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TharkiPo

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अपडेट नंबर 258 पेज संख्या 1268 पर पोस्ट कर दी है पढ़ कर रिव्यू ज़रूर करें, लाइक और रिव्यू कम नहीं होने चाहिए।
 
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TharkiPo

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शालू: तुम लोग पिटोगे अभी।है
अंजली: अरे कोई बात नहीं मौसी बुलाने दो, अच्छा लगता है।
ये कह कर वो शर्मा गई तो सब हंसने लगे।
पल्ली: चलो न भाभी हमारे साथ थोड़ा घूम कर आते हैं गांव में।
किरन: हां और बहुत सी बातें भी करनी हैं तुमसे।
सागर: अरे हम लोगों को भी बातें करनी थी भाभी से।
अनुज: और क्या तुम लोग ही क्यों करेंगे।
पल्ली: ननद पहले देवर बाद में।
दोनों अंजली को लेकर चली गईं। बाकी घर में सब अपने काम में लग गए।

अपडेट 257

अंजली को किरन और पल्ली ने गांव में शाम तक घुमाया और फिर कर्मा उसे घर छोड़ आया, जब तक कर्मा बापिस पहुंचा तभी उसके पापा और मौसा भी आ गए, नीलेश ने फिर घर पर रात के प्रोग्राम के बारे में बताया तो वहीं सभ्या और कर्मा ने भी उनके साथ दिन में अंजली और दोनों के बीच जो हुआ उसे सांझा किया,

वहीं महिपाल भी अपने घर में आज रात के प्रोग्राम के बारे में बता रहा था अंजली और रानी रसोई में थी,
महिपाल: खाने वाने का देख लेना तुम कोई कमी नहीं रहनी चाहिए,
सविता: अरे उसकी चिंता मत करो तुम।
सविता कुछ सोचते हुए बोली,
पीयूष: पापा मैं भी बैठूं आज तुम लोगो के साथ?
महिपाल: तू वैसे मुझे तो कोई परेशानी नहीं है उन लोगों को अजीब न लगे बस।
सविता: नहीं लगेगा वो भी खुले विचारों के लोग हैं।
पीयूष: हां कर्मा ने भी बताया है उनके बारे में और पता है उसके पापा ने तो नीतू है न उसकी मम्मी को भी चोदा है।
महिपाल: सच में नीतू की मम्मी को, तुझे कैसे पता?
हैरान होते हुए महिपाल बोला,
पीयूष: मुझे कर्मा ने खुद बताया था और तो और फोटो तक दिखाया था,
महिपाल: तुझे कर्मा ने बताया मतलब उसे पता है कि उसके पापा का नीतू की मम्मी क्या नाम है उनका हां रज्जो से चक्कर है और उसे कोई परेशानी नहीं है?
सविता दोनों की बात ध्यान से सुन रही थी हालांकि वो उन दोनों से ज़्यादा जानती थी इस बारे में क्योंकि सभ्या ने खुद उसे बताया था पर इतना सब होने के बाद भी न जाने क्यों वो अपने और उनके बीच जो हुआ था उसे बताने की पहल नहीं कर पाती थी इसीलिए चुप ही रहना उसने उचित समझा।
पीयूष: अरे पापा वो तो कह रहा था कि उसकी मां को भी पता होगा इस बारे में क्योंकि उसके मां पापा आपस में कोई बात नहीं छुपाते।
महिपाल: सही है यार कमाल का परिवार है, वैसे देखते हैं क्या पता आज के प्रोग्राम में कुछ खुल कर और राज सामने आएँ,
सविता: हां हो सकता है,
इतने में पीछे से अंजली की आवाज़ आई: क्या हो सकता है मम्मी?
इसने चाय की ट्रे बीच में रखते हुए बोला।
सविता: कुछ कुछ नहीं बेटा, वो तेरे पापा कह रहे थे कि आज खाने में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए कर्मा के घर वालों के लिए।
अंजली: अरे उसकी तैयारी मैने और भाभी ने कर दी है तुम लोग चिंता मत करो और मजे से चाय पियो,
अंजली भी मन ही मन सोच रही थी आज ही उसने कर्मा और उसकी मां के साथ मिलकर चुदाई की और कुछ ही घंटों बाद फिर से वो सामने होंगी, कहीं कुछ अजीब तो नहीं लगेगा।

खैर समय बीता और सभ्या, नीलेश, शैलेश और शालू निकल गए गैंदापुर के लिए, और कुछ देर में ही वो लोग महिपाल के घर के सामने थे जहां महिपाल ने उन सबका बहुत गर्मजोशी से स्वागत किया, और उन्हें अंदर ले गया, शुरुआती मेल मिलाप के बाद मर्दों की टोली छत पर पहुंच गई अपने प्रोग्राम के लिए वहीं औरतें नीचे रह गईं, नाश्ते वगैरा की तैयारी चल रही थी, रानी और अंजली रसोई में व्यस्त थी तो वहीं रसोई के बाहर तीनों सभ्या, शालू और सविता बैठ कर बातें कर रही थीं।
सभ्या: चलो भाई इन लोगों का तो प्रोग्राम शुरू भी हो गया,
सविता: पता नहीं इन मर्दों को क्या मजा आता है इस दारू में इनका बस चले तो रोज लेकर बैठ जाएं।
शालू: सही कह रही हो जीजी कितना भी मना करो मानते भी नहीं हैं,
सभ्या: हर बार बस इस कर लेने दो यही सुनने को मिलता है।
रानी: चाची मैं तो कहती हूं तुम लोग भी ऊपर ही बैठो इन लोगों के साथ तभी थोड़ा सोच समझ कर पीएंगे नहीं तो इनका प्रोग्राम चलता रहेगा,
अंजली: सही में भाभी सही कह रही हैं आप लोग भी ऊपर ही बैठो मैं नाश्ता वगैरा ऊपर ही पहुंचाती हूं, आप लोग भी अपना प्रोग्राम करना।
शालू: और क्या ये भी सही है, दारू नहीं पी सकते बाकी हम भी प्रोग्राम कर सकते हैं,
अंजली: मौसी चाय पकोड़े का नशा तो कर ही सकते हो।
अंजली ने हंसते हुए कहा तो सब हंसने लगे।
सभ्या: चलो भाई आज हमारा प्रोग्राम भी हो ही जाए,
सविता: चलो चटाई ले चलती हूं मैं आराम से बैठेंगे। अंजली नाश्ता वगैरह ले आना हमारे लिए भी और उनके लिए भी।
अंजली: तुम लोग पहुंचो मम्मी मैं ले आऊंगी।

