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Incest मेघना - साया काली रात का

Iron Man

Try and fail. But never give up trying
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Shaandar dinner
 

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मृतपाय सी धरातल को अपने अमृत समी बूंदों से भिगोने के बाद मेघराजा ने थोड़ी देर के लिए विराम लिया था लेकिन बारिश की कुछ बिन्दु अभी भी धरा में प्राण फूंक रहे थे,उमस भरी गर्मी से निस्तार करके (छुटकारा दिलाना) भीनी मिट्टी की खुशबू और गीली मिट्टी की ठंडक चारों ओर फैल गई थी। ऐसे में अहमदाबाद शहर में मिलन सिनेमा का आखिरी शो खत्म होने के बाद, लोग धीरे-धीरे थिएटर से निकल रहे थे।

साल 1992

वो समय जिसमें टेलीविज़न, रेडियो और सिनेमा ही मनोरंजन के मुख्य साधन थे और 90s की बॉलीवुड फिल्मों ने सिनेमा जगत में लोगों के दिलों-दिमाग़ पर अच्छा प्रभाव छोड़ा था। उन सिनेमा के दीवानों में सभी लोगों के साथ नीरव, संजय, कौशल और राघव नाम के चार दोस्त थिएटर से बाहर निकल रहे थे। हालांकि यह रात का आखिरी शो था, इसलिए भीड़ ज़्यादा नहीं थी। जैसे ही फिल्म खत्म हुई, सभी लोग अपने-अपने घरों के लिए निकल रहे थे।

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संजय और कौशल का घर थोड़ा दूर था, इसलिए वे दोनों साइकिल लाए थे, जबकि थियेटर से पास के इलाके में रहने वाले नीरव और राघव दोनों पैदल जा रहे थे,"अबे......माधुरी क्या कड़क माल है यार.......ऊपर से उस '.....धक-धक करने लगा....' वाले गाने ने तो पूरा लंड खड़ा कर दिया......साथ ही जो रंडियों की तरह आहें भर रही थी......ऊउउफफ्.......मन तो करता है पूरा लंड उसके मुंह में उतार दूं।"
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राहुल की बात सुनकर तीनों दोस्त हंसने लगे।उसने अपनी बात पूरी करते हुए कहा,"पर सच कहूं तो माधुरी पति बहुत नसीबवाला होगा जिसे ऐसी बड़े बबले और कसी हुई गांड़वाली लड़की चोदने को मिलेगी।"
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उस समय में इंटरनेट और मोबाइल की सुविधाएं नहीं थी इसलिए ज़्यादातर लोग अपनी आंखे सेकने और हवस मिटाने के लिए अश्लील गाने या B Grade Movies का सहारा लेते थे।
कौशल : लगता है ये आज रात को भाभी को माधुरी समझ कर आगे पीछे से दबाकर पेलेगा,वैसी भी उनका भरा जिस्म किसी हीरोइन से कम थोड़े ही है ऊपर से उनके दो रसीले दूध...... ऊउउफफ्...."

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राहुल : हा चल भोसडीके......इतनी ही ठरक जग रही है तो आज तू ही चढ़ जा मेरी बीवी के ऊपर और तेरी बीवी को मेरे पास भेज दे।
कौशल : वैसे ख्याल तो बुरा नहीं है।
कौशल की बात सुनकर तीनों दोस्त ठहाके लगाने लगे।कौशल और राहुल अय्याश किस्म के आदमी थे इसलिए उनके लिए यह सब आम बात थी।
राहुल : क्यों बे अगर तुझे ऐसी लड़की मिले तो तू उसे छोड़ देगा क्या?
संजय : वैसे बात तो इसने पते की कही है,माधुरी को देखकर सबका मूड बन गया है ऊपर से मौसम भी ऐसा मेहरबान हुआ है कि सबकी आग बीवी की चूत ही शांत कर पाएगी.......हाहाहाहा।

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कौशल : पर लगता है नीरव को आज भी अपने हाथ से ही काम चलाना पड़ेगा....... हाहाहाहाआआआ........." यह कहकर तीनों दोस्त नीरव की तरफ देखकर जोरो से हंसने लगे,नीरव भी अपने चेहरे पर एक मुसकान लिए खड़ा रहा क्योंकि अपनी आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से उसके अलावा उसके सभी दोस्तों की शादी हों चुकी थी।साथ ही नीरव एक अच्छे दिल के साथ मजबूत इरादों वाला आदमी था,अपनी जिस्मानी प्यास बुझाने के लिए उसने किसी पराई स्त्री के साथ यौन संबंध नहीं बनाए थे,जवान औरतों के उपांगो को देखकर उसका दिल भी कभी मचलने लगता पर उसने खुदको हस्तमैथुन की क्रीड़ा का आदि नहीं बनाया था जो उसके व्यक्तित्व में उभर के दिखता था।
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यही हंसी,मजाक और फिल्मों की बातें करते हुए चारों दोस्त चौराहे तक पहुँच गए। चारों तरफ शांति थी,शहर की उन गीली सड़कों पर इंसानों की मौजूदगी रेगिस्तान में पानी के समान लग रही थी, मानो सब लोग बारिश की ठंडक का मज़ा ले रहे हों और कुछ अपने घरों में मीठी नींद ले रहे हों तभी रात के 1 बजे शहर के बीचों-बीच स्थित अजरामर टावर का घंटा बजा और यह आवाज़ रात के चीर सन्नाटे में चारों तरफ फैल गई।

