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इस बार इकराम की शॉपिंग में उन लोगों को ज्यादा समय नहीं लगा। इसी दौरान निशा के कहने पर दिव्या ने मोनू, और पापा जी के लिए भी कुछ कपडे खरीद लिए थे। जिनकी पेमेंट निशा ने अपनी तरफ से की थी साथ ही साथ निशा ने अज्जू के लिए भी कुछ कपडे खरीदकर उसे गिफ्ट कर दिए थे। लेकिन इस बार अज्जू ने निशा से गिफ्ट लेने में ज्यादा ना नकुर नहीं की, क्योंकि वो यह बात अच्छी तरह से समझ गया था कि जोया किसी ना किसी तरह उसे गिफ्ट लेने के लिए मना ही लेगी। आखिरकार सारी शॉपिंग होने के बाद वो लोग अपने अपने घर पर चले गए।
घर पहुँचकर दिव्या ने सभी लोगों को उनके गिफ्ट दे दिए, हाँलाकि माँ को दिव्या की बॉस यानि जोया से कोई भी गिफ्ट लेने में शर्म आ रही थी, लेकिन जब पापा जी ने खुशी खुशी अपना गिफ्ट ले लिया, तो माँ को भी गिफ्ट एक्सेप्ट करना ही पडा। वहीँ दूसरी तरफ जिया भी जोया का गिफ्ट लेने में थोडा हिचकिचा रही थी, पर जब उसने देखा कि जोया ने ना शिर्फ उसके लिए बल्कि पूरी फैमली के लिए गिफ्ट खरीदे हैं, खासकर राधा पर तो जोया ने कुछ ज्यादा ही खर्च कर दिया है। तो उसके पास भी जोया यानि निशा के दिए गिफ्ट एक्सेप्ट करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था।
हाँलाकि सभी लोगों के गिफ्ट देखने के बाद अज्जू को अपने ऊपर कुछ ज्यादा ही शर्म आ रही थी। क्योंकि जोया ने सभी लोगों के लिए काफी खूबसूरत और ब्रांडेड कपडे खरीदे थे, जो काफी ज्यादा मंहगे भी थे। लेकिन दूसरी तरफ अज्जू ने चिढकर जोया के लिए जो साडी गिफ्ट की थी, वो ना तो देखने में ज्यादा अच्छी थी और ना ही ब्रांडेड थी। वो तो बस शो-रूम बालों ने अपनी डिस्पिले को भरने के लिए एक साधारण साडी मैनेक्वीन को पहनाकर रख दी थी। जिसे अज्जू ने जोया के लिए खरीदकर गिफ्ट कर दिया था और जिसकी कीमत मात्र 500 रूपये थी।
उस वक्त अज्जू को यही लगा था कि इतनी घटिया साडी देखकर शायद जोया लेने से मना कर देगी, जिसके बाद उसे भी जोया के गिफ्ट बापिस करने का बहाना मिल जाऐ, पर हुआ इसका एकदम उल्टा। जोया ने अज्जू की दी साडी खुशी खुशी एक्सेप्ट कर ली थी, इसलिए मजबूरी में अज्जू को भी जोया के दिए गिफ्ट एक्सेप्ट करने पडे थे। पर अब उसे अपने ऊपर ही गुस्सा आ रहा था। इसलिए अज्जू ने मन ही मन तय किया कि अगली बार जब भी उसे मौका मिलेगा तो वो जोया के लिए जरूर एक अच्छा गिफ्ट खरीदकर उसे देगा। अभी अज्जू यह सब सोच ही रहा था कि तभी उसका मोबाईल रिंग होने लगा। अज्जू ने देखा कि मोनू उसे क़ॉल कर रहा था। इसलिए अज्जू ने तुरंत कॉल रिसीव करते हुए कहा
अज्जू- अबे तेरी तो… हम दोनों एक ही घऱ में रह रहे हैं… फिर कॉल क्यों किया… सीधे सीधे मेरे रूम में आ जाता….
अज्जू की बात सुनकर मोनू ने रूखेपन से कहा….
मोनू- मुझे तुझसे एक जरूरी मैटर पर बात करनी है। इसलिए मैं अपने घर के पास बाले पार्क में तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ। जितनी जल्दी हो सके आ जा…..
इतना बोलकर मोनू ने कॉल कट कर दी। मोनू की कॉल कट होने के तुरंत बाद अज्जू नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया। करीब 10 मिनट बाद ही अज्जू नहाकर और कपडे चेंज करने के बाद अपने घर के पास बने पार्क की तरफ चल पडा, जहाँ मोनू उसका बेट कर रहा था। जब अज्जू पार्क में पहुँचा तो उसने देखा कि मोनू पार्क के एक कार्नर में डली चेयर पर अकेला बैठा हुआ उसका इंतजार कर रहा है। इसलिए अज्जू भी मोनू के पास जाकर बैठ गया और मोनू से बोला….
अज्जू- हाँ जी कहो…. आखिर तुम्हें मुझसे ऐसी क्या बात करनी है, जो तुम मुझसे घर पर नहीं कर सकते हो।
अज्जू का सबाल सुनकर मोनू थोडा गुस्से में झल्लाते हुए बोला
मोनू- अज्जू मुझे सच सच बता कि आखिर तेरे और जोया मैम के बीच चल क्या रहा है….
