थ्रेट परसेप्सन
अब बात एन टी आर ओ वाले सज्जन ने शुरू कि थ्रेट परसेप्सन- साउंड सिक्योरटी, सिग्नल और एयर।
कुछ बाते मैंने भी शेयर की,
तय हुआ की दीवालों में स्टोन वूल और ग्लास वूल अंदर दो लेयर कम से कम हों परफेक्ट साउंड और वर्क काम्प्लेक्स के चारो और जो दीवाल हो उसमें भी मल्टीपल लेयर साउंड प्रूफिंग की हो, और अब बात इलेक्ट्रॉनिक्स वारफेयर और काउंटर मेजर की शुरू हुयी तो हेजल मैदान में आ गयी।
लीनियर फ्रीकवेंसी मॉडुलेशन, हॉपिंग और न जाने क्या लेकिन सबसे बड़ी बात जो मेरी समझ में आयी वो ये थी की जो सिग्नल हमारे सिंग्नल कैप्चर करेंगे उनपर पिग्गीबैंक कर के हम उन के सोर्सेज तक कैसे पहुँच सकते हैं और उसे कैसे न्यूटलाइज कर सकते हैं।
एन्क्रिप्शन और डिक्रिप्शन के बारे में जो जो क्रिप्टोलिएजिस्ट ने कहा वह सब मान लिया गया।
एक बात मैंने भी कही, जो मान भी ली गयी।
पहले था की वर्क एरिया में सी सी टीवी जो मैंने मना किया , कोई भी सी सी टीवी होगा उसकी फीड होगी तो उसे हैक किया जा सकता है और कम्प्यूटर भी नेटवर्क न हों, और हों भी तो लोकल एरिया नेटवर्क जिसे प्रोटेक्ट करना आसान हो, उस एरिया में वैसे भी स्मार्ट फोन मना था, बल्कि इनर फेन्स के अंदर ही मना था, हम लोगों के फोन आउटर फेन्स पर ही रखवा लिए गए थे।
अब एक सवाल आया एरियल सर्वेलेंस का सेटलाइट और ड्रोन,
एंटी ड्रोन मेजर्स तो आउटर फेन्स पर ही लगाने होंगे आई बी वाले सज्जन ने फैसला सुना दिया लेकिन सेटलाइट से यहाँ इतनी हेक्टिक एक्टिविटी दिखेगी और पुरानी इमेजरी गूगल अर्थ की डिटेल्ड इमेज से कम्पेयर करने पर पता चलेगा,
एन टी आर ओ वाले ने थोड़ा सा हल तो निकाला उन लोगों ने ड्रोन से और सेटलाइट से इस इलाके का एक डिटेल्ड मैप बनाया था क्या उसी तरह का एक होलोग्राफिक इमेज बना के सैटलाइट्स को कुछ कन्फ्यूज किया जा सकता है। ये काम उनके और हेजेल के ऊपर छोड़ा गया और पांच दिन का टारगेट तय हुआ।
लेकिन सबसे बड़ी बात मेरा एक काम होगया।
एक सिक्योर कम्युनिकेशन सेंटर, मैंने जो अमेरिकन कौंसुलेट में कम्युनिएकशन सेंटर देखा था जिसे कैसे भी हैक नहीं किया जा सकता था मैंने उसे डिस्क्राइब करना शुरू ही किया था की हैजेल ने टोक दिया
" अमेरिकन एम्बेसी के सेंटर की तरह, लेकिन उसके काउंटर मेजर्स यहाँ नहीं मिलेंगे मैं स्टेटस से तीन चार दिन में भिजवाती हूँ , और उसमें एक इम्प्रूवमेंट हैं स्क्रैम्ब्लर के कोड हर बारह घंटे में रैंडमली चेंज होते हैं इसलिए उसे डिकोड करना मुश्किल है।
जो क्रिप्टोलैजिस्ट थे उन्होंने कुछ और चेंज सजेस्ट किया और तय हुआ की फिजिकल स्ट्रक्चर तीन दिन में बन जाएगा और अगले दिन में कम्युनिकेशन डिवाइसेज लग जायेगीं और छह दिन बाद उसी सेंटर में मीटिंग होगी, जिसमें मीटिंग रूम, आफिस, एक दो स्यूट और कामयियनिकेशन सेंटर होग।
अगली मीटिंग कस्ट्रक्शन कांट्रेक्टर्स से थी जिसमे मेरी जरूरत नहीं थी।