• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Incest मेघना - साया काली रात का

p696r

Lust is the Essence of Life
223
842
94
नमस्कार दोस्तों आप सभी के प्यार और Support की वजह से मुझे से कई नए लोगों को लिखने की प्रेरणा मिलती हैं,दूसरे लेखकों की तरह मैंने भी एक कोशिश के साथ यह सफर शुरू किया था पर आप सब की वजह से मैं आगे लिखता गया,यह मेरे द्वारा लिखित दूसरी कहानी है,मेरी एक कहानी अभी भी Running है पर इसके साथ ही मेरी रुचि Paranormal Activities and Horror Novels पढ़ने में काफी रही है, भूत,प्रेत और Exorcism की चीज़ों के बारे ने पढ़कर मुझे भी एक अलग थ्रिल महसूस होता है इसलिए उन सबसे प्रेरित होकर मैं भी एक छोटी कहानी प्रस्तुत कर रहा हूं,आशा है इसे भी आपका प्यार मिलेगा।यह कहानी ज्यादा लंबी तो नहीं होगी इसलिए 4-5 अपडेट्स में ये खत्म हो जाएगी,साथ ही यह प्यार,दोस्ती,हॉरर और Fantasy पर केंद्रित होगी,कहानी में दिखाई जाने वाले शारीरिक संबंध वास्तविकता से बढ़कर Fantasy से भरपूर होंगे जो मानवीय दिमाग से जुड़कर एक अलग क्षमता के साथ संभोग करेंगे तो ज्यादा बात ना करते हुए जल्द ही मिलेंगे एक नए अपडेट के साथ।

20260102-170551
 

Iron Man

Try and fail. But never give up trying
45,677
122,606
304
:congrats: for new story thread
 
  • Like
  • Love
Reactions: Napster and p696r

p696r

Lust is the Essence of Life
223
842
94
अपडेट - 1

मृतपाय सी धरातल को अपने अमृत समी बूंदों से भिगोने के बाद मेघराजा ने थोड़ी देर के लिए विराम लिया था लेकिन बारिश की कुछ बिन्दु अभी भी धरा में प्राण फूंक रहे थे,उमस भरी गर्मी से निस्तार करके (छुटकारा दिलाना) भीनी मिट्टी की खुशबू और गीली मिट्टी की ठंडक चारों ओर फैल गई थी। ऐसे में अहमदाबाद शहर में मिलन सिनेमा का आखिरी शो खत्म होने के बाद, लोग धीरे-धीरे थिएटर से निकल रहे थे।

साल 1992

वो समय जिसमें टेलीविज़न, रेडियो और सिनेमा ही मनोरंजन के मुख्य साधन थे और 90s की बॉलीवुड फिल्मों ने सिनेमा जगत में लोगों के दिलों-दिमाग़ पर अच्छा प्रभाव छोड़ा था। उन सिनेमा के दीवानों में सभी लोगों के साथ नीरव, संजय, कौशल और राघव नाम के चार दोस्त थिएटर से बाहर निकल रहे थे। हालांकि यह रात का आखिरी शो था, इसलिए भीड़ ज़्यादा नहीं थी। जैसे ही फिल्म खत्म हुई, सभी लोग अपने-अपने घरों के लिए निकल रहे थे।

IMG-20260103-001709
संजय और कौशल का घर थोड़ा दूर था, इसलिए वे दोनों साइकिल लाए थे, जबकि थियेटर से पास के इलाके में रहने वाले नीरव और राघव दोनों पैदल जा रहे थे,"अबे......माधुरी क्या कड़क माल है यार.......ऊपर से उस '.....धक-धक करने लगा....' वाले गाने ने तो पूरा लंड खड़ा कर दिया......साथ ही जो रंडियों की तरह आहें भर रही थी......ऊउउफफ्.......मन तो करता है पूरा लंड उसके मुंह में उतार दूं।"
IMG-20260103-002443
राहुल की बात सुनकर तीनों दोस्त हंसने लगे।उसने अपनी बात पूरी करते हुए कहा,"पर सच कहूं तो माधुरी पति बहुत नसीबवाला होगा जिसे ऐसी बड़े बबले और कसी हुई गांड़वाली लड़की चोदने को मिलेगी।"
IMG-20260103-002143
उस समय में इंटरनेट और मोबाइल की सुविधाएं नहीं थी इसलिए ज़्यादातर लोग अपनी आंखे सेकने और हवस मिटाने के लिए अश्लील गाने या B Grade Movies का सहारा लेते थे।
कौशल : लगता है ये आज रात को भाभी को माधुरी समझ कर आगे पीछे से दबाकर पेलेगा,वैसी भी उनका भरा जिस्म किसी हीरोइन से कम थोड़े ही है ऊपर से उनके दो रसीले दूध...... ऊउउफफ्...."

IMG-20260103-144646
राहुल : हा चल भोसडीके......इतनी ही ठरक जग रही है तो आज तू ही चढ़ जा मेरी बीवी के ऊपर और तेरी बीवी को मेरे पास भेज दे।
कौशल : वैसे ख्याल तो बुरा नहीं है।
कौशल की बात सुनकर तीनों दोस्त ठहाके लगाने लगे।कौशल और राहुल अय्याश किस्म के आदमी थे इसलिए उनके लिए यह सब आम बात थी।
राहुल : क्यों बे अगर तुझे ऐसी लड़की मिले तो तू उसे छोड़ देगा क्या?
संजय : वैसे बात तो इसने पते की कही है,माधुरी को देखकर सबका मूड बन गया है ऊपर से मौसम भी ऐसा मेहरबान हुआ है कि सबकी आग बीवी की चूत ही शांत कर पाएगी.......हाहाहाहा।

IMG-20260103-003051
कौशल : पर लगता है नीरव को आज भी अपने हाथ से ही काम चलाना पड़ेगा....... हाहाहाहाआआआ........." यह कहकर तीनों दोस्त नीरव की तरफ देखकर जोरो से हंसने लगे,नीरव भी अपने चेहरे पर एक मुसकान लिए खड़ा रहा क्योंकि अपनी आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से उसके अलावा उसके सभी दोस्तों की शादी हों चुकी थी।साथ ही नीरव एक अच्छे दिल के साथ मजबूत इरादों वाला आदमी था,अपनी जिस्मानी प्यास बुझाने के लिए उसने किसी पराई स्त्री के साथ यौन संबंध नहीं बनाए थे,जवान औरतों के उपांगो को देखकर उसका दिल भी कभी मचलने लगता पर उसने खुदको हस्तमैथुन की क्रीड़ा का आदि नहीं बनाया था जो उसके व्यक्तित्व में उभर के दिखता था।
highly-detailed-black-white-drawing-muscular-classical-male-figure-curly-hair-beard-displaying-stren
यही हंसी,मजाक और फिल्मों की बातें करते हुए चारों दोस्त चौराहे तक पहुँच गए। चारों तरफ शांति थी,शहर की उन गीली सड़कों पर इंसानों की मौजूदगी रेगिस्तान में पानी के समान लग रही थी, मानो सब लोग बारिश की ठंडक का मज़ा ले रहे हों और कुछ अपने घरों में मीठी नींद ले रहे हों तभी रात के 1 बजे शहर के बीचों-बीच स्थित अजरामर टावर का घंटा बजा और यह आवाज़ रात के चीर सन्नाटे में चारों तरफ फैल गई।

घड़ी की आवाज़ सुनकर संजय ने नीरव और राहुल से कहा, "चलो हम दोनों चलते हैं,नहीं तो पता नहीं बीवियां कब तक हमारे इंतज़ार में जागती रहेगी और आज तो हमें भी घर पहुंचने की जल्दी है" इतना कहकर वे दोनों अपने-अपने घर की ओर चल पड़े। आसमान अभी भी काले बादलों से ढका हुआ था और ये काले बादल रात के अंधेरे में सफ़ेद रुई समान लग रहे थे जिसकी आवाज सुनसान सड़को पर शेर के दहाड़ जैसी प्रतीत हो रही थी,नीरव और राहुल अपने घर की तरफ चलते हुए आगे बढ़ रहे थे, आसमान से गिरती बारिश की बूंदे खंभे की रोशनी से साफ़ दिख रही थीं।

105391
अचानक राहुल ने नीरव की तरफ़ देखा और कहा,"सुन नीरव,हम आज बाहर घूम ही रहे हैं तो चल ना किशन से भी मिल लेते हैं,वैसे भी उससे मिले हुए बहुत दिन हो गए हैं।"

वैसे तो दोनों के घर रेलवे स्टेशन के पासवाले इलाके में ही थे लेकिन अचानक वहाँ जाने की बात सुनकर नीरव ने हैरानी से पूछा, "अभी!!?.....इस वक्त!?......जरा देख तो सही घड़ी में रात के 1 बज रहे हैं और हमें पता भी नहीं कि वो जाग रहा होगा या नहीं।"
"अबे, कैसी बात कर रहा है!? रात में भी ट्रेन की चहल-पहल रहती ही है तो तुम्हें लगता है कि वो सो गया होगा?"

