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Romance Love in College. दोस्ती प्यार में बदल गई❣️ (completed)

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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श्रीमान जी रोमेंटिक स्टोरी पर मुझे रिव्यू लिखे ही नही जाते थोड़ा थ्रिल सस्पेस का तड़का लगने दीजिए रिव्यू बड़ा और लम्बा आएगा
Avasya Devi ji👍 waise aap e kabhi pyar nahi kiya lagta😀 Varna aisa na bolte aap🤔 waise ye kewal meri niji soch hai ise anyatha na le.🙏🏼
 

Raj_sharma

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Raj_sharma

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Raj_sharma

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200-19-2


Ky to mast update dia bhai
Lekin ye sapna bahaut ajeeb tha bhai
Esa lagta hai shyad kuch hone ko hai
Kher Ver or Sunny ki dosti sath Priya or Kanchan ka sath lagta hai Manali Jake iska asar dekhne ko Milne wala hai 😉 😉
.
VERY WELL UPDATE Raj_sharma BHAI 💐💐💐💐
Thank you very much for your wonderful review bhai, obviously brother, you will definitely enjoy the next update DEVIL MAXIMUM ❣️:hug:
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Nicely updateted...its a common problem in our society...🤔bhot dost dekhe h jo oyar karte h but bol nahi pate to aapki story ka concept bhi aacha h or jo me hameshaa kahati hu nicely updateted..... waiting for your next update
Thank you very much Yasasvi3 for your valuable review and support :thanx:Yes aapne sahi kaha ye problem bohot logo me hoti hai👍 ek ko mai bhi janta hu jiska pyar na bolne ki vajah se us se door ho gaya😞
 

ellysperry

Humko jante ho ya hum bhi de apna introduction
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Update 11.

कंचन: ठीक है प्रिया जब तुम इतना बोल ही रही हो तो मैं भी चलूंगी, आख़िर तू ही तो मेरी एकलौती दोस्त है।

इतना सुनते ही सनी जोश जोश में जोर से चिल्लाता है हुर्रे..... सभी उसकी तरफ देखने लगे, तब उसे एहसास हुआ कि वो क्या कह रहा है। और तुरंत माफ़ी माँगता है।
सॉरी मुझे बस इसी बात की खुशी हो रही है कि हमारा ग्रुप साथ में जा रहा है, इसके लिए...!!


ये देख कर कंचन को भी हंसी आती है जब सनी की नजर कंचन पर पड़ती है तो वो अपनी नजर झुका लेती है।

अब आगे:

सब लोग बेल लगाने के बाद फिर से क्लास में चले जाते हैं, ऐसे ही पढ़ते या बात करते हुए दिन निकल जाता है,

छुट्टी होने पर रघुवीर, सुप्रिया, सनी, कंचन, चारो कॉलेज से निकलते हैं, सब लोग साथ में चलते हुए बातें करते हैं।

सनी: यार वीरे मजा आ जाएगा, इतने सालो बाद हम सब साथ हैं और ये सावन का मौसम हर तरफ हरियाली, और वो मनाली की खूबसूरत वादियां!

वीर: अबे सानिया साले अभी सावन कहां शुरू हुआ है? और तूने टर्र-टर्र करना शुरू कर भी दिया (मुस्कान) 😄 अबे अभी एक हफ्ता है जाने में।

और बरसात आई कहाँ है? हा तब तक हो सकती है वो अलग बात है!
रही बात जाने की तो तू बिल्कुल सही कह रहा है कि लगभाग 12 साल हो गए हम दोनों को साथ में कहीं घूमे!

मुझे आज भी याद है तेरे मामा की शादी में कितने मजे किये थे हमने।

सनी: हां यार वीरे सही कह रहा है तू, अरे मेरा तो और भी रुकने का मन था वाहा पर साले तेरी वजह से ना रुक पाया, वो चौधरी के लड़के का सर फोड़ दिया था तुमने तो तेरे मामा ने मामला रफादफा कर के हमें वाहा से भेज दिया था!