जब गैंदापुर में प्रोग्राम शुरू हो चुका था तो चोदम पुर कहां पीछे रहने वाला था बस यहां दारू का प्रोग्राम नहीं हो रहा था, किसी और तरीके का चल रहा था,

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सरजू और बिरजू अभी कर्मा के यहां थे और अभी बिरजू दीवान पर पैर लटका कर बैठा हुआ था तो वहीं ममता अपनी साड़ी को ऊपर उठाकर उसका लंड चूत में लेकर उछल रही थी, ममता के बदन पर सिर्फ साड़ी थी ऊपर से बिल्कुल नंगी थी, बिरजू वहीं उनके बगल में कच्छा पहने खड़ा था और ममता की चूचियों और पेट को सहला रहा था,
बिरजू: ओह चाची बड़ी मुलायम हो तुम,
ममता: और तू बहुत कड़क है रे बिरजू,
ममता ने हाथ बढ़ाकर बिरजू के लंड को कच्छे के ऊपर से ही पकड़ते हुए कहा, और धीरे धीरे सहलाने लगी,
बिरजू: आह चाची ओह यहम्मम।
बिरजू सिसकते हुए झुका और अपने होंठों को ममता के होंठों से मिला दिया और चूसने लगा, वहीं सरजू नीचे से लगातार धक्के लगाकर ममता को चोद रहा था ममता भी बिना लय तोड़े उसके लंड पर उछल रही थी,
सरजू: आह चाची ऐसी मखमली और गरम चूत का राज क्या है आह आह लगता है लोड़ा पिघल जाएगा।
ममता कुछ बोल नहीं सकी क्योंकि उसका मुंह तो बिरजू ने बंद कर रखा था, कुछ पल बाद बिरजू ने उसके होंठों को छोड़ा भी तो उसे झुका कर अपना लंड कच्छे से निकाला और उसके मुंह में घुसा दिया जिसे ममता चूसने लगी, दोनों भाई मिलकर उसके कामुक बदन का मज़ा ले रहे थे।
वहीं उनके घर पर भी कुछ ऐसा ही प्रोग्राम चल रहा था, जहां एक कमरे में कर्मा की मामी गुंजन थी जिसके कामुक भरे बदन का लुत्फ दीनू उठा रहा था,

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गुंजन: आह जीजा ऐसी क्या आग भरी है कम से कम खटिया तक तो चलते,
गुंजन खटिया के नीचे जमीन पर थी जहां दीनू उसे दबोचे हुए था और उसके कामुक बदन को अपने हाथों से मसल रहा था, एक हाथ गुंजन की कमर को मसल रहा था तो दूसरा उसकी चूचियों को, वहीं दीनू के होंठ गुंजन के गले और पीठ को चाट रहे थे चूम रहे थे, गुंजन के बदन पर सिर्फ साड़ी थी। वो भी आधी खुली पड़ी थी वहीं दीनू के बदन पर एक अंगोछा था

दीनू: ओह सलहज तुम मिल जाओ तो हर जगह ही बिस्तर है खटिया की क्या ज़रूरत है आह उम्मम।
गुंजन: आह कभी अपनी बहनिया को भी ऐसे ही लपेटे हो जीजा कि सलहज पर ही हाथ आजमा रहे हो।
गुंजन ने उसे छेड़ते हुए कहा,
दीनू: आह बहन अगर मौका दे तो उसे भी उठने ना दें गुंजन, आह किसकी याद दिला दी,
दीनू ने गुंजन की चूचियों को मसलते हुए कहा,
गुंजन: पूरे जुगाड़ में हो जीजा बहनचोद बनने के,
दीनू: बिल्कुल गुंजन रानी, ऐसी बहन नहीं चोदी तो हम काहे के भैया,
गुंजन: तो बुला लो न जीजा, रण्डी के भोसड़े में अपना हाथ से पकड़ कर डालेंगे तुम्हारा लौड़ा,
दीनू: हाय गुंजन रानी क्या बात कह दी ऐसा हो जाए तो मज़ा ही आ जायेगा।
गुंजन: उसका मज़ा बाद में लेना जीजा पहले सलहज की चूत का स्वाद तो ले लो देखो कबसे गीली होकर बह रही है,
गुंजन उठी और अपनी साड़ी खोल कर बिल्कुल नंगी होकर टांगे फैला कर खाट पर लेट गई, और अपनी गीली चूत को दिखाने लगी। जिसे देखते ही दीनू ने भी देर नहीं की और अपना मुंह उसकी टांगों के बीच घुसा दिया।
उन्हीं के घर के दूसरे कमरे में भी कुछ ऐसा ही कामुक नजारा था

