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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

parkas

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#209.

सुपर हीरो:
(25.01.02, शुक्रवार, वाशिंगटन डी.सी., अमेरिका)

वेगा और वीनस अपने कमरे में बैठे थे। पिछली बार के समुद्री हमले के बाद उन्हें काफी कुछ समझ में आ गया था।

पिछले हमले में वेगा किसी बच्चों की तरह से लड़ा था। ये तो भला था कि वेगा की जोडियाक वॉच से निकले, सिंहमानव और अश्वमानव ने उन्हें बचा लिया था, नहीं तो दोनों को वह पहला युद्ध ही आखिरी युद्ध बन जाना था।

उस युद्ध से सीखते हुए वीनस ने पिछले 8 दिन में बहुत सी चीजें की थीं। वीनस का पहला कार्य अपने और वेगा के लिये एक ड्रेस और मास्क का चुनाव करना था, जिससे लड़ते समय उन्हें कोई पहचान ना सके?

इसके लिये वीनस ने विश्व के सबसे हल्के और मजबूत मैटीरियल का चुनाव किया। इसके तहत एयरोग्रैफीन मैटीरियल को फैब्रिक में मिलाकर, एक नये कपड़े का निर्माण किया और उसी कपड़े से वेगा और वीनस की ड्रेस बनी।

कपड़ा सेलेक्ट करने के बाद, उसकी ड्रेस बनवाने का कार्य वेगा के हिस्से आया।

इतने कम समय में बिना किसी के जाने ड्रेस बनवाना इतना आसान नहीं था। परंतु इसके लिये वेगा ने अपनी सम्मोहन शक्ति का सहारा लिया। वेगा ने ड्रेस बनवाने के बाद, ड्रेस बनाने वाले की पूरी यादाश्त को मिटा दिया था।

बहरहाल इन दोनों नौसिखिये सुपर हीरोज की ड्रेस इस समय वीनस के हाथ में थी। पूरी ड्रेस लाल और काले रंग से निर्मित थी।

“यह क्या वेगा, मैंने कहा था कि मेरी ड्रेस का रंग गुलाबी रखवाना, पर तुमने तो मेरी ड्रेस भी अपने रंग की ही बनवा दी।” वीनस ने वेगा पर नाराज होते हुए कहा।

“तुम्हें किसी रैम्प वॉक में हिस्सा नहीं लेना है वीनस? ये एक सुपर हीरो की ड्रेस है, मैं इसे किसी कार्टून के ड्रेस के रंग में तो नहीं बनवा सकता था ना।” वेगा ने वीनस को चिढ़ाते हुए कहा।

"तुम्हारा कहने का मतलब है कि गुलाबी रंग सिर्फ कार्टून पहनते हैं?” वीनस ने गुस्साते हुए कहा।

“न न....नहीं, मेरा कहने का तो ये मतलब था, कि गुलाबी रंग बहुत अजीब लगता, किसी सुपर हीरो की ड्रेस पर।” वेगा ने सफाई देते हुए कहा।

“चलो, अब जरा इस ड्रेस को पहनकर देख लेते हैं कि कहीं यह भी तो अन्य कपड़ों की तरह गर्म तो नहीं कर रही?” वीनस ने कहा और अपनी ड्रेस लेकर अंदर के कमरे में चली गई।

कुछ ही देर में वीनस वह ड्रेस पहनकर बाहर आई, तब तक वेगा भी उस ड्रेस को पहन चुका था।

पर जैसे ही दोनों की नजर एक-दूसरे पर पड़ी, दोनों का हंसते-हंसते बुरा हाल हो गया। दोनों सच में ही इस ड्रेस में अजीब से लग रहे थे।

"कसम से....क्या-क्या करना पड़ रहा है, एक द्वीप के युवराज को?” वेगा ने कहा- “और ये सब कुछ तुम्हारी वजह से हो रहा है।"

"मेरी वजह से क्यो? मैंने ऐसा क्या किया?" वीनस ने आश्चर्य से वेगा की ओर देखते हुए पूछा।

“मुझसे प्यार।” वेगा ने वीनस के पास आते हुए कहा- “और तुम्हारे प्यार के लिये, मैं किसी भी तरह का कार्टून बनने के लिये तैयार हूं?"

“अरे ओ 5 किलोमीटर क्षेत्रफल वाले राज्य के युवराज, सुबह-सुबह ज्यादा रोमांटिक होने का नाटक मत करो अब इस ड्रेस के ऊपर कोई कपड़ा डालो और मेरे साथ जॉगिंग पर चलो, मुझे देखना है कि दौड़ने भागने पर यह ड्रेस कितना आरामदायक है?"

“धत् तेरे की...पूरे मूड का सत्यानाश कर दिया।" वेगा ने चिढ़ते हुए कहा।

अब वेगा और वीनस ने उस ड्रेस के ऊपर ही एक टी. शर्ट और ट्राडजर डाला और मास्क को जेब में रख, सोसाइटी के बाहर वाले पार्क में आ गये।

उस पार्क में बहुत से लोग पहले से जॉगिंग या एक्सरसाइज कर रहे थे। वेगा और वीनस भी उसी भीड़ में शामिल हो गये।

सुबह का मौसम काफी सुहाना लग रहा था। चारो ओर पंछी चहचहा रहे थे, जिनकी बोली वीनस को बहुत भली महसूस हो रही थी।

तभी एक चिड़िया की तेज आवाज सुन वीनस आश्चर्य से इधर-उधर देखने लगी।

उसे इस प्रकार चारो ओर देखते देख वेगा से रहा ना गया, वह पूछ बैठा- “क्या हुआ वीनस? कोई परेशानी है क्या?"

“तुरंत किसी पेड़ की ओट में जाकर, अपने सुपर हीरो का अवतार धारण कर लो कोई अंजाना खतरा हमारे आसपास मंडरा रहा है?" वीनस ने कहा और स्वयं एक पत्थर की ओट में आ गई।

वीनस की बात सुन वेगा भी एक पेड़ के पीछे की ओर भागा। वेगा ने अपनी टी शर्ट और ट्राउजर को उतार कर वहीं पेड़ के पास फेंका और पेड़ की ओट से बाहर आ गया।

तब तक वीनस भी चट्टान के पीछे से बाहर आ गई थी और उसी की ओर देख रही थी। पार्क में सबकुछ पहले की ही तरह था, पर अब सभी लोग उन्हें आश्चर्य से देख रहे थे।

“यह सब हमें घूर-चूर कर क्यों देख रहे हैं? कहीं यह हमें ही तो खतरा नहीं समझ रहे?" वेगा ने धीमी आवाज में फुसफुसाकर वीनस से कहा।

पर वीनस ने वेगा को चुप रहने का इशारा किया और फिर से चिड़ियों की आवाजें सुनने लगी।

तभी वीनस के सामने, पार्क के बीचो बीच में एक नीली ड्रेस पहने, एक अंतरिक्ष मानव खड़ा दिखाई दिया, जिसकी ड्रेस पर A7 लिखा था, वह एनम ही था, जिसके पास बहुशरीर शक्ति थी और जिसने एलनिको के साथ मिलकर धरा और मयूर को हराया था।

वीनस के देखते ही देखते एनम के शरीर से सैकड़ों शरीर निकलकर पूरे पार्क में फैल गये। अब पार्क में हर ओर सिर्फ एनम ही एनम दिखाई दे रहे थे।

पार्क में घूम रहे सभी लोग घबराकर, उस एक जैसे बहुत से एनम को देख रहे थे। तभी वेगा, उस पहले वाले एनम के सामने आ गया।

“कौन हो तुम? और क्या चाहिये तुम्हें?” वेगा ने तेज आवाज में एनम से पूछा।

"हम यहां बस तुम्हारे हाथ में बंधी वह घड़ी लेने आये हैं, अगर तुम वह घड़ी चुपचाप से मेरे हवाले कर देते हो, हम बिना किसी को नुकसान पहुंचाये, यहां से चले जायेंगे, पर अगर तुमने वह घड़ी हमारे हवाले नहीं की तो यहां मौजूद सभी लोगों की मौत के सिर्फ तुम जिम्मेदार होगे?” एनम ने एक प्रकार की धमकी देते हुए कहा।

“यह तो यहां मेरे पीछे ही आये हैं, इसका मतलब किसी प्रकार से इन्हें इस घड़ी का रहस्य पता चल गया है?" वेगा ने मन ही मन कहा- “यह अंतरिक्ष जीव, पिछले वाले समुद्री जीवों से ज्यादा खतरनाक लग रहा है, फिलहाल इससे बचकर रहना होगा।"

यह सोच वेगा ने वीनस की ओर एक बार देखा और फिर एनम के आगे तनकर खड़ा होते हुए बोला- “तुम्हें क्या लगता है? कि तुम मुझसे ऐसे यह घड़ी मांगोगे और मैं तुम्हें दे दूंगा। ऐसे टोपी वाले जादूगर मैंने बहुत देखे हैं...तुम मुझे इस जादू से डरा नहीं सकते। रुको मैं तुम्हें दिखाता हूं कि जादू कैसा होता है?"

वेगा ने आखिरी के शब्द बहुत तेज आवाज में कहे। वेगा की आवाज इतनी तेज थी कि लगभग पूरे पार्क में गूंज गई।

इसी के साथ वेगा के शरीर से, एनम से भी ज्यादा वेगा निकले और हर एनम के सामने जाकर खड़े हो गये।

दरअसल यह वेगा के द्वारा किया गया, ध्वनि सम्मोहन था, यह सम्मोहन वेगा की आवाज के साथ फैलता था, यानि की जितने लोगों तक वेगा की आवाज सुनाई देती, उतने लोगों को वही दिखाई देता, जो वेगा उन्हें दिखाना चाहता।

एनम यह देखकर हैरान हो गया। उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या वेगा के पास भी उसी की तरह की कोई शक्ति है?

स्वयं वीनस भी वेगा की इस शक्ति को देख हैरान थी, क्यों कि उसे भी वेगा की किसी ऐसी शक्ति के बारे में नहीं पता था?

तभी वेगा को पार्क में एक और अंतरिक्ष का जीव दिखाई दिया, जिसकी ड्रेस पर A4 लिखा था। यह रुफो था, जिसके पास अपने शरीर को रबर की तरह लचीला बना लेने की शक्ति थी।

इससे पहले कि वेगा कुछ समझ पाता, कि रुफो ने अपने हाथों को लंबा करके, वेगा के सभी शरीरों को पकड़ने की कोशिश की, पर रुफो का हाथ, वेगा के सभी शरीरों के पार निकल गया।

चूंकि उनमें से एक भी शरीर असली नहीं था, इसलिये रुफो, वेगा के किसी भी शरीर को पकड़ नहीं पाया।

तभी वेगा की घड़ी से वृष राशि के प्रतीक के रुप में एक विशाल बैल निकला और उसने रुफो को एक जोरदार टक्कर मार दी।

रुफो का सारा ध्यान वेगा की ओर था, इसलिये वह बैल की टक्कर से बच नहीं पाया। बैल की टक्कर इतनी बलशाली थी कि रुफो कुछ पलों के लिये बेहोश सा हो गया।

तभी वीनस को अपना दम थोड़ा घुटता हुआ सा महसूस हुआ। वीनस ने चारो ओर देखा, इस समय पार्क में मौजूद हर व्यक्ति अपना सीना पकड़कर हांफ रहा था।

अब वीनस को हवा में उड़ रहा एक और नीला जीव दिखाई दिया, जिसके सीने पर बने गोले में A1 लिखा था। यह एलनिको था, जिसके पास चुंबकत्व शक्ति थी।

इसी शक्ति के काले कणों के माध्यम से, एलनिको ने धरा और मयूर को वश में किया था।

एलनिको के हाथ से इस समय भी काले रंग के कण निकलकर हवा में फैल रहे थे। यही काले कण, सभी की साँस में बाधा उत्पन्न कर रहे थे।

यह देख वीनस ने किसी प्रकार से अपने मुंह से एक तेज सीटी निकाली, वीनस की सीटी की आवाज सुनकर, हवा में उड़ रही बहुत सी चिड़ियों और कौओं ने एलनिको पर हमला बोल दिया।

एलनि को इस विचित्र हमले से घबरा गया। कुछ देर तो उसे समझ ही नहीं आया कि यह क्या हुआ? पर जैसे ही एलनि को संभला, उसने अपने पर आक्रमण कर रहे सभी जीवों के ऊपर भी काले कणों का हमला कर दिया।

