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Nice and beautiful update.....अपडेट - 5रात को देरी से घर लौटने के बाद राहुल अपने घर में आराम कर रहा था तभी उसकी उसकी मां की बात सुनकर उसकी नींद खुल गई,"राहुल उठो, बाहर राजेश्री भाभी आई है और कह रहे है कि नीरव कल रात से घर नहीं लौटा।"
( Final Update )
"क्या कहा?" यह सुनकर राहुल की आँख खुल गई और वह सीधा नींद से जागकर बैठ गया,कमरे से बाहर जब बाहर आकर देखा तो नीरव की माँ के चेहरे पर चिंता और डर के भाव लिए सामने खड़ी थी,यह देखकर राहुल ने पूछा,"काकी,नीरव अभी तक घर नहीं आया!!?"
"हाँ बेटा,कल तुम दोनों साथ में गए थे और देर रात तक उसका इंतज़ार करने के बाद, मुझे लगा कि वह शायद तुम्हारे घर पर ही रुक गया होगा पर दोपहर होने पर भी जब वो घर नहीं लौटा तो मैं यहाँ पूछने आई थी लेकिन वो यहाँ पर भी नहीं है,पता नहीं कहाँ रह गया है?" यह कहते हुए उनकी आँखें नम हो गईं।
"काकी, चिंता मत करो, मैं अभी उसे ढूंढने निकलता हूँ,एक बार मिल जाए तो उसकी खैर नहीं, ऐसा कौनसा काम आ गया है जिसे करने घर पर बिना बताएं चल पड़ा" राहुल जल्दी से हाथ-मुँह धोकर बाहर आया तो उसकी पत्नी छाता लिए इंतेज़ार कर रही थी,राहुल ने छाता लेकर उसकी तरफ देखा तो दोनों के नैन मिले,"जल्दी आइएगा" यह सुनकर राहुल ने अपना सर हिलाया और नीरव को ढूँढ़ने निकल पड़ा।
कल की बारिश का असर शहर पर साफ़ दिख रहा था। शहर के कई इलाकों में पानी भर गया था,सड़के कच्ची होने की वजह से कई जगह पानी के गढ्ढे भरे हुए थे,घर की छत पर लगे पाइपों से पानी गिरते की आवाज़ गलियों में गूंज रही थी।ऊपर से देखने पर ऐसा लग रहा था जैसे पूरा शहर पानी में डूब रहा हो।राहुल नीरव के दूसरे दोस्तों, रिश्तेदारों और जहां काम करता था वो फैक्ट्री हर जगह पूछते हुए घूम रहा था।
इसके साथ ही,उसने उन सभी जगहों पर पता कर लिया था जहाँ वे दोनों बैठते थे लेकिन नीरव का कुछ पता नहीं चला। तेज़ बारिश से छाता राहुल को कब तक ढंक पाता जिसके चलते राहुल अब भीगने लगा था,बारिश की मार भी झेलते हुए दिलों से जुड़ी दोस्ती को वो ज्यादा एहमियत देता था,यह सब करते हुए कब रात हो गई उसे पता ही नहीं चला। राहुल की बेचैनी हर गुज़रते पल के साथ बढ़ती जा रही थी,इतनी जगह पर ढूंढने के बाद भी ना मिलने पर उसका मन किसी बड़ी अनहोनी की ओर संकेत दे रहा था।आखिर में, उसके दिमाग में एक ख्याल आया कि आख़िरी बार नीरव को उसने रेलवे स्टेशन पर देखा था और अब वही एक जगह बची थी जहां उसने तलाश नहीं की थी,इस ख्याल के साथ किशन को पूछने के इरादे से वो स्टेशन की तरफ चल पड़ा।
राहुल जब स्टेशन पर पहुँचा तो 9:30 बज चुके थे।बारिश की वजह से सुबह से चलती सारी ट्रेनें और बसें रद कर दी गई थी।केवल 30 km के अंदर चलने वाली एक-दो लोकल ट्रेनों को छोड़कर कोई ट्रेन नहीं चल रही थी इसलिए स्टेशन पर लोगों की चहल-पहल बहुत कम थी। राहुल ने नज़रें घुमाई तो किशन ताऊजी के साथ एक बेंच पर बैठा था।ताऊजी का नाम गजेंद्र सिंह था।उनकी उम्र 70 साल की थी लेकिन अपनी इस उम्र में भी कद-काठी अच्छी होने की वजह से सब उन्हें ताऊजी कहते थे। ताऊजी ज़्यादातर रात में यहीं बैठने आते थे इसलिए सब लोगों के साथ राहुल की भी उनसे अच्छी जान-पहचान हो गई थी।किशन को वहाँ बैठा देखकर राहुल जल्दी से उसके पास गया।उसको यहां आए हुए देखकर किशन कुछ कह पाता ताऊजी बोल पड़े,"कितने दिनों बाद मिले हो लाला,लेकिन इस वक्त तुम यहां और इतना हाँफ क्यों रहे हो!!?" ताऊजी राहुल को लाला कहकर पुकारते थे।
"ताऊजी मैं भी आपको यही बताने वाला था" राहुल ने किशन की तरफ देखा और कहा,"यार किशन गड़बड़ हो गई है,कल रात से नीरव घर ही नहीं पहुँचा है।" यह सुनकर किशन अपनी जगह पर खड़ा हो गया,"ये क्या बक रहा है!!?"
"हाँ यार,आंटी आज सुबह ही मेरे घर आई थीं उन्होंने मुझे बताया इसलिए मैंने सुबह से हर जगह देखा जहां उसके मिलने की उम्मीद थी लेकिन वह कहीं नहीं मिला, अंत मैं सोचा कि तुमसे बात करूं क्योंकि हम दोनों ने आखरी बार उसे यही देखा था।" यह सुनकर किशन के चेहरे पर भी तंग रेखाएं उमड़ पड़ी।
"हां तू सही कह रहा है चल हम........" किशन राहुल के साथ बात ही कर रहा था कि तभी किशन का सहकर्मी मनीष ऑफिस से दौड़ता हुआ आया और बोला,"किशन, गड़बड़ हो गई है भाई, लगता है अहमदाबाद से गांधीनगर की तरफ जाने वाली फाटक के पास कुछ दुर्घटना हुई है,अभी वहाँ से फ़ोन आया था इसलिए हमें तुरंत वहाँ जाना होगा।"
"बहनचोद क्या मुसीबत है,आज ही ये सब होना था ऊपर से किशोरभाई भी ड्यूटी पर नहीं आए हैं।" उसने कुछ सोचने के बाद राहुल से कहा,"राहुल,तुम कुछ पल इंतज़ार करो,मैं थोड़ी देर में वापस आता हूँ फिर जाकर हम नीरव को ढूँढेंगे।" यह कहकर किशन मनीष के साथ चला गया और राहुल ताऊजी के पास बेंच पर बैठ गया,"लाला,चिंता मत कर,नीरव यही कही होगा जल्द ही मिल जाएगा।" लेकिन राहुल का ध्यान ताऊजी की बातों पर नहीं था,वो अपने ख्यालों में खोया हुआ था।
राहुल को अंदर से शांति नहीं मिल रही थी इसलिए वो उठा और प्लेटफॉर्म पर एक चक्कर मारने के लिए निकल लगा।चलते-चलते वह प्लेटफॉर्म के अंतिम छोर तक पहुंच गया।सब जगह भयावह खामोशी फैली हुई थी,ऊपर प्लेटफॉर्म के लाइट की रोशनी में कई कीड़े-मकौड़े आसपास चक्कर लगा रहे थे,दूर से आती मेंढकों के टर्राने की आवाज़ चीत्कार सी कानों में चुभ रही थी।अचानक उसकी नज़र दूर एक रेलवे ट्रैक के पास रुक गई तो वो सहम गया क्योंकि नीरव जल्दी से चलते हुए अंधेरे इलाक़े की तरफ आगे बढ़ रहा था। राहुल पूरी ताकत इक्कठा करके ज़ोर से चिल्लाया,"नीररववव्......." लेकिन नीरव आगे बढ़ने लगा जैसे उसने राहुल की आवाज़ सुनी ना हो इसलिए ज़्यादा समय बर्बाद किए बिना राहुल सीधा उसकी तरफ दौड़ पड़ा।
ठंडी हवाओं को चीरते हुए रफ़्तार के साथ राहुल झाड़ियों के बीच से गुजरते हुए नीरव की तरफ बढ़ रहा था लेकिन राहुल जितनी तेज़ी से उसके पास जाने की कोशिश कर रहा था नीरव उससे उतना ही दूर जाते हुए दिख रहा था जैसे उन दोनों के बीच की दूरी कम ही ना हो रही हो।आसमान में एक बार फिर बादल घिरने लगे थे और हवा में नमी को देखकर ऐसा लग रहा था कि यह बादल एक बार फिर धरती को अपनी बौछार में भिगोएगी।राहुल तेज सांसों के साथ आगे बढ़ रहा था लेकिन दोनों तरफ के घने पेड़ो के बीच से उसके साथ कोई आगे बढ़ा रहा हो उसे ऐसा प्रतीत हो रहा था क्योंकि बिजली की रोशनी में एक काला साया उजायमन हो रहा था।बादलों की गरज किसी के गुस्से भरी दहाड़ सी प्रतीत होती थी जो हर बार ज़मीन के अंदर तक उतर जाती थी।
राहुल चलते हुए इस वीरान बस्ती में जा पहुंचा,बिजली की चमकार में पलभर के लिए टूटी दीवारें,हवाओं से काँपती खिड़कियाँ और फिर वही घना अंधेरा,आसमान से गिरती बूँदें खट-खट करती हुई छत पर पड़ रही थीं उसकी आवाज ऐसी थी मानो कोई नाखूनों से उसे खुरेच रहा हो।राहुल नज़रे सामने करके चलने लगा उसकी सांसे इतनी तेज़ थी जैसे पसलियां छाती चीरकर बाहर आ जाएंगी।
आखिर में नीरव का पीछा करते हुए राहुल उस घर तक पहुँच गया,उसने उसे दूर से देखा कि नीरव ने दरवाज़ा खोला और घर के अंदर चला गया जैसे वो उसका अपना घर हो।राहुल ने जब बाहर से घर की हालत देखी तो बाहर फूल मुरझाकर पड़े थे,चारों ओर की लकड़ी की बाड़ दो-तीन जगह से टूटी हुई थी,घर की ज़मीन काली पड़ी हुई थी,छत ऊपर से टूटी हुई थी,इसके अलावा घर में कई जगह दरारें भी थीं। घर को बाहर से देखने पर ऐसा लग रहा था कि जैसे यह कई सालों से बंद पड़ा होगा लेकिन राहुल ने देखा कि घर के नीचे और ऊपर के एक कमरे से हल्की रोशनी आ रही थी। यह देखकर राहुल मन ही मन सोचने लगा कि नीरव यहाँ किस लिए आया होगा?जैसे-जैसे वह आगे बढ़ा, उसे एक तेज़ दुर्गंध आने लगी। राहुल ने मुँह पर हाथ रखा और धीरे से घर के दरवाजे को धक्का लगाया,दरवाज़ा एक अजीब सी आवाज़ के साथ खुल गया,'कर्रर्रर्र......'
राहुल जब अंदर पहुँचा तो घर में भी वही बदबू फैली हुई थी,साथ ही घर के अंदर की हालत बाहर से भी ज़्यादा खराब थी। घर में कई जगह मकड़ी के जाले लगे थे, फर्नीचर टूटा हुआ था, अंदर रखे गमले टूटे पड़े थे जिसकी मिट्टी ज़मीन पर बिखरी हुई थी।ऊपर के हिस्से से बच्चे के हंसने की आवाजें आ रही थी पर जैसे ही राहुल ने 'कोई है........??!' पुकारा पूरे घर में मरघट जैसा सन्नाटा छा गया।यह खामोशी उसके दिल को पसीज रही थी तभी उसकी नजर ऊपर की सीढ़ियों पर गई तो एक छोटा बच्चा निस्तेज चेहरे से झांक रहा था,अचानक पीछे से किसी ने उसके कंधे को छुआ तो वो घबराकर पीछे मुड़ गया,उसने देखा तो उसके पीछे गुलाबी साड़ी में एक औरत हाथ में लालटेन लिए खड़ी थी।श्वेत सा अंग,देह नितरता रूप और उभरा हुआ यौवन जिसे देखकर किसी की भी नियत डोल जाए उसी तरफ राहुल मेघना के स्तनप्रदेश के उभार में खो गया।
मेघना : जी आप कौन और यहां कैसे??!
राहुल (खुद को संभालते हुए) : माफ़ कीजिए, दरअसल मेरा दोस्त गलती से यहां आ गया है उसी को ढूंढते हुए मैं यहां आया हूँ।
मेघना : अजीब बात है क्योंकि इस इलाक़े में तो ज्यादा तर कोई इंसान नहीं आता। इतना कहते हुए उसने लालटेन टेबल पर रखा और थोड़ी मोमबत्तियां जलाकर कोनो में रख दी जिससे हॉल में उजाला हो गया।
राहुल (आसपास नज़रे घुमाकर) : मैंने उसे यही आते हुए देखा था इसलिए मैं यहां चला आया।
राहुल ने मेघना की तरफ देखा जो उसकी तरफ पीठ करके खड़ी थी उसी वक्त राहुल की नजर मेघना की लचीली कमर के साथ उसके नितंब की रेखा पर अटक गई जो साड़ी थोड़ा नीचे सरकने से बाहर उभर आई थी,साथ ही सिर्फ साड़ी पहनने की वजह से राहुल उसकी मांसल गांड़ को साफ देख सकता था।
मेघना ने हल्का अपना सर पीछे घुमाते हुए पूछा,"तो क्या आपको वो मिला?"
राहुल को मेघना का जिस्म मदहोश करने लगा था जिसमें नीरव को ढूंढने की चिंता कही विलीन होने लगी थी,राहुल अय्याश किस्म का इंसान था जिससे के मन में वासना भरी संवेदनाएं फिर जागृत होने लगी।वो चलते हुए मेघना के पास आया और उसे पीछे से बाहों में भर लिया, अपना मुंह उसने मेघना के गर्दन पर रखा तो वो दुर्गंध गायब होकर मेघना के जिस्म की मादक खुश्बू सांसों में समाने लगी,राहुल मेघना के पेट को सहलाने लगा जिस पर मेघना कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रही थी।
मेघना : आपने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया.....क्या आपको आपका दोस्त मिला? राहुल ने अपने दोनों हाथ से मेघना के स्तनों को पकड़ लिया जिससे अब मेघना की हल्की सिसकी निकली।
राहुल (खुश होते हुए) : नहीं,और अब लगता है कि वो मिलेगा भी नहीं।
स्त्री की मादक आवाज़ हर मर्द जिस्म में आग में पेट्रोल डालने का काम करती है इसी तरह राहुल मेघना के निप्पल दबाते हुए उससे खेलने लगा,अपने हाथों में नर्म एहसास अलग आनंद दे रहा था पर उसे एक बात अजीब लगी कि मेघना का पूरा शरीर ठंडा पड़ा हुआ था।
मेघना : सही समझे, क्योंकि यहां आनेवाले सभी लोग मुझमें ही कही खो जाते हैं।
राहुल ने मेघना की बात अनसुनी करते हुए उसे ऊपर के हिस्से से पूरा नंगा कर दिया था,साथ ही वो उसकी चूत पर उंगलियां घुमाते हुए उसे उत्तेजित करने का प्रयास कर रहा था।
राहुल : क्या आप यहां अकेली रहती है?
मेघना : आआहहह्........जी नहीं,मैं यहां अपने 4 साल के बच्चे और पति के साथ रहती हूं।
अब राहुल ने मेघना को अपनी तरफ घुमा लिया था,उसकी योनि में उंगली घुमाने से उसकी साड़ी भी निकल चुकी थी जिससे मेघना का पारदर्शी देह उसके सामने था,राहुल ने मेघना को पास खींचने से उसके उरोज छाती में दब गए और वो मेघना के होठों पर उंगलियां घुमाने लगा।
राहुल : तो आपके पति इस वक्त कहां है?
मेघना : अक्सर काम की वजह से उन्हें दूसरे शहर जाना पड़ता है तो वो इस वक्त बाहर गए है।
मेघना के इतना कहते ही वो उसके होठों पर टूट पड़ा,मेघना के होठों और स्तनों का भरपूर रसपान करके राहुल ने मेघना को घुटनों के बल बिठाया और अपना लिंग बाहर निकालकर उसके मुंह में भर दिया,मेघना भी बड़ी कुशलता से उसे मुख मैथुन का आनंद दे रही थी जिससे वो कुछ ही पल में स्खलित हो गया,राहुल की सांसे तेज़ चल रही थी।
मेघना : बस इतने में थक गए? यह सुनकर राहुल ने आक्रमकता के साथ जवाब दिया।
राहुल : अभी तो बस शुरुआत है मेरी जान। इतना बोलकर वो मेघना की योनि को अपने मुख से भिगोने लगा कुछ पल चूसने के बाद वो अपना लिंग डालने ही वाला था कि तभी मेघना ने उसे रोकते हुए कहा,"यहां नहीं अंदर कमरे में चलते है।" यह सुनकर राहुल की उसकी मटकती गांड़ को देखकर उसके पीछे चल दिया।
अंदर कमरे की हालत भी कुछ ठीक नहीं थी पर हवस में राहुल इतना अंधा हो गया था कि उसके दिमाग़ में यह तक नहीं आया,आखिर अकेली स्त्री इस बंजर घर में क्या कर रही है? अंदर कमरे से एक टूटे पलंग पर मेला गद्दा था जिस पर राहुल लेट गया और मेघना ने राहुल के लिंग को हिलाकर अपने मुंह से चिकना किया और धीरे से जोर लगाते हुए अपनी योनि में उतार दिया,मेघना के हिलने की वजह से उछलते स्तनों को देखकर राहुल का लहू उबाल मारने लगा और उसने मुंह में चूसते हुए धक्के मारने लगा जिससे दोनों के आवाजों की पड़छंदे अब कमरे में गूंज रही थी,कुछ देर धक्के मारने के बाद राहुल मेघना की योनि में ही जड़ गया।
मेघना चुपचाप राहुल के बगल में आकर लेट गई और राहुल मेघना की नाभि के पास सर रखकर उसमें अपनी जीभ घुमाने लगा,राहुल ने देखा तो मेघना के चेहरे पर एक अधूरापन था।
राहुल : क्या हुआ जान तुम इतनी चुप क्यों हो?