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जहां नीतू और उसकी मां रज्जो एक दूसरे के होंठों को चूसने में व्यस्त थी तो वहीं कर्मा का जिगड़ी यार जग्गू नीचे बैठ कर नीतू के पेट को चाट रहा था उसके हाथ नीतू के चूतड़ों को मसल रहे थे जो कि एक पतली सी पैंटी में कैद थे, नीतू के बदन पर सिर्फ ब्रा और पैंटी थी वहीं उसकी मां रज्जो के बदन पर भी ब्रा थी और उसकी साड़ी को नीचे लटक रहीं थी, रज्जो अपनी बेटी के रसीले होंठों को लगातार चूस रही थी, साथ ही जग्गू की पीठ और कंधों को सहला रही थी,
तीनों के ही मुंह एक दूसरे के साथ व्यस्त थे और सिर्फ हलकी घुट्टी हुई आहों की आवाज आ रही थी, कुछ पल बाद जग्गू ने अपना मुंह नीतू के पेट से हटाया और घुमा कर रज्जो के भरे मांसल पेट को चाटने लगा चूसने लगा तो रज्जो के होंठ नीतू के होंठों पर और का गए, जग्गू ने अपना अगला निशाना रज्जो की नाभि को बनाया जिससे रज्जो पूरी तरह मचलने लगी। और फिर उसने जग्गू को बाल पकड़ कर ऊपर उठाया और अपने होंठ नीतू के होंठों से हटा कर उसके होंठों पर रख दिए, कुछ पल के चुंबन के बाद ही जग्गू ने अपने होठों को रज्जो के होंठों से हटा दिया, और बापिस मा बेटी के होंठों को मिला दिया। और खुद रज्जो के पीछे आकर अपना लंड साड़ी के ऊपर से ही उसके चूतड़ों में घिसने लगा।

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जग्गू: ओह चाची अपनी चूचियों के दर्शन तो कराओ,
ये कहते हुए उसने रज्जो की ब्रा पीछे से खोल दी जिसे नीतू ने अगले ही पल उसके बदन से अलग कर दिया, और अपनी मां की नंगी और मोटी मोटी चूचियों को मसलने लगी, वहीं जग्गू भी पीछे से उसके पेट और चूतड़ों को मसल रहा था और मसलते हुए उसने रज्जो की साड़ी भी खोल दी जिससे रज्जो अब पूरी तरह नंगी हो गई, जग्गू ने भी अपना कच्छा उतार दिया और अपने नंगे लंड को रज्जो के मोटे चूतड़ों के बीच घुसाने लगा, वहीं नीतू ने भी दोनों को देख कर अपनी ब्रा और पैंटी को उतार फेंका,

जग्गू: चाची अपनी बेटी से चूत चटवाओगी,
रज्जो: आह बेटा चूत चटवाने के लिए तो मैं हमेशा तैयार हूं, अब बेटी चाटे इससे अच्छा और क्या हो सकता है,
नीतू: अरे मम्मी इसमें भी कोई कहने की बात है जिस चूत से निकली हूं उसे नहीं चाटूंगी तो क्या चाटूंगी।
नीतू ने नीचे बैठते हुए कहा और अपनी मम्मी की टांगों के बीच अपना मुंह घुसा दिया, जग्गू भी रज्जो के पीछे बैठ गया और उसके चूतड़ों को फैलाकर उसकी गांड के छेद को चाटने लगा,
रज्जो दोहरे मजे से कराहने लगी,
रज्जो: आह ओह मेरे बच्चों ऐसे ही चाटो मेरी चूत और गांड, आह नीतू घुसा अपनी जीभ अपनी मां की चूत में, इसी चूत से निकली थी तू आह अच्छे से चूस। जग्गू तू भी ऐसे ही चाट अपनी चाची के गांड के गंदे छेद को अच्छे से गीला कर दे फिर अपना मोटा लंड घुसा कर अच्छे से मार मार कर फाड़ दियो मेरी गांड आह।
रज्जो गरम होते हुए बोली,
वहीं जग्गू के घर में रौनक कम नहीं थी, प्रेमा एक खाट पर आगे झुकी हुई थी और हमारा हीरो कर्मा पीछे से दनादन उसकी गांड में लंड पेल रहा था,

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प्रेमा जी साड़ी आधी खुली हुई थी और वो बिस्तर पर घुटनों और हाथों पर झुकी थी, साड़ी से पीछे से उठी हुई थी, ब्लाउज खुला हुआ था और दोनों मोटी चूचियां नंगी बाहर लटक रही थी, कर्मा का मोटा लंड प्रेमा की तंग गांड में दनादन अंदर बाहर हो रहा था जिसका असर प्रेमा पर और उसके चेहरे पर आ रहे भावों से पता चल रहा था,
प्रेमा: ओह ओह आह आह आह भैया आह आह गांड फाड़ दी ओह तुमने तो,
कर्मा: ओह भाभी की गांड तो होती ही है देवर के फाड़ने के लिए भाभी, आह तुम्हारी गांड नहीं फाडूंगा तो ओह कैसा देवर।
प्रेमा: आह बिलकुल फाड़ दो लल्ला आह रुको पर कपड़े उतार लेने दो आह नंगी कर के चुदना है आह मुझे,
कर्मा: लंड तो अब नहीं निकलेगा, आह ऐसे ही नंगी कर देता हूं भाभी ओह,
कर्मा ने साड़ी को प्रेमा के बदन से अलग करते हुए कहा, वहीं प्रेमा ने भी ब्लाउज को अपने बाजुओं से निकाल दिया और बिल्कुल नंगी हो गई, कर्मा लगातार उसकी गांड में पीछे से धक्के लगा रहा था, प्रेमा की गांड कर्मा के लंड पर कसी हुई आगे पीछे हो रही थी,
वहीं घर के दूसरे कमरे में भी कुछ ऐसा ही नज़ारा था सागर और अनुज एक साथ थे और मंजू ताई के भरे बदन से खेल रहे थे