घड़ी की आवाज़ सुनकर संजय ने नीरव और राहुल से कहा, "चलो हम दोनों चलते हैं,नहीं तो पता नहीं बीवियां कब तक हमारे इंतज़ार में जागती रहेगी और आज तो हमें भी घर पहुंचने की जल्दी है" इतना कहकर वे दोनों अपने-अपने घर की ओर चल पड़े। आसमान अभी भी काले बादलों से ढका हुआ था और ये काले बादल रात के अंधेरे में सफ़ेद रुई समान लग रहे थे जिसकी आवाज सुनसान सड़को पर शेर के दहाड़ जैसी प्रतीत हो रही थी,नीरव और राहुल अपने घर की तरफ चलते हुए आगे बढ़ रहे थे, आसमान से गिरती बारिश की बूंदे खंभे की रोशनी से साफ़ दिख रही थीं।

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अचानक राहुल ने नीरव की तरफ़ देखा और कहा,"सुन नीरव,हम आज बाहर घूम ही रहे हैं तो चल ना किशन से भी मिल लेते हैं,वैसे भी उससे मिले हुए बहुत दिन हो गए हैं।"

वैसे तो दोनों के घर रेलवे स्टेशन के पासवाले इलाके में ही थे लेकिन अचानक वहाँ जाने की बात सुनकर नीरव ने हैरानी से पूछा, "अभी!!?.....इस वक्त!?......जरा देख तो सही घड़ी में रात के 1 बज रहे हैं और हमें पता भी नहीं कि वो जाग रहा होगा या नहीं।"
"अबे, कैसी बात कर रहा है!? रात में भी ट्रेन की चहल-पहल रहती ही है तो तुम्हें लगता है कि वो सो गया होगा?"

राहुल की बातें सुनकर नीरव थोड़ी देर तक कुछ नहीं बोला, नीरव की आँखों में नींद साफ दिख रही थी इसलिए उसका जाने का बिल्कुल मन नहीं था पर राहुल उसे मनाने के लिए फिर कहता है,"अरे यार, वैसे भी कल छुट्टी है, तो कल जितना सोना है सो लेना.......वैसे भी,हम वहां ज्यादा देर नहीं बैठेंगे,उससे जल्दी ही मिलकर वापस चले आयेंगे।" राहुल की बातें सुनकर नीरव ने सिर्फ हाँ में सिर हिलाया और दोनों स्टेशन की तरफ चल पड़े।

वो दोनों स्टेशन तो पहुँच गए पर जब हम प्लेटफॉर्म पर पहुँचे तो देखा हर तरफ सन्नाटा छाया हुआ था,दूर से सिर्फ कुछ कुत्तों के भौंकने की आवाज़ आ रही थी।वैसे तो प्लेटफॉर्म लाइट की सुविधा थी लेकिन तेज़ बारिश की वजह से ज़्यादातर लाइटें बंद थीं,कुछ पुरानी 2-3 लाइट थी जो अपनी हल्की रोशनी बिखेर रही थीं।

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स्टेशन के आसपास अच्छे-खासे पेड़ होने के कारण यहाँ शहर के बाकी हिस्सों से ज़्यादा ठंड थी, ठंडी हवाएं नीरव के शरीर को छू रही थी जो उसे निंद्रा की ओर धकेलने का काम रही थी।वह उबासी लेते हुए बोला,"यार राहुल,चल ना घर चलते हैं क्योंकि वैसे भी इस अंधेरे में किशन यहां कही दिखाई नहीं दे रहा है, वह सो गया होगा और अब अगर मैं भी यहाँ 10 मिनट खड़ा रहा तो यहीं सो जाऊँगा।”

नीरव की बातें सुनकर राहुल ने अपनी नज़र इधर-उधर घुमाई और उसकी नज़र एक बेंच पर जाकर रुक गई,"चल मेरे साथ" इतना बोलकर कहकर राहुल ने नीरव को अपने साथ चलने को कहा।दोनों बेंच के पास आकर खड़े हो गए। वहाँ, बेंच पर एक आदमी उन दोनों की तरफ पीठ करके चादर ओढ़े सो रहा था। राहुल ने उसे कंधे से पकड़कर दो-तीन बार जगाया, लेकिन वह नहीं उठा। राहुल ने किशन की ओढ़ी हुई चादर भी खींच ली लेकिन वो फिर भी आँखें बंद करके सोता रहा।

