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Hello Hello !! .... My reader log kaafi time hogaya kaafi saare personal reasons ki wajah so i guess ab wapas aajana chahiye 

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AwesomeUpdate 17
"सब तैयारी हो गई क्या बल्ली"।....... अनिल ने बल्ली के घर पहुंच कर उससे पूछा।
ये बल्ली का घर मैंने सिटी से बहार की तरफ था और ये काभी बडा था ।
"हां अनिल सारी तैयारियां हो गई और ये रहे वो तीनों जो उस रात बच गये थे"..... बल्ली ने तीन लोगो की तरफ इशारा करते हुए कहा।
"हम्म बताया इन्होने कौन है जिसने मयंक पर हमला किया ".... अनिल ने अपनी पूरी बांह वाली आस्तीन को ऊपर चढाते हुए कहा।
बल्ली -"नहीं तूने अभी कुछ देर पहले ही फोन किया था की तीन बचे हैं इतनी जल्दी मिल गये ये कम हैं।"
"कोई बात नहीं अब बताएंगे मादर चोद "..... अनिल ने कहा और उन तीनों की तरफ बढ चला।
"बताओ किसने भेजा था तुमको उस लडके को मारने"..... पहले वाले का मुंह पकड़ते हुए अनिल ने पूछा जिस पर उसने अपनी गर्दन को दांए बांए करते हुए मना कर दिया।
"चट्ट्टटाक्क््क".......तू बता भोसडीके "...... पहले को छोड दूसरे पर थप्पड़ जडते हुए उससे पूछा।..... उसने भी मना कर दिया ।
"अरे बहनचोद तुम लोग क्या समझ रहे हो कि ये कोई खेल चल रहा है ऐसे नहीं बताओगे तुम.....ओए एक हथोडा तो लेके आ ".... अनिल ने गुस्से में खडा होते हुए कहा और फिर एक आदमी को हथोडा लाने को कहा।
और वो आदमी भी जल्दी से जाकर एक हथोडा ले आया जब तक एक आदमी से कह कर उन तीनों में से एक का मुंह बांधवा दिया जिससे चिल्लाने की आवाज जोर से ना आए।
और हथोडा आते ही उसके हाथ को पकडा और पास ही एक पत्थर पर रखते हुए हथोडा उस हाथ पर मारने उठाया तो वो आदमी अपने हाथ को छुड़ाने की कोशिश करने लगा पर अनिल जानवर टाइप आदमी था और तो और उसकी पकड इतनी मजबूत थी की वो आदमी लाख छटपटाने के बाद भी अपना हाथ थोडा सा भी ना हिला पाया ।
"धम्ममम््््"....... भयंकर आवाज हुई जब वो हथोडा उस पत्थर पर ठकराया पर पत्थर और हथोड़े के बीच में जो उंगली थी वो अब वहां नहीं थी सिर्फ खून था क्योंकि वो उंगलियां हाथ से अलग हो चुकी थी खून के छीटे अनिल पर पडने ही थे पर उसके साथ साथ अनिल के पीछे खड़े बल्ली पर पडे और वो आदमी गांड फाड चिल्लाया मतलब बहुत ज्यादा तेज मुंह बंधा होने के बाद भी उसकी चीख इतनी तेज थी उसके बाकी दो दोस्त पेंट में मूत चुके और छटपटा रहे थे वो अलग अगर उनके हाथ पांव ना बंधे होते तो अब तक वो दो किमी दूर होते
"म्मममैं मैं बताऊंगा..... मैं ".....वो आदमी जिसके हथौडा पडा था वो तो अधमरा ही हो गया था पर तब ही बाकी दो में से एक बोल पडा।
"हां भोसडीके अब तो तू बताएगा ही जब अच्छे से पूछा तो मना कर रहा था तू टेंशन मत ले उस आदमी के बारे में तो हम तेरी लास से भी पूछ ही लेते "......और इतना कहते ही एक बार फिर हथोडा चला और सीधे उस आदमी के सर में पडा और उसका सर तरबूज की तरह खुल गया और इस बार दो चीख निकली। और दोनों ही मरने वाले के साथी थे क्योंकि ये तो स्वर्ग सिधार चुका था।
"र्रररररघघुघूघू ..... रघु। नाम है उसका ".....बाकी बचे दो में से एक चिल्लाया डर से कांपते हुए।
"औ्रररृ और उसका अड्डा ****** नगर में बंद पडी वो शक्कर की फैक्ट्री है"........ पहले वाले को बोलता देख दूसरा भी अपनी जान बचाने के उद्देश्य से बोला ।
"हाहहाहहा अरे चूतियों तुम दोनों से अच्छा तो ये था कम से कम अपने मालिक के बारे कुछ बताया तो नहीं"..... बल्ली ने पास ही रखी तलवार उठाते हुए कहा और तलवार उठाकर अनिल की तरफ उचका दी ।
जिसके बाद दो बार तलवार चली और वो दोनों भी ऊपर पहुंच गए।
"यार बल्ली ये रघु नाम सुना सुना लग रहा है"....एक कपड़े से हाथ पहुंचते हुए अनिल ने बल्ली से कहा।
"हां.....सुना तो बहनचो मैंने भी है"..... बल्ली ने अपने आदमियों को इशारा किया जैसे कह रहा हो ये सब कुछ साफ करो ।
"हां.....याद आया "..... बल्ली ने कहा।
"बता कौन है".....अपने हाथ पैर पास ही बने सीमेंट के टेंक से धोते हुए अनिल ने पूछा।
"तूने उस्मानी का नाम सुना है"...... बल्ली ने पूछा।
"वो नीमच वाला ?"....... अनिल ने अपना अंदाजा बताया
"हां वही ..... उससे ही जुडा लग रहा है ये रघु और वैसे भी दो सालों से मैं इस घर से बहार ना निकला और शायद निकलता भी नहीं अगर बिष्णु भईया कहते नहीं "...... बल्ली ने जूठी मुस्कुराहट सजाते हुए कहा।
"हां भोसडीके वो तो खसम है ना तेरा उसकी बात तो मानेगा ही क्योंकि मुझे यहां आए महीना भर हो गया और मेरे कहने पर तो सिर्फ दो बार ही आया तू "...... अनिल ने बल्ली को संग लगाते हुए कहा।
बल्ली- "चल छोडना .....तू ये बता की निबटाना है रघु को "......
"आज रात को .....तू ऐसा कर अपने दो सबसे बढिया आदमी भेज फैक्ट्री में और पता लगावा की वो कितने लोग हैं मैं जब तक और इस रघु के बारे में पता लगवाता हूं और ये भी देखता हूं की ये उस्मानी से जुडा है या नहीं ".....और उसके बाद एक घंटा अनिल ने यहां गुजारा और फिर अपने आॅफिस के लिए निकल गया शाम का मिलने का कहते हुए।
*****************
"दद्दा आज बिष्णु राजस्थान में जाएगा ....".......ये व्यक्ति दद्दा के बदन की मालिश कर रहा था जब इसने बिष्णु का जिक्र किया।
"तो क्या करना है".....दद्दा ने आंखें खोलते हुए एक नजर इस आदमी को देखा और सवाल किया ।
"आप कहो तो पकड लें क्या उसको "......
"हाहाहा मुझे अच्छा लगा सुनकर की मेरे बदले की चिंता मुझसे ज्यादा तुझे है कल्लू.....पर ये इतना आसान नहीं है".....दद्दा ने आंख बंद रखे ही कहा।
कल्लू -"आप कहो तो दद्दा और फिर मुझ पर छोड दो ....वो तीन घंटे में आपके कदमों में होगा ।
दद्दा -"कदमों में आने की तो बात ही नहीं है.....अगर मैं उसको फोन करके यहां आने की कहुंगा नि तो वो निहथ्था खुद ही आजाएगा।....खैर छैड ये बता कितनी देर में निकलेगा वो "...
कल्लू -"अभी एक घंटे में जाएगा वो यहां से ".....