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तीनों खाट पर थे, अनुज और सागर ने अंगोछे अपनी कमर से लपेट रखे थे ऊपर से दोनों का बदन नंगा था, सागर मंजू के होंठों को शिद्दत से चूस रहा था और साथ ही उसके हाथ मंजू की नंगी चूचियों पर चल रहे थे, मंजू के ब्लाउज को दोनों ने खोल रखा था और उसकी नंगी मोटी चूचियों को बाहर निकाल रखा था, अनुज मंजू के पीछे बैठ उसकी गर्दन को चूमते हुए उसके पेट और चूचियों को मसल रहा था, सागर ने कुछ पल बाद मंजू के होंठों को छोड़ा तो अगले ही पल अनुज उन्हें चूसने लगा, दोनों भाई बारी बारी से उसके होंठों का रसपान कर रहे थे,
कुछ पल बाद दोनों ने मंजू को खाट पर पीठ के बल लिटा दिया और दोनों उसकी एक एक चूची पर टूट पड़े।
मंजू: ओह बच्चों ओह आह ऐसे ही बेटा चूसो अपनी ताई और बुआ की चूचियों को, आह खा जाओ आह खा जाओ अच्छे से।
अनुज उसकी चूचियों को चूसते हुए उसकी साड़ी को खोलने लगा और कुछ देर बाद मुंह हटा कर उसने मंजू ताई के पेटीकोट और साड़ी को खोल कर कमर से नीचे सरका कर उसकी टांगों से निकाल दिया, सागर ने भी मंजू के ब्लाउज को उसके बदन से अलग कर दिया और उसे पूरा नंगा कर दिया, मंजू नंगी होते ही जोश में आई और सागर के लंड को पकड़ कर मुंह में भर लिया और चूसने लगी, वहीं अनुज ने मंजू की टांगों के बीच जगह ली और अपना लंड उसकी गरम चूत में उतार दिया,
अनुज: आह क्या चूत है ताई ओह इतनी गरम,
अनुज उसकी कमर थाम कर धक्के लगाने लगा,
सागर: मुंह भी बहुत गरम है आह बुआ का, बिल्कुल आह रंडियों की तरह चूसती है।
सागर उसके मुंह में धक्के लगाते हुए बोला।
जहां मंजू अनुज और सागर के साथ व्यस्त थी तो उनके पति यानि कर्मा के राजपाल ताऊ भी खाली नहीं थे और अकेले भी नहीं थी, राजपाल ताऊ और कर्मा के नाना एक साथ थे वो भी नीलेश के बाग में जहां नया घर बन रहा था वहीं क्योंकि रात में किसी न किसी को वहां रुकना पड़ता था कि क्योंकि समान के चोरी होने की आशंका रहती थी, पर अभी दोनों का ध्यान सामान पर नहीं था क्योंकि दोनों ही बिल्कुल नंगे थे एक दूसरे के बगल में और अपने आगे घोड़ी बनी हुई दो कच्ची कलियों की गांड मार रहे थे,

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नाना का लंड जहां लाडो की कसी हुई गांड में अंदर बाहर हो रहा था वहीं राजपाल का लंड पल्लवी की गरम गांड को अंदर तक भेद रहा था,
राजपाल: ओह आह बाबा कुछ भी कहो जो मज़ा आह गांड मारने में है आह वो किसी में नहीं,
नाना: ओह आह आह बिल्कुल सही कहा, आह बड़े जमाई बाबू, ओह और जब गांड कुंवारी कमसिन लड़की की हो तो ओह और फिर उस पर भी नातिन की हो तो मज़ा कई गुना बढ़ जाता है।

पल्ली: ओह आह कितनी बातें करते हैं आह ताऊजी और नाना, आह आह आह।
लाडो: आह सही में पल्ली, ओह अगर मेरी गांड में लंड आह नहीं होता तो आह मैं तो ओह बोर हो जाती,
इस पर दोनों हंसने लगती हैं,
राजपाल: अच्छा बिटिया ताऊ और नाना का मजाक उड़ा रही हो, बाबा जरा सबक सिखाया जाए इन्हें।
नाना: अरे नहीं बाबू बच्चियां हैं अपनी इन्हें क्या सबक सिखाना,
पल्ली: अरे नहीं नाना सिखाओ न मज़ा आयेगा,
राजपाल: तो लो अभी। ये लो आज तुम दोनों की गांड के धागे खोल देंगे,
राजपाल और तेजी से पल्ली की गांड में लंड चलाते हुए बोला, वहीं नाना भी लाडो की गांड तेजी से मारने लगे, नाना यहां लाडो की गांड मार रहे थे तो उनका बेटा यानी जमुना राजन के साथ था राजन और ममता के घर में थे और अभी राजन और जमुना मिल कर जमुना की बेटी किरन को दोनों ओर से घेरे हुए थे,

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किरन बिस्तर पर लेटी हुई थी उसकी टांगें फैली हुई थी और टांगों के बीच राजन थे जिसका लंड किरन की कड़ी और गरम चूत में घुसा हुआ था और राजन किरन की टांगों को थाम कर उसकी चूत में धक्के लगा रहे थे वहीं किरन के मुंह में उसके पापा का लंड था जिसे वो पूरी लगन से चूस रही थी, उसके बदन पर सिर्फ समीज थी जिसमें से उसकी चूचियां बाहर झूल रही थी।
राजन: ओह बिटिया कितनी मस्त चूत है तेरी आह आह ओह मज़ा आ गया।
जमुना: बिटिया की चूत होती ही मस्त है जीजा आह ओह चूसती भी कितनी बढ़िया है तू किरन आह आह,
दोनों बातें कर रहे थे वहीं किरन दोनों की सेवा में लगी हुई थी। वो जानती थी आज दोनों मिल कर अच्छी तरह उसे बजाने वाले हैं।


