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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

Avaran

एवरन
10,015
19,399
214
रिव्यू की शुरुआत की जाए
इंटरेस्टिंग इंटरेस्टिंग

Raj_sharma
आर्केडिया यहाँ वो जगह थी जहाँ शलाका अपने भाइयों के साथ बर्फ़ में विश्राम कर रहे थे। आर्गस का कैरेक्टर किसने नोटिस नहीं किया, लेकिन अगर याद हो तो मैंने कहा था आर्गस से रिलेटेड कुछ आगे होने को है।

एक और जगह जहाँ मेरा ध्यान गया है वो है लिडिया भी आरियन गैलेक्सी से रिश्ता रखती हैं, यानी अटलांटिक और आरियन के संबंध न सिर्फ़ अलेना की वजह से जुड़े हैं बल्कि एटलस की वाइफ़ लिडिया की वजह से भी ये लोग संबंधी हैं।

अब देखा जाए तो आरियन और फोरेना दोनों अलग-अलग आकाशगंगा हैं। इसका मतलब अगर मेरा अनुमान सही जाता है तो एक आकाशगंगा के लोग शलाका के समर्थन में होना चाहिए। देखो मुझे अब लगने लगा है शलाका का रोल हम लोग अटलांटिक के संदर्भ में देखते थे लेकिन जिस तरह कहानी में मोड़ आ रहे हैं उससे ये लगता है शलाका का रोल हमें आकाशगंगा के लोगों के बीच में होना चाहिए।
क्योंकि कहानी की मुख्य नायिका शेफ्फाली है जो कि अटलांटिक क्षेत्र में भूमिका निभाएगी। दूसरी मुख्य नायिका शलाका है जो कि आकाशगंगा में। ऐसे में दोनों के बीच न्याय होगा, वरना शलाका अटलांटिक तक रहती तब उसका उद्देश्य इतना महत्वपूर्ण नज़र नहीं आता।

वैसे अब एक और लक्ष्य मुझे नज़र आता है वो है शलाका का आर्गस को ढूँढना कि वह कहाँ है। कहीं आर्गस के इन लोगों से संपर्क तोड़ने की वजह कुछ और तो नहीं, क्योंकि सिर्फ़ रहने की जगह निर्धारण में संबंध तोड़ना थोड़ा फ़िल्मी टाइप लगता है।

आगे देखना टाइटन (आरियन) बनाम एंडोरस (फोरेना) के लोग भी भिड़ेंगे एक-दूसरे से। यहाँ भी एक पक्ष अच्छाई के साथ तो दूसरा ग़लत के साथ मिलेगा।

(इनकी लड़ाई समय चक्र के लिए होने वाली है)
इसको बुकमार्क करना पड़ेगा, ये आगे मुझे फ़्लेक्स मारने में काम आएगा कि देखो मैंने क्या प्रेडिक्ट किया था।

वैसे किस्मत देखो जेम्स की एलियन स्पेस शिप उड़ाएगा, दूसरा विलमार बेचारा अब जानवरों वाली ज़िंदगी जीने वाला है।

वैसे मैं एक बात को लेकर कन्फ्यूज़ हूँ कि जो दिव्य जोड़ें हैं उन्हें एक-एक शक्ति मिली, इसका मतलब क्या? उदाहरण लें तो मयूर और धारा दोनों के पास एक तरह की कॉमन शक्तियाँ हैं, और सुयश और शलाका के पास अलग-अलग तरह की दो शक्तियाँ हैं, ऐसा ही ना? या सिर्फ़ इन दोनों की और भी शक्तियाँ उजागर होना बाकी हैं।

अब यहाँ एक पहले जो मुझे संदेह था जिसका मैंने ज़िक्र भी किया था कि अगर तत्व शक्ति शलाका के भाइयों के पास हैं तो वही शक्तियाँ दिव्य जोड़ें के पास कैसे और अग्नि, वायु का कहाँ रोल रहेगा ऐसे में खैर अब समझ आ गया क्या था वो।

आगे देखने में बहुत सी चीज़ें हुईं, सबसे बड़ी बात शीट हृतु तिलिस्म पूरा हुआ। एक समय लगा कि वो आँक गिर रहे हैं, कहीं इन लोगों का द एंड तो नहीं लिख दिया गया।

तिलिस्म की मुसीबत से बाहर निकलने की घटना रोचक थी। इस बार का तिलिस्म वाक़ई ख़तरनाक था, सच में मृगन मछली ने दिमाग़ खपा दिया।

लेकिन एक रोचक घटना ने मेरा ध्यान खींच लिया। वो जलपरी का शुरू में मुझे लगा सच में तिलिस्म से बाहर से कोई आ तो नहीं गया वो भी इतना जल्दी।

अब केश्वर को पहले हल्के में ले रहा था मैं, लेकिन मुझे लगता है केश्वर आगे चलकर बहुत बड़ा खलनायक बनेगा। केश्वर अगर एक प्राणी में भावना डाल सकता है तो वह भगवान ही बन गया एक तरह से। वो चाहे तो तिलिस्म में अपनी खुद की सेना तैयार कर दे।

एक बात कुछ अपडेट में ये भी सामने आई कि तिलिस्म से कुछ जीव बाहर भी गए। सोचो ऐसे अगर भावना वाले जीव तिलिस्म के बाहर चले गए तो आम लोगों का क्या हश्र होगा। इन जीवों के पास तो मैजिकल पावर्स भी हैं।

मुझे लगता है कहानी यहाँ से एक स्तर और ऊपर चली गई है, कहानी का स्केल अब एकदम ग्रैंड लग रहा है।

आगे चलते हैं।
त्रिकाली और व्योम का दृश्य बहुत समय के उपरांत आया है। शुरू में मुझे लगा क्या ये विधुम्न का अध्याय इतना जल्दी समाप्त हो गया, पर मैं ग़लत था। संदेह था ज़रूर यहाँ कि ऐसा कैसे इतना जल्दी, अभी तो बस झलकियाँ दिखीं, ऐसे में ख़त्म इतना जल्दी।

खैर महावृक्ष की प्रशिक्षण इतनी ख़तरनाक थी, विधुम्न कितने ख़तरनाक होने वाले हैं। वैसे भी उसे महादेव का वरदान प्राप्त है तो चुनौती और कठिन।
वैसे मुझे साइंस आती तो नहीं है लेकिन गुरुत्व आकर्षण के नियम ज़रूर समझ आए।

मुझे बस इस चीज़ का समझ नहीं आ रहा कि विधुम्न, त्रिशल, कालिका, व्योम ये लोग अटलांटिक से और स्टोरी के नज़रिए से कनेक्टेड कैसे होंगे, क्योंकि इनका रोल सिर्फ़ वो नीमा गुरुजी का बदला लेने तक तो सीमित नहीं होगा।

आगे मेरे लीजेंडरी प्रेडिक्शन “अल्बर्ट ज़िंदा है शायद” वाली कन्फर्म हो गई।

Wese Purane character Ke Name Yaad aaye To Kya kuch surprise se purane Character Jinda bache Jese wo suyash ka assistant brad aur Albert kahi dinosaur se kabhi Jinda bach Gaya Ho .
वैसे क्या पेच डाला है कि अल्बर्ट को पकड़ा ही नहीं पकड़ी तो उसकी जैकेट थी, और गिराया भी पेड़ पर मान गए गुरु।

अब ऐसे ही ब्रैंडन और ब्रूनो मिल जाएँ मज़ा आ जाए।
वैसे ये काली बिल्ली की देवी क्या चीज़ थी। उस द्रव्य में तो कुछ था या नहीं लेकिन उस ब्रैसलेट में ज़रूर कुछ पावर है। वैसे लगता तो नहीं अल्बर्ट काली बिल्ली बन जाएगा क्योंकि उसे लाया गया है मतलब आगे लंबा कुछ काम होगा, इसलिए जहाँ तक लगता है उसको बिल्ली वाली शक्ति मिली होगी, शायद बिल्ली का रूप धारण करने की शक्ति मिल गई।
वैसे अभी अल्बर्ट अगर मयावन में है मतलब वो सम्रा या सेनोर जा सकता है, क्योंकि मयावन तो ख़तरे से खाली नहीं है।

कुल मिलाकर अच्छा अपडेट था।
आगे की प्रतीक्षा।
 
Last edited:

Werewolf

𝕽𝖚𝖒𝖇𝖑𝖎𝖓𝖌
Supreme
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Werewolf
आर्केडिया यहाँ वो जगह थी जहाँ शलाका अपने भाइयों के साथ बर्फ़ में विश्राम कर रहे थे। आर्गस का कैरेक्टर किसने नोटिस नहीं किया, लेकिन अगर याद हो तो मैंने कहा था आर्गस से रिलेटेड कुछ आगे होने को है।

एक और जगह जहाँ मेरा ध्यान गया है वो है लिडिया भी आरियन गैलेक्सी से रिश्ता रखती हैं, यानी अटलांटिक और आरियन के संबंध न सिर्फ़ अलेना की वजह से जुड़े हैं बल्कि एटलस की वाइफ़ लिडिया की वजह से भी ये लोग संबंधी हैं।

