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अपडेट नंबर 265 पोस्ट कर दी है पढ़ कर रिव्यू ज़रूर करें, लाइक और रिव्यू कम नहीं होने चाहिए। और जब तक 30 लाइक्स नहीं होते अपडेट लिखना शुरू नहीं होगा।
।।बहुत बहुत धन्यवाद।।
 
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babapatna

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किरन ने सभ्या की कमर पर हाथ फेरते हुए शरारत से कहा, “हां बुआ, आज तुम इतनी सुंदर लगोगी की फूफाजी देखते ही शुरू हो जाएंगे।
सभ्या शर्म से लाल हो गई, लेकिन खुश भी थी। “अरे पागल लड़कियां, तुम लोगों को भी न जाने क्या हो गया है।
सब औरतें तैयार हो चुकी थीं, लेकिन उन्हें अभी भी सिर्फ इतना पता था कि “शाम को कुछ खास प्रोग्राम है”।

अपडेट 263

तैयार होकर सारी औरतों को दो गाड़ियों में बिठाकर, लड़कियों को मोटरसाइकिलों पर चढ़ाकर पूरा काफिला नीलेश के अब तक छिपे हुए आलीशान फार्म हाउस की ओर रवाना हो गया।
जब सभ्या गाड़ी से उतरी, तो उसके साथ थीं शालू, गुंजन, ममता, रज्जो और मंजू। ममता और पल्ली तो पहले भी यहाँ आ चुकी थीं, लेकिन आज का माहौल कुछ और ही था। चारों तरफ हरे-भरे पेड़ों से घिरा हुआ ये विशाल फार्म हाउस आज दुल्हन की तरह सजाया गया था। रोशनी की मालाएँ, फूलों के गुच्छे, और हल्की-हल्की खुशबू... सभ्या दरवाजे पर खड़ी रह गई। उसकी आँखें हैरानी और खुशी से फैल गईं।
नीलेश और बाकी सारे मर्द पहले से ही वहाँ खड़े थे। सभ्या के चेहरे पर उभरती हुई वो निश्छल खुशी देखकर उनके चेहरे गर्व से फूल गए थे।
नीलेश धीरे से आगे बढ़ा, सभ्या का नरम हाथ अपने बड़े-बड़े हाथ में ले लिया और गहरी नजरों से उसे देखते हुए बोला, “ये है तुम्हारा तोहफा, ... कैसा लगा?”
सभ्या अभी भी अपनी भावनाओं को संभाल नहीं पा रही थी। उसकी आवाज़ थोड़ी काँप रही थी, “बहुत... बहुत सुंदर है। बिल्कुल महल जैसा लग रहा है।”
नीलेश मुस्कुराया, उसकी आँखों में शैतानी चमक थी, “तो फिर इस महल की रानी... अंदर तो चलो।”
सभ्या शर्मीली मुस्कान के साथ नीलेश का हाथ मजबूती से पकड़कर आगे बढ़ गई। उसके पीछे-पीछे सारी औरतें और मर्द भी अंदर घुस गए। हर कदम पर फार्म हाउस की भव्यता उन्हें और भी हैरान कर रही थी।

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अंदर पहुँचते ही सबके मुँह खुशी से खुले के खुले रह गए। पूरा हॉल दिवाली की तरह जगमगा रहा था। दीवारें फूलों और लाइटों से सजी हुईं, हवा में हल्की मीठी खुशबू, और हॉल के एक तरफ खूबसूरती से सजाया गया स्टेज... जिस पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा था — “Happy Anniversary”।
सभ्या और बाकी औरतें तो ये देखकर खुशी से पागल हो गईं। उनकी आँखें चमक रही थीं, होंठों पर अनकही मुस्कान थी।
फिर मर्दों ने बाकी सब औरतों को आराम से बैठा दिया। सभ्या को धीरे-धीरे स्टेज पर ले जाकर खड़ा कर दिया गया। नीलेश भी उसके ठीक बगल में आकर खड़ा हो गया। उसने सभ्या की ओर मुड़कर गहरी, प्यार भरी आवाज़ में कहा,
“सालगिरह की ढेर सारी शुभकामनाएँ, मेरी रानी।”
सभ्या की आँखें नम हो आईं। वो मुस्कुराते हुए बोली, “तुम्हें भी जी... आज तुमने मुझे सच में बहुत खुश कर दिया। ये तोहफा... सबसे सुंदर तोहफा था।”
नीलेश की आँखों में फिर वो शरारती चमक लौट आई। उसने धीरे से सभ्या के कान के पास मुँह ले जाकर फुसफुसाया,
“अभी तोहफा पूरा कहाँ हुआ है, रानी... अभी तो बस शुरुआत है।”
सभ्या ने हैरानी से उसकी ओर देखा, “मतलब?”
नीलेश मुस्कुराया और जोर से आवाज़ लगाई, “कर्मा... ओह कर्मा! लेके आ!”
कर्मा बगल वाले दरवाजे से बाहर निकला। कुछ पलों बाद जब वो वापस अंदर आया, तो उसके चेहरे पर चौड़ी मुस्कान थी। वो अपनी माँ सभ्या की ओर देखकर मुस्कुराया और एक तरफ खड़ा हो गया।
और फिर... उसी दरवाजे से अंदर आई — शशि।
नीलेश की वो खूबसूरत, मादक, और बेहद कामुक बहन। जैसे ही शशि ने अपनी भाभी सभ्या की ओर देखा, उसके होंठों पर शरारती हँसी खिल गई। सभ्या का मुँह भी खुशी से एकदम खुल गया।
शशि फुर्ती से भागकर स्टेज पर चढ़ गई और सभ्या की ओर लपकी। दोनों — एक तरफ मादक कामुक बदन वाली ननद, दूसरी तरफ अपनी भाभी — एक दूसरे से इतने जोर से गले मिलीं कि उनके मुलायम, भरे-भरे जिस्म एक-दूसरे से सट गए।

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सभ्या: तू कब से आई हुई है यहां?
शशि: हो गया भाभी घंटा भर।
सभ्या: लो घंटा भर हो गया और अब मिल रही है मुझसे?
शशि: अरे पहले मिलती तो तुम्हारे सुंदर चेहरे पर ऐसे हैरानी और खुशी कैसे देखती।
शशि ने उसके गालों को छूते हुए कहा,
सभ्या: बच्चे कहां हैं?
इतने में पीछे से आवाज आई: हम यहां हैं मामी, ये आवाज पूर्व की थी जो उनकी ओर चलती आ रही थी उसके साथ विनीत, उसके पापा, ताऊजी और ताई जी थे, पूर्वी भी आकर उसके गले लग जाती है
पूर्वी: हैप्पी एनिवर्सरी मेरी सेक्सी मामी।
सभ्या: आ गई मेरी प्यारी बिटिया,
पूर्वी: तुम्हारी पार्टी हो हम न आएं मेरी जान ऐसे कैसे हो सकता है?
सभ्या: पागल कहीं की? अच्छा तेरे ससुराल वाले वो लोग कहां है? और पंकज?
पूर्वी: अरे उनका क्या काम यहां? उन्हें छोड़ आई।
पूर्वी हंसते हुए बोली,
सभ्या: हाय दैय्या देखो तो जीजी कैसे बोल रही है,
सभ्या सावित्री के गले लगते हुए बोलती है
सावित्री: अब हम का कहें बन्नो, तू बड़ी सुंदर लग रही है आजा।
सभ्या: तुम भी जीजी।
विनीत: मेरी प्यारी मामी,
विनीत भी गले लगते हुए कहता है,
सभ्या: अब तो मेरा प्यारा भांजा दूल्हा बनने वाला है,
विनीत: हां दुल्हन तुम बनो तो।
पूर्वी: हां मामी कर लो ब्याह फिर से दूल्हा ये रहा,
सभ्या: अपना दूल्हा तो लाई नहीं तू मेरा ब्याह करवा रही है
पूर्वी: अरे लाई हूं मामी लो नाम लिया और हाजिर।
पंकज: हैप्पी एनिवर्सरी मामी जी, ये तो हमें छोड़ आई थी पर हम फिर भी चले आए,
पंकज गिफ्ट का एक बड़ा सा डिब्बा सभ्या की ओर देते हुए कहता है, पंकज के साथ उसकी मां रेनू, बहन प्रीती और पिता प्रकाश भी थे,
सभ्या: अरे देखो तो बदमाश को कैसे मजाक करती है,
सभ्या पंकज से मिलती है और फिर रेनू भी उसके गले लगती है और कहती है: मुबारक हो बहन जी।
पूर्वी: अरे थोड़ा कस के मिलो समधन बनने वाली हो दोनों।
इस पर सब हंसने लगते हैं वहीं प्रीती पीछे खड़े खड़े शर्मा रही होती है,
रेणु: हां अच्छे से ही मिल रही हूं और समधन तो पहले से ही हैं।
सभ्या: ये भी बात बिल्कुल सही कही बहन जी।
प्रकाश: अरे समधी के लिए गले मिलने का कोई मौका नहीं है क्या?
इस पर सब हंसते हैं और रेणु कहती है: तुम जाओ पीछे खड़े हैं समधी जी उनसे मिलो।
इसी तरह हंसी मज़ाक में फिर बाकी सब भी सभ्या से मिलते हैं, उनके बाद रिमझिम और उसके ससुराल वाले मिलते हैं, सविता रानी महिपाल, पीयूष भी पहले ही आ चुके थे, अंजली भी लड़कियों के साथ आ गई थी। सबसे मेल मिलाप के बाद चंचल जो कि एक पार्टी वियर साड़ी में थी और वो साड़ी उसके भरे और कामुक बदन पर खूब जंच रही थी वो पेशाब करने के लिए जा रही थी कि तभी पीछे से कोई उसे बाहों में भर लेता है वो चौंक कर देखती है और कहती है: अरे तूने तो मुझे डरा ही दिया।
कर्मा: कैसी हो दीदी?
कर्मा उसके पेट को सहलाते हुए कहता है।

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चंचल ने कर्मा की मजबूत बाहों में थोड़ा सिकुड़ते हुए, लेकिन मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “अच्छी हूँ तू... तू कैसा है मेरा प्यारा भाई?”

कर्मा ने अपनी हथेली को चंचल के नाभि के नीचे थोड़ा और नीचे सरकाते हुए, गर्म साँस उसके कान में डालते हुए बोला, “मैं भी अच्छा हूँ दीदी... लेकिन हाय! आज तुम कितनी मस्त, कितनी रसीली लग रही हो। मन कर रहा है यहीं खा जाऊँ... इन भरे-भरे चूचों को, इस चिकनी कमर को, और नीचे जो कुछ छिपा है उसे चूस-चूस कर...”

चंचल शर्म से लाल हो गई, लेकिन उसकी आँखों में भी शरारत झलक रही थी। उसने हल्के से कर्मा की छाती पर थपकी मारते हुए कहा, “धत्त पागल कहीं का! पार्टी पर ध्यान दे न... पहले मुझे सुसु जाने दे। बहुत तेज लगी है। फिर भले ही खा लेना... जितना मन करे।

कर्मा ने मजबूर होकर अपनी पकड़ ढीली की और मुस्कुराते हुए बोला, “अच्छा जाओ... जल्दी आना। वैसे तुम्हारी देवरानी किधर है?”

चंचल ने पीछे मुड़कर इशारा किया, “यहीं होगी कहीं... पूर्वी के साथ थी अभी।”

ये कहकर चंचल अपनी साड़ी की पल्लू ठीक करती हुई, कमर लचकाती हुई पेशाब करने चली गई। उसके पीछे-पीछे उसकी गोल-गोल गांड हिल रही थी, जो देखकर कर्मा का लंड एक बार फिर से तन गया।

कर्मा ने गहरी साँस ली और आगे बढ़ गया। जिनसे अभी तक नहीं मिला था, उन सबसे मिलने लगा। सबसे पहले चंचल के माँ-बाप उदयवीर और बिमला से मिला। उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया और आगे बढ़ गया।

फिर उसकी नजर पड़ी अपनी होने वाली भाभी खुशी पर, जो विनीत से बातें कर रही थी। खुशी आज बेहद सुंदर लग रही थी — उसकी साड़ी उसके नई-नई दुल्हनिया वाले बदन को ऐसे लपेटे हुए थी कि उसके उभरे हुए स्तन और पतली कमर साफ नजर आ रहे थे।

कर्मा सीधा उनके पास पहुँचा, विनीत को हल्के से धकेलते हुए बोला, “अरे यार, छोड़ मत देना तू बिल्कुल भी... एक पल के लिए भी नहीं!”

फिर वो खुशी को जोर से अपनी बाहों में भर लिया। खुशी का नरम, गर्म बदन उसके सीने से सट गया। उसके मोटे स्तन दब गए और एक मीठी रगड़ पैदा हुई।

खुशी ने शर्माते हुए लेकिन खुश होकर पूछा, “कैसे हो भैया?”

कर्मा ने उसे और कसकर जकड़ते हुए उसके कान में फुसफुसाया, “अच्छा हूँ भाभी... अब तो और भी अच्छा हो गया। वैसे ये विनीत तुमसे यूँ ही चिपका रहता है क्या दिन-रात?” कर्मा ने अलग होते हुए कहा,

विनीत हँसते हुए बोला, “अच्छा! जैसे तू अपनी वाली को छोड़ देता है। सब पता है मुझे तेरी और अंजली की कहानी...

खुशी ने शरमाकर हँसते हुए कहा, “अरे हाँ भैया, मुझे भी मिलाओ अंजली से... मैंने सुना है वो बहुत प्यारी और... बहुत सुंदर है।”

कर्मा मुस्कुराया। उसने तुरंत अंजली को आवाज़ दी, “अंजली... इधर आ ना!”

अंजली पास आई तो कर्मा ने दोनों को एक-दूसरे से मिलवाया। अंजली और खुशी दोनों एक-दूसरे को गले लगाकर मिलीं। दोनों की साड़ियाँ और बदन एक-दूसरे से सटे और दोनों ही बातें करने लगीं।

थोड़ी दूर ही पूर्वी और रिमझिम दोनों बहनें खड़ी थीं। दोनों नई-नई साड़ियों में लिपटी हुईं, बेहद खुश और शरारती मूड में आपस में मजाक कर रही थीं।

पूर्वी की साड़ी तो ऐसे पहनी हुई थी कि उसकी गहरी नाभि साफ दिख रही थी, ब्लाउज इतना टाइट कि उसके भरे-भरे, दूधिया स्तन लगभग बाहर झाँक रहे थे। रिमझिम की साड़ी भी कम नहीं थी — उसकी मोटी, गोल गांड और पतली कमर का मेल देखकर किसी का भी मन ललचा जाए। दोनों बहनों के कामुक बदन साड़ी के कपड़े में इस कदर लिपटे हुए थे कि हर हिलने-डुलने पर उनके अंगों की लचक साफ नजर आ रही थी।

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पूर्वी ने रिमझिम के सामने खड़े होकर उसकी भरी-भरी चूचियों को घूरते हुए शरारती मुस्कान के साथ कहा, “अरे यार... तेरे ये गुब्बारे हर बार बढ़ते कैसे जा रहे हैं? जब देखती हूँ, और भी बड़े, और भी भारी मिलते हैं।
पूर्वी ने अपनी उंगली से रिमझिम के चूचों की तरफ इशारा करते हुए हल्के से दबा भी दिया।
रिमझिम ने झेंपते हुए लेकिन हँसते हुए पूर्वी के अपने से भारी खरबूजे जैसे चूचों पर नजर डाली और बोली, “कुछ भी मत बोल! तेरे जितने बड़े तो मेरे हो ही नहीं सकते न... खुद तो दो-दो खरबूजे लिए घूमती है! चलते-फिरते इन्हें संभालना भी मुश्किल हो जाता होगा।”
पूर्वी ने कमर लचकाते हुए अपनी गांड को थोड़ा आगे निकालकर कहा, “तेरे चूतड़ भी तो तरबूज जैसे हैं यार! अभी देख कैसे फुदक-फुदक रहे हैं... ”
रिमझिम ने पूर्वी की कमर पर हाथ रखकर उसे अपने करीब खींच लिया, “हाय... ये नौकझोंक तेरे साथ कितनी अच्छी लगती है। मजा आ जाता है।”
पूर्वी ने पुरानी यादों में खोते हुए कहा, “अभी अच्छी लगती है... बचपन में कितना लड़ते थे हम दोनों।”
रिमझिम ने हँसते हुए पूर्वी की नाक पकड़ ली, “हाँ वो तो है... तू थी भी बड़ी कुतिया बचपन में।”
पूर्वी ने मुंह बनाते हुए नाटकीय अंदाज में बोला, “हो... देखो तो कैसे बोल रही है! मैं कुतिया थी?”
रिमझिम ने तुरंत प्यार से उसके गाल सहलाए, “अच्छा-अच्छा, मजाक में बोला... मुंह मत बना मेरी जान।”
पूर्वी ने बेशर्मी से आँख मारी और बोली, “मैं अभी भी कुतिया हूँ... बस अब बड़े थनों वाली।”
ये सुनकर दोनों बहनें जोर से हँस पड़ीं। उनकी हँसी में शैतानी और कामुकता दोनों थी।
रिमझिम ने अभी भी हँसते हुए पूछा, “कुतिया कहीं की! अच्छा, कोल्ड ड्रिंक पियेगी?”
पूर्वी ने तुरंत सहमति में सिर हिलाया, “हाँ चल... प्यास भी लगी है।”
दोनों आगे बढ़ीं। थोड़ी दूर जाकर पूर्वी ने एक कोने की तरफ इशारा करते हुए हँसते हुए कहा, “इन्हें देख दो... हंसो का जोड़ा बन गया है।”
रिमझिम ने देखा तो अनुज और प्रीती कोने में खड़े थे।
रिमझिम: अरे करने दे न मजे उन्हें तू चल,
दोनों आगे बढ़ जाती हैं उनके पीछे कोने में अनुज और प्रीती थे, अनुज प्रीति के होंठों को चूम रहा था

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अनुज प्रीती के होंठों को बड़े प्यार और भूख से चूम रहा था। प्रीती लहंगे में बेहद सुंदर और सेक्सी लग रही थी — लहंगे का घेरा उसके गोल चूतड़ों को अच्छे से उभार रहा था, ब्लाउज उसके उभरे चूचों पर तना हुआ था। अनुज खुद को रोक नहीं पा रहा था, उसके हाथ प्रीती की कमर पर फिर रहे थे।
अनुज ने किस के बीच साँस लेते हुए फुसफुसाया, “बहुत सुंदर लग रही हो तुम आज... ये लहंगा तुम पर बहुत खिल रहा है। तुम्हारी ये कमर, ये होंठ ... सब कुछ नशीला लग रहा है।”
प्रीती शर्म से लाल होकर बोली, “तुम भी बहुत हैंडसम लग रहे हो...”
अनुज ने आगे होते हुए कहा, “इसी बात पर एक और किस हो जाए...”
प्रीती ने हल्के से उसे धकेलते हुए कहा, “नहीं... सब देख रहे हैं। मुझे शर्म आती है।”
अनुज ने हँसते हुए उसे और कस लिया, “अरे यहाँ सब अपने ही तो हैं... कैसी शर्म?”
प्रीती ने इधर-उधर देखते हुए फुसफुसाया, “अरे नहीं... ये खाना परोसने वाले, सर्वेंट्स सब खड़े हैं।”
इतने में ही नीलेश की गहरी, भावुक आवाज स्टेज से गूँजी। उन्होंने सभ्या का हाथ थामे हुए कहा,
“सभी को नमस्कार और हृदय से आभार... कि आप लोगों ने अपना कीमती समय हमारे एक बार कहने पर निकाला और हमें आतिथ्य करने का सौभाग्य दिया। मेरे जीवन का ये बहुत खास अवसर है। आज हमारी शादी को पूरे 25 वर्ष बीत गए।”
नीलेश ने सभ्या के हाथ को और मजबूती से दबाया, फिर उसकी आँखों में गहराई से देखते हुए बोले,
“वैसे तो ये लंबा समय है... पर ऐसे हमसफर का साथ हो तो कम ही लगता है। जब से तुम मेरे जीवन में आई हो, मेरा पूरा जीवन ही बदल गया। जब अपनों से दूर हुआ, तब तुम मेरे साथ थी। जब नए रिश्ते बने और नए लोग अपने बन गए, तब भी तुम मेरे साथ थी। सोचता हूँ कि बिना तुम्हारे जो कुछ थोड़ा बहुत आज हासिल कर पाया हूँ, वो भी नहीं कर पाता। धन्यवाद, आभार... ये सब दूसरों से कहा जाता है। तुमसे क्या कहना है, ये मैं नहीं जानता... और शायद जरूरत ही नहीं पड़ती। तुम सब बिना कहे समझ जाती हो। आज भी समझ जाओगी न?”
सभ्या की आँखें भर आईं। आँसुओं के साथ वो मुस्कुराई और नीलेश के सीने से लग गई। कर्मा, अनुज और बाकी सब भी भावुक होकर उन्हें देख रहे थे। जैसे ही सभ्या नीलेश के चौड़े सीने से चिपकी, पूरा हॉल तालियों और खुशी के शोर से गूँज उठा।
पूर्वी ने तेज आवाज में चिल्लाकर कहा, “मामा-मामी... आपने तो मुझे भी रुला दिया! अगर मेरे पति ने मुझे ऐसा प्यार नहीं किया तो मैं उन्हें घर से निकाल दूँगी!”
सब जोर से हँस पड़े। पंकज ने तुरंत मजाक उड़ाया, “मतलब तुम्हें पच्चीस साल झेलना पड़ेगा!”
इस पर और भी तेज ठहाके गूँजे। माहौल और भी गर्म और खुशनुमा हो गया।
शैलेश ने स्टेज से आवाज लगाई, “अरे भाई साहब... भाभी! अब केक काटो न...”
नीलेश और सभ्या दोनों केक के सामने गए। तालियों, सीटियों और खुशी के शोर के बीच दोनों ने एक साथ केक काटा।
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नीलेश ने एक टुकड़ा लिया उठाया और सभ्या को चखाया और प फिर सभ्या ने नीलेश को, इसके बाद कर्मा और अनुज ने भी अपने मां पापा को केक खिलाया, घर के बड़े यानी नाना भी आगे आए और बेटी और जमाई राजा को आशिर्वाद दिया और सभ्या ने उन्हें भी केक खिला दिया, उनके बाद धीरे धीरे बाकी लोग भी आते गए और कहीं केक खिलाने का तो कहीं मुंह पर लगाने का प्रोग्राम चलने लगा, लड़कियां आपस में बहुत मस्ती कर रही थीं, नीतू, किरन, अंजली, लाड़ो, पल्लवी और अब उनके साथ प्रीती और खुशी भी मिल गई थी सब साथ में फिल्मी गानों पर धमाल मचा रहीं थी, लड़कों का वही हाल था जो अक्सर होता है विचारे काम में इधर से उधर लगे हुए थे, किसी को खाने की व्यवस्था देखनी थी तो किसी को पीने की, स्टेज पर फोटो खिंचवाने का प्रोग्राम चल रहा था मेहमान एक एक करके आ रहे थे और सभ्या नीलेश को उपहार देते हुए उनके साथ फोटो करवा रहे थे, इसी बीच में राजन ने खोज कर कर्मा और अनुज को भी स्टेज पर चढ़ा दिया कि पूरे परिवार की साथ में एक फोटो करवा लो, दोनों अपने मां पापा के साथ खड़े हुए तो सभ्या ने अंजली को भी बुला लिया और बोली: ये भी परिवार में ही जुड़ने वाली है, अब अंजली भी अकेली नहीं गई उसने प्रीती का हाथ थामा और लेकर स्टेज पर चढ़ गई उस समय प्रीती और अनुज दोनों की हालत देखने वालीं थी दोनों के गाल शर्म से टमाटर की तरह लाल हो चले थे, अंजली ने अपने और सभ्या के बीच प्रीती को खड़ा किया तो सभ्या ने भी प्यार से अपना सिर अपनी होने वाली छोटी बहू के सिर से टिका दिया और फिर पूरे परिवार की कई फोटो ली गई।

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पिक्चरों के दौर के बाद बाहर खुले में खाने की व्यवस्था की गई थी जहां खाने का प्रोग्राम चला सबने स्वदिष्ट बने खाने का लुत्फ उठाया, और जी भर के खाया, खाते हुए बातों का और नाच गाने का प्रोग्राम साथ में चल रहा था, जो लोग आपस में इतना नहीं मिले थे उन्हें भी एक दूसरे को जानने का मौका मिल रहा था, कहीं राजपाल उदयवीर और सुजान सिंह की जोड़ी बन रही थी तो कहीं चरन सिंह, नाना, दीनू और महिपाल साथ थे, एक ओर नीलेश, प्रदीप(शशि के पति), शैलेश, राजन, जमुना, चेतन, साथ में थे वहीं विनीत, पंकज, रमन आदि कर्मा, जग्गू, सरजू, और पीयूष के साथ गप्पें लड़ा रहे थे,
इसी तरह औरतों भी आपस में घुल मिल रही थीं, सावित्री और मंजू ताई की खूब जम रही थी तो रज्जो, माधुरी और ममता की, वहीं थोड़ी शर्मीली रेनू को हमारी हंसमुख गुंजन और शालू भा रही थी तो बिमला शशि और सभ्या एक साथ बैठी थीं। लड़कियां तो सारी साथ में घूम ही रही थी, नाच रही थी, फोटो खींचा रहीं थी और अब खाना भी खा रही थी, हम उम्र बहुएं और ननदें भी एक साथ थी जैसे प्रेमा, रानी, रिमझिम, पूर्वी और चंचल।
खाने के बाद फिर से एक बार नाच गाने का प्रोग्राम हुआ और इस बार सबकी फरमाइश पर नीलेश और सभ्या को भी साथ में ठुमके लगाने ही पड़े, अंदर की ओर इन सब का नाच गाना चल रहा था वहीं सारे लड़के मिल कर हलवाई का सारा ताम झाम इकठ्ठा करवा रहा रहे थे और फिर कुछ ही देर में हलवाई और उसके लोग अपना सामान लेकर निकल गए थे, पहले से ही बड़ा सा फ्रिज और चूल्हा और ज़रूरी सामान कर्मा और उसकी सेना ने लाकर रखा था ताकि हलवाई के जाने के बाद भी मेहमानों को कोई तकलीफ न हो। बाहर से दरवाज़ा आदि लगा कर लड़के भी अंदर पहुंच गए थे और नाच गाने में शामिल हो गए, अब जब सिर्फ जान पहचान के लोग ही रह गए थे तो नाच गाने के साथ साथ छेड़ छाड़ भी बढ़ रही थी,

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नाच गाने के बाद थक-हार कर सब लोग बैठ गए। बड़ों के लिए कुर्सियाँ लगी थीं, छोटे लोग नीचे ही पसर गए। कोल्ड ड्रिंक के गिलास बाँटे गए। सब ठंडी-ठंडी कोलड्रिंक ड्रिंक पीते हुए फिर से बातें करने लगे।
इसी बीच किरण उठी। सबका ध्यान अपनी तरफ खींचते हुए उसने मुस्कुराकर कहा,
“सब लोगों को मेरा नमस्ते... प्यारी बुआ और प्यारे फूफाजी, तुम दोनों के लिए और आप सभी के लिए हम बच्चों की तरफ से एक छोटी-सी भेंट।”
नीलेश हँसते हुए बोले, “अरे भाई, अब कौन-सी भेंट रह गई?”
पल्ली भी उठते हुए बोली, “बस देखते जाओ ताऊजी...”
किरण, पल्ली, लाड़ो, नीतू और अंजली सब मिलकर स्टेज पर पहुँच गईं। उनके इशारे पर सागर ने गाना चला दिया। पाँचों ने एक धमाकेदार गाने पर नाच पेश किया। पूरा हॉल तालियों से गूँज उठा। खासकर सभ्या और नीलेश ने खूब तालियाँ बजाईं।
फिर तुरंत किरण और पल्ली अंदर चली गईं। अंजली सबका ध्यान बातों में लगाए रखी। कुछ देर बाद जब किरण वापस आई, तो वो सभ्या की ही साड़ी पहने हुई थी — बिल्कुल उन्हीं की तरह तैयार, बालों में फूल, मेकअप, सब कुछ। उसे देखकर सब हँसने लगे, तालियाँ बजने लगीं। सभ्या बलाएँ ले रही थी, शालू ने तो जाकर पैसे भी न्योछावर कर दिए।
दूसरी तरफ जब पल्ली नीलेश का कुर्ता-पजामा पहनकर स्टेज पर आई, तो पूरा हॉल तालियों और सीटियों से गूँज उठा। नीलेश सिर पकड़कर जोर-जोर से हँस रहे थे।
फिर गाना बज उठा...
“अरे ओ जुम्मा... मेरी जान-ए-मन... बाहर निकल... आज जुम्मा है... आज का वादा है...”



