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: story me jis introduction ki jarurat t thi wo ho chuka he, raghav ke kai cheharon me se ek samane he , lekin ksnde ki layers khulani baki he. yaha note karne ke wali bat ye he ke neha ne bhi kafi halchal ki heUpdate 5
“क्या हो रहा है वहा”
पीछे से एक डीप डोमीनेट करने वाली आवाज आई, उस आवाज मे एक जरब थी, हुकिमीपन था जो किसी को भी अपने सामने झुका सकता था
नेहा अपनी जगह पर जम गई थी हर बीतते पल के साथ उसके दिल की धड़कने भी बढ़ रही थी और नेहा को अब उसके गुस्से से डर लग रहा था
वहा खड़े सब लोग डर से नीचे देख रहे थे और नेहा भगवान से प्रार्थना कर रही थी के इस फ्लोर पर मौजूद सभी को उसके गुस्से से बचा ले
“स.. सर.. वो.. ये लेडी बगैर अपॉइन्टमेंट के आपके केबिन की तरफ जा रही थी और जब मैंने उसे रोका तो उसने कहा के उसे किसी अपॉइन्टमेंट की जरूरत नाही है” जिसने नेहा को रोका था उस लड़की ने कॉन्फिडेंट बनते हुए कहा और तभी नेहा के दिमाग मे एक बात आई
वो तो उसके केबिन मे नही जा रही थी वो तो पापा के केबिन मे जा रही थी
“टर्न”
उसने नेहा से कहा मानो वो उसकी कोई इम्प्लॉइ हो नेहा अपनी सारी का पल्लू पकड़ा और उसकी ओर मुड़ी, उसकी वो डोमीनेट करने वाली आवाज नेहा को कुछ सोचने ही नही दे रही थी, उसकी आवाज मे कोई नम्रता नही थी लेकिन नेहा ने अपने आप को शांत रखा
और वो उसकी तरफ मुड़ी और उस इंसान की तरफ देखा जो अभी उसके सामने खड़ा था
जो उसका सबकुछ था
परफेक्ट जॉलाइन तीखी नाक और उससे भी खूबसूरत आंखे, जेल लगा कर सेट किए हुए बाल हल्की दाढ़ी और काले रंग के सूट में वो वहा कहर ढा रहा था, उसके ऑफिस की लगभग हर लड़की को उसपर क्रश था और हो भी क्यू न वो था ही वैसा, इस जगह का राजा
राघव देशपांडे
नेहा ने उसकी नीली आँखों मे देखा, पहली बार उसने उसके साथ नजर मिलाई लेकिन बस एक सेकंद के लिए बाद ने उसने अपनी नजरे घुमा ली
राघव ने कुछ समय तक उसको देखा और फिर एक ऐसा सवाल पूछा जिसकी नेहा को कोई उम्मीद नही थी,
राघव- नाम क्या है तुम्हारा?