अब देखा जाए तो आरियन और फोरेना दोनों अलग-अलग आकाशगंगा हैं। इसका मतलब अगर मेरा अनुमान सही जाता है तो एक आकाशगंगा के लोग शलाका के समर्थन में होना चाहिए। देखो मुझे अब लगने लगा है शलाका का रोल हम लोग अटलांटिक के संदर्भ में देखते थे लेकिन जिस तरह कहानी में मोड़ आ रहे हैं उससे ये लगता है शलाका का रोल हमें आकाशगंगा के लोगों के बीच में होना चाहिए।
क्योंकि कहानी की मुख्य नायिका शेफ्फाली है जो कि अटलांटिक क्षेत्र में भूमिका निभाएगी। दूसरी मुख्य नायिका शलाका है जो कि आकाशगंगा में। ऐसे में दोनों के बीच न्याय होगा, वरना शलाका अटलांटिक तक रहती तब उसका उद्देश्य इतना महत्वपूर्ण नज़र नहीं आता।

वैसे अब एक और लक्ष्य मुझे नज़र आता है वो है शलाका का आर्गस को ढूँढना कि वह कहाँ है। कहीं आर्गस के इन लोगों से संपर्क तोड़ने की वजह कुछ और तो नहीं, क्योंकि सिर्फ़ रहने की जगह निर्धारण में संबंध तोड़ना थोड़ा फ़िल्मी टाइप लगता है।

आगे देखना टाइटन (आरियन) बनाम एंडोरस (फोरेना) के लोग भी भिड़ेंगे एक-दूसरे से। यहाँ भी एक पक्ष अच्छाई के साथ तो दूसरा ग़लत के साथ मिलेगा।

(इनकी लड़ाई समय चक्र के लिए होने वाली है)
इसको बुकमार्क करना पड़ेगा, ये आगे मुझे फ़्लेक्स मारने में काम आएगा कि देखो मैंने क्या प्रेडिक्ट किया था।

वैसे किस्मत देखो जेम्स की एलियन स्पेस शिप उड़ाएगा, दूसरा विलमार बेचारा अब जानवरों वाली ज़िंदगी जीने वाला है।

वैसे मैं एक बात को लेकर कन्फ्यूज़ हूँ कि जो दिव्य जोड़ें हैं उन्हें एक-एक शक्ति मिली, इसका मतलब क्या? उदाहरण लें तो मयूर और धारा दोनों के पास एक तरह की कॉमन शक्तियाँ हैं, और सुयश और शलाका के पास अलग-अलग तरह की दो शक्तियाँ हैं, ऐसा ही ना? या सिर्फ़ इन दोनों की और भी शक्तियाँ उजागर होना बाकी हैं।

अब यहाँ एक पहले जो मुझे संदेह था जिसका मैंने ज़िक्र भी किया था कि अगर तत्व शक्ति शलाका के भाइयों के पास हैं तो वही शक्तियाँ दिव्य जोड़ें के पास कैसे और अग्नि, वायु का कहाँ रोल रहेगा ऐसे में खैर अब समझ आ गया क्या था वो।

आगे देखने में बहुत सी चीज़ें हुईं, सबसे बड़ी बात शीट हृतु तिलिस्म पूरा हुआ। एक समय लगा कि वो आँक गिर रहे हैं, कहीं इन लोगों का द एंड तो नहीं लिख दिया गया।

तिलिस्म की मुसीबत से बाहर निकलने की घटना रोचक थी। इस बार का तिलिस्म वाक़ई ख़तरनाक था, सच में मृगन मछली ने दिमाग़ खपा दिया।

लेकिन एक रोचक घटना ने मेरा ध्यान खींच लिया। वो जलपरी का शुरू में मुझे लगा सच में तिलिस्म से बाहर से कोई आ तो नहीं गया वो भी इतना जल्दी।

अब केश्वर को पहले हल्के में ले रहा था मैं, लेकिन मुझे लगता है केश्वर आगे चलकर बहुत बड़ा खलनायक बनेगा। केश्वर अगर एक प्राणी में भावना डाल सकता है तो वह भगवान ही बन गया एक तरह से। वो चाहे तो तिलिस्म में अपनी खुद की सेना तैयार कर दे।

एक बात कुछ अपडेट में ये भी सामने आई कि तिलिस्म से कुछ जीव बाहर भी गए। सोचो ऐसे अगर भावना वाले जीव तिलिस्म के बाहर चले गए तो आम लोगों का क्या हश्र होगा। इन जीवों के पास तो मैजिकल पावर्स भी हैं।

मुझे लगता है कहानी यहाँ से एक स्तर और ऊपर चली गई है, कहानी का स्केल अब एकदम ग्रैंड लग रहा है।

आगे चलते हैं।
त्रिकाली और व्योम का दृश्य बहुत समय के उपरांत आया है। शुरू में मुझे लगा क्या ये विधुम्न का अध्याय इतना जल्दी समाप्त हो गया, पर मैं ग़लत था। संदेह था ज़रूर यहाँ कि ऐसा कैसे इतना जल्दी, अभी तो बस झलकियाँ दिखीं, ऐसे में ख़त्म इतना जल्दी।

खैर महावृक्ष की प्रशिक्षण इतनी ख़तरनाक थी, विधुम्न कितने ख़तरनाक होने वाले हैं। वैसे भी उसे महादेव का वरदान प्राप्त है तो चुनौती और कठिन।
वैसे मुझे साइंस आती तो नहीं है लेकिन गुरुत्व आकर्षण के नियम ज़रूर समझ आए।

मुझे बस इस चीज़ का समझ नहीं आ रहा कि विधुम्न, त्रिशल, कालिका, व्योम ये लोग अटलांटिक से और स्टोरी के नज़रिए से कनेक्टेड कैसे होंगे, क्योंकि इनका रोल सिर्फ़ वो नीमा गुरुजी का बदला लेने तक तो सीमित नहीं होगा।

आगे मेरे लीजेंडरी प्रेडिक्शन “अल्बर्ट ज़िंदा है शायद” वाली कन्फर्म हो गई।

वैसे क्या पेच डाला है कि अल्बर्ट को पकड़ा ही नहीं पकड़ी तो उसकी जैकेट थी, और गिराया भी पेड़ पर मान गए गुरु।

अब ऐसे ही ब्रैंडन और ब्रूनो मिल जाएँ मज़ा आ जाए।
वैसे ये काली बिल्ली की देवी क्या चीज़ थी। उस द्रव्य में तो कुछ था या नहीं लेकिन उस ब्रैसलेट में ज़रूर कुछ पावर है। वैसे लगता तो नहीं अल्बर्ट काली बिल्ली बन जाएगा क्योंकि उसे लाया गया है मतलब आगे लंबा कुछ काम होगा, इसलिए जहाँ तक लगता है उसको बिल्ली वाली शक्ति मिली होगी, शायद बिल्ली का रूप धारण करने की शक्ति मिल गई।
वैसे अभी अल्बर्ट अगर मयावन में है मतलब वो सम्रा या सेनोर जा सकता है, क्योंकि मयावन तो ख़तरे से खाली नहीं है।

कुल मिलाकर अच्छा अपडेट था।
आगे की प्रतीक्षा।
Wo sab toh theek hai par mein kyu tagged hu!? :Jerry:
 

SHADOW KING

Supreme
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32,824
259
“अद्भुत दिव्यास्त्र"

दोस्तों सर्वप्रथम मैं आप सभी का दिल से आभारी हूं कि आपने इतने कम समय में, मेरे जैसे एक नये लेखक को इतना सारा प्यार दिया।
मैं आशा करता हूं, अपने नेत्रों की कृपा दृष्टि से अभिसिंचित कर मुझे उत्साहित करते रहेंगे।

दोस्तों आज से 200 वर्ष पहले तक सभी लोग देवताओं पर विश्वास करते थे, उन्हें मानते थे और उनकी हृदय से पूजा करते थे।
पर जैसे-जैसे विज्ञान अपने पाँव पसारता गया, ईश्वर की तस्वीर लोगों के समक्ष धुंधली होती चली गई।

बहुत से मनुष्यों को लगने लगा कि इस ब्रह्मांड में ईश्वर का अस्तित्व ही नहीं है, वह सभी तो एक जैविक रचना हैं।

उधर हमारे कुछ धर्मगुरुओं के द्वारा गढ़े गए, झूठे मिथकों ने हमारे अविश्वास को और भी बढ़ा दिया।

हमारे मस्तिष्क में ईश्वर के लिये गलत धारणाएं बनने लगीं। हमें सभी ईश्वरीय कथाएं कपोल-कल्पित लगने लगीं।

विज्ञान का पर्दा हमारी आँखों पर पड़ जाने के बाद, हमने ये भी नहीं सोचा कि क्या हम अभी तक सप्त तत्व को समझ पायें हैं? अग्नि क्या है? क्या जल मात्र एक तत्व है? क्या हवा के कण सिर्फ वायुमण्डल में घूमने के लिये बने हैं? क्या धरती के मूल सिद्धान्तों को हम पूर्णतया समझ चुके हैं? क्या ध्वनि हमारी श्रवणेन्द्रिय में घूमने वाली एक ऊर्जा मात्र है? प्रकाश और आकाश के बारे में तो बात ही क्या करना ? उनकी तो जानकारी भी हमारे पास नगण्य है।

