• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Incest यह क्या हुआ

sunoanuj

Well-Known Member
5,143
12,831
189
अगले भाग की प्रतीक्षा में हैं !
 

DB Singh

Active Member
696
1,193
123
सुनीता _हा हा वहा जानें को बेताब हो, यहां तुम्हे तुम्हे दुध पीने को नही मिल रहा है? वहा जायेगा तो ताजा दुध पीने को मिलेगा।
राजेश _मुझे कुछ जलने की बू आ रही है?
Sunita jalan ke mare fir se pregnant ho jayegi aur iss bar bache ko janam deke ye bhi dudh dene wali ban jayegi
 

rajesh bhagat

Active Member
1,241
7,106
144
राजेश हवेली के अंदर गया।
रत्नवती _अरे राजेश बेटा आओ, बैठो।
राजेश _नमस्ते मां जी।
नमस्ते दी।
गीता _कैसे हो राजेश?
राजेश _मै बिलकुल ठीक हूं दी। आप लोग जैसे है?
रत्नवती _ हम लोग भी अच्छे हैं बेटा।बेटा तुम तो दिल्ली गए, थे न।
राजेश _हा , मां जी।
आज ही सुबह दिल्ली से लौटा।
गीता _, राजेश तुम्हारा इंटरव्यू कैसा रहा?
राजेश _बहुत अच्छा दी।
गीता _ये तो बड़ी अच्छी बात है, अब कुछ दिनो बाद तुम आई ए एस अफसर बन जाओगे।
रत्नवती ने नौकरों से राजेश के लिए चाय नाश्ता का प्रबंध करने कहा।
राजेश _मां जी, घर से चाय नाश्ता करके आया हूं, रहने दीजिए।
मां जी ओ दिव्या जी दिखाई नहीं दे रही है।
रत्नवती और गीता दोनो एक दूसरे के मुंह ताकने लगे।
क्या बोले उन्हे समझ नही आ रहा था?
राजेश _ओ भाभी बोल रही थी कि दिव्या जी ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से इस्तीफा दे दिया है।
गीता _ओ हां, क्या है न कि वो आगे डाक्टरी की पढाई और करना चाहतीं थी,,,,,
तो,,,, वह,,,
मां तुम बताओ न,,,
रत्नवती _वो बेटा, दिव्या आगे पढ़ाई के लिए,,,,,
रत्नवती भी बोल नही पाई।
गीता _वो राजेश, दिव्या आगे की पढाई के लिए रूस चली,,,,,
राजेश _क्या, दिव्या रूस चली गईं?
पर उसने तो मुझसे कभी जिक्र ही नहीं किया था, इस बारे में।
गीता _वो क्या है न कि उसने ये योजना अचानक से बनाई। अब तुम दिल्ली में थे इंटरव्यू के लिए तो वो तुम्हे डिस्टर्ब करना नही चाहती थी।
राजेश _ओह,
राजेश का मन उदास हो गया।
अच्छा दी,मै चलता हूं।
दिव्या जी का कोइ काल या मेसेज आए तो मुझे काल करने के लिए कहना।
रत्नवती _बेटा कॉफी वगैरा तो लेते जा।
राजेश _नही मां जी, मुझे ईच्छा नही हो रही है कॉफी पीने की, अच्छा मां जी मुझे इजाजत दीजिए।
रत्नवती _ठीक है बेटा, हवेली आते जाते रहना। दिव्या नही है तो क्या? हम तो है।
राजेश _जी।
राजेश वहा से चला गया।
उसका मन उदास हो गया।
वह बाइक लेकर सुरज पुर के लिए निकल पड़ा।
इधर हवेली में।
गीता _मां राजेश से झूठ बोल कर मुझे बिल्कुल अच्छा नही लग रहा है।
रत्नवती _बेटा मुझे भी, जब राजेश को सच पता चलेगा तो हम उनसे नजर नहीं मिला पाएंगे।
गीता _मां मै तो कहती हूं हम राजेश को सब सच बता देते हैं? जो होना होगा देखा जाएगा।
रत्नवती _पर बेटी, दिव्या ने तो मना की है न कुछ बताने। और तुम्हारा पिता वो तो राजेश के नाम से ही चिड़ता है, मारने या मरने में उतारू हो जाता है।
पता नहीं आगे क्या होगा?
