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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

H E Y W I Z Z A R D

Devil 😈 calls me DAD
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# -2.

23 दिसम्बर 2001, रविवार 14:15; “सुप्रीम” “

अरे यार! हम इतनी देर से आपस में बातें कर रहें हैं।“ क्रिस्टी ने हल्के से अपने माथे पर चपत लगाते हुए कहा – “पर मैंने तुमसे अभी तक यह नहीं पूछा, कि तुम्हारे ब्वॉयफ्रेंड का क्या हुआ? जो कॉलेज में तुमको चुपके-चुपके लेटर लिखा करता था ।“

“छोड़ो यार!“ लॉरेन ने थोड़ा दुखी स्वर में कहा - “तुमने भी क्या याद दिला दिया ?“

“क्या हुआ? वो तुझे छोड़कर भाग गया क्या ?“ क्रिस्टी ने मजाकिया अंदाज में बोला ।

“भाग कर कहां जाएगा ?“ लॉरेन ने गहरी साँस भरते हुए जवाब दिया - “है तो अभी भी मेरे साथ, और वो भी इसी शिप पर।“

“इसी शिप पर!“ क्रिस्टी ने हवा में हाथ नचाते हुए शायराना अंदाज में कहा - “अरे वाह! और ये तू सबसे बाद में बता रही है। अच्छा छोड़! ये बता, तू उससे मुझे कब मिलवा रही है।“

“क्या खाक मिलवा रही हूं! लॉरेन की आवाज में अभी भी दुख भरा था - “उसने इस शिप पर, मुझसे तक से तो मिलने से मना कर रखा है, फिर तुझे उससे कैसे मिलवाऊं?“

“ये क्या बात हुई?“ क्रिस्टी ने चहककर कहा- “अरे वो तेरा ब्वॉयफ्रेंड है, या कोई जासूस! जो वह तुझसे भी नहीं मिलना चाहता।“

“वह कह रहा था कि उसके कुछ दुश्मन भी इसी शिप पर हैं, जो कहीं मुझे उससे मिलते देखकर मेरे पीछे ना पड़ जाएं। लॉरेन ने कहा-
“इसलिए उसने शिप पर मुझसे मिलने से मना कर रखा है।“

“अच्छा मिलवाना छोड़ो । उसकी कोई फोटो तो मुझे दिखा सकती हो। आखिर मैं भी तो देखूं, कौन है वह सूरमा जो मेरी सहेली के रातों की नींद उड़ाए है।“ क्रिस्टी ने लॉरेन के चेहरे के पास, हवा में हाथ हिलाते हुए कुछ मजा किया अंदाज में कहा ।

“हां फोटो तो दिखा सकती हूं।“ लॉरेन ने स्वीकृति से सिर हिलाते हुए कहा - “मगर एक शर्त है, तुम और किसी से कुछ नहीं बताओगी ।“

“अरे यार! मेरा इस शिप पर और कोई जानने वाला है ही नहीं । फिर भला मैं किसे बताऊंगी । लेकिन अगर तू नहीं मानती है, तोले..... मैं प्रॉमिस करती हूं।“ क्रिस्टी ने बाकायदा चुटकी से गला पकड़ते हुए प्रॉमिस करने वाले अंदाज में कहा – “कि किसी से भी नहीं बताऊंगी ।“

“फिर ठीक है। मैं तुम्हें कल उसकी फोटो जरूर दिखाऊंगी ।“ लॉरेन ने हामी भरते हुए कहा ।

“अच्छा ये बता कि तेरे उन दोनों शौक का क्या हुआ?“ क्रिस्टी ने एक के बाद तुरंत दूसरे सवाल का गोला दागा - “आज भी नयी-नयी भाषाएं सीख रही है या नहीं?“

“मैं जिंदगी में सब कुछ भूल जाऊं, पर अपने शौक को नहीं भूलती ।“ लॉरेन ने पूर्ण आत्मविश्वास भरे लहजे में कहा- “भाषाएं तो मैं आज भी सीख रही हूं। बल्कि यह कहा जाए, कि अब मुझे कुछ भाषाओं, जैसे फ्रेंच, उर्दू आदि में तो महारत हासिल हो गई है। बाकी रही बात दूसरा शौक डांस करने की । तो मैं आज भी वह कर रही हूं। बल्कि उसी की वजह से तो मैं आज इस शिप पर हूं।“