दद्दा -"हम्म ....ठीक है चल दिया मौका तुझे कर ले कोशिश "
अब आप पाठक गण जरा इस इलाके के बारे में कुछ और भी जान लें......तो जिस शहर में बिष्णु यानी मयंक का घर है वो मध्यप्रदेश में आता है और फिर उसी शहर से बहार निकलते ही चंबल नदी की बीहड शुरू हो जाती है जो लगभग 11 किमी. लंबी है जहां ये दद्दा का राज चलता है और इस बिहड को पार करते ही राजस्थान की सीमा लगती है। तो जब बिष्णु रोड से राजस्थान जाएगा तो उसको इस बीहड को भी पार करना होगा जहां कल्लू ने उसको पकड़ने की सोची है।
अब जैसे ही टोल से बिष्णु की गाड़ी निकली तो कल्लू तक इस चीज की खबर पहुंची जो नदी के पूल को पार करते ही सेंद लगाए बिष्णु का इंतजार कर रहा उसने रोड जो की ना के बराबर थी मतलब उस रोड पर सीमेंट से ज्यादा मट्टी मौजूद थी उस पर किलें बिछा दी जिससे वो गाड़ी रोक सकें ।
और उसके बाद उसका प्लान था की गाड़ी पर वो अपने साथियों के साथ हमला कर देगा अब चूंकि उसने दद्दा से वादा किया था कि वो
बिष्णु को जिंदा लाएगा तो बंदूक का क्या काम था और तो और जब उसको पता लगा की एक ही गाडी है तो वो और भी निश्चिंत हो गया की बिष्णु को पकड ही लेगा।.....
और लग भी ऐसा ही रहा था की बिष्णु को कल्लू आराम से पकड लेगा खैर वो वक्त भी आ गया जब बिष्णु की गाडी के टायर उन किलों पर से गुजरने जा रहे थे ........और जैसे ही गाडी के आगे का राइट साइड वाला टायर कील से गुजरा और इस सुनसान सडक पर...
"फ्फफफटट्ट्ट".......एक भयानक आवाज हुई और बिष्णु की एंबेसडर का जो नया मोडल 2003 में ही लांच हुआ था उसका पहला टायर फट गया जिसके साथ ही गाडी काबू से बहार हुई और उसकी ब्रेक लगी और कुछ दूर चल कर वो रुक गई।
पहले तो गाडी की ड्राइविंग सीट से एक आदमी बाहर निकला उसने टायर को देखा तो वो फट चुका था और तब उसकी नजर रोड पर पडी तो
पाया की वहां काभी सारी कील डली थी । और ये देखकर वो तुरंत बिष्णु की साइड बढा और वो कुछ कहता तभी रोड पर कल्लू और उसके दस साथी निकल आए और इस बार बिष्णु की तरफ का दरवाजा खुला............?
लंड मरा ना लुल्ल हुआ, चूत से निकला मूत
फिर भी तृष्णा ना बुझी,चोद दिए सब चूत "
Bhai bohot badhiya update tha. Per flash back ahura reh gaya?अध्याय - 19
"यार मेरी बात तो सुन".......जब राजीव ने मयंक को बात करते सुना और जैसे ही मयंक ने उसको देखा तो राजीव वो आइसक्रीम कप वहीं गिरा कर वापस जाने लगा तो मयंक ने पीछे से आवाज लगाई।
"आह्ह"...... जैसे ही मयंक जल्दबाजी में सीढ़ियों पर चढा तो उसकी चोट पर असर यशहुआ और दर्द की वजह से आगे बढ़ने की जगह गिर गया।
"साले तू मर जा तो बढिया है"..... जैसे ही मयंक की आवाज सुनी तो राजीव पीछे मुडा और मयंक को गिरा देखकर उसको गरियाते हुए उसकी तरफ बडा।
"अब भोसडीके भागा तो यही पटक के मारुंगा"...... राजीव जैसे ही मयंक के पास आया तो उसको पकड़ते हुए बोला।
"किधर लगी"...... राजीव ने उसकी बात नजरंदाज करते हुए पूछा।
मयंक -"लंड लगी है मेरे .....और क्या साले लडकी जैसे रूठ रहा है......बता रहा हूं सुन तो ले"
राजीव -"मैंने तो कुछ पूछा ही नहीं.....बाकी अगर तूने बताना नहीं शुरू नहीं किया तो मेरे हाथ चलने शुरू हो जाएंगे "
और दोनों दोस्त सीढ़ियों पर बैठ गये और मयंक ने जैसे ही बताना शुरू किया तब ही राजीव का फोन बजा जो कि अनिल का था।
"हां पापा"....... फोन उठाते हुए राजीव ने कहा।
अनिल -" मयंक कहां है....... उसका फोन क्यों नहीं उठ रहा"
राजीव -"पापा वो मेरे साथ ही है....उसका फोन शायद कमरे में होगा अभी हम बगीचे में बैठे हैं"
अनिल -"उसको फोन दो"
मयंक -"हां चाचा"
अनिल -"स्पीकर पर कर दे फोन और ध्यान से सुनो तुम दोनों को मारने आदमी आ रहें हैं और शायद पहुंच भी गये होंगे .... मयंक तुझे बंदूक दी थी ना मैंने जब आया था तो बस अगर लगे की बात जान पर आ गयी है तो माथे में छेद करने से कतराना मत बिल्कुल भी 20 मिनट बस बीस मिनट लगेंगे मुझे ध्यान रखना "
और अनिल का फोन कट गया .......
"और साले निशाना खराब तो नहीं हो गया तेरा यहां आकर.... चाचा ने बीचों बीच गोली देने की कही है "....... मयंक ने अपने हाथ को पीछे कमर पर ले जाते हुए कहा जैसे अपनी रिवॉल्वर निकाल रहा हो।
पर रिवॉल्वर तो थी ही नहीं.....
राजीव - तूने सेक्सी साहित्यकार का दोहा नहीं सुना क्या ?
मयंक-"चल खडा हो पहले तो रिवॉल्वर कमरे में है चलते चलते बताना"
राजीव-"तो सुन ध्यान से
"लंड मरा ना लुल्ल हुआ, चूत से निकला मूत
फिर भी तृष्णा ना बुझी,चोद दिए सब चूत "
राजीव को सहारा देकर खडा करते हुए राजीव ने दोहा सुनाया।
मयंक -"है! काव्य की गांड मारने वाले... कृपया इस दोहे की व्याख्या तो करें "
राजीव -"तो सुनो वत्स यहां कवि कहना चाहते हैं की जैसे लंड कितनी भी च* मारले पर घिसता नहीं है उसी भांति जो आदमी रुपी प्राणी जब एक चीज को करना सीख जाए तो फिर भूलता नहीं है "
अभी ये दोनों सीढियां चढने ही वाले थे अपने कमरे में जाने के लिए तब ही बडी दूर एक आवाज इनके कानों में आई
"भाई वो छोकरा जिसको अपुन ढूंढ रहे हैं "
ये आवाज सुनते ही मयंक और राजीव ने अपनी गर्दन आवाज की तरफ घुमाई तो नौ-दस आदमी इन दोनों को ही देख रहे थे और इन को देखते ही राजीव ने फुडती से सीढ़ियों की तरफ कदम बढाए पर तब ही मयंक ने उसको पीछे से पकडा।
राजीव -"चिरांद है क्या साले छोड मुझे मैं गन लेकर आता हूं जल्दी"
मयंक -"ऊपर अगर ये मार भी जाएंगे तो बचाने नहीं आने वाला इसलिए ऊपर छोड बगीचे की तरफ भाग उसके पीछे जंगल है उधर अपनी गांड ना टूटे ऐसा हो सकता है यहां अस्पताल में कोई भी जगह जाएंगे तो ड्रिल मशीन डाल देंगे ये अपने भीतर "
और दोनों ही बगीचे की तरफ भागे और इनको भागता देख ही वो लोग भी इनकी तरफ भागे...
"आजा जल्दी"..... राजीव ने बगीचे और जंगल को अलग करने वाली दीवार पर चढ़ते हुए मयंक से कहा।
"तेरे कसम राजीव तू मेरे हाथ से ही मरेगा मैं क्या साले कोई सूपरमेन हूं दिख ना रहो तोए चलो पर ना रहो और तू दीवाल पर चढने कह रहा है"....... मयंक ने राजीव से कहा।
"ठीक है ठीक है चल अब चड"..... राजीव ने नीचे उतरकर मयंक को उठाया और उस सात फुट की दीवार को पार कराया और जैसे ही राजीव चडा तब तक वो गुंडे बगीचे तक। आ गये ।
"भागोगे कहां आज बच नहीं पाओगे"......उन लोगों को भागता देख गुंडों में एक चिल्लाया जो इनका मुखिया दिख रहा था।
"हा हाहा हहा "
"पागल हो गया क्या चूतिए..... दौड़ने पर ध्यान दे गिर गया तो बचाऊंगा नहीं"...... मयंक को राक्षस जैसे हस्ता देख राजीव चिल्लाया.....दोनों भाग ही रहे थे की तब ही
"राजीव वो देख तू उधर जा "...... मयंक ने एक ओर इशारा करते हुए कहा जहां एक पुराना सा बरगद का पेड था और उसके पीछे एक ढलान थी जहां आसानी से चुपा जा सकता था।
राजीव- "तू जा साले लंगडे..... मैं तो ढूंढ लुंगा जगह".......