राहुल की बातें सुनकर नीरव थोड़ी देर तक कुछ नहीं बोला, नीरव की आँखों में नींद साफ दिख रही थी इसलिए उसका जाने का बिल्कुल मन नहीं था पर राहुल उसे मनाने के लिए फिर कहता है,"अरे यार, वैसे भी कल छुट्टी है, तो कल जितना सोना है सो लेना.......वैसे भी,हम वहां ज्यादा देर नहीं बैठेंगे,उससे जल्दी ही मिलकर वापस चले आयेंगे।" राहुल की बातें सुनकर नीरव ने सिर्फ हाँ में सिर हिलाया और दोनों स्टेशन की तरफ चल पड़े।

वो दोनों स्टेशन तो पहुँच गए पर जब हम प्लेटफॉर्म पर पहुँचे तो देखा हर तरफ सन्नाटा छाया हुआ था,दूर से सिर्फ कुछ कुत्तों के भौंकने की आवाज़ आ रही थी।वैसे तो प्लेटफॉर्म लाइट की सुविधा थी लेकिन तेज़ बारिश की वजह से ज़्यादातर लाइटें बंद थीं,कुछ पुरानी 2-3 लाइट थी जो अपनी हल्की रोशनी बिखेर रही थीं।

IMG-20260103-005629
स्टेशन के आसपास अच्छे-खासे पेड़ होने के कारण यहाँ शहर के बाकी हिस्सों से ज़्यादा ठंड थी, ठंडी हवाएं नीरव के शरीर को छू रही थी जो उसे निंद्रा की ओर धकेलने का काम रही थी।वह उबासी लेते हुए बोला,"यार राहुल,चल ना घर चलते हैं क्योंकि वैसे भी इस अंधेरे में किशन यहां कही दिखाई नहीं दे रहा है, वह सो गया होगा और अब अगर मैं भी यहाँ 10 मिनट खड़ा रहा तो यहीं सो जाऊँगा।”

नीरव की बातें सुनकर राहुल ने अपनी नज़र इधर-उधर घुमाई और उसकी नज़र एक बेंच पर जाकर रुक गई,"चल मेरे साथ" इतना बोलकर कहकर राहुल ने नीरव को अपने साथ चलने को कहा।दोनों बेंच के पास आकर खड़े हो गए। वहाँ, बेंच पर एक आदमी उन दोनों की तरफ पीठ करके चादर ओढ़े सो रहा था। राहुल ने उसे कंधे से पकड़कर दो-तीन बार जगाया, लेकिन वह नहीं उठा। राहुल ने किशन की ओढ़ी हुई चादर भी खींच ली लेकिन वो फिर भी आँखें बंद करके सोता रहा।

IMG-20260103-005618
किशन को सोता देखकर नीरव ने राहुल से कहा,"अबे उसे सोने दे ना चूतिए,क्यों उसकी नींद खराब कर रहा है चल हम कल मिलने आएंगे।"
नीरव की बात सुनकर राहुल ने पास पड़ी पानी की बोतल उठाई और कहा,"अबे गांडू ऐसे मौके बड़ी मुश्किल से मिलते है तू बस देखता जा।”इतना कहकर उसने पानी की बोतल उठाकर किशन के मुंह पर उल्टा कर दिया, चेहरे पर ठंडे पानी का एहसास होते ही किशन हड़बड़ा कर खड़ा हो गया,"कौन...? कौन है....बे मादरचोद?"

किशन की इस हालत में देखकर नीरव और राघव ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगे। दोनों को हंसता देख किशन बोला,"क्यूं बे भोसड़ी वालों,आधी रात को तुम दोनों की मां मर गई जो तुम दूसरों की नींद खराब करने निकल पड़े हो।" किशन को इस तरह गुस्सा होते देख राहुल और भी ज़ोरो से हंसने लगा,"हंसना बंद कर गंडमरे और बताओ की इतनी रात को यहां क्या कर रहे हो?" आखिर में राहुल शांत हुआ और बोला,"अरे यार, तुमसे मिले हुए बहुत दिन हो गए थे और हम पिक्चर देखकर घर जा रहे थे, तो सोचा तुमसे मिल लेते हैं, जब यहां आए तो देखा कि तुम बड़े आराम से गहरी नींद में सो रहे हो,अब ऐसा मौका हम कैसे छोड़ सकते है।" यह कहकर राहुल फिर हंसने लगा।
"मुझे समझ जाना चाहिए था कि ये तेरे हरामी दिमाग की ही पैदाइश होगी।" उन दोनों के बातों के बीच नीरव ने इधर-उधर देखा और बोला, "अरे यार, राजू काका, किशोरभाई या ताऊजी कहां हैं? कोई दिख क्यों नहीं रहा?"

नीलेश की बातें सुनकर किशन ने आँखें मलते हुए कहा, "हाँ यार, किशोरभाई और राजू काका कल छुट्टी होने ही वजह से अपने गाँव गए हैं और ताऊजी आज बारिश की वजह से नहीं आए है वरना तुम्हें तो पता ही है उन सबका डेरा यही जमा हुआ होता है।" अभी वो तीनों बातें ही कर रहे थे कि स्टेशन की 2-3 लाइट्स जो जल रही थी वो एक-दो बार टिमटिमाई और बंध हो गई।

f303367fb2504deea46e4c855b9276b0
यह देखकर राहुल बोला, "हद है यार, बारिश की दो बूंदे गिरते ही रास्तों की लाइट खराब हो जाती है या पावर कट हो जाता है।" अब चारों तरफ घोर अंधकार फैल गया था,दूर से आती हल्की रोशनी इस वक्त थोड़ा उजाला कर रही थी और आसमान से चमकती बिजली चमकते हुए अपना प्रकाश बिखेर रही थी जिसके चमकार में वो जगह चमक उठती थी।ऐसा माहौल सबके दिलो की धड़कने बढ़ाने के लिए काफी था राहुल ने अपने थूक गला गिला करते हुए कहा,"अबे यार ये जगह तो रोज के मुकाबले किसी स्मशान घाट सी डरावनी लग रही है।"
IMG-20260103-010148
किशन : क्यों बे इतने में तेरी फैट गई,ये सब तो आम बात है तू रुक मैं आता हूं।
इतना देखकर किशन एक कमरे में गया और लालटेन लेकर बाहर आया, उसने बाहर आकर लालटेन बेंच के किनारे रख दी जिसकी पीली रोशनी ने सबके चेहरे चमक उठे।
किशन ने राहुल की तरफ देखा और कहा, "अब तुमने मेरी नींद खराब कर दी है तो आज की चाय तुम्हारी तरफ से।" यह सुनकर राहुल खड़ा हुआ और बोला,"वो सब तो ठीक है, लेकिन इतनी रात में चाय कहाँ मिलेगी? क्योंकि स्टेशन के बाहर वाली चाय का स्टॉल तो बारिश की वजह से बंद है।"
किशन : वो सब मुझे नहीं पता तू चाहे तो मेरी मोटर-साइकल ले जा पर कही से भी मेरे लिए चाय लाकर दे।

"नहीं बे,इतनी रात को मैं अकेले कहीं नहीं जा रहा, अगर तुझे चाय पीनी है तो मेरे साथ चल।" राहुल की बात पर किशन ने उसके गले के पिछले हिस्से से पकड़कर कहा,"क्यों बे मेरी नींद हराम करने से पहले नहीं सोचा और अब अकेले जाने में जनानीयो गांड़ फट रही है।" किशन की बात पर राहुल कुछ नहीं बोला आखिर उसने अपना हाथ हटाते हुए कहा,"ठीक है चलो, मैं तुम्हारे साथ चलता हूँ लेकिन तुम्हे कुछ अंदाजा है कि इस वक्त चाय का कौनसा स्टॉल खुला होगा?"

