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Kon sa language me likhu batao aap sab jispar 5 vote aa jayega uspar likhunga

  • Hindi

    Votes: 20 37.0%
  • Hinglish

    Votes: 36 66.7%
  • Khanai pasand aa raha hai ki nahi

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  • Ha

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  • Na

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    54

Iron Man

Try and fail. But never give up trying
45,970
123,868
304
♣️ Update 12 ♣️

Previous

घर आकर किसी ने कुछ नहीं कहा—न कुलवंत ने, न सज्जन ने। अब सिमर की मौज थी। जब मन करता कोमल को नंगा कर लेता, जब मन करता मम्मी-डैडी के कमरे में जाकर माँ को पिता के सामने नंगा कर लेता।

Ab next
अगले एक साल तक सिमर ने अपनी बहन कोमल को पूरी राज़ी-खुशी से चोदा। कोमल का शरीर अब पूरी तरह बदल चुका था। सिमर उसे अपनी बीवी की तरह रखता था और रोकने वाला घर में कोई नहीं था। कोमल को भी कोई एतराज़ नहीं था। वह अपने छोटे भाई से इतना प्यार करती थी कि जो सिमर कहता, वही करती। वह अब सिमर के साथ ठीक वैसी रहती जैसे कोई घरवाली रहती है। मम्मी-डैडी भी दोनों को कुछ नहीं कहते थे। दोपहर की रोटी खाने के बाद बेटी के कमरे से आने वाली आवाज़ें अब सज्जन सिंह को परेशान नहीं करती थीं।
यहाँ तक कि जब सिमर ने पहली बार कोमल की गांड में लंड डाला था, तो दर्द इतना हुआ था कि उसकी पॉटी निकल गई थी, लेकिन फिर भी सेक्स के मामले में कोमल ने कभी सिमर को मना नहीं किया। लेकिन एक बात और थी—अब कोमल का सिमर पर कंट्रोल पहले से कहीं ज्यादा हो गया था।
पहले सिमर कॉलेज में लड़ाई-झगड़ों में टॉप पर रहता था और पढ़ाई में डिपार्टमेंट में 33वें नंबर पर था। अब पढ़ाई में उसका नंबर 50-60 तक पहुँच गया था। यह सब कोमल के हाथ और उसकी जूती का कमाल था। कुलवंत कौर भी हैरान थी कि सिमर की पढ़ाई में इतनी प्रोग्रेस कैसे आई, क्योंकि उसे पता नहीं था कि कोमल अब सिमर के साथ उससे भी ज्यादा सख्त हो गई है। कोई भी गलती होने पर सिमर अपनी बहन की नंगी टांगों पर पीठ लिटाकर लेट जाता था।
एक दिन की बात है। सिमर जब घर आया तो पता चला कि आज फिर किसी से लड़ाई हुई है। कपड़े फटे हुए थे और मुँह लाल हो रहा था।
कुलवंत कौर ने जैसे हमेशा गुस्से में पूछा, लेकिन कोमल ने बीच में टोक दिया और सिमर की तरफ मुड़कर बोली:
“तू कमरे में जा के वेट कर। मेरी बेहतर है तेरे लिए। चल, तित्तर हो जा यहाँ से।”
सिमर को पता था इसका मतलब क्या है। मुँह लटकाकर बोला:
“प्लीज रहने दो ना आज… आगे से नहीं करूँगा, प्रॉमिस करता हूँ पक्का।”
कोमल गुस्से में: “जो कहा सुनता नहीं? तुझे पता है ना मेरा?”
कुलवंत: “क्या हुआ? इसका रंग क्यों उड़ गया कमरे में जाने का नाम सुनके?”
कोमल ने चुटकी मारते हुए सिमर को कमरे की तरफ इशारा किया। सिमर चुपचाप चल पड़ा। वह अपनी बहन को मना भी नहीं कर सकता था। एक-दो बार कोशिश की थी, रिजल्ट ये निकला कि कोमल उसे हाथ भी नहीं लगाने देती थी—सेक्स तो दूर की बात। बातचीत भी बंद कर देती थी। सिमर बेचारा कोमल के इस इमोशनल ब्लैकमेल में फँस गया था।
कोमल ने माँ से कहा:
“रंग तो उड़ाया सिमर का। तुम जब से इसके साथ फिजिकल रिलेशनशिप में हो, तुम कुछ कहती नहीं। इसकी ऐसी लड़ाइयाँ दिन-ब-दिन बढ़ गई थीं। ऊपर से फेल होने लगा था तो तुम्हारी जिम्मेदारी मैंने संभाल ली…”
कुलवंत: “सच्ची…? हम्म, अब समझी इसमें इतनी इम्प्रूवमेंट कैसे आई। लेकिन ये मान कैसे गया?”
कोमल: “बस मना लिया। चलो, मैं चलती हूँ। वो मेरा वेट कर रहा होगा। रोटी बना लीजियो, मुझे टाइम लग जाएगा।” (आँख मारते हुए)
कुलवंत: “कर लूँगी। जा तू…”
कमरे में जैसे ही कोमल आई, सिमर हर बार की तरह नंगा कोने में कान पकड़कर खड़ा था। कोमल के पैरों की आवाज़ सुनते ही पता चल गया था। फिर कोमल के कपड़े उतारने की आवाज़ आई—क्योंकि जब भी कोमल सजा देती, तो खुद भी नंगी हो जाती थी।
कोमल: “सिमर, आ जा…”
सिमर मुड़ा तो अपनी प्यारी बहन को नंगी देखकर मुँह में पानी आ गया। लंड तो पहले से ही खड़ा था।
सिमर: “दीदी, रहने दो ना प्लीज… आगे से नहीं करूँगा गलती।” (कान अभी भी पकड़े हुए)
कोमल: “ओके, रहने देती हूँ। नहीं मारती। लेकिन सच-सच मेरी बात का जवाब दे। गलती तेरी थी लड़ाई में? तू जानबूझकर पंगा लिया था उनसे?”
“खुद बता दे सच मुझे। अगर तू झूठ भी बोलेगा तो मैं खेत चेक करने जाऊँगी वहाँ? तुझे क्या लगता है, मुझे मजा आता है तुझे मारके? खुद सोच—तेरे किए से अगर लड़ाई में कुछ हो गया तो…”
सिमर चुपचाप खड़ा रहा। उसके पास जवाब नहीं था। भले सेक्स में वह बहुत एक्सपीरियंस्ड हो गया था, लेकिन हाँ तो अभी भी 19 साल का बच्चा ही था।
कोमल: “अब बोलता नहीं? दे जवाब तो। चला जा बाहर और जब मूड हो तब आना मजे करने, मेरे छोटे वीर।” (शैतानी अंदाज़ में)
सिमर बिना कुछ बोले अपनी बहन की गोद में लेट गया। लंड पूरा खड़ा था, जिसे कोमल ने अपनी टांगों में ले लिया। अब सिमर की पीठ पूरी तरह टारगेट पर थी।
कोमल ने धीरे-धीरे हल्के थप्पड़ों से शुरुआत की। अब उसके हाथ काफी हार्ड हो चुके थे—क्योंकि सिमर अपनी सजा का बदला बहन से घर में एक्सरसाइज करवाकर लेता था। खुद जिम जाता और कोमल से घर में डंड-बैठक मरवाता।
करीब 5 मिनट मारने के बाद कोमल ने नीचे देखा तो गलत जूती पहनी थी—वह जूती जिससे वह सिमर को नहीं मारती थी।
कोमल: “औच, सॉरी सिमर… मैं जूती लाना भूल गई। वो मम्मी ले गई थी डैडी पर यूज़ करने के लिए लास्ट वीक। मैं वापस लेना भूल गई। प्लीज ले आ मम्मी से।”
सिमर पीठ मलता हुआ उठा और बाहर आ गया। पीठ से सेंक निकल रही थी।
मम्मी अपने कमरे में टीवी देख रही थी। सिमर को नंगा, एक हाथ आँखों पर और दूसरे से पीठ मलता देखकर बोली:
“आ गया तू बड़ी जल्दी। फ्री करता है तेरे को। कोमल ने… मैं होती तो तेरी चंगी खबर लेती। लेकिन पता नहीं क्यों, तेरे से फुद्दी मरवा के बाद अब तेरे को सजा देने का दिल नहीं करता।”
सिमर आगे होकर माँ को हग कर लिया और गाल पर किस करते हुए बोला:
“आज कहाँ चढ़े हो तुम? सजा वाली जूती ले आए थे, वो लेने आया मैं।”
कुलवंत: “ओह हाँ, सच। तेरे डैडी के लिए लेके आई थी। देख, मेरे ब्रा-पैंटी वाले ड्रॉअर में पड़ी होगी।”
वह स्पेशल जूती थी—पैरों के तलवे और पीठ पर ज्यादा असर करती थी। कुलवंत को अपने पुत्तर के लिए बुरा लग रहा था, लेकिन पता था यह सब उसके भले के लिए है। अगर सख्त न हुईं तो बाकी लड़कों की तरह यह भी बिगड़ जाएगा।
कमरे में वापस जाकर सिमर ने लेदर वाली जूती कोमल को दी और फिर से बहन के नंगे पट्टे पर लेट गया। कोमल ने फिर 5-7 थप्पड़ मारे, फिर जूती से गांड रेडी करके अगले 15 मिनट पूरी जान से बेदर्दी दिखाते हुए लगातार कुटाई की। सिमर खुलकर रोने लगा—दर्द से भी और शर्म से भी। पहले कोमल सिर्फ बहन थी, अब वाइफ जैसी भी थी जिसके साथ वह सोता था।
जब कोमल ने खत्म किया तो वह खुद भी रोने लगी थी। सिमर की पीठ पर उसके आँसू गिरने लगे थे, लेकिन वह नहीं रुकी। रुकने के बाद सिमर को महसूस हुआ कि बहन भी रो रही है।
सिमर उठा और हँसाने के लिए बंदर की तरह गांड मलता हुआ कमरे में कूदने लगा। कोमल हँसने लगी तो सिमर ने उसे खड़ा करके हग कर लिया।
सिमर: “ले दीदी, तुम भी हद करते हो। कुटते हो मुझे, फिर खुद रोने लग जाते हो। ये क्या बात हुई?”
कोमल: “फिर क्यों ऐसे काम करता है कि मुझे ये सब करना पड़े… चल छोड़ अब। सजा के बाद फिर वही टॉपिक छेड़ के क्या फायदा।”
यह कहकर कोमल सिमर की टांगों में बैठ गई और उसके ढीले पड़े लंड को मुँह में डाल लिया। पहले लंड खड़ा था, लेकिन मार पड़ने के बाद ढीला हो गया था।
कोमल की गर्म-गर्म जीभ से कुछ ही पलों में लंड फिर खड़ा हो गया। कोमल एक हाथ से टट्टों पर पोले-पोले हाथ फेरती हुई तेज़ी से मुँह आगे-पीछे करने लगी। सिमर से कंट्रोल नहीं हुआ और उसने सारा माल कोमल के मुँह में ही गिरा दिया।
