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Fantasy विलासपुर राज्य ( क्रूर राजा और उसके राज्य की मजबूर औरतें )

Dear readers, kuch log chahte he ki me ye kahani hinglish me continue karu, aap sabhi ki kya ray he?


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नटखट कहानियां
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प्रकरण सूची

विनम्र निवेदन
बहुत सारे पाठक कहानी को पढ़ कर बिना लाइक और कमैंट्स किये ही चले जाते हैँ, इस बात से हम लेखकों को बहुत हतोत्साहित महसूस होता है, कृपया आप ऐसा ना करें | हमारी आपसे विनम्र विनती है, की कहानी पढ़िए, आनंद लीजिये, फिर अपने कीमती कमैंट्स ज़रूर कीजिये, हमें बताइये आपको क्या पसंद और क्या नापसंद है | पाठकों की पसंद हमारे लिए सर्वोपरि है | हमारी कहानी के आने वाले भागों में और हमारी आने वाली नई कहानियों में, पाठकों की पसंद का खास ध्यान रखा जायेगा | धन्यवाद | 🙏
 
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नटखट कहानियां
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चाँद आधा था, पर कमरे में पूरा उजाला,
वो आई, जैसे हवा ने बदन को छुआ लरजकर।
नज़रों की नमी में इक कशिश थी बेताबी की,
और उंगलियाँ काँप रही थीं इबादत की तरह।

उसने लिबास उतारा नहीं,
वो खुद ही धीरे-धीरे उतर गया,
जैसे आकाश से गिरती हो कोई दुआ,
या सज़दा बन जाए कोई प्यासा पल।

उसकी साँसें मेरे गले में उलझीं,
और मैंने लफ़्ज़ों को चूम लिया,
हर लफ़्ज़ में कोई दबी हुई आह थी,
हर चुम्बन में इक हज़ार रातों की चाह थी।

उसकी छाती पर जब होंठ रखे,
तो लगा जैसे वक्त रुक गया हो,
वो धड़कन नहीं थी,
वो अल्फ़ाज़ थे.. जिन्हें सिर्फ़ महसूस किया जा सकता था।

उसकी जांघों के बीच,
कोई जन्नत नहीं थी,
बल्कि एक ज्वाला थी,
जो खुदा को भी सुलगाने का हौसला रखती थी।

हम टूटे नहीं,
हम जुड़ते गए, हर इक थरथराहट में।
वो सिर्फ़ जिस्म नहीं थी,
वो उस रात की आग थी,
जिसमें मैं जलना चाहता था,
बिना राख हुए।

क्या बात है राजीव जी, बहुत खूब | मलिका फातिमा के हुस्न की तारीफ में आपने जो लिखा है, वह सच ही काबिल-ए-तारीफ़ है | आपका कलम कौशल लाजवाब है |
 

rajeev13

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क्या बात है राजीव जी, बहुत खूब | मलिका फातिमा के हुस्न की तारीफ में आपने जो लिखा है, वह सच ही काबिल-ए-तारीफ़ है | आपका कलम कौशल लाजवाब है |
आपकी कविता के सामने तो कुछ भी नहीं, आपकी कविता अगर ताज महल है तो ये किसी मकबरे के सामान!
 
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नटखट कहानियां
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भाग - 1 ( बादशाह कासिम का सवेरा )

साथियों, मै हाज़िर हूं आपके लिए कहानी का पहला भाग लेकर । तो चलिए मै आप सभी को ले चलता हूं एक रोमांचक सफर पर, विलासपुर नगर में, बादशाह कासिम के किले में। सुबह सुबह 6 बजे का वक्त है। पंछियों की धीमी धीमी आवाज़ सुबह का संदेश देने लगी है। बादशाह कासिम अपने शयनकक्ष में गहरी नींद में सोए हुए हैं। उनके बदन पर एक भी कपड़ा नहीं है। ज़ाहिर है, राजा जी सोते वक्त कपड़ों का बोझ क्यों ही झेलेंगे।