तभी वीनस ने अपने पास मौजूद एक बड़े से लकड़ी के डंडे को खींचकर एलनिको पर मार दिया।

लकड़ी का डंडा सीधा जाकर एलनि को के सिर से टकराया। यह देख एलनिको ने गुस्साकर, वीनस पर चुंबकीय तरंगों का वार कर दिया।

एलनिको के हाथ से चुंबकीय तरंगें निकलीं और उन तरंगों ने वीनस के पूरे शरीर को एक तीव्र चुंबक में बदल दिया।

ऐसा करते ही वीनस का शरीर हवा में खिंचकर, पार्क में मौजूद एक लोहे के खंभे से चिपक गया। अब वीनस किसी भी तरह से स्वयं को उस खंभे से छुड़ा नहीं पा रही थी।

उधर वेगा के माया शरीर अब गायब हो गये थे। अब वेगा की ओर एलनिको, एनम और रुफो तीनों एक साथ बढ़ रहे थे।

तभी वेगा की घड़ी से एक बड़ा सा बिच्छू निकलकर बाहर आ गया और बाहर निकलते ही उसने सभी अंतरिक्ष के जीवों पर अपने डंक से हमला कर दिया।

बिच्छू के डंक उसके शरीर से निकल-निकल कर, एनम के अनगिनत शरीरों से जा टकराये। इसी के साथ एनम के सभी माया रुप गायब हो गये।

बिच्छू का एक डंक असली एनम से भी जा टकराया, एनम जमीन पर गिरकर, बिच्छू के जहर के कारण तड़पने लगा। अब बिच्छू अपना कार्य करके गायब हो गया।

उधर रुफो को तब तक होश आ गया था, रुफो ने इस बार अपने हाथ को लंबा करके वेगा के पूरे शरीर को लपेट लिया और फिर अपने हाथों को तेजी से खींचकर वेगा को किसी लटू की भांति नचा दिया।

इतनी तेज नाचने की वजह से वेगा अपने दिमाग को कुछ देर के लिये कंट्रोल नहीं कर पाया और नाचते-नाचते जमीन पर गिर पड़ा।

अब एलनिको ने वेगा के ऊपर भी अपने काले कणों का हमला कर दिया। काले कणों ने वेगा के पूरे चेहरे को ढक लिया।

वेगा अब उन काले कणों के नीचे तड़पने लगा था, यह देखकर वीनस छटपटा रही थी, पर खंभे से चिपके होने के कारण वह कुछ कर नहीं पा रही थी।

अब काले कणों ने वेगा की घड़ी को भी पूरी तरह से ढक लिया, जिससे घड़ी से कोई नया कण नहीं निकल पा रहा था।

इस समय वेगा और वीनस भी पार्क में मौजूद, साधारण व्यक्तियों की तरह तड़प रहे थे। किसी के भी पास बचाव का कोई तरीका नजर नहीं आ रहा था।

तभी हवा में एक बड़ा सा ऊर्जा द्वार बन गया और उस ऊर्जा द्वार से युगाका व कलाट निकलकर बाहर आ गये।

युगाका ने ऊर्जा द्वार से बाहर निकलते ही वेगा को जमीन पर पड़ा, तड़पते हुए देखा। यह दृश्य देखते ही मानों युगाका का खून खौल गया।

युगाका ने एक तेज हुंकार भरी, उसकी हुंकार सुनते ही पार्क में मौजूद कुछ पेड़ों ने अपनी शाखाएं बड़ी करके रुफो के चारो ओर झाड़ियों का एक गोला बन दिया।

रुफो उस गोले में इस प्रकार जकड़ गया कि रुफो अपने शरीर का कोई अंग बड़ा करके बाहर नहीं निकल सकता था।

अब सभी पेड़ की पत्तियों ने पार्क में मौजूद सभी काले कणों को अपने अंदर खींच लिया। इतना करने के बाद युगाका की नजर हवा में खड़े एलनिको की ओर गई।

उधर कलाट के हाथों से निकली ऊष्मा ने वीनस को खंभे से छुड़ा दिया था। अब वेगा, वीनस और कलाट एक स्थान पर खड़े होकर युगाका का क्रोध देख रहे थे।

तभी एलनिको ने चुंबक शक्ति और काले कणों का वार एक साथ युगाका पर कर दिया। यह देख युगाका, एक विशाल वृक्ष मानव में परिवर्तित हो गया।

“तुम मूर्ख हो एलनिको, जो मुझ पर चुंबक की शक्ति का वार कर रहे हो, भला कभी लकड़ी पर भी चुंबक का असर होता है।” युगाका ने गरजते हुए कहा- “और तुम इन काले कणों से मेरी श्वांस नली को बंद करना चाहते हो, तो मैं तुम्हें बता दूं कि पेड़ अपने शरीर के हर भाग से साँस ले सकते हैं। तो इस प्रकार तुम्हारे दोनों वार विफल हो गये। अब मेरी बारी है। मेरे भाई पर प्रहार करने का दंड भुगतने के लिये तैयार हो जाओ।" यह कहकर युगाका ने अपने दोनों हाथों को एलनिको की ओर कर दिया।

युगाका के हाथ एक नुकीले लकड़ी के भाले के समान बन गये और लंबे होते हुए एलनिको के शरीर के
आरपार हो गये। एक सेकेण्ड में ही एलनिको का शरीर मरकर हवा में झूलने लगा।

उधर युगाका का ध्यान एलनिको की ओर देख एनम ने अपने शरीर में घुसे बिच्छू के काँटे को बाहर निकाला और इससे पहले कि किसी का ध्यान उनकी ओर जाता, वह लकड़ी के गोले में बंद रुफो को लेकर हवा में उड़ गया।

युगाका ने एलनिको के मृत शरीर को जमीन पर पटक दिया और अपने असली रुप में आ गया।

“अरे, इसके दोनों साथी कहां गये?" वीनस ने चारो ओर देखते हुए कहा।

"लगता है भाई से डरकर भाग गये।" वेगा ने अपने मास्क को अपने चेहरे पर एडजेस्ट करते हुए कहा- “अब इससे पहले कि मीडिया वाले आकर सबका इंटरव्यू लेने लगें, हमें तुरंत यहां से अपने कमरे पर पहुंचना होगा।

वेगा की बात सुनकर कलाट ने अपने चारो ओर खड़े लोगों को देखा और तुरंत ऊर्जा का द्वार बनाकर, सभी को लेकर वहां से गायब हो गया।


जारी
रहेगा_____✍️
Bahut hi badhiya update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and beautiful update....
 
  • Love
Reactions: Raj_sharma

sunoanuj

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#208.

अष्टकोणीय सत्य:
(24.01.2002, गुरुवार, मैनहट्टन, न्यूयार्क, अमेरिका)

आर्केडिया न्यूयार्क पहुंच चुका था। आर्ची ने अदृश्य करके आर्केडिया को 'हडसन नदी' में उतार लिया था।

मैनहट्टन का वह क्षेत्र, जहां महेन्द्र शर्मा का घर था, वहां से ज्यादा दूर नहीं था। शलाका और जेम्स आर्केडिया से निकलकर मैनहट्टन की 6 स्ट्रीट पर पहुच गये।

कुछ ही देर में दोनों उस पते पर खड़े थे, जो कि शारदा ने दिया था। शलाका, देवोम को जल्द से जल्द देखना चाहती थी। इसलिये शलाका ने आगे बढ़कर घर की घंटी बजा दी।

कुछ देर के बाद लगभग एक 70 वर्षीय बूढ़े ने घर का दरवाजा खोला, जिसके चेहरे पर एक चश्मा लगा हुआ था, लेकिन इस उम्र में भी वह किसी आर्मी के जवान की तरह से फिट दिखाई दे रहा था।

“जी, हमें महेन्द्र शर्मा जी से मिलना है।” शलाका ने उस बूढ़े को देखते हुए हिंदी भाषा में कहा।

“कहिये, क्या कहना है आपको? मैं ही हूॅ महेन्द्र शर्मा।” महेन्द्र ने शलाका और जेम्स को ऊपर से नीचे तक देखते हुए कहा।

“मुझे आपसे भारत में मिले अष्टकोण के बारे में बात करनी है।” शलाका ने बिना ज्यादा कुछ घुमाये-फिराये महेन्द्र से कहा।

“अष्टकोण!" अब महेन्द्र के चेहरे पर आश्चर्य के भाव उभरे, जिसे शलाका ने तुरंत पहचान लिया- “कौन हैं आप लोग?"

“क्या हम अंदर बैठकर बात कर सकते हैं?" शलाका ने इधर-उधर देखते हुए कहा।

शलाका की बात सुन महेन्द्र एक पल को सोच में पड़ गया, फिर जाने क्या सोचकर उसने शलाका और जेम्स को अंदर आने को कह दिया।

शलाका और जेम्स अंदर आकर बैठ गये। तभी शलाका की नजर, सामने टेबल पर रखे एक फोटो फ्रेम पर गई। उस फोटो फ्रेम में महेन्द्र, उनकी पत्नी और उनका बेटा देवोम, तीनों दिख रहे थे।

इस फोटो में देवोम काफी छोटा था। परंतु शलाका की तेज आँखों ने देवोम को तुरंत पहचान लिया, वह वही दिव्य बालक था....आर्यन और आकृति का पुत्र जिसकी आँखों में सूर्य के समान तेज दिखाई दे रहा था।

महेन्द्र ने शलाका की आँखों का पीछा करके, यह देख लिया कि शलाका उस फोटो फ्रेम को देख रही है। अतः वह बोल उठा- “ये फोटो देव के बचपन की है, तब वह मात्र …वर्ष का था।"

शलाका ने धीरे से सिर हिलाया और आगे बढ़कर उस फोटो फ्रेम को उठा लिया।

“आर्ची, इस फोटो को अपने डेटा में सेव कर लो।" शलाका ने अपने मन में आर्ची से कहा।

“कर लिया।" आर्ची ने शलाका की आँखों का प्रयोग करके, उस तस्वीर को अपने डेटा में सेव कर लिया।

अब शलाका ने एक बार और ध्यान से उस अद्भुत बालक को देखा और फिर उस फोटो फ्रेम को वापस टेबल पर रखकर, महेन्द्र के सामने आकर बैठ गई।

"महेन्द्र जी,... मेरा नाम शलाका है....मैं पिछले 25 वर्षों से उस अष्टकोण को ढूंढ रही हूं इसलिये अब आप मुझसे कुछ ना छिपाएं और मुझे सारी बातें सचसच बता दें कि आप उस अष्टकोण के बारे में क्या-क्या जानते हैं?” शलाका ने तीखी निगाहों से महेन्द्र को देखते हुए कहा।

शलाका की बात सुन महेन्द्र ने कसमसाकर, अपने शरीर के बैठने के अंदाज को ठीक किया और फिर बोलना शुरु कर दिया- “आज से लगभग 22 वर्ष पहले, जब हम भारत के उज्जैन शहर में रहते थे, उस समय एक रात, जब मैं और मेरी पत्नी गायत्री, अपने बेडरुम में सो रहे थे कि तभी हमें अपने बेड के नीचे से एक अजीब सी ‘धम्-धम्' की आवाज आती हुई सुनाई दी। धीरे-धीरे वह आवाज थोड़ी तेज हो गई। हमने अपने बेड के नीचे झांक कर देखा, पर बेड के नीचे कोई नहीं था। जब हमने जमीन से कान लगाकर सुना, तो हमें वह आवाज जमीन के नीचे से आती हुई प्रतीत हुई। हमने उस रात कुदाल से अपने कमरे की पूरी जमीन को खोद डाला। हमें उस समय जमीन के नीचे से एक काँच का अष्टकोण मिला, जिसमें एक दिव्य बालक लेटा हुआ, मुस्कुरा रहा था।

“हमें बहुत आश्चर्य हुआ कि यह दिव्य बालक, बिना साँस लिये, उस जमीन के अंदर जिंदा कैसे था? हमने उस काँच के अष्टकोण को जमीन के अंदर से निकाल लिया। अब हमने उस अष्टकोण को तोड़ने के लिये हर प्रकार के औजार का प्रयोग किया, पर वह नहीं टूटा। इस प्रकार धीरे-धीरे पूरी रात बीत गई, पर हम उस अष्टकोण को किसी भी प्रकार से नहीं खोल पाये? अब थक कर हमने उस अष्टकोण को वहीं कमरे की खिड़की के पास रख दिया और सो गये। पूरी रात जगे होने के कारण हमें तुरंत नींद आ गई। सुबह किसी बच्चे की किलकारी की आवाज ने हमें जगा दिया। जब उठकर हमने देखा, तो हमें सूर्य की रोशनी खिड़की से निकलकर, उस काँच के अष्टकोण पर पड़ती दिखाई दी।