मोनू का सबाल सुनकर अज्जू बुरी तरह से शॉक्ड होते हुए बोला
अज्जू- अबे क्या बक रहा है… हमारे बीच ऐसा बैसा कुछ भी नहीं है… हम बस अच्छे दोस्त हैं।
मोनू- अच्छा… तो फिर एक दूसरे को गिफ्ट लेने देने का क्या चक्कर है…. और हाँ मुझसे झूठ बोलने की गलती तो करना ही मत। मैंने खुद अपनी आँखों से देखा है कि तुमने मॉल में एक साडी खरीदकर जोया मैम को गिफ्ट की थी।
मोनू की बात सुनकर अज्जू एक गहरी सांस लेते हुए बोला
अज्जू- अबे यार बस इतनी सी बात पर तू लाल पीला क्यों हो रहा है। अगर यह बात तू नॉर्मल तरीके से भी पूछता, तो मै तुझे सच सच ही बताता। बात दरअसल यह है कि मैं जोया मैम से अपने या फिर अपनी फैमली के लिए कोई भी गिफ्ट लेना नहीं चाहता था। तुमने तो देखा ही होगा कि जोया मैम ने राधा के लिए कितने सारे गिफ्ट खरीदकर दे दिए हैं। पर जोया मैम की जिद के आगे मैं उन्हें मना भी नहीं कर पा रहा था। तभी मेरे दिमाग में एक आईडिया आया, मैंने सोचा कि जोया मैम अलग मजहब की है, तो वो साडी तो पहनेंगी नहीं, इसलिए मैंने एक सस्ती और बेकार दिखने बाली साडी खरीदकर उन्हें गिफ्ट कर दी। मुझे पूरी उम्मीद थी कि वो मुझसे वो साडी लेने से मना कर देंगी, जिसके बाद मेरे पास भी उनके दिए गिफ्ट लौटाने का बहाना होगा। पर…..
मोनू- पर क्या….. क्या उन्होंने तुम्हारा वो घटिया गिफ्ट भी एक्सेप्ट कर लिया….
अज्जू- हाँ यार….. इसलिए मेरे पास भी उनके दिए गिफ्ट एक्सेप्ट करने का कोई कारण नहीं बचा था। बस इतनी सी बात है।
मोनू- ओह तो यह बात है…. पर तू आज कल जोया मैम के साथ कुछ ज्यादा ही टाईम स्पैण्ड नहीं कर रहा है…. पहले तो तूने कभी किसी और लडकी के साथ ऐसा नहीं किया…. कहीं तेरा मन अब निशा दी और जिया से भर तो नहीं गया… जो अब तू जोया मैम के पीछ पड गया है।
अज्जू- अबे क्या बकवास किए जा रहा है…. ऐसा कुछ भी नहीं है…. पर तेरे दिमाग में यह फालतू बातें आखिर क्यों आ रही हैं….
मोनू- वो इसलिए क्योंकि जोया मैम से मिलने से पहले तो तू निशा दी के लिए पूरी तरह से पागल हो रखा था और किसी भी तरह उनके पास पहुंचना चाहता था। पर अब जब हमारे पास उनकी लीड है और हमें पता है कि वो हमें बांधवगढ में मिल सकती हैं… तो तुझे उनके पास पहुँचने की कोई जल्दी नहीं हो रही है….
अज्जू- वो इसलिए मेरे भाई… क्योंकि मैं निशा से मिलने से पहले अपनी कमियों को दूर करके अपने आपको उसके लायक बनाना चाहता हूँ। बस इसीलिए मैं बांधवगढ जाने की जल्दी नहीं कर रहा हूँ।
मोनू- पर तू जोया मैम से इतना ज्यादा क्यों घुल मिल रहा है….
अज्जू- असल में जोया ने ही मुझे मेरी गलतियों का एहसास करवाया है, साथ ही साथ उसने मुझे अपनी कमियों को दूर करने का तरीका भी बताया है। इसके अलावा जोया के साथ धुलने मिलने का एक कारण यह है कि जोया और निशा एक दूसरे की बेस्ट फ्रेंड हैं। जोया जानती है कि निशा इस वक्त कहाँ है और क्या कर रही है। शायद उन दोनों की रेगुलर बातें भी होती रहती हैं। बस इसीलिए मैं जोया के साथ ज्यादा घुल मिल रहा हूँ, ताकि मुझे जोया से निशा के बारे में कोई इन्फार्मेशन मिल सके।
मोनू- तू सच बोल रहा है ना… कहीं तू जिया और निशा दी को धोखा तो नहीं दे रहा है।
अज्जू- हाँ मेरे भाई मैं सच बोल रहा हूँ…. मैं जिया और निशा को धोखा देने के बार में सपने में भी नहीं सोच सकता।
मोनू- अगर ऐसा है तो मैं आज के बाद जोय मैम के बारे में तुझसे कोई बात नहीं करूँगा। पर अगर फ्यूचर में मुझे कभी पता चला कि तूने जोया मैम के साथ मिलकर जिया और निशा दी को धोखा दिया है। तो फिर मुझसे बुरा कोई नहीं होगा। मैंने अब तक हर सिचूऐशन में तेरा साथ दिया है। जिया के जाने के बाद जब तुझे निशा दी से प्यार हुआ, तो वो मैं था जिसने तुझे सबसे पहले सपोर्ट किया था, क्योंकि उस वक्त तू सही था। मैं हमेशा तुम दोनों को खुश देखना चाहता था, इसीलिए मैंने तुम दोनोें की शादी को भी सपोर्ट किया था। हाँलाकि जब जिया के बापिस आने के बाद तूने जिया से दूसरी शादी की, उस वक्त मुझे तेरा यह फैसला बिल्कुल भी पसंद नहीं आया था। पर फिर भी मैंने तुझसे कुछ नहीें कहा, उसके बाद तूने धीरे धीरे निशा दी को इग्नोर करना शुरू कर दिया, उस पर भी मैंने तुझसे कुछ नहीं कहा, और फिर तूने निशा दी की बेइज्जति कर उन्हें अपनी जिंदगी से दूर जाने के लिए कहा, मैं तब भी खामोश रहा, और जब निशा दी हम सबसे दूर चली गईं, मैं तब भी तेरे साथ ही रहा। पर अब अगर मुझे पता चला कि तूने निशा दी को एक बार फिर धोखा दिया है, तो वो दिन हमारी दोस्ती का आखिरी दिन होगा अज्जू…