20250425-2011-image

अरे, यह मै क्या देख रहा हूं, बादशाह के शयनकक्ष में, 5 कोमलांगिनियों ( सुंदर स्त्रियों ) का आगमन होता है। चलिए उन खूबसूरत हसीनाओं के हुस्न से आपको रूबरू कराता हूं। पहली हसीना है बादशाह कासिम की बेगम, फातिमा जी। उम्र, 42, पर इनकी जवानी, इसके तो क्या कहने।


Malika-Fatima


एक सुंदर सी पोषक से, बेगम जी ने अपने फूल से कोमल बदन को ढक रखा है। एक लाल रंग का मखमली पेशवाज, और नीचे खूबसूरत चूड़ीदार पजामा, रानी जी के हुस्न के जलवों को, हमारी नज़रों से दूर किये बैठा है। होंठों पर लाली, बदन पर गहने, और चेहरे पर प्यारी सी मुस्कान लिए, रानी जी बादशाह के बिस्तर की ओर बढ़ी चली आ रही हैं। उनके साथ जो 4 सुंदरियां हैं, वे कौन हैं, आप यही सोच रहे होंगे। तो आपको बता दूं, वे चारों, बादशाह की दासियां हैं। जो बेगम फातिमा के पीछे, कदम से कदम मिला कर, बढ़ी चली आ रही हैं। सभी दसियों ने सुंदर सुंदर सलवार और कुरते पहने हुए हैं, होठों पर लाली है, बाल खुले हुए, और सूरत, सूरत तो सभी की ऐसी जैसे धरती पर जन्नत से उतर कर अप्सराएं ही आ गई हों।

सभी औरतें, बादशाह के बिस्तर तक आती हैं। बेग़म फातिमा, बादशाह के चेहरे के करीब बैठ जाती हैं। 2 दासियां बादशाह के पैरों के पास, और 2 बादशाह की कमर के पास बैठ जाती हैं। अब द्रश्य यह है, की बादशाह बिस्तर पर पीठ के बल, फैल कर नग्न अवस्था में लेटे हुए गहरी नींद में सो रहे हैं, और 5 हसीनाएं उन्हें घेर कर, उनके पास बैठ चुकी हैं।



20250425-2059-image

इतने में ही, बेग़म फातिमा, धीरे से अपने चेहरे को, बादशाह कासिम के चेहरे के पास लेजाती हैं, अपना एक हाथ, बादशाह के गाल पर रखती हैं, और अपने लाल सुकोमल होंठों से, गहरी नींद में सोए हुए बादशाह के होंठों पर, प्यार भरे मीठे-मीठे चुम्बन लेने लगती हैं। यूं लगता है, की बेग़म का हर चुम्बन बादशाह से कह रहा हो, कि, "जागो मेरे बादशाह, सुबह हो गई है, आपकी मलिका आपकी खिदमत में हाज़िर है"।
इसी के साथ, सभी दासियां, बेहद प्यार से, बादशाह के पूरे नंगे जिस्म पर, हल्के हल्के चुम्बन लेना शुरू कर देती हैं। देखते ही देखते आलम यूं हो गया है, कि बादशाह के नंगे बदन के जिस भी अंग पर नज़र डालो, कोई एक सुंदरी उसपर अपने रसीले होंठों का रस बरसाती नज़र आती है। बादशाह के पैर, जांघें, पेट, छाती, बाहें, कुछ भी सूखा नहीं रह गया है अब। और हां, आप सोच रहे होंगे मैने बादशाह के लिंग का ज़िक्र नहीं किया, है ना? तो जनाब यह भी कोई कहने वाली बात है। बादशाह के लिंग पर तो एक दासी के होंठ जैसे चिपक ही गए हैं।

अबतक तो आप समझ ही गए होंगे के ये सब क्या हो रहा है, और क्यों हो रहा है। नहीं समझे, तो मै बता देता हूं आपको। जिस तरह हम सभी सुबह अलार्म से उठते हैं, ये जो आपने पिछली कुछ पंक्तियों में पढ़ा, ये हमारे राजा की का अलार्म है। सभी हसीनाएं, ये जतन, अपने बादशाह को नींद से जगाने के लिए कर रही हैं। और ये सब हर रोज़ किसके आदेश पर होता है, बादशाह के? नहीं पगलों, बेग़म के आदेश पर होता है। राजा जी की सुबह को रंगीन बनाने की यह योजना, हमारी मलिका फातिमा जी की है। और इस काम के लिए, बेग़म जी ने खुद अपने हरम की सबसे सुंदर और नौजवान युवतियों को चुना है।

