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Congratulations on your new story
Thank to All of you bottom of My Heart Guysbadhiya update
Nice and beautiful update....अपडेट - 1मृतपाय सी धरातल को अपने अमृत समी बूंदों से भिगोने के बाद मेघराजा ने थोड़ी देर के लिए विराम लिया था लेकिन बारिश की कुछ बिन्दु अभी भी धरा में प्राण फूंक रहे थे,उमस भरी गर्मी से निस्तार करके (छुटकारा दिलाना) भीनी मिट्टी की खुशबू और गीली मिट्टी की ठंडक चारों ओर फैल गई थी। ऐसे में अहमदाबाद शहर में मिलन सिनेमा का आखिरी शो खत्म होने के बाद, लोग धीरे-धीरे थिएटर से निकल रहे थे।
साल 1992
वो समय जिसमें टेलीविज़न, रेडियो और सिनेमा ही मनोरंजन के मुख्य साधन थे और 90s की बॉलीवुड फिल्मों ने सिनेमा जगत में लोगों के दिलों-दिमाग़ पर अच्छा प्रभाव छोड़ा था। उन सिनेमा के दीवानों में सभी लोगों के साथ नीरव, संजय, कौशल और राघव नाम के चार दोस्त थिएटर से बाहर निकल रहे थे। हालांकि यह रात का आखिरी शो था, इसलिए भीड़ ज़्यादा नहीं थी। जैसे ही फिल्म खत्म हुई, सभी लोग अपने-अपने घरों के लिए निकल रहे थे।
संजय और कौशल का घर थोड़ा दूर था, इसलिए वे दोनों साइकिल लाए थे, जबकि थियेटर से पास के इलाके में रहने वाले नीरव और राघव दोनों पैदल जा रहे थे,"अबे......माधुरी क्या कड़क माल है यार.......ऊपर से उस '.....धक-धक करने लगा....' वाले गाने ने तो पूरा लंड खड़ा कर दिया......साथ ही जो रंडियों की तरह आहें भर रही थी......ऊउउफफ्.......मन तो करता है पूरा लंड उसके मुंह में उतार दूं।"
राहुल की बात सुनकर तीनों दोस्त हंसने लगे।उसने अपनी बात पूरी करते हुए कहा,"पर सच कहूं तो माधुरी पति बहुत नसीबवाला होगा जिसे ऐसी बड़े बबले और कसी हुई गांड़वाली लड़की चोदने को मिलेगी।"
उस समय में इंटरनेट और मोबाइल की सुविधाएं नहीं थी इसलिए ज़्यादातर लोग अपनी आंखे सेकने और हवस मिटाने के लिए अश्लील गाने या B Grade Movies का सहारा लेते थे।
कौशल : लगता है ये आज रात को भाभी को सोने नहीं देगा। कौशल की बात सुनकर तीनों दोस्त ठहाके लगाने लगे।
राहुल : क्यों बे अगर तुझे ऐसी लड़की मिले तो तू उसे छोड़ देगा क्या?
संजय : वैसे बात तो इसने पते की कही है,माधुरी को देखकर सबका मूड बन गया है ऊपर से मौसम भी ऐसा मेहरबान हुआ है कि सबकी आग बीवी की चूत ही शांत कर पाएगी.......हाहाहाहा।
कौशल : पर लगता है नीरव को आज भी अपने हाथ से ही काम चलाना पड़ेगा....... हाहाहाहाआआआ........." यह कहकर तीनों दोस्त नीरव की तरफ देखकर जोरो से हंसने लगे,नीरव भी अपने चेहरे पर एक मुसकान लिए खड़ा रहा क्योंकि अपनी आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से उसके अलावा उसके सभी दोस्तों की शादी हों चुकी थी।साथ ही नीरव एक अच्छे दिल के साथ मजबूत इरादों वाला आदमी था,अपनी जिस्मानी प्यास बुझाने के लिए उसने किसी पराई स्त्री के साथ यौन संबंध नहीं बनाए थे,जवान औरतों के उपांगो को देखकर उसका दिल भी कभी मचलने लगता पर उसने खुदको हस्तमैथुन की क्रीड़ा का आदि नहीं बनाया था जो उसके व्यक्तित्व में उभर के दिखता था।
यही हंसी,मजाक और फिल्मों की बातें करते हुए चारों दोस्त चौराहे तक पहुँच गए। चारों तरफ शांति थी,शहर की उन गीली सड़कों पर इंसानों की मौजूदगी रेगिस्तान में पानी के समान लग रही थी, मानो सब लोग बारिश की ठंडक का मज़ा ले रहे हों और कुछ अपने घरों में मीठी नींद ले रहे हों तभी रात के 1 बजे शहर के बीचों-बीच स्थित अजरामर टावर का घंटा बजा और यह आवाज़ रात के चीर सन्नाटे में चारों तरफ फैल गई।
घड़ी की आवाज़ सुनकर संजय ने नीरव और राहुल से कहा, "चलो हम दोनों चलते हैं,नहीं तो पता नहीं बीवियां कब तक हमारे इंतज़ार में जागती रहेगी और आज तो हमें भी घर पहुंचने की जल्दी है" इतना कहकर वे दोनों अपने-अपने घर की ओर चल पड़े। आसमान अभी भी काले बादलों से ढका हुआ था और ये काले बादल रात के अंधेरे में सफ़ेद रुई समान लग रहे थे जिसकी आवाज सुनसान सड़को पर शेर के दहाड़ जैसी प्रतीत हो रही थी,नीरव और राहुल अपने घर की तरफ चलते हुए आगे बढ़ रहे थे, आसमान से गिरती बारिश की बूंदे खंभे की रोशनी से साफ़ दिख रही थीं।
अचानक राहुल ने नीरव की तरफ़ देखा और कहा,"सुन नीरव,हम आज बाहर घूम ही रहे हैं तो चल ना किशन से भी मिल लेते हैं,वैसे भी उससे मिले हुए बहुत दिन हो गए हैं।"
वैसे तो दोनों के घर रेलवे स्टेशन के पासवाले इलाके में ही थे लेकिन अचानक वहाँ जाने की बात सुनकर नीरव ने हैरानी से पूछा, "अभी!!?.....इस वक्त!?......जरा देख तो सही घड़ी में रात के 1 बज रहे हैं और हमें पता भी नहीं कि वो जाग रहा होगा या नहीं।"
"अबे, कैसी बात कर रहा है!? रात में भी ट्रेन की चहल-पहल रहती ही है तो तुम्हें लगता है कि वो सो गया होगा?"
