ससुराल की नयी दिशा
अध्याय १९: दिशा का मायका
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अब तक:
“ममता मेरी जान. क्यों न आज तू अखिल और शक्ति के साथ मजा कर, मैं इन दोनों को अपने घर ले जाती हूँ.”
ममता ने सोचा और फिर मान लिया. बियर समाप्त करते ही नलिनी रितेश और जयेश को लेकर अपने घर चल दी.
दिशा की ससुराल में अगले अध्याय में हम फिर लौटेंगे.
अब आगे:
गाड़ी में बैठते ही नलिनी ने रागिनी को फोन लगाया. रागिनी ने फोन उठाया और दोनों कुछ देर छुटपुट बातें करती रहीं. फिर नलिनी ने धमाका किया.
“दीदी, आपको कैसे बताऊँ आज क्या हुआ है?” नलिनी बोली.
“जैसे बताना हो बता ही दे. तेरे पेट में तो पचने से रही.” रागिनी ने हँसते हुए कहा.
नलिनी ने संक्षेप ने रागिनी को ममता के घर बीती शाम के बारे में बताया. दूसरी ओर रागिनी चुप रही. बात समाप्त होने के भी बाद जब रागिनी चुप ही रही तो नलिनी ने पूछा कि क्या हुआ.
“अब तुझे मेरी सहायता नहीं चाहिए पड़ेगी न दिशा के देवरों के लिए?” रागिनी के स्वर में निराशा थी.
“मुझे तो लग रहा दोनों को मैं एक बार पटरी पर ले आऊँ फिर अगर चाहोगी तो आप भी आ जाना किसी दिन निमिष से पूछकर. चलो दीदी, घर पहुंच गई हूँ, कल बात करुँगी।” ये कहते हुए नलिनी ने फोन बंद किया, फिर गाड़ी पार्क की और घर में जाने लगी. रितेश और जयेश अपनी गाड़ी से आ रहे थे और अब तक पहुंचे नहीं थे. उसने घर में जाकर किचन में देखा तो कुछ भी नहीं था. फिर उसने सोचा कि ये दोनों आ तो घर ही रहे थे पहले भी तो हो सकता है कुछ ले ही आयें।
वो अपने कमरे में गई और नहा कर हल्के कपड़े पहने. उसे न जाने क्यों अभी चुदाई की बहुत आतुरता नहीं थी. चुदना तो था ही, पर ऐसा भी न था कि उनके घुसते ही चढ़ने देती. फिर वो कॉफी बनाने लगी. कॉफी पीते हुए वो जीवन के इस नए मोड़ के बारे में ही चिंतन कर रही थी. बस ये बात दिशा तक न पहुंचे, आगे कोई समस्या नहीं थी. तभी घर का दरवाजा खुला और रितेश और जयेश अंदर आ गए. नलिनी को ये देखकर चैन मिला कि वो खाना ले आये थे. साथ ही साथ बियर भी.
"इतनी बियर पियूँगी तो थुलथुल हो जाऊँगी”, नलिनी ने सोचा।
रितेश और जयेश ममता के घर से निकलकर पहले बियर लेने गए और फिर खाना भी पैक करवा लिए.
“मुझे लगता है कि हमारी समस्या का भी समाधान हो गया और भाभी की इच्छा की भी अब पूर्ति हो सकेगी.” रितेश ने कहा.
“ये तो ठीक है, पर उन्हें भाभी के बारे में कैसे बताओगे? और फिर उन्हें साथ ले जाने का क्या होगा?”
“समय आने पर सोचेंगे. पर मैं सोच रहा था कि उन्हें कुछ कुछ संकेत आज से ही दे दें तो ठीक रहेगा. क्यों न चुदाई के समय उन्हें गलती से एक दो बार भाभी ही कह दें? हमें भी पता चलेगा कि उनकी क्या प्रतिक्रिया रहती है. पूछेंगी तो थोड़ा कुछ बता देंगे.”
“ये तो ठीक है, पर ममता मस्त गदराई घोड़ी थी. छोड़ने में मजा आ गया.”
“और चुदक्क्ड़ भी बहुत है, वैसे माँ जी भी कम नहीं हैं. देखा नहीं अखिल और शक्ति से क्या चुदवा रही थीं.”
