Nice update waiting for nextUpdate 14
रसोई में खड़ी कुलजीत कौर (गोपी की माँ) दोपहर की रोटी बना रही थी और साथ-साथ सोच रही थी कि इस लड़के को क्या हो गया है? वो तो रोज़ रात को कमरे में आ जाता था और दोनों मजे करते थे।
पिछले 1 साल से गोपी रोज़ उस पर चढ़ता था। इतना कि उसने अपनी कुंवारी गांड भी अपने बेटे को दे दी थी। बस एक बात थी जो अब भी वही चल रही थी कि वो और उसका बेटा रात को सेक्स करते समय कभी कोई बात नहीं करते थे। दोनों एक-दूसरे के साथ पूरा मजा लेते थे... रात होते ही गोपी रोज़ की तरह चुपचाप उसके कमरे में आ जाता। कमरे में हल्की-हल्की रोशनी होती थी, बल्ब हमेशा बंद रहता था।
कमरे में आते ही गोपी पहले अपने कपड़े उतारता, फिर अपनी माँ को पूरी तरह नंगा करता। पूरी रात वो उसे मसलता, जितना मन करता—2 बार, 3 बार, जितना भी उसका मूड होता। कुलजीत भी हमेशा तैयार रहती अपने बेटे का लंड लेने के लिए। और अपना काम खत्म करके वो अपने कमरे में चला जाता। सुबह होते ही दोनों माँ-बेटा नॉर्मल हो जाते। रात के अंधेरे में जो होता, दिन चढ़ते ही उसके बारे में कोई बात नहीं होती थी। जिस तरह माँ की टांगें सारी रात गोपी के कंधों पर रहतीं, दिन में वही माँ की टांगें गोपी घुटनों के बीच रखता और पैरों पर हाथ भी फेरता था।
लेकिन पिछले 20 दिनों से पता नहीं क्या बात थी कि गोपी उसके कमरे में एक बार भी नहीं आया था। उसके दिमाग में तरह-तरह की बातें घूम रही थीं कि पता नहीं इस लड़के को क्या हो गया, आया ही नहीं। लेकिन गोपी जानबूझकर अपनी माँ की आग भड़का रहा था। क्योंकि अब तक उसकी माँ उसके लंड के नीचे पूरी तरह आ चुकी थी। वो देखना चाहता था कि क्या उसकी माँ दिन में कुछ बोलती है या कोई हिंट देती है या नहीं। बस इसी चक्कर में उसने पिछले 3 हफ्ते से अपनी माँ के साथ सेक्स नहीं किया था। इसका रिजल्ट भी दिखने लगा था—उसकी माँ फिर से खिजी और गुस्से में रहने लगी थी। इसी चक्कर में एक बार छोटी-सी बात पर कुलजीत कौर ने उसे जूती से कुटा था और उसका फोन भी छीन लिया था। बाद में फोन तो वापस कर दिया था, लेकिन गोपी अभी भी अपनी जिद पर अड़ा हुआ था...
रोटी-पानी खाकर कुलजीत लेट गई। फिर अचानक दिमाग में कुछ आया तो उठकर गोपी के कमरे में गई तो देखा वो कंप्यूटर पर गेम खेल रहा था। गुस्सा तो बहुत आया, लेकिन फिर भी खुद को शांत करके सीधे कंप्यूटर बंद कर दिया—“चल सो जा अब, आराम कर ले। कितनी देर बैठा रहेगा कंप्यूटर पर।”
गोपी भी समझ गया कि अब और ज्यादा तंग करना मम्मी को ठीक नहीं। कहीं ऐसा न हो कि मम्मी से कुछ करने को ही न मिले अगर वो ऐसे ही लगा रहा। इसलिए वो चुपचाप लेट गया, कंबल ओढ़कर शाम के 7 बजे तक सोता रहा। कुलजीत आज थोड़ी खुश थी कि शायद उसका बेटा आज रात आएगा, तभी तो सारी दोपहर सोया रहा। वो रात की रोटी बनाकर और बाथरूम जाकर जल्दी से अपनी चूत और अंडरआर्म्स के बाल भी साफ कर आई थी।
आज भी पता नहीं क्यों वो सीधी बात नहीं करना चाहती थी—डर था या शर्म, जो भी कह लो। जब गोपी सोकर उठा तो देखा कुलजीत टीवी देख रही थी।
गोपी: “इतना टाइम हो गया, मुझे उठा क्यों नहीं दिया? अब सारी रात नींद नहीं आएगी।”
कुलजीत: “चल कोई नहीं, अच्छा हुआ तू रेस्ट कर लिया। नहीं तो आँखें दही रखनी पड़तीं कंप्यूटर या फोन पर।”
गोपी: “हाहाहा... क्यों पीछे पड़ी रहती हो? चलो, रोती खाते हैं।”
कुलजीत: “और तेरे साथ एक और बात करनी थी तेरी दीदी के बारे में...”
गोपी: “क्या बात करनी थी? सब ठीक तो है ना वहाँ...”
कुलजीत: “ठीक ही है, बस एक पंगा खड़ा हो गया। फिर संदीप के ससुराल वाले दूसरे बच्चे के लिए कह रहे हैं। पहले तो इतने दिनों टाल रही थी, लेकिन अब उसका फोन आया है कि वो कल आ रही है यहाँ एक महीने के लिए... इसका मतलब समझता है ना तू...”
गोपी: “हाँ जी, मैं समझ गया... लेकिन क्या ये जरूरी है? मेरे से बर्दाश्त नहीं होता। मेरा ही पक्का यार मेरी बड़ी बहन के साथ... मेरे दिल में आग लग जाती है।”
कुलजीत: “मैं समझ सकती हूँ भाई के दिल का हाल... लेकिन तू बता, कोई और हल है इस मुश्किल का? तू क्या चाहता है—कोई और लड़का ढूँढे संदीप...? तुझे भी पता है तू इस काम के लिए ठीक नहीं और सिमर के अलावा किसी पर यकीन नहीं कर सकते... घर तो उसे आना ही पड़ेगा हमारे...”
गोपी: “सॉरी मम्मी, कोई गल नहीं। मैं सिमर से बात कर लूँगा। अपनी बहन की खुशी के लिए सब कुछ कर सकता हूँ मैं...”
यह सुनकर कुलजीत ने अपने बेटे को गले लगाकर जकड़ लिया—“शाबाश मेरा सयाना पुत्तर... चल, मैं रोटी लगाती हूँ। तेरा पसंदीदा मुर्गा बनाया है... बीयर मैं तेरी फ्रिज में रख दी थी...”
गोपी का पिता कई सालों से बाहर रहता था। गोपी घर का इकलौता मर्द था, इसलिए उसने गोपी को साफ कह रखा था कि अगर बीयर या शराब पीनी है तो घर बैठकर पी लिया कर, बाहर कोई नशा नहीं करना। गोपी ने भी इस आजादी का फायदा खूब उठाया था—घर बैठकर ही बीयर पी लेता...
रोटी खाकर कुलजीत अपने कमरे में चली गई। आज तो उसने काम खत्म करना भी जरूरी नहीं समझा। चुपचाप जाकर कमरे में लेट गई। बस आज फर्क यह था कि उसने अपने कपड़े नहीं उतारे थे। आज उसका दिल चाहता था कि उसका बेटा उसे खुद नंगा करे।
गोपी ने कोई 5 मिनट वेट किया। डर तो अब उसे किसी बात का नहीं था। अपने कपड़े उसने अपने रूम में उतार दिए और नंगा ही अपनी माँ के कमरे में चला गया। कमरे में पूरा अंधेरा था। गोपी ने जाकर डिम लाइट चला दी। आज उसकी माँ ने कपड़े नहीं उतारे थे। एक बार तो उसका दिल किया वापस मुड़ जाए—शायद मम्मी का मूड नहीं है तभी कपड़े नहीं उतारे। फिर उसने एक बार ट्राई करने की सोची।
उसकी माँ ने अपना चेहरा चादर से ढक रखा था और सीधी लेटी हुई थी। गोपी अपनी माँ के मम्मों पर हाथ फेरता हुआ उन्हें मसलने लगा—सूट के ऊपर से ही। सूट पतला था, नीचे पहनी ब्रा की शेप वो फील कर सकता था।
उसने अपनी माँ का सूट ऊपर चढ़ाकर पेट नंगा कर लिया और झुककर पेट पर किस करने लगा। कुलजीत इतने दिनों बाद यह सब फील करके मजा ले रही थी, अंदर-अंदर सिसक उठी। गोपी ने उसकी सलवार का नाड़ा अंदर-बाहर करके खींच दिया... नाड़ा तो खुल गया लेकिन सलवार अभी भी गांड के नीचे थी। वो साइड में अपनी माँ के पास लेट गया। कमीज और ब्रा ऊपर चढ़ाकर मम्मे नंगे कर लिए... और झुककर चूसने लगा। साथ ही एक हाथ उसने अपनी माँ की सलवार और कच्छी में डालकर चूत मसलने लगा। कुलजीत के निप्पल्स को दाँत से खींचता-चूसता और साथ ही 2 उँगलियाँ अपनी माँ की चूत में डालने लगा। इस दोहरे हमले से थोड़ी ही देर में वो पूरी तरह गर्म हो गई थी।
गोपी ने देखा जब उसकी माँ पूरी गर्म है तो वो जानबूझकर ऊँची आवाज में बोला—“ओह शिट, मैं सरसों के तेल की बोतल तो बाहर ही छोड़ आया!”
कुलजीत जैसे ही गोपी बाहर गया, वो एकदम उठी। पहले कमीज उतारी, फिर ब्रा... नाड़ा तो उसका बेटा पहले ही खोल चुका था। अपनी कच्छी देखी जो पूरी गीली हो गई थी, वो भी उतारकर कोने में फेंक दी और फिर से पूरी नंगी लेट गई...
सरसों का तेल तो बहाना था। तेल की बोतल तो दरवाजे के पास ही छोड़ आया था जानबूझकर। कमरे के दरवाजे पर खड़ा अपनी माँ को नंगी होते देख रहा था वो। जब कुलजीत कौर नंगी होकर फिर लेट गई तो वो कमरे में आया। कमरे में आते ही उसने अपना लंड तेल से अच्छे से चिकना कर लिया। कुलजीत कौर सीधी लेटी हुई थी। उसकी टांगों में आकर अपना लंड सेट किया और टांगें ऊपर चढ़ा लीं। लंड की पहली सात पड़ते ही उसकी माँ की सिसकी निकल गई। गोपी भी पिछले 3 हफ्ते से रुका हुआ था, वो भी नहीं रुका और लगातार घसे मारने लगा।
अपने बेटे का लंड अपनी चूत के अंदर फील करके कुलजीत मजा ले रही थी। आज पहली बार उसने वह काम किया जो उसने आज तक नहीं किया था। उसने अपने बेटे को अपनी बाहों में जकड़ लिया। गोपी भी खुश हो गया कि चलो कुछ तो शुरुआत हुई।
जब गोपी के घसे तेज हो गए तो कुलजीत को अपनी गलती का एहसास हुआ लेकिन अब तो देर हो चुकी थी। इसी सोच में वो अपने बेटे को जकड़कर उसके लंड की मार का मजा लेने लगी। कोई 5 मिनट चोदने के बाद गोपी ने पोज बदला और अपनी माँ की टांगें कंधों पर रखकर पूरी तरह मोड़ दिया और ऊपर आ गया। कुलजीत के घुटने उसके कंधों से लग गए। इस पोज में उसकी चूत पूरी ऊपर आ गई थी। गोपी बेड के दोनों सिरों पर अपने पैर फंसाकर पूरे जोर से घसे मारने लगा।
घसे इतने तेज थे कि चूतड़ से चूतड़ टकराने की आवाज रात के चुप शांत अंधेरे में अपना राग बयान कर रही थी। सात-सात की आवाज तेज होती जा रही थी। कुलजीत आँखें बंद करके अपने बेटे के लंड का स्वाद ले रही थी। सोच रही थी कि उसके ही इतने साल उसने अपनी जवानी खराब की...
इसी सोच में वो लंड का स्वाद ले रही थी कि गोपी ने लंड चूत से बाहर निकाला और उसे पलटने लगा। घसे की मार में इतनी बेसुध हो गई थी कि उसे समझ ही नहीं आया कि उसका बेटा क्या करना चाहता है। और उसका बेटा सेक्स की आग में जलता हुआ बोल पड़ा—“घोड़ी बन जा माता, क्या कर रही है? तुझे समझ नहीं लग रही?”
अपने बेटे के इतने खुले शब्द सुनकर वो एकदम हक्की-बक्की रह गई। अब तक दोनों ने कभी कोई बात नहीं की थी। यह पहला लफ्ज था जो गोपी ने बोला था। वो बिजली की फुर्ती से घोड़ी बन गई।
गोपी ने अपनी माँ को गांड से पकड़ा और बेड के किनारे पर ले आया। खुद बेड से नीचे उतरकर उसके पीछे आ गया। फिर शैतानी हँसी हँसते हुए एक साइड होकर खींचकर एक थप्पड़ अपनी माँ के मांस से भरे चूतड़ों पर जमा दिया। कुलजीत झटका खाकर आगे हो गई... और बेड की चादर को घुटनों से पकड़ लिया। एक ही थप्पड़ से उसे ऐसा लगा जैसे सेंक निकल रही हो। लेकिन उसका बेटा यहीं नहीं रुका। अगले 1-2 मिनट में पता नहीं कितने थप्पड़ जमा दिए और फिर दोबारा लंड उसकी चूत में धक दिया। बेटे से मार खाकर भी उसकी चूत से पानी निकल रहा था, मजा आ रहा था उसे...
ऐसे ही सारी रात चलता रहा... पोज बदल-बदलकर गोपी ने सारी रात अपनी माँ को सोने नहीं दिया। पहले 2 राउंड उसने अपनी माँ की चूत में खूब हलचल मचाई और बाद में गांड की तरफ हो गया... जैसा आम होता है, औरत ने जितनी भी गांड मरवाई हो, दर्द तो हर बार होता ही है। इधर तो कुलजीत कौर ने बहुत कम मरवाई थी। गोपी को गांड में लंड डालने का ज्यादा शौक नहीं था। लेकिन आज जब उसने 2 बार गांड मारी तो कुलजीत की बस करवा दी। एक तो उसका 2 बार काम पहले ही हो चुका था, इसलिए जब उसने कुलजीत कौर के पीछे लंड डालकर घसे मारने शुरू किए तो उसकी आँखों से पानी निकलने लगा... पहले तो उसे लगा वो बेहोश हो जाएगी, लेकिन गांड की मोरी से उठता दर्द उसे जगाए रख रहा था। किसी तरह जब 30-40 मिनट बाद गोपी का पानी उसकी गांड में ही निकला तो उसने सुकून का साँस लिया। इतनी देर लगातार गांड मरवाने से उसके पेट में भी गड़बड़ होने लगी थी। उसने तो सोचा भी नहीं था कि गोपी उसके पीछे लंड डालेगा और रात की रोटी भी उसने खूब खाई थी।
किसी तरह उसने अपनी ताकत इकट्ठी की और उठकर बाथरूम में खुद को साफ करने चली गई। खुद को ऐसे बाथरूम में नंगी और बिगड़ी हुई देख शर्म आ गई। जब वो हल्की हो रही थी तो उसे काफी दर्द हो रहा था। अपनी चूत और गांड को अच्छे से साबुन से धोया। जब लड़खड़ाती कमरे में जा रही थी तो यही दुआ कर रही थी—“हायyyy बाबा जी, जो मर्जी कर लवे यह लड़का, लेकिन पीछे न धके। मेरे से और नहीं लिया जाएगा...”
कमरे में आकर जब वो सीधी लेटी तो झटके से शॉल मारकर उसका पेट भर आया। उसके चूतड़ बेड पर नहीं लग रहे थे। कमरे से बाहर जाते हुए अपने बेटे की दबी हुई हँसी की आवाज वो सुन सकती थी...
कुछ ही देर बाद उसका बेटा वापस आ गया और फिर से उसके नंगे शरीर पर हाथ फेरने लगा। उसने भी हाथ नीचे करके उसका लंड पकड़ लिया जो फिर से खड़ा होने लगा था। आज उसका बेटा दहाड़ी हुआ पड़ा था। थोड़ी देर हाथ फेरने के बाद वो आकर उसके ऊपर लेट गया... क्योंकि शरीर वजन में अपने बेटे से ज्यादा था... लेकिन यह क्या—उसका सिर उसके चूतड़ों के बीच में था... कुलजीत कौर ने आज तक अपने बेटे का लंड नहीं चूसा था।
आखिर उसे लंड चूसना ही पड़ा आज। कर भी क्या सकती थी... आखिरी राउंड में वही हुआ जिससे उसे डर था। लास्ट राउंड में जब गोपी ने घोड़ी बनाकर बेड के किनारे पर उसकी गांड पर लंड रखा तो उसकी जान ही निकल गई। बोली तो नहीं कुछ... चुपचाप उसके लंड की मार बर्दाश्त करने लगी। आखिरी राउंड बहुत लंबा चला, बहुत बुरा किया उसके साथ। सबसे ज्यादा तो तब हुआ जब उसका बेटा खुद नीचे लेट गया और उसे अपने लंड पर बिठा लिया। एक बार उसने कोशिश की चूत में लंड लेने की तो उसने वहाँ नहीं डाला और लंड गांड की मोरी पर लगा दिया। कुलजीत कौर का वजन भी इतना था कि अपने भार से लंड पर पूरी बैठ गई... उसे कोई पता नहीं चला कि कब उसके बेटे ने अपना पानी निकाला और कब उसे नींद आ गई...
अगले दिन जब वो उठी तो पहले से ही 10 बज चुके थे। उसे बड़ी शर्म आई खुद पर कि इतनी देर सो गई। बड़े दिनों बाद ऐसा हुआ था अब। जब उसके घरवाले इंडिया में होते थे तब ऐसा होता था। सारा दिन चूल्हे के आगे, रात को लुले के आगे और सुबह उठने में अक्सर देर हो जाती...