रत्नवती _हे भगवान मेरी बेटी की जिंदगी में जो तूफान आया है, उससे उसे तू ही निकाल सकता है प्रभु। उसकी जिंदगी में जो कांटे आए हैं।
उसे तू ही हटा सकता है।
इधर राजेश गांव पहुंचने के पहले जो शिव का मंदिर था, वहा बाइक रोक दिया।
वह मंदिर के सीढ़ी में बैठ कर सोच में डूब गया।
उसे दिव्या के साथ बिताए पल याद आने लगा।

मंदिर का पुजारी उसके पास आया।

पुजारी _अरे राजेश बेटा तुम, क्या बात है बेटा कुछ उदास लग रहे हो।
राजेश _हा बाबा, आज मैं दूसरी बार उदास huwa हू। आज फिर मुझे मेरा एक सच्चा दोस्त मुझे छोड़ कर चली गईं।
बाबा _बेटा, तुम प्रभु के दरबार में आए हो, तुम सच्चे मन से प्रभु से प्रार्थना करो। तुम्हे छोड़कर जाने वाले जरूर तुमसे फिर से मिलेंगे। तुमने सबके भलाई के लिए काम किया है। प्रभु तुम्हारी जरूर सुनेंगे।
जाओ बेटा, प्रभु के चरणों में जाकर प्रार्थना करो।
राजेश मंदिर के ऊपर चढ़ा, वह घंटी बजाया, फिर उसने ईश्वर से प्रार्थना किया,
हे प्रभु, तुमने निशा को तो मुझसे दूर कर दिया, इसमें गलती मेरी ही थी इसलिए आपसे कभी शिकायत नहीं की।
पर दिव्या वह भी मुझे बिना बताए, मुझसे दूर चली गईं,,, लगता है आप मुझे मेरे बुरे कर्मो की सजा दे रहे है। जिन्हे मै अपना सच्चा दोस्त समझता हूं उसे आप मुझसे छीन लेते हैं। मेरे बुरे कर्मों की सजा देने का अच्छा तरीका निकाला है आपने। निशा की याद सताती थी इस लिय मैं शहर छोड़ आया, अब यहां भी आपने दिव्या जी को मुझसे दूर कर दिया, अब मैं कहा जाऊ प्रभु,,,
राजेश घुटने के बल बैठ कर प्रभु के सामने हाथ जोड़ लिया। उसकी आंख भर आया था।
पुजारी _उठो बेटा, प्रभु पार विश्वास रखो।
वो जरूर सब ठीक कर देंगे।
राजेश कुछ देर मंदिर में और रुका। फिर वह घर आ गया।
घर आया और किसी से कुछ बात किए, अपने कमरे जाकर लेट गया।
पूनम उसके कमरे में आई।
पूनम _क्या huwa देवर जी, उदास लग रहे हो?
