अब सुरक्षित नहीं है क्योंकि उनको हमारे मकसद के बारे में काफी खबर हो गई है कल अगर हमने काम अच्छे से किया फिर हमें काफी समय तक किसी बाहरी मदद की जरूरत नहीं होगी हम अपनी दहसत इस देश में फैला सकते हैं "
२-"बिल्कुल आप चिंता ना करें वैसे भी नोटों से काम खूब चला लिया हाहाहा "
इतना कहते ही सामने वाले ने फोन काट दिया और रिकोर्डिंग खत्म हो गई।
अनिल ने तुरंत बल्ली को फोन किया दो बार फोन ना उठने के बाद तीसरी बार में फोन उठा और उसको अपने आने की बताता हुआ अनिल उस खंडहर नुमा घर को बहार से ताला लगाता हुआ अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ गया जैसे अंदर रहने वाले उस व्यक्ति के बहार जाने का मन था ही नहीं ये अनिल जानता हो।
पर जैसे ही वो अपनी जिप्सी तक आया तो वहां राजीव और मयंक खड़े मिले।
"तुम दोनों यहां"........ अनिल उन दोनों को यहां देख हैरान था जो मयंक और राजीव ने उसके पूछने के अंदाज में देखा भी।
"अब चाचा आप आधी रात को इतनी हड़बड़ी में घर से निकलोगे तो पता तो चलना ही था और वैसे भी हम सो नहीं रहे थे I.G.I खेल रहे थे "....... मयंक ने कहा।
"फिर मेरे साथ ही आ जाते पीछा करने की क्या जरूरत थी अब जल्दी से इसको उस घर में रखो और मेरे साथ चलो "...... अनिल ने बाइक की तरफ इशारा करते हुए कहा।
कुछ देर में ही ये तीनों बल्ली के घर थे और अनिल ने जैसे ही सब कुछ बाकी सबको बताया तो मयंक ने कहा।
मयंक -"मतलब जोया जिंदा है?"
अनिल -"कहे नहीं सकते पर फोन वाले की बातें तो यही जाहिर करती है"
मयंक -"मतलब अवनी ने हमसे झूठ बोला है?"
राजीव -"यार बच्ची है वो उसको सच और झूठ का सही से अस्तित्व भी नहीं पता "
मयंक -"तो फिर ये एक साज़िश है क्यूंकि अगर जोया ब्लास्ट से पहले भागती तो तरुण उसको जाने नहीं देता और अगर कोई आदमी आया था जो जोया को ले गया तो अवनी ने हमें क्यूं नहीं बताया "
बल्ली -"बहनचोद ये चक्कर क्या है "
अनिल -"जोया के साथ क्या हुआ हम इसको बाद में सोच सकते हैं हमे उस बात पर ध्यान देना चाहिए जो उसने कहीं कल वो लोग कुछ कांड करेंगे जो हो ना हो पैसे से जुड़ा हुआ है तो हमें ये चेक करना होगा की कल शहर में कोई बड़ी डील या लेन-देन तो नहीं हो रहा "
राजीव -"लेकिन पापा इंदौर इतना छोटा नहीं है और हम कैसे ढूंढेंगे "
अनिल -"इंदौर भले ही छोटा हो या बड़ा पर वो डील बहुत बड़ी होगी और इसका पता हम नहीं लगाएंगे बल्कि वो लगाएंगे जो इस काम के लिए बने हैं सुबह छः जब बजेंगे जब हमारे पास सिर्फ बड़ी डीलों की लिस्ट होगी "
इसके बाद इन्होंने कुछ देर और कुछ बातचीत की पर मयंक का मन उस बात से बहार नहीं आ रहा था जहां जोया बची थी या किडनैप हुई थी।
इसी सोच के साथ जाने क्यों पर मयंक का मन वहां ना लगा और वो बाकी सब को वहां छोड़कर बल्ली के घर से splendor उठाता हुआ साक्षी के घर की तरफ बढ़ गया ।
उसने बहार वाला गेट खोला तो आंटी को गार्डन में टहलते हुए पाया जो खुद मयंक के लोक आने से अंचभे में थी क्योंकि मयंक ने आज रात को नहीं आने का कह रखा था उसने सबसे पहले बाइक घर के पीछे गैराज में रखी और आंटी के पास लौट कर आया ।
"आंटी आप सोई नहीं अब तक एक बजने वाला है"...... मयंक ने आंटी के पास आते हुए कहा।
रोमा -"नींद नहीं आ रही मयंक"
"और ऐसा क्यूं भला"......... मयंक की नजर जब आंटी के चेहरे से हट कर शरीर पर पड़ी तो घर के बहार लगे उस पीले बल्ब की रोशनी में पाया की वो नाइटी पहने हुए थी और उनके बड़े बड़े दुग्ध कलश बहार आने को हो रहे थे साथ ही अंगूर के दाने साफ जाहिर थे जो बहार से ही खड़े प्रतीत हो रहे थे।
आंटी -"कभी कभी अपने बारे में हमें खुद नहीं पता होता शायद आज वैसा ही मेरे साथ भी है जो मुझे खुद नहीं मालूम की नींद क्यूं नहीं आ रही "
मयंक -"ऐसा भी भला कभी हुआ है जो हमें हमारे ही बारे में ना पता हो ...... हां बस कभी कभी सच्चाई हमारी सोच से मेल नहीं खाती तो हम उसको नकारने लगते हैं और इस कसमकश में फस जाते हैं की हमारी सोच सही है या जो हमारी अंतर आत्मा कह रही है वो "
रोमा -"उम्र से बड़ी बातें भी कर लेते हो ये मुझे आज पता चला "
मयंक -"शायद उम्र से बड़े लोगों को पसंद और उनके साथ समय बिताने का नतीजा है "...
रोमा -"अच्छा.....तुम्हें पता है मयंक उस दिन के बाद मेरे साथ भी यही होता रहा जो तुमने कुछ देर पहले कहा जब भी वो पल याद आता है तो वहीं कशमकश शुरु हो जाती है...."
"मै उसके के लिए आपसे माफ़ी मांग चुका हूं आंटी "........रोमा कुछ और कहती उससे पहले ही मयंक ने ये बात कह दी जैसे वो जानता हो बात किस ओर जा रही है......