मोनू की बात सुनकर अज्जू ने एक गहरी सांस ली और फिर उसकी आँखो में आखें डालकर बोला
अज्जू- ऐसा कभी नहीं होगा मेरे भाई… मेरी जिंदगी में निशी की जगह कभी कोई न हीं ले सकता। जिया भी नहीं….. हाँ मैं मानता हूँ कि मैंने जिया से दूसरी शादी करके गलत किया है…. पर जो बीत गया उसे बदला तो नहीं जा सकता है ना… तुम तो जानते ही हो कि जिया ने मुझे राधा जैसी प्यारी बच्ची दी है…. इसलिए मैं जिया को अब अपने से दूर नहीं कर सकता… बैसे भी जो कुछ भी हुआ है उसमें जिया की उतनी बडी भी गलती नहीं है, जितनी बडी गलती मैंने की थी… मुझे कभी भी मामा जी की बात मानकर अपने और निशा के रिश्ते को जिया से छिपाना ही नहीं चाहिए था। अगर मैं पहले ही जिया को सब कुछ सच सच बता देता। तो शायद आज सिचुऐशन कुछ अलग होती…. और सच कहूँ तो मुझे इस सब में मामा जी की भी कोई गलती नजर नहीं आ रही है।
अज्जू की बात सुनकर मोनू थोडा हैरान होते हुे बोला
मोनू- मतलब
अज्जू- मतलब यह कि जब हमारी शादी के बाद हम लोग यहाँ दिल्ली में छिपकर रह रहे थे और अपनी ताकत बडा रहे थे। उसी दौरान जब निशा ने ऑफिस ज्वाईन करने की बात कही तो मैंने उससे हमारे रिश्ते को छिपाने के लिए कहा था। हाँलाकि निशा हमारे रिश्ते को छिपाने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी, लेकिन मेरे कहने पर वो मान गई थी। उस वक्त यह सारी बातचीत मामा जी के सामने ही हुई थी। शायद उसी के बाद मामा जी के अंदर इतनी हिम्मत आई थी कि वो निशा को मजबूर करके हमारे रिश्ते को जिया से छिपाने के लिए वादा ले सकें। अगर उस वक्त मैं निशा को हमारा रिश्ता छिपाने से नहीं रोकता, तो मेरे ऑफिस के हर एक इंप्लॉय को हमारे रिश्ते के बारे में पता होता… जिया को भी, जो उस वक्त याददास्त जाने के कारण पूनम बनकर मेरे ऑफिस में काम कर रही थी।
अज्जू की बात सुनकर मोनू उसे समझाते हुए बोला
मोनू- अब जो बीत गया सो बीत गया मेरे भाई…. उसे हम बदल तो नहीं सकते… लेकिन यह कोशिश जरूर कर सकते हैं कि फ्यूचर में हमसे ऐसी कोई गलती ना हो।
अज्जू- हाँ तुम सही कह रहे हो…
मोनू- तो फिर चलो, घर पर सभी लोग डिनर के लिए हमारा इंतजार कर रहे होंगे।
मोनू की बात सुनकर अज्जू मुस्कुराया और फिर वो दोनों ही घर की तरफ चल पडे। अगले दिन जब इकराम और हिना रॉ हेडक्वाटर पहुँचे तो उन्होंने देखा कि निशा अपने ऑफिस के अंदर ढेर सारी फाईलों और न्यूज पेपर में उलझी हुई है। हाँलाकि निशा का प्लान इकराम और हिना की इंगेज्मेंट तक रॉ के काम से छुट्टी लेना का था। पर जब से इकराम ने ड्रैगन के इण्डिया आने के बारे में उसे बताया था। तब से निशा बुरी तरह से बेचैन थी और उसे लगातार कुछ गलत होने का एहसास हो रहा था।
इसीलिए आज सुबह सुबह ही वो रॉ हेडक्वाटर आ गई थी। ताकि ड्रेगन से रिलेटेड सभी फाईलों को अच्छी तरह से चैक कर सके, साथ ही साथ न्यूज पेपर में छपी करैंट न्यूज से ड्रैगन का कनेक्शन जोड सके। असल में निशा का दिल यह मानने के लिए बिल्कुल भी तैयार ही नहीं था कि ड्रैगन मात्र हैकाथॉन काम्पटीशन में हिस्सा लेने के लिए इण्डिया आ रहा है। बल्कि निशा को पूरा यकीन था कि ड्रैगन के यहाँ आने के पीछे जरूर कोई बहुत बडा कारण है। जिसके बारे में निशा हर हाल में पता करना चाहती थी। निशा को इस तरह फाईलों में उलझा हुआ देखकर इकराम ने सबाल किया
इकराम- अप्पी आखिर यह सब क्या है…. आपने तो कहा था कि मेरी और हिना की इंगेज्मेंट तक आप पूरी तरह से फ्री रहोगी। फिर आज सुबह सुबह ही यहाँ आकर आप किस काम में उलझ गई।
इकराम के चुप होते ही हिना ने भी उससे सबाल किया
हिना- हाँ अप्पी…. आप कुछ परेशान दिखाई दे रही हो…. क्या कहीँ कुछ बडा होने बाला है….