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किशन को सोता देखकर नीरव ने राहुल से कहा,"अबे उसे सोने दे ना चूतिए,क्यों उसकी नींद खराब कर रहा है चल हम कल मिलने आएंगे।"
नीरव की बात सुनकर राहुल ने पास पड़ी पानी की बोतल उठाई और कहा,"अबे गांडू ऐसे मौके बड़ी मुश्किल से मिलते है तू बस देखता जा।”इतना कहकर उसने पानी की बोतल उठाकर किशन के मुंह पर उल्टा कर दिया, चेहरे पर ठंडे पानी का एहसास होते ही किशन हड़बड़ा कर खड़ा हो गया,"कौन...? कौन है....बे मादरचोद?"

किशन की इस हालत में देखकर नीरव और राघव ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगे। दोनों को हंसता देख किशन बोला,"क्यूं बे भोसड़ी वालों,आधी रात को तुम दोनों की मां मर गई जो तुम दूसरों की नींद खराब करने निकल पड़े हो।" किशन को इस तरह गुस्सा होते देख राहुल और भी ज़ोरो से हंसने लगा,"हंसना बंद कर गंडमरे और बताओ की इतनी रात को यहां क्या कर रहे हो?" आखिर में राहुल शांत हुआ और बोला,"अरे यार, तुमसे मिले हुए बहुत दिन हो गए थे और हम पिक्चर देखकर घर जा रहे थे, तो सोचा तुमसे मिल लेते हैं, जब यहां आए तो देखा कि तुम बड़े आराम से गहरी नींद में सो रहे हो,अब ऐसा मौका हम कैसे छोड़ सकते है।" यह कहकर राहुल फिर हंसने लगा।
"मुझे समझ जाना चाहिए था कि ये तेरे हरामी दिमाग की ही पैदाइश होगी।" उन दोनों के बातों के बीच नीरव ने इधर-उधर देखा और बोला, "अरे यार, राजू काका, किशोरभाई या ताऊजी कहां हैं? कोई दिख क्यों नहीं रहा?"

नीलेश की बातें सुनकर किशन ने आँखें मलते हुए कहा, "हाँ यार, किशोरभाई और राजू काका कल छुट्टी होने ही वजह से अपने गाँव गए हैं और ताऊजी आज बारिश की वजह से नहीं आए है वरना तुम्हें तो पता ही है उन सबका डेरा यही जमा हुआ होता है।" अभी वो तीनों बातें ही कर रहे थे कि स्टेशन की 2-3 लाइट्स जो जल रही थी वो एक-दो बार टिमटिमाई और बंध हो गई।

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यह देखकर राहुल बोला, "हद है यार, बारिश की दो बूंदे गिरते ही रास्तों की लाइट खराब हो जाती है या पावर कट हो जाता है।" अब चारों तरफ घोर अंधकार फैल गया था,दूर से आती हल्की रोशनी इस वक्त थोड़ा उजाला कर रही थी और आसमान से चमकती बिजली चमकते हुए अपना प्रकाश बिखेर रही थी जिसके चमकार में वो जगह चमक उठती थी।ऐसा माहौल सबके दिलो की धड़कने बढ़ाने के लिए काफी था राहुल ने अपने थूक गला गिला करते हुए कहा,"अबे यार ये जगह तो रोज के मुकाबले किसी स्मशान घाट सी डरावनी लग रही है।"
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किशन : क्यों बे इतने में तेरी फैट गई,ये सब तो आम बात है तू रुक मैं आता हूं।
इतना देखकर किशन एक कमरे में गया और लालटेन लेकर बाहर आया, उसने बाहर आकर लालटेन बेंच के किनारे रख दी जिसकी पीली रोशनी ने सबके चेहरे चमक उठे।
किशन ने राहुल की तरफ देखा और कहा, "अब तुमने मेरी नींद खराब कर दी है तो आज की चाय तुम्हारी तरफ से।" यह सुनकर राहुल खड़ा हुआ और बोला,"वो सब तो ठीक है, लेकिन इतनी रात में चाय कहाँ मिलेगी? क्योंकि स्टेशन के बाहर वाली चाय का स्टॉल तो बारिश की वजह से बंद है।"
किशन : वो सब मुझे नहीं पता तू चाहे तो मेरी मोटर-साइकल ले जा पर कही से भी मेरे लिए चाय लाकर दे।

"नहीं बे,इतनी रात को मैं अकेले कहीं नहीं जा रहा, अगर तुझे चाय पीनी है तो मेरे साथ चल।" राहुल की बात पर किशन ने उसके गले के पिछले हिस्से से पकड़कर कहा,"क्यों बे मेरी नींद हराम करने से पहले नहीं सोचा और अब अकेले जाने में जनानीयो गांड़ फट रही है।" किशन की बात पर राहुल कुछ नहीं बोला आखिर उसने अपना हाथ हटाते हुए कहा,"ठीक है चलो, मैं तुम्हारे साथ चलता हूँ लेकिन तुम्हे कुछ अंदाजा है कि इस वक्त चाय का कौनसा स्टॉल खुला होगा?"