बादशाह कासिम की आंखें अभी खुली नहीं थीं, लेकिन दासी के कोमल होंठों के स्पर्श से, बादशाह के लिंग में तनाव आना शुरू हो गया था। यहां सभी मर्द जानते ही होंगे, न जाने क्यों सुबह सुबह आदमियों के लिंग में एक ज़बरदस्त ऊर्जा रहती है, और उस पर अगर किसी महिला के सुकोमल होंठों का स्पर्श मिल जाये, फिर तो क्या ही बात है। वह दासी बादशाह के लिंग को कुछ इस तरह चाट रही थी, जैसे कोई लड़की स्वादिष्ट कुल्फी को चाट-चाट कर आनंद लूट रही हो।
एक दासी बादशाह के निप्पल्स को धीरे धीरे अपने होंठों के बीच दबाकर प्यार से चूस रही थी।

अब किसी काम को इतनी शिद्दत से करो, तो सफलता तो मिलती ही है। आखिर हमारी प्यारी कोमलांगिनियों की मेहनत रंग लाई, और धीरे धीरे, बादशाह कासिम ने अपनी आंखें खोलीं।

बादशाह के आंखें खोलते ही, मलिका फातिमा सहित सभी दासियां धीरे से उठ कर खड़ी हो गईं। बादशाह अपने बिस्तर पर उठ कर बैठ गए। मलिका, जो कि अपने साथ एक शीतल जल का प्याला ले कर आईं थीं, उन्होंने वो प्याला बादशाह कासिम की ओर बढ़ाया। बादशाह कासिम ने प्याला लिया, और पानी पीते हुए उन चारों दासियों की ओर देखने लगे। दरअसल मलिका हर रोज़ इस काम के लिए 4 नई दासियों को लेकर आती थीं।
जब मलिका ने देखा कि बादशाह उन चारों दासियों की ओर कैसे ललचाई निगाहों से देख रहे हैं, तो मलिका नटखट अंदाज़ में अपनी दासियों को डांटते हुए बोलीं, "क्या तुम सब ऐसे कठपुतलियों की तरह चुपचाप खड़ी हुई हो, देख नहीं रहीं, बादशाह तुम सबकी ओर कैसे देख रहे हैं? अपने बादशाह की ख़िदमत कैसे की जाती है, किसी ने सिखाया नहीं तुम सब को, मै सिखाऊ?"।
मलिका की डांट से चारों दासियां सहम गईं, और बिना किसी देरी के चारों ने अपने अपने कपड़े उतारना शुरू कर दिए। देखते ही देखते चारों दासियां मादरजात नंगी होकर, बादशाह कासिम की आँखों के सामने खड़ी हो जाती हैं |



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मलिका एक बार फिर दासियों से कड़क अंदाज़ में बोलीं, "चलो सब की सब एक कतार में खड़ी हो जाओ, अपने अपने हाथ ऊपर करके"। सभी दासियां वैसा ही करती हैं।


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मलिका मुस्कुराती हुई बादशाह के पास बैठतीं हैं, और बादशाह के लिंग को अपने कोमल हाथों में लेकर सहलाते हुए बादशाह से नटखट अंदाज़ में कहती हैं, "बादशाह, हमारी चारों रंडियां बहुत प्यासी हैं, और देखिए ना, सभी की ज़िद है, कि अपनी प्यास पानी से नहीं बल्कि आपके वीर्य से बुझायेंगी। अब आप ही बताइए, ये भी कोई ज़िद हुई।"
मलिका की यह बात सुनकर सभी दासियों के गाल, शर्म से लाल हो जाते हैं, पर वह सभी बिल्कुल चुपचाप अपनी जगह पर, उसी लज्जाजनक मुद्रा में खड़ी रहती हैं।

