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Incest Maa or mera naya rishta

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vs12557

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दोस्तों यह मेरी पहली कहानी है. जो की एक मां बेटे के नए रिश्ते को दर्शाती है. यह बिल्कुल सच्ची कहानी है और यह कोई एक दिन की बात नहीं बल्कि कई दिनों की मेहनत है. उम्मीद है आप सबको यह पसंद आएगा. और अपनी राय जरुर दें.
 

vs12557

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मेरा नाम राहुल है और मैं 21 साल का हूं.जैसा कि मैंने बताया यह कहानी सच्ची है.
इसके मुख्य किरदार है मेरी मां जिसका नाम अंजू है. उम्र 46 साल रंग गोरा है जो कि बड़े शांत स्वभाव की और संस्कारी है हमेशा वह साड़ी पहनना ही पसंद करती है और शरीर सुडौल और सुंदर है.
और मेरी एक छोटी बहन भी है जिसका नाम संगीता है. वह अभी स्कूल में पढ़ती है.
इसके अलावा मेरे पापा है जो बीमार रहते हैं. जिनका एक्सीडेंट हो गया था और वह चल फिर भी नहीं पाते हैं मां पूरे दिन उनकी सेवा में लगी रहती है.
और सबसे ज्यादा जरूरी मेरा दोस्त है जिसका नाम रवि है. आखिर हम मां बेटे का रिश्ता उसी के वजह से सच हो पाया है.
 

vs12557

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1 दिन की बात है मैं और मेरा दोस्त बैठे हुए आपस में बातें कर रहे थे. बातों बातों में हम सेक्स की टॉपिक का जिक्र करने लगे.
रवि: यार सेक्स करने में कितना मजा आता होगा ना.
मैं: पता नहीं यार आज तक तो मौका नहीं मिला पर मन तो बहुत करता है.
रवि: तुमने कभी सेक्स स्टोरी पड़ी है.
मैं: नहीं तेरे पास कोई बुक है क्या?
रवि: अभी तो नहीं है पर पहले थी उसमें कई सारी कहानी थी. कुछ कहानी तो ऐसे थे जिसने मेरे होश उड़ा दिए थे.
मैं: ऐसा क्या था मुझे भी तो बता.
रवि: छोड़ जाने दे तुझे नहीं पसंद आएगा.
मैं: यार प्लीज बताना.
रवि: तूने कभी सुना है बेटे ने अपनी मां के साथ सेक्स किया हो.
मैं: नहीं, क्या यह सच में होता है? और यह तो कितना गलत है ना.
रवि: कुछ गलत नहीं होता है. गलत तब होता ना जब किसी को पता चलता, घर में अगर एक मां बेटे एक दूसरे से प्यार करते हो
यह थोड़े किसी को पता चलता है.
मैं: यार आखिर एक मां कैसे तैयार हो जाती हो क्या अपने बेटे के साथ यह सब करवाने के लिए. और क्या बेटे को भी शर्म नहीं आती है सब करने में. किसे पता चलेगा.
रवि: तुझे क्या लगता है औरतें शरीफ होती है. क्या तेरी मां का मन नहीं करता होगा. तेरे पापा का तो एक्सीडेंट हो चुका है. पिछले 4 महीने से बेड पर है.
मैं: यार मेरी मां तो बहुत शरीफ है.
रवि: ऐसा मैं भी मेरी मां के बारे में सोचता था कि वह बहुत शरीफ है. जब से उसे सेक्स करवाते हुए देखा है पापा के साथ अलग-अलग पोजीशन में. तब से मैं समझ गया कि मेरी मां शरीफ नहीं है और कोई औरत शरीफ नहीं होती है. आखिर उनकी भी कुछ ज़रूरतें होती है.
मैं: क्या तुने अपनी मम्मी को सेक्स करवाते हुए देखा. अजीब नहीं लगा यह सब देखकर हो तूने तो उसे पूरा नंगा देख लिया होगा.
रवि: मन तो कर रहा था मैं भी चोद लूं उसे पर हिलाकर ही शांत करना पड़ा और तू मेरे जगह होता तो क्या करता है. तेरा मन नहीं करता अपनी मां के साथ सोने का?
मैं: यार आज तक मैंने कभी इस बारे में सोचा नहीं. पर पता नहीं क्यों आज तेरी बातें सुन के अंदर से बहुत अजीब सा हो रहा है.
रवि: क्या तूने उसे कभी नंगा देखा है.
मैं: कभी नहीं बस कई बार वह झाड़ू लगाती है तब मेरी नज़रें गलती से उसके ब्लाउस पर पड़ गई थी. पर मैंने कभी इस बारे में सोचा नहीं.
रवि: तो आज जाकर सोचना और जिस दिन तू उसका चुत देख लेगा तेरी सारी शराफत खत्म हो जाएगी यह मेरा वादा है.