"जब हम लोग इस तरफ आए थे तो राज सर्कल के पास एक टी स्टॉल खुला था शायद वहाँ से तुम्हारी चाय का इंतजाम हो जाए।" उन दोनों की बात के बीच में बोलते हुए नीरव ने कहा,"राहुल तूने कहा था कि हम दोनों किशन से मिलकर जल्द ही वापस आ जाएंगे और अब तुम दोनों फिर घूमने जा रहे हो!"
किशन : हम दोनों मतलब??!! तू हमारे साथ नहीं चल रहा?
नीरव : नहीं यार,मुझे पहले ही बहुत नींद आ रही थी मैंने इसे मना किया था फिर भी ये मुझे पकड़कर यहां ले आया।
किशन : देख भाई,इस झाट के बाल ने मेरी नींद हराम की है तो इसे तो मैं नहीं छोड़ने वाला पर तब तक तुझे आराम करना है तो यहां बेंच या फिर कमरे में जाकर सो सकते हो तुझे कोई परेशान नहीं करेगा क्योंकि आज का इंचार्ज तेरा भाई है।
इतना कहकर वो दोनों हंसने लगे।किशन की बात पर सहमत होते हुए नीरव ने कहा,"ठीक है तुम दोनों जाओ मैं यही आराम करता हूं।" नीरव की बात सुनकर किशन ने अपनी जेब से एक छोटी टॉर्च निकाली और दोनों उसकी रोशनी में चलते हुए स्टेशन के बाहर निकल गए।


उन लोगों के जाने के बाद फिर से शांति हो गई थी,नीरव ने कमरे में जाने से अच्छा बेंच पर ही लेटना ठीक समझा,उसने बेंच पर देखा तो एक तकिया और कंबल रखे हुए थे,लालटेन की पीली रोशनी इस मौसम में एक सुकून भरा एहसास दे रही थी।

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नीरव ने आसपास अपनी नज़र घुमाई लेकिन कोहरे की एक परत मौसम में छाने लगी थी जिसकी वजह से उसे ज़्यादा दूर तक कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, ऊपर से बारिश भी फिर से शुरू हो गई थी,जिसकी वजह से वहाँ पानी की बूंदों के गिरने के अलावा दूसरी कोई आवाज़ नहीं आ रही थी।हवा के भीगे झोंके उसकी पलकों का भार बढ़ा रहे थे तभी एक सुरीली लड़की की आवाज उसके कानों में पड़ी जैसे वो आवाज आसपास गूंज रही हो।

सौ बरस गुज़रे साँस लिए, सौ बरस गुज़रे बिना जिए
आईने में जब देखती हूँ, मैं हूँ या कोई साया पिए।

काली रातें मेरी सहेली, चाँद भी मुझसे डर जाए,

कदमों की आहट पूछे मुझसे, कौन है जो साथ निभाए?


एक मधुर सी Siren Song जैसी आवाज नीरव को संमोहित कर रही थी, उसके दिमाग़ जैसे सुन्न पड़ गया था,कंबल ओढ़ने की वजह से एक गर्म सा एहसास उसके जिस्म में छाने लगा था जो उसके बदन को आराम पहुंचा रहा था।
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धीरे-धीरे वो आवाज कम होती गई और वो आँखें बंध करके सो गया। चेहरे पर एक अलग ही शांति दिख रही थी, कंबल की वजह से मौसम की ठंड उसके बदन को बिन छुए गुजर रही थी।अभी कुछ पल ही बीते होंगे कि तभी एक औरत की दर्द भरी चीख से नीरव की नींद टूट गई।चीख सुनकर नीरव हड़बड़ाते हुए बैठ गया,उसे याद ही नहीं था कि वो कब सो गया,ख्यालों से बाहर आकर उसने आवाज की दिशा में अपनी नजर बढ़ाई तो रेलवे ट्रैक के अंधेरे हिस्से से वो आवाज आई थी,जिसे सुनकर अंदाजा लगा सकते है कि वो औरत जो कोई भी थी बहुत दर्द में होंगी इसलिए ज़्यादा टाइम बर्बाद किए बिना उसने पास पड़ी लालटेन उठाई और आवाज़ की दिशा में चल पड़ा।
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रेलवे ट्रैक पर तेज़ी से चलते हुए आवाज़ की दिशा में आगे बढ़ रहा था,तेज़ धड़कन और साँसों के साथ उसके मन में कई सवाल घूम रहे थे,"वह औरत कौन हो सकती है? क्या हुआ होगा? इतनी अंधेरी रात में वह अकेली क्या कर रही होगी?" इन्हीं सब ख्यालों के साथ वो उस अंधेरे की तरफ़ बढ़ रहा था। हालाँकि, उसके हाथ में लालटेन था लेकिन उसकी रोशनी में दूर तक देख पाना मुमकिन नहीं था।
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इसके साथ ही दूर से कुत्तों के रोने की आवाज़ उसका डर ओर बढ़ा रही थी। नीरव थोड़ा ही आगे बढ़ा होगा कि तभी उसे दूर रेलवे ट्रैक पर कुछ हिलता हुआ नजर आया। यह देखकर वह धीरे-धीरे उसकी तरफ़ बढ़ा
पर जैसे ही वो वह पहुंचा तो सामने का मंजर देखकर उसके हाथ से लालटेन गिर गया और इसके साथ वो भी उस काले अंधकार से घिर गया।