हम अभी आत्मा और मानव शरीर को पूर्णतया नहीं समझे हैं ईश्वर पर प्रश्नचिंह कैसे उठा सकते हैं? क्या कुछ भद्रजनों के द्वारा लिखी गई, काल्पनिक कहानियों से, हम ईश्वर के अस्तित्व को नकार सकते हैं? इस अनन्त ब्रह्मांड के आकार के आगे, हम एक धूल के कण जितने बड़े भी नहीं हैं।

इसलिये हे विज्ञान के पुजारियों, झूठी कहानियों पर विश्वास मत करो.......परंतु ईश्वर के अस्तित्व को चुनौती भी मत दो....... वह निराकार है........वह ब्रह्मांड के कण-कण में व्याप्त है.......उसको ढूंढने के लिये हमको अपने धर्मस्थलों पर जाने की जरुरत नहीं है, उसे ढूंढने के लिये तो हमारा मन और विश्वास ही काफी है।

तो फिर इंतजार किजिए अगले आध्याय का, जो कि बोहोत जल्द शुरु हो रहा है।

तो दोस्तों इन शब्दों के साथ मैं अपना यह लेख यहीं समाप्त करूंगा।
आपका दोस्त "राज शर्मा"
Sahi kaha hai aapne .
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
44,271
80,372
304

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
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304
अद्भुत दिव्यास्त्र"

दोस्तों सर्वप्रथम मैं आप सभी का दिल से आभारी हूं कि आपने इतने कम समय में, मेरे जैसे एक नये लेखक को इतना सारा प्यार दिया।
मैं आशा करता हूं, अपने नेत्रों की कृपा दृष्टि से अभिसिंचित कर मुझे उत्साहित करते रहेंगे।

दोस्तों आज से 200 वर्ष पहले तक सभी लोग देवताओं पर विश्वास करते थे, उन्हें मानते थे और उनकी हृदय से पूजा करते थे।
पर जैसे-जैसे विज्ञान अपने पाँव पसारता गया, ईश्वर की तस्वीर लोगों के समक्ष धुंधली होती चली गई।

बहुत से मनुष्यों को लगने लगा कि इस ब्रह्मांड में ईश्वर का अस्तित्व ही नहीं है, वह सभी तो एक जैविक रचना हैं।

उधर हमारे कुछ धर्मगुरुओं के द्वारा गढ़े गए, झूठे मिथकों ने हमारे अविश्वास को और भी बढ़ा दिया।

हमारे मस्तिष्क में ईश्वर के लिये गलत धारणाएं बनने लगीं। हमें सभी ईश्वरीय कथाएं कपोल-कल्पित लगने लगीं।

विज्ञान का पर्दा हमारी आँखों पर पड़ जाने के बाद, हमने ये भी नहीं सोचा कि क्या हम अभी तक सप्त तत्व को समझ पायें हैं? अग्नि क्या है? क्या जल मात्र एक तत्व है? क्या हवा के कण सिर्फ वायुमण्डल में घूमने के लिये बने हैं? क्या धरती के मूल सिद्धान्तों को हम पूर्णतया समझ चुके हैं? क्या ध्वनि हमारी श्रवणेन्द्रिय में घूमने वाली एक ऊर्जा मात्र है? प्रकाश और आकाश के बारे में तो बात ही क्या करना ? उनकी तो जानकारी भी हमारे पास नगण्य है।

हम अभी आत्मा और मानव शरीर को पूर्णतया नहीं समझे हैं ईश्वर पर प्रश्नचिंह कैसे उठा सकते हैं? क्या कुछ भद्रजनों के द्वारा लिखी गई, काल्पनिक कहानियों से, हम ईश्वर के अस्तित्व को नकार सकते हैं? इस अनन्त ब्रह्मांड के आकार के आगे, हम एक धूल के कण जितने बड़े भी नहीं हैं।

इसलिये हे विज्ञान के पुजारियों, झूठी कहानियों पर विश्वास मत करो.......परंतु ईश्वर के अस्तित्व को चुनौती भी मत दो....... वह निराकार है........वह ब्रह्मांड के कण-कण में व्याप्त है.......उसको ढूंढने के लिये हमको अपने धर्मस्थलों पर जाने की जरुरत नहीं है, उसे ढूंढने के लिये तो हमारा मन और विश्वास ही काफी है।

तो फिर इंतजार किजिए अगले आध्याय का, जो कि बोहोत जल्द शुरु हो रहा है।

तो दोस्तों इन शब्दों के साथ मैं अपना यह लेख यहीं समाप्त करूंगा।
आपका दोस्त "राज शर्मा"

#179.

शक्ति
- एक ऐसा शब्द जिसे प्राप्त करने के लिये, मनुष्य, देवता, दैत्य ही नहीं अपितु अंतरिक्ष के जीव भी सदैव लालायित रहते हैं।

शक्ति का पर्याय स्वामित्व से जुड़ता है, इसलिये ब्रह्मांड के सभी जीव शक्ति को प्राप्त कर, स्वयं को श्रेष्ठ दिखाना चाहते हैं।

वन में मौजूद एक सिंह भी, अन्य वन्य प्राणियों के समक्ष अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने से नहीं चूकता। ठीक उसी प्रकार कुछ देवता भी मनुष्यों के समक्ष, अपना शक्ति प्रदर्शन कर, उनमें भय की भावना उत्पन्न करते रहते हैं।

जैसे देवराज इंद्र के द्वारा जलप्रलय लाना या सूर्यदेव के द्वारा सूखे की स्थिति उत्पन्न कर देना। यह सब भी शक्ति प्रदर्शन के अद्वितीय उदाहरण हैं।

दैत्यों ने हमेशा त्रिदेवों से ही शक्ति प्राप्त कर, उनका प्रयोग देवताओं के ही विरुद्ध किया है। इन शक्तियों को प्राप्त करने के लिये, मनुष्यों ने भी घोर तप किये हैं।

कुछ ऐसी ही देवशक्तियों को, पृथ्वी की सुरक्षा के लिये, देवताओं ने पृथ्वी के अलग-अलग भागों में छिपा दिया, जिससे समय आने पर कुछ दिव्य मानव, उन देव शक्तियों को धारण कर, पृथ्वी की सुरक्षा का भार उठा सकें।

ऐसे ही देवशक्ति धारक कुछ विलक्षण मनुष्य बाद में ब्रह्मांड रक्षक कहलाये।

समयचक्र- डेल्फानो ग्रह समाप्त होने के बाद, वहां के राजा गिरोट ने अपनी सबसे अद्वितीय रचना समयचक्र को पृथ्वी पर फेंक दिया, जो कि ब्लैक होल के सिद्धांतों पर कार्य करती थी।

यह समयचक्र पृथ्वी पर आने के 20 वर्षों तक सुप्तावस्था में रहा। एक दिन अचानक ही यह समयचक्र अपनी शक्तियों से, समय के कई आयामों को बांधने की कोशिश करने लगा।

इस समयचक्र के पास समय और ब्रह्मांड में यात्रा करने की अद्भुत शक्तियां थीं, पर इसी अद्भुत
शक्तियों को प्राप्त करने के लिये कुछ अंतरिक्ष के जीव भी पृथ्वी पर आ गये।

उन जीवों के पास दूसरी आकाशगंगा की अनोखी शक्तियां थीं, जो हमारे विज्ञान की कल्पनाओं से भी परे थीं।

इसी के साथ शुरु हुआ एक अनोखा टकराव, जिससे अनगिनत प्रश्नों की एक श्रृंखला खड़ी हो गई.

1) क्या व्योम और त्रिकाली, विद्युम्ना की जलशक्ति से बने मायाजाल में, देवराज इंद्र के वज्र से बच सके?

2) क्या हुआ जब कालकूट विष से बने नीलाभ को ब्रह्मांड में, महा..देव के पंचमुखी दर्शन हुए?

3) क्या हुआ जब ओरस, स्वयं अपने ही समयचक्र के जाल में फंसकर समययात्रा कर बैठा?

4) क्या सुयश अपने साथियों के साथ तिलिस्मा के मायाजाल में घूम रही पांचों इन्द्रियों को परास्त कर सका?

5) कौन था अष्टकोण में छिपा वह दिव्य बालक, जिसके बारे में कोई नहीं जानता था?

6) क्या हुआ जब देवशक्ति धारक माया का टकराव, ग्रीक देवताओं से हुआ?

7) क्या था महा..देव की अमरकथा का रहस्य, जिसे देव ने देवी पा..ती को सुनाया था?

8) वी…भद्र और भद्रक..ली ने किस प्रकार से नीलाभ की परीक्षा ली?

9) क्या धनवंतरी के आयुर्वेद में सभी रोगों का निदान छिपा था?

10) क्या देवशक्ति धारक योद्धा, डार्क मैटर, नेबुला, ब्लैक होल जैसी शक्तियों से पृथ्वी की रक्षा कर पाये?