बादशाह मुस्कुराते हुए, उन चारों दासियों को ऊपर से नीचे तक देखते हैं। यूं लगता है, कि नज़रों से ही वे हर एक दासी के नंगे बदन का हर एक अंग चूम रहे हों। फिर, एक दासी पर उनकी नज़र ठहर जाती है, वे उसे आंखों के इशारे से पास बुलाते हैं। वो दासी आगे आकर बादशाह के कदमों के पास बैठ जाती है। बादशाह उस दासी से उसका नाम पूछते हैं, तो वो अपना नाम रुखसाना बताती है।

मलिका रुखसाना को बादशाह के लिंग के करीब आने का इशारा करती हैं। रुखसाना धीरे से बादशाह की टांगों के बीच आकर, अपने चेहरे को बादशाह के नंगे लिंग के ठीक सामने ले आती है। इस वक्त, बादशाह का लिंग, मलिका के हाथों में था। मलिका अपना एक हाथ रुखसाना के सर पर रख कर उससे कहतीं हैं, "रुखसाना, अपना मुंह खोलो"। रुखसाना धीरे से अपना मुंह खोल देती है, और मलिका बादशाह के लिंग को अपने हाथ से, रुखसाना के मुंह के अंदर डाल देती हैं।
रुखसाना के मुंह के अंदर जाते ही, बादशाह का लिंग, सांप सा फन फना उठता है। रुखसाना धीरे धीरे बादशाह के लिंग को प्यार से चूसने लगती है।



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कभी लिंग को मुंह से बाहर निकाल कर उस पर चुम्बन करती, कभी अंडकोषों को चाटती, और फिर से लिंग को मुंह में लेकर चूसने लगती। कुछ ही देर में रुखसाना के मुंह के अंदर, बादशाह के लिंग से वीर्य की धार छूटती है, और रुखसाना पूरा वीर्य पी जाती है। फिर धीरे से बादशाह के लिंग को अपने मुंह से बाहर निकालकर, लिंग पर लगे वीर्य को भी चाट चाट कर साफ कर देती है। और इसके बाद, अपना सर झुका लेती है, अगले आदेश के इंतज़ार में। बादशाह के चहरे पर संतुष्टि के भाव को देख, मलिका दासी से कहती हैं, "बहुत खूब, रुखसाना"।

बादशाह कासिम, सभी दासियों को कपड़े पहन कर वहां से जाने के लिए कहते हैं। सभी दासियां, अपने अपने कपड़े पहन कर, बादशाह को सलाम करती हैं, औऱ वहां से चली जाती हैं।
 
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भाग - 1 ( बादशाह कासिम का सवेरा )

साथियों, मै हाज़िर हूं आपके लिए कहानी का पहला भाग लेकर । तो चलिए मै आप सभी को ले चलता हूं एक रोमांचक सफर पर, विलासपुर नगर में, बादशाह कासिम के किले में। सुबह सुबह 6 बजे का वक्त है। पंछियों की धीमी धीमी आवाज़ सुबह का संदेश देने लगी है। बादशाह कासिम अपने शयनकक्ष में गहरी नींद में सोए हुए हैं। उनके बदन पर एक भी कपड़ा नहीं है। ज़ाहिर है, राजा जी सोते वक्त कपड़ों का बोझ क्यों ही झेलेंगे।


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अरे, यह मै क्या देख रहा हूं, बादशाह के शयनकक्ष में, 5 कोमलांगिनियों ( सुंदर स्त्रियों ) का आगमन होता है। चलिए उन खूबसूरत हसीनाओं के हुस्न से आपको रूबरू कराता हूं। पहली हसीना है बादशाह कासिम की बेगम, फातिमा जी। उम्र, 42, पर इनकी जवानी, इसके तो क्या कहने।


