Dharmendra Kumar Patel
Nude av or dp not allowed. Edited
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Sexyअब हाल ये था की दीदी तो मुझसे खुल के चुदना चाहती थी पर माँ अब भी संकोच में थी। मैं चाहता था की घर में मैं जब चाहूँ, जिसे चाहूँ , जहाँ चाहू चोद दू। अब मेरा लंड हमेशा शिकार की तलाश में रहता। एक दिन शाम हम बैठ टीवी देख रहे थे। मैंने माँ की गोद में सर रखा हुआ था और मेरा पैर दीदी के गोद में था। माँ ने साडी पहन राखी थी और दीदी हमेशा की तरह एक छोटी सी निक्कर और स्लिप में थी। मैंने भी बरमूडा और बनियान पहन रखा था। तभी अचानक से जोरदार बारिश होने लगी। दीदी ने कहा चल नहाते हैं। मैं तुरंत तैयार हो गया। दीदी ने माँ से कहा तो माँ ने पहले तो मना किया फिर तैयार हो गई।
अब आपको हमारे घर के बारे में बता दूँ। हमारा घर दोमंजिला है और आस पास के घरो से ऊँचा है। हमारी रेलिंग भी थोड़ी ऊँची है। मेरे सीने से बस थोड़ी ही नीची। एक कोने में इमरजेंसी पर्पज के लिए एक छोटा सा कमरा और बाथरूम बना था। कमरा तो स्टोर रूम में तब्दील हो चूका था पर बाथरूम यूज़ में था। वहीँ पास में एक बड़ी सी सीमेंटेड पानी की टंकी थी जिस के एक तरफ सीमेंट का ही बेंच सा बना रखा था।
बारिश धुआंधार हो रही थी। दीदी और मैं तो तुरंत बारिश में चले गए। माँ संकोच कर रही थी पर उन्हें भी मैंने और दीदी ने खींच लिया।
अब हम तीनो बारिश में भींग रहे थे। दीदी का स्लिप एकदम चिपक गया था। मेरी बनियान बह भींग गई थी। माँ अपनी साडी से खुद को ढकने की कोशिश में लगीं थी पर दीदी को तो ठरक सवार थी। उन्होंने माँ का पल्लू लिया और खींचने लगी।
माँ - क्या कर रही है।
दीदी - घर में तो चूचियां दिखाती फिरो और यहाँ साडी नहीं उतर रही।
माँ- भाई छत पर कोई देख लेगा।
दीदी - हम ऊंचाई पर हैं। हम सबको देख सकते हैं हमें कोई नहीं देख सकता।
माँ ने चारो तरफ देखा और फिर दीदी को उनकी वाली करने दी। अब माँ सिर्फ पेटीकोट ब्लाउज में थी। ब्लाउज तो पहले ही भींग चूका था।
पेटीकोट भी आगे पीछे दोनों तरफ से चिपक गई थी। माँ ने न ब्रा पहना था न ही पैंटी। उनकी गांड एकदम मस्त तबले जैसी लग रही थी।
दीदी का भी वही हाल था। तभी मैं भाग कर निचे अपना मोबाइल लाने गया। लाकर मैंने कमरे की खिड़की पर रख दिया और सेक्सी बरसात वाले गाने लगा दिए। गाना बजते ही दीदी ने मुझे पकड़ लिया और डांस करना शुरू कर दिया। उन्होंने माँ को भी खींच लिया डांस के लिए।
हम हम तीनो डांस कर रहे थे। डांस करते करते एक दुसरे से चिपक रहे थे। उनकी हालात देख मेरा लंड खड़ा हो गया। मेरी स्थिति देख दीदी ने माँ से गाना गाते हुए कहा - अम्मा देख तेरा लौंडा बिगड़ा जाए। अपनी माँ बहन को देख लंड खड़ा किया जाय। माँ हंसने लगी।