राजेश _भाभी तुमने जो बताता था वो सच है दिव्या जी यहां से चली गईं हैं।
पूनम _तुम उसके चले जाने से दुखी हो।
राजेश _दिव्या जी मेरी बहुत अच्छी दोस्त थी भाभी।
पूनम _देवर जी आप चिन्ता न करो, मै आपकी सारी उदासी दूर कर दूंगी।
चलो पहले खाना खा लो।
राजेश _भाभी मुझे भूख नहीं है।
पूनम _देखो देवर जी, तुम्हारे भूखे रहने से दिव्या जी वापस तो नही आ जायेगी न।
अगर तुम नहीं खाओगे तो मैं भी नही खाऊंगी, कह देती हूं हा।
राजेश _मेरे कारण आप क्यों भूखी रहेंगी भाभी।
पूनम _अच्छा मेरी चिंता है तो चलो भोजन कर लो।
राजेश _अच्छा, चलो मै आता हूं।
पूनम _ये हुई न बात। अच्छा तुम हाथ मुंह धोकर किचन में आओ, मै खाना लगाती हूं।
राजेश _जी।
राजेश हाथ मुंह धोकर कीचन में गया, पूनम ने भोजन परोसा।
राजेश _ताई नही दिख रही।
पूनम _खेत में कुछ काम ज्यादा है न तो, वह खेत चली गईं। आरती स्कूल गई है।
राजेश थोड़ा सा भोजन किया।
पूनम _देवर जी और लो न, बस थोड़ा सा ही खाएं हो।
राजेश _न भाभी, पेट भर गया।
राजेश भोजन करके अपने कमरे में जाकर लेट गया।
पूनम भी भोजन करने के बाद कीचन का काम निपटाकर राजेश के रूम मे आया।
पूनम _देवर जी आपको किसी चीज की जरूरत तो नही है।
देवर जी कहा खोए हो,,,
राजेश _की भाभी आपने कुछ कहा,,,
पूनम _तुम फिर किसी सोच मे डूब गए।
कही तुम दिव्या से प्यार करने तो नही लगे थे।
राजेश _भाभी प्यार तो सिर्फ एक बार होता है न।
पूनम _क्यू? एक बार क्यो? इंसान को जीवन में कई बार प्यार हो सकता है? तुम्हारी हालत देख कर तो यही लगता है कि तुम दिव्या जी को प्यार करते हो।
राजेश _दिव्या से मुझे प्यार है कि नही ये तो मैं नही जानता भाभी लेकिन वो मेरी बहुत अच्छी दोस्त थी। और उसका इस तरह जाना, मुझे अच्छा नहीं लग रहा है।
पूनम _ठीक है देवर जी, तुम आराम करो किसी चीज की जरूरत हो तो मुझे आवाज देना।
शाम के समय राजेश अपने चाचा चाची से मिलने चला गया।
राजेश _नमस्ते चाचा जी।
माधव _अरे राजेश, खुश रह, यार तू कब आया।
राजेश _जी आज सुबह ही।
माधव _और इंटरव्यू कैसा गया?
राजेश _बहुत अच्छा चाचा जी।
माधव _भईया भाभी कैसे है?
राजेश _मां और पापा दोनो अच्छे है।
माधव_राजेश, तुम्हारी चाची रोज तुम्हारी ही बाते करती रहती हैं जाओ उससे मिल लो।
सविता किचन में काम कर रही थी।
राजेश चुपके से गया और उसके पीछे खड़े होकर उसकी आंखो को को अपनी हाथ से बंद कर दिया।
सबिता चौंक गई।
कौन हो छोड़ों मुझे,,
राजेश ने हाथ हटाया।
सबिता _अरे राजेश तू, तू कब आया।
राजेश _जी आज सुबह।
सबिता _तू सुबह का आ चुका है और अभी मिलने आया। तुम्हे तो मेरी परवाह ही नहीं।
राजेश _सॉरी चाची।
सबिता _और सुना कैसा गया तुम्हारा इंटरव्यू?
राजेश _जी बहुत अच्छा।
सबिता _और घर में सब कैसे है?
राजेश _सब अच्छे से है?
सविता _तू तो वहा जाने के बाद अपनी चाची को बिलकुल भूल ही गया था re
न कोई फोन न कोई खोज खबर। मुझे तो लग रहा था कि तू गांव वापस आएगा ही नहीं।
राजेश _चाची मै आप लोगो को कैसे भुल सकता हूं?
