• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Incest MITHA PANI

अपनी राय बताए कहानी को लेकर

  • अच्छी है

    Votes: 11 12.4%
  • बहुत अच्छी है

    Votes: 75 84.3%
  • बुरी है

    Votes: 0 0.0%
  • बहुत बुरी है

    Votes: 3 3.4%

  • Total voters
    89

Bakchod Londa

Member
333
591
109
ओह भाई क्या लिखते हो यार, लन्ड में आग लग गई है मां से थोड़ा तो मिलन करवाओ।
दूसरो को बीच में मत लाना थोड़ा समय प्लीज हाथ जोड़कर विनती है
 
  • Like
Reactions: Maniac1100

Maniac1100

Member
131
681
94
ओह भाई क्या लिखते हो यार, लन्ड में आग लग गई है मां से थोड़ा तो मिलन करवाओ।
दूसरो को बीच में मत लाना थोड़ा समय प्लीज हाथ जोड़कर विनती है
Bhai milan vilan sab hoga but jaldi mt kro yaar, mujhe apne hisab se likhne doge to hi shi se likh pauga, ye meri sachi majburi hai, aapke comment ki sarahna karta hu pr kripya dhery rakhe❤❤❤
 
  • Like
Reactions: Nishat Sultana
179
139
43
Mitha pani 12
शाम हो चुकी थी। शामु दोपहर का गया हुआ अभी तक घर नही लौटा था। पशुओ को पानी पिलाकर सीता को एक बार थोडा समय मिला तो वापिस पायदान बुनने लगी। बुनते बुनते दिमाग मे जमना काकी की कही बात याद आई और उसी के साथ सीता को अपनी शादी के दिन याद आ गए। बुनाई मे हाथ इतने अभ्यस्त थे कि दिमाग मे विचार चलते रहते और हाथ अपना काम करते। सीता सोच रही थी की समय कितना तीव्र गति से चलता है। एक जमाना था जब वो एक कुआरी लड़की थी और आज दो शादी के लायक बच्चों की माँ है। माँ से याद आया की शामु और माया भी अब शादी के लायक है। शादी से याद आया की जेसे जमना काकी बुलावा देने आयी थी वेसे उसे भी बुलावा देने जाना पड़ेगा। शादी से एक और चीज याद आई के माया को भी अपना घर बसाना पड़ेगा जिसे अभी तक अपना बिस्तर बनाना भी नही आता। शादी से याद आया जब शामु की शादी हो जाएगी तो घर मे बहु आ जाएगी।
सीता का दिमाग रुकने का नाम ही नही ले रहा था। कहते है दिमाग के घोड़े जब दोडने लग जाए तो लौड़े लग जाते है। बहु से याद आया कि जो बेटा उसका हर एक कहना मानता है क्या वो बाद मे भी मानेगा। जेसे वो अब बाजार से कभी खाली हाथ नही लोटता, कभी उसके लिए नथनी, कभी कपड़े लत्ते, कभी मिठाई, कभी कोल्ड ड्रिंक कभी कुछ कभी कुछ लाता ही रहता है, शादी के बाद वो तो अपनी बीवी के लिए लायेगा। फिर कहा समय होगा उसके पास माँ के लिए। बीवी के लिए तो वो और भी बहुत कुछ लाएगा। हाये, ये तू क्या सोच रही है सीता। बीवी होगी उसकी,लाएगा तो लायेगा। तू भी तो मंगवाती थी उनसे। पर मेरा शामु तो बहुत भोला है।
हालांकि ये सीता का बस भ्रम था की शामु भोला है। उसे क्या पता की शामु ने ना जाने कितनी ही लोंडियो की नैया पार लगवाई है।