उठकर बाहर आई तो देखा गोपी ने पहले ही चाय बना के पी ली थी और उसके लिए रख दी थी। चाय पी रही थी कि बाहर का दरवाजा खुला और उसकी बेटी संदीप अपना बैग चुककर सुबह-सुबह ही आ गई।
दोनों माँ-बेटी एक-दूसरे को गले लगाकर मिलीं।
संदीप पास की मंजी पर बैठकर अपनी चाय फड़कने लगी। उसका बेटा सोया पड़ा था। कुलजीत ने बेटे को गोद में ले लिया...
कुलजीत: “होर पुत्तर, कैसे हो? सारे ठीक? ससुराल...”
संदीप: “हाँ, उन्हें क्या होना। ठीक हैं। मेरे गले पंगा पड़े रखते हैं नया।”
संदीप भारी होकर आते ही शुरू हो गई...
कुलजीत: “कोई नहीं, क्यों घबराती है...”
संदीप: “घबराने वाली ही तो बात है। एक बच्चा जन्म देकर दे दिया। इनको अपने सिर पर सास कुट्टी, अपने नामर्द मर्द को कहती है जोड़ी रला लो...”
कुलजीत: “कोई नहीं, शांत हो जा। आराम कर। अब मैं तेरे लिए आलू के पराठे बना देती हूँ। आज रोटी बनाने में देर हो गई।”
जब वो उठी तो संदीप ने देखा उसकी माँ तकिए पर बैठी हुई थी। और जब ध्यान माँ की तरफ गया तो उसका हाथ मुंह पर आ गया और खुद से सवाल करने लगी—“हायyyy ये क्या? मम्मी की चाल क्यों बिगड़ी हुई है? जरूर कोई गड़बड़ है तभी तो तकिए पर बैठी है।” यह गोपी कहाँ चला गया सुबह-सुबह? उसे पूछती हूँ, शायद उसे पता हो...
यह कहकर वो अपने छोटे भाई को फोन मिलाने लगी।
Hinglish
Kuljeet Kaur (Gopy ki maa) kitchen mein dopahar ki roti bana rahi thi. Soch rahi thi – "Is ladke ko kya ho gaya? Roz raat ko aata tha, hum dono maze karte the."
Pichle 1 saal se Gopy har raat uske upar chadhta tha. Itna ki usne apni gaand bhi pehli baar usko de di thi. Bas ek baat fixed thi – sex karte time dono bilkul chup rehte the. Koi baat nahi karte. Sirf maza lete the.
Raat hote hi Gopy chupke se maa ke kamre mein aa jaata. Kamra halka sa lit, full light band.
Gopy pehle apne kapde utaarta, fir maa ko poora nanga karta.
Poori raat usko masalta, chumta, jitni baar mood hota – 2-3 baar bhi.
Kuljeet hamesha ready rehti – bete ka lund lene ke liye.
Kaam khatam, Gopy apne kamre chala jaata.
Subah dono bilkul normal – jaise kuch hua hi nahi. Raat ki baat din mein nahi hoti thi.
Par last 20 din se Gopy bilkul nahi aaya uske kamre mein.
Kuljeet sochti rehti – "Kya ho gaya isko?"
Asal mein Gopy jaan-bujh kar uski aag bhadka raha tha. Ab tak maa uske control mein thi, ab woh dekhna chahta tha ki maa khud bolegi ya hint degi ya nahi.
Is chakkar mein 3 hafte se sex nahi hua.
Kuljeet gusse mein rehne lagi.
Ek din chhoti si baat pe usne Gopy ko jutti se maara aur phone cheen liya.
Phone waapis to kar diya, par Gopy abhi bhi zid pe ada tha – nahi ja raha tha maa ke paas.
Aaj dopahar roti kha ke Kuljeet let gayi.
Fir socha kuch aur, uthi aur Gopy ke kamre gayi.
Dekha – woh computer pe game khel raha tha.
Gussa aaya, par control kiya aur seedha computer band kar diya.
Boli – "Chal so ja ab, kitni der baitha rahega?"
Gopy samajh gaya – ab zyada tang kiya to mummy se kuch milega hi nahi.
Chupchap let gaya, kambal odha aur shaam 7 baje tak so gaya.
Kuljeet khush ho gayi – "Shayad aaj raat aayega, tabhi to itna soya."
Raat ko roti banayi, bathroom ja ke apni choot aur underarms saaf kiye (baal remove kiye).
Aaj kapde nahi utaare – dil chahta tha beta khud utaare.
Gopy 5 minute wait kiya, phir apne kapde utaare aur nanga hi maa ke kamre mein gaya.
Dim light on ki.
Maa chunni se muh dhak ke leti thi, kapde pehne hue.
Gopy ne pehle suit ke upar se mumme dabaye, masta.
Suit upar karke pet nanga kiya, kiss karne laga.
Kuljeet andar se garam ho gayi, siskariyan nikalne lagi.
Phir salwar ka naada khola, khinch diya.
Side mein let ke kamiz-bra upar ki, mumme chusne laga.
Ek haath salwar-kachhi mein daal ke choot ragadne laga.
Nipples ko daant se kheenchta, 2 ungli choot mein daalta.
Kuljeet jaldi garam ho gayi.
Gopy jaan-bujh kar bola (oonchi awaaz mein) – "Oh shit, sarson ka tel to baahar hi chhod aaya!"
Jaise hi Gopy bahar gaya, Kuljeet uthi.
Jaldi se kamiz, bra, kachhi sab utaar diya.
Poori nangi let gayi.
Gopy darwaze pe khada sab dekh raha tha.
Tel to bahana tha – bottle darwaze ke paas hi rakhi thi.
Wapas aaya, lund pe tel laga ke chikna kiya.
Maa ki taangein uthayi, lund set kiya aur ek jhatke mein andar.
Pehli saat se hi maa ki siskari nikal gayi.
Gopy 3 hafte se ruka tha – tez ghase marne laga.
Kuljeet ne pehli baar apne bete ko baahon mein jakda – pura control uske haath mein de diya.
Ghase tez hue to Kuljeet ko ehsaas hua galti hui, par ab der ho chuki.
Usne bete ko jakad ke maza lene lagi.
5 minute baad Gopy ne pose badla – maa ki taangein kandhon pe, poora mod diya, upar chadh gaya.
Tez ghase – chootad se chootad takraane ki awaaz poore kamre mein.
Kuljeet aankhein band karke lund ka swaad le rahi thi.
Soch rahi thi – "Maine apni jawani barbaad kar di iske liye..."
Gopy ne lund bahar nikala aur maa ko palat diya.
Bola – "Ghodi ban ja mata! Kya kar rahi hai, samajh nahi aa raha?"
Maa shock ho gayi – pehli baar baat hui sex ke time.
Jaldi se ghodi ban gayi.
Gopy ne maa ko bed ke kinare pe laaya.
Khud neeche utra, peeche se pakda.
Ek zor ka thappad chitad pe maara.
Kuljeet aage jhuk gayi, chadar pakad li.
Phir 1-2 minute mein kayi thappad maare.
Fir dobara lund choot mein daala.
Aise hi poori raat chalta raha.
Pehle 2 round choot mein, fir gaand ki taraf.
Gaand mein pehli baar itna – dard bahut hua.
Kuljeet ro padi, aankhon se paani nikal aaya.
Par Gopy nahi ruka – 30-40 minute tak gaand maari.
Paani gaand mein hi chhod diya.
Kuljeet uthi, bathroom gayi saaf hone.
Sharm aa rahi thi khud pe.
Dard bahut tha – dua maang rahi thi – "Baba ji, jo marzi kar le is munde se, par gaand mein mat daalna. Aur nahi sah sakti."
Wapas aayi to pet bhar aaya – chitad bed pe nahi lag rahe the.
Gopy ki dabi hasi sunai di.
Thodi der baad Gopy waapas aaya, haath ferne laga.
Kuljeet ne lund pakda – fir khada ho gaya.
Aaj Gopy bold ho gaya tha.
Upar let gaya, par sir chitadon ke beech.
Kuljeet ko lund chusna pada – pehli baar.
Last round mein Gopy ne ghodi banaya, gaand pe lund rakha.
Kuljeet darr gayi, par chup rahi.
Aakhir mein Gopy neeche leta, maa ko upar bitha liya.
Kuljeet ne choot mein try kiya, par Gopy ne gaand mein daal diya.
Uske wazan se poori baith gayi.
Kuljeet ko pata nahi chala kab paani nikla, kab neend aa gayi.
Subah 10 baje uthi – sharm aayi itni der sone pe.
Bahut din baad aisa hua.
Chai pi rahi thi ki darwaza khula – beti Sandeep bag leke aa gayi.
Maa-beti gale lage.
Sandeep manji pe baith gayi chai peene.
Kuljeet ne pota god mein liya.
Kuljeet: "Hor puttar, sab theek? Sasural waale?"
Sandeep: "Haan theek hain. Bas mere peeche pade rehte hain doosra bacha karne ko."
Sandeep rone lagi...
Kuljeet: "Koi na, ghabra mat."
Sandeep: "Ghabrane wali baat hai. Ek bacha de diya, ab saas bolti hai joड़ी bana lo. Mera pati to namard jaisa..."
Kuljeet: "Shant ho ja. Ab main tere liye aloo ke parathe bana deti hoon. Roti banane mein der ho gayi."
Jab Kuljeet uthi, Sandeep ne dekha maa pillow pe baithi hai.
Dhyaan gaya to haath muh pe – "Hayeee, mummy ki chaal kyun bigdi hai? Zaroor kuch gadbad hai."
Socha – "Gopy kahan gaya subah-subah? Usse poochti hoon, shayad pata ho."
Aur usne chhote bhai ko phone lagana shuru kar diya.
Badhiya hai![]()
Mast kammuk update
Thanks broNice update waiting for next
Super excellent work waiting for nextUpdate 15
गोपी सुबह जल्दी उठ गया अपनी रोज़ की आदत से। चाय पीकर वो खेतों की तरफ निकल गया, सोचता हुआ। रात को जब वो अपनी माँ को चोद रहा था, तब बीच-बीच में उसके दिमाग में बड़ी बहन संदीप और सिमर के ख्याल आ रहे थे...
उसे दोनों से गुस्सा तो नहीं था, लेकिन जलन तो होती ही है। फिर भी बहन के भले के लिए सोचकर वो सिमर के पास चला गया। क्योंकि बहुत बार बहन को रोते हुए देखा था जब वो गाँव वापस आती थी। सारे परिवार वाले महीनों तक ताने मारते थे। उसे पता था सिमर सुबह-सुबह सरकारी स्कूल की ग्राउंड में दौड़ लगाने ज़रूर आता है।
आज सिमर ने गोपी को ग्राउंड में देखा तो दौड़ते-दौड़ते रुक गया।
“ओए बाले, आज तू सुबह-सुबह यहाँ? चल आ जा, 2-2 और राउंड मारते हैं।”
गोपी: “हाहा बस दिल किया आ गया...” यह कहकर वो भी साथ दौड़ने लगा।
एक चक्कर लगाने के बाद बोला – “एक ज़रूरी बात करनी थी।”
सिमर: “हाहा बोल, क्या बात? आज यहाँ आ गया, कॉलेज मिल जाता... चल उधर बैठकर बात करते हैं।” (ग्राउंड के एक कोने में नीचे बैठते हुए)
गोपी: “कैसे बताऊँ यार, समझ ही नहीं आ रही... दीदी फिर आ रही है आज। मेरे हिसाब से अब तक आ गई होगी... उसके फोन आने लग गए हैं...”
सिमर: “दीदी आ रही है? अच्छी बात है। कितने दिन बाद आ रही। मैं भी तेरे भांजे से मिल लूँगा...”
गोपी: “वो तो ठीक है, मिल लेना। लेकिन दीदी दूसरे बच्चे के लिए आ रही है...”
सिमर: “ओह हेलो, सुबह-सुबह क्या बोल रहा है? लगता है रात की नींद नहीं उतरी... लास्ट टाइम जब मैंने दीदी को प्रेग्नेंट किया था, तेरे से बर्दाश्त नहीं हुआ था। कितने दिन तूने बात तक नहीं की... मुझे इतना दबाव दिया तो तेरी बहन के साथ किया था। तू मेरे साथ मुँह लटकाए फिरता था।”
गोपी: “यार मुँह न लटकाता तो क्या करता साला बहनचोद? जीजा मेरा तो लोला है। बहन के यार से कुछ नहीं होता। और तू जब भी आता था, सारी रात उसकी टाँगें तले लगाने देता था... अब सारी रात बहन की चीखें सुनकर तू क्या करेगा, खुद बता। अगर मैं तेरी बहन के साथ ऐसा करूँ तो तू क्या करेगा...”
सिमर: “शांत हो जा पटंडा, क्यों इतना हाइपर हो रहा है? ओह अगर मेरा जीजा भी फुद्दू निकला तो तू मेरी बहन संभाल ले... ज्यादा दिल करता है तो उसके साथ विवाह करवा ले। दूसरा मैं समझ गया – तेरी पिंड वाली सोच है। 2-3 बच्चे तो नॉर्मल होते हैं... नहीं तो कहेंगे एक बच्चा देकर थक गई... चल कोई नहीं, तू घर जा। मैं शाम को कोमल को भेज दूँगा, वो संदीप दीदी को हमारे घर ले आएगी...”
गोपी: “तेरे घर ठीक रहेगा? कोई पंगा तो नहीं पड़ेगा...”
सिमर: “नहीं पड़ेगा। सबको पता है तेरी बहन को पहले मैंने प्रेग्नेंट किया था, घबराना मत। घर जा बेफिक्र होकर।”
गोपी: “चल ठीक है...” यह कहकर घर लौट आया।
घर पहुँचते ही संदीप उसका इंतज़ार कर रही थी। उसके दिल की धड़कन तेज़ थी क्योंकि उसने माँ की हालत देख ली थी। शक हो रहा था – कहीं माँ का कोई चक्कर तो नहीं चल रहा बाहर किसी के साथ?
संदीप: “ओए कहाँ फिर रहा था सुबह-सुबह? घर में पैर नहीं लगते तेरे...”
गोपी: “हाहा आते ही शुरू हो गई तू। ससुराल में ही सूट रहती है। चल पजामा पहन, हमारे घर चल...” यह कहकर जकड़ लिया।
संदीप: “अच्छा पुत्तर, मैं तो 2 महीने नहीं जाऊँगी...”
गोपी: “ओह तेरी दी। 2 महीने फिर तो सिमर की मौज लग गई...”
संदीप उसके खुले बोल से शर्मा गई – “क्या बकवास करता है...”
गोपी: “रात को मम्मी ने सारा खेल बताया था। बस उसी चक्कर में सिमर से मिलने गया था...”
संदीप: “नहीं यहाँ। चल अंदर जाकर बात करते हैं...”
दोनों संदीप के पुराने कमरे में चले गए।
संदीप: “एक बात बता सच-सच, तुझे मेरी सोह है...”
गोपी: “सोह की क्या ज़रूरत? तुझसे कभी झूठ बोला है? झूठ बोलकर मार तो नहीं खानी तुझसे।”
संदीप: “हेहे गुड बॉय। अच्छा तो बता कल रात कोई आया था घर? मम्मी की चाल बिगड़ी हुई है...”
गोपी: “ना... ना... नहीं। ठीक तो होगी। कहाँ बिगड़ी है? चल... तुझे भूख लगी होगी...”
संदीप उसकी हकलाहट से समझ गई – माँ की चाल बिगाड़ने वाला कोई और नहीं, उसका छोटा भाई ही है। जान-बूझकर भी हो सकता है... या झूठ बोल रहा है...
कोई नहीं पुत्तर, मैं तेरी बड़ी बहन हूँ। सच कड़वा सुनाना आता है। पहले अपने भांजे को बेड पर कंधे वाली साइड पर रख दे। इस तरफ तकिया रख दे ताकि गिर न जाए।
गोपी बच्चे को रखकर वापस आया तो संदीप के हाथ में जूती थी – “हाँ अब बता काका जी, सच बोलेंगे या जूती से...”
गोपी: “क्या है यार तू पूछकर क्या लेना...”
संदीप: “चल ज्यादा होशियार मत बन। टोट्टे की तरह बोलना शुरू कर...”
गोपी: “यार मम्मी के साथ मैं ही करता हूँ। कोई और नहीं... यह सब उस दिन से चल रहा है जब पहली बार तुझे और सिमर चढ़ाया था। फिर वो अपनी बहन को सब बताता है – रात को कैसे करते हैं, आपस में बात नहीं करते, दिन में इस टॉपिक पर कोई बात नहीं होती।”
संदीप: “अच्छा यह बात है... रात को पीछे पड़ा होगा तू, तभी बैठ भी नहीं पा रही थी मम्मी...”
गोपी: “हाँ पहले भी 2-3 बार किया था लेकिन रात को बहुत मन करता था, इसलिए लास्ट 2 राउंड पीछे लगाए...”
संदीप: “हेहे कुट्टा कमीना... वैसे बढ़िया किया तूने बापू जी के लिए। कितने साल हो गए इंडिया नहीं आए, जब कहो बहाना मारकर टाल देते हैं। तूने मम्मी संभालकर अच्छा किया...”
गोपी: “तू भी मम्मी को मत बताना कि मैंने तुझे सब बता दिया... दूसरा आज सिमर ने बुलाया है, कह रहा है हमारे घर आ जाओ...”
संदीप: “ले मैं कैसे जाऊँगी? बच्चे के साथ उसके घर? फिर बच्चा कौन देखेगा मेरा? चल तू टेंशन मत ले। मैं फोन कर दूँगी उसे...”
यह कहकर संदीप रसोई में चली गई जहाँ कुलजीत रोटी बना रही थी। संदीप ने पानी और सरसों का तेल गर्म करना शुरू किया। कुलजीत ने देखा लेकिन अपना ध्यान रोटी पर रखा। पानी उबला तो बोतल में डाल दिया और तेल कटोरी में रख दिया...