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एक सुंदर सी पोषक से, बेगम जी ने अपने फूल से कोमल बदन को ढक रखा है। एक लाल रंग का मखमली पेशवाज, और नीचे खूबसूरत चूड़ीदार पजामा, रानी जी के हुस्न के जलवों को, हमारी नज़रों से दूर किये बैठा है। होंठों पर लाली, बदन पर गहने, और चेहरे पर प्यारी सी मुस्कान लिए, रानी जी बादशाह के बिस्तर की ओर बढ़ी चली आ रही हैं। उनके साथ जो 4 सुंदरियां हैं, वे कौन हैं, आप यही सोच रहे होंगे। तो आपको बता दूं, वे चारों, बादशाह की दासियां हैं। जो बेगम फातिमा के पीछे, कदम से कदम मिला कर, बढ़ी चली आ रही हैं। सभी दसियों ने सुंदर सुंदर सलवार और कुरते पहने हुए हैं, होठों पर लाली है, बाल खुले हुए, और सूरत, सूरत तो सभी की ऐसी जैसे धरती पर जन्नत से उतर कर अप्सराएं ही आ गई हों।

सभी औरतें, बादशाह के बिस्तर तक आती हैं। बेग़म फातिमा, बादशाह के चेहरे के करीब बैठ जाती हैं। 2 दासियां बादशाह के पैरों के पास, और 2 बादशाह की कमर के पास बैठ जाती हैं। अब द्रश्य यह है, की बादशाह बिस्तर पर पीठ के बल, फैल कर नग्न अवस्था में लेटे हुए गहरी नींद में सो रहे हैं, और 5 हसीनाएं उन्हें घेर कर, उनके पास बैठ चुकी हैं।



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इतने में ही, बेग़म फातिमा, धीरे से अपने चेहरे को, बादशाह कासिम के चेहरे के पास लेजाती हैं, अपना एक हाथ, बादशाह के गाल पर रखती हैं, और अपने लाल सुकोमल होंठों से, गहरी नींद में सोए हुए बादशाह के होंठों पर, प्यार भरे मीठे-मीठे चुम्बन लेने लगती हैं। यूं लगता है, की बेग़म का हर चुम्बन बादशाह से कह रहा हो, कि, "जागो मेरे बादशाह, सुबह हो गई है, आपकी मलिका आपकी खिदमत में हाज़िर है"।
इसी के साथ, सभी दासियां, बेहद प्यार से, बादशाह के पूरे नंगे जिस्म पर, हल्के हल्के चुम्बन लेना शुरू कर देती हैं। देखते ही देखते आलम यूं हो गया है, कि बादशाह के नंगे बदन के जिस भी अंग पर नज़र डालो, कोई एक सुंदरी उसपर अपने रसीले होंठों का रस बरसाती नज़र आती है। बादशाह के पैर, जांघें, पेट, छाती, बाहें, कुछ भी सूखा नहीं रह गया है अब। और हां, आप सोच रहे होंगे मैने बादशाह के लिंग का ज़िक्र नहीं किया, है ना? तो जनाब यह भी कोई कहने वाली बात है। बादशाह के लिंग पर तो एक दासी के होंठ जैसे चिपक ही गए हैं।

अबतक तो आप समझ ही गए होंगे के ये सब क्या हो रहा है, और क्यों हो रहा है। नहीं समझे, तो मै बता देता हूं आपको। जिस तरह हम सभी सुबह अलार्म से उठते हैं, ये जो आपने पिछली कुछ पंक्तियों में पढ़ा, ये हमारे राजा की का अलार्म है। सभी हसीनाएं, ये जतन, अपने बादशाह को नींद से जगाने के लिए कर रही हैं। और ये सब हर रोज़ किसके आदेश पर होता है, बादशाह के? नहीं पगलों, बेग़म के आदेश पर होता है। राजा जी की सुबह को रंगीन बनाने की यह योजना, हमारी मलिका फातिमा जी की है। और इस काम के लिए, बेग़म जी ने खुद अपने हरम की सबसे सुंदर और नौजवान युवतियों को चुना है।