"जब हम लोग इस तरफ आए थे तो राज सर्कल के पास एक टी स्टॉल खुला था शायद वहाँ से तुम्हारी चाय का इंतजाम हो जाए।" उन दोनों की बात के बीच में बोलते हुए नीरव ने कहा,"राहुल तूने कहा था कि हम दोनों किशन से मिलकर जल्द ही वापस आ जाएंगे और अब तुम दोनों फिर घूमने जा रहे हो!"
किशन : हम दोनों मतलब??!! तू हमारे साथ नहीं चल रहा?
नीरव : नहीं यार,मुझे पहले ही बहुत नींद आ रही थी मैंने इसे मना किया था फिर भी ये मुझे पकड़कर यहां ले आया।
किशन : देख भाई,इस झाट के बाल ने मेरी नींद हराम की है तो इसे तो मैं नहीं छोड़ने वाला पर तब तक तुझे आराम करना है तो यहां बेंच या फिर कमरे में जाकर सो सकते हो तुझे कोई परेशान नहीं करेगा क्योंकि आज का इंचार्ज तेरा भाई है।
इतना कहकर वो दोनों हंसने लगे।किशन की बात पर सहमत होते हुए नीरव ने कहा,"ठीक है तुम दोनों जाओ मैं यही आराम करता हूं।" नीरव की बात सुनकर किशन ने अपनी जेब से एक छोटी टॉर्च निकाली और दोनों उसकी रोशनी में चलते हुए स्टेशन के बाहर निकल गए।


उन लोगों के जाने के बाद फिर से शांति हो गई थी,नीरव ने कमरे में जाने से अच्छा बेंच पर ही लेटना ठीक समझा,उसने बेंच पर देखा तो एक तकिया और कंबल रखे हुए थे,लालटेन की पीली रोशनी इस मौसम में एक सुकून भरा एहसास दे रही थी।

IMG-20260103-010548
नीरव ने आसपास अपनी नज़र घुमाई लेकिन कोहरे की एक परत मौसम में छाने लगी थी जिसकी वजह से उसे ज़्यादा दूर तक कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, ऊपर से बारिश भी फिर से शुरू हो गई थी,जिसकी वजह से वहाँ पानी की बूंदों के गिरने के अलावा दूसरी कोई आवाज़ नहीं आ रही थी।हवा के भीगे झोंके उसकी पलकों का भार बढ़ा रहे थे तभी एक सुरीली लड़की की आवाज उसके कानों में पड़ी जैसे वो आवाज आसपास गूंज रही हो।

सौ बरस गुज़रे साँस लिए, सौ बरस गुज़रे बिना जिए
आईने में जब देखती हूँ, मैं हूँ या कोई साया पिए।

काली रातें मेरी सहेली, चाँद भी मुझसे डर जाए,

कदमों की आहट पूछे मुझसे, कौन है जो साथ निभाए?


एक मधुर सी Siren Song जैसी आवाज नीरव को संमोहित कर रही थी, उसके दिमाग़ जैसे सुन्न पड़ गया था,कंबल ओढ़ने की वजह से एक गर्म सा एहसास उसके जिस्म में छाने लगा था जो उसके बदन को आराम पहुंचा रहा था।
IMG-20260103-011030
धीरे-धीरे वो आवाज कम होती गई और वो आँखें बंध करके सो गया। चेहरे पर एक अलग ही शांति दिख रही थी, कंबल की वजह से मौसम की ठंड उसके बदन को बिन छुए गुजर रही थी।अभी कुछ पल ही बीते होंगे कि तभी एक औरत की दर्द भरी चीख से नीरव की नींद टूट गई।चीख सुनकर नीरव हड़बड़ाते हुए बैठ गया,उसे याद ही नहीं था कि वो कब सो गया,ख्यालों से बाहर आकर उसने आवाज की दिशा में अपनी नजर बढ़ाई तो रेलवे ट्रैक के अंधेरे हिस्से से वो आवाज आई थी,जिसे सुनकर अंदाजा लगा सकते है कि वो औरत जो कोई भी थी बहुत दर्द में होंगी इसलिए ज़्यादा टाइम बर्बाद किए बिना उसने पास पड़ी लालटेन उठाई और आवाज़ की दिशा में चल पड़ा।
haunted-train-tracks
रेलवे ट्रैक पर तेज़ी से चलते हुए आवाज़ की दिशा में आगे बढ़ रहा था,तेज़ धड़कन और साँसों के साथ उसके मन में कई सवाल घूम रहे थे,"वह औरत कौन हो सकती है? क्या हुआ होगा? इतनी अंधेरी रात में वह अकेली क्या कर रही होगी?" इन्हीं सब ख्यालों के साथ वो उस अंधेरे की तरफ़ बढ़ रहा था। हालाँकि, उसके हाथ में लालटेन था लेकिन उसकी रोशनी में दूर तक देख पाना मुमकिन नहीं था।
peakpx
इसके साथ ही दूर से कुत्तों के रोने की आवाज़ उसका डर ओर बढ़ा रही थी। नीरव थोड़ा ही आगे बढ़ा होगा कि तभी उसे दूर रेलवे ट्रैक पर कुछ हिलता हुआ नजर आया। यह देखकर वह धीरे-धीरे उसकी तरफ़ बढ़ा
पर जैसे ही वो वह पहुंचा तो सामने का मंजर देखकर उसके हाथ से लालटेन गिर गया और इसके साथ वो भी उस काले अंधकार से घिर गया।

978-1-61779-058-4-14-Fig37-HTML
बरसात की ठंडी रात में भी नीरव के माथे पर पसीना आने लगा था क्योंकि उसके सामने इंसानी शरीर के कटे हुए टुकड़े पड़े थे। उसे देखकर लग रहा था कि जैसे कोई इंसान हाल ही में ट्रेन के नीचे कटकर मर गया होगा।वहां पड़े हुए हाथ, पैर, आंतों और मांस के कुचड़ो से निकले खून की वजह से जैसे वहां तालाब भर गया हो।
17210bef4fa1648d683495131410
वहां पर एक से भी पड़ा हुआ था जो बुरी तरह से पिचक गया था,उसके लंबे बाल को देखकर समझ सकते है कि वो कोई स्त्री होगी पर इस वक्त को कोई ट्रेन नहीं आई तो फिर यह सब कैसे हो गया? वह अभी इन सब ख्यालों से बाहर भी नहीं निकला था कि उसे दूर से आती ट्रेन की व्हीसल सुनाई दी। उसने नज़रें हटाईं तो रात के 1:45 बज रहे थे और बांद्रा पैसेंजर एक्सप्रेस, कोहरे को चीरती हुई पूरी स्पीड से नीरव की तरफ बढ़ रही थी। नीरव को होश आने पर वहाँ से हटने के लिए अपना पैर आगे बढ़ाया, लेकिन उसके साथ ही उसे ज़ोर का झटका लगा। जब उसने
देखा कि उसका बायाँ पैर दो रेलवे ट्रैक के बीच फँस गया है।

IMG-20260103-012719


आज के लिए सिर्फ इतना ही Guys,कहानी का पहला अपडेट कैसा लगा आपको यह कमेंट करके जरूर बताईए और क्या नीरव बच पाएगा यह जानने के लिए मैं मिलूंगा आपको जल्द ही एक नए अपडेट के साथ।
 
Last edited:

p696r

Lust is the Essence of Life
223
842
94

parkas

Well-Known Member
32,881
70,375
303
अपडेट - 1

मृतपाय सी धरातल को अपने अमृत समी बूंदों से भिगोने के बाद मेघराजा ने थोड़ी देर के लिए विराम लिया था लेकिन बारिश की कुछ बिन्दु अभी भी धरा में प्राण फूंक रहे थे,उमस भरी गर्मी से निस्तार करके (छुटकारा दिलाना) भीनी मिट्टी की खुशबू और गीली मिट्टी की ठंडक चारों ओर फैल गई थी। ऐसे में अहमदाबाद शहर में मिलन सिनेमा का आखिरी शो खत्म होने के बाद, लोग धीरे-धीरे थिएटर से निकल रहे थे।

साल 1992

वो समय जिसमें टेलीविज़न, रेडियो और सिनेमा ही मनोरंजन के मुख्य साधन थे और 90s की बॉलीवुड फिल्मों ने सिनेमा जगत में लोगों के दिलों-दिमाग़ पर अच्छा प्रभाव छोड़ा था। उन सिनेमा के दीवानों में सभी लोगों के साथ नीरव, संजय, कौशल और राघव नाम के चार दोस्त थिएटर से बाहर निकल रहे थे। हालांकि यह रात का आखिरी शो था, इसलिए भीड़ ज़्यादा नहीं थी। जैसे ही फिल्म खत्म हुई, सभी लोग अपने-अपने घरों के लिए निकल रहे थे।