“मैं कुछ समझी नहीं !“ क्रिस्टी ने ना समझने वाले भाव से लॉरेन की तरफ देखते हुए कहा । “

दरअसल कालेज से निकलने के बाद मैंने अपने इस शौक को प्रोफेशन बनाने के लिए सोचा ।“ लॉरेन ने अपनी बात को आगे बढ़ाया - “और फ्रांस की सबसे फेमस ’ड्रीम्स डांस ग्रुप’ में अपना बायो डाटा भेजा । यहां पर मेरी किस्मत अच्छी रही, क्यों कि उस डांस ग्रुप की, एक मुख्य डांसर की, एक एक्सीडेंट में मौत हो जाने से उस समय वहां पर एक जगह भी खाली थी । उन्हों ने मेरा बायो डाटा देखा और मुझे डांस टेस्ट के लिए बुलवा लिया । जिसमें मेरे अच्छे परफॉर्मेंस के कारण मुझे चुन लिया गया। उसी डांस ग्रुप को इस शिप पर डांस प्रोग्राम के लिए रखा गया है। इसलिए मैं उस ग्रुप के साथ आज यहां पर हूं।“

“एक मिनट! ड्रीम्स डांस ग्रुप .......।“ क्रिस्टी ने अपने सीधे हाथ की तर्जनी उंगली से, अपनी दांई कनपटी पर धीरे-धीरे चोट करते हुए, सोचने वाले अंदाज में कहा - “ कहीं ये जेनिथ वाला डांस ग्रुप तो नहीं ?“

“हाँ ! ..... बिल्कुल ठीक। मैं उसी ग्रुप में इस समय परफॉर्म कर रही हूं और जेनिथ तो इस समय मेरी सबसे खास दोस्त है। यहां तक कि मैं और वो इस समय शिप में एक ही रूम में रुके हुए हैं।“

“अच्छा छोड़ो मेरी बातों को।“ लॉरेन ने कुछ सेकेण्ड रुककर फिर बोलना शुरू किया - “ये बताओ तुम मेरे बारे में ही पूछती रहोगी या फिर कुछ अपने बारे में भी बताओगी । तुम सुनाओ तुम आजकल क्या कर रही हो ? तुम्हें भी तो जिमनास्टिक का बहुत शौक था । कॉलेज वाले सारे दोस्त तुम्हें “रबर की गुड़िया “ कहा करते थे।“

“कहां यार!“ क्रिस्टी ने निराशा भरे स्वर में कहा - “कॉलेज से निकलने के बाद तो डैड ने मुझे ’कंप्यूटर सॉफ्टवेयर’ के बिजनेस में फंसा दिया और उसमें मैं ऐसा फंसी, कि मुझे अपना शौक पूरा करने का टाइम ही नहीं मिला और जब से डैड एक्सपायर हो गए, तब से तो मेरे पास समय और भी ना बचा ।“

“सॉरी यार! मुझे नहीं पता था कि तेरे डैड ........। लेकिन यह बता कि तेरे डैड तो अभी अच्छे भले थे, फिर वह कैसे एक्सपायर हो गए?“ लॉरेन ने क्रिस्टी के दुख में दुखी होते हुए कहा ।

“दरअसल उनकी मौत स्वाभाविक नहीं थी ।“ कहते-कहते एकाएक क्रिस्टी का चेहरा लावे की तरह धधकने लगा - “बल्कि उनका मर्डर हुआ था ।“

“मर्डर!“ लॉरेन के शब्दों में आश्चर्य था ।

“अरे छोड़ो यार!“ क्रिस्टी ने सामान्य होते हुए, मुस्कुराने की एक असफल कोशिश करते हुए कहा- “किसी और टॉपिक पर बात करते हैं।“