“सूर्य की किरणें पड़ने के बाद ना जाने कैसे वह अष्टकोण स्वतः ही खुल गया था और वह नन्हा दिव्य बालक, उस सूर्य की रोशनी में रोने की जगह, हंसता हुआ ऐसे खेल रहा था, मानो वह सूर्य की रोशनी में नहीं, बल्कि अपने पिता की गोद में हो। गायत्री ने उस दिव्य बालक को उठाकर अपनी गोद में ले लिया। तभी मेरी नजर उस अष्टकोण में उपस्थित एक सुनहरी रंग की धातु की शीशी पर गई, जिस पर एक 'ॐ' का निशान बना था, मैंने उस शीशी को उठाकर देखा, पर उसमें कुछ नहीं था।

"मैंने उस शीशी को अलमारी में उठाकर रख दिया और गायत्री को उस दिव्य बालक से खेलते देखता रहा। चूंकि हमारे कोई बच्चा नहीं था, इसलिये हमने सभी को यही बताया कि यह हमारा ही पुत्र है। उस बालक के चेहरे पर देवताओं सा तेज था और उस दिव्य शीशी पर 'ऊँ' लिखा था, इसलिये हमने अपने बालक का नाम 'देवोम' रख दिया। देवोम बहुत ही विलक्षण बालक था, वह बचपन से ही हर चीज को जल्दी सीख जाता था। कुछ समय बाद जब देवोम बड़ा हो गया, तो हम भारत छोड़कर अमेरिका में आकर बस गये।” इतना कहकर महेन्द्र चुप हो गया।

"इस समय देवोम कहां है? मुझे उससे मिलना है।" शलाका ने बेसब्र होते हुए कहा।

“नहीं मिल सकते वह पिछले 15 दिनों से कहीं गायब हो गया है?” महेन्द्र ने कहा।

महेन्द्र के शब्द सुन शलाका पर तो जैसे बिजली ही गिर गई- “क्याऽऽऽऽ?...कहां गायब हो गया?"

“आज से 15 दिन पहले, वह यह कहकर घर से गया था कि उसे कहीं नौकरी मिल गई है, जिसकी 5 दिन की ट्रेनिंग के लिये वह फ्लोरिडा जा रहा है, 5 दिन बाद वह वापस आ जायेगा।” महेन्द्र ने रोने वाले अंदाज में कहा “पर आज 5 तो क्या 15 दिन भी बाद भी उसकी खबर नहीं है। मुझे लगा था कि वह बुढ़ापे में हमारा सहारा बनेगा, पर वह जिस रहस्यमय अंदाज में हमें मिला था, उसी रहस्यमय अंदाज में गायब भी हो गया। मैंने अभी आपको इसलिये भी अंदर आने दिया कि मुझे लगा आपके पास देवोम की कोई खबर है?"

यह सुनकर एक पल के लिये शलाका का चेहरा थोड़ा मुर्झा सा गया, पर तुरंत ही उसने अपने पर नियंत्रण करते हुए कहा- “आप देवोम की कोई नई फोटो मुझे दे दीजिये, मैं उसे अवश्य ढूंढ लूंगी।

"नहीं है देवोम की एक भी नई फोटो हमारे पास नहीं है।” महेन्द्र ने सिर झुकाते हुए कहा।

"ऐसा कैसे हो सकता है?” शलाका ने आश्चर्य से महेन्द्र की ओर देखते हुए कहा- “मेरा मतलब है कि आज के समय में तो सभी लोग फोटोज रखते हैं... फिर आपके पास उसकी कोई फोटो क्यों नहीं है?... और आपने घर में बिना चेक किये एकदम से कैसे बोल दिया कि उसकी कोई फोटो आपके पास नहीं है?"

“क्यों कि जब उसको गायब हुए 10 दिन हो गये, तो मैंने पुलिस में कम्प्लेन लिखवा दी। कम्प्लेन लिखवाने पर जब पुलिस ने उसकी फोटो मांगी, तो हमने अपना पूरा घर छान मारा, पर उसके बचपन की इस फोटो को छोड़कर, उसकी सारी फोटो कहीं गायब हो गईं? हमने बहुत ढूंढा, पर उसकी कोई फोटो नहीं मिली?"

“यह कैसे हो सकता है? इसका मतलब वह जानबूझकर कहीं गया है? और उसी ने जाने से पहले अपनी सारी फोटो भी गायब कर दी हैं।” जेम्स ने काफी देर बाद कुछ कहा।

"पर वो ऐसा क्यों करेगा?" महेन्द्र ने कहा।

“शायद उसे पता हो कि कोई उसे ढूंढने आने वाला है?" जेम्स ने कहा।

“यह संभव नहीं हो सकता।” महेन्द्र ने जेम्स को देखते हुए कहा- “हमने आज तक उसे नहीं बताया कि वह हमें कहां से मिला था? या फिर वह कौन है? वैसे क्या आप यह बता सकती हैं कि वह कौन है? और हमारे कमरे में जमीन के नीचे कैसे आया?"

“यह बहुत लंबी कहानी है।” शलाका ने महेन्द्र से कहा- “बस आप इतना जान लीजिये कि वह एक देवपुत्र है, जिसे किसी कारणवश उस अष्टकोण में छिपाया गया था, पर अब उसकी तलाश देवताओं को भी है।“

शलाका की बात सुन महेन्द्र खुश होते हुए बोला "मुझे पता था कि वह कोई दिव्य बालक है। अगर वह आपको मिल जाता है, तो मुझे भी अवश्य बताइयेगा।"

“ठीक है।” शलाका ने कहा- “अब जरा मुझे उस सुनहरी दिव्य शीशी और अष्टकोण के बारे में भी बता दीजिये कि वह कहां है? वह भी आपके पास है या फिर वह भी कहीं खो गया?"

शलाका के कटाक्ष सुन महेन्द्र ने अपना सिर झुकाते हुए कहा- “वह दोनों चीजें, मैंने एक आर्कियोलॉजिस्ट को दे दिया था, जो कि अब न्यूयार्क के मशहूर ‘दि मेट क्लाएस्टर म्यूजियम' में रखी हैं। वह म्यूजियम यहां से मात्र 30 मिनट की दूरी पर है।"

यह सुन शलाका को महेन्द्र पर गुस्सा तो बहुत आया, पर उसने कुछ महेन्द्र को कुछ कहा नहीं।

"तो फिर अब हम चलते हैं अगर हमें देवोम की कोई जानकारी मिली, तो आपको अवश्य बतायेंगे।" यह कहकर शलाका खड़ी हुई और जेम्स को लेकर वहां से बाहर निकल गई।

“आपको क्या लगता है कि यह बूढ़ा सही बोल रहा था?" जेम्स ने शलाका से पूछा।

“यह पता करना तो बहुत आसान है, पर इसके लिये हमें पहले किसी शांत जगह पर बैठना होगा।” शलाका ने कहा।

"तो फिर क्यों ना ‘दि मेट क्लाएस्टर म्यूजियम' की ओर ही चलें, वहां पर एक ‘मामा सूशी' रेस्टोरेंट है, जहां पर जापानी -मैक्सिकन फ्यूजन फूड मिलता है। वहां पर बैठने के लिये काफी शांत जगह है।” जेम्स ने कहा।

“तुम्हें बहुत पता है न्यूयार्क के बारे में?” शलाका ने मुस्कुराते हुए कहा।

“हे देवी शलाका, आप भूल रही हैं कि मैं इसी शहर का हूं।" जेम्स अपना दाहिना हाथ अपने पेट से टच कराते हुए, अदब से झुकते हुए कहा।

“अच्छा, तो अब तुम मेरे कार्य के बीच अपना पर्सनल फूड भी खाना चाहते हो?” शलाका ने कहा।

“एक खाने का ही तो शौक है, जो बचपन से अभी तक चल रहा है।” जेम्स ने दुखी होते हुए कहा- “पर क्या आपके पास अमेरिकन डॉलर हैं, क्यों कि मैं खाने के बाद बर्तन नहीं धोना चाहता?"

“अब उदास मत हो, हम उधर ही चल रहे हैं और आर्ची के रहते किसी भी टाइप की करेंसी की जरुरत नहीं पड़ेगी।" यह कहकर शलाका ने अपने बैग से निकालकर, जेम्स को एक क्रेडिट कार्ड दिखाया।

“वाह, मानना पड़ेगा आपकी आर्ची को।” जेम्स ने कहा और एक टैक्सी को हाथ देकर रोक लिया।

कुछ ही देर में जेम्स और शलाका ‘मामा सूशी' रेस्टोरेंट में बैठे थे। जेम्स ने अपनी पसंद का खाना आर्डर कर दिया।

“आर्ची, जरा कम्प्यूटर पर देख कर बताओ कि क्या अष्टकोण और अमृत की शीशी अभी भी ‘दि मेट क्लाएस्टर म्यूजियम' में है या उसे कहीं और शिफ्ट कर दिया गया है?" शलाका ने आर्ची से कहा।

थोड़ी ही देर के बाद शलाका के दिमाग में आर्ची की आवाज उभरी- “अष्टकोण अभी भी म्यूजियम में है, पर अमृत की शीशी आज से 4 दिन पहले ही म्यूजियम से गायब हो चुकी है।"

"क्याऽऽऽऽ? कैसे?” शलाका ने तेज आवाज में कहा- “मुझे तुरंत उसके बारे में सारी जानकारी चेक करके बताओ।

“क्या हुआ? जेम्स ने शलाका से पूछा। शलाका ने सारी बात जेम्स को बता दी।

“इसका मतलब कि किसी को अमृत की शीशी के बारे में सबकुछ पता चल गया है?" जेम्स ने कहा।

तभी फिर शलाका के दिमाग में आर्ची की आवाज उभरी- “म्यूजियम को भी अभी उस चोरी के बारे में ज्यादा कुछ नहीं पता, पर 4 दिन पहले ही एक स्कूल के बच्चों का ग्रुप म्यूजियम में घूमने आया था, उसी के बाद से उस अमृत की शीशी का कुछ पता नहीं है।"

इस बार आर्ची की आवाज, जेम्स को भी सुनाई दे रही थी, शायद शलाका ने जेम्स को भी उन बातों में शामिल कर लिया था।

यह जेम्स के लिये अच्छा ही था। अब बार-बार उसे शलाका से पूछने की जरुरत नहीं पड़नी थी कि उसकी आर्ची से क्या बात हो रही थी?

“आर्ची, उस दिन के म्यूजियम के सभी सी.सी.टी.वी. कैमरे को चेक करो और यह देखो कि कौन सा बच्चा उस दिन अमृत की शीशी के पास था?"

शलाका की बात सुन आर्ची काम पर लग गई। इधर रेस्टोरेंट में खाना भी सर्व हो चुका था, जिसे जेम्स ने प्लेट में निकालना शुरु कर दिया था।

कुछ देर बाद फिर से आर्ची की आवाज उभरी “शलाका, एक बच्चा बार-बार उस अमृत की शीशी को देख रहा था। किसी भी फुटेज में उसे अमृत की शीशी को निकालते तो नहीं देखा गया, पर म्यूजियम से निकलते समय, उसकी जेब थोड़ी फूली हुई थी और म्यूजियम से निकलते समय, वह बच्चा स्कैनर के बगल से निकला था, जिसकी वजह से किसी भी प्रकार का अलार्म नहीं बजा। बच्चा होने की वजह से सिक्योरिटी वालों ने इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया था।"

“वेरी गुड आर्ची अब जरा उस स्कूल के डेटा को सर्च करके, उस बच्चे का पता निकालो और मुझे दो।" यह कहकर शलाका फिर से अपना खाना खाने लगी।

कुछ देर बाद आर्ची की आवाज पुनः आई- “उस बच्चे का डेटा, हमें स्कूल के रिकार्ड में नहीं मिला शायद वह बच्चा उस स्कूल का था ही नहीं... वह उनके बीच किसी तरह से घुस गया था?"