संदीप: “मम्मी तू जा। यह ले मैं तैयार कर देती हूँ। काम मैं कर लूँगी...”
कुलजीत: “यह क्या पुत्तर...”
संदीप: “मैं भी औरत हूँ, शादीशुदा... थोड़ी हालत तो मैं आते ही देख ली थी।”
कुलजीत: “जान-बूझकर अनजान बनी रही। समझ गई थी। दूसरा यकीन था बेटा किसी को नहीं बताएगा, बहन को भी नहीं...”
संदीप: “मेरी भोली माँ, जब गाड़ी कच्चे रास्ते पर दौड़ती है तो ऐसा ही होता है... आज तकिए पर बैठी थी और चलने में दिक्कत। मेरे साथ भी ऐसा होता था पहले जब तेरे लाड़ले सिमर ने मेरे पीछे पड़ा था... दूसरी बात, इससे पहले तूने गोपी बेचारे के मगड़ पावे उसने मुझे कुछ नहीं बताया...”
कुलजीत: “ओके। मुझे गलत मत समझ। पता नहीं क्या हुआ, कंट्रोल नहीं हुआ। इन सालों किसी को हाथ नहीं लगाया। लेकिन अब बूढ़ी हो गई तो यह काम करने लग पड़ी...”
संदीप: “तू कहाँ बूढ़ी लगती है... अगर बूढ़ी होती तो जवान लड़का इतना जोर कैसे मारता? और गलत नहीं समझती मैं। मेरे हिसाब से तूने बहुत अच्छा किया। इन सालों बिना सेक्स के काट लिए बस...”
कुलजीत: “हाँ यही बात तेरी कुलवंत आंटी भी कहती है – मज़े कर बस किसी को पता न चले... लेकिन सच रात पता नहीं क्या हो गया। आखिरी 2 राउंड में लगभग 2 घंटे किया। तारीफ दिखा देते। बैठ भी नहीं रही, चलना तो दूर...”
संदीप: “हाँ जी कोई नहीं। मैं समझ सकती हूँ। गोपी को कह दूँगी 4 दिन गाड़ी कच्चे रास्ते पर डाल दे। सारी रात फिर सेट हो जा... थोड़ी कब्ज़ भी दूर हो जाएगी और पॉटी खुलकर आएगी... हेहे...”
कुलजीत उसके सिर पर थप्पड़ मारती – “बेशर्म माँ की बेटी। ऐसा तो लिहाज़ कर ले...” यह कहकर तेल और गर्म पानी लेकर अंदर चली गई – गांड सेंकने के लिए...
उधर सिमर के घर सुबह की तैयारी चल रही थी। आज हैप्पी की बड़ी बहन अपनी फैमिली के साथ आ रही थी – कोमल के रिश्ते को पक्का करने...
लगभग 12 बजे सब लोग होशियारपुर के एक रेस्टोरेंट में पहुँच गए जहाँ मिलना था...
हैप्पी और उसकी बीवी मनजीत कुलवंत हुरा के साथ एक ही कार में आए थे...
चाय-वगैरह पीने के बाद बातचीत शुरू हुई... कुलवंत पढ़ी-लिखी थी तो पहले 2-3 बातें इधर-उधर की हुईं, फिर सीधे अमन पर आई।
कुलवंत: “बेटा आज 22 साल की उम्र है। पहले पढ़ाई पूरी कर ले... करियर की सोच ले। शादी तो हो ही जाएगी...”
अमन: “पढ़ाई तो साथ-साथ चलती रहेगी। करियर खेती से जुड़ा ही करना चाहता हूँ और मैंने शुरू भी कर दिया है। बाहर जाने का मन नहीं...”
कुलवंत: “यह तो अच्छी बात है लेकिन तेरी बहन जवान है। घर में उसके विवाह का सोचना... और हमारी कोमल तेरे से 4 साल बड़ी है...”
यह सुन सब एक साथ बोले – “नहीं-नहीं यह गलत बात है। लड़का भी तो बड़ा होता है। यह कहकर मत मना करो। हमें कोई प्रॉब्लम नहीं।”
सज्जन सिंह जो चुप था बोल पड़ा – “पर हम चुनते हैं कि लड़की पहले शादी कर ले। बाकी रिंग सेरेमनी कर लेते हैं और इंतज़ार कर लेंगे...”
सज्जन की बात सबको पसंद आई। अमन ने कोमल को रिंग पहना दी...
रिंग के बाद दोनों को 10 मिनट के लिए अकेला छोड़ दिया। सिमर के दिल में आज पहली बार जलन आई। आमतौर पर ऐसा नहीं होता था क्योंकि वो चोदता था और दूसरे देखते थे।
कमरे में आने पर हेलो के बाद दोनों आमने-सामने बैठ गए...
अमन: “कैसी? तुझे इस रिश्ते से कोई प्रॉब्लम तो नहीं...”
कोमल: “नहीं मुझे नहीं। बस एक बात पहले बता दूँ। उसके बाद फैसला करना...”
अमन: “मैं तो फैसला कर चुका हूँ। बदलाव नहीं होगा जब तक तुझे प्रॉब्लम न हो। क्योंकि आई रियली लाइक यू...”
कोमल: “हेहे थैंक यू। मुझे भी प्रॉब्लम नहीं तुझसे शादी तो... पर बात यह है मेरा एक फ्रेंड है। उसके साथ रिलेशनशिप में हूँ। प्यार नहीं, बस फिजिकल है पिछले 2 साल से... समझ गए ना क्या कहना चाहती हूँ... बाद में पता लगे इसलिए पहले बता दिया।”
अमन: “ओह ओके। कोई नहीं। लेकिन मेरी भी एक शर्त है या रिक्वेस्ट। प्लीज़ अगर मानोगी...”
कोमल: “हाहा बोल ज़रूर। जो बड़ी बात बता दी तो तुझे फर्क नहीं पड़ा तो मैं भी तेरी बात मानूँगी जो मन वाली हो...”
अमन: “मैं अपनी होने वाली बीवी का पूरा पास्ट सुनना चाहता हूँ...”
कोमल: “हूँ तू लगता है शादी से पहले मार खानी मेरे से... चलो बाहर चलते हैं, सब वेट कर रहे होंगे...”
अमन: “हाहा अच्छा ले अगर तू मेरे से बड़ी है तो मेरे पर हुकुम चलेगा ना? ना मैं नहीं करवाना तेरे साथ शादी। बच्चे की जान ले लेनी तू तो...”
कोमल: “हेहे ऐसा कैसे पज लाओगे? तू बस देख क्या होता है...” दोनों में जल्दी अच्छी केमिस्ट्री बन गई क्योंकि दोनों पढ़े-लिखे थे, आजकल के माहौल से वाकिफ थे।
कोमल खुश थी। अमन समझदार लग रहा था उसे...
जितनी देर कोमल-अमन लगे थे, उतनी देर में सिमर ने अपना काम सेट कर लिया...
जसप्रीत: “तू तो बड़ा खुश होना अब...”
सिमर: “हाहा ले मेरे से ज़्यादा तू सारी हो रही है। किसी का डर तो तुझसे आएगा... आज रुक जा तू। मज़े करेगी। तुझे वापस भेज दूँगा, वो खुद रोटी बना देगी...”
जसप्रीत: “नहीं आज जा लेती हूँ। फिर आ जाऊँगी...”
सिमर: “चल कल को। आज हैप्पी पाजी के साथ मिलके तुझे और मनजीत भाभी को ठोकूँगा... तू भी अपने छोटे भाई के सामने करके मज़ा कर... या आज तू और मैं मोटर पर और वो अपने मुहल्ले के मेरे दोस्त गोपी की बहन संदीप के साथ...”
जसप्रीत: “हाय तू पिंड की कितनी फँसा रखी हैं...?”
सिमर: “हाहा ऐसा ही है बस... लेकिन आज तो तेरे पर चढ़ने का मूड है मेरा...”
जसप्रीत: “तू नहीं सुधरेगा कुट्टे वी। पूरा बंदा बन जा। मैं तेरी बहन की सास बनने वाली हूँ...”
सिमर: “ओके मासी जी प्लीज़ रुक जाओ आज। हाथ जोड़कर बिनती है हाहा...”
जसप्रीत: “अच्छा-अच्छा चल ठीक है। रुक। मैं बात करके आती हूँ...”
जसप्रीत: “तू चल जा पिंड वापस। अमन और तनु के साथ मैं कल आ जाऊँगी...”
मिंटू: “तू आज रुक के क्या करेगी? चल कल को कहाँ बस के धक्के खाती रहेगी...”
जसप्रीत: “कोई गल नहीं। मैं आ जाऊँगी खुद। मैं तो आज ही चलना था लेकिन वो होने वाली ननद का छोटा भाई कह रहा है आज रुक जा...”
मिंटू: “ओह यह बात है। फिर तो रुक जा। कोई चक्कर नहीं। लेकिन यार उसको कह ना मेरी हैप्पी की बीवी के साथ सेटिंग हो लेने दे। मैं कहाँ तुझे रोकता हूँ मज़ा करने से। तेरी बात मानता। एवेन तू मेरी लाल भी करती है बैक...”
जसप्रीत: “हेहे कोई नहीं। करवा दे थोड़ी सेटिंग... हूँ जा तू। लाइव शो देखना हो तो बता देना। मैं कॉल करवा दूँगी... तुझे पता मुझे फोन बारे इतना नहीं पता...”
मिंटू: “हाहा ज़रूर। अपनी बेटी तो देख ली सील पटवाते हुए। हूँ बीवी को बेगना पुत्तर चढ़ते हुए भी देख लेंगे... इस बेगर्त तो बना ही दिया तूने मुझे...”
जसप्रीत: “सारी तेरी गलती है इसमें भी। तू बाहर मुँह मारता था। कभी मेरी खबर नहीं ली... जब करते भी थे तो सलवार नीचे करके 4 घसे मारकर काम खत्म करके साइड में... उस दिन देखा नहीं कैसे तेरी प्यारी बेटी रानी के लिए सिमर ने चूस-चाट-चूम किया... तू कभी ऐसा किया? मुझे भी आज मज़ा लेने दे... आज पहली बार बेगना लंड ले रही हूँ। वो भी तुझे बता के...”
मिंटू: “हाहा ठीक है। तू कर मज़ा लेकिन मेरा ख्याल रख...” यह कहकर कार की तरफ चला गया जहाँ अमन ड्राइविंग सीट पर इंतज़ार कर रहा था। तनु सबको मिल रही थी...
अमन: “हूँ मम्मी और दीदी कहाँ रह गईं? चलो अब चलते हैं...”
मिंटू: “हूँ ठंडा रहना सीख ले। ऐसे काम में वेट करना पड़ता है। हूँ शादी करवाने की खुशी है तुझे तो अक्ल भी सीख ले... नाले तनु आ रही है मम्मी तेरी ने आज रुकना। उसके कुछ ज़रूरी काम यहाँ...”
अमन: “सॉरी। आगे से ध्यान रखूँगा... लेकिन मम्मी क्यों रुक गई? घर का काम कौन करेगा...”
मिंटू: “कोई नहीं पुत्तर। फिर क्या हुआ? कल आ जाएगी तो तू कर लेगा सारे काम...”
अमन: “तू तो ऐसा बिहेव करती है जैसे तुझे कुछ पता ही न हो...”
मिंटू समझ गया अमन को सब पता है। फिर नॉर्मली बोला – “तुझे कैसे पता?”
अमन: “पीछे जैसे एक बार मैं मम्मी और मनजीत मामी को बाहर जाते देखा था एक्टिवा पर... जाते अच्छे से मामी पर लेकिन वापस आई तो चल बदल गई थी। मैंने पूछा एक्टिवा से गिर पड़ी लेकिन स्कूटी चेक की तो ठीक थी... हूँ लड़कियों के साथ रिलेशन तो मेरे भी हैं। कैसे बदलती है मुझे अच्छे से पता...”
“फिर उस दिन सबको देखा मामे हुरड़े के घर सेकंड फ्लोर पर। तू सब एक साथ थे... हूँ अकेली-अकेली बात दस कि तुझे शर्मिंदा तो नहीं करना मैं...”
मिंटू: “ज तुझे इतनी बातें पता फिर कोमल के साथ शादी की ज़िद क्यों करता? तुझे पता तेरा होने वाला साला कौन है...?”
अमन: “होर कौन? मेरा होने वाला साला... लेकिन मैं तो इसी के साथ शादी करवाना चाहता हूँ। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता...”
“तेरी मर्ज़ी है। मैं तो तू ही उसे घर वाडन की चाबी दे रहा...”
यह कहकर मिंटू चुप हो गया...
इतनी देर में तनु हँसती हुई आ गई – “अपनी चलो डैडी जी चलते हैं। मम्मी खुद आ जाएगी...” यह कहकर पीछे बैठ गई...
सब एक ही गाड़ी में फिट होकर घरवालों की तरफ चल पड़े... जब जसप्रीत घरवालों से बात कर रही थी तो सिमर जान-बूझकर अपनी बहन की तरफ मुड़ गया...
सिमर: “दीदी आज तेरी होने वाली सास का वाजा वाजना वी... उधर देख तेरा ससुर साब को बता रही है...”
कोमल: “हेहे बढ़िया। बढ़िया पुत्तर चुक दे फट्टे। अक्ल सिखा दी पूरी। इसे पता लगना चाहिए कि किसकी बहन हूँ मैं... अगर कल यह टाँगें खोलकर नहीं चली तो मैं तुझे अपना हिसाब लगवा लूँगी जूती से कुटो तुझे मैं पुत्तर।”
Hinglish
Gopy subah jaldi uth gaya, roz ki aadat se. Chai pi ke khidiyon ki taraf nikal gaya, sochta raha. Raat ko jab maa ko choda tha tab beech-beech mein dimag mein badi behan Sandeep aur Simar ke khayal aa rahe the...
Usse dono pe gussa to nahi tha, par jealousy hoti hi hai. Fir bhi behan ke bhale ke liye soch ke Simar ke paas chala gaya. Kyunki bahut baar behan ko rote hue dekha tha jab pind waapas aati thi. Saare tabbar ke taane usko sunne padte the. Usse pata tha Simar subah-subah school ground mein daudne zaroor aata hai.
Aaj Simar ne Gopy ko ground pe dekha to daudte hue ruk gaya –
“O bale, aaj tu subah-subah yahaan? Chal aa ja, 2-2 round aur maarte hain.”
Gopy: “Haha bas dil kiya aa gaya...” Yeh keh ke woh bhi saath daudne laga.
Ek chakkar ke baad seedha bola – “Ek baat karni thi important.”
Simar: “Haha bol, kya baat? Aaj yahaan aa gaya, college mil jaata... Chal udhar baith ke baat karte hain.” (Ground ke side mein baithte hue)
Gopy: “Kaise bataun yaar, samajh nahi aa rahi... Di fir aa rahi hai aaj. Jitna mera idea hai ab tak aa gayi hogi... Phone aane lage uske...”
Simar: “Di aa rahi hai? Badhiya toh. Kitne din baad aa rahi. Main bhi tere bhanje ko milwa dunga...”
Gopy: “Woh to theek hai, milwa de. Par di doosre bache ke liye aa rahi hai...”
Simar: “O hello, kya bol raha subah-subah? Lagta raat ki utri nahi... Last time jab maine di ko pregnant kiya tha, tere se bardasht nahi hua tha. Kitne din tu baat nahi ki... Mujhe itna pressure diya to kiya tha teri behan ke saath. Tu mere saath muh latka ke firta tha.”
Gopy: “Yaar muh na latkata to kya karta sala? Jija mera to lola hai. Behan ke yaar se kuch nahi hota. Aur tu jab bhi aata tha, saari raat uski taangein tala lagane deta tha... Ab saari raat behan ki cheekhein sun ke tu kya karega, khud bata. Agar main teri behan ke saath aisa karun to tu kya karega...”
Simar: “Shant ho ja patanda, kyun hyper ho raha? O j mera jija bhi fuddu nikla to tu sambhal le meri behan... Agar zyada dil kare to viaah karwa le uske saath. Dusra samajh gaya – pind wali soch hai teri. 2-3 bache to normal hote hain... Nahi to kahenge ek bacha deke thak gayi... Chal koi na, tu ghar ja. Main shaam ko Komal ko bhej dunga, woh le aayegi Sandeep di ko hamare ghar...”
Gopy: “Tere ghar theek rahega? Koi panga to nahi...”
Simar: “Nahi padega. Sabko pata teri behan ko pehle maine pregnant kiya tha, so ghabra mat. Ghar ja befikar hoke.”
Gopy: “Chal theek hai...” Yeh keh ke ghar aa gaya.
Ghar pahunchte hi Sandeep intezaar kar rahi thi. Uske dil ki dhadkan tez thi jab usne maa ki halat dekhi. Shak tha – kya maa ka koi chakkar chal raha hai bahar kisi ke saath?
Sandeep: “Oye kithe fir raha tha subah-subah? Paer nahi lagte ghar mein...”
Gopy: “Haha aate hi shuru ho gayi tu. Sasural hi suit rehti hai. Chal pajama pehen, hamare ghar chal...” Yeh keh ke jhappi maar li.
Sandeep: “Achha puttar, main to 2 mahine nahi jaungi...”
Gopy: “O teri di. 2 mahine fir to lag gayi Simar ki mauj...”
Sandeep sharma gayi uske khule bol se – “Kya bakwas karta hai...”
Gopy: “Raat ko mummy ne sara khel bataya tha. Bas isi chakkar mein Simar se milne gaya tha...”
Sandeep: “Nahi yahaan. Chal andar ja ke baat karte hain...”
Dono Sandeep ke purane kamre mein chale gaye.
Sandeep: “Ek baat bata sachchi, tujhe soh hai meri...”
Gopy: “Soh ki kya lod? Tujhse kabhi jhoot bola? Jhoot bol ke maar to nahi khaani tujhse.”
