• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Romance Love in College. दोस्ती प्यार में बदल गई❣️ (completed)

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
43,687
79,576
304
Last edited:

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
43,687
79,576
304

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
43,687
79,576
304

DEVIL MAXIMUM

"सर्वेभ्यः सर्वभावेभ्यः सर्वात्मना नमः।"
Prime
11,166
34,964
244
“कभी तुम आजाओ ख़यालों में और मुस्कुराहट दूं मैं, इसे गर इश्क़ कहते हैं तो हां मुझे इश्क़ है तुमसे.”
बादशाह तो कहीं का भी बन सकता हूँ, पर तेरे दिल की नगरी में हुकूमत करने का मजा ही कुछ अलग है दोस्त


GIF-20240503-161359-143


आज भी याद आती है वो स्कूल कॉलेज की दोस्ती, प्यार का जुनून और प्यारे दोस्तों की दोस्ती, आज भी याद आते है वो प्यारे लम्हे, और याद आती है उन प्यारे दोस्तों की दोस्ती। नींद नहीं आती जब तू उदास होता है, अच्छा नहीं लगता जब तू नाराज़ होता है, शायद ये सच्ची दोस्ती ही है हमारे बीच की, दिल खुश होता है जब तू पास होता है। और हमने जब आप जैसा दोस्त पा लिया, तो सारे गम को चन्द लम्हो में भुला दिया।“

GIF-20240503-160951-936


जिंदगी की राह में मिले होंगे हजारों मुसाफिर तुमको, जिंदगी भर ना भुला पाओगे वो मुलाकात हूं मैं…”

GIF-20240503-161057-053
upload photos free


मेरी रूह को अपनी रूह में मिलाकर मुझे गुमनाम कर दो, तुम्हें देख कर लोग मुझे पहचाने यूं खुद को मेरा हमनाम कर दो”

02-27-52-44-512

Update 12.

सीता देवी: बेटा तू ही रघुवीर का ख्याल रख सकती है। तू मेरे रघुवीर से शादी कर ले इस पागल को तेरे अलावा कोई नहीं समझा सकता है।

रघुवीर तेरे अलावा किसी और की नहीं सुनता (रघुवीर की मम्मी सुप्रिया को पसंद करती है)। ये सुनके सुप्रिया को शर्म आ जाती है।

रघुवीर की मम्मी कहती है, पढाई में तो ध्यान देता नहीं सारे दिन इधर-उधर घूमता है! हर रोज रघुवीर के पापा रघुवीर पर गुस्सा करते रहते है। इतना सुनकर के सुप्रिया अपने घर चली जाती है क्योकि रघुवीर घर पर नहीं होता अपने पापा के साथ कही गया होता है।

अब आगे:

इधर दोनों अपने घर पर कहते है टूर पर जाने के लिए पर रघुवीर के पापा नहीं जाने देते रघुवीर को। उसके पापा डांटने लगते हैं, की कोई काम अच्छे से करता है क्या? जो यह कही जाए, पढ़ाई पर ध्यान तो है नहीं।
तभी सुप्रिया आ जाती है और रघुवीर के पापा से कहती है !

प्रिया: अंकल रघुवीर को मैं पढाई में मदद करती हूँ, और रघुवीर पढ़ाई पर अच्छे से ध्यान देने लगा है।
आप रघुवीर को हमारे साथ जाने दो, अब रघुवीर कभी को कभी कम नंबर नहीं आएगा कॉलेज में, इसकी गारंटी मैं देती हूं !! मुझे यकीन है वीर पे.

सुप्रिया की बात सुनने के बाद रघुवीर के पापा राज़ी हो जाते है, और कहते हैं.

दशरथ सिंह: मुझे तुम पर पूरा विश्वास है सुप्रिया बेटे कि तुम जो बोल रही हो वही सच होगा, तुम बोलती हो तो ठीक है! ये जा सकता है!

अगले दिन सुबह-2 घर से बाहर निकलते ही प्रिया अपनी छत पर घुमती हुई दिखाई देती है तो वीर इशारा करता है, जिसे देखकर प्रिया छत के दूसरी तरफ जहां गली थी वहा आती है!

वीर: धन्यवाद प्रिया! तुम्हारी वजह से पापा मान गए वरना पता नहीं कितने पापड़ बेलने पड़ते? प्रिया: क्या यार वीर तुम भी अजीब बातें करते हो? आपस में भी कोई सॉरी और थैंक यू होता है क्या?
और दूसरी बात वहां चलने के लिए तुमने ही हमें तैयार किया और तुम ही ना जा सके तो मैं वाहा जाके क्या करूंगी?

