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Incest मेरी माँ, बहने और उनका परिवार

Who do you suggest Raj should fuck first?

  • Shweta

    Votes: 89 75.4%
  • Soniya

    Votes: 29 24.6%

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tharkiman

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अगले दिन सुबह नाश्ते के बाद फिर से मेरे कमरे में सरला दी और मामी ने जमावड़ा लगा लिया। पर इस बार उनके साथ मामा और शलभ जीजा भी थे । बड़े जीजा राजीव का कुछ पता ही नहीं था। किसी ने उनके बारे में पुछा ही नहीं। बात कल शाम उस न्यूड बीच की चलने लगी।
मामी ने सरला दी और जीजा को छेड़ते हुए कहा - तुम दोनों से तो बर्दास्त ही नहीं हुआ। वही सबके सामने ही शुरू हो गए।
सरला दी - अब हमाम में जब सब नंगे हो तो शर्माना कैसा ? आप कौन सा रुक गई। बालू से साणे निकले थे आप दोनों।
शलभ जीजा - पर हमारे राज साहब कहाँ छुप गए थे अपनी प्रेमिका को लेकर।
मैं - सब्र का फल मीठा होता है। हमें तो आगे चलकर एक टेंट मिल गया था। वहीँ बैठे थे।
मामा - बैठे थे या फिर हाहाहाहा
मैं - जो करने गए थे वही किया। अच्छे से किया। हाहाहाहाहा। आप बताओ खुश हो न
सुधा दी - मामी , आपको अब तो नाना से फुर्सत मिली। उम्मीद है मजा आ रहा होगा ?
मामी - हाँ , थोड़ा आराम है। वरना वहां तो पता ही नहीं चलता था शादी किससे हुई है ?
शलभ जीजा - वैसे आपको देख कर किसी का भी मन डोल जाये। नाना का कोई कसूर नहीं है।
मामी - देख सरला , तेरा मियां यहाँ भी बहक रहा है। तेरे होते मुझ पर नजर डाले हुए है।
सरला दी - मुझे कोई दिक्कत नहीं है। आप मामा से पूछ लो।
मामी - उनका भी जी कर गया अपनी प्यारी भांजी के संग खेलने को तो ?
अबकी जवाब शलभ जीजा ने दिया - मुझे कोई परेशानी नहीं है। आखिर सरला से उनका रिश्ता मुझसे पहले से है।
मुझे समझ नहीं आ रहा था कि ये क्या रंडी बाजी चल रही है। सब एक तरफ तो अपने पति से बच्चा पैदा करने आई है दूसरी तरफ दूसरों से चुदने को तैयार है। अभी मैं सोच ही रहा था कि मामी बोल पड़ी - मुझे भी कोई दिक्कत नहीं है पर फ्रंट डोर से सिर्फ मामा कि एंट्री अलाउड है।
दीदी - मेरा बैकडोर जाम है। अभी तो पति के लिए भी नहीं खुला है। फ्रंट डोर पर इस छुट्टी में सिर्फ शलभ का है। सो बस मामा खिलौने को छू भर सकते है।
मामा - मैं अपनी भांजियों को उनकी मर्जी के बिना कुछ भी नहीं करूँगा।
सुधा दी - तुम चारो को जो करना है करो। मुझे इन सब से दूर रखो।