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बरसात की ठंडी रात में भी नीरव के माथे पर पसीना आने लगा था क्योंकि उसके सामने इंसानी शरीर के कटे हुए टुकड़े पड़े थे। उसे देखकर लग रहा था कि जैसे कोई इंसान हाल ही में ट्रेन के नीचे कटकर मर गया होगा।वहां पड़े हुए हाथ, पैर, आंतों और मांस के कुचड़ो से निकले खून की वजह से जैसे वहां तालाब भर गया हो।
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वहां पर एक से भी पड़ा हुआ था जो बुरी तरह से पिचक गया था,उसके लंबे बाल को देखकर समझ सकते है कि वो कोई स्त्री होगी पर इस वक्त को कोई ट्रेन नहीं आई तो फिर यह सब कैसे हो गया? वह अभी इन सब ख्यालों से बाहर भी नहीं निकला था कि उसे दूर से आती ट्रेन की व्हीसल सुनाई दी। उसने नज़रें हटाईं तो रात के 1:45 बज रहे थे और बांद्रा पैसेंजर एक्सप्रेस, कोहरे को चीरती हुई पूरी स्पीड से नीरव की तरफ बढ़ रही थी। नीरव को होश आने पर वहाँ से हटने के लिए अपना पैर आगे बढ़ाया, लेकिन उसके साथ ही उसे ज़ोर का झटका लगा। जब उसने
देखा कि उसका बायाँ पैर दो रेलवे ट्रैक के बीच फँस गया है।

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आज के लिए सिर्फ इतना ही Guys,कहानी का पहला अपडेट कैसा लगा आपको यह कमेंट करके जरूर बताईए और क्या नीरव बच पाएगा यह जानने के लिए मैं मिलूंगा आपको जल्द ही एक नए अपडेट के साथ।
बहुत ही सुंदर लाजवाब और शानदार रोमांचक अपडेट है भाई मजा आ गया
अगले रोमांचकारी धमाकेदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा
 