“ना बाबा ना ।“ लॉरेन ने घड़ी पर निगाह डालते हुए, कुर्सी से उठते हुए कहा- “समय बहुत हो रहा है। आपस में बातें करते-करते समय का तो पता ही नहीं चला । शाम को हम लोगों का इस शिप पर पहला शो है। अभी शो के लिए हमें काफी तैयारियां भी करनी है। जेनिथ भी मेरी राह देख रही होगी, मुझे अब चलना चाहिए।“ यह कहते हुए उसने पास में रखे, उस कॉफी के बिल पर साइन कर अपना रुम नंo डाल दिया, जो कुछ देर पहले उसके इशारे पर वेटर वहां रख गया था । और फिर क्रिस्टी को “बाय “ करती हुई, रेस्टोरेंट के दरवाजे से बाहर निकल गयी । क्रिस्टी उसे अंत तक देखती रही, जब तक कि वह उसकी नजरों से ओझल ना हो गयी । फिर धीरे से वह भी उठकर दरवाजे की तरफ चल दी ।

अगर वह पीछे पलट कर देखती, तो उसे वह दो आंखें जरूर दिखाई दे जातीं, जो बहुत देर से खूनी नजरों से, लगातार उन पर और उनकी बातों पर नजर रखे थीं । उसके जाने के बाद धीरे से वह साया भी उठा और रेस्टोरेंट के बाहर निकल गया ।


जारी रहेगा….... :writing:
Kon hai jo cristy ko khuni najaro se dekh rha hai
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Raj_sharma

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First update padhke lag raha story bohut interesting honewali hai
Aur yeh story sayad foreign countries upar likhi gayi hai lekin kuch keh nahi sakte age kya hone wala hai
Padhna jari rahega :book:
Nahi bhai, foreign country per nahi balki isme desi, and videsi dono tarah ke character hain, 10 update ke aas paas tak buildup poora ho jayega and aapko kahani acche se samajh me aane lag jayegi, kyu ki ye story kaafi badi hai, aur multiple star and multivers se judi hai, to iska plot kaafi vistrut hai, iss liye suru me speed slow hai, and details jyada. Welcome to the story :thanks:
 

Raj_sharma

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Bahut hi zabardast update he Raj_sharma Bhai

Ab shalaka aur jems Ujjain Baba Mahakal ke pass aa rahe he.......

Aaryan aur Aakriti ke bete ko dhundhna he ab in dono ko............

Agali update ki pratiksha rahegi Bhai

Keep rocking
Bilkul theek kaha, lekin kya wo Aryan ke bete ko dhoondh payenge? Ye dekhne wali baat hogi? Sath bane rahiye, thank you very much for your valuable review and support bhai :thanks:
 

Raj_sharma

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dhparikh

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#188.

दिव्य बालक:
(18.01.02, शुक्रवार, आर्केडिया यान, ट्रांस अंटार्कटिक माउन्टेन, अंटार्कटिका)

शलाका को युद्ध के बारे में पता चल चुका था, वह जानती थी कि यदि युद्ध हुआ, तो उसका परिणाम किसी भी पक्ष में जा सकता है और ऐसी स्थिति में पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीवों के लिये खतरनाक था।

अतः शलाका ने सबसे पहले अपने सभी भाइयों को सुरक्षित करते हुए, अपने पिता के घर एरियन आकाश -गंगा में भेज दिया था। अब आर्केडिया यान पर सिर्फ शलाका और जेम्स ही बचे थे।

जेम्स को भी शलाका ने आर्केडिया के कंट्रोल्स सीखने के कार्य पर लगा दिया था। अतः अब शलाका थोड़ा निश्चिंत लगने लगी थी।

चूंकि आर्केडिया पिछले 5,000 वर्षों से अटार्कटिका की बर्फ के नीचे दबा था, इसलिये शलाका ने पूरी रात जागकर आर्केडिया के सभी तकनीकी प्रणाली को दुरुस्त कर लिया था।

अब शलाका को आर्यन और आकृति के पुत्र की याद आ गई, जो कि अष्टकोण में बंद भारत के किसी अवन्ती राज्य के, उज्जैनी नगर में जमीन के नीचे सो रहा था।