“मेरा तो लंड फिर से अकड़ने लगा है. आज रात चुदाई होगी न? नहीं तो ममता के घर लौटना पड़ेगा.”
“चिंता न कर छोटे, अपने भाई पर छोड़ दे. और सुन, उनकी गांड पहले तू ही मारना, मैंने ममता की मार ही ली है, तो तुझे भी अवसर मिलना चाहिए.”
“यू आर ग्रेट, भाई.”
घर पहुंचे और फिर उन्होंने सभी सामान व्यवस्थित रूप से रखा. अब समय था स्वांग का.
जयेश ने तीन बियर लीं और रितेश ने कुछ अल्पाहार. दोनों जाकर नलिनी के सामने खड़े हुए और उसे बियर दी और एक प्लेट में अल्पाहार भी. दोनों ने उसके साथ किसी प्रकार की अभद्रता नहीं की.
“बैठो.” नलिनी ने दोनों से कहा.
दोनों बैठ गए और कुछ बोले नहीं. बियर के दो तीन घूंट लेने के बाद नलिनी ने ही पहले बोला।
“तुम मेरे बारे में अब बहुत बुरा सोचते होंगे न? कैसी बुढ़िया है जो जवान लौंडों से चुदवाती है. दिशा न जाने मेरे बारे में क्या क्या धारणाएं बनाये हुए है. आज सभी ध्वस्त हो गईं.” नलिनी के स्वर में एक दुःख और पीड़ा थी.
“माँ जी, पहले तो आप ये समझिये कि हम दोनों आपके बारे में कोई भी गलत धारणा नहीं रखते. आप अपने शरीर की शारीरिक आवश्यकताओं की ही पूर्ति कर रही है. और ऐसा भी नहीं कि किसी सड़क चलते के साथ..... बल्कि परिचित लड़कों से ही मेल मिलाप है. हम दोनों को नहीं लगता कि इसमें कोई भी बुराई है. और जहाँ तक भाभी की बात है, उन्होंने हमें यहाँ रहने के लिए इसीलिए भी कहा था कि आपका एकाकीपन कुछ दिनों के लिए दूर हो सके.”
“भाभी की ये भी इच्छा है कि आप अगले माह से सप्ताहांत में हमारे साथ चलें. इससे आपका उनसे भी मिलना हो जायेगा और हमारे परिवार से भी.”
न जाने रितेश के इस अंतिम वाक्य के बोलने में क्या था कि नलिनी को कुछ संदेह सा हो गया. पर वो बोली कुछ नहीं और सिर हिलाकर चुप ही रही. वो रितेश या जयेश से ही सुनना चाहती थी.
“हमारे बीच जो भी हुआ या होगा उसका कोई भी वर्णन भाभी की नहीं दिया जायेगा, जब आपकी अनुमति नहीं होगी. वैसे भाभी ने हमें आपको हर सम्भव रूप से संतुष्ट करने की आज्ञा दी है.” रितेश अब उनकी आँखों झांक रहा था.
नलिनी को सांत्वना मिली कि ये दोनों उसे चोदने से कतरा नहीं रहे हैं. पर दिशा ने उसे संतुष्ट करने की आज्ञा दी? ये क्या चक्कर था?
“संतुष्ट?” नलिनी ने पूछा।
रितेश समझ गया कि उसने अधिक ही बोल दिया है.
बात संभालते हुए उसने कहा, “जी. उन्हें आपकी बहुत चिंता रहती है. उन्होंने तो हमें कहा था कि शाम को लौटने के बाद हम दोनों आपकी मालिश और अन्य प्रकार से सेवा करें.
“अगर वो तुम्हें अपने घर में रख रही हैं, खाना इत्यादि दे रही हैं तो तुम्हारा भी कर्तव्य बनता है कि उनकी भी सेवा करो - भाभी ने ये कहा था. वैसे परिवार में हम दोनों का मसाज बहुत प्रसिद्ध है. मम्मी हों या मामी, भाभी हों या काव्या सभी हम दोनों से मसाज करवाती हैं.”
नलिनी ने सोचा कि अगर ये अपनी माँ, बहन मामी और दिशा की मसाज करते हैं तो सब ठीक ही होगा. दिशा ने उसके बारे में इतना सोचा ये सोचते ही माँ की आँखें भर आयीं.
उसने फोन उठाया और दिशा को लगाया. रितेश और जयेश ने एक दूसरे को चिंता से देखा.