Sandeep: “Hehe good boy. Achha to bata kal raat koi aaya tha ghar? Mummy ki chal bigdi hui hai...”
Gopy: “Na... na... nahi. Theek to hogi. Kahaan bigdi hai? Chal... tujhe bhuk lagi hogi...”
Sandeep uski hichkichahat se samajh gayi – maa ki chal bigadne wala koi aur nahi, uska chhota bhai hi hai. Jaane bujh kar bhi ho sakta hai... ya jhoot bol raha hai...
Koi na, main teri badi behan hoon. Sach kadwa sunana aata hai. Pehle apne bhanje ko bed pe kandhe wale side pe daal de, pillow rakh de taaki gir na jaaye.
Gopy bachche ko daal ke waapas aaya to Sandeep ke haath mein jutti thi – “Haan ab bata kaka ji, sach bolenge ya jutti se...”
Gopy: “Kya yaar tu pooch ke kya lena...”
Sandeep: “Chal chal zyada hosiyar mat ban. Totton ki tarah bolna shuru kar...”
Gopy: “Yaar mummy ke saath main hi karta hoon, koi aur nahi... Yeh sab us din se chal raha hai jab pehle din tujhe aur Simar chadhaya tha. Fir woh apni behan ko sab batata hai – raat ko kaise karte hain, aapas mein baat nahi karte, din mein is topic pe koi baat nahi hoti.”
Sandeep: “Achha yeh baat hai... Raat ko peeche pada hoga tera, tabhi baith bhi nahi pa rahi thi mummy...”
Gopy: “Haan pehle bhi 2-3 baar kiya tha par raat ko bada dil karta tha, isliye last 2 round peeche lagaye...”
Sandeep: “Hehe kutte kamino... Waise badhiya kiya tune bapu ji ke liye. Kitne saal ho gaye India nahi aaye, jab kaho taala dete hain bahana maar ke. Tu yeh badhiya kiya mummy sambhal ke...”
Gopy: “Tu bhi mummy ko yeh mat batana ki maine tujhe sab bata diya... Dusra aaj Simar ne bulaya hai, keh raha hai hamare ghar aa ja...”
Sandeep: “Le main kaise jaungi? Munde ke saath uske ghar? Fir munda kaun sambhalega mera? Chal tu tension mat le. Main phone kar dungi usko...”
Yeh keh ke Sandeep rasoi mein chali gayi jahaan Kuljeet roti bana rahi thi. Sandeep ne pani aur sarson ka tel garam karna shuru kiya. Kuljeet ne dekha par apna dhyaan roti mein lagaye rakha. Pani ubalne laga to bottle mein daal diya aur tel katori mein rakh diya...
Sandeep: “Mummy tu ja, yeh le main ready kar deti hoon tere liye. Kaam main kar lungi...”
Kuljeet: “Yeh kya puttar...”
Sandeep: “Main bhi aurat hoon, shaadi-shuda... Thodi halat to main aate hi dekh li thi.”
Kuljeet: “Kadi halat jaan bujh kar woh bhi anjaan bani rahi. Samajh gayi thi. Dusra yakeen tha ki beta kisi ko batayega nahi, behan ko bhi nahi...”
Sandeep: “Meri bholi maa, jab gaadi kachche raste pe daudti hai to aisa hi hota hai... Jidhar aaj takiye pe baithi thi aur chal mein dikkat. Mere saath bhi aisa hota tha pehle jab tere ladle Simar ne mere peeche pada tha... Dusri baat, isse pehle tune Gopy bichare ke maagde paave usne mujhe kuch nahi bataya...”
Kuljeet: “O okay. Mujhe galat mat samajh. Pata nahi kya baat control nahi hua. In saalon kisi ko haath nahi lagaya. Par ab bhoodhi ho gayi to yeh kaam karne lag padi...”
Sandeep: “Tu kahaan old lagti hai... Agar bhoodhi hoti to jawan munda itna zor kaise maarta? Aur galat nahi samajhti main. Mere hisaab se tune bahut badhiya kiya. In saalon bina sex ke kaat liye bas aur nahi...”
Kuljeet: “Haan yahi baat teri Kulwant aunty bhi kehti hai – maza kar bas kisi ko pata na chale... Par sach raat pata nahi kya ho gaya. Last 2 round mein lagbhag 2 ghante kiya. Tariq dikha dete. Baith bhi nahi rahi, chalna to door...”
Sandeep: “Haan ji chal koi na. Main samajh sakti hoon. Gopy ko keh dungi 4 din gaadi kachche raste pe daal de. Saari raat fir set ho ja... Thodi kabz bhi door ho jayegi aur potty khul ke aayegi... Hehe...”
Kuljeet uske sir pe thappad maarti – “Besharam maa va teri. Aisa to lihaj kar le...” Yeh keh ke tel aur garam pani leke andar chali gayi gaand sekne ke liye...
Udhhar Simar ke ghar subah ki taiyaari chal rahi thi. Aaj Happy ki badi behan family ke saath aa rahi thi Komal ke rishte ko pakka karne...
Aur lagbhag 12 baje sab log Hoshiarpur ke ek restaurant pahunch gaye jahaan milna tha...
Happy aur uski wife Manjeet Kulwant ke saath ek hi car mein aa gaye the...
Chai wagairah peene ke baad sab baat-cheet ho gayi... Kulwant padhi-likhi thi to 2-3 baatein idhar-udhar ki hui, fir seedhi Aman pe aayi.
Kulwant: “Beta aaj 22 saal ki umar hai. Pehle study wagairah finish kar le... Career soch le. Viaah to ho hi jayega...”
Aman: “Study to saath-saath chalti rahegi. Career khheti related hi karna chahta hoon aur maine start bhi kar diya hai. Bahar jaane ka man nahi...”
Kulwant: “Yeh to badhiya baat hai par teri behan jawaan hai. Ghar mein uske viaah ka sochna... Aur hamari Komal tere se 4 saal badi hai...”
Yeh sun sab ek saath bole – “Nahi nahi yeh galat baat hai. Munda bhi to bada hota hai. Yeh keh ke mat mana karo. Humein koi problem nahi.”
Sajjan Singh jo chup tha bol pada – “Par hum chunte hain ki ladki pehle viaah ho. Baaki ring ceremony kar lete hain aur wait kar lenge...”
Sajjan ki baat sabko theek lagi. Aman ne Komal ko ring pahna di...
Ring ke baad dono ko 10 minute ke liye akela chhod diya. Simar ke dil mein aaj pehli baar jealousy aayi. Normally aisa nahi hota tha kyuki woh chodata tha aur dusre dekhte the.
Kambre mein aane pe hello ke baad dono saamne baith gaye...
Aman: “Kaisi tujhe koi problem to nahi is rishte se...”
Komal: “Nahi mujhe nahi. Bas ek baat bata deti hoon pehle. Uske baad decide karna...”
Aman: “Main to decide kar chuka hoon. Change nahi hoga jab tak tujhe problem na ho. Kyunki I really like you...”
Komal: “Hehe thank you. Mujhe bhi problem nahi tujhse viaah to... Par baat yeh hai mera ek friend hai. Uske saath relationship mein hoon. Pyaar nahi, bas physical hai last 2 saal se... So samajh gaye na kya kehna chahti hoon... Baad mein pata lage isliye pehle bata diya.”
Aman: “Oh okay. Chal koi na. Par meri bhi ek shart hai ya request. Please agar manogi...”
Komal: “Haha bol jarur. Jo badi baat bata di to tujhe fark nahi pada to main bhi teri baat manungi jo man wali ho...”
Aman: “Main apni hone wali biwi ka poora past sunna chahta hoon...”
Komal: “Hoon tu lagta viaah se pehle maar khaani mere se... Chal bahar chalte hain, sab wait kar rahe honge...”
Aman: “Haha achha le je tu mere se badi hai to mere pe hukum chalega na? Na main nahi karwana tere saath viaah. Bache ki jaan le leni tu to...”
Komal: “Hehe aisa kaise paj laaoge? Tu bas dekh kya hota hai...” Dono mein jaldi hi achhi chemistry ban gayi kyuki dono padhe-likhe the, aajkal ke mahaul se waqif the.
Komal khush thi. Aman samajhdar tha, achha lag raha tha use...
Jitni der Komal-Aman lage, utni der mein Simar ne apna kaam set kar liya...
Jaspreet: “Tu to bada khush hona ab...”
Simar: “Haha le mere se zyada tu sari ho rahi hai. Kisi ka dar to tujhse aayega... Aaj ruk ja tu. Maje karegi. Tujhe bhej dunga waapas, woh aap roti bana degi...”
Jaspreet: “Nahi aaj ja leti hoon. Fir aa jaungi...”
Simar: “Chal kal ko. Aaj Happy paji ke saath mil ke tujhe aur Manjeet bhabhi ko thokunga... Tu bhi apne chhote bhai ke saamne karke maza kar... Ya aaj tu aur main motor pe aur woh apne muhalle ke mere dost Gopy ki behan Sandeep ke saath...”
Jaspreet: “Hayee tu pind ki kitni fasaa rakhi hain...?”
Simar: “Haha aisa hi hai bas... Par aaj to tere pe chadhne ka mood hai mera...”
Jaspreet: “Tu nahi sudhrega kutte ve. Poora banda ban ja. Main teri behan ki saas banne wali hoon...”
Simar: “Okay masi ji pls ruk jao aaj. Haath jod ke benti hai haha...”
Jaspreet: “Achha achha chal theek hai. Ruk. Main baat kar ke aati hoon...”
Jaspreet: “Tu chal ja pind waapas. Aman aur Tanu ke saath main kal aa jaungi...”
Mintu: “Tu aaj ruk ke kya karegi? Chal kal ko kahaan bus ke dhakke khati rahegi...”
Jaspreet: “Koi gal nahi. Main aa jaungi aap. Main to aaj hi chalna tha par woh hone wali nanad ka chhota bhai keh raha hai aaj ruk ja...”
Mintu: “Oh yeh baat hai. Fir to ruk ja. Koi chakkar nahi. Par yaar usko keh na meri Happy ki biwi ke saath setting ho lene de. Main kahan tujhe rokta hoon maza karne se. Teri baat maanta. Even tu meri laal bhi karti hai back...”
Jaspreet: “Hehe koi na. Karwa de setting thodi... Hoon jao tu. Live show dekhna ho to bata dena. Main call karwa dungi... Tujhe pata mujhe phone bare itna nahi pata...”
Mintu: “Haha jarur. Apni beti to dekh li seal patwate hue. Hoon biwi ko begana puttar chadhte hue bhi dekh lenge... Is begart to bana hi diya tune mujhe...”
Jaspreet: “Saari teri galti hai isme bhi. Tu bahar muh maarta tha. Kabhi meri khabar nahi li... Jab karte bhi the to salwar neeche karke 4 ghase maar ke kaam khatam kar side pe... Us din dekha nahi kaise teri pyari beti rani ke liye Simar ne choos-chaat-chum kiya... Tu kabhi aisa kiya? Mujhe bhi aaj maza lene de... Aaj pehli baar begana lund le rahi hoon. Woh bhi tujhe bata ke...”
Mintu: “Haha theek hai. Tu kar maza par mera khyal rakh...” Yeh keh ke car ki taraf chala gaya jahaan Aman driving seat pe wait kar raha tha. Tanu sabko mil rahi thi...
Aman: “Hoon mummy aur di kahan reh gayi? Chal ab chalte hain...”
Mintu: “Hoon thanda rehna seekh le. Aise kaam mein wait karna padta hai. Hoon viaah karwane ki khushi hai tujhe to akal bhi seekh le... Nale Tanu aa rahi hai mummy teri ne aaj rukna. Uske kuch zaroori kaam yahaan...”
Aman: “Sorry. Aage se dhyaan rakhunga... Par mummy kyun ruk gayi? Ghar ka kaam kaun karega...”
Mintu: “Koi na puttar. Fir kya hua? Kal aa jayegi to tu kar lega saare kaam...”
Aman: “Tu to aisa behave karti hai jaise tujhe kuch pata hi na ho...”
Mintu samajh gaya Aman ko sab pata hai. Fir normally bola – “Tujhe kaise pata?”
Aman: “Pichhe jaise ek baar main mummy aur Manjeet mami ko bahar jaate dekha tha Activa pe... Jaate the achhe se mami pe par waapas aayi to chal badli hui thi. Maine poocha Activa se gir padi par scooty check ki to theek thi... Hoon ladkiyon ke saath relations to mere bhi hain. Kaise badalti hai mujhe achhe se pata...”
“Fir us din sabko dekha mame hure ke ghar second floor pe. Tu sab ek saath the... Hoon akeli-akeli baat das ki tujhe sharminda to nahi karna main...”
Mintu: “J tujhe itni baatein pata fir Komal ke saath viaah ki zid kyun karta? Tujhe pata tera hone wala saala kaun hai...?”
Aman: “Hoor kaun? Mera hone wala saala... Par main to isi ke saath viaah karwana chahta hoon. Mujhe koi fark nahi padta...”
“Teri marzi hai. Main to tu hi usko ghar waadon ki chaabi de raha...”
Yeh keh ke Mintu chup ho gaya...
Itni der mein Tanu aa gayi hasdi hui – “Apni chal daddy ji chalte hain. Mummy aap aa jayegi...” Yeh keh ke peeche baith gayi...
Sab ek hi gaadi mein fit hoke ghar waalon ki taraf chal pade... Jab Jaspreet gharwalon se baat kar rahi thi to Simar jaan ke apni behan ki taraf mud gaya...
Simar: “Didi aaj teri hone wali saas ka vaaja vaajna ve... Udhhar dekh tera sohra saab ko bata rahi hai...”
Komal: “Hehe badhiya. Badhiya puttar chuk de fatte. Akal sikha di poori. Isse pata lagna chahiye ki kiski behen hoon main... Agar kal yeh taangein khol ke nahi chali to main tujhe apna hisaab lagwa lungi jutti se kuto tujhe main puttar.”
Simar sahi maje kar raha hai.Update 10
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तनु: "हाय... चूत दुख रही। पर दर्द खुशी का है। मिलते रहना।"
तनु ने पैंटी पहनी—सिमर का माल रिस रहा था। नीचे गई। सबने देखा वो लँगड़ाकर चल रही थी।
जसप्रीत: "आ जा, दूध पी।"
तनु: "सॉरी, फ्रेंड्स नहीं छोड़ रहे थे।"
मिंटू: "हाँ पुत्त... आज पता लगा तू बच्ची नहीं रही
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ऐसे ही थोड़ी देर बाद मनजीत उठकर अपने कमरे में चली गई, जहाँ हैप्पी पहले ही लेटा इंतजार कर रहा था। गर्म दूध पीकर तनु को भी काफी अच्छा महसूस हुआ। ऐसा लगा जैसे उसके शरीर में नई जान आ गई हो। फिर भी अभी तक पैर में दर्द था, यह वह महसूस कर सकती थी। इसलिए अपनी मम्मी से हाथ जोड़ते हुए बोली, "मम्मी, प्लीज मुझे कमरे तक छोड़ दो। मेरी नस खिंच गई है, बहुत दर्द हो रहा है।"
जसप्रीत: "हाँ पुत्री, क्यों नहीं।" और अपने पति से मुंह बनाते हुए, "तुम भी जाओ, मैं आ रही हूँ। क्या सोच रहे हो यहाँ खड़े-खड़े?"
मिंटू: "कुछ नहीं सोचता, तू जल्दी आ जाना..."
जसप्रीत: "हाँ आ रही हूँ। तनु की टांग को जरा तिल के तेल से मालिश कर दूँगी, ठीक हो जाएगी। नहीं तो यह ऐसे ही टांगें फैलाए लेटी रहेगी तो लोग गलत सोचेंगे इस लड़की के बारे में। हेहेहे..."
तनु: "क्या मम्मी, तुम भी ना, जरा सोच-समझकर बोलती हो या नहीं..."
जसप्रीत: "ले, उसी की शर्मीली जाति। इतनी बड़ी हो गई है बाप के..."
मिंटू भी अपनी पत्नी की इतनी खुली बातें सुनकर शर्मिंदा हो गया था। कोई भी पिता हो जाता, जब उसकी पत्नी उसके सामने ही जवान 25 साल की बेटी की टांगों को तेल लगाने की बात करती।
तनु: "मम्मी जी, मैं तुम्हें सब बताती थी तो फिर आज यह क्या था...?"
जसप्रीत: "क्या मतलब पुत्री, मैं तेरी बात नहीं समझी?"
तनु: "नहीं, मुझे ऐसा लगा जैसे तुम डैडी जी को जानबूझकर तंग कर रही थीं। इशारों-इशारों में ताने मार रही थीं। देखो, मैं तुमसे आज तक कोई बात नहीं छुपाई... मैं तो तुम्हें यह भी बताती थी कि मैं सिमर से प्यार करती हूँ, उसके साथ ही सब करना चाहती हूँ और आज करना था। यह भी बताया था। अब तुम भी बताओ, क्या है तुम्हारे और डैडी के बीच? सब ठीक तो है ना..."
फिर जसप्रीत भी अपनी बेटी से कुछ नहीं छुपाती और सब कुछ सच बता देती है। सारा नंगा सच, जिसे सुनकर उसकी बेटी भी स्तब्ध हो जाती है।
तनु: "ऐसा मतलब... आज जब मैं सिमर के साथ कमरे में थी, उधर डैडी बाहर देख रहे थे..."
जसप्रीत: "हेहेहे अरे हाँ, जब तू दर्द से तड़प रही थी, वे भी बाहर परेशान हो रहे थे..."
तनु: "और क्या करती जरा, हाथ-पैर न मारती, तड़पती न? ऐसे बड़ी मेरी चूत जैसी में फंसा दिया। ऊपर से चु भी नहीं निकलने दिया, बल्क में बल्क डालकर... अभी भी कितना दर्द हो रहा है। मैं तो सोचती थी 19 साल का है, अभी खैर, इतनी अक्ल होनी चाहिए मुझे बतानी पड़ती सब। पर उसने तो मेरी चूत बंद कर दी..."