वीर: कमीने इसमें भी तेरी ही गलती थी! साले खुद जा कर हर किसी से लड़ाई कर लेता था, और बाद में मुझे निपटना पड़ता था, साले बचपन में एक बार भी चेन की सांस नहीं लेने दी तुमने जब देखो किसी न किसी से उलझा रहता था।

सनी: यार वीरे सही कह रहा है तू, लेकिन दो चीजें हैं एक तो अपने से गलत कुछ भी बर्दाश्त नहीं होता, ये तू भी जानता है, मेरे पापा ने हमेशा बचपन से ही यही सिखाया है कि गलत के सामने कभी झुकना नहीं! दूसरा मुझे इतना समझ नहीं था उस समय तो हो जाता था ऊपर नीचे। :D

सुप्रिया और कंचन दोनों की बातें सुनकर हस्ती हैं, सुप्रिया बोलती हैं,

सुप्रिया: अरे -अरे रुकोगे या यहीं पर आज कल्कि पुराण सुनने का इरादा है? हम लोग बात करते-करते कॉलेज से कंचन के घर के पास तक पहुंच गए लेकिन तुमलोगो ने अपनी बात ख़तम नहीं की।

वीर: देख ले सनी इसे कहते है जलकुकड़ी! ये चिकुड़ी जलती है हमसे, इसे बर्दाश्त नहीं हुआ कि हम दो बेचारे सीधे साधे लड़के हंसी मजाक करके समय बिता रहे हैं।

प्रिया: देख ले तोते मारूंगी एक तुझे बोला ना मुझे इस नाम से मत बुलाया कर।

वीर: मै तो बुलाऊंगा क्या कर लेगी "चिकुड़ी" (ये बोलके हसने लगता है साथ में सनी और कंचन भी हस्ती है)।
प्रिया: ठीक है फिर मैं भी सबको बोलूंगी कि ये ज्यादा बोलने वाला तोता है! और फिर तू मिल अकेले में तेरी खबर ना ली तो कहना?

सनी: अकेला? हे भगवान ये क्या हो रहा है? ये मैं क्या सुन रहा हूँ!!

प्रिया: ओए तू चुप कर वरना ये तो बच गया पर तू मेरे हाथ से जरूर पिटेगा।(मुस्कुराते हुए) ऐसे ही बाते करते हुए सब लोग कंचन को उसके घर के पास छोड़ कर वहां से अपने घर की और निकल जाते हैं सनी, वीर और सुप्रिया के घर थोड़ी-थोड़ी दूर पर ही थे तो तीनो अपने घर की और निकल जाते हैं ।

(वैसे सनी के) पिता जी पुलिस अधिकारी हैं तो गांव में साल में एक बार चुट्टियों में आते हैं अपना घर और जमीन देखने के लिए, वैसे सनी और वीर की तरह ही उनके पिता जी भी आपस में मित्र ही थे तो उन्हें कोई चिंता नहीं थी अपनी जमीन की)

वीर: यार सानिया टाइम निकाल के आना शाम को हवेली के चोबारे में बैठते हैं!

सनी: चल साले तू भी क्या याद करेगा किस रहीस से पाला पड़ा है! आता हूँ शाम को,

रघुवीर अपने घर चला जाता है जहां उसकी माता जी उसका इंतजार कर रही हैं ।

सीता देवी: आ गया बेटा, चल जल्दी से हाथ मुँह धो कर आजा कुछ खा ले! और रबड़ी (मोठ बाजरा और लस्सी से बनी) रक्खी है निकल के वो पी लेना गरमी बहुत पड़ रही है बेटा और तुम लोग धूप में आते हो!

वीर: ठीक है माँ!

वीर खाना खा कर चोबारे में चला जाता है जहां पर उसने गाने सुन ने के लिए टेप रिकॉर्डर और कैसेट्स रखे हुए थे! काफी खोज-बीन कर एक कैसेट निकला और टेप में लगाकर मध्यम आवाज में गाना चलाया! कूलर चालू कर के बिस्तर पर धड़ाम से कूद पड़ा!