थक हार कर सब लोग बैठ गए, बढ़ों के लिए कुर्सियां रखी गई थी तो छोटे तो नीचे ही पसर गए, कोलड्रिंक के गिलास बांटे गए और सब ठंडी ठंडी कोलड्रिंक पीते हुए फिर से बातें करने लगे, इसी बीच किरन उठी और सबका ध्यान अपनी ओर करते हुए बोली: सब लोगों को मेरा नमस्ते, प्यारी बुआ और प्यारे फूफाजी तुम दोनों लोगों के लिए और आप सभी के लिए हम बच्चों की तरफ से एक छोटी सी भेंट।
नीलेश: अरे भाई अब कौन सी भेंट रह गई?
पल्ली: बस देखते जाओ ताऊजी।
पल्ली भी उठते हुए बोली, किरन भी उठ गई थी, इसके बाद किरन, पल्ली, लाड़ो नीतू और अंजली ये सब मिलकर स्टेज पर पहुंच गईं इनके इशारे पर सागर ने गाना चलाया और फिर सब ने एक गाने पर नाच पेश किया और सबने ताली बजा कर उनका खूब स्वागत किया, खासकर सभ्या और नीलेश ने, उसके बाद तुरंत ही किरन और पल्ली अंदर गईं तब तक अंजली सबका ध्यान बातों में लगाती रही और कुछ देर बाद ही किरन अपनी बुआ की साड़ी पहन कर उन्हीं की तरह तैयार हो कर स्टेज पर आई उसे देख सब हंस रहे थे ताली मार रहे थे, सभ्या बलाएं ले रही थी, वहीं शालू ने तो जाकर पैसे भी न्योछावर कर दिए, दूसरी ओर से जब पल्ली नीलेश का कुर्ता पजामा पहन कर स्टेज पर आई तो पूरा हाल तालियों सीटियों से गूंज उठा, नीलेश भी सिर पकड़ कर हंस रहे थे,
फिर गाना बजा,
अरे ओ जुम्मा मेरी जानेमन, बाहर निकल आज जुम्मा है आज का वादा है, पल्ली गाने के बोल पर पूरा अभिनय करते हुए नाचने लगी, वहीं किरन भी हीरोइन की तरह नहीं नहीं करते हुए शर्मा रही थी, गाना जब तक खत्म हुआ तब तक दोनों ने पूरा माहौल बांध दिया था और हर कोई खुशी से उनके लिए तालियां पीट रहा था, गाना खत्म होने पर सबने उनका खूब जोश बढ़ाया, शैलेश ने सभी लड़कियों को इक्कीस सौ- इक्कीस सौ का शगुन भी बांट दिया, किरन और पल्ली फिर निलेश और सभ्या को पकड़ कर स्टेज पर लाए और उन्हें खड़ा कर पल्ली बोली: वैसे इतने अच्छे गाने के बाद चुम्मा हो ही जाए क्या कहते हो आप लोग।
पूर्वी: अरे नेकी और पूछ पूछ? मामा हो जाओ शुरू।
नीलेश सबके सामने थोड़ा शर्माए और बोले: अरे क्या तुम लोग भी।
राजन: अरे भाई बच्चों का मन है तो हो ही जाए,
शशि: हां भैया भाभी हो जाए,
सबके कहने पर सभ्या और निलेश एक दूसरे की ओर मुड़े प्यार से एक दूसरे की आंखों में देखा सभ्या ने एक हाथ नीलेश के कंधे पर रख लिया तो नीलेश के हाथ सभ्या की कमर पर पहुंच गए और फिर धीरे से दोनों के होंठ मिले एक छोटे पर गरम चुंबन के लिए

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एक के बाद दूसरा... फिर तीसरा... चुंबन लंबे और गहरे होते गए। आसपास की आवाजें जैसे उनके लिए कम होती गईं। कुछ पलों बाद दोनों पूरे जोश से एक-दूसरे के होंठ चूस रहे थे। नीलेश की जीभ सभ्या के मुँह में घुस गई थी, हाथ बदन को सहला रहे थे। जब होंठ अलग हुए तो दोनों हाँफ रहे थे। उनके गर्म चुंबन को देख पूरे हॉल में गर्मी फैलने लगी।
सबने तालियाँ बजाकर उनका स्वागत किया। दोनों शर्माते हुए सबकी ओर देख रहे थे।
इसी बीच पूर्वी स्टेज पर चढ़ गई और बोली, “देखा सबने? दोनों में आग अभी भी उतनी ही है जितनी पच्चीस साल पहले थी!”
नीलेश हँसते हुए बोले, “अरे तू भी क्या बोल रही है?”
पूर्वी ने शरारत से आँख मारी, “अरे मामा शर्माना कैसा? यहाँ सब अपने ही हैं और सबकी एक जैसी सोच भी है। तो आप सबकी तरफ से और अपनी तरफ से मैं ये कहना चाहूँगी कि चुम्मा-चाटी तो बहुत देख ली... अब कुछ और देखना है।”
नीलेश ने हैरानी से पूछा, “क्या?”
पूर्वी ने सीधे, बेशर्मी से कहा, “चुदाई!”
सभ्या शर्माकर बोली, “धत्त तू भी ना...”
पूर्वी हँसते हुए बोली, “मामी मान जाओ... नहीं तो मेरी सेना तुम पर टूट पड़ेगी!”
इधर मर्द भी नीलेश को उकसाने लगे।
राजन चिल्लाया, “अरे सालगिरह पर नहीं चोदोगे तो कब चोदोगे भैया?”
पूर्वी ने लड़कियों की तरफ इशारा किया, “अरे लड़कियों देख क्या रही हो? शुरू हो जाओ!”
पूर्वी के कहते ही तीन-तीन लड़कियाँ दोनों पर टूट पड़ीं। कुछ ही पलों में नीलेश और सभ्या के सारे कपड़े उतर चुके थे। दोनों बिल्कुल नंगे स्टेज पर खड़े थे।
नीलेश का लंड पहले से ही कड़क हो चुका था, सीधा तना हुआ, मोटा और लंबा। सभ्या को लड़कियों ने उनके सामने घुटनों पर बैठा दिया। जिन मर्दों ने अब तक सभ्या को नंगा नहीं देखा था, वो उसे देखकर आहें भर रहे थे — उसके भारी-भारी दूधिया चूचे, चिकनी कमर, और साफ-सुथरी, गुलाबी चूत देखकर उनके मुँह खुले के खुले रह गए। औरतें नीलेश के तने हुए लंड को और सभ्या के कामुक नंगे बदन को घूर रही थीं।
पूर्वी और बाकी लड़कियाँ चिल्लाने लगीं, “चूसो... चूसो... चूसो!”
सबकी आवाज सुनकर सभ्या ने आगे बढ़कर नीलेश के मोटे लंड को हाथ में पकड़ लिया। उनकी आँखों में देखते हुए वो मुस्कुराई और बोली, “सालगिरह मुबारक हो, मेरे राजा...”
और ये कहते हुए उसने पूरा लंड अपने गरम, गीले मुंह में भर लिया और जोर-जोर से चूसने लगी।

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नीलेश के मुंह से आह निकल गई, “ओह आह्ह्ह्ह... मेरी रानी...”
सभ्या हाथ से लंड को सहलाते हुए, अपने मुंह का पूरा जादू चला रही थी — कभी सिर चूसती, कभी पूरी लंबाई गले तक ले जाती, कभी जीभ से लंड की नोक को चाटती। नीलेश की आँखें मजे से बंद हो गईं।
मर्दों के लंड कड़क हो गए, औरतें अपनी चूत में गर्म नमी महसूस करने लगीं। लेकिन सब चुपचाप देख रहे थे।
रिमझिम चिल्लाई, “मामा... पच्चीस साल बाद भी वही मजा है या नहीं मामी के मुंह में?”
नीलेश हाँफते हुए बोले, “ओह... ज़्यादा ही है बिटिया... बहुत ज़्यादा!”
राजन बोला, “अरे हमारी भौजी तो और गरम होती जा रही हैं!”
पूर्वी हँसते हुए बोली, “सही कहा... हमारी मामी तो शराब है, जितनी पुरानी उतनी नशीली!”
पंकज बोला, “हमारा भी मन कर रहा है शराब पीने का...”
पल्ली तुरंत शरारत से बोली, “आओ जीजा... नीचे टंकी से मुंह लगाओ, अभी पिला देती हूँ!”
सब जोर से हँस पड़े।
पंकज ने पल्ली को घूरते हुए कहा, “बिल्कुल पीएंगे साली साहिबा... तुम्हारी शराब भी पीएंगे। तुम भी कम नशीली नहीं लगती।”
किरण बोली, “अरे जीजा... सालियाँ तो इतनी नशीली हैं कि पीकर सब भूल जाओगे!”
पूर्वी ने हँसते हुए कहा, “अभी बताती हूँ तुम्हें... चुपचाप स्टेज पर देखो और कुछ सीखो!”
पंकज हँसते हुए स्टेज की ओर देखने लगा।
दृश्य अब बदल चुका था। नीलेश ने सभ्या को स्टेज पर रखी कुर्सी पर लिटा दिया, उसकी टांगें फैला दीं और अपना मोटा लंड पकड़कर उसकी चूत पर थपथपाने लगे।
नीलेश ने गहरी नजरों से पूछा, “घुसा दूँ मेरी रानी?”
सभ्या ने अपने होंठ काटते हुए कामुक आवाज में कहा, “घुसा दो ना मेरे राजा...”
नीलेश ने सबकी तरफ देखा और जोर से पूछा, “घुसा दूँ?”
सबने गर्मजोशी से “हाँ... हाँ...” करते हुए शोर मचाया।
नीलेश ने एक गहरा, जोरदार धक्का लगाया और अपना पूरा लंड सभ्या की चूत में जड़ तक घुसा दिया, और दोनों की एक साथ गहरी आह निकल गई।
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सब लोग खुश होकर शोर मचाने लगे, उनका जोश बढ़ाने लगे।
नीलेश ने सभ्या की आँखों में देखा और बोले, “अभी भी वही गर्मी... वही कसावट... वही आनंद है तुम्हारी चूत में जो पच्चीस बरस पहले था।”
सभ्या हाँफते हुए बोली, “ओह जी... तुम्हारा लोड़ा जरूर पहले से भी बड़ा हो गया है... तभी तो ये चूत कसी हुई लग रही है।”
नीलेश मुस्कुराए, “तुम्हारा बदन सामने पाकर ये अपने आप बड़ा हो जाता है।”
वे आगे झुके, सभ्या के होंठ चूसने लगे और साथ ही धक्के भी लगाते रहे।
जब चुंबन टूटा तो सभ्या मुस्कुराकर बोली, “ऐसा लग रहा है जैसा पहली रात को महसूस हुआ था... आह... सुहागरात पर।”
नीलेश बोले, “आह... तो ये हमारी पहली रात ही तो है रानी... आने वाले और पच्चीस बरसों की पहली रात... या कहूँ सुहागरात।”
सभ्या हाँफते हुए बोली, “आह... आह... पर इस बार सुहागरात पर दर्शक भी हैं।”
नीलेश ने जोर से धक्का लगाते हुए कहा, “हाँ... पहली बार हम दोनों ही थे... इस बार इतने हैं... अगली बार और भी होंगे।”
सभ्या ने हैरानी से पूछा, “अगली बार और?”
नीलेश हँसते हुए बोले, “और क्या... इस बार बच्चे देख रहे हैं... अगली बार नाती-पोते देखेंगे!”
सभ्या शर्माकर बोली, “अगली बार तक हम लोग बुड्ढे हो चुके होंगे।”
नीलेश ने तेज धक्का लगाते हुए कहा, “तो क्या हुआ... बुढ़ापे में चुदाई का अलग ही मजा होगा।”
शालू चिल्लाई, “अरे प्रेमियों की क्या बातें हो रही हैं... हमें भी सुनाई देनी चाहिए!”
पल्ली ने शरारत से कहा, “और ताऊजी-ताईजी... बहुत हुआ प्यार से धीमे-धीमे... मेहमान आए हैं, इन्हें भी दिखाओ चोदमपुर की चुदाई क्या होती है!”
सभ्या हाँफते हुए बोली, “सुना जी... गाँव की इज्जत का सवाल है... मुझे ऊपर आने दो।”
नीलेश ने लंड निकाला, कुर्सी पर बैठ गए और बोले, “आ जाओ...”
सभ्या तुरंत ऊपर चढ़ गई, पति का मोटा लंड अपनी चूत में लिया और जोर-जोर से उछलने लगी। शुरू से ही कोई धीमे-धीमे नहीं — वो अपनी चूत को जड़ तक पति के लंड पर मार रही थी, फिर ऊपर उठ जाती। उसके नंगे बदन और उछलती-नाचती चूचियों को देखकर मर्दों के मुंह में पानी आ रहा था, लंड में तनाव बढ़ रहा था।

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इस बार कोई धीमे धीमे नहीं शुरू से ही वो अपनी चूत को जड़ तक पति के लंड पर मारती है और फिर ऊपर जाती है, उसके नंगे बदन और उछलती नाचती चूचियों को देख कर मर्दों के मुंह में पानीं आने लगता है तो लंड में तनाव।
पल्ली: आह आह ये हुई न बात आह ताऊजी, ताई जी ऐसे ही मज़ा आ रहा है,
पल्ली अपनी चूत को कपड़ों के ऊपर से ही रगड़ते हुए कहती है।
अंजली: बहुत बढ़िया मां पापा ऐसे ही बहुत अच्छे लग रहे हो,
अंजली भी गरम होते हुए उनका हौसला बढ़ाती है, वैसे चुदाई के लिए उन्हें कहां किसी तरह की प्रेरणा की ज़रूरत थी वो दोनों ही इस मामले में काफी खुले विचारों वाले थे,
निलेश भी सभ्या की कमर थामे नीचे से लंड उसकी चूत में ठोंक रहे थे।
अनुज और कर्मा दोनों ही उत्तेजित भी महसूस कर रहे थे और कहीं न कहीं भावुक भी, जो भी नीलेश और सभ्या से जुड़ा हुआ था उन सब के लिए ही ये खास और भावुक पल था,
कच्ची और गरम उत्तेजना की कढ़ाई में कामुकता और भावना का तड़का और लग जाए तो चुदाई की दाल बहुत स्वादिष्ट बनती है, और उसी का लुत्फ़ आज सब उठा रहे थे, चखने वाले भी और सूंघने वाले भी।
और उसी भावनात्मक चुदाई का असर कहो या इतने लोगों के सामने प्रदर्शन के कारण सभ्या अपनी पूरी जी जान लगा कर अपने पति के लंड पर उछल रही थी और फिर एक पाप ऐसा आया कि वो तेजी से चिल्लाते हुए ढीली पड़ गई, उसका बदन मचलते हुए शांत हो गया,
उसे शांत होते देख नीलेश ने वही किया जो हर पति का कर्तव्य होता है जब उसकी पत्नी ढीला महसूस करे, नीलेश ने उसे गोद में उठाया और अपने ऊपर बैठा लिया और उसके चूतड़ों को थाम कर उसे अपने ऊपर उछालने लगे,
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दर्शकों में गर्मी अब खुलकर दिखने लगी थी। कोई अपनी चूचियों को मसल रहा था, कोई चूत रगड़ रहा था, कोई लंड सहला रहा था, कोई किसी के बदन को छू रहा था।
पल्ली आगे बढ़कर पंकज जीजा की गोद में बैठ गई। पंकज उसकी मोटी चूचियों को मसलते हुए उसकी गर्दन चूम रहे थे। पल्ली अपने चूतड़ उनके कड़क लंड पर घुमा रही थी।
पल्ली ने मज़ाक करते हुए कहा, “आहिस्ते जीजा... साली की चूची हैं, तुम्हारी रांड बहन की नहीं!”
पंकज मुस्कुराते हुए उसे चूमने लगा।
कर्मा और अनुज अपनी-अपनी भावी हमसफर से चिपके हुए माँ-पापा की चुदाई देख रहे थे। अंजली को कर्मा का कड़ा लंड अपने चूतड़ों पर चुभता महसूस हो रहा था। अनुज ने तो प्रीती के ब्लाउज में हाथ घुसा दिया था।
पर सबकी नजर स्टेज पर थी। नीलेश अब सभ्या को कुर्सी के सहारे झुका रहे थे। सभ्या ने अपने चूतड़ उभारकर पति और सभी दर्शकों के लिए परोस दिए। नीलेश ने लंड पकड़ा, अपनी पत्नी के गरम, कसे हुए गांड के छेद पर रखा और एक जोरदार धक्का लगाकर अंदर सरका दिया। सभ्या की मखमली गांड चीरती हुई लंड जड़ तक समा गया।
दर्शकों ने गर्मजोशी से तालियाँ और सीटियाँ बजाईं।
नीलेश ने उतनी ही गर्मी से सभ्या की गांड मारना शुरू कर दिया।

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सभ्या चिल्लाई, “आह... आह... आह जी... ऐसे ही मारो... अपनी रंडी पत्नी की गांड... आह... मार-मार के फाड़ दो... ओह... ऐसे ही!”
नीलेश कस-कस के धक्के लगाते हुए बोले, “आह... साली कुतिया... आह... ले... क्या गरम गांड है... आह... आह... आह!”
महिपाल ने रज्जो को पकड़कर उसका ब्लाउज खोल दिया और चूचियों को पागलों की तरह चूसने लगा। चेतन गुंजन मामी के बदन को सहलाते हुए उनके होंठ चूस रहा था। विनीत किरण को खींचकर उसके बदन का मजा ले रहा था।
दीनू ने शशि की मोटी चूचियों के बीच मुंह घुसा रखा था। सुजान सिंह रानी को गोद में बिठाए हुए थे। प्रदीप शालू मौसी की चूचियों के दीवाने हो रहे थे।
सागर अपनी माँ का बदला लेते हुए चेतन की मां माधुरी की नाभि चाट रहा था। सरजू, कर्मा की होने वाली सास सविता को सामने बिठाकर होंठ चूस रहा था। पीयूष रिमझिम के रसीले होंठ चूस रहा था। बिरजू पूर्वी के साथ था। जमुना मामा ने रेनू को अकेले में घुसा रखा था। प्रकाश प्रेमा भाभी के साथ थे। नाना बिमला को अपना अनुभव दिखा रहे थे। राजन चाचा सावित्री को “जीजी-जीजी” कहकर मसल रहे थे। शैलेश मौसा चंचल की मोटी चूचियों को ब्लाउज से बाहर निकाल चुका था। रमन ममता चाची को पकड़ चुका था। चरन सिंह की सेवा नीतू और लाड़ो दोनों बहनें कर रही थीं। खुशी कर्मा और अंजली के पास पहुँचकर दोनों के होंठ बारी-बारी चूस रही थी।
सबका ध्यान स्टेज पर भी था, जहाँ चुदाई अब तूफानी हो चुकी थी। नीलेश कुर्सी से आगे अपनी पीठ पर लेट गए थे और सभ्या उनके ऊपर। नीचे से नीलेश का लंड सभ्या की गांड को भेद रहा था।

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सभ्या अपनी मोटी, गोल चूतड़ों को नीलेश की गोद में पटक-पटक कर मार रही थी। नीलेश लेटे-लेटे नीचे से जोर-जोर से अपनी कमर उठाकर लंड ठोक रहे थे। सभ्या की गांड पूरी तरह खुल चुकी थी, नीलेश का मोटा, गाढ़ा लंड जड़ तक अंदर-बाहर हो रहा था। हर धक्के पर सभ्या के चूतड़ लहरा रहे थे, उसके भारी-भारी चूचे ऊपर-नीचे उछल रहे थे और पूरा हॉल उनकी चुदाई की आवाज़ से गूँज रहा था — “पच... पच... पच...”
“आह... आह... मेरे राजा... ऐसे ही... तेज... तेज मारो मेरी गांड... आह... फाड़ दो आज... ओह...!” सभ्या हाँफते हुए चिल्लाई, उसके बाल बिखर गए थे, पसीना चमक रहा था।
नीलेश ने उसके चूतड़ों को दोनों हाथों से कसकर पकड़ लिया और और तेज धक्के लगाने लगे, “आह... साली कुतिया... ले... ले... तेरी ये गरम मखमली गांड... आह... मेरा लंड निगल रही है... 25 साल बाद भी कितनी कसी हुई है रे... ओह...!”
कुछ देर तक यही जोरदार चुदाई चलती रही। सभ्या ऊपर-नीचे उछल रही थी, नीलेश नीचे से ठोक रहे थे, दोनों की साँसें तेज़ हो गई थीं।

हॉल में माहौल अब पूरी तरह से कामुक हो चुका था, लेकिन कोई भी चुदाई नहीं कर रहा था। बस छेड़छाड़, चूमा-चाटी और चूचियों को मसलने का मज़ा चल रहा था।
पंकज ने पल्ली को अपनी गोद में बिठा रखा था पर अब पल्ली ने अपना मुंह पंकज की ओर कर रखा था और दोनों के होंठ मिले हुए थे। पंकज की दोनों हथेलियाँ पल्ली के भरे-भरे चूतड़ों पर थीं, वो जोर-जोर से मसल रहे थे। पल्ली अपनी चूत उनके कड़क लंड पर रगड़ रही थी, कपड़े के ऊपर से ही। “

कर्मा अंजली से चिपका हुआ था। उसका एक हाथ अंजली के ब्लाउज़ के अंदर घुसा हुआ था, वो उसके नरम चूचों को दबा-दबा कर सहला रहा था। अंजली उसकी गर्दन चूस रही थी और अपनी गांड उसके लंड पर घुमा रही थी। “... आह... ऐसे ही दबाओ... मेरे चूचे... ओह...
कर्मा: देख लो आह हमें भी ऐसे ही मनानी है अपनी 25वीं एनिवर्सरी।
अंजली: देखना क्या है, बिल्कुल मनायेंगे मैने तो सोच भी लिया है मैं क्या पहनूंगी।
अंजली हंसते हुए कहती है तो कर्मा भी उसके होंठ चूसने लगता है।
अनुज ने प्रीती को दीवार से सटा दिया था। उसका मुँह प्रीती के ब्लाउज में घुसा हुआ था, वो उसके एक चूचे को चूस रहा था और दूसरा हाथ से मसल रहा था। प्रीती की आँखें बंद थीं, वो कराह रही थी, “आह... अनुज... काट मत... चूस... चूस... ओह...”
महिपाल रज्जो की चूचियों को दोनों हाथों से पकड़े हुए था, उन्हें जोर से दबाता और चूमता जा रहा था। रज्जो उसकी पीठ पर नाखून गड़ाए हुए थी। चेतन गुंजन को पीछे से पकड़े हुए था, उसके चूचों को सहलाते और उसके होंठों को चूसता हुआ। विनीत किरण की कमर पर हाथ फेर रहा था और उसके चूचों को ब्लाउज के ऊपर से मसल रहा था।
पूरा हॉल चूमने, चाटने, दबाने और कराहने की आवाज़ों से भर गया था। वहीं स्टेज पर भी दृश्य बदल चुका था, सभ्या अब नीलेश की ओर पीठ करके बैठी थी, नीलेश का लंड अब भी उसकी गांड में अंदर बाहर हो रहा था, उसके घुटने दोनों तरफ फैले हुए थे, चूत पूरी तरह खुली हुई दिख रही थी, और नीलेश का मोटा लंड उसकी गांड में जड़ तक घुसा हुआ था। सभ्या ने अपने आनंद को और बढ़ाने के लिए अपनी उंगलियां भी चूत में घुसा दी थीं

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“आह... जी... ऐसे... देखो सबको...तुम्हारी आह पत्नी को आह देख रहे हैं आह मेरी आह खुली चूत ओह...!” सभ्या कामुक आवाज़ में बोली।
नीलेश ने उसके चूतड़ों को दोनों हाथों से थाम लिया और नीचे से जोर-जोर से लंड ठोकना शुरू कर दिया। सभ्या की गांड अब पूरी तरह खुली हुई थी, लंड हर धक्के पर जड़ तक घुस रहा था और बाहर निकल रहा था। उसके चूचे तेज़ी से उछल रहे थे, पसीना चमक रहा था।
“आह... आह... मेरे राजा... फाड़ दो... पूरी गांड... आह... देखो सब... आह मेरी गांड चुद रही है... ओह...!” सभ्या चिल्लाई, उसकी आवाज़ पूरे हॉल में गूँज रही थी।
नीलेश भी हाँफते हुए बोले, “आह... रानी... कितनी खुली है तेरी गांड... आह... ले... ले... मेरा लंड निगल... ओह... 25 साल की की सारी गर्मी.. आज मैं तेरी गांड भर दूँगा... आह...!”
गति वही तेज़ थी। सभ्या अपनी गांड को नीचे पटक-पटक कर मार रही थी, नीलेश नीचे से ठोक रहे थे। दोनों की साँसें एक हो गई थीं। हॉल में सबकी नजरें स्टेज पर थीं। छेड़छाड़ तो चल ही रही थी, लेकिन सबकी आँखें सभ्या-नीलेश की इस खुली चुदाई पर टिकी हुई थीं।
फिर नीलेश का लंड और भी फूल गया। उन्होंने सभ्या के चूतड़ों को कस लिया और जोर-जोर से धक्के लगाने लगे।
“आह... रानी... मैं झड़ने वाला हूँ... तेरी गांड में... आह... ले... ले... पूरा... ओह...!”
सभ्या भी अपनी चूत में उंगलियां चलाते हुए चिल्लाई, “आह... जी... झड़ो... मेरी गांड में भर दो... आह... मैं भी... आह... आ रही हूँ... ओह... राजा...!”
दोनों एक साथ चरम पर पहुँच गए। नीलेश का लंड सभ्या की गांड के अंदर फड़क उठा और गर्म-गर्म मोटी-मोटी धारें छोड़ने लगा। सभ्या का बदन मचल उठा, उसकी चूत से पानी की फुहार निकली और वो भी जोर से झड़ गई। दोनों की चीखें पूरे हॉल में गूँज उठीं — “आह्ह्ह्ह... ओह्ह्ह्ह...!”
नीलेश की सारी मलाई सभ्या की गांड में भर गई। सभ्या ढीली पड़कर उनके सीने पर गिर गई, दोनों हाँफ रहे थे, बदन पसीने से तर।
हॉल में तालियाँ और सीटियाँ बजने लगीं। सबकी आँखों में अभी भी गर्मी थी। सब जानते थे कि रात अभी बाकी थी।