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नीरव ने छटपटाते हुए बहुत कोशिश की लेकिन उसका पैर निकल ही नहीं रहा था ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने उसका पैर जकड़ रखा हो।उसका पूरा मुंह पसीने से भीग चुका था और चीखते हुए वो अपना सारा जोर लगाते हुए निकलने की कोशिश कर रहा था,"बचाचाओओअ्.........कोई है!!?........ कोई तो मदद करोओओ.........." लेकिन इस चिक्कार सन्नाटे में उसकी गुहार सुनने वाला कोई नहीं था,सामने से पूरी रफ़्तार से ट्रेन धरती को हिलाते हुए उस सन्नाटे और धुंध को चीरते हुए अपनी दिशा में आगे बढ़ रही थी,कई हज़ार किलो सा भारी-भरकम Engine रेल की पटरी को थरथराते हुए नीरव के पास पहुंच रहा था जिसकी कंपन नीरव अपने पूरे बदन में महसूस कर सकता था। ट्रैन अब नीरव से कुछ ही दूरी पर थी और इसके साथ ही नीरव ने भी अपनी मौत को स्वीकार कर लिया था,आज तक के सब हसीन लम्हे उसकी आँखों के सामने दिख रहे थे,मन में अभी कितने अरमान थे जिसे वो पूरा करना चाहता था, भावनाओं का यही सैलाब उसकी आंखों में एक नमी बनकर उभर आया और एक आंसू उसकी आंखों से बह निकला।वो हिम्मत इकट्ठा करके खड़ा हो गया तभी अंधेरे में आशा की किरण की तरह एक औरत ठंडे झोंके की तरह नीरव के पास आई,उसे अपनी बाहों में जकड़ा और पैरों से एक झटका लगाया जिससे उसका पैर आज़ाद हो गया और छलांग लगाते हुए दोनों रेलवे ट्रैक के बाईं ओर गिर पड़े।
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ट्रेन उन दोनों के पास से आवाज़ करते हुए सडसडाट से गुज़र गई,नीरव बिना पलकें झपकाए सदमे में देखता रहा, उसे पता ही नहीं चला कि पलक झपकते ही उसके साथ इतनी जल्दी क्या घटित हो गया। बाई तरफ कूदने की वजह से ढलान होने की वजह से दोनों के शरीर लुढ़कते हुए थोड़ी दूरी पर गिर पड़े,कूदते वक्त उस औरत का पेटीकोट पटरी में फंसकर जांघ तक फट गया था जिससे उसकी पहनी पूरी साड़ी अस्त-व्यस्त हो गई थी।नीरव का शरीर जमीन पर पड़ा था और अपने ठीक ऊपर उसे नाज़ुक से गर्म बदन का एहसास हो रहा था,उसे अपने मुंह पर किसी के गर्म सांसों की ख़ुशबू महसूस हुई और वो औरत उठकर नीरव के जांघों पर बैठ गई,उस औरत ने नीचे अंतर्वस्त्र नहीं पहने थे इसलिए उसके अंगों की पारदर्शिता नीरव को अपने बदन के निचले हिस्से पर महसूस हो रही थी।
सदमे की वजह से नीरव उठा जिसकी सांसे अभी भी तेज चल रही थी,दोनों बिल्कुल करीब थे,वो औरत कुछ कहने जा रही थी पर नीरव सीधा उस औरत के सीने में जाकर छिप गया, उस औरत का ब्लाउस भी सरक कर नीचे आ गया था और उसके बाएं तरफ का उरोज साफ दिख रहा था,नीरव सीधा उसके दोनों स्तनों के बीच में जाकर अपना मुंह छिपा लिया।

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"आपका शुक्रिया.......बहुत.....बहुत शुक्रिया......Sniffff........आपकी वजह से मेरी जान बच गई....." सुबकते हुए नीरव बोले जा रहा था।वो औरत पहले तो हड़बड़ा गई पर परिस्थित की गंभीरता वो समझ गई,अपने शालीन उत्कृष्ट स्तनों पर पुरुष का एहसास होते ही उसने भी दोनों हाथों से नीरव के सर को थाम लिया।
"कोई बात नहीं.......शांत हो जाईए.......अब आप सुरक्षित है.......बससस........कुछ नहीं हुआ......" एक छोटे बच्चे की तरह सहलाकर वो औरत नीरव को शांत पर रही थी और उसकी यह तरकीब काम भी कर रही थी नीरव का सुबकना बंद हो रहा था,नीरव अलग हुआ होकर उसके चेहरे को देखने की कोशिश करने लगा पर उस औरत के मुख की केवल आकृति मिल रही थी,डर से उसका बदन अब भी कांप रहा था जिसे शांत करने के लिए उस औरत ने नीरव के चेहरे को पकड़ा और अपने मधुमित होठों का रसपान कराने लगी,नीरव के लिए यह एहसास बिल्कुल नया था क्योंकि आज से पहले उसने कभी किसी स्त्री के इतने नर्म होठों का स्वाद नहीं लिया था पर उस अधरो का पूर्ण रसपान करने से पहले ही उस औरत ने उसे अलग किया और फिर उसके सर को अपने सीने में दबा दिया।

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इस बार भीगी साड़ी का कोई आवरण बीच में नहीं था जिससे उन कोमल स्तन का एहसास सीधा अपने गालों पर हुआ,नीरव ने अपने होठ हिलाए तो पता चला उसका मुंह बिलकुल निप्पल के पास ही था,नीरव की गर्म सांसे उस औरत के सीने में समा रही थी।ट्रेन गुज़र चुकी थी पर इस काले आसमान के नीचे दोनों किसी प्रेमी युगल की तरह एक दूसरे की बाहों में थे जिसे आसमान अपनी बूंदों से हल्का भिगो रहा था।
कुछ देर बाद नीरव को होश आया तो तुंरत ही उस औरत से अलग होकर खड़ा हो गया,दोनों अपने कपड़े ठीक करने लगे,उस औरत ने अंत वस्त्र पहने बिना अपने स्तन पर ब्लाउज का आवरण चढ़ा दिया और अपना पेटीकोट निकालकर अपनी साफी पहनने लगी, अंधेरा घनघोर होने की वजह से दोनों एक-दूसरे को ठीक से देख तो नहीं सकते थे पर मर्यादा को समझते हुए वो दूसरी तरफ घूम गया,उसके बस उस औरत के चेहरे की हल्के झलके मिल रही थी।