जसप्रीत: "तुझे तो फिर भी उसने प्यार से किया। दोपहर तेरी मनजीत मामी की जबरदस्त चीखें सुनीं उसने अपनी मोटर पर..."
तनु: "ओह, ऐसा मतलब थोड़ा नाड़ा भी खोल दिया सिमर ने?"
जसप्रीत: "नहीं-नहीं, मेरा नहीं। सिर्फ तेरी मनजीत मामी का। चल, मैं चलती हूँ। बाद में बात करेंगी। घर जाओ, तेरा पिता इंतजार कर रहा होगा मुझे..."
तनु: "हेहेहे जाओ, आज थोड़ा खैर नहीं... सुबह सबको पूछना थोड़ा माँ-बेटी की चाल क्यों बदल गई है..."
जसप्रीत तनवीर के गाल पर थप्पड़ मारते हुए चली गई। उस रात जसप्रीत और मिंटू के कमरे में काफी बहस हुई, लेकिन जब जसप्रीत अपने कपड़े उतारकर मिंटू की छाती पर बैठ गई, तो मिंटू चुप हो गया।
मिंटू: "नीचे उतर साली मोटी..."
जसप्रीत: "अच्छा, मैं मोटी हूँ? चल, फिर आज ऐसे मजा कर।" इतना कहकर वह उसके मुँह पर अपनी गांड रखकर बैठ गई...
जहाँ पहले मिंटू काफी गुस्से में था, अब वह अपनी पत्नी की ये हरकतों से उत्तेजित हो गया था। जब से अपनी बेटी को नंगी उस लड़के के नीचे देखकर आया था, उधर से उसका दिमाग सुन्न हो गया था। जैसे उसकी बेटी नंगी लंड पर उछल रही हो, जैसे वह लड़का उसकी बेटी की टांगें कंधों पर रखकर फिर घोड़ी बनाकर उसे चोद रहा हो। उसे अपनी बेटी की चिंता हो रही थी कि उसे दर्द तो नहीं हो रहा होगा। बाद में वापस आने पर उसकी बदली चाल देखकर उसे तरस आ रहा था तनु पर।
10 मिनट ऐसे ही चुसवाकर जसप्रीत नीचे उतर गई।
जसप्रीत: "अब बताओ, क्या कह रहे थे तुम..."
मिंटू: "कुछ नहीं मेरी माँ, तू जीती, मैं हार गया... तनु कहीं इतनी जल्दी आ गई? तू थोड़ा रुक जाती उसके पास मालिश लेने..."
जसप्रीत: "ओह हो, तुम तो ऐसे ही टेंशन लेते रहते हो। वह ठीक है, सिर्फ एक बार ही करवाकर आई हूँ। नाल की सील टूटी है, थोड़ा दर्द तो जरूरी है..."
मिंटू: "हाँ ठीक है, बस उसे समझा देना बाहर किसी को पता न लगे। जो भी करना, चुपचाप करे।"
उधर हैप्पी भी बड़ी खुश हुआ सारी स्टोरी सुनकर।
ऐसे ही विवाह भी लंगड़ा गया। विवाह के बीच कई कुँवारी-शादीशुदा लड़कियाँ बेगाने लड़कों से चुद गईं। क्योंकि विवाह का तो मौका होता ही ऐसे कामों के लिए।
सिमर ने तो मौका देखकर डॉली जान से पहले दिलप्रीत को एक बार फिर चोद दिया था। वह चाहता था कि डॉली जान से पहले एक बार दिलप्रीत को चोदे। जब होटल में ही सब खा-पी रहे थे, भांगड़ा डाल रहे थे, तो मौका देखकर उसने उधर ही बाथरूम में बुलाकर दिलप्रीत का विवाह वाला लहंगा ऊपर चढ़ाकर दिलप्रीत की चूत मार ली। उसने तो दिलप्रीत को चूत भी साफ नहीं करने दी। दिलप्रीत ने भी उसकी बात मान ली और वापस जाकर स्टेज पर अपने पति के साथ जाकर बैठ गई, माल से भरी चूत लेकर। इधर तक कि जब वह रात को दिलप्रीत अपने पति के साथ नंगी हुई, तो उधर भी चूत साफ नहीं की थी। पानी से बस टिश्यू पेपर से बाहर एक बार साफ कर दिया था। उसके पति को बिल्कुल भी पता नहीं चला कि वह अपनी पत्नी की चूत से किसी बेगाने लड़के का माल चाट रहा है।
कुलवंत बड़ी खुश थी। विवाह में उसने काफी बार तनु को चोदा था। सिमर का जब दिल करता, तनु को बुला लेता। मिंटू ने कई बार अपनी बेटी की टांगें सिमर के कंधों पर देखीं। दो बार तो तनु सिमर के कंधों पर टांगें रखकर मजे कर रही थी कि उसकी मम्मी-पापा आ गए, लेकिन दोनों को मजे करते देख चुपचाप वापस चले गए। तनु अपनी मम्मी का पिता पर नया कंट्रोल देखकर हैरान भी थी और खुश भी थी।
ऐसे ही एक दिन कुलवंत और सिमर बैठे हुए थे कि उसकी माँ का फोन बार-बार बज रहा था। उसकी माँ नंबर देखकर फोन काट देती, लेकिन फोन अगले ही पल फिर बजने लग जाता।
सिमर: "मम्मी, क्या हुआ? फोन क्यों काट रही हो? बात कर लो। कहते हो तो मैं बाहर चला जाऊँ।"
कुलवंत: "नहीं पुत्र, तुझे बाहर जाने की जरूरत नहीं। अब तू मेरे ऊपर पूरा हक रखता है। अब तो तू मेरा सरदार है। तू ही है जो मुझे अपने कंट्रोल में रख सकता है। तू वो हक रखता है जो शायद तेरा पिता कभी नहीं ले सका। जो हुकुम तेरा पिता कभी नहीं चला पाया मेरे ऊपर। यह मेरा पुराना यार है, हमारे साथ ही टीचर है। जगदीप नाम है। शायद तुझे पता हो उसके बारे में। यह रात को अक्सर आता रहता है मुझे मिलने। मुझे ब्लैकमेल करता रहता है कि मैं उसे मिलूँ नहीं तो मेरी कुछ फोटोज हैं जो इसने धोखे से खींची थीं नंगी वाली, वे वायरल कर देगा व्हाट्सएप पर।"
सिमर: "ओह ओके, हाँ जगदीप कंप्यूटर वाला टीचर थोड़ा है। मैं जानता हूँ इसे, भला हीरो बंदा है। यह ज्यादा उड़ान भर रहा है हवा में। लगता है ऐसे इलाज भी करना पड़ेगा। कोई ना, बुला लो इसे रात को।"
सिमर के कहने पर कुलवंत ने जगदीप सर को अपने घर बुला लिया। जगदीप का आजकल दिमाग और टाइम दोनों खराब चल रहे थे। उसकी पक्की सहेली, जिसे वह बड़ा प्यार करता था और वह भी जगदीप को बहुत प्यार करती थी, उसे जगदीप की करतूतों का पता चल गया था कि कुलवंत से हटकर उसके और भी कई टीचर्स के साथ रिलेशन थे। वह लड़की भी नाल दे स्कूल में टीचर थी। वह यह सब बर्दाश्त न कर सकी और गुस्से में आकर अपने माँ-पिता की पसंद के लड़के से विवाह करवा लिया।
जैसे आम होता है, प्यार जितना भी गहरा हो, विवाह के बाद सब बदल ही जाता है। जब विवाह के बाद 1 साल तक पति अपनी नई पत्नी को नंगी करके धुन तक लंड डालता है, तो पत्नी प्यार वगैरह सब भूल जाती है। जगदीप के साथ भी वैसा ही हुआ। वह तो अब उसे बुलाने की भी हिम्मत नहीं थी। 3 महीने हो चुके थे विवाह को। रोज उसे देखता, बुलाने की कोशिश करता, लेकिन वह उसे इग्नोर कर देती।
दिन-ब-दिन अपनी माशूक का बदलता शरीर जगदीप की जान ले लेता। जगदीप ने भी उसे ठोका था, लेकिन ज्यादा नहीं। पर अब तो उसे रोज नंगी होना पड़ता था। ऐसा कोई दिन नहीं था जब वह बिना चूत मरवाई सोती हो। कई बार वह सारा दिन स्कूल में ज्यादा काम से थक जाती, तो अपने पति को कहती कि आज रहने दो, लेकिन वह जिधर उसे रोज 4 बार चूत मारता, उधर 2 बार मारकर सोने दे देता। ऐसे नतीजा यह था कि अब उसका शरीर पहले से भरने लगा था। ब्रा उसकी साइज 32 से 34 हो गई थी। जगदीप यह देखकर बहुत जलन महसूस करता था।
आज वह अपनी जलन कुलवंत पर उतारना चाहता था। थोड़े दिन पहले ही उसने कुछ स्टूडेंट लड़कों को बिना बात के पीट दिया था, जिसके कारण प्रिंसिपल साब से वार्निंग मिल गई थी।
कोई 10 बजे ही जगदीप ने गाड़ी उनके घर से थोड़ी दूर पार्क करके खड़ी कर दी और दरवाजा खोलकर अंदर आ गया। सीधा कुलवंत के कमरे में चला गया। जहाँ कुलवंत नंगी उसके इंतजार में पड़ी थी, जैसे उसे उसके बेटे सिमर ने समझाया था।
जगदीप स्कूल की आदत के मुताबिक कुलवंत को मैडम जी कहकर बुलाता हुआ, "तुम ना मना कर रही थीं, अब क्या हो गया? अब मुझे देखो थोड़े फूहड़ में खैर आग लग गई जो मेरे आने से पहले ही नंगी बैठी हो।"
कुलवंत: "नहीं आग तो नहीं लगी। बस जिधर तेरी आग लगी थी, वह ठंडी करनी थी। तेरा दिमाग ठिकाने पर लाना था।"
जगदीप: "क्या बकवास कर रही हो? अपनी औकात न भूल जाओ। ज्यादा बोलीं तो तेरी होटल वाली फोटोज और वीडियोज मैं वायरल कर दूँगा सारे स्कूल में।"
इतने में सिमर, जो बाहर ही खड़ा था, अंदर आ गया। "पंगा लेने आया? मम्मी ने इतने साल तुम्हें मजे करवाए, अब भूल जाओ वे वीडियोज और पिक्चर्स। डिलीट करो और इधर से टर हो जाओ।"
जगदीप: "तू साला इधर क्या करने आया बेशर्म? तू भी दलाल ही लगता घस्ती माँ का पुत्र। साला तुझे तो पता ही है, तेरी घस्ती माँ का यह लंड लिए बिना नहीं रह सकती।"
अभी जगदीप और बोलना चाहता था कि सिमर ने पहले एक लात जगदीप के टेस्टिकल्स पर मार दी। जगदीप इससे पहले संभल पाता, दूसरा मुक्का उसके जबड़े पर ठा ठोंका सिमर ने मार दिया। यह सब इतनी जल्दी हुआ कि जगदीप को संभलने का मौका ही नहीं मिला। वह उधर ही ढेर हो गया।
सिमर: "साला तुझे प्यार से समझा रहा था, तू ऐसे फालतू बोलता जाता। आज तेरा मोर मैं बनाऊँगा। चल, कपड़े उतार और जो कहूँ चुपचाप कर। नहीं तो मैं चिल्ला दूँगा कि हमारे घर चोर आ गया, लूटने आया था। हमारे घर मेरी माँ के साथ रेप करने लगा था। नाले उसके साथ कुटमार कर रहा था। बाकी तू खुद सोच ले, मेरी माँ की गाँव में इज्जत कितनी है। गाँव वाले तुझे जिंदा नहीं छोड़ेंगे। ज बच भी गया गाँव वालों से, पुलिस ने जिधर तेरी गांड पर पट्टा फेरना, वह वखरा।"
जगदीप जो हो रहा था, समझ ही नहीं पाया। सिमर की बात सही थी। गाँव वाले उसकी बात नहीं सुनते। हो सकता था गाँव वाले कुट-कुट मार दें। जान से मार दें।
जगदीप: "देख, मेरे से गलती हो गई। यह ले मेरा फोन, तो रख लो। तसल्ली कर लो। मैं सारा कुछ डिलीट कर देता हूँ। प्लीज मुझे जाने दो। इधर से मैं वापस कभी नहीं आऊँगा। तेरी माँ के रास्ते में नौकरी भी छोड़ दूँगा।"
कुलवंत: "पुत्र, जाने दो इसे। छोड़ दो। हम कोई पंगे में नहीं पड़ना। तू बस इसके फोन से पिक्स और वीडियोज डिलीट करके भेज दो इसे।"
सिमर: "तुम टेंशन न लो। बस मजे करो। बाकी मैं देख लूँगा।"
और फिर जगदीप वाली देखते हुए, "तू साला अभी तक नंगा नहीं हुआ? पहले तो बड़ा जल्दी में था मेरी माँ चोदने को। यह देख, नंगी खड़ी है। बन शेर लगा हाथ।"
जगदीप ने चुपचाप अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए। जब कुलवंत की पीठ उसके सामने हुई थी, तो कुलवंत के लाल चिट्टड़ को वह देख चुका था। जो आज दोपहर उसके पुत्र ने किए थे।
क्योंकि इतने दिन हो गए थे, कुलवंत ने चूत नहीं मरवाई थी। अपने बदले की आग में वह सब भूल गई थी। और दूसरा, अपने पुत्र को ऐसे सेक्स में तेज देखकर वह बड़ी खुश थी। पर इतने साल की आदत थी टांगें फैलाने की। इतनी जल्दी कैसे छूट जाती। यह सलाह उसकी बेटी कोमल ने ही दी थी। बात-बात करते जब शाम की चाय पी रहे थे, वह।
कोमल: "मम्मी, क्या हो गया? बड़े परेशान लग रही हो। इतना पसीना आ रहा है। क्या हुआ? सब ठीक तो है ना? गोली ले लो, अगर बुखार हो तो।"
कुलवंत: "तुझे सारा पता क्यों? तंग करती है। मैं अब वह सब बंद करना चाहती हूँ। पर यह बुरी आदत इतनी जल्दी नहीं छूटती। और एक तेरा खासी पिता है, कुछ करता ही नहीं।"
कोमल: "हम्म, बुरी आदत। हेहेहे, वह तो बहुत आसान है। वह तो जल्दी छूट जाएगी। आदत जितनी भी गंदी और पुरानी हो..."
कुलवंत: "ओह, कैसे? बता मुझे। बड़ी तंग हूँ मैं। सिमर भी तुझे पता, बिजी है अब। उसे तो आप खेंच लगी कि आ जा, मेरे ऊपर चढ़ जा।"
कोमल: "हाँ, यह तो उसे आप चिढ़ाकर सादी सेक्सी माँ को कंट्रोल में रखे। नहीं तो यह फिर बाहर जाओगी मरवाने। फिलहाल तरीका तो थोड़ा वैसा ही है, जिधर तुम हमें सजा देती हो और हम वह गलती दोबारा नहीं करते। क्या कहती हो? वही हिम्मत, जिधर सजा हमें देती हो, अपने ऊपर ट्राई करने की।"
कुलवंत: "हाँ, यह तरीका ठीक रहेगा। इससे ध्यान भटक जाएगा। जा, सिमर को मेरे कमरे में भेज दे। इस बार सिमर को करने दे। अगली बार तुझे मौका दूँगी कुटने का। मैं जाकर कपड़े चेंज कर लेती हूँ इतनी देर। फिर आज रात को किसी को बुलाना है।"
कोमल: "गुड लक। नाले यह ना टेंशन लो कि ज रो पड़े तो हम क्या सोचेंगे थोड़े के बारे में। बाकी सादा छोटा शेर बड़ा तेज है। इतने काम में आप संभाल लेना।"
कुलवंत: "हेहेहे, मुझे ना सिखा। तुझे पता सारा कुछ।"
कोमल: "तुम भूल गई लगती हो। आज तक हम दोनों बहन-भाई और शायद डैडी जी भी थोड़ी गोदी में पड़ते थे। तुम मारती थीं। आज थोड़ी बारी।"
इतना कहकर हँसते हुए कोमल सिमर को बुलाने उसके कमरे में चली गई।
कोमल: "सिमर, गेम बंद कर। मम्मी बुला रही हैं अपने रूम में तुझे..."
सिमर: "क्यों, क्या हुआ? मैं तो कुछ नहीं किया..."