“मुझे ऐसी ही कुछ आशा थी।” शलाका ने जोर से साँस लेते हुए कहा- “शायद वह कोई बहुरुपिया है, जो बच्चे का भेष बनाकर घूम रहा है आर्ची, तुम तुरंत उस बच्चे का फोटो, पूरे न्यूयार्क के कैमरे में स्कैन करो और पता करो कि क्या वह बच्चा अब भी न्यूयार्क में ही है या फिर कहीं चला गया?

“वह बच्चा, अब भी न्यूयार्क में है, इस समय वह म्यूजियम के पास ही, ‘फोर्ट ट्रायन पार्क' में सूर्य नमस्कार कर रहा है।” आर्ची ने कहा।

“वेरी गुड आर्ची, तुम उस पर नजर रखो, हम अभी वहां पहुंचते हैं।” यह कहकर शलाका अपनी कुर्सी से खड़ी हो गई।

तब तक जेम्स ने भी अपना खाना खत्म कर लिया था, इसलिये वह भी शलाका के पीछे उठकर भागा।

शलाका ने कैश काउंटर पर जाकर अपना बिल पे किया, पर जैसे ही वह वहां से निकलने लगी, उसका रास्ता रोककर विक्रम खड़ा हो गया।

“वारुणी, तुम यहां हो और मैं कब से वहां टेबल पर बैठकर तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं।” विक्रम ने कहा।

विक्रम को वहां देख शलाका हैरान हो गई।

“अरे विक्रम तुम यहां न्यूयार्क में क्या कर रहे हो? और...और तुम मुझे वारुणि कहकर क्यों संबोधित कर रहे हो? मैं तो शलाका हूं तुम भूल गये क्या?"

"शलाका?” विक्रम ने ना समझने वाले अंदाज में कहा- “ये तुम कैसी बातें कर रही हो वारुणि अभी कुछ देर पहले ही तो तुम मुझे उस टेबल पर बैठाकर, इधर आई थी। इतनी जल्दी तुम यह बात कैसे भूल सकती हो?"

“शलाका, वह बालक अब पार्क के अंदर की ओर जा रहा है और पार्क के उस स्थान पर कोई कैमरा नहीं है, तुम्हें जल्दी उसके पास पहुंचना होगा।” आर्ची ने शलाका को कहा।

आर्ची की बात सुन शलाका तेजी से रेस्टोरेंट के बाहर की ओर निकलती हुई बोली- “तुम यहीं रुको विक्रम। मैं अभी वापस आकर तुमसे बात करती हूं..कहीं जाना नहीं?"

विक्रम ठगा सा वहां खड़ा, दूर जा रही शलाका...म....मेरा मतलब है कि वारुणि को देख रहा था।


जारी रहेगा_____✍️


बहुत ही शानदार और आकर्षक अपडेट दिया है ! हर मोड पे लगा अब सस्पेंस खुला जब खुला लेकिन वो अगले अपडेट के लिए बचा हुआ है !


बहुत ही अच्छा लिख रहे हो .💐💐💐💐👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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बहुत ही शानदार और आकर्षक अपडेट दिया है ! हर मोड पे लगा अब सस्पेंस खुला जब खुला लेकिन वो अगले अपडेट के लिए बचा हुआ है !

बहुत ही अच्छा लिख रहे हो .💐💐💐💐👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻
आपके इन अमूल्य शब्द, और योगदान के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद मित्र, साथ बने रहिए, हर सस्पेंस दूर हो जाएगा। :hug:
 
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kas1709

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सुपर हीरो:
(25.01.02, शुक्रवार, वाशिंगटन डी.सी., अमेरिका)

वेगा और वीनस अपने कमरे में बैठे थे। पिछली बार के समुद्री हमले के बाद उन्हें काफी कुछ समझ में आ गया था।

पिछले हमले में वेगा किसी बच्चों की तरह से लड़ा था। ये तो भला था कि वेगा की जोडियाक वॉच से निकले, सिंहमानव और अश्वमानव ने उन्हें बचा लिया था, नहीं तो दोनों को वह पहला युद्ध ही आखिरी युद्ध बन जाना था।

उस युद्ध से सीखते हुए वीनस ने पिछले 8 दिन में बहुत सी चीजें की थीं। वीनस का पहला कार्य अपने और वेगा के लिये एक ड्रेस और मास्क का चुनाव करना था, जिससे लड़ते समय उन्हें कोई पहचान ना सके?

इसके लिये वीनस ने विश्व के सबसे हल्के और मजबूत मैटीरियल का चुनाव किया। इसके तहत एयरोग्रैफीन मैटीरियल को फैब्रिक में मिलाकर, एक नये कपड़े का निर्माण किया और उसी कपड़े से वेगा और वीनस की ड्रेस बनी।

कपड़ा सेलेक्ट करने के बाद, उसकी ड्रेस बनवाने का कार्य वेगा के हिस्से आया।

इतने कम समय में बिना किसी के जाने ड्रेस बनवाना इतना आसान नहीं था। परंतु इसके लिये वेगा ने अपनी सम्मोहन शक्ति का सहारा लिया। वेगा ने ड्रेस बनवाने के बाद, ड्रेस बनाने वाले की पूरी यादाश्त को मिटा दिया था।

बहरहाल इन दोनों नौसिखिये सुपर हीरोज की ड्रेस इस समय वीनस के हाथ में थी। पूरी ड्रेस लाल और काले रंग से निर्मित थी।

“यह क्या वेगा, मैंने कहा था कि मेरी ड्रेस का रंग गुलाबी रखवाना, पर तुमने तो मेरी ड्रेस भी अपने रंग की ही बनवा दी।” वीनस ने वेगा पर नाराज होते हुए कहा।

“तुम्हें किसी रैम्प वॉक में हिस्सा नहीं लेना है वीनस? ये एक सुपर हीरो की ड्रेस है, मैं इसे किसी कार्टून के ड्रेस के रंग में तो नहीं बनवा सकता था ना।” वेगा ने वीनस को चिढ़ाते हुए कहा।

"तुम्हारा कहने का मतलब है कि गुलाबी रंग सिर्फ कार्टून पहनते हैं?” वीनस ने गुस्साते हुए कहा।

“न न....नहीं, मेरा कहने का तो ये मतलब था, कि गुलाबी रंग बहुत अजीब लगता, किसी सुपर हीरो की ड्रेस पर।” वेगा ने सफाई देते हुए कहा।

“चलो, अब जरा इस ड्रेस को पहनकर देख लेते हैं कि कहीं यह भी तो अन्य कपड़ों की तरह गर्म तो नहीं कर रही?” वीनस ने कहा और अपनी ड्रेस लेकर अंदर के कमरे में चली गई।

कुछ ही देर में वीनस वह ड्रेस पहनकर बाहर आई, तब तक वेगा भी उस ड्रेस को पहन चुका था।

पर जैसे ही दोनों की नजर एक-दूसरे पर पड़ी, दोनों का हंसते-हंसते बुरा हाल हो गया। दोनों सच में ही इस ड्रेस में अजीब से लग रहे थे।

"कसम से....क्या-क्या करना पड़ रहा है, एक द्वीप के युवराज को?” वेगा ने कहा- “और ये सब कुछ तुम्हारी वजह से हो रहा है।"

"मेरी वजह से क्यो? मैंने ऐसा क्या किया?" वीनस ने आश्चर्य से वेगा की ओर देखते हुए पूछा।

“मुझसे प्यार।” वेगा ने वीनस के पास आते हुए कहा- “और तुम्हारे प्यार के लिये, मैं किसी भी तरह का कार्टून बनने के लिये तैयार हूं?"

“अरे ओ 5 किलोमीटर क्षेत्रफल वाले राज्य के युवराज, सुबह-सुबह ज्यादा रोमांटिक होने का नाटक मत करो अब इस ड्रेस के ऊपर कोई कपड़ा डालो और मेरे साथ जॉगिंग पर चलो, मुझे देखना है कि दौड़ने भागने पर यह ड्रेस कितना आरामदायक है?"

“धत् तेरे की...पूरे मूड का सत्यानाश कर दिया।" वेगा ने चिढ़ते हुए कहा।

अब वेगा और वीनस ने उस ड्रेस के ऊपर ही एक टी. शर्ट और ट्राडजर डाला और मास्क को जेब में रख, सोसाइटी के बाहर वाले पार्क में आ गये।

उस पार्क में बहुत से लोग पहले से जॉगिंग या एक्सरसाइज कर रहे थे। वेगा और वीनस भी उसी भीड़ में शामिल हो गये।

सुबह का मौसम काफी सुहाना लग रहा था। चारो ओर पंछी चहचहा रहे थे, जिनकी बोली वीनस को बहुत भली महसूस हो रही थी।

तभी एक चिड़िया की तेज आवाज सुन वीनस आश्चर्य से इधर-उधर देखने लगी।

उसे इस प्रकार चारो ओर देखते देख वेगा से रहा ना गया, वह पूछ बैठा- “क्या हुआ वीनस? कोई परेशानी है क्या?"

“तुरंत किसी पेड़ की ओट में जाकर, अपने सुपर हीरो का अवतार धारण कर लो कोई अंजाना खतरा हमारे आसपास मंडरा रहा है?" वीनस ने कहा और स्वयं एक पत्थर की ओट में आ गई।

वीनस की बात सुन वेगा भी एक पेड़ के पीछे की ओर भागा। वेगा ने अपनी टी शर्ट और ट्राउजर को उतार कर वहीं पेड़ के पास फेंका और पेड़ की ओट से बाहर आ गया।

तब तक वीनस भी चट्टान के पीछे से बाहर आ गई थी और उसी की ओर देख रही थी। पार्क में सबकुछ पहले की ही तरह था, पर अब सभी लोग उन्हें आश्चर्य से देख रहे थे।

“यह सब हमें घूर-चूर कर क्यों देख रहे हैं? कहीं यह हमें ही तो खतरा नहीं समझ रहे?" वेगा ने धीमी आवाज में फुसफुसाकर वीनस से कहा।

पर वीनस ने वेगा को चुप रहने का इशारा किया और फिर से चिड़ियों की आवाजें सुनने लगी।

तभी वीनस के सामने, पार्क के बीचो बीच में एक नीली ड्रेस पहने, एक अंतरिक्ष मानव खड़ा दिखाई दिया, जिसकी ड्रेस पर A7 लिखा था, वह एनम ही था, जिसके पास बहुशरीर शक्ति थी और जिसने एलनिको के साथ मिलकर धरा और मयूर को हराया था।

वीनस के देखते ही देखते एनम के शरीर से सैकड़ों शरीर निकलकर पूरे पार्क में फैल गये। अब पार्क में हर ओर सिर्फ एनम ही एनम दिखाई दे रहे थे।

पार्क में घूम रहे सभी लोग घबराकर, उस एक जैसे बहुत से एनम को देख रहे थे। तभी वेगा, उस पहले वाले एनम के सामने आ गया।

“कौन हो तुम? और क्या चाहिये तुम्हें?” वेगा ने तेज आवाज में एनम से पूछा।

"हम यहां बस तुम्हारे हाथ में बंधी वह घड़ी लेने आये हैं, अगर तुम वह घड़ी चुपचाप से मेरे हवाले कर देते हो, हम बिना किसी को नुकसान पहुंचाये, यहां से चले जायेंगे, पर अगर तुमने वह घड़ी हमारे हवाले नहीं की तो यहां मौजूद सभी लोगों की मौत के सिर्फ तुम जिम्मेदार होगे?” एनम ने एक प्रकार की धमकी देते हुए कहा।

“यह तो यहां मेरे पीछे ही आये हैं, इसका मतलब किसी प्रकार से इन्हें इस घड़ी का रहस्य पता चल गया है?" वेगा ने मन ही मन कहा- “यह अंतरिक्ष जीव, पिछले वाले समुद्री जीवों से ज्यादा खतरनाक लग रहा है, फिलहाल इससे बचकर रहना होगा।"

यह सोच वेगा ने वीनस की ओर एक बार देखा और फिर एनम के आगे तनकर खड़ा होते हुए बोला- “तुम्हें क्या लगता है? कि तुम मुझसे ऐसे यह घड़ी मांगोगे और मैं तुम्हें दे दूंगा। ऐसे टोपी वाले जादूगर मैंने बहुत देखे हैं...तुम मुझे इस जादू से डरा नहीं सकते। रुको मैं तुम्हें दिखाता हूं कि जादू कैसा होता है?"