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"आपको कहीं चोट तो नहीं लगी?" सामने खड़ी औरत की आवाज़ सुनकर नीरव का ध्यान उस तरफ गया।उसने देखा तो वो औरत ने अपनी साड़ी ठीक से पहन ली थी।
"मेरी जान बचाने के लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया, मैं आपका यह एहसान जिंदगी भर नहीं चुका पाऊँगा।" नीरव ने हाथ जोड़ते हुए एक सांस में कह दिया।

"अरे,आप हाथ मत जोड़िए" कहते हुए उस औरत ने अपने मृदुल हाथों को मेरे ऊपर रख दिया,"इसमें एहसान की कोई बात नहीं है?पर आप उस जगह पर कैसे फंस गए?"
"वो....वो.......आवाज़...." कहते हुए उसके दिमाग़ में उसी मृतप्राय स्त्री का मंजर घूमने लगा,वो दौड़ते हुए आगे बढ़ने वाला था पर उसके पैर में दर्द की लहर दौड़ गई,पैर निकलते वक्त काफी जोर लगाने से लोहे से घिसकर उसका पैर छिल गया था,जिससे वो गिरने वाला था पर उन कोमल हाथों ने उसे फिर थाम लिया,"अरे आराम से,इतनी जल्दी में कहा जा रहे थे।" उसकी नाज़ुक उंगलियां नीरव से सीने पर स्पर्श कर रही थी,नीरव ने ऊपर रेल ट्रैक की तरफ इशारा किया और वो दोनों वहां पर पहुंच गए पर वहां पहुंचकर उसका दिमाग़ जैसे सुन्न पड़ गया क्योंकि वहां ना ही खून था और ना ही लड़की का कटा हुआ शरीर।इन सब ख्यालों से उसका सर भारी होने लगा।
"आप ऐसा क्या देखने के लिए इतनी जल्दबाजी कर रहे थे?" उस औरत की बात सुनकर वो चुप रहा,"नहीं......कुछ नहीं" आखिर ने उसने इतना कहा और वो नीरव को देखती रही।

"वैसे आपका नाम क्या है और आप इतनी रात में अकेली यहां क्या कर रही है?" इसके जवाब में उस औरत ने कमर में बंधी एक प्लास्टिक की थैली दिखाई जिसमें कुछ दवाइयां थी।
"मेरा नाम मेघना है,मेरे पति की एक एक्सीडेंट में मौत हो चुकी हैं,मैं पास ही में अपने 4 साल के बच्चे के साथ अकेली रहती हूँ, उनकी अचानक तबीयत खराब होने की वजह से मैं दवाएँ लेने गई थी।"
नीरव : ओह मुझे माफ़ कीजिएगा।
मेघना : कोई बात नहीं इसमें माफी मांगने जैसा कुछ नहीं है।
नीरव : अगर आपको कोई दिक्कत ना हो तो क्या मैं आपके साथ चल सकता हूँ? आपने मेरी जान बचाई है इसलिए अगर मैं आपके कोई काम आ सकूँ तो मुझे बहुत खुशी होगी।" नीरव की बातें सुनकर मेघना कुछ देर सोचने लगी तभी उसका ध्यान नीरव के पैर की तरफ गया,"ठीक है,वैसे भी पैर के इस दर्द के साथ आपका अकेले घर जाना ठीक नहीं,मेरे घर पर आपको कुछ दवाई भी लगा दूंगी।" आखिर में मेघना ने नीरव के साथ चलने पर सहमति दे दी पर चलने से पहले मेघना ने पेटीकोट को फाड़कर एक कपड़ा नीरव के पैर पर बंध दिया जिससे उसे चलने में आसानी हो।

नीरव से घर का पता पूछने पर उसने बताया कि उसका घर पास के स्टेशन की बस्ती के पास ही है। यह सुनकर नीरव को थोड़ी हैरानी हुई क्योंकि बस्ती का इलाका शहर से अलग पड़ता था इसलिए सब लोग समय के साथ एक-एक करके शहर के मुख्य विस्तार की तरफ रहने लगे थे और वो Area वीरान पड़ गया था ऐसे इलाके में एक औरत बच्चे के साथ अभी भी अकेली रहती है ये बात सोचने पर मजबूर कर देती है।मन में कई ख्याल घूमने की वजह से नीरव थोड़ा पीछे रह गया इसलिए मेघना ने पीछे मुड़कर कहा,"अरे क्या सोच रहे है? आप पक्का मेरे साथ चल पायेंगे?"
नीरव : अरे ऐसी कोई बात नहीं है,आप मेरी फिक्र मत कीजिए।