"किस बात की माफी मांग रहे हो तुम उस ग़लती की जिसमें ग़लती मेरी थी चाहत मेरी थी उस पल को मैं नहीं भूल पा रही हूं जानते हो क्यूं क्योंकि उसके बाद वो एहसास दोबारा हुआ नहीं ".......रोमा ने ये बातें जिस तरह से मयंक की आंखों में आंखें डाल कर कहीं थी मयंक रोमा की मंशा को समझ चुका था पर ना चाहते हुए भी मयंक ये रोकना चाहता था जैसे उस दिन को ना दोहराने का प्रण कर चुका हो ।
पर रोमा बात कहती हुई मयंक के इतने पास आ गई थी की उसकी सांसे मयंक के चेहरे पर आने लगी थी ।
"आंटी हमें चलना चाहिए"...... मयंक ने दूसरी तरफ मुड़ते हुए कहा पर रोमा ने खुद उसको अपनी तरफ करते हुए उसके होंठों से अपने होंठ मिला दिए।
रोमा ने जिस तरह ये शुरू किया था मयंक समझ चुका था अब उसके हाथ में कुछ नहीं है उसने रोमा की कमर को पकड़ते हुए उसका साथ देना शुरू किया और रोमा ने भी अपनी एड़ियां उचकाते हुए अपनी खुशी जाहिर की ।
"हमें अंदर चलना चाहिए"...... मयंक ने रोमा को कंधे से हटाते हुए कहा और जब जगह देखी तो वो लोग बहार वाले गेट के सामने थे जहां से कोई भी बहार वाला देख सकता था चूंकि उस गेट की उंचाई मुश्किल से चार साढ़े चार फी
ट रही होगी ।
मयंक भी अंदर जाने लगा पर तब ही उसको याद आया बहार का दरवाजा खुला था और अनायास ही नजर सामने घर पर पड़ी तो वहां भी पीले बल्ब की रोशनी थी उसी रोशनी में उसकी आंखें सामने खड़ी आंखों से टकराईं जिसके तुरंत बाद ही वो आकृति अपने घर की तरफ जाने लगी मयंक को यकीन था उसने रोमा और मयंक को किस करते हुए देख लिया था।
Nice update....Update - 31
रात के करीब 12 बजे थे कि तब ही अनिल का फोन बजने लगा।
"हैलो"........अनिल ने फोन कान से लगाते हुए कहा।
"सर अभी अभी जोया का फोन चलू हुआ है और उस फोन से काॅल लगाया जा रहा है आप यहां आ जाएं ।"......... सामने से इतना कहने के साथ फोन कट गया जैसे ये फोन भी बहुत जल्दी में लगाया है।
जैसे ही सामने से अनिल ने ये सुना वो जल्दी से बिस्तर से खड़ा हुआ और अपना हुलिया ठीक करता हुआ लोवर टी-शर्ट में ही जिप्सी चालू करता हुआ घर से निकल चला ।
"क्या बात हुई और किस से"......... अनिल ने इस खंडर जैसी बिल्डिंग में आकर हेडफोन लगाए बैठे आदमी से पूछा।
"सर हुआ ये की जैसा आप ने हमसे कहा था दोनों एजेंट के फोन टेप करने है तो उसी वक्त से मैं कनेक्ट करने की कोशिश कर रहा था पर दोनों ही फोन थे जिस वजह से ना उनकी लोकेशन पता थी और ना ही उनके टेप कर सकते थे पर अभी कुछ देर पहले में जब ये सब बंद करके सोने जा रहा था तो सोचा आखरी बार और ट्राई करता हूं तो पहले तरुण का फोन चेक किया तो वहीं परिणाम था पर जैसे ही जोया के नंबर को टेप किया तो वह चालू था और तो और उससे किसी को फोन लगाया जा रहा था "........उस व्यक्ति की आंखें बड़ी मुश्किल से खुल रही थी पर उसने जिस तरह से अनिल को सब बता रहा था की वो अपनी ड्यूटी के लिए जज्बा रखता है।
"रिकोर्डिंग की"...... अनिल ने उस रेडियो जैसे उपकरण को देखते हुए सिर्फ इतना ही पूछा।
"जी सर"....... उस आदमी ने कहा इतना सुनते ही अनिल ने उसका कंधा थपथपाया और उसको सोने के लिए भेजता हुआ खुद उस कुर्सी पर बैठते हुए हेडफोन जैसे उपकरण को कान पर लगाता हुआ उस रेडियो जैसे उपकरण का एक खास बटन दबाया इसी के साथ वो रिकॉर्डिंग अनिल को सुनाई देने लगी।
(यहां जो आदमी जोया के फोन से बात कर रहा है उसको '1' और दूसरे को '2' लगाउंगा)
1 -"कैसे हो जनाब "
2-"सब खैरियत अपना बताएं"
"बस आपको इंतलआ करना था जो काम हम कल करने जा रहे हैं उससे हमारी काफी मदद हो जाने वाली है इसलिए कल की एक ग़लती हमारे मैं काम को टाल सकती है जो हमारे बोस को मंजूर नहीं होगा "
२ -"पर आपने आज इस नंबर से फोन क्यूं किया"
1 -"ये फोन उसका है जो लोगों के लिए इस दुनिया में अब मौजूद नहीं और हमारे फोन अब सुरक्षित नहीं है क्योंकि उनको हमारे मकसद के बारे में काफी खबर हो गई है कल अगर हमने काम अच्छे से किया फिर हमें काफी समय तक किसी बाहरी मदद की जरूरत नहीं होगी हम अपनी दहसत इस देश में फैला सकते हैं "
२-"बिल्कुल आप चिंता ना करें वैसे भी नोटों से काम खूब चला लिया हाहाहा "
इतना कहते ही सामने वाले ने फोन काट दिया और रिकोर्डिंग खत्म हो गई।
अनिल ने तुरंत बल्ली को फोन किया दो बार फोन ना उठने के बाद तीसरी बार में फोन उठा और उसको अपने आने की बताता हुआ अनिल उस खंडहर नुमा घर को बहार से ताला लगाता हुआ अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ गया जैसे अंदर रहने वाले उस व्यक्ति के बहार जाने का मन था ही नहीं ये अनिल जानता हो।
पर जैसे ही वो अपनी जिप्सी तक आया तो वहां राजीव और मयंक खड़े मिले।
"तुम दोनों यहां"........ अनिल उन दोनों को यहां देख हैरान था जो मयंक और राजीव ने उसके पूछने के अंदाज में देखा भी।
"अब चाचा आप आधी रात को इतनी हड़बड़ी में घर से निकलोगे तो पता तो चलना ही था और वैसे भी हम सो नहीं रहे थे I.G.I खेल रहे थे "....... मयंक ने कहा।
"फिर मेरे साथ ही आ जाते पीछा करने की क्या जरूरत थी अब जल्दी से इसको उस घर में रखो और मेरे साथ चलो "...... अनिल ने बाइक की तरफ इशारा करते हुए कहा।
कुछ देर में ही ये तीनों बल्ली के घर थे और अनिल ने जैसे ही सब कुछ बाकी सबको बताया तो मयंक ने कहा।
मयंक -"मतलब जोया जिंदा है?"
अनिल -"कहे नहीं सकते पर फोन वाले की बातें तो यही जाहिर करती है"
मयंक -"मतलब अवनी ने हमसे झूठ बोला है?"