कोमल सारा माल गटककर बोली: “चल अब थोड़ी देर पढ़ ले।” यह कहकर नंगी ही गांड मटकाती बाथरूम में चली गई।
अपनी बहन के हिलते चूतड़ देख सिमर का दिल जोर से धड़का, लेकिन फिर भी उसने तकिया कुर्सी पर रखकर पढ़ना शुरू कर दिया।
कोमल और सिमर के प्यार का असर कोमल के शरीर पर भी दिखने लगा था। ब्रा 32 से 34 हो गई थी, चूतड़ फैल गए थे, पट्टे गोल-मटोल और मोटे हो गए थे। सिमर ने अपनी पतली बहन का शरीर भर दिया था। ऐसा कोई दिन नहीं होता था कि सिमर उसे चोदे बिना सोता। हर रात उसकी टाँगें भाई के कंधों पर हिलती रहतीं। भले सिमर मम्मी को भी चोदता था, लेकिन कोमल का पूरा ख्याल रखता था।
कुलवंत कई बार सिमर से कह चुकी थी कि कोमल के साथ कम कर दे, क्योंकि पड़ोस की औरतें गॉसिप करती थीं कि कोमल का शरीर वैसी औरतों जैसा हो रहा है। अब कुलवंत को बेटी की फिक्र होने लगी थी। वह जल्दी से अच्छा लड़का देखकर कोमल का विवाह करवाना चाहती थी।
एक अच्छा लड़का खेत में जल्दी मिल जाता। कोमल सुंदर-सुशील थी और अब पहले जैसी मारियल भी नहीं रही थी। एक साल में सिमर ने और निखार दिया था—शरीर सही जगह पर भरा हुआ था।
जब भी कोमल के विवाह की बात होती, सिमर का मुँह उतर जाता, लेकिन कोमल समझाने पर मान जाता। कोमल हमेशा कहती: “तेरा हक कोई नहीं ले सकता। मैं दूर नहीं करवाऊँगी विवाह। लगे ही करवाऊँगी ताकि तू घेड़ा मारता रहे घर।”
उधर दिलप्रीत भी गाँव वापस आई थी। उसका घरवाला किसी काम से बाहर गया था, तो वह गाँव आ गई। उसी शाम सिमर ने हैप्पी को फोन करके दिलप्रीत को मिलने बुला लिया।
सिमर ने काफी दिनों बाद दिलप्रीत को देखा। एक बार तो पहचान ही नहीं पाया। शरीर गुदवा हो गया था। सिमर को यकीन नहीं हो रहा था कि यह वही लड़की है जिसकी उसने सील तोड़ी थी।
सिमर: “बाले मेरी जान, तू तो बिल्कुल बदल गई। कितनी निखर गई है तू। शरीर भी सही जगह से भरा हुआ अब तो।”
दिलप्रीत: “हेहे… बस ऐसे ही है। ये बात तुझे पता होनी चाहिए थी बुद्धू। राम के विवाह के बाद लड़की का शरीर बदल जाता है। हिप्स भरे हो जाते हैं, फैल जाते हैं। ब्रा का साइज भी बदल जाता है। पट्टे और गुदवे हो जाते हैं मेरे भोले मदारी।”
सिमर: “हाहाहा… ये तो मुझे पता है कि लड़की बदल जाती है, लेकिन तू तो कितनी निखर गई है। साली, तुझे गालियाँ आती भूल गई? तेरी सील मैंने ही तोड़ी थी।”
दिलप्रीत: “क्यों गुस्सा करता है? मैं कुछ नहीं भूली। जो भूली होती तो तेरे को मिलने क्यों आती? दूसरी बात—तेरे पास मेरा नंबर भी तो होगा। तू सीधा मुझे फोन क्यों नहीं किया? हैप्पी वीर जी को क्यों फोन किया?”
यह कहकर दिलप्रीत ने सलवार का नाड़ा खोला, कच्छी सलवार के साथ उतारकर साइड रख दी। कमीज और ब्रा तो सिमर ने आते ही उतार दी थी। दोनों टाँगें सिमर के आसपास करके गोद में बैठ गई।
सिमर: “ओह बस उसका ही किया था—तेरे भाई को तंग करने के लिए। दूसरा कोई शक मत कर, पंगा पाएगी।”
दिलप्रीत: “हाँ, बात तो तेरी सही है। वैसे भी हैप्पी पाजी से क्यों डरना? भाभी बताती थी कि तू हैप्पी के सामने ही चोदता है उसे और पाजी से चूपे भी मारवाए।”
सिमर मजे से उसके मम्मे मसलता, गाल का रस पीने लगा। निप्पल्स मसलता, नंगे शरीर से खेलने लगा।
काफी देर मम्मे चूसने के बाद सिमर ने दिलप्रीत को लिटाया और गोरे पट्टों को चूमने लगा। चूमते-चूमते उसकी फुद्दी गौर से देखने लगा।
सिमर: “तेरे नीचे वाले गाल कितने फैल गए हैं। बाहर निकल गए हैं जैसे गुलाब के फूल की पंखुड़ियाँ।”
दिलप्रीत: “हाँ, ये तो होना ही था। मेरा घरवाला पुलिस वाला है। तुझे पता है पुलिस वाले ऐसे ही होते हैं। रोज़ तो नहीं करता मुझे नंगी, क्योंकि पता नहीं कब ड्यूटी पर बड़े साहब के साथ बाहर जाना पड़े। लेकिन जब घर होता है, न खुद सोता है न मुझे सोने देता।”
सिमर: “हाहाहा… ठीक है। फिर तो अच्छी बात है—लंड की कमी नहीं। वैसे तेरी ढीली फुद्दी और गांड देखकर पता नहीं लगा उसे कि तू पहले मरवा चुकी है?”
दिलप्रीत: “तेरा घोड़े जैसा लंड है, पता तो लगना ही था। लेकिन मैंने पहले ही बता दिया था—विवाह से 10 दिन पहले। साफ बोल दिया कि मैं अपने बॉयफ्रेंड के साथ सब कर चुकी हूँ। कोई भूल्का न रखे दिल-दिमाग में। वो बोला—कोई बात नहीं, मुझे कोई एतराज़ नहीं।”
सिमर: “हाँ, फिर तो बंदा ठीक है तेरा।”
दिलप्रीत: “चल, उसकी तरफदारी बंद कर। साथ मार। कितनी देर ऐसे नंगी रखेगा? मेरी फुद्दी से पानी निकल-निकल पट्टे गीले हो गए हैं।”
सिमर ने टाँगें कंधों पर रखीं और एक झटके में लंड फुद्दी में डाल दिया। दिलप्रीत की फुद्दी पहले से खुली लगी, लेकिन फिर भी मजेदार थी। कुछ देर ऐसे मारने के बाद सिमर ने उसे घोड़ी बनाया और झटका मारा—निशाना फुद्दी नहीं, गांड था।
दिलप्रीत: “हायyyy मैं मर गई मम्मी! अह्ह्ह्ह सी… क्या करता है? बता तो देता गांड में डालने से पहले! हाय ओउउउईईई।”
सिमर हँसता हुआ गांड पर थप्पड़ मारकर भवा पीछे कर, फाड़कर जोर-जोर से चोदने लगा। कभी फुद्दी, कभी गांड—मारते-मारते सारा माल फुद्दी में ही गिरा दिया।
थोड़ी देर रेस्ट के बाद दिलप्रीत ने कपड़े पहने और सिमर के ऊपर लेटकर बोली:
“एक बात करनी थी तेरे से। गुस्सा न करना।”
सिमर: “हाहा… बोल। तेरी बात पर कभी गुस्सा किया?”
दिलप्रीत: “मुझे पता लगा तुम कोमल दीदी का रिश्ता ढूँढ रहे हो?”
सिमर: “हाँ, ढूँढ रहे हैं। लेकिन कोई अच्छा लड़का मिल नहीं रहा अभी।”
दिलप्रीत: “जो कहे तो तेरी बहन का रिश्ता मैं मनजीत दीदी के लड़के यानी अमन के साथ करवा सकती हूँ। वो तो तेरी बहन पर लट्टू हुआ फिरता है। घर में कलेश डाला था कि मेरा विवाह की बात करो तुम्हारे घर…”
सिमर दिलप्रीत को खड़ा करते हुए: “तेरा दिमाग सेट है? वो अभी 21-22 साल का है। नाले अभी वैहला है—ना कोई काम, ना कार…”
दिलप्रीत: “नहीं-नहीं, ऐसे की बात नहीं। वो अब काम करता है। जमीन-वाड़ों की। डेयरी फार्म खोला हुआ है। बड़े अच्छे पैसे बना लेता है…”
सिमर: “यार, तुझे तो पता है मैं उसकी बहन तनवीर की भी सील तोड़ी थी। ये बात तेरे जीजा और दीदी दोनों को पता है। अब मेरी बहन का रिश्ता उसके साथ अच्छा लगेगा…?”
दिलप्रीत: “ऐसे फालतू न सोचा कर। जो तू उसकी बहन चोद चुका है, अब वो तेरी चोद लेगा तो क्या हुआ? सियाना बन। देख, तेरे को भी फायदा—हमारे घर में एंट्री मिल जाएगी। बहन घर तो तू जाता ही करता है। भाभी, मैं, तनवीर और मनजीत दीदी—चारों औरतें तेरे नीचे लेटी पड़ी करेंगी। तू अपनी बहन नहीं चुदवा सकता अमन से? वो भी विवाह करवा के। इतना भोला मत बन—मुझे पता है तेरा बहन के साथ भी टांका फिट है।”
सिमर: “तेरे को कैसे पता?”
दिलप्रीत: “इस बार आई तो लगा। कोमल बाहर तो जाती नहीं कहीं। शरीर देखा—मेरे से भी दो कदम आगे। मतलब तूने खोल दिया अपनी बहन का।”
सिमर: “चल ठीक है। मैं मम्मी को बता दूँगा। लेकिन तेरे घरवाले की बहन भी मैं चोदनी है।”
दिलप्रीत सिमर को बाहों में लेते हुए: “हरामजादे कुत्ते… कितना बड़ा कमीना है मेरे तबार की। इतनी चोद ली, अभी भी आँख है तेरी…”
यह कहकर दोनों अपने-अपने घर चले गए। सिमर खुश था—क्योंकि मिंटू, मनजीत और तनु तीनों पर उसका कंट्रोल था। दिलप्रीत भी अपने यार से मिलकर खुश थी, भले यार ने सूखी गांड मारकर उसकी चाल बिगाड़ दी थी और वह फिर से हल्की लंगड़ाती चल रही थी।
Shaandar update
 

tera hero

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♣️ Update 13 ♣️

घर आकर सिमर काफी देर तक सोचता रहा। फिर अपनी बहन की खुशी के लिए वह तैयार भी हो गया। लेकिन समस्या यह थी कि लड़के की उम्र अभी 22 साल चल रही थी और कोमल की 26वीं चल रही थी। वैसे तो 3-4 साल का फर्क ज्यादा नहीं माना जाता, लेकिन यह लड़के के लिए होता है ज्यादातर। लड़की हमेशा लड़के से छोटी होती है। आखिरकार उसने अपनी मम्मी से सीधी बात करना ही बेहतर समझा...