मैंने तभी दीदी की पिछवाड़े पर धीरे से एक चपत लगा दी। दीदी ने यही देख माँ के गांड पर चपत लगा दी। मैंने माँ को किस कर लिया। माँ भी मस्ती में थी उन्होंने दीदी को किस कर लिया। खेल चालू हो चूका था। मैंने अपना बनियान उतार दिया। दीदी ने भी मस्ती में अपना स्लिप उतार दिया। अब सिर्फ एक डिज़ाइनर ब्रा में थी। वो भी पूरा भींगा हुआ। उनके निप्पल टाइट होकर निकल चुके थे। सब लगभग दिख रहा था। माँ थोड़ा सकपकाई पर दीदी आगे बढ़ी और उनका ब्लॉउस पकड़ कर फाड़ दिया। चट चट करके सारे हुक टूट गए। उन्होंने माँ के ब्लॉउस को उतार दिया और उनके मुम्मे पीछे से जाकर पकड़ लिए। अब दीदी माँ के पीछे चिपक कर कड़ी थी। उन्होंने माँ के निप्पल निचोड़ते हुए मुझसे कहा - राज , तुझे मम्मी के मुम्मे पसंद हैं न।
मैंने कहा - बहुत
दीदी - माँ तेरे मुम्मे एकदम दुधारू गाय की तरह है। देखो न लड़का तड़प रहा है पीला दो।
माँ ने अब शरम तोड़ते हुए कहा - पी ले। मेरा दूध तो तुम दोनों के लिए है। पी लो।
मैंने आगे बढ़कर उनके मुम्मो पर हाथ लगा दिया और उनको किस कर लिया। दीदी ने कहा - बहनचोद ,मुझे भी किस कर लेगा तो तेरी जीभी घिस नहीं जाएगी।
मैंने माँ के गर्दन से ही सर आगे किया और दीदी को किस कर लिया। अब दीदी पीछे से माँ के मुम्मे दबा रही थी और मैं आगे से।
माँ - तुम दोनों दबाओगे या पियोगे भी। आह आह। आराम से।
फिर दीदी माँ को लेकर टंकी के पास गईं । मैं बेंच पर बैठ गया। दीदी ने माँ को टंकी से लगाकर चौपाया बना दिया और साइड से आकर उनके मुम्मे ऐसे दबाने लगीं जैसे दुह रही हो और मैं बछड़ा बना पीने लगा। ऊपर से बारिश की बुँदे गिर रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे माँ के स्तनों से सचमुच दूध निकल रहा हो।
माँ - आह , रराज बेटाआअअअअअ पी ले माँ का दूध। तेरी माँ एकदम दुधारू गाय है। तेरी बहन आ गई तो तुझे मिला नहीं था न। देख तेरी बहना ही तुझे पीला रही है। कितना खेल रखती है तेरा। आह आह। सरला तू मेरी प्यारी बेटी है। तू नहीं पीयेगी क्या। पी ना
अब दीदी भी मेरे बगल में बैठ गई और हम दोनों उनके मुम्मे पीने लगे।
माँ - आह कितना अच्छा लग रहा है। तुम दोनों के बचपन की याद आ गई। फिर माँ बैठ गई। मै उनके गोद में सर रख कर पीने लगा और दीदी ने दुसरे मुम्मे पर कब्ज़ा कर लिया।
माँ - ऐसे ही जब मैं राज को बचपन में दूध पिलाती थी और तू बहुत जिद करने लगती थी पीने के लिए। जब भी मैं राज को पिलाती तू दूसरा मुम्मा ऐसे ही चूसने लगती थी। आह आह राज के बाद तूने ही सबसे ज्यादा मेरा दूध पिया है इस लिए ही तुझमे मेरे जैसे ही गुण हैं।
मैं - काश इसमें आज भी दूध आता।
दीदी - साले , नहीं आता है तब भी तू इनसे लटका रहता है। आते तो दिन भर माँ के पल्लू में ही रहता। माँ सुधा दी फिर क्या करती थी।
माँ - मत याद दिला सुधा की। उसे तो कुछ और ही पीने की आदत थी। बड़ी थी न। उसे बड़ो का खेल पसंद था
मैं - माँ अब मैं भी बड़ा हो गया हूँ मुझे भी वो करने दो न