राहुल की बातें सुनकर नीरव थोड़ी देर तक कुछ नहीं बोला, नीरव की आँखों में नींद साफ दिख रही थी इसलिए उसका जाने का बिल्कुल मन नहीं था पर राहुल उसे मनाने के लिए फिर कहता है,"अरे यार, वैसे भी कल छुट्टी है, तो कल जितना सोना है सो लेना.......वैसे भी,हम वहां ज्यादा देर नहीं बैठेंगे,उससे जल्दी ही मिलकर वापस चले आयेंगे।" राहुल की बातें सुनकर नीरव ने सिर्फ हाँ में सिर हिलाया और दोनों स्टेशन की तरफ चल पड़े।
वो दोनों स्टेशन तो पहुँच गए पर जब हम प्लेटफॉर्म पर पहुँचे तो देखा हर तरफ सन्नाटा छाया हुआ था,दूर से सिर्फ कुछ कुत्तों के भौंकने की आवाज़ आ रही थी।वैसे तो प्लेटफॉर्म लाइट की सुविधा थी लेकिन तेज़ बारिश की वजह से ज़्यादातर लाइटें बंद थीं,कुछ पुरानी 2-3 लाइट थी जो अपनी हल्की रोशनी बिखेर रही थीं।
स्टेशन के आसपास अच्छे-खासे पेड़ होने के कारण यहाँ शहर के बाकी हिस्सों से ज़्यादा ठंड थी, ठंडी हवाएं नीरव के शरीर को छू रही थी जो उसे निंद्रा की ओर धकेलने का काम रही थी।वह उबासी लेते हुए बोला,"यार राहुल,चल ना घर चलते हैं क्योंकि वैसे भी इस अंधेरे में किशन यहां कही दिखाई नहीं दे रहा है, वह सो गया होगा और अब अगर मैं भी यहाँ 10 मिनट खड़ा रहा तो यहीं सो जाऊँगा।”
नीरव की बातें सुनकर राहुल ने अपनी नज़र इधर-उधर घुमाई और उसकी नज़र एक बेंच पर जाकर रुक गई,"चल मेरे साथ" इतना बोलकर कहकर राहुल ने नीरव को अपने साथ चलने को कहा।दोनों बेंच के पास आकर खड़े हो गए। वहाँ, बेंच पर एक आदमी उन दोनों की तरफ पीठ करके चादर ओढ़े सो रहा था। राहुल ने उसे कंधे से पकड़कर दो-तीन बार जगाया, लेकिन वह नहीं उठा। राहुल ने किशन की ओढ़ी हुई चादर भी खींच ली लेकिन वो फिर भी आँखें बंद करके सोता रहा।
किशन को सोता देखकर नीरव ने राहुल से कहा,"अबे उसे सोने दे ना चूतिए,क्यों उसकी नींद खराब कर रहा है चल हम कल मिलने आएंगे।"
नीरव की बात सुनकर राहुल ने पास पड़ी पानी की बोतल उठाई और कहा,"अबे गांडू ऐसे मौके बड़ी मुश्किल से मिलते है तू बस देखता जा।”इतना कहकर उसने पानी की बोतल उठाकर किशन के मुंह पर उल्टा कर दिया, चेहरे पर ठंडे पानी का एहसास होते ही किशन हड़बड़ा कर खड़ा हो गया,"कौन...? कौन है....बे मादरचोद?"
किशन की इस हालत में देखकर नीरव और राघव ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगे। दोनों को हंसता देख किशन बोला,"क्यूं बे भोसड़ी वालों,आधी रात को तुम दोनों की मां मर गई जो तुम दूसरों की नींद खराब करने निकल पड़े हो।" किशन को इस तरह गुस्सा होते देख राहुल और भी ज़ोरो से हंसने लगा,"हंसना बंद कर गंडमरे और बताओ की इतनी रात को यहां क्या कर रहे हो?" आखिर में राहुल शांत हुआ और बोला,"अरे यार, तुमसे मिले हुए बहुत दिन हो गए थे और हम पिक्चर देखकर घर जा रहे थे, तो सोचा तुमसे मिल लेते हैं, जब यहां आए तो देखा कि तुम बड़े आराम से गहरी नींद में सो रहे हो,अब ऐसा मौका हम कैसे छोड़ सकते है।" यह कहकर राहुल फिर हंसने लगा।
"मुझे समझ जाना चाहिए था कि ये तेरे हरामी दिमाग की ही पैदाइश होगी।" उन दोनों के बातों के बीच नीरव ने इधर-उधर देखा और बोला, "अरे यार, राजू काका, किशोरभाई या ताऊजी कहां हैं? कोई दिख क्यों नहीं रहा?"