बादशाह कासिम की आंखें अभी खुली नहीं थीं, लेकिन दासी के कोमल होंठों के स्पर्श से, बादशाह के लिंग में तनाव आना शुरू हो गया था। यहां सभी मर्द जानते ही होंगे, न जाने क्यों सुबह सुबह आदमियों के लिंग में एक ज़बरदस्त ऊर्जा रहती है, और उस पर अगर किसी महिला के सुकोमल होंठों का स्पर्श मिल जाये, फिर तो क्या ही बात है। वह दासी बादशाह के लिंग को कुछ इस तरह चाट रही थी, जैसे कोई लड़की स्वादिष्ट कुल्फी को चाट-चाट कर आनंद लूट रही हो।
एक दासी बादशाह के निप्पल्स को धीरे धीरे अपने होंठों के बीच दबाकर प्यार से चूस रही थी।

अब किसी काम को इतनी शिद्दत से करो, तो सफलता तो मिलती ही है। आखिर हमारी प्यारी कोमलांगिनियों की मेहनत रंग लाई, और धीरे धीरे, बादशाह कासिम ने अपनी आंखें खोलीं।

बादशाह के आंखें खोलते ही, मलिका फातिमा सहित सभी दासियां धीरे से उठ कर खड़ी हो गईं। बादशाह अपने बिस्तर पर उठ कर बैठ गए। मलिका, जो कि अपने साथ एक शीतल जल का प्याला ले कर आईं थीं, उन्होंने वो प्याला बादशाह कासिम की ओर बढ़ाया। बादशाह कासिम ने प्याला लिया, और पानी पीते हुए उन चारों दासियों की ओर देखने लगे। दरअसल मलिका हर रोज़ इस काम के लिए 4 नई दासियों को लेकर आती थीं।
जब मलिका ने देखा कि बादशाह उन चारों दासियों की ओर कैसे ललचाई निगाहों से देख रहे हैं, तो मलिका नटखट अंदाज़ में अपनी दासियों को डांटते हुए बोलीं, "क्या तुम सब ऐसे कठपुतलियों की तरह चुपचाप खड़ी हुई हो, देख नहीं रहीं, बादशाह तुम सबकी ओर कैसे देख रहे हैं? अपने बादशाह की ख़िदमत कैसे की जाती है, किसी ने सिखाया नहीं तुम सब को, मै सिखाऊ?"।
मलिका की डांट से चारों दासियां सहम गईं, और बिना किसी देरी के चारों ने अपने अपने कपड़े उतारना शुरू कर दिए। देखते ही देखते चारों दासियां मादरजात नंगी होकर, बादशाह कासिम की आँखों के सामने खड़ी हो जाती हैं |



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मलिका एक बार फिर दासियों से कड़क अंदाज़ में बोलीं, "चलो सब की सब एक कतार में खड़ी हो जाओ, अपने अपने हाथ ऊपर करके"। सभी दासियां वैसा ही करती हैं।


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मलिका मुस्कुराती हुई बादशाह के पास बैठतीं हैं, और बादशाह के लिंग को अपने कोमल हाथों में लेकर सहलाते हुए बादशाह से नटखट अंदाज़ में कहती हैं, "बादशाह, हमारी चारों रंडियां बहुत प्यासी हैं, और देखिए ना, सभी की ज़िद है, कि अपनी प्यास पानी से नहीं बल्कि आपके वीर्य से बुझायेंगी। अब आप ही बताइए, ये भी कोई ज़िद हुई।"
मलिका की यह बात सुनकर सभी दासियों के गाल, शर्म से लाल हो जाते हैं, पर वह सभी बिल्कुल चुपचाप अपनी जगह पर, उसी लज्जाजनक मुद्रा में खड़ी रहती हैं।

बादशाह मुस्कुराते हुए, उन चारों दासियों को ऊपर से नीचे तक देखते हैं। यूं लगता है, कि नज़रों से ही वे हर एक दासी के नंगे बदन का हर एक अंग चूम रहे हों। फिर, एक दासी पर उनकी नज़र ठहर जाती है, वे उसे आंखों के इशारे से पास बुलाते हैं। वो दासी आगे आकर बादशाह के कदमों के पास बैठ जाती है। बादशाह उस दासी से उसका नाम पूछते हैं, तो वो अपना नाम रुखसाना बताती है।