मामी - हम्म पर राज का क्या ?
सुधा दी - राज अपनी मर्जी का मालिक है। वो जो चाहे सो करे।
मैं इन सब बातों से तंग आ गया था। मैंने कहा बकचोदी हो गई हो तो आज कहीं घूमने चले ? नहीं तो अपने कमरे में जाओ , थोड़ा समय बताओ एक दुसरे के लिए।
मामी ने मेरे गाल पर पप्पी दी और कहा - देखो जरा इस दीवाने को। सुधा के साथ खाट कबड्डी खेलनी है तो सीधे कह न।
सुधा दी बोली - चलो न कहीं घूमने चलते है।
सब बाहर घूमने के लिए तैयार हो गए। सभी तैयार होने के लिए अपने अपने कमरे में चले गए।
एक घंटे बाद सब तैयार होकर निकले। मर्दो ने हाफ पेंट और टी-शर्ट डाल लिया था। सरला दी ने एक छोट पेंट और उस पर एक लम्बा सा जालीदार शर्ट डाला था। शर्ट इतना लम्बा था कि पेंट उसके नीचे छुप गया था। दीदी ने एक कॉटन कैप्री और गुलाबी शर्ट डाली हुई थी। सबसे कातिल तो बड़ी मामी लग रही थी। एकदम हेरोइन कि तरह ढीली ढाली ट्रांसपेरेंट बीच ड्रेस डाली हुई थी जो मुश्किल से उनके जांघो तक आ रही थी। कंधे पर ये ड्रेस एक डोरी से टिकी हुई थी। उनकी पैंटी और ब्रा क्लेअरली दिख रहे थे। उनको देखते ही सभी के होश उड़ गए।
सरला दी ने कहा - यार मामी आप तो लग रहा है आज कईओं को घायल करोगी। देख लेना कहीं कोई उठा कर न ले जाये।
मामी - यहाँ तीन तीन मुस्टंडे हैं कोई कैसे ले जायेगा।
मैं - अगर इन्ही तीन मुस्टंडो में उठा लिया तो।
मामी - उठा ले। इनकी परवाह नहीं है।
सुधा दी - मामा देख लो।
मामी - तुम दिखाओ तो वो भी देख लेंगे।
उनकी इस बात से सब हंस पड़े।
हमने पहले होटल के बीच पर ही थोड़ा सा टाइम बिताया। लहरों के साथ साथ किनारे एक दुसरे के हाथों में हाथ हम तीनो एकदम नवविवाहित जोड़े जैसे लग रहे था। कुछ देर समय बिताने के बाद हम सबने वहीँ से एक एक बाइक ली और आस पास घूमने निकल पड़े। हमने वहां आस पास के कुछ चर्च देखे और कुछ मार्केट्स घूमे।
कुछ घंटे यूँ ही बिताने के बाद हम बागा बीच पहुंचे। वहां सरला दी और शलभ जीजा ने पैरासेलिंग के मजे लिए। सुधा दी डर रही थी तो मैं उनके साथ ही बैठा था । दीदी ने कई बार कहा कि मेरी चिंता न करो तुम जाओ। मामा मामी भी उनके साथ ही बैठे थे। आखिर में मैंने जेट स्की एन्जॉय करने का सोचा। जेट स्की करने से एकदम थ्रिल सा हो गया। लौट कर आया तो सरला दी और शलभ जीजा भी आ गए थे।