आखिरकार उन दोनों की बात सुनकर निशा ने उन दोनों की तरफ देखे बिना ही जबाब दिया
निशा- पता नहीं…. पर जब से मुझे ड्रैगन के इण्डिया आने के बारे में पता चला है। तब से मेरा दिल मुझसे कह रहा है कि जरूर कुछ ऐसा होने बाला है जो नहीं होना चाहिए….. असल में ड्रैगन जैसा बडा हैकर और चाईना सीक्रेट सर्विस का इतना बडा ऐजेंट मात्र एक हैकिंग काम्पटीशन में हिस्सा लेने तो यहाँ नहीं आऐगा। क्योंकि वो अच्छी तरह से जानता है कि यहाँ यानि इण्डिया हिन्द की शेरनी का इलाका है।
निशा की बात सुनकर इकराम अपना सिर खुजलाते हुए बोला
इकराम- हाँ वो बात तो सही है… लेकिन आप इन ढेर सारी फाईलों और न्यूज पेपर में आखिर ढूंड क्या रही हो….
निशा- कुछ भी ऐसा जो ड्रैगन से रिलेटेड हो….
हिना- तो कुछ मिला आपको….
निशा- नहीं…. ना तो इन फाईलों में ड्रैगन के बारे में कोई खास जानकारी मौजूद है और ना ही न्यूज पेपर से मुझे कुछ खास जानकारी मिली है। यहाँ तक कि अगले कुछ दिनों तक हमारे देश में हैकॉथान काम्पटीशन के अलावा कोई दूसरा बडा ईवेंट भी नहीं है। फिर ड्रैगन के यहाँ आने का असली मकसद क्या है…
निशा अभी इस बारे में सोच ही रही थी कि तभी उसे कुछ याद आया और वो लगभग चीखते हुए हिना से बोली
निशा- हिना…. तुम्हें याद है ना जब मैं और इकराम शालिमार दीप पर ऑपरेशन चक्रव्यू को पूरा करने गए थे, तब हमारे साथ दो साईंटिस्ट प्रोफेसर प्रभाकर जैन और प्रोफेसर अनिल वर्मा भी थे।
निशा की बात सुनकर हिना हैरान होते हुए तुरंत बोली
हिना- हाँ…. मुझे याद है… वो दोनों साईंटिस्ट पूरी तरह से सुरक्षित हैं…
निशा- इस वक्त वो दोनों कहाँ है….
हिना- असल में इकराम को शक था कि उन दोनों में से कोई एक गद्दार है और दुश्मनों से मिला हुआ है। इसलिए उन दोनों को ही हमने यहीँ अपने हैड ऑफिस में बने सीक्रेट कैदखाने में रखा हुआ है। ताकि उन दोनों में से कौन गद्दार है, इसका पता लगाया जा सके। लेकिन अब तक हमें कुछ भी पता नहीं चला है। हाँलाकि हमने उनकी सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा हुआ है और उन्हें घर जैसा पूरा महौल दे रखा है। बस उनके कहीं भी आने जाने और किसी से कान्टेक्ट करने पर पावंदी है।
हिना की बात सुनकर निशा तुरंत बोली
निशा- बेकार में इतने दिनों तक उन दोनों को कैद करके रखा हुआ है। कम से कम मुझसे एक बार पूछ तो लेना चाहिए था…. और फिर जब मैं इतने दिन पहले से ठीक हो गई हूँ, तो अब तक मुझे उन दोनों के बारे में बताया क्यों नहीं…
निशा की बात सुनकर इकराम और हिना बुरी तरह से डर गए थे। असल में निशा की तरह इकराम भी उन दोनों साईंटिस्ट के बारे में लगभग भूल ही गया था। जिस कारण उसे डर था कि कहीं उसकी लापरवाही के कारण निशा उससे नाराज ना हो जाऐ। जबकि हिना और बाकी लोगों ने अब तक उन दोनों साईंटिस्ट के बारे में ना तो निशा को कुछ बताया था और ना ही याद दिलाया था। जिस कारण हिना का निशा से डरना स्वभाविक था। बैसे भी निशा रॉ की डिप्युटी चीफ जो थी।
आखिरकार हिना ने जैसे तैसे अपने डर पर काबू पाया और हकलाते हुए निशा से बोली
हिना- वो वो चीफ ने उन दोनों को अजय सर के हैंड ओबर कर दिया था। ताकि अजय सर उनसे सही तरीके से पूछताछ कर सकें। पर उस वक्त आप और इकराम बुरी तरह से घायल थे। जिस कारण अजय सर का पूरा फोकस आप दोनों को बचाने पर था और जब तक आप ठीक हुए, शायद तब तक अजय सर उन दोनों साईंटिस्ट के बारे भूल ही गए होंगे।
हिना की बात सुनकर निशा चिढते हुए बोली
निशा- हाँ हाँ जो भी हो… लेकिन असली गद्दार प्रोफेसर अनिल वर्मा है….. इसलिए प्रोफेसर प्रभाकर जैन को कैद करने की कोई जरूरत नहीं थी।
निशा की बात सुनकर इकराम हैरान होते हुए बोला
इकराम- पर अप्पी आपको कैसे पता कि असली गद्दार अनिल वर्मा है