“हैलो, दिशा, मेरी रानी! कैसी है?”
“ .”
“तेरे देवर तेरे बारे में ही बता रहे थे. ये भी कह रहे थे कि वो दोनों बहुत अच्छी मसाज करते हैं और तुमने उन्हें मेरी मसाज करने के लिए भी कहा है.”
“ .”
“ठीक है, तुम कहती हो तो…., क्या?”
“ .”
“ओह, पर अगर तुम सब भी ऐसे ही करते हो तो मुझे भी कोई आपत्ति नहीं है.”
“ .”
“चल अब रखती हूँ.”
फोन के दूसरे छोर पर दिशा ने फोन रखा और अपने पति के सीने से लग गई. रितेश और जयेश लगता है माँ को चोदने में सफल हो ही जायेंगे.”
“आखिर भाई किसके हैं?” देवेश ने हँसते हुए कहा और पलटते हुए अपनी पत्नी को नीचे किया और उसके मम्मे चूसने लगा.
“ओह, ओह, देवेश!” दिशा की सिसकारी निकल पड़ी.
इधर नलिनी ने फोन काटा और रितेश की ओर देखा.
“दिशा तो तुम दोनों की बहुत प्रशंसा कर रही थी. पर क्या तुम दोनों अपनी मम्मी, मामी और बहन को भी मसाज के समय….”
“जी आंटीजी, नहीं तो कपड़े भी व्यर्थ में गंदे होते हैं और सही रूप से दबाव भी नहीं पड़ता है.”
“लगता है मुझे भी इसका अनुभव कर ही लेना चाहिए.”
रितेश ने जयेश से कुछ कहा और जयेश बाहर चला गया. फिर वो एक मसाज की टेबल ले आया. उसे देखकर नलिनी आश्चर्य में पड़ गई.
“इसे क्या साथ रखते हो?”
“नहीं, भाभी ने जब कहा था तो रख ली थी. इसपर सही रूप से मसाज हो सकेगा. कहाँ चलना है?”
“हम्म्म मेरे ही कमरे में चलते हैं. यहाँ तो अगर कोई आ गया तो कठिनाई हो जाएगी.” नलिनी उठकर अपने कमरे की ओर चल पड़ी.
रितेश ने जयेश के हाथ से बैग लिया और जयेश टेबल लेकर नलिनी के पीछे चल पड़ा. दोनों नलिनी की मस्त मोटी लहराती गांड देख रहे थे. नलिनी भी कुछ अधिक ही लचक कर चल रही थी. कमरे में जाकर भाइयों ने कमरे को देखा. फिर एक ओर टेबल लगाने का उचित स्थान दिखा. जयेश ने टेबल खोली। फिर रितेश ने बैग खोला और उसमे से श्वेत चादर निकालकर फैला दी. फिर उसने बैग में से तेल की शीशी निकाली. एक छोटी सी बैटरी से चलने वाली गर्म प्लेट निकली और एक बड़े से कटोरे में तेल डाला और उसे प्लेट पर रख दिया.
नलिनी उनकी इस व्यवस्था को देखकर चकित थी. इसके बाद दोनों भाइयों ने अपने कपड़े निकाले हुए केवल अंडरवियर में खड़े हो गए. नलिनी के मन में अभी तक अगर कोई आशंका थी तो वो भी दूर हो ही गयी. अब तो मसाज करवाना ही होगा. हालाँकि अभी कुछ घंटे पहले ही वो इन दोनों के सामने नंगी होकर चुदी थी, पर फिर भी झिझक रही थी. और मानो इसका भी समाधान मिल गया. दिशा का फोन आया और उसने नलिनी को आश्वस्त किया. नलिनी ने अब नखरे न दिखाकर अपने शरीर पर पड़े गाऊन को उतार दिया. फिर ब्रा भी उतार दी, पर पैंटी पहने रखी.
अंत में रितेश ने अपने अंडरवियर को भी उतार दिया और उसे देखकर जयेश भी नंगा हो गया.
“आंटीजी, हम भी आपको नंगा देख ही चुके हैं, फिर हिचक किस बात की है?”
