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Thriller 100 - Encounter !!!! Journey Of An Innocent Girl (Completed)

aman rathore

Enigma ke pankhe
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Happy New Year To My All The Readers... Is Saal Aapko, Bhagwan Aapke Pasand Ki Kahaniya Kisi Ka Kisi Ke Msdhyam Se Likhwakar Post Karwaye....

Baki Jald Hi Milte Hain Update Ke Sath... Tabtak Mast Rahe Aur Padhte Rahen
Besabri se Intezaar rahega bhai,
Aur aapko bhi naye saal ki shubhkamnaye 💐🎉
 
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Nain bhai नए साल के 5 दिन होने को हैं, पर आपके पोस्ट तो दूज के चांद हो गए हैं। आ कर कुछ पोस्ट कर ही दीजिये और नव वर्ष की खुशी में चार चाँद लगा दीजिये।
 
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nain11ster

Prime
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Nain bhai नए साल के 5 दिन होने को हैं, पर आपके पोस्ट तो दूज के चांद हो गए हैं। आ कर कुछ पोस्ट कर ही दीजिये और नव वर्ष की खुशी में चार चाँद लगा दीजिये।
Intzar kijiye ... Mai puri kahani hi samapt karunga ...
 
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Intzar kijiye ... Mai puri kahani hi samapt karunga ...
अब और क्या कह सकता हूँ, बस इंतेजार में नैन बिछाये हैं।
 

krish1152

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Iron Man

Try and fail. But never give up trying
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अध्याय 13 भाग:- 6 (पूरी सच्चाई)




80 करोड़ का अमाउंट जो प्लाई फैक्टरी का प्रोफिट था. मनीष भैया को 1 करोड़ अमाउंट के साथ टेंडर की डिटेल मिली और उन्होंने पहले उस लड़की को भड़काया जिसके नाम, उस हाईवे के पास की सबसे ज्यादा जमीन थी.. 5 एकड़ का प्लॉट जो लगभग 8 बीघा और कुछ कट्ठा होता है.. 1 एकड़ बराबर 1.61 बीघा जमीन...


80 करोड़ का प्रोफिट जो नीलेश के कंपनी से काम करवाकर निकालना था... उसके पार्टनर कुछ इस प्रकार थे... 1) नीलेश के कंपनी के 2 पार्टनर नंदू और गिरीश... 2) प्रोजेक्ट लाने वाला डेप्युटी डीएम और डीएम... 3) प्रोजेक्ट डिटेल पहुंचा था एक 2 सरकारी दफ्तर मै उतनी टेक्निकल बात पूरी नहीं जानती लेकिन अन्य वेल्फेयर डिपार्टमेंट, और जहां जहां टेंडर की फाइल घूमी हो.. 4) वहां उसके अलावा, मुखिया बख्तियार, विधायक के तीनो बेटे, जिसमे लियाकत को दूध में परी मक्खी की तरह किनारे कर दिया गया था इस मालामाल प्रोजेक्ट से.. और अंत में विधायक फंड 10%.. महादेव मिश्रा को पैसे मे कभी इंट्रेस्ट नहीं रहा, उसका इंट्रेस्ट शुरू से पॉवर के पीछे था... इतने लोग इस मालामाल प्रोजेक्ट के पार्टनर थे...


तो जब मामला 6 से 7 करोड़ प्रोफिट का हो 10-12 लोगों के बीच में, और वहां 4 पार्टनर (विधायक असगर अली के तीनो बेटे और मुखिया बख्तियार) किसी और दुश्मनी की वजह से यदि कमती हो जाए जबकि प्रोजेक्ट मे मिली भगत पुरा सरकारी उच्च अधिकारी की हो, तो घंटा 40 मर्डर हो या 50 मर्डर कोई सूंघने भी आएगा, जबतक कि मामला उछला ना जाए, जो कि लियाकत जैसा आदमी कभी होने नहीं देता...


अभी मैंने एक कड़ी जोड़ी है कि क्यों बस में सवार लोगों का मामला पहले दिन ही बिना जांच के खत्म हुआ. क्यों एक सरेंडर करने आए आदमी को बख्तियार के खून का सीधा दोषी मान लिया गया और मामला खत्म.. क्योंकि मामला की छानबीन होती और प्रोजेक्ट पार्टनरशिप खुलती तो सबका प्रोफिट घुस जाता और ज्यादा प्रोफिट के कारन मर्डर हुआ इस केस में गला फंसती सो अलग...


इस प्लाई फैक्टरी के प्रोजेक्ट को रूकवाने के काम से जब मै गई, तभी मेरी मुलाकात संगीता और मिथलेश से हुई थी. जिस दिन मैंने संगीता को निलश के साथ सेक्स करते देखी थी, नीलेश की बात सुनकर ही ब्लूटूथ डिस्कनेक्ट कर दी थी, शायद रुक गई होती तो मिथलेश और संगीता की बात पता चलती, जो मैंने रिकॉर्डिंग यहां से जाने के बाद सुनी थी...


और कोर्ट वाले घटना के दिन के बाद से नीलेश की लंका कैसे लगेगी, उसकी पूरी डिटेल मै सबको दे चुकी थी. बस यहां ध्यान कुछ और दिलाना था कि इस प्रोजेक्ट के रुकने से कैसे अर्पिता के केस में जान आ गया था...


80 करोड़ का अमाउंट बोलने में मात्र एक फिगर है, लेकिन हकीकत में 1 लाख भी दिख जाता है तो मर्डर हो जाता है. नीलेश के साथ उसके सभी सरकारी पार्टनर इस प्रोजेक्ट में फंस चुके थे. यहां लैंड नहीं मिली तो क्या हुआ, सब हर जगह के प्लॉट की जांच कर रहे थे.. और यहां प्रोजेक्ट मे इनविजिबल रोड़ा बने थे मनीष भैया. लैंड डील से पहले ही ऐसा खेल रचते की डील कैंसल.. पुरा मामले में क्या हुआ वो तो अब मनीष भैया अच्छे से डिटेल करते, जो मै बाद मे उनसे गुरु ज्ञान लूंगी...