कोमल: "अपनी फिक्र तुझे पहले पड़ जाती। हेहेहे। तेरी बारी नहीं है। मम्मी को थोड़ी मदद चाहिए तेरी।"
सिमर गेम बंद करके जाने लगा था, तो कोमल पीछे से आवाज मारती है, "एक मिनट रुक। अपनी बेल्ट साथ लेता जा। तुझे जरूरत पड़ेगी।"
सिमर ने उस समय शॉर्ट पहन रखी थी। वह वापस आकर अपनी किली पर टंगी पैंट से बेल्ट निकालकर साथ ले गया। डर तो अभी भी था कि कहीं इसके से ही आज पड़नी हो उसे।
कमरे में जब पहुँचा, तो उसकी माँ पूरी नंगी बेड पर कोने पर बैठी हुई थी। उसके हाथ में बेल्ट देखकर उसकी माँ ने अपना नीचे वाला बल्क दांतों में दबा लिया। वह पास जाकर बेड पर बैठ गया। उसकी माँ चुपचाप उठी, उसके पैरों पर बैठ गई और पहले एक जबरदस्त किस उसके बल्क पर किया। फिर सारी बात एक्सप्लेन करने लगी कि कैसे अभी भी उसका दिल बाहर टांगें फैलाने का करता है, लेकिन अब वह यह सब बंद करना चाहती है।
सिमर उसकी बात समझ गया और कुलवंत कौर उठकर अपने पुत्र पर पैर ऊपर करके लेट गई। सिमर पहले अपनी माँ के गोरे-चिट्टे गोल चिट्टड़ को देखता रहा। एक भी दाग नहीं था उसकी माँ की गांड पर। उसे झुककर अपनी माँ के चिट्टड़ को चूम लिया।
कुलवंत: "पुत्र, यह सब बाद में भी कर सकता तू। पहले जिधर मेरा काम है वह कर ले। इससे पहले मेरा इरादा बदल जाए।"
सिमर ने बिना कुछ बोले अपना हाथ कंधों तक उठाया और अपनी माँ के चिट्टड़ पर ठा मार दिया। इतने साल खुद अपनी माँ की गोदी में मार खाकर वह भी एक्सपर्ट बन गया था। उसे पता था कि हाथ के खरे हिस्से से सजा ज्यादा लगती है। बस वही तरीका अपनाते हुए साए खबे दोनों चिट्टड़ पर सटाक-सटाक करते थप्पड़ लगने लगे। पहले 1-1 दोनों तरफ मारता रहा। फिर जब देखा कि उसकी माँ के चिट्टड़ ने रंग बदलना शुरू कर दिया, तो वह एक ही साइड पर 5-7 मारकर साइड बदल लेता।
कुलवंत तो सिमर के हाथ से मार खाकर ही रोने लग पड़ी थी। उसकी गांड से पसीना निकलने लगा था। जब उसके पैर का पिछला हिस्सा भी लाल हो गया, तो सिमर के कहने पर कुलवंत कौर बेड पर लेट गई और अपने पेट के नीचे 2 तकिए रख लिए, जिससे उसकी गांड ऊँची हो गई।
सिमर को आज यकीन हुआ था कि जब उसकी मम्मी कहती होती थी, "पुत्र, ऐसे गलतियाँ ना करो। नहीं तो मुझे तुम्हें अपने रूम में बुलाकर ऐसा करना पड़ता। मुझे यह सब करना अच्छा नहीं लगता, लेकिन ज आज तुम्हें छोड़ दूँ तो तुम यह गलती दोबारा करोगे।" उधर सिमर सोचता होता था कि मम्मी को हमें दोनों बहन-भाई को कुटना अच्छा लगता है। लेकिन आज वह खुद मम्मी वाली जगह पर था। उसे भी अच्छा नहीं लग रहा था अपनी मम्मी की गांड को कुटना।
अपनी माँ के ऊपर हुए लाल चिट्टड़ पर एक के बाद एक सिमर ने लगातार बेल्ट से 12 बार किए। जब भी बेल्ट कुलवंत की गांड पर बजती, तो वह उछल पड़ती, लेकिन उसने सिमर को बिल्कुल भी रोकने की कोशिश न की।
सिमर ने बाद में अपनी माँ के चिट्टड़ पर कोल्ड क्रीम लगा दी। चिट्टड़ सिर्फ लाल हुए थे, कोई सजा नहीं लगी थी उसके ऊपर। बस अब अगले 4 दिन बैठने में दर्द होना था।
इतने लाल चिट्टड़ देख जगदीप भी समझ गया था कि ज उसने सिमर की बात न मानी तो बहुत बुरा होगा उसके साथ।
इसलिए चुपचाप जगदीप अपने कपड़े उतारकर नंगा हो गया। और सिमर वाली देखा, जो साइड पर कुर्सी पर पैर पर पैर रख बैठा हुआ था। सिमर ने सिर हिलाकर उसे परमिशन दे दी, तो जगदीप आगे होकर कुलवंत को गले लगा लिया और होंठों पर किस करता चूमने लगा। साथ ही कुलवंत मैडम के लाल सुर्ख चिट्टड़ से खेलने लगा। जब जगदीप के हाथ उसकी गांड पर लगे, तो कुलवंत कौर सिसक पड़ी दर्द और मजे से। दर्द काफी था अभी भी।
जगदीप फुसफुसाते हुए, "ओह शिट, सॉरी कुलवंत मैडम। मैं भूल गया। पर तुम ऐसे करने क्यों दिया अपने बेटे को।"
कुलवंत: "क्योंकि मेरी आदतें खराब रही हैं शुरू से। मेरा पति तो खासी है, तुझे पता। पर मेरे बेटे को औरत कंट्रोल में रखना आता है। चल, अब तू बातें घटाकर और काम ज्यादा कर।"
उसने कुलवंत के बल्क चूसने चाहे, तो कुलवंत ने मना कर दिया। जगदीप फिर उसके स्तन चूसने लगा। ऐसे ही कभी स्तन, कभी उसकी चूत पर पैर को चूमता-चूसता कुलवंत को खुश करने में लगा रहा। जब उसने देखा कि कुलवंत गर्म हो गई है, तो वह उसके पैरों में आ गया। उसके ऊपर लेटकर जगदीप को अपना लंड धीरे-धीरे चूत में डाल घिसे मारने शुरू कर दिए।
पहले तो 5 मिनट वह सिमर वाली देखता रहा कि कहीं वह कुछ बोले ना, लेकिन बाद में वह बेफिक्र हो घिसे मारने लगा। जगदीप भी सेक्स का पक्का था, उसका काम भी जल्दी नहीं होता था। ऐसे ही अपनी मस्ती में वह घिसे मारने लगा हुआ था कि उसे अपनी पीठ पर कुछ गीला-गीला महसूस हुआ। जब उसने पीछे मुड़कर देखा, तो कुलवंत मैडम का बेटा सिमर पूरा नंगा होकर खड़ा था। जिसे देख वह डर गया। डरने वाली बात भी थी। लंड उसका अपने लंड से बड़ा भी था, मोटाई तो काफी ज्यादा थी।
उसने अपने लंड पर सरसों के तेल से पूरा मल लिया था। जब सिमर ने उसकी गांड पर तेल सूटका, तो जगदीप समझ गया कि आज खैर नहीं। चूत मारने आया था, आज गांड मरवानी पड़ेगी।
जगदीप: "प्लीज भाई, छोड़ दे। माफ कर दे... आगे से कभी नहीं करूँगा ऐसा।"
सिमर: "हाँ जी, तुम यह गलती नहीं करोगे। बस वही पक्का करने दो। नाले रुको ना, घिसे मारते रहो।"
जगदीप ने कुलवंत वाली देखा, "प्लीज मैडम, बचाओ। प्लीज, थोड़े पैर फाड़ता।"
कुलवंत: "पैर तो तुम्हें इतने साल हो गए फाड़ते। नंगी करके मेरे पैर ही तो फाड़ते थे, फिर अपने मोड़ पर रख लेते थे।"
कुलवंत फिर जगदीप को अपनी बाहों में लेते हुए, "मुझे फाड़ लो। जो दिल करता, कर लो। मैं नहीं रोकूँगी। तुम मेरे बल्क का रस चूसना चाहते थे? आओ।" इतना कह कुलवंत ने जगदीप के बल्क में बल्क डाल लिए। जगदीप को पता था, और कोई रास्ता नहीं। वह बल्क चूसने लगा। कुलवंत को पता था आगे क्या करना है। उसने अपने ऊपर पड़े जगदीप की गांड दोनों हाथों से फैला दी।
सिमर ने कुछ देर जगदीप को रोका और अपना लंड उसकी गांड पर सेट करके जोर लगा दिया। अभी टोपा ही अंदर गया था कि जगदीप दर्द के मारे छूटने की कोशिश करने लगा, लेकिन कुलवंत के जोर के आगे हार गया। पर उसके पीछे खड़ा सिमर नहीं रुका। अपना 8 इंच से ज्यादा लंड पूरा अंदर धक्का करके कुछ पल रुका और जगदीप को चेतावनी दी।
सिमर: "ले सर जी, ऐसे दर्दे थे। सारा लंड निगल गए तुम तो। मम्मी, थोड़ा यार तो बड़ा अट्ट है।"
जगदीप: "साला मेरी गांड फाड़ दी तू बहनचोद। मेरे पीछे मिर्च लग दिया। हायyyy, मैं मर गया। प्लीज निकाल ले बाहर यार।"
कुलवंत यह सुन हँसते हुए जगदीप का फेस अपनी चुन्नी से साफ करती हुई, "कोई बात नहीं सर जी। अभी ठीक हो जाओ। दर्द फिर तुम भी अपनी गांड हिलाओगे मजे से मेरे बेटे के लंड पर। जिधर मैं हिलाती होती थी थोड़े के लंड पर।"
बड़ी शानदार गेम चल पड़ी थी। सिमर पूरे जोर से घिसे मारता, तो उसके जोर से जगदीप का लंड भी कुलवंत की चूत में बजता। ऐसे ही लगे रहे। जगदीप का काम भी जल्दी नहीं हो रहा था। कुलवंत की चूत की गर्मी उसके लंड को ढीला नहीं पड़ने दे रही थी और उसकी गांड में गया लंड उसका पानी नहीं निकलने दे रहा था। ऐसे ही कुलवंत की चूत में घिसे मारते-मारते और गांड मरवाते जगदीप का काम हो गया। वह ऐसे ही कुलवंत पर ढेर होकर गिर पड़ा, लेकिन उसके पीछे लगा सिमर नहीं रुका। कोई 10 मिनट और धक्के मारकर उसकी गांड चोदने के बाद उसने अपना सारा पानी वहीं उंडेल दिया।
जब रेस्ट करने के बाद अपनी गांड धोने जगदीप बाथरूम जा रहा था, उसके पैर चल ही नहीं रहे थे। इंग्लिश टॉयलेट सीट पर जब बैठा, तो उधर भी उसे काफी दर्द हुआ। सिमर की मलाई अपनी गांड में देखकर उसे बड़ी शर्म आई और वह वापस कमरे में आ गया।
कुलवंत: "क्यों सर जी, आज थोड़ी अपनी चाल बदल गई है? किधर का लग रहा? आज तक कई लड़कियों की चाल बदल दी थी तुम तो।"
जगदीप: "बस मैडम, आग निकल रही है पीछे से। प्लीज किसी को ना बताना।"
सिमर और कुलवंत हँसने लग पड़े और बोले, "नहीं बताते सर जी। क्यों डरते हो? मजे करो। तुम अकड़ बहुत रही थी। अब थोड़ी अकड़ और सील दोनों टूट गए।" यह देखो। इतना कह सिमर ने अपना फोन बेड कोने से गिलास से छुपाकर लिया, जिधर उसने गिलास में सेट किया था।
"यह देखो, किधर टपड़े पड़े थे। तुम अपनी क्लिप देख।" जगदीप कुछ नहीं बोला। उसे पता था ज सिमर किसी बात से खिज गया तो उसके लिए अच्छा नहीं होगा। इसलिए आप ही हँसता बोला, "साला जो करने आया था, सब उल्टा हो गया।"
जगदीप तो वापस घर जाना चाहता था। सिमर ने यह कहकर रोक लिया, "सर जी, हर बार सुबह तक रुकते हो। सो आज भी सुबह तक ही रुकोगे।"
जगदीप की सारी रात गांड मरवाते और चूत मारते निकली। जब वह कुलवंत को घोड़ी बनाता, तो सिमर आकर पीछे से उसकी गांड में लंड धक्का दे देता। सिमर ने अपनी आदत के मुताबिक कोई कसर नहीं छोड़ी थी। जब जगदीप उसके लंड पर बैठकर उछल रहा था, कुलवंत उनकी पिक्चर्स ले रही थीं। सारी रात 3 बार चूत मारने और 4 बार गांड मरवाने के बाद जगदीप सुबह 4 बजे उधर से निकल गया। बड़ी मुश्किल से वह घर पहुँचा, क्योंकि बैठ तो हो ही नहीं रहा था दर्द के मारे। इतनी खोल दी थी गांड उसकी सिमर ने। उसे शर्म भी आ रही थी, क्योंकि आखिरी के 2 राउंड में उसे भी बड़ा मजा आया था। कुलवंत मैडम की बात सही थी कि "सर जी, तुम भी अपनी गांड हिलाओगे मेरे बेटे के लंड पर।" हुआ भी वैसा ही। उसे खुद नहीं पता चला था जब वह घोड़ी बने पीछे वाली जोर लगाने लगा था, और दूसरा जब लंड पर बैठकर उछल रहा था, उसे स्वाद आ रहा था। यही सब सोचते उसे नींद आ गई।
दूसरी तरफ जब सिमर अपने कमरे में पहुँचा, तो कोमल भी जाग रही थी।
सिमर: "दीदी, तुम अभी तक जाग रही हो? क्या हुआ?"
कोमल: "तुम सोने देते हो माँ-बेटे? सारी रात जगदीप सर की चीखें ने सोने नहीं दिया। बेचारे की गांड फाड़कर रख दी तूने।" इतना कहकर उसने सिमर के हल्के से मुक्का मार दिया।
सिमर: "हाहाहा, तुम देख लिया... हाँ, वह ज्यादा हवा में था। नीचे तो उतारना ही था।"
कोमल: "चल, अब शरारतें न मार। लाइट बंद कर दे। अब तो सो जाओ।"
सिमर ने "हाँ जी दीदी" कहकर लाइट बंद कर दी और अपने कपड़े उतारकर सिर्फ कच्छे में, जैसा कि वह हर रोज सोता था, चादर के नीचे आ गया। जब वह चादर खींचकर अपने ऊपर डाली, तो कोमल के पैर उसके पैरों से टच हुए। तो उसे महसूस हुआ कि उसकी दीदी भी नंगी है चादर के नीचे।
सिमर: "दीदी, तुम कपड़े क्यों उतार दिए?"
कोमल: "इसमें बड़ी बात है? इतनी बार तो तू मुझे नंगी देख चुका है..."
सिमर: "हाँ जी दीदी, देखा है। पर नॉर्मली तुम ऐसे नहीं सोतीं, तो पूछा।"
कोमल: "हम्म, तुझे सारा पता मेरे बारे में सिमर।"
इतना कहकर उसने सिमर को गले लगा लिया। भले सिमर ने कच्छा पहन रखा था, पर...
Shaandar updateUpdate 15
गोपी सुबह जल्दी उठ गया अपनी रोज़ की आदत से। चाय पीकर वो खेतों की तरफ निकल गया, सोचता हुआ। रात को जब वो अपनी माँ को चोद रहा था, तब बीच-बीच में उसके दिमाग में बड़ी बहन संदीप और सिमर के ख्याल आ रहे थे...
उसे दोनों से गुस्सा तो नहीं था, लेकिन जलन तो होती ही है। फिर भी बहन के भले के लिए सोचकर वो सिमर के पास चला गया। क्योंकि बहुत बार बहन को रोते हुए देखा था जब वो गाँव वापस आती थी। सारे परिवार वाले महीनों तक ताने मारते थे। उसे पता था सिमर सुबह-सुबह सरकारी स्कूल की ग्राउंड में दौड़ लगाने ज़रूर आता है।
आज सिमर ने गोपी को ग्राउंड में देखा तो दौड़ते-दौड़ते रुक गया।
“ओए बाले, आज तू सुबह-सुबह यहाँ? चल आ जा, 2-2 और राउंड मारते हैं।”
गोपी: “हाहा बस दिल किया आ गया...” यह कहकर वो भी साथ दौड़ने लगा।
एक चक्कर लगाने के बाद बोला – “एक ज़रूरी बात करनी थी।”
सिमर: “हाहा बोल, क्या बात? आज यहाँ आ गया, कॉलेज मिल जाता... चल उधर बैठकर बात करते हैं।” (ग्राउंड के एक कोने में नीचे बैठते हुए)
गोपी: “कैसे बताऊँ यार, समझ ही नहीं आ रही... दीदी फिर आ रही है आज। मेरे हिसाब से अब तक आ गई होगी... उसके फोन आने लग गए हैं...”
सिमर: “दीदी आ रही है? अच्छी बात है। कितने दिन बाद आ रही। मैं भी तेरे भांजे से मिल लूँगा...”
गोपी: “वो तो ठीक है, मिल लेना। लेकिन दीदी दूसरे बच्चे के लिए आ रही है...”
सिमर: “ओह हेलो, सुबह-सुबह क्या बोल रहा है? लगता है रात की नींद नहीं उतरी... लास्ट टाइम जब मैंने दीदी को प्रेग्नेंट किया था, तेरे से बर्दाश्त नहीं हुआ था। कितने दिन तूने बात तक नहीं की... मुझे इतना दबाव दिया तो तेरी बहन के साथ किया था। तू मेरे साथ मुँह लटकाए फिरता था।”
गोपी: “यार मुँह न लटकाता तो क्या करता साला बहनचोद? जीजा मेरा तो लोला है। बहन के यार से कुछ नहीं होता। और तू जब भी आता था, सारी रात उसकी टाँगें तले लगाने देता था... अब सारी रात बहन की चीखें सुनकर तू क्या करेगा, खुद बता। अगर मैं तेरी बहन के साथ ऐसा करूँ तो तू क्या करेगा...”
सिमर: “शांत हो जा पटंडा, क्यों इतना हाइपर हो रहा है? ओह अगर मेरा जीजा भी फुद्दू निकला तो तू मेरी बहन संभाल ले... ज्यादा दिल करता है तो उसके साथ विवाह करवा ले। दूसरा मैं समझ गया – तेरी पिंड वाली सोच है। 2-3 बच्चे तो नॉर्मल होते हैं... नहीं तो कहेंगे एक बच्चा देकर थक गई... चल कोई नहीं, तू घर जा। मैं शाम को कोमल को भेज दूँगा, वो संदीप दीदी को हमारे घर ले आएगी...”
गोपी: “तेरे घर ठीक रहेगा? कोई पंगा तो नहीं पड़ेगा...”
सिमर: “नहीं पड़ेगा। सबको पता है तेरी बहन को पहले मैंने प्रेग्नेंट किया था, घबराना मत। घर जा बेफिक्र होकर।”
गोपी: “चल ठीक है...” यह कहकर घर लौट आया।
घर पहुँचते ही संदीप उसका इंतज़ार कर रही थी। उसके दिल की धड़कन तेज़ थी क्योंकि उसने माँ की हालत देख ली थी। शक हो रहा था – कहीं माँ का कोई चक्कर तो नहीं चल रहा बाहर किसी के साथ?