नलिनी ने माना कि रितेश सही कह रहा है और उसने अपनी पैंटी भी उतार कर अलग कर दी. फिर वो टेबल पर जाकर बैठ गई. रितेश ने उसे पेट के बल लेटने के लिए कहा और नलिनी ने ऐसा ही किया. रितेश ने गर्म प्लेट को ऑन किया और उस पर रखी कटोरी का तेल गर्म होने लगा. तेल सुंगंधित था और कमरे कुछ देर में उसकी सुगंध से महक उठा. रितेश दायीं ओर आ गया और जयेश बायीं ओर। दोनों ने तेल लेकर नलिनी का मसाज आरम्भ कर दिया. पैर की उँगलियाँ, तलवे, एड़ी, पिंडली से होते हुए वो नलिनी की जांघों तक पहुंच गए. नलिनी ने अब तक पैर जोड़े हुए थे. उसके जांघों को अलग करते हुए दोनों उसकी जांघ की भी मसाज करने लगे.
“आंटीजी, अगर आप चाहो तो हम मसाज कुछ अलग प्रकार से भी कर सकते हैं.”
नलिनी अब तक उनके स्पर्श और मसाज की अद्भुतता में खो चुकी थी. उसने उन्हें स्वीकृति दे दी. इस बार उसके नितम्बों पर तेल लगते हुए उसका मसाज होने लगा. फिर रितेश ने कटोरी उठाई और जयेश ने नलिनी के दोनों नितम्बों को फैला दिया. इससे नलिनी की गांड का छेद खुल गया. दोनों हाथों के अंगूठे के शेयर जयेश ने गांड को और खोल दिया. रितेश ने खुली गांड में तेल की धार डाल दी. जब तेल बाहर आने लगा तभी वो रुका. इसके बाद उसने और तेल शीशी में डाला.
नलिनी की गांड में जब गर्म तेल गया तो वो सिसकी लेने लगी. जयेश ने अभी तक उसकी गांड को अंगूठों से खोल रखा था. रितेश ने तेल में ऊँगली डाली और फिर नलिनी की गांड में डाल दी.
“क्या कर रहे हो? अपनी माँ बहन के साथ भी ऐसा करते हो क्या?” नलिनी विचलित हो गई, पर उसने उन्हें रोकने का प्रयास नहीं किया.
“आंटीजी, मैंने पूछा था न इस प्रकार के मसाज के लिए आपसे. आपने ही तो हाँ कहा था.” रितेश ने अपनी ऊँगली से गांड को चोदते हुए कहा. “अब आप बस आनंद लीजिये.”
एक के बाद फिर दो और फिर तीन उँगलियों से रितेश नलिनी की गांड को चोदता रहा. उसका उद्देश्य उसे इतना खोल देना था कि जयेश को गांड मारने में कोई कठिनाई न हो. नलिनी भी समझ चुकी थी कि उसे बहकाया गया था, पर उसकी बेटी ने ऐसा क्यों किया ये उसे समझ नहीं आया. फिर वो अपनी गांड में चल रही उँगलियों पर ध्यान लगाने लगी. अब ये तय था कि उसकी आज चुदाई अवश्य होगी. गांड की अच्छे से मसाज करने के बाद दोनों भाई उसकी कमर का मसाज करते हुए उसकी गर्दन तक जा पहुंचे. उसके बाद रितेश ने नलिनी को पलटने के लिए कहा.
टेबल पर तेल होने के कारण जयेश ने नलिनी को सहारा दिया और जब वो पलट गई तो उसके अगर भाग का निरीक्षण किया. चूत पर एक भी बाल न था, बिलकुल चिकनी सपाट चूत का आंगन था. बस चूत के ऊपरी भाग में डिज़ाइन के लिए कुछ बाल अवश्य थे. पर वो भी गिनती के. दोनों फिर से नलिनी के पैरों का मसाज करने लगे. उन्होंने ये तो देख ही लिया था कि नलिनी की चूत भी अब गीली हो चुकी थी. अर्थात, लोहा गर्म हो रहा था. और उसे आकार देने के लिए उनके पास दो हथोड़े भी थे.