तो आइये दोस्तों कुछ ऐसे ही सवालों का जवाब जानने के लिये पढ़ते हैं, विज्ञान और ईश्वरीय शक्ति के मध्य, रहस्य के ताने-बाने से बुना एक ऐसा अविस्मरणीय कथानक, जो आपको मानव शरीर और इन्द्रियों का अद्भुत ज्ञान देगा, जिसका नाम है "अद्भुत दिव्यास्त्र"

चैपटर-1
इंद्रसभा:
(20,005 वर्ष पहले.......) देवराज इंद्र का दरबार, स्वर्गलोक

स्वर्गलोक- एक ऐसा स्थान, जहां जीवित रहते कोई भी मनुष्य नहीं जाना चाहता, पर मृत्यु के उपरांत हर मनुष्य वहीं रहने की कामना करता है।

स्वर्गलोक- पृथ्वी का एक ऐसा भूभाग, जिसके बारे में कोई नहीं जानता, कि वह कहां पर है? एक ऐसा स्थान, जहां देवताओं का निवास है। वह देवता जिन्हें आदित्य भी कहते हैं।

त्रिदेवों ने देओं का राजा इंद्र को चुना था। सूर्य, अग्नि, पवन, वरुण, यम आदि सभी देव इंद्र के साथ मिलकर मनुष्यों की सहायता करते हैं।

इस समय स्वर्गलोक में इंद्र की सभा लगी हुई थी। सभी देव, सिंहासनों पर बैठे हुए थे, पर किसी को यह नहीं पता था कि उन्हें आज यहां किसलिये बुलाया गया है? बस उन्हें इतना बता या गया था, कि यह सभा त्रि..देवों के कहने पर बुलाई गई है, इसलिये सभी धीरे-धीरे आपस में बातें कर रहे थे।

इंद्र भी सभा के मध्य, अपने सिंहासन पर बैठे हुए थे। पर इस समय इंद्र के चेहरे की बेचैनी, ये साफ बता रही थी, कि इस सभा का उद्देश्य उन्हें भी नहीं पता है। सभी के चेहरे पर बेचैनी एवं असमंजस के भाव थे।

आखिरकार गमणेश से रहा नहीं गया और उसने इंद्र से पूछ लिया- “देवराज, हमें यहां बैठे बहुत समय बीत गया है, पर आप तो कुछ बता ही नहीं रहे, कि आपने हम सभी को यहां किसलिये बुलाया है?"

गणे.. के शब्द सुन इंद्र डर गये। अब वो ये भी नहीं कह सकते थे कि उन्हें भी नहीं पता, नहीं तो सभी देवताओं के सामने उनका अपमान हो जाता।

अतः इंद्र ने अपने मस्तिष्क का प्रयोग करते हुए कहा- “कुछ देर और प्रतीक्षा करो गमणेश, त्रि..वों ने हमें कुछ भी बताने से मना किया है, बस वह अब आते ही होंगे। उनके आते ही हम आपको सब कुछ बता देंगे।

इंद्र की बात सुन कार्तिकय जोर से हंस दिया, वो इंद्र का चेहरा देखकर ही जान गया था, कि इंद्र को कुछ नहीं पता?

तभी सभा में एक तीव्र प्रकाशपुंज उत्पन्न हुआ और उस प्रकाशपुंज से त्रि..मदेव प्रकट हो गये।
उन्के आगमन से, सभी के वार्तालापों का भ्रमरगुंजन स्वतः ही समाप्त हो गया। सभी उनके सम्मान में अपने-अपने सिंहासन से खड़े हो गये।

त्रि.देवों के साथ नीलाभ और माया भी थे। गमणेश ने माया को देखकर, अपनी पलकें जोर से झपकाईं।

यह एक प्रकार का शरारत भरा अभिवादन था। माया ने भी मुस्कुराते हुए अपनी पलकें झपका कर गणे.. का अभिवादन स्वीकार कर लिया।

माया को देखकर हनुरमान.. को भी वह नन्हा यति याद आ गया। नन्हें यति को यादकर वह एक पल को सिहर उठे।

त्देवों के साथ नीलाभ और माया को देखकर, इंद्र के चेहरे पर आश्चर्य के भाव आ गये, वह समझ गये कि अवश्य ही कोई अत्यंत महत्वपूर्ण बात है, क्यों कि त्रि..देव आज तक किसी को भी लेकर इंद्रसभा में नहीं आये थे? कुछ ही देर में सभी ने आसन ग्रहण कर लिया।

अब सभी देवताओं की नजर त्र..देवों पर थी, सभी साँस रोके बस उन्हें ही देखे जा रहे थे। भगवान व…ष्णु ने महानदेव को बोलने का इशारा किया।

“देवों आप सभी को भली-भांति पता है, कि पृथ्वी पर युगों को 4 भागों में बांटा गया है- सतयुग, त्रेता युग, द्वापरयुग एवं कलयुग।” महानदेव ने कहा - “पहले 3 युगों में मनुष्य हमारे अस्तित्व को स्वीकार करता है, वह वेद के माध्यम से देवताओं की आराधना करता है, जिसके फलस्वरुप देवता उसे आशीर्वाद देते हैं और उसे असुरों से सुरक्षा प्रदान करते हैं। परंतु कलयुग में मनुष्य हमारे अस्तित्व को नकार देता है। हम स्वयं भी इन्हीं कारणों से मनुष्यों से दूरी बना लेते हैं, परंतु फिर भी हमें उनकी सुरक्षा का दायित्व लेना पड़ता है।

“कलयुग में मनुष्यों की तकनीक इतनी ज्यादा उन्नत हो जाती है कि वह ब्रह्मांड के अन्य ग्रहों की ओर भी झांकना शुरु कर देते हैं और मनुष्यों की यह क्रिया, प्रत्येक बार उनके विनाश का कारण बनती है। ऐसे समय में हम स्वयं भी, उन मनुष्यों की किसी भी प्रकार से सुरक्षा नहीं कर पाते। इसलिये हमने कलयुग में भी मनुष्यों की रक्षा के लिये एक अनूठा उपाय सोचा है। हम चाहते हैं कि हम सभी देव, अपनी एक देवशक्ति को किसी ऐसे मनुष्य को प्रदान करें, जो कि ब्रह्मांड रक्षक बनकर कलयुग में, हमारी अनुपस्थिति में भी, मनुष्यों की रक्षा कर सके।" यह कहकर महानदेव शांत हो गये।

“पर ..देव, हम ऐसे मनुष्यों का चयन कैसे करेंगे? जो हमारी शक्ति को धारण कर ब्रह्मांड रक्षक का कार्य भली-भांति कर सके।” इंद्र ने परेशान होते हुए कहा।

“और ..देव ऐसे मनुष्यों के चयन में तो हजारों वर्ष लग सकते हैं और फिर हम उनकी परीक्षा कैसे लेंगे? कि वह देवशक्ति को धारण करने योग्य हैं कि नहीं?” सूर्य ने कहा।

"हमें पता है कि यह कार्य इतना आसान नहीं है। ब्रह्म.. ने कहा- “पर इसका भी उपाय हमारे पास है।... आप में से कोई यह बताये कि हमारे पास ऐसा कौन सा ज्ञान का भंडार है? जो कभी खाली नहीं होगा और वह हमेशा सभी मनुष्यों को उचित मार्ग दिखायेगा।"

“वेदों का ज्ञान।” गमणेश ने हाथ उठाते हुए कहा “वही एक ऐसा ज्ञान है, जो कलयुग में भी सभी को उचित मार्ग दिखा सकता है।'

"बिल्कुल सही कहा ..गमणेश ने।” ब्रह..देव ने अपने एक हाथ में पकड़े वेद को सभी को दिखाते हुए कहा "वह वेदों का ज्ञान ही होगा, जिसके द्वारा हम उचित मनुष्य का चुनाव कर सकते हैं और वेदों के ज्ञानार्जन के बाद, वह मनुष्य कभी भी, कलयुग में भी, अपने मार्ग से विमुख नहीं होगा।”

“परंतु ब्रह्म.., इस वेद को समझना मनुष्य के मस्तिष्क से परे होगा।” कार्तिक... ने कहा- “यह तो अत्यंत जटिल भाषा में है, इसे तो मैं स्वयं भी अभी समझने की कोशिश कर रहा हूं।"

“भ्राता श्री, ये मैं आपको अच्छे से समझा दूंगा। मुझे यह बहुत अच्छे से आ गया है।" गमणेश ने अपनी भोली सी भाषा में कहा।

“मुझे तुमसे ज्ञान लेने की जरुरत नहीं है, मैं इसे स्वयं समझ लूंगा।” कर्तिके.. को उनकी बात सुनकर बहुत बुरा लगा। वह अपने छोटे भाई से किसी भी प्रकार का ज्ञान नहीं लेना चाहते थे।

ब्रह्म… ने कार्तिके.. की बात पर ध्यान नहीं दिया और वह पुनः बोले- “तुम सही कह रहे हो, इसकी भाषा अत्यंत जटिल है, परंतु आज से हजारों वर्षों के बाद, जब कलयुग का पृथ्वी पर प्रवेश होने वाला होगा, तो पृथ्वी पर एक ऋषि कृष्ण द्वैपायन का जन्म होगा। वही ऋषि इस 1 वेद को 4 भागों में विभक्त कर, इसे नया आकार देंगे और वेदों के इसी विभाजन के कारण उन्हें महर्षि वेदव्यास के नाम पर जाना जायेगा। वेद व्यास का अभिप्राय ही होगा, वेदों का विभाजन करने वाला। अब रही बात वेदों के इस विभाजन को सरलता देने की, तो मुझे लगता है कि यह कार्य गणे… बहुत आसानी से कर लेंगे। क्यों गमणेश हमने उचित कहा ना?"