नीलेश की बातें सुनकर किशन ने आँखें मलते हुए कहा, "हाँ यार, किशोरभाई और राजू काका कल छुट्टी होने ही वजह से अपने गाँव गए हैं और ताऊजी आज बारिश की वजह से नहीं आए है वरना तुम्हें तो पता ही है उन सबका डेरा यही जमा हुआ होता है।" अभी वो तीनों बातें ही कर रहे थे कि स्टेशन की 2-3 लाइट्स जो जल रही थी वो एक-दो बार टिमटिमाई और बंध हो गई।
यह देखकर राहुल बोला, "हद है यार, बारिश की दो बूंदे गिरते ही रास्तों की लाइट खराब हो जाती है या पावर कट हो जाता है।" अब चारों तरफ घोर अंधकार फैल गया था,दूर से आती हल्की रोशनी इस वक्त थोड़ा उजाला कर रही थी और आसमान से चमकती बिजली चमकते हुए अपना प्रकाश बिखेर रही थी जिसके चमकार में वो जगह चमक उठती थी।ऐसा माहौल सबके दिलो की धड़कने बढ़ाने के लिए काफी था राहुल ने अपने थूक गला गिला करते हुए कहा,"अबे यार ये जगह तो रोज के मुकाबले किसी स्मशान घाट सी डरावनी लग रही है।"
किशन : क्यों बे इतने में तेरी फैट गई,ये सब तो आम बात है तू रुक मैं आता हूं।
इतना देखकर किशन एक कमरे में गया और लालटेन लेकर बाहर आया, उसने बाहर आकर लालटेन बेंच के किनारे रख दी जिसकी पीली रोशनी ने सबके चेहरे चमक उठे।
किशन ने राहुल की तरफ देखा और कहा, "अब तुमने मेरी नींद खराब कर दी है तो आज की चाय तुम्हारी तरफ से।" यह सुनकर राहुल खड़ा हुआ और बोला,"वो सब तो ठीक है, लेकिन इतनी रात में चाय कहाँ मिलेगी? क्योंकि स्टेशन के बाहर वाली चाय का स्टॉल तो बारिश की वजह से बंद है।"
किशन : वो सब मुझे नहीं पता तू चाहे तो मेरी मोटर-साइकल ले जा पर कही से भी मेरे लिए चाय लाकर दे।
"नहीं बे,इतनी रात को मैं अकेले कहीं नहीं जा रहा, अगर तुझे चाय पीनी है तो मेरे साथ चल।" राहुल की बात पर किशन ने उसके गले के पिछले हिस्से से पकड़कर कहा,"क्यों बे मेरी नींद हराम करने से पहले नहीं सोचा और अब अकेले जाने में जनानीयो गांड़ फट रही है।" किशन की बात पर राहुल कुछ नहीं बोला आखिर उसने अपना हाथ हटाते हुए कहा,"ठीक है चलो, मैं तुम्हारे साथ चलता हूँ लेकिन तुम्हे कुछ अंदाजा है कि इस वक्त चाय का कौनसा स्टॉल खुला होगा?"
"जब हम लोग इस तरफ आए थे तो राज सर्कल के पास एक टी स्टॉल खुला था शायद वहाँ से तुम्हारी चाय का इंतजाम हो जाए।" उन दोनों की बात के बीच में बोलते हुए नीरव ने कहा,"राहुल तूने कहा था कि हम दोनों किशन से मिलकर जल्द ही वापस आ जाएंगे और अब तुम दोनों फिर घूमने जा रहे हो!"
किशन : हम दोनों मतलब??!! तू हमारे साथ नहीं चल रहा?
नीरव : नहीं यार,मुझे पहले ही बहुत नींद आ रही थी मैंने इसे मना किया था फिर भी ये मुझे पकड़कर यहां ले आया।
किशन : देख भाई,इस झाट के बाल ने मेरी नींद हराम की है तो इसे तो मैं नहीं छोड़ने वाला पर तब तक तुझे आराम करना है तो यहां बेंच या फिर कमरे में जाकर सो सकते हो तुझे कोई परेशान नहीं करेगा क्योंकि आज का इंचार्ज तेरा भाई है।
इतना कहकर वो दोनों हंसने लगे।किशन की बात पर सहमत होते हुए नीरव ने कहा,"ठीक है तुम दोनों जाओ मैं यही आराम करता हूं।" नीरव की बात सुनकर किशन ने अपनी जेब से एक छोटी टॉर्च निकाली और दोनों उसकी रोशनी में चलते हुए स्टेशन के बाहर निकल गए।
उन लोगों के जाने के बाद फिर से शांति हो गई थी,नीरव ने कमरे में जाने से अच्छा बेंच पर ही लेटना ठीक समझा,उसने बेंच पर देखा तो एक तकिया और कंबल रखे हुए थे,लालटेन की पीली रोशनी इस मौसम में एक सुकून भरा एहसास दे रही थी।
नीरव ने आसपास अपनी नज़र घुमाई लेकिन कोहरे की एक परत मौसम में छाने लगी थी जिसकी वजह से उसे ज़्यादा दूर तक कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, ऊपर से बारिश भी फिर से शुरू हो गई थी,जिसकी वजह से वहाँ पानी की बूंदों के गिरने के अलावा दूसरी कोई आवाज़ नहीं आ रही थी।हवा के भीगे झोंके उसकी पलकों का भार बढ़ा रहे थे तभी एक सुरीली लड़की की आवाज उसके कानों में पड़ी जैसे वो आवाज आसपास गूंज रही हो।
सौ बरस गुज़रे साँस लिए, सौ बरस गुज़रे बिना जिए
आईने में जब देखती हूँ, मैं हूँ या कोई साया पिए।
काली रातें मेरी सहेली, चाँद भी मुझसे डर जाए,
कदमों की आहट पूछे मुझसे, कौन है जो साथ निभाए?