राजीव -"यार बच्ची है वो उसको सच और झूठ का सही से अस्तित्व भी नहीं पता "
मयंक -"तो फिर ये एक साज़िश है क्यूंकि अगर जोया ब्लास्ट से पहले भागती तो तरुण उसको जाने नहीं देता और अगर कोई आदमी आया था जो जोया को ले गया तो अवनी ने हमें क्यूं नहीं बताया "
बल्ली -"बहनचोद ये चक्कर क्या है "
अनिल -"जोया के साथ क्या हुआ हम इसको बाद में सोच सकते हैं हमे उस बात पर ध्यान देना चाहिए जो उसने कहीं कल वो लोग कुछ कांड करेंगे जो हो ना हो पैसे से जुड़ा हुआ है तो हमें ये चेक करना होगा की कल शहर में कोई बड़ी डील या लेन-देन तो नहीं हो रहा "
राजीव -"लेकिन पापा इंदौर इतना छोटा नहीं है और हम कैसे ढूंढेंगे "
अनिल -"इंदौर भले ही छोटा हो या बड़ा पर वो डील बहुत बड़ी होगी और इसका पता हम नहीं लगाएंगे बल्कि वो लगाएंगे जो इस काम के लिए बने हैं सुबह छः जब बजेंगे जब हमारे पास सिर्फ बड़ी डीलों की लिस्ट होगी "
इसके बाद इन्होंने कुछ देर और कुछ बातचीत की पर मयंक का मन उस बात से बहार नहीं आ रहा था जहां जोया बची थी या किडनैप हुई थी।
इसी सोच के साथ जाने क्यों पर मयंक का मन वहां ना लगा और वो बाकी सब को वहां छोड़कर बल्ली के घर से splendor उठाता हुआ साक्षी के घर की तरफ बढ़ गया ।
उसने बहार वाला गेट खोला तो आंटी को गार्डन में टहलते हुए पाया जो खुद मयंक के लोक आने से अंचभे में थी क्योंकि मयंक ने आज रात को नहीं आने का कह रखा था उसने सबसे पहले बाइक घर के पीछे गैराज में रखी और आंटी के पास लौट कर आया ।
"आंटी आप सोई नहीं अब तक एक बजने वाला है"...... मयंक ने आंटी के पास आते हुए कहा।
रोमा -"नींद नहीं आ रही मयंक"
"और ऐसा क्यूं भला"......... मयंक की नजर जब आंटी के चेहरे से हट कर शरीर पर पड़ी तो घर के बहार लगे उस पीले बल्ब की रोशनी में पाया की वो नाइटी पहने हुए थी और उनके बड़े बड़े दुग्ध कलश बहार आने को हो रहे थे साथ ही अंगूर के दाने साफ जाहिर थे जो बहार से ही खड़े प्रतीत हो रहे थे।
आंटी -"कभी कभी अपने बारे में हमें खुद नहीं पता होता शायद आज वैसा ही मेरे साथ भी है जो मुझे खुद नहीं मालूम की नींद क्यूं नहीं आ रही "
मयंक -"ऐसा भी भला कभी हुआ है जो हमें हमारे ही बारे में ना पता हो ...... हां बस कभी कभी सच्चाई हमारी सोच से मेल नहीं खाती तो हम उसको नकारने लगते हैं और इस कसमकश में फस जाते हैं की हमारी सोच सही है या जो हमारी अंतर आत्मा कह रही है वो "
रोमा -"उम्र से बड़ी बातें भी कर लेते हो ये मुझे आज पता चला "
मयंक -"शायद उम्र से बड़े लोगों को पसंद और उनके साथ समय बिताने का नतीजा है "...
रोमा -"अच्छा.....तुम्हें पता है मयंक उस दिन के बाद मेरे साथ भी यही होता रहा जो तुमने कुछ देर पहले कहा जब भी वो पल याद आता है तो वहीं कशमकश शुरु हो जाती है...."
"मै उसके के लिए आपसे माफ़ी मांग चुका हूं आंटी "........रोमा कुछ और कहती उससे पहले ही मयंक ने ये बात कह दी जैसे वो जानता हो बात किस ओर जा रही है......
"किस बात की माफी मांग रहे हो तुम उस ग़लती की जिसमें ग़लती मेरी थी चाहत मेरी थी उस पल को मैं नहीं भूल पा रही हूं जानते हो क्यूं क्योंकि उसके बाद वो एहसास दोबारा हुआ नहीं ".......रोमा ने ये बातें जिस तरह से मयंक की आंखों में आंखें डाल कर कहीं थी मयंक रोमा की मंशा को समझ चुका था पर ना चाहते हुए भी मयंक ये रोकना चाहता था जैसे उस दिन को ना दोहराने का प्रण कर चुका हो ।
पर रोमा बात कहती हुई मयंक के इतने पास आ गई थी की उसकी सांसे मयंक के चेहरे पर आने लगी थी ।
"आंटी हमें चलना चाहिए"...... मयंक ने दूसरी तरफ मुड़ते हुए कहा पर रोमा ने खुद उसको अपनी तरफ करते हुए उसके होंठों से अपने होंठ मिला दिए।
रोमा ने जिस तरह ये शुरू किया था मयंक समझ चुका था अब उसके हाथ में कुछ नहीं है उसने रोमा की कमर को पकड़ते हुए उसका साथ देना शुरू किया और रोमा ने भी अपनी एड़ियां उचकाते हुए अपनी खुशी जाहिर की ।
"हमें अंदर चलना चाहिए"...... मयंक ने रोमा को कंधे से हटाते हुए कहा और जब जगह देखी तो वो लोग बहार वाले गेट के सामने थे जहां से कोई भी बहार वाला देख सकता था चूंकि उस गेट की उंचाई मुश्किल से चार साढ़े चार फी
ट रही होगी ।
मयंक भी अंदर जाने लगा पर तब ही उसको याद आया बहार का दरवाजा खुला था और अनायास ही नजर सामने घर पर पड़ी तो वहां भी पीले बल्ब की रोशनी थी उसी रोशनी में उसकी आंखें सामने खड़ी आंखों से टकराईं जिसके तुरंत बाद ही वो आकृति अपने घर की तरफ जाने लगी मयंक को यकीन था उसने रोमा और मयंक को किस करते हुए देख लिया था।
wah wahhh... wah wahhh...
Nice starting

Romanchak. Pratiksha agle rasprad update ki
Thanks for supportingNice and superb update....

Nice update
Bahot bariya update tha bhai![]()
Bahut hi badhiya update diya hai Hell Strom bhai.....
Nice and awesome update.....
ये पड़ोसन तो खबरी लगती है।
जैसा शक है, जोया शायद जिंदा है, और अगर जो है तो वो डबल क्रॉस कर रही है।
बाकी भाई अपडेट बड़े करो![]()
Great update and awesome writingbrother. Mayank fattu nahi bas thoda Sharmila hai. Thoda samay le kar ubhrega. Waise Maine uski koi or kahani bhi Padhi thi jisse Mayank or Vishnu Sharma the. Bas story ka name yad ni aaraha.?
Romanchak. Pratiksha agle rasprad update ki
Nice and superb update....
Nice update.....
Nice update.....