कुलवंत कौर और सज्जन सिंह भी जल्दी ही मान गए कि हाँ, परिवार ठीक है, विवाह करने में कोई समस्या नहीं। कोमल भी यह सब दरवाजे के पास खड़ी सुन रही थी।

कोमल और सिमर ऐसे ही लेटे पड़े थे रात में तो कोमल बोली—

“तू तो बड़ा खुश होना चाहिए अब।”

सिमर: “क्यों? क्या गल हो गई...”

कोमल: “तू मेरी होने वाली ननद को मेरे ससुर के सामने चोद चुका है, मेरी सास भी तेरे तले लेटने को फिरती है और मुझे तो तूने चोद-चोदकर देख क्या बना दिया—सूखी-सी थी साल भर में इतना शरीर भर गया जैसे पता नहीं कितनी बार चुद गई हो...”

सिमर: “ले दीदी, तू खुश नहीं वै? ”

कोमल: “हा हा मैं भी खुश हाँ। अच्छी फैमिली है। लड़के को भी मैंने देखा है—स्मार्ट है, देखने में। बाकी जो तुझे सबको पसंद है तो मुझे क्या एतराज़ हो सकता है। क्योंकि खासम तो तू ही रहेगा मेरा। दुनिया की नजर में बस वो होगा। तू जब चाहे मेरे ऊपर चढ़ सकता है...”

सिमर ने अपनी बहन के नाले को खींचते हुए कहा—

“चल ना, मैं तुझे आज भी नहीं छोड़ता। चलो, आज थोड़ी एक्सरसाइज करवाता हूँ।”

यह कहकर सिमर ने अपना लंड बाहर निकाल लिया...

कोमल एक्सरसाइज के नाम से ही घबरा जाती थी... आगे भी सिमर आप तो आराम से तले लेट जाता और कोमल को लंड ऊपर तपाने के लिए बोल देता। लंड पर तपते-तपते कोमल के पट्टे फूल जाते, बहुत थक जाती वह...

हर रात की तरह आज भी कोमल सुबह 3 बजे सोई। अब तो आदत पड़ गई थी उसकी इस सब की... पहले दिनों की तरह अब सारी रात चुदाई के बाद उसकी टाँगें नहीं काँपती थीं। नहीं तो पहले तो सुबह सारी रात चुदाई के बाद उसकी टाँगें भर नहीं झलकती थीं...

दूसरी तरफ अमन भी बहुत खुश था। जब दिलप्रीत ने फोन करके उन्हें बताया कि सिमर और उनके घर वाले विवाह के लिए मान गए हैं, उन्हें कोई एतराज़ नहीं और जल्दी ही घर बात करने आएंगे।

लेकिन जसप्रीत (उसकी माँ) के मन में अभी भी थोड़ा डर था क्योंकि सिमर को ऐसे उनके घर आने की कुल मिल जाएगी... और उसे सिमर का पता था कि वो लड़का सेक्स के मामले में कितना पागल है। तनु को जितना वो ठोकता था, उसे पता था कि एक बार उसके लड़के का विवाह सिमर की बहन से हो गया तो वो दोनों माँ-बेटी को नहीं छोड़ेगा...

यही बातें दोनों माँ-बेटी कर रही थीं...

जसप्रीत: “क्या करूँ इस लड़के का? एक लड़की पीछे पागल फिरता है। इसे पता ही नहीं कि इसका होने वाला साला क्या चीज है...”

तनु: “ले जी, पता होता तो वो मुसीबत की बहन को अपनी घरवाली बनाने का न सोचता। हे हे... उसकी बहन हमारे अमन तले और हम दोनों माँ-बेटी हे हे हे... समझ गई...

वैसे एक बात कहूँ मम्मी, गुस्सा न करना...”

जसप्रीत: “तेरी किस बात का गुस्सा...”

तनु: “दिलप्रीत का फोन आया था। उसने मेरे साथ बात शेयर की थी। कहती आगे न करूँ लेकिन तुम्हारे साथ तो कोई बात नहीं। इसलिए बता रही हूँ। दिलप्रीत कह रही थी—सिमर ने पिछले 1-2 साल से अपनी बहन कोमल को भी टिक्का रखा हुआ है...”

जसप्रीत: “हााँ सच्ची...? वैसे इसमें बड़ी बात भी नहीं क्योंकि वो लड़का मैंने देखा है—पूरा पागल है सेक्स पीछे...”

तनु: “हाँ, बता रही थी दिलप्रीत। कह रही थी कोमल को तो पूरी तरह बदलकर रख दिया उसने...”

जसप्रीत: “हे हे हे... वो तो बदलनी ही थी। जब इतना बड़ा किल्ला जैसा लंड रोज़ फिरता...

चल कोई नहीं। कर लेंगे। उनके घर जाकर हमारे लिए अच्छा रहेगा। जब मर्जी आए कर आया करो बहन के घर।”

यह कहकर आँख मार दी। जसप्रीत भी हँस पड़ी।

तनु: “हे हे हे... तुम्हारा भी दिल करता होगा उसके तले लेटने का...”

जसप्रीत: “पहले नहीं करता था क्योंकि तेरा पापा ही हफ्ते में 3-4 बार मेरे खेत में पानी लगा जाता था। लेकिन पता नहीं क्यों अब नया करने को दिल करता है। उस दिन जब तेरे ऊपर और मनजीत ऊपर सिमर चढ़ा था, मेरा भी दिल आ गया...”

तनु ने अपनी माँ को जकड़ते हुए: “तो कर लाओ। तुम्हें क्या डर है? किसी ने कुछ कहना? डैडी तो आजकल वैसे भी तुम्हारी टाँगों तले हैं...”

जसप्रीत: “हाँ, जिस दिन अमन के रिश्ते की बात करने जाएँगे, उस दिन मैं वहीं रुक जाऊँगी... अगर तुझे भी रुकना हो तो तू भी रुक जाना। इकट्ठे कर लिया...”

तनु: “नहीं, पहले तुम 1-2 बार अकेले मजा लो। अपना रास्ता तो चोरा करवाओ। वैसे पता है न उसका कितना मोटा है। इसलिए एडजस्ट होने में टाइम लगेगा तुम्हें...”

ऐसे ही दोनों की बातें चलती रहीं और बाद में दोनों अपने-अपने काम-काज में लग गईं...

दूसरी तरफ दिलप्रीत अपने ससुराल वापस चली गई थी। रात की रोटी खाकर दोनों लेटे पड़े थे...

परदीप (दिलप्रीत का घरवाला): “किधर हो गई पिंडो मिल आई यारों को...”

दिलप्रीत हँसते हुए: “हाँ मिल आई अपने यारों को। क्यों, तुम भी मिलना...”

परदीप: “हाँ साली बेशर्म, कैसे बोलती है? देखी सच्ची तो नहीं कर आई कोई कांड...”

दिलप्रीत ने अपनी पजामा और पैंटी उतार साइड रख दी और टाँगें खोलते हुए: “पहले इधर आओ अपनी ड्यूटी पर, फिर बताती हूँ...”

परदीप: “सच्ची दे आई पिंड अपने उसी मिस्टिरियस यार को?”

दिलप्रीत ने अपने घरवाले का सिर टाँगों में घुसेड़ते हुए: “आहो... उसके साथ कोई जरूरी बात करनी थी इसलिए मिलने गई थी। ये तो तुम्हें पता ही है—यार को मिलने गई हो तो कोई लड़की बिना वजह तो अगले को जान नहीं देती। नंगी तो करनी ही है...”

परदीप ने सिर पर हाथ मारते हुए: “हाय रब्बा... घस्ती पाले पे गई मेरे। कैसे अपनी यार की तारीफ अपने घरवाले के आगे कर रही है...”

यह कहकर वह एक बार अपनी घरवाली की फुद्दी को गौर से देखता हुआ फिर चाटने लगा...

दोनों ऐसे ही खुलकर बात करते थे क्योंकि कभी भी दोनों ने एक-दूसरे से कुछ नहीं छुपाया था... परदीप भी आजकल के मॉडर्न ख्यालों वाला लड़का था इसलिए कोई गुस्सा नहीं करता था क्योंकि वह खुद भी अब तक काफी लड़कियों को चोद चुका था।

दिलप्रीत: “अच्छा मैं घस्ती हूँ? लगता है तुम्हें घस्ती बनकर दिखाना पड़ेगा...”

परदीप: “ओ नहीं-नहीं मेरी माँ... क्यों गुस्सा करती हो? मैं तो मजाक कर रहा था।”

यह कहकर उसने दिलप्रीत के गोरे पट्टे को चूम लिया...

दिलप्रीत: “आज मेरा मूड ठीक नहीं है। पता ही है मेरा तुम्हें...”

परदीप: “थैंक्यू मैडम जी। इतना तो वादे साब आ जाने नहीं देते। मैं जितना तेरा डर है मुझे हँसते-हँसते भी बंड फाड़ देनी है। हमारे पुलिस वाले से ज्यादा तो तू कुटती है मुझे। कहाँ से सीखा ये सब? कितनी बार पूछा तुझे, तू बताती नहीं...”

दिलप्रीत: “उसी ने सिखाया था जिसने आगे-पीछे का उद्घाटन किया था...”

परदीप: “बड़ा खतरनाक बंदा वैसे तो फिर... बीसी उस दिन एस.एच.ओ साब भी पूछ बैठे—क्या हुआ तुझे? कुर्सी पर क्यों हिली जा रही है इधर-उधर... अब मैं क्या बताऊँ कि दारू पीकर घर गया था तो कुट पड़ी...”

दिलप्रीत: “हे हे हे... खीने कहा था दफन नू हा मान लिया कि थोड़ी बहुत पी ली है। थोड़ा टुन होकर घर आ जाओ फिर घर के खरोद पाओ।”

परदीप: “तेनू वैसे एक बात का पता?”

दिलप्रीत: “कौन सी बात का?”

परदीप: “भले मैंने तुझे विवाह से पहले ही सब सच-सच बता दिया था, लेकिन फिर भी मुझे यकीन नहीं था। सोचा—चलो बॉयफ्रेंड था, 2-4 बार कर लिया तो क्या हुआ। मैं तो सारा तेल लेकर आया था रूम में। लेकिन जब पहली रात तुझे नंगी किया, तले देखा—बहनचोद तुझे तो चोद-चोदकर खिला दिया पूरी उसने...”