आप लोगो की याद आते ही चला आया।
सबिता _चल झूठा कही का।
राजेश _चाची, कैसा चल रहा है आपका पंचायत का काम।
सबिता _बस पहले जैसा ही, सब लोग तुम्हे याद कर रहे थे। अब तू आ गया है तो कुछ छोटी छोटी समस्या है पर अब तू आ गया है तो सब ठीक हो जाएगा।
तू काफी पिएगा की चाय।
राजेश _जी काफी बना दीजिए।
सबिता काफी बनाने लगी, दोनो आपस में बात चीत करने लगें।
सबिता _लो काफी पियो।
राजेश _थैंक यू चाची।
राजेश काफी पीने लगा।
राजेश _अच्छा चाची अब मैं चलता हूं, दोस्तो से मिलना है।
सबिता _ठीक है पर सुन रात का भोजन यही करना, मै तेरा पसंद का भोजन बनाऊंगी।
राजेश _ठीक है चाची।
सबिता _तू कुछ भूल रहा है।
राजेश _क्या?
सबिता _तू तो कुछ ही दिनो मे सब कुछ भूल ही गया re
सविता नाराज होते हुए बोली।
राजेश उसके पास गया और उसकी गाल को चूम लिया।
सबिता शर्मा गई।
राजेश _अब चलु।
सबिता _हूं।
राजेश गांवों के दोस्तों से मिलने चला गया। दोस्तो से गांव का हालचाल जाना।
रात का भोजन सबिता के घर किया। सबिता ने उसके लिए उसका पसंद का भोजन बनाया था। भोजन करने के बाद वह घर आया। अगली सुबह उठ कर वह आर्मी प्रशिक्षण केंद्र गया।
वह वहा चल रही ट्रेनिंग का जायजा लिया। दोपहर में वह स्कूल गया।
माधुरी राजेश को देखकर बहुत खुश हुई।
स्कूल की पढाई का अवलोकन किया।
अगले दिन वह ग्राम पंचायत के मीटिंग में शामिल huwa, बैठक में गांव की समस्याओं पर चर्चा किया गया। राजेश ने समाधान हेतु अपना सुझाव दिया।
इस तरह कुछ दिन निकल गया।
राजेश अकेले में दिव्या को बहुत मिस करता था।
उनके साथ बिताए हुए पलों को याद करता था।
इधर आश्रम में दिव्या, ने अपने त्याग, समर्पण औरव्यवहार से सभी का दिल जीत लिया था।
रात में जब राजबती और दिव्या जब भोजन करने के बाद बेड पर आराम कर रही थी।
राजवती _बेटी, यहां के लोग तुमसे बहुत प्रेम करने लगें है अपनी त्याग समर्पण और व्यवहार से तुमने कुछ ही दिनो मे सबका दिल जीत लिया है।
मै तुम्हारे आने के पहले बहुत चिंतित थी बेटी।
दिव्या _किस बात के लिए नानी।
राजवती _बेटी मै चिंतित थी की मेरे बाद इस आश्रम का क्या होगा। कोन सम्हालेगा इसे। मै भगवान से हमेशा प्रार्थना करती थी। इस आश्रम का वारिश के लिए। बेटी भगवान ने मेरी सुन ली। उसने तुम्हे यहां भेजा।
बेटी तुम मुझसे वादा करो, मेरे जाने के बाद, इस आश्रम को तुम सम्हालोगी।
दिव्या _नानी क्या आपको लगता है कि इतने बड़े आश्रम को मैं सम्हाल पाऊंगी।
राजवती _तुम्हारी काबिलियत देखकर ही मेने यह फैसला लिया है बेटी मेरे बाद तुम ही यहां की नई माता बनोगी।
एक दिन राजेश दिव्या को बहुत मिस कर रहा था। वह उस स्थान पर गया था। जहा दिव्या के साथ समय बिताया था।
वह रोड किनारे अपना बाइक रख कर।
वह उन स्थानों पर आगे बढ़ता गया। जहां दिव्या के साथ समय बिताया था।
शाम के समय गीता जिला कार्यालय से घर आ रही थी।
उसने राजेश का बाइक रोड किनारे खडा देखा उसने ड्राइवर को बाइक रोकने के लिए कहा।
गीता _ये तो राजेश का बाइक है, इस सुन सान जगह पर राजेश क्या कर रहा है!