Sabhi updates ek se badhkar ek he Hell Strom Bhai,
Avni ne jaisa bataya us hisab se zoya mari nahi he.......ya to vo kidnap ho gayi he ya fir vo khud hi dushmano me se ek he...........
Roma aur mayank me fir ek baar relation banane wala he............lekin ye pados wali aunty pehle bhi kayi baar jhankte huye dekhi ja chuki he..................ho sakta he vo mayank apr nazar rakhne ke liye dushmano dwara bheji huyi ho
Keep posting Bhai
Thanks for always supporting me Update -32 postedNice update....

Padosi ki pehchan saamne aane hi wali hai abSabhi updates ek se badhkar ek he Hell Strom Bhai,
Avni ne jaisa bataya us hisab se zoya mari nahi he.......ya to vo kidnap ho gayi he ya fir vo khud hi dushmano me se ek he...........
Roma aur mayank me fir ek baar relation banane wala he............lekin ye pados wali aunty pehle bhi kayi baar jhankte huye dekhi ja chuki he..................ho sakta he vo mayank apr nazar rakhne ke liye dushmano dwara bheji huyi ho
Keep posting Bhai

ये बढ़िया अपडेट था। एक्शन पैक्ड।Update - 32
रात को रोमा के साथ तीन बार मिलन करने के बाद मयंक ना जाने किस सोच के साथ सुबह सात बजे एक बार फिर अवनी के पास था जैसे कुछ ना कुछ तो उससे छूट रहा है भले ही जो कुछ भी उस घर में हुआ हो कुछ ना कुछ सबुत तो मिलेगा ही जो बताएगा कि आखिर उस रात उस घर में हुआ क्या ........
मयंक ने एक बार फिर अवनी से सब कुछ सुना और शायद उन सब बातों पर गौर करने के बाद भले ही ना के बराबर हो पर कुछ तो उसको समझ आ रहा था । पर एक बार और बुलवाने के लिए उसको अवनी को बाजार ले जाकर नाश्ता करवाने का प्रोमिस किया।
"हो गई तैयार आओ चलो जल्दी"........ अवनी एक प्यारी सी फ्रोक में बड़ी ही प्यारी लग रही थी जब अवनी कमरे से बहार आई तो मयंक ने उसकी उंगली पकड़ते हुए कहा।
"इतनी जल्दी क्या है बच्चू मैं अकेले नहीं जाउंगी ".......अवनी ने उंगली खींचते हुए कहा।
मयंक -"अकेली नहीं जाउंगी से क्या मतलब है"
"मतलब ये है की मैं भी जाउंगी "......दीदी ने बहार आते हुए कहा।
इतने ही समय में अवनी और दीदी की साझेदारी बहुत अच्छी हो गई थी और मयंक ने भी बात मानते हुए दोनों को ले जाना ही ठीक समझा और जब एक घंटे बाद ये लौटे तो राजीव का फोन आ गया ।
राजीव -"जल्दी आ बल्ली चाचा के यहां बड़ी लीड मिली है"
मयंक -"15 बस आया ".......इतना कहते हुए मयंक ने फोन काट दिया और निकल चला बल्ली के घर ।
****************
"तो जैसा मैंने कहा था की मैं पता लगवाता हूं कोई बड़ी डील तो नहीं हो रही है शहर में तो मेरा शक सही निकला आज दोपहर बारह बजे लगभग 125 kg सोना इंदौर आने वाला है हो ना हो ये लोग इसी को लूटने की प्लानिंग कर रहे हैं "........ अनिल ने मयंक के आते ही उसको सब कुछ बताया ।
"हम्मम चाचा यार कुछ तो गडबड है मेरा दिल कह नहीं रहा की हम सही दिशा में जा रहे हैं पर हम इस लीड को भी नहीं नकार सकते और अब मुश्किल से दो घंटे है हमारे पास तो आप लोग जल्दी से जल्दी प्लान बनाओ क्या करना है।"
"प्लान तैयार है और अब हमें जब पता है कि क्या प्लान है उनका तो हम पुलिस की मदद भी ले सकते हैं मैं DSP आफिस जा रहा हूं अब तुम लोग फ्री हो बल्ली को लेकर चला जाउंगा मैं "....... अनिल ने मयंक के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा जैसे अब तक की मदद के लिए धन्यवाद कह रहा हो ।
कुछ देर और बात करने के बाद अनिल बल्ली और मयंक राजीव साथ ही बल्ली के घर से निकले बल्ली और अनिल जीप में और ये दोनों अनिल की जिप्सी में थे ।
"रज्जो (राजीव) गाडी उस घर की तरफ मोड़ ले "....... मैंने राजीव से कहा।
राजीव -"क्यूं "
मयंक -"अरे भोसडीके बकचोदी ना कर मन में तेरे भी है और मेरे भी एक बार और उस घर को चैक करने की इसलिए जल्दी चल अब टाइम कम बचा है ऐसा मुझे लग रहा है "
राजीव -"तूरा मेरा सच्चा आंड है साले "
इतना कहते ही गाड़ी को राजीव ने गाड़ी को उस घर की तरफ मोड़ लिया और पंजे पर दबा भी अब कुछ अधिक था।
"तू भीतर देख मैं बहार देखता हूं"...... मयंक ने राजीव से कहा ।
मयंक ने उस घर के गार्डन को अच्छे से चैक किया और जब इस बार उसने गेंदें के फूल वाली जगह को अच्छे से देखा तो कुछ लिफाफा जैसा फटा हुआ डला था चूंकि फूल काफी घने थे जो दिखता नहीं था जब तक उनको हटाकर ना देखा जाए ।
"ये क्या है साले"....... मयंक गार्डन में गली एक मेज पर उस फटे हुए लेफाफे को जोड़ रहा था उस लेफाफे के भीतर एक सफेद कागज भी था जो की कवर के साथ ही फट गया था।
"बहनचोद यो कौन सी भाषा है".......जब उस सफेद कागज के सारे हिस्से जोड़े तो उस पर किसी अलग सी भाषा में एक लाइन लिखी हुई थी ।
मयंक -"अब ये कागज ही बता सकता है कि उन लोगों का असली प्लान क्या है"
राजीव -"ये भाषा कौन सी है पता लग सकता है भाई "
"कैसे "...... मयंक ने कहा।
"चल मेरे साथ "....... राजीव ने मयंक से कहा और लगभग दौडता हुआ गाड़ी की तरफ बढ़ गया ।
मयंक भी राजीव के साथ गाड़ी में बैठ गया और अगले बीस मिनट तक गाड़ी चलती रही और जब रुकी तो सामने एक पुरानी सी बिल्डिंग थी जिस पर बड़े बड़े अक्षरों में लिखा था।
"Govt. Ahilya Centeral Library , Indore "
मयंक समझ गया और राजीव के पीछे पीछे दौड़ चला उस इमारत के भीतर .......