मेघना : आप मर्द जात कितने खुदगर्ज होते हो,अपनी प्यास बुझाने के लिए हमारा इस्तेमाल तो करते हो पर जरूरत खत्म हो जाने के बाद हमारे बारे में एक पल भी ख्याल नहीं करते।
राहुल : ओह तो तुम इस बात से नाराज़ हो।
मेघना : हंहह्......आपसे नाराजगी कैसी? आपसे अच्छे तो आपके दोस्त नीरव है जिन्होंने मेरी बरसो की प्यास बुझा दी।
नीरव का नाम सुनते ही राहुल को जैसे झटका लगा।उसने तुरंत मेघना को देखकर पूछा,"क्या कहा तुमने अभी......नीरव?!! इसका मतलब तुम जानती हो नीरव को!!? कहां है वो?? और तुम उससे कहां और कैसे मिली!??!" इतना सुनकर मेघना हल्का सा मुस्कुराई और राहुल की ओर देखकर कहा,"आप उनसे मिलना चाहते है? तो मैं आपको अभी ले चलती हूं" इतना बोलकर मेघना की आँखें राहुल से मिली और उसकी आँखें भारी होने लगी और आसपास का वातावरण बदलने लगा।
कुछ ही पल में घर के कमरे से वो अब एक जंगल के बीच आकर खड़ा हुआ था जहां आसपास काफी घने पेड़ थे,चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था,ऊपर से बारिश गिर रही थी पर वो उसमें भीग नहीं रहा था तभी उसके कुछ आवाजें सुनाई दी जिसे सुनकर वो चलते हुए आगे बढ़ा जहां से पीली रोशनी आ रही थी उसने एक पड़े के तने के पीछे से देखा तो चकित रह गया,नीरव मेघना के साथ पूरी तरह नग्न होकर कामक्रीड़ा में डूबा हुआ था,दोनों फूलों की सेज पर लेटकर अपने इन पलो का आनंद ले रहे थे,दोनों के बदन फूलों और पेड़ो जैसी प्राकृतिक तत्वों पर रगड़ने से महकने लगे थे,नीरव का लंड पूरी ताक़त मेघना की योनि को रिझा रहा था........ Frriiiccchhh.........Fuuuchhhh..........की आवाज के साथ मेघना की सिसकियां इस माहौल में गूंज रही थी।
अब अंधेरा हटने लगा था पर आसमान में काले बादलों ने अपनी मौजूदगी का ग़रज कर ऐलान कर दिया था मानो यह सवेरा नहीं पर आने वाले अंधकार ने बरसात का मुखौटा पहन लिया हो।पूरा माहौल त्रस्त था जैसे रात ने जाने से इनकार कर दिया हो। गरजते बादलों के बीच गिरती बारिश की हर बूंद चीख़ बनकर धरती से टकरा रही थी पर इसके विपरीत हर बीतते पल के साथ दोनों का संभोग ज्यादा आक्रामक बनते जा रहा था।नीरव कई बार मेघना की योनि में स्खलित हो चुका था पर उसके मन को वो तृप्ति नहीं मिली थी।
राहुल से अब रहा नहीं गया इसलिए उसने नीरव के पास पहुंचते हुए कहा,"नीरव ये क्या कर रहा है!!? दूर रह इस लड़की से.......वरना ये तुझे भी अपने जाल में फंसा लेगी।" पर नीरव ने जैसे उसकी बातें सुनी ही ना हो,राहुल ने नीरव को छूने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया पर वो प्रतिबिंब की तरह उन दोनों के आरपार निकल गया,राहुल को यह बातें बड़ी अचंभिग कर रही थी तभी उसकी नजर मेघना से मिली जैसे वो उसे देख सकती हो,राहुल को देखकर उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान फैल गई।
राहुल : साली रंडी,यह सब तेरा ही किया धरा है ना!!? कौन है तू बता मुझे........और मेरे दोस्त के साथ ये क्यों कर रही है!???.........बताताआआ्........." पर सामने से कोई जवाब नहीं आया,दोनों ने पड़े के पास अपना समागम जारी रखा जिसमें एक बार फिर नीरव का वीर्यपात हो गया।
राहुल को नीरव को देखकर बड़ा झटका लगा था कि एक आम इंसान में इतनी क्षमता कैसे हो सकती है!!? दोनों का यह संभोग अब कोई अमानवीय शक्तियों का संबद्ध सा प्रतीत हो रहा था जिसमें दोनों ने प्रकृति के हर जगह अपने वीर्य के अंश छोड़े थे तभी राहुल ने देखा कि वो दोनों अपनी जिह्वा से खेलते हुए घर के रास्ते की तरफ आगे बढ़ने लगे।
चलते हुए भी वो अपने हाथ से जिस्म के उफान को वेग दे रहे थे,ऐसे करते हुए वो घर के द्वार तक पहुंच गए नीरव मेघना को गांड़ के उभारों से पकड़कर अंदर ले गया और बेड पर लाकर पटक दिया,वर्षा की रिमझिम में दोनों पूरे भीग गए थे पर मेघना के मुख की प्रसन्नता अलग ही चरम पर थी,इतने समागम के बाद भी नीरव के हर अंग में जैसे लावा दौड़ रहा था इसलिए वो मेघना के आंतर अंगों के बालों को दांतों से काटकर मुंह में उतार रहा था,अपने जिस्म के कांख,योनि और गुदा में उठती पीड़ा मेघना को संतुष्टि दे रही थी जिसमें वो अपने बालों को पकड़कर सिसकियां भर रही थी,"आआआआहाहांहाहाआआआआहाहाहहह्............. हाहाहाहाआआहहहह्.............ऐसे ही और कीजिए..........हमारा मिलन ऐसा ही होना चाहिए........... ओओओअअअहहहहह्.............."
नीरव सभी बालों को थूकने के बजाय गले से नीचे उतार गया जिसमें वो सभी गले में फंसने के बजाए नर्म रुई की तरह मुंह में घुल गए। केशविहीन मेघना का अब पूरा बदन ज्योत जैसे दमक रहा था।
इसके साथ ही प्रणयरंग के वो लम्हे फिर शुरू हो गए,श्वासों की लय, हृदय की धड़कन और जिस्मों के पड़छंद ने मिलकर ऐसा बंधन रचा जिसमें अलगाव का कोई अर्थ शेष न रहा,मेघना के मुंह,योनि,गुदा के साथ जिस्म का हर हिस्सा नीरव के कामरस में निसर गया,मेघना को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वो वीर्य की नदी के नहाकर आई हो और इसी खेल में दोपहर हो गई पता ही नहीं चला।
राहुल अब भी बेबसी से उन दोनों को समागम को निहार रहा था,बाहर अब भी घनघोर बारिश गिर रही थी इसलिए माहौल की नमी कमरे के अंदर की गर्मी से मिलकर खिड़की पर ओस की बूंदे जम गई थी, कमरे में अंदर मेघना नीरव के लिंग पर सवार थी उसके सिर से वीर्य की बूंदे पसीने में मिलकर फिसलते हुए गांड़ की रेखा में मिल जाती थी,नीरव अब भी धक्के मार रहा था पर अब दोनों को देखकर लग रहा था कि जैसे वो थकने लगे थे,बेड की चादर दोनों के वीर्य और पसीने में भीग चुकी थी।
मेघना : आआहहहह्........हहअअहह्.......हहहह्......नीरव आप मुझसे बहुत प्यार करते है नाआआ.........सीईईहअअहह्
नीरव : हहांआआहह्.........आआहह्...... मैं अपनी पूरी जिंदगी सिर्फ तुम्हारे साथ बिताना चाहता हूँ.......ऊउम्म्हह्.......जिससे मैं हर पल तुम्हे ऐसे ही प्यार करता रहूं........ओओफफ्........तुम्हारे सभी दुःख और ग़मो को दूर करके अपने प्यार से तुम्हे भर देना चाहता हूं........ आआहहहह्.........
इतना कहते हुए नीरव ने फिर जोश के साथ धक्का लगाया पर इस बार वो मेघना की नाभि से भी ऊपर पेट तक पहुंच रहा था और उसकी मोटाई मेघना के पेट के ऊपर से दिख रही थी।
मेघना (सर ऊपर करते हुए) : आआआआहाहांहाहाआआआआहाहाहहह्.............बस अब अपनी पत्नी को पूर्ण कर दीजिए......... ओओओअअअहहहहह्..........मैं अब सिर्फ आपकी हूँ........ ऊंऊउन्न्ननहहह्..........नीरव ने मेघना की गांड़ पर अपनी पकड़ बनाई और एक ज़ोरदार झटके से अपना सारा माल अंदर उतार दिया पर इस बार मेघना को उबकाई सी आई और वो रस मेघना उल्टी करते हुए मुंह के मार्ग से बाहर निकलने लगा जिसमें उन दोनों के बदन भीग गए।
मेघना का मुंह,छाती,पेट सब कुछ सफेद तरल पदार्थ में भीग हुआ था,मेघना नीरव के सनी पर लेती हुई थी तभी वो मधुर सी ध्वनि महकी जिसे सुनकर राहुल भी सचेत हो गया,
सौ बरस गुज़रे साँस लिए,सौ बरस गुज़रे बिन जिए,
क्यूं पल ठहरता नहीं ये, क्यूं वक्त बदलता नहीं,
मेघना ने अपनी नजरे नीरव नीचे की तरफ की और जब वो नीरव की नजरों से में तो आंखों में जैसे अंधकार की कालिख मिली हो इस कदर काली हो गई थी,नीरव की आंखें जैसे ही उससे मिली उसका शरीर स्तब्ध रह गया,मेघना ने नीरव के चेहरे के पास आकर उसकी आंखों में देखा तो नीरव की पुतलियां गायब होकर सफेद होने लगी जैसे वो उसके वश में आ रहा हो,मेघना की आंखों से इस वक्त खून निकल रहा था।
मेघना : अब हम दोनों की ऊर्जा एक होने लगी है.......मेघना ने नीरव की ओर देखा जो एक टक उसे देख रहा था........मेघना ने नीरव के होठों को चूमकर कहा,"आप हमारे साथ चलेंगे ना??"
राहुल हड़बड़ाते हुए बेड पर आकर चीखने लगा,"नहींईइइह्.......रुक जाओ.........छोड़ दो उसे.........नीरवव........नीरववव मेरी बात सुननन्.......देख तेरा दोस्त तुझे पुकार रहा है........नीरररवववव्........."
तभी मेघना कठोर आवाज़ में चीखी,"चुपपप्........रहोओओअ्........." अब राहुल कुछ बोल नहीं सकता था जैसे किसी ने उसकी आवाज छीन ली हो।
मेघना (चेहरे को थामकर) : आप बोलिए ना
नीरव : हां,जहां तुम ले चलो में आऊंगा.........इतना सुनने के बाद मेघना और नीरव के मुंह आपस में मिल गए,नीरव का लंड अभी भी मेघना की चूत में था,मेघना के हाथों के नाखून काले पड़कर किसी तेज हथियार जैसे नुकीले हो गए थे जिसे वो नीरव के सिने पर घुमा रही थी।
दोनों की जीभ एक दूसरे के मुंह का स्वाद ले रही थी तभी मेघना ने जीभ को अपने दांतों से पकड़ा और जोर से खींचकर नीरव के मुंह से उखाड़ दिया।
"........आआआआहाहांहाहाआआआआहाहाहहह्..........."
एक तेज चीख उस सन्नाटे में गूंज उठी,नीरव के मुंह से खून की धारा बह रही थी।
ये नजारा देखकर राहुल का दिल जैसे धड़कन चुक गया नीरव अपना सर इधर उधर घुमा रहा था जिसे मेघना ने अपने हाथों से पकड़ कर कहा,"मैंने आपके लिए संभोग की पीड़ा सही तो आपको भी हमारे मिलन के लिए इस दर्द को सहना होगा,उसके बाद ही हमारी आत्मा यह नश्वर शरीर छोड़कर एक हो पाएगी"
खून जैसे पानी है,चीखें यहाँ मधुर गीत,
मौत से मिलकर निभाएंगे मिलन की ये रीत,
हड्डियाँ अब चरमराईं, जब ये खेल खेला,
इस कमरों ने प्यार नहीं सिर्फ मांस तोला।
मेघना ने फिर नीरव के दोनों होठों को मुंह में लिया और उसे चूमकर अपने तेज दांतों के बीच दबाकर जोर से काटा.....Sppprachhh.......की आवाज़ से खून की धारा से मेघना का मुंह सर गया और होठों को अपने मुंह में लेकर चबाने लगी,नीरव के अब पूरे दांत दिखने लगे थे वो बिलखते हुए अपना सर पटक रहा था।
नीरव के इस स्थिति में भी मेघना उसके लिंग पर उछलने लगी,नीरव का जिस्म जैसे मेघना की आज्ञा का पालन कर रहा हो वो धीरे-धीरे हिलते हुए उसकी योनि में धक्के मारने लगा,"हहांआआहह्.........यह हवस ही हमारे मिलन की वजह है जिसका मज़ा में तुम्हारे आखिरी पल में भी लेना चाहती हूं।"
मेघना ने आहे भरते हुए अपने नाखून नीरव के सीने में उतारे और उसे बीच में से चीर दिया........Frrraachhh........अब नीरव की आतें,मांस,फेफड़े,दिल सब कुछ बाहर दिख रहा था।मेघना इस वक्त किसी शैतान की तरह धीरे-धीरे नीरव को मौत की तरफ ले जा रही थी,उसके जिस्म के आसपास कई काले साए और मृत आकृतियां दिख रही थी।
नाखूनों में फँसी है तुम्हारी आख़िरी साँस,
खून के साथ बहता है टूटा हुआ विश्वास।
आँखें अब देखती नहीं, बस याद करती हैं डर,
हर पल मांगता है जैसे ज़िंदा रहने का कर्ज़।
मेघना एक के बाद एक नीरव के फेफड़े,आतें,मांस,आँखें,चमड़ी को खाने लगी,"......... ऊंऊन्न्ननहहह्.......... आआआहाहाहहह्..........आआईईईहहहहीईईई.............." आंखों की रोशनी जाने से नीरव सर पटकते हुए बोलने की कोशिश कर रहा था अपने दोस्त की यह हालत देखकर राहुल के भी आंसू लगातार बह रहे थे।
मेघना नीरव के दोनों हाथों को उखाड़कर एक तरफ फेंक दिया था।जो कमरा संतुष्टि भरे समागम का स्थान था वो अब नर्क के भयानक मंजर जैसे लग रहा था,हर तरफ खून के छिटे और मांस के टुकड़े फैले हुए थे।
मेघना की योनि अब ज्वालामुखी जैसे गर्म हो गई थी जिसमें धक्के लगाता नीरव का लिंग मोम की तरह पिघलते हुए विलीन हो गया,अब मेघना ने नीरव का दिल जो थोड़ा धड़क रहा था उसे भी उखाड़कर सेब की तरह चबाकर अपने अंदर उतार लिया,उसके बाद नीरव के टांगों के बीच बैठकर दोनों शुक्रपिंड को भी दांतो चबाकर खा लिया।
अब बिस्तर पर सिर्फ नीरव की टांगे,हाथ,खोपड़ी और कुछ हड्डियां ही बची थी।सामने राहुल जैसे सदमे से घिर चुका था क्योंकि अपने दोस्त के शरीर के टुकड़े होते हुए देखे थे तभी मेघना के कुछ शब्द उसके कान में पड़े,
रात की रगों में ज़हर बह रहा है,
हर दीवार पर साया कुछ कह रहा है।
खामोशी चीखती है इन बंद कमरों में,
आज फिर किसी ने दम तोड़ा अंधेरों में।
अब चारों तरफ फिर माहौल बदलने लगा और राहुल फिर वास्तविक समय में आ गया पर दहशत से भरी उन यादों की कालिख अब भी उसके मुख मंडल पर अपनी छाप छोड़ है थी जिससे दिमाग इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहा था,मेघना अब भी नग्न अवस्था में राहुल के पास बैठी हुई थी।
मेघना : अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हे आसान मौत दे सकती हूं क्योंकि आप मेरे पति के दोस्त है।
राहुल को कुछ देर पहले जो चेहरा हसीन लग रहा था उसी पर अब दहशत नजर आने लगी थी,राहुल ने मेघना को धक्का देकर दूर हटाया पर जल्दबाजी में वो बेड से नीचे गिर गया,जैसे ही उसकी नज़र पलंग के नीचे गई मोमबती की मद्धम रोशनी में हाथ-पैर के कटे टुकड़ों के पास एक खोपड़ी नजर आई जिसपर मांस के कुछ टुकड़े लगे हुए थे और नीचे सारा फर्श खून में भीगा हुआ था।यह शरीर नीरव का ही था जिसे देखकर राहुल के मुंह से चीख निकल गई,"......नहींईइहहह्.........." साथ ही पास के कोने में एक छोटा बच्चा नजर आया जो उसकी तरफ ही देख रहा था जिसकी आँखें नहीं थीं पर उसका पूरा चेहरा लाल और सड़ा हुआ था।
आयुष (कर्कश आवाज़ में) : मेरे मम्मी की बात मान लीजिए वो आपको आसानी से मार देगी पर मेरे पापा को मुझसे दूर करने की कोशिश भी मत करना।
अपने दोस्त की ऐसी हालत देखकर राहुल की आँखों से आँसू बहने लगे लेकिन ज़्यादा देर यहां रुकना मौत को गले लगाने जैसा था,वो कुछ सोच ही रहा था तभी उसकी नज़र सामने वाली खिड़की पर गई जो आधी टूटी हुई थी।मौका पाकर अपने दोस्त की अनावृत लाश हो वही छोड़कर वो तेज़ी से उस तरफ़ दौड़ा,हाथों की मदद से उसने घर की खिड़की तोड़ी और बाहर की तरफ कूद गया। खिड़की टूटने की आवाज़ सुनसान इलाके में हर जगह फैल गई और वह तेज़ी से उस घर से दूर भागने लगा।
उसे समझ नहीं आ रहा था कि नीरव के साथ अचानक यह सब कैसे हो गया,साथ में वो औरत और बच्चा कौन था? उसका दिल इतनी तेज़ी से धड़क रहा था जिसकी आवाज़ उसके कानों तक पहुँच रही थी। वह जल्द से जल्द इस जगह से दूर जाना चाहता था लेकिन वह बार-बार घूमकर उसी जगह पर पहुँच जाता था जैसे चारों तरफ भूल-भुलैया हो और आखिर में वो थककर एक जगह खड़ा हो गया।
वह पेड़ के सहारे खड़े होकर अपनी सांसों को काबू कर रहा था तभी उसे एक और बड़ा झटका लगा जब उसने सामने देखा तो नीरव दौड़ते हुए उसकी ओर आ रहा था।नीरव राहुल के पास आया पर राहुल घबराते हुए पीछे हटने लगा वो अपने दिमाग़ में सोच रहा था कि कहीं नीरव के रूप यह उस औरत की आत्मा तो नहीं?
नीरव : भगवान का शुक्र है जो तुम मिल गए।
राहुल (डरते हुए) : नहीं,दूर रहना मुझसे।
नीरव : राहुल क्या हुआ? मैं तुम्हारा दोस्त हूँ नीरव।
राहुल : नहीं तुम मर चुके हो, मैं कैसे मान लूं कि तुम नीरव ही हो।
नीरव : अच्छा.....अच्छा शांत हो जाओ, स्टेशन पर ताऊजी से मैं मिला उन्होंने ही मुझे बताया कि तुम इस तरफ आए हो, इसलिए मैं तुम्हें ढूँढने इस तरफ आया हूं,अब तो मानते हो?
राहुल सहमते हुए नीरव के पास आता है,"नीरव....नीरव!!? क्या यह सच में तुम हो?" इतना कहते हुए वो उसे छूने लगता है जैसे ही उसे यकीन होता है वो कसकर नीलेश के गले लगकर रोने लगता है,"नीररववव्.........नीरवव ये तुम ही हो मेरे यार.......sniffff.........भगवान का लाख-लाख शुक्र है कि तुम जिंदा हो।" नीरव कुछ देर तक उसे रोने देता है उसके बाद वो अलग होकर नीरव से पूछता है,"पर मैंने तो तुम्हे उस औरत के साथ....!??!! उसके हाथों मरते हुए देखा है!!"