जारी रहेगी।
Awesome
 
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soumo54

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i am currently at update 143 , but I gave a like to the latest update so you don't stop
किरन ने सभ्या की कमर पर हाथ फेरते हुए शरारत से कहा, “हां बुआ, आज तुम इतनी सुंदर लगोगी की फूफाजी देखते ही शुरू हो जाएंगे।
सभ्या शर्म से लाल हो गई, लेकिन खुश भी थी। “अरे पागल लड़कियां, तुम लोगों को भी न जाने क्या हो गया है।
सब औरतें तैयार हो चुकी थीं, लेकिन उन्हें अभी भी सिर्फ इतना पता था कि “शाम को कुछ खास प्रोग्राम है”।


अपडेट 263

तैयार होकर सारी औरतों को दो गाड़ियों में बिठाकर, लड़कियों को मोटरसाइकिलों पर चढ़ाकर पूरा काफिला नीलेश के अब तक छिपे हुए आलीशान फार्म हाउस की ओर रवाना हो गया।
जब सभ्या गाड़ी से उतरी, तो उसके साथ थीं शालू, गुंजन, ममता, रज्जो और मंजू। ममता और पल्ली तो पहले भी यहाँ आ चुकी थीं, लेकिन आज का माहौल कुछ और ही था। चारों तरफ हरे-भरे पेड़ों से घिरा हुआ ये विशाल फार्म हाउस आज दुल्हन की तरह सजाया गया था। रोशनी की मालाएँ, फूलों के गुच्छे, और हल्की-हल्की खुशबू... सभ्या दरवाजे पर खड़ी रह गई। उसकी आँखें हैरानी और खुशी से फैल गईं।
नीलेश और बाकी सारे मर्द पहले से ही वहाँ खड़े थे। सभ्या के चेहरे पर उभरती हुई वो निश्छल खुशी देखकर उनके चेहरे गर्व से फूल गए थे।
नीलेश धीरे से आगे बढ़ा, सभ्या का नरम हाथ अपने बड़े-बड़े हाथ में ले लिया और गहरी नजरों से उसे देखते हुए बोला, “ये है तुम्हारा तोहफा, ... कैसा लगा?”
सभ्या अभी भी अपनी भावनाओं को संभाल नहीं पा रही थी। उसकी आवाज़ थोड़ी काँप रही थी, “बहुत... बहुत सुंदर है। बिल्कुल महल जैसा लग रहा है।”
नीलेश मुस्कुराया, उसकी आँखों में शैतानी चमक थी, “तो फिर इस महल की रानी... अंदर तो चलो।”
सभ्या शर्मीली मुस्कान के साथ नीलेश का हाथ मजबूती से पकड़कर आगे बढ़ गई। उसके पीछे-पीछे सारी औरतें और मर्द भी अंदर घुस गए। हर कदम पर फार्म हाउस की भव्यता उन्हें और भी हैरान कर रही थी।

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अंदर पहुँचते ही सबके मुँह खुशी से खुले के खुले रह गए। पूरा हॉल दिवाली की तरह जगमगा रहा था। दीवारें फूलों और लाइटों से सजी हुईं, हवा में हल्की मीठी खुशबू, और हॉल के एक तरफ खूबसूरती से सजाया गया स्टेज... जिस पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा था — “Happy Anniversary”।
सभ्या और बाकी औरतें तो ये देखकर खुशी से पागल हो गईं। उनकी आँखें चमक रही थीं, होंठों पर अनकही मुस्कान थी।
फिर मर्दों ने बाकी सब औरतों को आराम से बैठा दिया। सभ्या को धीरे-धीरे स्टेज पर ले जाकर खड़ा कर दिया गया। नीलेश भी उसके ठीक बगल में आकर खड़ा हो गया। उसने सभ्या की ओर मुड़कर गहरी, प्यार भरी आवाज़ में कहा,
“सालगिरह की ढेर सारी शुभकामनाएँ, मेरी रानी।”
सभ्या की आँखें नम हो आईं। वो मुस्कुराते हुए बोली, “तुम्हें भी जी... आज तुमने मुझे सच में बहुत खुश कर दिया। ये तोहफा... सबसे सुंदर तोहफा था।”
नीलेश की आँखों में फिर वो शरारती चमक लौट आई। उसने धीरे से सभ्या के कान के पास मुँह ले जाकर फुसफुसाया,
“अभी तोहफा पूरा कहाँ हुआ है, रानी... अभी तो बस शुरुआत है।”
सभ्या ने हैरानी से उसकी ओर देखा, “मतलब?”
नीलेश मुस्कुराया और जोर से आवाज़ लगाई, “कर्मा... ओह कर्मा! लेके आ!”
कर्मा बगल वाले दरवाजे से बाहर निकला। कुछ पलों बाद जब वो वापस अंदर आया, तो उसके चेहरे पर चौड़ी मुस्कान थी। वो अपनी माँ सभ्या की ओर देखकर मुस्कुराया और एक तरफ खड़ा हो गया।
और फिर... उसी दरवाजे से अंदर आई — शशि।
नीलेश की वो खूबसूरत, मादक, और बेहद कामुक बहन। जैसे ही शशि ने अपनी भाभी सभ्या की ओर देखा, उसके होंठों पर शरारती हँसी खिल गई। सभ्या का मुँह भी खुशी से एकदम खुल गया।
शशि फुर्ती से भागकर स्टेज पर चढ़ गई और सभ्या की ओर लपकी। दोनों — एक तरफ मादक कामुक बदन वाली ननद, दूसरी तरफ अपनी भाभी — एक दूसरे से इतने जोर से गले मिलीं कि उनके मुलायम, भरे-भरे जिस्म एक-दूसरे से सट गए।

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सभ्या: तू कब से आई हुई है यहां?
शशि: हो गया भाभी घंटा भर।
सभ्या: लो घंटा भर हो गया और अब मिल रही है मुझसे?
शशि: अरे पहले मिलती तो तुम्हारे सुंदर चेहरे पर ऐसे हैरानी और खुशी कैसे देखती।
शशि ने उसके गालों को छूते हुए कहा,
सभ्या: बच्चे कहां हैं?
इतने में पीछे से आवाज आई: हम यहां हैं मामी, ये आवाज पूर्व की थी जो उनकी ओर चलती आ रही थी उसके साथ विनीत, उसके पापा, ताऊजी और ताई जी थे, पूर्वी भी आकर उसके गले लग जाती है
पूर्वी: हैप्पी एनिवर्सरी मेरी सेक्सी मामी।
सभ्या: आ गई मेरी प्यारी बिटिया,
पूर्वी: तुम्हारी पार्टी हो हम न आएं मेरी जान ऐसे कैसे हो सकता है?
सभ्या: पागल कहीं की? अच्छा तेरे ससुराल वाले वो लोग कहां है? और पंकज?
पूर्वी: अरे उनका क्या काम यहां? उन्हें छोड़ आई।
पूर्वी हंसते हुए बोली,
सभ्या: हाय दैय्या देखो तो जीजी कैसे बोल रही है,
सभ्या सावित्री के गले लगते हुए बोलती है
सावित्री: अब हम का कहें बन्नो, तू बड़ी सुंदर लग रही है आजा।
सभ्या: तुम भी जीजी।
विनीत: मेरी प्यारी मामी,
विनीत भी गले लगते हुए कहता है,
सभ्या: अब तो मेरा प्यारा भांजा दूल्हा बनने वाला है,
विनीत: हां दुल्हन तुम बनो तो।
पूर्वी: हां मामी कर लो ब्याह फिर से दूल्हा ये रहा,
सभ्या: अपना दूल्हा तो लाई नहीं तू मेरा ब्याह करवा रही है
पूर्वी: अरे लाई हूं मामी लो नाम लिया और हाजिर।
पंकज: हैप्पी एनिवर्सरी मामी जी, ये तो हमें छोड़ आई थी पर हम फिर भी चले आए,
पंकज गिफ्ट का एक बड़ा सा डिब्बा सभ्या की ओर देते हुए कहता है, पंकज के साथ उसकी मां रेनू, बहन प्रीती और पिता प्रकाश भी थे,
सभ्या: अरे देखो तो बदमाश को कैसे मजाक करती है,
सभ्या पंकज से मिलती है और फिर रेनू भी उसके गले लगती है और कहती है: मुबारक हो बहन जी।
पूर्वी: अरे थोड़ा कस के मिलो समधन बनने वाली हो दोनों।
इस पर सब हंसने लगते हैं वहीं प्रीती पीछे खड़े खड़े शर्मा रही होती है,
रेणु: हां अच्छे से ही मिल रही हूं और समधन तो पहले से ही हैं।
सभ्या: ये भी बात बिल्कुल सही कही बहन जी।
प्रकाश: अरे समधी के लिए गले मिलने का कोई मौका नहीं है क्या?
इस पर सब हंसते हैं और रेणु कहती है: तुम जाओ पीछे खड़े हैं समधी जी उनसे मिलो।
इसी तरह हंसी मज़ाक में फिर बाकी सब भी सभ्या से मिलते हैं, उनके बाद रिमझिम और उसके ससुराल वाले मिलते हैं, सविता रानी महिपाल, पीयूष भी पहले ही आ चुके थे, अंजली भी लड़कियों के साथ आ गई थी। सबसे मेल मिलाप के बाद चंचल जो कि एक पार्टी वियर साड़ी में थी और वो साड़ी उसके भरे और कामुक बदन पर खूब जंच रही थी वो पेशाब करने के लिए जा रही थी कि तभी पीछे से कोई उसे बाहों में भर लेता है वो चौंक कर देखती है और कहती है: अरे तूने तो मुझे डरा ही दिया।
कर्मा: कैसी हो दीदी?
कर्मा उसके पेट को सहलाते हुए कहता है।

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चंचल ने कर्मा की मजबूत बाहों में थोड़ा सिकुड़ते हुए, लेकिन मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “अच्छी हूँ तू... तू कैसा है मेरा प्यारा भाई?”

कर्मा ने अपनी हथेली को चंचल के नाभि के नीचे थोड़ा और नीचे सरकाते हुए, गर्म साँस उसके कान में डालते हुए बोला, “मैं भी अच्छा हूँ दीदी... लेकिन हाय! आज तुम कितनी मस्त, कितनी रसीली लग रही हो। मन कर रहा है यहीं खा जाऊँ... इन भरे-भरे चूचों को, इस चिकनी कमर को, और नीचे जो कुछ छिपा है उसे चूस-चूस कर...”

चंचल शर्म से लाल हो गई, लेकिन उसकी आँखों में भी शरारत झलक रही थी। उसने हल्के से कर्मा की छाती पर थपकी मारते हुए कहा, “धत्त पागल कहीं का! पार्टी पर ध्यान दे न... पहले मुझे सुसु जाने दे। बहुत तेज लगी है। फिर भले ही खा लेना... जितना मन करे।

कर्मा ने मजबूर होकर अपनी पकड़ ढीली की और मुस्कुराते हुए बोला, “अच्छा जाओ... जल्दी आना। वैसे तुम्हारी देवरानी किधर है?”

चंचल ने पीछे मुड़कर इशारा किया, “यहीं होगी कहीं... पूर्वी के साथ थी अभी।”

ये कहकर चंचल अपनी साड़ी की पल्लू ठीक करती हुई, कमर लचकाती हुई पेशाब करने चली गई। उसके पीछे-पीछे उसकी गोल-गोल गांड हिल रही थी, जो देखकर कर्मा का लंड एक बार फिर से तन गया।

कर्मा ने गहरी साँस ली और आगे बढ़ गया। जिनसे अभी तक नहीं मिला था, उन सबसे मिलने लगा। सबसे पहले चंचल के माँ-बाप उदयवीर और बिमला से मिला। उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया और आगे बढ़ गया।

फिर उसकी नजर पड़ी अपनी होने वाली भाभी खुशी पर, जो विनीत से बातें कर रही थी। खुशी आज बेहद सुंदर लग रही थी — उसकी साड़ी उसके नई-नई दुल्हनिया वाले बदन को ऐसे लपेटे हुए थी कि उसके उभरे हुए स्तन और पतली कमर साफ नजर आ रहे थे।

कर्मा सीधा उनके पास पहुँचा, विनीत को हल्के से धकेलते हुए बोला, “अरे यार, छोड़ मत देना तू बिल्कुल भी... एक पल के लिए भी नहीं!”

फिर वो खुशी को जोर से अपनी बाहों में भर लिया। खुशी का नरम, गर्म बदन उसके सीने से सट गया। उसके मोटे स्तन दब गए और एक मीठी रगड़ पैदा हुई।

खुशी ने शर्माते हुए लेकिन खुश होकर पूछा, “कैसे हो भैया?”

कर्मा ने उसे और कसकर जकड़ते हुए उसके कान में फुसफुसाया, “अच्छा हूँ भाभी... अब तो और भी अच्छा हो गया। वैसे ये विनीत तुमसे यूँ ही चिपका रहता है क्या दिन-रात?” कर्मा ने अलग होते हुए कहा,

विनीत हँसते हुए बोला, “अच्छा! जैसे तू अपनी वाली को छोड़ देता है। सब पता है मुझे तेरी और अंजली की कहानी...

खुशी ने शरमाकर हँसते हुए कहा, “अरे हाँ भैया, मुझे भी मिलाओ अंजली से... मैंने सुना है वो बहुत प्यारी और... बहुत सुंदर है।”

कर्मा मुस्कुराया। उसने तुरंत अंजली को आवाज़ दी, “अंजली... इधर आ ना!”

अंजली पास आई तो कर्मा ने दोनों को एक-दूसरे से मिलवाया। अंजली और खुशी दोनों एक-दूसरे को गले लगाकर मिलीं। दोनों की साड़ियाँ और बदन एक-दूसरे से सटे और दोनों ही बातें करने लगीं।

थोड़ी दूर ही पूर्वी और रिमझिम दोनों बहनें खड़ी थीं। दोनों नई-नई साड़ियों में लिपटी हुईं, बेहद खुश और शरारती मूड में आपस में मजाक कर रही थीं।

पूर्वी की साड़ी तो ऐसे पहनी हुई थी कि उसकी गहरी नाभि साफ दिख रही थी, ब्लाउज इतना टाइट कि उसके भरे-भरे, दूधिया स्तन लगभग बाहर झाँक रहे थे। रिमझिम की साड़ी भी कम नहीं थी — उसकी मोटी, गोल गांड और पतली कमर का मेल देखकर किसी का भी मन ललचा जाए। दोनों बहनों के कामुक बदन साड़ी के कपड़े में इस कदर लिपटे हुए थे कि हर हिलने-डुलने पर उनके अंगों की लचक साफ नजर आ रही थी।

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पूर्वी ने रिमझिम के सामने खड़े होकर उसकी भरी-भरी चूचियों को घूरते हुए शरारती मुस्कान के साथ कहा, “अरे यार... तेरे ये गुब्बारे हर बार बढ़ते कैसे जा रहे हैं? जब देखती हूँ, और भी बड़े, और भी भारी मिलते हैं।
पूर्वी ने अपनी उंगली से रिमझिम के चूचों की तरफ इशारा करते हुए हल्के से दबा भी दिया।
रिमझिम ने झेंपते हुए लेकिन हँसते हुए पूर्वी के अपने से भारी खरबूजे जैसे चूचों पर नजर डाली और बोली, “कुछ भी मत बोल! तेरे जितने बड़े तो मेरे हो ही नहीं सकते न... खुद तो दो-दो खरबूजे लिए घूमती है! चलते-फिरते इन्हें संभालना भी मुश्किल हो जाता होगा।”
पूर्वी ने कमर लचकाते हुए अपनी गांड को थोड़ा आगे निकालकर कहा, “तेरे चूतड़ भी तो तरबूज जैसे हैं यार! अभी देख कैसे फुदक-फुदक रहे हैं... ”
रिमझिम ने पूर्वी की कमर पर हाथ रखकर उसे अपने करीब खींच लिया, “हाय... ये नौकझोंक तेरे साथ कितनी अच्छी लगती है। मजा आ जाता है।”
पूर्वी ने पुरानी यादों में खोते हुए कहा, “अभी अच्छी लगती है... बचपन में कितना लड़ते थे हम दोनों।”
रिमझिम ने हँसते हुए पूर्वी की नाक पकड़ ली, “हाँ वो तो है... तू थी भी बड़ी कुतिया बचपन में।”
पूर्वी ने मुंह बनाते हुए नाटकीय अंदाज में बोला, “हो... देखो तो कैसे बोल रही है! मैं कुतिया थी?”
रिमझिम ने तुरंत प्यार से उसके गाल सहलाए, “अच्छा-अच्छा, मजाक में बोला... मुंह मत बना मेरी जान।”
पूर्वी ने बेशर्मी से आँख मारी और बोली, “मैं अभी भी कुतिया हूँ... बस अब बड़े थनों वाली।”
ये सुनकर दोनों बहनें जोर से हँस पड़ीं। उनकी हँसी में शैतानी और कामुकता दोनों थी।
रिमझिम ने अभी भी हँसते हुए पूछा, “कुतिया कहीं की! अच्छा, कोल्ड ड्रिंक पियेगी?”
पूर्वी ने तुरंत सहमति में सिर हिलाया, “हाँ चल... प्यास भी लगी है।”
दोनों आगे बढ़ीं। थोड़ी दूर जाकर पूर्वी ने एक कोने की तरफ इशारा करते हुए हँसते हुए कहा, “इन्हें देख दो... हंसो का जोड़ा बन गया है।”
रिमझिम ने देखा तो अनुज और प्रीती कोने में खड़े थे।
रिमझिम: अरे करने दे न मजे उन्हें तू चल,
दोनों आगे बढ़ जाती हैं उनके पीछे कोने में अनुज और प्रीती थे, अनुज प्रीति के होंठों को चूम रहा था

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अनुज प्रीती के होंठों को बड़े प्यार और भूख से चूम रहा था। प्रीती लहंगे में बेहद सुंदर और सेक्सी लग रही थी — लहंगे का घेरा उसके गोल चूतड़ों को अच्छे से उभार रहा था, ब्लाउज उसके उभरे चूचों पर तना हुआ था। अनुज खुद को रोक नहीं पा रहा था, उसके हाथ प्रीती की कमर पर फिर रहे थे।
अनुज ने किस के बीच साँस लेते हुए फुसफुसाया, “बहुत सुंदर लग रही हो तुम आज... ये लहंगा तुम पर बहुत खिल रहा है। तुम्हारी ये कमर, ये होंठ ... सब कुछ नशीला लग रहा है।”
प्रीती शर्म से लाल होकर बोली, “तुम भी बहुत हैंडसम लग रहे हो...”
अनुज ने आगे होते हुए कहा, “इसी बात पर एक और किस हो जाए...”
प्रीती ने हल्के से उसे धकेलते हुए कहा, “नहीं... सब देख रहे हैं। मुझे शर्म आती है।”
अनुज ने हँसते हुए उसे और कस लिया, “अरे यहाँ सब अपने ही तो हैं... कैसी शर्म?”
प्रीती ने इधर-उधर देखते हुए फुसफुसाया, “अरे नहीं... ये खाना परोसने वाले, सर्वेंट्स सब खड़े हैं।”
इतने में ही नीलेश की गहरी, भावुक आवाज स्टेज से गूँजी। उन्होंने सभ्या का हाथ थामे हुए कहा,
“सभी को नमस्कार और हृदय से आभार... कि आप लोगों ने अपना कीमती समय हमारे एक बार कहने पर निकाला और हमें आतिथ्य करने का सौभाग्य दिया। मेरे जीवन का ये बहुत खास अवसर है। आज हमारी शादी को पूरे 25 वर्ष बीत गए।”
नीलेश ने सभ्या के हाथ को और मजबूती से दबाया, फिर उसकी आँखों में गहराई से देखते हुए बोले,
“वैसे तो ये लंबा समय है... पर ऐसे हमसफर का साथ हो तो कम ही लगता है। जब से तुम मेरे जीवन में आई हो, मेरा पूरा जीवन ही बदल गया। जब अपनों से दूर हुआ, तब तुम मेरे साथ थी। जब नए रिश्ते बने और नए लोग अपने बन गए, तब भी तुम मेरे साथ थी। सोचता हूँ कि बिना तुम्हारे जो कुछ थोड़ा बहुत आज हासिल कर पाया हूँ, वो भी नहीं कर पाता। धन्यवाद, आभार... ये सब दूसरों से कहा जाता है। तुमसे क्या कहना है, ये मैं नहीं जानता... और शायद जरूरत ही नहीं पड़ती। तुम सब बिना कहे समझ जाती हो। आज भी समझ जाओगी न?”
सभ्या की आँखें भर आईं। आँसुओं के साथ वो मुस्कुराई और नीलेश के सीने से लग गई। कर्मा, अनुज और बाकी सब भी भावुक होकर उन्हें देख रहे थे। जैसे ही सभ्या नीलेश के चौड़े सीने से चिपकी, पूरा हॉल तालियों और खुशी के शोर से गूँज उठा।
पूर्वी ने तेज आवाज में चिल्लाकर कहा, “मामा-मामी... आपने तो मुझे भी रुला दिया! अगर मेरे पति ने मुझे ऐसा प्यार नहीं किया तो मैं उन्हें घर से निकाल दूँगी!”
सब जोर से हँस पड़े। पंकज ने तुरंत मजाक उड़ाया, “मतलब तुम्हें पच्चीस साल झेलना पड़ेगा!”
इस पर और भी तेज ठहाके गूँजे। माहौल और भी गर्म और खुशनुमा हो गया।
शैलेश ने स्टेज से आवाज लगाई, “अरे भाई साहब... भाभी! अब केक काटो न...”
नीलेश और सभ्या दोनों केक के सामने गए। तालियों, सीटियों और खुशी के शोर के बीच दोनों ने एक साथ केक काटा।
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नीलेश ने एक टुकड़ा लिया उठाया और सभ्या को चखाया और प फिर सभ्या ने नीलेश को, इसके बाद कर्मा और अनुज ने भी अपने मां पापा को केक खिलाया, घर के बड़े यानी नाना भी आगे आए और बेटी और जमाई राजा को आशिर्वाद दिया और सभ्या ने उन्हें भी केक खिला दिया, उनके बाद धीरे धीरे बाकी लोग भी आते गए और कहीं केक खिलाने का तो कहीं मुंह पर लगाने का प्रोग्राम चलने लगा, लड़कियां आपस में बहुत मस्ती कर रही थीं, नीतू, किरन, अंजली, लाड़ो, पल्लवी और अब उनके साथ प्रीती और खुशी भी मिल गई थी सब साथ में फिल्मी गानों पर धमाल मचा रहीं थी, लड़कों का वही हाल था जो अक्सर होता है विचारे काम में इधर से उधर लगे हुए थे, किसी को खाने की व्यवस्था देखनी थी तो किसी को पीने की, स्टेज पर फोटो खिंचवाने का प्रोग्राम चल रहा था मेहमान एक एक करके आ रहे थे और सभ्या नीलेश को उपहार देते हुए उनके साथ फोटो करवा रहे थे, इसी बीच में राजन ने खोज कर कर्मा और अनुज को भी स्टेज पर चढ़ा दिया कि पूरे परिवार की साथ में एक फोटो करवा लो, दोनों अपने मां पापा के साथ खड़े हुए तो सभ्या ने अंजली को भी बुला लिया और बोली: ये भी परिवार में ही जुड़ने वाली है, अब अंजली भी अकेली नहीं गई उसने प्रीती का हाथ थामा और लेकर स्टेज पर चढ़ गई उस समय प्रीती और अनुज दोनों की हालत देखने वालीं थी दोनों के गाल शर्म से टमाटर की तरह लाल हो चले थे, अंजली ने अपने और सभ्या के बीच प्रीती को खड़ा किया तो सभ्या ने भी प्यार से अपना सिर अपनी होने वाली छोटी बहू के सिर से टिका दिया और फिर पूरे परिवार की कई फोटो ली गई।

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पिक्चरों के दौर के बाद बाहर खुले में खाने की व्यवस्था की गई थी जहां खाने का प्रोग्राम चला सबने स्वदिष्ट बने खाने का लुत्फ उठाया, और जी भर के खाया, खाते हुए बातों का और नाच गाने का प्रोग्राम साथ में चल रहा था, जो लोग आपस में इतना नहीं मिले थे उन्हें भी एक दूसरे को जानने का मौका मिल रहा था, कहीं राजपाल उदयवीर और सुजान सिंह की जोड़ी बन रही थी तो कहीं चरन सिंह, नाना, दीनू और महिपाल साथ थे, एक ओर नीलेश, प्रदीप(शशि के पति), शैलेश, राजन, जमुना, चेतन, साथ में थे वहीं विनीत, पंकज, रमन आदि कर्मा, जग्गू, सरजू, और पीयूष के साथ गप्पें लड़ा रहे थे,
इसी तरह औरतों भी आपस में घुल मिल रही थीं, सावित्री और मंजू ताई की खूब जम रही थी तो रज्जो, माधुरी और ममता की, वहीं थोड़ी शर्मीली रेनू को हमारी हंसमुख गुंजन और शालू भा रही थी तो बिमला शशि और सभ्या एक साथ बैठी थीं। लड़कियां तो सारी साथ में घूम ही रही थी, नाच रही थी, फोटो खींचा रहीं थी और अब खाना भी खा रही थी, हम उम्र बहुएं और ननदें भी एक साथ थी जैसे प्रेमा, रानी, रिमझिम, पूर्वी और चंचल।
खाने के बाद फिर से एक बार नाच गाने का प्रोग्राम हुआ और इस बार सबकी फरमाइश पर नीलेश और सभ्या को भी साथ में ठुमके लगाने ही पड़े, अंदर की ओर इन सब का नाच गाना चल रहा था वहीं सारे लड़के मिल कर हलवाई का सारा ताम झाम इकठ्ठा करवा रहा रहे थे और फिर कुछ ही देर में हलवाई और उसके लोग अपना सामान लेकर निकल गए थे, पहले से ही बड़ा सा फ्रिज और चूल्हा और ज़रूरी सामान कर्मा और उसकी सेना ने लाकर रखा था ताकि हलवाई के जाने के बाद भी मेहमानों को कोई तकलीफ न हो। बाहर से दरवाज़ा आदि लगा कर लड़के भी अंदर पहुंच गए थे और नाच गाने में शामिल हो गए, अब जब सिर्फ जान पहचान के लोग ही रह गए थे तो नाच गाने के साथ साथ छेड़ छाड़ भी बढ़ रही थी,

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नाच गाने के बाद थक-हार कर सब लोग बैठ गए। बड़ों के लिए कुर्सियाँ लगी थीं, छोटे लोग नीचे ही पसर गए। कोल्ड ड्रिंक के गिलास बाँटे गए। सब ठंडी-ठंडी कोलड्रिंक ड्रिंक पीते हुए फिर से बातें करने लगे।
इसी बीच किरण उठी। सबका ध्यान अपनी तरफ खींचते हुए उसने मुस्कुराकर कहा,
“सब लोगों को मेरा नमस्ते... प्यारी बुआ और प्यारे फूफाजी, तुम दोनों के लिए और आप सभी के लिए हम बच्चों की तरफ से एक छोटी-सी भेंट।”
नीलेश हँसते हुए बोले, “अरे भाई, अब कौन-सी भेंट रह गई?”
पल्ली भी उठते हुए बोली, “बस देखते जाओ ताऊजी...”
किरण, पल्ली, लाड़ो, नीतू और अंजली सब मिलकर स्टेज पर पहुँच गईं। उनके इशारे पर सागर ने गाना चला दिया। पाँचों ने एक धमाकेदार गाने पर नाच पेश किया। पूरा हॉल तालियों से गूँज उठा। खासकर सभ्या और नीलेश ने खूब तालियाँ बजाईं।
फिर तुरंत किरण और पल्ली अंदर चली गईं। अंजली सबका ध्यान बातों में लगाए रखी। कुछ देर बाद जब किरण वापस आई, तो वो सभ्या की ही साड़ी पहने हुई थी — बिल्कुल उन्हीं की तरह तैयार, बालों में फूल, मेकअप, सब कुछ। उसे देखकर सब हँसने लगे, तालियाँ बजने लगीं। सभ्या बलाएँ ले रही थी, शालू ने तो जाकर पैसे भी न्योछावर कर दिए।
दूसरी तरफ जब पल्ली नीलेश का कुर्ता-पजामा पहनकर स्टेज पर आई, तो पूरा हॉल तालियों और सीटियों से गूँज उठा। नीलेश सिर पकड़कर जोर-जोर से हँस रहे थे।
फिर गाना बज उठा...
“अरे ओ जुम्मा... मेरी जान-ए-मन... बाहर निकल... आज जुम्मा है... आज का वादा है...”