“जी देव, आपकी आज्ञा का अक्षरशः पालन होगा।” गणे.. ने सिर झुकाते हुए कहा।

"तो अब बचता है कार्य, मनुष्यों के चयन और उन्हें वेदों का ज्ञान देने का।” तो इसके लिये हम अपने साथ, यहां नीलाभ और माया को लेकर आये हैं। माया निर्माण शक्ति में पूर्ण निपुण है और निर्माण शक्ति के ही माध्यम से, माया पृथ्वी पर अलग-अलग जगहों पर, 15 लोकों का निर्माण करेगी। यह लोक पूर्णतया, एक भव्य नगर की भांति होंगे। इन 15 लोकों में हम 30 अद्भुत शक्तियों को छिपा देंगे और जो मनुष्य वेदों का ज्ञान अर्जित कर, इन 30 शक्तियों को प्राप्त करेगा, उसे ही हम अपनी देवशक्तियां देंगे। अब इसके लिये माया को हिमालय पर, एक विद्यालय 'वेदालय' की रचना भी करनी होगी। जहां पर कुछ चुने हुए मनुष्यों के बालकों को, नीलाभ वेदों के माध्यम से शिक्षा देंगे और उन बालकों को इतना निपुण बनायेंगे कि वह देवशक्ति धारण करने योग्य हो जायें।"

"बालको के हाथ में देवशक्ति देना क्या उचित होगा देव?” पवन ने कहा।

"क्यों नहीं पवनदेव।” ब्रह्म… ने कहा- “वेदालय की प्रतियोगिताएं इतनी दुष्कर होंगी कि आप भी उन्हें सरलता से पूर्ण नहीं कर पायेंगे और अगर वह बालक उसे पूर्ण कर लेते हैं, तो उन्हें देवशक्ति देने में दुविधा ही क्या है?”

“परंतु देव, वह बालक जब तक उन देवशक्तियों का प्रयोग सही से सीखेंगे, तब तक तो वह बूढ़े हो जायेंगे। मनुष्यों की आयु आखिर होती ही कितनी है?" वरुण ने कहा।

"हां, यह बात आपने सही कही वरुणदेव।" ब्रह्म.. ने कहा- “इसी के लिये विद्यालय की पढ़ाई समाप्त होने के पश्चात्, हम उन्हें अमृतपान करायेंगे, जिससे वह भी आप लोगों की तरह, अमृत्व को प्राप्त कर लेंगे और युगों युगों तक निष्पक्ष भाव से ब्रह्मांड रक्षक का कार्य करते रहेंगे।

यह बात सुन कर इंद्र का हृदय कांप गया। वह सोचने लगे कि कहीं वह मनुष्य आगे चलकर, देवशक्तियों की शक्ति से, उनका ही सिंहासन ना छीन लें? परंतु इंद्र जानते थे कि इस समय त्रि..देवों के सामने कुछ भी बोलना सही नहीं है? अन्यथा वह कहीं अभी ही सिंहासन से ना हटा दिये जायें?

यह सोच इंद्र ने वापस देवों की ओर देखना शुरु कर दिया। पर जैसे ही इंद्र की नजरें भगवान वहिष्णु से टकराईं, वह एकाएक सटपटा गये, क्यों कि भगवान ..ष्णु मुस्कुराते हुए उन्हें ही देख रहे थे।

इंद्र को लगा कि जैसे उनकी चोरी पकड़ ली गई हो, इसलिये वह जल्दी से इधर-उधर देखने लगे।

“चलिये अमृतपान भी ठीक है, पर वह विवाह तो करेंगे ना? फिर विवाहोपरांत वह अपने मार्ग से भ्रमित भी हो सकते हैं? उन्हें अपने परिवार की सुरक्षा का भार सर्वोपरि लगने लगेगा। फिर वह ब्रह्मांड रक्षक का भार अपने कंधों पर कैसे उठा पायेंगे?” गुरु बृहस्पति ने कहा।

"नहीं, वह तब तक विवाह नहीं करेंगे, जब तक कि उन्हें स्वयं के समान कोई दूसरा मनुष्य नहीं मिल जाता? जब उन्हें दूसरा मनुष्य मिल जायेगा, तो वह अपनी शक्तियों के साथ, अपना अमरत्व भी दूसरे मनुष्य को दे देंगे और स्वयं विवाह कर, एक साधारण मनुष्य की जिंदगी जी सकेंगे।" ब्रह्देव ने कहा।

"क्या हम उन लोकों के नाम जान सकते हैं ब्देव?” शेषनाग ने कहा।

“अवश्य।” यह कह देव ने उन लोकों के नाम बताना शुरु कर दिया- “देवलोक, शक्ति लोक, राक्षसलोक, ब्रह्म…लोक, नागलोक, माया लोक, हिमलोक, नक्षत्रलोक, पाताललोक, भूलोक, सिंहलोक, रुद्रलोक, यक्षलोक, प्रेतलोक और मत्स्यलोक।"

शेषनाग, नागलोक का नाम सुनकर ही प्रसन्न हो गये।

Jaaari rahega……
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Oh toh kahani ka villan Makota :roll3: hai! Poore aarka 🏝️ dweep par raaj karne ke liye usne Jaigan 🐛 ka sahara liya.

Aakruti 🤵‍♀️ ko Shalaka 👸 banakar usne Lufasa 🦁 aur Sanura 🐈‍⬛ ko bhi behka diya.

Supreme 🛳️ ke Bermuda Triangle mei aane ke baad jo bhi musibate aayi woh kahina kahi usi ke wajah se hai.

Supreme par se sabhi laasho ke gayab hone ka raaz toh woh keede 🐛 hi thay.

Lekin Lufasa 🐀 aur Sanura 🐈‍⬛ ne Aakruti aur Makota ki baate sunn hi li. Shayad ab ab woh sahi raasta chune.

Iss Aarka / Atlantis ke chakkar mei hum Supreme par hue sab se pehle khoon ki baat toh bhool hi gaye Aur kyo Aslam ne jahaaz ko Bermuda Triangle ki taraf moda! Aur Woh Vega ki kahani bhi wahi chhut gayi.
Lekin aaj ke iss update mei kaafi sawaalo ke jawaab mil hi gaye. :cool3:





Badhiya update bhai

To Toffik hi tha jisne sab kiya tha lekin loren ko kyun mar diya usne wo to usse pyar karta tha na or bechari loren bhi uske pyar me andhi hoker uski baten man rahi thi or jis jenith se badla lena chahta tha use abhi tak jinda rakha ha usne usse pyar ka natak karta ja raha ha Jenith ki sab sachhai pata pad gayi ha dekhte han kab tak Toffik babu apni sachhai chhupa pate han waise bure karm ki saja milti hi ha or jis jagah ye sab han usse lagta ha jaise Aslam miya ko saja mili usi prakar Toffik ka bhi number lag sakta ha

उचित समय आने पर, अवश्य ही

चौदह वर्ष पूर्व कलिका - जो दिल्ली के एक मैग्जीन की संपादक थी - ने यक्षलोक के प्रहरी युवान के कठिन सवालों का जो जवाब दिया वह बिल्कुल महाभारत के एक प्रसंग ( युधिष्ठिर और यक्ष संवाद ) की तरह था ।
क्या ही कठिन सवाल थे और क्या ही अद्भुत जवाब थे ! यह सब कैसे कर लेते है आप शर्मा जी ! पहले तो दिमाग मे कठिन सवाल लाना और फिर उस सवाल का जवाब ढूंढना , यह कैसे कर लेते है आप !
यह वाकई मे अद्भुत था । इस अपडेट के लिए आप की जितनी तारीफ की जाए कम है ।

शायद सम्राट शिप से चौदह साल पहले जो शिप बरमूडा ट्राइंगल मे डुब गया था , उस शिप मे ही कलिका की बेटी सफर कर रही होगी । वह लड़की आकृति हो सकती है । वह आकृति जो शलाका का क्लोन धारण कर रखी है ।

दूसरी तरफ सामरा प्रदेश मे व्योम साहब पर कुदरत बहुत ही अधिक मेहरबान हो रखा है । वगैर मांगे छप्पर फाड़ कर कृपा बरसा रहा है । पहले अमृत की प्राप्ति हुई और अब राजकुमारी त्रिकाली का दिल उनपर धड़क गया है ।
मंदिर मे जिस तरह दोनो ने एक दूसरे को रक्षा सूत्र पहनाया , उससे लगता है यह रक्षा सूत्र नही विवाह सूत्र की प्रक्रिया थी ।


इन दो घटनाक्रम के बाद तीसरी तरफ कैस्पर का दिल भी मैग्ना पर मचल उठा है और खास यह है कि यह धड़कन हजारों वर्ष बाद हुआ है । लेकिन सवाल यह है कि मैग्ना है कहां !
कहीं शैफाली ही मैग्ना तो नही ! शैफाली कहीं मैग्ना का पुनर्जन्म तो नही !