IMG-20260103-001709
संजय और कौशल का घर थोड़ा दूर था, इसलिए वे दोनों साइकिल लाए थे, जबकि थियेटर से पास के इलाके में रहने वाले नीरव और राघव दोनों पैदल जा रहे थे,"अबे......माधुरी क्या कड़क माल है यार.......ऊपर से उस '.....धक-धक करने लगा....' वाले गाने ने तो पूरा लंड खड़ा कर दिया......साथ ही जो रंडियों की तरह आहें भर रही थी......ऊउउफफ्.......मन तो करता है पूरा लंड उसके मुंह में उतार दूं।"
IMG-20260103-002443
राहुल की बात सुनकर तीनों दोस्त हंसने लगे।उसने अपनी बात पूरी करते हुए कहा,"पर सच कहूं तो माधुरी पति बहुत नसीबवाला होगा जिसे ऐसी बड़े बबले और कसी हुई गांड़वाली लड़की चोदने को मिलेगी।"
IMG-20260103-002143
उस समय में इंटरनेट और मोबाइल की सुविधाएं नहीं थी इसलिए ज़्यादातर लोग अपनी आंखे सेकने और हवस मिटाने के लिए अश्लील गाने या B Grade Movies का सहारा लेते थे।
कौशल : लगता है ये आज रात को भाभी को सोने नहीं देगा। कौशल की बात सुनकर तीनों दोस्त ठहाके लगाने लगे।
राहुल : क्यों बे अगर तुझे ऐसी लड़की मिले तो तू उसे छोड़ देगा क्या?
संजय : वैसे बात तो इसने पते की कही है,माधुरी को देखकर सबका मूड बन गया है ऊपर से मौसम भी ऐसा मेहरबान हुआ है कि सबकी आग बीवी की चूत ही शांत कर पाएगी.......हाहाहाहा।

IMG-20260103-003051
कौशल : पर लगता है नीरव को आज भी अपने हाथ से ही काम चलाना पड़ेगा....... हाहाहाहाआआआ........." यह कहकर तीनों दोस्त नीरव की तरफ देखकर जोरो से हंसने लगे,नीरव भी अपने चेहरे पर एक मुसकान लिए खड़ा रहा क्योंकि अपनी आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से उसके अलावा उसके सभी दोस्तों की शादी हों चुकी थी।साथ ही नीरव एक अच्छे दिल के साथ मजबूत इरादों वाला आदमी था,अपनी जिस्मानी प्यास बुझाने के लिए उसने किसी पराई स्त्री के साथ यौन संबंध नहीं बनाए थे,जवान औरतों के उपांगो को देखकर उसका दिल भी कभी मचलने लगता पर उसने खुदको हस्तमैथुन की क्रीड़ा का आदि नहीं बनाया था जो उसके व्यक्तित्व में उभर के दिखता था।
highly-detailed-black-white-drawing-muscular-classical-male-figure-curly-hair-beard-displaying-stren
यही हंसी,मजाक और फिल्मों की बातें करते हुए चारों दोस्त चौराहे तक पहुँच गए। चारों तरफ शांति थी,शहर की उन गीली सड़कों पर इंसानों की मौजूदगी रेगिस्तान में पानी के समान लग रही थी, मानो सब लोग बारिश की ठंडक का मज़ा ले रहे हों और कुछ अपने घरों में मीठी नींद ले रहे हों तभी रात के 1 बजे शहर के बीचों-बीच स्थित अजरामर टावर का घंटा बजा और यह आवाज़ रात के चीर सन्नाटे में चारों तरफ फैल गई।

घड़ी की आवाज़ सुनकर संजय ने नीरव और राहुल से कहा, "चलो हम दोनों चलते हैं,नहीं तो पता नहीं बीवियां कब तक हमारे इंतज़ार में जागती रहेगी और आज तो हमें भी घर पहुंचने की जल्दी है" इतना कहकर वे दोनों अपने-अपने घर की ओर चल पड़े। आसमान अभी भी काले बादलों से ढका हुआ था और ये काले बादल रात के अंधेरे में सफ़ेद रुई समान लग रहे थे जिसकी आवाज सुनसान सड़को पर शेर के दहाड़ जैसी प्रतीत हो रही थी,नीरव और राहुल अपने घर की तरफ चलते हुए आगे बढ़ रहे थे, आसमान से गिरती बारिश की बूंदे खंभे की रोशनी से साफ़ दिख रही थीं।

105391
अचानक राहुल ने नीरव की तरफ़ देखा और कहा,"सुन नीरव,हम आज बाहर घूम ही रहे हैं तो चल ना किशन से भी मिल लेते हैं,वैसे भी उससे मिले हुए बहुत दिन हो गए हैं।"

वैसे तो दोनों के घर रेलवे स्टेशन के पासवाले इलाके में ही थे लेकिन अचानक वहाँ जाने की बात सुनकर नीरव ने हैरानी से पूछा, "अभी!!?.....इस वक्त!?......जरा देख तो सही घड़ी में रात के 1 बज रहे हैं और हमें पता भी नहीं कि वो जाग रहा होगा या नहीं।"
"अबे, कैसी बात कर रहा है!? रात में भी ट्रेन की चहल-पहल रहती ही है तो तुम्हें लगता है कि वो सो गया होगा?"

राहुल की बातें सुनकर नीरव थोड़ी देर तक कुछ नहीं बोला, नीरव की आँखों में नींद साफ दिख रही थी इसलिए उसका जाने का बिल्कुल मन नहीं था पर राहुल उसे मनाने के लिए फिर कहता है,"अरे यार, वैसे भी कल छुट्टी है, तो कल जितना सोना है सो लेना.......वैसे भी,हम वहां ज्यादा देर नहीं बैठेंगे,उससे जल्दी ही मिलकर वापस चले आयेंगे।" राहुल की बातें सुनकर नीरव ने सिर्फ हाँ में सिर हिलाया और दोनों स्टेशन की तरफ चल पड़े।

वो दोनों स्टेशन तो पहुँच गए पर जब हम प्लेटफॉर्म पर पहुँचे तो देखा हर तरफ सन्नाटा छाया हुआ था,दूर से सिर्फ कुछ कुत्तों के भौंकने की आवाज़ आ रही थी।वैसे तो प्लेटफॉर्म लाइट की सुविधा थी लेकिन तेज़ बारिश की वजह से ज़्यादातर लाइटें बंद थीं,कुछ पुरानी 2-3 लाइट थी जो अपनी हल्की रोशनी बिखेर रही थीं।

IMG-20260103-005629
स्टेशन के आसपास अच्छे-खासे पेड़ होने के कारण यहाँ शहर के बाकी हिस्सों से ज़्यादा ठंड थी, ठंडी हवाएं नीरव के शरीर को छू रही थी जो उसे निंद्रा की ओर धकेलने का काम रही थी।वह उबासी लेते हुए बोला,"यार राहुल,चल ना घर चलते हैं क्योंकि वैसे भी इस अंधेरे में किशन यहां कही दिखाई नहीं दे रहा है, वह सो गया होगा और अब अगर मैं भी यहाँ 10 मिनट खड़ा रहा तो यहीं सो जाऊँगा।”

नीरव की बातें सुनकर राहुल ने अपनी नज़र इधर-उधर घुमाई और उसकी नज़र एक बेंच पर जाकर रुक गई,"चल मेरे साथ" इतना बोलकर कहकर राहुल ने नीरव को अपने साथ चलने को कहा।दोनों बेंच के पास आकर खड़े हो गए। वहाँ, बेंच पर एक आदमी उन दोनों की तरफ पीठ करके चादर ओढ़े सो रहा था। राहुल ने उसे कंधे से पकड़कर दो-तीन बार जगाया, लेकिन वह नहीं उठा। राहुल ने किशन की ओढ़ी हुई चादर भी खींच ली लेकिन वो फिर भी आँखें बंद करके सोता रहा।

IMG-20260103-005618
किशन को सोता देखकर नीरव ने राहुल से कहा,"अबे उसे सोने दे ना चूतिए,क्यों उसकी नींद खराब कर रहा है चल हम कल मिलने आएंगे।"
नीरव की बात सुनकर राहुल ने पास पड़ी पानी की बोतल उठाई और कहा,"अबे गांडू ऐसे मौके बड़ी मुश्किल से मिलते है तू बस देखता जा।”इतना कहकर उसने पानी की बोतल उठाकर किशन के मुंह पर उल्टा कर दिया, चेहरे पर ठंडे पानी का एहसास होते ही किशन हड़बड़ा कर खड़ा हो गया,"कौन...? कौन है....बे मादरचोद?"