शलाका कुछ देर आराम करके, अब आर्यन के पुत्र की खोज में जाना चाहती थी। इसलिये शलाका ने एक नजर जेम्स के कमरे पर मारी।

इस समय जेम्स भी सो रहा था। उसे सोते देख शलाका अपने कमरे में आ गई और बिस्तर पर लेट गई।

तभी शलाका की आँखों के आगे आर्यन के पुत्र की मोहक छवि नजर आने लगी। ना जाने कितनी ही देर तक शलाका उस पुत्र के ख्यालों में खोई रही।

अंततः उसे नींद आ ही गई। कुछ ही देर में शलाका गहरी नींद के घोड़ों पर सवार हो, सपनों की दुनिया में चली गई। अब आर्केडिया में चारो ओर सन्नाटा छा गया था।

लगभग आधे घंटे के बाद शलाका के कमरे का दरवाजा बिना आवाज के धीरे से खुला और एक साया दबे पाँव अंदर दाखिल हुआ।

कमरे में ज्यादा उजाला नहीं था, पर फिर भी उस साये के चेहरे पर एक दबी मुस्कान दिखाई दे रही थी।
वह साया काफी देर तक ऐसे ही खड़ा, सो रही शलाका को देखता रहा, फिर वह दबे पाँव कमरे के अंदर आ गया।

उस साये के चलने पर बिल्कुल भी आवाज नहीं हो रही थी। अब वह साया धीरे से शलाका के सामने रखी एक कुर्सी पर बैठ गया।

अब उस साये के हाथ में एक कागज और एक पेन दिखाई देने लगा था। उस साये के हाथ अब कागज पर तेजी से चलने लगे। शायद वह कुछ चित्रकारी कर रहा था।

काफी देर तक चित्रकारी करने के बाद, उस बेखौफ साये ने उस कागज को शलाका के सिरहाने रख दिया।

कागज रखने के बाद उस साये ने एक बार फिर प्यार भरी नजरों से शलाका को देखा और वापस उसी प्रकार कमरे से निकल गया, जिस प्रकार वह अंदर आया था।

इस घटना के लगभग 5 घंटे के बाद शलाका की आँख खुली। अब उसकी नींद पूरी हो गई थी। शलाका बिस्तर से उठी और एक जोर की अंगड़ाई ली। नींद पूरी हो जाने के बाद, अब उसे काफी फ्रेश महसूस होने लगा था।

तभी शलाका की नजर, अपने सिरहाने रखे उस कागज के टुकड़े पर पड़ी। शलाका ने आश्चर्य से उस कागज के टुकड़े को देखा और फिर आगे बढ़कर उसे उठा लिया।

पर जैसे ही शलाका की नजर उस पर बनी आकृति पर गई, वह आश्चर्य से भर उठी।

कागज के टुकड़े पर, बहुत ही सुंदर 3 डी के अक्षरों में अंग्रेजी भाषा का S लिखा था, उस S के आगे एक सुंदर सा डिजाइन किया हुआ दिल बना था, जिसके चारो ओर से किरणें निकल रहीं थीं। उस कागज को देख शलाका की आँखें सिकुड़ गईं।

“यह कागज का टुकड़ा मेरे कमरे में कैसे आया?" शलाका ने दिमाग लगाते हुए सोचना शुरु कर दिया- “कहीं, मेरे सोते समय जेम्स तो नहीं आया था मेरे कमरे में?...नहीं-नहीं जेम्स की इतनी हिम्मत नहीं होगी। तो फिर और कौन हो सकता है? और सबसे बड़ी बात की वह आर्केडिया के अंदर घुसा कैसे? और...और यह S अक्षर तो मेरे नाम का पहला अक्षर है, जो कि....काफी प्यार से लिखा गया लग रहा है? इसके आगे बना दिल भी प्यार का ही संकेत दे रहा है।...पर ऐसा कौन हो सकता है?"