राहुल की बात सुनकर नीरव ने कहा,"मैं तुम्हे सब बताऊंगा पर पहले हमें यहां से निकलना होगा क्योंकि रात में यह जगह ज्यादा भयावह हो जाती है।"
राहुल : मैंने बहुत कोशिश की दोस्त पर मैं इस जगह से बाहर नहीं निकल पाया।
नीरव : चिंता मत करो, मैं जहां से आया उस जगह से बाहर निकलने की कोशिश करते है।
इसके बाद दोनों तेजी से बाहर की ओर चलने लगे।आसमान में बादलों का जमघट लगा था,साथ ही यह रात सभी के लिए कहर लेकर आई थी, दोनों आगे चल रहे थे रास्ते में नीरव ने राहुल को उस घर के बारे में बताया और कहा,"बीस साल पहले,आनंदकुमार चावड़ा नाम का एक आदमी अपनी पत्नी मेघना चावड़ा और चार साल के बच्चे के साथ यहाँ रहता था,दोनों ने परिवार के विरुद्ध प्रेम विवाह किया था जिससे दोनों के घरवालों ने उनसे सारे रिश्ते तोड़ दिए थे पर फिर भी तीनों की ज़िंदगी छोटे-छोटे सपने और प्यार भरे लम्हों से भरी हुईं थी,
पर किस्मत ने उसकी जिंदगी में कुछ और ही लिखा था अचानक एक रात घर लौटते वक्त आनंद की दुर्घटना में मौत हो गई जिससे भरी जवानी में मेघना और उनका बेटा आयुष अकेले हो गए।
मेघना खूबसूरत के साथ एक भरे हुए जिस्म की मालकिन भी थी जिससे बस्ती में रहते कई लोग उसे अपनी वासना भरी नजरों से देखते थे और छेड़ते थे,उन लोगों से तंग आकर उसने अपने घर वापस लौटने का प्रयास भी किया पर वो अब उनके लिए मर चुकी है यह कहकर उन्होंने से दुत्कार दिया।
मेघना अब मौन रहकर सारे ग़म सहती रही जिससे उन लोगों हिम्मत बढ़ गई और एक रात कुछ लोगों ने घर घुसकर उसके साथ जबरदस्ती की जैसे। वो उनकी हवस मिटाने का साधन हो,उसका बेटा आयुष भी इतने गम और बोझ तले बीमार रहने लगा था जिसके लिए मेघनाने भी अपने हालतों को स्वीकार करके व्यभिचारी (धंधा करनेवाली) औरत की तरह जिस्म का व्यापार करना शुरू कर दिया था इसका परिणाम यह आया कि गांव के कुछ भले लोगों ने भी उसका साथ छोड़ दिया और उसे बुरी तरह बदनाम कर दिया पर मेघना को उन लोगों की बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता था।
अचानक एक तूफ़ानी देर रात में आयुष की तबीयत ज्यादा खराब हो गई, यहां परिवहन का कोई साधन भी मौजूद नहीं था तो मेघना अकेले दवाई लेने निकल गई और दवा लेकर लौटते समय जल्दबाजी में उसका पैर रेलवे ट्रैक में फंस गया।
बहुत चीखने,बिलखने और कोशिश करने के बाद भी उसकी मदद के लिए कोई नहीं आया जिससे वह ट्रेन के नीचे आकर मर गई। दूसरी तरफ,घर के निचले हिस्से में खिड़की के पास रखा एक लालटेन हवा के कारण नीचे गिर गया और उसकी आग पूरे घर में फैल गई,आयुष उस वक्त अपने कमरे में सो रहा था इसलिए उस भीषण आग ने उसे भी अपने अंदर समा लिया।
इस घटना के कुछ दिनों के बाद कई लोगों को एक सुंदर स्त्री उस घर के पास में देखने को मिली,जो अपने रूप और जिस्म के जाल में फंसाकर उन लोगों की जान लें रही थी,धीरे-धीरे यह सिलसिला बढ़ता गया और बस्ती के मर्द कम होने लगे इसलिए बचे हुए लोग समय के साथ सभी लोग शहर की तरफ रहने चले गए और यह जगह वीरान हो गई। राहुल ने नीरव की बात सुनकर कुछ पल चुप रहा।वो दोनों अभी उस गाँव से ही गुजर रहे थे,आखिर में राहुल ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा,"वैसे मेघना के साथ तो बहुत गलत हुआ है यार"
नीरव : सही कहा,लोगों को इतना भी मजबूर मत करो कि वो इंसान इंसानियत ही छोड़ दे।
नीरव की बात सुनकर राहुल चुप हो गया तभी उसके दिमाग़ में एक सवाल आया जिससे उसने कहा,"वैसे,नीरव कल रात तुम कहां चले गए थे?"
नीरव : अरे हाँ, मैं तुम्हें बताना भूल गया। कल जब तुम लोगो को देर हो गई तो मैं घर चल गया,जब मैं घर पहुँचा तो तार से मुझे पता चला कि मेरे दादाजी के बेटे की तबीयत खराब है इसलिए मुझे आज सुबह जल्दी निकलना पड़ा और वापस आकर जब मैं घर पहुँचा तो मां ने बताया कि तुम मुझे सुबह से ढूँढ़ रहे हो।" नीरव की बात सुनकर राहुल वही थम गया जिससे नीरव ने उसकी तरफ देखा।
राहुल : जहाँ तक मुझे पता है, आज सुबह से ही बारिश की वजह से सारी बसें और ट्रेनें रद कर दी गई हैं और अगर रही बात तबियत खराब होने कि तो उस तार की मिलने की खबर तुम्हारे घर में किसी को पता क्यों नहीं है?" राहुल ने अपनी बात खत्म की थी कि आसमान में ज़ोर से बिजली चमकी और उसकी रोशनी में राहुल को नीरव की परछाई दिखाई दी।
जिसे देखकर वह हैरान रह गया क्योंकि नीरव की परछाई में एक औरत की आकृति दिख रही थी।
उसी वक्त राहुल को नीरव की हँसी सुनाई दी जो बस्ती के चारों तरफ़ गूंज रही थी,"तुम बहुत सवाल पूछते हो लेकिन बहुत दिनों बाद आयुष को उसके पापा मिले है, अब मैं किसी भी हालत में उन्हें दूर नहीं जाने दूँगा।"
दूसरी तरफ़ किशन दौड़ते हुए बस्ती की तरफ़ ही पहुंच रहा था,"पता नहीं ये राहुल इस तरफ क्यों आया होगा?" मन में बहुत सारे ख्यालों के साथ आसपास देखते हुए आगे बढ़ रहा था कि तभी एक दर्दनाक चीख ने माहौल को झुंझला दिया,"......आआअह्हाहाआआअह्ह्ह्.........नहीहीईईअ्अह्ह्ह्.........." यह सुनकर किशन का कलेजा कांप उठा क्योंकि यह चीख राहुल की थी उसे एहसास हुआ कि चीख उसके आसपास के इलाक़े से ही आई है,उसे थोड़ी दूर वह बस्ती दिखाई दी और दौड़ते हुए जब वो वहां पहुंचा तो जैसे उसके पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गई हो।नीरव ने पूरी ताकत से राहुल के पेट में लकड़ी का एक बड़ा टुकड़ा घोंप दिया था,उसके जिस्म से बहता खून नीचे ज़मीन को भिगो रहा था,साथ ही राहुल के बदन पर कई गहरे घाव के निशान थे।
जब नीरव किशन की तरफ मुड़ा तो उसका डरावना चेहरा देखकर किशन कुछ कदम पीछे हट गया। काली आँखें,खून से सना सफेद चेहरा और उस चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी।राहुल ने किशन की तरफ देखकर गिड़गिड़ाते हुए कहा,"मुऊऊझझेझे.........बअअचचाचा......ललेले.........यायाआआरररर.........आआहाहाआआह्........." दर्द और खून में मिलकर उसकी आंखों से आंसू निकले जिसमें अपने परिवार से बिछड़ने का गम दिख रहा था,अपनी पत्नी और मां का वो चेहरा उसके सामने तैरने लगा तभी पीछे से एक बार हुआ और राहुल की गर्दन हवा में उड़ते हुए जमीन पर जा गिरी,उसके पीछे से मेघना का हैवानियत से भरा चेहरा दिखा जो दहशत से भरा था।
मेघना : मैने कहा था कि तुम्हे आसान मौत दूंगी पर तुमने दर्दभरी इस मौत को चुना। इतना बोलकर वो राहुल के गर्दन से निकलते खून को पीने लगी और नीरव राहुल के सीने से दिल दिलाकर खाने लगा,किशन को अब समझ आ गया कि इन अमानवीय शक्तियों से लड़ना उसके बस में नहीं है जिससे वो तेज़ी स्टेशन की ओर भागने लगा।
आभ से बरसते नीर के साथ बारिश ने फिर अपना खेल शुरू कर दिया था और इसी बीच किशन पूरी ताकत से वहाँ से भाग रहा था उसने जो मंज़र देखा था वो अब भी उसकी आँखों के सामने तैर रहा था जिसका डर उसके चेहरे पर साफ़ दिख रहा था। वो जल्दी से उस बस्ती से निकलकर बाहर आ गया और रेलवे ट्रैक पर भागते हुए स्टेशन की तरफ जाने लगा। पथरीले ट्रैक पर जल्दी में दौड़ने की वजह से उसका संतुलन बिगड़ा और नीचे गिर पड़ा,गिरते वक्त एक पत्थर से उसका पैर टकराया जिससे उसके पैर के हड्डी टूट गई,उसकी दर्द भरी आवाज़ रेलवे स्टेशन तक गूँज उठी।कुछ देर तक बिलखने के बाद वो खड़े होने की कोशिश करता है पर उसके बाद उसने जो डर मेहसूस किया जिससे उसके शरीर में सिरहन दौड़ गई, उसने देखा कि उसका एक पैर ट्रैक के बीच में फँस गया था।
एक मछली जैसे बिना पानी के छटपटाती है उस तरह उसने पूरी कोशिश की लेकिन कामयाब नहीं हुआ।वो ऊपर आसमान में देखता तो जैसे बादल भी उसके दर्द बया करता हुए पानी बरसा रहे थे,गिरती हुई पानी की बूंदों के साथ उसकी नज़र बाईं ओर जाती है तो नीरव और मेघना के साथ एक बच्चा किशन के सामने खड़े होते है,तीनों के चेहरों पर वही शैतानी मुस्कान फैली होती है।वही थोड़ी दूर से उसे ट्रेन की व्हिस्ल सुनाई देती है और मौत के डर से उसका शरीर काँपने लगता है,आँखों से निकलते आँसूओ के साथ बहुत कोशिश करता है लेकिन एक चीख के साथ उसका शरीर ट्रेन के नीचे कुचला जाता है और पूरा माहौल शांत हो जाता है।
अगले दिन, कुछ रेलवे अधिकारी और स्टेशन मास्टर किशोरभाई किशन की डेड बॉडी के पास आते हैं जिसके साथ ताऊजी भी खड़े होते है। अधिकारी मृतक की रिपोर्ट और पंचनामा बना रहे थे।
ऑफिसर ने लाश को देखा और कहा, "यह सब कैसे हुआ इसका कोई गवाह है जो आंखों देखा हाल बता सके?" उसकी बातें सुनकर ताऊजी आगे आकर कहते है, "जी साहब,मैने देखा है,कल रात मैं यह बैठा था तो किसी की दर्दनाक चीख सुनाई दी जिसे सुनकर मैं उस तरफ देखने गया तो पाया कि किशन का पैर रेलवे ट्रैक के बीच में फंसा हुआ था,जिसे निकलने की वो कोशिश कर रहा था, इससे पहले मैं उसकी मदद के लिए पहुँच पाता, ट्रेन आ गई और यह दुर्घटना हो गई।"
ऑफिसर : इससे तो साफ जाहिर होता है कि यह सब आकस्मिक कारणों के चलते घटा है जिसके आप गवाह है।
ताऊजी : हां,साहब।
ऑफिसर : ठीक है,लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दो और मृतक के परिवार को खबर करो।
इतना कहकर किशन की बॉडी को सफेद चादर से ढंक दिया गया,दो दिनों से चलती बारिश ने आज विराम लिया था,दूर क्षितिज पर छाए काले बादल में बीती रात को मनहूसियत भरी हुई थी और सन्नाटे को चीरती वो हवाएं किशन के बदन को ढंके कपड़े को हल्का सा हिला रही थी।
आखिर में किशन की मौत को एक दुर्घटना मानकर केस को बंध कर दिया गया,साथ ही राहुल और नीरव का उनके परिवार को कभी पता नहीं चला इस तरह 3 परिवार अंधेरे की खाई में खो गए।अक्सर कोई आदमी या राहगीर भटकते हुए उस घर तक पहुंचता है तो बच्चे के हंसने की,खेलने की या स्त्री के मादक सिसकियों की आवाज सुनाई देती है,
या कभी जंगल के वीरान इलाक़े में दो प्रेमियों के संभोग करते हुए भी आकृति दिखती है,आखिर में मौत को गले लगाकर नीरव को मेघना अपने साथ ले गई।
दोस्तों यह कहानी यही पर खत्म होती है, जानता हूँ कि कुछ लोगों को इस कहानी की Ending पसंद नहीं आई होगी पर मैं इसे एक Dark Ending ही देना चाहता था इसके बारे में आपकी क्या राय है नीचे Comment करके जरूर बताईए और अब जल्द ही मैं दूसरी कहानी पर भी काम शुरू करूंगा।
Nice and beautiful update.....
Thanks BuddiesShandar update
Bahut hee badhiya update diya hai or kahani ko bahut ache tarike se samapan kiya hai !अपडेट - 5रात को देरी से घर लौटने के बाद राहुल अपने घर में आराम कर रहा था तभी उसकी उसकी मां की बात सुनकर उसकी नींद खुल गई,"राहुल उठो, बाहर राजेश्री भाभी आई है और कह रहे है कि नीरव कल रात से घर नहीं लौटा।"
( Final Update )
"क्या कहा?" यह सुनकर राहुल की आँख खुल गई और वह सीधा नींद से जागकर बैठ गया,कमरे से बाहर जब बाहर आकर देखा तो नीरव की माँ के चेहरे पर चिंता और डर के भाव लिए सामने खड़ी थी,यह देखकर राहुल ने पूछा,"काकी,नीरव अभी तक घर नहीं आया!!?"
"हाँ बेटा,कल तुम दोनों साथ में गए थे और देर रात तक उसका इंतज़ार करने के बाद, मुझे लगा कि वह शायद तुम्हारे घर पर ही रुक गया होगा पर दोपहर होने पर भी जब वो घर नहीं लौटा तो मैं यहाँ पूछने आई थी लेकिन वो यहाँ पर भी नहीं है,पता नहीं कहाँ रह गया है?" यह कहते हुए उनकी आँखें नम हो गईं।
"काकी, चिंता मत करो, मैं अभी उसे ढूंढने निकलता हूँ,एक बार मिल जाए तो उसकी खैर नहीं, ऐसा कौनसा काम आ गया है जिसे करने घर पर बिना बताएं चल पड़ा" राहुल जल्दी से हाथ-मुँह धोकर बाहर आया तो उसकी पत्नी छाता लिए इंतेज़ार कर रही थी,राहुल ने छाता लेकर उसकी तरफ देखा तो दोनों के नैन मिले,"जल्दी आइएगा" यह सुनकर राहुल ने अपना सर हिलाया और नीरव को ढूँढ़ने निकल पड़ा।
कल की बारिश का असर शहर पर साफ़ दिख रहा था। शहर के कई इलाकों में पानी भर गया था,सड़के कच्ची होने की वजह से कई जगह पानी के गढ्ढे भरे हुए थे,घर की छत पर लगे पाइपों से पानी गिरते की आवाज़ गलियों में गूंज रही थी।ऊपर से देखने पर ऐसा लग रहा था जैसे पूरा शहर पानी में डूब रहा हो।राहुल नीरव के दूसरे दोस्तों, रिश्तेदारों और जहां काम करता था वो फैक्ट्री हर जगह पूछते हुए घूम रहा था।
इसके साथ ही,उसने उन सभी जगहों पर पता कर लिया था जहाँ वे दोनों बैठते थे लेकिन नीरव का कुछ पता नहीं चला। तेज़ बारिश से छाता राहुल को कब तक ढंक पाता जिसके चलते राहुल अब भीगने लगा था,बारिश की मार भी झेलते हुए दिलों से जुड़ी दोस्ती को वो ज्यादा एहमियत देता था,यह सब करते हुए कब रात हो गई उसे पता ही नहीं चला। राहुल की बेचैनी हर गुज़रते पल के साथ बढ़ती जा रही थी,इतनी जगह पर ढूंढने के बाद भी ना मिलने पर उसका मन किसी बड़ी अनहोनी की ओर संकेत दे रहा था।आखिर में, उसके दिमाग में एक ख्याल आया कि आख़िरी बार नीरव को उसने रेलवे स्टेशन पर देखा था और अब वही एक जगह बची थी जहां उसने तलाश नहीं की थी,इस ख्याल के साथ किशन को पूछने के इरादे से वो स्टेशन की तरफ चल पड़ा।
राहुल जब स्टेशन पर पहुँचा तो 9:30 बज चुके थे।बारिश की वजह से सुबह से चलती सारी ट्रेनें और बसें रद कर दी गई थी।केवल 30 km के अंदर चलने वाली एक-दो लोकल ट्रेनों को छोड़कर कोई ट्रेन नहीं चल रही थी इसलिए स्टेशन पर लोगों की चहल-पहल बहुत कम थी। राहुल ने नज़रें घुमाई तो किशन ताऊजी के साथ एक बेंच पर बैठा था।ताऊजी का नाम गजेंद्र सिंह था।उनकी उम्र 70 साल की थी लेकिन अपनी इस उम्र में भी कद-काठी अच्छी होने की वजह से सब उन्हें ताऊजी कहते थे। ताऊजी ज़्यादातर रात में यहीं बैठने आते थे इसलिए सब लोगों के साथ राहुल की भी उनसे अच्छी जान-पहचान हो गई थी।किशन को वहाँ बैठा देखकर राहुल जल्दी से उसके पास गया।उसको यहां आए हुए देखकर किशन कुछ कह पाता ताऊजी बोल पड़े,"कितने दिनों बाद मिले हो लाला,लेकिन इस वक्त तुम यहां और इतना हाँफ क्यों रहे हो!!?" ताऊजी राहुल को लाला कहकर पुकारते थे।
"ताऊजी मैं भी आपको यही बताने वाला था" राहुल ने किशन की तरफ देखा और कहा,"यार किशन गड़बड़ हो गई है,कल रात से नीरव घर ही नहीं पहुँचा है।" यह सुनकर किशन अपनी जगह पर खड़ा हो गया,"ये क्या बक रहा है!!?"