एक मधुर सी Siren Song जैसी आवाज नीरव को संमोहित कर रही थी, उसके दिमाग़ जैसे सुन्न पड़ गया था,कंबल ओढ़ने की वजह से एक गर्म सा एहसास उसके जिस्म में छाने लगा था जो उसके बदन को आराम पहुंचा रहा था।
धीरे-धीरे वो आवाज कम होती गई और वो आँखें बंध करके सो गया। चेहरे पर एक अलग ही शांति दिख रही थी, कंबल की वजह से मौसम की ठंड उसके बदन को बिन छुए गुजर रही थी।अभी कुछ पल ही बीते होंगे कि तभी एक औरत की दर्द भरी चीख से नीरव की नींद टूट गई।चीख सुनकर नीरव हड़बड़ाते हुए बैठ गया,उसे याद ही नहीं था कि वो कब सो गया,ख्यालों से बाहर आकर उसने आवाज की दिशा में अपनी नजर बढ़ाई तो रेलवे ट्रैक के अंधेरे हिस्से से वो आवाज आई थी,जिसे सुनकर अंदाजा लगा सकते है कि वो औरत जो कोई भी थी बहुत दर्द में होंगी इसलिए ज़्यादा टाइम बर्बाद किए बिना उसने पास पड़ी लालटेन उठाई और आवाज़ की दिशा में चल पड़ा।
रेलवे ट्रैक पर तेज़ी से चलते हुए आवाज़ की दिशा में आगे बढ़ रहा था,तेज़ धड़कन और साँसों के साथ उसके मन में कई सवाल घूम रहे थे,"वह औरत कौन हो सकती है? क्या हुआ होगा? इतनी अंधेरी रात में वह अकेली क्या कर रही होगी?" इन्हीं सब ख्यालों के साथ वो उस अंधेरे की तरफ़ बढ़ रहा था। हालाँकि, उसके हाथ में लालटेन था लेकिन उसकी रोशनी में दूर तक देख पाना मुमकिन नहीं था।
इसके साथ ही दूर से कुत्तों के रोने की आवाज़ उसका डर ओर बढ़ा रही थी। नीरव थोड़ा ही आगे बढ़ा होगा कि तभी उसे दूर रेलवे ट्रैक पर कुछ हिलता हुआ नजर आया। यह देखकर वह धीरे-धीरे उसकी तरफ़ बढ़ा
पर जैसे ही वो वह पहुंचा तो सामने का मंजर देखकर उसके हाथ से लालटेन गिर गया और इसके साथ वो भी उस काले अंधकार से घिर गया।
बरसात की ठंडी रात में भी नीरव के माथे पर पसीना आने लगा था क्योंकि उसके सामने इंसानी शरीर के कटे हुए टुकड़े पड़े थे। उसे देखकर लग रहा था कि जैसे कोई इंसान हाल ही में ट्रेन के नीचे कटकर मर गया होगा।वहां पड़े हुए हाथ, पैर, आंतों और मांस के कुचड़ो से निकले खून की वजह से जैसे वहां तालाब भर गया हो।
वहां पर एक से भी पड़ा हुआ था जो बुरी तरह से पिचक गया था,उसके लंबे बाल को देखकर समझ सकते है कि वो कोई स्त्री होगी पर इस वक्त को कोई ट्रेन नहीं आई तो फिर यह सब कैसे हो गया? वह अभी इन सब ख्यालों से बाहर भी नहीं निकला था कि उसे दूर से आती ट्रेन की व्हीसल सुनाई दी। उसने नज़रें हटाईं तो रात के 1:45 बज रहे थे और बांद्रा पैसेंजर एक्सप्रेस, कोहरे को चीरती हुई पूरी स्पीड से नीरव की तरफ बढ़ रही थी। नीरव को होश आने पर वहाँ से हटने के लिए अपना पैर आगे बढ़ाया, लेकिन उसके साथ ही उसे ज़ोर का झटका लगा। जब उसने
देखा कि उसका बायाँ पैर दो रेलवे ट्रैक के बीच फँस गया है।
आज के लिए सिर्फ इतना ही Guys,कहानी का पहला अपडेट कैसा लगा आपको यह कमेंट करके जरूर बताईए और क्या नीरव बच पाएगा यह जानने के लिए मैं मिलूंगा आपको जल्द ही एक नए अपडेट के साथ।
Thanks for Reading broNice and beautiful update....