वह अपने वाहन से उतरी और राजेश को इधर उधर ढूंढने लगी।
राजेश नदी किनारे बैठा हुआ था।
वह दिव्या को याद कर रहा था, उसके साथ जो गीत गाया था वो पल उसे याद आ रही थी।
 
Last edited:

Ek number

Well-Known Member
10,108
21,971
228
राजेश हवेली के अंदर गया।
रत्नवती _अरे राजेश बेटा आओ, बैठो।
राजेश _नमस्ते मां जी।
नमस्ते दी।
गीता _कैसे हो राजेश?
राजेश _मै बिलकुल ठीक हूं दी। आप लोग जैसे है?
रत्नवती _ हम लोग भी अच्छे हैं बेटा।बेटा तुम तो दिल्ली गए, थे न।
राजेश _हा , मां जी।
आज ही सुबह दिल्ली से लौटा।
गीता _, राजेश तुम्हारा इंटरव्यू कैसा रहा?
राजेश _बहुत अच्छा दी।
गीता _ये तो बड़ी अच्छी बात है, अब कुछ दिनो बाद तुम आई ए एस अफसर बन जाओगे।
रत्नवती ने नौकरों से राजेश के लिए चाय नाश्ता का प्रबंध करने कहा।
राजेश _मां जी, घर से चाय नाश्ता करके आया हूं, रहने दीजिए।
मां जी ओ दिव्या जी दिखाई नहीं दे रही है।
रत्नवती और गीता दोनो एक दूसरे के मुंह ताकने लगे।
क्या बोले उन्हे समझ नही आ रहा था?
राजेश _ओ भाभी बोल रही थी कि दिव्या जी ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से इस्तीफा दे दिया है।
गीता _ओ हां, क्या है न कि वो आगे डाक्टरी की पढाई और करना चाहतीं थी,,,,,
तो,,,, वह,,,
मां तुम बताओ न,,,
रत्नवती _वो बेटा, दिव्या आगे पढ़ाई के लिए,,,,,
रत्नवती भी बोल नही पाई।
गीता _वो राजेश, दिव्या आगे की पढाई के लिए रूस चली,,,,,
राजेश _क्या, दिव्या रूस चली गईं?
पर उसने तो मुझसे कभी जिक्र ही नहीं किया था, इस बारे में।
गीता _वो क्या है न कि उसने ये योजना अचानक से बनाई। अब तुम दिल्ली में थे इंटरव्यू के लिए तो वो तुम्हे डिस्टर्ब करना नही चाहती थी।
राजेश _ओह,
राजेश का मन उदास हो गया।
अच्छा दी,मै चलता हूं।
दिव्या जी का कोइ काल या मेसेज आए तो मुझे काल करने के लिए कहना।
रत्नवती _बेटा कॉफी वगैरा तो लेते जा।
राजेश _नही मां जी, मुझे ईच्छा नही हो रही है कॉफी पीने की, अच्छा मां जी मुझे इजाजत दीजिए।
रत्नवती _ठीक है बेटा, हवेली आते जाते रहना। दिव्या नही है तो क्या? हम तो है।
राजेश _जी।
राजेश वहा से चला गया।
उसका मन उदास हो गया।
वह बाइक लेकर सुरज पुर के लिए निकल पड़ा।
इधर हवेली में।
गीता _मां राजेश से झूठ बोल कर मुझे बिल्कुल अच्छा नही लग रहा है।
रत्नवती _बेटा मुझे भी, जब राजेश को सच पता चलेगा तो हम उनसे नजर नहीं मिला पाएंगे।
गीता _मां मै तो कहती हूं हम राजेश को सब सच बता देते हैं? जो होना होगा देखा जाएगा।
रत्नवती _पर बेटी, दिव्या ने तो मना की है न कुछ बताने। और तुम्हारा पिता वो तो राजेश के नाम से ही चिड़ता है, मारने या मरने में उतारू हो जाता है।
पता नहीं आगे क्या होगा?