लेकिन इधर लैंड डील कैंसल होते रहे और वो लोग सारे काम छोड़कर उसी के पीछे पागल होते रहे. इधर एसपी कुमार आंनद इतने चुप्पी से काम कर रहे थे कि बारीकी से ध्यान देने पर ही किसी भी अधिकारी को पता चलता, क्योंकि लड़ाई तो आईएएस वर्सेज आईपीएस था, और कुमार आंनद कोई लूप हरगिज नहीं छोड़ सकता था... और इस मामले में किसने बूटी का काम किया ये प्लाई फैक्टरी की डील रुकना..


अब यहां कहानी शुरू होगी की मै कहां से शुरू हुई और ये प्लाई फैक्टरी की डील ने मुझे कहां पहुंचा दिया... चुकी मामला 1, 2 लाख का नहीं था जो की गम खाकर भुल जाओ... कुल 80 करोड़ का प्रोफिट. इतना ही काफी था किसी बाधा मे डालने वालों को रास्ते से हटाने के लिए...


लेकिन मै सेफ खेल गई थी, चतुर्भुज और विधायक असगर अली के नाम पर. क्योंकि मेले के पहले दिन ही मेरा विवाद हुआ था और नीलेश और उनके लोगों के नजर मे, मै निजी दुश्मनी निकाल रही थी. इसके अलावा एक और बात थी, यदि मुझे पता होता की नीलेश इस प्रोजेक्ट में है तो मै किनारे रहती, ऐसा नीलेश को विश्वास था.. और उसके अंदर ये विश्वास मैंने ही डाला था.. कैसे वो बताती हूं..


अब तक तो ये बात जान ही चुके होंगे कि नकुल मेरे लिए क्या है... कितना भी समझदार क्यों ना हो टूट जाता है, ये मै उस दिन कार मे मेहसूस कर रही थी, जब नकुल रो रहा था... जैसे-जैसे वो अपनी पूरी बात बताता गया... मेरे अंदर आग लग रही थी... लड़की, पैसा, जमीन, धोका.… लड़की, पैसा, जमीन, धोका... बस इतना ही ख्याल आता रहा.


वहां नकुल का चेहरा देखकर मै शांत हो गई.. लेकिन मै भी केवल और केवल मौके की तलाश में थी.. बदले की आग अंदर से पूरी तरह भड़की हुई थी, पर मै एक छोटी सी लड़की हूं, जो चिल्लाकर या किसी को पूरी बात बताकर नीलेश का बाल भी बांका नहीं कर सकती थी, ये तो मै पहले से जानती थी... बस पीछे खड़ी रही इंतजार में, पूरे धैर्य से अपनी महाभारत लिखने को व्याकुल.. अपने पांडव की तलाश में..


अब यहां बात हो रही है पहले दिन से.. कैसे मैंने रवि की मदद से नीतू की सच्चाई जानी. दिल में तरप जागी की नकुल के साथ रहकर तो नीतू धोका नहीं कर रही और फिर मुझे अलग ही कहानी का पता चल गया...


मै अपनी जिंदगी सामान्य रूप से जी रही थी. केवल अंदर एक बदले की भावना लिए.…. पांडव की तलाश में मुझे पहला साथी मिला रवि... उसकी जितनी तारीफ करूं वो कम है.. एक भरोसेमंद साथी, जिसके साथ मै आंख मूंदकर चल सकती थी...


नीतू के लाइब्रेरी केस के बाद जब मुझे नकुल की सच्चाई पता चली, तब मै रवि के पास बैठकर उसे पूरी कहानी बता गई. रवि मेरा हाथ थामकर ऐसा भरोसा जताया जैसे वो जिंदगी का हमसफर हो... पहले मुझे वास्तविकता समझाया की लड़की के मामले का हल्ला होगा, तो सब अपनी इज्जत बचाएंगे. फिर तुम्हे बदनाम करने से लेकर पुरा परेशान करेंगे.. आराम से हम उनका वीडियो रिकॉर्डिंग करेंगे यहीं लाइब्रेरी का, और तब देखते है कि क्या होता है...


लाइब्रेरी के उस दिन के बाद की घटना के बाद तो इन लोगों ने दोबारा वहां रुख ही नहीं किया. मै और रवि केवल वहीं फोकस किए हुए थे और पूर्ण बदला लेने का मेरे पास एक ही जरिया था.… लाइब्रेरी की रिकॉर्डिंग. मै कुछ सोच रही थी, तभी ध्यान आया कि लोग को लंबी जीत मिली हो तो खुशी भी दिल खोलकर मानते हैं... इसलिए अब मुझे नीलेश को खुश करना था, ताकि ये कुछ तो गड़बड़ी करे.


तभी मैंने एक दाव खेल दिया. राजवीर अंकल और नीलेश के बीच लैंड डील… लेकिन क्या बताऊं राजवीर अंकल के बारे में.…. नीलेश का नाम सुनते ही वो भड़क गए. नकुल के साथ हुई घटना तो पता ही था, बस मै उनसे कहती रही की नीलेश को फसाना है, और उन्हे यकीन था कि नीलेश जैसा खिलाड़ी तो नहीं फसेगा, लेकिन जमीन का सौदा करके वो फंस जाएंगे...


मैने बड़ी मिन्नते की लेकिन वो जमीन के मामले में बहुत भावुक इंसान थे, नहीं माने. मै अपने कलेजे की आग ठंडा किए बिना नहीं मान सकती थी, मोह अंकल को था जमीन का लेकिन मुझे नहीं... मैंने उसी वक्त अंकल से कहा कि आप पेपर लाओ, मै अपने नाम वाली हाईवे की जमीन आपको लिख देती हूं.. सारे मेजर और माइनर के सिग्नेचर के साथ.. इतना सुनने के बाद तब कहीं जाकर वो माने और नीलेश को फोन कर दिये की... "मेनका ने सिफारिश कर दी है, जो प्लॉट चाहिए पसंद कर लेना.. बयाना (advance) जमा करवाकर पेपर बनवा लो और दिसंबर तक अमाउंट जमा करवाकर रजिस्ट्री करवा लेना..."


