दोस्तों यह मेरी पहली कहानी है. जो की एक मां बेटे के नए रिश्ते को दर्शाती है. यह बिल्कुल सच्ची कहानी है और यह कोई एक दिन की बात नहीं बल्कि कई दिनों की मेहनत है. उम्मीद है आप सबको यह पसंद आएगा. और अपनी राय जरुर दें.
nice startमेरे घर में आते ही मां ने मुझे धीमे और प्यार भरी आवाज में पूछा.
मां: खाने में क्या बनाऊं.
मैंने सर झुकाए हुए कहा कुछ भी बना दो. और मैं अपने रूम की तरफ गया. अलमारी से कपड़े लिए और चेंज करने के लिए बाथरुम में चला गया.
मैं अंदर जाकर कपड़े चेंज कर ही रहा था कि मेरी नजर एक ऐसी चीज पर पड़ी जिसकी मुझे उम्मीद नहीं थी और वह थी मेरी मां की पेंटी. वह लाल रंग की पेंटी स्टाइलिश डिजाइन की थी, मुझे कहीं ना कहीं यह लगा की मां इन सब चीजों की भी थोड़ी तो शौकीन है. मेरा मन पेंटी अपने हाथों में लेकर सूंघने का हुआ.
मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मैं उसकी चुत की खुशबू को वाकई में सूंघ रहा हूं. मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया और खुद पर कोई काबू न रहा. और मैं अपने लंड को सहलाने शुरू कर दिया. एक हाथ से उसकी चड्डी सूंघता रहा. दूसरा हाथ मेरे लंड को हिला रहा था. उसकी खुशबू मुझे इतनी मदहोश कर रही थी कि मेरा लंड 2 मिनट में पानी छोड़ दिया.
मैंने उसकी पेंटी को वैसे ही रख दिया जैसे वह पहले था और चुपचाप कपड़ा चेंज करके बाहर आ गया. बाहर आकर मैंने देखा मम्मी किचन में काम कर रही थी. मैंने बहाने से कोशिश की उसके पास जाने की और उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया. और धीरे से पास जाकर मैंने पूछा "मां क्या कर रही हो".
मां: (मुस्कुरा कर जवाब दिया) तुझे तो पता ही है मेरा दिन रात का यही काम है. और कम से कहां फुर्सत मिलती है.
दोनों कंधे पर हाथ रखते हुए मैंने कहा. "छोड़ो भी यह सब".
इसी बहाने उसके बदन के खुशबू का भी एहसास हुआ. मन तो कर रहा था उसके होठों को चूम लूं लेकिन यह सब सोचना बस एक सपने की तरह लग रहा था. क्योंकि ऐसी संस्कारी औरत कभी तैयार नहीं होगी अपने बेटे के साथ यह सब करने के लिए तभी मैं फिर से कहा.
"मां छोड़ो यह सब मैं कर देता हूं".
मां: (मजाक करते हुए बोला) जब तेरी बीवी आएगी तब उसके लिए करना अभी मुझे काम करने दे.
मैं: आप इतना काम करके बहुत थक जाती हो ना. आज मैं आपके हाथ पैरों की मालिश कर दूंगा.
मां: क्या बात है आज अचानक से मेरी इतनी फिक्र क्यों हो रही है.
मैं: मुझे आपकी हमेशा फिक्र होती है.
मुझे लगा नहीं था कि वह मांनेगी पर वह मान गई. लेकिन यह इतना ही मुश्किल था जितना मैंने सोचा था. क्योंकि एक रूम में तो मेरी बहन थी. और हाल में पापा सो रहे थे. तो मालिश करता तो करता कहां.
रात को हम सबने खाना खाया. और मेरी बहन सोने चली गई. पापा भी हाल में सो चुके थे. मम्मी ने सारे बर्तन वगैरा साफ करने के बाद अपने लिए बिस्तर लगाना शुरू कर दिया हाल में जमीन पर तभी मैंने मम्मी को याद दिलाया फिर से कि आपकी मालिश कर देता हूं.
कहने लगी "नहीं चलेगा रहने दे".
मैंने कहा "आओ ना ऐसा भी क्या है".
मैं उसे प्यार से खींच कर अपने रूम में ले गया और बोला में आपकी मालिश कर देता हूं. जैसे तैसे वह मनी. मैं जानता था अगर इससे नॉर्मल मालिश करूंगा तो यह कुछ नहीं करने देगी. तो मैं बहाने से तेल लगाकर मालिश करने की कोशिश की किसी बहाने थोड़ा साड़ी उठाने का मौका मिल जाएगा. पर ऐसा नहीं हुआ.
मां: कहा "बस ऊपर ऊपर से दबा दो हाथ पैर चलेगा". तो भी मैं नहीं करके नीचे से साड़ी उसके घुटनों तक उठा दिया. क्या पैर थे उसके सुंदर से गोरे-गोरे. मां को एहसास हो चुका था कि मैंने साड़ी उठाया है. उसने झट से साड़ी नीचे किया.
मां: धीमी आवाज में बोली "क्या कर रहा है बस रहने दे अपने सोने जा रही हूं".
घुटने तक ही सही पर उसकी गोरी टांगें देखकर मेरा जो हाल बेहाल हुआ वह तो मैं ही जानता हूं.