काफी देर तक सोचते रहने के बाद भी जब शलाका को उस कागज के टुकड़े का रहस्य समझ में नहीं आया, तो वह उसे लेकर जेम्स के कमरे की ओर बढ़ गई।

जेम्स इस समय अपने कमरे में नहीं था। इसलिये शलाका आर्केडिया के ट्रेनिंग रुम की ओर बढ़ गई।

जेम्स ट्रेनिंग रुम में ही था, वह अब भी पूरी तन्मयता से वीडियो गेम के द्वारा आर्केडिया के कंट्रोल्स को सीखने की कोशिश कर रहा था। शलाका को ट्रेनिंग रुम में आता देख जेम्स ने गेम को 'फ्रीज' कर दिया।

"तो कैसी चल रही है तुम्हारी ट्रेनिंग?” शलाका ने जेम्स की आँखों में झांकते हुए पूछा।

“बहुत अच्छी...मुझे लग रहा है कि मैं जल्दी ही इसे पूरी तरह से चलाना सीख लूंगा।” जेम्स ने मुस्कुराते हुए कहा।

“वेरी गुड।” शलाका ने जेम्स की तारीफ करते हुए कहा- “मुझे पहले ही पता था कि तुम इसे जल्दी ही सीख लोगे। अच्छा जेम्स, क्या तुम इस कागज के बारे में कुछ जानते हो?" शलाका ने जेम्स के चेहरे के सामने वह कागज का टुकड़ा, हवा में लहराते हुए पूछा।

जेम्स ने ध्यान से उस कागज के टुकड़े को देखा और फिर बोला- “अरे वाह! आपकी तो चित्रकारी भी अच्छी है।"

“यह मेरा बनाया हुआ नहीं है जेम्स।” शलाका ने ध्यान से जेम्स के चेहरे को पढ़ते हुए कहा।

"तो फिर यह जिसने भी बनाया है, उसकी चित्रकारी बहुत अच्छी है और इसने जो दिल के चारो ओर सूर्य की किरणें बनाई हैं, वह तो लाजवाब है।"

शलाका ने जेम्स की बात सुन एक बार फिर उस कागज के टुकड़े को देखा, जेम्स सही कह रहा था, दिल के चारो ओर सूर्य के प्रकाश को ही दर्शाया गया था।

“मैं सही सोच रही थी, जेम्स को इसके बारे में कुछ भी नहीं पता?” शलाका स्वयं को समझाते हुए सोच रही थी- “परंतु दिल पर बनी ये सूर्य की किरणें...कहीं सुयश तो नहीं.... नहीं-नहीं मैं भी क्या सोचने लगी? सुयश तो इस समय तिलिस्मा में है...वह भला यहां.. सुयश तो नहीं कैसे आ सकता है?....फिर...फिर और कौन ऐसा है? जो मुझे प्यार करता है और उसके बारे में मुझे भी नहीं पता है। लेकिन एक बात तो तय है कि वह जो भी है, बहुत हिम्मत वाला है, नहीं तो मेरे कमरे में प्रवेश करने की हिम्मत नहीं करता।”

“आप क्या सोचने लगीं?" तभी जेम्स ने शलाका को कुछ ना बोलते देख पूछ लिया।

“नही-नहीं...कुछ नहीं....मैं तो बस अपने भाइयों के बारे में सोच रही थी।” शलाका ने बात को बदलते हुए कहा- “अच्छा, अब तुम जल्दी से तैयार हो जाओ, हम लोग, कुछ ही देर में भारत जाने वाले हैं।"

“येऽऽऽ!” जेम्स खुशी से चीख उठा- “यानि कि मेरा पहला मिशन आज से ही शुरु होगा।"

“आज से नहीं, बल्कि अभी से...अब तुम जल्दी से तैयार हो जाओ। मैं तुम्हारे कमरे में लगभग 1 घंटे के बाद आती हूं।" यह कहकर शलाका जेम्स के कमरे से बाहर निकल गई। वह कागज का टुकड़ा अभी भी
शलाका के हाथ में था।

"लगता है कि मुझे अब आर्केडिया का सुरक्षा तंत्र शुरु करना पड़ेगा, जिससे आज जैसी कोई घटना ना घटने पाये।" यह सोच शलाका चलती हुई, अपने कमरे के एक किनारे गई और हवा में हाथ हिलाया।

उसके ऐसा करते ही हवा में एक बड़ा सा आयताकार डिब्बा प्रकट हुआ, उस डिब्बे का आकार किसी क्रिकेट की किट के समान था।