दीदी फिर अपना ब्रा खोल दिया और खड़ी हो गई। बोली - मेरे दोनों थनों में भी काश दूध होता।
माँ ने दीदी को अपने गोद में बिठा लिया। उमके मुम्मे दबाते हुए बोली - आ जायेंगे। तू तो मुझसे भी बड़ी दुधारू गाय निकलेगी।
माँ ने अब दीदी के मुम्मे पीने शुरू कर दिए। मैंने भी माँ की गोद से उठ कर दीदी का खली मुम्मा मुँह में भर लिया।
दीदी - सससस, आह क्या चूसती हो माँ। तुमने भाई को भी अच्छा सिखाया है। आह भाई तुम्हारा लौंडा तो तेरे जीजू से बड़ा है ही तेरी जीभ भी उनसे ज्यादा चटोरी है। पी जाओ मेरा दूध। जब असली वाला आएगा तो भी पिलाऊंगी। मेरा वादा है। आह आह मेरे भाई। पहला बच्चा मायके में ही होता है। तुझे पूरा मौका मिलेगा। आह आह।
दीदी ने अपने हाथ मेरे बरमूडा के अंदर डाला और मेरे लंड को बाहर निकाल लिया। माँ को दिखाते हुए बोली - माँ कितना प्यारा है न। लंबा , और गोल। कितना साफ़ रखता है भाई।
मैं अब बेकाबू हो रहा था। मैंने बोला - माँ का ही हेयर रेमोवेर यूज़ करता हूँ।
दीदी - माँ तुम खुद क्यों नहीं साफ़ कर देती हो इसका।
मेरी आहें निकल रही थी। मैंने कहा - कितना बदकिस्मत हूँ। ऊपर से बादल रो रहा है , निचे मेरा लंड। दो दो चूत हैं यहाँ पर एक भी नसीब नहीं।
दीदी तभी उठी और एकदम से कमर लहराते हुए अपने पेंट को उतार दिया और मेरी तरफ पीठ करके मेरे ऊपर बैठ गईं। मेर लंड उनके गांड की फांको से निकलता हुआ आगे उनकी चूत के दरवाजे पर दस्तक देने लगा। दीदी ने वैसे ही थोड़ी देर मेरे ऊपर कमर आगे पीछे किया।
माँ - क्यों तड़पा रही है मेरे बेटे को। जब खोल ही दिया है तो दे दे न।
दीदी - देने के लिए ही खोला है मेरी अम्मा। आज भाई को बहन की चूत तो मिलेगी ही। पर रोड़ा तू है
माँ - मैं कहा। कह तो रही हूँ दे दे।
दीदी - आज तुम्हे भी देनी होगी अपनी चूत। आज भाई अगर बहन चोदेगा तो माँ की भी चूत में घुसेगा। बोलो मंजूर है।
माँ - अब बचा ही क्या है।
दीदी ने फिर मेरे पैर बेंच के दोनों तरफ किया और अपने भी। आग हम दोनों का पैर बेंच पर लटक रहा था।
माँ दीदी की सामने दोनों तरफ पैर करके बैठ गई। उनका पेटीकोट कमर पर आ गया था।
अब दीदी धीरे से उठी और मेरे लंड को चूत पर सेट किया। बैठने वाली थी की मुझसे रहा नहीं गया और मैंने निचे से धक्का देकर उनकी चूत में अपना पूरा लंड घुसा दिया।
दीदी - बहनचोअअअअअ द, दे रही थी न। सब्र नहीं हुआ तुझे। आह , मार ही डाला रे। दीदी ने मुझे हिलने नहीं दिआ और जमकर मेरे लंड पर पूरा बैठ गईं। आह आह कितना लम्बा है रे। लगता है पहली बार चूत में लंड लिया है। आह माँ ये तो फाड़ देगा मेरी चूत को।
माँ दीदी के नजदीक आई और उनके मुम्मे को दबाते हुए बोली - अब समझ आया मैं क्यों नहीं दे रही थी। मेरी चूत ने खानदान के कितने लंड लिए होंगे पर यही असली मर्द है। मुझे भी इससे डर लगता है। तेरी चाची की तो फट ही गई थी।
दीदी - चाची बड़ी हिम्मत वाली है माँ। क्या करूँ ?