निशा- वो इसलिए क्योंकि मैं उस ऑपरेशन से पहले कभी भी उन दोनों साईंटिस्ट से नहीं मिली थी। लेकिन जब मैं शालिमार दीप पर दुशमनों के अड्डे से उन दोनों को आजाद करवा रही थी। तब प्रोफेशर अनिल वर्मा ने मुझे तुरंत पहचान लिया था और मुझे ऐजेंट जीरो कहकर बुलाया था। इसका मतलब समझ रहे हो ना तुम…
निशा की बात सुनकर इकराम तुरंत बोला
इकराम- हाँ अप्पी… इसका मतलब है कि वो कमीना अनिल वर्मा दुशमनों से मिला हुआ था, और शायद दुशमनों ने उसे पहले ही आपके बारे में सब कुछ बता दिया होगा, इसलिए वो पहले से ही आपको पहचानता था और आपके वहाँ आने का इंतजार भी कर रहा था। ताकि आपके आते ही वो दुशमनों के पास सिंग्नल भेजकर आपको दुशमनों के हाथों पकडवा सके।
निशा- हुम्म…. अब लग रहा है कि हिना के साथ रहते रहते तुम्हारा दिमाग भी थोडा बहुत चलने लगा है। ठीक है तो अब चलो…. चलकर उससे पूछताछ करते हैं। शायद उसे ड्रैगन के यहाँ आने के बारे में कुछ पता हो।
इतना बोलकर निशा अपने ऑफिस से बाहर निकल गई, निशा के पीछे पीछे इकराम और हिना भी ऑफिस से बाहर निकल गए। करीब आधे घंटे बाद निशा इकराम और हिना के साथ प्रोफेशर अनिल वर्मा की सेल में थी। वहीं दूसरी तरफ प्रोफेसर प्रभाकर जैन से माफी माँगकर निशा उन्हें पहले ही अपने कुछ ऐजेंट्स की निगरानी में उनके घर भेज चुकी थी। अब वस वहाँ पर प्रोफेसर अनिल वर्मा ही बचे थे, जिनसे पूछताछ करने की निशा ने पहले ही पूरी तैयारी कर ली थी।
अब तक प्रोफेसर अनिल वर्मा से निशा ने कोई बात नहीं की थी और ना ही उनके किसी सबाल का जबाब इकराम और हिना ने दिया था। वो लोग तो बस चुपचाप निशा के आर्डर पूरे कर रहे थे। निशा के इशारे पर उन लोगों ने प्रोफेसर अनिल वर्मा को जबरदस्ती एक लक़डी की चेयर पर बैठाकर उनके हाथ-पैर मजबूती के साथ उस चेयर से बांध दिए थे। ताकि प्रोफेसर अनिल वर्मा ना तो वहां से भाग सके और ना ही हिल-डुल सकें। प्रोफेसर अनिल वर्मा एक साईंटिस्ट थे, इसलिए निशा अच्छी तरह से जानती थी कि थोडा बहुत टार्चर करने के बाद ही वो किसी रट्टू तोते के तरह सारा सच उगल कर रख देगा।
हाँलाकि आज से पहले भी प्रोफेसर अनिल वर्मा को टार्चर करके सारा सच जाना जा सकता था। लेकिन निशा के टीम मेंबर्स को यह बात पता नहीं थी कि प्रोफेसर प्रभाकर जैन और प्रोफेसर अनिल वर्मा में से गद्दार आखिर कौन है। इसलिए वो किसी निर्दोष इंशान को टार्चर नहीं करना चाहते थे। पर अब जब उन्हें पता चल चुका है कि प्रोफेसर अनिल वर्मा ही असली गद्दार है, तो वो लोग उसपर कोई रहम नहीं करने बाले थे। वहीं दूसरी तरफ प्रोफेसर अनिल वर्मा का भी डर के कारण बुरा हाल था। वो लगातार चीख चिल्ला कर उन लोगों से सबाल पूछ रहा था
अनिल- तुम लोग आखिर मेरे साथ करने क्या बाले हो…. तुम लोग शायद जानते नहीं हो कि मैं कौन हूँ। अगर मैंने तुम लोगों की कम्प्लेन कर दी तो एक झटके में तुम सबकी नौकरी चली जाऐगी।
अनिल वर्मा की बात का जब किसी ने कोई जबाब नहीं दिया तो वो फिर से बोला
अनिल- आखिर तुम लोग मेरे साथ ही यह सब क्यों कर रहे हो… तुम लोगों ने प्रभाकर को क्यों जाने दिया… वही असली गद्दार था…
इस वक्त इकराम और हिना प्रोफेसर अनिल वर्मा के ठीक पीछे खडे हुए थे, जबकि निशा अनिल वर्मा के ठीक सामने कुर्सी पर बैठी मुस्कुरा रही थी। वो इस वक्त अपने असली रूप में थी, ताकि वो अपनी सुपर पावर का सही से यूज कर सके और जरूरत पडने पर प्रोफेसर अनिल वर्मा का दिमाग भी पढ सके। आखिरकार अनिल वर्मा की बातें सुनकर निशा मुस्कुराते हुए बोली
निशा- ठीक है मिस्टर अनिल तुम बाद में जिससे चाहो उससे हमारी शिकायत करते रहना। मैं भी देखना चाहती हूँ कि इस देश में आखिर ऐसा कौन है जो तेरे जैसे गद्दार का साथ देता है। रही बात नौकरी की तो लगता है तेरे दिमाग में भूसा भरा हुआ है, पता नहीं तू कैसे साईंटिस्ट बन गया। अबे गधे जब हम लोग मरने से नहीं डरते तो भला नौकरी की किसे फिक्र होगी….