किशन की इस हालत में देखकर नीरव और राघव ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगे। दोनों को हंसता देख किशन बोला,"क्यूं बे भोसड़ी वालों,आधी रात को तुम दोनों की मां मर गई जो तुम दूसरों की नींद खराब करने निकल पड़े हो।" किशन को इस तरह गुस्सा होते देख राहुल और भी ज़ोरो से हंसने लगा,"हंसना बंद कर गंडमरे और बताओ की इतनी रात को यहां क्या कर रहे हो?" आखिर में राहुल शांत हुआ और बोला,"अरे यार, तुमसे मिले हुए बहुत दिन हो गए थे और हम पिक्चर देखकर घर जा रहे थे, तो सोचा तुमसे मिल लेते हैं, जब यहां आए तो देखा कि तुम बड़े आराम से गहरी नींद में सो रहे हो,अब ऐसा मौका हम कैसे छोड़ सकते है।" यह कहकर राहुल फिर हंसने लगा।
"मुझे समझ जाना चाहिए था कि ये तेरे हरामी दिमाग की ही पैदाइश होगी।" उन दोनों के बातों के बीच नीरव ने इधर-उधर देखा और बोला, "अरे यार, राजू काका, किशोरभाई या ताऊजी कहां हैं? कोई दिख क्यों नहीं रहा?"

नीलेश की बातें सुनकर किशन ने आँखें मलते हुए कहा, "हाँ यार, किशोरभाई और राजू काका कल छुट्टी होने ही वजह से अपने गाँव गए हैं और ताऊजी आज बारिश की वजह से नहीं आए है वरना तुम्हें तो पता ही है उन सबका डेरा यही जमा हुआ होता है।" अभी वो तीनों बातें ही कर रहे थे कि स्टेशन की 2-3 लाइट्स जो जल रही थी वो एक-दो बार टिमटिमाई और बंध हो गई।

f303367fb2504deea46e4c855b9276b0
यह देखकर राहुल बोला, "हद है यार, बारिश की दो बूंदे गिरते ही रास्तों की लाइट खराब हो जाती है या पावर कट हो जाता है।" अब चारों तरफ घोर अंधकार फैल गया था,दूर से आती हल्की रोशनी इस वक्त थोड़ा उजाला कर रही थी और आसमान से चमकती बिजली चमकते हुए अपना प्रकाश बिखेर रही थी जिसके चमकार में वो जगह चमक उठती थी।ऐसा माहौल सबके दिलो की धड़कने बढ़ाने के लिए काफी था राहुल ने अपने थूक गला गिला करते हुए कहा,"अबे यार ये जगह तो रोज के मुकाबले किसी स्मशान घाट सी डरावनी लग रही है।"
IMG-20260103-010148
किशन : क्यों बे इतने में तेरी फैट गई,ये सब तो आम बात है तू रुक मैं आता हूं।
इतना देखकर किशन एक कमरे में गया और लालटेन लेकर बाहर आया, उसने बाहर आकर लालटेन बेंच के किनारे रख दी जिसकी पीली रोशनी ने सबके चेहरे चमक उठे।
किशन ने राहुल की तरफ देखा और कहा, "अब तुमने मेरी नींद खराब कर दी है तो आज की चाय तुम्हारी तरफ से।" यह सुनकर राहुल खड़ा हुआ और बोला,"वो सब तो ठीक है, लेकिन इतनी रात में चाय कहाँ मिलेगी? क्योंकि स्टेशन के बाहर वाली चाय का स्टॉल तो बारिश की वजह से बंद है।"
किशन : वो सब मुझे नहीं पता तू चाहे तो मेरी मोटर-साइकल ले जा पर कही से भी मेरे लिए चाय लाकर दे।

"नहीं बे,इतनी रात को मैं अकेले कहीं नहीं जा रहा, अगर तुझे चाय पीनी है तो मेरे साथ चल।" राहुल की बात पर किशन ने उसके गले के पिछले हिस्से से पकड़कर कहा,"क्यों बे मेरी नींद हराम करने से पहले नहीं सोचा और अब अकेले जाने में जनानीयो गांड़ फट रही है।" किशन की बात पर राहुल कुछ नहीं बोला आखिर उसने अपना हाथ हटाते हुए कहा,"ठीक है चलो, मैं तुम्हारे साथ चलता हूँ लेकिन तुम्हे कुछ अंदाजा है कि इस वक्त चाय का कौनसा स्टॉल खुला होगा?"

"जब हम लोग इस तरफ आए थे तो राज सर्कल के पास एक टी स्टॉल खुला था शायद वहाँ से तुम्हारी चाय का इंतजाम हो जाए।" उन दोनों की बात के बीच में बोलते हुए नीरव ने कहा,"राहुल तूने कहा था कि हम दोनों किशन से मिलकर जल्द ही वापस आ जाएंगे और अब तुम दोनों फिर घूमने जा रहे हो!"
किशन : हम दोनों मतलब??!! तू हमारे साथ नहीं चल रहा?
नीरव : नहीं यार,मुझे पहले ही बहुत नींद आ रही थी मैंने इसे मना किया था फिर भी ये मुझे पकड़कर यहां ले आया।
किशन : देख भाई,इस झाट के बाल ने मेरी नींद हराम की है तो इसे तो मैं नहीं छोड़ने वाला पर तब तक तुझे आराम करना है तो यहां बेंच या फिर कमरे में जाकर सो सकते हो तुझे कोई परेशान नहीं करेगा क्योंकि आज का इंचार्ज तेरा भाई है।
इतना कहकर वो दोनों हंसने लगे।किशन की बात पर सहमत होते हुए नीरव ने कहा,"ठीक है तुम दोनों जाओ मैं यही आराम करता हूं।" नीरव की बात सुनकर किशन ने अपनी जेब से एक छोटी टॉर्च निकाली और दोनों उसकी रोशनी में चलते हुए स्टेशन के बाहर निकल गए।


उन लोगों के जाने के बाद फिर से शांति हो गई थी,नीरव ने कमरे में जाने से अच्छा बेंच पर ही लेटना ठीक समझा,उसने बेंच पर देखा तो एक तकिया और कंबल रखे हुए थे,लालटेन की पीली रोशनी इस मौसम में एक सुकून भरा एहसास दे रही थी।

IMG-20260103-010548
नीरव ने आसपास अपनी नज़र घुमाई लेकिन कोहरे की एक परत मौसम में छाने लगी थी जिसकी वजह से उसे ज़्यादा दूर तक कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, ऊपर से बारिश भी फिर से शुरू हो गई थी,जिसकी वजह से वहाँ पानी की बूंदों के गिरने के अलावा दूसरी कोई आवाज़ नहीं आ रही थी।हवा के भीगे झोंके उसकी पलकों का भार बढ़ा रहे थे तभी एक सुरीली लड़की की आवाज उसके कानों में पड़ी जैसे वो आवाज आसपास गूंज रही हो।

सौ बरस गुज़रे साँस लिए, सौ बरस गुज़रे बिना जिए
आईने में जब देखती हूँ, मैं हूँ या कोई साया पिए।

काली रातें मेरी सहेली, चाँद भी मुझसे डर जाए,

कदमों की आहट पूछे मुझसे, कौन है जो साथ निभाए?


एक मधुर सी Siren Song जैसी आवाज नीरव को संमोहित कर रही थी, उसके दिमाग़ जैसे सुन्न पड़ गया था,कंबल ओढ़ने की वजह से एक गर्म सा एहसास उसके जिस्म में छाने लगा था जो उसके बदन को आराम पहुंचा रहा था।
IMG-20260103-011030
धीरे-धीरे वो आवाज कम होती गई और वो आँखें बंध करके सो गया। चेहरे पर एक अलग ही शांति दिख रही थी, कंबल की वजह से मौसम की ठंड उसके बदन को बिन छुए गुजर रही थी।अभी कुछ पल ही बीते होंगे कि तभी एक औरत की दर्द भरी चीख से नीरव की नींद टूट गई।चीख सुनकर नीरव हड़बड़ाते हुए बैठ गया,उसे याद ही नहीं था कि वो कब सो गया,ख्यालों से बाहर आकर उसने आवाज की दिशा में अपनी नजर बढ़ाई तो रेलवे ट्रैक के अंधेरे हिस्से से वो आवाज आई थी,जिसे सुनकर अंदाजा लगा सकते है कि वो औरत जो कोई भी थी बहुत दर्द में होंगी इसलिए ज़्यादा टाइम बर्बाद किए बिना उसने पास पड़ी लालटेन उठाई और आवाज़ की दिशा में चल पड़ा।
haunted-train-tracks
रेलवे ट्रैक पर तेज़ी से चलते हुए आवाज़ की दिशा में आगे बढ़ रहा था,तेज़ धड़कन और साँसों के साथ उसके मन में कई सवाल घूम रहे थे,"वह औरत कौन हो सकती है? क्या हुआ होगा? इतनी अंधेरी रात में वह अकेली क्या कर रही होगी?" इन्हीं सब ख्यालों के साथ वो उस अंधेरे की तरफ़ बढ़ रहा था। हालाँकि, उसके हाथ में लालटेन था लेकिन उसकी रोशनी में दूर तक देख पाना मुमकिन नहीं था।
peakpx
इसके साथ ही दूर से कुत्तों के रोने की आवाज़ उसका डर ओर बढ़ा रही थी। नीरव थोड़ा ही आगे बढ़ा होगा कि तभी उसे दूर रेलवे ट्रैक पर कुछ हिलता हुआ नजर आया। यह देखकर वह धीरे-धीरे उसकी तरफ़ बढ़ा
पर जैसे ही वो वह पहुंचा तो सामने का मंजर देखकर उसके हाथ से लालटेन गिर गया और इसके साथ वो भी उस काले अंधकार से घिर गया।