वीर: लव यू "चिकुडी"

प्रिया: (अपनी आँखे सिकोड़ कर) क्या बोला तुमने?

वीर: कुछ नहीं मैं तो बस ऐसे ही...

प्रिया: ना-ना कुछ तो बोला है पर मुझे ठीक से सुना नहीं?

वीर: यार वो क्या है ना पापा ने एक काम बोला था याद आया अभी!
तो मैं बाद में मिलता हूं वरना मुझे डांटेंगे।

प्रिया: अरे-2 सुनो तो सही!!
लेकिन वीर प्रिया की नजर चुरा कर निकल लेता है काम के बहाने से,

और प्रिया मंद-मंद मुस्कुराती हुई:


“कभी तुम आजाओ ख़यालों में और मुस्कुराहट दूं मैं, इसे गर इश्क़ कहते हैं तो हां मुझे इश्क़ है तुमसे.”

प्रिया: उसको लगता है मैंने कुछ नहीं सुना?
लेकिन मेरा बालम जरा नादान है, कुछ भी कहो वीर तू तो मेरी जान है!!

वीर वहां से निकल कर सनी की हवेली पर उससे मिलता है! दोनों दोस्त मिलके मनाली घूमने के बारे में बताते हैं, और सनी बोलता है कि यार हमारे काफी दिन हो गए नदी पर नहाए? तो चलो आज दोनों फिर से एक बार कॉम्पिटिशन हो जाए कि सबसे जल्दी नदी कोन पार करता है।

वीर : बड़ा बादशाह बन रहा है बेटा चलो हो जाये,

सनी: “
बादशाह तो कहीं का भी बन सकता हूँ, पर तेरे दिल की नगरी में हुकूमत करने का मजा ही कुछ अलग है दोस्त”

वीर: चलो भाई !!. फ़िर दोनों दोस्त वहां से नदी पर नहाने चले जाते हैं! ये उन दोनों की आदत थी केवल बरसात के समय को छोड़ के कभी भी नदी में नहाते निकल पड़ते थे।

ऐसा ही एक दो दिन और निकल जाते हैं! और आख़िर टूर जाने का दिन भी नज़दीक आ जाता है,

शाम को प्रिया रघुवीर से मिलती है और कहती है सुबह जल्दी उठ जाना, ठीक है? तुम्हारी देर करने की पुरानी आदत नहीं चलेगी।

फिर दोनों जाने के लिए तैयारी करने लगते है, और अपना -अपना बैग पैक करते हैं।

अगले दिन सुबह सब जाने के लिए तैयार थे। पर रघुवीर को लेट करने की बीमारी होती है। तभी सुप्रिया तैयार हो कर आ जाती है रघुवीर के घर पर,
रघुवीर अभी तक सो रहा होता है।

सुप्रिया -रघुवीर कहा है चाची ?

रघुवीर की मम्मी – रघुवीर सो रहा है

सुप्रिया – अभी तक सो रहा है। इतना कह के सुप्रिया रघुवीर के रूम में चली जाती है। और रघुवीर को उठाने लगती है।

रघुवीर: कुछ देर और सोने दे यार,

सुप्रिया: नहीं हम दोनों लेट हो जाएगें!!

फिर रघुवीर उठ जाता है। और जल्दी से तैयार होने लगता है। क्योकि रघुवीर सुप्रिया का हर कहना मानता है। और जल्दी कॉलेज की और जाते है। दोनों कुछ ही टाइम बाद कॉलेज पहुँच जाते है।

कुछ देर और लेट करते तो सब निकल जाते, सुप्रिया रघुवीर को मारने लगती है क्योकि सब बस में बैठ गए थे सिर्फ रघुवीर और सुप्रिया का ही इंतजार कर रहे थे। वो दोनों भी जल्दी से बस में चले जाते है, जहां सनी, कंचन और बाकी सब भी उनका इंतजार कर रहे थे।

इनके जाते ही बस चल पड़ती है। रघुवीर और सुप्रिया को सब से पीछे की सीट मिलती है। लेट होने की वजह से सुप्रिया रघुवीर पर गुस्सा करती है, आज तेरी वजह से बस छूट जाती ना, तब रघुवीर कहता है यार सॉरी, सुप्रिया मान जाती है। और बातें करने लगती है।

