होटल पहुंचे तो वहां शाम की पूल पार्टी हो रही थी। बाइक खड़ा करके शलभ जीजा और सरला दी सीधे वहीँ हुस गए। दीदी ने अपना पेंट भी उतार दिया और सिर्फ ब्रा पैंटी में आ गई। उन दोनों को देख मामा और मामी भी मचल पड़े। मामा ने अपना शर्ट उतारा और वो भी अंदर चले गए। मामी ने भी अपनी मिनी उतार दी। वो अब सिर्फ पैंटी और ब्रा में थी।
मैंने दीदी से कहा तो वो बोलीं उनका मन नहीं है। मैंने सबके कपडे वहीँ एक तरफ से उठाया और एक खली बेंच पर मैं और दीदी बैठ गए।
पार्टी के माहौल की क्या ही कहें। क्या पूल में क्या पूल के बाहर, पूरी मस्ती चल रही थी। चरों तरफ रंगीन लाइट, डीजे म्यूजिक , स्नैक्स और ड्रिंक्स भी सर्व हो रहे थे। मोस्टली कपल थे। पुरे मस्ती में थे। एक दुसरे को किस करना , चिपक कर डांस करना सब हो रहा था। क्या जवान क्या अधेड़ सब कपल आपस में लगे हुए थे।
जो पूल में नहीं थे वो बाहर एक दुसरे से प्यार कर रहे थे। पूल में मैंने देखा जीजा ने दीदी के बूब्स दबाने शुरू कर दिए थे। दीदी भी मस्ती में थी। वही हाल मामा और मामी का था। तभी दीदी ने गौर किया की एक आदमी मामी के गांड को बार बार टच कर रहा है। मामी की गांड थी ही ऐसी। लगता था जैसे दो बड़े बड़े चिकने फ़लफ़्फ़ी बॉल्स सटा कर रख दिए गए हो। दीदी ने मुझे उस और दिखाया और कहा - तू जा। उस बन्दे के इरादे ठीक नहीं है। ऐसा ही करता रहा तो लड़ाई हो जाएगी।
मैंने कहा - मैं उसे ठीक कर देता हूँ। साले का हाथ तोड़ दूंगा।
दीदी - बेवकूफ है क्या ? तू चला जा। बन्दे को भगा तू उनका पिछवाड़ा बचा।
मैं दीदी के आईडिया पर हंस पड़ा। बोला - मेरे जाने से उनका पिछवाड़ा बचेगा या फटेगा।
दीदी मुश्कुरा कर बोली - उन्हें अपनों से कोई प्रॉब्लम नहीं है। दे दे उन्हें बैक डोर से मजा।
मैंने अपने कप उतार दिए और सिर्फ हाफ पेंट में पूल पर उतर गया। मैं कमर से थोड़े ऊपर पानी से चलते हुए मामी के पास पहुंचा। मामी ने मुझे देखते ही अपने बाँहों में पकड़ लिया।
उस बन्दे को समझ आ गया मैं उनके साथ हूँ। पर एक के साथ दो मर्द देख कर उससे रहा नहीं गया। उसने कहा - साली रंडी का एक से काम नहीं हो रहा था। मैं क्या कम था जो किसी और को बुला लिया।
मैंने पूल के अंदर से ही बन्दे की गोटिया और लंड जोर से पकड़ा और कहा - साले अभी दबा कर तोड़ दूंगा। किसी काम का नहीं रहेगा।
मामा और शलभ जीजा ने भी उसे घेर लिया। उस बन्दे का सारा नशा उतर गया और वो धीरे से सरक लिया।
शलभ जीजा वापस दीदी के पास चले गए। दीदी और जीजा ने भी कुछ ड्रिंक्स लिए थे। फुल मस्ती में वो आपस में लग पड़े।
पूल का माहौल गरम था। पानी के अंदर कइयों ने चुदाई का खेल शुरू कर दिया था।
मैं वहीँ मामा मामी पूल में डांस कर रहा था। मामी ने तभी मुझे होठो पर किस कर लिया और बोली - थैंक यू मेरे हीरो।
मैं मामी के नशीले होठो को पाकर अपने होश खो बैठा। तभी मामा बोले - ये क्या बच्चों वाला इनाम है ?