8 करोड़ की लैंड डील अगले ही दिन हुई थी, जिसमें 2 करोड़ एडवांस देकर, नीलेश ने सहर के बीच में जो खाली जमीन थी राजवीर अंकल की, उसे चुना था. जिसे लिखवाने का डेट 8 दिसंबर तय हुआ. मेरे कहने पर चल रहे रेट से 10 लाख रुपए कम पर सौदा तय हो गया था... मै बदले कि भावना मे बहुत बड़ा रिस्क ले चुकी थी, क्योंकि यदि अंकल को वो सहर की खाली जमीन बेचनी पर जाती तो मेरा एक विश्वासपात्र मजबूत कॉन्टैक्ट खत्म हो जाता...


लेकिन मै पूरे धैर्य के साथ थी और श्रावण मेले के एक दिन पहले हुए इस डील ने क्या-क्या रंग लाया इस कहानी में, उसकी पूरी कहानी मै बताती हूं...


पहला कनेक्शन, अकेले नीलेश के बस में नहीं था जमीन खरीदना इसलिए नंदू के अलावा, प्रवीण मिश्रा, (गिरीश के पापा और मंदिर के पास वाले मुखिया) और मुखिया बख्तियार, 3 लोग की मिली भगत हुई... उसके अगले ही दिन सोमवार को, विधायक के बेटे से मेरा लफ़ड़ा हुआ और प्रवीण मिश्रा को ना चाहते हुए भी मेरा समर्थन करना परा... इस वक्त मुझे कोई नाराज नहीं कर सकता था..


आगे बढ़ती हूं.. मुझे नाराज नहीं किया जा सकता तो विधायक के बेटे को भी नाराज नहीं किया जा सकता था... इसलिए लाइब्रेरी मे कार्यक्रम का आयोजन हुआ... और वहां विधायक के बेटे फैजान के साथ सहर के थाने का सी आई, डीएम, डेपुटी कलेक्टर और डिप्टी एसपी भी पहुंचा था... वैसे तो ये अधिकारी नहीं पहुंचते, लेकिन रवि के यहां जो डकैती करवाई गई थी, उस मामले में ये लोग आए..


अब अधिकारी पहुंचे है, तो चढ़ावा तो चाहिए ही था, और चढ़ावा तो वहीं लाइब्रेरी में इंतजार कर रहा था. सारे अधिकारी खुश होकर गए.. फैजान खुश होकर गया.…. नई कमसिन लड़की, जो अभी-अभी जवान हुई थी, समा परवीन, वो बचाओ-बचाओ चिल्लाकर 5 लाख बटोर ले गई, वो खुश हो गई... और नीलेश से बदला लेने के लिए जो मुझे चाहिए था, वो मुझे मिल गया था.. मेरी खुशी तो पूरे श्रावण मेले में देखने मिली थी...


हां लेकिन कहते है ना कि आप अच्छा करो या बुरा, अंत में कीमत चुकानी पड़ती है.. मुझे भी इस काम के लिए बहुत बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ी थी... आप सोच रहे है कहानी आगे बढाने के बदले मै यहां रोककर कीमत चुकाने की बात क्यों कर रही हूं... क्योंकि मुझे कीमत यहीं चुकानी पड़ी थी...


रवि मेरी चाहतों मे सुमार हो चुका था, तभी तो उसका हाथ पकड़ना, उससे रूठने मनाना मे मुझे बड़ा प्यार आता था. किन्तु जबसे वो रिकॉर्डिंग के लिए लाइब्रेरी गया उसमे थोड़ा बदलाव आ गया.


रवि, एक वर्जिन लड़का, अपनी आखों से जब महा संग्राम देखा था, तभी से उसके व्यवहार में बदलाव मैंने मेहसूस किया था... ना मेरे प्रति या किसी भी लड़की के प्रति उसकी नजर या नीयत नहीं फिसली, लेकिन जब किसी ने उसे मौका दिया तो वो फिसल गया... उसके बाद की पूरी फीलिंग वो मुझसे बताकर ही गया था.. साथ में माफी भी मांगा की अब उसकी फीलिंग पहले जैसी नहीं रही, तो वो मेरी फीलिंग के साथ बेईमानी नहीं कर सकता...


कोई बात नहीं, एक कीमत सबको चुकानी पड़ती है, सो मैंने भी चुकाया था... चलते है राजवीर अंकल और लैंड डील के आगे.. जब मै उत्साहित थी कि बदला लेने का पुरा अवसर अपनी मुट्ठी में...


आप जब अच्छा करने की सोचते हो तो एक के बाद एक मौके अपने आप ही झोली में आ जाते है... मुझे दूसरे पांडव के रूप में मिले राजवीर अंकल, जिन्हे मै वीडियो तो नहीं दिखा सकती थी, लेकिन अंदर क्या है वो बताया था..


उन्होंने मुस्कुराते हुए तभी कहा.. "मुझे यदि ये जमीन बेचनी पड़ती तो मै तुम्हारा चेहरा दोबारा नहीं देखता. तुम तो उस नीलेश की गर्दन हाथ में ले आयी.. जैसा तुमने सोचा है उसकी शादी में जुलुश निकालने का, वैसा ही होगा. क्योंकि चमरी के मामले में जब अधिकारियों की इज्जत जाएगी, तो नीलेश को कोई नहीं बचा सकता, वो गायब ही होगा देखना.. और तुम तो उसकी शादी में ये वीडियो दिखाकर उसे पुरा नंगा कर देना"…


मेरी आत्मा कांप गई जब मैंने सुना की नीलेश को मरना होगा. गुनाह मरने वाले नहीं थे, लालच में धोखा दिया था, बस सबक सीखना था... मेरा दिल नहीं माना, मै वो पेनड्राइव लेकर चली आयी, और कुछ भी तय नहीं कर पा रही थी...