गैंदापुर में भी दारू का प्रोग्राम तो लगभग खत्म हो चुका था, अंजली और रानी नीचे रसोई का काम निपटा रहीं थीं।
रानी: तुम नहीं गई ऊपर अंजली मैं निपटा लेती काम तो,
अंजली: नहीं भाभी वहां सब पी रहे होंगे पापा और सब, मुझे देख कर सब खुल कर पी भी नहीं पाएंगे,
रानी: मैं तो जाऊंगी, मैं भी देखूं क्या क्या होता है,
अंजली: हां तुम जाओ न, मैं वैसे भी थक गई हूं नींद आ रही है।
रानी: हां हां थक ही गई होगी ससुराल जो गई थी आज,
अंजली: भाभी धत्त तुम बहुत खराब हो, इसलिए तुम्हे बताया था कि तुम मुझे चिढ़ाओ।
रानी: अरे मेरी प्यारी ननद को नहीं चिढ़ाऊंगी तो किसे चिढ़ाऊंं, रानी ने उसे गले लगाते हुए कहा तो अंजली भी हंसने लगी और उसे गले लगा लिया,
अंजली: अब जाओ तुम तुम्हें जाना है तो बाकी मैं निपटा कर सो जाऊंगी।
रानी: पक्का?
अंजली: हां भाभी पक्का

तब तक ऊपर चारों मर्दों को अच्छा खासा शुरूर हो रहा था वहीं मर्द और औरतें अब सब साथ बैठ कर बातें कर रहे थे, रानी भी ऊपर पहुंची और एक ओर को बैठ गई, और सबकी बातें सुनने लगी।

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सविता: सही में बहन जी मैं नहीं मान सकती भाई साहब ये करते होंगे!
सभ्या: अरे शादी के समय पर तो इनकी बात ही कुछ और थी, मैं कुछ कह तो दूं ये सब कर देते थे,
पीयूष: फिर भी चाची भरे सिनेमा हाल में गाना गाना ये कुछ ज़्यादा फिल्मी नहीं हो गया,
सभ्या: अरे बेटा तब तो बिल्कुल फिल्मी हीरो बनते थे ये।
नीलेश: अरे जानेमन तुम अब भी कह कर देख लो हम तो तुम्हारे लिए अब भी कुछ भी कर देंगे।
सभ्या: लो हो गए न शुरू, अब इनका हीरो बस नशे में बाहर आता है।
नीलेश: अरे नशे में कौन है, हम सच कह रहे हैं मेरी रानी तुम कहो तो अभी भी कुछ कह दो अभी कर के दिखा देंगे।
सब नीलेश और सभ्या की बातों पर हंस रहे थे, रानी को भी बहुत मज़ा आ रहा था पर वो बहू थी इसलिए कुछ बोल नहीं रही थी
शालू: अरे जीजी कुछ करने को कह ही दो न आज अच्छा मौका है,
नीलेश: हां हां कहो जो मन करे कहो,
महिपाल: आज नीलेश भाई पूरे जोश हैं।
शैलेश: अरे महिपाल भाई मर्द हमेशा जोश में ही रहता है, मर्द और घोड़ा कभी बूढ़ा नहीं होता।
महिपाल: अरे क्या बात कही है शैलेश भाई साहब बिल्कुल सही।
शालू: अरे तो सब लोग बातें ही करते रहोगे या कुछ करके भी दिखाओगे।
नीलेश: हम तो तैयार हैं तुम लोग कुछ बोलते ही नहीं।
शालू : सविता जीजी, कुछ बताओ न क्या करवाना है?
सभ्या: अरे मैं क्या बताऊं तू ही देख।
सविता: हां शालू तुम ही कुछ सोचो न,
शालू: अरे बहुरिया तुम ही कुछ सुझा दो,
शालू ने रानी की ओर देख कर कहा तो रानी उसके कान में कुछ बोली,
शालू: अच्छा तो जीजी के लिए मस्त एक बार नाच के दिखाओ हीरो की तरह।
सभ्या: धत्त ये अब अच्छे लगेंगे नाच गाना करते हुए,
पीयूष: क्यों नहीं अच्छे लगेंगे चाची मज़ा आयेगा, करने दो न।
ये लोग बात ही कर रहे थे कि इतने में नीलेश तो खड़े भी हो गए थे और फिर आवाज़ आई: मैं यमला पगला दीवाना हो रब्बा,
और फिर सब खुशी से ताली बजाने लगे,
महिपाल: जे बात,
शैलेश: जिओ भैया।
नीलेश कुछ पल नाचे और फिर रुक गए और बोले: अरे यार हीरोइन के बिना हीरो कैसे नाचे,
और पकड़ कर सभ्या को खींच लिया, सभ्या के खड़े होते ही सब ज़ोर से ताली बजाने लगे, सभ्या खड़े हुए शर्मा रही थी और हंस रही थी वहीं नीलेश पूरे जोश में नाच रहे थे,