कुकुरमुत्ता को छाते की तरह इस्तेमाल करते हुए सुयश साहब और उनकी टीम का तेजाबी बारिश से खुद को रक्षा करना एक और खुबसूरत अपडेट था । पांच लोग बचे हुए हैं और एलेक्स को मिला दिया जाए तो छ लोग । तौफिक साहब की जान जाते जाते बची , लेकिन लगता नही है यह साहब अधिक दिन तक जीवित रह पायेंगे ।
कुछ मिलाकर पांच प्राणी ही सम्राट शिप के जीवित बचेंगे , बशर्ते राइटर साहब ने कुछ खुराफाती न सोच रखा हो ।
ये मिश्रित पांडव जीवित रहने चाहिए पंडित जी ! :D

सभी अपडेट बेहद खुबसूरत थे ।
रोमांच से भरपूर ।
एक अलग तरह की कहानी , एक अद्भुत कहानी ।
और आउटस्टैंडिंग राइटिंग ।

अद्भुत अंक भाई

Nice update ...lambe gap ke karan thoda confusion hai kuch ...lekhak mahodaya ho sake to iska answer dijiyega ...
Gurutva shakti

Ab s
समझ आया आकृति के चेहरा नहीं बदल पाने के कारण.... इसलिए आर्यन भी जल्दी नहीं पहचान पाया उसको....


बहुत ही सुंदर अपडेट

Awesome update and nice story

Nice update....

बहुत ही उम्दा और लाजवाब अपडेट चल रहा है तिलिस्म का !

अदभुद अकल्पनीय इससे अधिक शब्द नहीं हैं व्याख्यान के लिए

Bahut hi shandar update he Raj_sharma Bhai,

Ye Ke-ishwar bhi ab had se jyada chalaki kar raha he.............

Vo nahi chahta ki suyash and party kabhi bhi tilsima bahar ja paye.......vo tilsima ke guards me emotions daal raha he

Jiske karan ab suyash and party ki musibat aur bhi jayda badhne vali he...........

Vyomaur Trikali ne mahavriksh ki pariksha bhi pass kar li...........

Lekin ye abhi ek practice match tha..............asli world cup final to abhi baaki he............

Keep rocking Bro

Nice intro 👏🏻 🎉

Aaj se padhna suru karungi.

यह अपडेट रोमांच, रहस्य और भावनाओं का एक बेहतरीन मिश्रण है। आपने कहानी को दो अलग-अलग कालखंडों में बांटकर इसे बहुत ही दिलचस्प बना दिया है।

झील के नीचे का दृश्य काफी विस्तृत और कल्पनाशील है। मिसगर्न मछली और समुद्री घोड़े के साथ शैफाली का लुका-छिपी का खेल और उसे पकड़ने के लिए लगाया गया उसका दिमाग कहानी में रोमांच पैदा कर रहा है।
जलपरी की मूर्ति, बैंगनी ड्रेस, राजदंड और त्रिशूल वाली जलपरियां एक जादुई माहौल तैयार करती हैं।😃

क्रिस्टी की गलती से सेन्टौर का जाग्रत होना और उसके बाद आया भूकंप कहानी में 'हाई-स्टेक' ड्रामा जोड़ता है। ऐलेक्स के शरीर में चट्टानों का समा जाना एक बड़ा रहस्य पैदा करता है कि क्या वह अब भी ऐलेक्स है या कुछ और बन चुका है।🤔

सुयश का 'कंटक' छूते ही बर्फ बन जाना एक ज़बरदस्त मोड़ है। अब सारी जिम्मेदारी शैफाली और तौफीक पर आ गई है।😎

सुयश का अतीत (Flashback: 1972) कहानी का यह हिस्सा सुयश के चरित्र की गहराई को दर्शाता है। 👍
अयोध्या की पृष्ठभूमि और सूर्यवंशी राजपूत होने का गर्व सुयश के व्यक्तित्व को एक ऐतिहासिक और राजसी आधार देता है।

सूर्य नारायण सिंह और नन्हे सुयश के बीच के संवाद बहुत ही मर्मस्पर्शी हैं। "कलेक्टर" और "कैप्टन" बनने वाली बातचीत बच्चों की मासूमियत को बखूबी दर्शाती है।

सुयश का पहाड़ी से गिरना और साक्षात सूर्यदेव द्वारा उसे बचाया जाना कहानी में 'सुपरनेचुरल' तत्व जोड़ता है। सूर्यदेव का उसे 'पुत्र' कहना यह संकेत देता है कि सुयश के पास कुछ विशेष दैवीय शक्तियां हो सकती हैं, जो शायद वर्तमान के इस संकट (बर्फ बनने वाली स्थिति) से उसे बाहर निकालेंगी।🤔

आपने हिंदी के सरल लेकिन प्रभावशाली शब्दों का प्रयोग किया है। दृश्यों का वर्णन इतना सजीव है कि पाठक के सामने एक फिल्म की तरह दृश्य चलने लगते हैं। विशेष रूप से बर्फ की गिरती चट्टानें और पानी के भीतर का तिलिस्म प्रभावी ढंग से लिखा गया है।:bow:

कुछ अनसुलझे सवाल (जो उत्सुकता बढ़ाते हैं)
* क्या ऐलेक्स अब इन चट्टानों की शक्ति को सोख रहा है?
* सुयश बर्फ बन गया है, तो क्या उसका 'सूर्यपुत्र' होना उसे पिघलाने में मदद करेगा?
* उस बैंगनी ड्रेस वाली परी के राजदंड में क्या राज है?
निष्कर्ष:
यह अपडेट कहानी को एक निर्णायक मोड़ पर ले आया है। एक तरफ वर्तमान की जानलेवा मुसीबत है और दूसरी तरफ सुयश के 'सूर्यपुत्र' होने का रहस्य। भाई वाह, मजा आ गया 👌🏻👌🏻👌🏻

Bhut hi jabardast update bhai
To albert bhi us terosor se bach gaya tha
Aage dhekte hai us patr ke jal aur us bracelet ka kya rahasya hai ye to aage pata chalega

Ab intezar rahega agle bhag ka jisme hame in sawalo ka jawab milega

Nice update💯
Dekhte hai Albert kya kya krta hai aage

Shaandar update

Bahut hi shaandar update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and lovely update....

Shandar update bhai

nice update

अच्छी बात यह है कि अल्बर्ट बच गया है और अपनी ख़ुराफ़ात जारी रख रहा है।
पढ़ कर ऐसा लगा कि सुपर कमाण्डो ध्रुव वाली एक बेहद पुरानी कहानी - 'आदमखोरों का स्वर्ग' जैसा कुछ होगा।
लेकिन निराशा हाथ लगी :) हा हा!

इस अपडेट से एक और बात सूझती है कि क्या पुराने 'मर गए' किरदार भी वापस आ सकते हैं?

इस अपडेट में इक्यावन प्रश्न हैं - इतने तो एग्जाम में भी नहीं हल किए।
लिहाज़ा प्रश्नों को पढ़ने की ज़हमत नहीं उठाई मैंने।

अब तो सीधे अगले अपडेट में मिलेंगे जहाँ दिव्यास्त्रों की बातें होंगी - जैसे अभी कोई कम दिव्य शक्तियों की बातें हो रही थीं।
:tongue: :tongue: :tongue:

Lovely update.albert terosor se to Bach Gaya par kuwe me fans gaya. Apne khurafati dimag se devi ka pani aur bracelet pehenke dekha par koi natija nahi dikha par lagta hai aage jaake koi effect dikh jaaye ..
waise sawal to bahut bache hai jiska jikr kiya writer ne par aakhri panktiyan padhkar maja aa gaya.

Nice update....

फिर से एक अप्रतिम रोमांचक अद्भुत और विस्मयकारी अपडेट है भाई मजा आ गया

Wonderful update brother, jab Suyash ne kaha tha ki ab Albert bhi ab hume chhod kar chale gaye the tab mujhe pata nahi kyun vishwas nahi hua tha, aaj phir se update ko jinda dekh kar achha laga. Ye Albert toh Crist ke boyfriend se bhi jyada takatwar ban kar wapas aaya hai story mein aisa lag raha hai, mujhe ye bhi feel ho raha hai ki isne hi Jenith/Cristy ko aag ki dariya mein girne se bachaya hai.

Sahi kaha hai aapne .