मलिका रुखसाना को बादशाह के लिंग के करीब आने का इशारा करती हैं। रुखसाना धीरे से बादशाह की टांगों के बीच आकर, अपने चेहरे को बादशाह के नंगे लिंग के ठीक सामने ले आती है। इस वक्त, बादशाह का लिंग, मलिका के हाथों में था। मलिका अपना एक हाथ रुखसाना के सर पर रख कर उससे कहतीं हैं, "रुखसाना, अपना मुंह खोलो"। रुखसाना धीरे से अपना मुंह खोल देती है, और मलिका बादशाह के लिंग को अपने हाथ से, रुखसाना के मुंह के अंदर डाल देती हैं।
रुखसाना के मुंह के अंदर जाते ही, बादशाह का लिंग, सांप सा फन फना उठता है। रुखसाना धीरे धीरे बादशाह के लिंग को प्यार से चूसने लगती है।



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कभी लिंग को मुंह से बाहर निकाल कर उस पर चुम्बन करती, कभी अंडकोषों को चाटती, और फिर से लिंग को मुंह में लेकर चूसने लगती। कुछ ही देर में रुखसाना के मुंह के अंदर, बादशाह के लिंग से वीर्य की धार छूटती है, और रुखसाना पूरा वीर्य पी जाती है। फिर धीरे से बादशाह के लिंग को अपने मुंह से बाहर निकालकर, लिंग पर लगे वीर्य को भी चाट चाट कर साफ कर देती है। और इसके बाद, अपना सर झुका लेती है, अगले आदेश के इंतज़ार में। बादशाह के चहरे पर संतुष्टि के भाव को देख, मलिका दासी से कहती हैं, "बहुत खूब, रुखसाना"।

बादशाह कासिम, सभी दासियों को कपड़े पहन कर वहां से जाने के लिए कहते हैं। सभी दासियां, अपने अपने कपड़े पहन कर, बादशाह को सलाम करती हैं, औऱ वहां से चली जाती हैं।
बहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजना से भरपूर खतरनाक कामोत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गया
अगले रोमांचकारी धमाकेदार और चुदाईदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा
 

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बहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजना से भरपूर खतरनाक कामोत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गया
अगले रोमांचकारी धमाकेदार और चुदाईदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा

सुनकर प्रसन्नता हुई कि मेरा काम आपको पसंद आया | यूँही आपकी खिदमत में कामोत्तेजना के रस में डूबे हुए गरमागरम कहानी के अगले भाग, हम पेश करते रहेंगे | पढ़िए, और आनंद लीजिये |
साथ ही यदि आप कुछ खास तरह के प्रसंग पढ़ना चाहते हैं, तो कृपया कमेंट करके अवश्य बताएं, आपकी पसंद अनुसार प्रसंगों को भी आगे की कहानी में शामिल किया जायेगा |

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आपसे विनती है कृपया मुझे फॉलो कर लें, और फॉलो करते समय ऊपर के 3 बॉक्सेस पर टिक ज़रूर कर लें, जिससे मेरा हर अपडेट आप तक उचित समय पर स्वयं ही पंहुच जाये | क्योंकि जैसे जैसे पाठकों की संख्या बढ़ेगी, सभी पाठकों को एक एक करके सूचित करना कठिन होता जायेगा |
आशा करता हूँ आपको मेरा काम आगे भी अच्छा लगेगा | पढ़ें और आनंद लें | धन्यवाद |
 
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सुरुवात बहुत बढीया है अपडेट थोडा लंबा देते जाओ🥳👍
सुनकर प्रसन्नता हुई कि मेरा काम आपको पसंद आया | यूँही आपकी खिदमत में कामोत्तेजना के रस में डूबे हुए गरमागरम कहानी के अगले भाग, हम पेश करते रहेंगे | पढ़िए, और आनंद लीजिये | आपकी सलाह अनुसार हम भाग 2 से कहानी के अपडेट्स को लम्बा रखने का पूरा प्रयत्न करेंगे |
धन्यवाद |
 
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