"हाँ यार,आंटी आज सुबह ही मेरे घर आई थीं उन्होंने मुझे बताया इसलिए मैंने सुबह से हर जगह देखा जहां उसके मिलने की उम्मीद थी लेकिन वह कहीं नहीं मिला, अंत मैं सोचा कि तुमसे बात करूं क्योंकि हम दोनों ने आखरी बार उसे यही देखा था।" यह सुनकर किशन के चेहरे पर भी तंग रेखाएं उमड़ पड़ी।
"हां तू सही कह रहा है चल हम........" किशन राहुल के साथ बात ही कर रहा था कि तभी किशन का सहकर्मी मनीष ऑफिस से दौड़ता हुआ आया और बोला,"किशन, गड़बड़ हो गई है भाई, लगता है अहमदाबाद से गांधीनगर की तरफ जाने वाली फाटक के पास कुछ दुर्घटना हुई है,अभी वहाँ से फ़ोन आया था इसलिए हमें तुरंत वहाँ जाना होगा।"
"बहनचोद क्या मुसीबत है,आज ही ये सब होना था ऊपर से किशोरभाई भी ड्यूटी पर नहीं आए हैं।" उसने कुछ सोचने के बाद राहुल से कहा,"राहुल,तुम कुछ पल इंतज़ार करो,मैं थोड़ी देर में वापस आता हूँ फिर जाकर हम नीरव को ढूँढेंगे।" यह कहकर किशन मनीष के साथ चला गया और राहुल ताऊजी के पास बेंच पर बैठ गया,"लाला,चिंता मत कर,नीरव यही कही होगा जल्द ही मिल जाएगा।" लेकिन राहुल का ध्यान ताऊजी की बातों पर नहीं था,वो अपने ख्यालों में खोया हुआ था।
राहुल को अंदर से शांति नहीं मिल रही थी इसलिए वो उठा और प्लेटफॉर्म पर एक चक्कर मारने के लिए निकल लगा।चलते-चलते वह प्लेटफॉर्म के अंतिम छोर तक पहुंच गया।सब जगह भयावह खामोशी फैली हुई थी,ऊपर प्लेटफॉर्म के लाइट की रोशनी में कई कीड़े-मकौड़े आसपास चक्कर लगा रहे थे,दूर से आती मेंढकों के टर्राने की आवाज़ चीत्कार सी कानों में चुभ रही थी।अचानक उसकी नज़र दूर एक रेलवे ट्रैक के पास रुक गई तो वो सहम गया क्योंकि नीरव जल्दी से चलते हुए अंधेरे इलाक़े की तरफ आगे बढ़ रहा था। राहुल पूरी ताकत इक्कठा करके ज़ोर से चिल्लाया,"नीररववव्......." लेकिन नीरव आगे बढ़ने लगा जैसे उसने राहुल की आवाज़ सुनी ना हो इसलिए ज़्यादा समय बर्बाद किए बिना राहुल सीधा उसकी तरफ दौड़ पड़ा।
ठंडी हवाओं को चीरते हुए रफ़्तार के साथ राहुल झाड़ियों के बीच से गुजरते हुए नीरव की तरफ बढ़ रहा था लेकिन राहुल जितनी तेज़ी से उसके पास जाने की कोशिश कर रहा था नीरव उससे उतना ही दूर जाते हुए दिख रहा था जैसे उन दोनों के बीच की दूरी कम ही ना हो रही हो।आसमान में एक बार फिर बादल घिरने लगे थे और हवा में नमी को देखकर ऐसा लग रहा था कि यह बादल एक बार फिर धरती को अपनी बौछार में भिगोएगी।राहुल तेज सांसों के साथ आगे बढ़ रहा था लेकिन दोनों तरफ के घने पेड़ो के बीच से उसके साथ कोई आगे बढ़ा रहा हो उसे ऐसा प्रतीत हो रहा था क्योंकि बिजली की रोशनी में एक काला साया उजायमन हो रहा था।बादलों की गरज किसी के गुस्से भरी दहाड़ सी प्रतीत होती थी जो हर बार ज़मीन के अंदर तक उतर जाती थी।
राहुल चलते हुए इस वीरान बस्ती में जा पहुंचा,बिजली की चमकार में पलभर के लिए टूटी दीवारें,हवाओं से काँपती खिड़कियाँ और फिर वही घना अंधेरा,आसमान से गिरती बूँदें खट-खट करती हुई छत पर पड़ रही थीं उसकी आवाज ऐसी थी मानो कोई नाखूनों से उसे खुरेच रहा हो।राहुल नज़रे सामने करके चलने लगा उसकी सांसे इतनी तेज़ थी जैसे पसलियां छाती चीरकर बाहर आ जाएंगी।
आखिर में नीरव का पीछा करते हुए राहुल उस घर तक पहुँच गया,उसने उसे दूर से देखा कि नीरव ने दरवाज़ा खोला और घर के अंदर चला गया जैसे वो उसका अपना घर हो।राहुल ने जब बाहर से घर की हालत देखी तो बाहर फूल मुरझाकर पड़े थे,चारों ओर की लकड़ी की बाड़ दो-तीन जगह से टूटी हुई थी,घर की ज़मीन काली पड़ी हुई थी,छत ऊपर से टूटी हुई थी,इसके अलावा घर में कई जगह दरारें भी थीं। घर को बाहर से देखने पर ऐसा लग रहा था कि जैसे यह कई सालों से बंद पड़ा होगा लेकिन राहुल ने देखा कि घर के नीचे और ऊपर के एक कमरे से हल्की रोशनी आ रही थी। यह देखकर राहुल मन ही मन सोचने लगा कि नीरव यहाँ किस लिए आया होगा?जैसे-जैसे वह आगे बढ़ा, उसे एक तेज़ दुर्गंध आने लगी। राहुल ने मुँह पर हाथ रखा और धीरे से घर के दरवाजे को धक्का लगाया,दरवाज़ा एक अजीब सी आवाज़ के साथ खुल गया,'कर्रर्रर्र......'
राहुल जब अंदर पहुँचा तो घर में भी वही बदबू फैली हुई थी,साथ ही घर के अंदर की हालत बाहर से भी ज़्यादा खराब थी। घर में कई जगह मकड़ी के जाले लगे थे, फर्नीचर टूटा हुआ था, अंदर रखे गमले टूटे पड़े थे जिसकी मिट्टी ज़मीन पर बिखरी हुई थी।ऊपर के हिस्से से बच्चे के हंसने की आवाजें आ रही थी पर जैसे ही राहुल ने 'कोई है........??!' पुकारा पूरे घर में मरघट जैसा सन्नाटा छा गया।यह खामोशी उसके दिल को पसीज रही थी तभी उसकी नजर ऊपर की सीढ़ियों पर गई तो एक छोटा बच्चा निस्तेज चेहरे से झांक रहा था,अचानक पीछे से किसी ने उसके कंधे को छुआ तो वो घबराकर पीछे मुड़ गया,उसने देखा तो उसके पीछे गुलाबी साड़ी में एक औरत हाथ में लालटेन लिए खड़ी थी।श्वेत सा अंग,देह नितरता रूप और उभरा हुआ यौवन जिसे देखकर किसी की भी नियत डोल जाए उसी तरफ राहुल मेघना के स्तनप्रदेश के उभार में खो गया।
मेघना : जी आप कौन और यहां कैसे??!
राहुल (खुद को संभालते हुए) : माफ़ कीजिए, दरअसल मेरा दोस्त गलती से यहां आ गया है उसी को ढूंढते हुए मैं यहां आया हूँ।
मेघना : अजीब बात है क्योंकि इस इलाक़े में तो ज्यादा तर कोई इंसान नहीं आता। इतना कहते हुए उसने लालटेन टेबल पर रखा और थोड़ी मोमबत्तियां जलाकर कोनो में रख दी जिससे हॉल में उजाला हो गया।
राहुल (आसपास नज़रे घुमाकर) : मैंने उसे यही आते हुए देखा था इसलिए मैं यहां चला आया।
राहुल ने मेघना की तरफ देखा जो उसकी तरफ पीठ करके खड़ी थी उसी वक्त राहुल की नजर मेघना की लचीली कमर के साथ उसके नितंब की रेखा पर अटक गई जो साड़ी थोड़ा नीचे सरकने से बाहर उभर आई थी,साथ ही सिर्फ साड़ी पहनने की वजह से राहुल उसकी मांसल गांड़ को साफ देख सकता था।
मेघना ने हल्का अपना सर पीछे घुमाते हुए पूछा,"तो क्या आपको वो मिला?"
राहुल को मेघना का जिस्म मदहोश करने लगा था जिसमें नीरव को ढूंढने की चिंता कही विलीन होने लगी थी,राहुल अय्याश किस्म का इंसान था जिससे के मन में वासना भरी संवेदनाएं फिर जागृत होने लगी।वो चलते हुए मेघना के पास आया और उसे पीछे से बाहों में भर लिया, अपना मुंह उसने मेघना के गर्दन पर रखा तो वो दुर्गंध गायब होकर मेघना के जिस्म की मादक खुश्बू सांसों में समाने लगी,राहुल मेघना के पेट को सहलाने लगा जिस पर मेघना कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रही थी।
मेघना : आपने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया.....क्या आपको आपका दोस्त मिला? राहुल ने अपने दोनों हाथ से मेघना के स्तनों को पकड़ लिया जिससे अब मेघना की हल्की सिसकी निकली।
राहुल (खुश होते हुए) : नहीं,और अब लगता है कि वो मिलेगा भी नहीं।
स्त्री की मादक आवाज़ हर मर्द जिस्म में आग में पेट्रोल डालने का काम करती है इसी तरह राहुल मेघना के निप्पल दबाते हुए उससे खेलने लगा,अपने हाथों में नर्म एहसास अलग आनंद दे रहा था पर उसे एक बात अजीब लगी कि मेघना का पूरा शरीर ठंडा पड़ा हुआ था।
मेघना : सही समझे, क्योंकि यहां आनेवाले सभी लोग मुझमें ही कही खो जाते हैं।
राहुल ने मेघना की बात अनसुनी करते हुए उसे ऊपर के हिस्से से पूरा नंगा कर दिया था,साथ ही वो उसकी चूत पर उंगलियां घुमाते हुए उसे उत्तेजित करने का प्रयास कर रहा था।
राहुल : क्या आप यहां अकेली रहती है?
मेघना : आआहहह्........जी नहीं,मैं यहां अपने 4 साल के बच्चे और पति के साथ रहती हूं।
अब राहुल ने मेघना को अपनी तरफ घुमा लिया था,उसकी योनि में उंगली घुमाने से उसकी साड़ी भी निकल चुकी थी जिससे मेघना का पारदर्शी देह उसके सामने था,राहुल ने मेघना को पास खींचने से उसके उरोज छाती में दब गए और वो मेघना के होठों पर उंगलियां घुमाने लगा।
राहुल : तो आपके पति इस वक्त कहां है?
मेघना : अक्सर काम की वजह से उन्हें दूसरे शहर जाना पड़ता है तो वो इस वक्त बाहर गए है।
मेघना के इतना कहते ही वो उसके होठों पर टूट पड़ा,मेघना के होठों और स्तनों का भरपूर रसपान करके राहुल ने मेघना को घुटनों के बल बिठाया और अपना लिंग बाहर निकालकर उसके मुंह में भर दिया,मेघना भी बड़ी कुशलता से उसे मुख मैथुन का आनंद दे रही थी जिससे वो कुछ ही पल में स्खलित हो गया,राहुल की सांसे तेज़ चल रही थी।
मेघना : बस इतने में थक गए? यह सुनकर राहुल ने आक्रमकता के साथ जवाब दिया।
राहुल : अभी तो बस शुरुआत है मेरी जान। इतना बोलकर वो मेघना की योनि को अपने मुख से भिगोने लगा कुछ पल चूसने के बाद वो अपना लिंग डालने ही वाला था कि तभी मेघना ने उसे रोकते हुए कहा,"यहां नहीं अंदर कमरे में चलते है।" यह सुनकर राहुल की उसकी मटकती गांड़ को देखकर उसके पीछे चल दिया।
अंदर कमरे की हालत भी कुछ ठीक नहीं थी पर हवस में राहुल इतना अंधा हो गया था कि उसके दिमाग़ में यह तक नहीं आया,आखिर अकेली स्त्री इस बंजर घर में क्या कर रही है? अंदर कमरे से एक टूटे पलंग पर मेला गद्दा था जिस पर राहुल लेट गया और मेघना ने राहुल के लिंग को हिलाकर अपने मुंह से चिकना किया और धीरे से जोर लगाते हुए अपनी योनि में उतार दिया,मेघना के हिलने की वजह से उछलते स्तनों को देखकर राहुल का लहू उबाल मारने लगा और उसने मुंह में चूसते हुए धक्के मारने लगा जिससे दोनों के आवाजों की पड़छंदे अब कमरे में गूंज रही थी,कुछ देर धक्के मारने के बाद राहुल मेघना की योनि में ही जड़ गया।
मेघना चुपचाप राहुल के बगल में आकर लेट गई और राहुल मेघना की नाभि के पास सर रखकर उसमें अपनी जीभ घुमाने लगा,राहुल ने देखा तो मेघना के चेहरे पर एक अधूरापन था।
राहुल : क्या हुआ जान तुम इतनी चुप क्यों हो?
मेघना : आप मर्द जात कितने खुदगर्ज होते हो,अपनी प्यास बुझाने के लिए हमारा इस्तेमाल तो करते हो पर जरूरत खत्म हो जाने के बाद हमारे बारे में एक पल भी ख्याल नहीं करते।
राहुल : ओह तो तुम इस बात से नाराज़ हो।
मेघना : हंहह्......आपसे नाराजगी कैसी? आपसे अच्छे तो आपके दोस्त नीरव है जिन्होंने मेरी बरसो की प्यास बुझा दी।
नीरव का नाम सुनते ही राहुल को जैसे झटका लगा।उसने तुरंत मेघना को देखकर पूछा,"क्या कहा तुमने अभी......नीरव?!! इसका मतलब तुम जानती हो नीरव को!!? कहां है वो?? और तुम उससे कहां और कैसे मिली!??!" इतना सुनकर मेघना हल्का सा मुस्कुराई और राहुल की ओर देखकर कहा,"आप उनसे मिलना चाहते है? तो मैं आपको अभी ले चलती हूं" इतना बोलकर मेघना की आँखें राहुल से मिली और उसकी आँखें भारी होने लगी और आसपास का वातावरण बदलने लगा।
कुछ ही पल में घर के कमरे से वो अब एक जंगल के बीच आकर खड़ा हुआ था जहां आसपास काफी घने पेड़ थे,चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था,ऊपर से बारिश गिर रही थी पर वो उसमें भीग नहीं रहा था तभी उसके कुछ आवाजें सुनाई दी जिसे सुनकर वो चलते हुए आगे बढ़ा जहां से पीली रोशनी आ रही थी उसने एक पड़े के तने के पीछे से देखा तो चकित रह गया,नीरव मेघना के साथ पूरी तरह नग्न होकर कामक्रीड़ा में डूबा हुआ था,दोनों फूलों की सेज पर लेटकर अपने इन पलो का आनंद ले रहे थे,दोनों के बदन फूलों और पेड़ो जैसी प्राकृतिक तत्वों पर रगड़ने से महकने लगे थे,नीरव का लंड पूरी ताक़त मेघना की योनि को रिझा रहा था........ Frriiiccchhh.........Fuuuchhhh..........की आवाज के साथ मेघना की सिसकियां इस माहौल में गूंज रही थी।
अब अंधेरा हटने लगा था पर आसमान में काले बादलों ने अपनी मौजूदगी का ग़रज कर ऐलान कर दिया था मानो यह सवेरा नहीं पर आने वाले अंधकार ने बरसात का मुखौटा पहन लिया हो।पूरा माहौल त्रस्त था जैसे रात ने जाने से इनकार कर दिया हो। गरजते बादलों के बीच गिरती बारिश की हर बूंद चीख़ बनकर धरती से टकरा रही थी पर इसके विपरीत हर बीतते पल के साथ दोनों का संभोग ज्यादा आक्रामक बनते जा रहा था।नीरव कई बार मेघना की योनि में स्खलित हो चुका था पर उसके मन को वो तृप्ति नहीं मिली थी।
राहुल से अब रहा नहीं गया इसलिए उसने नीरव के पास पहुंचते हुए कहा,"नीरव ये क्या कर रहा है!!? दूर रह इस लड़की से.......वरना ये तुझे भी अपने जाल में फंसा लेगी।" पर नीरव ने जैसे उसकी बातें सुनी ही ना हो,राहुल ने नीरव को छूने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया पर वो प्रतिबिंब की तरह उन दोनों के आरपार निकल गया,राहुल को यह बातें बड़ी अचंभिग कर रही थी तभी उसकी नजर मेघना से मिली जैसे वो उसे देख सकती हो,राहुल को देखकर उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान फैल गई।
राहुल : साली रंडी,यह सब तेरा ही किया धरा है ना!!? कौन है तू बता मुझे........और मेरे दोस्त के साथ ये क्यों कर रही है!???.........बताताआआ्........." पर सामने से कोई जवाब नहीं आया,दोनों ने पड़े के पास अपना समागम जारी रखा जिसमें एक बार फिर नीरव का वीर्यपात हो गया।
राहुल को नीरव को देखकर बड़ा झटका लगा था कि एक आम इंसान में इतनी क्षमता कैसे हो सकती है!!? दोनों का यह संभोग अब कोई अमानवीय शक्तियों का संबद्ध सा प्रतीत हो रहा था जिसमें दोनों ने प्रकृति के हर जगह अपने वीर्य के अंश छोड़े थे तभी राहुल ने देखा कि वो दोनों अपनी जिह्वा से खेलते हुए घर के रास्ते की तरफ आगे बढ़ने लगे।
चलते हुए भी वो अपने हाथ से जिस्म के उफान को वेग दे रहे थे,ऐसे करते हुए वो घर के द्वार तक पहुंच गए नीरव मेघना को गांड़ के उभारों से पकड़कर अंदर ले गया और बेड पर लाकर पटक दिया,वर्षा की रिमझिम में दोनों पूरे भीग गए थे पर मेघना के मुख की प्रसन्नता अलग ही चरम पर थी,इतने समागम के बाद भी नीरव के हर अंग में जैसे लावा दौड़ रहा था इसलिए वो मेघना के आंतर अंगों के बालों को दांतों से काटकर मुंह में उतार रहा था,अपने जिस्म के कांख,योनि और गुदा में उठती पीड़ा मेघना को संतुष्टि दे रही थी जिसमें वो अपने बालों को पकड़कर सिसकियां भर रही थी,"आआआआहाहांहाहाआआआआहाहाहहह्............. हाहाहाहाआआहहहह्.............ऐसे ही और कीजिए..........हमारा मिलन ऐसा ही होना चाहिए........... ओओओअअअहहहहह्.............."
नीरव सभी बालों को थूकने के बजाय गले से नीचे उतार गया जिसमें वो सभी गले में फंसने के बजाए नर्म रुई की तरह मुंह में घुल गए। केशविहीन मेघना का अब पूरा बदन ज्योत जैसे दमक रहा था।
इसके साथ ही प्रणयरंग के वो लम्हे फिर शुरू हो गए,श्वासों की लय, हृदय की धड़कन और जिस्मों के पड़छंद ने मिलकर ऐसा बंधन रचा जिसमें अलगाव का कोई अर्थ शेष न रहा,मेघना के मुंह,योनि,गुदा के साथ जिस्म का हर हिस्सा नीरव के कामरस में निसर गया,मेघना को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वो वीर्य की नदी के नहाकर आई हो और इसी खेल में दोपहर हो गई पता ही नहीं चला।
राहुल अब भी बेबसी से उन दोनों को समागम को निहार रहा था,बाहर अब भी घनघोर बारिश गिर रही थी इसलिए माहौल की नमी कमरे के अंदर की गर्मी से मिलकर खिड़की पर ओस की बूंदे जम गई थी, कमरे में अंदर मेघना नीरव के लिंग पर सवार थी उसके सिर से वीर्य की बूंदे पसीने में मिलकर फिसलते हुए गांड़ की रेखा में मिल जाती थी,नीरव अब भी धक्के मार रहा था पर अब दोनों को देखकर लग रहा था कि जैसे वो थकने लगे थे,बेड की चादर दोनों के वीर्य और पसीने में भीग चुकी थी।
मेघना : आआहहहह्........हहअअहह्.......हहहह्......नीरव आप मुझसे बहुत प्यार करते है नाआआ.........सीईईहअअहह्
नीरव : हहांआआहह्.........आआहह्...... मैं अपनी पूरी जिंदगी सिर्फ तुम्हारे साथ बिताना चाहता हूँ.......ऊउम्म्हह्.......जिससे मैं हर पल तुम्हे ऐसे ही प्यार करता रहूं........ओओफफ्........तुम्हारे सभी दुःख और ग़मो को दूर करके अपने प्यार से तुम्हे भर देना चाहता हूं........ आआहहहह्.........