निशा की बात सुनकर अनिल वर्मा बुरी तरह से डरते हुए बोला
अनिल- तुम्हारी मुझे गद्दार कहने की हिम्मत कैसे हुई… मैने इस देश के लिए अपनी सारी जिंदगी लगा दी और आज तुम मुझे गद्दार कहकर बेइज्जत कर रही हो। आखिर तुम्हारे पास क्या सबूत है कि मैं गद्दार हूँ।
अनिल वर्मा की बात सुनकर निशा मुस्कुराते हुए बोली
निशा- तुम्हें याद है ना जब मैं तुम्हें छुडवाने के लिए शालिमार दीप पर गई थी, तब तुमने मुझे देखते ही मुझसे क्या कहा था….
निशा की बात सुनकर अनिल वर्मा हकलाते हुऐ बोला
अनिल- ऐजेंट जीरो……..
निशा- बिल्कुल सही… तो अब बताओ मिस्टर अनिल वर्मा कि तुम्हें मेरा कोड नेम कैसे बता है…. मेरे डिपार्टमेंट और मेरे कुछ खास दुशमनों के अलावा किसी को भी मेरा कोडनेम नहीं पता है और ना ही मैं उस दिन से पहले कभी तुमसे मिली थी। फिर भला तुम मुझे कैसे पहचानते थे….. वहीं दूसरी तरफ प्रोफेसर प्रभाकर जैन ने पूरी तरह से नैचुरल बर्ताव किया था और मुझे नहीं पहचाना था। इसका मतलब है कि असली गद्दार तुम हो… बस इसीलिए हमने प्रोफेसर प्रभाकर जैन से माफी मांगकर उन्हें यहाँ से जाने दिया है।
निशा की बात सुनकर अचानक से अनिल वर्मा पागलों की तरह हंसते हुए बोला
अनिल- हा हा हा… मैं तुम्हें जितना चालाक समझता था, तुम उससे भी ज्यादा चालाक निकली ऐजेंट जीरो… लेकिन तुम यह बात कभी साबित नहीं कर पाओगी कि मैं गद्दार हूँ। तुम भले ही मुझे टार्चर कर लो, पर मैं तुम्हें कुछ भी नहीं बताऊँगा और आखिरकार तुम्हें मुझे छोडना ही होगा।
अनिल वर्मा की बात सुनकर निशा एक रहस्यमई मुस्कान के साथ बोली
निशा- आई एम सॉरी प्रोफेसर…. बात दर असल यह है कि हमारे डिपार्टमेंट को छोडकर अभी तक किसी को नहीं पता है कि तुम दोनों को सुरक्षित बचा लिया गाय था। हमने प्रोफेसर प्रभाकर जैन को अच्छी तरह समझा दिया है कि वो यहाँ से अपने घऱ जाकर सभी लोगों को यही बताऐंगे कि तुम्हें दुशमनों ने टार्चर करके जान से मार दिया है। मेरी बात समझ रहे हो ना मिस्टर अनिल वर्मा… तुम अब सारी जिंदगी हमारी कैद में रहने बाले हो, यहाँ पर हम तुम्हारे ऊपर हर दिन नऐ नऐ एक्सपेरीमेंट करके तुम्हें टार्चर करेंगे….
निशा की बात सुनकर अनिल वर्मा पागलों की तरह हंसते हुए बोला
अनिल- तुम जो चाहो करो… पर मुझसे कुछ भी नहीं जान पाओगे….
निशा- चलो देखते हैं कि तुम मेरे सामने कितनी देर टिकते हो…
इतना बोलकर निशा ने इकराम को इशारा किया, निशा का इशारा मिलते ही इकराम एक गंदा और बडा सा कपडे का टुकडा जबरदस्ती अनिल वर्मा के मूँह में ठूंसते हुए बोला
इकराम- सॉरी मिस्टर अनिल…. असल में मेरी बडी बहन को ज्यादा शोर शराब ापसंद नहीं है। इसलिए मजबूरी में तुम्हारा मूँह बंद करना पड रहा था। ताकि तुम्हारी चीख सुनकर मेरी बडी बहन के कान दर्द ना करने लगें। बैसे तुम्हें ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। जो कपडा मैंने तुम्हारे मूँह के अंदर ठूँसा है उससे हम लोग बस अपने जूते साफ करते हैं, बाकि कपडा एकदम ठीक ठाक है….