माँ - अब उखली में मुसल घुसा ही लिया है तो तेल पेरवा ही ले। तेल निकलेगा तो भी तो मैं पियूँगी।
अब दीदी ने धीरे धीरे मेरे लंड को थोड़ा सा निकाला और फिर अंदर ले लिया। मुझे लग रहा था की मेरा लंड जलती भट्ठी के अंदर है।
दीदी ने धीरे धीरे मेरे लंड पर कूदना शुरू कर दिया। उन्होंने मुझे पूरा कण्ट्रोल किया हुआ था तो सब उनके हाथ में था। मै पीछे से उनके मुम्मे पकड़ कर दबाने लगा।
दीदी - आह ससससस आह कितना बड़ा लंड दिया है माँ ने तुझे। मैं भी अपने बच्चे को खूब दूध पिलाऊंगी। उसका भी लंड बड़ा होगा। मामा के जैसा होगा। मेरी सेवा वो भी करेगा। आह आह तुझ पर झूलने में कितना मजा है। अब दीदी ने स्पीड बढ़ा दिया था। माँ ने अपना हाथ आगे बढ़ा कर दीदी की चूत को ऊपर से सहलाना शुरू कर दिया।
दीदी ने माँ को बोला - माँ थोड़ा ग्रीज लगाओ न। मेरी मुनिया को प्यार करो न।
अब माँ झुक गईं और दीदी की चूत पर अपना जीभ फेरने लगी। दीदी की चूत पर डबल अटैक था। माँ दीदी की चूत में अंदर बाहर जाते लंड को बीच बीच में चाट ले रही थी।
दीदी - आह आह माआआआआ मजा आ रहा है। भाई तू भी कुछ मेहनत कर लगा दे जोर।
अब मैंने निचे से धक्के लगाने शुरू किये।
मैं - क्या मस्त चूत है दीदी। एकदम कुँवारी। जीजा ने तुम्हे ठीक से चोदा नहीं है।
दीदी - नहीं रे , ऐसा नहीं है। प्यार तो करते हैं पर उनकी माँ के दूध में दम नहीं रहा होगा। लंड तेरे जैसा बड़ा नहीं है। आह मार जोर से मार स्पीड बढ़ा। मेरा आने वाला है आह आह आह आह बहन चोद ही ली तूने। स्स्सस्स्स्स रहा नहीं जा रहा। पेल दे। आह आह आह
दीदी ने अपनी चूत से आखिर कार नमकीन पानी छोड़ ही दिया। मेरे लंड ने भी उसी समय पिचकारी छोड़ दी। दीदी एकदम से मेरे लंड पर बैठी ही रही। माँ अपना काम कर रही थी। दीदी की चूत के पानी के साथ साथ मेरा वीर्य भी बाहर रिस रहा था। माँ यूज़ पूरा चाट रही थी। थोड़ी देर सुस्ताने के बाद दीदी उठी। उनकी चूत से मेरा लंड गप की आवाज के साथ बाहर आ गया। वो माँ को चूमने लगी। माँ के मुँह में जो रास था उसे चाटने लगीं। मेरा लंड अब भी खड़ा था। माहौल का असर था या फिर अगली चूत का इंतजार। दीदीको अपने गांड पर मेरे लंड का अहसास हुआ तो वो घूम गईं और बोली - क्या रे तेरा अभी तक शांत क्यों नहीं हुआ। माँ की मार कर ही मानेगा क्या ?