थक हार कर सब लोग बैठ गए, बढ़ों के लिए कुर्सियां रखी गई थी तो छोटे तो नीचे ही पसर गए, कोलड्रिंक के गिलास बांटे गए और सब ठंडी ठंडी कोलड्रिंक पीते हुए फिर से बातें करने लगे, इसी बीच किरन उठी और सबका ध्यान अपनी ओर करते हुए बोली: सब लोगों को मेरा नमस्ते, प्यारी बुआ और प्यारे फूफाजी तुम दोनों लोगों के लिए और आप सभी के लिए हम बच्चों की तरफ से एक छोटी सी भेंट।
नीलेश: अरे भाई अब कौन सी भेंट रह गई?
पल्ली: बस देखते जाओ ताऊजी।
पल्ली भी उठते हुए बोली, किरन भी उठ गई थी, इसके बाद किरन, पल्ली, लाड़ो नीतू और अंजली ये सब मिलकर स्टेज पर पहुंच गईं इनके इशारे पर सागर ने गाना चलाया और फिर सब ने एक गाने पर नाच पेश किया और सबने ताली बजा कर उनका खूब स्वागत किया, खासकर सभ्या और नीलेश ने, उसके बाद तुरंत ही किरन और पल्ली अंदर गईं तब तक अंजली सबका ध्यान बातों में लगाती रही और कुछ देर बाद ही किरन अपनी बुआ की साड़ी पहन कर उन्हीं की तरह तैयार हो कर स्टेज पर आई उसे देख सब हंस रहे थे ताली मार रहे थे, सभ्या बलाएं ले रही थी, वहीं शालू ने तो जाकर पैसे भी न्योछावर कर दिए, दूसरी ओर से जब पल्ली नीलेश का कुर्ता पजामा पहन कर स्टेज पर आई तो पूरा हाल तालियों सीटियों से गूंज उठा, नीलेश भी सिर पकड़ कर हंस रहे थे,
फिर गाना बजा,
अरे ओ जुम्मा मेरी जानेमन, बाहर निकल आज जुम्मा है आज का वादा है, पल्ली गाने के बोल पर पूरा अभिनय करते हुए नाचने लगी, वहीं किरन भी हीरोइन की तरह नहीं नहीं करते हुए शर्मा रही थी, गाना जब तक खत्म हुआ तब तक दोनों ने पूरा माहौल बांध दिया था और हर कोई खुशी से उनके लिए तालियां पीट रहा था, गाना खत्म होने पर सबने उनका खूब जोश बढ़ाया, शैलेश ने सभी लड़कियों को इक्कीस सौ- इक्कीस सौ का शगुन भी बांट दिया, किरन और पल्ली फिर निलेश और सभ्या को पकड़ कर स्टेज पर लाए और उन्हें खड़ा कर पल्ली बोली: वैसे इतने अच्छे गाने के बाद चुम्मा हो ही जाए क्या कहते हो आप लोग।
पूर्वी: अरे नेकी और पूछ पूछ? मामा हो जाओ शुरू।
नीलेश सबके सामने थोड़ा शर्माए और बोले: अरे क्या तुम लोग भी।
राजन: अरे भाई बच्चों का मन है तो हो ही जाए,
शशि: हां भैया भाभी हो जाए,
सबके कहने पर सभ्या और निलेश एक दूसरे की ओर मुड़े प्यार से एक दूसरे की आंखों में देखा सभ्या ने एक हाथ नीलेश के कंधे पर रख लिया तो नीलेश के हाथ सभ्या की कमर पर पहुंच गए और फिर धीरे से दोनों के होंठ मिले एक छोटे पर गरम चुंबन के लिए

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एक के बाद दूसरा... फिर तीसरा... चुंबन लंबे और गहरे होते गए। आसपास की आवाजें जैसे उनके लिए कम होती गईं। कुछ पलों बाद दोनों पूरे जोश से एक-दूसरे के होंठ चूस रहे थे। नीलेश की जीभ सभ्या के मुँह में घुस गई थी, हाथ बदन को सहला रहे थे। जब होंठ अलग हुए तो दोनों हाँफ रहे थे। उनके गर्म चुंबन को देख पूरे हॉल में गर्मी फैलने लगी।
सबने तालियाँ बजाकर उनका स्वागत किया। दोनों शर्माते हुए सबकी ओर देख रहे थे।
इसी बीच पूर्वी स्टेज पर चढ़ गई और बोली, “देखा सबने? दोनों में आग अभी भी उतनी ही है जितनी पच्चीस साल पहले थी!”
नीलेश हँसते हुए बोले, “अरे तू भी क्या बोल रही है?”
पूर्वी ने शरारत से आँख मारी, “अरे मामा शर्माना कैसा? यहाँ सब अपने ही हैं और सबकी एक जैसी सोच भी है। तो आप सबकी तरफ से और अपनी तरफ से मैं ये कहना चाहूँगी कि चुम्मा-चाटी तो बहुत देख ली... अब कुछ और देखना है।”
नीलेश ने हैरानी से पूछा, “क्या?”
पूर्वी ने सीधे, बेशर्मी से कहा, “चुदाई!”
सभ्या शर्माकर बोली, “धत्त तू भी ना...”
पूर्वी हँसते हुए बोली, “मामी मान जाओ... नहीं तो मेरी सेना तुम पर टूट पड़ेगी!”
इधर मर्द भी नीलेश को उकसाने लगे।
राजन चिल्लाया, “अरे सालगिरह पर नहीं चोदोगे तो कब चोदोगे भैया?”
पूर्वी ने लड़कियों की तरफ इशारा किया, “अरे लड़कियों देख क्या रही हो? शुरू हो जाओ!”
पूर्वी के कहते ही तीन-तीन लड़कियाँ दोनों पर टूट पड़ीं। कुछ ही पलों में नीलेश और सभ्या के सारे कपड़े उतर चुके थे। दोनों बिल्कुल नंगे स्टेज पर खड़े थे।
नीलेश का लंड पहले से ही कड़क हो चुका था, सीधा तना हुआ, मोटा और लंबा। सभ्या को लड़कियों ने उनके सामने घुटनों पर बैठा दिया। जिन मर्दों ने अब तक सभ्या को नंगा नहीं देखा था, वो उसे देखकर आहें भर रहे थे — उसके भारी-भारी दूधिया चूचे, चिकनी कमर, और साफ-सुथरी, गुलाबी चूत देखकर उनके मुँह खुले के खुले रह गए। औरतें नीलेश के तने हुए लंड को और सभ्या के कामुक नंगे बदन को घूर रही थीं।
पूर्वी और बाकी लड़कियाँ चिल्लाने लगीं, “चूसो... चूसो... चूसो!”
सबकी आवाज सुनकर सभ्या ने आगे बढ़कर नीलेश के मोटे लंड को हाथ में पकड़ लिया। उनकी आँखों में देखते हुए वो मुस्कुराई और बोली, “सालगिरह मुबारक हो, मेरे राजा...”
और ये कहते हुए उसने पूरा लंड अपने गरम, गीले मुंह में भर लिया और जोर-जोर से चूसने लगी।

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नीलेश के मुंह से आह निकल गई, “ओह आह्ह्ह्ह... मेरी रानी...”
सभ्या हाथ से लंड को सहलाते हुए, अपने मुंह का पूरा जादू चला रही थी — कभी सिर चूसती, कभी पूरी लंबाई गले तक ले जाती, कभी जीभ से लंड की नोक को चाटती। नीलेश की आँखें मजे से बंद हो गईं।
मर्दों के लंड कड़क हो गए, औरतें अपनी चूत में गर्म नमी महसूस करने लगीं। लेकिन सब चुपचाप देख रहे थे।
रिमझिम चिल्लाई, “मामा... पच्चीस साल बाद भी वही मजा है या नहीं मामी के मुंह में?”
नीलेश हाँफते हुए बोले, “ओह... ज़्यादा ही है बिटिया... बहुत ज़्यादा!”
राजन बोला, “अरे हमारी भौजी तो और गरम होती जा रही हैं!”
पूर्वी हँसते हुए बोली, “सही कहा... हमारी मामी तो शराब है, जितनी पुरानी उतनी नशीली!”
पंकज बोला, “हमारा भी मन कर रहा है शराब पीने का...”
पल्ली तुरंत शरारत से बोली, “आओ जीजा... नीचे टंकी से मुंह लगाओ, अभी पिला देती हूँ!”
सब जोर से हँस पड़े।
पंकज ने पल्ली को घूरते हुए कहा, “बिल्कुल पीएंगे साली साहिबा... तुम्हारी शराब भी पीएंगे। तुम भी कम नशीली नहीं लगती।”
किरण बोली, “अरे जीजा... सालियाँ तो इतनी नशीली हैं कि पीकर सब भूल जाओगे!”
पूर्वी ने हँसते हुए कहा, “अभी बताती हूँ तुम्हें... चुपचाप स्टेज पर देखो और कुछ सीखो!”
पंकज हँसते हुए स्टेज की ओर देखने लगा।
दृश्य अब बदल चुका था। नीलेश ने सभ्या को स्टेज पर रखी कुर्सी पर लिटा दिया, उसकी टांगें फैला दीं और अपना मोटा लंड पकड़कर उसकी चूत पर थपथपाने लगे।
नीलेश ने गहरी नजरों से पूछा, “घुसा दूँ मेरी रानी?”
सभ्या ने अपने होंठ काटते हुए कामुक आवाज में कहा, “घुसा दो ना मेरे राजा...”
नीलेश ने सबकी तरफ देखा और जोर से पूछा, “घुसा दूँ?”
सबने गर्मजोशी से “हाँ... हाँ...” करते हुए शोर मचाया।
नीलेश ने एक गहरा, जोरदार धक्का लगाया और अपना पूरा लंड सभ्या की चूत में जड़ तक घुसा दिया, और दोनों की एक साथ गहरी आह निकल गई।
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सब लोग खुश होकर शोर मचाने लगे, उनका जोश बढ़ाने लगे।
नीलेश ने सभ्या की आँखों में देखा और बोले, “अभी भी वही गर्मी... वही कसावट... वही आनंद है तुम्हारी चूत में जो पच्चीस बरस पहले था।”
सभ्या हाँफते हुए बोली, “ओह जी... तुम्हारा लोड़ा जरूर पहले से भी बड़ा हो गया है... तभी तो ये चूत कसी हुई लग रही है।”
नीलेश मुस्कुराए, “तुम्हारा बदन सामने पाकर ये अपने आप बड़ा हो जाता है।”
वे आगे झुके, सभ्या के होंठ चूसने लगे और साथ ही धक्के भी लगाते रहे।
जब चुंबन टूटा तो सभ्या मुस्कुराकर बोली, “ऐसा लग रहा है जैसा पहली रात को महसूस हुआ था... आह... सुहागरात पर।”
नीलेश बोले, “आह... तो ये हमारी पहली रात ही तो है रानी... आने वाले और पच्चीस बरसों की पहली रात... या कहूँ सुहागरात।”
सभ्या हाँफते हुए बोली, “आह... आह... पर इस बार सुहागरात पर दर्शक भी हैं।”
नीलेश ने जोर से धक्का लगाते हुए कहा, “हाँ... पहली बार हम दोनों ही थे... इस बार इतने हैं... अगली बार और भी होंगे।”
सभ्या ने हैरानी से पूछा, “अगली बार और?”
नीलेश हँसते हुए बोले, “और क्या... इस बार बच्चे देख रहे हैं... अगली बार नाती-पोते देखेंगे!”
सभ्या शर्माकर बोली, “अगली बार तक हम लोग बुड्ढे हो चुके होंगे।”
नीलेश ने तेज धक्का लगाते हुए कहा, “तो क्या हुआ... बुढ़ापे में चुदाई का अलग ही मजा होगा।”
शालू चिल्लाई, “अरे प्रेमियों की क्या बातें हो रही हैं... हमें भी सुनाई देनी चाहिए!”
पल्ली ने शरारत से कहा, “और ताऊजी-ताईजी... बहुत हुआ प्यार से धीमे-धीमे... मेहमान आए हैं, इन्हें भी दिखाओ चोदमपुर की चुदाई क्या होती है!”
सभ्या हाँफते हुए बोली, “सुना जी... गाँव की इज्जत का सवाल है... मुझे ऊपर आने दो।”
नीलेश ने लंड निकाला, कुर्सी पर बैठ गए और बोले, “आ जाओ...”
सभ्या तुरंत ऊपर चढ़ गई, पति का मोटा लंड अपनी चूत में लिया और जोर-जोर से उछलने लगी। शुरू से ही कोई धीमे-धीमे नहीं — वो अपनी चूत को जड़ तक पति के लंड पर मार रही थी, फिर ऊपर उठ जाती। उसके नंगे बदन और उछलती-नाचती चूचियों को देखकर मर्दों के मुंह में पानी आ रहा था, लंड में तनाव बढ़ रहा था।

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इस बार कोई धीमे धीमे नहीं शुरू से ही वो अपनी चूत को जड़ तक पति के लंड पर मारती है और फिर ऊपर जाती है, उसके नंगे बदन और उछलती नाचती चूचियों को देख कर मर्दों के मुंह में पानीं आने लगता है तो लंड में तनाव।
पल्ली: आह आह ये हुई न बात आह ताऊजी, ताई जी ऐसे ही मज़ा आ रहा है,
पल्ली अपनी चूत को कपड़ों के ऊपर से ही रगड़ते हुए कहती है।
अंजली: बहुत बढ़िया मां पापा ऐसे ही बहुत अच्छे लग रहे हो,
अंजली भी गरम होते हुए उनका हौसला बढ़ाती है, वैसे चुदाई के लिए उन्हें कहां किसी तरह की प्रेरणा की ज़रूरत थी वो दोनों ही इस मामले में काफी खुले विचारों वाले थे,
निलेश भी सभ्या की कमर थामे नीचे से लंड उसकी चूत में ठोंक रहे थे।
अनुज और कर्मा दोनों ही उत्तेजित भी महसूस कर रहे थे और कहीं न कहीं भावुक भी, जो भी नीलेश और सभ्या से जुड़ा हुआ था उन सब के लिए ही ये खास और भावुक पल था,
कच्ची और गरम उत्तेजना की कढ़ाई में कामुकता और भावना का तड़का और लग जाए तो चुदाई की दाल बहुत स्वादिष्ट बनती है, और उसी का लुत्फ़ आज सब उठा रहे थे, चखने वाले भी और सूंघने वाले भी।
और उसी भावनात्मक चुदाई का असर कहो या इतने लोगों के सामने प्रदर्शन के कारण सभ्या अपनी पूरी जी जान लगा कर अपने पति के लंड पर उछल रही थी और फिर एक पाप ऐसा आया कि वो तेजी से चिल्लाते हुए ढीली पड़ गई, उसका बदन मचलते हुए शांत हो गया,
उसे शांत होते देख नीलेश ने वही किया जो हर पति का कर्तव्य होता है जब उसकी पत्नी ढीला महसूस करे, नीलेश ने उसे गोद में उठाया और अपने ऊपर बैठा लिया और उसके चूतड़ों को थाम कर उसे अपने ऊपर उछालने लगे,
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दर्शकों में गर्मी अब खुलकर दिखने लगी थी। कोई अपनी चूचियों को मसल रहा था, कोई चूत रगड़ रहा था, कोई लंड सहला रहा था, कोई किसी के बदन को छू रहा था।
पल्ली आगे बढ़कर पंकज जीजा की गोद में बैठ गई। पंकज उसकी मोटी चूचियों को मसलते हुए उसकी गर्दन चूम रहे थे। पल्ली अपने चूतड़ उनके कड़क लंड पर घुमा रही थी।
पल्ली ने मज़ाक करते हुए कहा, “आहिस्ते जीजा... साली की चूची हैं, तुम्हारी रांड बहन की नहीं!”
पंकज मुस्कुराते हुए उसे चूमने लगा।
कर्मा और अनुज अपनी-अपनी भावी हमसफर से चिपके हुए माँ-पापा की चुदाई देख रहे थे। अंजली को कर्मा का कड़ा लंड अपने चूतड़ों पर चुभता महसूस हो रहा था। अनुज ने तो प्रीती के ब्लाउज में हाथ घुसा दिया था।
पर सबकी नजर स्टेज पर थी। नीलेश अब सभ्या को कुर्सी के सहारे झुका रहे थे। सभ्या ने अपने चूतड़ उभारकर पति और सभी दर्शकों के लिए परोस दिए। नीलेश ने लंड पकड़ा, अपनी पत्नी के गरम, कसे हुए गांड के छेद पर रखा और एक जोरदार धक्का लगाकर अंदर सरका दिया। सभ्या की मखमली गांड चीरती हुई लंड जड़ तक समा गया।
दर्शकों ने गर्मजोशी से तालियाँ और सीटियाँ बजाईं।
नीलेश ने उतनी ही गर्मी से सभ्या की गांड मारना शुरू कर दिया।

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सभ्या चिल्लाई, “आह... आह... आह जी... ऐसे ही मारो... अपनी रंडी पत्नी की गांड... आह... मार-मार के फाड़ दो... ओह... ऐसे ही!”
नीलेश कस-कस के धक्के लगाते हुए बोले, “आह... साली कुतिया... आह... ले... क्या गरम गांड है... आह... आह... आह!”
महिपाल ने रज्जो को पकड़कर उसका ब्लाउज खोल दिया और चूचियों को पागलों की तरह चूसने लगा। चेतन गुंजन मामी के बदन को सहलाते हुए उनके होंठ चूस रहा था। विनीत किरण को खींचकर उसके बदन का मजा ले रहा था।
दीनू ने शशि की मोटी चूचियों के बीच मुंह घुसा रखा था। सुजान सिंह रानी को गोद में बिठाए हुए थे। प्रदीप शालू मौसी की चूचियों के दीवाने हो रहे थे।
सागर अपनी माँ का बदला लेते हुए चेतन की मां माधुरी की नाभि चाट रहा था। सरजू, कर्मा की होने वाली सास सविता को सामने बिठाकर होंठ चूस रहा था। पीयूष रिमझिम के रसीले होंठ चूस रहा था। बिरजू पूर्वी के साथ था। जमुना मामा ने रेनू को अकेले में घुसा रखा था। प्रकाश प्रेमा भाभी के साथ थे। नाना बिमला को अपना अनुभव दिखा रहे थे। राजन चाचा सावित्री को “जीजी-जीजी” कहकर मसल रहे थे। शैलेश मौसा चंचल की मोटी चूचियों को ब्लाउज से बाहर निकाल चुका था। रमन ममता चाची को पकड़ चुका था। चरन सिंह की सेवा नीतू और लाड़ो दोनों बहनें कर रही थीं। खुशी कर्मा और अंजली के पास पहुँचकर दोनों के होंठ बारी-बारी चूस रही थी।
सबका ध्यान स्टेज पर भी था, जहाँ चुदाई अब तूफानी हो चुकी थी। नीलेश कुर्सी से आगे अपनी पीठ पर लेट गए थे और सभ्या उनके ऊपर। नीचे से नीलेश का लंड सभ्या की गांड को भेद रहा था।

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सभ्या अपनी मोटी, गोल चूतड़ों को नीलेश की गोद में पटक-पटक कर मार रही थी। नीलेश लेटे-लेटे नीचे से जोर-जोर से अपनी कमर उठाकर लंड ठोक रहे थे। सभ्या की गांड पूरी तरह खुल चुकी थी, नीलेश का मोटा, गाढ़ा लंड जड़ तक अंदर-बाहर हो रहा था। हर धक्के पर सभ्या के चूतड़ लहरा रहे थे, उसके भारी-भारी चूचे ऊपर-नीचे उछल रहे थे और पूरा हॉल उनकी चुदाई की आवाज़ से गूँज रहा था — “पच... पच... पच...”
“आह... आह... मेरे राजा... ऐसे ही... तेज... तेज मारो मेरी गांड... आह... फाड़ दो आज... ओह...!” सभ्या हाँफते हुए चिल्लाई, उसके बाल बिखर गए थे, पसीना चमक रहा था।
नीलेश ने उसके चूतड़ों को दोनों हाथों से कसकर पकड़ लिया और और तेज धक्के लगाने लगे, “आह... साली कुतिया... ले... ले... तेरी ये गरम मखमली गांड... आह... मेरा लंड निगल रही है... 25 साल बाद भी कितनी कसी हुई है रे... ओह...!”
कुछ देर तक यही जोरदार चुदाई चलती रही। सभ्या ऊपर-नीचे उछल रही थी, नीलेश नीचे से ठोक रहे थे, दोनों की साँसें तेज़ हो गई थीं।

हॉल में माहौल अब पूरी तरह से कामुक हो चुका था, लेकिन कोई भी चुदाई नहीं कर रहा था। बस छेड़छाड़, चूमा-चाटी और चूचियों को मसलने का मज़ा चल रहा था।
पंकज ने पल्ली को अपनी गोद में बिठा रखा था पर अब पल्ली ने अपना मुंह पंकज की ओर कर रखा था और दोनों के होंठ मिले हुए थे। पंकज की दोनों हथेलियाँ पल्ली के भरे-भरे चूतड़ों पर थीं, वो जोर-जोर से मसल रहे थे। पल्ली अपनी चूत उनके कड़क लंड पर रगड़ रही थी, कपड़े के ऊपर से ही। “

कर्मा अंजली से चिपका हुआ था। उसका एक हाथ अंजली के ब्लाउज़ के अंदर घुसा हुआ था, वो उसके नरम चूचों को दबा-दबा कर सहला रहा था। अंजली उसकी गर्दन चूस रही थी और अपनी गांड उसके लंड पर घुमा रही थी। “... आह... ऐसे ही दबाओ... मेरे चूचे... ओह...
कर्मा: देख लो आह हमें भी ऐसे ही मनानी है अपनी 25वीं एनिवर्सरी।
अंजली: देखना क्या है, बिल्कुल मनायेंगे मैने तो सोच भी लिया है मैं क्या पहनूंगी।
अंजली हंसते हुए कहती है तो कर्मा भी उसके होंठ चूसने लगता है।
अनुज ने प्रीती को दीवार से सटा दिया था। उसका मुँह प्रीती के ब्लाउज में घुसा हुआ था, वो उसके एक चूचे को चूस रहा था और दूसरा हाथ से मसल रहा था। प्रीती की आँखें बंद थीं, वो कराह रही थी, “आह... अनुज... काट मत... चूस... चूस... ओह...”
महिपाल रज्जो की चूचियों को दोनों हाथों से पकड़े हुए था, उन्हें जोर से दबाता और चूमता जा रहा था। रज्जो उसकी पीठ पर नाखून गड़ाए हुए थी। चेतन गुंजन को पीछे से पकड़े हुए था, उसके चूचों को सहलाते और उसके होंठों को चूसता हुआ। विनीत किरण की कमर पर हाथ फेर रहा था और उसके चूचों को ब्लाउज के ऊपर से मसल रहा था।
पूरा हॉल चूमने, चाटने, दबाने और कराहने की आवाज़ों से भर गया था। वहीं स्टेज पर भी दृश्य बदल चुका था, सभ्या अब नीलेश की ओर पीठ करके बैठी थी, नीलेश का लंड अब भी उसकी गांड में अंदर बाहर हो रहा था, उसके घुटने दोनों तरफ फैले हुए थे, चूत पूरी तरह खुली हुई दिख रही थी, और नीलेश का मोटा लंड उसकी गांड में जड़ तक घुसा हुआ था। सभ्या ने अपने आनंद को और बढ़ाने के लिए अपनी उंगलियां भी चूत में घुसा दी थीं

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“आह... जी... ऐसे... देखो सबको...तुम्हारी आह पत्नी को आह देख रहे हैं आह मेरी आह खुली चूत ओह...!” सभ्या कामुक आवाज़ में बोली।
नीलेश ने उसके चूतड़ों को दोनों हाथों से थाम लिया और नीचे से जोर-जोर से लंड ठोकना शुरू कर दिया। सभ्या की गांड अब पूरी तरह खुली हुई थी, लंड हर धक्के पर जड़ तक घुस रहा था और बाहर निकल रहा था। उसके चूचे तेज़ी से उछल रहे थे, पसीना चमक रहा था।
“आह... आह... मेरे राजा... फाड़ दो... पूरी गांड... आह... देखो सब... आह मेरी गांड चुद रही है... ओह...!” सभ्या चिल्लाई, उसकी आवाज़ पूरे हॉल में गूँज रही थी।
नीलेश भी हाँफते हुए बोले, “आह... रानी... कितनी खुली है तेरी गांड... आह... ले... ले... मेरा लंड निगल... ओह... 25 साल की की सारी गर्मी.. आज मैं तेरी गांड भर दूँगा... आह...!”
गति वही तेज़ थी। सभ्या अपनी गांड को नीचे पटक-पटक कर मार रही थी, नीलेश नीचे से ठोक रहे थे। दोनों की साँसें एक हो गई थीं। हॉल में सबकी नजरें स्टेज पर थीं। छेड़छाड़ तो चल ही रही थी, लेकिन सबकी आँखें सभ्या-नीलेश की इस खुली चुदाई पर टिकी हुई थीं।
फिर नीलेश का लंड और भी फूल गया। उन्होंने सभ्या के चूतड़ों को कस लिया और जोर-जोर से धक्के लगाने लगे।
“आह... रानी... मैं झड़ने वाला हूँ... तेरी गांड में... आह... ले... ले... पूरा... ओह...!”
सभ्या भी अपनी चूत में उंगलियां चलाते हुए चिल्लाई, “आह... जी... झड़ो... मेरी गांड में भर दो... आह... मैं भी... आह... आ रही हूँ... ओह... राजा...!”
दोनों एक साथ चरम पर पहुँच गए। नीलेश का लंड सभ्या की गांड के अंदर फड़क उठा और गर्म-गर्म मोटी-मोटी धारें छोड़ने लगा। सभ्या का बदन मचल उठा, उसकी चूत से पानी की फुहार निकली और वो भी जोर से झड़ गई। दोनों की चीखें पूरे हॉल में गूँज उठीं — “आह्ह्ह्ह... ओह्ह्ह्ह...!”
नीलेश की सारी मलाई सभ्या की गांड में भर गई। सभ्या ढीली पड़कर उनके सीने पर गिर गई, दोनों हाँफ रहे थे, बदन पसीने से तर।
हॉल में तालियाँ और सीटियाँ बजने लगीं। सबकी आँखों में अभी भी गर्मी थी। सब जानते थे कि रात अभी बाकी थी।