मामी ने फिर मुझे गले लगा लिया और मेरे कान में धीरे से कहा - देखो लल्ला बड़ा इनाम तो फिर कभी पर आज मेरे गांड की खुजली मिटा दो।
कहकर मामी ने मामा को गले लगा लिया। मैं मामी की बातों से गरम तो हो ही चूका था। मैंने मामी के पीछे जाकर चिपक गया। अब मामी मेरे और मामा के बीच में सैंडविच बानी हुई थी। म्यूजिक के ताल पर हम तीनो की कमर ऐसे हिल रहे थे जैसे मामी आगे और पीछे दोनों साइड से चुद रही हो। हम ऐसे नाचते हुए पूल के एक किनारे चले आये मैं पूल के किनारे साइड पर था मामी की पीठ मेरे सीने से , और मामा आगे से। मामा ने अपना लंड पेंट की ज़िप से निकल लिया था और मामी पैंटी सरका कर उनकी चूत में डाल दिया। मैंने अपना पेंट निचे किया और लंड बाहर कर लिया। अब मेरा लंड मामी के पिछवाड़े में फंसा हुआ था। मामा के हर धक्के से मेरा लंड मामी के गांड में ऐसे अंदर जाता जैसे मैं उनकी गांड मार रहा हूँ। मैंने सुधा दीदी को इशारा किया अपने तरफ आने का। सुधा दी भी मेरे पास आ गई। वो मेरे दोनों तरफ पूल में पैर लटका कर बैठ गई। अब मैं उनके जांघो के बीच में थे। दीदी ने झुक कर मुझे किस कर लिया। दीदी ने मेरे सर को अपने मुम्मो के बीच में रख लिया। उधर मामा मामी को जबरदस्त तरीके से पेले जा रहे थे।
मामी ने मुझे पीछे मुड़कर देखा और कहा - तुम तो मेरी खुजली बढ़ा रहे हो। खूंटा सिर्फ रगड़ने के लिए है क्या ?
मामी के ताव को देख मैंने उनकी पैंटी पीछे से सरकाया और अपना लंड उनके गांड के छेद पर रख दिया। मामा के अगले धक्के से मेरा लंड अपने आप ही अंदर हो गया मुझे तो जन्नत मिल गई थी। मुझे कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ रही थी। मामा और मामी के हर धक्के से मेरे लंड को अपने आप मजा मिल रहा था।
इतनी एक्ससाइटमेंट भरा माहौल था। चूँकि मामा मामी को पहले से चोद रहे थे उनका लंड थोड़े देर में जवाब दे गया। मामी भी झाड़ गई थी। पर मेरा नहीं हुआ था। मामा का लंड उनकी चूत से बाहर आ गया था। पर वो उनके आगे ही खड़े रहे। मैं अब मामी की गांड मार रहा था ।
मामी - आह राज, कितना खतरनाक हथियार छुपाये घूम रहे थे। गांड फाड़ दीया तुमने तो
मैं - दर्द हो तो मामी रहने दू।
मामी - ना लल्ला , इसी दर्द का मजा तो लेना था। मार लो मेरी गांड। बस चूत अभी नहीं मिलेगी। आह आह। सुधा तू किस्मत वाली है। इतने बड़े हथियार से चुद रही है। तेरा बच्चा भी इसके जैसा ही हो।
दीदी - ले लो मामी आप भी अंदर।
मामी- अभी तो मेरे लाल को गांड से ही संतोष करना पड़ेगा। पर बाद में जो मांगेगा वो दूंगी। पेल जोर से पेल।
मेरा लंड भी जवाब देने वाला था। मैंने मामी के मुम्मे जोर से दबाये और अपने धक्के तेज का दिए। कुछ ही देर में मेरे लंड ने भी पानी छोड़ दिया। मैं थक कर दीदी के सीने पर सर रख दिया। मामी को मामा ने संभाल लिया। कुछ पल बाद मेरी नजर खुली तो देखा बगल में सरला दी और जीजा मुस्कुरा रहे थे। जीजा ने कहा - आखिर किला फ़तेह कर ही लिया तुमने।
मैं - मौका तो आपके पास भी था।
जीजा - अभी मैं अपनी वाली से ही खुश हूँ। मामी कौन सा भाग रही है।
कुछ देर बाद हम सब अपने अपने कमरे की तरफ चल दिए। मैंने मामी के कान में कहा - रात हमारे कमरे में ही औ न।
मामी ने कहा - सुधा को दिक्कत न हो कोई।
सुधा दी ने बात सुन ली थी - उन्होंने कहा - मेरा मर्द जिसमे खुश रहे , मैं उसी में खुश हूँ।
मामी - देखते है फिर तो।