वेगा ने आखिरी के शब्द बहुत तेज आवाज में कहे। वेगा की आवाज इतनी तेज थी कि लगभग पूरे पार्क में गूंज गई।

इसी के साथ वेगा के शरीर से, एनम से भी ज्यादा वेगा निकले और हर एनम के सामने जाकर खड़े हो गये।

दरअसल यह वेगा के द्वारा किया गया, ध्वनि सम्मोहन था, यह सम्मोहन वेगा की आवाज के साथ फैलता था, यानि की जितने लोगों तक वेगा की आवाज सुनाई देती, उतने लोगों को वही दिखाई देता, जो वेगा उन्हें दिखाना चाहता।

एनम यह देखकर हैरान हो गया। उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या वेगा के पास भी उसी की तरह की कोई शक्ति है?

स्वयं वीनस भी वेगा की इस शक्ति को देख हैरान थी, क्यों कि उसे भी वेगा की किसी ऐसी शक्ति के बारे में नहीं पता था?

तभी वेगा को पार्क में एक और अंतरिक्ष का जीव दिखाई दिया, जिसकी ड्रेस पर A4 लिखा था। यह रुफो था, जिसके पास अपने शरीर को रबर की तरह लचीला बना लेने की शक्ति थी।

इससे पहले कि वेगा कुछ समझ पाता, कि रुफो ने अपने हाथों को लंबा करके, वेगा के सभी शरीरों को पकड़ने की कोशिश की, पर रुफो का हाथ, वेगा के सभी शरीरों के पार निकल गया।

चूंकि उनमें से एक भी शरीर असली नहीं था, इसलिये रुफो, वेगा के किसी भी शरीर को पकड़ नहीं पाया।

तभी वेगा की घड़ी से वृष राशि के प्रतीक के रुप में एक विशाल बैल निकला और उसने रुफो को एक जोरदार टक्कर मार दी।

रुफो का सारा ध्यान वेगा की ओर था, इसलिये वह बैल की टक्कर से बच नहीं पाया। बैल की टक्कर इतनी बलशाली थी कि रुफो कुछ पलों के लिये बेहोश सा हो गया।

तभी वीनस को अपना दम थोड़ा घुटता हुआ सा महसूस हुआ। वीनस ने चारो ओर देखा, इस समय पार्क में मौजूद हर व्यक्ति अपना सीना पकड़कर हांफ रहा था।

अब वीनस को हवा में उड़ रहा एक और नीला जीव दिखाई दिया, जिसके सीने पर बने गोले में A1 लिखा था। यह एलनिको था, जिसके पास चुंबकत्व शक्ति थी।

इसी शक्ति के काले कणों के माध्यम से, एलनिको ने धरा और मयूर को वश में किया था।

एलनिको के हाथ से इस समय भी काले रंग के कण निकलकर हवा में फैल रहे थे। यही काले कण, सभी की साँस में बाधा उत्पन्न कर रहे थे।

यह देख वीनस ने किसी प्रकार से अपने मुंह से एक तेज सीटी निकाली, वीनस की सीटी की आवाज सुनकर, हवा में उड़ रही बहुत सी चिड़ियों और कौओं ने एलनिको पर हमला बोल दिया।

एलनि को इस विचित्र हमले से घबरा गया। कुछ देर तो उसे समझ ही नहीं आया कि यह क्या हुआ? पर जैसे ही एलनि को संभला, उसने अपने पर आक्रमण कर रहे सभी जीवों के ऊपर भी काले कणों का हमला कर दिया।

तभी वीनस ने अपने पास मौजूद एक बड़े से लकड़ी के डंडे को खींचकर एलनिको पर मार दिया।

लकड़ी का डंडा सीधा जाकर एलनि को के सिर से टकराया। यह देख एलनिको ने गुस्साकर, वीनस पर चुंबकीय तरंगों का वार कर दिया।

एलनिको के हाथ से चुंबकीय तरंगें निकलीं और उन तरंगों ने वीनस के पूरे शरीर को एक तीव्र चुंबक में बदल दिया।

ऐसा करते ही वीनस का शरीर हवा में खिंचकर, पार्क में मौजूद एक लोहे के खंभे से चिपक गया। अब वीनस किसी भी तरह से स्वयं को उस खंभे से छुड़ा नहीं पा रही थी।

उधर वेगा के माया शरीर अब गायब हो गये थे। अब वेगा की ओर एलनिको, एनम और रुफो तीनों एक साथ बढ़ रहे थे।

तभी वेगा की घड़ी से एक बड़ा सा बिच्छू निकलकर बाहर आ गया और बाहर निकलते ही उसने सभी अंतरिक्ष के जीवों पर अपने डंक से हमला कर दिया।

बिच्छू के डंक उसके शरीर से निकल-निकल कर, एनम के अनगिनत शरीरों से जा टकराये। इसी के साथ एनम के सभी माया रुप गायब हो गये।

बिच्छू का एक डंक असली एनम से भी जा टकराया, एनम जमीन पर गिरकर, बिच्छू के जहर के कारण तड़पने लगा। अब बिच्छू अपना कार्य करके गायब हो गया।

उधर रुफो को तब तक होश आ गया था, रुफो ने इस बार अपने हाथ को लंबा करके वेगा के पूरे शरीर को लपेट लिया और फिर अपने हाथों को तेजी से खींचकर वेगा को किसी लटू की भांति नचा दिया।

इतनी तेज नाचने की वजह से वेगा अपने दिमाग को कुछ देर के लिये कंट्रोल नहीं कर पाया और नाचते-नाचते जमीन पर गिर पड़ा।

अब एलनिको ने वेगा के ऊपर भी अपने काले कणों का हमला कर दिया। काले कणों ने वेगा के पूरे चेहरे को ढक लिया।

वेगा अब उन काले कणों के नीचे तड़पने लगा था, यह देखकर वीनस छटपटा रही थी, पर खंभे से चिपके होने के कारण वह कुछ कर नहीं पा रही थी।

अब काले कणों ने वेगा की घड़ी को भी पूरी तरह से ढक लिया, जिससे घड़ी से कोई नया कण नहीं निकल पा रहा था।

इस समय वेगा और वीनस भी पार्क में मौजूद, साधारण व्यक्तियों की तरह तड़प रहे थे। किसी के भी पास बचाव का कोई तरीका नजर नहीं आ रहा था।

तभी हवा में एक बड़ा सा ऊर्जा द्वार बन गया और उस ऊर्जा द्वार से युगाका व कलाट निकलकर बाहर आ गये।

युगाका ने ऊर्जा द्वार से बाहर निकलते ही वेगा को जमीन पर पड़ा, तड़पते हुए देखा। यह दृश्य देखते ही मानों युगाका का खून खौल गया।

युगाका ने एक तेज हुंकार भरी, उसकी हुंकार सुनते ही पार्क में मौजूद कुछ पेड़ों ने अपनी शाखाएं बड़ी करके रुफो के चारो ओर झाड़ियों का एक गोला बन दिया।

रुफो उस गोले में इस प्रकार जकड़ गया कि रुफो अपने शरीर का कोई अंग बड़ा करके बाहर नहीं निकल सकता था।

अब सभी पेड़ की पत्तियों ने पार्क में मौजूद सभी काले कणों को अपने अंदर खींच लिया। इतना करने के बाद युगाका की नजर हवा में खड़े एलनिको की ओर गई।

उधर कलाट के हाथों से निकली ऊष्मा ने वीनस को खंभे से छुड़ा दिया था। अब वेगा, वीनस और कलाट एक स्थान पर खड़े होकर युगाका का क्रोध देख रहे थे।

तभी एलनिको ने चुंबक शक्ति और काले कणों का वार एक साथ युगाका पर कर दिया। यह देख युगाका, एक विशाल वृक्ष मानव में परिवर्तित हो गया।

“तुम मूर्ख हो एलनिको, जो मुझ पर चुंबक की शक्ति का वार कर रहे हो, भला कभी लकड़ी पर भी चुंबक का असर होता है।” युगाका ने गरजते हुए कहा- “और तुम इन काले कणों से मेरी श्वांस नली को बंद करना चाहते हो, तो मैं तुम्हें बता दूं कि पेड़ अपने शरीर के हर भाग से साँस ले सकते हैं। तो इस प्रकार तुम्हारे दोनों वार विफल हो गये। अब मेरी बारी है। मेरे भाई पर प्रहार करने का दंड भुगतने के लिये तैयार हो जाओ।" यह कहकर युगाका ने अपने दोनों हाथों को एलनिको की ओर कर दिया।

युगाका के हाथ एक नुकीले लकड़ी के भाले के समान बन गये और लंबे होते हुए एलनिको के शरीर के
आरपार हो गये। एक सेकेण्ड में ही एलनिको का शरीर मरकर हवा में झूलने लगा।

उधर युगाका का ध्यान एलनिको की ओर देख एनम ने अपने शरीर में घुसे बिच्छू के काँटे को बाहर निकाला और इससे पहले कि किसी का ध्यान उनकी ओर जाता, वह लकड़ी के गोले में बंद रुफो को लेकर हवा में उड़ गया।

युगाका ने एलनिको के मृत शरीर को जमीन पर पटक दिया और अपने असली रुप में आ गया।

“अरे, इसके दोनों साथी कहां गये?" वीनस ने चारो ओर देखते हुए कहा।

"लगता है भाई से डरकर भाग गये।" वेगा ने अपने मास्क को अपने चेहरे पर एडजेस्ट करते हुए कहा- “अब इससे पहले कि मीडिया वाले आकर सबका इंटरव्यू लेने लगें, हमें तुरंत यहां से अपने कमरे पर पहुंचना होगा।

वेगा की बात सुनकर कलाट ने अपने चारो ओर खड़े लोगों को देखा और तुरंत ऊर्जा का द्वार बनाकर, सभी को लेकर वहां से गायब हो गया।


जारी
रहेगा_____✍️
Nice update....
 
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#208.

अष्टकोणीय सत्य:
(24.01.2002, गुरुवार, मैनहट्टन, न्यूयार्क, अमेरिका)

आर्केडिया न्यूयार्क पहुंच चुका था। आर्ची ने अदृश्य करके आर्केडिया को 'हडसन नदी' में उतार लिया था।

मैनहट्टन का वह क्षेत्र, जहां महेन्द्र शर्मा का घर था, वहां से ज्यादा दूर नहीं था। शलाका और जेम्स आर्केडिया से निकलकर मैनहट्टन की 6 स्ट्रीट पर पहुच गये।

कुछ ही देर में दोनों उस पते पर खड़े थे, जो कि शारदा ने दिया था। शलाका, देवोम को जल्द से जल्द देखना चाहती थी। इसलिये शलाका ने आगे बढ़कर घर की घंटी बजा दी।

कुछ देर के बाद लगभग एक 70 वर्षीय बूढ़े ने घर का दरवाजा खोला, जिसके चेहरे पर एक चश्मा लगा हुआ था, लेकिन इस उम्र में भी वह किसी आर्मी के जवान की तरह से फिट दिखाई दे रहा था।

“जी, हमें महेन्द्र शर्मा जी से मिलना है।” शलाका ने उस बूढ़े को देखते हुए हिंदी भाषा में कहा।

“कहिये, क्या कहना है आपको? मैं ही हूॅ महेन्द्र शर्मा।” महेन्द्र ने शलाका और जेम्स को ऊपर से नीचे तक देखते हुए कहा।

“मुझे आपसे भारत में मिले अष्टकोण के बारे में बात करनी है।” शलाका ने बिना ज्यादा कुछ घुमाये-फिराये महेन्द्र से कहा।

“अष्टकोण!" अब महेन्द्र के चेहरे पर आश्चर्य के भाव उभरे, जिसे शलाका ने तुरंत पहचान लिया- “कौन हैं आप लोग?"