शलाका ने उस डिब्बे को खींचकर खोल दिया और उसमें मौजूद बहुत सारे इलेक्ट्रानिक यंत्रों को देखने लगी। अब उसने कुछ यंत्र उठाकर एक छोटे से बैग में रख लिये और उस डिब्बे को वापस से गायब
कर दिया।

अब शलाका ने अपने बैग में कुछ और जरुरत की चीजें डालीं। अब वह बैग भी शलाका की तरह से तैयार हो गया था।

आज का दिन शलाका के लिये आश्चर्य से भरा दिख रहा था। जो भी हो, पर आज की घटना ने शलाका का दिमाग हिला दिया था। बहरहाल लगभग 1 घंटे के बाद शलाका फिर से जेम्स के कमरे में पहुंची।

शलाका का तैयार किया हुआ बैग इस समय शलाका के हाथ में था। इस समय जेम्स पूरी तरह से तैयार खड़ा था। उसने आगे बढ़कर शलाका के हाथ से बैग ले लिया।

शलाका ने जेम्स को अपने पीछे आने का इशारा किया और स्वयं एक दिशा की ओर चल दी।

जेम्स शलाका के साथ-साथ चलने लगा। शलाका जेम्स को लेकर एक विशाल कमरे में पहुंच गई, पर जेम्स को इस कमरे में कुछ भी दिखाई नहीं दिया। वह समझ ही नहीं पा रहा था कि शलाका इस कमरे में क्यों आई है? लेकिन थोड़ी ही देर बाद जेम्स को अपना जवाब मिलना शुरु हो गया।

शलाका कमरे के बीचो-बीच में पहुंची और उसने अपने दोनों हाथ ऊपर उठा दिये।

अब शलाका के हाथों में नीले रंग का एक ऊर्जा जाल आ गया। उस ऊर्जा जाल को देखकर महसूस हो रहा था कि शलाका ने अपने हाथों में, कोई हल्के नीले रंग के पारदर्शी दस्ताने पहने हों।

शलाका ने अब अपने दस्तानों से, हवा में एक जगह अपनी उंगली दबाई। शलाका के ऐसा करते ही पूरा कमरा एक दूधिया रोशनी से भर गया और जिस स्थान पर शलाका खड़ी थी, उस स्थान पर 2 कुर्सियां प्रकट हो गईं।

जेम्स आश्चर्य भरी नजरों से इस अद्भुत तकनीक को देख रहा था। शलाका अब उनमें से एक कुर्सी पर बैठ गई और जेम्स को दूसरी कुर्सी पर बैठने का इशारा किया।

शलाका का इशारा पाकर जेम्स दूसरी कुर्सी पर आकर बैठ गया। जेम्स अब स्वयं को किसी ‘एस्ट्रोनॉट' से कम नहीं समझ रहा था।

अब शलाका के सामने एक बड़ी सी चमकीली स्क्रीन प्रकट हो गई। शलाका ने उस स्क्रीन पर लगे एक लाल रंग के बटन को दबा दिया।

शलाका के ऐसा करते ही हवा में किसी लड़की का विशालकाय चेहरा उभरा, जो कि देखने पर ही कोई कम्प्यूटर प्रोग्राम के समान प्रतीत हो रही थी।

“शलाका को आर्ची का प्रणाम।” उस कम्प्यूटर वाली लड़की ने कहा- “इस बार तो बहुत लंबे अंतराल के बाद आपने मुझे जगाया।"

"हां आर्ची...इसलिये सबसे पहले आर्केडिया यान के सारे कंट्रोल्स चेक करो।” शलाका ने कहा।

“जो आज्ञा।” यह कहकर आर्ची, आर्केडिया के सारे कंट्रोल्स को चेक करने लगी।

"आर्केडिया के सारे कंट्रोल्स सही काम कर रहे हैं। कुछ देर के बाद आर्ची ने कहा- “अब मैं आर्केडिया का सुरक्षा तंत्र शुरु कर देती हूं।"