मयंक -"अबे वो देख मैं वहां चुपुंगा"
******************
"जाओ बेटा खेलो .....वो देखो तुम्हारा पहला दोस्त तुमको कैसे देख रहा है"....... अनिल ने मयंक को गोद से उतारते हुए कहा।
आज मयंक का तीसरा जन्मदिन था और और आज उसका जन्मदिन अनिल अपनी कोठी पर मनाने वाला था इसलिए वो सुबह उठकर ही मयंक को उसके घर से ले आया था और यहां आकर अनिल उसको राजीव की तरफ इशारा करते हुए ये बात बोली थी।
और अपने पापा की गोद में एक नये शक्स को देख कर राजीव दौडता हुआ आया था अपने पापा के पास......
"पापा ये तोन है".....अपनी छोटी सी उंगली मयंक की तरफ करते हुए राजीव ने अनिल से पूछा।
"ये आपका भाई है राजीव तुम इस्से एक साल बड़े हो इसलिए इसका ख्याल हमेशा तुमको ही रखना है चाहे कुछ भी हो जाए ठीक है"..... अनिल ने राजीव के सर पर हाथ फेरते हुए कहा।
"चाचा"........ अपने पापा की बात सुनकर राजीव ने गर्दन हां में हिला दी और मयंक की तरफ बडा पर अपनी तरफ अंजाने शक्स को आता देख मयंक जल्दी से अनिल से चिपक गया क्योंकि अनिल तो शुरू से ही उसके घर आता जाता रहा है तो मयंक उसको जानता था।
"अरे डरो नहीं मयंक "......और एक बार फिर अनिल ने मयंक को राजीव की तरफ घूमा दिया पर मयंक आगे नहीं बडा।
"रुको पापा अभी देखना"......इतना कहते ही मयंक अपने घर के किचन की तरफ भागा।।
किचन में......
"मम्मी मुझे समोसे चाहिए"........ किचन में घुसते ही चाची की साडी पकड़ते हुए राजीव ने कहा
"अच्छा रुको ".....चाची ने हस्ते हुए कहा।
"ये लो".....चाची ने आधा समोसा एक कटोरी में रखकर राजीव को पकडाते हुए कहा।
"अरे मम्मी पूरा समोसा दो"..... राजीव ने गुस्से से कहा।
"बेटा आप इतना भी नहीं खा पाते हो पहले इतना तो खाओ फिर ले जाना और जितना चाहिए"......चाची ने राजीव का गाल खींचते हुए कहा।
"नहीं मुझे पूरा समोसा चाहिए और मैं अब अकेला खाने वाला नहीं हूं"....... राजीव ने खुश होते हुए कहा।
"अच्छा चलो दिया पूरा समोसा लो ....अब बताओ और कौन है खाने वाला"...... चाची ने कहा
"मैं खाऊंगा और मेरा दोस्त खाएगा"..... राजीव ने खुश होकर उस कटोरी को उठाते हुए कहा।
"दोस्त तुम्हारा कौन दोस्त है ".....
राजीव -"हां मेरा दोस्त.....आओ बाहर ...पापा लेकर आए हैं उसको "
उसके बाद दोनों बहार आए तो मयंक अनिल की पीठ पर था और अनिल उसको घोडा बनकर खिला रहा था। उसके बाद राजीव दौड़ते हुए अनिल की पीठ पर बैठ गया और दोनों मयंक और राजीव खेलने लगे फिर राजीव ने एक समोसे का बहुत छोटा टुकड़ा मयंक के सामने किया जिसको मयंक ने आगे बढकर खा लिया और राजीव ने मयंक के लटके गालों को पकडकर थोडा सा खींच दिया जिसपर मयंक फिर रोने लगा।
एक वो दिन था और एक आज का दिन कभी भी मयंक और राजीव में झगडा नहीं हुआ पर इन दोनों ने बहुत झगडे किए हैं काफी किस्से हैं आगे हम सुनाएंगे और आप सुनना
*************
"बस परम यहीं रोकले गाडी वो सामने चाय की टपरी है वहीं आएगा रघु रुपये का बैग लेने "......... बल्ली ने परम को सामने कुछ दूर पर बनी चाय की टपरी की तरफ इशारा करते हुए कहा।
वैसे तो ये इलाका इंदौर के भीड़ वाले इलाके में आता है पर ये चाय की टपरी भीड से कुछ अलग होकर थी जहां चाय पीने वाले और बनाने वाला कहीं से भी शरीफ नहीं मालूम पडते थे।
यहां आए हुए दस मिनट ही हुए होंगे बल्ली को तब ही एक गाडी वहां आकर रुकी और उसमें से एक सामान्य कद काठी का आदमी उतरा ।
"ये ही है रघु बल्ली भईया"......उस आदमी को देखते ही परम ने बल्ली से कहा।
"अब ध्यान से सुनो जब ये रघु पैसे लेंने वाले से बात कर रहा होगा तब ही मैं और परम उसकी तरफ जाएंगे और तुम दोनों सिर्फ गाडी के टायर पर निशाना रखोगे समझे वैसे तो उसने हमको नहीं देखा है पर अगर वो गाडी से भागना चाहेगा तो भी नहीं भाग पाएगा और सबसे बडी बात जब तक वो गाडी में ना बैठे बंदूक मत चलाना नहीं तो पैदल भागेगा ....... साइलेंसर लगाओ अपनी बंदूकों में जल्दी "....... बल्ली ने सबको समझाते हुए कहा।
और इतना कहते ही बल्ली और परम आगे बड गये उन्होंने सोचा रघु को टाइम लगेगा रुपये लेने में....पर रघु उतरा गाडी से और उसको देखते ही टपरी वाले ने एक बेग रख दिया सामने और रघु उसको जल्दी से उठाकर गाडी और सड गया और उसको गाडी में घुसता देख परम और बल्ली उसकी तरफ भागे लेकिन तबतक गाडी चालू हो गयी पर तब ही.....
"पप्पपाठ्ठठकाटक्क्क "........उस शांत माहौल में एक दम से ये धमाका हुआ और गाड़ी के पीछे वाले दोनों टायर फट गये तब तक बल्ली और परम पहुंच गये वहां तक परम ड्राइवर की तरफ गया और इधर रघु के तरफ का दरवाजा खुला और वो जैसे ही बहार निकला बल्ली ने एक लात उसकी पीठ में दी और रघु सीधे गाडी से टकराया और बल्ली ने बंदूक रघु के माथे पर रख दी।
Aaj shaamHell Strom bhai next update kab tak aayega?

intezaar rahega....Aaj shaam![]()
intezaar rahega Hell Strom bhai....Aaj shaam![]()
intezaar rahega....Aaj shaam![]()
Bhai bohot badhiya update tha. Per flash back adhura reh gaya?अध्याय - 19
"यार मेरी बात तो सुन".......जब राजीव ने मयंक को बात करते सुना और जैसे ही मयंक ने उसको देखा तो राजीव वो आइसक्रीम कप वहीं गिरा कर वापस जाने लगा तो मयंक ने पीछे से आवाज लगाई।
"आह्ह"...... जैसे ही मयंक जल्दबाजी में सीढ़ियों पर चढा तो उसकी चोट पर असर यशहुआ और दर्द की वजह से आगे बढ़ने की जगह गिर गया।
"साले तू मर जा तो बढिया है"..... जैसे ही मयंक की आवाज सुनी तो राजीव पीछे मुडा और मयंक को गिरा देखकर उसको गरियाते हुए उसकी तरफ बडा।
"अब भोसडीके भागा तो यही पटक के मारुंगा"...... राजीव जैसे ही मयंक के पास आया तो उसको पकड़ते हुए बोला।
"किधर लगी"...... राजीव ने उसकी बात नजरंदाज करते हुए पूछा।
मयंक -"लंड लगी है मेरे .....और क्या साले लडकी जैसे रूठ रहा है......बता रहा हूं सुन तो ले"
राजीव -"मैंने तो कुछ पूछा ही नहीं.....बाकी अगर तूने बताना नहीं शुरू नहीं किया तो मेरे हाथ चलने शुरू हो जाएंगे "
और दोनों दोस्त सीढ़ियों पर बैठ गये और मयंक ने जैसे ही बताना शुरू किया तब ही राजीव का फोन बजा जो कि अनिल का था।
"हां पापा"....... फोन उठाते हुए राजीव ने कहा।
अनिल -" मयंक कहां है....... उसका फोन क्यों नहीं उठ रहा"
राजीव -"पापा वो मेरे साथ ही है....उसका फोन शायद कमरे में होगा अभी हम बगीचे में बैठे हैं"
अनिल -"उसको फोन दो"
मयंक -"हां चाचा"
अनिल -"स्पीकर पर कर दे फोन और ध्यान से सुनो तुम दोनों को मारने आदमी आ रहें हैं और शायद पहुंच भी गये होंगे .... मयंक तुझे बंदूक दी थी ना मैंने जब आया था तो बस अगर लगे की बात जान पर आ गयी है तो माथे में छेद करने से कतराना मत बिल्कुल भी 20 मिनट बस बीस मिनट लगेंगे मुझे ध्यान रखना "
और अनिल का फोन कट गया .......