“क्या हम अंदर बैठकर बात कर सकते हैं?" शलाका ने इधर-उधर देखते हुए कहा।

शलाका की बात सुन महेन्द्र एक पल को सोच में पड़ गया, फिर जाने क्या सोचकर उसने शलाका और जेम्स को अंदर आने को कह दिया।

शलाका और जेम्स अंदर आकर बैठ गये। तभी शलाका की नजर, सामने टेबल पर रखे एक फोटो फ्रेम पर गई। उस फोटो फ्रेम में महेन्द्र, उनकी पत्नी और उनका बेटा देवोम, तीनों दिख रहे थे।

इस फोटो में देवोम काफी छोटा था। परंतु शलाका की तेज आँखों ने देवोम को तुरंत पहचान लिया, वह वही दिव्य बालक था....आर्यन और आकृति का पुत्र जिसकी आँखों में सूर्य के समान तेज दिखाई दे रहा था।

महेन्द्र ने शलाका की आँखों का पीछा करके, यह देख लिया कि शलाका उस फोटो फ्रेम को देख रही है। अतः वह बोल उठा- “ये फोटो देव के बचपन की है, तब वह मात्र …वर्ष का था।"

शलाका ने धीरे से सिर हिलाया और आगे बढ़कर उस फोटो फ्रेम को उठा लिया।

“आर्ची, इस फोटो को अपने डेटा में सेव कर लो।" शलाका ने अपने मन में आर्ची से कहा।

“कर लिया।" आर्ची ने शलाका की आँखों का प्रयोग करके, उस तस्वीर को अपने डेटा में सेव कर लिया।

अब शलाका ने एक बार और ध्यान से उस अद्भुत बालक को देखा और फिर उस फोटो फ्रेम को वापस टेबल पर रखकर, महेन्द्र के सामने आकर बैठ गई।

"महेन्द्र जी,... मेरा नाम शलाका है....मैं पिछले 25 वर्षों से उस अष्टकोण को ढूंढ रही हूं इसलिये अब आप मुझसे कुछ ना छिपाएं और मुझे सारी बातें सचसच बता दें कि आप उस अष्टकोण के बारे में क्या-क्या जानते हैं?” शलाका ने तीखी निगाहों से महेन्द्र को देखते हुए कहा।

शलाका की बात सुन महेन्द्र ने कसमसाकर, अपने शरीर के बैठने के अंदाज को ठीक किया और फिर बोलना शुरु कर दिया- “आज से लगभग 22 वर्ष पहले, जब हम भारत के उज्जैन शहर में रहते थे, उस समय एक रात, जब मैं और मेरी पत्नी गायत्री, अपने बेडरुम में सो रहे थे कि तभी हमें अपने बेड के नीचे से एक अजीब सी ‘धम्-धम्' की आवाज आती हुई सुनाई दी। धीरे-धीरे वह आवाज थोड़ी तेज हो गई। हमने अपने बेड के नीचे झांक कर देखा, पर बेड के नीचे कोई नहीं था। जब हमने जमीन से कान लगाकर सुना, तो हमें वह आवाज जमीन के नीचे से आती हुई प्रतीत हुई। हमने उस रात कुदाल से अपने कमरे की पूरी जमीन को खोद डाला। हमें उस समय जमीन के नीचे से एक काँच का अष्टकोण मिला, जिसमें एक दिव्य बालक लेटा हुआ, मुस्कुरा रहा था।

“हमें बहुत आश्चर्य हुआ कि यह दिव्य बालक, बिना साँस लिये, उस जमीन के अंदर जिंदा कैसे था? हमने उस काँच के अष्टकोण को जमीन के अंदर से निकाल लिया। अब हमने उस अष्टकोण को तोड़ने के लिये हर प्रकार के औजार का प्रयोग किया, पर वह नहीं टूटा। इस प्रकार धीरे-धीरे पूरी रात बीत गई, पर हम उस अष्टकोण को किसी भी प्रकार से नहीं खोल पाये? अब थक कर हमने उस अष्टकोण को वहीं कमरे की खिड़की के पास रख दिया और सो गये। पूरी रात जगे होने के कारण हमें तुरंत नींद आ गई। सुबह किसी बच्चे की किलकारी की आवाज ने हमें जगा दिया। जब उठकर हमने देखा, तो हमें सूर्य की रोशनी खिड़की से निकलकर, उस काँच के अष्टकोण पर पड़ती दिखाई दी।

“सूर्य की किरणें पड़ने के बाद ना जाने कैसे वह अष्टकोण स्वतः ही खुल गया था और वह नन्हा दिव्य बालक, उस सूर्य की रोशनी में रोने की जगह, हंसता हुआ ऐसे खेल रहा था, मानो वह सूर्य की रोशनी में नहीं, बल्कि अपने पिता की गोद में हो। गायत्री ने उस दिव्य बालक को उठाकर अपनी गोद में ले लिया। तभी मेरी नजर उस अष्टकोण में उपस्थित एक सुनहरी रंग की धातु की शीशी पर गई, जिस पर एक 'ॐ' का निशान बना था, मैंने उस शीशी को उठाकर देखा, पर उसमें कुछ नहीं था।

"मैंने उस शीशी को अलमारी में उठाकर रख दिया और गायत्री को उस दिव्य बालक से खेलते देखता रहा। चूंकि हमारे कोई बच्चा नहीं था, इसलिये हमने सभी को यही बताया कि यह हमारा ही पुत्र है। उस बालक के चेहरे पर देवताओं सा तेज था और उस दिव्य शीशी पर 'ऊँ' लिखा था, इसलिये हमने अपने बालक का नाम 'देवोम' रख दिया। देवोम बहुत ही विलक्षण बालक था, वह बचपन से ही हर चीज को जल्दी सीख जाता था। कुछ समय बाद जब देवोम बड़ा हो गया, तो हम भारत छोड़कर अमेरिका में आकर बस गये।” इतना कहकर महेन्द्र चुप हो गया।

"इस समय देवोम कहां है? मुझे उससे मिलना है।" शलाका ने बेसब्र होते हुए कहा।

“नहीं मिल सकते वह पिछले 15 दिनों से कहीं गायब हो गया है?” महेन्द्र ने कहा।

महेन्द्र के शब्द सुन शलाका पर तो जैसे बिजली ही गिर गई- “क्याऽऽऽऽ?...कहां गायब हो गया?"

“आज से 15 दिन पहले, वह यह कहकर घर से गया था कि उसे कहीं नौकरी मिल गई है, जिसकी 5 दिन की ट्रेनिंग के लिये वह फ्लोरिडा जा रहा है, 5 दिन बाद वह वापस आ जायेगा।” महेन्द्र ने रोने वाले अंदाज में कहा “पर आज 5 तो क्या 15 दिन भी बाद भी उसकी खबर नहीं है। मुझे लगा था कि वह बुढ़ापे में हमारा सहारा बनेगा, पर वह जिस रहस्यमय अंदाज में हमें मिला था, उसी रहस्यमय अंदाज में गायब भी हो गया। मैंने अभी आपको इसलिये भी अंदर आने दिया कि मुझे लगा आपके पास देवोम की कोई खबर है?"

यह सुनकर एक पल के लिये शलाका का चेहरा थोड़ा मुर्झा सा गया, पर तुरंत ही उसने अपने पर नियंत्रण करते हुए कहा- “आप देवोम की कोई नई फोटो मुझे दे दीजिये, मैं उसे अवश्य ढूंढ लूंगी।

"नहीं है देवोम की एक भी नई फोटो हमारे पास नहीं है।” महेन्द्र ने सिर झुकाते हुए कहा।

"ऐसा कैसे हो सकता है?” शलाका ने आश्चर्य से महेन्द्र की ओर देखते हुए कहा- “मेरा मतलब है कि आज के समय में तो सभी लोग फोटोज रखते हैं... फिर आपके पास उसकी कोई फोटो क्यों नहीं है?... और आपने घर में बिना चेक किये एकदम से कैसे बोल दिया कि उसकी कोई फोटो आपके पास नहीं है?"

“क्यों कि जब उसको गायब हुए 10 दिन हो गये, तो मैंने पुलिस में कम्प्लेन लिखवा दी। कम्प्लेन लिखवाने पर जब पुलिस ने उसकी फोटो मांगी, तो हमने अपना पूरा घर छान मारा, पर उसके बचपन की इस फोटो को छोड़कर, उसकी सारी फोटो कहीं गायब हो गईं? हमने बहुत ढूंढा, पर उसकी कोई फोटो नहीं मिली?"

“यह कैसे हो सकता है? इसका मतलब वह जानबूझकर कहीं गया है? और उसी ने जाने से पहले अपनी सारी फोटो भी गायब कर दी हैं।” जेम्स ने काफी देर बाद कुछ कहा।

"पर वो ऐसा क्यों करेगा?" महेन्द्र ने कहा।

“शायद उसे पता हो कि कोई उसे ढूंढने आने वाला है?" जेम्स ने कहा।

“यह संभव नहीं हो सकता।” महेन्द्र ने जेम्स को देखते हुए कहा- “हमने आज तक उसे नहीं बताया कि वह हमें कहां से मिला था? या फिर वह कौन है? वैसे क्या आप यह बता सकती हैं कि वह कौन है? और हमारे कमरे में जमीन के नीचे कैसे आया?"

“यह बहुत लंबी कहानी है।” शलाका ने महेन्द्र से कहा- “बस आप इतना जान लीजिये कि वह एक देवपुत्र है, जिसे किसी कारणवश उस अष्टकोण में छिपाया गया था, पर अब उसकी तलाश देवताओं को भी है।“

शलाका की बात सुन महेन्द्र खुश होते हुए बोला "मुझे पता था कि वह कोई दिव्य बालक है। अगर वह आपको मिल जाता है, तो मुझे भी अवश्य बताइयेगा।"

“ठीक है।” शलाका ने कहा- “अब जरा मुझे उस सुनहरी दिव्य शीशी और अष्टकोण के बारे में भी बता दीजिये कि वह कहां है? वह भी आपके पास है या फिर वह भी कहीं खो गया?"

शलाका के कटाक्ष सुन महेन्द्र ने अपना सिर झुकाते हुए कहा- “वह दोनों चीजें, मैंने एक आर्कियोलॉजिस्ट को दे दिया था, जो कि अब न्यूयार्क के मशहूर ‘दि मेट क्लाएस्टर म्यूजियम' में रखी हैं। वह म्यूजियम यहां से मात्र 30 मिनट की दूरी पर है।"

यह सुन शलाका को महेन्द्र पर गुस्सा तो बहुत आया, पर उसने कुछ महेन्द्र को कुछ कहा नहीं।

"तो फिर अब हम चलते हैं अगर हमें देवोम की कोई जानकारी मिली, तो आपको अवश्य बतायेंगे।" यह कहकर शलाका खड़ी हुई और जेम्स को लेकर वहां से बाहर निकल गई।

“आपको क्या लगता है कि यह बूढ़ा सही बोल रहा था?" जेम्स ने शलाका से पूछा।

“यह पता करना तो बहुत आसान है, पर इसके लिये हमें पहले किसी शांत जगह पर बैठना होगा।” शलाका ने कहा।

"तो फिर क्यों ना ‘दि मेट क्लाएस्टर म्यूजियम' की ओर ही चलें, वहां पर एक ‘मामा सूशी' रेस्टोरेंट है, जहां पर जापानी -मैक्सिकन फ्यूजन फूड मिलता है। वहां पर बैठने के लिये काफी शांत जगह है।” जेम्स ने कहा।

“तुम्हें बहुत पता है न्यूयार्क के बारे में?” शलाका ने मुस्कुराते हुए कहा।

“हे देवी शलाका, आप भूल रही हैं कि मैं इसी शहर का हूं।" जेम्स अपना दाहिना हाथ अपने पेट से टच कराते हुए, अदब से झुकते हुए कहा।

“अच्छा, तो अब तुम मेरे कार्य के बीच अपना पर्सनल फूड भी खाना चाहते हो?” शलाका ने कहा।

“एक खाने का ही तो शौक है, जो बचपन से अभी तक चल रहा है।” जेम्स ने दुखी होते हुए कहा- “पर क्या आपके पास अमेरिकन डॉलर हैं, क्यों कि मैं खाने के बाद बर्तन नहीं धोना चाहता?"