अपडेट - 1मृतपाय सी धरातल को अपने अमृत समी बूंदों से भिगोने के बाद मेघराजा ने थोड़ी देर के लिए विराम लिया था लेकिन बारिश की कुछ बिन्दु अभी भी धरा में प्राण फूंक रहे थे,उमस भरी गर्मी से निस्तार करके (छुटकारा दिलाना) भीनी मिट्टी की खुशबू और गीली मिट्टी की ठंडक चारों ओर फैल गई थी। ऐसे में अहमदाबाद शहर में मिलन सिनेमा का आखिरी शो खत्म होने के बाद, लोग धीरे-धीरे थिएटर से निकल रहे थे।
साल 1992
वो समय जिसमें टेलीविज़न, रेडियो और सिनेमा ही मनोरंजन के मुख्य साधन थे और 90s की बॉलीवुड फिल्मों ने सिनेमा जगत में लोगों के दिलों-दिमाग़ पर अच्छा प्रभाव छोड़ा था। उन सिनेमा के दीवानों में सभी लोगों के साथ नीरव, संजय, कौशल और राघव नाम के चार दोस्त थिएटर से बाहर निकल रहे थे। हालांकि यह रात का आखिरी शो था, इसलिए भीड़ ज़्यादा नहीं थी। जैसे ही फिल्म खत्म हुई, सभी लोग अपने-अपने घरों के लिए निकल रहे थे।
संजय और कौशल का घर थोड़ा दूर था, इसलिए वे दोनों साइकिल लाए थे, जबकि थियेटर से पास के इलाके में रहने वाले नीरव और राघव दोनों पैदल जा रहे थे,"अबे......माधुरी क्या कड़क माल है यार.......ऊपर से उस '.....धक-धक करने लगा....' वाले गाने ने तो पूरा लंड खड़ा कर दिया......साथ ही जो रंडियों की तरह आहें भर रही थी......ऊउउफफ्.......मन तो करता है पूरा लंड उसके मुंह में उतार दूं।"
राहुल की बात सुनकर तीनों दोस्त हंसने लगे।उसने अपनी बात पूरी करते हुए कहा,"पर सच कहूं तो माधुरी पति बहुत नसीबवाला होगा जिसे ऐसी बड़े बबले और कसी हुई गांड़वाली लड़की चोदने को मिलेगी।"
उस समय में इंटरनेट और मोबाइल की सुविधाएं नहीं थी इसलिए ज़्यादातर लोग अपनी आंखे सेकने और हवस मिटाने के लिए अश्लील गाने या B Grade Movies का सहारा लेते थे।
कौशल : लगता है ये आज रात को भाभी को माधुरी समझ कर आगे पीछे से दबाकर पेलेगा,वैसी भी उनका भरा जिस्म किसी हीरोइन से कम थोड़े ही है ऊपर से उनके दो रसीले दूध...... ऊउउफफ्...."
राहुल : हा चल भोसडीके......इतनी ही ठरक जग रही है तो आज तू ही चढ़ जा मेरी बीवी के ऊपर और तेरी बीवी को मेरे पास भेज दे।
कौशल : वैसे ख्याल तो बुरा नहीं है।
कौशल की बात सुनकर तीनों दोस्त ठहाके लगाने लगे।कौशल और राहुल अय्याश किस्म के आदमी थे इसलिए उनके लिए यह सब आम बात थी।
राहुल : क्यों बे अगर तुझे ऐसी लड़की मिले तो तू उसे छोड़ देगा क्या?
संजय : वैसे बात तो इसने पते की कही है,माधुरी को देखकर सबका मूड बन गया है ऊपर से मौसम भी ऐसा मेहरबान हुआ है कि सबकी आग बीवी की चूत ही शांत कर पाएगी.......हाहाहाहा।
कौशल : पर लगता है नीरव को आज भी अपने हाथ से ही काम चलाना पड़ेगा....... हाहाहाहाआआआ........." यह कहकर तीनों दोस्त नीरव की तरफ देखकर जोरो से हंसने लगे,नीरव भी अपने चेहरे पर एक मुसकान लिए खड़ा रहा क्योंकि अपनी आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से उसके अलावा उसके सभी दोस्तों की शादी हों चुकी थी।साथ ही नीरव एक अच्छे दिल के साथ मजबूत इरादों वाला आदमी था,अपनी जिस्मानी प्यास बुझाने के लिए उसने किसी पराई स्त्री के साथ यौन संबंध नहीं बनाए थे,जवान औरतों के उपांगो को देखकर उसका दिल भी कभी मचलने लगता पर उसने खुदको हस्तमैथुन की क्रीड़ा का आदि नहीं बनाया था जो उसके व्यक्तित्व में उभर के दिखता था।
यही हंसी,मजाक और फिल्मों की बातें करते हुए चारों दोस्त चौराहे तक पहुँच गए। चारों तरफ शांति थी,शहर की उन गीली सड़कों पर इंसानों की मौजूदगी रेगिस्तान में पानी के समान लग रही थी, मानो सब लोग बारिश की ठंडक का मज़ा ले रहे हों और कुछ अपने घरों में मीठी नींद ले रहे हों तभी रात के 1 बजे शहर के बीचों-बीच स्थित अजरामर टावर का घंटा बजा और यह आवाज़ रात के चीर सन्नाटे में चारों तरफ फैल गई।
घड़ी की आवाज़ सुनकर संजय ने नीरव और राहुल से कहा, "चलो हम दोनों चलते हैं,नहीं तो पता नहीं बीवियां कब तक हमारे इंतज़ार में जागती रहेगी और आज तो हमें भी घर पहुंचने की जल्दी है" इतना कहकर वे दोनों अपने-अपने घर की ओर चल पड़े। आसमान अभी भी काले बादलों से ढका हुआ था और ये काले बादल रात के अंधेरे में सफ़ेद रुई समान लग रहे थे जिसकी आवाज सुनसान सड़को पर शेर के दहाड़ जैसी प्रतीत हो रही थी,नीरव और राहुल अपने घर की तरफ चलते हुए आगे बढ़ रहे थे, आसमान से गिरती बारिश की बूंदे खंभे की रोशनी से साफ़ दिख रही थीं।
अचानक राहुल ने नीरव की तरफ़ देखा और कहा,"सुन नीरव,हम आज बाहर घूम ही रहे हैं तो चल ना किशन से भी मिल लेते हैं,वैसे भी उससे मिले हुए बहुत दिन हो गए हैं।"
वैसे तो दोनों के घर रेलवे स्टेशन के पासवाले इलाके में ही थे लेकिन अचानक वहाँ जाने की बात सुनकर नीरव ने हैरानी से पूछा, "अभी!!?.....इस वक्त!?......जरा देख तो सही घड़ी में रात के 1 बज रहे हैं और हमें पता भी नहीं कि वो जाग रहा होगा या नहीं।"
"अबे, कैसी बात कर रहा है!? रात में भी ट्रेन की चहल-पहल रहती ही है तो तुम्हें लगता है कि वो सो गया होगा?"