"और साले निशाना खराब तो नहीं हो गया तेरा यहां आकर.... चाचा ने बीचों बीच गोली देने की कही है "....... मयंक ने अपने हाथ को पीछे कमर पर ले जाते हुए कहा जैसे अपनी रिवॉल्वर निकाल रहा हो।
पर रिवॉल्वर तो थी ही नहीं.....
राजीव - तूने सेक्सी साहित्यकार का दोहा नहीं सुना क्या ?
मयंक-"चल खडा हो पहले तो रिवॉल्वर कमरे में है चलते चलते बताना"
राजीव-"तो सुन ध्यान से
"लंड मरा ना लुल्ल हुआ, चूत से निकला मूत
फिर भी तृष्णा ना बुझी,चोद दिए सब चूत "
राजीव को सहारा देकर खडा करते हुए राजीव ने दोहा सुनाया।
मयंक -"है! काव्य की गांड मारने वाले... कृपया इस दोहे की व्याख्या तो करें "
राजीव -"तो सुनो वत्स यहां कवि कहना चाहते हैं की जैसे लंड कितनी भी च* मारले पर घिसता नहीं है उसी भांति जो आदमी रुपी प्राणी जब एक चीज को करना सीख जाए तो फिर भूलता नहीं है "
अभी ये दोनों सीढियां चढने ही वाले थे अपने कमरे में जाने के लिए तब ही बडी दूर एक आवाज इनके कानों में आई
"भाई वो छोकरा जिसको अपुन ढूंढ रहे हैं "
ये आवाज सुनते ही मयंक और राजीव ने अपनी गर्दन आवाज की तरफ घुमाई तो नौ-दस आदमी इन दोनों को ही देख रहे थे और इन को देखते ही राजीव ने फुडती से सीढ़ियों की तरफ कदम बढाए पर तब ही मयंक ने उसको पीछे से पकडा।
राजीव -"चिरांद है क्या साले छोड मुझे मैं गन लेकर आता हूं जल्दी"
मयंक -"ऊपर अगर ये मार भी जाएंगे तो बचाने नहीं आने वाला इसलिए ऊपर छोड बगीचे की तरफ भाग उसके पीछे जंगल है उधर अपनी गांड ना टूटे ऐसा हो सकता है यहां अस्पताल में कोई भी जगह जाएंगे तो ड्रिल मशीन डाल देंगे ये अपने भीतर "
और दोनों ही बगीचे की तरफ भागे और इनको भागता देख ही वो लोग भी इनकी तरफ भागे...
"आजा जल्दी"..... राजीव ने बगीचे और जंगल को अलग करने वाली दीवार पर चढ़ते हुए मयंक से कहा।
"तेरे कसम राजीव तू मेरे हाथ से ही मरेगा मैं क्या साले कोई सूपरमेन हूं दिख ना रहो तोए चलो पर ना रहो और तू दीवाल पर चढने कह रहा है"....... मयंक ने राजीव से कहा।
"ठीक है ठीक है चल अब चड"..... राजीव ने नीचे उतरकर मयंक को उठाया और उस सात फुट की दीवार को पार कराया और जैसे ही राजीव चडा तब तक वो गुंडे बगीचे तक। आ गये ।
"भागोगे कहां आज बच नहीं पाओगे"......उन लोगों को भागता देख गुंडों में एक चिल्लाया जो इनका मुखिया दिख रहा था।
"हा हाहा हहा "
"पागल हो गया क्या चूतिए..... दौड़ने पर ध्यान दे गिर गया तो बचाऊंगा नहीं"...... मयंक को राक्षस जैसे हस्ता देख राजीव चिल्लाया.....दोनों भाग ही रहे थे की तब ही
"राजीव वो देख तू उधर जा "...... मयंक ने एक ओर इशारा करते हुए कहा जहां एक पुराना सा बरगद का पेड था और उसके पीछे एक ढलान थी जहां आसानी से चुपा जा सकता था।
राजीव- "तू जा साले लंगडे..... मैं तो ढूंढ लुंगा जगह".......
मयंक -"अबे वो देख मैं वहां चुपुंगा"
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"जाओ बेटा खेलो .....वो देखो तुम्हारा पहला दोस्त तुमको कैसे देख रहा है"....... अनिल ने मयंक को गोद से उतारते हुए कहा।
आज मयंक का तीसरा जन्मदिन था और और आज उसका जन्मदिन अनिल अपनी कोठी पर मनाने वाला था इसलिए वो सुबह उठकर ही मयंक को उसके घर से ले आया था और यहां आकर अनिल उसको राजीव की तरफ इशारा करते हुए ये बात बोली थी।
और अपने पापा की गोद में एक नये शक्स को देख कर राजीव दौडता हुआ आया था अपने पापा के पास......
"पापा ये तोन है".....अपनी छोटी सी उंगली मयंक की तरफ करते हुए राजीव ने अनिल से पूछा।
"ये आपका भाई है राजीव तुम इस्से एक साल बड़े हो इसलिए इसका ख्याल हमेशा तुमको ही रखना है चाहे कुछ भी हो जाए ठीक है"..... अनिल ने राजीव के सर पर हाथ फेरते हुए कहा।
"चाचा"........ अपने पापा की बात सुनकर राजीव ने गर्दन हां में हिला दी और मयंक की तरफ बडा पर अपनी तरफ अंजाने शक्स को आता देख मयंक जल्दी से अनिल से चिपक गया क्योंकि अनिल तो शुरू से ही उसके घर आता जाता रहा है तो मयंक उसको जानता था।
"अरे डरो नहीं मयंक "......और एक बार फिर अनिल ने मयंक को राजीव की तरफ घूमा दिया पर मयंक आगे नहीं बडा।
"रुको पापा अभी देखना"......इतना कहते ही मयंक अपने घर के किचन की तरफ भागा।।
किचन में......
"मम्मी मुझे समोसे चाहिए"........ किचन में घुसते ही चाची की साडी पकड़ते हुए राजीव ने कहा
"अच्छा रुको ".....चाची ने हस्ते हुए कहा।
"ये लो".....चाची ने आधा समोसा एक कटोरी में रखकर राजीव को पकडाते हुए कहा।
"अरे मम्मी पूरा समोसा दो"..... राजीव ने गुस्से से कहा।
"बेटा आप इतना भी नहीं खा पाते हो पहले इतना तो खाओ फिर ले जाना और जितना चाहिए"......चाची ने राजीव का गाल खींचते हुए कहा।
"नहीं मुझे पूरा समोसा चाहिए और मैं अब अकेला खाने वाला नहीं हूं"....... राजीव ने खुश होते हुए कहा।
"अच्छा चलो दिया पूरा समोसा लो ....अब बताओ और कौन है खाने वाला"...... चाची ने कहा
"मैं खाऊंगा और मेरा दोस्त खाएगा"..... राजीव ने खुश होकर उस कटोरी को उठाते हुए कहा।
"दोस्त तुम्हारा कौन दोस्त है ".....