मेरा शामु तो बहुत भोला और अच्छा है, कह दूँगी बहु से ये सब चीज़े अपने आप ले आये बाजार से। पर नही, एसे कोन मना करता है। वो पत्नी होगी उसकी। तू भी तो है एक पत्नी। तेरी सास ने तुझे रोका था क्या। विश्वास ही नहीं होता कि मेरा शामु इतना बड़ा हो गया। पर नहीं वह मुझसे बहुत प्यार करता है। और हमेशा करता रहेगा। चाहे उसकी शादी हो या ना वह मेरा शामु है और हमेशा रहेगा। यह जमना काकी भी कभी-कभी पता नहीं कैसे मजाक कर देती है। दिमाग खराब करके रख दिया है। बावली केहती है मेरा बंदोबस्त शामु.......... हाय हाय सीता यह क्या सोच रही है।
खीज कर सीता ने पायदान एक तरफ रख दिया।
और यह अभी तक आया क्यों नहीं दोपहर से गया हुआ है। आज खैर नहीं उसकी। शामु की लापरवाही पर सीता गुस्सा करके बोली। सीता ने मोबाइल उठाया और मैसेज कर दिया।
" आज घर नहीं आना क्या?"
मैसेज पढ़ते ही शामु को तारे नजर आने लगे। उसे एहसास हुआ कि वह काफी देर से घर से बाहर है। उसे यह भी एहसास हुआ की उसकी माँ बहुत गुस्से में होगी। वह फौरन घर के लिए निकल पड़ा। जब घर पहुंचा तो सीता रसोई में खड़ी सब्जियां काट रही थी। वह धीरे से सीता के पास गया और उसे पीछे से धीरे से अपनी बाहों में भर ली। एक बार तो सीता डर गयी, पर जल्दी ही उसे एहसास हो गया की शामु है।
"बड़ी भूख लगी है मां खाना कब तक बनेगा?"
सीता वापिस सब्जिया काटने लगी। बिना शामु कि और देखे बोली
"अब तुझे भूख लगी है? पता है कितना वक्त हो गया तुझे बाहर गए हुए?" सीता का गुस्सा थोड़ा शांत हो गया था शामु के द्वारा यू प्यार से पुछने पर। ये पैंतरा कभी विफल नही होता था। जब भी शामु को लगता की उसकी माँ क्रोधित है, वो सीता को युं ही बाहों मे भरकर बात करता था।
"क्या बताउ माँ, बातो बातो मे पता ही नही चला" इसके साथ ही शामु ने अपनी माँ के दांये गाल पर हल्का सा चुम्बन अंकित कर दिया। चुम्बन का असर ऐसा हुआ कि जो सीता थोड़ी देर पहले बहुत गुस्सा थी, के चेहरे पर मुस्कुराहट फैल गयी।
"बस बस, ज्यादा मक्खन की जरूरत नही है। थोड़ी देर मे बन जाएगा खाना"
शामु को भी हसी आ गयी। उसे पता चल गया उसकी माँ अब राजी है। उसने थोड़े जोर से सीता को भिंचा और बोला
"ठीक है माँ, मैं नहा लेता हुँ तब तक" बाहों के जोर से सीता को एक गुदगुदी हुई। शामु को तो पता नही चला पर सीता को यू लगने लगा की लड़का अब बड़ा हो गया है। इस तरह से बाहों मे लेना अब बंद करना चाहिए।
अच्छा, एक तो शादी के बाद वेसे भी बेटे बहुओं के हो जाते है, उसपर जो इतना सा प्यार जताते है वो भी बंद करवादे तू उससे। नही नही मैं नही रोकने वाली उसे किसी बात पर। जितना चाहे उतना प्यार करे। आखिर मैं उसकी माँ हुँ। माँ पर सबसे ज्यादा हक बेटे का होता है। इन्हीं विचारों के साथ सीता खाना बनाने लगी। पता नहीं पर कुछ तो बदलाव होने लगे थे घर में। बेटा जब तक छोटा होता हैं तब तक मां को यह एहसास नहीं होता पर जब उन्हें यह एहसास होता है कि उसका बेटा कुछ दिनों बाद किसी और का हो जाएगा तो जलन, प्यार, हक आदि एहसास मिलकर उसे अपने बेटे के लिए और भी प्रेम आने लगता है। सीता का भी वही हाल है।