978-1-61779-058-4-14-Fig37-HTML
बरसात की ठंडी रात में भी नीरव के माथे पर पसीना आने लगा था क्योंकि उसके सामने इंसानी शरीर के कटे हुए टुकड़े पड़े थे। उसे देखकर लग रहा था कि जैसे कोई इंसान हाल ही में ट्रेन के नीचे कटकर मर गया होगा।वहां पड़े हुए हाथ, पैर, आंतों और मांस के कुचड़ो से निकले खून की वजह से जैसे वहां तालाब भर गया हो।
17210bef4fa1648d683495131410
वहां पर एक से भी पड़ा हुआ था जो बुरी तरह से पिचक गया था,उसके लंबे बाल को देखकर समझ सकते है कि वो कोई स्त्री होगी पर इस वक्त को कोई ट्रेन नहीं आई तो फिर यह सब कैसे हो गया? वह अभी इन सब ख्यालों से बाहर भी नहीं निकला था कि उसे दूर से आती ट्रेन की व्हीसल सुनाई दी। उसने नज़रें हटाईं तो रात के 1:45 बज रहे थे और बांद्रा पैसेंजर एक्सप्रेस, कोहरे को चीरती हुई पूरी स्पीड से नीरव की तरफ बढ़ रही थी। नीरव को होश आने पर वहाँ से हटने के लिए अपना पैर आगे बढ़ाया, लेकिन उसके साथ ही उसे ज़ोर का झटका लगा। जब उसने
देखा कि उसका बायाँ पैर दो रेलवे ट्रैक के बीच फँस गया है।

IMG-20260103-012719


आज के लिए सिर्फ इतना ही Guys,कहानी का पहला अपडेट कैसा लगा आपको यह कमेंट करके जरूर बताईए और क्या नीरव बच पाएगा यह जानने के लिए मैं मिलूंगा आपको जल्द ही एक नए अपडेट के साथ।
Nice and beautiful update....
 

Ajju Landwalia

Well-Known Member
4,459
17,075
159
अपडेट - 1

मृतपाय सी धरातल को अपने अमृत समी बूंदों से भिगोने के बाद मेघराजा ने थोड़ी देर के लिए विराम लिया था लेकिन बारिश की कुछ बिन्दु अभी भी धरा में प्राण फूंक रहे थे,उमस भरी गर्मी से निस्तार करके (छुटकारा दिलाना) भीनी मिट्टी की खुशबू और गीली मिट्टी की ठंडक चारों ओर फैल गई थी। ऐसे में अहमदाबाद शहर में मिलन सिनेमा का आखिरी शो खत्म होने के बाद, लोग धीरे-धीरे थिएटर से निकल रहे थे।

साल 1992

वो समय जिसमें टेलीविज़न, रेडियो और सिनेमा ही मनोरंजन के मुख्य साधन थे और 90s की बॉलीवुड फिल्मों ने सिनेमा जगत में लोगों के दिलों-दिमाग़ पर अच्छा प्रभाव छोड़ा था। उन सिनेमा के दीवानों में सभी लोगों के साथ नीरव, संजय, कौशल और राघव नाम के चार दोस्त थिएटर से बाहर निकल रहे थे। हालांकि यह रात का आखिरी शो था, इसलिए भीड़ ज़्यादा नहीं थी। जैसे ही फिल्म खत्म हुई, सभी लोग अपने-अपने घरों के लिए निकल रहे थे।

IMG-20260103-001709
संजय और कौशल का घर थोड़ा दूर था, इसलिए वे दोनों साइकिल लाए थे, जबकि थियेटर से पास के इलाके में रहने वाले नीरव और राघव दोनों पैदल जा रहे थे,"अबे......माधुरी क्या कड़क माल है यार.......ऊपर से उस '.....धक-धक करने लगा....' वाले गाने ने तो पूरा लंड खड़ा कर दिया......साथ ही जो रंडियों की तरह आहें भर रही थी......ऊउउफफ्.......मन तो करता है पूरा लंड उसके मुंह में उतार दूं।"
IMG-20260103-002443
राहुल की बात सुनकर तीनों दोस्त हंसने लगे।उसने अपनी बात पूरी करते हुए कहा,"पर सच कहूं तो माधुरी पति बहुत नसीबवाला होगा जिसे ऐसी बड़े बबले और कसी हुई गांड़वाली लड़की चोदने को मिलेगी।"
IMG-20260103-002143
उस समय में इंटरनेट और मोबाइल की सुविधाएं नहीं थी इसलिए ज़्यादातर लोग अपनी आंखे सेकने और हवस मिटाने के लिए अश्लील गाने या B Grade Movies का सहारा लेते थे।
कौशल : लगता है ये आज रात को भाभी को माधुरी समझ कर आगे पीछे से दबाकर पेलेगा,वैसी भी उनका भरा जिस्म किसी हीरोइन से कम थोड़े ही है ऊपर से उनके दो रसीले दूध...... ऊउउफफ्...."
राहुल : हा चल भोसडीके......इतनी ही ठरक जग रही है तो आज तू ही चढ़ जा मेरी बीवी के ऊपर और तेरी बीवी को मेरे पास भेज दे।
कौशल : वैसे ख्याल तो बुरा नहीं है।
कौशल की बात सुनकर तीनों दोस्त ठहाके लगाने लगे।कौशल और राहुल अय्याश किस्म के आदमी थे इसलिए उनके लिए यह सब आम बात थी।
राहुल : क्यों बे अगर तुझे ऐसी लड़की मिले तो तू उसे छोड़ देगा क्या?
संजय : वैसे बात तो इसने पते की कही है,माधुरी को देखकर सबका मूड बन गया है ऊपर से मौसम भी ऐसा मेहरबान हुआ है कि सबकी आग बीवी की चूत ही शांत कर पाएगी.......हाहाहाहा।

IMG-20260103-003051
कौशल : पर लगता है नीरव को आज भी अपने हाथ से ही काम चलाना पड़ेगा....... हाहाहाहाआआआ........." यह कहकर तीनों दोस्त नीरव की तरफ देखकर जोरो से हंसने लगे,नीरव भी अपने चेहरे पर एक मुसकान लिए खड़ा रहा क्योंकि अपनी आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से उसके अलावा उसके सभी दोस्तों की शादी हों चुकी थी।साथ ही नीरव एक अच्छे दिल के साथ मजबूत इरादों वाला आदमी था,अपनी जिस्मानी प्यास बुझाने के लिए उसने किसी पराई स्त्री के साथ यौन संबंध नहीं बनाए थे,जवान औरतों के उपांगो को देखकर उसका दिल भी कभी मचलने लगता पर उसने खुदको हस्तमैथुन की क्रीड़ा का आदि नहीं बनाया था जो उसके व्यक्तित्व में उभर के दिखता था।
highly-detailed-black-white-drawing-muscular-classical-male-figure-curly-hair-beard-displaying-stren
यही हंसी,मजाक और फिल्मों की बातें करते हुए चारों दोस्त चौराहे तक पहुँच गए। चारों तरफ शांति थी,शहर की उन गीली सड़कों पर इंसानों की मौजूदगी रेगिस्तान में पानी के समान लग रही थी, मानो सब लोग बारिश की ठंडक का मज़ा ले रहे हों और कुछ अपने घरों में मीठी नींद ले रहे हों तभी रात के 1 बजे शहर के बीचों-बीच स्थित अजरामर टावर का घंटा बजा और यह आवाज़ रात के चीर सन्नाटे में चारों तरफ फैल गई।