यह कहकर आर्ची ने पता नहीं क्या किया? कि पूरे यान में कुछ देर तक खट-पट की आवाजें आती रहीं।

“सुरक्षा तंत्र भी शुरु हो चुका है। अब बताइये कि मुझे और क्या करना है?" आर्ची ने कहा।

“सबसे पहले इस पृथ्वी पर, हवा में घूम रहे सभी सिग्नल्स का ठीक से अध्ययन करो और पृथ्वी का सारा लेटेस्ट डेटा अपने प्रोग्राम में डाल लो, जिससे तुम्हारे पास की सभी जानकारियां अपडेट हो जायें। हां... पृथ्वी की बाहरी कक्षा में घूम रहे सभी सेटेलाइट को स्कैन करना मत भूलना।” शलाका ने आर्ची को अगला आदेश दिया।

यह आदेश सुन जेम्स की आँखें खुली की खुली रह गईं। वह पृथ्वी पर अगले 50 वर्षों तक भी ऐसी तकनीक की कल्पना नहीं कर सकता था।

लगभग 10 मिनट के बाद फिर से आर्ची की आवाज उभरी- “पृथ्वी का सारा तकनीकी डेटा, मैंने अपने स्टोर में अपडेट कर लिया है।"

“ओ.के. तो अब सबसे पहले मुझे ये बताओ कि भारत में अवन्ती राज्य कहां है? मुझे उसके एक शहर उज्जैनी में जाना है।” शलाका ने कहा।

"भारत में अब राजाओं की परंपरा समाप्त हो चुकी है और अवन्ती राज्य का उज्जैनी शहर, अब उज्जैन नाम से विख्यात है, जो कि भारत के एक राज्य मध्य प्रदेश में स्थित है।" आर्ची ने कहा।

“अब मुझे ये बताओ कि तुम उज्जैन में कहां लैंड कर सकती हो?” शलाका ने कहा।


“उज्जैन शहर, म…देव के एक मंदिर महा…लेश्वर के लिये प्रसिद्ध है। महा…लेश्वर मंदिर के बगल एक रुद्र सागर नाम की झील है। वहां हम आसानी से अपना यान उतार सकते हैं। दूसरा विकल्प क्षिप्रा नदी का है, जो शहर से कुछ दूरी पर है।” आर्ची ने अपना कम्प्यूटर खंगालते हुए कहा।

“ठीक है तो पहले आर्केडिया को अदृश्य तरंगों से इस प्रकार अदृश्य कर दो कि कोई रेडार भी उसे ना ढूंढ पाये और फिर उज्जैन की ओर चलो और हां....जेम्स को अच्छी तरह से देख लो, यह आज से हमारे साथ काम करेगा, इसलिये आपातकाल को छोड़, अब तुम्हें इसके आदेश भी मानने पड़ेंगे।” शलाका ने आर्ची को आदेश देते हुए कहा।

"जो आज्ञा शलाका और आर्केडिया पर आपका स्वागत है जेम्स।" यह कहकर आर्ची ने आर्केडिया को अदृश्य किया और उसे अटलांटिक की बर्फ से निकालकर, भारत की ओर लेकर चल दी।

“यह यान तो ऑटोमेटिक है। फिर आप मुझे इसका कंट्रोल क्यों सिखा रहीं थीं?" जेम्स ने शलाका से पूछा।

“भले ही आज तुम्हें आर्केडिया को चलाना ना हो, पर उसे चलाना आना जरुरी है। हम एक कम्प्यूटर पर एक हद तक ही निर्भर हो सकते हैं।” शलाका ने जेम्स को समझाते हुए कहा।

"वैसे यह आर्केडिया कब तक भारत पहुंच जायेगा?" जेम्स ने शलाका से पूछा।

लेकिन इससे पहले कि शलाका कुछ जवाब दे पाती, यान में आर्ची की आवाज सुनाई दी- “हम कुछ ही देर में उज्जैन पहुंचने वाले हैं।"