"हैलो सर मिस प्रिती किस सेक्शन में होगी इस वक्त ?"....... राजीव ने रिसेप्शन पर बैठ एक अधेड व्यक्ति से पूछा।
जब तक मयंक यहां तक आता राजीव उस आदमी का जबाब सुनते ही फिर दौड़ लिया और सामने बनी सीढियां जो दूसरी मंजिल पर जाती थी उन पर चढ़ने लगा मयंक ने भी उसके पीछे जाना ही ठीक समझा जबकि रिसेप्शन पर बैठे व्यक्ति ने मयंक को टोका और एंट्री कराने के लिए कहा।
"बिल्लू बकचोद एड्रेस आमपुरा जांटौली डाल देना autograph फिर कभी "........ मयंक जो पहले से ही राजीव पर गुस्सा था क्योंकि लाख पुछने पर भी उसने मयंक को नहीं बताया था की वह कहां जा रहा है और अब जगह पर पहुंच गये तो रुक नहीं रहा है इसलिए वो गुस्सा रिसेप्शन वाले पर उतर गया और खुद भी एक सीढ़ी छोड़ता हुआ दूसरी मंजिल पर पहुंच गया जहां बड़ी बड़ी बुक रखने की रैक बनी हुई थी तीन छोटी गलियों को पार करने के बाद चौथी गली में राजीव एक सुंदर सी लडकी के गले मिल रहा था ।
"अच्छा डार्लिंग सुनो एक काम है "...... मयंक जब उनके पास पहुंचा तो राजीव के मुंह से ये सुना
"आप को क्या चाहिए मिस्टर "......उस लड़की ने जब मयंक को उन दोनों के पास जाने लगा तो लड़की ने मयंक से पूछा।
"वो मेरे साथ ही है"...... राजीव ने उस लड़की से कहा जिसपर उस लड़की ने मयंक को सॉरी बोला।
"हां राजीव बताओ क्या काम था "....... प्रीति ने राजीव से कहा
राजीव -"ज्यादा कुछ नहीं एक लाइन पढ़नी है तुम्हें जो हमें समझ नहीं आ रही".....
इतना कहते ही राजीव ने मयंक को इशारा किया जैसे वो कागज मांग रहा हो। मयंक ने उस कागज को राजीव को दिया और प्रीति जिस किताब को पकड़े हुए थी उसी पर उसको जोड़कर कर लगा दिया ।
"ये तो Arabic है".......उस लड़की ने उन अक्षर की बनावट पहचानते हुए कहा।
"क्या लिखा है वो बताओ ना जानू"....... राजीव ने जिस तरह से उस लड़की को कहा था वो लड़की दुगने जोश से भर गई जो उसके चेहरे पर आई मुस्कान बता रही थी।
"रुको ... ज्यादा हार्ड शब्द मुझे भी पढ़ना नहीं आते Dictionary की मदद लेनी पड़ेगी ".......ये कहते हुए वो दौड़ते हुए गई और दो मिनट बाद एक किताब ले आई वहीं धरती पर बैठ कर उन शब्दों का मतलब ढूंढने लगी और पांच मिनट बाद जो उसने बताया तो दोनों राजीव और मयंक के चेहरे पीले पड़ने लगे ।
मयंक तो लगभग दौड़ते हुए नीचे आया वहीं राजीव वो कागज के टुकड़े लेकर उस लड़की के गाल पर किस करना नहीं भूला जब मयंक गेट के पास पहुंचा तो अब वो रिसेप्शन वाला गेट पर ही खड़ा हो गया ।
"पहले एंट्री नहीं कराई और तो और शौर शराबा कर रहे हो वो अलग फाइन .......वो बिचारा कुछ और कह पाता उससे पहले ही मयंक ने पीछे कमर से एक पिस्तौल निकाली और उस आदमी का मुंह पकड़ कर उसके मुंह में रख दी ।
"अबे चूतिए आदमी के चेहरे को पढ़ना सीख ले और साथ ही सही समय पर सही बात करना भी नहीं तो सही उम्र से पहले ही सही जगह पहुंच जाएगा "....... मयंक ने इतना कहा था की उस आदमी के पेंट से धार बहने लगी वो मुहावरा सुना ही होगा पतलून गीली होना .....
"कहे तो बताऊं"...... मयंक और कुछ कहता उससे पहले राजीव आ गया जिसने मयंक को उस से दूर किया और उसको नीचे वाले फ्लोर पर ही एक दिशा में ले चला
"पापा से पूछा मैंने वो बताने वाले हैं अभी "...... राजीव ने इतना कहा कि तब ही राजीव का फोन बजा ।
"सही कहा था राजीव अभी आधे घंटे में ठीक उसी समय जब सोना आएगा तब ही उन लोग को ***** जेल से **** जेल ले जाएंगे पुलिस वाले "........ अनिल ने जो बताया वो दोनों ने सुना चूंकि फोन का स्पीकर चालू था।
"जल्दी मैप लेकर आ इस रुट का रज्जो"......... मयंक ने कहा और एक टेबल जिस पर कुछ किताबें थीं उनको हटाकर जगह बनाने लगा वहीं राजीव भी मैप ले आया ।
"जल्दी से ****जेल से ****जेल का रुट दिखा "........ मयंक ने कहा
"देख ज्यादा बड़ा रस्ता नहीं है पर ये गांव पड़ेगा रास्ते में जिसके एक किलोमीटर पहले तक ये रोड खाली रहती उसके अलावा पूरा रुट व्यस्त रहता है तो हो ना हो यहीं कांड करेंगे।"........ राजीव ने उस मेज पर मैप रखकर सब समझाते हुए कहा।
"चल जल्दी फिर इंतजार किसका है "...... मयंक ने कहा और गाड़ी की तरफ दौड़ लगा दी इस बार रिसेप्शन टेबल खाली मिली ।
"बहनचोद ये तो हमने सोचा भी ना था "...... मयंक ने गाड़ी चलाते माफी उड़ाते हुए कहा।
इसके बाद ये लोग बात करते रहे और गाड़ी चलती रही लगभग बीस मिनट बाद ये उस गांव वाली रोड पर थे यहां जैसे ही एक मोड़ आया तो मयंक ने गाड़ी धीरे की
"गाड़ी रोक साले "...... राजीव ने मयंक के हाथ को पकड़ते हुए कहा।
मयंक राजीव के ऐसे हाथ पकड़े जाने पर हड़बड़ा गया और एक दम से ब्रेक लगा दी
"क्या है"..... मयंक ने कहा
"सामने देख कर गाड़ी चलाता तो मुझसे ना पूछता "..... राजीव ने इतना कहा
मयंक ने सामने देखा तो पुलिस की वैन जिसमें कैदियों को ले जाया जाता है वो और एक जीप को दो टाटा सूमो ने रोक रखा था वो गाड़ियां ऐसे खड़ी थी जैसे पुलिस की वैन को उन सूमो गाड़ियों ने लेफ्ट साइड से टक्कर मारी हो और अब उन गाड़ियों के गेट खुले तो दोनों में से एक एक बंदा निकला जिनके हाथों में इन थी और ऐसे ही दोनों गाड़ियों में से पांच पांच आदमी गन लेकर निकले ये सारा नजारा मयंक और राजीव लगभग 200m पीछे खड़े देख रहे थे।