राहुल की बातें सुनकर नीरव थोड़ी देर तक कुछ नहीं बोला, नीरव की आँखों में नींद साफ दिख रही थी इसलिए उसका जाने का बिल्कुल मन नहीं था पर राहुल उसे मनाने के लिए फिर कहता है,"अरे यार, वैसे भी कल छुट्टी है, तो कल जितना सोना है सो लेना.......वैसे भी,हम वहां ज्यादा देर नहीं बैठेंगे,उससे जल्दी ही मिलकर वापस चले आयेंगे।" राहुल की बातें सुनकर नीरव ने सिर्फ हाँ में सिर हिलाया और दोनों स्टेशन की तरफ चल पड़े।
वो दोनों स्टेशन तो पहुँच गए पर जब हम प्लेटफॉर्म पर पहुँचे तो देखा हर तरफ सन्नाटा छाया हुआ था,दूर से सिर्फ कुछ कुत्तों के भौंकने की आवाज़ आ रही थी।वैसे तो प्लेटफॉर्म लाइट की सुविधा थी लेकिन तेज़ बारिश की वजह से ज़्यादातर लाइटें बंद थीं,कुछ पुरानी 2-3 लाइट थी जो अपनी हल्की रोशनी बिखेर रही थीं।
स्टेशन के आसपास अच्छे-खासे पेड़ होने के कारण यहाँ शहर के बाकी हिस्सों से ज़्यादा ठंड थी, ठंडी हवाएं नीरव के शरीर को छू रही थी जो उसे निंद्रा की ओर धकेलने का काम रही थी।वह उबासी लेते हुए बोला,"यार राहुल,चल ना घर चलते हैं क्योंकि वैसे भी इस अंधेरे में किशन यहां कही दिखाई नहीं दे रहा है, वह सो गया होगा और अब अगर मैं भी यहाँ 10 मिनट खड़ा रहा तो यहीं सो जाऊँगा।”
नीरव की बातें सुनकर राहुल ने अपनी नज़र इधर-उधर घुमाई और उसकी नज़र एक बेंच पर जाकर रुक गई,"चल मेरे साथ" इतना बोलकर कहकर राहुल ने नीरव को अपने साथ चलने को कहा।दोनों बेंच के पास आकर खड़े हो गए। वहाँ, बेंच पर एक आदमी उन दोनों की तरफ पीठ करके चादर ओढ़े सो रहा था। राहुल ने उसे कंधे से पकड़कर दो-तीन बार जगाया, लेकिन वह नहीं उठा। राहुल ने किशन की ओढ़ी हुई चादर भी खींच ली लेकिन वो फिर भी आँखें बंद करके सोता रहा।
किशन को सोता देखकर नीरव ने राहुल से कहा,"अबे उसे सोने दे ना चूतिए,क्यों उसकी नींद खराब कर रहा है चल हम कल मिलने आएंगे।"
नीरव की बात सुनकर राहुल ने पास पड़ी पानी की बोतल उठाई और कहा,"अबे गांडू ऐसे मौके बड़ी मुश्किल से मिलते है तू बस देखता जा।”इतना कहकर उसने पानी की बोतल उठाकर किशन के मुंह पर उल्टा कर दिया, चेहरे पर ठंडे पानी का एहसास होते ही किशन हड़बड़ा कर खड़ा हो गया,"कौन...? कौन है....बे मादरचोद?"