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सब ताली बजा रहे थे और गाना गा कर नीलेश का पूरा जोश बढ़ा रहे थे, रानी भी पल्लू से मुंह छुपा कर हंस रही थी वहीं सविता भी खूब हंस रही थी,
नीलेश पूरा धर्मेंद्र का जोश लेकर नाच रहे थे और सभ्या के इर्द घूम के उसे छेड़ रहे थे सभ्या भी हंसते हुए सबको देख रही थी, थोड़ी देर बाद नीलेश रुके तो सबने जोर से तालियां पीट कर उनका स्वागत किया,
नीलेश: अरे तालियां वगैरह तो ठीक है पर ये बात गलत है कि हीरो अकेला नाचे और हीरोइन खड़ी रहे, ऐसे वो थोड़ी होता है.
महिपाल: वो क्या भाई साहब?
नीलेश: अरे वो ही जो हीरो हीरोइन करते हैं,
शैलेश: गाना बजाना, नाचना यही तो करते हैं।
नीलेश: अरे नहीं यार।
पीयूष: और क्या करते हैं हीरो हीरोइन?
इतने में रानी के मुंह से निकल गया: रोमांस करते हैं।
और ये बोल कर उसने शर्मा कर मुंह छुपा लिया,
नीलेश: बिल्कुल सही बोली बहू, ये ही ऐसे ही थोड़ी होता है रोमांस,
शालू: अरे अब इस उमर में रोमांस करोगे जीजा?
शैलेश: अरे हमने क्या कहा मर्द और घोड़ा बूढ़ा नहीं होता, भईया शुरू हो जाओ आज दिखाओ कितना रोमांस भरा है तुम्हारे अंदर।
महिपाल: और क्या भाई साहब आज दिखा ही दो,
सभ्या: अरे नहीं नहीं बहुत बन लियो हीरो अब रहने दो।
सभ्या ने बापिस जाते हुए कहा तो नीलेश ने उसका हाथ पकड़ कर बापिस खींच लिया और सभ्या फिल्मों की तरह ही उसकी बाहों में समा गई नीलेश ने उसे खुद से चिपका लिया,
पीयूष: अरे वाह चाचाजी,
शैलेश: ये हुई हीरो वाली बात भईया,
महिपाल: अब हो जाए रोमांस।
सभ्या: अरे क्या कर रहे हो छोड़ो, सब देख रहे हैं।
नीलेश: अरे देख रहे हैं तो देखने दो अपनी हीरोइन को ही तो पकड़ा है, क्यों भाई कुछ गलत है क्या?
शैलेश: नहीं बिल्कुल गलत नहीं है,
नीलेश: और क्या अब अपनी हीरोइन के साथ क्या कहते हैं रोमांस करेंगे,
ये कहते हुए नीलेश सभ्या के बदन को सहलाने लगे, सभ्या उनकी पकड़ से छूटने की कोशिश कर रही थी पर छूट नहीं पा रही थी, और फिर अचानक से नीलेश ने अपने होंठ सभ्या के होंठो से मिला दिए और जोश में चूसने लगे, बाकी सब भी हैरान रह गए सभ्या ने भी खुद को पीछे करने की कोशिश की पर नीलेश ने होने नहीं दिया और लगातार उसके होंठों को चूसने लगे कुछ पल बाद सभ्या भी उनका साथ देने लगी,