तब ही दोनों आइडिया सोचने लगे क्योंकि ऐसे सीधे जिप्सी से हीरो गीली दिखाते तो दोनों में कितनी गोलियां पड़ती अंदाजा भी नहीं था वहीं पुलिस और उन मास्क पहने आदमियों में फायरिंग शुरू हो गई।
तब ही मयंक को एक तरीका सूजा और ड्राइविंग सीट से उतरते हुए वो वापस उसी सड़क पर भागने लगा जिस पर से ये लोग आ रहे थे राजीव ने उसको आवाज़ दी पर मयंक ने नहीं सुनी राजीव को समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे तो उसने अपनी कमर से बंदूक निकाली और रोड के किनारे किनारे आगे बढ़ने लगा ।
वहीं मयंक जब रुका तो एक ट्रेक्टर के पास था जो की उस मोड़ से कुछ पीछे खड़ा था पता नहीं क्या सोच रखा था उसने ट्रेक्टर की बैटरी के तार इंजन में जहां लगे थे वहां से हटाते हुए उनको दांतों से छीला और एक और जगह के तार हटाए और उस जगह बैटरी के तार लगाए तो ट्रेक्टर आवाज के साथ चालू हो गया।
मयंक ने सबसे पहले ट्रोली और ट्रेक्टर को जोड़ने वाले नाके को हटाया और ट्रेक्टर की सीट पर बैठते हुए किलच दबाकर गीयर को neutral से हटाया और "चईंचचचचच" की आवाज के साथ पहला गीयर डाला और हाथ से रेस को खोलता हुआ फुल स्पीड में आगे बड़ा दिया ।
मयंक एक मिनट के भीतर उस मोड़ पर था और ट्रेक्टर चौथे गीयर में भयंकर आवाज करता हुआ उस मोड़ से घूमकर जब उस सड़क पर आया तो पलटते हुए बचा अगर यहां मयंक स्पीड कम करता तो यकीनन गाड़ियों तक पहुंचते हुए टाइम लगा और उन गुंडों को टाइम मिलता पर ऐसा हुआ नहीं और मयंक ने उस रोड पर आते ही एक बार फिर किलच दबाया और एक गीयर उतारता हुए रेस पूरी खोल दी ट्रेक्टर और आवाज करते हुए भयंकर गयी से आगे बढ़ा ।
यहां ट्रेक्टर असंतुलित हो चुका था पर मयंक को इसकी शायद प्रवाह ही नहीं थी।
"धम्मममम ".......इस भयंकर आवाज के साथ वो ट्रेक्टर पहले खड़ी सूमो गाड़ी से टकराया और वो गुंडे जो दोनों गाड़ी के बीच थे वो इस टकराव की वजह से पहले से टकराए और दूसरी गाड़ी से जा लगे ।
वहीं गाड़ी में टक्कर लगते हुए ट्रेक्टर जैसे ही कुछ धीमा हुआ तो मयंक ने एक बार फिर गीयर उतारते हुए रेस खींच दी जिसका प्रभाव ये हुआ वो ट्रेक्टर उस पहली गाड़ी को डक्का देता हुआ दूसरी से जा लगा और दूसरी वाली गाड़ी पलटी गई जबकि पहली वाली के चिथड़े उड़ चुके थे मयंक ने ट्रेक्टर को रिवर्स गीयर में डाला और एक बार फिर गीयर चेंज करते हुए टक्कर मारी और चूंकि पहली टक्कर में आगे वाली गाड़ी पिचक सी गई थी इस बार ट्रेक्टर उस गाड़ी पर ही चड़ गया जिससे मयंक को भयंकर जटका लगा और आवाज करता हुआ बंद हो गया ।
"धआंएएए".......तब ही गोली की आवाज उस वातावरण में गूंज गई जो की मयंक की तरफ ही चली थी वो भी उसके पीछे से......
Bahut hi shaandar update diya hai Hell Strom bhai.....Update - 32
रात को रोमा के साथ तीन बार मिलन करने के बाद मयंक ना जाने किस सोच के साथ सुबह सात बजे एक बार फिर अवनी के पास था जैसे कुछ ना कुछ तो उससे छूट रहा है भले ही जो कुछ भी उस घर में हुआ हो कुछ ना कुछ सबुत तो मिलेगा ही जो बताएगा कि आखिर उस रात उस घर में हुआ क्या ........
मयंक ने एक बार फिर अवनी से सब कुछ सुना और शायद उन सब बातों पर गौर करने के बाद भले ही ना के बराबर हो पर कुछ तो उसको समझ आ रहा था । पर एक बार और बुलवाने के लिए उसको अवनी को बाजार ले जाकर नाश्ता करवाने का प्रोमिस किया।
"हो गई तैयार आओ चलो जल्दी"........ अवनी एक प्यारी सी फ्रोक में बड़ी ही प्यारी लग रही थी जब अवनी कमरे से बहार आई तो मयंक ने उसकी उंगली पकड़ते हुए कहा।
"इतनी जल्दी क्या है बच्चू मैं अकेले नहीं जाउंगी ".......अवनी ने उंगली खींचते हुए कहा।
मयंक -"अकेली नहीं जाउंगी से क्या मतलब है"
"मतलब ये है की मैं भी जाउंगी "......दीदी ने बहार आते हुए कहा।
इतने ही समय में अवनी और दीदी की साझेदारी बहुत अच्छी हो गई थी और मयंक ने भी बात मानते हुए दोनों को ले जाना ही ठीक समझा और जब एक घंटे बाद ये लौटे तो राजीव का फोन आ गया ।
राजीव -"जल्दी आ बल्ली चाचा के यहां बड़ी लीड मिली है"
मयंक -"15 बस आया ".......इतना कहते हुए मयंक ने फोन काट दिया और निकल चला बल्ली के घर ।
****************
"तो जैसा मैंने कहा था की मैं पता लगवाता हूं कोई बड़ी डील तो नहीं हो रही है शहर में तो मेरा शक सही निकला आज दोपहर बारह बजे लगभग 125 kg सोना इंदौर आने वाला है हो ना हो ये लोग इसी को लूटने की प्लानिंग कर रहे हैं "........ अनिल ने मयंक के आते ही उसको सब कुछ बताया ।
"हम्मम चाचा यार कुछ तो गडबड है मेरा दिल कह नहीं रहा की हम सही दिशा में जा रहे हैं पर हम इस लीड को भी नहीं नकार सकते और अब मुश्किल से दो घंटे है हमारे पास तो आप लोग जल्दी से जल्दी प्लान बनाओ क्या करना है।"