किशन की इस हालत में देखकर नीरव और राघव ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगे। दोनों को हंसता देख किशन बोला,"क्यूं बे भोसड़ी वालों,आधी रात को तुम दोनों की मां मर गई जो तुम दूसरों की नींद खराब करने निकल पड़े हो।" किशन को इस तरह गुस्सा होते देख राहुल और भी ज़ोरो से हंसने लगा,"हंसना बंद कर गंडमरे और बताओ की इतनी रात को यहां क्या कर रहे हो?" आखिर में राहुल शांत हुआ और बोला,"अरे यार, तुमसे मिले हुए बहुत दिन हो गए थे और हम पिक्चर देखकर घर जा रहे थे, तो सोचा तुमसे मिल लेते हैं, जब यहां आए तो देखा कि तुम बड़े आराम से गहरी नींद में सो रहे हो,अब ऐसा मौका हम कैसे छोड़ सकते है।" यह कहकर राहुल फिर हंसने लगा।
"मुझे समझ जाना चाहिए था कि ये तेरे हरामी दिमाग की ही पैदाइश होगी।" उन दोनों के बातों के बीच नीरव ने इधर-उधर देखा और बोला, "अरे यार, राजू काका, किशोरभाई या ताऊजी कहां हैं? कोई दिख क्यों नहीं रहा?"
नीलेश की बातें सुनकर किशन ने आँखें मलते हुए कहा, "हाँ यार, किशोरभाई और राजू काका कल छुट्टी होने ही वजह से अपने गाँव गए हैं और ताऊजी आज बारिश की वजह से नहीं आए है वरना तुम्हें तो पता ही है उन सबका डेरा यही जमा हुआ होता है।" अभी वो तीनों बातें ही कर रहे थे कि स्टेशन की 2-3 लाइट्स जो जल रही थी वो एक-दो बार टिमटिमाई और बंध हो गई।
यह देखकर राहुल बोला, "हद है यार, बारिश की दो बूंदे गिरते ही रास्तों की लाइट खराब हो जाती है या पावर कट हो जाता है।" अब चारों तरफ घोर अंधकार फैल गया था,दूर से आती हल्की रोशनी इस वक्त थोड़ा उजाला कर रही थी और आसमान से चमकती बिजली चमकते हुए अपना प्रकाश बिखेर रही थी जिसके चमकार में वो जगह चमक उठती थी।ऐसा माहौल सबके दिलो की धड़कने बढ़ाने के लिए काफी था राहुल ने अपने थूक गला गिला करते हुए कहा,"अबे यार ये जगह तो रोज के मुकाबले किसी स्मशान घाट सी डरावनी लग रही है।"
किशन : क्यों बे इतने में तेरी फैट गई,ये सब तो आम बात है तू रुक मैं आता हूं।
इतना देखकर किशन एक कमरे में गया और लालटेन लेकर बाहर आया, उसने बाहर आकर लालटेन बेंच के किनारे रख दी जिसकी पीली रोशनी ने सबके चेहरे चमक उठे।
किशन ने राहुल की तरफ देखा और कहा, "अब तुमने मेरी नींद खराब कर दी है तो आज की चाय तुम्हारी तरफ से।" यह सुनकर राहुल खड़ा हुआ और बोला,"वो सब तो ठीक है, लेकिन इतनी रात में चाय कहाँ मिलेगी? क्योंकि स्टेशन के बाहर वाली चाय का स्टॉल तो बारिश की वजह से बंद है।"
किशन : वो सब मुझे नहीं पता तू चाहे तो मेरी मोटर-साइकल ले जा पर कही से भी मेरे लिए चाय लाकर दे।
"नहीं बे,इतनी रात को मैं अकेले कहीं नहीं जा रहा, अगर तुझे चाय पीनी है तो मेरे साथ चल।" राहुल की बात पर किशन ने उसके गले के पिछले हिस्से से पकड़कर कहा,"क्यों बे मेरी नींद हराम करने से पहले नहीं सोचा और अब अकेले जाने में जनानीयो गांड़ फट रही है।" किशन की बात पर राहुल कुछ नहीं बोला आखिर उसने अपना हाथ हटाते हुए कहा,"ठीक है चलो, मैं तुम्हारे साथ चलता हूँ लेकिन तुम्हे कुछ अंदाजा है कि इस वक्त चाय का कौनसा स्टॉल खुला होगा?"
"जब हम लोग इस तरफ आए थे तो राज सर्कल के पास एक टी स्टॉल खुला था शायद वहाँ से तुम्हारी चाय का इंतजाम हो जाए।" उन दोनों की बात के बीच में बोलते हुए नीरव ने कहा,"राहुल तूने कहा था कि हम दोनों किशन से मिलकर जल्द ही वापस आ जाएंगे और अब तुम दोनों फिर घूमने जा रहे हो!"
किशन : हम दोनों मतलब??!! तू हमारे साथ नहीं चल रहा?
नीरव : नहीं यार,मुझे पहले ही बहुत नींद आ रही थी मैंने इसे मना किया था फिर भी ये मुझे पकड़कर यहां ले आया।
किशन : देख भाई,इस झाट के बाल ने मेरी नींद हराम की है तो इसे तो मैं नहीं छोड़ने वाला पर तब तक तुझे आराम करना है तो यहां बेंच या फिर कमरे में जाकर सो सकते हो तुझे कोई परेशान नहीं करेगा क्योंकि आज का इंचार्ज तेरा भाई है।
इतना कहकर वो दोनों हंसने लगे।किशन की बात पर सहमत होते हुए नीरव ने कहा,"ठीक है तुम दोनों जाओ मैं यही आराम करता हूं।" नीरव की बात सुनकर किशन ने अपनी जेब से एक छोटी टॉर्च निकाली और दोनों उसकी रोशनी में चलते हुए स्टेशन के बाहर निकल गए।
उन लोगों के जाने के बाद फिर से शांति हो गई थी,नीरव ने कमरे में जाने से अच्छा बेंच पर ही लेटना ठीक समझा,उसने बेंच पर देखा तो एक तकिया और कंबल रखे हुए थे,लालटेन की पीली रोशनी इस मौसम में एक सुकून भरा एहसास दे रही थी।
नीरव ने आसपास अपनी नज़र घुमाई लेकिन कोहरे की एक परत मौसम में छाने लगी थी जिसकी वजह से उसे ज़्यादा दूर तक कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, ऊपर से बारिश भी फिर से शुरू हो गई थी,जिसकी वजह से वहाँ पानी की बूंदों के गिरने के अलावा दूसरी कोई आवाज़ नहीं आ रही थी।हवा के भीगे झोंके उसकी पलकों का भार बढ़ा रहे थे तभी एक सुरीली लड़की की आवाज उसके कानों में पड़ी जैसे वो आवाज आसपास गूंज रही हो।
सौ बरस गुज़रे साँस लिए, सौ बरस गुज़रे बिना जिए
आईने में जब देखती हूँ, मैं हूँ या कोई साया पिए।
काली रातें मेरी सहेली, चाँद भी मुझसे डर जाए,
कदमों की आहट पूछे मुझसे, कौन है जो साथ निभाए?