तभी सनी भी वही आत है साथ में कंचन भी होती है! इनको आगे सीट मिलती है क्यों कि ये पहले ही आ गए थे, और साथ में बैठे थे, और वीर आखिरी में।

सनी: भाई यार तुझसे बड़ा चोमू मैंने कभी नहीं देखा! यार इतना भी क्या आलसी होना? तेरे आलस्य की वजह से अभी सब लोग तुझे छोड़ कर जाने वाले थे, मैं भी बस से उतरने वाला ही था।

वीर: अब हो गया ना यार गलती सॉरी प्लीज! ओर वीर एक कविता सुनाता है:

आज भी याद आती है वो स्कूल कॉलेज की दोस्ती, प्यार का जुनून और प्यारे दोस्तों की दोस्ती, आज भी याद आते है वो प्यारे लम्हे, और याद आती है उन प्यारे दोस्तों की दोस्ती। नींद नहीं आती जब तू उदास होता है, अच्छा नहीं लगता जब तू नाराज़ होता है, शायद ये सच्ची दोस्ती ही है हमारे बीच की, दिल खुश होता है जब तू पास होता है। और हमने जब आप जैसा दोस्त पा लिया, तो सारे गम को चन्द लम्हो में भुला दिया।“


सनी: (कविता सुनके मुस्कान के साथ) जा कर दिया माफ तू सुधरने वाला तो है नहीं!

थोड़ी देर में सब मस्ती मजाक कर रहे थे,

सनी: अरे भाई सब लोग मिलके अंताक्षरी खेलते हैं, क्या बोलते हो सब?

सब लोग मिलके गाना गाते है ।.. “ज़िंदगी एक सफ़र है सुहाना यहाँ कल क्या हो किसने जाना…….

ऐसे ही हंसी मजाक चलता रहता है... उधर सुप्रिया को नींद आने लगती है। और रघुवीर अपने फ़ोन से गाने सुन रहा होता है।

सुप्रिया खिड़की के पास ही बैठी होती है । और खिड़की पर सर रख के सो जाती है जैसे-जैसे बस हिलती है वैसे-वैसे बार बार सुप्रिया उठ जाती है। तब रघुवीर देख लेता है और अपने कंधे पर सुप्रिया का सर रख देता है।

प्रिया वीर की तरफ देखती है! वीर प्रिया की तरफ एक पल के लिए दोनों की आंखें चार होती हैं और दोनों खो जाते हैं।

जैसे ही बस को झटका लगता है उनकी तंद्रा टूट जाती है और दोनो मंद -मंद मुस्कुराते हुए इधर उधर देखने लगते हैं!

कुछ देर बाद प्रिया को फिर नींद आने लगती है तो वीर उसका सर अपने कंधे पर रख लेता है। सुप्रिया रघुवीर के कंधे पर ही सो जाती है तभी अचानक बस ब्रेक मारती है तो सुप्रिया रघुवीर को कस के पकड़ लेती है।

रघुवीर को बहुत अच्छा लगता है। रघुवीर भी अपना हाथ सुप्रिया के कमर पर रख लेता है और दोनों एक दूसरे के करीब आ जाते है।

जिंदगी की राह में मिले होंगे हजारों मुसाफिर तुमको, जिंदगी भर ना भुला पाओगे वो मुलाकात हूं मैं…”

सुप्रिया नींद में रघुवीर के गले के पास ही सुप्रिया के लिप्स लगने लगते है तभी रघुवीर को कुछ-कुछ होने लगता है।

रघुवीर सुप्रिया को कस के पकड़ लेता है सुप्रिया भी रघुवीर को पकड़ लेती है ना जाने क्या होता दोनों को। :heart:

वीर: (मन में)

मेरी रूह को अपनी रूह में मिलाकर मुझे गुमनाम कर दो, तुम्हें देख कर लोग मुझे पहचाने यूं खुद को मेरा हमनाम कर दो”


सफर जारी है दोस्तों :writing:
Ky bat hai bhai wah pyar dono trf se dono ko hai bus ijhaar ki deri hai bhai
Maja aagaya update me
Mast wala update Raj_sharma bhai
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
43,687
79,576
304

Yasasvi3

😈Devil queen 👑
1,638
3,878
144
Update 12.