दीदी फिर मेरे लंड को चाट चाट कर साफ करने लगीं। माँ भी निचे बगल में आ गईं और उन्होंने भी मेरा लंड चाटना शुरू कर दिया। अब मेरा लंड फिर से तैयार था। पर उसे माँ की चूत चाहिए थी। दीदी समझ गई थी यही सही मौका है।
उन्होंने माँ से कहा - कितना सुन्दर है न तेरा लल्ला।
माँ - हां रे , गोल गोल सुन्दर। देख इसका चेहरा कितना लाल है।
दीदी - वो वही जाना चाहता है जहाँ से आया है। ले ले माँ इसे अपने शरण में ले ले। देख कितना तड़प रहा है।
माँ - अब तो लेना ही पड़ेगा सरला। बहुत तरसाया है इसे मैंने।
कह कर माँ उठी और मेरे होठो को किस कर लिया। फिर बोली - आजा मेरे लाल , तेरी माँ की चूत तैयार है तुम्हे अंदर लेने के लिए।
मैं उठ खड़ा हुआ। माँ ने अपना वही बेंच पर टिकाया और चौपाया बन गई। मै उठकर उनके पीछे गया और उनके पीछे से अपना लम्बा मुसल उनके चूत पर सेट कर लिया। दीदी माँ के सामने बैठी थी उन दोनों का लिप लॉक हो चूका था। मैंने अपना लैंड धीरे धीरे माँ की चूत में डालना शुरू किया मैन उन्हें तकलीफ नहीं देना चाहता था। उन्होंने मेरे लिए छूटों का इंतजाम जो किया था। मैन धीरे धीरे माँ को पीछे से धक्का लगा रहा था और दीदी ने माँ के जीभ को अपने मुँह में ले राखी थी। मैंने अब स्पीड बढ़ा दिया। क्या गजब की चूत थी माँ की। पापा के जाने के बाद से कुँवारी ही थी। मेरे लंड तो लग रहा था जैसे एकदम संकरी गली में फंसा हुआ हो। इतने गरम माहौल में माँ की चूत में पानी की वजह से चिकनाई तो थी पर मुझे बिलकुल भी ढीलापैन नहीं लग रहा था।
माँ - आह जैसा लगा था वैसा ही है तेरा लंड। एकदम गधे जैसा। आह आह आह। पेल ले अपनी माँ को। कर ले अपनी तमन्ना पूरी। बहुत तरसाया है न मैंने आज कर ले अपनी वाली। जोर से घुसा आह आह।
मेरा लंड पूरा टाइट था। दीदी को पेलने के बाद भी पूरा कड़क था। मेरी पेले की स्पीड बढ़ गई थी। माँ खड़े खड़े थक गई थी तो मैंने उन्हें सीधा किया और उनका एक पैर उठा कर बेंच पर कर दिया और सामने से अपना लंड उनकी चूत में घुसा कर पेलने लगा। माँ ने अपने बाहों को मेरे कंधे पर लपेट लिया था। अब माँ भी धक्के लगा रही थी।
माँ - क्या मस्त चोदता है रे तू। अब समझ आया छोटी (चाची) से लेकर तेरी बहन भी दीवानी हो गई है। पेल मेरे राजा पेल। आह आह । देख सरला मेरी चूत कितनी खुश है। तेरे पापा के जाने के बाद उसे लंड नसीब हुआ है वो भी इतना तगड़ा।
दीदी माँ के पीछे जाकर बैठ कर उनकी गांड चाट रही थी। बीच बीच में वो उनके चूतड़ों पर थप्पड़ भी मार रही थी।
माँ एक बार झाड़ चुकी थी पर मेरा लंड तो थकने का नाम ही नहीं ले रहा था।
माँ - आह इतनी पिलाई के बाद भी थका नहीं रे तू। तेरा लंड तो और भी बड़ा होता जा रहा है।
मै -अपने घर में गया है माँ। वहां इतना अच्छा लग रहा है उसे की निकलने को तैयार नहीं है। आज वो बहुत खुश है।
माँ - आज तो खुश होना ही है। बहन चोदने के बाद माँ भी जो चोदने को मिल गई।
दीदी ने तभी अपनी एक ऊँगली गीली करके माँ के गांड में घुसाने की कोशिश करने लगी
माँ - आउच , रंडी कहीं की। उसमे आज तक कुछ नहीं गया। तेरे बाप ने बहुत कोशिश की थी मारने की वो तक नहीं पा पाया। क्या कर रही है।