दिलप्रीत: “चलो बस करो अब। क्यों सोचते हो? तुम्हारी किस्मत में थी मैं तुम्हें मिल गई। और मैंने तुम्हें कभी रोका दूसरी औरतों के साथ करने से... चलो अब आ जाओ। और कितनी देर चूसनी है मेरी... तुम जो अपना लॉलीपॉप चुसवाना तो बता दो। नहीं तो आओ मारो सात...”

परदीप: “नहीं तेरी गल्लां नाल अलरेडी मेरा लंड फटान ते आया। तेरे मुँह की गर्मी ने इसे पिघला देना एक मिनट में...

चलो जिदा तेरा दिल करदा।”

यह कहकर दिलप्रीत ने अपनी टाँगें अपने घरवाले के कंधों पर रख लीं। अगले ही पल उसकी फुद्दी में मजेदार लहर भर गई जब लंड एक घसे में पूरा अंदर चला गया... भले लंड सिमर जितना मोटा नहीं था लेकिन फिर भी बुरा नहीं था। दोनों काफी देर लगे रहे। पोज बदल-बदलकर परदीप अपनी पूरी ड्यूटी निभा रहा था और आखिर में उसने अपना सारा पानी दिलप्रीत की फुद्दी में ही छोड़ दिया और साइड में गिर पड़ा।

परदीप ने दिलप्रीत की फुद्दी को टिशू पेपर से साफ करके उसे अपने ऊपर लेटाते हुए: “जो मर्जी हो जाए लेकिन तू मजा बहुत देती है। शर्म-वेगरा वाला काम बेडरूम के बाहर अच्छा लगता है, हसबैंड-वाइफ में नहीं...”

दिलप्रीत ने माथे से पसीना साफ करते हुए: “हे हे हे... थैंक्यू हसबैंड। आगे तो फुद्दी में आग लगी हुई थी। पता नहीं क्या-क्या बोल जाती थी। मैं तुम्हें गुस्सा तो नहीं लगा मेरी गल्लों का?”

परदीप: “नहीं-नहीं गुस्सा नहीं। हाँ जलन तो होती है कि ये सोचकर मेरी जनानी पर कोई बेगाना पुट भी चढ़ता है। लेकिन हाँ गुस्सा नहीं आता। ये बात पक्की है... कई बार दिल में आता है कि तुझे और तेरे यार को मजा करते देखूँ क्योंकि इतना टाइम हो गया विवाह को, इतना तुझे चोदा आगे-पीछे। तूने कभी मना नहीं किया भले दिन हो या रात... फिर सोचा तू गुस्सा न कर जाए...”

दिलप्रीत: “अच्छा जी फिर तो ठीक है। अगर गुस्सा नहीं करते तो अब जो तुम सादी बेशर्म वाली कैटेगरी में आ ही गए हो तो तुम्हें राज की बात दस ही देनी है। तुम्हारी बड़ी बहन भी मेरे यार तले पड़ती है...”

परदीप: “क्या? कौन सी बड़ी बहन? मतलब मनजीत दीदी? नहीं-नहीं यार वो तो कितनी सिंपल है। मॉडर्न नहीं, शरीफ है, डीसेंट है... कितनी...”

दिलप्रीत: “हे हे हे... अपनी बहन सबको शरीफ ही लगती है। मेरी भाभी है। मेरे से ज्यादा नहीं जानते तुम...”

परदीप: “नहीं ऐसी बात नहीं। लेकिन यार वो कैसे इस चक्कर में फँस गई? कितनी शरीफ होती थी पहले...”

दिलप्रीत: “वो तो बड़ी लंबी स्टोरी है। बाकी तुम्हारी बहन ने मेरे पति को कंट्रोल करके रखा हुआ है। मेरे पति बेचारे को आप फाड़ के पूना पड़ता है। तुम्हारी बहन की फुद्दी में लंड मेरे ही यार का...”

परदीप: “ओ रब्ब दा वास्ता बस कर। मैं सुबह ड्यूटी पर जाना है। तेरी गल्लां फिर मूड बनाई जाती...”

दिलप्रीत: “अच्छा जी गल्ल क्यों बदल रहे हो? सीधा कहो न कि बहन पर चढ़ने का दिल करता है...”

परदीप: “तू भी न हद कर देती है। बहन पर कैसे चढ़ सकता है कोई...”

दिलप्रीत: “सब कुछ हो सकता है। बस तुम मैं जो करूँ रोकना मत करना। ओके... किसी को पता नहीं लगना चाहिए।”

परदीप: “तेनू आगे कभी रोका? जो अब रोका जाएगा...”

यह कहकर उसने दिलप्रीत को जकड़ लिया और लेट गया।

इधर गोपी की बहन संदीप फिर से पंगे में थी क्योंकि संदीप का लड़का अब साल का हो गया था। जैसा आम औरतों में होता है कि जोड़ी रला लो। संदीप की सास भी उन दोनों के पीछे पड़ी हुई थी।

संदीप: “प्लीज यार, मम्मी को समझाओ न कि एक ही बच्चा काफी है...”

संदीप का घरवाला: “हाँ यार, मानता हूँ। मैं तेरी बात मम्मी को कहा भी था लेकिन तुझे पता है माता जी कहाँ मानती हैं। कोई नहीं, हम फिर ट्राई करते हैं। जट्ट पूरा कायम है...”

संदीप मन ही मन में: “हाँ कुत्ते पाले रख, ये भुलक्कड़ अपने मन में...”

अगर तू कायम होता तो मुझे अपनी टाँगें अपने भाई के यार के आगे न खोलनी पड़ती...

संदीप: “हाँ जी हाँ जी, जिदा तुम्हें ठीक लगे।”

यह कहकर उसने अपना सूट और ब्रा मम्मों से ऊपर चढ़ा लिया और सलवार व पैंटी उतार साइड रख दी। क्योंकि संदीप को पता था कि ये अच्छी तरह चूसेगा बस घसे मारकर साइड में गिर जाएगा...

संदीप: “वैसे मैं 20-22 दिन के लिए पिंड हो आऊँ? कितने चिर हो गया, गई ही नहीं...”

घरवाला: “हाँ हाँ चली जा, कोई गल नहीं। वैसे भी तू बच्चे के बाद पिंड गई ही नहीं। जितना चिर दिल करदा रह, पैसे मेरे पर्स से ले लेना जितने दिल करदा।”

यह कहकर वह अपने नॉर्मल ढंग से संदीप की टाँगों में आ गया। कोई 2-3 मिनट उसने संदीप के मम्मे चूसे और साथ ही अपना लंड फुद्दी में धक दिया। थोड़ी ही देर बाद वह साइड में गिर पड़ा था अपना काम खत्म करके।

संदीप का पानी निकला या नहीं, इससे उसे कोई मतलब नहीं था। संदीप माथे पर हाथ रखे सोच रही थी कि गोपी से कैसे बात करेगी कि तुझे अपने यार को दोबारा बुलाना पड़ेगा ताकि वो फिर मेरी टाँगें चुक सके।