पैरों से ऊपर बढ़ते हुए वो फिर जांघों तक आ पहुँचे। इस बार नलिनी अपनी जांघें स्वतः ही खोल दीं. जयेश ने अपने बैग में से एक तकिया के समान वस्तु निकाली. वो पतली थी, लम्बी थी और ऊँची भी थी. नलिनी के नितम्बों को उठाकर जयेश ने उसे गांड के नीचे लगा दिया. अब नलिनी की चूत ऊपर होकर खिल गई. इस बार नलिनी को पता था कि क्या होना है. जयेश ने उसकी चूत की पंखुड़ियों को खोला और रितेश ने इस बार उसकी चूत को तेल से भर दिया. गर्म चूत में गर्म तेल जाते ही नलिनी को एक झटका सा लगा.
उसने रितेश को देखा, “दिशा को मत कहना हमने क्या किया.”
रितेश मुस्कुराया और कोई उत्तर नहीं दिया. नलिनी ने इसे मूक सहमति समझ लिया. रितेश ने इस बार अपनी उँगलियों का जादू नलिनी की चूत में दिखाना आरम्भ किया. इस मसाज से नलिनी पहले ही से कामातुर थी. ऊँगली जाते ही उसने एक लम्बी पिचकारी छोड़ दी. कुछ समय नलिनी को उँगलियों से चोद लेने के बाद दोनों उसके पेट और वीर मम्मों तक पहुंचे. अब नलिनी का संयम टूट चुका था, पर वो दोनों के मसाज को अंत तक ले जाने की भी इच्छुक थी.
जब रितेश मम्मों पर केंद्रित था, जयेश ने नलिनी के सिर के पीछे जाकर उसके माथे और फिर सिर पर ध्यान लगाया. शरीर के रोम रोम की इस प्रकार से मालिश हो चुकी थी. पर नलिनी अब तेल से भी लथपथ थी. मसाज समाप्ति की घोषणा करते हुए रितेश ने नलिनी को बैठाया और जयेश से बाथरूम में जाकर स्नान का प्रबंध करने के लिए कहा.
“आपको गर्म पानी से ही नहाना होगा, जयेश आपकी सहायता करेगा. उसके बाद जैसा आप चाहें.” रितेश ने अर्थपूर्ण मुस्कुराहट से नलिनी को देखा.
“अब मैं चाहती हूँ ये समझना मुझे नहीं लगता इतना कठिन है.” नलिनी ने भी इठलाकर कहा. रितेश ने उसे टेबल से उतारा और उसे पकड़कर बाथरूम में ले गया जहां जयेश अपनी भूमिका के लिए तत्पर था. पानी गर्म होने में अभी समय था, इसीलिए दोनों भाइयों ने नलिनी को कमोड पर ही बैठाया और एक तौलिये से उसके शरीर को पोंछने लगे. तलवे से आरम्भ करते हुए उन्होंने हर उस अंग को पोंछा जहाँ तेल लगा था. तब तक पानी भी गर्म हो गया.
रितेश जयेश के साथ नलिनी को छोड़कर बाहर चला गया और फिर तीन और बियर लेकर आ गया. टेबल को उसने बंद किया और सामान को बैग में डाला. जब तक नलिनी नहाकर निकली तो कमरे से मसाज का कोई भी उपकरण उपस्थित नहीं था. नलिनी दोनों के इस प्रकार के अनुशासन से प्रभावित हुए बिना न रह सकी. नलिनी और जयेश नंगे ही बाहर आये थे परन्तु नलिनी के शरीर पर अभी तक पानी की बूंदे थिरक रही थीं.
रितेश ने उसका हाथ लेकर उसे सोफे पर बैठाया और बियर थमा दी. एक बियर उसने जयेश को दी और एक स्वयं ले ली.
“बियर से आपके शरीर की गर्मी कुछ कम होगी.”
बियर के कुछ घूंट लेने के बाद रितेश ने वो प्रश्न किया जिसकी नलिनी प्रतीक्षा कर रही थी.
“अब आप आगे क्या चाहती हैं, आंटीजी?”
“अब यहाँ तक लाये हो तो चोद भी डालो.”
नलिनी को इस बात का आभास नहीं था कि जब रितेश उसे बाथरूम में छोड़कर आया था तब उसने अपने और जयेश के मोबाइल को कमरे के दो विशिष्ट स्थानों पर रखते हुए उससे रिकॉर्डिंग आरम्भ कर दी थी जो इंटरनेट के माध्यम से प्रकाशित हो रही थी. ये भिन्न विषय था कि इसका ज्ञान उनके परिवार के सिवाय किसी को न था. उसने दिशा को भी एक मिस कॉल करके सूचना दे दी थी. तो अब जो कुछ हो रहा था वो देवेश और दिशा अपने कमरे में देख रहे थे. दिशा के अनुरोध पर देवेश ने टीवी पर उसे दर्शित कर दिया. अपनी माँ के इस रूप से दिशा को एक संतोष प्राप्त हुआ.