दीदी नई ऊँगली जितनी गई थी उतनी डाले रखी
माँ अब तड़प रही थी। माँ - आह मादरचोद क्या हुआ तेरे मुसल को। पेल मुझे। इतना बड़ा लौंड़ा रखे है और कोई गर्लफ्रेंड नहीं है। तुझे तीन तीन चूत मिल गई। और भी छूटें दिलाऊंगी , बस तुम मेरी चूत को पेलते रहना।
मैं - मेरी गदराई माँ। तू तो मेरी रानी है। पहला प्यार है। मैं चाहे जितनों को अपना बना लूँ पर तुझसे दूर कभी नाह जाऊंगा।
माँ - आह आह आह मैं टी आ गई रे। जल्दी कर। देख तेरी एक बहन ने तो चूत दे ही दिया है , सुधा तो कब से प्यासी है। उसकी भी दिलवा दूंगी। हम चारो एक साथ होंगे तो कितना मजा आएगा। आह तेरी गर्लफ्रेंड बह बनेगी। एक नहीं कई बनेगी। सब तेरे सामने चूत खोल कर कड़ी रहेंगी। आआ आ माआआआ फाड़ दिया रे।
माँ की गरम गरम बातें सुन कर मेरे अंदर का लावा फुटने को तैयार था। कुछ ही क्षणों में मै भी धराशाही हो गया। हम दोनों एक दुसरे के बाहों में थे। दीदी भी आकर हमसे लिपट गई। बारिश तो कब की थम चुकी थी पर यहाँ अलग ही बारिश हुई थी। मैं सबसे ज्यादा खुश था आखिर माँ की चूत मिल ही गई थी। अब मैं सरला दी और माँ के साथ फ्रीली सेक्स कर सकता था।
Shandaar updateहम दोनों अपने कमरे में पहुंचे और जैसे ही अंदर घुसे वहां देखा तो राजीव जीजा जी बेड पर बैठे थे। हमें देखते ही वो खड़े हो गए।
मैंने कहा - जीजा जी आप यहाँ कैसे ? कहाँ थे अभी तक ?
जीजा - एक चाभी मेरे पास भी है। मुझे बस सुधा की याद आ रही थी तो मैं चला आया। उस रात बगल के कमरे में सुधा की बहुत आवाज आ रही थी तो मैं थोड़ा परेशान हो गया था।
सुधा दी - आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है। मैं ठीक हूँ
जीजा - हां पता है तुम लोगों की मस्ती देख कर लग ही रहा है तुम सब खुश हो
सुधा दी इस बात से चिढ गई। बोली - तुम खुश रख पाते तो ये नौबत नहीं आती।
जीजा उदास होते हुए - हाँ मुझे पता है।
सुधा दी - तुम्हे ख़ाक पता है ? एक तुम्हारा खड़ा नहीं होता। खड़ा होता है को कुछ ही पल में वापस बैठ जाता है। और एक राज का है , लम्बा, मोटा , जोशीला। अभी अभी मामी की गांड मार कर आ रहा है। तुमसे तो चूत की आग भी नहीं बुझाई जाती।
जीजा एकदम शांत थे। मुझे आश्चर्य हो रहा था की वो दीदी जो कुछ समय पहले सेक्स करने को तैयार नहीं थी। इतना शर्म कर रही थी और यहाँ अभी एकदम बेशर्मो की तरह लंड, चूत और गांड किये जा रही है। खैर वो अपने पति से ऐसे बात कर सकती थी। तभी मुझे याद आया कि जीजा को ह्युमिलिएट करने में दीदी को बहुत मजा मिलता है। शायद उन्हें उसमे अलग ही किक मिलता हो। मुझे फिर भी जीजाजी के लिए बुरा लग रहा था।
मैंने कहा - जाने दो दीदी। जीजा जी सब ठीक है, आप जाओ आराम करो।
दीदी - ये भड़वा कहीं नहीं जायेगा। इससे कुछ नहीं उखड़ेगा। अगर मैं नंगी भी हो जॉन तो साले का लंड खड़ा नहीं होगा।
दीदी ने ये कहकर अपना टॉप और कैप्री उतार दिया। दोनों खैर पहले से गीले थे। उन्हें उतरना ही था। दीदी ने फिर अपना एक पैर बेड पर बैठे जीजा के जीजा के जांघो पर रख दिया। कहा - देख नज़दीक से देख तेरा खड़ा हुआ ?