लडकी: तू जब जब मुझको पुकारे मैं दौड़ी आऊं नदिया किनारे.. 🎶🎶

पुरुष: हर पल तेरा रास्ता निहारे.. दिल लागे नहीं तेरे बिना रे... :music:

मुझे सीने से लगा ले मुझे अपना बना ले मेरे भोले साथिया... तुझे दिल दे दिया...........
मेरा दिल ले लिया... :music:

गाना सुनते-सुनते वीर को नींद आ जाती है और वो सपनों में खो जाता है! जहां वो सपने में देखता है :

आज से कुछ साल पहले की यादे जब वीर और प्रिया आपस में नदी किनारे खेल रहे थे: तो वीर उसको कुछ हस्कर बोल रहा है, कुछ देर बाद सीन चेंज हो जाता है और उसमे वीर और सनी क्रिकेट खेल रहे हैं और किसी के साथ बात कर रहे हैं! फिर कुछ देर बाद वीर और प्रिया आपस में बात करते दिखे!

तभी वीर अपने आपको आज की प्रिया के साथ बैठा हुआ दिखायी देता है!

सपने में वीर से प्रिया बोलती है :
वीर ये प्यार क्या होता है?

वीर: प्यार क्या होता है? :

“जानती हो प्यार क्या होता है,
कभी पूछा है खुद से, कोसिस की है जान-ने की,
ये जो तुम्हारी आँखों में अजाती है चमक मेरे आने से,
और तुम्हें देखकर दिल मेरा भी धड़कने लगता है,
हाँ यही तो प्यार होता है!

या जब तुम दूर होती हो मुझसे, तो तड़फ उठता हूं मे,
तुम्हारा भी तो दिल बेचैन होता है,
हाँ यही तो प्यार होता है!

एक दूसरे की बाते याद करके अकेले में हसना, एक दूसरे की तस्वीर देख खिल उठना,
एक दूसरे से मिलने का इंतज़ार होता है,
हाँ यही तो प्यार होता है!

तुम्हारी गौद मैं सोना, तुम्हारा हाथ -हाथो में ले कर घण्टो बातें करना,
उस वक़्त जो एक दूसरे पर ऐतबार होता है,
हाँ यही तो प्यार होता है!”


सपने में अभी दोनों बातें कर रहे हैं कि जोर की आंधी आती है, वीर और प्रिया दोनों वहां से घर की और निकलते हैं पर आंधी इतनी तेज और धूल भरी थी कि दोनों को घेर लेती है जिसमें कुछ भी नहीं दिखता! आँधी की वजह से प्रिया और वीर की आँखों में धूल चली जाती है प्रिया अपने हाथ में जो कि वीर के हाथ में थी उससे छुड़वा के आँख साफ करती है!

वीर आवाज़ लगता है प्रिया....!!
मेरा हाथ पकड़ो लेकिन प्रिया की आवाज़ नहीं आती!

वीर: प्रिया कहाँ हो तुम? वीर बार-बार चिल्लाता है

तभी उसे प्रिया की आवाज सुनाई दी जो कहीं दूर से आ रही थी!


प्रिया: वीर बचाओ मुझे पता नहीं ये आंधी मुझे कहा उड़ाये ले जा रही है? बचाओ....!

वीर: मैने कहा था मेरा हाथ पकड़ो लेकिन तुम सुनती कहा हो! आ रहा हूँ मै! कहते हुए वीर आवाज की दिशा में दौड़ने लगता है,


(वो बहुत देर तक इधर-उधर घूमता रहता है काफी चिल्लाता है लेकिन कोई आवाज नहीं आती! तब तक आँधी भी जा चुकी है पर प्रिया का कोई पता नहीं,)
प्रिया……!!
कोई मेरी प्रिया को मिला दो मुझसे, कोई ढूंढ दो उसे कहते हुए वीर की आँखों में झर-झर आँसू बहने लगते हैं! तभी उसे जानी पहचानी आवाज सुनाई देती है: वीरे… वीरे!!

वीर: सनी मेरे भाई कहा है तू मुझे केवल तेरी आवाज सुना दे रही है!