राघव ने साफ सर्द आवाज मे पूछा
नेहा और बाकी इम्प्लॉइ उसे ऐसे देख रहे थे मानो वो कोई भूत हो लेकिन वो बस नेहा को देख रहा था ईमोशनलेस चेहरे के साथ
राघव- इनसे इनका नाम पूछो
राघव ने उस लड़की से कहा जिसने नेहा को रोका था, उसकी आवाज से खतरे का अंदाज लगाया जा सकता था
“आप.. आपका नाम क्या है मैडम” उस लड़की ने हकलाते हुए पूछा
नेहा- न.. नेहा
नेहा ने इधर उधर देखते हुए अपनी आँखों मे जमे आँसुओ को छुपाते हुए कहा जिसमे वो कमियाब भी रही
कौन लड़की चाहेगी के उसका पति उससे शादी के पाँच महीने बाद उसका नाम पूछे वो भी ऐसे लोगों के सामने जो उनका रीलेशन जानते थे
राघव- पूरा नाम।
नेहा- नेहा देशपांडे
राघव- मैंने पूरा नाम पूछा है
राघव ने दोबारा नेहा की तरह देखते हुए अपने हर शब्द पर जोर देते हुए कहा
नेहा- नेहा राघव देशपांडे
नेहा ने नीचे देखते हुए कहा
राघव- मिसेस नेहा राघव देशपांडे
राघव ने एक एक शब्द पर जोर देते हुए नेहा को देखते हुए कहा जिससे नेहा ने भी उसकी ओर देखा
उसके मुह से आज अपना नाम सुन कर नेहा को अच्छा लगा लेकिन साथ ही उसके रूखे व्यवहार से तकलीफ भी हो रही थी राघव ने फिर उस लड़की की तरफ देखा
राघव – मुझे लगता है ये पहचान काफी है
राघव ने एक सर्द आवाज मे कहा और फिर अपने अससिस्टेंट से बोला
राघव- रवि, इसका टर्मिनेशन लेटर बनाओ
इतना बोल कर राघव अपने केबिन मे वापिस चला गया बगैर किसी की तरफ देखे और नेहा शॉक होकर उसकी तरफ देखती रही लेकिन नेहा से ज्यादा वो लड़की शॉक मे थी
“मैडम सॉरी मैडम, मुझे नाही पता था आप सर की वाइफ है, मुझे माफ कर दीजिए मैडम” उस लड़की की हेकड़ी उतर चुकी थी
नेहा- मैं बात करती हु
इतना बोल कर नेहा राघव के पीछे पीछे उसके केबिन मे चली गई
नेहा रघाव के पीछे बगैर नॉक किए केबिन मे जाने वाली थी लेकिन वो अपनी जगह रुक गई और उसने सोचा
‘ये पहले ही गुस्से मे है कही इनका गुस्सा ज्यादा ना बढ़ जाए’
नेहा ने केबिन का दरवाजा खटखटाया लेकिन कोई जवाब नही आया, नेहा ने दोबारा थोड़ा जोर से खटखटाया लेकिन इस बार भी हालत सेम ही रही फिर नेहा सीधा दरवाजा खोल कर अंदर चली गई
अंदर राघव अपनी खुर्ची पर आंखे मूँदे बैठा था
केबिन मे आने के बाद नेहा ने एक बात नोटिस की थी के अब राघव ने सिर्फ सफेद शर्ट और पैन्ट पहनी हुई थी कोट उसका सोफ़े पर पड़ा हुआ था..
नेहा को समझ नही आ रहा था के बात कैसे शुरू करे, बाकी लोगों के सामने तो वह बहुत बातुनी थी लेकिन राघव के सामने उसकी बोलती बंद हो गई थी ऐसा लग रहा था मानो उसके गले मे आवाज ही ना हो
राघव- अब तुम कुछ बोलोगी या वैसे ही मुझे देखती रहोगी
राघव ने वैसे ही बैठे बैठे बंद आँखों के साथ पूछा उसकी आवाज मे इरिटेशन झलक रहा था, नेहा ने अपनी नजरे घुमाई और बोली
नेहा- प्लीज उसे फायर मत कीजिए उसकी कोई गलती नही थी
राघव- तो किसकी गलती थी?
राघव ने अपनी आंखे खोली और अपने दोनों हाथ टेबल पर रखते हुए नेहा की ओर देखते हुए उससे पूछा और इससे पहले नेहा कुछ कह पाती वो आगे बोला
राघव – अगर पापा को पता चला के मैंने इस मामले मे कोई एक्शन नही लिया है तो मुझे उनका लेक्चर सुनना पड़ेगा तो मैंने एक्शन ले लिया ज्यादा मत सोचो
राघव ने थोड़ा रुडली कहा जिसके बाद नेहा से कुछ बोलते ही नही बना
राघव – वैसे तुम क्यू आई हो ?