जीजा जी का तो पता नहीं पर मेरा लंड जरूर खड़ा हो गया था। पर मैं अपनी जगह पर ही खड़ा था। दीदी ने गुर्राते हुए मुझे बुलाया - राआज
मैं चुपचाप उनके बगल में खड़ा हो गया। दीदी ने पेंट में बने मेरे तम्बू को दिखते हुए जीजा को बोला - देखा ये है मर्द , दूर से ही मेरा पिछवाड़ा देख कर ही अपना लंड खड़ा कर लिया।
दीदी ने फिर अपनी पैटी भी उतार दी और अपनी चूत जीजा के चेहरे के एकदम नजदीक ले गई और बोली - अब तेरा खड़ा होगा ?
जीजा का लंड तो सन्नाटा मार गया था। पर उनकी नजरे दीदी कि चूत पर थी।
दीदी ने उनको देख कर कहा - चल चाट , देख क्या रहा है।
जीजाजी एकदम पालतू कुत्ते कि तरह अपनी जीभ निकाल कर दीदी कि चूत चाटने लगे। मुझसे रहा नहीं गया। मैंने भी अपना शर्ट और पेंट उतार दिया और दीदी के पीछे खड़ा हो गया। मैंने अपना लंड दीदी के गांड में फंसा लिया। दीदी ने अपना कमर आगे पीछे करना शुरू किया।
दीदी ने आहें भरी और जीजा से कहा - आह ठीक से चाट , तेरे जीभ में भी दम नहीं है क्या। अंदर डाल। लंड से नहीं तो जीभ से चोद जैसे तेरी माँ करती है।
दीदी के कमर आगे पीछे करने के चक्कर में मेरा लंड पीछे से आगे चला गया और जीजा के जीभ से जा लगा। मुझे बड़ा ही अजीब लगा। मैंने तुरंत अपने को कमर पीछे कर लिया। मैंने दीदी के ब्रा को उतार दिया और दीदी के मुम्मे दबाने लगा। दीदी ने अपनी गर्दन पीछे मोदी और मेरे गर्दन के चारो और अपने बाहें डाल कर मुझे किस करने लगी। इससे उनकी चूत जीजा के चेहरे में घुस गई।
अब चूची मर्दन और चूत चुदाई से दीदी एकदम गरम हो चुकी थी। उन्होंने मुझे आगे किया और जीजा के बगल में बेड पर ही लिटा दिया।
उन्होंने मेरा लैंड पकड़ा और जीजा को दिखते हुए कहा - देख भड़वे ये होता है लंड। ऐसे लंड से औरत खुश होती है।
जीजा जी का चेहरा देखने लायक था। अब दीदी बिस्तर पर चढ़ गईं और मेरे दोनों तरफ पैर करके मेरे लंड को अपनी चूत में घुसाने लगी।
मेरा लंड कुछ ही पल में उनकी चूत में समा गया।
दीदी - आह , फट जाएगी मेरी चूत रे।
अब दीदी मेरे लंड के ऊपर उछलने लगी। उनके उछलने से उनके मुम्मे भी एक लय में उछाल रहे थे। दीदी की चूत ने तो पहले ही पानी छोड़ रखा था। उनके साथ साथ मैं भी निचे से धक्के लगा रहा था। कुछ ही पल में दीदी पुरे मजे में आ गई।
उन्होंने मस्ती में जीजा जी को फिर से ताने देना शुरू किया - देखो , इसे कहते हैं चुदाई। अंदर तक मजा देता है मेरा भाई। तुम तो मेरी सील तक नहीं तोड़ पाए। पूछ रहे थे न मैं क्यों चीख रही थी उस रात। पहली बार मेरी सील टूटी थी।