संदीप: “ओए कहाँ फिर रहा था सुबह-सुबह? घर में पैर नहीं लगते तेरे...”
गोपी: “हाहा आते ही शुरू हो गई तू। ससुराल में ही सूट रहती है। चल पजामा पहन, हमारे घर चल...” यह कहकर जकड़ लिया।
संदीप: “अच्छा पुत्तर, मैं तो 2 महीने नहीं जाऊँगी...”
गोपी: “ओह तेरी दी। 2 महीने फिर तो सिमर की मौज लग गई...”
संदीप उसके खुले बोल से शर्मा गई – “क्या बकवास करता है...”
गोपी: “रात को मम्मी ने सारा खेल बताया था। बस उसी चक्कर में सिमर से मिलने गया था...”
संदीप: “नहीं यहाँ। चल अंदर जाकर बात करते हैं...”
दोनों संदीप के पुराने कमरे में चले गए।
संदीप: “एक बात बता सच-सच, तुझे मेरी सोह है...”
गोपी: “सोह की क्या ज़रूरत? तुझसे कभी झूठ बोला है? झूठ बोलकर मार तो नहीं खानी तुझसे।”
संदीप: “हेहे गुड बॉय। अच्छा तो बता कल रात कोई आया था घर? मम्मी की चाल बिगड़ी हुई है...”
गोपी: “ना... ना... नहीं। ठीक तो होगी। कहाँ बिगड़ी है? चल... तुझे भूख लगी होगी...”
संदीप उसकी हकलाहट से समझ गई – माँ की चाल बिगाड़ने वाला कोई और नहीं, उसका छोटा भाई ही है। जान-बूझकर भी हो सकता है... या झूठ बोल रहा है...
कोई नहीं पुत्तर, मैं तेरी बड़ी बहन हूँ। सच कड़वा सुनाना आता है। पहले अपने भांजे को बेड पर कंधे वाली साइड पर रख दे। इस तरफ तकिया रख दे ताकि गिर न जाए।
गोपी बच्चे को रखकर वापस आया तो संदीप के हाथ में जूती थी – “हाँ अब बता काका जी, सच बोलेंगे या जूती से...”
गोपी: “क्या है यार तू पूछकर क्या लेना...”
संदीप: “चल ज्यादा होशियार मत बन। टोट्टे की तरह बोलना शुरू कर...”
गोपी: “यार मम्मी के साथ मैं ही करता हूँ। कोई और नहीं... यह सब उस दिन से चल रहा है जब पहली बार तुझे और सिमर चढ़ाया था। फिर वो अपनी बहन को सब बताता है – रात को कैसे करते हैं, आपस में बात नहीं करते, दिन में इस टॉपिक पर कोई बात नहीं होती।”
संदीप: “अच्छा यह बात है... रात को पीछे पड़ा होगा तू, तभी बैठ भी नहीं पा रही थी मम्मी...”
गोपी: “हाँ पहले भी 2-3 बार किया था लेकिन रात को बहुत मन करता था, इसलिए लास्ट 2 राउंड पीछे लगाए...”
संदीप: “हेहे कुट्टा कमीना... वैसे बढ़िया किया तूने बापू जी के लिए। कितने साल हो गए इंडिया नहीं आए, जब कहो बहाना मारकर टाल देते हैं। तूने मम्मी संभालकर अच्छा किया...”
गोपी: “तू भी मम्मी को मत बताना कि मैंने तुझे सब बता दिया... दूसरा आज सिमर ने बुलाया है, कह रहा है हमारे घर आ जाओ...”
संदीप: “ले मैं कैसे जाऊँगी? बच्चे के साथ उसके घर? फिर बच्चा कौन देखेगा मेरा? चल तू टेंशन मत ले। मैं फोन कर दूँगी उसे...”
यह कहकर संदीप रसोई में चली गई जहाँ कुलजीत रोटी बना रही थी। संदीप ने पानी और सरसों का तेल गर्म करना शुरू किया। कुलजीत ने देखा लेकिन अपना ध्यान रोटी पर रखा। पानी उबला तो बोतल में डाल दिया और तेल कटोरी में रख दिया...
संदीप: “मम्मी तू जा। यह ले मैं तैयार कर देती हूँ। काम मैं कर लूँगी...”
कुलजीत: “यह क्या पुत्तर...”
संदीप: “मैं भी औरत हूँ, शादीशुदा... थोड़ी हालत तो मैं आते ही देख ली थी।”
कुलजीत: “जान-बूझकर अनजान बनी रही। समझ गई थी। दूसरा यकीन था बेटा किसी को नहीं बताएगा, बहन को भी नहीं...”
संदीप: “मेरी भोली माँ, जब गाड़ी कच्चे रास्ते पर दौड़ती है तो ऐसा ही होता है... आज तकिए पर बैठी थी और चलने में दिक्कत। मेरे साथ भी ऐसा होता था पहले जब तेरे लाड़ले सिमर ने मेरे पीछे पड़ा था... दूसरी बात, इससे पहले तूने गोपी बेचारे के मगड़ पावे उसने मुझे कुछ नहीं बताया...”
कुलजीत: “ओके। मुझे गलत मत समझ। पता नहीं क्या हुआ, कंट्रोल नहीं हुआ। इन सालों किसी को हाथ नहीं लगाया। लेकिन अब बूढ़ी हो गई तो यह काम करने लग पड़ी...”
संदीप: “तू कहाँ बूढ़ी लगती है... अगर बूढ़ी होती तो जवान लड़का इतना जोर कैसे मारता? और गलत नहीं समझती मैं। मेरे हिसाब से तूने बहुत अच्छा किया। इन सालों बिना सेक्स के काट लिए बस...”
कुलजीत: “हाँ यही बात तेरी कुलवंत आंटी भी कहती है – मज़े कर बस किसी को पता न चले... लेकिन सच रात पता नहीं क्या हो गया। आखिरी 2 राउंड में लगभग 2 घंटे किया। तारीफ दिखा देते। बैठ भी नहीं रही, चलना तो दूर...”
संदीप: “हाँ जी कोई नहीं। मैं समझ सकती हूँ। गोपी को कह दूँगी 4 दिन गाड़ी कच्चे रास्ते पर डाल दे। सारी रात फिर सेट हो जा... थोड़ी कब्ज़ भी दूर हो जाएगी और पॉटी खुलकर आएगी... हेहे...”
कुलजीत उसके सिर पर थप्पड़ मारती – “बेशर्म माँ की बेटी। ऐसा तो लिहाज़ कर ले...” यह कहकर तेल और गर्म पानी लेकर अंदर चली गई – गांड सेंकने के लिए...
उधर सिमर के घर सुबह की तैयारी चल रही थी। आज हैप्पी की बड़ी बहन अपनी फैमिली के साथ आ रही थी – कोमल के रिश्ते को पक्का करने...
लगभग 12 बजे सब लोग होशियारपुर के एक रेस्टोरेंट में पहुँच गए जहाँ मिलना था...
हैप्पी और उसकी बीवी मनजीत कुलवंत हुरा के साथ एक ही कार में आए थे...
चाय-वगैरह पीने के बाद बातचीत शुरू हुई... कुलवंत पढ़ी-लिखी थी तो पहले 2-3 बातें इधर-उधर की हुईं, फिर सीधे अमन पर आई।
कुलवंत: “बेटा आज 22 साल की उम्र है। पहले पढ़ाई पूरी कर ले... करियर की सोच ले। शादी तो हो ही जाएगी...”
अमन: “पढ़ाई तो साथ-साथ चलती रहेगी। करियर खेती से जुड़ा ही करना चाहता हूँ और मैंने शुरू भी कर दिया है। बाहर जाने का मन नहीं...”
कुलवंत: “यह तो अच्छी बात है लेकिन तेरी बहन जवान है। घर में उसके विवाह का सोचना... और हमारी कोमल तेरे से 4 साल बड़ी है...”
यह सुन सब एक साथ बोले – “नहीं-नहीं यह गलत बात है। लड़का भी तो बड़ा होता है। यह कहकर मत मना करो। हमें कोई प्रॉब्लम नहीं।”
सज्जन सिंह जो चुप था बोल पड़ा – “पर हम चुनते हैं कि लड़की पहले शादी कर ले। बाकी रिंग सेरेमनी कर लेते हैं और इंतज़ार कर लेंगे...”
सज्जन की बात सबको पसंद आई। अमन ने कोमल को रिंग पहना दी...
रिंग के बाद दोनों को 10 मिनट के लिए अकेला छोड़ दिया। सिमर के दिल में आज पहली बार जलन आई। आमतौर पर ऐसा नहीं होता था क्योंकि वो चोदता था और दूसरे देखते थे।
कमरे में आने पर हेलो के बाद दोनों आमने-सामने बैठ गए...
अमन: “कैसी? तुझे इस रिश्ते से कोई प्रॉब्लम तो नहीं...”
कोमल: “नहीं मुझे नहीं। बस एक बात पहले बता दूँ। उसके बाद फैसला करना...”
अमन: “मैं तो फैसला कर चुका हूँ। बदलाव नहीं होगा जब तक तुझे प्रॉब्लम न हो। क्योंकि आई रियली लाइक यू...”
कोमल: “हेहे थैंक यू। मुझे भी प्रॉब्लम नहीं तुझसे शादी तो... पर बात यह है मेरा एक फ्रेंड है। उसके साथ रिलेशनशिप में हूँ। प्यार नहीं, बस फिजिकल है पिछले 2 साल से... समझ गए ना क्या कहना चाहती हूँ... बाद में पता लगे इसलिए पहले बता दिया।”
अमन: “ओह ओके। कोई नहीं। लेकिन मेरी भी एक शर्त है या रिक्वेस्ट। प्लीज़ अगर मानोगी...”
कोमल: “हाहा बोल ज़रूर। जो बड़ी बात बता दी तो तुझे फर्क नहीं पड़ा तो मैं भी तेरी बात मानूँगी जो मन वाली हो...”
अमन: “मैं अपनी होने वाली बीवी का पूरा पास्ट सुनना चाहता हूँ...”
कोमल: “हूँ तू लगता है शादी से पहले मार खानी मेरे से... चलो बाहर चलते हैं, सब वेट कर रहे होंगे...”
अमन: “हाहा अच्छा ले अगर तू मेरे से बड़ी है तो मेरे पर हुकुम चलेगा ना? ना मैं नहीं करवाना तेरे साथ शादी। बच्चे की जान ले लेनी तू तो...”
कोमल: “हेहे ऐसा कैसे पज लाओगे? तू बस देख क्या होता है...” दोनों में जल्दी अच्छी केमिस्ट्री बन गई क्योंकि दोनों पढ़े-लिखे थे, आजकल के माहौल से वाकिफ थे।
कोमल खुश थी। अमन समझदार लग रहा था उसे...
जितनी देर कोमल-अमन लगे थे, उतनी देर में सिमर ने अपना काम सेट कर लिया...
जसप्रीत: “तू तो बड़ा खुश होना अब...”
सिमर: “हाहा ले मेरे से ज़्यादा तू सारी हो रही है। किसी का डर तो तुझसे आएगा... आज रुक जा तू। मज़े करेगी। तुझे वापस भेज दूँगा, वो खुद रोटी बना देगी...”
जसप्रीत: “नहीं आज जा लेती हूँ। फिर आ जाऊँगी...”
सिमर: “चल कल को। आज हैप्पी पाजी के साथ मिलके तुझे और मनजीत भाभी को ठोकूँगा... तू भी अपने छोटे भाई के सामने करके मज़ा कर... या आज तू और मैं मोटर पर और वो अपने मुहल्ले के मेरे दोस्त गोपी की बहन संदीप के साथ...”
जसप्रीत: “हाय तू पिंड की कितनी फँसा रखी हैं...?”
सिमर: “हाहा ऐसा ही है बस... लेकिन आज तो तेरे पर चढ़ने का मूड है मेरा...”
जसप्रीत: “तू नहीं सुधरेगा कुट्टे वी। पूरा बंदा बन जा। मैं तेरी बहन की सास बनने वाली हूँ...”
सिमर: “ओके मासी जी प्लीज़ रुक जाओ आज। हाथ जोड़कर बिनती है हाहा...”
जसप्रीत: “अच्छा-अच्छा चल ठीक है। रुक। मैं बात करके आती हूँ...”
जसप्रीत: “तू चल जा पिंड वापस। अमन और तनु के साथ मैं कल आ जाऊँगी...”
मिंटू: “तू आज रुक के क्या करेगी? चल कल को कहाँ बस के धक्के खाती रहेगी...”
जसप्रीत: “कोई गल नहीं। मैं आ जाऊँगी खुद। मैं तो आज ही चलना था लेकिन वो होने वाली ननद का छोटा भाई कह रहा है आज रुक जा...”
मिंटू: “ओह यह बात है। फिर तो रुक जा। कोई चक्कर नहीं। लेकिन यार उसको कह ना मेरी हैप्पी की बीवी के साथ सेटिंग हो लेने दे। मैं कहाँ तुझे रोकता हूँ मज़ा करने से। तेरी बात मानता। एवेन तू मेरी लाल भी करती है बैक...”
जसप्रीत: “हेहे कोई नहीं। करवा दे थोड़ी सेटिंग... हूँ जा तू। लाइव शो देखना हो तो बता देना। मैं कॉल करवा दूँगी... तुझे पता मुझे फोन बारे इतना नहीं पता...”
मिंटू: “हाहा ज़रूर। अपनी बेटी तो देख ली सील पटवाते हुए। हूँ बीवी को बेगना पुत्तर चढ़ते हुए भी देख लेंगे... इस बेगर्त तो बना ही दिया तूने मुझे...”
जसप्रीत: “सारी तेरी गलती है इसमें भी। तू बाहर मुँह मारता था। कभी मेरी खबर नहीं ली... जब करते भी थे तो सलवार नीचे करके 4 घसे मारकर काम खत्म करके साइड में... उस दिन देखा नहीं कैसे तेरी प्यारी बेटी रानी के लिए सिमर ने चूस-चाट-चूम किया... तू कभी ऐसा किया? मुझे भी आज मज़ा लेने दे... आज पहली बार बेगना लंड ले रही हूँ। वो भी तुझे बता के...”
मिंटू: “हाहा ठीक है। तू कर मज़ा लेकिन मेरा ख्याल रख...” यह कहकर कार की तरफ चला गया जहाँ अमन ड्राइविंग सीट पर इंतज़ार कर रहा था। तनु सबको मिल रही थी...
अमन: “हूँ मम्मी और दीदी कहाँ रह गईं? चलो अब चलते हैं...”
मिंटू: “हूँ ठंडा रहना सीख ले। ऐसे काम में वेट करना पड़ता है। हूँ शादी करवाने की खुशी है तुझे तो अक्ल भी सीख ले... नाले तनु आ रही है मम्मी तेरी ने आज रुकना। उसके कुछ ज़रूरी काम यहाँ...”
अमन: “सॉरी। आगे से ध्यान रखूँगा... लेकिन मम्मी क्यों रुक गई? घर का काम कौन करेगा...”
मिंटू: “कोई नहीं पुत्तर। फिर क्या हुआ? कल आ जाएगी तो तू कर लेगा सारे काम...”
अमन: “तू तो ऐसा बिहेव करती है जैसे तुझे कुछ पता ही न हो...”
मिंटू समझ गया अमन को सब पता है। फिर नॉर्मली बोला – “तुझे कैसे पता?”
अमन: “पीछे जैसे एक बार मैं मम्मी और मनजीत मामी को बाहर जाते देखा था एक्टिवा पर... जाते अच्छे से मामी पर लेकिन वापस आई तो चल बदल गई थी। मैंने पूछा एक्टिवा से गिर पड़ी लेकिन स्कूटी चेक की तो ठीक थी... हूँ लड़कियों के साथ रिलेशन तो मेरे भी हैं। कैसे बदलती है मुझे अच्छे से पता...”
“फिर उस दिन सबको देखा मामे हुरड़े के घर सेकंड फ्लोर पर। तू सब एक साथ थे... हूँ अकेली-अकेली बात दस कि तुझे शर्मिंदा तो नहीं करना मैं...”
मिंटू: “ज तुझे इतनी बातें पता फिर कोमल के साथ शादी की ज़िद क्यों करता? तुझे पता तेरा होने वाला साला कौन है...?”
अमन: “होर कौन? मेरा होने वाला साला... लेकिन मैं तो इसी के साथ शादी करवाना चाहता हूँ। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता...”
“तेरी मर्ज़ी है। मैं तो तू ही उसे घर वाडन की चाबी दे रहा...”
यह कहकर मिंटू चुप हो गया...
इतनी देर में तनु हँसती हुई आ गई – “अपनी चलो डैडी जी चलते हैं। मम्मी खुद आ जाएगी...” यह कहकर पीछे बैठ गई...
सब एक ही गाड़ी में फिट होकर घरवालों की तरफ चल पड़े... जब जसप्रीत घरवालों से बात कर रही थी तो सिमर जान-बूझकर अपनी बहन की तरफ मुड़ गया...
सिमर: “दीदी आज तेरी होने वाली सास का वाजा वाजना वी... उधर देख तेरा ससुर साब को बता रही है...”
कोमल: “हेहे बढ़िया। बढ़िया पुत्तर चुक दे फट्टे। अक्ल सिखा दी पूरी। इसे पता लगना चाहिए कि किसकी बहन हूँ मैं... अगर कल यह टाँगें खोलकर नहीं चली तो मैं तुझे अपना हिसाब लगवा लूँगी जूती से कुटो तुझे मैं पुत्तर।”
Hinglish
Gopy subah jaldi uth gaya, roz ki aadat se. Chai pi ke khidiyon ki taraf nikal gaya, sochta raha. Raat ko jab maa ko choda tha tab beech-beech mein dimag mein badi behan Sandeep aur Simar ke khayal aa rahe the...