घड़ी की आवाज़ सुनकर संजय ने नीरव और राहुल से कहा, "चलो हम दोनों चलते हैं,नहीं तो पता नहीं बीवियां कब तक हमारे इंतज़ार में जागती रहेगी और आज तो हमें भी घर पहुंचने की जल्दी है" इतना कहकर वे दोनों अपने-अपने घर की ओर चल पड़े। आसमान अभी भी काले बादलों से ढका हुआ था और ये काले बादल रात के अंधेरे में सफ़ेद रुई समान लग रहे थे जिसकी आवाज सुनसान सड़को पर शेर के दहाड़ जैसी प्रतीत हो रही थी,नीरव और राहुल अपने घर की तरफ चलते हुए आगे बढ़ रहे थे, आसमान से गिरती बारिश की बूंदे खंभे की रोशनी से साफ़ दिख रही थीं।

105391
अचानक राहुल ने नीरव की तरफ़ देखा और कहा,"सुन नीरव,हम आज बाहर घूम ही रहे हैं तो चल ना किशन से भी मिल लेते हैं,वैसे भी उससे मिले हुए बहुत दिन हो गए हैं।"

वैसे तो दोनों के घर रेलवे स्टेशन के पासवाले इलाके में ही थे लेकिन अचानक वहाँ जाने की बात सुनकर नीरव ने हैरानी से पूछा, "अभी!!?.....इस वक्त!?......जरा देख तो सही घड़ी में रात के 1 बज रहे हैं और हमें पता भी नहीं कि वो जाग रहा होगा या नहीं।"
"अबे, कैसी बात कर रहा है!? रात में भी ट्रेन की चहल-पहल रहती ही है तो तुम्हें लगता है कि वो सो गया होगा?"

राहुल की बातें सुनकर नीरव थोड़ी देर तक कुछ नहीं बोला, नीरव की आँखों में नींद साफ दिख रही थी इसलिए उसका जाने का बिल्कुल मन नहीं था पर राहुल उसे मनाने के लिए फिर कहता है,"अरे यार, वैसे भी कल छुट्टी है, तो कल जितना सोना है सो लेना.......वैसे भी,हम वहां ज्यादा देर नहीं बैठेंगे,उससे जल्दी ही मिलकर वापस चले आयेंगे।" राहुल की बातें सुनकर नीरव ने सिर्फ हाँ में सिर हिलाया और दोनों स्टेशन की तरफ चल पड़े।

वो दोनों स्टेशन तो पहुँच गए पर जब हम प्लेटफॉर्म पर पहुँचे तो देखा हर तरफ सन्नाटा छाया हुआ था,दूर से सिर्फ कुछ कुत्तों के भौंकने की आवाज़ आ रही थी।वैसे तो प्लेटफॉर्म लाइट की सुविधा थी लेकिन तेज़ बारिश की वजह से ज़्यादातर लाइटें बंद थीं,कुछ पुरानी 2-3 लाइट थी जो अपनी हल्की रोशनी बिखेर रही थीं।

IMG-20260103-005629
स्टेशन के आसपास अच्छे-खासे पेड़ होने के कारण यहाँ शहर के बाकी हिस्सों से ज़्यादा ठंड थी, ठंडी हवाएं नीरव के शरीर को छू रही थी जो उसे निंद्रा की ओर धकेलने का काम रही थी।वह उबासी लेते हुए बोला,"यार राहुल,चल ना घर चलते हैं क्योंकि वैसे भी इस अंधेरे में किशन यहां कही दिखाई नहीं दे रहा है, वह सो गया होगा और अब अगर मैं भी यहाँ 10 मिनट खड़ा रहा तो यहीं सो जाऊँगा।”

नीरव की बातें सुनकर राहुल ने अपनी नज़र इधर-उधर घुमाई और उसकी नज़र एक बेंच पर जाकर रुक गई,"चल मेरे साथ" इतना बोलकर कहकर राहुल ने नीरव को अपने साथ चलने को कहा।दोनों बेंच के पास आकर खड़े हो गए। वहाँ, बेंच पर एक आदमी उन दोनों की तरफ पीठ करके चादर ओढ़े सो रहा था। राहुल ने उसे कंधे से पकड़कर दो-तीन बार जगाया, लेकिन वह नहीं उठा। राहुल ने किशन की ओढ़ी हुई चादर भी खींच ली लेकिन वो फिर भी आँखें बंद करके सोता रहा।

IMG-20260103-005618
किशन को सोता देखकर नीरव ने राहुल से कहा,"अबे उसे सोने दे ना चूतिए,क्यों उसकी नींद खराब कर रहा है चल हम कल मिलने आएंगे।"
नीरव की बात सुनकर राहुल ने पास पड़ी पानी की बोतल उठाई और कहा,"अबे गांडू ऐसे मौके बड़ी मुश्किल से मिलते है तू बस देखता जा।”इतना कहकर उसने पानी की बोतल उठाकर किशन के मुंह पर उल्टा कर दिया, चेहरे पर ठंडे पानी का एहसास होते ही किशन हड़बड़ा कर खड़ा हो गया,"कौन...? कौन है....बे मादरचोद?"

किशन की इस हालत में देखकर नीरव और राघव ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगे। दोनों को हंसता देख किशन बोला,"क्यूं बे भोसड़ी वालों,आधी रात को तुम दोनों की मां मर गई जो तुम दूसरों की नींद खराब करने निकल पड़े हो।" किशन को इस तरह गुस्सा होते देख राहुल और भी ज़ोरो से हंसने लगा,"हंसना बंद कर गंडमरे और बताओ की इतनी रात को यहां क्या कर रहे हो?" आखिर में राहुल शांत हुआ और बोला,"अरे यार, तुमसे मिले हुए बहुत दिन हो गए थे और हम पिक्चर देखकर घर जा रहे थे, तो सोचा तुमसे मिल लेते हैं, जब यहां आए तो देखा कि तुम बड़े आराम से गहरी नींद में सो रहे हो,अब ऐसा मौका हम कैसे छोड़ सकते है।" यह कहकर राहुल फिर हंसने लगा।
"मुझे समझ जाना चाहिए था कि ये तेरे हरामी दिमाग की ही पैदाइश होगी।" उन दोनों के बातों के बीच नीरव ने इधर-उधर देखा और बोला, "अरे यार, राजू काका, किशोरभाई या ताऊजी कहां हैं? कोई दिख क्यों नहीं रहा?"

नीलेश की बातें सुनकर किशन ने आँखें मलते हुए कहा, "हाँ यार, किशोरभाई और राजू काका कल छुट्टी होने ही वजह से अपने गाँव गए हैं और ताऊजी आज बारिश की वजह से नहीं आए है वरना तुम्हें तो पता ही है उन सबका डेरा यही जमा हुआ होता है।" अभी वो तीनों बातें ही कर रहे थे कि स्टेशन की 2-3 लाइट्स जो जल रही थी वो एक-दो बार टिमटिमाई और बंध हो गई।

f303367fb2504deea46e4c855b9276b0
यह देखकर राहुल बोला, "हद है यार, बारिश की दो बूंदे गिरते ही रास्तों की लाइट खराब हो जाती है या पावर कट हो जाता है।" अब चारों तरफ घोर अंधकार फैल गया था,दूर से आती हल्की रोशनी इस वक्त थोड़ा उजाला कर रही थी और आसमान से चमकती बिजली चमकते हुए अपना प्रकाश बिखेर रही थी जिसके चमकार में वो जगह चमक उठती थी।ऐसा माहौल सबके दिलो की धड़कने बढ़ाने के लिए काफी था राहुल ने अपने थूक गला गिला करते हुए कहा,"अबे यार ये जगह तो रोज के मुकाबले किसी स्मशान घाट सी डरावनी लग रही है।"
IMG-20260103-010148
किशन : क्यों बे इतने में तेरी फैट गई,ये सब तो आम बात है तू रुक मैं आता हूं।
इतना देखकर किशन एक कमरे में गया और लालटेन लेकर बाहर आया, उसने बाहर आकर लालटेन बेंच के किनारे रख दी जिसकी पीली रोशनी ने सबके चेहरे चमक उठे।
किशन ने राहुल की तरफ देखा और कहा, "अब तुमने मेरी नींद खराब कर दी है तो आज की चाय तुम्हारी तरफ से।" यह सुनकर राहुल खड़ा हुआ और बोला,"वो सब तो ठीक है, लेकिन इतनी रात में चाय कहाँ मिलेगी? क्योंकि स्टेशन के बाहर वाली चाय का स्टॉल तो बारिश की वजह से बंद है।"
किशन : वो सब मुझे नहीं पता तू चाहे तो मेरी मोटर-साइकल ले जा पर कही से भी मेरे लिए चाय लाकर दे।

"नहीं बे,इतनी रात को मैं अकेले कहीं नहीं जा रहा, अगर तुझे चाय पीनी है तो मेरे साथ चल।" राहुल की बात पर किशन ने उसके गले के पिछले हिस्से से पकड़कर कहा,"क्यों बे मेरी नींद हराम करने से पहले नहीं सोचा और अब अकेले जाने में जनानीयो गांड़ फट रही है।" किशन की बात पर राहुल कुछ नहीं बोला आखिर उसने अपना हाथ हटाते हुए कहा,"ठीक है चलो, मैं तुम्हारे साथ चलता हूँ लेकिन तुम्हे कुछ अंदाजा है कि इस वक्त चाय का कौनसा स्टॉल खुला होगा?"