सबूत थे मेरे पास और जुलुश भी निकालना था, लेकिन राजवीर अंकल के हिसाब से नहीं, इसलिए मै बस श्रावण का मज़ा ले रही थी और दूसरे पांडव (राजवीर अंकल) के विचार को किनारे कर गई... लेकिन श्रावण के चौथे या पांचवे दिन कि लाइब्रेरी की घटना से सबको तो फायदा हो गया था, केवल नीलेश को छोड़कर. तो उसके लिए बंपर मालामाल प्रोजेक्ट इंतजार कर रहा था जो श्रावण के दूसरे हफ्ते में पहुंचा... डिपुटी डीएम ने प्लाई फैक्टरी की डील डाल दी नीलेश की झोली में...


जाने अंजाने में मनीष भैया ने प्लाई फैक्टरी का काम रूकवाने के लिए जो खेल रचा, उसका फायदा ये हुआ कि मुझे अर्पिता का केस उसी दिन कोर्ट में पता चला... एक और खुशी थी कि मैंने 2 जिंदगी बचा ली.. क्योंकि संगीता और मिथलेश जैसे ही झूठा रेप केस फाइल करते, उनको गायब कर दिया जाता... और वहीं कोर्ट में ही मोहब्बत का वो जजबा भी मै मेहसूस कर रही थी, जो संगीता करने जा रही थी... स्वेक्षा से किए गए सेक्स को चिंखकर सबको बताना, मेरा रेप हुआ… आप सोच भी नहीं सकते इसके बाद एक लड़की को समाज का कैसे-कैसे रूप देखने मिलता है...


खैर मुझे यहां मेरा तीसरा पांडव मिल गया था, कपिल.. यूं कह लीजिए की क्राइम मामले का एक्सपर्ट.. उसने ही दोनो को वकील से मिलने के लिए मना किया, और अपने साथ ले जाकर गेस्ट हाउस पर ठहरा दिया...


कोर्ट का मामला निपटाकर हम सीधा वहीं पहुंचे. हमारे बीच कुछ समय तक बहस हुई की उन्हे क्यों रोका गया. कहानी पहले विश्वास दिलाने की चली, फिर कहीं जाकर मिथलेश ने अपना दर्द बयान करना शुरू किया... और नीलेश को फसाने की पूरी स्कीम हमारे सामने थी...


मुझे तो कानूनी दावं पेंच तो नहीं आती, लेकिन जब वो पूरी फाइल राजवीर अंकल ने देखी, उनके होश उड़ गए. डॉक्टर की रेप केस की फाइनल जांच पेपर, लेकिन कोई डेट मेंशन नहीं... एफआईआर की रफ कॉपी जिसपर दफाएं तो थी लेकिन वो केवल एक रफ पेपर था.. वो हैरानी से पूछने लगे कि इन पपर्स का क्या करने वाली थी..


तब संगीता ने जवाब दिया कि अभी वकील मुकुल शर्मा से मिलकर डिस्कस करना था कि इतना काफी है उस कुत्ते को फसाने के लिए या और जोरदार एविडेंस तैयार चाहिए, केवल हां या ना मे बताइए...


जैसे ही यह बात राजवीर अंकल और कपिल ने सुनी चौंकते हुए पूछने लगे कि किसने ये सब पेपर बनाने में हेल्प किया.. फिर से वही नाटक और इस बार वो दोनो नाम बताने के लिए तैयार नहीं थे, तब मैंने अकेले में अपनी जमा सबूत उनको दिखाई, फिर जाकर नाम खुला, 3 दिन पहले ड्यूटी ज्वॉइन किए हुए एसपी कुमार आनंद की...


अब तक तो मै केवल ऊपर-ऊपर काम कर रही थी, कहानी मे यह नाम आने के बाद तो पूरी तस्वीर ही बदल गई.. मै एक पांडव ढूंढ रही थी, लेकिन मुझे तो पुरा चाणक्य मिल गया. बात पहले मुझसे शुरू हुई और मैंने अपनी कहानी बताई, फिर मैंने नीलेश की एक एक डिटेल बताई.. उस डिटेल को सुनने के बाद, वो भी वही कहे जो मै संगीता से कही थी, उसे इस वक्त फसाते तो दोनो गायब हो जाते और कहीं गलती से कुमार आनंद का नाम निकल आता तो एक और तबादला तय था...


फिर बात यह हुई कि बदला किस हद तक चाहिए... क्योंकि अर्पिता के साथ क्या हुआ उसका पता तो एसपी कुमार आनंद लगा सकते है, लेकिन नीलेश को ऐसे कोर्ट में अकेला घसीटने से काम तो बिल्कुल भी नहीं होगा...


"2 बेटियां मेरी भी है, यदि उसके साथ ऐसा होता तो... कुमार आंनद जी, केवल ये नीलेश नहीं बल्कि नीलेश जिस-जिस के दम पर कूद रहा है, सबको लपेटिए... सजा तय होनी चाहिए"…. ये डायलॉग और राजवीर अंकल का गुस्से में लाल आखें मुझे अब तक याद है...


वहीं के वहीं कुमार आंनद ने कहा था, जिस हिसाब का ये वीडियो एविडेंस है और जिस तरह के लोग सामिल है, मुझे खुले हाथ चाहिए... अंकल ने सीधा पूछ लिया कितना... तब उन्होंने कहा था 6 करोड़...