राघव ने अपना लैपटॉप ऑन करते हुए पूछा जिसके बाद नेहा का दिमाग चला के वो वहा क्यू आई थी
नेहा- वो पापा का केबिन कहा है, मुझे उन्हे ये फाइल देनी थी
जिसके बाद राघव ने अपना एक हाथ बढ़ा दिया लेकिन नजरे उसकी लैपटॉप मे ही जमी हुई थी जिससे नेहा थोड़ा उदास हो गई
राघव- मुझे दे दो मैंने ही वो फाइल पापा से कह कर मँगवाई थी
नेहा- नहीं
जिसके बाद राघव ने अपना काम रोका और नेहा को देखा
नेहा- वो... मतलब पापा ने कहा था के फाइल बस उन्हे ही देनी है इसीलिए उन्होंने फॅमिली मेम्बर को लाने कहा था
जिसके बाद राघव ने उसे थोड़ा घूर के देखा
‘नेहा क्यू शेर को शिकार का मौका दे रही हो’ नेहा ने मन ही मन सोचा
राघव- मुझे दे दो मैं दे दूंगा पापा को
नेहा- नहीं, मैं सिर्फ पापा को ही ये फाइल दूँगी आपको चाहिए तो पापा से ले लेना
नेहा से थोड़ा कॉन्फिडेंट बनते हुए कहा और इसके आगे राघव कुछ बोल पाता शेखर वहा आ गया
राघव- अंदर घुसने से पहले नॉक नहीं कर सकते क्या!
राघव शेखर पर भड़क गया जिससे वो दोनों ही वही जम गए
शेखर- अरे यार भाई आराम से मुझे नाही पता था आपको भाभी के साथ प्राइवसी चाहिए
राघव- शट उप !
राघव पहले ही बाहर हुए वाकये से गुस्से मे था और अब उसमे शेखर उसे छेड रहा था
शेखर- भाभी बड़े पापा ने कहा है के फाइल भाई को ही दे दो
शेखर की बात सुनते ही नेहा ने हा मे गर्दन हिलाई और फाइल राघव की डेस्क पर रख दी और राघव उसे ऐसे देखने लगा मानो वो कोई ऐलीअन हो
‘वाह! मैंने कहा फाइल मुझे दे दो तो मेरी बात तो नहीं मानी लेकिन शेखर के बोलते ही फट से फाइल रख दी’ राघव ने मन ही मन सोच जिससे उसका गुस्सा थोड़ा और बढ़ गया
शेखर- और हा मैंने पापा और बड़े पापा को लंच दे दिया है आपने भाई को दे दिया ?
जिसके बाद नेहा ने लंच बॉक्स भी टेबल पर रख दिया
नेहा – मा ने कहा है पहले कहना खा लीजिएगा फिर काम कीजिएगा
नेहा से बहुत प्यार से कहा जीसे कोई मना कर ही नहीं सकता था लेकिन अपने राघव भाई बस लैपटॉप मे नजरे टिकाए बैठे रहे
शेखर- चलो भाभी हम लोग चलते है भाई खाना खा लेना और भाई दादू का स्ट्रिक्ट ऑर्डर है के आज 8 बजे के पहले घर आ जाना वरना दादू का गुस्सा देखने के लिए रेडी रहना
शेखर की बात सुनकर राघव ने नेहा की ओर देखा और सोचा के काही इसने अपनी कम्प्लैन्ट तो नहीं कर दी जिसके बाद नेहा और शेखर दोनों वहा से चले गए
आज इन पाँच महीनों मे पहली बार उन दोनों के बीच इतनी बात हुई थी और यही वो दोनों इस वक्त सोच रहे थे और यहा मैं सोच रहा हु के दादू को ऐसी कौनसी बात करनी है जिसके लिए उन्होंने राघव को जल्दी बुलाया है अगर आप भी यही सोच रहे है तो साथ बने रहिए आगे भाग मे तब तक आप लोग अपने कमेंट्स मे राघव को गाली दे सकते है मुझे बुरा नहीं लगेगामिलते है आप से अगले अपडेट मे..
क्रमश:
new thread ke liye