राजीव -"हां मेरा दोस्त.....आओ बाहर ...पापा लेकर आए हैं उसको "
उसके बाद दोनों बहार आए तो मयंक अनिल की पीठ पर था और अनिल उसको घोडा बनकर खिला रहा था। उसके बाद राजीव दौड़ते हुए अनिल की पीठ पर बैठ गया और दोनों मयंक और राजीव खेलने लगे फिर राजीव ने एक समोसे का बहुत छोटा टुकड़ा मयंक के सामने किया जिसको मयंक ने आगे बढकर खा लिया और राजीव ने मयंक के लटके गालों को पकडकर थोडा सा खींच दिया जिसपर मयंक फिर रोने लगा।
एक वो दिन था और एक आज का दिन कभी भी मयंक और राजीव में झगडा नहीं हुआ पर इन दोनों ने बहुत झगडे किए हैं काफी किस्से हैं आगे हम सुनाएंगे और आप सुनना
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"बस परम यहीं रोकले गाडी वो सामने चाय की टपरी है वहीं आएगा रघु रुपये का बैग लेने "......... बल्ली ने परम को सामने कुछ दूर पर बनी चाय की टपरी की तरफ इशारा करते हुए कहा।
वैसे तो ये इलाका इंदौर के भीड़ वाले इलाके में आता है पर ये चाय की टपरी भीड से कुछ अलग होकर थी जहां चाय पीने वाले और बनाने वाला कहीं से भी शरीफ नहीं मालूम पडते थे।
यहां आए हुए दस मिनट ही हुए होंगे बल्ली को तब ही एक गाडी वहां आकर रुकी और उसमें से एक सामान्य कद काठी का आदमी उतरा ।
"ये ही है रघु बल्ली भईया"......उस आदमी को देखते ही परम ने बल्ली से कहा।
"अब ध्यान से सुनो जब ये रघु पैसे लेंने वाले से बात कर रहा होगा तब ही मैं और परम उसकी तरफ जाएंगे और तुम दोनों सिर्फ गाडी के टायर पर निशाना रखोगे समझे वैसे तो उसने हमको नहीं देखा है पर अगर वो गाडी से भागना चाहेगा तो भी नहीं भाग पाएगा और सबसे बडी बात जब तक वो गाडी में ना बैठे बंदूक मत चलाना नहीं तो पैदल भागेगा ....... साइलेंसर लगाओ अपनी बंदूकों में जल्दी "....... बल्ली ने सबको समझाते हुए कहा।
और इतना कहते ही बल्ली और परम आगे बड गये उन्होंने सोचा रघु को टाइम लगेगा रुपये लेने में....पर रघु उतरा गाडी से और उसको देखते ही टपरी वाले ने एक बेग रख दिया सामने और रघु उसको जल्दी से उठाकर गाडी और सड गया और उसको गाडी में घुसता देख परम और बल्ली उसकी तरफ भागे लेकिन तबतक गाडी चालू हो गयी पर तब ही.....
"पप्पपाठ्ठठकाटक्क्क "........उस शांत माहौल में एक दम से ये धमाका हुआ और गाड़ी के पीछे वाले दोनों टायर फट गये तब तक बल्ली और परम पहुंच गये वहां तक परम ड्राइवर की तरफ गया और इधर रघु के तरफ का दरवाजा खुला और वो जैसे ही बहार निकला बल्ली ने एक लात उसकी पीठ में दी और रघु सीधे गाडी से टकराया और बल्ली ने बंदूक रघु के माथे पर रख दी।
Shandaar update. Dumdaar lekhan Kushal or interesting kahani. Bas is se jyada nahi bol sakta moda.Update - 21
"हां तो तू किस बहन की बात कर रहा था तू"....... राजीव के हाथ में दो जूस के ग्लास थे जिसमें से एक मुझे पकड़ाते हुए उसने पूछा।
मयंक -"भाई उसके लिए हमको उस समय में जाना होगा जब तू यहां इंदौर आ रहा था।"
राजीव -"तो अब का महुरत निकरेगो तब बतागो"
रीडर्स लोग बीच बीच में ये खडी बोली आ जाती है उसके लिए माफी पर मैं इसको नहीं रोक सकता क्योंकि "Its in my blood "....
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शाम का समय,
जगह - ******, मध्यप्रदेश।
"मिलने आ जाना तब तेरा मन हो किसी से पूछने की कतई जरूरत नहीं है समझा".......चाचा (अनिल) ने मुझे गले लगाते हुए कहा जो अभी पापा के यहां से आए थे और वो रात से ही उनके साथ थे। आज चाचा , चाची , दीदी और राजीव सब इंदौर सिफ्ट हो रहे थे।
वैसे तो चाचा का ट्रांसफर उनकी और मेरे पापा की मर्जी के खिलाफ कोई कर नहीं सकता था पर हुआ कुछ ये की कुछ दिन पहले बीहड जो की फोरेस्ट डिपार्टमेंट के अंडर आती है वहां से कुछ लोग अवैध मिट्टी का व्यापार कर रहे थे इतना भी ठीक था पर ये लोग इस हद तक बेकौफ हो गये थे की ज़िले में रोड दुर्घटना चरम पर पहुंच ग चुकी थी।
अब चूंकि चाचा डिविजनल आफिसर है तो उनको ही देखना था और इस को ध्यान रखते हुए चाचा ने इन लोगों की सेंध लगाने की सोची अब ये जो खनन करने वाले थे वो इतनी आसानी से कहां मानने वाले थे तो चाचा ने पहले इन सब को ट्रेक्टर की नंबर प्लेट से खोजने की सोची जिसमें बहुत हद तक सफल भी हुए पर उसका नतीजा ये हुआ अब की जिले के आधे से ज्यादा ट्रेक्टर या तो बिना नंबर के चलने लगे या फिर आधे नंबर लगी नंबर प्लेटों का प्रयोग होने लगा।
और ये होते ही रेत माफिया भी ज्यादा सक्रिय हो गया क्योंकि उनको भी ये तरीका खूब भा रहा था इसी कडी में चाचा ने एक रात योजना बनाई की जो बेरिकेट्स सरकार द्वारा भेजे गये है (2003 ka time hai isliye barricades ek dum nyi cheez thi us waqt )उनको प्रयोग में लाया जाएगा और रोड के बीचोंबीच उनको रखकर माफिया को रोकने की योजना बनी और इसके साथ ही आरक्षकों (constable) को ये बताया की ट्रेक्टर धीमे होते ही उनपर पत्थर से हमला कर उनको रोका जाए और इसने बहुत हद तक माफिया को रोकने का काम किया पर इसका नतीजा ये हुआ की ट्रेक्टर का मालिक ड्राइवर के साथ मोटरसाइकिल पर अपने आदमियों को भेजने लगा जो बेकौफ पुलिस और वन विभाग पर फायरिंग कर जाते और इसी कडी में चाचा की टीम का एक साथी शहीद हो गया ।
जिसके बाद चाचा और पापा ने (वैसे तो पापा ये सरकारी मामलों से दूर ही रहते थे पर जहां बात चाचा की आती है तो ये चीजें पापा के लिए मायने नहीं रखती) इस अवैध माफिया को गैरकानूनी तरीके से खतम करने की सोची और इसी के चलते चाचा ने करीब 20 लोगों को धर दबोचा जिसमें चाचा को एक नई जानकारी मिली की ये सब कठपुतली है असल में चंबल के ये सब काम एक ही करवा रहा है खैर चाचा ने उन बीसों को बीहड में ले जाकर ठोक दिया जिससे माफिया तो एक दम से रुक गया पर एक साथ बीस लोगों का गायब होना काफी बडी बात थी जिसके चलते ना चाहते हुए भी एक टीम आई और छानबीन हुई पर पापा ने एक व्यक्ति को आगे बड कर गुनाह कुबूल करवा दिए जिससे चाचा बाइज्जत बरी हो गये पर उनका यहां रहना ठीक नहीं था क्योंकि उन बीस परिवारों से कैसे बचा जा सकता था वो लोग सामने से कुछ नहीं बोल सकते थे पापा और चाचा के रुतबे के चलते पर पीछे से या अकेले पाकर क्या कर जांए उसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता था और भले ही चाचा बरी हुए उस केस में पर केस बंद नहीं हुआ था और कभी भी पलट सकता था इसलिए पापा ने जबरन चाचा का ट्रांसफर करवा दिया।
मयंक -"हां चाचा बिलकुल आउंगा जब मन होगा तब "
और इसके साथ ही सब लोग गाडी में चढ चले गये। उसके बाद मैं एक बार फिर अकेला हो गया । क्योंकि बचपन से लेकर इस पल तक मुझे कभी ऐहसास नहीं हो रहा था। फिर एक दिन बलवीर सिंह का आना हुआ जिनके घर पर अखाडा था। और उन्होंने ही मुझे कहा की जब भी अकेला महसूस करो तो चले आया करो हमारे यहां...