पता नहीं राजवीर अंकल को क्या भूत सवार था.... उन्होंने मेरे सामने 5 लोगों से कर्ज लेकर 4 करोड़ रुपए जुटाए, अपने पास से रखे 2 करोड़ कैश निकाल कर दिया. पूरे 6 करोड़ का अमाउंट 1 घंटे में व्यवस्था करके देते हुए... "अब बताइए की हमे क्या करना है"…


आंनद कुमार मुस्कुराए और कहने लगे बैठकर शो एन्जॉय कीजिए अब. वहीं पर उन्होंने मुझसे सभी लड़कियों की तस्वीर मांग ली, मिथलेश और संगीता से बंगलौर के कुछ प्रोफेशनल जो ऑडियो वीडियो सबूत जमा कर सके, उन्हे हायर करने कहा... मिथलेश था आखरी का पांडव, जिसे कुमार आनंद ने मेरे लिए ढूंढ दिया... प्लाई फैक्टरी के लैंड डील के दिन मुझे मेरे पांडव मिल गए थे और अब महाभारत लिखी जा रही थी...


हालांकि ये कहना ग़लत होगा कि इस कहानी को मैंने लिखा, मात्र एक तसल्ली थी. मै तो बदले की राह पर थी और कड़ियां जुड़ती चली गई. और जुड़ते-जुड़ते जो हीरा संगीता ने ढूंढा था, उसने कमाल कर दिया... एसपी कुमार आंनद ने क्यों 6 करोड़ रुपए लिए और कहां इस्तमाल किया हमे नहीं पता था. लेकिन जब जज आर के शंकर के पास उसने सेंट्रल फ्रोरेंसिक की रिपोर्ट टेबल पर रखी और जज आर के शंकर से कह दिया की सेंट्रल होम मिनीस्ट्री पहले से मैनेज है, तब हमे इस बात का एहसास हुआ कि वो आईपीएस कितनी दूर की पहले ही दिन सोच गया था...


एक रैंक होल्डर ईमानदार आईपीएस को जब पैसों का सपोर्ट मिल गया, ऊपर से अगस्त का दिया काम उसे दिसंबर मे प्रकाश मे लाना है ऐसा कह दिया गया था... तब कुमार आंनद भी पहली बार दोनो हाथ खोलकर काम कर रहा था... ये थी नीलेश के केस में मेरी पूरी चुप्पी.. और उसके नतीजे का दिन निकट आ गया था...


मै पूरे रास्ते दोनो को डिटेल मे किस्सा सुनती गई, केवल रवि के चाहत वाला भाग छोड़कर... और जब मै चुप हुई तो सब ख़ामोश थे. एक गहरी सोच मे वो दोनो भी डूबे हुए थे.. मै राजवीर अंकल के घर पहुंचते ही उन्हे पहले 6 करोड़ वापस कर दी, जो उन्होंने केस में लगाए थे.. और बाकी के पैसे मैंने नकुल को दे दिए... इसी पैसे की कमी के कारन वो अच्छे काम नहीं कर पा रहा था और इसी पैसे की वजह से वो लोग कुछ भी करने मे सक्षम थे.


एक बात तो ये पैसा हम तीनों को सिखा रहा था कि आज कल अच्छा करने के लिए भी आपके पास पैसे होने चाहिए.. मै प्राची दीदी और नकुल, तीनो जब साथ थे तो मै हाथ जोड़कर कहने लगी... "मेरा भाई रोया था गाड़ी में, वो भाई जिसने मुझे हमेशा हसाया था... मेरे दिल में आग लगी थी और इतिहास गवाह है स्त्री का प्रतिशोध उसे कुछ भी करने पर मजबूर कर देती है... प्लीज, इस मामले में सब अपनी-अपनी कहानी जानते है और मै पूरी कहानी, जो अब आप दोनो को पता है... इसका जिक्र दोबारा नहीं कीजिएगा.... मेरे दिल को अब जाकर शांति मिली है"


मै अपनी बात कहती हुई थोड़ी बेचैन थी. मै समझ नहीं पा रही थी कि उनसे क्या कहूं, दोनो की नजरें जैसे कह रही हो कि मै कितनी महान हूं. पर सच तो ये था कि मैंने बदला लिया था.. मै उन दोनों से नजरे नहीं मिला पा रही थी क्योंकि पूरी कहानी की समीक्षा करने के बाद मै खुद से ही कह रही थी.. एक बदले की कहानी ने मुझे क्या से क्या बाना दिया...


नकुल मेरे पास आकर एक किनारे से मुझे समेट लिया और मेरे पीठ पर हाथ फेरते हुए सांतवना देते कहने लगा… "भुल गयी, दादी (मेरी मां) क्या कही थी, अच्छा करने के कारन कोई अपना फसे तो भी अफ़सोस नहीं करना चाहिए, क्योंकि उसने जिसके साथ बुरा किया होगा, वो भी किसी ना किसी का अपना होगा"..


मुझे मां की बात से कोई सरोकार नहीं था, लेकिन नकुल का शांत करना मुझे कितना सुकून दे रहा था वो मै कह नहीं सकती. तभी दूसरे किनारे से प्राची दीदी मुझे समेटती अपने गाल चिपका दी... उधर से नकुल भी, फिर फोन आगे आया और... "स्माइल"…
Behad hi shandar or jabardast update
 

Iron Man

Try and fail. But never give up trying
46,008
124,033
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अध्याय 14 भाग:- 4 (चंद मुट्ठी भर अच्छे इंसान)





बात यदि की जाए महादेव मिश्रा की सच्चाई की.. तो कुमार आंनद सर ने हम लोगों को, पहली मीटिंग के दूसरे दिन ही बता दिया था कि बिना कोई स्ट्रॉन्ग पॉलिटिकल बैकअप के नीलेश इतना ऊंचा नहीं उड़ सकता, इसलिए कोई भी व्यक्ति ना तो अर्पिता केस की चर्चा करेगा, ना ही नीलेश कैसे टेंडर हासिल करता है... केवल शो एन्जॉय कीजिए.. जब सबका भाग्य लिखा जा चुका होगा, तभी खुलासा होगा...


खैर अभी कुमार आंनद सर कहीं दूर-दूर तक नहीं दिख रहे थे लेकिन "आए हम बराती बारात लेकर" गाना बजते हुए करीब 8 बजे नीलेश दरवाजे पर बारात लेकर पहुंच चुका था..