रत्नवती _हे भगवान मेरी बेटी की जिंदगी में जो तूफान आया है, उससे उसे तू ही निकाल सकता है प्रभु। उसकी जिंदगी में जो कांटे आए हैं।
उसे तू ही हटा सकता है।
इधर राजेश गांव पहुंचने के पहले जो शिव का मंदिर था, वहा बाइक रोक दिया।
वह मंदिर के सीढ़ी में बैठ कर सोच में डूब गया।
उसे दिव्या के साथ बिताए पल याद आने लगा।

मंदिर का पुजारी उसके पास आया।

पुजारी _अरे राजेश बेटा तुम, क्या बात है बेटा कुछ उदास लग रहे हो।
राजेश _हा बाबा, आज मैं दूसरी बार उदास huwa हू। आज फिर मुझे मेरा एक सच्चा दोस्त मुझे छोड़ कर चली गईं।
बाबा _बेटा, तुम प्रभु के दरबार में आए हो, तुम सच्चे मन से प्रभु से प्रार्थना करो। तुम्हे छोड़कर जाने वाले जरूर तुमसे फिर से मिलेंगे। तुमने सबके भलाई के लिए काम किया है। प्रभु तुम्हारी जरूर सुनेंगे।
जाओ बेटा, प्रभु के चरणों में जाकर प्रार्थना करो।
राजेश मंदिर के ऊपर चढ़ा, वह घंटी बजाया, फिर उसने ईश्वर से प्रार्थना किया,
हे प्रभु, तुमने निशा को तो मुझसे दूर कर दिया, इसमें गलती मेरी ही थी इसलिए आपसे कभी शिकायत नहीं की।
पर दिव्या वह भी मुझे बिना बताए, मुझसे दूर चली गईं,,, लगता है आप मुझे मेरे बुरे कर्मो की सजा दे रहे है। जिन्हे मै अपना सच्चा दोस्त समझता हूं उसे आप मुझसे छीन लेते हैं। मेरे बुरे कर्मों की सजा देने का अच्छा तरीका निकाला है आपने। निशा की याद सताती थी इस लिय मैं शहर छोड़ आया, अब यहां भी आपने दिव्या जी को मुझसे दूर कर दिया, अब मैं कहा जाऊ प्रभु,,,
राजेश घुटने के बल बैठ कर प्रभु के सामने हाथ जोड़ लिया। उसकी आंख भर आया था।
पुजारी _उठो बेटा, प्रभु पार विश्वास रखो।
वो जरूर सब ठीक कर देंगे।
राजेश कुछ देर मंदिर में और रुका। फिर वह घर आ गया।
घर आया और किसी से कुछ बात किए, अपने कमरे जाकर लेट गया।
पूनम उसके कमरे में आई।
पूनम _क्या huwa देवर जी, उदास लग रहे हो?