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सब लोग हैरानी से आंखें फाड़े उन्हें देख रहे थे खास कर महिपाल और उसका परिवार, उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि कैसे प्रतिक्रिया दें, उत्तेजित तो वो भी हो रहे थे सबको देख कर,
शैलेश: लगे रहो भैया भाभी,
शैलेश ने सीटी मारते हुए बोला
शैलेश के ये बोलने से महिपाल को भी लगा अगर खुल रहे हैं तो अच्छा ही है बाकी नशे में तो वो भी था,
महिपाल: कमाल कर दिया नीलेश भाई साहब,
सविता, रानी और शालू शर्माते हुए मुस्कुरा रही थी,
कुछ देर बाद नीलेश ने होंठों को छोड़ा तो सभ्या और नीलेश को सब देख रहे थे,
नीलेश: अरे ऐसे क्या देख रहे हो,
शैलेश: और क्या सब शादीशुदा हैं यहां पर सब करते हैं भइया,
नीलेश: और क्या, तुम लोग भी करो,
सभ्या: करेंगे सब करेंगे तुम अभी बैठो चल के,
नीलेश: बैठ जाएंगे यार लो बैठ गए,
नीलेश ने बापिस अपनी जगह बैठने को कहा,
शालू: अब किस से और क्या करवाना है।
शैलेश: कुछ भी करवालो पर ये नाच गाना मत करवाना ये नहीं होगा हमसे।
महिपाल: हां भाई हम से भी नहीं।
नीलेश: अरे भाई तुम लोग तो बड़े खराब हो हमसे करवा लिया और खुद मना कर रहे हो।
महिपाल: नीलेश भाई सब तुम्हारी तरह हीरो नहीं बन सकते न।
निलेश: वो तो हम हैं।
शैलेश: फिर क्या करना है अब,
शालू: अब क्या करना है सोना है।
सभ्या: और क्या सोते हैं देर हो गई है।
शैलेश: चलो भाई अगर सोना ही है तो सोते हैं,
सविता: चलो फिर मैं सबके बिस्तर लगवा देती हूं,
नीलेश: अरे भाभी जी, बिस्तर क्या यहीं सो जाएंगे सब चटाई है ही बस तकिए चाहिए़।
महिपाल: अरे नहीं भाई साहब यहां कहां आराम से नीचे सोते।
शैलेश: अरे सही कह रहे हैं भैया, सुहाना मौसम है सब साथ में सोएंगे।
शालू: हां ये ठीक रहेगा, और मजेदार चीज बताऊं औरतें एक साथ सोएंगी और आदमी एक साथ।
नीलेश: अरे यार ये तो गलत बात है।
सभ्या: गलत सही पता नहीं ऐसे ही सोएंगे अब तो।
सबिता: पीयूष रानी तुम लोग एक और बड़ी चटाई और तकिए और पानी वगैरह ले आओ।
रानी: अभी लाई मम्मी जी।
पीयूष और रानी नीचे चले गए,
महिपाल: मैं भी बाथरूम हो आता हूं, थोड़ी समान लाने में बच्चों की मदद भी कर दूंगा।
महिपाल भी नीचे चला जाता है, और नीचे हल्का होकर पीयूष और रानी के पास जाता है जो कपड़े निकाल रहे होते हैं,
महिपाल: निकल गए कपड़े और तकिया वगैरा?
रानी: हां पापाजी,
पीयूष: वो तो सब हो गया पर लगता है आज रात सूखा सोना पड़ेगा।
महिपाल: अरे वही तो यार सब साथ में सो रहे हैं तो सब खराब हो गया, मेरा तो बहुत मन कर रहा है।
रानी: मन तो है पापाजी पर क्या कर सकते हैं,
महिपाल: एक काम करना जब सो जाएं तो हम लोग चुप चाप नीचे आ जाएंगे और एक एक राउंड निपटा कर वापिस जा कर सो जायेंगे।
पीयूष: हां ये हो सकता है।
महिपाल: रानी अपनी मम्मी को बता देना तू ये चुप चाप।
रानी: ठीक है पापाजी।
महिपाल: चलो सब अब ऊपर चलते हैं।
कुछ देर बाद सब ऊपर थे बिस्तर बिछ चुके थे एक तरफ चारों औरतें थी, सभ्या फिर सविता उसके बगल में शालू और फिर रानी, सविता दोनों बहनों के बीच में थीं और बातें कर रही थी लेट कर, इसी तरह मर्द भी दूसरे बिस्तर पर थे, निलेश, शैलेश, महिपाल और पीयूष।
महिपाल: आराम से तो लेटे हो न भाई साहब कोई परेशानी हो तो बताना।
नीलेश: परेशानी तो एक ही है भाई साहब तुम जानते ही हो हमें क्या चाहिए होता है पीने के बाद।
शैलेश: अरे भइया आराम से पीयूष भी यही है।
महिपाल: कोई बात नहीं शैलेश बाबू, लड़का जब बड़ा हो जाए तो दोस्त बन जाता है, खुल कर बात करो।
पीयूष: किस बारे में बात हो रही है वैसे मौसा?
महिपाल: अरे तेरे मौसा और चाचा की परेशानी है कि इन्हें शराब के बाद शबाब की तलब लगती है और आज वो तलब मिट नहीं सकती इसलिए परेशान हैं।
पीयूष: अच्छा वैसे ये तलब तो सबको लगती है चाचाजी, पर क्या कर सकते हैं।
शैलेश: यार ये सबके साथ में सोने वाली बात गलत निकल गई मुंह से।
महिपाल: वहीं तो इसीलिए मैने भी मना किया था, पर अब तो औरतें मानेंगी भी नहीं।
नीलेश: हां अब सोने की कोशिश करो सब और कोई चारा नहीं है।
इधर औरतों की भी बातें जारी थी, और वो भी धीरे धीरे सोने की कोशिश करने लगीं।
रानी आंखें बंद करके सोने का नाटक करने लगी वो सविता से उस बारे में बात नहीं कर पाई थी उसने सोचा जब उठेगी तब हल्के से जगा देगी, नाटक करते हुए उसकी आंख कब लग गई उसे पता ही नहीं चला अचानक से किसी के हिलाने से उसकी आंख खुली तो उसने हल्के से आंख खोल के देखा तो उसका पति था, पीयूष ने उसे तुरंत शांत रहने का इशारा किया और उसे चुपचाप से चलने को कहा, वो भी तुरंत उठ कर पीयूष के पीछे पीछे चल दी, उसने एक नज़र पीछे मूड कर डाली तो सब सो रहे थे, पीयूष और रानी के नीचे जाने के कुछ देर बाद ही महिपाल भी अपनी जगह से उठा और चुपचाप नीचे चला गया, उसके जाने के कुछ पल बाद ही शैलेश की आंख खुली और उसने हाथ बढ़ा कर हल्का सा नीलेश को जगाया, और फुसफुसाया: मैने कहा था न भैया,
नीलेश ने आँखें खोल कर देखा तो सिर्फ वो ही लोग थे
नीलेश: आओ फिर हम क्यों सूखे सोएं,
वो भी उठे और औरतों के बिस्तर के पास पहुंचे जहां अभी सभ्या, सविता और शालू सो रही थी, नीलेश सभ्या की ओर जाकर लेट गए और शैलेश शालू की ओर, नीलेश ने धीरे से सभ्या का चेहरा अपनी ओर मोड़ा और अपने होंठों को उसके होंठों से मिला दिया, सभ्या की आंख भी तुरंत खुल गई और जब उसने नीलेश को सामने देखा तो वो भी तुरंत साथ देने लगी, निलेश भी उसकी कमर और पेट सहलाते हुए उसे चूमने लगे
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यही दूसरी ओर शैलेश और शालू का प्रोग्राम भी चल रहा था दोनों के होंठों में कुश्ती हो रंही थी, पर चारों ही इस बात से अनजान थे कि सविता भी उठ गई थी और वो दोनों जोड़ों को देख रही थी और गरम हो रही थी, और उत्तेजना में अपने पेट को अनजाने में ही सहला रही थी, कुछ देर बाद निलेश और सभ्या के होंठ अलग हुए तो सभ्या ने मूड कर देखा और उसकी और सविता की नज़रें मिल गईं, न सविता ने ये जताने की कोशिश की कि वो सो रही थी न सभ्या ने अपनी आँखें हटाई, बल्कि एक मुस्कान उसके होंठों पर फैल गई,
सभ्या: उठ गई बहन जी, कुछ देखा तो नहीं?
सभ्या ने उसकी ओर मुड़कर उसकी आंखों में देखते हुए कहा,
सविता: जो देखना चाहिए था वही देखा बस,
सविता ने भी सभ्या के हाथ को सहलाते हुए कहा, और उसकी तरफ करवट ले ली,
सभ्या: पिछली बार का स्वाद भूली तो नहीं?
सविता: ये भी कोई भूलने की चीज है,
ये कहते हुए सविता ने अपना चेहरा आगे किया और सभ्या ने भी और अगले ही पल दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसने लगी, नीलेश भी अपनी पत्नी और सविता के चुंबन देख कर गरम हो रहे थे और उत्तेजित होकर सभ्या के पेट को सहलाते हुए उसकी गर्दन को चूमने लगे। वहीं दूसरी ओर से शालू झुक कर सविता की पीठ को चूमने लगी और शैलेश हाथ बढ़ा कर सविता के पेट को सहलाने लगे।