सीता देवी: बेटा तू ही रघुवीर का ख्याल रख सकती है। तू मेरे रघुवीर से शादी कर ले इस पागल को तेरे अलावा कोई नहीं समझा सकता है।

रघुवीर तेरे अलावा किसी और की नहीं सुनता (रघुवीर की मम्मी सुप्रिया को पसंद करती है)। ये सुनके सुप्रिया को शर्म आ जाती है।

रघुवीर की मम्मी कहती है, पढाई में तो ध्यान देता नहीं सारे दिन इधर-उधर घूमता है! हर रोज रघुवीर के पापा रघुवीर पर गुस्सा करते रहते है। इतना सुनकर के सुप्रिया अपने घर चली जाती है क्योकि रघुवीर घर पर नहीं होता अपने पापा के साथ कही गया होता है।

अब आगे:

इधर दोनों अपने घर पर कहते है टूर पर जाने के लिए पर रघुवीर के पापा नहीं जाने देते रघुवीर को। उसके पापा डांटने लगते हैं, की कोई काम अच्छे से करता है क्या? जो यह कही जाए, पढ़ाई पर ध्यान तो है नहीं।
तभी सुप्रिया आ जाती है और रघुवीर के पापा से कहती है !

प्रिया: अंकल रघुवीर को मैं पढाई में मदद करती हूँ, और रघुवीर पढ़ाई पर अच्छे से ध्यान देने लगा है।
आप रघुवीर को हमारे साथ जाने दो, अब रघुवीर कभी को कभी कम नंबर नहीं आएगा कॉलेज में, इसकी गारंटी मैं देती हूं !! मुझे यकीन है वीर पे.

सुप्रिया की बात सुनने के बाद रघुवीर के पापा राज़ी हो जाते है, और कहते हैं.

दशरथ सिंह: मुझे तुम पर पूरा विश्वास है सुप्रिया बेटे कि तुम जो बोल रही हो वही सच होगा, तुम बोलती हो तो ठीक है! ये जा सकता है!

अगले दिन सुबह-2 घर से बाहर निकलते ही प्रिया अपनी छत पर घुमती हुई दिखाई देती है तो वीर इशारा करता है, जिसे देखकर प्रिया छत के दूसरी तरफ जहां गली थी वहा आती है!

वीर: धन्यवाद प्रिया! तुम्हारी वजह से पापा मान गए वरना पता नहीं कितने पापड़ बेलने पड़ते? प्रिया: क्या यार वीर तुम भी अजीब बातें करते हो? आपस में भी कोई सॉरी और थैंक यू होता है क्या?
और दूसरी बात वहां चलने के लिए तुमने ही हमें तैयार किया और तुम ही ना जा सके तो मैं वाहा जाके क्या करूंगी?

वीर: लव यू "चिकुडी"

प्रिया: (अपनी आँखे सिकोड़ कर) क्या बोला तुमने?

वीर: कुछ नहीं मैं तो बस ऐसे ही...

प्रिया: ना-ना कुछ तो बोला है पर मुझे ठीक से सुना नहीं?

वीर: यार वो क्या है ना पापा ने एक काम बोला था याद आया अभी!
तो मैं बाद में मिलता हूं वरना मुझे डांटेंगे।

प्रिया: अरे-2 सुनो तो सही!!
लेकिन वीर प्रिया की नजर चुरा कर निकल लेता है काम के बहाने से,

और प्रिया मंद-मंद मुस्कुराती हुई:


“कभी तुम आजाओ ख़यालों में और मुस्कुराहट दूं मैं, इसे गर इश्क़ कहते हैं तो हां मुझे इश्क़ है तुमसे.”

प्रिया: उसको लगता है मैंने कुछ नहीं सुना?
लेकिन मेरा बालम जरा नादान है, कुछ भी कहो वीर तू तो मेरी जान है!!

वीर वहां से निकल कर सनी की हवेली पर उससे मिलता है! दोनों दोस्त मिलके मनाली घूमने के बारे में बताते हैं, और सनी बोलता है कि यार हमारे काफी दिन हो गए नदी पर नहाए? तो चलो आज दोनों फिर से एक बार कॉम्पिटिशन हो जाए कि सबसे जल्दी नदी कोन पार करता है।

वीर : बड़ा बादशाह बन रहा है बेटा चलो हो जाये,

सनी: “
बादशाह तो कहीं का भी बन सकता हूँ, पर तेरे दिल की नगरी में हुकूमत करने का मजा ही कुछ अलग है दोस्त”

वीर: चलो भाई !!. फ़िर दोनों दोस्त वहां से नदी पर नहाने चले जाते हैं! ये उन दोनों की आदत थी केवल बरसात के समय को छोड़ के कभी भी नदी में नहाते निकल पड़ते थे।