"प्लान तैयार है और अब हमें जब पता है कि क्या प्लान है उनका तो हम पुलिस की मदद भी ले सकते हैं मैं DSP आफिस जा रहा हूं अब तुम लोग फ्री हो बल्ली को लेकर चला जाउंगा मैं "....... अनिल ने मयंक के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा जैसे अब तक की मदद के लिए धन्यवाद कह रहा हो ।
कुछ देर और बात करने के बाद अनिल बल्ली और मयंक राजीव साथ ही बल्ली के घर से निकले बल्ली और अनिल जीप में और ये दोनों अनिल की जिप्सी में थे ।
"रज्जो (राजीव) गाडी उस घर की तरफ मोड़ ले "....... मैंने राजीव से कहा।
राजीव -"क्यूं "
मयंक -"अरे भोसडीके बकचोदी ना कर मन में तेरे भी है और मेरे भी एक बार और उस घर को चैक करने की इसलिए जल्दी चल अब टाइम कम बचा है ऐसा मुझे लग रहा है "
राजीव -"तूरा मेरा सच्चा आंड है साले "
इतना कहते ही गाड़ी को राजीव ने गाड़ी को उस घर की तरफ मोड़ लिया और पंजे पर दबा भी अब कुछ अधिक था।
"तू भीतर देख मैं बहार देखता हूं"...... मयंक ने राजीव से कहा ।
मयंक ने उस घर के गार्डन को अच्छे से चैक किया और जब इस बार उसने गेंदें के फूल वाली जगह को अच्छे से देखा तो कुछ लिफाफा जैसा फटा हुआ डला था चूंकि फूल काफी घने थे जो दिखता नहीं था जब तक उनको हटाकर ना देखा जाए ।
"ये क्या है साले"....... मयंक गार्डन में गली एक मेज पर उस फटे हुए लेफाफे को जोड़ रहा था उस लेफाफे के भीतर एक सफेद कागज भी था जो की कवर के साथ ही फट गया था।
"बहनचोद यो कौन सी भाषा है".......जब उस सफेद कागज के सारे हिस्से जोड़े तो उस पर किसी अलग सी भाषा में एक लाइन लिखी हुई थी ।
मयंक -"अब ये कागज ही बता सकता है कि उन लोगों का असली प्लान क्या है"
राजीव -"ये भाषा कौन सी है पता लग सकता है भाई "
"कैसे "...... मयंक ने कहा।
"चल मेरे साथ "....... राजीव ने मयंक से कहा और लगभग दौडता हुआ गाड़ी की तरफ बढ़ गया ।
मयंक भी राजीव के साथ गाड़ी में बैठ गया और अगले बीस मिनट तक गाड़ी चलती रही और जब रुकी तो सामने एक पुरानी सी बिल्डिंग थी जिस पर बड़े बड़े अक्षरों में लिखा था।
"Govt. Ahilya Centeral Library , Indore "
मयंक समझ गया और राजीव के पीछे पीछे दौड़ चला उस इमारत के भीतर .......
"हैलो सर मिस प्रिती किस सेक्शन में होगी इस वक्त ?"....... राजीव ने रिसेप्शन पर बैठ एक अधेड व्यक्ति से पूछा।
जब तक मयंक यहां तक आता राजीव उस आदमी का जबाब सुनते ही फिर दौड़ लिया और सामने बनी सीढियां जो दूसरी मंजिल पर जाती थी उन पर चढ़ने लगा मयंक ने भी उसके पीछे जाना ही ठीक समझा जबकि रिसेप्शन पर बैठे व्यक्ति ने मयंक को टोका और एंट्री कराने के लिए कहा।
"बिल्लू बकचोद एड्रेस आमपुरा जांटौली डाल देना autograph फिर कभी "........ मयंक जो पहले से ही राजीव पर गुस्सा था क्योंकि लाख पुछने पर भी उसने मयंक को नहीं बताया था की वह कहां जा रहा है और अब जगह पर पहुंच गये तो रुक नहीं रहा है इसलिए वो गुस्सा रिसेप्शन वाले पर उतर गया और खुद भी एक सीढ़ी छोड़ता हुआ दूसरी मंजिल पर पहुंच गया जहां बड़ी बड़ी बुक रखने की रैक बनी हुई थी तीन छोटी गलियों को पार करने के बाद चौथी गली में राजीव एक सुंदर सी लडकी के गले मिल रहा था ।
"अच्छा डार्लिंग सुनो एक काम है "...... मयंक जब उनके पास पहुंचा तो राजीव के मुंह से ये सुना
"आप को क्या चाहिए मिस्टर "......उस लड़की ने जब मयंक को उन दोनों के पास जाने लगा तो लड़की ने मयंक से पूछा।
"वो मेरे साथ ही है"...... राजीव ने उस लड़की से कहा जिसपर उस लड़की ने मयंक को सॉरी बोला।
"हां राजीव बताओ क्या काम था "....... प्रीति ने राजीव से कहा
राजीव -"ज्यादा कुछ नहीं एक लाइन पढ़नी है तुम्हें जो हमें समझ नहीं आ रही".....
इतना कहते ही राजीव ने मयंक को इशारा किया जैसे वो कागज मांग रहा हो। मयंक ने उस कागज को राजीव को दिया और प्रीति जिस किताब को पकड़े हुए थी उसी पर उसको जोड़कर कर लगा दिया ।
"ये तो Arabic है".......उस लड़की ने उन अक्षर की बनावट पहचानते हुए कहा।
"क्या लिखा है वो बताओ ना जानू"....... राजीव ने जिस तरह से उस लड़की को कहा था वो लड़की दुगने जोश से भर गई जो उसके चेहरे पर आई मुस्कान बता रही थी।
"रुको ... ज्यादा हार्ड शब्द मुझे भी पढ़ना नहीं आते Dictionary की मदद लेनी पड़ेगी ".......ये कहते हुए वो दौड़ते हुए गई और दो मिनट बाद एक किताब ले आई वहीं धरती पर बैठ कर उन शब्दों का मतलब ढूंढने लगी और पांच मिनट बाद जो उसने बताया तो दोनों राजीव और मयंक के चेहरे पीले पड़ने लगे ।
मयंक तो लगभग दौड़ते हुए नीचे आया वहीं राजीव वो कागज के टुकड़े लेकर उस लड़की के गाल पर किस करना नहीं भूला जब मयंक गेट के पास पहुंचा तो अब वो रिसेप्शन वाला गेट पर ही खड़ा हो गया ।
"पहले एंट्री नहीं कराई और तो और शौर शराबा कर रहे हो वो अलग फाइन .......वो बिचारा कुछ और कह पाता उससे पहले ही मयंक ने पीछे कमर से एक पिस्तौल निकाली और उस आदमी का मुंह पकड़ कर उसके मुंह में रख दी ।
"अबे चूतिए आदमी के चेहरे को पढ़ना सीख ले और साथ ही सही समय पर सही बात करना भी नहीं तो सही उम्र से पहले ही सही जगह पहुंच जाएगा "....... मयंक ने इतना कहा था की उस आदमी के पेंट से धार बहने लगी वो मुहावरा सुना ही होगा पतलून गीली होना .....