जारी रहेगी।
 

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किरन ने सभ्या की कमर पर हाथ फेरते हुए शरारत से कहा, “हां बुआ, आज तुम इतनी सुंदर लगोगी की फूफाजी देखते ही शुरू हो जाएंगे।
सभ्या शर्म से लाल हो गई, लेकिन खुश भी थी। “अरे पागल लड़कियां, तुम लोगों को भी न जाने क्या हो गया है।
सब औरतें तैयार हो चुकी थीं, लेकिन उन्हें अभी भी सिर्फ इतना पता था कि “शाम को कुछ खास प्रोग्राम है”।


अपडेट 263

तैयार होकर सारी औरतों को दो गाड़ियों में बिठाकर, लड़कियों को मोटरसाइकिलों पर चढ़ाकर पूरा काफिला नीलेश के अब तक छिपे हुए आलीशान फार्म हाउस की ओर रवाना हो गया।
जब सभ्या गाड़ी से उतरी, तो उसके साथ थीं शालू, गुंजन, ममता, रज्जो और मंजू। ममता और पल्ली तो पहले भी यहाँ आ चुकी थीं, लेकिन आज का माहौल कुछ और ही था। चारों तरफ हरे-भरे पेड़ों से घिरा हुआ ये विशाल फार्म हाउस आज दुल्हन की तरह सजाया गया था। रोशनी की मालाएँ, फूलों के गुच्छे, और हल्की-हल्की खुशबू... सभ्या दरवाजे पर खड़ी रह गई। उसकी आँखें हैरानी और खुशी से फैल गईं।
नीलेश और बाकी सारे मर्द पहले से ही वहाँ खड़े थे। सभ्या के चेहरे पर उभरती हुई वो निश्छल खुशी देखकर उनके चेहरे गर्व से फूल गए थे।
नीलेश धीरे से आगे बढ़ा, सभ्या का नरम हाथ अपने बड़े-बड़े हाथ में ले लिया और गहरी नजरों से उसे देखते हुए बोला, “ये है तुम्हारा तोहफा, ... कैसा लगा?”
सभ्या अभी भी अपनी भावनाओं को संभाल नहीं पा रही थी। उसकी आवाज़ थोड़ी काँप रही थी, “बहुत... बहुत सुंदर है। बिल्कुल महल जैसा लग रहा है।”
नीलेश मुस्कुराया, उसकी आँखों में शैतानी चमक थी, “तो फिर इस महल की रानी... अंदर तो चलो।”
सभ्या शर्मीली मुस्कान के साथ नीलेश का हाथ मजबूती से पकड़कर आगे बढ़ गई। उसके पीछे-पीछे सारी औरतें और मर्द भी अंदर घुस गए। हर कदम पर फार्म हाउस की भव्यता उन्हें और भी हैरान कर रही थी।

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अंदर पहुँचते ही सबके मुँह खुशी से खुले के खुले रह गए। पूरा हॉल दिवाली की तरह जगमगा रहा था। दीवारें फूलों और लाइटों से सजी हुईं, हवा में हल्की मीठी खुशबू, और हॉल के एक तरफ खूबसूरती से सजाया गया स्टेज... जिस पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा था — “Happy Anniversary”।
सभ्या और बाकी औरतें तो ये देखकर खुशी से पागल हो गईं। उनकी आँखें चमक रही थीं, होंठों पर अनकही मुस्कान थी।
फिर मर्दों ने बाकी सब औरतों को आराम से बैठा दिया। सभ्या को धीरे-धीरे स्टेज पर ले जाकर खड़ा कर दिया गया। नीलेश भी उसके ठीक बगल में आकर खड़ा हो गया। उसने सभ्या की ओर मुड़कर गहरी, प्यार भरी आवाज़ में कहा,
“सालगिरह की ढेर सारी शुभकामनाएँ, मेरी रानी।”
सभ्या की आँखें नम हो आईं। वो मुस्कुराते हुए बोली, “तुम्हें भी जी... आज तुमने मुझे सच में बहुत खुश कर दिया। ये तोहफा... सबसे सुंदर तोहफा था।”
नीलेश की आँखों में फिर वो शरारती चमक लौट आई। उसने धीरे से सभ्या के कान के पास मुँह ले जाकर फुसफुसाया,
“अभी तोहफा पूरा कहाँ हुआ है, रानी... अभी तो बस शुरुआत है।”
सभ्या ने हैरानी से उसकी ओर देखा, “मतलब?”
नीलेश मुस्कुराया और जोर से आवाज़ लगाई, “कर्मा... ओह कर्मा! लेके आ!”
कर्मा बगल वाले दरवाजे से बाहर निकला। कुछ पलों बाद जब वो वापस अंदर आया, तो उसके चेहरे पर चौड़ी मुस्कान थी। वो अपनी माँ सभ्या की ओर देखकर मुस्कुराया और एक तरफ खड़ा हो गया।
और फिर... उसी दरवाजे से अंदर आई — शशि।
नीलेश की वो खूबसूरत, मादक, और बेहद कामुक बहन। जैसे ही शशि ने अपनी भाभी सभ्या की ओर देखा, उसके होंठों पर शरारती हँसी खिल गई। सभ्या का मुँह भी खुशी से एकदम खुल गया।
शशि फुर्ती से भागकर स्टेज पर चढ़ गई और सभ्या की ओर लपकी। दोनों — एक तरफ मादक कामुक बदन वाली ननद, दूसरी तरफ अपनी भाभी — एक दूसरे से इतने जोर से गले मिलीं कि उनके मुलायम, भरे-भरे जिस्म एक-दूसरे से सट गए।

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सभ्या: तू कब से आई हुई है यहां?
शशि: हो गया भाभी घंटा भर।
सभ्या: लो घंटा भर हो गया और अब मिल रही है मुझसे?
शशि: अरे पहले मिलती तो तुम्हारे सुंदर चेहरे पर ऐसे हैरानी और खुशी कैसे देखती।
शशि ने उसके गालों को छूते हुए कहा,
सभ्या: बच्चे कहां हैं?
इतने में पीछे से आवाज आई: हम यहां हैं मामी, ये आवाज पूर्व की थी जो उनकी ओर चलती आ रही थी उसके साथ विनीत, उसके पापा, ताऊजी और ताई जी थे, पूर्वी भी आकर उसके गले लग जाती है
पूर्वी: हैप्पी एनिवर्सरी मेरी सेक्सी मामी।
सभ्या: आ गई मेरी प्यारी बिटिया,
पूर्वी: तुम्हारी पार्टी हो हम न आएं मेरी जान ऐसे कैसे हो सकता है?
सभ्या: पागल कहीं की? अच्छा तेरे ससुराल वाले वो लोग कहां है? और पंकज?
पूर्वी: अरे उनका क्या काम यहां? उन्हें छोड़ आई।
पूर्वी हंसते हुए बोली,
सभ्या: हाय दैय्या देखो तो जीजी कैसे बोल रही है,
सभ्या सावित्री के गले लगते हुए बोलती है
सावित्री: अब हम का कहें बन्नो, तू बड़ी सुंदर लग रही है आजा।
सभ्या: तुम भी जीजी।
विनीत: मेरी प्यारी मामी,
विनीत भी गले लगते हुए कहता है,
सभ्या: अब तो मेरा प्यारा भांजा दूल्हा बनने वाला है,
विनीत: हां दुल्हन तुम बनो तो।
पूर्वी: हां मामी कर लो ब्याह फिर से दूल्हा ये रहा,
सभ्या: अपना दूल्हा तो लाई नहीं तू मेरा ब्याह करवा रही है
पूर्वी: अरे लाई हूं मामी लो नाम लिया और हाजिर।
पंकज: हैप्पी एनिवर्सरी मामी जी, ये तो हमें छोड़ आई थी पर हम फिर भी चले आए,
पंकज गिफ्ट का एक बड़ा सा डिब्बा सभ्या की ओर देते हुए कहता है, पंकज के साथ उसकी मां रेनू, बहन प्रीती और पिता प्रकाश भी थे,
सभ्या: अरे देखो तो बदमाश को कैसे मजाक करती है,
सभ्या पंकज से मिलती है और फिर रेनू भी उसके गले लगती है और कहती है: मुबारक हो बहन जी।
पूर्वी: अरे थोड़ा कस के मिलो समधन बनने वाली हो दोनों।
इस पर सब हंसने लगते हैं वहीं प्रीती पीछे खड़े खड़े शर्मा रही होती है,
रेणु: हां अच्छे से ही मिल रही हूं और समधन तो पहले से ही हैं।
सभ्या: ये भी बात बिल्कुल सही कही बहन जी।
प्रकाश: अरे समधी के लिए गले मिलने का कोई मौका नहीं है क्या?
इस पर सब हंसते हैं और रेणु कहती है: तुम जाओ पीछे खड़े हैं समधी जी उनसे मिलो।
इसी तरह हंसी मज़ाक में फिर बाकी सब भी सभ्या से मिलते हैं, उनके बाद रिमझिम और उसके ससुराल वाले मिलते हैं, सविता रानी महिपाल, पीयूष भी पहले ही आ चुके थे, अंजली भी लड़कियों के साथ आ गई थी। सबसे मेल मिलाप के बाद चंचल जो कि एक पार्टी वियर साड़ी में थी और वो साड़ी उसके भरे और कामुक बदन पर खूब जंच रही थी वो पेशाब करने के लिए जा रही थी कि तभी पीछे से कोई उसे बाहों में भर लेता है वो चौंक कर देखती है और कहती है: अरे तूने तो मुझे डरा ही दिया।
कर्मा: कैसी हो दीदी?
कर्मा उसके पेट को सहलाते हुए कहता है।

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चंचल ने कर्मा की मजबूत बाहों में थोड़ा सिकुड़ते हुए, लेकिन मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “अच्छी हूँ तू... तू कैसा है मेरा प्यारा भाई?”

कर्मा ने अपनी हथेली को चंचल के नाभि के नीचे थोड़ा और नीचे सरकाते हुए, गर्म साँस उसके कान में डालते हुए बोला, “मैं भी अच्छा हूँ दीदी... लेकिन हाय! आज तुम कितनी मस्त, कितनी रसीली लग रही हो। मन कर रहा है यहीं खा जाऊँ... इन भरे-भरे चूचों को, इस चिकनी कमर को, और नीचे जो कुछ छिपा है उसे चूस-चूस कर...”

चंचल शर्म से लाल हो गई, लेकिन उसकी आँखों में भी शरारत झलक रही थी। उसने हल्के से कर्मा की छाती पर थपकी मारते हुए कहा, “धत्त पागल कहीं का! पार्टी पर ध्यान दे न... पहले मुझे सुसु जाने दे। बहुत तेज लगी है। फिर भले ही खा लेना... जितना मन करे।

कर्मा ने मजबूर होकर अपनी पकड़ ढीली की और मुस्कुराते हुए बोला, “अच्छा जाओ... जल्दी आना। वैसे तुम्हारी देवरानी किधर है?”

चंचल ने पीछे मुड़कर इशारा किया, “यहीं होगी कहीं... पूर्वी के साथ थी अभी।”

ये कहकर चंचल अपनी साड़ी की पल्लू ठीक करती हुई, कमर लचकाती हुई पेशाब करने चली गई। उसके पीछे-पीछे उसकी गोल-गोल गांड हिल रही थी, जो देखकर कर्मा का लंड एक बार फिर से तन गया।

कर्मा ने गहरी साँस ली और आगे बढ़ गया। जिनसे अभी तक नहीं मिला था, उन सबसे मिलने लगा। सबसे पहले चंचल के माँ-बाप उदयवीर और बिमला से मिला। उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया और आगे बढ़ गया।

फिर उसकी नजर पड़ी अपनी होने वाली भाभी खुशी पर, जो विनीत से बातें कर रही थी। खुशी आज बेहद सुंदर लग रही थी — उसकी साड़ी उसके नई-नई दुल्हनिया वाले बदन को ऐसे लपेटे हुए थी कि उसके उभरे हुए स्तन और पतली कमर साफ नजर आ रहे थे।

कर्मा सीधा उनके पास पहुँचा, विनीत को हल्के से धकेलते हुए बोला, “अरे यार, छोड़ मत देना तू बिल्कुल भी... एक पल के लिए भी नहीं!”

फिर वो खुशी को जोर से अपनी बाहों में भर लिया। खुशी का नरम, गर्म बदन उसके सीने से सट गया। उसके मोटे स्तन दब गए और एक मीठी रगड़ पैदा हुई।

खुशी ने शर्माते हुए लेकिन खुश होकर पूछा, “कैसे हो भैया?”

कर्मा ने उसे और कसकर जकड़ते हुए उसके कान में फुसफुसाया, “अच्छा हूँ भाभी... अब तो और भी अच्छा हो गया। वैसे ये विनीत तुमसे यूँ ही चिपका रहता है क्या दिन-रात?” कर्मा ने अलग होते हुए कहा,

विनीत हँसते हुए बोला, “अच्छा! जैसे तू अपनी वाली को छोड़ देता है। सब पता है मुझे तेरी और अंजली की कहानी...

खुशी ने शरमाकर हँसते हुए कहा, “अरे हाँ भैया, मुझे भी मिलाओ अंजली से... मैंने सुना है वो बहुत प्यारी और... बहुत सुंदर है।”

कर्मा मुस्कुराया। उसने तुरंत अंजली को आवाज़ दी, “अंजली... इधर आ ना!”

अंजली पास आई तो कर्मा ने दोनों को एक-दूसरे से मिलवाया। अंजली और खुशी दोनों एक-दूसरे को गले लगाकर मिलीं। दोनों की साड़ियाँ और बदन एक-दूसरे से सटे और दोनों ही बातें करने लगीं।

थोड़ी दूर ही पूर्वी और रिमझिम दोनों बहनें खड़ी थीं। दोनों नई-नई साड़ियों में लिपटी हुईं, बेहद खुश और शरारती मूड में आपस में मजाक कर रही थीं।

पूर्वी की साड़ी तो ऐसे पहनी हुई थी कि उसकी गहरी नाभि साफ दिख रही थी, ब्लाउज इतना टाइट कि उसके भरे-भरे, दूधिया स्तन लगभग बाहर झाँक रहे थे। रिमझिम की साड़ी भी कम नहीं थी — उसकी मोटी, गोल गांड और पतली कमर का मेल देखकर किसी का भी मन ललचा जाए। दोनों बहनों के कामुक बदन साड़ी के कपड़े में इस कदर लिपटे हुए थे कि हर हिलने-डुलने पर उनके अंगों की लचक साफ नजर आ रही थी।

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पूर्वी ने रिमझिम के सामने खड़े होकर उसकी भरी-भरी चूचियों को घूरते हुए शरारती मुस्कान के साथ कहा, “अरे यार... तेरे ये गुब्बारे हर बार बढ़ते कैसे जा रहे हैं? जब देखती हूँ, और भी बड़े, और भी भारी मिलते हैं।
पूर्वी ने अपनी उंगली से रिमझिम के चूचों की तरफ इशारा करते हुए हल्के से दबा भी दिया।
रिमझिम ने झेंपते हुए लेकिन हँसते हुए पूर्वी के अपने से भारी खरबूजे जैसे चूचों पर नजर डाली और बोली, “कुछ भी मत बोल! तेरे जितने बड़े तो मेरे हो ही नहीं सकते न... खुद तो दो-दो खरबूजे लिए घूमती है! चलते-फिरते इन्हें संभालना भी मुश्किल हो जाता होगा।”
पूर्वी ने कमर लचकाते हुए अपनी गांड को थोड़ा आगे निकालकर कहा, “तेरे चूतड़ भी तो तरबूज जैसे हैं यार! अभी देख कैसे फुदक-फुदक रहे हैं... ”
रिमझिम ने पूर्वी की कमर पर हाथ रखकर उसे अपने करीब खींच लिया, “हाय... ये नौकझोंक तेरे साथ कितनी अच्छी लगती है। मजा आ जाता है।”
पूर्वी ने पुरानी यादों में खोते हुए कहा, “अभी अच्छी लगती है... बचपन में कितना लड़ते थे हम दोनों।”
रिमझिम ने हँसते हुए पूर्वी की नाक पकड़ ली, “हाँ वो तो है... तू थी भी बड़ी कुतिया बचपन में।”
पूर्वी ने मुंह बनाते हुए नाटकीय अंदाज में बोला, “हो... देखो तो कैसे बोल रही है! मैं कुतिया थी?”
रिमझिम ने तुरंत प्यार से उसके गाल सहलाए, “अच्छा-अच्छा, मजाक में बोला... मुंह मत बना मेरी जान।”
पूर्वी ने बेशर्मी से आँख मारी और बोली, “मैं अभी भी कुतिया हूँ... बस अब बड़े थनों वाली।”
ये सुनकर दोनों बहनें जोर से हँस पड़ीं। उनकी हँसी में शैतानी और कामुकता दोनों थी।
रिमझिम ने अभी भी हँसते हुए पूछा, “कुतिया कहीं की! अच्छा, कोल्ड ड्रिंक पियेगी?”
पूर्वी ने तुरंत सहमति में सिर हिलाया, “हाँ चल... प्यास भी लगी है।”
दोनों आगे बढ़ीं। थोड़ी दूर जाकर पूर्वी ने एक कोने की तरफ इशारा करते हुए हँसते हुए कहा, “इन्हें देख दो... हंसो का जोड़ा बन गया है।”
रिमझिम ने देखा तो अनुज और प्रीती कोने में खड़े थे।
रिमझिम: अरे करने दे न मजे उन्हें तू चल,
दोनों आगे बढ़ जाती हैं उनके पीछे कोने में अनुज और प्रीती थे, अनुज प्रीति के होंठों को चूम रहा था

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अनुज प्रीती के होंठों को बड़े प्यार और भूख से चूम रहा था। प्रीती लहंगे में बेहद सुंदर और सेक्सी लग रही थी — लहंगे का घेरा उसके गोल चूतड़ों को अच्छे से उभार रहा था, ब्लाउज उसके उभरे चूचों पर तना हुआ था। अनुज खुद को रोक नहीं पा रहा था, उसके हाथ प्रीती की कमर पर फिर रहे थे।
अनुज ने किस के बीच साँस लेते हुए फुसफुसाया, “बहुत सुंदर लग रही हो तुम आज... ये लहंगा तुम पर बहुत खिल रहा है। तुम्हारी ये कमर, ये होंठ ... सब कुछ नशीला लग रहा है।”
प्रीती शर्म से लाल होकर बोली, “तुम भी बहुत हैंडसम लग रहे हो...”
अनुज ने आगे होते हुए कहा, “इसी बात पर एक और किस हो जाए...”
प्रीती ने हल्के से उसे धकेलते हुए कहा, “नहीं... सब देख रहे हैं। मुझे शर्म आती है।”
अनुज ने हँसते हुए उसे और कस लिया, “अरे यहाँ सब अपने ही तो हैं... कैसी शर्म?”
प्रीती ने इधर-उधर देखते हुए फुसफुसाया, “अरे नहीं... ये खाना परोसने वाले, सर्वेंट्स सब खड़े हैं।”
इतने में ही नीलेश की गहरी, भावुक आवाज स्टेज से गूँजी। उन्होंने सभ्या का हाथ थामे हुए कहा,
“सभी को नमस्कार और हृदय से आभार... कि आप लोगों ने अपना कीमती समय हमारे एक बार कहने पर निकाला और हमें आतिथ्य करने का सौभाग्य दिया। मेरे जीवन का ये बहुत खास अवसर है। आज हमारी शादी को पूरे 25 वर्ष बीत गए।”
नीलेश ने सभ्या के हाथ को और मजबूती से दबाया, फिर उसकी आँखों में गहराई से देखते हुए बोले,
“वैसे तो ये लंबा समय है... पर ऐसे हमसफर का साथ हो तो कम ही लगता है। जब से तुम मेरे जीवन में आई हो, मेरा पूरा जीवन ही बदल गया। जब अपनों से दूर हुआ, तब तुम मेरे साथ थी। जब नए रिश्ते बने और नए लोग अपने बन गए, तब भी तुम मेरे साथ थी। सोचता हूँ कि बिना तुम्हारे जो कुछ थोड़ा बहुत आज हासिल कर पाया हूँ, वो भी नहीं कर पाता। धन्यवाद, आभार... ये सब दूसरों से कहा जाता है। तुमसे क्या कहना है, ये मैं नहीं जानता... और शायद जरूरत ही नहीं पड़ती। तुम सब बिना कहे समझ जाती हो। आज भी समझ जाओगी न?”
सभ्या की आँखें भर आईं। आँसुओं के साथ वो मुस्कुराई और नीलेश के सीने से लग गई। कर्मा, अनुज और बाकी सब भी भावुक होकर उन्हें देख रहे थे। जैसे ही सभ्या नीलेश के चौड़े सीने से चिपकी, पूरा हॉल तालियों और खुशी के शोर से गूँज उठा।
पूर्वी ने तेज आवाज में चिल्लाकर कहा, “मामा-मामी... आपने तो मुझे भी रुला दिया! अगर मेरे पति ने मुझे ऐसा प्यार नहीं किया तो मैं उन्हें घर से निकाल दूँगी!”
सब जोर से हँस पड़े। पंकज ने तुरंत मजाक उड़ाया, “मतलब तुम्हें पच्चीस साल झेलना पड़ेगा!”
इस पर और भी तेज ठहाके गूँजे। माहौल और भी गर्म और खुशनुमा हो गया।
शैलेश ने स्टेज से आवाज लगाई, “अरे भाई साहब... भाभी! अब केक काटो न...”
नीलेश और सभ्या दोनों केक के सामने गए। तालियों, सीटियों और खुशी के शोर के बीच दोनों ने एक साथ केक काटा।
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नीलेश ने एक टुकड़ा लिया उठाया और सभ्या को चखाया और प फिर सभ्या ने नीलेश को, इसके बाद कर्मा और अनुज ने भी अपने मां पापा को केक खिलाया, घर के बड़े यानी नाना भी आगे आए और बेटी और जमाई राजा को आशिर्वाद दिया और सभ्या ने उन्हें भी केक खिला दिया, उनके बाद धीरे धीरे बाकी लोग भी आते गए और कहीं केक खिलाने का तो कहीं मुंह पर लगाने का प्रोग्राम चलने लगा, लड़कियां आपस में बहुत मस्ती कर रही थीं, नीतू, किरन, अंजली, लाड़ो, पल्लवी और अब उनके साथ प्रीती और खुशी भी मिल गई थी सब साथ में फिल्मी गानों पर धमाल मचा रहीं थी, लड़कों का वही हाल था जो अक्सर होता है विचारे काम में इधर से उधर लगे हुए थे, किसी को खाने की व्यवस्था देखनी थी तो किसी को पीने की, स्टेज पर फोटो खिंचवाने का प्रोग्राम चल रहा था मेहमान एक एक करके आ रहे थे और सभ्या नीलेश को उपहार देते हुए उनके साथ फोटो करवा रहे थे, इसी बीच में राजन ने खोज कर कर्मा और अनुज को भी स्टेज पर चढ़ा दिया कि पूरे परिवार की साथ में एक फोटो करवा लो, दोनों अपने मां पापा के साथ खड़े हुए तो सभ्या ने अंजली को भी बुला लिया और बोली: ये भी परिवार में ही जुड़ने वाली है, अब अंजली भी अकेली नहीं गई उसने प्रीती का हाथ थामा और लेकर स्टेज पर चढ़ गई उस समय प्रीती और अनुज दोनों की हालत देखने वालीं थी दोनों के गाल शर्म से टमाटर की तरह लाल हो चले थे, अंजली ने अपने और सभ्या के बीच प्रीती को खड़ा किया तो सभ्या ने भी प्यार से अपना सिर अपनी होने वाली छोटी बहू के सिर से टिका दिया और फिर पूरे परिवार की कई फोटो ली गई।

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पिक्चरों के दौर के बाद बाहर खुले में खाने की व्यवस्था की गई थी जहां खाने का प्रोग्राम चला सबने स्वदिष्ट बने खाने का लुत्फ उठाया, और जी भर के खाया, खाते हुए बातों का और नाच गाने का प्रोग्राम साथ में चल रहा था, जो लोग आपस में इतना नहीं मिले थे उन्हें भी एक दूसरे को जानने का मौका मिल रहा था, कहीं राजपाल उदयवीर और सुजान सिंह की जोड़ी बन रही थी तो कहीं चरन सिंह, नाना, दीनू और महिपाल साथ थे, एक ओर नीलेश, प्रदीप(शशि के पति), शैलेश, राजन, जमुना, चेतन, साथ में थे वहीं विनीत, पंकज, रमन आदि कर्मा, जग्गू, सरजू, और पीयूष के साथ गप्पें लड़ा रहे थे,
इसी तरह औरतों भी आपस में घुल मिल रही थीं, सावित्री और मंजू ताई की खूब जम रही थी तो रज्जो, माधुरी और ममता की, वहीं थोड़ी शर्मीली रेनू को हमारी हंसमुख गुंजन और शालू भा रही थी तो बिमला शशि और सभ्या एक साथ बैठी थीं। लड़कियां तो सारी साथ में घूम ही रही थी, नाच रही थी, फोटो खींचा रहीं थी और अब खाना भी खा रही थी, हम उम्र बहुएं और ननदें भी एक साथ थी जैसे प्रेमा, रानी, रिमझिम, पूर्वी और चंचल।
खाने के बाद फिर से एक बार नाच गाने का प्रोग्राम हुआ और इस बार सबकी फरमाइश पर नीलेश और सभ्या को भी साथ में ठुमके लगाने ही पड़े, अंदर की ओर इन सब का नाच गाना चल रहा था वहीं सारे लड़के मिल कर हलवाई का सारा ताम झाम इकठ्ठा करवा रहा रहे थे और फिर कुछ ही देर में हलवाई और उसके लोग अपना सामान लेकर निकल गए थे, पहले से ही बड़ा सा फ्रिज और चूल्हा और ज़रूरी सामान कर्मा और उसकी सेना ने लाकर रखा था ताकि हलवाई के जाने के बाद भी मेहमानों को कोई तकलीफ न हो। बाहर से दरवाज़ा आदि लगा कर लड़के भी अंदर पहुंच गए थे और नाच गाने में शामिल हो गए, अब जब सिर्फ जान पहचान के लोग ही रह गए थे तो नाच गाने के साथ साथ छेड़ छाड़ भी बढ़ रही थी,

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नाच गाने के बाद थक-हार कर सब लोग बैठ गए। बड़ों के लिए कुर्सियाँ लगी थीं, छोटे लोग नीचे ही पसर गए। कोल्ड ड्रिंक के गिलास बाँटे गए। सब ठंडी-ठंडी कोलड्रिंक ड्रिंक पीते हुए फिर से बातें करने लगे।
इसी बीच किरण उठी। सबका ध्यान अपनी तरफ खींचते हुए उसने मुस्कुराकर कहा,
“सब लोगों को मेरा नमस्ते... प्यारी बुआ और प्यारे फूफाजी, तुम दोनों के लिए और आप सभी के लिए हम बच्चों की तरफ से एक छोटी-सी भेंट।”
नीलेश हँसते हुए बोले, “अरे भाई, अब कौन-सी भेंट रह गई?”
पल्ली भी उठते हुए बोली, “बस देखते जाओ ताऊजी...”
किरण, पल्ली, लाड़ो, नीतू और अंजली सब मिलकर स्टेज पर पहुँच गईं। उनके इशारे पर सागर ने गाना चला दिया। पाँचों ने एक धमाकेदार गाने पर नाच पेश किया। पूरा हॉल तालियों से गूँज उठा। खासकर सभ्या और नीलेश ने खूब तालियाँ बजाईं।
फिर तुरंत किरण और पल्ली अंदर चली गईं। अंजली सबका ध्यान बातों में लगाए रखी। कुछ देर बाद जब किरण वापस आई, तो वो सभ्या की ही साड़ी पहने हुई थी — बिल्कुल उन्हीं की तरह तैयार, बालों में फूल, मेकअप, सब कुछ। उसे देखकर सब हँसने लगे, तालियाँ बजने लगीं। सभ्या बलाएँ ले रही थी, शालू ने तो जाकर पैसे भी न्योछावर कर दिए।
दूसरी तरफ जब पल्ली नीलेश का कुर्ता-पजामा पहनकर स्टेज पर आई, तो पूरा हॉल तालियों और सीटियों से गूँज उठा। नीलेश सिर पकड़कर जोर-जोर से हँस रहे थे।
फिर गाना बज उठा...
“अरे ओ जुम्मा... मेरी जान-ए-मन... बाहर निकल... आज जुम्मा है... आज का वादा है...”