राजेश _भाभी तुमने जो बताता था वो सच है दिव्या जी यहां से चली गईं हैं।
पूनम _तुम उसके चले जाने से दुखी हो।
राजेश _दिव्या जी मेरी बहुत अच्छी दोस्त थी भाभी।
पूनम _देवर जी आप चिन्ता न करो, मै आपकी सारी उदासी दूर कर दूंगी।
चलो पहले खाना खा लो।
राजेश _भाभी मुझे भूख नहीं है।
पूनम _देखो देवर जी, तुम्हारे भूखे रहने से दिव्या जी वापस तो नही आ जायेगी न।
अगर तुम नहीं खाओगे तो मैं भी नही खाऊंगी, कह देती हूं हा।
राजेश _मेरे कारण आप क्यों भूखी रहेंगी भाभी।
पूनम _अच्छा मेरी चिंता है तो चलो भोजन कर लो।
राजेश _अच्छा, चलो मै आता हूं।
पूनम _ये हुई न बात। अच्छा तुम हाथ मुंह धोकर किचन में आओ, मै खाना लगाती हूं।
राजेश _जी।
राजेश हाथ मुंह धोकर कीचन में गया, पूनम ने भोजन परोसा।
राजेश _ताई नही दिख रही।
पूनम _खेत में कुछ काम ज्यादा है न तो, वह खेत चली गईं। आरती स्कूल गई है।
राजेश थोड़ा सा भोजन किया।
पूनम _देवर जी और लो न, बस थोड़ा सा ही खाएं हो।
राजेश _न भाभी, पेट भर गया।
राजेश भोजन करके अपने कमरे में जाकर लेट गया।
पूनम भी भोजन करने के बाद कीचन का काम निपटाकर राजेश के रूम मे आया।
पूनम _देवर जी आपको किसी चीज की जरूरत तो नही है।
देवर जी कहा खोए हो,,,
राजेश _की भाभी आपने कुछ कहा,,,
पूनम _तुम फिर किसी सोच मे डूब गए।
कही तुम दिव्या से प्यार करने तो नही लगे थे।
राजेश _भाभी प्यार तो सिर्फ एक बार होता है न।
पूनम _क्यू? एक बार क्यो? इंसान को जीवन में कई बार प्यार हो सकता है? तुम्हारी हालत देख कर तो यही लगता है कि तुम दिव्या जी को प्यार करते हो।
राजेश _दिव्या से मुझे प्यार है कि नही ये तो मैं नही जानता भाभी लेकिन वो मेरी बहुत अच्छी दोस्त थी। और उसका इस तरह जाना, मुझे अच्छा नहीं लग रहा है।
पूनम _ठीक है देवर जी, तुम आराम करो किसी चीज की जरूरत हो तो मुझे आवाज देना।
शाम के समय राजेश अपने चाचा चाची से मिलने चला गया।
राजेश _नमस्ते चाचा जी।
माधव _अरे राजेश, खुश रह, यार तू कब आया।
राजेश _जी आज सुबह ही।
माधव _और इंटरव्यू कैसा गया?
राजेश _बहुत अच्छा चाचा जी।
माधव _भईया भाभी कैसे है?
राजेश _मां और पापा दोनो अच्छे है।
माधव_राजेश, तुम्हारी चाची रोज तुम्हारी ही बाते करती रहती हैं जाओ उससे मिल लो।
सविता किचन में काम कर रही थी।
राजेश चुपके से गया और उसके पीछे खड़े होकर उसकी आंखो को को अपनी हाथ से बंद कर दिया।
सबिता चौंक गई।
कौन हो छोड़ों मुझे,,
राजेश ने हाथ हटाया।
सबिता _अरे राजेश तू, तू कब आया।
राजेश _जी आज सुबह।
सबिता _तू सुबह का आ चुका है और अभी मिलने आया। तुम्हे तो मेरी परवाह ही नहीं।
राजेश _सॉरी चाची।
सबिता _और सुना कैसा गया तुम्हारा इंटरव्यू?
राजेश _जी बहुत अच्छा।
सबिता _और घर में सब कैसे है?
राजेश _सब अच्छे से है?
सविता _तू तो वहा जाने के बाद अपनी चाची को बिलकुल भूल ही गया था re
न कोई फोन न कोई खोज खबर। मुझे तो लग रहा था कि तू गांव वापस आएगा ही नहीं।
राजेश _चाची मै आप लोगो को कैसे भुल सकता हूं?
आप लोगो की याद आते ही चला आया।
सबिता _चल झूठा कही का।
राजेश _चाची, कैसा चल रहा है आपका पंचायत का काम।
सबिता _बस पहले जैसा ही, सब लोग तुम्हे याद कर रहे थे। अब तू आ गया है तो कुछ छोटी छोटी समस्या है पर अब तू आ गया है तो सब ठीक हो जाएगा।
तू काफी पिएगा की चाय।
राजेश _जी काफी बना दीजिए।
सबिता काफी बनाने लगी, दोनो आपस में बात चीत करने लगें।
सबिता _लो काफी पियो।
राजेश _थैंक यू चाची।
राजेश काफी पीने लगा।
राजेश _अच्छा चाची अब मैं चलता हूं, दोस्तो से मिलना है।
सबिता _ठीक है पर सुन रात का भोजन यही करना, मै तेरा पसंद का भोजन बनाऊंगी।
राजेश _ठीक है चाची।
सबिता _तू कुछ भूल रहा है।
राजेश _क्या?