Raj_sharma next update kab aaraha hain

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parkas

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शक्ति
- एक ऐसा शब्द जिसे प्राप्त करने के लिये, मनुष्य, देवता, दैत्य ही नहीं अपितु अंतरिक्ष के जीव भी सदैव लालायित रहते हैं।

शक्ति का पर्याय स्वामित्व से जुड़ता है, इसलिये ब्रह्मांड के सभी जीव शक्ति को प्राप्त कर, स्वयं को श्रेष्ठ दिखाना चाहते हैं।

वन में मौजूद एक सिंह भी, अन्य वन्य प्राणियों के समक्ष अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने से नहीं चूकता। ठीक उसी प्रकार कुछ देवता भी मनुष्यों के समक्ष, अपना शक्ति प्रदर्शन कर, उनमें भय की भावना उत्पन्न करते रहते हैं।

जैसे देवराज इंद्र के द्वारा जलप्रलय लाना या सूर्यदेव के द्वारा सूखे की स्थिति उत्पन्न कर देना। यह सब भी शक्ति प्रदर्शन के अद्वितीय उदाहरण हैं।

दैत्यों ने हमेशा त्रिदेवों से ही शक्ति प्राप्त कर, उनका प्रयोग देवताओं के ही विरुद्ध किया है। इन शक्तियों को प्राप्त करने के लिये, मनुष्यों ने भी घोर तप किये हैं।

कुछ ऐसी ही देवशक्तियों को, पृथ्वी की सुरक्षा के लिये, देवताओं ने पृथ्वी के अलग-अलग भागों में छिपा दिया, जिससे समय आने पर कुछ दिव्य मानव, उन देव शक्तियों को धारण कर, पृथ्वी की सुरक्षा का भार उठा सकें।

ऐसे ही देवशक्ति धारक कुछ विलक्षण मनुष्य बाद में ब्रह्मांड रक्षक कहलाये।

समयचक्र- डेल्फानो ग्रह समाप्त होने के बाद, वहां के राजा गिरोट ने अपनी सबसे अद्वितीय रचना समयचक्र को पृथ्वी पर फेंक दिया, जो कि ब्लैक होल के सिद्धांतों पर कार्य करती थी।

यह समयचक्र पृथ्वी पर आने के 20 वर्षों तक सुप्तावस्था में रहा। एक दिन अचानक ही यह समयचक्र अपनी शक्तियों से, समय के कई आयामों को बांधने की कोशिश करने लगा।

इस समयचक्र के पास समय और ब्रह्मांड में यात्रा करने की अद्भुत शक्तियां थीं, पर इसी अद्भुत
शक्तियों को प्राप्त करने के लिये कुछ अंतरिक्ष के जीव भी पृथ्वी पर आ गये।

उन जीवों के पास दूसरी आकाशगंगा की अनोखी शक्तियां थीं, जो हमारे विज्ञान की कल्पनाओं से भी परे थीं।

इसी के साथ शुरु हुआ एक अनोखा टकराव, जिससे अनगिनत प्रश्नों की एक श्रृंखला खड़ी हो गई.

1) क्या व्योम और त्रिकाली, विद्युम्ना की जलशक्ति से बने मायाजाल में, देवराज इंद्र के वज्र से बच सके?

2) क्या हुआ जब कालकूट विष से बने नीलाभ को ब्रह्मांड में, महा..देव के पंचमुखी दर्शन हुए?

3) क्या हुआ जब ओरस, स्वयं अपने ही समयचक्र के जाल में फंसकर समययात्रा कर बैठा?

4) क्या सुयश अपने साथियों के साथ तिलिस्मा के मायाजाल में घूम रही पांचों इन्द्रियों को परास्त कर सका?

5) कौन था अष्टकोण में छिपा वह दिव्य बालक, जिसके बारे में कोई नहीं जानता था?

6) क्या हुआ जब देवशक्ति धारक माया का टकराव, ग्रीक देवताओं से हुआ?

7) क्या था महा..देव की अमरकथा का रहस्य, जिसे देव ने देवी पा..ती को सुनाया था?

8) वी…भद्र और भद्रक..ली ने किस प्रकार से नीलाभ की परीक्षा ली?

9) क्या धनवंतरी के आयुर्वेद में सभी रोगों का निदान छिपा था?

10) क्या देवशक्ति धारक योद्धा, डार्क मैटर, नेबुला, ब्लैक होल जैसी शक्तियों से पृथ्वी की रक्षा कर पाये?

तो आइये दोस्तों कुछ ऐसे ही सवालों का जवाब जानने के लिये पढ़ते हैं, विज्ञान और ईश्वरीय शक्ति के मध्य, रहस्य के ताने-बाने से बुना एक ऐसा अविस्मरणीय कथानक, जो आपको मानव शरीर और इन्द्रियों का अद्भुत ज्ञान देगा, जिसका नाम है "अद्भुत दिव्यास्त्र"

चैपटर-1
इंद्रसभा:
(20,005 वर्ष पहले.......) देवराज इंद्र का दरबार, स्वर्गलोक

स्वर्गलोक- एक ऐसा स्थान, जहां जीवित रहते कोई भी मनुष्य नहीं जाना चाहता, पर मृत्यु के उपरांत हर मनुष्य वहीं रहने की कामना करता है।

स्वर्गलोक- पृथ्वी का एक ऐसा भूभाग, जिसके बारे में कोई नहीं जानता, कि वह कहां पर है? एक ऐसा स्थान, जहां देवताओं का निवास है। वह देवता जिन्हें आदित्य भी कहते हैं।

त्रिदेवों ने देओं का राजा इंद्र को चुना था। सूर्य, अग्नि, पवन, वरुण, यम आदि सभी देव इंद्र के साथ मिलकर मनुष्यों की सहायता करते हैं।

इस समय स्वर्गलोक में इंद्र की सभा लगी हुई थी। सभी देव, सिंहासनों पर बैठे हुए थे, पर किसी को यह नहीं पता था कि उन्हें आज यहां किसलिये बुलाया गया है? बस उन्हें इतना बता या गया था, कि यह सभा त्रि..देवों के कहने पर बुलाई गई है, इसलिये सभी धीरे-धीरे आपस में बातें कर रहे थे।

इंद्र भी सभा के मध्य, अपने सिंहासन पर बैठे हुए थे। पर इस समय इंद्र के चेहरे की बेचैनी, ये साफ बता रही थी, कि इस सभा का उद्देश्य उन्हें भी नहीं पता है। सभी के चेहरे पर बेचैनी एवं असमंजस के भाव थे।

आखिरकार गमणेश से रहा नहीं गया और उसने इंद्र से पूछ लिया- “देवराज, हमें यहां बैठे बहुत समय बीत गया है, पर आप तो कुछ बता ही नहीं रहे, कि आपने हम सभी को यहां किसलिये बुलाया है?"

गणे.. के शब्द सुन इंद्र डर गये। अब वो ये भी नहीं कह सकते थे कि उन्हें भी नहीं पता, नहीं तो सभी देवताओं के सामने उनका अपमान हो जाता।

अतः इंद्र ने अपने मस्तिष्क का प्रयोग करते हुए कहा- “कुछ देर और प्रतीक्षा करो गमणेश, त्रि..वों ने हमें कुछ भी बताने से मना किया है, बस वह अब आते ही होंगे। उनके आते ही हम आपको सब कुछ बता देंगे।

इंद्र की बात सुन कार्तिकय जोर से हंस दिया, वो इंद्र का चेहरा देखकर ही जान गया था, कि इंद्र को कुछ नहीं पता?

तभी सभा में एक तीव्र प्रकाशपुंज उत्पन्न हुआ और उस प्रकाशपुंज से त्रि..मदेव प्रकट हो गये।
उन्के आगमन से, सभी के वार्तालापों का भ्रमरगुंजन स्वतः ही समाप्त हो गया। सभी उनके सम्मान में अपने-अपने सिंहासन से खड़े हो गये।

त्रि.देवों के साथ नीलाभ और माया भी थे। गमणेश ने माया को देखकर, अपनी पलकें जोर से झपकाईं।

यह एक प्रकार का शरारत भरा अभिवादन था। माया ने भी मुस्कुराते हुए अपनी पलकें झपका कर गणे.. का अभिवादन स्वीकार कर लिया।

माया को देखकर हनुरमान.. को भी वह नन्हा यति याद आ गया। नन्हें यति को यादकर वह एक पल को सिहर उठे।

त्देवों के साथ नीलाभ और माया को देखकर, इंद्र के चेहरे पर आश्चर्य के भाव आ गये, वह समझ गये कि अवश्य ही कोई अत्यंत महत्वपूर्ण बात है, क्यों कि त्रि..देव आज तक किसी को भी लेकर इंद्रसभा में नहीं आये थे? कुछ ही देर में सभी ने आसन ग्रहण कर लिया।

अब सभी देवताओं की नजर त्र..देवों पर थी, सभी साँस रोके बस उन्हें ही देखे जा रहे थे। भगवान व…ष्णु ने महानदेव को बोलने का इशारा किया।

“देवों आप सभी को भली-भांति पता है, कि पृथ्वी पर युगों को 4 भागों में बांटा गया है- सतयुग, त्रेता युग, द्वापरयुग एवं कलयुग।” महानदेव ने कहा - “पहले 3 युगों में मनुष्य हमारे अस्तित्व को स्वीकार करता है, वह वेद के माध्यम से देवताओं की आराधना करता है, जिसके फलस्वरुप देवता उसे आशीर्वाद देते हैं और उसे असुरों से सुरक्षा प्रदान करते हैं। परंतु कलयुग में मनुष्य हमारे अस्तित्व को नकार देता है। हम स्वयं भी इन्हीं कारणों से मनुष्यों से दूरी बना लेते हैं, परंतु फिर भी हमें उनकी सुरक्षा का दायित्व लेना पड़ता है।