इकारम की बात सुनकर अनिल वर्मा बुरी तरह से डर गया और उसका मन उल्टी करने जैसा होने लगा…. पर कपडा मूँह के अंदर होने के कारण वो उल्टी भी नहीं कर सकता था। वहीं दूसरी तरफ निशा पर अनिल वर्मा को इस हालत में देखकर कोई फर्क नहीं पड रहा था। उनसे हिना की तरह देखकर एक इशारा किया। निशा का इशारा मिलते ही हिना सेल के बाहर चली गई और लगभग आधे मिनट के अंदर ही एक सूटकेश के साथ बापिस आ गई। अंदर आते ही हिना ने वो सूटकेस निशा को पकडा दिया। जिसके बाद निशा ने मुस्कुराते हुए उस सूटकेस को खोलकर अनिल वर्मा के ठीक सामने नीचे जमीन पर रख दिया।
वो सूटकेस ढेर सारे अलग अलग तरह के टूल्स से भरा हुआ था, उनमें से ज्यादातर टूल्स पर सूखा खून लगा हुआ था। जिसका एक ही मतलब था कि निशा पहले भी उन टूल्स का यूज दूसरों को टार्चर करने में कर चुकी है और लोगों को टार्चर करने के बाद निशा ने उन टूल्स को साफ करना भी जरूरी नहीं समझा। जिस कारण वो टूल्स अब और भी ज्यादा डरावने लग रहे थे। अचानक से अनिल वर्मा को निशा एक जल्लाद की तरह दिखाई देने लगी… कुछ देर पहले जिस निशा को देखकर उसके मन में निशा के लिए वासना जाग रही थी। अब उसी निशा को देखकर अनिल वर्मा के दिल में मौत का खौफ बैठ चुका था।
इससे पहले वो कुछ कहता। निशा ने एक प्लायर उठाया और एक एक करके अनिल वर्मा के दोनों हाथों के नाखूनों को बेरहमी से उखाड दिया। यह सब निशा ने बस कुछ ही मिनटों में ऐसे कर दिया था, जैसे वो वर्षों से यही सब करती आ रही हो। वहीं दूसरी तरफ अनिल वर्मा का दर्द के कारण बुरा हाल था, लेकिन मूँह के अंदर कपडा होने के कारण वो चीख भी नहीं सकता था। जिस बजह से लगातार उनकी आँखों से आँशू बह रहे थे। अनिल वर्मा की ऐसी हालत देखकर निशा समझ गई कि वो अह बस अब टूटने ही बाला है। इसलिए निशा ने उसे पूरी तरह से तोडने के लिए सूटकेस में से एक खंजर उठाया और अनिल वर्मा को डराने हुए बोली।
निशा- तुमने भिण्डी यानि लेडी फिंगर तो कई बार खई होंगी मिस्टर अनिल वर्मा…. लेकिन आज मैं तुम्हें जेन्टस फिंगर का स्वाद चखाती हूँ
इतना बोलकर निशा ने बेरहमी के साथ अनिल वर्मा के दाऐँ हाथ की उंगलियों को लेडी फिंगर यानि भिण्डी की तरह चॉप करना शुरू कर दिया। यह नजारा इतना ज्यादा भयानक था, जिसे देखकर हिना का मन उल्टी करने का करने लगा था। पर वो किसी तरह अपने आप को कंट्रोल किए हुए चुपचाप खडी रही… निशा का यह रूप देखकर हिना की रीढ की हड्डी में सिहरन दौड गई थी। उसने आज से पहले इतना बेरहम इंशान नहीं देखा था। वहीं दूसरी तरफ इकराम पूरी तरह से नॉर्मल खडा हुआ था।
ऐसा लग रहा था जैसे वो पहले भी कई बार निशा का यह रूप देख चुका हो। दाऐँ हाथ की उंगलियां चॉप करने के बाद निशा ने जैसे अपना खंजर अनिल वर्मा के बाँऐँ हाथ पर रखा, तो वो बुरी तरह से छटपटाने लगा। उसे देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वो कुछ कहना चाह रह हो। इसलिए निशा ने इकराम को इशारा किया। निशा का इशारा मिलते ही इकराम ने अनिल वर्मा के मूँह से कपडा निकाल दिया। मूँह के कपडा निकलते ही अनिल वर्मा लगभग रोते हुए बोला
अनिल- साली कमीनी… हारामजादी… तू इंशान नहीं हो सकती… पक्का तू इंशान के रूप में कोई शैतान है….
अनिल वर्मा की बात सुनकर निशा उसका मजाक उडाते हुए बोली
निशा- लगता है कि प्रोफेसर सहाब की अक्कल अब तक ठिकाने पर नहीं आई है। तभी तो बेमतलब की बकवास कर रहे हैं…. इकराम इनका मूँह फिर से बंद कर दो…. अभी तो इनके बाऐं हाथ की उंगलियाँ बची हुई हैं, उसके बाद दोनों पैरों का नम्बर आऐगा।
निशा की बात सुनकर डर के कारण अनिल वर्मा का पेसाब छुट गया और उसने वहीं बैठे बैठे अपना पेंट गिला कर दिया। इससे पहले इकराम उसका मूँह फिर से बंद कर पाता, अनिल वर्मा बुरी तरह से चीखते हुए बोला
अनिल- नहीं रुको… में सब बताता हूँ… प्लीज रुक जाओ…..