नलिनी की ये बात सुनते ही रितेश उसके पाँवों के बीच में बैठा और उसकी जाँघे फैलाकर चूत चाटने लगा. तेल की कुछ मात्रा अभी तक शेष थी, पर नलिनी की चूत की सुगंध और रस ने उसे दबा दिया था. बड़े प्रेम के साथ उसने नलिनी की चूत को चाटा और फिर एक ऊँगली से उसे चोदने लगा. नलिनी सोफे पर आगे सरक आयी और अब रितेश को और सरलता हो गई. उसने पल भर के लिए पाने फोन को देखा और आँख दबा दी.
जयेश खड़ा होकर अपने लंड को अब तक नलिनी के मुंह में दे चुका था और नलिनी भी प्यासी बिल्ली की भांति उसे चाट और चूस रही थी. ये सब चूमा चाटी तो ठीक थी पर मसाज ने जो आग नलिनी के शरीर में लगाई थी उसका ये उपचार न था. उसने कुछ ही देर में मुंह से लंड निकाला।
“अब रहा नहीं जा रहा है. पहले चुदाई करो, फिर चुसाई कर लेंगे.” उसने कहा तो सब खड़े हो गए.
रितेश और जयेश के लिए ये व्यवहार नया नहीं था. जब भी वो अपनी माँ, बहन, मामी या भाभी की मसाज करते उन्हें भी चुदने की लालसा बढ़ जाती थी. रितेश ने अपने भाई को दिए वचन के अनुसार बिस्तर पर लेटकर अपना लंड थाम लिया. कैमरे को देखा और मुस्कुराकर नलिनी को देखा जो अब उसके लंड पर चढ़ रही थी. नलिनी ने अपनी चूत रितेश के लंड पर लगाई और बैठती चली गई. लंड पूरा लेने के बाद भी उसने विश्राम नहीं लिया और उस पर उछलने लगी.
उसके पीछे अपने लंड को हाथ में लिए जयेश खड़ा रहा. उसे ये तो पता था कि उनकी रिकॉर्डिंग हो रही है पर फोन कहाँ थे उसे पता न था. रितेश ने नलिनी के कुछ देर तक उछलने के बाद उसकी कमर को पकड़ा और उसे थाम लिया.
“आंटीजी, अब जयेश को भी तो अंदर आने दीजिये.”
नलिनी समझ गई और ठहर गई. जयेश ने नलिनी की गांड को ठीक से नहीं धोया था, जिसके कारण उसमे पर्याप्त मात्रा में तेल अभी भी उपस्थित था जो गांड मारने में सहायक रहने वाला था. अपने लंड को नलिनी की गांड पर रखने के बाद जयेश ने एक भयंकर धक्का मारा. उसका लंड नलिनी की गांड की गहराइयों में जाकर खो गया. नलिनी की चीख निकली पर उसे रितेश ने अपने मुंह से बंद कर दिया.
दिशा ने जब देखा तो उसे अपनी माँ पर दया आ गई.
“ओह, मम्मी. ये दुष्ट उन्हें फाड़ देंगे.” उसने देवेश से आहत स्वर में कहा.
“नहीं. अगर ऐसा होता तो माँ जी ऐसी चुदाई के लिए नहीं मानतीं. ये उनकी पहली डबल चुदाई नहीं है, ये तो निश्चित है. और सम्भवतः जयेश ने उन्हें इसी कारण से इस बुरी प्रकार से गांड में पेला होगा.”
दिशा इस बात से संतुष्ट तो नहीं हुई, पर उसने देवेश की बात मान ली. पर कुछ ही समय में उसे देवेश के कथन का प्रमाण भी मिल गया.
“मारो मेरी चूत और गांड. हरामखोरों. और तेज करो. इतने दिन से जो मलाई खिला रही हूँ उसका मान रखो और फाड़ दो मेरी चूत और गांड.”
दिशा आश्चर्य से टीवी देख रही थी. उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि उसकी माँ इस प्रकार की भाषा का प्रयोग करेगी. देवेश उसकी ओर देखकर विजयी भाव से मुस्कुरा दिया.