Usse dono pe gussa to nahi tha, par jealousy hoti hi hai. Fir bhi behan ke bhale ke liye soch ke Simar ke paas chala gaya. Kyunki bahut baar behan ko rote hue dekha tha jab pind waapas aati thi. Saare tabbar ke taane usko sunne padte the. Usse pata tha Simar subah-subah school ground mein daudne zaroor aata hai.
Aaj Simar ne Gopy ko ground pe dekha to daudte hue ruk gaya –
“O bale, aaj tu subah-subah yahaan? Chal aa ja, 2-2 round aur maarte hain.”
Gopy: “Haha bas dil kiya aa gaya...” Yeh keh ke woh bhi saath daudne laga.
Ek chakkar ke baad seedha bola – “Ek baat karni thi important.”
Simar: “Haha bol, kya baat? Aaj yahaan aa gaya, college mil jaata... Chal udhar baith ke baat karte hain.” (Ground ke side mein baithte hue)
Gopy: “Kaise bataun yaar, samajh nahi aa rahi... Di fir aa rahi hai aaj. Jitna mera idea hai ab tak aa gayi hogi... Phone aane lage uske...”
Simar: “Di aa rahi hai? Badhiya toh. Kitne din baad aa rahi. Main bhi tere bhanje ko milwa dunga...”
Gopy: “Woh to theek hai, milwa de. Par di doosre bache ke liye aa rahi hai...”
Simar: “O hello, kya bol raha subah-subah? Lagta raat ki utri nahi... Last time jab maine di ko pregnant kiya tha, tere se bardasht nahi hua tha. Kitne din tu baat nahi ki... Mujhe itna pressure diya to kiya tha teri behan ke saath. Tu mere saath muh latka ke firta tha.”
Gopy: “Yaar muh na latkata to kya karta sala? Jija mera to lola hai. Behan ke yaar se kuch nahi hota. Aur tu jab bhi aata tha, saari raat uski taangein tala lagane deta tha... Ab saari raat behan ki cheekhein sun ke tu kya karega, khud bata. Agar main teri behan ke saath aisa karun to tu kya karega...”
Simar: “Shant ho ja patanda, kyun hyper ho raha? O j mera jija bhi fuddu nikla to tu sambhal le meri behan... Agar zyada dil kare to viaah karwa le uske saath. Dusra samajh gaya – pind wali soch hai teri. 2-3 bache to normal hote hain... Nahi to kahenge ek bacha deke thak gayi... Chal koi na, tu ghar ja. Main shaam ko Komal ko bhej dunga, woh le aayegi Sandeep di ko hamare ghar...”
Gopy: “Tere ghar theek rahega? Koi panga to nahi...”
Simar: “Nahi padega. Sabko pata teri behan ko pehle maine pregnant kiya tha, so ghabra mat. Ghar ja befikar hoke.”
Gopy: “Chal theek hai...” Yeh keh ke ghar aa gaya.
Ghar pahunchte hi Sandeep intezaar kar rahi thi. Uske dil ki dhadkan tez thi jab usne maa ki halat dekhi. Shak tha – kya maa ka koi chakkar chal raha hai bahar kisi ke saath?
Sandeep: “Oye kithe fir raha tha subah-subah? Paer nahi lagte ghar mein...”
Gopy: “Haha aate hi shuru ho gayi tu. Sasural hi suit rehti hai. Chal pajama pehen, hamare ghar chal...” Yeh keh ke jhappi maar li.
Sandeep: “Achha puttar, main to 2 mahine nahi jaungi...”
Gopy: “O teri di. 2 mahine fir to lag gayi Simar ki mauj...”
Sandeep sharma gayi uske khule bol se – “Kya bakwas karta hai...”
Gopy: “Raat ko mummy ne sara khel bataya tha. Bas isi chakkar mein Simar se milne gaya tha...”
Sandeep: “Nahi yahaan. Chal andar ja ke baat karte hain...”
Dono Sandeep ke purane kamre mein chale gaye.
Sandeep: “Ek baat bata sachchi, tujhe soh hai meri...”
Gopy: “Soh ki kya lod? Tujhse kabhi jhoot bola? Jhoot bol ke maar to nahi khaani tujhse.”
Sandeep: “Hehe good boy. Achha to bata kal raat koi aaya tha ghar? Mummy ki chal bigdi hui hai...”
Gopy: “Na... na... nahi. Theek to hogi. Kahaan bigdi hai? Chal... tujhe bhuk lagi hogi...”
Sandeep uski hichkichahat se samajh gayi – maa ki chal bigadne wala koi aur nahi, uska chhota bhai hi hai. Jaane bujh kar bhi ho sakta hai... ya jhoot bol raha hai...
Koi na, main teri badi behan hoon. Sach kadwa sunana aata hai. Pehle apne bhanje ko bed pe kandhe wale side pe daal de, pillow rakh de taaki gir na jaaye.
Gopy bachche ko daal ke waapas aaya to Sandeep ke haath mein jutti thi – “Haan ab bata kaka ji, sach bolenge ya jutti se...”
Gopy: “Kya yaar tu pooch ke kya lena...”
Sandeep: “Chal chal zyada hosiyar mat ban. Totton ki tarah bolna shuru kar...”
Gopy: “Yaar mummy ke saath main hi karta hoon, koi aur nahi... Yeh sab us din se chal raha hai jab pehle din tujhe aur Simar chadhaya tha. Fir woh apni behan ko sab batata hai – raat ko kaise karte hain, aapas mein baat nahi karte, din mein is topic pe koi baat nahi hoti.”
Sandeep: “Achha yeh baat hai... Raat ko peeche pada hoga tera, tabhi baith bhi nahi pa rahi thi mummy...”
Gopy: “Haan pehle bhi 2-3 baar kiya tha par raat ko bada dil karta tha, isliye last 2 round peeche lagaye...”
Sandeep: “Hehe kutte kamino... Waise badhiya kiya tune bapu ji ke liye. Kitne saal ho gaye India nahi aaye, jab kaho taala dete hain bahana maar ke. Tu yeh badhiya kiya mummy sambhal ke...”
Gopy: “Tu bhi mummy ko yeh mat batana ki maine tujhe sab bata diya... Dusra aaj Simar ne bulaya hai, keh raha hai hamare ghar aa ja...”
Sandeep: “Le main kaise jaungi? Munde ke saath uske ghar? Fir munda kaun sambhalega mera? Chal tu tension mat le. Main phone kar dungi usko...”
Yeh keh ke Sandeep rasoi mein chali gayi jahaan Kuljeet roti bana rahi thi. Sandeep ne pani aur sarson ka tel garam karna shuru kiya. Kuljeet ne dekha par apna dhyaan roti mein lagaye rakha. Pani ubalne laga to bottle mein daal diya aur tel katori mein rakh diya...
Sandeep: “Mummy tu ja, yeh le main ready kar deti hoon tere liye. Kaam main kar lungi...”
Kuljeet: “Yeh kya puttar...”
Sandeep: “Main bhi aurat hoon, shaadi-shuda... Thodi halat to main aate hi dekh li thi.”
Kuljeet: “Kadi halat jaan bujh kar woh bhi anjaan bani rahi. Samajh gayi thi. Dusra yakeen tha ki beta kisi ko batayega nahi, behan ko bhi nahi...”
Sandeep: “Meri bholi maa, jab gaadi kachche raste pe daudti hai to aisa hi hota hai... Jidhar aaj takiye pe baithi thi aur chal mein dikkat. Mere saath bhi aisa hota tha pehle jab tere ladle Simar ne mere peeche pada tha... Dusri baat, isse pehle tune Gopy bichare ke maagde paave usne mujhe kuch nahi bataya...”
Kuljeet: “O okay. Mujhe galat mat samajh. Pata nahi kya baat control nahi hua. In saalon kisi ko haath nahi lagaya. Par ab bhoodhi ho gayi to yeh kaam karne lag padi...”
Sandeep: “Tu kahaan old lagti hai... Agar bhoodhi hoti to jawan munda itna zor kaise maarta? Aur galat nahi samajhti main. Mere hisaab se tune bahut badhiya kiya. In saalon bina sex ke kaat liye bas aur nahi...”
Kuljeet: “Haan yahi baat teri Kulwant aunty bhi kehti hai – maza kar bas kisi ko pata na chale... Par sach raat pata nahi kya ho gaya. Last 2 round mein lagbhag 2 ghante kiya. Tariq dikha dete. Baith bhi nahi rahi, chalna to door...”
Sandeep: “Haan ji chal koi na. Main samajh sakti hoon. Gopy ko keh dungi 4 din gaadi kachche raste pe daal de. Saari raat fir set ho ja... Thodi kabz bhi door ho jayegi aur potty khul ke aayegi... Hehe...”
Kuljeet uske sir pe thappad maarti – “Besharam maa va teri. Aisa to lihaj kar le...” Yeh keh ke tel aur garam pani leke andar chali gayi gaand sekne ke liye...
Udhhar Simar ke ghar subah ki taiyaari chal rahi thi. Aaj Happy ki badi behan family ke saath aa rahi thi Komal ke rishte ko pakka karne...
Aur lagbhag 12 baje sab log Hoshiarpur ke ek restaurant pahunch gaye jahaan milna tha...
Happy aur uski wife Manjeet Kulwant ke saath ek hi car mein aa gaye the...
Chai wagairah peene ke baad sab baat-cheet ho gayi... Kulwant padhi-likhi thi to 2-3 baatein idhar-udhar ki hui, fir seedhi Aman pe aayi.
Kulwant: “Beta aaj 22 saal ki umar hai. Pehle study wagairah finish kar le... Career soch le. Viaah to ho hi jayega...”
Aman: “Study to saath-saath chalti rahegi. Career khheti related hi karna chahta hoon aur maine start bhi kar diya hai. Bahar jaane ka man nahi...”
Kulwant: “Yeh to badhiya baat hai par teri behan jawaan hai. Ghar mein uske viaah ka sochna... Aur hamari Komal tere se 4 saal badi hai...”
Yeh sun sab ek saath bole – “Nahi nahi yeh galat baat hai. Munda bhi to bada hota hai. Yeh keh ke mat mana karo. Humein koi problem nahi.”
Sajjan Singh jo chup tha bol pada – “Par hum chunte hain ki ladki pehle viaah ho. Baaki ring ceremony kar lete hain aur wait kar lenge...”
Sajjan ki baat sabko theek lagi. Aman ne Komal ko ring pahna di...
Ring ke baad dono ko 10 minute ke liye akela chhod diya. Simar ke dil mein aaj pehli baar jealousy aayi. Normally aisa nahi hota tha kyuki woh chodata tha aur dusre dekhte the.
Kambre mein aane pe hello ke baad dono saamne baith gaye...
Aman: “Kaisi tujhe koi problem to nahi is rishte se...”
Komal: “Nahi mujhe nahi. Bas ek baat bata deti hoon pehle. Uske baad decide karna...”
Aman: “Main to decide kar chuka hoon. Change nahi hoga jab tak tujhe problem na ho. Kyunki I really like you...”
Komal: “Hehe thank you. Mujhe bhi problem nahi tujhse viaah to... Par baat yeh hai mera ek friend hai. Uske saath relationship mein hoon. Pyaar nahi, bas physical hai last 2 saal se... So samajh gaye na kya kehna chahti hoon... Baad mein pata lage isliye pehle bata diya.”
Aman: “Oh okay. Chal koi na. Par meri bhi ek shart hai ya request. Please agar manogi...”
Komal: “Haha bol jarur. Jo badi baat bata di to tujhe fark nahi pada to main bhi teri baat manungi jo man wali ho...”
Aman: “Main apni hone wali biwi ka poora past sunna chahta hoon...”
Komal: “Hoon tu lagta viaah se pehle maar khaani mere se... Chal bahar chalte hain, sab wait kar rahe honge...”
Aman: “Haha achha le je tu mere se badi hai to mere pe hukum chalega na? Na main nahi karwana tere saath viaah. Bache ki jaan le leni tu to...”
Komal: “Hehe aisa kaise paj laaoge? Tu bas dekh kya hota hai...” Dono mein jaldi hi achhi chemistry ban gayi kyuki dono padhe-likhe the, aajkal ke mahaul se waqif the.
Komal khush thi. Aman samajhdar tha, achha lag raha tha use...
Jitni der Komal-Aman lage, utni der mein Simar ne apna kaam set kar liya...
Jaspreet: “Tu to bada khush hona ab...”
Simar: “Haha le mere se zyada tu sari ho rahi hai. Kisi ka dar to tujhse aayega... Aaj ruk ja tu. Maje karegi. Tujhe bhej dunga waapas, woh aap roti bana degi...”
Jaspreet: “Nahi aaj ja leti hoon. Fir aa jaungi...”
Simar: “Chal kal ko. Aaj Happy paji ke saath mil ke tujhe aur Manjeet bhabhi ko thokunga... Tu bhi apne chhote bhai ke saamne karke maza kar... Ya aaj tu aur main motor pe aur woh apne muhalle ke mere dost Gopy ki behan Sandeep ke saath...”
Jaspreet: “Hayee tu pind ki kitni fasaa rakhi hain...?”
Simar: “Haha aisa hi hai bas... Par aaj to tere pe chadhne ka mood hai mera...”
Jaspreet: “Tu nahi sudhrega kutte ve. Poora banda ban ja. Main teri behan ki saas banne wali hoon...”
Simar: “Okay masi ji pls ruk jao aaj. Haath jod ke benti hai haha...”
Jaspreet: “Achha achha chal theek hai. Ruk. Main baat kar ke aati hoon...”
Jaspreet: “Tu chal ja pind waapas. Aman aur Tanu ke saath main kal aa jaungi...”
Mintu: “Tu aaj ruk ke kya karegi? Chal kal ko kahaan bus ke dhakke khati rahegi...”
Jaspreet: “Koi gal nahi. Main aa jaungi aap. Main to aaj hi chalna tha par woh hone wali nanad ka chhota bhai keh raha hai aaj ruk ja...”
Mintu: “Oh yeh baat hai. Fir to ruk ja. Koi chakkar nahi. Par yaar usko keh na meri Happy ki biwi ke saath setting ho lene de. Main kahan tujhe rokta hoon maza karne se. Teri baat maanta. Even tu meri laal bhi karti hai back...”
Jaspreet: “Hehe koi na. Karwa de setting thodi... Hoon jao tu. Live show dekhna ho to bata dena. Main call karwa dungi... Tujhe pata mujhe phone bare itna nahi pata...”
Mintu: “Haha jarur. Apni beti to dekh li seal patwate hue. Hoon biwi ko begana puttar chadhte hue bhi dekh lenge... Is begart to bana hi diya tune mujhe...”
Jaspreet: “Saari teri galti hai isme bhi. Tu bahar muh maarta tha. Kabhi meri khabar nahi li... Jab karte bhi the to salwar neeche karke 4 ghase maar ke kaam khatam kar side pe... Us din dekha nahi kaise teri pyari beti rani ke liye Simar ne choos-chaat-chum kiya... Tu kabhi aisa kiya? Mujhe bhi aaj maza lene de... Aaj pehli baar begana lund le rahi hoon. Woh bhi tujhe bata ke...”
Mintu: “Haha theek hai. Tu kar maza par mera khyal rakh...” Yeh keh ke car ki taraf chala gaya jahaan Aman driving seat pe wait kar raha tha. Tanu sabko mil rahi thi...
Aman: “Hoon mummy aur di kahan reh gayi? Chal ab chalte hain...”
Mintu: “Hoon thanda rehna seekh le. Aise kaam mein wait karna padta hai. Hoon viaah karwane ki khushi hai tujhe to akal bhi seekh le... Nale Tanu aa rahi hai mummy teri ne aaj rukna. Uske kuch zaroori kaam yahaan...”
Aman: “Sorry. Aage se dhyaan rakhunga... Par mummy kyun ruk gayi? Ghar ka kaam kaun karega...”
Mintu: “Koi na puttar. Fir kya hua? Kal aa jayegi to tu kar lega saare kaam...”
Aman: “Tu to aisa behave karti hai jaise tujhe kuch pata hi na ho...”
Mintu samajh gaya Aman ko sab pata hai. Fir normally bola – “Tujhe kaise pata?”
Aman: “Pichhe jaise ek baar main mummy aur Manjeet mami ko bahar jaate dekha tha Activa pe... Jaate the achhe se mami pe par waapas aayi to chal badli hui thi. Maine poocha Activa se gir padi par scooty check ki to theek thi... Hoon ladkiyon ke saath relations to mere bhi hain. Kaise badalti hai mujhe achhe se pata...”
“Fir us din sabko dekha mame hure ke ghar second floor pe. Tu sab ek saath the... Hoon akeli-akeli baat das ki tujhe sharminda to nahi karna main...”
Mintu: “J tujhe itni baatein pata fir Komal ke saath viaah ki zid kyun karta? Tujhe pata tera hone wala saala kaun hai...?”
Aman: “Hoor kaun? Mera hone wala saala... Par main to isi ke saath viaah karwana chahta hoon. Mujhe koi fark nahi padta...”
“Teri marzi hai. Main to tu hi usko ghar waadon ki chaabi de raha...”
Yeh keh ke Mintu chup ho gaya...
Itni der mein Tanu aa gayi hasdi hui – “Apni chal daddy ji chalte hain. Mummy aap aa jayegi...” Yeh keh ke peeche baith gayi...
Sab ek hi gaadi mein fit hoke ghar waalon ki taraf chal pade... Jab Jaspreet gharwalon se baat kar rahi thi to Simar jaan ke apni behan ki taraf mud gaya...
Simar: “Didi aaj teri hone wali saas ka vaaja vaajna ve... Udhhar dekh tera sohra saab ko bata rahi hai...”
Komal: “Hehe badhiya. Badhiya puttar chuk de fatte. Akal sikha di poori. Isse pata lagna chahiye ki kiski behen hoon main... Agar kal yeh taangein khol ke nahi chali to main tujhe apna hisaab lagwa lungi jutti se kuto tujhe main puttar.”