"कहे तो बताऊं"...... मयंक और कुछ कहता उससे पहले राजीव आ गया जिसने मयंक को उस से दूर किया और उसको नीचे वाले फ्लोर पर ही एक दिशा में ले चला
"पापा से पूछा मैंने वो बताने वाले हैं अभी "...... राजीव ने इतना कहा कि तब ही राजीव का फोन बजा ।
"सही कहा था राजीव अभी आधे घंटे में ठीक उसी समय जब सोना आएगा तब ही उन लोग को ***** जेल से **** जेल ले जाएंगे पुलिस वाले "........ अनिल ने जो बताया वो दोनों ने सुना चूंकि फोन का स्पीकर चालू था।
"जल्दी मैप लेकर आ इस रुट का रज्जो"......... मयंक ने कहा और एक टेबल जिस पर कुछ किताबें थीं उनको हटाकर जगह बनाने लगा वहीं राजीव भी मैप ले आया ।
"जल्दी से ****जेल से ****जेल का रुट दिखा "........ मयंक ने कहा
"देख ज्यादा बड़ा रस्ता नहीं है पर ये गांव पड़ेगा रास्ते में जिसके एक किलोमीटर पहले तक ये रोड खाली रहती उसके अलावा पूरा रुट व्यस्त रहता है तो हो ना हो यहीं कांड करेंगे।"........ राजीव ने उस मेज पर मैप रखकर सब समझाते हुए कहा।
"चल जल्दी फिर इंतजार किसका है "...... मयंक ने कहा और गाड़ी की तरफ दौड़ लगा दी इस बार रिसेप्शन टेबल खाली मिली ।
"बहनचोद ये तो हमने सोचा भी ना था "...... मयंक ने गाड़ी चलाते माफी उड़ाते हुए कहा।
इसके बाद ये लोग बात करते रहे और गाड़ी चलती रही लगभग बीस मिनट बाद ये उस गांव वाली रोड पर थे यहां जैसे ही एक मोड़ आया तो मयंक ने गाड़ी धीरे की
"गाड़ी रोक साले "...... राजीव ने मयंक के हाथ को पकड़ते हुए कहा।
मयंक राजीव के ऐसे हाथ पकड़े जाने पर हड़बड़ा गया और एक दम से ब्रेक लगा दी
"क्या है"..... मयंक ने कहा
"सामने देख कर गाड़ी चलाता तो मुझसे ना पूछता "..... राजीव ने इतना कहा
मयंक ने सामने देखा तो पुलिस की वैन जिसमें कैदियों को ले जाया जाता है वो और एक जीप को दो टाटा सूमो ने रोक रखा था वो गाड़ियां ऐसे खड़ी थी जैसे पुलिस की वैन को उन सूमो गाड़ियों ने लेफ्ट साइड से टक्कर मारी हो और अब उन गाड़ियों के गेट खुले तो दोनों में से एक एक बंदा निकला जिनके हाथों में इन थी और ऐसे ही दोनों गाड़ियों में से पांच पांच आदमी गन लेकर निकले ये सारा नजारा मयंक और राजीव लगभग 200m पीछे खड़े देख रहे थे।
तब ही दोनों आइडिया सोचने लगे क्योंकि ऐसे सीधे जिप्सी से हीरो गीली दिखाते तो दोनों में कितनी गोलियां पड़ती अंदाजा भी नहीं था वहीं पुलिस और उन मास्क पहने आदमियों में फायरिंग शुरू हो गई।
तब ही मयंक को एक तरीका सूजा और ड्राइविंग सीट से उतरते हुए वो वापस उसी सड़क पर भागने लगा जिस पर से ये लोग आ रहे थे राजीव ने उसको आवाज़ दी पर मयंक ने नहीं सुनी राजीव को समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे तो उसने अपनी कमर से बंदूक निकाली और रोड के किनारे किनारे आगे बढ़ने लगा ।
वहीं मयंक जब रुका तो एक ट्रेक्टर के पास था जो की उस मोड़ से कुछ पीछे खड़ा था पता नहीं क्या सोच रखा था उसने ट्रेक्टर की बैटरी के तार इंजन में जहां लगे थे वहां से हटाते हुए उनको दांतों से छीला और एक और जगह के तार हटाए और उस जगह बैटरी के तार लगाए तो ट्रेक्टर आवाज के साथ चालू हो गया।
मयंक ने सबसे पहले ट्रोली और ट्रेक्टर को जोड़ने वाले नाके को हटाया और ट्रेक्टर की सीट पर बैठते हुए किलच दबाकर गीयर को neutral से हटाया और "चईंचचचचच" की आवाज के साथ पहला गीयर डाला और हाथ से रेस को खोलता हुआ फुल स्पीड में आगे बड़ा दिया ।
मयंक एक मिनट के भीतर उस मोड़ पर था और ट्रेक्टर चौथे गीयर में भयंकर आवाज करता हुआ उस मोड़ से घूमकर जब उस सड़क पर आया तो पलटते हुए बचा अगर यहां मयंक स्पीड कम करता तो यकीनन गाड़ियों तक पहुंचते हुए टाइम लगा और उन गुंडों को टाइम मिलता पर ऐसा हुआ नहीं और मयंक ने उस रोड पर आते ही एक बार फिर किलच दबाया और एक गीयर उतारता हुए रेस पूरी खोल दी ट्रेक्टर और आवाज करते हुए भयंकर गयी से आगे बढ़ा ।
यहां ट्रेक्टर असंतुलित हो चुका था पर मयंक को इसकी शायद प्रवाह ही नहीं थी।
"धम्मममम ".......इस भयंकर आवाज के साथ वो ट्रेक्टर पहले खड़ी सूमो गाड़ी से टकराया और वो गुंडे जो दोनों गाड़ी के बीच थे वो इस टकराव की वजह से पहले से टकराए और दूसरी गाड़ी से जा लगे ।
वहीं गाड़ी में टक्कर लगते हुए ट्रेक्टर जैसे ही कुछ धीमा हुआ तो मयंक ने एक बार फिर गीयर उतारते हुए रेस खींच दी जिसका प्रभाव ये हुआ वो ट्रेक्टर उस पहली गाड़ी को डक्का देता हुआ दूसरी से जा लगा और दूसरी वाली गाड़ी पलटी गई जबकि पहली वाली के चिथड़े उड़ चुके थे मयंक ने ट्रेक्टर को रिवर्स गीयर में डाला और एक बार फिर गीयर चेंज करते हुए टक्कर मारी और चूंकि पहली टक्कर में आगे वाली गाड़ी पिचक सी गई थी इस बार ट्रेक्टर उस गाड़ी पर ही चड़ गया जिससे मयंक को भयंकर जटका लगा और आवाज करता हुआ बंद हो गया ।
"धआंएएए".......तब ही गोली की आवाज उस वातावरण में गूंज गई जो की मयंक की तरफ ही चली थी वो भी उसके पीछे से......