रवि की इन सारी बातों से मेरे मन में हलचल पैदा हो गई. मेरे समझ में नहीं आ रहा था क्या यह सब भी सच हो सकता है. मैं जो वापस घर की तरफ जा रहा था तो मेरे दिमाग में सिर्फ मेरी मां की ख्याल चल रहे थे, ना चाहते हुए भी मेरी आंखों में अलग से ही चमक थी. एक उम्मीद थी अपनी मां को करीब से देखने की.
डर भी सताया जा रहा था. कि यह सब चीज बहुत गलत है. और यह सब आखिर मुमकिन कैसे होगा. क्योंकि मेरा घर बहुत छोटा था एक बेडरूम और हाल में ही बाथरूम. पापा का एक्सीडेंट होने की वजह से वह हाल में ही सोते थे और मम्मी नीचे जमीन पर. बस एक बेडरूम होने के कारण उसमें मैं और मेरी बहन सोते थे. सबका कपड़ा बेडरूम में ही अलमारी में होता था. जिसकी वजह से अगर किसी को नहाते वक्त कपड़े की जरूरत होती थी. तो यह तो उसे साथ ले जाता था या फिर मांगना पड़ता था.
मैं शाम के 7:00 बजे घर पहुंचा पर मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी अंदर जाने की. जानता हूं यह बातें सुनने में अजीब लग रही होगी, आप खुद सोचिए आपने कभी अपनी मां को उसे नजरिए से देखने की कोशिश नहीं की होगी और अचानक आपके दिमाग में यह सब चलने लगे तो फिर कैसा लगेगा.
मैंने जैसे ही दरवाजा खटखटाया. दरवाजा खोलते ही मेरे सामने मेरी मां खड़ी थी. उसे देख मेरे बदन के रोंगटे खड़े हो गए. उसने ब्लू कलर की साड़ी पहनी हुई थी. आंखों में वही मासूमियत पर उसे क्या पता था कि आज उसके बेटे के मन में उसके लिए कुछ और ही चल रहा है.
 