फिर ये हुआ कि क्या किया जाये। मैंने कहा सब चलते हैं बनाना राइड लेते हैं। सरला दी और शलभ जीजा तो झट से तैयार हो गए। मामा मामी और सुधा दी थोड़ा डर रहे थे। पर सबके कहने पर मान गए। सबसे पहले उस पर शलभ जीजा बैठे। उसके बाद सरला दी। मामी ने कहा मैं इतना आगे नहीं बैठूंगी। तो मामा को दीदी के पीछे बैठना पड़ा। खैर उनके तो मजे ही हो गए।
पता नहीं सुधा दी के मन में क्या था , उन्होंने कहा - मामी आप मेरे पीछे बैठ जाना।
मामा के पीछे सुधा दी। सुधा दी के पीछे मामी और लास्ट में मैं।
मामी ने मुझसे कहा - लल्ला मुझे संभल के रखा। गिरने मत देना।
मैं - आप कहो तो जिंदगी भर संभल लू। इस राइड का क्या ?
मैंने उनसे चिपक गया। सबने अपने आगे वाले के कमर पर हाथ लपटे कर अच्छे से पकड़ा हुआ था।
मेरा लंड मामी के पिछवाड़े से चिपकते ही अपनी हरकत करने लगा।
मैं बोलै - मामी अभी भी डर लग रहा हो तो मेरे खूंटे पर चढ़ जाओ। टोका कर रखूँगा।
मामी - तेरा खूंटा तो जोरदार है ही। पर अभी चढूँगी तो मजा नहीं आएगा।
खैर राइड स्टार्ट हुई। सबने एक दुसरे को जोर से पकड़ा हुआ था। मामा के पुरे मजे थे। आगे पीछे दोनों गदराई भांजीया थी। उन्होंने मौका देख कर कई बार सरला दी के चुचे पकड़ लिए थे। सरला दी भी पूरा मजा ले रही थी। मैंने भी मामी को कमर से पकड़ रखा था।
सच कहूँ तो मन कर रहा था कि राइड ख़त्म ही न हो। खैर कुछ मिंटो में राइड ख़त्म हुई।
मामा और मेरा लंड अपनी जगह से हिला हुआ थ। हम दोनों अपने लंड को एडजस्ट कर रहे थे।
तीनो महिलाओं कि चूचिया एकदम टाइट हो चुकी थी। सबके कपडे भींग चुके थे।
खेल तो शलभ जीजा के साथ हुआ था। उन्हें हम सबको देख कर अपने पर पछतावा हो रहा था। वो हम सबको देख कर कुछ सोच रहे थे। तभी मामी हँसते हुए बोली - शलभ बाबू , चिंता न करो। सरला के साथ मामा ने बस बच्चों वाला प्यार ही किया है।
सब हंस पड़े। मामा और शलभ जीजा झेंप पड़े।
मामी पुरे मूड में थी - पर आपके मामा कि ऐश हुई है। आगे पीछे दोनों तरफ से प्यार मिला।
सरला दी कहा छुप रहने वाली थी। उन्होंने कहा - मामा का तो पता नहीं पर आपने तो राज को बैकडोर से एंट्री नहीं दे दी न।
अब मामी कि झेंपने कि बारी थी।
सुधा दी बोली - सबके कपडे भींग गए हैं चलो होटल चलते हैं। मस्ती और एडवेंचर भी खूब हो लिया।
सरला दी कहा - हाँ शर्ट तो भींग ही गया है। पहनो न पहनो बराबर है। उन्होंने अपना शर्ट उतार दिया। वो निचे एक पेंट और ब्रा में थी। उनको देखते ही जीजा ने किस कर लिया।
दीदी का ये ड्रेस ओड नहीं लग रहा था। जहाँ टू पीस में लड़कियां घूम रही हों , वहां तो ये कुछ भी नहीं था।
खैर हम सब वापस लौट आये।
 