Hinglish

Ghar aa ke Simar kaafi der sochta raha. Fir apni behan ki khushi ke liye woh ready bhi ho gaya. Par problem yeh thi ki munde ki age abhi 22 saal hi thi aur Komal ka 26th chal raha tha. Waise to 3-4 saal ka gap zyada nahi maana jaata, par yeh mostly ladke ke liye hota hai. Ladki hamesha ladke se chhoti hoti hai. Aakhir usne apni mummy se seedhi baat karna hi better samjha...
Kulwant Kaur aur Sajjan Singh bhi jaldi hi maan gaye ki haan family theek hai, viaah karne mein koi problem nahi. Komal yeh sab darwaze ke paas khadi sun rahi thi.
Komal aur Simar aise hi late pade hue the raat ko. Tab Komal boli – “Tu to bada khush hona ab”
Simar: “Kyun ki baat ho gayi...”
Komal: “Tu meri hone wali nanad ke saamne chodega, meri saas bhi tere neeche leti phirti hai aur mujhe to tu chhod-chhod ke dekh – saal bhar mein kitna body bhar gaya jaise pata nahi kitni baar chud gayi hoon...”
Simar: “Le didi, tu khush nahi ho rahi toh...”
Komal: “Haha main bhi khush hoon yaar. Badhiya family hai, ladke ko bhi maine dekha hai – smart hai, dekhne mein bhi acha. Baaki jo tujhe sabko pasand hai toh mujhe kya etraaz ho sakta hai. Kyunki khasam to tu hi rahega mera. Duniya ki nazar bas woh hoga, tu jab chahe mere upar chadh sakta hai ve...”
Simar apni behan ke naakhun khinchta hua bola – “Aaj to nahi chadhna. Chal aaj thodi exercise karwata hoon.” Yeh keh ke Simar ne apna lund bahar nikaal liya...
Komal exercise ke naam se ghabra jaati thi... Pehle bhi Simar aaram se neeche let jaata aur Komal ko lund upar tapkaane ke liye bol deta. Lund pe tapakte-tapakte Komal ke patte full jaate, badi thak jaati thi woh...
Har raat ki tarah aaj bhi Komal subah 3 baje soyi. Ab to aadat pad gayi thi usko is sabki... Pehle dinon ki tarah ab saari raat chudai ke baad uski taangein nahi kaamp ti thi. Nahi to pehle to subah saari raat chudai ke baad uski taangein bhar nahi uth paati thi...
Doosre side Aman bhi bada khush tha jab Dilpreet ne phone kar ke bataya ki Simar aur uske ghar waale viaah ke liye maan gaye hain, unko koi etraaz nahi aur jaldi hi ghar baat karne aa jayenge.
Par Jaspreet (Aman ki maa) ke man mein abhi bhi thoda dar tha kyunki Simar ko unke ghar aane ki full entry mil jaayegi... Aur usko Simar ka pata tha – woh ladka sex ke maamle mein kitna pagal hai. Tanu ko jis tarah woh thokta tha, usko pata tha ki ek baar uske bete ka viaah Simar ki behan se ho gaya to woh dono maa-beti ko nahi chhodega...
Yeh baatein dono maa-beti kar rahi thi...
Jaspreet: “Kya karein is munde ka? Ek ladki ke peeche pagal ho raha phirta hai. Isko yeh nahi pata ki aisa hone wala saala kya cheez hai...”
Tanu: “Le agar pata hota to woh musibat ki behan ko apni biwi banane ka sochta hi nahi. Hehe, uski behan hamare Aman ke neeche aur hum dono maa-beti... Hehehe samajh gayi... Waise ek baat kahu mummy, gussa na karna...”
Jaspreet: “Teri kis baat ka gussa...”
Tanu: “Dilpreet ka phone aaya tha. Usne mere saath share kiya tha. Keh rahi thi aage na karna par thodi si baat to banta hai. Isliye bata rahi hoon – Dilpreet keh rahi thi Simar ne last 1-2 saal se apni behan Komal ko bhi tikka rakha hai...”
Jaspreet: “Haaaa sachi...? Waise isme badi baat bhi nahi kyunki woh ladka maine dekha hai – pura pagal hai sex ke peeche...”
Tanu: “Haan bata rahi thi Dilpreet. Keh rahi thi Komal ko to pura badal ke rakh diya usne...”
Jaspreet: “Hehehe... Woh to badalni hi thi jab itna bada killa jaisa lund roz phirna...”
Chal koi na. Unke ghar jaake hamare liye achha rahega. Jab marzi aaya karo behan ke ghar. Yeh keh ke aankh maarti Jaspreet bhi has padi.
Tanu: “Hehehe... Tera bhi dil karta hoga uske neeche letne ka...”
Jaspreet: “Pehle nahi karta tha kyunki tera pita hi hafte mein 3-4 baar mere khet mein paani laga jaata tha. Par pata nahi kyun ab naya karne ka dil karta hai. Us din jab tere upar aur Manjeet upar Simar chadh gaya tha, mera bhi dil aa gaya...”
Tanu apni maa ko jhappi maarte hue – “To kar lo na. Tujhe koi kuch nahi bolega. Daddy to aajkal waise bhi teri taangon ke neeche hain.”
Jaspreet: “Haan jis din Aman ke rishte ki baat karne jaungi, us din main wahan ruk jaungi... Agar tu bhi rukna chahe to tu bhi ruk jaana. Saath kar lenge...”
Tanu: “Nahi pehle tu 1-2 baar akeli maja le. Apna rasta to clear karwa le. Waise bhi pata to chalega uska kitna mota hai, adjust hone mein time lagega tujhe...”
Aise hi dono ki baatein chalti rahi aur baad mein dono apne-apne kaam mein lag gaye...
Doosre taraf Dilpreet apne sasural wapas chali gayi thi. Raat ki roti kha ke dono log late pade hue the...
Pardeep (Dilpreet ka pati): “Kaisi ho gayi? Pind mil aayi yaaron apne ko...”
Dilpreet hasdi hui: “Haan mil aayi apne yaar ko... Kyun tu bhi milna chahta hai?”
Pardeep: “Haan saali besharm kya bolti hai. Sach bata, koi kand to nahi kiya?”
Dilpreet pajama aur panty utaar side mein rakh ke taangein khol deti hui – “Pehle idhar aa ja apni duty pe, fir bataungi.”
Pardeep: “Sach bata, pind mein usi mysterious yaar se mili thi?”
Dilpreet apne pati ka sir taangon mein ghusaate hue – “Haan uske saath zaroori baat karni thi isliye milne gayi thi. Yeh to tujhe pata hi hai yaar ke paas gayi hoon to nangi to karni hi padti hai...”
Pardeep sir pe haath maarte hue – “Hayee o rabba... Ghasti ban gayi meri. Apne yaar ki tareef apne husband ke saamne kar rahi hai...” Yeh keh ke woh ek baar apni biwi ki choot ko gaur se dekhta hua fir se chaatne laga...
Dono aise hi openly baat karte the kyunki kabhi ek doosre se kuch nahi chhupaya tha... Pardeep bhi modern soch wala ladka tha isliye gussa nahi karta tha kyunki woh khud bhi ab tak kaafi ladkiyan chhod chuka tha.
Dilpreet: “Achha main ghasti hoon? Lagta hai tujhe ghasti ban ke dikhana padega...”
Pardeep: “O nahi nahi meri jaan, gussa kyun karti hai. Main to mazak kar raha tha.” Yeh keh ke usne Dilpreet ke gore patte ko chum liya...
Dilpreet: “Aaj mera mood theek nahi hai to pata hi hai tujhe...”
Pardeep: “Thanku madam ji. Itna bada sahab aa jaata hai nahi darta main jiska tera dar hai mujhe. Haste-haste bhi bund phaad deti hai. Police wale se zyada to tu kutti hai mujhe. Kahan se sikhaaya yeh sab? Kitni baar poocha tujhe, tu batati nahi...”
Dilpreet: “Usne hi sikhaaya tha jisne pehle aage peeche ka udghaatan kiya tha...”
“Bada khatarnak banda waise to fir woh... BC us din SHO saab bhi pooch baithe the ki kya hua tujhe? Kursi pe kyun hil rahi hai idhar-udhar... Main kya bataun – daaru pi ke ghar gaya tha to kut padi...”
Dilpreet: “Hehehe... Kehne ko daffan ko haan maana ki thodi bhut pi li. Thoda tun ho ke ghar aa jao fir ghar ke kharod pao.”
Pardeep: “Tujhe waise ek baat ka pata?”
Dilpreet: “Kis baat ka?”
Pardeep: “Bhave tune viaah se pehle hi sab sach bata diya tha, par fir bhi mujhe yakeen nahi tha. Socha chalo boyfriend tha, 2-4 baar kar liya to kya hua. Main to saara tel leke aaya tha room mein. Par jab pehli raat tujhe nangi kiya neeche dekha – behenchod tujhe to chhod-chhod ke khila diya poora usne...”
Dilpreet: “Chalo bas karo. Kyun soch rahe ho... Thodi kismat mein thi main tujhe mil gayi. Aur maine tujhe kabhi roka dusri ladkiyon ke saath karne se... Chalo ab aa ja. Aur kitni der choosni hai meri... Tu apna lollypop chuswana to bata de, nahi to aa maar saat...”
Pardeep: “Nahi teri baaton se already mera lund phatne ko aa raha hai. Tere muh ki garmi ne ise pigla dena ek minute mein...”
“Chalo jidha tera dil kare.” Yeh keh ke Dilpreet ne apni taangein apne husband ke kandhon pe rakh li. Agle hi pal uski choot mein maza ki lahar bhar gayi jab lund ek jhatke mein poora andar chala gaya... Bhave lund Simar jaisa mota nahi tha par bura bhi nahi tha. Dono kaafi der lage rahe. Pose badal-badal ke Pardeep apni poori duty nibha raha tha aur akhir mein usne saara paani Dilpreet ki choot mein hi chhod diya aur side mein dig padi.
Pardeep Dilpreet ki choot ko tissue se saaf karke usko apne upar lete hue – “Jo marzi ho jaaye par tu maza bahut deti hai. Sharam wagarah bedroom ke bahar achha lagta hai husband-wife mein nahi...”
Dilpreet apne maathe ka pasina saaf karte hue – “Hehehe thank you husband... Pehle to choot mein aag lagi hui thi. Pata nahi kya kya bol rahi thi main tujhe. Gussa to nahi laga meri baaton ka?”
Pardeep: “Nahi nahi gussa nahi. Haan jealousy to hoti hai ki yeh soch ke – meri jaan par koi begana ladka bhi chadh raha. Par haan gussa nahi aata yeh pakki baat hai... Kai baar dil mein aata hai ki tujhe aur tere yaar ko maza karte dekhoon kyunki itna time ho gaya viaah ko. Itna tujhe choda aage peeche, tu kabhi mana nahi kiya din ho ya raat... Fir socha tu gussa na kar jaaye...”
Dilpreet: “Achha gaye to theek hai. Gussa nahi karte. Ab tu hamari besharam category mein aa hi gaya toh tujhe raj ki baat bata hi deti hoon. Thodi badi behan bhi mere yaar ke neeche leti hai...”
Pardeep: “Kaunsi badi behan? Matlab Manjeet didi? Nahi nahi yaar woh to kitni simple hai. Modern nahi, shareef hai, decent hai kitni...”
Dilpreet: “Hehehe... Apni behan sabko shareef hi lagti hai. Meri bhabhi hai. Mujhse zyada nahi jaante tu...”
Pardeep: “Nahi aisi baat nahi. Par yaar woh kaise is chakkar mein phas gayi. Kitni shareef hoti thi pehle...”
Dilpreet: “Woh to lambi story hai. Baaki teri behan ne mere bhai ko control kar ke rakha hai. Mere bhai bechare ko aap faad ke puna padta hai teri behan ki choot mein lund mere hi yaar ka...”
Pardeep: “O rabba da wasta bas kar. Main subah duty pe jaana. Teri baatein mood bana deti hain...”
Dilpreet: “Achha gaye baat kyun badal rahe ho. Seedha kaho na ki behan pe chadhne ka dil karta hai...”
Pardeep: “Tu bhi hadd kar deti hai. Behan pe kaise chadh sakta koi...”
Dilpreet: “Sab kuch ho sakta hai. Bas tu jo main kar rahi hoon usko roka mat karna ok... Kisi ko pata nahi lagna chahiye.”
Pardeep: “Tujhe kabhi roka? Ab bhi nahi rokunga...”
Yeh keh ke usne Dilpreet ko jhappi maari aur late gaya.
Idhar Gopy ki behan Sandeep dobara pange mein thi kyunki Sandeep ka beta ab saal ka ho gaya tha jiska matlab common auraton ko lagta hai ab doosra bacha kar lo. Sandeep ki saas bhi un dono ke peeche padi hui thi.
Sandeep: “Please yaar mummy ko samjhao na ki ek hi bacha bahut hai...”
Sandeep ka pati: “Haan yaar maanta hoon teri baat. Mummy ko bhi kaha tha par tu jaanti hai mata ji kahan maanti hain. Koi na, hum fir try karte hain. Jatt poora kaim hai...”
Sandeep man hi man mein – “Haan kutte paali rakh. Yeh bhoolkha apne man mein...” Agar tu kaim hota to mujhe apni taangein apne bhai ke yaar ke saamne na kholni padti...
Sandeep: “Haanji haanji jaisa tujhe theek lage.” Yeh keh ke usne apna suit aur bra upar chadha liya aur salwar-panty utaar side mein rakh di. Kyunki Sandeep ko pata tha – isko achhi tarah choosni hai, bas ghase maar ke side mein dig padna... Sandeep – “Waise main 20-22 din ke liye pind jaungi. Kitne din ho gaye gayi hi nahi...”
“Haan ha chali ja. Koi gal nahi. Waise bhi tu bache ke baad pind nahi gayi. Jitna dil kare reh ja. Paise mere purse se le lena jitna dil kare.” Yeh keh ke woh apne normal style mein Sandeep ki taangon mein aa gaya. Koi 2-3 minute usne Sandeep ke mumme chuuse aur saath hi lund choot mein daal diya. Thodi der baad woh side mein dig pada tha. Kaam khatam hone ke baad.
Sandeep ka paani nikla ya nahi, usko koi farak nahi padta tha. Sandeep apne maathe pe haath rakhe soch rahi thi ki Gopy se kaise baat karegi – “Tujhe apne yaar ko dobara bulaana padega taaki woh fir meri taangein utha sake.”
 

tera hero

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♣️ Update 13 ♣️

घर आकर सिमर काफी देर तक सोचता रहा। फिर अपनी बहन की खुशी के लिए वह तैयार भी हो गया। लेकिन समस्या यह थी कि लड़के की उम्र अभी 22 साल चल रही थी और कोमल की 26वीं चल रही थी। वैसे तो 3-4 साल का फर्क ज्यादा नहीं माना जाता, लेकिन यह लड़के के लिए होता है ज्यादातर। लड़की हमेशा लड़के से छोटी होती है। आखिरकार उसने अपनी मम्मी से सीधी बात करना ही बेहतर समझा...