“कलयुग में मनुष्यों की तकनीक इतनी ज्यादा उन्नत हो जाती है कि वह ब्रह्मांड के अन्य ग्रहों की ओर भी झांकना शुरु कर देते हैं और मनुष्यों की यह क्रिया, प्रत्येक बार उनके विनाश का कारण बनती है। ऐसे समय में हम स्वयं भी, उन मनुष्यों की किसी भी प्रकार से सुरक्षा नहीं कर पाते। इसलिये हमने कलयुग में भी मनुष्यों की रक्षा के लिये एक अनूठा उपाय सोचा है। हम चाहते हैं कि हम सभी देव, अपनी एक देवशक्ति को किसी ऐसे मनुष्य को प्रदान करें, जो कि ब्रह्मांड रक्षक बनकर कलयुग में, हमारी अनुपस्थिति में भी, मनुष्यों की रक्षा कर सके।" यह कहकर महानदेव शांत हो गये।

“पर ..देव, हम ऐसे मनुष्यों का चयन कैसे करेंगे? जो हमारी शक्ति को धारण कर ब्रह्मांड रक्षक का कार्य भली-भांति कर सके।” इंद्र ने परेशान होते हुए कहा।

“और ..देव ऐसे मनुष्यों के चयन में तो हजारों वर्ष लग सकते हैं और फिर हम उनकी परीक्षा कैसे लेंगे? कि वह देवशक्ति को धारण करने योग्य हैं कि नहीं?” सूर्य ने कहा।

"हमें पता है कि यह कार्य इतना आसान नहीं है। ब्रह्म.. ने कहा- “पर इसका भी उपाय हमारे पास है।... आप में से कोई यह बताये कि हमारे पास ऐसा कौन सा ज्ञान का भंडार है? जो कभी खाली नहीं होगा और वह हमेशा सभी मनुष्यों को उचित मार्ग दिखायेगा।"

“वेदों का ज्ञान।” गमणेश ने हाथ उठाते हुए कहा “वही एक ऐसा ज्ञान है, जो कलयुग में भी सभी को उचित मार्ग दिखा सकता है।'

"बिल्कुल सही कहा ..गमणेश ने।” ब्रह..देव ने अपने एक हाथ में पकड़े वेद को सभी को दिखाते हुए कहा "वह वेदों का ज्ञान ही होगा, जिसके द्वारा हम उचित मनुष्य का चुनाव कर सकते हैं और वेदों के ज्ञानार्जन के बाद, वह मनुष्य कभी भी, कलयुग में भी, अपने मार्ग से विमुख नहीं होगा।”

“परंतु ब्रह्म.., इस वेद को समझना मनुष्य के मस्तिष्क से परे होगा।” कार्तिक... ने कहा- “यह तो अत्यंत जटिल भाषा में है, इसे तो मैं स्वयं भी अभी समझने की कोशिश कर रहा हूं।"


“भ्राता श्री, ये मैं आपको अच्छे से समझा दूंगा। मुझे यह बहुत अच्छे से आ गया है।" गमणेश ने अपनी भोली सी भाषा में कहा।

“मुझे तुमसे ज्ञान लेने की जरुरत नहीं है, मैं इसे स्वयं समझ लूंगा।” कर्तिके.. को उनकी बात सुनकर बहुत बुरा लगा। वह अपने छोटे भाई से किसी भी प्रकार का ज्ञान नहीं लेना चाहते थे।

ब्रह्म… ने कार्तिके.. की बात पर ध्यान नहीं दिया और वह पुनः बोले- “तुम सही कह रहे हो, इसकी भाषा अत्यंत जटिल है, परंतु आज से हजारों वर्षों के बाद, जब कलयुग का पृथ्वी पर प्रवेश होने वाला होगा, तो पृथ्वी पर एक ऋषि कृष्ण द्वैपायन का जन्म होगा। वही ऋषि इस 1 वेद को 4 भागों में विभक्त कर, इसे नया आकार देंगे और वेदों के इसी विभाजन के कारण उन्हें महर्षि वेदव्यास के नाम पर जाना जायेगा। वेद व्यास का अभिप्राय ही होगा, वेदों का विभाजन करने वाला। अब रही बात वेदों के इस विभाजन को सरलता देने की, तो मुझे लगता है कि यह कार्य गणे… बहुत आसानी से कर लेंगे। क्यों गमणेश हमने उचित कहा ना?"

“जी देव, आपकी आज्ञा का अक्षरशः पालन होगा।” गणे.. ने सिर झुकाते हुए कहा।

"तो अब बचता है कार्य, मनुष्यों के चयन और उन्हें वेदों का ज्ञान देने का।” तो इसके लिये हम अपने साथ, यहां नीलाभ और माया को लेकर आये हैं। माया निर्माण शक्ति में पूर्ण निपुण है और निर्माण शक्ति के ही माध्यम से, माया पृथ्वी पर अलग-अलग जगहों पर, 15 लोकों का निर्माण करेगी। यह लोक पूर्णतया, एक भव्य नगर की भांति होंगे। इन 15 लोकों में हम 30 अद्भुत शक्तियों को छिपा देंगे और जो मनुष्य वेदों का ज्ञान अर्जित कर, इन 30 शक्तियों को प्राप्त करेगा, उसे ही हम अपनी देवशक्तियां देंगे। अब इसके लिये माया को हिमालय पर, एक विद्यालय 'वेदालय' की रचना भी करनी होगी। जहां पर कुछ चुने हुए मनुष्यों के बालकों को, नीलाभ वेदों के माध्यम से शिक्षा देंगे और उन बालकों को इतना निपुण बनायेंगे कि वह देवशक्ति धारण करने योग्य हो जायें।"

"बालको के हाथ में देवशक्ति देना क्या उचित होगा देव?” पवन ने कहा।

"क्यों नहीं पवनदेव।” ब्रह्म… ने कहा- “वेदालय की प्रतियोगिताएं इतनी दुष्कर होंगी कि आप भी उन्हें सरलता से पूर्ण नहीं कर पायेंगे और अगर वह बालक उसे पूर्ण कर लेते हैं, तो उन्हें देवशक्ति देने में दुविधा ही क्या है?”

“परंतु देव, वह बालक जब तक उन देवशक्तियों का प्रयोग सही से सीखेंगे, तब तक तो वह बूढ़े हो जायेंगे। मनुष्यों की आयु आखिर होती ही कितनी है?" वरुण ने कहा।

"हां, यह बात आपने सही कही वरुणदेव।" ब्रह्म.. ने कहा- “इसी के लिये विद्यालय की पढ़ाई समाप्त होने के पश्चात्, हम उन्हें अमृतपान करायेंगे, जिससे वह भी आप लोगों की तरह, अमृत्व को प्राप्त कर लेंगे और युगों युगों तक निष्पक्ष भाव से ब्रह्मांड रक्षक का कार्य करते रहेंगे।

यह बात सुन कर इंद्र का हृदय कांप गया। वह सोचने लगे कि कहीं वह मनुष्य आगे चलकर, देवशक्तियों की शक्ति से, उनका ही सिंहासन ना छीन लें? परंतु इंद्र जानते थे कि इस समय त्रि..देवों के सामने कुछ भी बोलना सही नहीं है? अन्यथा वह कहीं अभी ही सिंहासन से ना हटा दिये जायें?

यह सोच इंद्र ने वापस देवों की ओर देखना शुरु कर दिया। पर जैसे ही इंद्र की नजरें भगवान वहिष्णु से टकराईं, वह एकाएक सटपटा गये, क्यों कि भगवान ..ष्णु मुस्कुराते हुए उन्हें ही देख रहे थे।

इंद्र को लगा कि जैसे उनकी चोरी पकड़ ली गई हो, इसलिये वह जल्दी से इधर-उधर देखने लगे।

“चलिये अमृतपान भी ठीक है, पर वह विवाह तो करेंगे ना? फिर विवाहोपरांत वह अपने मार्ग से भ्रमित भी हो सकते हैं? उन्हें अपने परिवार की सुरक्षा का भार सर्वोपरि लगने लगेगा। फिर वह ब्रह्मांड रक्षक का भार अपने कंधों पर कैसे उठा पायेंगे?” गुरु बृहस्पति ने कहा।

"नहीं, वह तब तक विवाह नहीं करेंगे, जब तक कि उन्हें स्वयं के समान कोई दूसरा मनुष्य नहीं मिल जाता? जब उन्हें दूसरा मनुष्य मिल जायेगा, तो वह अपनी शक्तियों के साथ, अपना अमरत्व भी दूसरे मनुष्य को दे देंगे और स्वयं विवाह कर, एक साधारण मनुष्य की जिंदगी जी सकेंगे।" ब्रह्देव ने कहा।

"क्या हम उन लोकों के नाम जान सकते हैं ब्देव?” शेषनाग ने कहा।

“अवश्य।” यह कह देव ने उन लोकों के नाम बताना शुरु कर दिया- “देवलोक, शक्ति लोक, राक्षसलोक, ब्रह्म…लोक, नागलोक, माया लोक, हिमलोक, नक्षत्रलोक, पाताललोक, भूलोक, सिंहलोक, रुद्रलोक, यक्षलोक, प्रेतलोक और मत्स्यलोक।"

शेषनाग, नागलोक का नाम सुनकर ही प्रसन्न हो गये।

Jaaari rahega……
Bahut hi badhiya update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and beautiful update....
 
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