सबिता _तू तो कुछ ही दिनो मे सब कुछ भूल ही गया re
सविता नाराज होते हुए बोली।
राजेश उसके पास गया और उसकी गाल को चूम लिया।
सबिता शर्मा गई।
राजेश _अब चलु।
सबिता _हूं।
राजेश गांवों के दोस्तों से मिलने चला गया। दोस्तो से गांव का हालचाल जाना।
रात का भोजन सबिता के घर किया। सबिता ने उसके लिए उसका पसंद का भोजन बनाया था। भोजन करने के बाद वह घर आया। अगली सुबह उठ कर वह आर्मी प्रशिक्षण केंद्र गया।
वह वहा चल रही ट्रेनिंग का जायजा लिया। दोपहर में वह स्कूल गया।
माधुरी राजेश को देखकर बहुत खुश हुई।
स्कूल की पढाई का अवलोकन किया।
अगले दिन वह ग्राम पंचायत के मीटिंग में शामिल huwa, बैठक में गांव की समस्याओं पर चर्चा किया गया। राजेश ने समाधान हेतु अपना सुझाव दिया।
इस तरह कुछ दिन निकल गया।
राजेश अकेले में दिव्या को बहुत मिस करता था।
उनके साथ बिताए हुए पलों को याद करता था।
इधर आश्रम में दिव्या, ने अपने त्याग, समर्पण औरव्यवहार से सभी का दिल जीत लिया था।
रात में जब राजबती और दिव्या जब भोजन करने के बाद बेड पर आराम कर रही थी।
राजवती _बेटी, यहां के लोग तुमसे बहुत प्रेम करने लगें है अपनी त्याग समर्पण और व्यवहार से तुमने कुछ ही दिनो मे सबका दिल जीत लिया है।
मै तुम्हारे आने के पहले बहुत चिंतित थी बेटी।
दिव्या _किस बात के लिए नानी।
राजवती _बेटी मै चिंतित थी की मेरे बाद इस आश्रम का क्या होगा। कोन सम्हालेगा इसे। मै भगवान से हमेशा प्रार्थना करती थी। इस आश्रम का वारिश के लिए। बेटी भगवान ने मेरी सुन ली। उसने तुम्हे यहां भेजा।
बेटी तुम मुझसे वादा करो, मेरे जाने के बाद, इस आश्रम को तुम सम्हालोगी।
दिव्या _नानी क्या आपको लगता है कि इतने बड़े आश्रम को मैं सम्हाल पाऊंगी।
राजवती _तुम्हारी काबिलियत देखकर ही मेने यह फैसला लिया है बेटी मेरे बाद तुम ही यहां की नई माता बनोगी।
एक दिन राजेश दिव्या को बहुत मिस कर रहा था। वह उस स्थान पर गया था। जहा दिव्या के साथ समय बिताया था।
वह रोड किनारे अपना बाइक रख कर।
वह उन स्थानों पर आगे बढ़ता गया। जहां दिव्या के साथ समय बिताया था।
शाम के समय गीता जिला कार्यालय से घर आ रही थी।
उसने राजेश का बाइक रोड किनारे खडा देखा उसने ड्राइवर को बाइक रोकने के लिए कहा।
गीता _ये तो राजेश का बाइक है, इस सुन सान जगह पर राजेश क्या कर रहा है!
वह अपने वाहन से उतरी और राजेश को इधर उधर ढूंढने लगी।
राजेश नदी किनारे बैठा हुआ था।
वह दिव्या को याद कर रहा था, उसके साथ जो गीत गाया था वो पल उसे याद आ रही थी।
Nice update
 
Top