ऐसा ही एक दो दिन और निकल जाते हैं! और आख़िर टूर जाने का दिन भी नज़दीक आ जाता है,

शाम को प्रिया रघुवीर से मिलती है और कहती है सुबह जल्दी उठ जाना, ठीक है? तुम्हारी देर करने की पुरानी आदत नहीं चलेगी।

फिर दोनों जाने के लिए तैयारी करने लगते है, और अपना -अपना बैग पैक करते हैं।

अगले दिन सुबह सब जाने के लिए तैयार थे। पर रघुवीर को लेट करने की बीमारी होती है। तभी सुप्रिया तैयार हो कर आ जाती है रघुवीर के घर पर,
रघुवीर अभी तक सो रहा होता है।

सुप्रिया -रघुवीर कहा है चाची ?

रघुवीर की मम्मी – रघुवीर सो रहा है

सुप्रिया – अभी तक सो रहा है। इतना कह के सुप्रिया रघुवीर के रूम में चली जाती है। और रघुवीर को उठाने लगती है।

रघुवीर: कुछ देर और सोने दे यार,

सुप्रिया: नहीं हम दोनों लेट हो जाएगें!!

फिर रघुवीर उठ जाता है। और जल्दी से तैयार होने लगता है। क्योकि रघुवीर सुप्रिया का हर कहना मानता है। और जल्दी कॉलेज की और जाते है। दोनों कुछ ही टाइम बाद कॉलेज पहुँच जाते है।

कुछ देर और लेट करते तो सब निकल जाते, सुप्रिया रघुवीर को मारने लगती है क्योकि सब बस में बैठ गए थे सिर्फ रघुवीर और सुप्रिया का ही इंतजार कर रहे थे। वो दोनों भी जल्दी से बस में चले जाते है, जहां सनी, कंचन और बाकी सब भी उनका इंतजार कर रहे थे।

इनके जाते ही बस चल पड़ती है। रघुवीर और सुप्रिया को सब से पीछे की सीट मिलती है। लेट होने की वजह से सुप्रिया रघुवीर पर गुस्सा करती है, आज तेरी वजह से बस छूट जाती ना, तब रघुवीर कहता है यार सॉरी, सुप्रिया मान जाती है। और बातें करने लगती है।

तभी सनी भी वही आत है साथ में कंचन भी होती है! इनको आगे सीट मिलती है क्यों कि ये पहले ही आ गए थे, और साथ में बैठे थे, और वीर आखिरी में।

सनी: भाई यार तुझसे बड़ा चोमू मैंने कभी नहीं देखा! यार इतना भी क्या आलसी होना? तेरे आलस्य की वजह से अभी सब लोग तुझे छोड़ कर जाने वाले थे, मैं भी बस से उतरने वाला ही था।

वीर: अब हो गया ना यार गलती सॉरी प्लीज! ओर वीर एक कविता सुनाता है:

आज भी याद आती है वो स्कूल कॉलेज की दोस्ती, प्यार का जुनून और प्यारे दोस्तों की दोस्ती, आज भी याद आते है वो प्यारे लम्हे, और याद आती है उन प्यारे दोस्तों की दोस्ती। नींद नहीं आती जब तू उदास होता है, अच्छा नहीं लगता जब तू नाराज़ होता है, शायद ये सच्ची दोस्ती ही है हमारे बीच की, दिल खुश होता है जब तू पास होता है। और हमने जब आप जैसा दोस्त पा लिया, तो सारे गम को चन्द लम्हो में भुला दिया।“


सनी: (कविता सुनके मुस्कान के साथ) जा कर दिया माफ तू सुधरने वाला तो है नहीं!

थोड़ी देर में सब मस्ती मजाक कर रहे थे,

सनी: अरे भाई सब लोग मिलके अंताक्षरी खेलते हैं, क्या बोलते हो सब?

सब लोग मिलके गाना गाते है ।.. “ज़िंदगी एक सफ़र है सुहाना यहाँ कल क्या हो किसने जाना…….

ऐसे ही हंसी मजाक चलता रहता है... उधर सुप्रिया को नींद आने लगती है। और रघुवीर अपने फ़ोन से गाने सुन रहा होता है।

सुप्रिया खिड़की के पास ही बैठी होती है । और खिड़की पर सर रख के सो जाती है जैसे-जैसे बस हिलती है वैसे-वैसे बार बार सुप्रिया उठ जाती है। तब रघुवीर देख लेता है और अपने कंधे पर सुप्रिया का सर रख देता है।

प्रिया वीर की तरफ देखती है! वीर प्रिया की तरफ एक पल के लिए दोनों की आंखें चार होती हैं और दोनों खो जाते हैं।

जैसे ही बस को झटका लगता है उनकी तंद्रा टूट जाती है और दोनो मंद -मंद मुस्कुराते हुए इधर उधर देखने लगते हैं!