बलवीर एक ऐसा व्यक्ति था जो पापा और चाचा के बाद हमारे यहां सबसे ज्यादा रसूक रखता था और ये पापा का दोस्त था पर कभी मैंने पापा को इसके साथ अनिल चाचा की तरह खुल कर बात करते नहीं देखा यही वो व्यक्ति था जिसके यहां से चंबल के सारे अवैध हथियार सप्लाई हुआ करते थे ।
एक दिन मैं यूं ही घर में बोर हो रहा था कि तब ही घर की लैंडलाइन बजी जब फोन उठाया तो बलवीर अंकल का ही फोन था उन्होंने मुझे घर बुलाया था अपने जब वहां पहुंचा तो अंकल ने बताया की उन्होंने हमारे और पडोस के गांव के बीच कब्बड्डी का मैच रखा हुआ है और इसी मैच के चलते मैं उनके आसपास रहा और अक्सर मेरा टाइम वहां गुजरने लगा ।
(जबसे मैंने बलवीर अंकल का जिक्र किया था तब से ही राजीव कुछ ज्यादा ध्यान से सुन रहा था)
कही बार तो उनको लड़कों के साथ मैं छोटे मोटे लफडों में भी चला जाया करता और पता नहीं क्यूं इन सब में मुझे बहुत मजा आने लगा था । ऐसा लगता था जैसे जो पावर है उसका सही इस्तेमाल करने लगा था जैसे मेरे सर पर एक अलग सा नशा चढ़ने लगा और कही बार मैं अंकल(बलवीर) के साथ बीहड में भी जाता था बागियों से मिलना और भी बहुत कुछ उनके साथ होता तो बापू ज्यादा कुछ कहते नहीं थे। अब जो भी बडी डील होती उसके लिए अंकल मुझे भेजने लगे थे ।
और एक दिन जब मैं उनके घर पहुंचा तो उनका फोन बजा और फोन पर बात करके उन्होंने मुझे कहा "मयंक एक काम है"
और इतना बोलते ही मैं शांत हो गया और उन पलों में खो गया कि तब ही ...
"क्या हुआ फिर ...बता साले रुक क्यूं गया"........ राजीव ने मुझे झिंझोड़ते हुए कहा।
"बता रहा हूं ना ...सुन . अभी मैं फिर बताना शुरु करता उससे पहले ही हमारे अस्पताल के कमरे का गेट खुला और वही नर्स अंदर आई ।
(ये जो पास्ट की कहानी है वो बहुत ही कम शब्दों में और सिर्फ उस लडकी पर ही केंद्रित है जो मयंक की बहन बनी बाकी राजीव के जाने के बाद से इंदौर में आने तक बहुत सी घटना हुई जिनका जिक्र जरुरत पड़ने पर होगा।")
"मैं आता हूं अभी"....... जैसे ही नर्स कमरे में आई राजीव कमरे से निकल लिया।
"मैंने सुना तुम पर यहां हमला हुआ.... कुछ लोग मारने आए थे".... नर्स ने एक बार फिर मेरी प्लस रेट चैक की।
"टेंशन मत लो ये अभी बड गई है पहले सही थी "........ जैसे ही उसने पल्स रेट चेक की तो धीरे से बडबडाई 98 ....
नर्स -"अच्छा अभी ऐसा क्या हुआ जो ये बड गई"..... उसने हल्का सा हस्ते हुए कहा।
मयंक -"वो खूबसूरत लड़कियों के टच में जादू होता है"
"फ्लर्ट कर रहे हो मिस्टर"........उसने मुस्कान के साथ आंखें दिखाता हुए पूछा।
मयंक -"हां शायद ...पर आप यहां क्या कर रही है वो समझ नहीं आया "
नर्स -"क्या मतलब यहां क्या कर रही हूं नर्स हूं तो यही होंगी ना"
मयंक -"तो आप नर्स क्यूं है इतनी हाॅट चिक्स अस्पताल में नहीं होनी चाहिए "
इस घटिया फ्लर्ट पर भी नर्स बराबर लाईन दे रही थी तब ही तो कहते हैं लडका पसंद हो तो लडकी को कुछ बुरा नहीं लगता उसका और जो ना पसंद हो तो अच्छे भले लडके में सौ कमी निकाल दें।
"उस रात तुम मुझे क्यूं ढूंढ रहे थे"...... उसने बात बदलते हुए कहा।
"बस ऐसे ही आपने बताया होता तो टूटे पैर के साथ नीचे ना जाना पडता "........
"और इतनी क्या मजबूरी जो टूटे पैर के साथ एक अंजान को ढूंढने चल पडे आप हूं?"......... उसने आंख नचाते हुए कहा।
"मैंने सुना है लड़कियां ज्यादा समझदार होती है लड़कों से मुझे लगता है आपको समझ जाना चाहिए वैसे अबतक "..
इस बात पर वो मुस्कुरा दी और बोली ...."रात नौ बजे के बाद केविन में ही रहने वाली हूं मैं बाकी की बांते वहीं करेंगे सी यू सून" और हस्ती हुई कमरे से निकल गई।
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"क्यूं तू तो बडी शान से गया था ना की विष्णु को पकड लेगा ...मेरे कदमों में डाल देगा अब क्या हुआ ".......दद्दा ने कल्लू का मजाक बनाते हुए उससे पूछा।
कल्लू -"दद्दा वो जानवर है पूरा मैंने सपने में भी नहीं सोचा था की वो ऐसा कुछ करेगा हमारे साथ जो मैने देखा ना उस दिन अभी भी आंखों के सामने पिक्चर जैसे चल रहा है "
दद्दा -"ऐसा क्या देख लिया तूने भला "..... दद्दा ने हसते हुए कहा।
"जब एक इंसान को मारने दस लोग आते हैं तो इंसान के पांव पीछे होते हैं दद्दा पर वो जानवर ही है जो दस आदमियों को देखकर उसकी आंखों में चमक देखी मैंने प्यास देखी जैसे किसी शेर को बडे दिनों बाद शिकार मिला हो "....... कल्लू ने उस मंजर को याद करते हुए कहा।
"अच्छा और ".......
कल्लू -"वो इंसान नहीं है दद्दा जब उसके हाथ रुके तो वहां का मंजर कुछ ऐसा था की मामूली इंसान का दम घुट जाता उसके दिल में रहम नहीं है बिल्कुल रहम नहीं आंते तक काट गई उसकी तलवार पर वो नहीं रुका और मुझे भी ये कहकर छोड दिया कि मैने भाईसा बोला इसलिए छोड रहा है "
"हाहा ऐसा कुछ नहीं है पागल उसने तुझे इसलिए छोडा क्यूं की तुझे मारने का मन नहीं था उसका ........और रही बात बेरहमी की तो तू अभी उसके लडके को नहीं जानता "
"उसका लडका विष्णु से भी खतरनाक है क्या "........ कल्लू ने किसी छोटे बच्चे की तरह पूछा ।
"बस ये मान ले की जो तूने देखा वो मयंक के लिए इंसानियत है "......दद्दा ने कुछ याद करते हुए कहा।
"आप कैसे मिले उससे दद्दा "...... कल्लू ने एक बार फिर सवाल किया।
"बलवीर लाया था उसको मेरे यहां तब ही मिला था उससे मुझसे भी एक हाथ लंबा और शरीर में तुझसे भी दुगना "......दद्दा ने कल्लू के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।
कल्लू- "वैसे दद्दा आपने विष्णु का क्या सोचा है कैसे हराना है इसको "
"तू गया तो था फिर हराया क्यूं नहीं उसको हाहा "....... दद्दा ने एक बार फिर कल्लू का मजाक बनाया।
Bohot khoob bhai. Bojot hi kamuk update. Ola-vrasti wale bhaiya.Update - 22
समय - 10:00 pm
मयंक कमरे से बहार आया और एक बार फिर उस छोटे कमरे की तरफ बढ गया जहां नर्स इस वक्त होनी चाहिए थी और जैसे ही कमरे के सामने पहुंचा तो दरवाजा खुद खुल गया । जो कि नर्स ने ही किया था इस वक्त नर्स ने सलवार कमीज़ पहन रखा था और उसकी कमीज़ में उसका यौवन उफान पर था।
"वैसे मैने आपका नाम नहीं पूछा अब तक "...... मयंक ने कुर्सी पर बैठ कर पूछा।
"रानी नाम है मेरा "...... उसने भी सामने बिस्तर पर बैठकर कहा।
रानी -"तो मेरा नाम पूछने आए थे "
मयंक -"नहीं नहीं जब भी हम बात करने जाते हैं तो कोई ना कोई आ ही जाता है इसलिए सोचा यहां आराम से बात कर सकते हैं फिर आपने ही तो कहा था की 9 बजे के बाद आप यहां फ्री होंगी।"
"हम्म तो क्या बात करनी है आपको जनाब"....... नर्स ने आंखें नचाते हुए कहा।
"और बताए अपने बारे में......आपके परिवार में कौन कौन है".......