“आंटीजी, थोड़ा घूम जाते हैं, मुझे यहाँ पैर जमाने में कठिनाई हो रही है.” रितेश ने कहा और कैमरे की ओर देखकर आँख मारी. इस बार घूमकर उसने ऐसा कोण बनाया कि एक फोन से उन दोनों के लौड़े नलिनी की चूत में आवागमन करते हुए दिख सकें और दूसरे से नलिनी और जयेश के चेहरे के भाव. एक ही दुविधा थी कि अब वो कैमरे को नहीं देख सकता था.
एक बार सही स्थिति और मुद्रा में आने के बाद उसने जयेश से कहा, “अब आंटीजी कि सही चुदाई की जाये भाई.”
“बिल्कुल, भाई.”
“ममता ने कहा था कि तुम दोनों मस्त चुदाई करते हो. अगर ममता को तुम संतुष्ट कर सकते हो तो मुझे भी. अब पेलो और चोदो अपनी भाभी की माँ.”
“अरे आंटीजी, भाभी…” जयेश आगे बोलता इसके पहले रितेश ने उसके हाथ पर मुक्का मारा.
“क्या भाभी?” नलिनी ने पूछा.
“भाभी की माँ भाभी से अच्छी हैं.” जयेश ने बात संभाली. और नलिनी अधिक न पूछने लगे दोनों भाई पूरी श्रद्धा और शक्ति से नलिनी की चुदाई में जुट गए.
दिशा अब सब कुछ देख सुन रही थी. जब जयेश ने उसका नाम लिया था तो उसकी साँस रुक गयी थी. उसने देवेश की ओर देखा.
“जयेश मरवा देता अभी.”
“पता नहीं.” देवेश ने षड्यंत्रकारी भाव से कहा. दिशा उसकी ओर देखने लगी.
“आप सब मिलकर किसी योजना पर कार्यरत हो, है न?”
“नहीं. कोई योजना नहीं है. पर मैं अपने इन दुष्ट भाइयों को तुमसे अधिक अच्छे से जानता हूँ. समस्या ये है कि मैं अब उन्हें रोक नहीं सकता नहीं तो उनका फोन पकड़ा जायेगा और खेल समाप्त हो जायेगा. अब जो भी हो ठीक हो, हम केवल यही कामना कर सकते हैं.”
दिशा देवेश को बोलते हुए देख रही थी. उसकी आँखों और शब्दों में सच्चाई थी. दिशा ने भी यही कामना की कि सब कुछ ठीक ठाक हो जाये और अपनी आँखें टीवी की और केंद्रित कर दीं जहाँ उस चुदाई का संग्राम अपने अंतिम चरण पर था.
“मजा आ गया मादरचोदों, ममता सच कहती थी, तुम दोनों मस्त चोदते हो. अब तो मैं तुमसे हर रात चुदवा कर ही सोया करुँगी. गांड फाड़ दी मेरी जयेश तूने. अखिल और उस मुये शक्ति से भी एक साथ चुदवाकर इतना आनंद नहीं मिला था.”
“आंटीजी, पानी कहाँ छोड़ना है ये भी अब बता ही दो.” रितेश ने वीडियो के लिए कुछ अधिक तेज स्वर में पूछा.
“मेरे मुंह में डालना, तुम दोनों का रस मुझे अपनी चूत और गांड के रस से मिलाकर पीना है. पहले कौन झड़ रहा है?”
जयेश ने ही पहले उत्तर दिया. वैसी भी गांड मारने वाले का लम्बे समय तक टिकना कठिन होता है. जहाँ चूत अपने रस से कुछ घर्षण कम करने में सक्षम है, बेचारी गांड के पास ऐसा कोई प्रकल्प नहीं है. इसी कारण गांड मारने में आनंद अधिक मिलता है, परन्तु उस गली के अधिक देर ठहरना बिरलों के ही वश में होता है.
“तो फिर निकाल लौड़ा और आ जा मेरे आगे. देखूँ तेरे रस का स्वाद कैसा है. अकेले लंड का स्वाद सुबह तुम लोगों के जाने से पहले ले लूँगी। “
जयेश ने अपने लंड को निकला और नलिनी के सामने जा खड़ा हुआ. पर इसके कारण टीवी पर चल रहा कार्यक्रम बाधित हो गया. नलिनी ने अपनी जीभ से लंड को चाटा और फिर मुंह में लेकर चूसने लगी. जयेश अधिक देर नहीं टिका और नलिनी के मुंह को अपने रस से भरने में सफल हुआ.