कुछ देर बाद प्रिया को फिर नींद आने लगती है तो वीर उसका सर अपने कंधे पर रख लेता है। सुप्रिया रघुवीर के कंधे पर ही सो जाती है तभी अचानक बस ब्रेक मारती है तो सुप्रिया रघुवीर को कस के पकड़ लेती है।

रघुवीर को बहुत अच्छा लगता है। रघुवीर भी अपना हाथ सुप्रिया के कमर पर रख लेता है और दोनों एक दूसरे के करीब आ जाते है।

जिंदगी की राह में मिले होंगे हजारों मुसाफिर तुमको, जिंदगी भर ना भुला पाओगे वो मुलाकात हूं मैं…”

सुप्रिया नींद में रघुवीर के गले के पास ही सुप्रिया के लिप्स लगने लगते है तभी रघुवीर को कुछ-कुछ होने लगता है।

रघुवीर सुप्रिया को कस के पकड़ लेता है सुप्रिया भी रघुवीर को पकड़ लेती है ना जाने क्या होता दोनों को। :heart:

वीर: (मन में)

मेरी रूह को अपनी रूह में मिलाकर मुझे गुमनाम कर दो, तुम्हें देख कर लोग मुझे पहचाने यूं खुद को मेरा हमनाम कर दो”


सफर जारी है दोस्तों :writing:
Woow kafi time baad romantic point noted...
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
43,687
79,576
304

Bittoo

Member
347
499
63
Update 12.

सीता देवी: बेटा तू ही रघुवीर का ख्याल रख सकती है। तू मेरे रघुवीर से शादी कर ले इस पागल को तेरे अलावा कोई नहीं समझा सकता है।

रघुवीर तेरे अलावा किसी और की नहीं सुनता (रघुवीर की मम्मी सुप्रिया को पसंद करती है)। ये सुनके सुप्रिया को शर्म आ जाती है।

रघुवीर की मम्मी कहती है, पढाई में तो ध्यान देता नहीं सारे दिन इधर-उधर घूमता है! हर रोज रघुवीर के पापा रघुवीर पर गुस्सा करते रहते है। इतना सुनकर के सुप्रिया अपने घर चली जाती है क्योकि रघुवीर घर पर नहीं होता अपने पापा के साथ कही गया होता है।

अब आगे:

इधर दोनों अपने घर पर कहते है टूर पर जाने के लिए पर रघुवीर के पापा नहीं जाने देते रघुवीर को। उसके पापा डांटने लगते हैं, की कोई काम अच्छे से करता है क्या? जो यह कही जाए, पढ़ाई पर ध्यान तो है नहीं।
तभी सुप्रिया आ जाती है और रघुवीर के पापा से कहती है !

प्रिया: अंकल रघुवीर को मैं पढाई में मदद करती हूँ, और रघुवीर पढ़ाई पर अच्छे से ध्यान देने लगा है।
आप रघुवीर को हमारे साथ जाने दो, अब रघुवीर कभी को कभी कम नंबर नहीं आएगा कॉलेज में, इसकी गारंटी मैं देती हूं !! मुझे यकीन है वीर पे.

सुप्रिया की बात सुनने के बाद रघुवीर के पापा राज़ी हो जाते है, और कहते हैं.

दशरथ सिंह: मुझे तुम पर पूरा विश्वास है सुप्रिया बेटे कि तुम जो बोल रही हो वही सच होगा, तुम बोलती हो तो ठीक है! ये जा सकता है!

अगले दिन सुबह-2 घर से बाहर निकलते ही प्रिया अपनी छत पर घुमती हुई दिखाई देती है तो वीर इशारा करता है, जिसे देखकर प्रिया छत के दूसरी तरफ जहां गली थी वहा आती है!

वीर: धन्यवाद प्रिया! तुम्हारी वजह से पापा मान गए वरना पता नहीं कितने पापड़ बेलने पड़ते? प्रिया: क्या यार वीर तुम भी अजीब बातें करते हो? आपस में भी कोई सॉरी और थैंक यू होता है क्या?
और दूसरी बात वहां चलने के लिए तुमने ही हमें तैयार किया और तुम ही ना जा सके तो मैं वाहा जाके क्या करूंगी?