Iron Man

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sunoanuj

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tharkiman

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होटल पहुंचे तो वहां शाम की पूल पार्टी हो रही थी। बाइक खड़ा करके शलभ जीजा और सरला दी सीधे वहीँ हुस गए। दीदी ने अपना पेंट भी उतार दिया और सिर्फ ब्रा पैंटी में आ गई। उन दोनों को देख मामा और मामी भी मचल पड़े। मामा ने अपना शर्ट उतारा और वो भी अंदर चले गए। मामी ने भी अपनी मिनी उतार दी। वो अब सिर्फ पैंटी और ब्रा में थी।
मैंने दीदी से कहा तो वो बोलीं उनका मन नहीं है। मैंने सबके कपडे वहीँ एक तरफ से उठाया और एक खली बेंच पर मैं और दीदी बैठ गए।
पार्टी के माहौल की क्या ही कहें। क्या पूल में क्या पूल के बाहर, पूरी मस्ती चल रही थी। चरों तरफ रंगीन लाइट, डीजे म्यूजिक , स्नैक्स और ड्रिंक्स भी सर्व हो रहे थे। मोस्टली कपल थे। पुरे मस्ती में थे। एक दुसरे को किस करना , चिपक कर डांस करना सब हो रहा था। क्या जवान क्या अधेड़ सब कपल आपस में लगे हुए थे।
जो पूल में नहीं थे वो बाहर एक दुसरे से प्यार कर रहे थे। पूल में मैंने देखा जीजा ने दीदी के बूब्स दबाने शुरू कर दिए थे। दीदी भी मस्ती में थी। वही हाल मामा और मामी का था। तभी दीदी ने गौर किया की एक आदमी मामी के गांड को बार बार टच कर रहा है। मामी की गांड थी ही ऐसी। लगता था जैसे दो बड़े बड़े चिकने फ़लफ़्फ़ी बॉल्स सटा कर रख दिए गए हो। दीदी ने मुझे उस और दिखाया और कहा - तू जा। उस बन्दे के इरादे ठीक नहीं है। ऐसा ही करता रहा तो लड़ाई हो जाएगी।
मैंने कहा - मैं उसे ठीक कर देता हूँ। साले का हाथ तोड़ दूंगा।
दीदी - बेवकूफ है क्या ? तू चला जा। बन्दे को भगा तू उनका पिछवाड़ा बचा।
मैं दीदी के आईडिया पर हंस पड़ा। बोला - मेरे जाने से उनका पिछवाड़ा बचेगा या फटेगा।
दीदी मुश्कुरा कर बोली - उन्हें अपनों से कोई प्रॉब्लम नहीं है। दे दे उन्हें बैक डोर से मजा।
मैंने अपने कप उतार दिए और सिर्फ हाफ पेंट में पूल पर उतर गया। मैं कमर से थोड़े ऊपर पानी से चलते हुए मामी के पास पहुंचा। मामी ने मुझे देखते ही अपने बाँहों में पकड़ लिया।
उस बन्दे को समझ आ गया मैं उनके साथ हूँ। पर एक के साथ दो मर्द देख कर उससे रहा नहीं गया। उसने कहा - साली रंडी का एक से काम नहीं हो रहा था। मैं क्या कम था जो किसी और को बुला लिया।
मैंने पूल के अंदर से ही बन्दे की गोटिया और लंड जोर से पकड़ा और कहा - साले अभी दबा कर तोड़ दूंगा। किसी काम का नहीं रहेगा।
मामा और शलभ जीजा ने भी उसे घेर लिया। उस बन्दे का सारा नशा उतर गया और वो धीरे से सरक लिया।
शलभ जीजा वापस दीदी के पास चले गए। दीदी और जीजा ने भी कुछ ड्रिंक्स लिए थे। फुल मस्ती में वो आपस में लग पड़े।
पूल का माहौल गरम था। पानी के अंदर कइयों ने चुदाई का खेल शुरू कर दिया था।
मैं वहीँ मामा मामी पूल में डांस कर रहा था। मामी ने तभी मुझे होठो पर किस कर लिया और बोली - थैंक यू मेरे हीरो।
मैं मामी के नशीले होठो को पाकर अपने होश खो बैठा। तभी मामा बोले - ये क्या बच्चों वाला इनाम है ?
मामी ने फिर मुझे गले लगा लिया और मेरे कान में धीरे से कहा - देखो लल्ला बड़ा इनाम तो फिर कभी पर आज मेरे गांड की खुजली मिटा दो।