रानी -"हम्मम मैं और मेरी मां ही है फिलाहल तो पति था जिसके साथ मैं अब रहती नहीं "
"वैसे तुम्हे पता है जब तुम यहां उस रात को आए थे तो तुम्हारे कपड़े मैनै ही चैंज किए थे"...... रानी ने मुझे देखते हुए कहा।
इतना सुनते ही मैं कुछ समझ नहीं पा रहा था की क्या कहुं इससे बस उसको देख रहा था ।......फिर सोचा जब इसने सब कुछ देख ही लिया है और लाइन बराबर दे रही है पति इसके साथ रहता नहीं ये इसने खुद बताया तो अब मैं इतना बेबकूफ भी नहीं के ये क्या चाहती है।
और मैंने उसकी आंखों में लगातार देखते हुए अपने चेहरे को उसकी तरफ बढ़ाया वो जो बिल्कुल मेरे सामने बिस्तर पर थी उसने भी अपने मुंह को मेरी आंखों में देखते हुए मेरी तरफ झुका दिया।
और अगले ही पल उसके पतले और कोमल होंठ मेरे होंठों से जा मिले उसने तुरंत अपने होंठों को थोडा खोलते हुए मेरे नीचले होंठ को चूसना शुरू कर दिया मैंने अपने हाथ उसकी कमर पर रखे और कुर्सी से खडा होने के साथ उसको भी बिस्तर से उठाया चूंकि मैं कुर्सी और वो बिस्तर पर मजा नहीं आ रहा था ।
अब हम दोनों ही खडे थे उसके दोनों हाथों ने मेरा चेहरा थामे हुआ था और मेरे दोनों हाथ उसकी सलवार के ऊपर से उसके सुडौल नितम्बों पर थे उसके नितम्ब पर्फेक्ट सेप में थे और उसका किस करने का स्टाइल बडा ही जबर दस्त था ऐसा लग रहा था मेरे होंठों से वो मेरी जान निकाल लेगी और इसी क्रम में मैंने अपना एक हाथ पीछे से हठा कर उसके बूब पर रख दिया और कमीज के ऊपर से ही उसके मध्यम साइज के बूब्स का जायजा लेने लगा और तब ही उसने चुम्बन तोड दिया और होंठ अलग होते ही उसने झट से अपनी कमीज़ निकाल फेंकी और अगले ही पल सलवार भी जमीन पर थी और वो अब मेरी सर्ट के बटन खोलने लगी और मेरा हाथ खुद वा खुद उसकी आंखों के सामने आई लट को पीछे करने के लिए आगे बडा और जैसी ही मैंने वो बाल उसके कान के पीछे किए तो उसने मेरी आंखों में देखा और हल्की मुस्कान हम दोनों के चेहरों पर उभर आई।
मेरी सर्ट उसने ही कंधों से निकाल फेकी और अपने घुटनों के बल बैठकर कर उसने मेरे लंड पर लोवर के ऊपर से ही हाथ फेरा जैसे कह रही हो आज मैं खा जाऊंगी इसको जैसे ही हम दोनों की आंखे मिली उसने अपने निचले होठ को दांतों से दबा कर आंख मारी और मेरे लोवर को निकाल दिया फिर मैंने उसको कंधों से पकड कर खडा किया और इस बार जब उसके दूध देखे तो पता चला कमीज़ के ऊपर से अनुमान लगाना बेबकूफी है और इस बार मैंने अपने तपते होंठ उसकी गर्दन पर रख दिए उसकी सिस्की निकल गई उसके बाद धीरे-धीरे गर्दन से कंधों तक और कंधों से गर्दन तक एक बार अच्छे चूमा और हाथ पीछे ले जाते हुए हल्के से उसके ब्रा का हुक खोल दिया और उसके तने हुए दूध मेरे सामने थे मैंने उसको बिस्तर पर हलका सा ढक्का दिया और वो खुद ही पीठ के बल आंखे बंद किए उस सिंगल बिस्तर पर लेट गई मैंने आगे बढ़ते हुए पहले अपनी उंगली उसकी नाभी के चारों तरफ घुमाई और उसके मुंह से एक बार फिर वही मजेदार सितकार फूठ पडी जिसको सुनते ही मैंने अपने होंठ उसके पेट पर रख दिए और जैसे ही मेरे होंठों का एहसास उसको अपने पेट और नाभि पर हुआ तो उसका वो हिस्सा बिस्तर से हवा में उठा और एक बार फिर बिस्तर पर जा लगा मैंने अपनी जीभ बहार निकाली और उसको नाभि से दूध तक घुमाते हुए लाया
"आह्हाआहहहह"....... जैसे ही उसके मटर के दाने जितना चूचक मैंने अपने होंठों में दबाया पहली चीख उसके मुंह से निकली मैने जितना हो सकता है उतना मुंह खोला और उसको दूध को अपने मुंह में समा लिया और अंदर अपनी जीभ उसके चूचक पर चलाई तो उसके हाथ खुद-ब-खुद मेरे बालों में चलने लगे ।
"आह्हाआ .....ओह्ह ..मम्मममययययंककक आ्््हह् ऐसे ही हूंहहह आह्हहहह ........... प्लीज़ काट्टटट्टो नहीं आह्हहह आऔह्हह तुम्ममक्ष आह्हह"..........अगले दस मिनट तक मैंने उसके दोनों दुग्ध कलशों को चूसा और उसके चूचक के आसपास मेरे दांतों के निशान थे ।
मैंने जैसे ही उसके दूध बहार निकाले तो उसने बिस्तर से उठना चाहा पर मैंने उसको हाथ से रोका और लेटे रहने का इशारा किया और उसने अपने शरीर को एक बार फिर बिस्तर पर टिका लिया और अपने हाथों को ऊपर की ओर उठा लिया और आंखे बंद कर ली।
मैंने उसकी पैंटी की इलास्टिक में अपनी ऊंगली फंसाई और एक बार पैंटी के ऊपर से ही उसकी योनि को चुम्बन दिया और धीरे-धीरे उसकी पैंटी पैरों की तरफ खींचने लगा उसने भी अपनी कमर हल्की उठाकर मदद की ।
और पैंटी निकालकर जब मैंने उसके योनि को देखा तो ये आंटी की चूत से काभी अलग थी आंटी की चूत में बहार से एक लकीर दिखती थी जिसको खोलकर देखने पर असली खजाना दिखता था ( \/)
पर रानी की चूत में होंठ पहले से ही बहार की तरफ थे उनको खोलते ही भगनासय दिखता था और उसके ठीक नीचे ही वो छेद था
"ओह्हह आह्ह मयंक य्ययययये क्ययाआआयय कर्ररररर रहे हो"...... मैंने तुरंत नीचे झुक कर उन लवों को खोला और जैसे ही जुबान की नोक भगनासय से लगी रानी की कमर झटके से हवा में उठी पर फिर मैंने एक हाथ उसकी नाभी और चूत के बीच चलाना लगा क्योंकि रानी कुछ ज्यादा ही उत्तेजित हुए जा रही थी।
और मेरी जीभ उसकी चूत पर चलने लगी तो रानी की हल्की आह्ह सितकार उस छोटे से कमरे में गूंजने लगी मैंने उसके एक पैर को उठाय और अपने कंधे पर रख लिया अब मेरी जीभ अच्छी तरह से उसकी योनि का रस पी रही थी अभी लगभग आठ नौ मिनट हुए होंगे तब ही रानी ने अपने दोनों पैर मोड लिए और मेरे चेहरे को जांघों के बीच दबा लिया और अपने एक हाथ से मेरे सर पर दबाव डालने लगी उसका शरीर बुरी तरह से अकडने लगा और अगले ही पल रानी उछलने लगी उसकी चूत ने अपना रस छोड दिया दो मिनट तक वो अपनी आंखें बंद किए बस धीरे धीरे आह्हह करती रही और जब उसने अपनी आंखों को खोला तो मयंक उसको मुस्कुरा कर देख रहा था उसको देखकर रानी भी हल्की मुस्कुरा दी।
"आज से पहले कभी मेरे पति ने मेरे साथ ऐसा नहीं किया .....कसम से मयंक ये अनुभव सबसे अलग था ऐसा लग रहा है मेरे शरीर के हर एक कण में बिजली दौड रही है".........रानी ने सांसे दुरुस्त करते हुए अपनी स्थिति कह सुनाई।
"अच्छा और मेरा क्या "....... मयंक ने आंखों से अपने लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा जो इस वक्त कच्छे में ऐसे खडा था जैसे अगले पल फाडकर बहार आ जाएगा।