वीर: लव यू "चिकुडी"

प्रिया: (अपनी आँखे सिकोड़ कर) क्या बोला तुमने?

वीर: कुछ नहीं मैं तो बस ऐसे ही...

प्रिया: ना-ना कुछ तो बोला है पर मुझे ठीक से सुना नहीं?

वीर: यार वो क्या है ना पापा ने एक काम बोला था याद आया अभी!
तो मैं बाद में मिलता हूं वरना मुझे डांटेंगे।

प्रिया: अरे-2 सुनो तो सही!!
लेकिन वीर प्रिया की नजर चुरा कर निकल लेता है काम के बहाने से,

और प्रिया मंद-मंद मुस्कुराती हुई:


“कभी तुम आजाओ ख़यालों में और मुस्कुराहट दूं मैं, इसे गर इश्क़ कहते हैं तो हां मुझे इश्क़ है तुमसे.”

प्रिया: उसको लगता है मैंने कुछ नहीं सुना?
लेकिन मेरा बालम जरा नादान है, कुछ भी कहो वीर तू तो मेरी जान है!!

वीर वहां से निकल कर सनी की हवेली पर उससे मिलता है! दोनों दोस्त मिलके मनाली घूमने के बारे में बताते हैं, और सनी बोलता है कि यार हमारे काफी दिन हो गए नदी पर नहाए? तो चलो आज दोनों फिर से एक बार कॉम्पिटिशन हो जाए कि सबसे जल्दी नदी कोन पार करता है।

वीर : बड़ा बादशाह बन रहा है बेटा चलो हो जाये,

सनी: “
बादशाह तो कहीं का भी बन सकता हूँ, पर तेरे दिल की नगरी में हुकूमत करने का मजा ही कुछ अलग है दोस्त”

वीर: चलो भाई !!. फ़िर दोनों दोस्त वहां से नदी पर नहाने चले जाते हैं! ये उन दोनों की आदत थी केवल बरसात के समय को छोड़ के कभी भी नदी में नहाते निकल पड़ते थे।

ऐसा ही एक दो दिन और निकल जाते हैं! और आख़िर टूर जाने का दिन भी नज़दीक आ जाता है,

शाम को प्रिया रघुवीर से मिलती है और कहती है सुबह जल्दी उठ जाना, ठीक है? तुम्हारी देर करने की पुरानी आदत नहीं चलेगी।

फिर दोनों जाने के लिए तैयारी करने लगते है, और अपना -अपना बैग पैक करते हैं।

अगले दिन सुबह सब जाने के लिए तैयार थे। पर रघुवीर को लेट करने की बीमारी होती है। तभी सुप्रिया तैयार हो कर आ जाती है रघुवीर के घर पर,
रघुवीर अभी तक सो रहा होता है।

सुप्रिया -रघुवीर कहा है चाची ?

रघुवीर की मम्मी – रघुवीर सो रहा है

सुप्रिया – अभी तक सो रहा है। इतना कह के सुप्रिया रघुवीर के रूम में चली जाती है। और रघुवीर को उठाने लगती है।

रघुवीर: कुछ देर और सोने दे यार,

सुप्रिया: नहीं हम दोनों लेट हो जाएगें!!

फिर रघुवीर उठ जाता है। और जल्दी से तैयार होने लगता है। क्योकि रघुवीर सुप्रिया का हर कहना मानता है। और जल्दी कॉलेज की और जाते है। दोनों कुछ ही टाइम बाद कॉलेज पहुँच जाते है।

कुछ देर और लेट करते तो सब निकल जाते, सुप्रिया रघुवीर को मारने लगती है क्योकि सब बस में बैठ गए थे सिर्फ रघुवीर और सुप्रिया का ही इंतजार कर रहे थे। वो दोनों भी जल्दी से बस में चले जाते है, जहां सनी, कंचन और बाकी सब भी उनका इंतजार कर रहे थे।

इनके जाते ही बस चल पड़ती है। रघुवीर और सुप्रिया को सब से पीछे की सीट मिलती है। लेट होने की वजह से सुप्रिया रघुवीर पर गुस्सा करती है, आज तेरी वजह से बस छूट जाती ना, तब रघुवीर कहता है यार सॉरी, सुप्रिया मान जाती है। और बातें करने लगती है।