समधी मिलन की रश्म बाहर दरवाजे पर हो रही थी. मै प्राची दीदी को 5 मिनट अंकल के साथ रुकने बोलकर, नकुल को साथ ली और चल दी मुख्य द्वार के ओर... आखों मे बचपन कि कई तस्वीर थी.. खासकर राखी और अन्य त्योहारों की.. बहुत छोटी थी, और चारो ओर मै अपने भाइयों से घिरी हुई...


मेरे लिए थोड़ा सा मुश्किल हो रहा था... मै एक बार नीलेश से मिलकर बस उसके गले लगना चाहती थी. बड़ी मुश्किल से आशु रोक पा रही थी.. शायद नकुल भी मेरे दिल की हालत जानता था.. या शायद हम दोनों ही एक दूसरे की हालात, क्योंकि आंसू वो भी छिपा रहा था..


भिड़ मे किसने हमसे क्या कहा हमने नहीं सुना... बारात में कौन किस नजर से उस माहोल में हमे देख रहा होगा, मुझे नहीं पता.. लेकिन थोड़ा अंदर गई तो वहां मेरे सारे भाई एक साथ खड़े थे, और उनके बीच से आ रहा था नीलेश..


नकुल को एहसास हो चला हो शायद की मै फुट फुटकर रोने वाली हूं... "मेनका मिलकर जल्दी चलते है"..


मुट्ठी भींचकर आशु किसी तरह तब रोकी, जब मेरे भाइयों ने मुझे देखा और मुझे घेरते हुए सेल्फी लेना शुरू कर दिया.. मै नीलेश को देखते ही नीलेश से लिपट गई और बस इतना ही कही की.. "भाभी के आने से हमे भुल ना जाना..." जुबान से कुछ भी निकला हो, लेकिन दिल जानता था कि मै नीलेश को आखरी विदाई देकर आयी हूं...


नकुल भी उसके गले लगा और फिर हम वहां रुक नहीं पाए. एकांत और वीराने मे हम दोनों बैठे हुए थे.. मै नकुल से लिपटकर सुबक रही थी और नकुल मुझे अपने बाहों में समेटकर, सर ऊपर करके रो रहा था...


"बाप रे, दोनो तो लिपटकर ऐसे रो रहे हो, जैसे मेनका की विदाई हो रही है"… मेरे पापा मेरे पास आकर बैठ गए...


मै, नकुल से अलग होकर पापा से लिपटकर रोने लगी.. पापा हर बात से अनजान, कुछ समझ ही नहीं पा रहे थे कि हुआ क्या? उन्होंने हमे भिड़ से निकलते देखा और हमारे पीछे-पीछे चले आए थे... "क्या हो गया है मेरी बहदुर बेटी को. बारात में आए किसी अनजान लड़के ने कुछ किया है क्या"?


नकुल:- दादा, हम दोनों ठीक है, बस कुछ जो होने वाला है उसका आखरी नतीजा सोचकर हमे रोना आ गया था...


मेरे पापा हैरानी से देखते... "क्या किया है तुम दोनो ने"..


मैंने पहले अपने आंसू साफ किए, फिर रुमाल से नकुल का चेहरा साफ की, और मुस्कुराती हुई पापा से कहने लगी… "हमने कुछ ऐसा किया है, जिसका गर्व आपको होगा.. पूरी कहानी हम दोनों (मै और नकुल) पूरे परिवार के पास बताएंगे.. फिलहाल अंदर चलिए पापा..."


हम दोनों पापा के साथ अंदर आए. मै जैसे ही अंदर आयी, पहली बार गिरीश मुझसे बात करने पहुंचा.. मुझे धन्यवाद किया और कहने लगा… "क्या तुम मुझे जानती हो?"..


मै मुस्कुराती हुई... "मैंने आपके तरह सहर से पढ़ाई नहीं की, गांव से पढ़ी हूं, और अपने लगभग सभी रिश्तेदारों को पहचानती हूं"..


नकुल:- सर आप बड़े लोग है, आपके स्वागत मे कुछ मंगवाऊं क्या?


गिरीश:- हाहाहाहा, तू भी ना भतीजे, मम्मी नहीं आयी साथ नाचते...


मै:- गिरीश भैया आप लोग एन्जॉय करो, हम अभी लड़की वालों के ओर से है...


उसके पास से हम दोनों वापस अपने जगह पर लौट रहे थे. मै गहरी श्वांस लेती नकुल के पीछे से, उसके कंधे से लद गयी... "चल भाई, हमलोग जरा ऊंची जगह खड़े होते है.. मुख्य अतिथि, एसपी कुमार आनंद का आगमन होने ही वाला होगा..


माहौल जयमाला का, संगीता को डोली में उठाकर जयमाला स्टेज तक लाया जा रहा था... नीचे कुर्सियों पर लगभग सभी लोग बैठे.…. दुल्हन के साथ आती हुई तितलियां, खासकर बंगलोर वालियों को देखकर लड़के हूटिंग और कमेंट करने लगे...


जयमाला स्टेज पर भरा पूरा माहौल, नीचे लगभग 700 लोग, जिसमे सरकारी महकमे और गुंडों की संख्या लगभग 150 के करीब तो होगी ही, उससे कम नहीं होगा. दूल्हा दुल्हन स्टेज पर आमने सामने, हाथों में फूलों की मला लिए..


तभी अचानक वहां की लाइट भूक-भाक भुक-भक होने लगी... लोगों को लगा ये भी सजावट का कोई हिस्सा है, फिर पुरा अंधेरा.. तभी वहां डिस्को लाइट जलनी शुरू हो गई, और एक डायलॉग चारो ओर गूंजा... "स्वागत नहीं करोगे हमारा" .. और उस डायलॉग के बाद सिंघम थीम म्यूज़िक बजना शुरू हो गया...