अनिल वर्मा की बात सुनकर निशा मुस्कुराते हुए बोली
निशा- तो फिर जल्दी से बकना शुरू करो…
अनिल- मैं तुम्हें सब कुछ बता दूँगा…. लेकिन प्लीज पहले मुझे हॉस्पीटल ले चलो… देखो ना कितना ज्यादा खून निकल रहा है… और मेरी उंगलियाँ…. हे भगवान ऐ तुमने क्या कर दिया….
अनिल वर्मा की बात सुनकर निशा चिढते हुए बोली
निशा- हुम्म तो तुम्हें पहले हॉस्पीटल जाना है…. ठीक है… मैं पहुँचाती हूँ तुम्हें हॉस्पीटल….
इतना बोलकर निशा ने इकराम को इशारा किया। इससे पहले कि अनिल वर्मा निशा के असली इरादों को समझ पता, इकराम ने नीचे डला हुआ कपडा उठाया। जो कुछ देर पहले उसने अनिल वर्मा के मूँह में से निकाला था। उसके बाद इकराम ने वो कपडा अनिल बर्मा में मूँह पर रखकर अपने दोनों हाथों से पूरी ताकत के साथ अनिल वर्मा का मूँह बंद कर दिया। जिस कारण अनिल वर्मा अब चाहकर भी कोई आवाज नहीं कर सकता था। ठीक तभी निशा ने सामने रखे सूटकेश में से प्लास्टिक की एक छोटी सी डिब्बी उठाई और उसका ढक्कन खोलकर उसमें भरा हुआ पाऊडर अनिल वर्मा के बाऐँ हाथ की उँगलियों पर डाल दिया, जहाँ से खून बह रहा था।
जैसे ही वो पाऊडर अनिल वर्मा के घाव पर गिरा, तो उसके पूरे बदन में दर्द और जलन की तेज लहर दौड गई। असल में वो पाऊडर कछ और नहीं बल्की नमक और मिर्च का मिश्रण था। जिसका उपयोग निशा अपने दुशमनों को दर्द देने के लिए करती थी। उस नमक मिर्च के पाऊडर के कारण अनिल वर्मा की हालत पहले से भी ज्यादा खराब हो गई थी। हाँलाकि वो चाहकर भी ना तो चीख सकता था और ना ही हिल डुल सकता था। पर दर्द और जलन के कारण उसकी आँखों से लगातार आँशू बह रहे थे। आखिरकर 5 मिनट बाद इकराम ने अनिल वर्मा को छोड दिया। जैसे ही वो आजाद हुआ तो निशा उससे बोली।
निशा- अब जल्दी से बकना शुरू करो… क्योंकि मै नहीं चाहती कि ज्यादा खून बहने से तेरी मौत हो जाऐ… तुम मेरे सबालों के जबाब देने में जितनी देर करोगे। उतनी ही देर बाद तुम हास्पीटल जा पाओगे और तुम्हारे जिंदा बचने क चांस उतने ही कम होते जाऐंगे।
अब तक अनिल वर्मा इतना तो समझ चुका था कि वो जल्लादों के बीच फंस चुका है और उसकी कोई भी चालाकी अब उन लोगों के सामने चलने बाली नहीं है। इसलिए वो हथियार डालते हुए बोला
अनिल- हाँ हाँ हाँ मैं दुशमनों से मिला हुआ था और तुम्हारे शालिमार दीप पर आने का इंतजार कर रहा था। ताकि मेरे साथी तुम्हें पकडकर अपने साथ चाईना ले जाऐं।
निशा- पर क्यों… आखिर तुमने यह सब क्यों किया… मेरी तो तुमसे कोई दुशमनी नहीं थी और जहाँ तक मुझे याद है मैंने कभी भी तुम्हारे साथ कुछ भी गलत नहीं किया है। फिर तुमने आखिर देश के दुशमनों के साथ मेरा सौदा क्यों किया… आखिर तुम इस देश के गद्दार क्यों बन गए…
निशा की बात सुनकर अनिल वर्मा कुछ देर तक खामोश रहा और फिर बोला
अनिल- नहीं मेरी तुमसे कोई दुश्मनी नहीं है… और ना ही मैं इस देश के साथ गद्दारी करना चाहता था… लेकिन मैं मजबूर था…..
निशा- कैसी मजबूरी…. क्या तुम्हें पैसों की जरूरत थी…..
अनिल- नहीं मैंने वो सब पैसों के लिए नहीं किया था…
निशा- तो तुमने वो सब किसके कहने पर किया था…… आखिर कौन है तुम्हारा बॉस…..
निशा का सबाल सुनकर अनिल वर्मा ने एक गहरी सांस ली और फिर निशा की आँखों में आँखें डालकर बोला
अनिल- किंग के कहने पर…..
अनिल वर्मा का जबाब सुनकर निशा के साथ साथ इकराम और हिना भी हैरानी के साथ अनिल वर्मा को देखने लगे थे… क्योंकि उन्हें अनिल वर्मा की बातों पर रत्ति भर भी यकीन नहीं हो रहा था।