"जब हम लोग इस तरफ आए थे तो राज सर्कल के पास एक टी स्टॉल खुला था शायद वहाँ से तुम्हारी चाय का इंतजाम हो जाए।" उन दोनों की बात के बीच में बोलते हुए नीरव ने कहा,"राहुल तूने कहा था कि हम दोनों किशन से मिलकर जल्द ही वापस आ जाएंगे और अब तुम दोनों फिर घूमने जा रहे हो!"
किशन : हम दोनों मतलब??!! तू हमारे साथ नहीं चल रहा?
नीरव : नहीं यार,मुझे पहले ही बहुत नींद आ रही थी मैंने इसे मना किया था फिर भी ये मुझे पकड़कर यहां ले आया।
किशन : देख भाई,इस झाट के बाल ने मेरी नींद हराम की है तो इसे तो मैं नहीं छोड़ने वाला पर तब तक तुझे आराम करना है तो यहां बेंच या फिर कमरे में जाकर सो सकते हो तुझे कोई परेशान नहीं करेगा क्योंकि आज का इंचार्ज तेरा भाई है।
इतना कहकर वो दोनों हंसने लगे।किशन की बात पर सहमत होते हुए नीरव ने कहा,"ठीक है तुम दोनों जाओ मैं यही आराम करता हूं।" नीरव की बात सुनकर किशन ने अपनी जेब से एक छोटी टॉर्च निकाली और दोनों उसकी रोशनी में चलते हुए स्टेशन के बाहर निकल गए।


उन लोगों के जाने के बाद फिर से शांति हो गई थी,नीरव ने कमरे में जाने से अच्छा बेंच पर ही लेटना ठीक समझा,उसने बेंच पर देखा तो एक तकिया और कंबल रखे हुए थे,लालटेन की पीली रोशनी इस मौसम में एक सुकून भरा एहसास दे रही थी।

IMG-20260103-010548
नीरव ने आसपास अपनी नज़र घुमाई लेकिन कोहरे की एक परत मौसम में छाने लगी थी जिसकी वजह से उसे ज़्यादा दूर तक कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, ऊपर से बारिश भी फिर से शुरू हो गई थी,जिसकी वजह से वहाँ पानी की बूंदों के गिरने के अलावा दूसरी कोई आवाज़ नहीं आ रही थी।हवा के भीगे झोंके उसकी पलकों का भार बढ़ा रहे थे तभी एक सुरीली लड़की की आवाज उसके कानों में पड़ी जैसे वो आवाज आसपास गूंज रही हो।

सौ बरस गुज़रे साँस लिए, सौ बरस गुज़रे बिना जिए
आईने में जब देखती हूँ, मैं हूँ या कोई साया पिए।

काली रातें मेरी सहेली, चाँद भी मुझसे डर जाए,

कदमों की आहट पूछे मुझसे, कौन है जो साथ निभाए?


एक मधुर सी Siren Song जैसी आवाज नीरव को संमोहित कर रही थी, उसके दिमाग़ जैसे सुन्न पड़ गया था,कंबल ओढ़ने की वजह से एक गर्म सा एहसास उसके जिस्म में छाने लगा था जो उसके बदन को आराम पहुंचा रहा था।
IMG-20260103-011030
धीरे-धीरे वो आवाज कम होती गई और वो आँखें बंध करके सो गया। चेहरे पर एक अलग ही शांति दिख रही थी, कंबल की वजह से मौसम की ठंड उसके बदन को बिन छुए गुजर रही थी।अभी कुछ पल ही बीते होंगे कि तभी एक औरत की दर्द भरी चीख से नीरव की नींद टूट गई।चीख सुनकर नीरव हड़बड़ाते हुए बैठ गया,उसे याद ही नहीं था कि वो कब सो गया,ख्यालों से बाहर आकर उसने आवाज की दिशा में अपनी नजर बढ़ाई तो रेलवे ट्रैक के अंधेरे हिस्से से वो आवाज आई थी,जिसे सुनकर अंदाजा लगा सकते है कि वो औरत जो कोई भी थी बहुत दर्द में होंगी इसलिए ज़्यादा टाइम बर्बाद किए बिना उसने पास पड़ी लालटेन उठाई और आवाज़ की दिशा में चल पड़ा।
haunted-train-tracks
रेलवे ट्रैक पर तेज़ी से चलते हुए आवाज़ की दिशा में आगे बढ़ रहा था,तेज़ धड़कन और साँसों के साथ उसके मन में कई सवाल घूम रहे थे,"वह औरत कौन हो सकती है? क्या हुआ होगा? इतनी अंधेरी रात में वह अकेली क्या कर रही होगी?" इन्हीं सब ख्यालों के साथ वो उस अंधेरे की तरफ़ बढ़ रहा था। हालाँकि, उसके हाथ में लालटेन था लेकिन उसकी रोशनी में दूर तक देख पाना मुमकिन नहीं था।
peakpx
इसके साथ ही दूर से कुत्तों के रोने की आवाज़ उसका डर ओर बढ़ा रही थी। नीरव थोड़ा ही आगे बढ़ा होगा कि तभी उसे दूर रेलवे ट्रैक पर कुछ हिलता हुआ नजर आया। यह देखकर वह धीरे-धीरे उसकी तरफ़ बढ़ा
पर जैसे ही वो वह पहुंचा तो सामने का मंजर देखकर उसके हाथ से लालटेन गिर गया और इसके साथ वो भी उस काले अंधकार से घिर गया।

978-1-61779-058-4-14-Fig37-HTML
बरसात की ठंडी रात में भी नीरव के माथे पर पसीना आने लगा था क्योंकि उसके सामने इंसानी शरीर के कटे हुए टुकड़े पड़े थे। उसे देखकर लग रहा था कि जैसे कोई इंसान हाल ही में ट्रेन के नीचे कटकर मर गया होगा।वहां पड़े हुए हाथ, पैर, आंतों और मांस के कुचड़ो से निकले खून की वजह से जैसे वहां तालाब भर गया हो।
17210bef4fa1648d683495131410
वहां पर एक से भी पड़ा हुआ था जो बुरी तरह से पिचक गया था,उसके लंबे बाल को देखकर समझ सकते है कि वो कोई स्त्री होगी पर इस वक्त को कोई ट्रेन नहीं आई तो फिर यह सब कैसे हो गया? वह अभी इन सब ख्यालों से बाहर भी नहीं निकला था कि उसे दूर से आती ट्रेन की व्हीसल सुनाई दी। उसने नज़रें हटाईं तो रात के 1:45 बज रहे थे और बांद्रा पैसेंजर एक्सप्रेस, कोहरे को चीरती हुई पूरी स्पीड से नीरव की तरफ बढ़ रही थी। नीरव को होश आने पर वहाँ से हटने के लिए अपना पैर आगे बढ़ाया, लेकिन उसके साथ ही उसे ज़ोर का झटका लगा। जब उसने
देखा कि उसका बायाँ पैर दो रेलवे ट्रैक के बीच फँस गया है।

IMG-20260103-012719


आज के लिए सिर्फ इतना ही Guys,कहानी का पहला अपडेट कैसा लगा आपको यह कमेंट करके जरूर बताईए और क्या नीरव बच पाएगा यह जानने के लिए मैं मिलूंगा आपको जल्द ही एक नए अपडेट के साथ।

Sabse pehle to ek nayi story shuru karne ke liye Hardik Shubhkamnaye p696r Bro

Pehli update hi badi hi faadu he...........

Story bahut hi daravani hone vali he

Keep rocking Bro
 
Top