भाई तेजी से चोदो , दिखा दो अपने जीजा को की मर्द कैसे चोदते हैं। आह आह आह।
दीदी मस्ती में अपने मुम्मे भी दबाने लगी। जीजा आँखे फाड़े हम दोनों को देख रहे थे।
दीदी - आह , ससससस अब मेरी चूत तो गई। मेरा होने वाला है। भाई सम्भालो मुझे। हाय माआआआ
कुछ ही देर में दीदी की चूत ने दोबारा पानी छोड़ दिया। दीदी मेरे ऊपर निढाल होकर लेट गई। पर मेरा लंड अभी तो बस चार्ज हुआ था। मैंने दीदी को लेटा दिया। मैंने उनके दोनों टाँगे अपने कंधे पर रख लिया और उन्हें ताबड़तोड़ चोदने लगा।
मैंने कहा - दीदी चिंता न करो। जीजा की कोई गलती नहीं है। जब उनके बाप में दम नहीं तो उनमे कहा होगा। मैं तुम्हारा ध्यान रखूँगा। इतना मस्त माल जीजा ने बर्बाद कर दिया , पर कोई नहीं अब मैं हूँ न।
दीदी ने गुर्राकर पास बैठे जीजा को बोलै - इधर आ मादरचोद , देख चुदाई।
जीजा बेचारे पास में आ गए। मेरी कैपेसिटी देख उन्हें बहुत आश्चर्य हुआ। दीदी ने उनके हाथ को पकड़ लिया।
दीदी - देखो , कैसे औरत को सुख दिया जाता है। तेरे सामने इस लौंडे ने मेरा तीन बार पानी निकल दिया। भाई फाड़ दो मेरी चूत। बहुत तड़पी है बेचारी। ख़ुशी के आंसू बहाए जा रही है। आह आह।
मैंने झुक दीदी के मुम्मे मुँह में डाल लिया। दीदी अब बेचैन हो गई।
दीदी - माआआ , क्या खिलाया है अपने लड़के को मर्द नहीं घोडा है ये तो। चोदे ही जा रहा है। राजीव , तेरी माँ को भी इससे चुदवाउंगी , वो भी प्यासी लगती है। तेरी बहन तो वैसे भी चुदेगी। साले तेरे पुरे खानदान को चुदवाउंग। मुझे बहुत प्यासा रखा है। सबको सजा मिलेगी।
भाई तुझे इसके घर की हर औरत दिलवाऊंगी।
अब मेरा भी होने वाला था। मैंने कुछ ही देर में दीदी के चूत में ढेर सारा पानी छोड़ दिया।
दीदी - बना दे मुझे माँ भाई। छोड़ दे अपना पूरा पानी मेरे अंदर। भर दे मेरी बच्चेदानी।
दीदी ने अपनी चूत इस तरह से सिकोड़ ली जैसे मेरे लंड को चूस रही हो। मैं उनके ऊपर ही लेट गया। मेरा लंड अब भी उनकी चूत में था। पता नहीं दीदी कैसे अपने चूत से उसे चूस रही थी उसका कड़ापन जा ही नहीं रहा था।
इस पुरे घमासान में जीजा जी एक दर्शक की तरह बैठे थे। हमारी चुदाई ख़त्म होने के बाद वो उठे और दो गिलास में पानी लेकर आये।
हम दोनों फिर बैठ गए। दीदी ने पानी लिया और कहा - तुम्हारे इसी प्यार की वजह से मैं तुम्हे छोड़ नहीं रही राजी। बस चुदाई के अलावा तुम मेरा पूरा ख्याल रख लेते हो।
जीजाजी कुछ देर हमारे साथ बैठे और जाने लगे। जाते जाते उन्होंने मुझे गले लगाया और बोला - थैंक यू राज।
मैं उनको क्या ही बोलता। मैं और दीदी वहीँ थक कर लेते रहे और वो अपने कमरे में चले गए।