थक हार कर सब लोग बैठ गए, बढ़ों के लिए कुर्सियां रखी गई थी तो छोटे तो नीचे ही पसर गए, कोलड्रिंक के गिलास बांटे गए और सब ठंडी ठंडी कोलड्रिंक पीते हुए फिर से बातें करने लगे, इसी बीच किरन उठी और सबका ध्यान अपनी ओर करते हुए बोली: सब लोगों को मेरा नमस्ते, प्यारी बुआ और प्यारे फूफाजी तुम दोनों लोगों के लिए और आप सभी के लिए हम बच्चों की तरफ से एक छोटी सी भेंट।
नीलेश: अरे भाई अब कौन सी भेंट रह गई?
पल्ली: बस देखते जाओ ताऊजी।
पल्ली भी उठते हुए बोली, किरन भी उठ गई थी, इसके बाद किरन, पल्ली, लाड़ो नीतू और अंजली ये सब मिलकर स्टेज पर पहुंच गईं इनके इशारे पर सागर ने गाना चलाया और फिर सब ने एक गाने पर नाच पेश किया और सबने ताली बजा कर उनका खूब स्वागत किया, खासकर सभ्या और नीलेश ने, उसके बाद तुरंत ही किरन और पल्ली अंदर गईं तब तक अंजली सबका ध्यान बातों में लगाती रही और कुछ देर बाद ही किरन अपनी बुआ की साड़ी पहन कर उन्हीं की तरह तैयार हो कर स्टेज पर आई उसे देख सब हंस रहे थे ताली मार रहे थे, सभ्या बलाएं ले रही थी, वहीं शालू ने तो जाकर पैसे भी न्योछावर कर दिए, दूसरी ओर से जब पल्ली नीलेश का कुर्ता पजामा पहन कर स्टेज पर आई तो पूरा हाल तालियों सीटियों से गूंज उठा, नीलेश भी सिर पकड़ कर हंस रहे थे,
फिर गाना बजा,
अरे ओ जुम्मा मेरी जानेमन, बाहर निकल आज जुम्मा है आज का वादा है, पल्ली गाने के बोल पर पूरा अभिनय करते हुए नाचने लगी, वहीं किरन भी हीरोइन की तरह नहीं नहीं करते हुए शर्मा रही थी, गाना जब तक खत्म हुआ तब तक दोनों ने पूरा माहौल बांध दिया था और हर कोई खुशी से उनके लिए तालियां पीट रहा था, गाना खत्म होने पर सबने उनका खूब जोश बढ़ाया, शैलेश ने सभी लड़कियों को इक्कीस सौ- इक्कीस सौ का शगुन भी बांट दिया, किरन और पल्ली फिर निलेश और सभ्या को पकड़ कर स्टेज पर लाए और उन्हें खड़ा कर पल्ली बोली: वैसे इतने अच्छे गाने के बाद चुम्मा हो ही जाए क्या कहते हो आप लोग।
पूर्वी: अरे नेकी और पूछ पूछ? मामा हो जाओ शुरू।
नीलेश सबके सामने थोड़ा शर्माए और बोले: अरे क्या तुम लोग भी।
राजन: अरे भाई बच्चों का मन है तो हो ही जाए,
शशि: हां भैया भाभी हो जाए,
सबके कहने पर सभ्या और निलेश एक दूसरे की ओर मुड़े प्यार से एक दूसरे की आंखों में देखा सभ्या ने एक हाथ नीलेश के कंधे पर रख लिया तो नीलेश के हाथ सभ्या की कमर पर पहुंच गए और फिर धीरे से दोनों के होंठ मिले एक छोटे पर गरम चुंबन के लिए

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एक के बाद दूसरा... फिर तीसरा... चुंबन लंबे और गहरे होते गए। आसपास की आवाजें जैसे उनके लिए कम होती गईं। कुछ पलों बाद दोनों पूरे जोश से एक-दूसरे के होंठ चूस रहे थे। नीलेश की जीभ सभ्या के मुँह में घुस गई थी, हाथ बदन को सहला रहे थे। जब होंठ अलग हुए तो दोनों हाँफ रहे थे। उनके गर्म चुंबन को देख पूरे हॉल में गर्मी फैलने लगी।
सबने तालियाँ बजाकर उनका स्वागत किया। दोनों शर्माते हुए सबकी ओर देख रहे थे।
इसी बीच पूर्वी स्टेज पर चढ़ गई और बोली, “देखा सबने? दोनों में आग अभी भी उतनी ही है जितनी पच्चीस साल पहले थी!”
नीलेश हँसते हुए बोले, “अरे तू भी क्या बोल रही है?”
पूर्वी ने शरारत से आँख मारी, “अरे मामा शर्माना कैसा? यहाँ सब अपने ही हैं और सबकी एक जैसी सोच भी है। तो आप सबकी तरफ से और अपनी तरफ से मैं ये कहना चाहूँगी कि चुम्मा-चाटी तो बहुत देख ली... अब कुछ और देखना है।”
नीलेश ने हैरानी से पूछा, “क्या?”
पूर्वी ने सीधे, बेशर्मी से कहा, “चुदाई!”
सभ्या शर्माकर बोली, “धत्त तू भी ना...”
पूर्वी हँसते हुए बोली, “मामी मान जाओ... नहीं तो मेरी सेना तुम पर टूट पड़ेगी!”
इधर मर्द भी नीलेश को उकसाने लगे।
राजन चिल्लाया, “अरे सालगिरह पर नहीं चोदोगे तो कब चोदोगे भैया?”
पूर्वी ने लड़कियों की तरफ इशारा किया, “अरे लड़कियों देख क्या रही हो? शुरू हो जाओ!”
पूर्वी के कहते ही तीन-तीन लड़कियाँ दोनों पर टूट पड़ीं। कुछ ही पलों में नीलेश और सभ्या के सारे कपड़े उतर चुके थे। दोनों बिल्कुल नंगे स्टेज पर खड़े थे।
नीलेश का लंड पहले से ही कड़क हो चुका था, सीधा तना हुआ, मोटा और लंबा। सभ्या को लड़कियों ने उनके सामने घुटनों पर बैठा दिया। जिन मर्दों ने अब तक सभ्या को नंगा नहीं देखा था, वो उसे देखकर आहें भर रहे थे — उसके भारी-भारी दूधिया चूचे, चिकनी कमर, और साफ-सुथरी, गुलाबी चूत देखकर उनके मुँह खुले के खुले रह गए। औरतें नीलेश के तने हुए लंड को और सभ्या के कामुक नंगे बदन को घूर रही थीं।
पूर्वी और बाकी लड़कियाँ चिल्लाने लगीं, “चूसो... चूसो... चूसो!”
सबकी आवाज सुनकर सभ्या ने आगे बढ़कर नीलेश के मोटे लंड को हाथ में पकड़ लिया। उनकी आँखों में देखते हुए वो मुस्कुराई और बोली, “सालगिरह मुबारक हो, मेरे राजा...”
और ये कहते हुए उसने पूरा लंड अपने गरम, गीले मुंह में भर लिया और जोर-जोर से चूसने लगी।

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नीलेश के मुंह से आह निकल गई, “ओह आह्ह्ह्ह... मेरी रानी...”
सभ्या हाथ से लंड को सहलाते हुए, अपने मुंह का पूरा जादू चला रही थी — कभी सिर चूसती, कभी पूरी लंबाई गले तक ले जाती, कभी जीभ से लंड की नोक को चाटती। नीलेश की आँखें मजे से बंद हो गईं।
मर्दों के लंड कड़क हो गए, औरतें अपनी चूत में गर्म नमी महसूस करने लगीं। लेकिन सब चुपचाप देख रहे थे।
रिमझिम चिल्लाई, “मामा... पच्चीस साल बाद भी वही मजा है या नहीं मामी के मुंह में?”
नीलेश हाँफते हुए बोले, “ओह... ज़्यादा ही है बिटिया... बहुत ज़्यादा!”
राजन बोला, “अरे हमारी भौजी तो और गरम होती जा रही हैं!”
पूर्वी हँसते हुए बोली, “सही कहा... हमारी मामी तो शराब है, जितनी पुरानी उतनी नशीली!”
पंकज बोला, “हमारा भी मन कर रहा है शराब पीने का...”
पल्ली तुरंत शरारत से बोली, “आओ जीजा... नीचे टंकी से मुंह लगाओ, अभी पिला देती हूँ!”
सब जोर से हँस पड़े।
पंकज ने पल्ली को घूरते हुए कहा, “बिल्कुल पीएंगे साली साहिबा... तुम्हारी शराब भी पीएंगे। तुम भी कम नशीली नहीं लगती।”
किरण बोली, “अरे जीजा... सालियाँ तो इतनी नशीली हैं कि पीकर सब भूल जाओगे!”
पूर्वी ने हँसते हुए कहा, “अभी बताती हूँ तुम्हें... चुपचाप स्टेज पर देखो और कुछ सीखो!”
पंकज हँसते हुए स्टेज की ओर देखने लगा।
दृश्य अब बदल चुका था। नीलेश ने सभ्या को स्टेज पर रखी कुर्सी पर लिटा दिया, उसकी टांगें फैला दीं और अपना मोटा लंड पकड़कर उसकी चूत पर थपथपाने लगे।
नीलेश ने गहरी नजरों से पूछा, “घुसा दूँ मेरी रानी?”
सभ्या ने अपने होंठ काटते हुए कामुक आवाज में कहा, “घुसा दो ना मेरे राजा...”
नीलेश ने सबकी तरफ देखा और जोर से पूछा, “घुसा दूँ?”
सबने गर्मजोशी से “हाँ... हाँ...” करते हुए शोर मचाया।
नीलेश ने एक गहरा, जोरदार धक्का लगाया और अपना पूरा लंड सभ्या की चूत में जड़ तक घुसा दिया, और दोनों की एक साथ गहरी आह निकल गई।
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सब लोग खुश होकर शोर मचाने लगे, उनका जोश बढ़ाने लगे।
नीलेश ने सभ्या की आँखों में देखा और बोले, “अभी भी वही गर्मी... वही कसावट... वही आनंद है तुम्हारी चूत में जो पच्चीस बरस पहले था।”
सभ्या हाँफते हुए बोली, “ओह जी... तुम्हारा लोड़ा जरूर पहले से भी बड़ा हो गया है... तभी तो ये चूत कसी हुई लग रही है।”
नीलेश मुस्कुराए, “तुम्हारा बदन सामने पाकर ये अपने आप बड़ा हो जाता है।”
वे आगे झुके, सभ्या के होंठ चूसने लगे और साथ ही धक्के भी लगाते रहे।
जब चुंबन टूटा तो सभ्या मुस्कुराकर बोली, “ऐसा लग रहा है जैसा पहली रात को महसूस हुआ था... आह... सुहागरात पर।”
नीलेश बोले, “आह... तो ये हमारी पहली रात ही तो है रानी... आने वाले और पच्चीस बरसों की पहली रात... या कहूँ सुहागरात।”
सभ्या हाँफते हुए बोली, “आह... आह... पर इस बार सुहागरात पर दर्शक भी हैं।”
नीलेश ने जोर से धक्का लगाते हुए कहा, “हाँ... पहली बार हम दोनों ही थे... इस बार इतने हैं... अगली बार और भी होंगे।”
सभ्या ने हैरानी से पूछा, “अगली बार और?”
नीलेश हँसते हुए बोले, “और क्या... इस बार बच्चे देख रहे हैं... अगली बार नाती-पोते देखेंगे!”
सभ्या शर्माकर बोली, “अगली बार तक हम लोग बुड्ढे हो चुके होंगे।”
नीलेश ने तेज धक्का लगाते हुए कहा, “तो क्या हुआ... बुढ़ापे में चुदाई का अलग ही मजा होगा।”
शालू चिल्लाई, “अरे प्रेमियों की क्या बातें हो रही हैं... हमें भी सुनाई देनी चाहिए!”
पल्ली ने शरारत से कहा, “और ताऊजी-ताईजी... बहुत हुआ प्यार से धीमे-धीमे... मेहमान आए हैं, इन्हें भी दिखाओ चोदमपुर की चुदाई क्या होती है!”
सभ्या हाँफते हुए बोली, “सुना जी... गाँव की इज्जत का सवाल है... मुझे ऊपर आने दो।”
नीलेश ने लंड निकाला, कुर्सी पर बैठ गए और बोले, “आ जाओ...”
सभ्या तुरंत ऊपर चढ़ गई, पति का मोटा लंड अपनी चूत में लिया और जोर-जोर से उछलने लगी। शुरू से ही कोई धीमे-धीमे नहीं — वो अपनी चूत को जड़ तक पति के लंड पर मार रही थी, फिर ऊपर उठ जाती। उसके नंगे बदन और उछलती-नाचती चूचियों को देखकर मर्दों के मुंह में पानी आ रहा था, लंड में तनाव बढ़ रहा था।

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इस बार कोई धीमे धीमे नहीं शुरू से ही वो अपनी चूत को जड़ तक पति के लंड पर मारती है और फिर ऊपर जाती है, उसके नंगे बदन और उछलती नाचती चूचियों को देख कर मर्दों के मुंह में पानीं आने लगता है तो लंड में तनाव।
पल्ली: आह आह ये हुई न बात आह ताऊजी, ताई जी ऐसे ही मज़ा आ रहा है,
पल्ली अपनी चूत को कपड़ों के ऊपर से ही रगड़ते हुए कहती है।
अंजली: बहुत बढ़िया मां पापा ऐसे ही बहुत अच्छे लग रहे हो,
अंजली भी गरम होते हुए उनका हौसला बढ़ाती है, वैसे चुदाई के लिए उन्हें कहां किसी तरह की प्रेरणा की ज़रूरत थी वो दोनों ही इस मामले में काफी खुले विचारों वाले थे,
निलेश भी सभ्या की कमर थामे नीचे से लंड उसकी चूत में ठोंक रहे थे।
अनुज और कर्मा दोनों ही उत्तेजित भी महसूस कर रहे थे और कहीं न कहीं भावुक भी, जो भी नीलेश और सभ्या से जुड़ा हुआ था उन सब के लिए ही ये खास और भावुक पल था,
कच्ची और गरम उत्तेजना की कढ़ाई में कामुकता और भावना का तड़का और लग जाए तो चुदाई की दाल बहुत स्वादिष्ट बनती है, और उसी का लुत्फ़ आज सब उठा रहे थे, चखने वाले भी और सूंघने वाले भी।
और उसी भावनात्मक चुदाई का असर कहो या इतने लोगों के सामने प्रदर्शन के कारण सभ्या अपनी पूरी जी जान लगा कर अपने पति के लंड पर उछल रही थी और फिर एक पाप ऐसा आया कि वो तेजी से चिल्लाते हुए ढीली पड़ गई, उसका बदन मचलते हुए शांत हो गया,
उसे शांत होते देख नीलेश ने वही किया जो हर पति का कर्तव्य होता है जब उसकी पत्नी ढीला महसूस करे, नीलेश ने उसे गोद में उठाया और अपने ऊपर बैठा लिया और उसके चूतड़ों को थाम कर उसे अपने ऊपर उछालने लगे,
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दर्शकों में गर्मी अब खुलकर दिखने लगी थी। कोई अपनी चूचियों को मसल रहा था, कोई चूत रगड़ रहा था, कोई लंड सहला रहा था, कोई किसी के बदन को छू रहा था।
पल्ली आगे बढ़कर पंकज जीजा की गोद में बैठ गई। पंकज उसकी मोटी चूचियों को मसलते हुए उसकी गर्दन चूम रहे थे। पल्ली अपने चूतड़ उनके कड़क लंड पर घुमा रही थी।
पल्ली ने मज़ाक करते हुए कहा, “आहिस्ते जीजा... साली की चूची हैं, तुम्हारी रांड बहन की नहीं!”
पंकज मुस्कुराते हुए उसे चूमने लगा।
कर्मा और अनुज अपनी-अपनी भावी हमसफर से चिपके हुए माँ-पापा की चुदाई देख रहे थे। अंजली को कर्मा का कड़ा लंड अपने चूतड़ों पर चुभता महसूस हो रहा था। अनुज ने तो प्रीती के ब्लाउज में हाथ घुसा दिया था।
पर सबकी नजर स्टेज पर थी। नीलेश अब सभ्या को कुर्सी के सहारे झुका रहे थे। सभ्या ने अपने चूतड़ उभारकर पति और सभी दर्शकों के लिए परोस दिए। नीलेश ने लंड पकड़ा, अपनी पत्नी के गरम, कसे हुए गांड के छेद पर रखा और एक जोरदार धक्का लगाकर अंदर सरका दिया। सभ्या की मखमली गांड चीरती हुई लंड जड़ तक समा गया।
दर्शकों ने गर्मजोशी से तालियाँ और सीटियाँ बजाईं।
नीलेश ने उतनी ही गर्मी से सभ्या की गांड मारना शुरू कर दिया।

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सभ्या चिल्लाई, “आह... आह... आह जी... ऐसे ही मारो... अपनी रंडी पत्नी की गांड... आह... मार-मार के फाड़ दो... ओह... ऐसे ही!”
नीलेश कस-कस के धक्के लगाते हुए बोले, “आह... साली कुतिया... आह... ले... क्या गरम गांड है... आह... आह... आह!”
महिपाल ने रज्जो को पकड़कर उसका ब्लाउज खोल दिया और चूचियों को पागलों की तरह चूसने लगा। चेतन गुंजन मामी के बदन को सहलाते हुए उनके होंठ चूस रहा था। विनीत किरण को खींचकर उसके बदन का मजा ले रहा था।
दीनू ने शशि की मोटी चूचियों के बीच मुंह घुसा रखा था। सुजान सिंह रानी को गोद में बिठाए हुए थे। प्रदीप शालू मौसी की चूचियों के दीवाने हो रहे थे।
सागर अपनी माँ का बदला लेते हुए चेतन की मां माधुरी की नाभि चाट रहा था। सरजू, कर्मा की होने वाली सास सविता को सामने बिठाकर होंठ चूस रहा था। पीयूष रिमझिम के रसीले होंठ चूस रहा था। बिरजू पूर्वी के साथ था। जमुना मामा ने रेनू को अकेले में घुसा रखा था। प्रकाश प्रेमा भाभी के साथ थे। नाना बिमला को अपना अनुभव दिखा रहे थे। राजन चाचा सावित्री को “जीजी-जीजी” कहकर मसल रहे थे। शैलेश मौसा चंचल की मोटी चूचियों को ब्लाउज से बाहर निकाल चुका था। रमन ममता चाची को पकड़ चुका था। चरन सिंह की सेवा नीतू और लाड़ो दोनों बहनें कर रही थीं। खुशी कर्मा और अंजली के पास पहुँचकर दोनों के होंठ बारी-बारी चूस रही थी।
सबका ध्यान स्टेज पर भी था, जहाँ चुदाई अब तूफानी हो चुकी थी। नीलेश कुर्सी से आगे अपनी पीठ पर लेट गए थे और सभ्या उनके ऊपर। नीचे से नीलेश का लंड सभ्या की गांड को भेद रहा था।

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सभ्या अपनी मोटी, गोल चूतड़ों को नीलेश की गोद में पटक-पटक कर मार रही थी। नीलेश लेटे-लेटे नीचे से जोर-जोर से अपनी कमर उठाकर लंड ठोक रहे थे। सभ्या की गांड पूरी तरह खुल चुकी थी, नीलेश का मोटा, गाढ़ा लंड जड़ तक अंदर-बाहर हो रहा था। हर धक्के पर सभ्या के चूतड़ लहरा रहे थे, उसके भारी-भारी चूचे ऊपर-नीचे उछल रहे थे और पूरा हॉल उनकी चुदाई की आवाज़ से गूँज रहा था — “पच... पच... पच...”
“आह... आह... मेरे राजा... ऐसे ही... तेज... तेज मारो मेरी गांड... आह... फाड़ दो आज... ओह...!” सभ्या हाँफते हुए चिल्लाई, उसके बाल बिखर गए थे, पसीना चमक रहा था।
नीलेश ने उसके चूतड़ों को दोनों हाथों से कसकर पकड़ लिया और और तेज धक्के लगाने लगे, “आह... साली कुतिया... ले... ले... तेरी ये गरम मखमली गांड... आह... मेरा लंड निगल रही है... 25 साल बाद भी कितनी कसी हुई है रे... ओह...!”
कुछ देर तक यही जोरदार चुदाई चलती रही। सभ्या ऊपर-नीचे उछल रही थी, नीलेश नीचे से ठोक रहे थे, दोनों की साँसें तेज़ हो गई थीं।

हॉल में माहौल अब पूरी तरह से कामुक हो चुका था, लेकिन कोई भी चुदाई नहीं कर रहा था। बस छेड़छाड़, चूमा-चाटी और चूचियों को मसलने का मज़ा चल रहा था।
पंकज ने पल्ली को अपनी गोद में बिठा रखा था पर अब पल्ली ने अपना मुंह पंकज की ओर कर रखा था और दोनों के होंठ मिले हुए थे। पंकज की दोनों हथेलियाँ पल्ली के भरे-भरे चूतड़ों पर थीं, वो जोर-जोर से मसल रहे थे। पल्ली अपनी चूत उनके कड़क लंड पर रगड़ रही थी, कपड़े के ऊपर से ही। “

कर्मा अंजली से चिपका हुआ था। उसका एक हाथ अंजली के ब्लाउज़ के अंदर घुसा हुआ था, वो उसके नरम चूचों को दबा-दबा कर सहला रहा था। अंजली उसकी गर्दन चूस रही थी और अपनी गांड उसके लंड पर घुमा रही थी। “... आह... ऐसे ही दबाओ... मेरे चूचे... ओह...
कर्मा: देख लो आह हमें भी ऐसे ही मनानी है अपनी 25वीं एनिवर्सरी।
अंजली: देखना क्या है, बिल्कुल मनायेंगे मैने तो सोच भी लिया है मैं क्या पहनूंगी।
अंजली हंसते हुए कहती है तो कर्मा भी उसके होंठ चूसने लगता है।
अनुज ने प्रीती को दीवार से सटा दिया था। उसका मुँह प्रीती के ब्लाउज में घुसा हुआ था, वो उसके एक चूचे को चूस रहा था और दूसरा हाथ से मसल रहा था। प्रीती की आँखें बंद थीं, वो कराह रही थी, “आह... अनुज... काट मत... चूस... चूस... ओह...”
महिपाल रज्जो की चूचियों को दोनों हाथों से पकड़े हुए था, उन्हें जोर से दबाता और चूमता जा रहा था। रज्जो उसकी पीठ पर नाखून गड़ाए हुए थी। चेतन गुंजन को पीछे से पकड़े हुए था, उसके चूचों को सहलाते और उसके होंठों को चूसता हुआ। विनीत किरण की कमर पर हाथ फेर रहा था और उसके चूचों को ब्लाउज के ऊपर से मसल रहा था।
पूरा हॉल चूमने, चाटने, दबाने और कराहने की आवाज़ों से भर गया था। वहीं स्टेज पर भी दृश्य बदल चुका था, सभ्या अब नीलेश की ओर पीठ करके बैठी थी, नीलेश का लंड अब भी उसकी गांड में अंदर बाहर हो रहा था, उसके घुटने दोनों तरफ फैले हुए थे, चूत पूरी तरह खुली हुई दिख रही थी, और नीलेश का मोटा लंड उसकी गांड में जड़ तक घुसा हुआ था। सभ्या ने अपने आनंद को और बढ़ाने के लिए अपनी उंगलियां भी चूत में घुसा दी थीं

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“आह... जी... ऐसे... देखो सबको...तुम्हारी आह पत्नी को आह देख रहे हैं आह मेरी आह खुली चूत ओह...!” सभ्या कामुक आवाज़ में बोली।
नीलेश ने उसके चूतड़ों को दोनों हाथों से थाम लिया और नीचे से जोर-जोर से लंड ठोकना शुरू कर दिया। सभ्या की गांड अब पूरी तरह खुली हुई थी, लंड हर धक्के पर जड़ तक घुस रहा था और बाहर निकल रहा था। उसके चूचे तेज़ी से उछल रहे थे, पसीना चमक रहा था।
“आह... आह... मेरे राजा... फाड़ दो... पूरी गांड... आह... देखो सब... आह मेरी गांड चुद रही है... ओह...!” सभ्या चिल्लाई, उसकी आवाज़ पूरे हॉल में गूँज रही थी।
नीलेश भी हाँफते हुए बोले, “आह... रानी... कितनी खुली है तेरी गांड... आह... ले... ले... मेरा लंड निगल... ओह... 25 साल की की सारी गर्मी.. आज मैं तेरी गांड भर दूँगा... आह...!”
गति वही तेज़ थी। सभ्या अपनी गांड को नीचे पटक-पटक कर मार रही थी, नीलेश नीचे से ठोक रहे थे। दोनों की साँसें एक हो गई थीं। हॉल में सबकी नजरें स्टेज पर थीं। छेड़छाड़ तो चल ही रही थी, लेकिन सबकी आँखें सभ्या-नीलेश की इस खुली चुदाई पर टिकी हुई थीं।
फिर नीलेश का लंड और भी फूल गया। उन्होंने सभ्या के चूतड़ों को कस लिया और जोर-जोर से धक्के लगाने लगे।
“आह... रानी... मैं झड़ने वाला हूँ... तेरी गांड में... आह... ले... ले... पूरा... ओह...!”
सभ्या भी अपनी चूत में उंगलियां चलाते हुए चिल्लाई, “आह... जी... झड़ो... मेरी गांड में भर दो... आह... मैं भी... आह... आ रही हूँ... ओह... राजा...!”
दोनों एक साथ चरम पर पहुँच गए। नीलेश का लंड सभ्या की गांड के अंदर फड़क उठा और गर्म-गर्म मोटी-मोटी धारें छोड़ने लगा। सभ्या का बदन मचल उठा, उसकी चूत से पानी की फुहार निकली और वो भी जोर से झड़ गई। दोनों की चीखें पूरे हॉल में गूँज उठीं — “आह्ह्ह्ह... ओह्ह्ह्ह...!”
नीलेश की सारी मलाई सभ्या की गांड में भर गई। सभ्या ढीली पड़कर उनके सीने पर गिर गई, दोनों हाँफ रहे थे, बदन पसीने से तर।
हॉल में तालियाँ और सीटियाँ बजने लगीं। सबकी आँखों में अभी भी गर्मी थी। सब जानते थे कि रात अभी बाकी थी।