शामु जल्द ही स्नान लेकर बाहर आ गया। जब वह बाहर आया तो उसके बाल गीले होने के कारण वह अपने बालों को झटक कर पानी सुखा रहा था। सीता को पता नहीं क्या हुआ वह शामु के चेहरे की ओर देखने लगी। जब उसने देखा कि उसकी मां लगातार उसे देख रही है तो उसने सीता की ओर देखकर मुस्कुराहट से अभिवादन किया।
" क्या देख रही हो मां?" पर सीता कुछ नहीं बोली और उसी तरह जड़वत होकर देखती रही। जब उसने देखा कि सीता कोई जवाब नहीं दे रही तो वह सीता के पास आया हो उसको दोनों हाथों से पकड़ कर हिलाया
" मां, क्या हुआ?"
सीता अपने विचारों से बाहर आई और मुस्कुराहट के साथ बोली
" कुछ नहीं बावले, बस सोच रही हूं तू कितना बड़ा हो गया है। थोड़े दिनों में तेरी भी शादी करनी पड़ेगी। पता नही क्यू शामु पर आज ये बाते मेरे दिमाग मे आ रही है।"
" मैं नहीं करूंगा शादी-वादी, वैसे भी अभी मेरी उम्र ही क्या है" शामु बच्चों की तरह बोला। सीता के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई।
"शादी तो करनी ही पड़ेगी बेटा, अब मुझसे काम नहीं होते" मजाक करते हुए सीता बोली," थोड़े दिनों में घुटनों में दर्द शुरू हो जाएगा फिर मेरी बहू ही तो काम करेगी"
" घुटनों में दर्द हो तेरे दुश्मनों के, यह अचानक आज शादी का विचार कैसे आ गया माँ?" शामु सर खुजाते हुए बोला।
" विचार तो आएंगे ही, देख अपने आप को सांड जैसा हो गया है, और मुझे भी तो दादी बनना है ना, अपने पोते पोतियो का चेहरा देखना है" सीता ने फिर मजाक किया।
" उसके लिए शादी की क्या जरूरत है वह तो मैं ऐसे ही कर दूंगा" यह बात शामु के मुँह से धीरे से निकल गई। जिसे सुन सीता का मुंह खुला रह गया।
"बदमाश, क्या क्या बोल देता है" शामु के कान खींचते हुए सीता ने कहा।
"अरे अरे अरे माँ, मैने कुछ नहीं बोला, आपके कान बज रहै है" शामु ने बोला तो सीता ने उसके कान को और मरोड़ कर बोला
" तेरी मां हुँ, सब सुनाई देता है"
"छोड़ माँ दर्द कर रहा है" सीता ने कान छोड़ दिया।
"बेठ अब, खाना खाले, खबरदार अगर अब बाहर गया तो"
शामु खाना खाने लगा। सीता रोटिया बेल रही थी। जेसे जेसे बेलन चलता, वेसे वेसे उसके नितंब थिरकन करते। शामु खाना खाते खाते उन लुभावने नितंबो को भी खा जाने वाली नजरो से देखने लगा। देखे भी क्यू ना, ऐसी दिल के आकार की गाँड़ बनी ही देखने के लिए होती है। उधर रोटी बनाते बनाते शामु द्वारा कहे गए शब्द सीता के कानो मे गूंजने लगे।
'वो तो मैं एसे ही कर दूंगा' बावला, एसे ही कर देगा, जेसे कोई पड़ी है अपनी टांगे फैलाके। हाए सीता, क्या हो गया है तेरी बुद्धि को। बावाला वो नही, तू हो गयी लगता है बेशर्म।
Absolutely wonderful and stunning story 😍 ❤️ ♥️Great writings
 
Top