कुलवंत कौर और सज्जन सिंह भी जल्दी ही मान गए कि हाँ, परिवार ठीक है, विवाह करने में कोई समस्या नहीं। कोमल भी यह सब दरवाजे के पास खड़ी सुन रही थी।

कोमल और सिमर ऐसे ही लेटे पड़े थे रात में तो कोमल बोली—

“तू तो बड़ा खुश होना चाहिए अब।”

सिमर: “क्यों? क्या गल हो गई...”

कोमल: “तू मेरी होने वाली ननद को मेरे ससुर के सामने चोद चुका है, मेरी सास भी तेरे तले लेटने को फिरती है और मुझे तो तूने चोद-चोदकर देख क्या बना दिया—सूखी-सी थी साल भर में इतना शरीर भर गया जैसे पता नहीं कितनी बार चुद गई हो...”

सिमर: “ले दीदी, तू खुश नहीं वै? ”

कोमल: “हा हा मैं भी खुश हाँ। अच्छी फैमिली है। लड़के को भी मैंने देखा है—स्मार्ट है, देखने में। बाकी जो तुझे सबको पसंद है तो मुझे क्या एतराज़ हो सकता है। क्योंकि खासम तो तू ही रहेगा मेरा। दुनिया की नजर में बस वो होगा। तू जब चाहे मेरे ऊपर चढ़ सकता है...”

सिमर ने अपनी बहन के नाले को खींचते हुए कहा—

“चल ना, मैं तुझे आज भी नहीं छोड़ता। चलो, आज थोड़ी एक्सरसाइज करवाता हूँ।”

यह कहकर सिमर ने अपना लंड बाहर निकाल लिया...

कोमल एक्सरसाइज के नाम से ही घबरा जाती थी... आगे भी सिमर आप तो आराम से तले लेट जाता और कोमल को लंड ऊपर तपाने के लिए बोल देता। लंड पर तपते-तपते कोमल के पट्टे फूल जाते, बहुत थक जाती वह...

हर रात की तरह आज भी कोमल सुबह 3 बजे सोई। अब तो आदत पड़ गई थी उसकी इस सब की... पहले दिनों की तरह अब सारी रात चुदाई के बाद उसकी टाँगें नहीं काँपती थीं। नहीं तो पहले तो सुबह सारी रात चुदाई के बाद उसकी टाँगें भर नहीं झलकती थीं...

दूसरी तरफ अमन भी बहुत खुश था। जब दिलप्रीत ने फोन करके उन्हें बताया कि सिमर और उनके घर वाले विवाह के लिए मान गए हैं, उन्हें कोई एतराज़ नहीं और जल्दी ही घर बात करने आएंगे।

लेकिन जसप्रीत (उसकी माँ) के मन में अभी भी थोड़ा डर था क्योंकि सिमर को ऐसे उनके घर आने की कुल मिल जाएगी... और उसे सिमर का पता था कि वो लड़का सेक्स के मामले में कितना पागल है। तनु को जितना वो ठोकता था, उसे पता था कि एक बार उसके लड़के का विवाह सिमर की बहन से हो गया तो वो दोनों माँ-बेटी को नहीं छोड़ेगा...

यही बातें दोनों माँ-बेटी कर रही थीं...

जसप्रीत: “क्या करूँ इस लड़के का? एक लड़की पीछे पागल फिरता है। इसे पता ही नहीं कि इसका होने वाला साला क्या चीज है...”

तनु: “ले जी, पता होता तो वो मुसीबत की बहन को अपनी घरवाली बनाने का न सोचता। हे हे... उसकी बहन हमारे अमन तले और हम दोनों माँ-बेटी हे हे हे... समझ गई...

वैसे एक बात कहूँ मम्मी, गुस्सा न करना...”

जसप्रीत: “तेरी किस बात का गुस्सा...”

तनु: “दिलप्रीत का फोन आया था। उसने मेरे साथ बात शेयर की थी। कहती आगे न करूँ लेकिन तुम्हारे साथ तो कोई बात नहीं। इसलिए बता रही हूँ। दिलप्रीत कह रही थी—सिमर ने पिछले 1-2 साल से अपनी बहन कोमल को भी टिक्का रखा हुआ है...”

जसप्रीत: “हााँ सच्ची...? वैसे इसमें बड़ी बात भी नहीं क्योंकि वो लड़का मैंने देखा है—पूरा पागल है सेक्स पीछे...”

तनु: “हाँ, बता रही थी दिलप्रीत। कह रही थी कोमल को तो पूरी तरह बदलकर रख दिया उसने...”

जसप्रीत: “हे हे हे... वो तो बदलनी ही थी। जब इतना बड़ा किल्ला जैसा लंड रोज़ फिरता...

चल कोई नहीं। कर लेंगे। उनके घर जाकर हमारे लिए अच्छा रहेगा। जब मर्जी आए कर आया करो बहन के घर।”

यह कहकर आँख मार दी। जसप्रीत भी हँस पड़ी।

तनु: “हे हे हे... तुम्हारा भी दिल करता होगा उसके तले लेटने का...”

जसप्रीत: “पहले नहीं करता था क्योंकि तेरा पापा ही हफ्ते में 3-4 बार मेरे खेत में पानी लगा जाता था। लेकिन पता नहीं क्यों अब नया करने को दिल करता है। उस दिन जब तेरे ऊपर और मनजीत ऊपर सिमर चढ़ा था, मेरा भी दिल आ गया...”

तनु ने अपनी माँ को जकड़ते हुए: “तो कर लाओ। तुम्हें क्या डर है? किसी ने कुछ कहना? डैडी तो आजकल वैसे भी तुम्हारी टाँगों तले हैं...”

जसप्रीत: “हाँ, जिस दिन अमन के रिश्ते की बात करने जाएँगे, उस दिन मैं वहीं रुक जाऊँगी... अगर तुझे भी रुकना हो तो तू भी रुक जाना। इकट्ठे कर लिया...”

तनु: “नहीं, पहले तुम 1-2 बार अकेले मजा लो। अपना रास्ता तो चोरा करवाओ। वैसे पता है न उसका कितना मोटा है। इसलिए एडजस्ट होने में टाइम लगेगा तुम्हें...”

ऐसे ही दोनों की बातें चलती रहीं और बाद में दोनों अपने-अपने काम-काज में लग गईं...

दूसरी तरफ दिलप्रीत अपने ससुराल वापस चली गई थी। रात की रोटी खाकर दोनों लेटे पड़े थे...

परदीप (दिलप्रीत का घरवाला): “किधर हो गई पिंडो मिल आई यारों को...”

दिलप्रीत हँसते हुए: “हाँ मिल आई अपने यारों को। क्यों, तुम भी मिलना...”

परदीप: “हाँ साली बेशर्म, कैसे बोलती है? देखी सच्ची तो नहीं कर आई कोई कांड...”

दिलप्रीत ने अपनी पजामा और पैंटी उतार साइड रख दी और टाँगें खोलते हुए: “पहले इधर आओ अपनी ड्यूटी पर, फिर बताती हूँ...”

परदीप: “सच्ची दे आई पिंड अपने उसी मिस्टिरियस यार को?”

दिलप्रीत ने अपने घरवाले का सिर टाँगों में घुसेड़ते हुए: “आहो... उसके साथ कोई जरूरी बात करनी थी इसलिए मिलने गई थी। ये तो तुम्हें पता ही है—यार को मिलने गई हो तो कोई लड़की बिना वजह तो अगले को जान नहीं देती। नंगी तो करनी ही है...”

परदीप ने सिर पर हाथ मारते हुए: “हाय रब्बा... घस्ती पाले पे गई मेरे। कैसे अपनी यार की तारीफ अपने घरवाले के आगे कर रही है...”

यह कहकर वह एक बार अपनी घरवाली की फुद्दी को गौर से देखता हुआ फिर चाटने लगा...

दोनों ऐसे ही खुलकर बात करते थे क्योंकि कभी भी दोनों ने एक-दूसरे से कुछ नहीं छुपाया था... परदीप भी आजकल के मॉडर्न ख्यालों वाला लड़का था इसलिए कोई गुस्सा नहीं करता था क्योंकि वह खुद भी अब तक काफी लड़कियों को चोद चुका था।

दिलप्रीत: “अच्छा मैं घस्ती हूँ? लगता है तुम्हें घस्ती बनकर दिखाना पड़ेगा...”

परदीप: “ओ नहीं-नहीं मेरी माँ... क्यों गुस्सा करती हो? मैं तो मजाक कर रहा था।”

यह कहकर उसने दिलप्रीत के गोरे पट्टे को चूम लिया...

दिलप्रीत: “आज मेरा मूड ठीक नहीं है। पता ही है मेरा तुम्हें...”

परदीप: “थैंक्यू मैडम जी। इतना तो वादे साब आ जाने नहीं देते। मैं जितना तेरा डर है मुझे हँसते-हँसते भी बंड फाड़ देनी है। हमारे पुलिस वाले से ज्यादा तो तू कुटती है मुझे। कहाँ से सीखा ये सब? कितनी बार पूछा तुझे, तू बताती नहीं...”

दिलप्रीत: “उसी ने सिखाया था जिसने आगे-पीछे का उद्घाटन किया था...”

परदीप: “बड़ा खतरनाक बंदा वैसे तो फिर... बीसी उस दिन एस.एच.ओ साब भी पूछ बैठे—क्या हुआ तुझे? कुर्सी पर क्यों हिली जा रही है इधर-उधर... अब मैं क्या बताऊँ कि दारू पीकर घर गया था तो कुट पड़ी...”

दिलप्रीत: “हे हे हे... खीने कहा था दफन नू हा मान लिया कि थोड़ी बहुत पी ली है। थोड़ा टुन होकर घर आ जाओ फिर घर के खरोद पाओ।”

परदीप: “तेनू वैसे एक बात का पता?”

दिलप्रीत: “कौन सी बात का?”

परदीप: “भले मैंने तुझे विवाह से पहले ही सब सच-सच बता दिया था, लेकिन फिर भी मुझे यकीन नहीं था। सोचा—चलो बॉयफ्रेंड था, 2-4 बार कर लिया तो क्या हुआ। मैं तो सारा तेल लेकर आया था रूम में। लेकिन जब पहली रात तुझे नंगी किया, तले देखा—बहनचोद तुझे तो चोद-चोदकर खिला दिया पूरी उसने...”