"इतनी तेज स्पीड?” जेम्स तो आर्ची की बात सुन हैरान हो गया।

“जेम्स, तुम भूल रहे हो कि यह यान यहां से कई प्रकाशवर्ष दूर भी जाता है, ऐसे में अगर इसकी स्पीड इतनी तेज ना होती, तो यह भला उतनी दूर कैसे जा पाता।” शलाका ने जेम्स को समझाते हुए कहा- “लो अब यह इलेक्ट्रानिक यंत्र अपने गले के पास लगा लो।"

यह कहते हुए शलाका ने अपने बैग से 2 छोटे से इलेक्ट्रानिक यंत्र निकाले और उसमें से एक जेम्स की ओर बढ़ा दिया।

“यह कैसा यंत्र है?” जेम्स ने पूछा।

"इस यंत्र को गले से लगाने के बाद हमारा संपर्क हमेशा आर्ची से बना रहेगा और इस यंत्र की मदद से आर्ची, इस यान में रहकर भी, बहुत प्रकार से हमारी मदद कर सकती है।" अब शलाका जल्दी-जल्दी जेम्स को अष्टकोण और उस दिव्य बालक के बारे में बताने लगी।

कुछ ही देर में अदृश्य आर्केडिया, उज्जैन के रुद्र सागर में उतर गया। ना जाने कैसी तकनीक थी कि आर्केडिया के झील में उतरने के बाद भी पानी ऊपर नहीं उछला।


जारी रहेगा_____✍️
Nice update....
 

Raj_sharma

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Raj_sharma

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अच्छी स्टोरी हैं , बड़े समय बाद के अच्छा पढ़ने को मिला।
शुरुआत के दस अपडेट की समीक्षा।

सच बताऊँ तो कहानी पढ़ते-पढ़ते मज़ा आ रहा है। ऐसा लग रहा है जैसे कोई पुरानी सस्पेंस वाली नॉवेल पढ़ रहे हों जिसमें हर थोड़ी देर में कुछ नया हो जाता है। सबसे अच्छी बात ये लगी कि कहानी रुकी हुई नहीं लगती, लगातार कुछ ना कुछ चलता रहता है, इसलिए पढ़ते रहो तो आगे क्या होगा ये जानने का मन करता रहता है।

शिप वाला आइडिया मुझे बहुत अच्छा लगा। एक ही जगह पर इतने सारे लोग, सबके अपने राज, ऊपर से इंटरपोल वाली बात, फिर सिक्योरिटी का शक, इससे कहानी में अलग ही टेंशन बनी रहती है। और जॉनी वाला हिस्सा तो काफी मजेदार था, खासकर जब उसने भेष बदलकर रिकॉर्ड रूम में एंट्री ली। वो सीन पढ़कर लगा कि अब कुछ बड़ा होने वाला है।

शैफाली वाला कैरेक्टर भी बहुत अलग लगा। वो अंधी है लेकिन उसकी समझ बहुत तेज है, ये चीज कहानी को खास बनाती है। ऐसे कैरेक्टर कम मिलते हैं इसलिए वो याद रह जाता है। प्रोफेसर अल्बर्ट वाला सीन भी अच्छा लगा, वहाँ कहानी थोड़ी शांत हो जाती है तो पढ़ने में अच्छा लगता है।

हाँ एक चीज थोड़ी लगी कि कभी-कभी बहुत सारे कैरेक्टर एक साथ आ जाते हैं तो थोड़ा याद रखना पड़ता है कि कौन कौन है। और कुछ जगह डायलॉग थोड़े लंबे हो गए हैं, जैसे लोग असल में इतने साफ-साफ नहीं बोलते। अगर थोड़ा छोटा रखो तो और नेचुरल लगेगा।

बाकी स्टोरी में सस्पेंस अच्छा बन रहा है, खासकर अभी जो न्यू ईयर वाली रात का प्लान चल रहा है, उससे तो लग रहा है आगे जरूर बड़ा कांड होने वाला है। अभी तक पढ़कर ऐसा लग रहा है कि असली कहानी अब शुरू होने वाली है।

मेरे हिसाब से कहानी में दम है। पढ़ने का मन बना रहता है और यही सबसे बड़ी बात होती है। बस ऐसे ही आगे भी सस्पेंस बनाए रखो तो कहानी और मजेदार हो जाएगी।

Raj_sharma
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