“अब उदास मत हो, हम उधर ही चल रहे हैं और आर्ची के रहते किसी भी टाइप की करेंसी की जरुरत नहीं पड़ेगी।" यह कहकर शलाका ने अपने बैग से निकालकर, जेम्स को एक क्रेडिट कार्ड दिखाया।

“वाह, मानना पड़ेगा आपकी आर्ची को।” जेम्स ने कहा और एक टैक्सी को हाथ देकर रोक लिया।

कुछ ही देर में जेम्स और शलाका ‘मामा सूशी' रेस्टोरेंट में बैठे थे। जेम्स ने अपनी पसंद का खाना आर्डर कर दिया।

“आर्ची, जरा कम्प्यूटर पर देख कर बताओ कि क्या अष्टकोण और अमृत की शीशी अभी भी ‘दि मेट क्लाएस्टर म्यूजियम' में है या उसे कहीं और शिफ्ट कर दिया गया है?" शलाका ने आर्ची से कहा।

थोड़ी ही देर के बाद शलाका के दिमाग में आर्ची की आवाज उभरी- “अष्टकोण अभी भी म्यूजियम में है, पर अमृत की शीशी आज से 4 दिन पहले ही म्यूजियम से गायब हो चुकी है।"

"क्याऽऽऽऽ? कैसे?” शलाका ने तेज आवाज में कहा- “मुझे तुरंत उसके बारे में सारी जानकारी चेक करके बताओ।

“क्या हुआ? जेम्स ने शलाका से पूछा। शलाका ने सारी बात जेम्स को बता दी।

“इसका मतलब कि किसी को अमृत की शीशी के बारे में सबकुछ पता चल गया है?" जेम्स ने कहा।

तभी फिर शलाका के दिमाग में आर्ची की आवाज उभरी- “म्यूजियम को भी अभी उस चोरी के बारे में ज्यादा कुछ नहीं पता, पर 4 दिन पहले ही एक स्कूल के बच्चों का ग्रुप म्यूजियम में घूमने आया था, उसी के बाद से उस अमृत की शीशी का कुछ पता नहीं है।"

इस बार आर्ची की आवाज, जेम्स को भी सुनाई दे रही थी, शायद शलाका ने जेम्स को भी उन बातों में शामिल कर लिया था।

यह जेम्स के लिये अच्छा ही था। अब बार-बार उसे शलाका से पूछने की जरुरत नहीं पड़नी थी कि उसकी आर्ची से क्या बात हो रही थी?

“आर्ची, उस दिन के म्यूजियम के सभी सी.सी.टी.वी. कैमरे को चेक करो और यह देखो कि कौन सा बच्चा उस दिन अमृत की शीशी के पास था?"

शलाका की बात सुन आर्ची काम पर लग गई। इधर रेस्टोरेंट में खाना भी सर्व हो चुका था, जिसे जेम्स ने प्लेट में निकालना शुरु कर दिया था।

कुछ देर बाद फिर से आर्ची की आवाज उभरी “शलाका, एक बच्चा बार-बार उस अमृत की शीशी को देख रहा था। किसी भी फुटेज में उसे अमृत की शीशी को निकालते तो नहीं देखा गया, पर म्यूजियम से निकलते समय, उसकी जेब थोड़ी फूली हुई थी और म्यूजियम से निकलते समय, वह बच्चा स्कैनर के बगल से निकला था, जिसकी वजह से किसी भी प्रकार का अलार्म नहीं बजा। बच्चा होने की वजह से सिक्योरिटी वालों ने इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया था।"

“वेरी गुड आर्ची अब जरा उस स्कूल के डेटा को सर्च करके, उस बच्चे का पता निकालो और मुझे दो।" यह कहकर शलाका फिर से अपना खाना खाने लगी।

कुछ देर बाद आर्ची की आवाज पुनः आई- “उस बच्चे का डेटा, हमें स्कूल के रिकार्ड में नहीं मिला शायद वह बच्चा उस स्कूल का था ही नहीं... वह उनके बीच किसी तरह से घुस गया था?"

“मुझे ऐसी ही कुछ आशा थी।” शलाका ने जोर से साँस लेते हुए कहा- “शायद वह कोई बहुरुपिया है, जो बच्चे का भेष बनाकर घूम रहा है आर्ची, तुम तुरंत उस बच्चे का फोटो, पूरे न्यूयार्क के कैमरे में स्कैन करो और पता करो कि क्या वह बच्चा अब भी न्यूयार्क में ही है या फिर कहीं चला गया?

“वह बच्चा, अब भी न्यूयार्क में है, इस समय वह म्यूजियम के पास ही, ‘फोर्ट ट्रायन पार्क' में सूर्य नमस्कार कर रहा है।” आर्ची ने कहा।

“वेरी गुड आर्ची, तुम उस पर नजर रखो, हम अभी वहां पहुंचते हैं।” यह कहकर शलाका अपनी कुर्सी से खड़ी हो गई।

तब तक जेम्स ने भी अपना खाना खत्म कर लिया था, इसलिये वह भी शलाका के पीछे उठकर भागा।

शलाका ने कैश काउंटर पर जाकर अपना बिल पे किया, पर जैसे ही वह वहां से निकलने लगी, उसका रास्ता रोककर विक्रम खड़ा हो गया।

“वारुणी, तुम यहां हो और मैं कब से वहां टेबल पर बैठकर तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं।” विक्रम ने कहा।

विक्रम को वहां देख शलाका हैरान हो गई।

“अरे विक्रम तुम यहां न्यूयार्क में क्या कर रहे हो? और...और तुम मुझे वारुणि कहकर क्यों संबोधित कर रहे हो? मैं तो शलाका हूं तुम भूल गये क्या?"

"शलाका?” विक्रम ने ना समझने वाले अंदाज में कहा- “ये तुम कैसी बातें कर रही हो वारुणि अभी कुछ देर पहले ही तो तुम मुझे उस टेबल पर बैठाकर, इधर आई थी। इतनी जल्दी तुम यह बात कैसे भूल सकती हो?"

“शलाका, वह बालक अब पार्क के अंदर की ओर जा रहा है और पार्क के उस स्थान पर कोई कैमरा नहीं है, तुम्हें जल्दी उसके पास पहुंचना होगा।” आर्ची ने शलाका को कहा।

आर्ची की बात सुन शलाका तेजी से रेस्टोरेंट के बाहर की ओर निकलती हुई बोली- “तुम यहीं रुको विक्रम। मैं अभी वापस आकर तुमसे बात करती हूं..कहीं जाना नहीं?"

विक्रम ठगा सा वहां खड़ा, दूर जा रही शलाका...म....मेरा मतलब है कि वारुणि को देख रहा था।


जारी रहेगा_____✍️


बहुत ही शानदार और आकर्षक अपडेट दिया है ! हर मोड पे लगा अब सस्पेंस खुला जब खुला लेकिन वो अगले अपडेट के लिए बचा हुआ है !


बहुत ही अच्छा लिख रहे हो .💐💐💐💐👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻
 

dhparikh

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#209.

सुपर हीरो:
(25.01.02, शुक्रवार, वाशिंगटन डी.सी., अमेरिका)

वेगा और वीनस अपने कमरे में बैठे थे। पिछली बार के समुद्री हमले के बाद उन्हें काफी कुछ समझ में आ गया था।

पिछले हमले में वेगा किसी बच्चों की तरह से लड़ा था। ये तो भला था कि वेगा की जोडियाक वॉच से निकले, सिंहमानव और अश्वमानव ने उन्हें बचा लिया था, नहीं तो दोनों को वह पहला युद्ध ही आखिरी युद्ध बन जाना था।

उस युद्ध से सीखते हुए वीनस ने पिछले 8 दिन में बहुत सी चीजें की थीं। वीनस का पहला कार्य अपने और वेगा के लिये एक ड्रेस और मास्क का चुनाव करना था, जिससे लड़ते समय उन्हें कोई पहचान ना सके?

इसके लिये वीनस ने विश्व के सबसे हल्के और मजबूत मैटीरियल का चुनाव किया। इसके तहत एयरोग्रैफीन मैटीरियल को फैब्रिक में मिलाकर, एक नये कपड़े का निर्माण किया और उसी कपड़े से वेगा और वीनस की ड्रेस बनी।

कपड़ा सेलेक्ट करने के बाद, उसकी ड्रेस बनवाने का कार्य वेगा के हिस्से आया।

इतने कम समय में बिना किसी के जाने ड्रेस बनवाना इतना आसान नहीं था। परंतु इसके लिये वेगा ने अपनी सम्मोहन शक्ति का सहारा लिया। वेगा ने ड्रेस बनवाने के बाद, ड्रेस बनाने वाले की पूरी यादाश्त को मिटा दिया था।

बहरहाल इन दोनों नौसिखिये सुपर हीरोज की ड्रेस इस समय वीनस के हाथ में थी। पूरी ड्रेस लाल और काले रंग से निर्मित थी।

“यह क्या वेगा, मैंने कहा था कि मेरी ड्रेस का रंग गुलाबी रखवाना, पर तुमने तो मेरी ड्रेस भी अपने रंग की ही बनवा दी।” वीनस ने वेगा पर नाराज होते हुए कहा।

“तुम्हें किसी रैम्प वॉक में हिस्सा नहीं लेना है वीनस? ये एक सुपर हीरो की ड्रेस है, मैं इसे किसी कार्टून के ड्रेस के रंग में तो नहीं बनवा सकता था ना।” वेगा ने वीनस को चिढ़ाते हुए कहा।

"तुम्हारा कहने का मतलब है कि गुलाबी रंग सिर्फ कार्टून पहनते हैं?” वीनस ने गुस्साते हुए कहा।

“न न....नहीं, मेरा कहने का तो ये मतलब था, कि गुलाबी रंग बहुत अजीब लगता, किसी सुपर हीरो की ड्रेस पर।” वेगा ने सफाई देते हुए कहा।

“चलो, अब जरा इस ड्रेस को पहनकर देख लेते हैं कि कहीं यह भी तो अन्य कपड़ों की तरह गर्म तो नहीं कर रही?” वीनस ने कहा और अपनी ड्रेस लेकर अंदर के कमरे में चली गई।

कुछ ही देर में वीनस वह ड्रेस पहनकर बाहर आई, तब तक वेगा भी उस ड्रेस को पहन चुका था।

पर जैसे ही दोनों की नजर एक-दूसरे पर पड़ी, दोनों का हंसते-हंसते बुरा हाल हो गया। दोनों सच में ही इस ड्रेस में अजीब से लग रहे थे।

"कसम से....क्या-क्या करना पड़ रहा है, एक द्वीप के युवराज को?” वेगा ने कहा- “और ये सब कुछ तुम्हारी वजह से हो रहा है।"

"मेरी वजह से क्यो? मैंने ऐसा क्या किया?" वीनस ने आश्चर्य से वेगा की ओर देखते हुए पूछा।

“मुझसे प्यार।” वेगा ने वीनस के पास आते हुए कहा- “और तुम्हारे प्यार के लिये, मैं किसी भी तरह का कार्टून बनने के लिये तैयार हूं?"

“अरे ओ 5 किलोमीटर क्षेत्रफल वाले राज्य के युवराज, सुबह-सुबह ज्यादा रोमांटिक होने का नाटक मत करो अब इस ड्रेस के ऊपर कोई कपड़ा डालो और मेरे साथ जॉगिंग पर चलो, मुझे देखना है कि दौड़ने भागने पर यह ड्रेस कितना आरामदायक है?"

“धत् तेरे की...पूरे मूड का सत्यानाश कर दिया।" वेगा ने चिढ़ते हुए कहा।

अब वेगा और वीनस ने उस ड्रेस के ऊपर ही एक टी. शर्ट और ट्राडजर डाला और मास्क को जेब में रख, सोसाइटी के बाहर वाले पार्क में आ गये।

उस पार्क में बहुत से लोग पहले से जॉगिंग या एक्सरसाइज कर रहे थे। वेगा और वीनस भी उसी भीड़ में शामिल हो गये।

सुबह का मौसम काफी सुहाना लग रहा था। चारो ओर पंछी चहचहा रहे थे, जिनकी बोली वीनस को बहुत भली महसूस हो रही थी।

तभी एक चिड़िया की तेज आवाज सुन वीनस आश्चर्य से इधर-उधर देखने लगी।

उसे इस प्रकार चारो ओर देखते देख वेगा से रहा ना गया, वह पूछ बैठा- “क्या हुआ वीनस? कोई परेशानी है क्या?"