कहकर मामी ने मामा को गले लगा लिया। मैं मामी की बातों से गरम तो हो ही चूका था। मैंने मामी के पीछे जाकर चिपक गया। अब मामी मेरे और मामा के बीच में सैंडविच बानी हुई थी। म्यूजिक के ताल पर हम तीनो की कमर ऐसे हिल रहे थे जैसे मामी आगे और पीछे दोनों साइड से चुद रही हो। हम ऐसे नाचते हुए पूल के एक किनारे चले आये मैं पूल के किनारे साइड पर था मामी की पीठ मेरे सीने से , और मामा आगे से। मामा ने अपना लंड पेंट की ज़िप से निकल लिया था और मामी पैंटी सरका कर उनकी चूत में डाल दिया। मैंने अपना पेंट निचे किया और लंड बाहर कर लिया। अब मेरा लंड मामी के पिछवाड़े में फंसा हुआ था। मामा के हर धक्के से मेरा लंड मामी के गांड में ऐसे अंदर जाता जैसे मैं उनकी गांड मार रहा हूँ। मैंने सुधा दीदी को इशारा किया अपने तरफ आने का। सुधा दी भी मेरे पास आ गई। वो मेरे दोनों तरफ पूल में पैर लटका कर बैठ गई। अब मैं उनके जांघो के बीच में थे। दीदी ने झुक कर मुझे किस कर लिया। दीदी ने मेरे सर को अपने मुम्मो के बीच में रख लिया। उधर मामा मामी को जबरदस्त तरीके से पेले जा रहे थे।
मामी ने मुझे पीछे मुड़कर देखा और कहा - तुम तो मेरी खुजली बढ़ा रहे हो। खूंटा सिर्फ रगड़ने के लिए है क्या ?
मामी के ताव को देख मैंने उनकी पैंटी पीछे से सरकाया और अपना लंड उनके गांड के छेद पर रख दिया। मामा के अगले धक्के से मेरा लंड अपने आप ही अंदर हो गया मुझे तो जन्नत मिल गई थी। मुझे कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ रही थी। मामा और मामी के हर धक्के से मेरे लंड को अपने आप मजा मिल रहा था।
इतनी एक्ससाइटमेंट भरा माहौल था। चूँकि मामा मामी को पहले से चोद रहे थे उनका लंड थोड़े देर में जवाब दे गया। मामी भी झाड़ गई थी। पर मेरा नहीं हुआ था। मामा का लंड उनकी चूत से बाहर आ गया था। पर वो उनके आगे ही खड़े रहे। मैं अब मामी की गांड मार रहा था ।
मामी - आह राज, कितना खतरनाक हथियार छुपाये घूम रहे थे। गांड फाड़ दीया तुमने तो
मैं - दर्द हो तो मामी रहने दू।
मामी - ना लल्ला , इसी दर्द का मजा तो लेना था। मार लो मेरी गांड। बस चूत अभी नहीं मिलेगी। आह आह। सुधा तू किस्मत वाली है। इतने बड़े हथियार से चुद रही है। तेरा बच्चा भी इसके जैसा ही हो।
दीदी - ले लो मामी आप भी अंदर।
मामी- अभी तो मेरे लाल को गांड से ही संतोष करना पड़ेगा। पर बाद में जो मांगेगा वो दूंगी। पेल जोर से पेल।
मेरा लंड भी जवाब देने वाला था। मैंने मामी के मुम्मे जोर से दबाये और अपने धक्के तेज का दिए। कुछ ही देर में मेरे लंड ने भी पानी छोड़ दिया। मैं थक कर दीदी के सीने पर सर रख दिया। मामी को मामा ने संभाल लिया। कुछ पल बाद मेरी नजर खुली तो देखा बगल में सरला दी और जीजा मुस्कुरा रहे थे। जीजा ने कहा - आखिर किला फ़तेह कर ही लिया तुमने।
मैं - मौका तो आपके पास भी था।
जीजा - अभी मैं अपनी वाली से ही खुश हूँ। मामी कौन सा भाग रही है।
कुछ देर बाद हम सब अपने अपने कमरे की तरफ चल दिए। मैंने मामी के कान में कहा - रात हमारे कमरे में ही औ न।
मामी ने कहा - सुधा को दिक्कत न हो कोई।
सुधा दी ने बात सुन ली थी - उन्होंने कहा - मेरा मर्द जिसमे खुश रहे , मैं उसी में खुश हूँ।
मामी - देखते है फिर तो।
 
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