जारी रहेगी।
Gajab update maza agya sabhya or nilesh ek dum open minded pati patni chae jo bhi ho dono ek dusre se itni mohobat karte hai ye dekh maza aya
 
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किरन ने सभ्या की कमर पर हाथ फेरते हुए शरारत से कहा, “हां बुआ, आज तुम इतनी सुंदर लगोगी की फूफाजी देखते ही शुरू हो जाएंगे।
सभ्या शर्म से लाल हो गई, लेकिन खुश भी थी। “अरे पागल लड़कियां, तुम लोगों को भी न जाने क्या हो गया है।
सब औरतें तैयार हो चुकी थीं, लेकिन उन्हें अभी भी सिर्फ इतना पता था कि “शाम को कुछ खास प्रोग्राम है”।


अपडेट 263

तैयार होकर सारी औरतों को दो गाड़ियों में बिठाकर, लड़कियों को मोटरसाइकिलों पर चढ़ाकर पूरा काफिला नीलेश के अब तक छिपे हुए आलीशान फार्म हाउस की ओर रवाना हो गया।
जब सभ्या गाड़ी से उतरी, तो उसके साथ थीं शालू, गुंजन, ममता, रज्जो और मंजू। ममता और पल्ली तो पहले भी यहाँ आ चुकी थीं, लेकिन आज का माहौल कुछ और ही था। चारों तरफ हरे-भरे पेड़ों से घिरा हुआ ये विशाल फार्म हाउस आज दुल्हन की तरह सजाया गया था। रोशनी की मालाएँ, फूलों के गुच्छे, और हल्की-हल्की खुशबू... सभ्या दरवाजे पर खड़ी रह गई। उसकी आँखें हैरानी और खुशी से फैल गईं।
नीलेश और बाकी सारे मर्द पहले से ही वहाँ खड़े थे। सभ्या के चेहरे पर उभरती हुई वो निश्छल खुशी देखकर उनके चेहरे गर्व से फूल गए थे।
नीलेश धीरे से आगे बढ़ा, सभ्या का नरम हाथ अपने बड़े-बड़े हाथ में ले लिया और गहरी नजरों से उसे देखते हुए बोला, “ये है तुम्हारा तोहफा, ... कैसा लगा?”
सभ्या अभी भी अपनी भावनाओं को संभाल नहीं पा रही थी। उसकी आवाज़ थोड़ी काँप रही थी, “बहुत... बहुत सुंदर है। बिल्कुल महल जैसा लग रहा है।”
नीलेश मुस्कुराया, उसकी आँखों में शैतानी चमक थी, “तो फिर इस महल की रानी... अंदर तो चलो।”
सभ्या शर्मीली मुस्कान के साथ नीलेश का हाथ मजबूती से पकड़कर आगे बढ़ गई। उसके पीछे-पीछे सारी औरतें और मर्द भी अंदर घुस गए। हर कदम पर फार्म हाउस की भव्यता उन्हें और भी हैरान कर रही थी।

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अंदर पहुँचते ही सबके मुँह खुशी से खुले के खुले रह गए। पूरा हॉल दिवाली की तरह जगमगा रहा था। दीवारें फूलों और लाइटों से सजी हुईं, हवा में हल्की मीठी खुशबू, और हॉल के एक तरफ खूबसूरती से सजाया गया स्टेज... जिस पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा था — “Happy Anniversary”।
सभ्या और बाकी औरतें तो ये देखकर खुशी से पागल हो गईं। उनकी आँखें चमक रही थीं, होंठों पर अनकही मुस्कान थी।
फिर मर्दों ने बाकी सब औरतों को आराम से बैठा दिया। सभ्या को धीरे-धीरे स्टेज पर ले जाकर खड़ा कर दिया गया। नीलेश भी उसके ठीक बगल में आकर खड़ा हो गया। उसने सभ्या की ओर मुड़कर गहरी, प्यार भरी आवाज़ में कहा,
“सालगिरह की ढेर सारी शुभकामनाएँ, मेरी रानी।”
सभ्या की आँखें नम हो आईं। वो मुस्कुराते हुए बोली, “तुम्हें भी जी... आज तुमने मुझे सच में बहुत खुश कर दिया। ये तोहफा... सबसे सुंदर तोहफा था।”
नीलेश की आँखों में फिर वो शरारती चमक लौट आई। उसने धीरे से सभ्या के कान के पास मुँह ले जाकर फुसफुसाया,
“अभी तोहफा पूरा कहाँ हुआ है, रानी... अभी तो बस शुरुआत है।”
सभ्या ने हैरानी से उसकी ओर देखा, “मतलब?”
नीलेश मुस्कुराया और जोर से आवाज़ लगाई, “कर्मा... ओह कर्मा! लेके आ!”
कर्मा बगल वाले दरवाजे से बाहर निकला। कुछ पलों बाद जब वो वापस अंदर आया, तो उसके चेहरे पर चौड़ी मुस्कान थी। वो अपनी माँ सभ्या की ओर देखकर मुस्कुराया और एक तरफ खड़ा हो गया।
और फिर... उसी दरवाजे से अंदर आई — शशि।
नीलेश की वो खूबसूरत, मादक, और बेहद कामुक बहन। जैसे ही शशि ने अपनी भाभी सभ्या की ओर देखा, उसके होंठों पर शरारती हँसी खिल गई। सभ्या का मुँह भी खुशी से एकदम खुल गया।
शशि फुर्ती से भागकर स्टेज पर चढ़ गई और सभ्या की ओर लपकी। दोनों — एक तरफ मादक कामुक बदन वाली ननद, दूसरी तरफ अपनी भाभी — एक दूसरे से इतने जोर से गले मिलीं कि उनके मुलायम, भरे-भरे जिस्म एक-दूसरे से सट गए।

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सभ्या: तू कब से आई हुई है यहां?
शशि: हो गया भाभी घंटा भर।
सभ्या: लो घंटा भर हो गया और अब मिल रही है मुझसे?
शशि: अरे पहले मिलती तो तुम्हारे सुंदर चेहरे पर ऐसे हैरानी और खुशी कैसे देखती।
शशि ने उसके गालों को छूते हुए कहा,
सभ्या: बच्चे कहां हैं?
इतने में पीछे से आवाज आई: हम यहां हैं मामी, ये आवाज पूर्व की थी जो उनकी ओर चलती आ रही थी उसके साथ विनीत, उसके पापा, ताऊजी और ताई जी थे, पूर्वी भी आकर उसके गले लग जाती है
पूर्वी: हैप्पी एनिवर्सरी मेरी सेक्सी मामी।
सभ्या: आ गई मेरी प्यारी बिटिया,
पूर्वी: तुम्हारी पार्टी हो हम न आएं मेरी जान ऐसे कैसे हो सकता है?
सभ्या: पागल कहीं की? अच्छा तेरे ससुराल वाले वो लोग कहां है? और पंकज?
पूर्वी: अरे उनका क्या काम यहां? उन्हें छोड़ आई।
पूर्वी हंसते हुए बोली,
सभ्या: हाय दैय्या देखो तो जीजी कैसे बोल रही है,
सभ्या सावित्री के गले लगते हुए बोलती है
सावित्री: अब हम का कहें बन्नो, तू बड़ी सुंदर लग रही है आजा।
सभ्या: तुम भी जीजी।
विनीत: मेरी प्यारी मामी,
विनीत भी गले लगते हुए कहता है,
सभ्या: अब तो मेरा प्यारा भांजा दूल्हा बनने वाला है,
विनीत: हां दुल्हन तुम बनो तो।
पूर्वी: हां मामी कर लो ब्याह फिर से दूल्हा ये रहा,
सभ्या: अपना दूल्हा तो लाई नहीं तू मेरा ब्याह करवा रही है
पूर्वी: अरे लाई हूं मामी लो नाम लिया और हाजिर।
पंकज: हैप्पी एनिवर्सरी मामी जी, ये तो हमें छोड़ आई थी पर हम फिर भी चले आए,
पंकज गिफ्ट का एक बड़ा सा डिब्बा सभ्या की ओर देते हुए कहता है, पंकज के साथ उसकी मां रेनू, बहन प्रीती और पिता प्रकाश भी थे,
सभ्या: अरे देखो तो बदमाश को कैसे मजाक करती है,
सभ्या पंकज से मिलती है और फिर रेनू भी उसके गले लगती है और कहती है: मुबारक हो बहन जी।
पूर्वी: अरे थोड़ा कस के मिलो समधन बनने वाली हो दोनों।
इस पर सब हंसने लगते हैं वहीं प्रीती पीछे खड़े खड़े शर्मा रही होती है,
रेणु: हां अच्छे से ही मिल रही हूं और समधन तो पहले से ही हैं।
सभ्या: ये भी बात बिल्कुल सही कही बहन जी।
प्रकाश: अरे समधी के लिए गले मिलने का कोई मौका नहीं है क्या?
इस पर सब हंसते हैं और रेणु कहती है: तुम जाओ पीछे खड़े हैं समधी जी उनसे मिलो।
इसी तरह हंसी मज़ाक में फिर बाकी सब भी सभ्या से मिलते हैं, उनके बाद रिमझिम और उसके ससुराल वाले मिलते हैं, सविता रानी महिपाल, पीयूष भी पहले ही आ चुके थे, अंजली भी लड़कियों के साथ आ गई थी। सबसे मेल मिलाप के बाद चंचल जो कि एक पार्टी वियर साड़ी में थी और वो साड़ी उसके भरे और कामुक बदन पर खूब जंच रही थी वो पेशाब करने के लिए जा रही थी कि तभी पीछे से कोई उसे बाहों में भर लेता है वो चौंक कर देखती है और कहती है: अरे तूने तो मुझे डरा ही दिया।
कर्मा: कैसी हो दीदी?
कर्मा उसके पेट को सहलाते हुए कहता है।

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चंचल ने कर्मा की मजबूत बाहों में थोड़ा सिकुड़ते हुए, लेकिन मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “अच्छी हूँ तू... तू कैसा है मेरा प्यारा भाई?”

कर्मा ने अपनी हथेली को चंचल के नाभि के नीचे थोड़ा और नीचे सरकाते हुए, गर्म साँस उसके कान में डालते हुए बोला, “मैं भी अच्छा हूँ दीदी... लेकिन हाय! आज तुम कितनी मस्त, कितनी रसीली लग रही हो। मन कर रहा है यहीं खा जाऊँ... इन भरे-भरे चूचों को, इस चिकनी कमर को, और नीचे जो कुछ छिपा है उसे चूस-चूस कर...”

चंचल शर्म से लाल हो गई, लेकिन उसकी आँखों में भी शरारत झलक रही थी। उसने हल्के से कर्मा की छाती पर थपकी मारते हुए कहा, “धत्त पागल कहीं का! पार्टी पर ध्यान दे न... पहले मुझे सुसु जाने दे। बहुत तेज लगी है। फिर भले ही खा लेना... जितना मन करे।

कर्मा ने मजबूर होकर अपनी पकड़ ढीली की और मुस्कुराते हुए बोला, “अच्छा जाओ... जल्दी आना। वैसे तुम्हारी देवरानी किधर है?”

चंचल ने पीछे मुड़कर इशारा किया, “यहीं होगी कहीं... पूर्वी के साथ थी अभी।”

ये कहकर चंचल अपनी साड़ी की पल्लू ठीक करती हुई, कमर लचकाती हुई पेशाब करने चली गई। उसके पीछे-पीछे उसकी गोल-गोल गांड हिल रही थी, जो देखकर कर्मा का लंड एक बार फिर से तन गया।

कर्मा ने गहरी साँस ली और आगे बढ़ गया। जिनसे अभी तक नहीं मिला था, उन सबसे मिलने लगा। सबसे पहले चंचल के माँ-बाप उदयवीर और बिमला से मिला। उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया और आगे बढ़ गया।

फिर उसकी नजर पड़ी अपनी होने वाली भाभी खुशी पर, जो विनीत से बातें कर रही थी। खुशी आज बेहद सुंदर लग रही थी — उसकी साड़ी उसके नई-नई दुल्हनिया वाले बदन को ऐसे लपेटे हुए थी कि उसके उभरे हुए स्तन और पतली कमर साफ नजर आ रहे थे।

कर्मा सीधा उनके पास पहुँचा, विनीत को हल्के से धकेलते हुए बोला, “अरे यार, छोड़ मत देना तू बिल्कुल भी... एक पल के लिए भी नहीं!”

फिर वो खुशी को जोर से अपनी बाहों में भर लिया। खुशी का नरम, गर्म बदन उसके सीने से सट गया। उसके मोटे स्तन दब गए और एक मीठी रगड़ पैदा हुई।

खुशी ने शर्माते हुए लेकिन खुश होकर पूछा, “कैसे हो भैया?”

कर्मा ने उसे और कसकर जकड़ते हुए उसके कान में फुसफुसाया, “अच्छा हूँ भाभी... अब तो और भी अच्छा हो गया। वैसे ये विनीत तुमसे यूँ ही चिपका रहता है क्या दिन-रात?” कर्मा ने अलग होते हुए कहा,

विनीत हँसते हुए बोला, “अच्छा! जैसे तू अपनी वाली को छोड़ देता है। सब पता है मुझे तेरी और अंजली की कहानी...

खुशी ने शरमाकर हँसते हुए कहा, “अरे हाँ भैया, मुझे भी मिलाओ अंजली से... मैंने सुना है वो बहुत प्यारी और... बहुत सुंदर है।”

कर्मा मुस्कुराया। उसने तुरंत अंजली को आवाज़ दी, “अंजली... इधर आ ना!”

अंजली पास आई तो कर्मा ने दोनों को एक-दूसरे से मिलवाया। अंजली और खुशी दोनों एक-दूसरे को गले लगाकर मिलीं। दोनों की साड़ियाँ और बदन एक-दूसरे से सटे और दोनों ही बातें करने लगीं।

थोड़ी दूर ही पूर्वी और रिमझिम दोनों बहनें खड़ी थीं। दोनों नई-नई साड़ियों में लिपटी हुईं, बेहद खुश और शरारती मूड में आपस में मजाक कर रही थीं।

पूर्वी की साड़ी तो ऐसे पहनी हुई थी कि उसकी गहरी नाभि साफ दिख रही थी, ब्लाउज इतना टाइट कि उसके भरे-भरे, दूधिया स्तन लगभग बाहर झाँक रहे थे। रिमझिम की साड़ी भी कम नहीं थी — उसकी मोटी, गोल गांड और पतली कमर का मेल देखकर किसी का भी मन ललचा जाए। दोनों बहनों के कामुक बदन साड़ी के कपड़े में इस कदर लिपटे हुए थे कि हर हिलने-डुलने पर उनके अंगों की लचक साफ नजर आ रही थी।

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पूर्वी ने रिमझिम के सामने खड़े होकर उसकी भरी-भरी चूचियों को घूरते हुए शरारती मुस्कान के साथ कहा, “अरे यार... तेरे ये गुब्बारे हर बार बढ़ते कैसे जा रहे हैं? जब देखती हूँ, और भी बड़े, और भी भारी मिलते हैं।
पूर्वी ने अपनी उंगली से रिमझिम के चूचों की तरफ इशारा करते हुए हल्के से दबा भी दिया।
रिमझिम ने झेंपते हुए लेकिन हँसते हुए पूर्वी के अपने से भारी खरबूजे जैसे चूचों पर नजर डाली और बोली, “कुछ भी मत बोल! तेरे जितने बड़े तो मेरे हो ही नहीं सकते न... खुद तो दो-दो खरबूजे लिए घूमती है! चलते-फिरते इन्हें संभालना भी मुश्किल हो जाता होगा।”
पूर्वी ने कमर लचकाते हुए अपनी गांड को थोड़ा आगे निकालकर कहा, “तेरे चूतड़ भी तो तरबूज जैसे हैं यार! अभी देख कैसे फुदक-फुदक रहे हैं... ”
रिमझिम ने पूर्वी की कमर पर हाथ रखकर उसे अपने करीब खींच लिया, “हाय... ये नौकझोंक तेरे साथ कितनी अच्छी लगती है। मजा आ जाता है।”
पूर्वी ने पुरानी यादों में खोते हुए कहा, “अभी अच्छी लगती है... बचपन में कितना लड़ते थे हम दोनों।”
रिमझिम ने हँसते हुए पूर्वी की नाक पकड़ ली, “हाँ वो तो है... तू थी भी बड़ी कुतिया बचपन में।”
पूर्वी ने मुंह बनाते हुए नाटकीय अंदाज में बोला, “हो... देखो तो कैसे बोल रही है! मैं कुतिया थी?”
रिमझिम ने तुरंत प्यार से उसके गाल सहलाए, “अच्छा-अच्छा, मजाक में बोला... मुंह मत बना मेरी जान।”
पूर्वी ने बेशर्मी से आँख मारी और बोली, “मैं अभी भी कुतिया हूँ... बस अब बड़े थनों वाली।”
ये सुनकर दोनों बहनें जोर से हँस पड़ीं। उनकी हँसी में शैतानी और कामुकता दोनों थी।
रिमझिम ने अभी भी हँसते हुए पूछा, “कुतिया कहीं की! अच्छा, कोल्ड ड्रिंक पियेगी?”
पूर्वी ने तुरंत सहमति में सिर हिलाया, “हाँ चल... प्यास भी लगी है।”
दोनों आगे बढ़ीं। थोड़ी दूर जाकर पूर्वी ने एक कोने की तरफ इशारा करते हुए हँसते हुए कहा, “इन्हें देख दो... हंसो का जोड़ा बन गया है।”
रिमझिम ने देखा तो अनुज और प्रीती कोने में खड़े थे।
रिमझिम: अरे करने दे न मजे उन्हें तू चल,
दोनों आगे बढ़ जाती हैं उनके पीछे कोने में अनुज और प्रीती थे, अनुज प्रीति के होंठों को चूम रहा था

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अनुज प्रीती के होंठों को बड़े प्यार और भूख से चूम रहा था। प्रीती लहंगे में बेहद सुंदर और सेक्सी लग रही थी — लहंगे का घेरा उसके गोल चूतड़ों को अच्छे से उभार रहा था, ब्लाउज उसके उभरे चूचों पर तना हुआ था। अनुज खुद को रोक नहीं पा रहा था, उसके हाथ प्रीती की कमर पर फिर रहे थे।
अनुज ने किस के बीच साँस लेते हुए फुसफुसाया, “बहुत सुंदर लग रही हो तुम आज... ये लहंगा तुम पर बहुत खिल रहा है। तुम्हारी ये कमर, ये होंठ ... सब कुछ नशीला लग रहा है।”
प्रीती शर्म से लाल होकर बोली, “तुम भी बहुत हैंडसम लग रहे हो...”
अनुज ने आगे होते हुए कहा, “इसी बात पर एक और किस हो जाए...”
प्रीती ने हल्के से उसे धकेलते हुए कहा, “नहीं... सब देख रहे हैं। मुझे शर्म आती है।”
अनुज ने हँसते हुए उसे और कस लिया, “अरे यहाँ सब अपने ही तो हैं... कैसी शर्म?”
प्रीती ने इधर-उधर देखते हुए फुसफुसाया, “अरे नहीं... ये खाना परोसने वाले, सर्वेंट्स सब खड़े हैं।”
इतने में ही नीलेश की गहरी, भावुक आवाज स्टेज से गूँजी। उन्होंने सभ्या का हाथ थामे हुए कहा,
“सभी को नमस्कार और हृदय से आभार... कि आप लोगों ने अपना कीमती समय हमारे एक बार कहने पर निकाला और हमें आतिथ्य करने का सौभाग्य दिया। मेरे जीवन का ये बहुत खास अवसर है। आज हमारी शादी को पूरे 25 वर्ष बीत गए।”
नीलेश ने सभ्या के हाथ को और मजबूती से दबाया, फिर उसकी आँखों में गहराई से देखते हुए बोले,
“वैसे तो ये लंबा समय है... पर ऐसे हमसफर का साथ हो तो कम ही लगता है। जब से तुम मेरे जीवन में आई हो, मेरा पूरा जीवन ही बदल गया। जब अपनों से दूर हुआ, तब तुम मेरे साथ थी। जब नए रिश्ते बने और नए लोग अपने बन गए, तब भी तुम मेरे साथ थी। सोचता हूँ कि बिना तुम्हारे जो कुछ थोड़ा बहुत आज हासिल कर पाया हूँ, वो भी नहीं कर पाता। धन्यवाद, आभार... ये सब दूसरों से कहा जाता है। तुमसे क्या कहना है, ये मैं नहीं जानता... और शायद जरूरत ही नहीं पड़ती। तुम सब बिना कहे समझ जाती हो। आज भी समझ जाओगी न?”
सभ्या की आँखें भर आईं। आँसुओं के साथ वो मुस्कुराई और नीलेश के सीने से लग गई। कर्मा, अनुज और बाकी सब भी भावुक होकर उन्हें देख रहे थे। जैसे ही सभ्या नीलेश के चौड़े सीने से चिपकी, पूरा हॉल तालियों और खुशी के शोर से गूँज उठा।
पूर्वी ने तेज आवाज में चिल्लाकर कहा, “मामा-मामी... आपने तो मुझे भी रुला दिया! अगर मेरे पति ने मुझे ऐसा प्यार नहीं किया तो मैं उन्हें घर से निकाल दूँगी!”
सब जोर से हँस पड़े। पंकज ने तुरंत मजाक उड़ाया, “मतलब तुम्हें पच्चीस साल झेलना पड़ेगा!”
इस पर और भी तेज ठहाके गूँजे। माहौल और भी गर्म और खुशनुमा हो गया।
शैलेश ने स्टेज से आवाज लगाई, “अरे भाई साहब... भाभी! अब केक काटो न...”
नीलेश और सभ्या दोनों केक के सामने गए। तालियों, सीटियों और खुशी के शोर के बीच दोनों ने एक साथ केक काटा।
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नीलेश ने एक टुकड़ा लिया उठाया और सभ्या को चखाया और प फिर सभ्या ने नीलेश को, इसके बाद कर्मा और अनुज ने भी अपने मां पापा को केक खिलाया, घर के बड़े यानी नाना भी आगे आए और बेटी और जमाई राजा को आशिर्वाद दिया और सभ्या ने उन्हें भी केक खिला दिया, उनके बाद धीरे धीरे बाकी लोग भी आते गए और कहीं केक खिलाने का तो कहीं मुंह पर लगाने का प्रोग्राम चलने लगा, लड़कियां आपस में बहुत मस्ती कर रही थीं, नीतू, किरन, अंजली, लाड़ो, पल्लवी और अब उनके साथ प्रीती और खुशी भी मिल गई थी सब साथ में फिल्मी गानों पर धमाल मचा रहीं थी, लड़कों का वही हाल था जो अक्सर होता है विचारे काम में इधर से उधर लगे हुए थे, किसी को खाने की व्यवस्था देखनी थी तो किसी को पीने की, स्टेज पर फोटो खिंचवाने का प्रोग्राम चल रहा था मेहमान एक एक करके आ रहे थे और सभ्या नीलेश को उपहार देते हुए उनके साथ फोटो करवा रहे थे, इसी बीच में राजन ने खोज कर कर्मा और अनुज को भी स्टेज पर चढ़ा दिया कि पूरे परिवार की साथ में एक फोटो करवा लो, दोनों अपने मां पापा के साथ खड़े हुए तो सभ्या ने अंजली को भी बुला लिया और बोली: ये भी परिवार में ही जुड़ने वाली है, अब अंजली भी अकेली नहीं गई उसने प्रीती का हाथ थामा और लेकर स्टेज पर चढ़ गई उस समय प्रीती और अनुज दोनों की हालत देखने वालीं थी दोनों के गाल शर्म से टमाटर की तरह लाल हो चले थे, अंजली ने अपने और सभ्या के बीच प्रीती को खड़ा किया तो सभ्या ने भी प्यार से अपना सिर अपनी होने वाली छोटी बहू के सिर से टिका दिया और फिर पूरे परिवार की कई फोटो ली गई।

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पिक्चरों के दौर के बाद बाहर खुले में खाने की व्यवस्था की गई थी जहां खाने का प्रोग्राम चला सबने स्वदिष्ट बने खाने का लुत्फ उठाया, और जी भर के खाया, खाते हुए बातों का और नाच गाने का प्रोग्राम साथ में चल रहा था, जो लोग आपस में इतना नहीं मिले थे उन्हें भी एक दूसरे को जानने का मौका मिल रहा था, कहीं राजपाल उदयवीर और सुजान सिंह की जोड़ी बन रही थी तो कहीं चरन सिंह, नाना, दीनू और महिपाल साथ थे, एक ओर नीलेश, प्रदीप(शशि के पति), शैलेश, राजन, जमुना, चेतन, साथ में थे वहीं विनीत, पंकज, रमन आदि कर्मा, जग्गू, सरजू, और पीयूष के साथ गप्पें लड़ा रहे थे,
इसी तरह औरतों भी आपस में घुल मिल रही थीं, सावित्री और मंजू ताई की खूब जम रही थी तो रज्जो, माधुरी और ममता की, वहीं थोड़ी शर्मीली रेनू को हमारी हंसमुख गुंजन और शालू भा रही थी तो बिमला शशि और सभ्या एक साथ बैठी थीं। लड़कियां तो सारी साथ में घूम ही रही थी, नाच रही थी, फोटो खींचा रहीं थी और अब खाना भी खा रही थी, हम उम्र बहुएं और ननदें भी एक साथ थी जैसे प्रेमा, रानी, रिमझिम, पूर्वी और चंचल।
खाने के बाद फिर से एक बार नाच गाने का प्रोग्राम हुआ और इस बार सबकी फरमाइश पर नीलेश और सभ्या को भी साथ में ठुमके लगाने ही पड़े, अंदर की ओर इन सब का नाच गाना चल रहा था वहीं सारे लड़के मिल कर हलवाई का सारा ताम झाम इकठ्ठा करवा रहा रहे थे और फिर कुछ ही देर में हलवाई और उसके लोग अपना सामान लेकर निकल गए थे, पहले से ही बड़ा सा फ्रिज और चूल्हा और ज़रूरी सामान कर्मा और उसकी सेना ने लाकर रखा था ताकि हलवाई के जाने के बाद भी मेहमानों को कोई तकलीफ न हो। बाहर से दरवाज़ा आदि लगा कर लड़के भी अंदर पहुंच गए थे और नाच गाने में शामिल हो गए, अब जब सिर्फ जान पहचान के लोग ही रह गए थे तो नाच गाने के साथ साथ छेड़ छाड़ भी बढ़ रही थी,

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नाच गाने के बाद थक-हार कर सब लोग बैठ गए। बड़ों के लिए कुर्सियाँ लगी थीं, छोटे लोग नीचे ही पसर गए। कोल्ड ड्रिंक के गिलास बाँटे गए। सब ठंडी-ठंडी कोलड्रिंक ड्रिंक पीते हुए फिर से बातें करने लगे।
इसी बीच किरण उठी। सबका ध्यान अपनी तरफ खींचते हुए उसने मुस्कुराकर कहा,
“सब लोगों को मेरा नमस्ते... प्यारी बुआ और प्यारे फूफाजी, तुम दोनों के लिए और आप सभी के लिए हम बच्चों की तरफ से एक छोटी-सी भेंट।”
नीलेश हँसते हुए बोले, “अरे भाई, अब कौन-सी भेंट रह गई?”
पल्ली भी उठते हुए बोली, “बस देखते जाओ ताऊजी...”
किरण, पल्ली, लाड़ो, नीतू और अंजली सब मिलकर स्टेज पर पहुँच गईं। उनके इशारे पर सागर ने गाना चला दिया। पाँचों ने एक धमाकेदार गाने पर नाच पेश किया। पूरा हॉल तालियों से गूँज उठा। खासकर सभ्या और नीलेश ने खूब तालियाँ बजाईं।
फिर तुरंत किरण और पल्ली अंदर चली गईं। अंजली सबका ध्यान बातों में लगाए रखी। कुछ देर बाद जब किरण वापस आई, तो वो सभ्या की ही साड़ी पहने हुई थी — बिल्कुल उन्हीं की तरह तैयार, बालों में फूल, मेकअप, सब कुछ। उसे देखकर सब हँसने लगे, तालियाँ बजने लगीं। सभ्या बलाएँ ले रही थी, शालू ने तो जाकर पैसे भी न्योछावर कर दिए।
दूसरी तरफ जब पल्ली नीलेश का कुर्ता-पजामा पहनकर स्टेज पर आई, तो पूरा हॉल तालियों और सीटियों से गूँज उठा। नीलेश सिर पकड़कर जोर-जोर से हँस रहे थे।
फिर गाना बज उठा...
“अरे ओ जुम्मा... मेरी जान-ए-मन... बाहर निकल... आज जुम्मा है... आज का वादा है...”