इतना कहते हुए नीरव ने फिर जोश के साथ धक्का लगाया पर इस बार वो मेघना की नाभि से भी ऊपर पेट तक पहुंच रहा था और उसकी मोटाई मेघना के पेट के ऊपर से दिख रही थी।
मेघना (सर ऊपर करते हुए) : आआआआहाहांहाहाआआआआहाहाहहह्.............बस अब अपनी पत्नी को पूर्ण कर दीजिए......... ओओओअअअहहहहह्..........मैं अब सिर्फ आपकी हूँ........ ऊंऊउन्न्ननहहह्..........नीरव ने मेघना की गांड़ पर अपनी पकड़ बनाई और एक ज़ोरदार झटके से अपना सारा माल अंदर उतार दिया पर इस बार मेघना को उबकाई सी आई और वो रस मेघना उल्टी करते हुए मुंह के मार्ग से बाहर निकलने लगा जिसमें उन दोनों के बदन भीग गए।
मेघना का मुंह,छाती,पेट सब कुछ सफेद तरल पदार्थ में भीग हुआ था,मेघना नीरव के सनी पर लेती हुई थी तभी वो मधुर सी ध्वनि महकी जिसे सुनकर राहुल भी सचेत हो गया,
सौ बरस गुज़रे साँस लिए,सौ बरस गुज़रे बिन जिए,
क्यूं पल ठहरता नहीं ये, क्यूं वक्त बदलता नहीं,
मेघना ने अपनी नजरे नीरव नीचे की तरफ की और जब वो नीरव की नजरों से में तो आंखों में जैसे अंधकार की कालिख मिली हो इस कदर काली हो गई थी,नीरव की आंखें जैसे ही उससे मिली उसका शरीर स्तब्ध रह गया,मेघना ने नीरव के चेहरे के पास आकर उसकी आंखों में देखा तो नीरव की पुतलियां गायब होकर सफेद होने लगी जैसे वो उसके वश में आ रहा हो,मेघना की आंखों से इस वक्त खून निकल रहा था।
मेघना : अब हम दोनों की ऊर्जा एक होने लगी है.......मेघना ने नीरव की ओर देखा जो एक टक उसे देख रहा था........मेघना ने नीरव के होठों को चूमकर कहा,"आप हमारे साथ चलेंगे ना??"
राहुल हड़बड़ाते हुए बेड पर आकर चीखने लगा,"नहींईइइह्.......रुक जाओ.........छोड़ दो उसे.........नीरवव........नीरववव मेरी बात सुननन्.......देख तेरा दोस्त तुझे पुकार रहा है........नीरररवववव्........."
तभी मेघना कठोर आवाज़ में चीखी,"चुपपप्........रहोओओअ्........." अब राहुल कुछ बोल नहीं सकता था जैसे किसी ने उसकी आवाज छीन ली हो।
मेघना (चेहरे को थामकर) : आप बोलिए ना
नीरव : हां,जहां तुम ले चलो में आऊंगा.........इतना सुनने के बाद मेघना और नीरव के मुंह आपस में मिल गए,नीरव का लंड अभी भी मेघना की चूत में था,मेघना के हाथों के नाखून काले पड़कर किसी तेज हथियार जैसे नुकीले हो गए थे जिसे वो नीरव के सिने पर घुमा रही थी।
दोनों की जीभ एक दूसरे के मुंह का स्वाद ले रही थी तभी मेघना ने जीभ को अपने दांतों से पकड़ा और जोर से खींचकर नीरव के मुंह से उखाड़ दिया।
"........आआआआहाहांहाहाआआआआहाहाहहह्..........."
एक तेज चीख उस सन्नाटे में गूंज उठी,नीरव के मुंह से खून की धारा बह रही थी।
ये नजारा देखकर राहुल का दिल जैसे धड़कन चुक गया नीरव अपना सर इधर उधर घुमा रहा था जिसे मेघना ने अपने हाथों से पकड़ कर कहा,"मैंने आपके लिए संभोग की पीड़ा सही तो आपको भी हमारे मिलन के लिए इस दर्द को सहना होगा,उसके बाद ही हमारी आत्मा यह नश्वर शरीर छोड़कर एक हो पाएगी"
खून जैसे पानी है,चीखें यहाँ मधुर गीत,
मौत से मिलकर निभाएंगे मिलन की ये रीत,
हड्डियाँ अब चरमराईं, जब ये खेल खेला,
इस कमरों ने प्यार नहीं सिर्फ मांस तोला।
मेघना ने फिर नीरव के दोनों होठों को मुंह में लिया और उसे चूमकर अपने तेज दांतों के बीच दबाकर जोर से काटा.....Sppprachhh.......की आवाज़ से खून की धारा से मेघना का मुंह सर गया और होठों को अपने मुंह में लेकर चबाने लगी,नीरव के अब पूरे दांत दिखने लगे थे वो बिलखते हुए अपना सर पटक रहा था।
नीरव के इस स्थिति में भी मेघना उसके लिंग पर उछलने लगी,नीरव का जिस्म जैसे मेघना की आज्ञा का पालन कर रहा हो वो धीरे-धीरे हिलते हुए उसकी योनि में धक्के मारने लगा,"हहांआआहह्.........यह हवस ही हमारे मिलन की वजह है जिसका मज़ा में तुम्हारे आखिरी पल में भी लेना चाहती हूं।"
मेघना ने आहे भरते हुए अपने नाखून नीरव के सीने में उतारे और उसे बीच में से चीर दिया........Frrraachhh........अब नीरव की आतें,मांस,फेफड़े,दिल सब कुछ बाहर दिख रहा था।मेघना इस वक्त किसी शैतान की तरह धीरे-धीरे नीरव को मौत की तरफ ले जा रही थी,उसके जिस्म के आसपास कई काले साए और मृत आकृतियां दिख रही थी।
नाखूनों में फँसी है तुम्हारी आख़िरी साँस,
खून के साथ बहता है टूटा हुआ विश्वास।
आँखें अब देखती नहीं, बस याद करती हैं डर,
हर पल मांगता है जैसे ज़िंदा रहने का कर्ज़।
मेघना एक के बाद एक नीरव के फेफड़े,आतें,मांस,आँखें,चमड़ी को खाने लगी,"......... ऊंऊन्न्ननहहह्.......... आआआहाहाहहह्..........आआईईईहहहहीईईई.............." आंखों की रोशनी जाने से नीरव सर पटकते हुए बोलने की कोशिश कर रहा था अपने दोस्त की यह हालत देखकर राहुल के भी आंसू लगातार बह रहे थे।
मेघना नीरव के दोनों हाथों को उखाड़कर एक तरफ फेंक दिया था।जो कमरा संतुष्टि भरे समागम का स्थान था वो अब नर्क के भयानक मंजर जैसे लग रहा था,हर तरफ खून के छिटे और मांस के टुकड़े फैले हुए थे।
मेघना की योनि अब ज्वालामुखी जैसे गर्म हो गई थी जिसमें धक्के लगाता नीरव का लिंग मोम की तरह पिघलते हुए विलीन हो गया,अब मेघना ने नीरव का दिल जो थोड़ा धड़क रहा था उसे भी उखाड़कर सेब की तरह चबाकर अपने अंदर उतार लिया,उसके बाद नीरव के टांगों के बीच बैठकर दोनों शुक्रपिंड को भी दांतो चबाकर खा लिया।
अब बिस्तर पर सिर्फ नीरव की टांगे,हाथ,खोपड़ी और कुछ हड्डियां ही बची थी।सामने राहुल जैसे सदमे से घिर चुका था क्योंकि अपने दोस्त के शरीर के टुकड़े होते हुए देखे थे तभी मेघना के कुछ शब्द उसके कान में पड़े,
रात की रगों में ज़हर बह रहा है,
हर दीवार पर साया कुछ कह रहा है।
खामोशी चीखती है इन बंद कमरों में,
आज फिर किसी ने दम तोड़ा अंधेरों में।
अब चारों तरफ फिर माहौल बदलने लगा और राहुल फिर वास्तविक समय में आ गया पर दहशत से भरी उन यादों की कालिख अब भी उसके मुख मंडल पर अपनी छाप छोड़ है थी जिससे दिमाग इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहा था,मेघना अब भी नग्न अवस्था में राहुल के पास बैठी हुई थी।
मेघना : अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हे आसान मौत दे सकती हूं क्योंकि आप मेरे पति के दोस्त है।
राहुल को कुछ देर पहले जो चेहरा हसीन लग रहा था उसी पर अब दहशत नजर आने लगी थी,राहुल ने मेघना को धक्का देकर दूर हटाया पर जल्दबाजी में वो बेड से नीचे गिर गया,जैसे ही उसकी नज़र पलंग के नीचे गई मोमबती की मद्धम रोशनी में हाथ-पैर के कटे टुकड़ों के पास एक खोपड़ी नजर आई जिसपर मांस के कुछ टुकड़े लगे हुए थे और नीचे सारा फर्श खून में भीगा हुआ था।यह शरीर नीरव का ही था जिसे देखकर राहुल के मुंह से चीख निकल गई,"......नहींईइहहह्.........." साथ ही पास के कोने में एक छोटा बच्चा नजर आया जो उसकी तरफ ही देख रहा था जिसकी आँखें नहीं थीं पर उसका पूरा चेहरा लाल और सड़ा हुआ था।
आयुष (कर्कश आवाज़ में) : मेरे मम्मी की बात मान लीजिए वो आपको आसानी से मार देगी पर मेरे पापा को मुझसे दूर करने की कोशिश भी मत करना।
अपने दोस्त की ऐसी हालत देखकर राहुल की आँखों से आँसू बहने लगे लेकिन ज़्यादा देर यहां रुकना मौत को गले लगाने जैसा था,वो कुछ सोच ही रहा था तभी उसकी नज़र सामने वाली खिड़की पर गई जो आधी टूटी हुई थी।मौका पाकर अपने दोस्त की अनावृत लाश हो वही छोड़कर वो तेज़ी से उस तरफ़ दौड़ा,हाथों की मदद से उसने घर की खिड़की तोड़ी और बाहर की तरफ कूद गया। खिड़की टूटने की आवाज़ सुनसान इलाके में हर जगह फैल गई और वह तेज़ी से उस घर से दूर भागने लगा।
उसे समझ नहीं आ रहा था कि नीरव के साथ अचानक यह सब कैसे हो गया,साथ में वो औरत और बच्चा कौन था? उसका दिल इतनी तेज़ी से धड़क रहा था जिसकी आवाज़ उसके कानों तक पहुँच रही थी। वह जल्द से जल्द इस जगह से दूर जाना चाहता था लेकिन वह बार-बार घूमकर उसी जगह पर पहुँच जाता था जैसे चारों तरफ भूल-भुलैया हो और आखिर में वो थककर एक जगह खड़ा हो गया।
वह पेड़ के सहारे खड़े होकर अपनी सांसों को काबू कर रहा था तभी उसे एक और बड़ा झटका लगा जब उसने सामने देखा तो नीरव दौड़ते हुए उसकी ओर आ रहा था।नीरव राहुल के पास आया पर राहुल घबराते हुए पीछे हटने लगा वो अपने दिमाग़ में सोच रहा था कि कहीं नीरव के रूप यह उस औरत की आत्मा तो नहीं?
नीरव : भगवान का शुक्र है जो तुम मिल गए।
राहुल (डरते हुए) : नहीं,दूर रहना मुझसे।
नीरव : राहुल क्या हुआ? मैं तुम्हारा दोस्त हूँ नीरव।
राहुल : नहीं तुम मर चुके हो, मैं कैसे मान लूं कि तुम नीरव ही हो।
नीरव : अच्छा.....अच्छा शांत हो जाओ, स्टेशन पर ताऊजी से मैं मिला उन्होंने ही मुझे बताया कि तुम इस तरफ आए हो, इसलिए मैं तुम्हें ढूँढने इस तरफ आया हूं,अब तो मानते हो?
राहुल सहमते हुए नीरव के पास आता है,"नीरव....नीरव!!? क्या यह सच में तुम हो?" इतना कहते हुए वो उसे छूने लगता है जैसे ही उसे यकीन होता है वो कसकर नीलेश के गले लगकर रोने लगता है,"नीररववव्.........नीरवव ये तुम ही हो मेरे यार.......sniffff.........भगवान का लाख-लाख शुक्र है कि तुम जिंदा हो।" नीरव कुछ देर तक उसे रोने देता है उसके बाद वो अलग होकर नीरव से पूछता है,"पर मैंने तो तुम्हे उस औरत के साथ....!??!! उसके हाथों मरते हुए देखा है!!"
राहुल की बात सुनकर नीरव ने कहा,"मैं तुम्हे सब बताऊंगा पर पहले हमें यहां से निकलना होगा क्योंकि रात में यह जगह ज्यादा भयावह हो जाती है।"
राहुल : मैंने बहुत कोशिश की दोस्त पर मैं इस जगह से बाहर नहीं निकल पाया।
नीरव : चिंता मत करो, मैं जहां से आया उस जगह से बाहर निकलने की कोशिश करते है।
इसके बाद दोनों तेजी से बाहर की ओर चलने लगे।आसमान में बादलों का जमघट लगा था,साथ ही यह रात सभी के लिए कहर लेकर आई थी, दोनों आगे चल रहे थे रास्ते में नीरव ने राहुल को उस घर के बारे में बताया और कहा,"बीस साल पहले,आनंदकुमार चावड़ा नाम का एक आदमी अपनी पत्नी मेघना चावड़ा और चार साल के बच्चे के साथ यहाँ रहता था,दोनों ने परिवार के विरुद्ध प्रेम विवाह किया था जिससे दोनों के घरवालों ने उनसे सारे रिश्ते तोड़ दिए थे पर फिर भी तीनों की ज़िंदगी छोटे-छोटे सपने और प्यार भरे लम्हों से भरी हुईं थी,
पर किस्मत ने उसकी जिंदगी में कुछ और ही लिखा था अचानक एक रात घर लौटते वक्त आनंद की दुर्घटना में मौत हो गई जिससे भरी जवानी में मेघना और उनका बेटा आयुष अकेले हो गए।
मेघना खूबसूरत के साथ एक भरे हुए जिस्म की मालकिन भी थी जिससे बस्ती में रहते कई लोग उसे अपनी वासना भरी नजरों से देखते थे और छेड़ते थे,उन लोगों से तंग आकर उसने अपने घर वापस लौटने का प्रयास भी किया पर वो अब उनके लिए मर चुकी है यह कहकर उन्होंने से दुत्कार दिया।
मेघना अब मौन रहकर सारे ग़म सहती रही जिससे उन लोगों हिम्मत बढ़ गई और एक रात कुछ लोगों ने घर घुसकर उसके साथ जबरदस्ती की जैसे। वो उनकी हवस मिटाने का साधन हो,उसका बेटा आयुष भी इतने गम और बोझ तले बीमार रहने लगा था जिसके लिए मेघनाने भी अपने हालतों को स्वीकार करके व्यभिचारी (धंधा करनेवाली) औरत की तरह जिस्म का व्यापार करना शुरू कर दिया था इसका परिणाम यह आया कि गांव के कुछ भले लोगों ने भी उसका साथ छोड़ दिया और उसे बुरी तरह बदनाम कर दिया पर मेघना को उन लोगों की बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता था।
अचानक एक तूफ़ानी देर रात में आयुष की तबीयत ज्यादा खराब हो गई, यहां परिवहन का कोई साधन भी मौजूद नहीं था तो मेघना अकेले दवाई लेने निकल गई और दवा लेकर लौटते समय जल्दबाजी में उसका पैर रेलवे ट्रैक में फंस गया।
बहुत चीखने,बिलखने और कोशिश करने के बाद भी उसकी मदद के लिए कोई नहीं आया जिससे वह ट्रेन के नीचे आकर मर गई। दूसरी तरफ,घर के निचले हिस्से में खिड़की के पास रखा एक लालटेन हवा के कारण नीचे गिर गया और उसकी आग पूरे घर में फैल गई,आयुष उस वक्त अपने कमरे में सो रहा था इसलिए उस भीषण आग ने उसे भी अपने अंदर समा लिया।
इस घटना के कुछ दिनों के बाद कई लोगों को एक सुंदर स्त्री उस घर के पास में देखने को मिली,जो अपने रूप और जिस्म के जाल में फंसाकर उन लोगों की जान लें रही थी,धीरे-धीरे यह सिलसिला बढ़ता गया और बस्ती के मर्द कम होने लगे इसलिए बचे हुए लोग समय के साथ सभी लोग शहर की तरफ रहने चले गए और यह जगह वीरान हो गई। राहुल ने नीरव की बात सुनकर कुछ पल चुप रहा।वो दोनों अभी उस गाँव से ही गुजर रहे थे,आखिर में राहुल ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा,"वैसे मेघना के साथ तो बहुत गलत हुआ है यार"
नीरव : सही कहा,लोगों को इतना भी मजबूर मत करो कि वो इंसान इंसानियत ही छोड़ दे।
नीरव की बात सुनकर राहुल चुप हो गया तभी उसके दिमाग़ में एक सवाल आया जिससे उसने कहा,"वैसे,नीरव कल रात तुम कहां चले गए थे?"
नीरव : अरे हाँ, मैं तुम्हें बताना भूल गया। कल जब तुम लोगो को देर हो गई तो मैं घर चल गया,जब मैं घर पहुँचा तो तार से मुझे पता चला कि मेरे दादाजी के बेटे की तबीयत खराब है इसलिए मुझे आज सुबह जल्दी निकलना पड़ा और वापस आकर जब मैं घर पहुँचा तो मां ने बताया कि तुम मुझे सुबह से ढूँढ़ रहे हो।" नीरव की बात सुनकर राहुल वही थम गया जिससे नीरव ने उसकी तरफ देखा।
राहुल : जहाँ तक मुझे पता है, आज सुबह से ही बारिश की वजह से सारी बसें और ट्रेनें रद कर दी गई हैं और अगर रही बात तबियत खराब होने कि तो उस तार की मिलने की खबर तुम्हारे घर में किसी को पता क्यों नहीं है?" राहुल ने अपनी बात खत्म की थी कि आसमान में ज़ोर से बिजली चमकी और उसकी रोशनी में राहुल को नीरव की परछाई दिखाई दी।
जिसे देखकर वह हैरान रह गया क्योंकि नीरव की परछाई में एक औरत की आकृति दिख रही थी।
उसी वक्त राहुल को नीरव की हँसी सुनाई दी जो बस्ती के चारों तरफ़ गूंज रही थी,"तुम बहुत सवाल पूछते हो लेकिन बहुत दिनों बाद आयुष को उसके पापा मिले है, अब मैं किसी भी हालत में उन्हें दूर नहीं जाने दूँगा।"
दूसरी तरफ़ किशन दौड़ते हुए बस्ती की तरफ़ ही पहुंच रहा था,"पता नहीं ये राहुल इस तरफ क्यों आया होगा?" मन में बहुत सारे ख्यालों के साथ आसपास देखते हुए आगे बढ़ रहा था कि तभी एक दर्दनाक चीख ने माहौल को झुंझला दिया,"......आआअह्हाहाआआअह्ह्ह्.........नहीहीईईअ्अह्ह्ह्.........." यह सुनकर किशन का कलेजा कांप उठा क्योंकि यह चीख राहुल की थी उसे एहसास हुआ कि चीख उसके आसपास के इलाक़े से ही आई है,उसे थोड़ी दूर वह बस्ती दिखाई दी और दौड़ते हुए जब वो वहां पहुंचा तो जैसे उसके पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गई हो।नीरव ने पूरी ताकत से राहुल के पेट में लकड़ी का एक बड़ा टुकड़ा घोंप दिया था,उसके जिस्म से बहता खून नीचे ज़मीन को भिगो रहा था,साथ ही राहुल के बदन पर कई गहरे घाव के निशान थे।
जब नीरव किशन की तरफ मुड़ा तो उसका डरावना चेहरा देखकर किशन कुछ कदम पीछे हट गया। काली आँखें,खून से सना सफेद चेहरा और उस चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी।राहुल ने किशन की तरफ देखकर गिड़गिड़ाते हुए कहा,"मुऊऊझझेझे.........बअअचचाचा......ललेले.........यायाआआरररर.........आआहाहाआआह्........." दर्द और खून में मिलकर उसकी आंखों से आंसू निकले जिसमें अपने परिवार से बिछड़ने का गम दिख रहा था,अपनी पत्नी और मां का वो चेहरा उसके सामने तैरने लगा तभी पीछे से एक बार हुआ और राहुल की गर्दन हवा में उड़ते हुए जमीन पर जा गिरी,उसके पीछे से मेघना का हैवानियत से भरा चेहरा दिखा जो दहशत से भरा था।
मेघना : मैने कहा था कि तुम्हे आसान मौत दूंगी पर तुमने दर्दभरी इस मौत को चुना। इतना बोलकर वो राहुल के गर्दन से निकलते खून को पीने लगी और नीरव राहुल के सीने से दिल दिलाकर खाने लगा,किशन को अब समझ आ गया कि इन अमानवीय शक्तियों से लड़ना उसके बस में नहीं है जिससे वो तेज़ी स्टेशन की ओर भागने लगा।
आभ से बरसते नीर के साथ बारिश ने फिर अपना खेल शुरू कर दिया था और इसी बीच किशन पूरी ताकत से वहाँ से भाग रहा था उसने जो मंज़र देखा था वो अब भी उसकी आँखों के सामने तैर रहा था जिसका डर उसके चेहरे पर साफ़ दिख रहा था। वो जल्दी से उस बस्ती से निकलकर बाहर आ गया और रेलवे ट्रैक पर भागते हुए स्टेशन की तरफ जाने लगा। पथरीले ट्रैक पर जल्दी में दौड़ने की वजह से उसका संतुलन बिगड़ा और नीचे गिर पड़ा,गिरते वक्त एक पत्थर से उसका पैर टकराया जिससे उसके पैर के हड्डी टूट गई,उसकी दर्द भरी आवाज़ रेलवे स्टेशन तक गूँज उठी।कुछ देर तक बिलखने के बाद वो खड़े होने की कोशिश करता है पर उसके बाद उसने जो डर मेहसूस किया जिससे उसके शरीर में सिरहन दौड़ गई, उसने देखा कि उसका एक पैर ट्रैक के बीच में फँस गया था।
एक मछली जैसे बिना पानी के छटपटाती है उस तरह उसने पूरी कोशिश की लेकिन कामयाब नहीं हुआ।वो ऊपर आसमान में देखता तो जैसे बादल भी उसके दर्द बया करता हुए पानी बरसा रहे थे,गिरती हुई पानी की बूंदों के साथ उसकी नज़र बाईं ओर जाती है तो नीरव और मेघना के साथ एक बच्चा किशन के सामने खड़े होते है,तीनों के चेहरों पर वही शैतानी मुस्कान फैली होती है।वही थोड़ी दूर से उसे ट्रेन की व्हिस्ल सुनाई देती है और मौत के डर से उसका शरीर काँपने लगता है,आँखों से निकलते आँसूओ के साथ बहुत कोशिश करता है लेकिन एक चीख के साथ उसका शरीर ट्रेन के नीचे कुचला जाता है और पूरा माहौल शांत हो जाता है।
अगले दिन, कुछ रेलवे अधिकारी और स्टेशन मास्टर किशोरभाई किशन की डेड बॉडी के पास आते हैं जिसके साथ ताऊजी भी खड़े होते है। अधिकारी मृतक की रिपोर्ट और पंचनामा बना रहे थे।
ऑफिसर ने लाश को देखा और कहा, "यह सब कैसे हुआ इसका कोई गवाह है जो आंखों देखा हाल बता सके?" उसकी बातें सुनकर ताऊजी आगे आकर कहते है, "जी साहब,मैने देखा है,कल रात मैं यह बैठा था तो किसी की दर्दनाक चीख सुनाई दी जिसे सुनकर मैं उस तरफ देखने गया तो पाया कि किशन का पैर रेलवे ट्रैक के बीच में फंसा हुआ था,जिसे निकलने की वो कोशिश कर रहा था, इससे पहले मैं उसकी मदद के लिए पहुँच पाता, ट्रेन आ गई और यह दुर्घटना हो गई।"
ऑफिसर : इससे तो साफ जाहिर होता है कि यह सब आकस्मिक कारणों के चलते घटा है जिसके आप गवाह है।
ताऊजी : हां,साहब।
ऑफिसर : ठीक है,लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दो और मृतक के परिवार को खबर करो।
इतना कहकर किशन की बॉडी को सफेद चादर से ढंक दिया गया,दो दिनों से चलती बारिश ने आज विराम लिया था,दूर क्षितिज पर छाए काले बादल में बीती रात को मनहूसियत भरी हुई थी और सन्नाटे को चीरती वो हवाएं किशन के बदन को ढंके कपड़े को हल्का सा हिला रही थी।
आखिर में किशन की मौत को एक दुर्घटना मानकर केस को बंध कर दिया गया,साथ ही राहुल और नीरव का उनके परिवार को कभी पता नहीं चला इस तरह 3 परिवार अंधेरे की खाई में खो गए।अक्सर कोई आदमी या राहगीर भटकते हुए उस घर तक पहुंचता है तो बच्चे के हंसने की,खेलने की या स्त्री के मादक सिसकियों की आवाज सुनाई देती है,
या कभी जंगल के वीरान इलाक़े में दो प्रेमियों के संभोग करते हुए भी आकृति दिखती है,आखिर में मौत को गले लगाकर नीरव को मेघना अपने साथ ले गई।
दोस्तों यह कहानी यही पर खत्म होती है, जानता हूँ कि कुछ लोगों को इस कहानी की Ending पसंद नहीं आई होगी पर मैं इसे एक Dark Ending ही देना चाहता था इसके बारे में आपकी क्या राय है नीचे Comment करके जरूर बताईए और अब जल्द ही मैं दूसरी कहानी पर भी काम शुरू करूंगा।
Mujhe laga tha iss tarah ki ending logo ko jyda pasand nahi aayegi par samjne ke liye ThanksBahut hee badhiya update diya hai or kahani ko bahut ache tarike se samapan kiya hai !
अपडेट - 5रात को देरी से घर लौटने के बाद राहुल अपने घर में आराम कर रहा था तभी उसकी उसकी मां की बात सुनकर उसकी नींद खुल गई,"राहुल उठो, बाहर राजेश्री भाभी आई है और कह रहे है कि नीरव कल रात से घर नहीं लौटा।"
( Final Update )
"क्या कहा?" यह सुनकर राहुल की आँख खुल गई और वह सीधा नींद से जागकर बैठ गया,कमरे से बाहर जब बाहर आकर देखा तो नीरव की माँ के चेहरे पर चिंता और डर के भाव लिए सामने खड़ी थी,यह देखकर राहुल ने पूछा,"काकी,नीरव अभी तक घर नहीं आया!!?"
"हाँ बेटा,कल तुम दोनों साथ में गए थे और देर रात तक उसका इंतज़ार करने के बाद, मुझे लगा कि वह शायद तुम्हारे घर पर ही रुक गया होगा पर दोपहर होने पर भी जब वो घर नहीं लौटा तो मैं यहाँ पूछने आई थी लेकिन वो यहाँ पर भी नहीं है,पता नहीं कहाँ रह गया है?" यह कहते हुए उनकी आँखें नम हो गईं।
"काकी, चिंता मत करो, मैं अभी उसे ढूंढने निकलता हूँ,एक बार मिल जाए तो उसकी खैर नहीं, ऐसा कौनसा काम आ गया है जिसे करने घर पर बिना बताएं चल पड़ा" राहुल जल्दी से हाथ-मुँह धोकर बाहर आया तो उसकी पत्नी छाता लिए इंतेज़ार कर रही थी,राहुल ने छाता लेकर उसकी तरफ देखा तो दोनों के नैन मिले,"जल्दी आइएगा" यह सुनकर राहुल ने अपना सर हिलाया और नीरव को ढूँढ़ने निकल पड़ा।
कल की बारिश का असर शहर पर साफ़ दिख रहा था। शहर के कई इलाकों में पानी भर गया था,सड़के कच्ची होने की वजह से कई जगह पानी के गढ्ढे भरे हुए थे,घर की छत पर लगे पाइपों से पानी गिरते की आवाज़ गलियों में गूंज रही थी।ऊपर से देखने पर ऐसा लग रहा था जैसे पूरा शहर पानी में डूब रहा हो।राहुल नीरव के दूसरे दोस्तों, रिश्तेदारों और जहां काम करता था वो फैक्ट्री हर जगह पूछते हुए घूम रहा था।
इसके साथ ही,उसने उन सभी जगहों पर पता कर लिया था जहाँ वे दोनों बैठते थे लेकिन नीरव का कुछ पता नहीं चला। तेज़ बारिश से छाता राहुल को कब तक ढंक पाता जिसके चलते राहुल अब भीगने लगा था,बारिश की मार भी झेलते हुए दिलों से जुड़ी दोस्ती को वो ज्यादा एहमियत देता था,यह सब करते हुए कब रात हो गई उसे पता ही नहीं चला। राहुल की बेचैनी हर गुज़रते पल के साथ बढ़ती जा रही थी,इतनी जगह पर ढूंढने के बाद भी ना मिलने पर उसका मन किसी बड़ी अनहोनी की ओर संकेत दे रहा था।आखिर में, उसके दिमाग में एक ख्याल आया कि आख़िरी बार नीरव को उसने रेलवे स्टेशन पर देखा था और अब वही एक जगह बची थी जहां उसने तलाश नहीं की थी,इस ख्याल के साथ किशन को पूछने के इरादे से वो स्टेशन की तरफ चल पड़ा।
राहुल जब स्टेशन पर पहुँचा तो 9:30 बज चुके थे।बारिश की वजह से सुबह से चलती सारी ट्रेनें और बसें रद कर दी गई थी।केवल 30 km के अंदर चलने वाली एक-दो लोकल ट्रेनों को छोड़कर कोई ट्रेन नहीं चल रही थी इसलिए स्टेशन पर लोगों की चहल-पहल बहुत कम थी। राहुल ने नज़रें घुमाई तो किशन ताऊजी के साथ एक बेंच पर बैठा था।ताऊजी का नाम गजेंद्र सिंह था।उनकी उम्र 70 साल की थी लेकिन अपनी इस उम्र में भी कद-काठी अच्छी होने की वजह से सब उन्हें ताऊजी कहते थे। ताऊजी ज़्यादातर रात में यहीं बैठने आते थे इसलिए सब लोगों के साथ राहुल की भी उनसे अच्छी जान-पहचान हो गई थी।किशन को वहाँ बैठा देखकर राहुल जल्दी से उसके पास गया।उसको यहां आए हुए देखकर किशन कुछ कह पाता ताऊजी बोल पड़े,"कितने दिनों बाद मिले हो लाला,लेकिन इस वक्त तुम यहां और इतना हाँफ क्यों रहे हो!!?" ताऊजी राहुल को लाला कहकर पुकारते थे।
"ताऊजी मैं भी आपको यही बताने वाला था" राहुल ने किशन की तरफ देखा और कहा,"यार किशन गड़बड़ हो गई है,कल रात से नीरव घर ही नहीं पहुँचा है।" यह सुनकर किशन अपनी जगह पर खड़ा हो गया,"ये क्या बक रहा है!!?"
"हाँ यार,आंटी आज सुबह ही मेरे घर आई थीं उन्होंने मुझे बताया इसलिए मैंने सुबह से हर जगह देखा जहां उसके मिलने की उम्मीद थी लेकिन वह कहीं नहीं मिला, अंत मैं सोचा कि तुमसे बात करूं क्योंकि हम दोनों ने आखरी बार उसे यही देखा था।" यह सुनकर किशन के चेहरे पर भी तंग रेखाएं उमड़ पड़ी।
"हां तू सही कह रहा है चल हम........" किशन राहुल के साथ बात ही कर रहा था कि तभी किशन का सहकर्मी मनीष ऑफिस से दौड़ता हुआ आया और बोला,"किशन, गड़बड़ हो गई है भाई, लगता है अहमदाबाद से गांधीनगर की तरफ जाने वाली फाटक के पास कुछ दुर्घटना हुई है,अभी वहाँ से फ़ोन आया था इसलिए हमें तुरंत वहाँ जाना होगा।"
"बहनचोद क्या मुसीबत है,आज ही ये सब होना था ऊपर से किशोरभाई भी ड्यूटी पर नहीं आए हैं।" उसने कुछ सोचने के बाद राहुल से कहा,"राहुल,तुम कुछ पल इंतज़ार करो,मैं थोड़ी देर में वापस आता हूँ फिर जाकर हम नीरव को ढूँढेंगे।" यह कहकर किशन मनीष के साथ चला गया और राहुल ताऊजी के पास बेंच पर बैठ गया,"लाला,चिंता मत कर,नीरव यही कही होगा जल्द ही मिल जाएगा।" लेकिन राहुल का ध्यान ताऊजी की बातों पर नहीं था,वो अपने ख्यालों में खोया हुआ था।
राहुल को अंदर से शांति नहीं मिल रही थी इसलिए वो उठा और प्लेटफॉर्म पर एक चक्कर मारने के लिए निकल लगा।चलते-चलते वह प्लेटफॉर्म के अंतिम छोर तक पहुंच गया।सब जगह भयावह खामोशी फैली हुई थी,ऊपर प्लेटफॉर्म के लाइट की रोशनी में कई कीड़े-मकौड़े आसपास चक्कर लगा रहे थे,दूर से आती मेंढकों के टर्राने की आवाज़ चीत्कार सी कानों में चुभ रही थी।अचानक उसकी नज़र दूर एक रेलवे ट्रैक के पास रुक गई तो वो सहम गया क्योंकि नीरव जल्दी से चलते हुए अंधेरे इलाक़े की तरफ आगे बढ़ रहा था। राहुल पूरी ताकत इक्कठा करके ज़ोर से चिल्लाया,"नीररववव्......." लेकिन नीरव आगे बढ़ने लगा जैसे उसने राहुल की आवाज़ सुनी ना हो इसलिए ज़्यादा समय बर्बाद किए बिना राहुल सीधा उसकी तरफ दौड़ पड़ा।
ठंडी हवाओं को चीरते हुए रफ़्तार के साथ राहुल झाड़ियों के बीच से गुजरते हुए नीरव की तरफ बढ़ रहा था लेकिन राहुल जितनी तेज़ी से उसके पास जाने की कोशिश कर रहा था नीरव उससे उतना ही दूर जाते हुए दिख रहा था जैसे उन दोनों के बीच की दूरी कम ही ना हो रही हो।आसमान में एक बार फिर बादल घिरने लगे थे और हवा में नमी को देखकर ऐसा लग रहा था कि यह बादल एक बार फिर धरती को अपनी बौछार में भिगोएगी।राहुल तेज सांसों के साथ आगे बढ़ रहा था लेकिन दोनों तरफ के घने पेड़ो के बीच से उसके साथ कोई आगे बढ़ा रहा हो उसे ऐसा प्रतीत हो रहा था क्योंकि बिजली की रोशनी में एक काला साया उजायमन हो रहा था।बादलों की गरज किसी के गुस्से भरी दहाड़ सी प्रतीत होती थी जो हर बार ज़मीन के अंदर तक उतर जाती थी।
राहुल चलते हुए इस वीरान बस्ती में जा पहुंचा,बिजली की चमकार में पलभर के लिए टूटी दीवारें,हवाओं से काँपती खिड़कियाँ और फिर वही घना अंधेरा,आसमान से गिरती बूँदें खट-खट करती हुई छत पर पड़ रही थीं उसकी आवाज ऐसी थी मानो कोई नाखूनों से उसे खुरेच रहा हो।राहुल नज़रे सामने करके चलने लगा उसकी सांसे इतनी तेज़ थी जैसे पसलियां छाती चीरकर बाहर आ जाएंगी।
आखिर में नीरव का पीछा करते हुए राहुल उस घर तक पहुँच गया,उसने उसे दूर से देखा कि नीरव ने दरवाज़ा खोला और घर के अंदर चला गया जैसे वो उसका अपना घर हो।राहुल ने जब बाहर से घर की हालत देखी तो बाहर फूल मुरझाकर पड़े थे,चारों ओर की लकड़ी की बाड़ दो-तीन जगह से टूटी हुई थी,घर की ज़मीन काली पड़ी हुई थी,छत ऊपर से टूटी हुई थी,इसके अलावा घर में कई जगह दरारें भी थीं। घर को बाहर से देखने पर ऐसा लग रहा था कि जैसे यह कई सालों से बंद पड़ा होगा लेकिन राहुल ने देखा कि घर के नीचे और ऊपर के एक कमरे से हल्की रोशनी आ रही थी। यह देखकर राहुल मन ही मन सोचने लगा कि नीरव यहाँ किस लिए आया होगा?जैसे-जैसे वह आगे बढ़ा, उसे एक तेज़ दुर्गंध आने लगी। राहुल ने मुँह पर हाथ रखा और धीरे से घर के दरवाजे को धक्का लगाया,दरवाज़ा एक अजीब सी आवाज़ के साथ खुल गया,'कर्रर्रर्र......'
राहुल जब अंदर पहुँचा तो घर में भी वही बदबू फैली हुई थी,साथ ही घर के अंदर की हालत बाहर से भी ज़्यादा खराब थी। घर में कई जगह मकड़ी के जाले लगे थे, फर्नीचर टूटा हुआ था, अंदर रखे गमले टूटे पड़े थे जिसकी मिट्टी ज़मीन पर बिखरी हुई थी।ऊपर के हिस्से से बच्चे के हंसने की आवाजें आ रही थी पर जैसे ही राहुल ने 'कोई है........??!' पुकारा पूरे घर में मरघट जैसा सन्नाटा छा गया।यह खामोशी उसके दिल को पसीज रही थी तभी उसकी नजर ऊपर की सीढ़ियों पर गई तो एक छोटा बच्चा निस्तेज चेहरे से झांक रहा था,अचानक पीछे से किसी ने उसके कंधे को छुआ तो वो घबराकर पीछे मुड़ गया,उसने देखा तो उसके पीछे गुलाबी साड़ी में एक औरत हाथ में लालटेन लिए खड़ी थी।श्वेत सा अंग,देह नितरता रूप और उभरा हुआ यौवन जिसे देखकर किसी की भी नियत डोल जाए उसी तरफ राहुल मेघना के स्तनप्रदेश के उभार में खो गया।
मेघना : जी आप कौन और यहां कैसे??!
राहुल (खुद को संभालते हुए) : माफ़ कीजिए, दरअसल मेरा दोस्त गलती से यहां आ गया है उसी को ढूंढते हुए मैं यहां आया हूँ।
मेघना : अजीब बात है क्योंकि इस इलाक़े में तो ज्यादा तर कोई इंसान नहीं आता। इतना कहते हुए उसने लालटेन टेबल पर रखा और थोड़ी मोमबत्तियां जलाकर कोनो में रख दी जिससे हॉल में उजाला हो गया।
राहुल (आसपास नज़रे घुमाकर) : मैंने उसे यही आते हुए देखा था इसलिए मैं यहां चला आया।
राहुल ने मेघना की तरफ देखा जो उसकी तरफ पीठ करके खड़ी थी उसी वक्त राहुल की नजर मेघना की लचीली कमर के साथ उसके नितंब की रेखा पर अटक गई जो साड़ी थोड़ा नीचे सरकने से बाहर उभर आई थी,साथ ही सिर्फ साड़ी पहनने की वजह से राहुल उसकी मांसल गांड़ को साफ देख सकता था।
मेघना ने हल्का अपना सर पीछे घुमाते हुए पूछा,"तो क्या आपको वो मिला?"
राहुल को मेघना का जिस्म मदहोश करने लगा था जिसमें नीरव को ढूंढने की चिंता कही विलीन होने लगी थी,राहुल अय्याश किस्म का इंसान था जिससे के मन में वासना भरी संवेदनाएं फिर जागृत होने लगी।वो चलते हुए मेघना के पास आया और उसे पीछे से बाहों में भर लिया, अपना मुंह उसने मेघना के गर्दन पर रखा तो वो दुर्गंध गायब होकर मेघना के जिस्म की मादक खुश्बू सांसों में समाने लगी,राहुल मेघना के पेट को सहलाने लगा जिस पर मेघना कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रही थी।
मेघना : आपने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया.....क्या आपको आपका दोस्त मिला? राहुल ने अपने दोनों हाथ से मेघना के स्तनों को पकड़ लिया जिससे अब मेघना की हल्की सिसकी निकली।
राहुल (खुश होते हुए) : नहीं,और अब लगता है कि वो मिलेगा भी नहीं।
स्त्री की मादक आवाज़ हर मर्द जिस्म में आग में पेट्रोल डालने का काम करती है इसी तरह राहुल मेघना के निप्पल दबाते हुए उससे खेलने लगा,अपने हाथों में नर्म एहसास अलग आनंद दे रहा था पर उसे एक बात अजीब लगी कि मेघना का पूरा शरीर ठंडा पड़ा हुआ था।
मेघना : सही समझे, क्योंकि यहां आनेवाले सभी लोग मुझमें ही कही खो जाते हैं।
राहुल ने मेघना की बात अनसुनी करते हुए उसे ऊपर के हिस्से से पूरा नंगा कर दिया था,साथ ही वो उसकी चूत पर उंगलियां घुमाते हुए उसे उत्तेजित करने का प्रयास कर रहा था।
राहुल : क्या आप यहां अकेली रहती है?
मेघना : आआहहह्........जी नहीं,मैं यहां अपने 4 साल के बच्चे और पति के साथ रहती हूं।
अब राहुल ने मेघना को अपनी तरफ घुमा लिया था,उसकी योनि में उंगली घुमाने से उसकी साड़ी भी निकल चुकी थी जिससे मेघना का पारदर्शी देह उसके सामने था,राहुल ने मेघना को पास खींचने से उसके उरोज छाती में दब गए और वो मेघना के होठों पर उंगलियां घुमाने लगा।
राहुल : तो आपके पति इस वक्त कहां है?
मेघना : अक्सर काम की वजह से उन्हें दूसरे शहर जाना पड़ता है तो वो इस वक्त बाहर गए है।
मेघना के इतना कहते ही वो उसके होठों पर टूट पड़ा,मेघना के होठों और स्तनों का भरपूर रसपान करके राहुल ने मेघना को घुटनों के बल बिठाया और अपना लिंग बाहर निकालकर उसके मुंह में भर दिया,मेघना भी बड़ी कुशलता से उसे मुख मैथुन का आनंद दे रही थी जिससे वो कुछ ही पल में स्खलित हो गया,राहुल की सांसे तेज़ चल रही थी।
मेघना : बस इतने में थक गए? यह सुनकर राहुल ने आक्रमकता के साथ जवाब दिया।
राहुल : अभी तो बस शुरुआत है मेरी जान। इतना बोलकर वो मेघना की योनि को अपने मुख से भिगोने लगा कुछ पल चूसने के बाद वो अपना लिंग डालने ही वाला था कि तभी मेघना ने उसे रोकते हुए कहा,"यहां नहीं अंदर कमरे में चलते है।" यह सुनकर राहुल की उसकी मटकती गांड़ को देखकर उसके पीछे चल दिया।
अंदर कमरे की हालत भी कुछ ठीक नहीं थी पर हवस में राहुल इतना अंधा हो गया था कि उसके दिमाग़ में यह तक नहीं आया,आखिर अकेली स्त्री इस बंजर घर में क्या कर रही है? अंदर कमरे से एक टूटे पलंग पर मेला गद्दा था जिस पर राहुल लेट गया और मेघना ने राहुल के लिंग को हिलाकर अपने मुंह से चिकना किया और धीरे से जोर लगाते हुए अपनी योनि में उतार दिया,मेघना के हिलने की वजह से उछलते स्तनों को देखकर राहुल का लहू उबाल मारने लगा और उसने मुंह में चूसते हुए धक्के मारने लगा जिससे दोनों के आवाजों की पड़छंदे अब कमरे में गूंज रही थी,कुछ देर धक्के मारने के बाद राहुल मेघना की योनि में ही जड़ गया।
मेघना चुपचाप राहुल के बगल में आकर लेट गई और राहुल मेघना की नाभि के पास सर रखकर उसमें अपनी जीभ घुमाने लगा,राहुल ने देखा तो मेघना के चेहरे पर एक अधूरापन था।
राहुल : क्या हुआ जान तुम इतनी चुप क्यों हो?
मेघना : आप मर्द जात कितने खुदगर्ज होते हो,अपनी प्यास बुझाने के लिए हमारा इस्तेमाल तो करते हो पर जरूरत खत्म हो जाने के बाद हमारे बारे में एक पल भी ख्याल नहीं करते।
राहुल : ओह तो तुम इस बात से नाराज़ हो।
मेघना : हंहह्......आपसे नाराजगी कैसी? आपसे अच्छे तो आपके दोस्त नीरव है जिन्होंने मेरी बरसो की प्यास बुझा दी।
नीरव का नाम सुनते ही राहुल को जैसे झटका लगा।उसने तुरंत मेघना को देखकर पूछा,"क्या कहा तुमने अभी......नीरव?!! इसका मतलब तुम जानती हो नीरव को!!? कहां है वो?? और तुम उससे कहां और कैसे मिली!??!" इतना सुनकर मेघना हल्का सा मुस्कुराई और राहुल की ओर देखकर कहा,"आप उनसे मिलना चाहते है? तो मैं आपको अभी ले चलती हूं" इतना बोलकर मेघना की आँखें राहुल से मिली और उसकी आँखें भारी होने लगी और आसपास का वातावरण बदलने लगा।
कुछ ही पल में घर के कमरे से वो अब एक जंगल के बीच आकर खड़ा हुआ था जहां आसपास काफी घने पेड़ थे,चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था,ऊपर से बारिश गिर रही थी पर वो उसमें भीग नहीं रहा था तभी उसके कुछ आवाजें सुनाई दी जिसे सुनकर वो चलते हुए आगे बढ़ा जहां से पीली रोशनी आ रही थी उसने एक पड़े के तने के पीछे से देखा तो चकित रह गया,नीरव मेघना के साथ पूरी तरह नग्न होकर कामक्रीड़ा में डूबा हुआ था,दोनों फूलों की सेज पर लेटकर अपने इन पलो का आनंद ले रहे थे,दोनों के बदन फूलों और पेड़ो जैसी प्राकृतिक तत्वों पर रगड़ने से महकने लगे थे,नीरव का लंड पूरी ताक़त मेघना की योनि को रिझा रहा था........ Frriiiccchhh.........Fuuuchhhh..........की आवाज के साथ मेघना की सिसकियां इस माहौल में गूंज रही थी।
अब अंधेरा हटने लगा था पर आसमान में काले बादलों ने अपनी मौजूदगी का ग़रज कर ऐलान कर दिया था मानो यह सवेरा नहीं पर आने वाले अंधकार ने बरसात का मुखौटा पहन लिया हो।पूरा माहौल त्रस्त था जैसे रात ने जाने से इनकार कर दिया हो। गरजते बादलों के बीच गिरती बारिश की हर बूंद चीख़ बनकर धरती से टकरा रही थी पर इसके विपरीत हर बीतते पल के साथ दोनों का संभोग ज्यादा आक्रामक बनते जा रहा था।नीरव कई बार मेघना की योनि में स्खलित हो चुका था पर उसके मन को वो तृप्ति नहीं मिली थी।
राहुल से अब रहा नहीं गया इसलिए उसने नीरव के पास पहुंचते हुए कहा,"नीरव ये क्या कर रहा है!!? दूर रह इस लड़की से.......वरना ये तुझे भी अपने जाल में फंसा लेगी।" पर नीरव ने जैसे उसकी बातें सुनी ही ना हो,राहुल ने नीरव को छूने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया पर वो प्रतिबिंब की तरह उन दोनों के आरपार निकल गया,राहुल को यह बातें बड़ी अचंभिग कर रही थी तभी उसकी नजर मेघना से मिली जैसे वो उसे देख सकती हो,राहुल को देखकर उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान फैल गई।
राहुल : साली रंडी,यह सब तेरा ही किया धरा है ना!!? कौन है तू बता मुझे........और मेरे दोस्त के साथ ये क्यों कर रही है!???.........बताताआआ्........." पर सामने से कोई जवाब नहीं आया,दोनों ने पड़े के पास अपना समागम जारी रखा जिसमें एक बार फिर नीरव का वीर्यपात हो गया।
राहुल को नीरव को देखकर बड़ा झटका लगा था कि एक आम इंसान में इतनी क्षमता कैसे हो सकती है!!? दोनों का यह संभोग अब कोई अमानवीय शक्तियों का संबद्ध सा प्रतीत हो रहा था जिसमें दोनों ने प्रकृति के हर जगह अपने वीर्य के अंश छोड़े थे तभी राहुल ने देखा कि वो दोनों अपनी जिह्वा से खेलते हुए घर के रास्ते की तरफ आगे बढ़ने लगे।
चलते हुए भी वो अपने हाथ से जिस्म के उफान को वेग दे रहे थे,ऐसे करते हुए वो घर के द्वार तक पहुंच गए नीरव मेघना को गांड़ के उभारों से पकड़कर अंदर ले गया और बेड पर लाकर पटक दिया,वर्षा की रिमझिम में दोनों पूरे भीग गए थे पर मेघना के मुख की प्रसन्नता अलग ही चरम पर थी,इतने समागम के बाद भी नीरव के हर अंग में जैसे लावा दौड़ रहा था इसलिए वो मेघना के आंतर अंगों के बालों को दांतों से काटकर मुंह में उतार रहा था,अपने जिस्म के कांख,योनि और गुदा में उठती पीड़ा मेघना को संतुष्टि दे रही थी जिसमें वो अपने बालों को पकड़कर सिसकियां भर रही थी,"आआआआहाहांहाहाआआआआहाहाहहह्............. हाहाहाहाआआहहहह्.............ऐसे ही और कीजिए..........हमारा मिलन ऐसा ही होना चाहिए........... ओओओअअअहहहहह्.............."
नीरव सभी बालों को थूकने के बजाय गले से नीचे उतार गया जिसमें वो सभी गले में फंसने के बजाए नर्म रुई की तरह मुंह में घुल गए। केशविहीन मेघना का अब पूरा बदन ज्योत जैसे दमक रहा था।
इसके साथ ही प्रणयरंग के वो लम्हे फिर शुरू हो गए,श्वासों की लय, हृदय की धड़कन और जिस्मों के पड़छंद ने मिलकर ऐसा बंधन रचा जिसमें अलगाव का कोई अर्थ शेष न रहा,मेघना के मुंह,योनि,गुदा के साथ जिस्म का हर हिस्सा नीरव के कामरस में निसर गया,मेघना को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वो वीर्य की नदी के नहाकर आई हो और इसी खेल में दोपहर हो गई पता ही नहीं चला।
राहुल अब भी बेबसी से उन दोनों को समागम को निहार रहा था,बाहर अब भी घनघोर बारिश गिर रही थी इसलिए माहौल की नमी कमरे के अंदर की गर्मी से मिलकर खिड़की पर ओस की बूंदे जम गई थी, कमरे में अंदर मेघना नीरव के लिंग पर सवार थी उसके सिर से वीर्य की बूंदे पसीने में मिलकर फिसलते हुए गांड़ की रेखा में मिल जाती थी,नीरव अब भी धक्के मार रहा था पर अब दोनों को देखकर लग रहा था कि जैसे वो थकने लगे थे,बेड की चादर दोनों के वीर्य और पसीने में भीग चुकी थी।
मेघना : आआहहहह्........हहअअहह्.......हहहह्......नीरव आप मुझसे बहुत प्यार करते है नाआआ.........सीईईहअअहह्
नीरव : हहांआआहह्.........आआहह्...... मैं अपनी पूरी जिंदगी सिर्फ तुम्हारे साथ बिताना चाहता हूँ.......ऊउम्म्हह्.......जिससे मैं हर पल तुम्हे ऐसे ही प्यार करता रहूं........ओओफफ्........तुम्हारे सभी दुःख और ग़मो को दूर करके अपने प्यार से तुम्हे भर देना चाहता हूं........ आआहहहह्.........
इतना कहते हुए नीरव ने फिर जोश के साथ धक्का लगाया पर इस बार वो मेघना की नाभि से भी ऊपर पेट तक पहुंच रहा था और उसकी मोटाई मेघना के पेट के ऊपर से दिख रही थी।
मेघना (सर ऊपर करते हुए) : आआआआहाहांहाहाआआआआहाहाहहह्.............बस अब अपनी पत्नी को पूर्ण कर दीजिए......... ओओओअअअहहहहह्..........मैं अब सिर्फ आपकी हूँ........ ऊंऊउन्न्ननहहह्..........नीरव ने मेघना की गांड़ पर अपनी पकड़ बनाई और एक ज़ोरदार झटके से अपना सारा माल अंदर उतार दिया पर इस बार मेघना को उबकाई सी आई और वो रस मेघना उल्टी करते हुए मुंह के मार्ग से बाहर निकलने लगा जिसमें उन दोनों के बदन भीग गए।
मेघना का मुंह,छाती,पेट सब कुछ सफेद तरल पदार्थ में भीग हुआ था,मेघना नीरव के सनी पर लेती हुई थी तभी वो मधुर सी ध्वनि महकी जिसे सुनकर राहुल भी सचेत हो गया,
सौ बरस गुज़रे साँस लिए,सौ बरस गुज़रे बिन जिए,
क्यूं पल ठहरता नहीं ये, क्यूं वक्त बदलता नहीं,
मेघना ने अपनी नजरे नीरव नीचे की तरफ की और जब वो नीरव की नजरों से में तो आंखों में जैसे अंधकार की कालिख मिली हो इस कदर काली हो गई थी,नीरव की आंखें जैसे ही उससे मिली उसका शरीर स्तब्ध रह गया,मेघना ने नीरव के चेहरे के पास आकर उसकी आंखों में देखा तो नीरव की पुतलियां गायब होकर सफेद होने लगी जैसे वो उसके वश में आ रहा हो,मेघना की आंखों से इस वक्त खून निकल रहा था।
मेघना : अब हम दोनों की ऊर्जा एक होने लगी है.......मेघना ने नीरव की ओर देखा जो एक टक उसे देख रहा था........मेघना ने नीरव के होठों को चूमकर कहा,"आप हमारे साथ चलेंगे ना??"
राहुल हड़बड़ाते हुए बेड पर आकर चीखने लगा,"नहींईइइह्.......रुक जाओ.........छोड़ दो उसे.........नीरवव........नीरववव मेरी बात सुननन्.......देख तेरा दोस्त तुझे पुकार रहा है........नीरररवववव्........."
तभी मेघना कठोर आवाज़ में चीखी,"चुपपप्........रहोओओअ्........." अब राहुल कुछ बोल नहीं सकता था जैसे किसी ने उसकी आवाज छीन ली हो।
मेघना (चेहरे को थामकर) : आप बोलिए ना
नीरव : हां,जहां तुम ले चलो में आऊंगा.........इतना सुनने के बाद मेघना और नीरव के मुंह आपस में मिल गए,नीरव का लंड अभी भी मेघना की चूत में था,मेघना के हाथों के नाखून काले पड़कर किसी तेज हथियार जैसे नुकीले हो गए थे जिसे वो नीरव के सिने पर घुमा रही थी।
दोनों की जीभ एक दूसरे के मुंह का स्वाद ले रही थी तभी मेघना ने जीभ को अपने दांतों से पकड़ा और जोर से खींचकर नीरव के मुंह से उखाड़ दिया।
"........आआआआहाहांहाहाआआआआहाहाहहह्..........."