जितने भी स्क्रीन वहां लगे थे, उसमे सबसे आगे कुमार आंनद अपने राउडी राठौड़ टाइप मूंछ पर ताव दिए, पीछे तकरीबन 200 सेंट्रल फोर्स के साथ, विवाह भवन में घुस रहे थे. पुरा अंधेरे में देखने के लिए किसी के पास कुछ नहीं था सिवाय स्क्रीन पर कुमार आंनद की एंट्री के..


कुमार आंनद आते ही सीधा स्टेज पर चढ़ गए... "दुल्हन से निवेदन है कि वो स्टेज से हटकर अपनी सखियों के साथ कुछ देर रहे, नीलेश कुमार जी आप महराजा कुर्सी पर विराजमान हो जाइए, और हम जरा यहां कुछ गिरफ्तारियां कर ले..."


मेरी आंखें बड़ी हो गई.. ऐसा लगा जैसे कोई फिल्म का सेट लगा हो यहां.. इतनी धांसू और ड्रामेटिक एंट्री, वाकई चौंकाने वाली थी... मै नकुल के ओर देख रही थी, और इधर ये दोनो (प्राची दीदी और नकुल) मुझे देख रहे थे, मानो मेरा ही सवाल मुझसे पूछना चाह रहे हो, "ये ऐसी एंट्री कब प्लान की"..


तभी संगीता हम तीनों के पास पहुंची और बताने लगी... "ये मिथलेश ने प्लान किया था. बंगलौर से जो प्रोफेशनल हायर किए थे उसने डीजे और लाइटिंग वालों के साथ मिलकर ये सब किया"…


संगीता को सुनने के बाद हम सबने सामने फोकस किया जहां ड्रामा शुरू था. सुपीरियर ऑफिसर, कमिश्नर, अपने से नीचे ओहदे वाले ऑफिसर को आंख दिखाते जवाब तलब करने लगा.. जिसके जवाब में कुमार आनंद ने इतना ही कहा कि... "सर मुझे ऑर्डर डीजीपी ऑफिस से आया है, बेहतर होगा कार्यवाही चलने दे".. फिर माईक मंगवाकर एसपी कुमार आंनद कहने लगे... "जबतक कुछ ऑफिसर और सेंट्रल की टीम नहीं पहुंचती, सोच रहा हूं आप लोगों का मनोरंजन कर दूं"..


मेरे अर्जी पर पहली ही वीडियो नीतू के रास लीला की शुरू हुई... कुछ भी ओपन नहीं दिखाया गया, लेकिन ऑडियो पुरा था और नीतू और उसके सेक्स राकेट गैंग की नई मार्केटिंग का चिर हरण करने बैठ गए कुमार आंनद... फिर तो नीलेश की कई सारे वीडियो स्क्रीन पर आने लगे और माईक पर कुमार आंनद... "दूल्हा रंगीन मिजाज का लगता है, अच्छा हुआ सही वक्त पर पहुंच गया मै"..


इधर जबतक ये सब हो रहा था, मैदान से बाकी लोगों को दूसरी ओर जाने के लिए कहा जाना लगा. 22 छोटे बड़े अधिकारी प्लस 12 गुंडों को उठाया जाना था, जिसके पीछे शुरवात से ही लोग खड़े थे, बाकियों को कुमार आंनद के साथ आयी सेंट्रल फोर्स मैनेज कर रही थी...


फिर वीडियो चलाया गया पोस्टमार्टम कर चुके उस डॉक्टर का, जिसने पोस्टमार्टम से पहले वीडियो शूट करके तीनो लड़कियों की लाश को पूरा दिखाया था.. उसके बदन के हर जख्म की कहानी को बयां किया... यहां कुछ भी ब्लर नहीं किया गया था...


फिर बिना चेहरा दिखाए डॉक्टर का बयान भी चलाया गया, जिसमे उसने बताया कि कैसे मरने तक एक लड़की को नोचा गया था. ये बिहार की जानता थी, जो गांव में मनचलों को पीटकर मार देती थी, यहां तो बेटी के साथ ऐसी बदसुलूकी हो चुकी, इसे तो हिंदुस्तान को जानता नहीं बर्दास्त करती..


इसी वीडियो के साथ पूरी लाइट ऑन हो गई.. कुर्सियां जहां रखी थी, उसके सबसे पीछे से माईक पकड़े कई लोग एक साथ सवाल पुछ रहे थे.. एक नहीं बल्कि एसपी कुमार आनंद ने पूरे मीडिया को यहां ला खड़ा किया था... मीडिया के सवाल जैसे आक्रोशित पब्लिक के सवाल थे, और सबकी नजर तो मानो नीलेश पर ही टिकी थी... "यही है वो हवसी दरिंदा"


किन्तु कुमार आंनद ने जैसे ही पहला लाइन बोला.. "इस जघन्य अपराध को अंजाम देने वाला अपराधी, किंग मेकर के नाम से इस इलाके में जाना जाता है"… ठीक उसी वक्त एक गोली फायरिंग हुई और महादेव मिश्रा का ठंडा शरीर नीचे जमीन पर. वो खुद को गोली मार चुका था...


शायद वो भी समझ चुका था कि अब जीना मरने से ज्यादा मुश्किल हो जाएगा और वो तुरंत ही फैसला कर चुका था. जैसे ही बुलेट फायर हुई, वहां माजूद लोगो के पाऊं तले से जैसे जमीन खिसक गई हो.. किसी के लिए यकीन कर पाना मुश्किल था कि इन सबके पीछे उसका हाथ था... आक्रोशित लोग चिल्लाते हुए कहने लगे... "साला आसान मौत मर गया वरना चौराहे पर टांग देते"..


एसपी कुमार आंनद अपने साथ आए सभी ऑफिसर और टीम को तुरंत ही आदेश दिए की सभी अभियुक्तों को तुरंत हथकड़ी पहनाई जाए. 33 लोगों के हाथ में जैसे ही हथकड़ी चढ़ी, वहां के माहौल मे सनसनी पैदा है गई.