दिलप्रीत: “चलो बस करो अब। क्यों सोचते हो? तुम्हारी किस्मत में थी मैं तुम्हें मिल गई। और मैंने तुम्हें कभी रोका दूसरी औरतों के साथ करने से... चलो अब आ जाओ। और कितनी देर चूसनी है मेरी... तुम जो अपना लॉलीपॉप चुसवाना तो बता दो। नहीं तो आओ मारो सात...”

परदीप: “नहीं तेरी गल्लां नाल अलरेडी मेरा लंड फटान ते आया। तेरे मुँह की गर्मी ने इसे पिघला देना एक मिनट में...

चलो जिदा तेरा दिल करदा।”

यह कहकर दिलप्रीत ने अपनी टाँगें अपने घरवाले के कंधों पर रख लीं। अगले ही पल उसकी फुद्दी में मजेदार लहर भर गई जब लंड एक घसे में पूरा अंदर चला गया... भले लंड सिमर जितना मोटा नहीं था लेकिन फिर भी बुरा नहीं था। दोनों काफी देर लगे रहे। पोज बदल-बदलकर परदीप अपनी पूरी ड्यूटी निभा रहा था और आखिर में उसने अपना सारा पानी दिलप्रीत की फुद्दी में ही छोड़ दिया और साइड में गिर पड़ा।

परदीप ने दिलप्रीत की फुद्दी को टिशू पेपर से साफ करके उसे अपने ऊपर लेटाते हुए: “जो मर्जी हो जाए लेकिन तू मजा बहुत देती है। शर्म-वेगरा वाला काम बेडरूम के बाहर अच्छा लगता है, हसबैंड-वाइफ में नहीं...”

दिलप्रीत ने माथे से पसीना साफ करते हुए: “हे हे हे... थैंक्यू हसबैंड। आगे तो फुद्दी में आग लगी हुई थी। पता नहीं क्या-क्या बोल जाती थी। मैं तुम्हें गुस्सा तो नहीं लगा मेरी गल्लों का?”

परदीप: “नहीं-नहीं गुस्सा नहीं। हाँ जलन तो होती है कि ये सोचकर मेरी जनानी पर कोई बेगाना पुट भी चढ़ता है। लेकिन हाँ गुस्सा नहीं आता। ये बात पक्की है... कई बार दिल में आता है कि तुझे और तेरे यार को मजा करते देखूँ क्योंकि इतना टाइम हो गया विवाह को, इतना तुझे चोदा आगे-पीछे। तूने कभी मना नहीं किया भले दिन हो या रात... फिर सोचा तू गुस्सा न कर जाए...”

दिलप्रीत: “अच्छा जी फिर तो ठीक है। अगर गुस्सा नहीं करते तो अब जो तुम सादी बेशर्म वाली कैटेगरी में आ ही गए हो तो तुम्हें राज की बात दस ही देनी है। तुम्हारी बड़ी बहन भी मेरे यार तले पड़ती है...”

परदीप: “क्या? कौन सी बड़ी बहन? मतलब मनजीत दीदी? नहीं-नहीं यार वो तो कितनी सिंपल है। मॉडर्न नहीं, शरीफ है, डीसेंट है... कितनी...”

दिलप्रीत: “हे हे हे... अपनी बहन सबको शरीफ ही लगती है। मेरी भाभी है। मेरे से ज्यादा नहीं जानते तुम...”

परदीप: “नहीं ऐसी बात नहीं। लेकिन यार वो कैसे इस चक्कर में फँस गई? कितनी शरीफ होती थी पहले...”

दिलप्रीत: “वो तो बड़ी लंबी स्टोरी है। बाकी तुम्हारी बहन ने मेरे पति को कंट्रोल करके रखा हुआ है। मेरे पति बेचारे को आप फाड़ के पूना पड़ता है। तुम्हारी बहन की फुद्दी में लंड मेरे ही यार का...”

परदीप: “ओ रब्ब दा वास्ता बस कर। मैं सुबह ड्यूटी पर जाना है। तेरी गल्लां फिर मूड बनाई जाती...”

दिलप्रीत: “अच्छा जी गल्ल क्यों बदल रहे हो? सीधा कहो न कि बहन पर चढ़ने का दिल करता है...”

परदीप: “तू भी न हद कर देती है। बहन पर कैसे चढ़ सकता है कोई...”

दिलप्रीत: “सब कुछ हो सकता है। बस तुम मैं जो करूँ रोकना मत करना। ओके... किसी को पता नहीं लगना चाहिए।”

परदीप: “तेनू आगे कभी रोका? जो अब रोका जाएगा...”

यह कहकर उसने दिलप्रीत को जकड़ लिया और लेट गया।

इधर गोपी की बहन संदीप फिर से पंगे में थी क्योंकि संदीप का लड़का अब साल का हो गया था। जैसा आम औरतों में होता है कि जोड़ी रला लो। संदीप की सास भी उन दोनों के पीछे पड़ी हुई थी।

संदीप: “प्लीज यार, मम्मी को समझाओ न कि एक ही बच्चा काफी है...”

संदीप का घरवाला: “हाँ यार, मानता हूँ। मैं तेरी बात मम्मी को कहा भी था लेकिन तुझे पता है माता जी कहाँ मानती हैं। कोई नहीं, हम फिर ट्राई करते हैं। जट्ट पूरा कायम है...”

संदीप मन ही मन में: “हाँ कुत्ते पाले रख, ये भुलक्कड़ अपने मन में...”

अगर तू कायम होता तो मुझे अपनी टाँगें अपने भाई के यार के आगे न खोलनी पड़ती...

संदीप: “हाँ जी हाँ जी, जिदा तुम्हें ठीक लगे।”

यह कहकर उसने अपना सूट और ब्रा मम्मों से ऊपर चढ़ा लिया और सलवार व पैंटी उतार साइड रख दी। क्योंकि संदीप को पता था कि ये अच्छी तरह चूसेगा बस घसे मारकर साइड में गिर जाएगा...

संदीप: “वैसे मैं 20-22 दिन के लिए पिंड हो आऊँ? कितने चिर हो गया, गई ही नहीं...”

घरवाला: “हाँ हाँ चली जा, कोई गल नहीं। वैसे भी तू बच्चे के बाद पिंड गई ही नहीं। जितना चिर दिल करदा रह, पैसे मेरे पर्स से ले लेना जितने दिल करदा।”

यह कहकर वह अपने नॉर्मल ढंग से संदीप की टाँगों में आ गया। कोई 2-3 मिनट उसने संदीप के मम्मे चूसे और साथ ही अपना लंड फुद्दी में धक दिया। थोड़ी ही देर बाद वह साइड में गिर पड़ा था अपना काम खत्म करके।

संदीप का पानी निकला या नहीं, इससे उसे कोई मतलब नहीं था। संदीप माथे पर हाथ रखे सोच रही थी कि गोपी से कैसे बात करेगी कि तुझे अपने यार को दोबारा बुलाना पड़ेगा ताकि वो फिर मेरी टाँगें चुक सके।