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vs12557

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मेरे घर में आते ही मां ने मुझे धीमे और प्यार भरी आवाज में पूछा.
मां: खाने में क्या बनाऊं.
मैंने सर झुकाए हुए कहा कुछ भी बना दो. और मैं अपने रूम की तरफ गया. अलमारी से कपड़े लिए और चेंज करने के लिए बाथरुम में चला गया.
मैं अंदर जाकर कपड़े चेंज कर ही रहा था कि मेरी नजर एक ऐसी चीज पर पड़ी जिसकी मुझे उम्मीद नहीं थी और वह थी मेरी मां की पेंटी. वह लाल रंग की पेंटी स्टाइलिश डिजाइन की थी, मुझे कहीं ना कहीं यह लगा की मां इन सब चीजों की भी थोड़ी तो शौकीन है. मेरा मन पेंटी अपने हाथों में लेकर सूंघने का हुआ.
मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मैं उसकी चुत की खुशबू को वाकई में सूंघ रहा हूं. मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया और खुद पर कोई काबू न रहा. और मैं अपने लंड को सहलाने शुरू कर दिया. एक हाथ से उसकी चड्डी सूंघता रहा. दूसरा हाथ मेरे लंड को हिला रहा था. उसकी खुशबू मुझे इतनी मदहोश कर रही थी कि मेरा लंड 2 मिनट में पानी छोड़ दिया.
मैंने उसकी पेंटी को वैसे ही रख दिया जैसे वह पहले था और चुपचाप कपड़ा चेंज करके बाहर आ गया. बाहर आकर मैंने देखा मम्मी किचन में काम कर रही थी. मैंने बहाने से कोशिश की उसके पास जाने की और उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया. और धीरे से पास जाकर मैंने पूछा "मां क्या कर रही हो".
मां: (मुस्कुरा कर जवाब दिया) तुझे तो पता ही है मेरा दिन रात का यही काम है. और कम से कहां फुर्सत मिलती है.
दोनों कंधे पर हाथ रखते हुए मैंने कहा. "छोड़ो भी यह सब".
इसी बहाने उसके बदन के खुशबू का भी एहसास हुआ. मन तो कर रहा था उसके होठों को चूम लूं लेकिन यह सब सोचना बस एक सपने की तरह लग रहा था. क्योंकि ऐसी संस्कारी औरत कभी तैयार नहीं होगी अपने बेटे के साथ यह सब करने के लिए तभी मैं फिर से कहा.
"मां छोड़ो यह सब मैं कर देता हूं".
मां: (मजाक करते हुए बोला) जब तेरी बीवी आएगी तब उसके लिए करना अभी मुझे काम करने दे.
मैं: आप इतना काम करके बहुत थक जाती हो ना. आज मैं आपके हाथ पैरों की मालिश कर दूंगा.
मां: क्या बात है आज अचानक से मेरी इतनी फिक्र क्यों हो रही है.
मैं: मुझे आपकी हमेशा फिक्र होती है.
मुझे लगा नहीं था कि वह मांनेगी पर वह मान गई. लेकिन यह इतना ही मुश्किल था जितना मैंने सोचा था. क्योंकि एक रूम में तो मेरी बहन थी. और हाल में पापा सो रहे थे. तो मालिश करता तो करता कहां.
रात को हम सबने खाना खाया. और मेरी बहन सोने चली गई. पापा भी हाल में सो चुके थे. मम्मी ने सारे बर्तन वगैरा साफ करने के बाद अपने लिए बिस्तर लगाना शुरू कर दिया हाल में जमीन पर तभी मैंने मम्मी को याद दिलाया फिर से कि आपकी मालिश कर देता हूं.
कहने लगी "नहीं चलेगा रहने दे".
मैंने कहा "आओ ना ऐसा भी क्या है".
मैं उसे प्यार से खींच कर अपने रूम में ले गया और बोला में आपकी मालिश कर देता हूं. जैसे तैसे वह मनी. मैं जानता था अगर इससे नॉर्मल मालिश करूंगा तो यह कुछ नहीं करने देगी. तो मैं बहाने से तेल लगाकर मालिश करने की कोशिश की किसी बहाने थोड़ा साड़ी उठाने का मौका मिल जाएगा. पर ऐसा नहीं हुआ.
मां: कहा "बस ऊपर ऊपर से दबा दो हाथ पैर चलेगा". तो भी मैं नहीं करके नीचे से साड़ी उसके घुटनों तक उठा दिया. क्या पैर थे उसके सुंदर से गोरे-गोरे. मां को एहसास हो चुका था कि मैंने साड़ी उठाया है. उसने झट से साड़ी नीचे किया.
मां: धीमी आवाज में बोली "क्या कर रहा है बस रहने दे अपने सोने जा रही हूं".
घुटने तक ही सही पर उसकी गोरी टांगें देखकर मेरा जो हाल बेहाल हुआ वह तो मैं ही जानता हूं.
 