भाई यार प्रिया कहीं खो गई है हमको ढूंढ़ना पड़ेगा, सनी मेरे दोस्त मुझे तू भी कहीं छोड़ कर मत जाना! सनी की आवाज़ फिर से सुनायी देती है:

वीरे मेरे भाई क्या हुआ है तुझे? आँखे खोल भाई ! तू रो क्यों रहा है बता मुझे क्या बात है आँख खोल भाई!

वीर: सनी कहा है तू भाई मेरे? मेरी प्रिया... तभी वीर की आंख खुल जाती है!

वीर की आंखे लाल हो राखी थी, और आंसू आ रहे थे।

सनी: (वीर को अपने सीने से लगाते हुए) वीरे क्या हुआ तुझे भाई? तेरी आँखे ऐसा लाल क्यों है? और तू रो क्यों रहा था? और तू नींद में प्रिया-प्रिया चिल्ला रहा था, इसका क्या कारण है?

वीर: भाई बहुत बुरा सपना देखा मैंने, मैंने देखा कि मेरी प्रिया मुझसे दूर हो गई कोई मुझे छीन ले गया उसको, कहते हुए वीर की आंखो में आंसू आने लगते हैं।

सनी: हम्म.. तो ये बात है! मैं ना कहता था कि बात कुछ और है!! अब सामने आ ही गया! तू चाहता है उसे ये साबित हो गया।

वीर: हां- हा मैं चाहता हूं उसे ! और उसके लिए कुछ भी कर सकता हूं! लेकिन मेरे भाई मैंने कभी भी अपने दिल की बात जुबान पर नहीं लाई, क्योंकि अगर वो मुझसे नाराज हो गई तो वो मुझसे दोस्ती भी खत्म कर लेगी, और मैं उसके बिना जी नहीं सकता.

Note: (सुप्रिया रघुवीर को बहुत पसंद करती है। बचपन से ही पर कभी कहती नहीं है और रघुवीर भी सुप्रिया को बहुत पसंद करता है। बचपन से दोनों एक दूसरे को पसंद करते है पर कभी एक दूसरे से नहीं कहते, दोनों डरते है कही हमारी दोस्ती खत्म ना हो जाए और एक दूसरे से दूर ना हो जाए)

(दो साल पहले) एक दिन रघुवीर की मम्मी कभी -कभी सुप्रिया को कहती है।

सीता देवी: बेटा तू ही रघुवीर का ख्याल रख सकती है। तू मेरे रघुवीर से शादी कर ले इस पागल को तेरे अलावा कोई नहीं समझा सकता है। रघुवीर तेरे अलावा किसी और की नहीं सुनता (रघुवीर की मम्मी सुप्रिया को पसंद करती है)। सुप्रिया को शर्म आ जाती है।

रघुवीर की मम्मी कहती है, हर रोज रघुवीर के पापा रघुवीर पर गुस्सा करते है। इतना सुनकर के सुप्रिया अपने घर चली जाती है क्योकि रघुवीर घर पर नहीं होता अपने पापा के साथ कही गया होता है।

जारी है...✍️
Awesome update bhai 👍🏻


Matlab Raghuveer aur Supriya dono ek dusre ko bachpan se hi pasand kerte hai per dono izhaar kerne se derte hai ki kahin unki bachpan ki dosti na toot jaaye ,
Bahut hi Khoobsurat likhte ho bhai , ek ek sabd ko piro ker likhte hai aap bahut hi jabardast 👏🏻
 

Raj_sharma

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Awesome update bhai 👍🏻


Matlab Raghuveer aur Supriya dono ek dusre ko bachpan se hi pasand kerte hai per dono izhaar kerne se derte hai ki kahin unki bachpan ki dosti na toot jaaye ,
Bahut hi Khoobsurat likhte ho bhai , ek ek sabd ko piro ker likhte hai aap bahut hi jabardast 👏🏻
Thank you so much ellysperry brother for your valuable review and support :hug: Waise mai koi writer nahi hu, writer to pata nahi gyan ke samander me se kaise kaise Moti nikaal late hai, mai to bas ek Sachi Bhatnagar ko thoda bohot kuch change karke hi likh raha hu👍
 

Raj_sharma

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Waise ye yasasvi 1 and 2 se Milwao kabhi, bohot din hue dekhe hue :D
 

Raj_sharma

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