मयंक की बात सुनते ही रानी बिस्तर से उठी और घुटनों पर बैठकर मयंक की आंखों में देखते हुए उसके कच्छे को घुटनों तक कर दिया और मयंक का लंड अब बिल्कुल नग्न अवस्था में रानी के मुंह के पास था । रानी ने हाथ आगे बढ़ा कर उसके लंड को पकडा जैसे मोटाई नाप रही हो और अगले पल ही लंड की चमडी को आगे पीछे करने लगी चमडी हटाकर रानी ने जैसे ही अपनी जीभ को उसके सुपाड़े पर चलाया तो मयंक के मुंह से भी आवाज फूट पडी मयंक ने रानी के चेहरे पर आए बालों को पीछे की ओर किया और चुटिया समेत सारे बालों को पकड लिया अब जैसे ही मयंक रानी के सर को बालों से पकडकर आगे पीछे करता रानी के होंठों का घर्षण उसके सुपाड़े पर होता और मयंक के शरीर में एक तरंग सी दौड जाया करती फिर मयंक ने उसके बालों को कसकर पकडा और और अपनी कमर को आगे पीछे करने लगा और मदहोशी में उसको पता तक नहीं चला की उसकी स्पीड कब तेज हो गई उसको भी पता ना चला ।
जब रानी ने मयंक की कमर पर अपने हाथ मारना शुरू किया तब वो वास्तविक दुनिया में लौटकर आया और तुरंत उसने अपना लंड उसके मुंह से बहार निकाला ।
और रानी को उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया उसकी टांगें उठाकर उसके कंधों से लगा दी और जब चूत पूरी तरह से खुल गई तो अपना सुपाड़ा उसके छेद पर लगाया और जैसे ही थोडा जोर लगाया तो आगे का हिस्सा चूत में घुस गया और मयंक के मुंह से भी आह्हह निकल पडी क्योंकी उसको ऐसा लगा जैसे उसका लंड छिल गया वहीं रानी के मुंह से भी एक चीख निकली जिसको उसने खुद अपने हाथों से रोका और मयंक ने अपने और उसके दर्द की परवाह ना करते हुए रानी के होंठों से होंठ मिलाए और थोडा जोर लगाया और अपना आधा लंड चूत में उतार दिया और किस करते समय जब उसकी आंखें रानी से मिली तो उसने देखा उसकी आंखों के किनारे से आंसूओं की धार बह रही थी ।
मयंक ने खुद को और रानी को थोडा सहज होने का वक्त दिया और अगले ही पल एक और जोरदार धक्का मारा और अपना पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया इसबार रानी की चीख इतनी जोर की थी की होठ मिले होने की बाद भी हूं हूं की आवाज आ रही थी मयंक ने कुछ देर बाद अपने होंठ हटाए तो रानी अब रो रही थी और मयंक को भी ऐसा लग रहा था मानों उसके लंड को किसी ने जकड रखा हो वो कसावट भी इतनी तेज थी की जैसे खून बहना रोक ले ।
फिर मयंक ने अपने आप को रानी के ऊपर से उठाया और अपने दोनों हाथों से रानी की जांघों को पकडा और धीरे धीरे अपनी कमर को आगे पीछे करना शुरू किया शुरू के कुछ पल रानी को परेशानी हुई पर जब लंड ने अपनी जगह बना ली तो वो आराम से भीतर बहार होने लगा अब रानी भी खुलकर उसका मजा ले रही थी।
बीच बीच में जब मयंक कोई जोर का धक्का देता और तो उसका लंड रानी के भीतर तक टकरा जाता और रानी की आह्ह्ह फूट पडती कुछ देर इस तरह चोदा पर मयंक के पैर में लगे होने के कारण उसको दर्द महसूस हो रहा था तो उसने पोशिसन चेंज की औश्र खुद कुर्सी पर आ बैठा और रानी को अपनी गोदी में बिठाया और अब रानी दर्द सहते हुए भी खुद ब खुद लंड भीतर ले रही थी।
इनकी ये चुदाई लगभग बीस मिनट चली और रानी दूसरी बार अपना पानी छोडने वाली थी और उसकी गती बेहद तेज हो चुकी थी और तब ही
"आह्हहह मम्ममेमै जड्डडने वाली हूं मययययंकककक ".......और इसी के साथ रानी दूसरी बार अपना पानी छोडने लगी पर मयंक का अभी हुआ नहीं था इसलिए उसने रानी को गोदी में उठा कर बिस्तर पर लाया और उसको घोड़ी बनने का इशारा किया रानी ने भी तुरंत अपने हाथ पांव बिस्तर पर टिकाए और अपनी कमर को ऊपर उठा लिया मयंक ने अपधा लंड एक बार फिर लंड सेट किया और पहला ही ढक्का इतना जोर का था की पूरा लंड भीतर समा गया रानी जिसने अपने मुंह को तकिये में दबा रखा था उसकी दबी दबी चीखे मयंक के कानों में जा रही थी ।
"मयंक रुक जाओ अब नहीं बस बस अब रुक जाओ मेरे जलन होने लगी है आह्हह आओह्् प्लीज़ स्टोप मयंक आह्हह"...... इस पोशिसन में मयंक का लंड रानी की गहराई तक उतर रहा था इस वजह से रानी को अब काफी परेशानी होने लगी थी।
"बस रानी हो गया कुछ देर और ".......और इतना कहते ही मयंक के आखरी ढक्के शुरू हो गये मयंक ने तो रोमा के पुर्जे हिला दिए थे ये तो फिर भी उससे बहुत छोटी थी भले ही मयंक को इसका अनुभव कम हो पर जब कोई चीज़ मजा बहुत देती है तो इंसान खुद सीख ही जाता है।
और एक पल ऐसा आया जब मयंक का छूटने वाला था तब मयंक ने और जोर लगाना शुरू कर दिया जिसकी वजह से रानी अपने हाथ से मयंक को पीछे करने की कोशिश करने लगी पर मयंक ने उसको कमर से पकड रखा था और अपने चरम पर पहुंचते ही मयंक को वही पुराना ऐहसास हुआ मानो उसका सारा खून इक्कठा हो गया है और उसका वीर्य चूत की गहराइयों में उतरने लगा चार पांच पिचकारी निकली और मयंक रानी के ऊपर ही लोट गया ।
यहां मयंक आनंद के पलों को जी रहा था और वहां उसको याद कर करके साक्षी इफ्तिका का हाल कुछ ठीक नहीं था ।
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जगह : ****** , राजस्थान
"शुक्रिया मेरे भाई आज तेरी वजह से मैं बेफिकर हूं अब .....ये तेरा एहसान कैसे चुकाऊंगा मुझे खुद नहीं पता।"........एक व्यक्ति ने विष्णु के सामने हाथ जोड़ते हुए कहा।
विष्णु को यहां राजस्थान आए दो दिन हो चुके थे वैसे तो वो यहां राजस्थान के **** मंत्री से मिलने आया था पर जब इस शक्स को पता चला की विष्णु राजस्थान आया है तो ये व्यक्ति लंदन से बिना सोचे समझे यहां इस जगह आ गया मिलने।
अभी इस जगह जहां विष्णु बैठा हुआ था वो उसका ही घर था .... वैसे तो ये उसकी पुस्तैनी जमींन नहीं थी पर ये विष्णु के चाचा मतलब मयंक के छोटे दादा की जमीन थी जो उनको उनके सास ससुर से मिली थी बेटा ना होने की स्थिति में और मयंक के छोटे दादा दादी के भी कोई पुत्र या पुत्री नहीं था क्योंकि उन्होंने शुरू से ही विष्णु को अपना सबकुछ समझा था इसलिए उन्होंने अपनी शंतान की कमी कभी महसूस नहीं हुई।
विष्णु -"कैसी बात कर रहा है मेरे भाई एहसान थोडी हैं ये और मैंने कुछ नहीं किया जब सब कुछ मैंने मयंक को बताया तो वो खुद तैयार हो गया इंदौर जाने के लिए।"
"मयंक का तो मैं शुरू से ही शुक्रगुजार हूं भाई बस तूने ये अच्छा किया की उसको दुश्मन का नाम नहीं बताया ".....
विष्णु -"हां उसको सिर्फ इतना ही बताया गया है की उसको तुम्हारे परिवार की सुरक्षा करनी है किसी भी सूरत में क्योंकि दुनिया के सामने तुम मर चुके हो "....
"जीते-जी मरना कौन चाहता है भाई पर अगर मेरा परिवार इससे सुरक्षित रहता है तो बुराई भी नहीं इसमें जाने कब से मैनें अपनी परिवार को नहीं देखा और वो भी नहीं जानते कि मैं जिंदा हूं..
..और वही सही भी है उनके लिए "
विष्णु -"छोड ये बातें और यहां मैं ये बात करने थोडी रूका हुआ हूं....... मैंने सुना है खूब निशानेबाजी करता है वहां लंदन में फिर दिखाएगा क्या कितना तेज हुआ निशाना "
"साले लंदन तक नजर है तेरी हाहहा चल".........इतना कहते ही विष्णु और ये व्यक्ति चल पड़े बाडे में जो इस हवेली के पीछे बना हुआ था।