netsunil

मैं काग़ज़ बेरंग.. तू रंगरेज़ मेरे अल्फ़ाज़ों का
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मेरे घर में आते ही मां ने मुझे धीमे और प्यार भरी आवाज में पूछा.
मां: खाने में क्या बनाऊं.
मैंने सर झुकाए हुए कहा कुछ भी बना दो. और मैं अपने रूम की तरफ गया. अलमारी से कपड़े लिए और चेंज करने के लिए बाथरुम में चला गया.
मैं अंदर जाकर कपड़े चेंज कर ही रहा था कि मेरी नजर एक ऐसी चीज पर पड़ी जिसकी मुझे उम्मीद नहीं थी और वह थी मेरी मां की पेंटी. वह लाल रंग की पेंटी स्टाइलिश डिजाइन की थी, मुझे कहीं ना कहीं यह लगा की मां इन सब चीजों की भी थोड़ी तो शौकीन है. मेरा मन पेंटी अपने हाथों में लेकर सूंघने का हुआ.
मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मैं उसकी चुत की खुशबू को वाकई में सूंघ रहा हूं. मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया और खुद पर कोई काबू न रहा. और मैं अपने लंड को सहलाने शुरू कर दिया. एक हाथ से उसकी चड्डी सूंघता रहा. दूसरा हाथ मेरे लंड को हिला रहा था. उसकी खुशबू मुझे इतनी मदहोश कर रही थी कि मेरा लंड 2 मिनट में पानी छोड़ दिया.
मैंने उसकी पेंटी को वैसे ही रख दिया जैसे वह पहले था और चुपचाप कपड़ा चेंज करके बाहर आ गया. बाहर आकर मैंने देखा मम्मी किचन में काम कर रही थी. मैंने बहाने से कोशिश की उसके पास जाने की और उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया. और धीरे से पास जाकर मैंने पूछा "मां क्या कर रही हो".
मां: (मुस्कुरा कर जवाब दिया) तुझे तो पता ही है मेरा दिन रात का यही काम है. और कम से कहां फुर्सत मिलती है.
दोनों कंधे पर हाथ रखते हुए मैंने कहा. "छोड़ो भी यह सब".
इसी बहाने उसके बदन के खुशबू का भी एहसास हुआ. मन तो कर रहा था उसके होठों को चूम लूं लेकिन यह सब सोचना बस एक सपने की तरह लग रहा था. क्योंकि ऐसी संस्कारी औरत कभी तैयार नहीं होगी अपने बेटे के साथ यह सब करने के लिए तभी मैं फिर से कहा.
"मां छोड़ो यह सब मैं कर देता हूं".
मां: (मजाक करते हुए बोला) जब तेरी बीवी आएगी तब उसके लिए करना अभी मुझे काम करने दे.
मैं: आप इतना काम करके बहुत थक जाती हो ना. आज मैं आपके हाथ पैरों की मालिश कर दूंगा.
मां: क्या बात है आज अचानक से मेरी इतनी फिक्र क्यों हो रही है.
मैं: मुझे आपकी हमेशा फिक्र होती है.
मुझे लगा नहीं था कि वह मांनेगी पर वह मान गई. लेकिन यह इतना ही मुश्किल था जितना मैंने सोचा था. क्योंकि एक रूम में तो मेरी बहन थी. और हाल में पापा सो रहे थे. तो मालिश करता तो करता कहां.
रात को हम सबने खाना खाया. और मेरी बहन सोने चली गई. पापा भी हाल में सो चुके थे. मम्मी ने सारे बर्तन वगैरा साफ करने के बाद अपने लिए बिस्तर लगाना शुरू कर दिया हाल में जमीन पर तभी मैंने मम्मी को याद दिलाया फिर से कि आपकी मालिश कर देता हूं.
कहने लगी "नहीं चलेगा रहने दे".
मैंने कहा "आओ ना ऐसा भी क्या है".
मैं उसे प्यार से खींच कर अपने रूम में ले गया और बोला में आपकी मालिश कर देता हूं. जैसे तैसे वह मनी. मैं जानता था अगर इससे नॉर्मल मालिश करूंगा तो यह कुछ नहीं करने देगी. तो मैं बहाने से तेल लगाकर मालिश करने की कोशिश की किसी बहाने थोड़ा साड़ी उठाने का मौका मिल जाएगा. पर ऐसा नहीं हुआ.
मां: कहा "बस ऊपर ऊपर से दबा दो हाथ पैर चलेगा". तो भी मैं नहीं करके नीचे से साड़ी उसके घुटनों तक उठा दिया. क्या पैर थे उसके सुंदर से गोरे-गोरे. मां को एहसास हो चुका था कि मैंने साड़ी उठाया है. उसने झट से साड़ी नीचे किया.
मां: धीमी आवाज में बोली "क्या कर रहा है बस रहने दे अपने सोने जा रही हूं".
घुटने तक ही सही पर उसकी गोरी टांगें देखकर मेरा जो हाल बेहाल हुआ वह तो मैं ही जानता हूं.
nice start
 
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