भाग २४५ गीता और गाजर वाला
३६,२२,४६६
और वो सब्जी का ठेला, कल जहाँ गाजर बिक रही थी , आज भी वही और सामने खड़ी गीता मोल भाव कर रही थी, गुड्डी के रहते तो गीता का पूरा ध्यान गुड्डी के पीछे ही पड़ा रहता था, लेकिन अब गुड्डी के जाने के बाद वो भी,…
मैंने नोट किया मेरे घर की पूरी चाभी का गुच्छा, गीता की कमर पे लटक रहा था, पल्लू से बंधा,
मुझे देख के वो एकदम सुबह की धूप की तरह खिल गयी, बोली, “ भैया भाभी घर पे नहीं है। काहें जल्दी मचाये हो।“
और अब मैं गीता के साथ उसी गाजर वाले सब्जी के ठेले के पास, और गीता ने मुझे समझाया
" भैया भाभी तो सुजाता भाभी के यहाँ गयी है कउनो अर्जेन्टी मीटिंग थी घंटा भर बाद आएँगी। हमसे बोल के गयीं हैं , तोहार भैया आफिस से थका मांदा आयेंगे तो तनी चाय वाय,… जो ओनकर मन करे पीयाय दिहु, हमहू बोले की हमार भैया हमार मर्जी जॉन मन करे तौन पियाइब। और थकान का पक्का इलाज कर देब, रात भर भौजी, तोहरे साथ कबड्डी खेलिहें। तो अभी हम चल रहे तोहरे साथ, तानी ये सब्जी ले लें। "
और गाजर के दूकान वाले पर पिल पड़ी
" ससुर के नाती, जउन मोट लम्बी गाजर रहे कुल अपनी बहिनी क बिल के लिए बचाय के रखे हो का, चुन चुन के सबसे लम्बी, सबसे मोटी दो …छोट मोट में हमें मजा ना आवत , और सामने ही रहती हूँ। गीता नाम है मेरा। "
मैं खड़ा गीता की बदमाशी और उसका मस्त पिछवाड़ा देख रहा था।
और सोच रहा था,
दिमाग अब दही हो रहा था , एकदम सर टनटना रहा था.
मुम्बई से चलने से पहले सिर्फ एक चिंता थी गुड्डी से मुलाकात हो पाएगी नहीं, कहीं फ्लाइट लेट हो गयी, कहीं एयरपोर्ट से घर पहुँचने तक ट्रैफिक जाम में फंस गया लेकिन
पहले एयरपोर्ट पर लॉबी में 'उनसे' मुलाकात के बाद जो सिलसिला शुरू हुआ की,.. पहले लग रहा था अब हम लोगों ने जंग जीत ली है और अब सिर्फ मस्ती और आराम, लेकिन
वो रिपोर्ट जो मिली कि कोई है जो वैसे तो मुझे ठरकी समझता है लेकिन थोड़ा बहुत शक है और घर पहुँचने के बाद, गुड्डी तो मिल गयी, बिन बोले बात भी बहुत हो गयी, लेकिन
सर्वेलेंस जो अभी अंग्रेजी जासूसी किताबो में पढ़ा था या फिल्मो में देखा था, फिजिकल और साइबर,... वो कीड़ा मारक यंत्र से साफ़ था घर के किसी भी कोने में बात करने से हर बात जो कोई भी है वहां तक बात पहुँच जायेगी, फोन लैप टॉप सब हैक, आफिस की हालत भी वही, ... और ये दुकान वाला ठीक घर के समाने और फिर फ़ूड ट्रक वो भी सरवायलेंस का ही हिस्सा, ...
३६,२२,४६६
और वो सब्जी का ठेला, कल जहाँ गाजर बिक रही थी , आज भी वही और सामने खड़ी गीता मोल भाव कर रही थी, गुड्डी के रहते तो गीता का पूरा ध्यान गुड्डी के पीछे ही पड़ा रहता था, लेकिन अब गुड्डी के जाने के बाद वो भी,…
मैंने नोट किया मेरे घर की पूरी चाभी का गुच्छा, गीता की कमर पे लटक रहा था, पल्लू से बंधा,
मुझे देख के वो एकदम सुबह की धूप की तरह खिल गयी, बोली, “ भैया भाभी घर पे नहीं है। काहें जल्दी मचाये हो।“
और अब मैं गीता के साथ उसी गाजर वाले सब्जी के ठेले के पास, और गीता ने मुझे समझाया
" भैया भाभी तो सुजाता भाभी के यहाँ गयी है कउनो अर्जेन्टी मीटिंग थी घंटा भर बाद आएँगी। हमसे बोल के गयीं हैं , तोहार भैया आफिस से थका मांदा आयेंगे तो तनी चाय वाय,… जो ओनकर मन करे पीयाय दिहु, हमहू बोले की हमार भैया हमार मर्जी जॉन मन करे तौन पियाइब। और थकान का पक्का इलाज कर देब, रात भर भौजी, तोहरे साथ कबड्डी खेलिहें। तो अभी हम चल रहे तोहरे साथ, तानी ये सब्जी ले लें। "
और गाजर के दूकान वाले पर पिल पड़ी
" ससुर के नाती, जउन मोट लम्बी गाजर रहे कुल अपनी बहिनी क बिल के लिए बचाय के रखे हो का, चुन चुन के सबसे लम्बी, सबसे मोटी दो …छोट मोट में हमें मजा ना आवत , और सामने ही रहती हूँ। गीता नाम है मेरा। "
मैं खड़ा गीता की बदमाशी और उसका मस्त पिछवाड़ा देख रहा था।
और सोच रहा था,
दिमाग अब दही हो रहा था , एकदम सर टनटना रहा था.
मुम्बई से चलने से पहले सिर्फ एक चिंता थी गुड्डी से मुलाकात हो पाएगी नहीं, कहीं फ्लाइट लेट हो गयी, कहीं एयरपोर्ट से घर पहुँचने तक ट्रैफिक जाम में फंस गया लेकिन
पहले एयरपोर्ट पर लॉबी में 'उनसे' मुलाकात के बाद जो सिलसिला शुरू हुआ की,.. पहले लग रहा था अब हम लोगों ने जंग जीत ली है और अब सिर्फ मस्ती और आराम, लेकिन
वो रिपोर्ट जो मिली कि कोई है जो वैसे तो मुझे ठरकी समझता है लेकिन थोड़ा बहुत शक है और घर पहुँचने के बाद, गुड्डी तो मिल गयी, बिन बोले बात भी बहुत हो गयी, लेकिन
सर्वेलेंस जो अभी अंग्रेजी जासूसी किताबो में पढ़ा था या फिल्मो में देखा था, फिजिकल और साइबर,... वो कीड़ा मारक यंत्र से साफ़ था घर के किसी भी कोने में बात करने से हर बात जो कोई भी है वहां तक बात पहुँच जायेगी, फोन लैप टॉप सब हैक, आफिस की हालत भी वही, ... और ये दुकान वाला ठीक घर के समाने और फिर फ़ूड ट्रक वो भी सरवायलेंस का ही हिस्सा, ...
Last edited: