उलझन ही उलझन
क्या करूँ कुछ समझ में नहीं आ रहा था,
रिपोर्ट जो x रिपोर्ट में आनी थी और हम लोगों के काउंटर अटैक का पार्ट थी उस में क्या हो रहा था मैं कहीं से पूछ भी नहीं सकता था, घर का इंच इंच हैक था। मिस x की हम लोगों की कंपनी के बारे में जो रिपोर्ट आनी थी, उस में क्या कुछ होगा हमारी कंपनी के बारे में इसपर बहुत कुछ डिपेंड करता था। उनकी इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट को बहुत कुछ डाटा सबूतों के साथ हम लोगो ने ही फीड किया था और वो हमारी कंपनी के लिए डैमेजिंग था, और सब कुछ असली सबूतों के आधार पर था , क्योंकि वो कम से कम दो तीन फोरेंसिक अकाउंट्स से उसे चेक कराते। पर पेंच ये था की उस में से ९० फीसदी डैमेज का डैमेज कंट्रोल हमारे पास था और बाकी दस फीसदी में थोड़ी बहुत फाइन वाइन लगती, लेकिन उस रिपोर्ट के आने के बाद मार्केट में फिर से उथल पुथल मचती, और उससे हमारा कुछ फायदा हो सकता था,
पर सब कुछ डिपेंड करता था उस रिपोर्ट में क्या आ रहा था। क्योंकि मिस एक्स और उनके सहयोगी अन्य सोर्सेज से भी मटेरियल ले सकते थे हालांकि टाइम लाइन बहुत टाइट थी और इस की संभावना न के बराबर थी, पर कुछ कहा नहीं जा सकता था।
और मेरे फोन हैक थे, किसी से बात नहीं कर सकता था, एकदम कुछ समझ में नहीं आ रहा था।
और उन बग्स को हटा नहीं सकता था, हटते ही उनका शक और गहरा हो जाता। वैसे तो अभी दो तीन दिन कुछ होना नहीं था, रिपोर्ट में सिवाय का इन्तजार करने के जिस दिन इंडिया टाइम से लेट इवनिंग वो रिपोर्ट पब्लिश होनी थी और उसी दिन तीज का फंक्शन था और दिन भर मिसेज मोइत्रा के कबूतरों के साथ, लेकिन अभी तो दिमाग का रायता बना था।
और सरवायलेंस और रिपोर्ट के साथ आज दिन भर आफिस के पास जो काम हो रहा था, क्यों कैसे क्या काम होना है कुछ समझ में नहीं आ रहा था। और मैं जान गया था की पूछना भी नहीं है, एक तो नीड टू नो वाली बात, दूसरे जिस तरह मेरा सरवायलेंस हो रहा था कहीं गलती से कुछ मुंह से निकल गया तो मुश्किल।
लेकिन दो फायदे तो हुए एक तो सिक्योर कम्युनिकेशंस रूम की बात टॉप प्रायरिटी पर बनने वाली बात मान ली गयी जिससे मेरे कम्युनिकेशन की बात तो कुछ हद तक सुलझ जायेगी, दूसरे श्रेया, वही सी आईएस ऍफ़ की कमांडेंट, मेरी एज की ही होगी उससे भी पक्की ट्यूनिंग हो गयी।
एक बात साफ़ थी इस प्रोजेक्ट में सिक्योरिटी के लिए लियाजन का काम वही करेगी, मुझसे भी, लोकल पुलिस से भी आई बी से भी और नेवी से भी और दूसरे वो क्रिप्टोलॉजिस्ट। ये साफ़ था की मेरी कम्पनी की पर से इस हाई वैल्यू पॉजेक्ट का लियाजन मुझे करना होगा, लेकिन ये सब है क्या, कुछ समझ में नहीं आ रहा था।
फिर एक काम जो मैं नहीं कर पा रहा था की जो मेरा सर्वेलेंस हो रहा था उसकी सूचना किसी तरह एम् ( M ) तक पहुंचा दूँ लेकिन कैसे ?
मुझे एक सोशल मिडिया की साइट दी गयी थी, जिसमें जा के मैं अर्जेन्ट सिच्येशन में मेसेज दे सकता था, मेसेज में कुछ भी लिखे लेकिन उसके पहले और अंत के शब्द फिक्स थे, मुझे कोई जवाब नहीं आता। लेकिन कम्युनिकेशन हैक्ड फोन से तो हो नहीं सकता था,