Hinglish

Ghar aa ke Simar kaafi der sochta raha. Fir apni behan ki khushi ke liye woh ready bhi ho gaya. Par problem yeh thi ki munde ki age abhi 22 saal hi thi aur Komal ka 26th chal raha tha. Waise to 3-4 saal ka gap zyada nahi maana jaata, par yeh mostly ladke ke liye hota hai. Ladki hamesha ladke se chhoti hoti hai. Aakhir usne apni mummy se seedhi baat karna hi better samjha...
Kulwant Kaur aur Sajjan Singh bhi jaldi hi maan gaye ki haan family theek hai, viaah karne mein koi problem nahi. Komal yeh sab darwaze ke paas khadi sun rahi thi.
Komal aur Simar aise hi late pade hue the raat ko. Tab Komal boli – “Tu to bada khush hona ab”
Simar: “Kyun ki baat ho gayi...”
Komal: “Tu meri hone wali nanad ke saamne chodega, meri saas bhi tere neeche leti phirti hai aur mujhe to tu chhod-chhod ke dekh – saal bhar mein kitna body bhar gaya jaise pata nahi kitni baar chud gayi hoon...”
Simar: “Le didi, tu khush nahi ho rahi toh...”
Komal: “Haha main bhi khush hoon yaar. Badhiya family hai, ladke ko bhi maine dekha hai – smart hai, dekhne mein bhi acha. Baaki jo tujhe sabko pasand hai toh mujhe kya etraaz ho sakta hai. Kyunki khasam to tu hi rahega mera. Duniya ki nazar bas woh hoga, tu jab chahe mere upar chadh sakta hai ve...”
Simar apni behan ke naakhun khinchta hua bola – “Aaj to nahi chadhna. Chal aaj thodi exercise karwata hoon.” Yeh keh ke Simar ne apna lund bahar nikaal liya...
Komal exercise ke naam se ghabra jaati thi... Pehle bhi Simar aaram se neeche let jaata aur Komal ko lund upar tapkaane ke liye bol deta. Lund pe tapakte-tapakte Komal ke patte full jaate, badi thak jaati thi woh...
Har raat ki tarah aaj bhi Komal subah 3 baje soyi. Ab to aadat pad gayi thi usko is sabki... Pehle dinon ki tarah ab saari raat chudai ke baad uski taangein nahi kaamp ti thi. Nahi to pehle to subah saari raat chudai ke baad uski taangein bhar nahi uth paati thi...
Doosre side Aman bhi bada khush tha jab Dilpreet ne phone kar ke bataya ki Simar aur uske ghar waale viaah ke liye maan gaye hain, unko koi etraaz nahi aur jaldi hi ghar baat karne aa jayenge.
Par Jaspreet (Aman ki maa) ke man mein abhi bhi thoda dar tha kyunki Simar ko unke ghar aane ki full entry mil jaayegi... Aur usko Simar ka pata tha – woh ladka sex ke maamle mein kitna pagal hai. Tanu ko jis tarah woh thokta tha, usko pata tha ki ek baar uske bete ka viaah Simar ki behan se ho gaya to woh dono maa-beti ko nahi chhodega...
Yeh baatein dono maa-beti kar rahi thi...
Jaspreet: “Kya karein is munde ka? Ek ladki ke peeche pagal ho raha phirta hai. Isko yeh nahi pata ki aisa hone wala saala kya cheez hai...”
Tanu: “Le agar pata hota to woh musibat ki behan ko apni biwi banane ka sochta hi nahi. Hehe, uski behan hamare Aman ke neeche aur hum dono maa-beti... Hehehe samajh gayi... Waise ek baat kahu mummy, gussa na karna...”
Jaspreet: “Teri kis baat ka gussa...”
Tanu: “Dilpreet ka phone aaya tha. Usne mere saath share kiya tha. Keh rahi thi aage na karna par thodi si baat to banta hai. Isliye bata rahi hoon – Dilpreet keh rahi thi Simar ne last 1-2 saal se apni behan Komal ko bhi tikka rakha hai...”
Jaspreet: “Haaaa sachi...? Waise isme badi baat bhi nahi kyunki woh ladka maine dekha hai – pura pagal hai sex ke peeche...”
Tanu: “Haan bata rahi thi Dilpreet. Keh rahi thi Komal ko to pura badal ke rakh diya usne...”
Jaspreet: “Hehehe... Woh to badalni hi thi jab itna bada killa jaisa lund roz phirna...”
Chal koi na. Unke ghar jaake hamare liye achha rahega. Jab marzi aaya karo behan ke ghar. Yeh keh ke aankh maarti Jaspreet bhi has padi.
Tanu: “Hehehe... Tera bhi dil karta hoga uske neeche letne ka...”
Jaspreet: “Pehle nahi karta tha kyunki tera pita hi hafte mein 3-4 baar mere khet mein paani laga jaata tha. Par pata nahi kyun ab naya karne ka dil karta hai. Us din jab tere upar aur Manjeet upar Simar chadh gaya tha, mera bhi dil aa gaya...”
Tanu apni maa ko jhappi maarte hue – “To kar lo na. Tujhe koi kuch nahi bolega. Daddy to aajkal waise bhi teri taangon ke neeche hain.”
Jaspreet: “Haan jis din Aman ke rishte ki baat karne jaungi, us din main wahan ruk jaungi... Agar tu bhi rukna chahe to tu bhi ruk jaana. Saath kar lenge...”
Tanu: “Nahi pehle tu 1-2 baar akeli maja le. Apna rasta to clear karwa le. Waise bhi pata to chalega uska kitna mota hai, adjust hone mein time lagega tujhe...”
Aise hi dono ki baatein chalti rahi aur baad mein dono apne-apne kaam mein lag gaye...
Doosre taraf Dilpreet apne sasural wapas chali gayi thi. Raat ki roti kha ke dono log late pade hue the...
Pardeep (Dilpreet ka pati): “Kaisi ho gayi? Pind mil aayi yaaron apne ko...”
Dilpreet hasdi hui: “Haan mil aayi apne yaar ko... Kyun tu bhi milna chahta hai?”
Pardeep: “Haan saali besharm kya bolti hai. Sach bata, koi kand to nahi kiya?”
Dilpreet pajama aur panty utaar side mein rakh ke taangein khol deti hui – “Pehle idhar aa ja apni duty pe, fir bataungi.”
Pardeep: “Sach bata, pind mein usi mysterious yaar se mili thi?”
Dilpreet apne pati ka sir taangon mein ghusaate hue – “Haan uske saath zaroori baat karni thi isliye milne gayi thi. Yeh to tujhe pata hi hai yaar ke paas gayi hoon to nangi to karni hi padti hai...”
Pardeep sir pe haath maarte hue – “Hayee o rabba... Ghasti ban gayi meri. Apne yaar ki tareef apne husband ke saamne kar rahi hai...” Yeh keh ke woh ek baar apni biwi ki choot ko gaur se dekhta hua fir se chaatne laga...
Dono aise hi openly baat karte the kyunki kabhi ek doosre se kuch nahi chhupaya tha... Pardeep bhi modern soch wala ladka tha isliye gussa nahi karta tha kyunki woh khud bhi ab tak kaafi ladkiyan chhod chuka tha.
Dilpreet: “Achha main ghasti hoon? Lagta hai tujhe ghasti ban ke dikhana padega...”
Pardeep: “O nahi nahi meri jaan, gussa kyun karti hai. Main to mazak kar raha tha.” Yeh keh ke usne Dilpreet ke gore patte ko chum liya...
Dilpreet: “Aaj mera mood theek nahi hai to pata hi hai tujhe...”
Pardeep: “Thanku madam ji. Itna bada sahab aa jaata hai nahi darta main jiska tera dar hai mujhe. Haste-haste bhi bund phaad deti hai. Police wale se zyada to tu kutti hai mujhe. Kahan se sikhaaya yeh sab? Kitni baar poocha tujhe, tu batati nahi...”
Dilpreet: “Usne hi sikhaaya tha jisne pehle aage peeche ka udghaatan kiya tha...”
“Bada khatarnak banda waise to fir woh... BC us din SHO saab bhi pooch baithe the ki kya hua tujhe? Kursi pe kyun hil rahi hai idhar-udhar... Main kya bataun – daaru pi ke ghar gaya tha to kut padi...”
Dilpreet: “Hehehe... Kehne ko daffan ko haan maana ki thodi bhut pi li. Thoda tun ho ke ghar aa jao fir ghar ke kharod pao.”
Pardeep: “Tujhe waise ek baat ka pata?”
Dilpreet: “Kis baat ka?”
Pardeep: “Bhave tune viaah se pehle hi sab sach bata diya tha, par fir bhi mujhe yakeen nahi tha. Socha chalo boyfriend tha, 2-4 baar kar liya to kya hua. Main to saara tel leke aaya tha room mein. Par jab pehli raat tujhe nangi kiya neeche dekha – behenchod tujhe to chhod-chhod ke khila diya poora usne...”
Dilpreet: “Chalo bas karo. Kyun soch rahe ho... Thodi kismat mein thi main tujhe mil gayi. Aur maine tujhe kabhi roka dusri ladkiyon ke saath karne se... Chalo ab aa ja. Aur kitni der choosni hai meri... Tu apna lollypop chuswana to bata de, nahi to aa maar saat...”
Pardeep: “Nahi teri baaton se already mera lund phatne ko aa raha hai. Tere muh ki garmi ne ise pigla dena ek minute mein...”
“Chalo jidha tera dil kare.” Yeh keh ke Dilpreet ne apni taangein apne husband ke kandhon pe rakh li. Agle hi pal uski choot mein maza ki lahar bhar gayi jab lund ek jhatke mein poora andar chala gaya... Bhave lund Simar jaisa mota nahi tha par bura bhi nahi tha. Dono kaafi der lage rahe. Pose badal-badal ke Pardeep apni poori duty nibha raha tha aur akhir mein usne saara paani Dilpreet ki choot mein hi chhod diya aur side mein dig padi.
Pardeep Dilpreet ki choot ko tissue se saaf karke usko apne upar lete hue – “Jo marzi ho jaaye par tu maza bahut deti hai. Sharam wagarah bedroom ke bahar achha lagta hai husband-wife mein nahi...”
Dilpreet apne maathe ka pasina saaf karte hue – “Hehehe thank you husband... Pehle to choot mein aag lagi hui thi. Pata nahi kya kya bol rahi thi main tujhe. Gussa to nahi laga meri baaton ka?”
Pardeep: “Nahi nahi gussa nahi. Haan jealousy to hoti hai ki yeh soch ke – meri jaan par koi begana ladka bhi chadh raha. Par haan gussa nahi aata yeh pakki baat hai... Kai baar dil mein aata hai ki tujhe aur tere yaar ko maza karte dekhoon kyunki itna time ho gaya viaah ko. Itna tujhe choda aage peeche, tu kabhi mana nahi kiya din ho ya raat... Fir socha tu gussa na kar jaaye...”
Dilpreet: “Achha gaye to theek hai. Gussa nahi karte. Ab tu hamari besharam category mein aa hi gaya toh tujhe raj ki baat bata hi deti hoon. Thodi badi behan bhi mere yaar ke neeche leti hai...”
Pardeep: “Kaunsi badi behan? Matlab Manjeet didi? Nahi nahi yaar woh to kitni simple hai. Modern nahi, shareef hai, decent hai kitni...”
Dilpreet: “Hehehe... Apni behan sabko shareef hi lagti hai. Meri bhabhi hai. Mujhse zyada nahi jaante tu...”
Pardeep: “Nahi aisi baat nahi. Par yaar woh kaise is chakkar mein phas gayi. Kitni shareef hoti thi pehle...”
Dilpreet: “Woh to lambi story hai. Baaki teri behan ne mere bhai ko control kar ke rakha hai. Mere bhai bechare ko aap faad ke puna padta hai teri behan ki choot mein lund mere hi yaar ka...”
Pardeep: “O rabba da wasta bas kar. Main subah duty pe jaana. Teri baatein mood bana deti hain...”
Dilpreet: “Achha gaye baat kyun badal rahe ho. Seedha kaho na ki behan pe chadhne ka dil karta hai...”
Pardeep: “Tu bhi hadd kar deti hai. Behan pe kaise chadh sakta koi...”
Dilpreet: “Sab kuch ho sakta hai. Bas tu jo main kar rahi hoon usko roka mat karna ok... Kisi ko pata nahi lagna chahiye.”
Pardeep: “Tujhe kabhi roka? Ab bhi nahi rokunga...”
Yeh keh ke usne Dilpreet ko jhappi maari aur late gaya.
Idhar Gopy ki behan Sandeep dobara pange mein thi kyunki Sandeep ka beta ab saal ka ho gaya tha jiska matlab common auraton ko lagta hai ab doosra bacha kar lo. Sandeep ki saas bhi un dono ke peeche padi hui thi.
Sandeep: “Please yaar mummy ko samjhao na ki ek hi bacha bahut hai...”
Sandeep ka pati: “Haan yaar maanta hoon teri baat. Mummy ko bhi kaha tha par tu jaanti hai mata ji kahan maanti hain. Koi na, hum fir try karte hain. Jatt poora kaim hai...”
Sandeep man hi man mein – “Haan kutte paali rakh. Yeh bhoolkha apne man mein...” Agar tu kaim hota to mujhe apni taangein apne bhai ke yaar ke saamne na kholni padti...
Sandeep: “Haanji haanji jaisa tujhe theek lage.” Yeh keh ke usne apna suit aur bra upar chadha liya aur salwar-panty utaar side mein rakh di. Kyunki Sandeep ko pata tha – isko achhi tarah choosni hai, bas ghase maar ke side mein dig padna... Sandeep – “Waise main 20-22 din ke liye pind jaungi. Kitne din ho gaye gayi hi nahi...”
“Haan ha chali ja. Koi gal nahi. Waise bhi tu bache ke baad pind nahi gayi. Jitna dil kare reh ja. Paise mere purse se le lena jitna dil kare.” Yeh keh ke woh apne normal style mein Sandeep ki taangon mein aa gaya. Koi 2-3 minute usne Sandeep ke mumme chuuse aur saath hi lund choot mein daal diya. Thodi der baad woh side mein dig pada tha. Kaam khatam hone ke baad.
Sandeep ka paani nikla ya nahi, usko koi farak nahi padta tha. Sandeep apne maathe pe haath rakhe soch rahi thi ki Gopy se kaise baat karegi – “Tujhe apne yaar ko dobara bulaana padega taaki woh fir meri taangein utha sake.”
Waah ji maja agaya Dilpreet or Pardeep ki bonding se or update to tha hi jabardast agle ka intzar rahega besabri se
 
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Iron Man

Try and fail. But never give up trying
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