“तुरंत किसी पेड़ की ओट में जाकर, अपने सुपर हीरो का अवतार धारण कर लो कोई अंजाना खतरा हमारे आसपास मंडरा रहा है?" वीनस ने कहा और स्वयं एक पत्थर की ओट में आ गई।

वीनस की बात सुन वेगा भी एक पेड़ के पीछे की ओर भागा। वेगा ने अपनी टी शर्ट और ट्राउजर को उतार कर वहीं पेड़ के पास फेंका और पेड़ की ओट से बाहर आ गया।

तब तक वीनस भी चट्टान के पीछे से बाहर आ गई थी और उसी की ओर देख रही थी। पार्क में सबकुछ पहले की ही तरह था, पर अब सभी लोग उन्हें आश्चर्य से देख रहे थे।

“यह सब हमें घूर-चूर कर क्यों देख रहे हैं? कहीं यह हमें ही तो खतरा नहीं समझ रहे?" वेगा ने धीमी आवाज में फुसफुसाकर वीनस से कहा।

पर वीनस ने वेगा को चुप रहने का इशारा किया और फिर से चिड़ियों की आवाजें सुनने लगी।

तभी वीनस के सामने, पार्क के बीचो बीच में एक नीली ड्रेस पहने, एक अंतरिक्ष मानव खड़ा दिखाई दिया, जिसकी ड्रेस पर A7 लिखा था, वह एनम ही था, जिसके पास बहुशरीर शक्ति थी और जिसने एलनिको के साथ मिलकर धरा और मयूर को हराया था।

वीनस के देखते ही देखते एनम के शरीर से सैकड़ों शरीर निकलकर पूरे पार्क में फैल गये। अब पार्क में हर ओर सिर्फ एनम ही एनम दिखाई दे रहे थे।

पार्क में घूम रहे सभी लोग घबराकर, उस एक जैसे बहुत से एनम को देख रहे थे। तभी वेगा, उस पहले वाले एनम के सामने आ गया।

“कौन हो तुम? और क्या चाहिये तुम्हें?” वेगा ने तेज आवाज में एनम से पूछा।

"हम यहां बस तुम्हारे हाथ में बंधी वह घड़ी लेने आये हैं, अगर तुम वह घड़ी चुपचाप से मेरे हवाले कर देते हो, हम बिना किसी को नुकसान पहुंचाये, यहां से चले जायेंगे, पर अगर तुमने वह घड़ी हमारे हवाले नहीं की तो यहां मौजूद सभी लोगों की मौत के सिर्फ तुम जिम्मेदार होगे?” एनम ने एक प्रकार की धमकी देते हुए कहा।

“यह तो यहां मेरे पीछे ही आये हैं, इसका मतलब किसी प्रकार से इन्हें इस घड़ी का रहस्य पता चल गया है?" वेगा ने मन ही मन कहा- “यह अंतरिक्ष जीव, पिछले वाले समुद्री जीवों से ज्यादा खतरनाक लग रहा है, फिलहाल इससे बचकर रहना होगा।"

यह सोच वेगा ने वीनस की ओर एक बार देखा और फिर एनम के आगे तनकर खड़ा होते हुए बोला- “तुम्हें क्या लगता है? कि तुम मुझसे ऐसे यह घड़ी मांगोगे और मैं तुम्हें दे दूंगा। ऐसे टोपी वाले जादूगर मैंने बहुत देखे हैं...तुम मुझे इस जादू से डरा नहीं सकते। रुको मैं तुम्हें दिखाता हूं कि जादू कैसा होता है?"

वेगा ने आखिरी के शब्द बहुत तेज आवाज में कहे। वेगा की आवाज इतनी तेज थी कि लगभग पूरे पार्क में गूंज गई।

इसी के साथ वेगा के शरीर से, एनम से भी ज्यादा वेगा निकले और हर एनम के सामने जाकर खड़े हो गये।

दरअसल यह वेगा के द्वारा किया गया, ध्वनि सम्मोहन था, यह सम्मोहन वेगा की आवाज के साथ फैलता था, यानि की जितने लोगों तक वेगा की आवाज सुनाई देती, उतने लोगों को वही दिखाई देता, जो वेगा उन्हें दिखाना चाहता।

एनम यह देखकर हैरान हो गया। उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या वेगा के पास भी उसी की तरह की कोई शक्ति है?

स्वयं वीनस भी वेगा की इस शक्ति को देख हैरान थी, क्यों कि उसे भी वेगा की किसी ऐसी शक्ति के बारे में नहीं पता था?

तभी वेगा को पार्क में एक और अंतरिक्ष का जीव दिखाई दिया, जिसकी ड्रेस पर A4 लिखा था। यह रुफो था, जिसके पास अपने शरीर को रबर की तरह लचीला बना लेने की शक्ति थी।

इससे पहले कि वेगा कुछ समझ पाता, कि रुफो ने अपने हाथों को लंबा करके, वेगा के सभी शरीरों को पकड़ने की कोशिश की, पर रुफो का हाथ, वेगा के सभी शरीरों के पार निकल गया।

चूंकि उनमें से एक भी शरीर असली नहीं था, इसलिये रुफो, वेगा के किसी भी शरीर को पकड़ नहीं पाया।

तभी वेगा की घड़ी से वृष राशि के प्रतीक के रुप में एक विशाल बैल निकला और उसने रुफो को एक जोरदार टक्कर मार दी।

रुफो का सारा ध्यान वेगा की ओर था, इसलिये वह बैल की टक्कर से बच नहीं पाया। बैल की टक्कर इतनी बलशाली थी कि रुफो कुछ पलों के लिये बेहोश सा हो गया।

तभी वीनस को अपना दम थोड़ा घुटता हुआ सा महसूस हुआ। वीनस ने चारो ओर देखा, इस समय पार्क में मौजूद हर व्यक्ति अपना सीना पकड़कर हांफ रहा था।

अब वीनस को हवा में उड़ रहा एक और नीला जीव दिखाई दिया, जिसके सीने पर बने गोले में A1 लिखा था। यह एलनिको था, जिसके पास चुंबकत्व शक्ति थी।

इसी शक्ति के काले कणों के माध्यम से, एलनिको ने धरा और मयूर को वश में किया था।

एलनिको के हाथ से इस समय भी काले रंग के कण निकलकर हवा में फैल रहे थे। यही काले कण, सभी की साँस में बाधा उत्पन्न कर रहे थे।

यह देख वीनस ने किसी प्रकार से अपने मुंह से एक तेज सीटी निकाली, वीनस की सीटी की आवाज सुनकर, हवा में उड़ रही बहुत सी चिड़ियों और कौओं ने एलनिको पर हमला बोल दिया।

एलनि को इस विचित्र हमले से घबरा गया। कुछ देर तो उसे समझ ही नहीं आया कि यह क्या हुआ? पर जैसे ही एलनि को संभला, उसने अपने पर आक्रमण कर रहे सभी जीवों के ऊपर भी काले कणों का हमला कर दिया।

तभी वीनस ने अपने पास मौजूद एक बड़े से लकड़ी के डंडे को खींचकर एलनिको पर मार दिया।

लकड़ी का डंडा सीधा जाकर एलनि को के सिर से टकराया। यह देख एलनिको ने गुस्साकर, वीनस पर चुंबकीय तरंगों का वार कर दिया।

एलनिको के हाथ से चुंबकीय तरंगें निकलीं और उन तरंगों ने वीनस के पूरे शरीर को एक तीव्र चुंबक में बदल दिया।

ऐसा करते ही वीनस का शरीर हवा में खिंचकर, पार्क में मौजूद एक लोहे के खंभे से चिपक गया। अब वीनस किसी भी तरह से स्वयं को उस खंभे से छुड़ा नहीं पा रही थी।

उधर वेगा के माया शरीर अब गायब हो गये थे। अब वेगा की ओर एलनिको, एनम और रुफो तीनों एक साथ बढ़ रहे थे।

तभी वेगा की घड़ी से एक बड़ा सा बिच्छू निकलकर बाहर आ गया और बाहर निकलते ही उसने सभी अंतरिक्ष के जीवों पर अपने डंक से हमला कर दिया।

बिच्छू के डंक उसके शरीर से निकल-निकल कर, एनम के अनगिनत शरीरों से जा टकराये। इसी के साथ एनम के सभी माया रुप गायब हो गये।

बिच्छू का एक डंक असली एनम से भी जा टकराया, एनम जमीन पर गिरकर, बिच्छू के जहर के कारण तड़पने लगा। अब बिच्छू अपना कार्य करके गायब हो गया।

उधर रुफो को तब तक होश आ गया था, रुफो ने इस बार अपने हाथ को लंबा करके वेगा के पूरे शरीर को लपेट लिया और फिर अपने हाथों को तेजी से खींचकर वेगा को किसी लटू की भांति नचा दिया।

इतनी तेज नाचने की वजह से वेगा अपने दिमाग को कुछ देर के लिये कंट्रोल नहीं कर पाया और नाचते-नाचते जमीन पर गिर पड़ा।

अब एलनिको ने वेगा के ऊपर भी अपने काले कणों का हमला कर दिया। काले कणों ने वेगा के पूरे चेहरे को ढक लिया।

वेगा अब उन काले कणों के नीचे तड़पने लगा था, यह देखकर वीनस छटपटा रही थी, पर खंभे से चिपके होने के कारण वह कुछ कर नहीं पा रही थी।

अब काले कणों ने वेगा की घड़ी को भी पूरी तरह से ढक लिया, जिससे घड़ी से कोई नया कण नहीं निकल पा रहा था।

इस समय वेगा और वीनस भी पार्क में मौजूद, साधारण व्यक्तियों की तरह तड़प रहे थे। किसी के भी पास बचाव का कोई तरीका नजर नहीं आ रहा था।

तभी हवा में एक बड़ा सा ऊर्जा द्वार बन गया और उस ऊर्जा द्वार से युगाका व कलाट निकलकर बाहर आ गये।

युगाका ने ऊर्जा द्वार से बाहर निकलते ही वेगा को जमीन पर पड़ा, तड़पते हुए देखा। यह दृश्य देखते ही मानों युगाका का खून खौल गया।

युगाका ने एक तेज हुंकार भरी, उसकी हुंकार सुनते ही पार्क में मौजूद कुछ पेड़ों ने अपनी शाखाएं बड़ी करके रुफो के चारो ओर झाड़ियों का एक गोला बन दिया।

रुफो उस गोले में इस प्रकार जकड़ गया कि रुफो अपने शरीर का कोई अंग बड़ा करके बाहर नहीं निकल सकता था।

अब सभी पेड़ की पत्तियों ने पार्क में मौजूद सभी काले कणों को अपने अंदर खींच लिया। इतना करने के बाद युगाका की नजर हवा में खड़े एलनिको की ओर गई।

उधर कलाट के हाथों से निकली ऊष्मा ने वीनस को खंभे से छुड़ा दिया था। अब वेगा, वीनस और कलाट एक स्थान पर खड़े होकर युगाका का क्रोध देख रहे थे।

तभी एलनिको ने चुंबक शक्ति और काले कणों का वार एक साथ युगाका पर कर दिया। यह देख युगाका, एक विशाल वृक्ष मानव में परिवर्तित हो गया।

“तुम मूर्ख हो एलनिको, जो मुझ पर चुंबक की शक्ति का वार कर रहे हो, भला कभी लकड़ी पर भी चुंबक का असर होता है।” युगाका ने गरजते हुए कहा- “और तुम इन काले कणों से मेरी श्वांस नली को बंद करना चाहते हो, तो मैं तुम्हें बता दूं कि पेड़ अपने शरीर के हर भाग से साँस ले सकते हैं। तो इस प्रकार तुम्हारे दोनों वार विफल हो गये। अब मेरी बारी है। मेरे भाई पर प्रहार करने का दंड भुगतने के लिये तैयार हो जाओ।" यह कहकर युगाका ने अपने दोनों हाथों को एलनिको की ओर कर दिया।

युगाका के हाथ एक नुकीले लकड़ी के भाले के समान बन गये और लंबे होते हुए एलनिको के शरीर के
आरपार हो गये। एक सेकेण्ड में ही एलनिको का शरीर मरकर हवा में झूलने लगा।

उधर युगाका का ध्यान एलनिको की ओर देख एनम ने अपने शरीर में घुसे बिच्छू के काँटे को बाहर निकाला और इससे पहले कि किसी का ध्यान उनकी ओर जाता, वह लकड़ी के गोले में बंद रुफो को लेकर हवा में उड़ गया।

युगाका ने एलनिको के मृत शरीर को जमीन पर पटक दिया और अपने असली रुप में आ गया।

“अरे, इसके दोनों साथी कहां गये?" वीनस ने चारो ओर देखते हुए कहा।

"लगता है भाई से डरकर भाग गये।" वेगा ने अपने मास्क को अपने चेहरे पर एडजेस्ट करते हुए कहा- “अब इससे पहले कि मीडिया वाले आकर सबका इंटरव्यू लेने लगें, हमें तुरंत यहां से अपने कमरे पर पहुंचना होगा।

वेगा की बात सुनकर कलाट ने अपने चारो ओर खड़े लोगों को देखा और तुरंत ऊर्जा का द्वार बनाकर, सभी को लेकर वहां से गायब हो गया।


जारी
रहेगा_____✍️
Nice update....
 
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