एक तेज चीख उस सन्नाटे में गूंज उठी,नीरव के मुंह से खून की धारा बह रही थी।
ये नजारा देखकर राहुल का दिल जैसे धड़कन चुक गया नीरव अपना सर इधर उधर घुमा रहा था जिसे मेघना ने अपने हाथों से पकड़ कर कहा,"मैंने आपके लिए संभोग की पीड़ा सही तो आपको भी हमारे मिलन के लिए इस दर्द को सहना होगा,उसके बाद ही हमारी आत्मा यह नश्वर शरीर छोड़कर एक हो पाएगी"
खून जैसे पानी है,चीखें यहाँ मधुर गीत,
मौत से मिलकर निभाएंगे मिलन की ये रीत,
हड्डियाँ अब चरमराईं, जब ये खेल खेला,
इस कमरों ने प्यार नहीं सिर्फ मांस तोला।
मेघना ने फिर नीरव के दोनों होठों को मुंह में लिया और उसे चूमकर अपने तेज दांतों के बीच दबाकर जोर से काटा.....Sppprachhh.......की आवाज़ से खून की धारा से मेघना का मुंह सर गया और होठों को अपने मुंह में लेकर चबाने लगी,नीरव के अब पूरे दांत दिखने लगे थे वो बिलखते हुए अपना सर पटक रहा था।
नीरव के इस स्थिति में भी मेघना उसके लिंग पर उछलने लगी,नीरव का जिस्म जैसे मेघना की आज्ञा का पालन कर रहा हो वो धीरे-धीरे हिलते हुए उसकी योनि में धक्के मारने लगा,"हहांआआहह्.........यह हवस ही हमारे मिलन की वजह है जिसका मज़ा में तुम्हारे आखिरी पल में भी लेना चाहती हूं।"
मेघना ने आहे भरते हुए अपने नाखून नीरव के सीने में उतारे और उसे बीच में से चीर दिया........Frrraachhh........अब नीरव की आतें,मांस,फेफड़े,दिल सब कुछ बाहर दिख रहा था।मेघना इस वक्त किसी शैतान की तरह धीरे-धीरे नीरव को मौत की तरफ ले जा रही थी,उसके जिस्म के आसपास कई काले साए और मृत आकृतियां दिख रही थी।
नाखूनों में फँसी है तुम्हारी आख़िरी साँस,
खून के साथ बहता है टूटा हुआ विश्वास।
आँखें अब देखती नहीं, बस याद करती हैं डर,
हर पल मांगता है जैसे ज़िंदा रहने का कर्ज़।
मेघना एक के बाद एक नीरव के फेफड़े,आतें,मांस,आँखें,चमड़ी को खाने लगी,"......... ऊंऊन्न्ननहहह्.......... आआआहाहाहहह्..........आआईईईहहहहीईईई.............." आंखों की रोशनी जाने से नीरव सर पटकते हुए बोलने की कोशिश कर रहा था अपने दोस्त की यह हालत देखकर राहुल के भी आंसू लगातार बह रहे थे।
मेघना नीरव के दोनों हाथों को उखाड़कर एक तरफ फेंक दिया था।जो कमरा संतुष्टि भरे समागम का स्थान था वो अब नर्क के भयानक मंजर जैसे लग रहा था,हर तरफ खून के छिटे और मांस के टुकड़े फैले हुए थे।
मेघना की योनि अब ज्वालामुखी जैसे गर्म हो गई थी जिसमें धक्के लगाता नीरव का लिंग मोम की तरह पिघलते हुए विलीन हो गया,अब मेघना ने नीरव का दिल जो थोड़ा धड़क रहा था उसे भी उखाड़कर सेब की तरह चबाकर अपने अंदर उतार लिया,उसके बाद नीरव के टांगों के बीच बैठकर दोनों शुक्रपिंड को भी दांतो चबाकर खा लिया।
अब बिस्तर पर सिर्फ नीरव की टांगे,हाथ,खोपड़ी और कुछ हड्डियां ही बची थी।सामने राहुल जैसे सदमे से घिर चुका था क्योंकि अपने दोस्त के शरीर के टुकड़े होते हुए देखे थे तभी मेघना के कुछ शब्द उसके कान में पड़े,
रात की रगों में ज़हर बह रहा है,
हर दीवार पर साया कुछ कह रहा है।
खामोशी चीखती है इन बंद कमरों में,
आज फिर किसी ने दम तोड़ा अंधेरों में।
अब चारों तरफ फिर माहौल बदलने लगा और राहुल फिर वास्तविक समय में आ गया पर दहशत से भरी उन यादों की कालिख अब भी उसके मुख मंडल पर अपनी छाप छोड़ है थी जिससे दिमाग इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहा था,मेघना अब भी नग्न अवस्था में राहुल के पास बैठी हुई थी।
मेघना : अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हे आसान मौत दे सकती हूं क्योंकि आप मेरे पति के दोस्त है।
राहुल को कुछ देर पहले जो चेहरा हसीन लग रहा था उसी पर अब दहशत नजर आने लगी थी,राहुल ने मेघना को धक्का देकर दूर हटाया पर जल्दबाजी में वो बेड से नीचे गिर गया,जैसे ही उसकी नज़र पलंग के नीचे गई मोमबती की मद्धम रोशनी में हाथ-पैर के कटे टुकड़ों के पास एक खोपड़ी नजर आई जिसपर मांस के कुछ टुकड़े लगे हुए थे और नीचे सारा फर्श खून में भीगा हुआ था।यह शरीर नीरव का ही था जिसे देखकर राहुल के मुंह से चीख निकल गई,"......नहींईइहहह्.........." साथ ही पास के कोने में एक छोटा बच्चा नजर आया जो उसकी तरफ ही देख रहा था जिसकी आँखें नहीं थीं पर उसका पूरा चेहरा लाल और सड़ा हुआ था।
आयुष (कर्कश आवाज़ में) : मेरे मम्मी की बात मान लीजिए वो आपको आसानी से मार देगी पर मेरे पापा को मुझसे दूर करने की कोशिश भी मत करना।
अपने दोस्त की ऐसी हालत देखकर राहुल की आँखों से आँसू बहने लगे लेकिन ज़्यादा देर यहां रुकना मौत को गले लगाने जैसा था,वो कुछ सोच ही रहा था तभी उसकी नज़र सामने वाली खिड़की पर गई जो आधी टूटी हुई थी।मौका पाकर अपने दोस्त की अनावृत लाश हो वही छोड़कर वो तेज़ी से उस तरफ़ दौड़ा,हाथों की मदद से उसने घर की खिड़की तोड़ी और बाहर की तरफ कूद गया। खिड़की टूटने की आवाज़ सुनसान इलाके में हर जगह फैल गई और वह तेज़ी से उस घर से दूर भागने लगा।
उसे समझ नहीं आ रहा था कि नीरव के साथ अचानक यह सब कैसे हो गया,साथ में वो औरत और बच्चा कौन था? उसका दिल इतनी तेज़ी से धड़क रहा था जिसकी आवाज़ उसके कानों तक पहुँच रही थी। वह जल्द से जल्द इस जगह से दूर जाना चाहता था लेकिन वह बार-बार घूमकर उसी जगह पर पहुँच जाता था जैसे चारों तरफ भूल-भुलैया हो और आखिर में वो थककर एक जगह खड़ा हो गया।
वह पेड़ के सहारे खड़े होकर अपनी सांसों को काबू कर रहा था तभी उसे एक और बड़ा झटका लगा जब उसने सामने देखा तो नीरव दौड़ते हुए उसकी ओर आ रहा था।नीरव राहुल के पास आया पर राहुल घबराते हुए पीछे हटने लगा वो अपने दिमाग़ में सोच रहा था कि कहीं नीरव के रूप यह उस औरत की आत्मा तो नहीं?
नीरव : भगवान का शुक्र है जो तुम मिल गए।
राहुल (डरते हुए) : नहीं,दूर रहना मुझसे।
नीरव : राहुल क्या हुआ? मैं तुम्हारा दोस्त हूँ नीरव।
राहुल : नहीं तुम मर चुके हो, मैं कैसे मान लूं कि तुम नीरव ही हो।
नीरव : अच्छा.....अच्छा शांत हो जाओ, स्टेशन पर ताऊजी से मैं मिला उन्होंने ही मुझे बताया कि तुम इस तरफ आए हो, इसलिए मैं तुम्हें ढूँढने इस तरफ आया हूं,अब तो मानते हो?
राहुल सहमते हुए नीरव के पास आता है,"नीरव....नीरव!!? क्या यह सच में तुम हो?" इतना कहते हुए वो उसे छूने लगता है जैसे ही उसे यकीन होता है वो कसकर नीलेश के गले लगकर रोने लगता है,"नीररववव्.........नीरवव ये तुम ही हो मेरे यार.......sniffff.........भगवान का लाख-लाख शुक्र है कि तुम जिंदा हो।" नीरव कुछ देर तक उसे रोने देता है उसके बाद वो अलग होकर नीरव से पूछता है,"पर मैंने तो तुम्हे उस औरत के साथ....!??!! उसके हाथों मरते हुए देखा है!!"
राहुल की बात सुनकर नीरव ने कहा,"मैं तुम्हे सब बताऊंगा पर पहले हमें यहां से निकलना होगा क्योंकि रात में यह जगह ज्यादा भयावह हो जाती है।"
राहुल : मैंने बहुत कोशिश की दोस्त पर मैं इस जगह से बाहर नहीं निकल पाया।
नीरव : चिंता मत करो, मैं जहां से आया उस जगह से बाहर निकलने की कोशिश करते है।
इसके बाद दोनों तेजी से बाहर की ओर चलने लगे।आसमान में बादलों का जमघट लगा था,साथ ही यह रात सभी के लिए कहर लेकर आई थी, दोनों आगे चल रहे थे रास्ते में नीरव ने राहुल को उस घर के बारे में बताया और कहा,"बीस साल पहले,आनंदकुमार चावड़ा नाम का एक आदमी अपनी पत्नी मेघना चावड़ा और चार साल के बच्चे के साथ यहाँ रहता था,दोनों ने परिवार के विरुद्ध प्रेम विवाह किया था जिससे दोनों के घरवालों ने उनसे सारे रिश्ते तोड़ दिए थे पर फिर भी तीनों की ज़िंदगी छोटे-छोटे सपने और प्यार भरे लम्हों से भरी हुईं थी,
पर किस्मत ने उसकी जिंदगी में कुछ और ही लिखा था अचानक एक रात घर लौटते वक्त आनंद की दुर्घटना में मौत हो गई जिससे भरी जवानी में मेघना और उनका बेटा आयुष अकेले हो गए।
मेघना खूबसूरत के साथ एक भरे हुए जिस्म की मालकिन भी थी जिससे बस्ती में रहते कई लोग उसे अपनी वासना भरी नजरों से देखते थे और छेड़ते थे,उन लोगों से तंग आकर उसने अपने घर वापस लौटने का प्रयास भी किया पर वो अब उनके लिए मर चुकी है यह कहकर उन्होंने से दुत्कार दिया।
मेघना अब मौन रहकर सारे ग़म सहती रही जिससे उन लोगों हिम्मत बढ़ गई और एक रात कुछ लोगों ने घर घुसकर उसके साथ जबरदस्ती की जैसे। वो उनकी हवस मिटाने का साधन हो,उसका बेटा आयुष भी इतने गम और बोझ तले बीमार रहने लगा था जिसके लिए मेघनाने भी अपने हालतों को स्वीकार करके व्यभिचारी (धंधा करनेवाली) औरत की तरह जिस्म का व्यापार करना शुरू कर दिया था इसका परिणाम यह आया कि गांव के कुछ भले लोगों ने भी उसका साथ छोड़ दिया और उसे बुरी तरह बदनाम कर दिया पर मेघना को उन लोगों की बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता था।
अचानक एक तूफ़ानी देर रात में आयुष की तबीयत ज्यादा खराब हो गई, यहां परिवहन का कोई साधन भी मौजूद नहीं था तो मेघना अकेले दवाई लेने निकल गई और दवा लेकर लौटते समय जल्दबाजी में उसका पैर रेलवे ट्रैक में फंस गया।
बहुत चीखने,बिलखने और कोशिश करने के बाद भी उसकी मदद के लिए कोई नहीं आया जिससे वह ट्रेन के नीचे आकर मर गई। दूसरी तरफ,घर के निचले हिस्से में खिड़की के पास रखा एक लालटेन हवा के कारण नीचे गिर गया और उसकी आग पूरे घर में फैल गई,आयुष उस वक्त अपने कमरे में सो रहा था इसलिए उस भीषण आग ने उसे भी अपने अंदर समा लिया।
इस घटना के कुछ दिनों के बाद कई लोगों को एक सुंदर स्त्री उस घर के पास में देखने को मिली,जो अपने रूप और जिस्म के जाल में फंसाकर उन लोगों की जान लें रही थी,धीरे-धीरे यह सिलसिला बढ़ता गया और बस्ती के मर्द कम होने लगे इसलिए बचे हुए लोग समय के साथ सभी लोग शहर की तरफ रहने चले गए और यह जगह वीरान हो गई। राहुल ने नीरव की बात सुनकर कुछ पल चुप रहा।वो दोनों अभी उस गाँव से ही गुजर रहे थे,आखिर में राहुल ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा,"वैसे मेघना के साथ तो बहुत गलत हुआ है यार"
नीरव : सही कहा,लोगों को इतना भी मजबूर मत करो कि वो इंसान इंसानियत ही छोड़ दे।
नीरव की बात सुनकर राहुल चुप हो गया तभी उसके दिमाग़ में एक सवाल आया जिससे उसने कहा,"वैसे,नीरव कल रात तुम कहां चले गए थे?"
नीरव : अरे हाँ, मैं तुम्हें बताना भूल गया। कल जब तुम लोगो को देर हो गई तो मैं घर चल गया,जब मैं घर पहुँचा तो तार से मुझे पता चला कि मेरे दादाजी के बेटे की तबीयत खराब है इसलिए मुझे आज सुबह जल्दी निकलना पड़ा और वापस आकर जब मैं घर पहुँचा तो मां ने बताया कि तुम मुझे सुबह से ढूँढ़ रहे हो।" नीरव की बात सुनकर राहुल वही थम गया जिससे नीरव ने उसकी तरफ देखा।
राहुल : जहाँ तक मुझे पता है, आज सुबह से ही बारिश की वजह से सारी बसें और ट्रेनें रद कर दी गई हैं और अगर रही बात तबियत खराब होने कि तो उस तार की मिलने की खबर तुम्हारे घर में किसी को पता क्यों नहीं है?" राहुल ने अपनी बात खत्म की थी कि आसमान में ज़ोर से बिजली चमकी और उसकी रोशनी में राहुल को नीरव की परछाई दिखाई दी।
जिसे देखकर वह हैरान रह गया क्योंकि नीरव की परछाई में एक औरत की आकृति दिख रही थी।
उसी वक्त राहुल को नीरव की हँसी सुनाई दी जो बस्ती के चारों तरफ़ गूंज रही थी,"तुम बहुत सवाल पूछते हो लेकिन बहुत दिनों बाद आयुष को उसके पापा मिले है, अब मैं किसी भी हालत में उन्हें दूर नहीं जाने दूँगा।"
दूसरी तरफ़ किशन दौड़ते हुए बस्ती की तरफ़ ही पहुंच रहा था,"पता नहीं ये राहुल इस तरफ क्यों आया होगा?" मन में बहुत सारे ख्यालों के साथ आसपास देखते हुए आगे बढ़ रहा था कि तभी एक दर्दनाक चीख ने माहौल को झुंझला दिया,"......आआअह्हाहाआआअह्ह्ह्.........नहीहीईईअ्अह्ह्ह्.........." यह सुनकर किशन का कलेजा कांप उठा क्योंकि यह चीख राहुल की थी उसे एहसास हुआ कि चीख उसके आसपास के इलाक़े से ही आई है,उसे थोड़ी दूर वह बस्ती दिखाई दी और दौड़ते हुए जब वो वहां पहुंचा तो जैसे उसके पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गई हो।नीरव ने पूरी ताकत से राहुल के पेट में लकड़ी का एक बड़ा टुकड़ा घोंप दिया था,उसके जिस्म से बहता खून नीचे ज़मीन को भिगो रहा था,साथ ही राहुल के बदन पर कई गहरे घाव के निशान थे।
जब नीरव किशन की तरफ मुड़ा तो उसका डरावना चेहरा देखकर किशन कुछ कदम पीछे हट गया। काली आँखें,खून से सना सफेद चेहरा और उस चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी।राहुल ने किशन की तरफ देखकर गिड़गिड़ाते हुए कहा,"मुऊऊझझेझे.........बअअचचाचा......ललेले.........यायाआआरररर.........आआहाहाआआह्........." दर्द और खून में मिलकर उसकी आंखों से आंसू निकले जिसमें अपने परिवार से बिछड़ने का गम दिख रहा था,अपनी पत्नी और मां का वो चेहरा उसके सामने तैरने लगा तभी पीछे से एक बार हुआ और राहुल की गर्दन हवा में उड़ते हुए जमीन पर जा गिरी,उसके पीछे से मेघना का हैवानियत से भरा चेहरा दिखा जो दहशत से भरा था।
मेघना : मैने कहा था कि तुम्हे आसान मौत दूंगी पर तुमने दर्दभरी इस मौत को चुना। इतना बोलकर वो राहुल के गर्दन से निकलते खून को पीने लगी और नीरव राहुल के सीने से दिल दिलाकर खाने लगा,किशन को अब समझ आ गया कि इन अमानवीय शक्तियों से लड़ना उसके बस में नहीं है जिससे वो तेज़ी स्टेशन की ओर भागने लगा।
आभ से बरसते नीर के साथ बारिश ने फिर अपना खेल शुरू कर दिया था और इसी बीच किशन पूरी ताकत से वहाँ से भाग रहा था उसने जो मंज़र देखा था वो अब भी उसकी आँखों के सामने तैर रहा था जिसका डर उसके चेहरे पर साफ़ दिख रहा था। वो जल्दी से उस बस्ती से निकलकर बाहर आ गया और रेलवे ट्रैक पर भागते हुए स्टेशन की तरफ जाने लगा। पथरीले ट्रैक पर जल्दी में दौड़ने की वजह से उसका संतुलन बिगड़ा और नीचे गिर पड़ा,गिरते वक्त एक पत्थर से उसका पैर टकराया जिससे उसके पैर के हड्डी टूट गई,उसकी दर्द भरी आवाज़ रेलवे स्टेशन तक गूँज उठी।कुछ देर तक बिलखने के बाद वो खड़े होने की कोशिश करता है पर उसके बाद उसने जो डर मेहसूस किया जिससे उसके शरीर में सिरहन दौड़ गई, उसने देखा कि उसका एक पैर ट्रैक के बीच में फँस गया था।
एक मछली जैसे बिना पानी के छटपटाती है उस तरह उसने पूरी कोशिश की लेकिन कामयाब नहीं हुआ।वो ऊपर आसमान में देखता तो जैसे बादल भी उसके दर्द बया करता हुए पानी बरसा रहे थे,गिरती हुई पानी की बूंदों के साथ उसकी नज़र बाईं ओर जाती है तो नीरव और मेघना के साथ एक बच्चा किशन के सामने खड़े होते है,तीनों के चेहरों पर वही शैतानी मुस्कान फैली होती है।वही थोड़ी दूर से उसे ट्रेन की व्हिस्ल सुनाई देती है और मौत के डर से उसका शरीर काँपने लगता है,आँखों से निकलते आँसूओ के साथ बहुत कोशिश करता है लेकिन एक चीख के साथ उसका शरीर ट्रेन के नीचे कुचला जाता है और पूरा माहौल शांत हो जाता है।
अगले दिन, कुछ रेलवे अधिकारी और स्टेशन मास्टर किशोरभाई किशन की डेड बॉडी के पास आते हैं जिसके साथ ताऊजी भी खड़े होते है। अधिकारी मृतक की रिपोर्ट और पंचनामा बना रहे थे।
ऑफिसर ने लाश को देखा और कहा, "यह सब कैसे हुआ इसका कोई गवाह है जो आंखों देखा हाल बता सके?" उसकी बातें सुनकर ताऊजी आगे आकर कहते है, "जी साहब,मैने देखा है,कल रात मैं यह बैठा था तो किसी की दर्दनाक चीख सुनाई दी जिसे सुनकर मैं उस तरफ देखने गया तो पाया कि किशन का पैर रेलवे ट्रैक के बीच में फंसा हुआ था,जिसे निकलने की वो कोशिश कर रहा था, इससे पहले मैं उसकी मदद के लिए पहुँच पाता, ट्रेन आ गई और यह दुर्घटना हो गई।"
ऑफिसर : इससे तो साफ जाहिर होता है कि यह सब आकस्मिक कारणों के चलते घटा है जिसके आप गवाह है।
ताऊजी : हां,साहब।
ऑफिसर : ठीक है,लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दो और मृतक के परिवार को खबर करो।
इतना कहकर किशन की बॉडी को सफेद चादर से ढंक दिया गया,दो दिनों से चलती बारिश ने आज विराम लिया था,दूर क्षितिज पर छाए काले बादल में बीती रात को मनहूसियत भरी हुई थी और सन्नाटे को चीरती वो हवाएं किशन के बदन को ढंके कपड़े को हल्का सा हिला रही थी।
आखिर में किशन की मौत को एक दुर्घटना मानकर केस को बंध कर दिया गया,साथ ही राहुल और नीरव का उनके परिवार को कभी पता नहीं चला इस तरह 3 परिवार अंधेरे की खाई में खो गए।अक्सर कोई आदमी या राहगीर भटकते हुए उस घर तक पहुंचता है तो बच्चे के हंसने की,खेलने की या स्त्री के मादक सिसकियों की आवाज सुनाई देती है,
या कभी जंगल के वीरान इलाक़े में दो प्रेमियों के संभोग करते हुए भी आकृति दिखती है,आखिर में मौत को गले लगाकर नीरव को मेघना अपने साथ ले गई।
दोस्तों यह कहानी यही पर खत्म होती है, जानता हूँ कि कुछ लोगों को इस कहानी की Ending पसंद नहीं आई होगी पर मैं इसे एक Dark Ending ही देना चाहता था इसके बारे में आपकी क्या राय है नीचे Comment करके जरूर बताईए और अब जल्द ही मैं दूसरी कहानी पर भी काम शुरू करूंगा।