एक मधुर सी Siren Song जैसी आवाज नीरव को संमोहित कर रही थी, उसके दिमाग़ जैसे सुन्न पड़ गया था,कंबल ओढ़ने की वजह से एक गर्म सा एहसास उसके जिस्म में छाने लगा था जो उसके बदन को आराम पहुंचा रहा था।
धीरे-धीरे वो आवाज कम होती गई और वो आँखें बंध करके सो गया। चेहरे पर एक अलग ही शांति दिख रही थी, कंबल की वजह से मौसम की ठंड उसके बदन को बिन छुए गुजर रही थी।अभी कुछ पल ही बीते होंगे कि तभी एक औरत की दर्द भरी चीख से नीरव की नींद टूट गई।चीख सुनकर नीरव हड़बड़ाते हुए बैठ गया,उसे याद ही नहीं था कि वो कब सो गया,ख्यालों से बाहर आकर उसने आवाज की दिशा में अपनी नजर बढ़ाई तो रेलवे ट्रैक के अंधेरे हिस्से से वो आवाज आई थी,जिसे सुनकर अंदाजा लगा सकते है कि वो औरत जो कोई भी थी बहुत दर्द में होंगी इसलिए ज़्यादा टाइम बर्बाद किए बिना उसने पास पड़ी लालटेन उठाई और आवाज़ की दिशा में चल पड़ा।
रेलवे ट्रैक पर तेज़ी से चलते हुए आवाज़ की दिशा में आगे बढ़ रहा था,तेज़ धड़कन और साँसों के साथ उसके मन में कई सवाल घूम रहे थे,"वह औरत कौन हो सकती है? क्या हुआ होगा? इतनी अंधेरी रात में वह अकेली क्या कर रही होगी?" इन्हीं सब ख्यालों के साथ वो उस अंधेरे की तरफ़ बढ़ रहा था। हालाँकि, उसके हाथ में लालटेन था लेकिन उसकी रोशनी में दूर तक देख पाना मुमकिन नहीं था।
इसके साथ ही दूर से कुत्तों के रोने की आवाज़ उसका डर ओर बढ़ा रही थी। नीरव थोड़ा ही आगे बढ़ा होगा कि तभी उसे दूर रेलवे ट्रैक पर कुछ हिलता हुआ नजर आया। यह देखकर वह धीरे-धीरे उसकी तरफ़ बढ़ा
पर जैसे ही वो वह पहुंचा तो सामने का मंजर देखकर उसके हाथ से लालटेन गिर गया और इसके साथ वो भी उस काले अंधकार से घिर गया।
बरसात की ठंडी रात में भी नीरव के माथे पर पसीना आने लगा था क्योंकि उसके सामने इंसानी शरीर के कटे हुए टुकड़े पड़े थे। उसे देखकर लग रहा था कि जैसे कोई इंसान हाल ही में ट्रेन के नीचे कटकर मर गया होगा।वहां पड़े हुए हाथ, पैर, आंतों और मांस के कुचड़ो से निकले खून की वजह से जैसे वहां तालाब भर गया हो।
वहां पर एक से भी पड़ा हुआ था जो बुरी तरह से पिचक गया था,उसके लंबे बाल को देखकर समझ सकते है कि वो कोई स्त्री होगी पर इस वक्त को कोई ट्रेन नहीं आई तो फिर यह सब कैसे हो गया? वह अभी इन सब ख्यालों से बाहर भी नहीं निकला था कि उसे दूर से आती ट्रेन की व्हीसल सुनाई दी। उसने नज़रें हटाईं तो रात के 1:45 बज रहे थे और बांद्रा पैसेंजर एक्सप्रेस, कोहरे को चीरती हुई पूरी स्पीड से नीरव की तरफ बढ़ रही थी। नीरव को होश आने पर वहाँ से हटने के लिए अपना पैर आगे बढ़ाया, लेकिन उसके साथ ही उसे ज़ोर का झटका लगा। जब उसने
देखा कि उसका बायाँ पैर दो रेलवे ट्रैक के बीच फँस गया है।
आज के लिए सिर्फ इतना ही Guys,कहानी का पहला अपडेट कैसा लगा आपको यह कमेंट करके जरूर बताईए और क्या नीरव बच पाएगा यह जानने के लिए मैं मिलूंगा आपको जल्द ही एक नए अपडेट के साथ।