मौजूद लोगो आक्रोशित होकर सब को यहीं के यहीं नंगा करके चीरने की मांग करने लगे. सबको लगा की लड़कियों के वैशिहना मौत के पीछे इतने लोगों का हाथ है... आंनद ने बताया कि बस कुछ लोग उस जघन्य अपराध में लिप्त है, बाकियों को हम अलग-अलग केस में उठा रहे है...


भीड़ को किसी तरह शांत करवाया गया और वहां से सभी दोषियों को भरकर ले जाया गया, जिसमे बड़े-बड़े सरकारी नाम मे, जिला कमिश्नर, एक मानसिक रोगी, एक्सक्यूटिव इंजिनियर, मानसिक रोगी. इसके अलावा डीएम, डेप्युटी डीएम, यूनिवर्सिटी वाइस चांसलर और डेप्युटी एसपी था. इसके अलावा कई सरकारी अधिकारी, और 12 गुंडे..


और सबसे आखरी मे नाम आया इन सबको करप्ट बनाने के गिरोह का, जिसका मुख्य आरोपी नीलेश, गिरीश, नीतू, पूनम और फातिमा को बताया जा रहा था. नीतू को जब लेडी पुलिस लेकर जा रही थी, नकुल ने उसे रुकवा लिया.. एसपी ने भी इशारे मे रुकने कह दिया..


नकुल उसे देखकर जोर से हंसा.. उसकी ओर देखते हुए कहने लगा... "शायद तुम जल्दी छूट जाओ, गांव में तुम्हारा इंतजार करूंगा नीतू... अब तक गांव के मज़े लिए, अब जेल के मज़े लो"…


ओह हां एक प्यारी सी घटना तो नीलेश और गिरीश के साथ भी हो गई... उसके साथ तकरीबन 8 गनमैन पहुंचे थे.. जो बारात मे बुलेट फायर कर रहे थे, नीलेश उनको देखकर कहता है... फायरिंग शुरू करो"..


एक शूटर नीलेश को झन्नाटेदार थप्पड़ मारते... "साले यहां लोकल ऑफिसर नहीं है जो घुस देकर बहाल हुए है, सेंट्रल की फोर्स लेकर आए है, हमने चुं भी किया तो गोली मारकर निकल लेंगे.. ये लोग थोड़े ना जिले में, या बिहार में रुकने वाले है जो डरेंगे.. सर हम भी सरेंडर करते है, इलेगल वैपन और अर्म्स ऐक्ट मे डाल दो अंदर"..


हम सब उसकी बात सुन सकते थे, और हम सबकी हंसी निकल आयी. दरअसल मामला वो नहीं था जो उस शूटर ने कहा, बल्कि कुमार आंनद ने 5 करोड़ मे सेंट्रल होम मिनिस्ट्री मैनेज किया था और 2 करोड़ उन लोगों के पीछे बहा दिए जो मुख्य अभियुक्त के साथ, 10-20 हजार के लिए काम करते थे..


कमिश्नर ऑफिस बिका हुआ था, डीएम ऑफिस, ऐसे ही अलग-अलग ऑफिस के स्टाफ को भी खरीद लिया गया था. कच्चा खिलाड़ी नहीं था कुमार आंनद, वीडियो एविडेंस के अलावा उसने इस हाई प्रोफाइल केस में, 2 करोड़ मे 80 गवाह को खड़ा किया था.. ज्यादातर पैसों पर बिक गए थे, वहीं कुछ क्रिमिनल भी थे जो महादेव मिश्रा और उन जैसों की करतूत, ने उन्हे भी हिला रखा था. जिसमे सबसे मुख्य था नंदू, और उसके अलावा नीलेश के साथ काम कार रहे 2-3 क्रिमिनल... जो स्वैक्षा से सब गवाह बनने के लिए तैयार हो गए थे...


नंदू और कुछ क्रिमिनल लगातार मना करते रहे कि काम और मज़े के लिए जब हमारे पास लड़कियां है, फिर किसी के साथ जबरदस्ती क्यों.. लेकिन महादेव मिश्रा से मिली ताकत के नशे में, नीलेश और गिरीश ऐसा अंधा हुआ कि ना सिर्फ जबदस्ती लड़की उठाया, बल्कि महादेव मिश्रा के खेल मे सामिल भी हो गया...


खैर पुरा जुलुश निकल चुका था.. नीलेश के लिए मै पहले ही रो चुकी थी, इसलिए उसके लिए भावना बिल्कुल खत्म हो गई थी कि वो जिए या मरे… हम चारो.. मै, नकुल, प्राची दीदी और संगीता चारो खुशी से ग्रुप गले मिल लिए और ठीक उसी वक्त मेरे पापा अनूप मिश्रा वहां पहुंच गए.. उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा... "गर्व का एहसास वाकई हुआ, बाकी पूरी कहानी घर पर सुनुगा... चलता हूं अभी."


जैसा कि मैंने तय किया था नीलेश की शादी में नीलेश और नीतू का पुरा जुलुश निकालना, वो हो चुका था. मेरा बदला पुरा हुआ, बाकी अपने कर्मों की सजा सबको खुद यहीं भुगतनी पड़ती है, सो उसके कर्मो की सजा वो जाने...


फिलहाल ये वक्त था एक ग्रैंड सेलिब्रेशन का... और अंत में एक बार फिर उनको दिल से धन्यवाद, जो इस केस की गहराई को पहले दिन समझा और दूसरा जिसने उस गहराई को बिना किसी लालच के भर दिया, और तीसरा जो बस इंसाफ के इंतजार में बैठे पूरी सच्चाई को संभाले बैठा था... कुमार आंनद, राजवीर सिंह, और पोस्टमार्टम कर चुके वो सरकारी डॉक्टर.... गिनती के 3 अच्छे लोग जब अपने ताऊ मे आए तो क्या हश्र हुआ कमीनो का...
Dhanshu Update
 

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