“अच्छा स्वाद है.” नलिनी ने चटखारे लेते हुए कहा. अब तक जयेश हट चुका था और नलिनी की ये क्रिया दिशा और देवेश ने भी देख ली.”
“ब्लडी हैल,” दिशा के मुंह से निकला, “ये तो सच में ऊँचे स्तर की चुदक्क्ड़ हैं.”
“तुमने ध्यान नहीं दिया, किसी अखिल और शक्ति की भी बात कर रही थीं.”
नलिनी ने रितेश के झड़ने की प्रतीक्षा नहीं की, जयेश के हटते ही उसने रितेश के ऊपर से उतर कर झुकते हुए रितेश के लंड को चाटा और मुंह में भर लिया. और तब तक नहीं निकाला जब तक उसके मुंह में रितेश ने अपना पानी नहीं छोड़ दिया.
इसके बाद वो दोनों भी उठ गए. और कमरे में पड़े सोफे पर जा बैठे. जयेश ने बियर खोली और सबके हाथों में थमा दी.
उधर दिशा ने देवेश से कहा कि अब टीवी बंद किया जाये.
“नहीं, क्या पता अब और क्या देखने मिले. जब तक चल रहा है चलने दो.”
कुछ घूंट बियर के पीने के बाद नलिनी ने कहा, “तो ये है तुम्हारे मसाज का रहस्य?”
रितेश ने भोला बनकर पूछा, “क्यां आंटीजी?”
“बेटा, बूढ़ी हूँ बुद्धिहीन नहीं. ये खेल तुमने मुझे चोदने के तात्पर्य से ही खेला था न?”
रितेश ने सिर हिलाया.
“और तुमने मेरी बेटी को इस षड्यंत्र का भाग भी बना लिया. उस बेचारी को पता है कि तुमने उसके विश्वास को कैसे तोड़ा है?” नलिनी खड़ी हो गई. उसकी पीठ रितेश और जयेश की ओर थी. दोनों स्तब्ध थे कि ये क्या हुआ.
नलिनी ने उसी स्थान पर उसी मुद्रा में खड़े रहते हुए अपनी बियर के दो घूंट लिए.
“जैसा मैंने कहा था, बूढ़ी हूँ बुद्धिहीन नहीं, तो मैं इस पूरे प्रकरण पर अपनी राय बताती हूँ.”
दिशा और देवेश भी उसे सुन रहे थे.
“ये सच है कि तुम दोनों अपने परिवार की महिलाओं की इस प्रकार से मसाज करते हो. वो मूर्ख होंगी अगर वो तुम्हारे इस कौशल का लाभ न उठती हों.” नलिनी बोल रही थी, “पर सच ये भी है कि उसके बाद उन सबके साथ भी वही होता है जो मेरे साथ हुआ.” नलिनी पलटी और उन दोनों की आँखों में आँख डालकर बोली, “तुम दोनों अपने माँ, बहन, मामी को चोदते हो. और अपनी भाभी और मेरी बेटी को भी. है न?”
जयेश ने मूक रहकर सिर हिलाया.
“और इसका विस्तार यहीं तक नहीं है. पूरा परिवार इसमें सम्मिलित है. क्यों?”
“आंटीजी….”
“मेरा एक ही प्रश्न है.”
“जी.”
“अगर मेरी बेटी परिवार का अंग है तो फिर मैं क्यों नहीं?” नलिनी के मुख मंडल पर एक मुस्कुराहट थी. और आँखों में एक चमक. उसे उत्तर नहीं चाहिए था, क्योंकि उसकी बेटी के योगदान के कारण उसे इसका उत्तर पता था. उसे अपनी ससुराल में बुलाने के अनगिनत न्योते नलिनी ने ठुकराए थे.
पर इस बार ऐसा होने की संभावना नगण्य थी.
जयेश और रितेश लपककर उसके पास आये. और उसे अपनी भुजाओं में ले लिया.
परिवार के पूर्ण होने में अब अधिक दिन शेष न थे.
क्रमशः