थक हार कर सब लोग बैठ गए, बढ़ों के लिए कुर्सियां रखी गई थी तो छोटे तो नीचे ही पसर गए, कोलड्रिंक के गिलास बांटे गए और सब ठंडी ठंडी कोलड्रिंक पीते हुए फिर से बातें करने लगे, इसी बीच किरन उठी और सबका ध्यान अपनी ओर करते हुए बोली: सब लोगों को मेरा नमस्ते, प्यारी बुआ और प्यारे फूफाजी तुम दोनों लोगों के लिए और आप सभी के लिए हम बच्चों की तरफ से एक छोटी सी भेंट।
नीलेश: अरे भाई अब कौन सी भेंट रह गई?
पल्ली: बस देखते जाओ ताऊजी।
पल्ली भी उठते हुए बोली, किरन भी उठ गई थी, इसके बाद किरन, पल्ली, लाड़ो नीतू और अंजली ये सब मिलकर स्टेज पर पहुंच गईं इनके इशारे पर सागर ने गाना चलाया और फिर सब ने एक गाने पर नाच पेश किया और सबने ताली बजा कर उनका खूब स्वागत किया, खासकर सभ्या और नीलेश ने, उसके बाद तुरंत ही किरन और पल्ली अंदर गईं तब तक अंजली सबका ध्यान बातों में लगाती रही और कुछ देर बाद ही किरन अपनी बुआ की साड़ी पहन कर उन्हीं की तरह तैयार हो कर स्टेज पर आई उसे देख सब हंस रहे थे ताली मार रहे थे, सभ्या बलाएं ले रही थी, वहीं शालू ने तो जाकर पैसे भी न्योछावर कर दिए, दूसरी ओर से जब पल्ली नीलेश का कुर्ता पजामा पहन कर स्टेज पर आई तो पूरा हाल तालियों सीटियों से गूंज उठा, नीलेश भी सिर पकड़ कर हंस रहे थे,
फिर गाना बजा,
अरे ओ जुम्मा मेरी जानेमन, बाहर निकल आज जुम्मा है आज का वादा है, पल्ली गाने के बोल पर पूरा अभिनय करते हुए नाचने लगी, वहीं किरन भी हीरोइन की तरह नहीं नहीं करते हुए शर्मा रही थी, गाना जब तक खत्म हुआ तब तक दोनों ने पूरा माहौल बांध दिया था और हर कोई खुशी से उनके लिए तालियां पीट रहा था, गाना खत्म होने पर सबने उनका खूब जोश बढ़ाया, शैलेश ने सभी लड़कियों को इक्कीस सौ- इक्कीस सौ का शगुन भी बांट दिया, किरन और पल्ली फिर निलेश और सभ्या को पकड़ कर स्टेज पर लाए और उन्हें खड़ा कर पल्ली बोली: वैसे इतने अच्छे गाने के बाद चुम्मा हो ही जाए क्या कहते हो आप लोग।
पूर्वी: अरे नेकी और पूछ पूछ? मामा हो जाओ शुरू।
नीलेश सबके सामने थोड़ा शर्माए और बोले: अरे क्या तुम लोग भी।
राजन: अरे भाई बच्चों का मन है तो हो ही जाए,
शशि: हां भैया भाभी हो जाए,
सबके कहने पर सभ्या और निलेश एक दूसरे की ओर मुड़े प्यार से एक दूसरे की आंखों में देखा सभ्या ने एक हाथ नीलेश के कंधे पर रख लिया तो नीलेश के हाथ सभ्या की कमर पर पहुंच गए और फिर धीरे से दोनों के होंठ मिले एक छोटे पर गरम चुंबन के लिए

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एक के बाद दूसरा... फिर तीसरा... चुंबन लंबे और गहरे होते गए। आसपास की आवाजें जैसे उनके लिए कम होती गईं। कुछ पलों बाद दोनों पूरे जोश से एक-दूसरे के होंठ चूस रहे थे। नीलेश की जीभ सभ्या के मुँह में घुस गई थी, हाथ बदन को सहला रहे थे। जब होंठ अलग हुए तो दोनों हाँफ रहे थे। उनके गर्म चुंबन को देख पूरे हॉल में गर्मी फैलने लगी।
सबने तालियाँ बजाकर उनका स्वागत किया। दोनों शर्माते हुए सबकी ओर देख रहे थे।
इसी बीच पूर्वी स्टेज पर चढ़ गई और बोली, “देखा सबने? दोनों में आग अभी भी उतनी ही है जितनी पच्चीस साल पहले थी!”
नीलेश हँसते हुए बोले, “अरे तू भी क्या बोल रही है?”
पूर्वी ने शरारत से आँख मारी, “अरे मामा शर्माना कैसा? यहाँ सब अपने ही हैं और सबकी एक जैसी सोच भी है। तो आप सबकी तरफ से और अपनी तरफ से मैं ये कहना चाहूँगी कि चुम्मा-चाटी तो बहुत देख ली... अब कुछ और देखना है।”
नीलेश ने हैरानी से पूछा, “क्या?”
पूर्वी ने सीधे, बेशर्मी से कहा, “चुदाई!”
सभ्या शर्माकर बोली, “धत्त तू भी ना...”
पूर्वी हँसते हुए बोली, “मामी मान जाओ... नहीं तो मेरी सेना तुम पर टूट पड़ेगी!”
इधर मर्द भी नीलेश को उकसाने लगे।
राजन चिल्लाया, “अरे सालगिरह पर नहीं चोदोगे तो कब चोदोगे भैया?”
पूर्वी ने लड़कियों की तरफ इशारा किया, “अरे लड़कियों देख क्या रही हो? शुरू हो जाओ!”
पूर्वी के कहते ही तीन-तीन लड़कियाँ दोनों पर टूट पड़ीं। कुछ ही पलों में नीलेश और सभ्या के सारे कपड़े उतर चुके थे। दोनों बिल्कुल नंगे स्टेज पर खड़े थे।
नीलेश का लंड पहले से ही कड़क हो चुका था, सीधा तना हुआ, मोटा और लंबा। सभ्या को लड़कियों ने उनके सामने घुटनों पर बैठा दिया। जिन मर्दों ने अब तक सभ्या को नंगा नहीं देखा था, वो उसे देखकर आहें भर रहे थे — उसके भारी-भारी दूधिया चूचे, चिकनी कमर, और साफ-सुथरी, गुलाबी चूत देखकर उनके मुँह खुले के खुले रह गए। औरतें नीलेश के तने हुए लंड को और सभ्या के कामुक नंगे बदन को घूर रही थीं।
पूर्वी और बाकी लड़कियाँ चिल्लाने लगीं, “चूसो... चूसो... चूसो!”
सबकी आवाज सुनकर सभ्या ने आगे बढ़कर नीलेश के मोटे लंड को हाथ में पकड़ लिया। उनकी आँखों में देखते हुए वो मुस्कुराई और बोली, “सालगिरह मुबारक हो, मेरे राजा...”
और ये कहते हुए उसने पूरा लंड अपने गरम, गीले मुंह में भर लिया और जोर-जोर से चूसने लगी।

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नीलेश के मुंह से आह निकल गई, “ओह आह्ह्ह्ह... मेरी रानी...”
सभ्या हाथ से लंड को सहलाते हुए, अपने मुंह का पूरा जादू चला रही थी — कभी सिर चूसती, कभी पूरी लंबाई गले तक ले जाती, कभी जीभ से लंड की नोक को चाटती। नीलेश की आँखें मजे से बंद हो गईं।
मर्दों के लंड कड़क हो गए, औरतें अपनी चूत में गर्म नमी महसूस करने लगीं। लेकिन सब चुपचाप देख रहे थे।
रिमझिम चिल्लाई, “मामा... पच्चीस साल बाद भी वही मजा है या नहीं मामी के मुंह में?”
नीलेश हाँफते हुए बोले, “ओह... ज़्यादा ही है बिटिया... बहुत ज़्यादा!”
राजन बोला, “अरे हमारी भौजी तो और गरम होती जा रही हैं!”
पूर्वी हँसते हुए बोली, “सही कहा... हमारी मामी तो शराब है, जितनी पुरानी उतनी नशीली!”
पंकज बोला, “हमारा भी मन कर रहा है शराब पीने का...”
पल्ली तुरंत शरारत से बोली, “आओ जीजा... नीचे टंकी से मुंह लगाओ, अभी पिला देती हूँ!”
सब जोर से हँस पड़े।
पंकज ने पल्ली को घूरते हुए कहा, “बिल्कुल पीएंगे साली साहिबा... तुम्हारी शराब भी पीएंगे। तुम भी कम नशीली नहीं लगती।”
किरण बोली, “अरे जीजा... सालियाँ तो इतनी नशीली हैं कि पीकर सब भूल जाओगे!”
पूर्वी ने हँसते हुए कहा, “अभी बताती हूँ तुम्हें... चुपचाप स्टेज पर देखो और कुछ सीखो!”
पंकज हँसते हुए स्टेज की ओर देखने लगा।
दृश्य अब बदल चुका था। नीलेश ने सभ्या को स्टेज पर रखी कुर्सी पर लिटा दिया, उसकी टांगें फैला दीं और अपना मोटा लंड पकड़कर उसकी चूत पर थपथपाने लगे।
नीलेश ने गहरी नजरों से पूछा, “घुसा दूँ मेरी रानी?”
सभ्या ने अपने होंठ काटते हुए कामुक आवाज में कहा, “घुसा दो ना मेरे राजा...”
नीलेश ने सबकी तरफ देखा और जोर से पूछा, “घुसा दूँ?”
सबने गर्मजोशी से “हाँ... हाँ...” करते हुए शोर मचाया।
नीलेश ने एक गहरा, जोरदार धक्का लगाया और अपना पूरा लंड सभ्या की चूत में जड़ तक घुसा दिया, और दोनों की एक साथ गहरी आह निकल गई।
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सब लोग खुश होकर शोर मचाने लगे, उनका जोश बढ़ाने लगे।
नीलेश ने सभ्या की आँखों में देखा और बोले, “अभी भी वही गर्मी... वही कसावट... वही आनंद है तुम्हारी चूत में जो पच्चीस बरस पहले था।”
सभ्या हाँफते हुए बोली, “ओह जी... तुम्हारा लोड़ा जरूर पहले से भी बड़ा हो गया है... तभी तो ये चूत कसी हुई लग रही है।”
नीलेश मुस्कुराए, “तुम्हारा बदन सामने पाकर ये अपने आप बड़ा हो जाता है।”
वे आगे झुके, सभ्या के होंठ चूसने लगे और साथ ही धक्के भी लगाते रहे।
जब चुंबन टूटा तो सभ्या मुस्कुराकर बोली, “ऐसा लग रहा है जैसा पहली रात को महसूस हुआ था... आह... सुहागरात पर।”
नीलेश बोले, “आह... तो ये हमारी पहली रात ही तो है रानी... आने वाले और पच्चीस बरसों की पहली रात... या कहूँ सुहागरात।”
सभ्या हाँफते हुए बोली, “आह... आह... पर इस बार सुहागरात पर दर्शक भी हैं।”
नीलेश ने जोर से धक्का लगाते हुए कहा, “हाँ... पहली बार हम दोनों ही थे... इस बार इतने हैं... अगली बार और भी होंगे।”
सभ्या ने हैरानी से पूछा, “अगली बार और?”
नीलेश हँसते हुए बोले, “और क्या... इस बार बच्चे देख रहे हैं... अगली बार नाती-पोते देखेंगे!”
सभ्या शर्माकर बोली, “अगली बार तक हम लोग बुड्ढे हो चुके होंगे।”
नीलेश ने तेज धक्का लगाते हुए कहा, “तो क्या हुआ... बुढ़ापे में चुदाई का अलग ही मजा होगा।”
शालू चिल्लाई, “अरे प्रेमियों की क्या बातें हो रही हैं... हमें भी सुनाई देनी चाहिए!”
पल्ली ने शरारत से कहा, “और ताऊजी-ताईजी... बहुत हुआ प्यार से धीमे-धीमे... मेहमान आए हैं, इन्हें भी दिखाओ चोदमपुर की चुदाई क्या होती है!”
सभ्या हाँफते हुए बोली, “सुना जी... गाँव की इज्जत का सवाल है... मुझे ऊपर आने दो।”
नीलेश ने लंड निकाला, कुर्सी पर बैठ गए और बोले, “आ जाओ...”
सभ्या तुरंत ऊपर चढ़ गई, पति का मोटा लंड अपनी चूत में लिया और जोर-जोर से उछलने लगी। शुरू से ही कोई धीमे-धीमे नहीं — वो अपनी चूत को जड़ तक पति के लंड पर मार रही थी, फिर ऊपर उठ जाती। उसके नंगे बदन और उछलती-नाचती चूचियों को देखकर मर्दों के मुंह में पानी आ रहा था, लंड में तनाव बढ़ रहा था।

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इस बार कोई धीमे धीमे नहीं शुरू से ही वो अपनी चूत को जड़ तक पति के लंड पर मारती है और फिर ऊपर जाती है, उसके नंगे बदन और उछलती नाचती चूचियों को देख कर मर्दों के मुंह में पानीं आने लगता है तो लंड में तनाव।
पल्ली: आह आह ये हुई न बात आह ताऊजी, ताई जी ऐसे ही मज़ा आ रहा है,
पल्ली अपनी चूत को कपड़ों के ऊपर से ही रगड़ते हुए कहती है।
अंजली: बहुत बढ़िया मां पापा ऐसे ही बहुत अच्छे लग रहे हो,
अंजली भी गरम होते हुए उनका हौसला बढ़ाती है, वैसे चुदाई के लिए उन्हें कहां किसी तरह की प्रेरणा की ज़रूरत थी वो दोनों ही इस मामले में काफी खुले विचारों वाले थे,
निलेश भी सभ्या की कमर थामे नीचे से लंड उसकी चूत में ठोंक रहे थे।
अनुज और कर्मा दोनों ही उत्तेजित भी महसूस कर रहे थे और कहीं न कहीं भावुक भी, जो भी नीलेश और सभ्या से जुड़ा हुआ था उन सब के लिए ही ये खास और भावुक पल था,
कच्ची और गरम उत्तेजना की कढ़ाई में कामुकता और भावना का तड़का और लग जाए तो चुदाई की दाल बहुत स्वादिष्ट बनती है, और उसी का लुत्फ़ आज सब उठा रहे थे, चखने वाले भी और सूंघने वाले भी।
और उसी भावनात्मक चुदाई का असर कहो या इतने लोगों के सामने प्रदर्शन के कारण सभ्या अपनी पूरी जी जान लगा कर अपने पति के लंड पर उछल रही थी और फिर एक पाप ऐसा आया कि वो तेजी से चिल्लाते हुए ढीली पड़ गई, उसका बदन मचलते हुए शांत हो गया,
उसे शांत होते देख नीलेश ने वही किया जो हर पति का कर्तव्य होता है जब उसकी पत्नी ढीला महसूस करे, नीलेश ने उसे गोद में उठाया और अपने ऊपर बैठा लिया और उसके चूतड़ों को थाम कर उसे अपने ऊपर उछालने लगे,
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दर्शकों में गर्मी अब खुलकर दिखने लगी थी। कोई अपनी चूचियों को मसल रहा था, कोई चूत रगड़ रहा था, कोई लंड सहला रहा था, कोई किसी के बदन को छू रहा था।
पल्ली आगे बढ़कर पंकज जीजा की गोद में बैठ गई। पंकज उसकी मोटी चूचियों को मसलते हुए उसकी गर्दन चूम रहे थे। पल्ली अपने चूतड़ उनके कड़क लंड पर घुमा रही थी।
पल्ली ने मज़ाक करते हुए कहा, “आहिस्ते जीजा... साली की चूची हैं, तुम्हारी रांड बहन की नहीं!”
पंकज मुस्कुराते हुए उसे चूमने लगा।
कर्मा और अनुज अपनी-अपनी भावी हमसफर से चिपके हुए माँ-पापा की चुदाई देख रहे थे। अंजली को कर्मा का कड़ा लंड अपने चूतड़ों पर चुभता महसूस हो रहा था। अनुज ने तो प्रीती के ब्लाउज में हाथ घुसा दिया था।
पर सबकी नजर स्टेज पर थी। नीलेश अब सभ्या को कुर्सी के सहारे झुका रहे थे। सभ्या ने अपने चूतड़ उभारकर पति और सभी दर्शकों के लिए परोस दिए। नीलेश ने लंड पकड़ा, अपनी पत्नी के गरम, कसे हुए गांड के छेद पर रखा और एक जोरदार धक्का लगाकर अंदर सरका दिया। सभ्या की मखमली गांड चीरती हुई लंड जड़ तक समा गया।
दर्शकों ने गर्मजोशी से तालियाँ और सीटियाँ बजाईं।
नीलेश ने उतनी ही गर्मी से सभ्या की गांड मारना शुरू कर दिया।

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सभ्या चिल्लाई, “आह... आह... आह जी... ऐसे ही मारो... अपनी रंडी पत्नी की गांड... आह... मार-मार के फाड़ दो... ओह... ऐसे ही!”
नीलेश कस-कस के धक्के लगाते हुए बोले, “आह... साली कुतिया... आह... ले... क्या गरम गांड है... आह... आह... आह!”
महिपाल ने रज्जो को पकड़कर उसका ब्लाउज खोल दिया और चूचियों को पागलों की तरह चूसने लगा। चेतन गुंजन मामी के बदन को सहलाते हुए उनके होंठ चूस रहा था। विनीत किरण को खींचकर उसके बदन का मजा ले रहा था।
दीनू ने शशि की मोटी चूचियों के बीच मुंह घुसा रखा था। सुजान सिंह रानी को गोद में बिठाए हुए थे। प्रदीप शालू मौसी की चूचियों के दीवाने हो रहे थे।
सागर अपनी माँ का बदला लेते हुए चेतन की मां माधुरी की नाभि चाट रहा था। सरजू, कर्मा की होने वाली सास सविता को सामने बिठाकर होंठ चूस रहा था। पीयूष रिमझिम के रसीले होंठ चूस रहा था। बिरजू पूर्वी के साथ था। जमुना मामा ने रेनू को अकेले में घुसा रखा था। प्रकाश प्रेमा भाभी के साथ थे। नाना बिमला को अपना अनुभव दिखा रहे थे। राजन चाचा सावित्री को “जीजी-जीजी” कहकर मसल रहे थे। शैलेश मौसा चंचल की मोटी चूचियों को ब्लाउज से बाहर निकाल चुका था। रमन ममता चाची को पकड़ चुका था। चरन सिंह की सेवा नीतू और लाड़ो दोनों बहनें कर रही थीं। खुशी कर्मा और अंजली के पास पहुँचकर दोनों के होंठ बारी-बारी चूस रही थी।
सबका ध्यान स्टेज पर भी था, जहाँ चुदाई अब तूफानी हो चुकी थी। नीलेश कुर्सी से आगे अपनी पीठ पर लेट गए थे और सभ्या उनके ऊपर। नीचे से नीलेश का लंड सभ्या की गांड को भेद रहा था।

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सभ्या अपनी मोटी, गोल चूतड़ों को नीलेश की गोद में पटक-पटक कर मार रही थी। नीलेश लेटे-लेटे नीचे से जोर-जोर से अपनी कमर उठाकर लंड ठोक रहे थे। सभ्या की गांड पूरी तरह खुल चुकी थी, नीलेश का मोटा, गाढ़ा लंड जड़ तक अंदर-बाहर हो रहा था। हर धक्के पर सभ्या के चूतड़ लहरा रहे थे, उसके भारी-भारी चूचे ऊपर-नीचे उछल रहे थे और पूरा हॉल उनकी चुदाई की आवाज़ से गूँज रहा था — “पच... पच... पच...”
“आह... आह... मेरे राजा... ऐसे ही... तेज... तेज मारो मेरी गांड... आह... फाड़ दो आज... ओह...!” सभ्या हाँफते हुए चिल्लाई, उसके बाल बिखर गए थे, पसीना चमक रहा था।
नीलेश ने उसके चूतड़ों को दोनों हाथों से कसकर पकड़ लिया और और तेज धक्के लगाने लगे, “आह... साली कुतिया... ले... ले... तेरी ये गरम मखमली गांड... आह... मेरा लंड निगल रही है... 25 साल बाद भी कितनी कसी हुई है रे... ओह...!”
कुछ देर तक यही जोरदार चुदाई चलती रही। सभ्या ऊपर-नीचे उछल रही थी, नीलेश नीचे से ठोक रहे थे, दोनों की साँसें तेज़ हो गई थीं।

हॉल में माहौल अब पूरी तरह से कामुक हो चुका था, लेकिन कोई भी चुदाई नहीं कर रहा था। बस छेड़छाड़, चूमा-चाटी और चूचियों को मसलने का मज़ा चल रहा था।
पंकज ने पल्ली को अपनी गोद में बिठा रखा था पर अब पल्ली ने अपना मुंह पंकज की ओर कर रखा था और दोनों के होंठ मिले हुए थे। पंकज की दोनों हथेलियाँ पल्ली के भरे-भरे चूतड़ों पर थीं, वो जोर-जोर से मसल रहे थे। पल्ली अपनी चूत उनके कड़क लंड पर रगड़ रही थी, कपड़े के ऊपर से ही। “

कर्मा अंजली से चिपका हुआ था। उसका एक हाथ अंजली के ब्लाउज़ के अंदर घुसा हुआ था, वो उसके नरम चूचों को दबा-दबा कर सहला रहा था। अंजली उसकी गर्दन चूस रही थी और अपनी गांड उसके लंड पर घुमा रही थी। “... आह... ऐसे ही दबाओ... मेरे चूचे... ओह...
कर्मा: देख लो आह हमें भी ऐसे ही मनानी है अपनी 25वीं एनिवर्सरी।
अंजली: देखना क्या है, बिल्कुल मनायेंगे मैने तो सोच भी लिया है मैं क्या पहनूंगी।
अंजली हंसते हुए कहती है तो कर्मा भी उसके होंठ चूसने लगता है।
अनुज ने प्रीती को दीवार से सटा दिया था। उसका मुँह प्रीती के ब्लाउज में घुसा हुआ था, वो उसके एक चूचे को चूस रहा था और दूसरा हाथ से मसल रहा था। प्रीती की आँखें बंद थीं, वो कराह रही थी, “आह... अनुज... काट मत... चूस... चूस... ओह...”
महिपाल रज्जो की चूचियों को दोनों हाथों से पकड़े हुए था, उन्हें जोर से दबाता और चूमता जा रहा था। रज्जो उसकी पीठ पर नाखून गड़ाए हुए थी। चेतन गुंजन को पीछे से पकड़े हुए था, उसके चूचों को सहलाते और उसके होंठों को चूसता हुआ। विनीत किरण की कमर पर हाथ फेर रहा था और उसके चूचों को ब्लाउज के ऊपर से मसल रहा था।
पूरा हॉल चूमने, चाटने, दबाने और कराहने की आवाज़ों से भर गया था। वहीं स्टेज पर भी दृश्य बदल चुका था, सभ्या अब नीलेश की ओर पीठ करके बैठी थी, नीलेश का लंड अब भी उसकी गांड में अंदर बाहर हो रहा था, उसके घुटने दोनों तरफ फैले हुए थे, चूत पूरी तरह खुली हुई दिख रही थी, और नीलेश का मोटा लंड उसकी गांड में जड़ तक घुसा हुआ था। सभ्या ने अपने आनंद को और बढ़ाने के लिए अपनी उंगलियां भी चूत में घुसा दी थीं

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“आह... जी... ऐसे... देखो सबको...तुम्हारी आह पत्नी को आह देख रहे हैं आह मेरी आह खुली चूत ओह...!” सभ्या कामुक आवाज़ में बोली।
नीलेश ने उसके चूतड़ों को दोनों हाथों से थाम लिया और नीचे से जोर-जोर से लंड ठोकना शुरू कर दिया। सभ्या की गांड अब पूरी तरह खुली हुई थी, लंड हर धक्के पर जड़ तक घुस रहा था और बाहर निकल रहा था। उसके चूचे तेज़ी से उछल रहे थे, पसीना चमक रहा था।
“आह... आह... मेरे राजा... फाड़ दो... पूरी गांड... आह... देखो सब... आह मेरी गांड चुद रही है... ओह...!” सभ्या चिल्लाई, उसकी आवाज़ पूरे हॉल में गूँज रही थी।
नीलेश भी हाँफते हुए बोले, “आह... रानी... कितनी खुली है तेरी गांड... आह... ले... ले... मेरा लंड निगल... ओह... 25 साल की की सारी गर्मी.. आज मैं तेरी गांड भर दूँगा... आह...!”
गति वही तेज़ थी। सभ्या अपनी गांड को नीचे पटक-पटक कर मार रही थी, नीलेश नीचे से ठोक रहे थे। दोनों की साँसें एक हो गई थीं। हॉल में सबकी नजरें स्टेज पर थीं। छेड़छाड़ तो चल ही रही थी, लेकिन सबकी आँखें सभ्या-नीलेश की इस खुली चुदाई पर टिकी हुई थीं।
फिर नीलेश का लंड और भी फूल गया। उन्होंने सभ्या के चूतड़ों को कस लिया और जोर-जोर से धक्के लगाने लगे।
“आह... रानी... मैं झड़ने वाला हूँ... तेरी गांड में... आह... ले... ले... पूरा... ओह...!”
सभ्या भी अपनी चूत में उंगलियां चलाते हुए चिल्लाई, “आह... जी... झड़ो... मेरी गांड में भर दो... आह... मैं भी... आह... आ रही हूँ... ओह... राजा...!”
दोनों एक साथ चरम पर पहुँच गए। नीलेश का लंड सभ्या की गांड के अंदर फड़क उठा और गर्म-गर्म मोटी-मोटी धारें छोड़ने लगा। सभ्या का बदन मचल उठा, उसकी चूत से पानी की फुहार निकली और वो भी जोर से झड़ गई। दोनों की चीखें पूरे हॉल में गूँज उठीं — “आह्ह्ह्ह... ओह्ह्ह्ह...!”
नीलेश की सारी मलाई सभ्या की गांड में भर गई। सभ्या ढीली पड़कर उनके सीने पर गिर गई, दोनों हाँफ रहे थे, बदन पसीने से तर।
हॉल में तालियाँ और सीटियाँ बजने लगीं। सबकी आँखों में अभी भी गर्मी थी। सब जानते थे कि रात अभी बाकी थी।


जारी रहेगी।
Super update ❤️🔥
 
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