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दोनों औरतें पागलों की तरह एक दूसरे के होंठों को चूस रही थी और बाकी सब भी उनके इर्द गिर्द अपने काम में लग गए थे,
शैलेश: आह भाभी बड़ा मन था तुम्हारी गांड और चूचियों को नंगा देखने का पिछली बार तो रह गई अब नहीं छोडूंगा।
शैलेश ने सविता की चूचियों को ब्लाउज़ के ऊपर से मसलते हुए कहा तो सविता की आह सभ्या के मुंह में ही घुट गईं।

नीलेश: अरे सब देख लेना शैलेश भाई, अब कहां जा रही है भाभी, महिपाल भाई लगता है हमारे लिए ही छोड़ कर गए हैं।
शालू ने भी सविता की पीठ से होंठ हटाए और बोली: पहले अपनी पत्नी पर ध्यान दो बहुत दूसरी औरतों को देखते हो,
और शैलेश को पकड़ कर चूमने लगी, शैलेश भी उसका साथ देते हुए उसे चूमते हुए भी सविता के बदन को सहलाने लगे। वहीं नीलेश उठ कर सविता और सभ्य के पीछे आ कर बैठ गए थे और एक एक हाथ से सविता और सभ्या के बदन को मसलने लगे,

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कुछ पल बाद सविता और सभ्या के होंठ अलग हुए तो नीलेश ने सविता के होंठों को चूसना शुरू कर दिया, वहीं सभ्या तो सविता के ब्लाउज के हुक खोलने लगी और कुछ पल बाद हो सविता का ब्लाउज खुल चुका था और ब्रा नीचे थी और अगले ही पल सभ्या उन पर टूट पड़ी और उसकी चूचियों को चूसने लगी जबकि नीलेश उसके होंठों को चूस रहे थे, नीलेश के हटते ही शैलेश ने सविता के होंठों पर कब्ज़ा कर लिया और चूसने लगा, एक एक करके चारों उसका स्वाद चख रहे थे,
दूसरी ओर रानी और पीयूष के जाने के बाद जब महिपाल पीछे पीछे नीचे पहुंचा और उसने पीयूष और रानी के कमरे को हल्का सा खोल कर देखा तो पाया उसने जैसा सोचा था वैसा ही नज़ारा था,

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अंदर बिस्तर पर उसका बेटा और बहू थे, बहू की साड़ी ऊपर उसकी जांघो तक इकट्ठी हो रखी थी वहीं उसका ब्लाउज खुला हुआ था चूचियों को पीयूष पीछे बैठ कर मसल रहा था, ये देख कर महिपाल का लंड ठुमके मारने लगा, और वो अंदर कमरे में आया,

पीयूष: कोई जागा तो नहीं पापा?

पीयूष ने रानी की चूचियों और पेट को मसलते हुए कहा,
महिपाल: नहीं तभी तो थोड़ा रुक कर आया हूं मैं। बहू तूने तेरी मम्मी से कहा था आने को?
रानी: नहीं पापाजी ओह वो चाची और मौसी ही मम्मी से बात कर रही थी लगातार इसलिए बोल ही नहीं पाई।
महिपाल: कोई बात नहीं बेटा हम तीन ही बहुत हैं, झेल लेगी न तू हम दोनों को,
महिपाल कहते हुए बिस्तर पर झुके और रानी के होंठों को चूमने लगे, वहीं पीयूष लगातार उसके पेट और चूचियों को मसल रहा था उसका कड़क लंड रानी के चूतड़ों में ठोकर मार रहा था
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पीयूष: आह मेरी जान आज तुम्हारे चूतड़ों में घुसा जा रहा है मेरा लंड तो अब रहा नहीं जाता आह चूस दो न।
महिपाल ने भी रानी के होंठों को छोड़ा और बोला: सच में बहू मेरा भी यही हाल है, एक तो वैसे ही नशा ऊपर से तुम दोनों का बदन देख देख कर लंड बैठने का नाम ही नहीं लेता,
रानी: अच्छा हम दोनों का या सभ्या चाची और शालू मौसी का, उनको भी अच्छे से निहार रहे थे आप पापा।
पीयूष: अरे तो इसमें गलत क्या है जब निहारने वाली चीज होगी तो निहारेंगे ही,
महिपाल: सच में दोनों ही बिल्कुल मस्त माल हैं गांड और चूचियों को ब्लाउज़ और साड़ी में से देख कर ही लंड तन जा रहा था,
रानी: ओहो देखो तो उनके बारे में सोच कर ही तुम्हारा लंड कैसे झटके मार रहा है पापा।
रानी ने हाथ बढ़ा कर पजामे के ऊपर से ही उसके लंड को सहलाते हुए कहा,
महिपाल: अब क्या ही कहूं बेटा। दोनों ही एक दम चोदने लायक हैं,
पीयूष: सोचो पापा चोदने का मौका मिलेगा तो क्या करोगे?
महिपाल: अरे जी भर के चोदूंगा दोनों बहनों को, आह ये भी कोई पूछने की बात है।
महिपाल ने अपना कुर्ता उतारते हुए कहा और फिर पजामा और कच्छा उतार कर पूरा नंगा हो गया.

ये सब बातें ही चल रही थी कि दरवाजा फिर से हल्का सा खुला और तीनों ने एक साथ दरवाज़े की ओर देखा तो तीनों हैरान रह गए देखते हुए।


जारी रहेगी
 
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