तभी सनी भी वही आत है साथ में कंचन भी होती है! इनको आगे सीट मिलती है क्यों कि ये पहले ही आ गए थे, और साथ में बैठे थे, और वीर आखिरी में।

सनी: भाई यार तुझसे बड़ा चोमू मैंने कभी नहीं देखा! यार इतना भी क्या आलसी होना? तेरे आलस्य की वजह से अभी सब लोग तुझे छोड़ कर जाने वाले थे, मैं भी बस से उतरने वाला ही था।

वीर: अब हो गया ना यार गलती सॉरी प्लीज! ओर वीर एक कविता सुनाता है:

आज भी याद आती है वो स्कूल कॉलेज की दोस्ती, प्यार का जुनून और प्यारे दोस्तों की दोस्ती, आज भी याद आते है वो प्यारे लम्हे, और याद आती है उन प्यारे दोस्तों की दोस्ती। नींद नहीं आती जब तू उदास होता है, अच्छा नहीं लगता जब तू नाराज़ होता है, शायद ये सच्ची दोस्ती ही है हमारे बीच की, दिल खुश होता है जब तू पास होता है। और हमने जब आप जैसा दोस्त पा लिया, तो सारे गम को चन्द लम्हो में भुला दिया।“


सनी: (कविता सुनके मुस्कान के साथ) जा कर दिया माफ तू सुधरने वाला तो है नहीं!

थोड़ी देर में सब मस्ती मजाक कर रहे थे,

सनी: अरे भाई सब लोग मिलके अंताक्षरी खेलते हैं, क्या बोलते हो सब?

सब लोग मिलके गाना गाते है ।.. “ज़िंदगी एक सफ़र है सुहाना यहाँ कल क्या हो किसने जाना…….

ऐसे ही हंसी मजाक चलता रहता है... उधर सुप्रिया को नींद आने लगती है। और रघुवीर अपने फ़ोन से गाने सुन रहा होता है।

सुप्रिया खिड़की के पास ही बैठी होती है । और खिड़की पर सर रख के सो जाती है जैसे-जैसे बस हिलती है वैसे-वैसे बार बार सुप्रिया उठ जाती है। तब रघुवीर देख लेता है और अपने कंधे पर सुप्रिया का सर रख देता है।

प्रिया वीर की तरफ देखती है! वीर प्रिया की तरफ एक पल के लिए दोनों की आंखें चार होती हैं और दोनों खो जाते हैं।

जैसे ही बस को झटका लगता है उनकी तंद्रा टूट जाती है और दोनो मंद -मंद मुस्कुराते हुए इधर उधर देखने लगते हैं!

कुछ देर बाद प्रिया को फिर नींद आने लगती है तो वीर उसका सर अपने कंधे पर रख लेता है। सुप्रिया रघुवीर के कंधे पर ही सो जाती है तभी अचानक बस ब्रेक मारती है तो सुप्रिया रघुवीर को कस के पकड़ लेती है।

रघुवीर को बहुत अच्छा लगता है। रघुवीर भी अपना हाथ सुप्रिया के कमर पर रख लेता है और दोनों एक दूसरे के करीब आ जाते है।

जिंदगी की राह में मिले होंगे हजारों मुसाफिर तुमको, जिंदगी भर ना भुला पाओगे वो मुलाकात हूं मैं…”

सुप्रिया नींद में रघुवीर के गले के पास ही सुप्रिया के लिप्स लगने लगते है तभी रघुवीर को कुछ-कुछ होने लगता है।

रघुवीर सुप्रिया को कस के पकड़ लेता है सुप्रिया भी रघुवीर को पकड़ लेती है ना जाने क्या होता दोनों को। :heart:

वीर: (मन में)

मेरी रूह को अपनी रूह में मिलाकर मुझे गुमनाम कर दो, तुम्हें देख कर लोग मुझे पहचाने यूं खुद को मेरा हमनाम कर दो”


सफर जारी है दोस्तों :writing:
बहुत अच्छा। बिलकुल एक फ़िल्मी कथानक लग रहा है। मानो कोई पुराने जमाने की फ़िल्म देश रहे हों

कृपया इंडेक्स भी अपडेट कर दें
 

Iron Man

Try and fail. But never give up trying
45,632
122,606
304
Waiting for next update
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
43,687
79,576
304
बहुत अच्छा। बिलकुल एक फ़िल्मी कथानक लग रहा है। मानो कोई पुराने जमाने की फ़िल्म देश रहे हों

कृपया इंडेक्स भी अपडेट कर दें
Thank you very much bitto bhai :hug:
 
Top