रेलवे स्टेशन से थोड़ी दूर चलकर,घनी झाड़ियों से गुज़रते हुए हम उस बस्ती में पहुँचे।अब हवा के साथ बारिश का ज़ोर धीरे-धीरे तेज़ होने लगा था जिससे हम दोनों भीगने लगे थे।बस्ती के बीच एक ऊबड़-खाबड़ पथरीली सड़क बनी हुई थी जिस पर हम दोनों चलते हुए आगे बढ़ रहे थे।
सड़क के दोनों तरफ़ टूटे-फूटे घरों की कतार लगी थी जिनकी दरारों में घास उगी हुई थी। घरों की दीवारों पर बनी तस्वीरें, दरवाज़े, टूटा हुआ फर्श और लकड़ी की खिड़कियां चमकती बिजली के साथ डरावनी आकृति बना रही थी,उनके बीच से गुज़रती हवा भी कर्कश आवाज़ पैदा करती थी जो दिल में एक अलग ही डर पैदा करता था। इस रात के अंधेरे में सभी घर काले लग रहे थे, जैसे कुदरत ने उनका रंग छीन लिया हो और वो भी उन्हें अपने अंदर समा लेना चाहती हो।

एक हल्की सी आहट भी उसके दिल को दहला देने का काम रही थी इसलिए नीरव ने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया और बस आगे देखकर चलने लगा।बस्ती से आगे बढ़कर हम दोनों अब कच्ची सड़क पर आ गए थे जिसके आसपास कई घने पेड़ थे जिससे उसके पत्तों पर गिरती पानी की बूंदों की आवाज गूंज उठती थी,वो दोनों घने पेड़ो के बीच से गुजरकर वो दोनों सुंदर दो मंजिला घर के सामने आकर खड़े हो गए।घर प्राकृतिक सुंदरता के साथ कलाकृति का उत्तम प्रतीक था,घर के बाहर एक छोटा बाग बना हुआ था जिसके दोनों तरफ सुंदर फूल और पौधें खिले हुए थे,उसके चारों ओर लकड़ी की बाड़ बनी हुई थी। घर के अंदर से आ रही पीली रोशनी उसे और भी सुंदर बना रही थी। मेघना ने दरवाज़ा खोला और एक रास्ते पर चलकर घर के मुख्य दरवाज़े के पास खड़ी हो गई। घर के बाहर एक बल्ब था जिससे हल्की रोशनी आ रही थी। मेघना ने ताला खोला और नीरव को देखा और दोनों घर के अंदर आ गए।

बाहर फिर हवा के साथ मुशलधार बारिश शुरू हो गई थी जिससे बारिश की बूँदें घर के दरवाज़े तक पहुँच रही थीं इसलिए दरवाज़ा बंध करने के लिए नीरव और मेघना दोनों ने एक साथ अपना हाथ आगे बढ़ाया और उसकी वजह से नीरव का हाथ उसके मुलायम हाथ को स्पर्श कर गया।नीरव ने अपना हाथ पीछे खींचा और दरवाजे से पीछे होकर नीरव के सामने आकर खड़ी हो गई,जिसे चेहरे को देखने के लिए नीरव कब से कोशिश कर रहा था वो उसके सामने था और इस चेहरे को देखकर जैसे उसका दिल एक पल के लिए धड़कना भूल गया हो क्योंकि मेघना उसके कल्पनाओं से भी अधिक सुंदर थी।

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रात के अंधेरे ने जिस बदन को अपने अंधकार से ढक रखा था उसे घर की रोशनी उजागर कर रही थी,रेशम सी लहराती लंबी जुल्फ़े,काजल के तिमिर (कालापन) समान काली आँखें,गुलाब की पंखुड़ियों के समान होठ जिसके पास एक छोटा सा तिल, जो सौंदर्य की इस मूरत को नज़र लगने से बचाने के लिए हो और सुबह की लालिमा जैसे उसके गाल।बारिश में भीगने की वजह से उसकी साड़ी उसके शरीर से चिपक गई थी जिसके नीचे से भीगे ब्लाउज से उसकी उरोज रेखा बाहर झांक रही थी और उसके दोनों निपल्स ब्लाउज से चिपक गए थे जो मेघना के उन्मादक स्तनों के आगाज कर रहे थे।हंस समान कमर के सौष्ठव (Curve) और पेट पर गहरा नाभि केन्द्र श्वेतशरीर को उसको अग्रता प्रदान कर रही थी।
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नीरव तो जैसे ऊपरवाले की इस मोहक रचना में मुग्ध हो गया था तभी भीगी साड़ी का पल्लू नीचे पेटीकोट ना पहनने की वजह से सरक गया जिससे जननांग बालों के साथ उसकी योनि मार्ग के दर्शन हो गए,चिकने रस से युक्त गुलाबी रंग से सज्ज वो काफी आकर्षक लग रहा था,अचानक हुई इस घटना से वो साड़ी को संभाल ना सकी और पूरी साड़ी जमीन पर गिर पड़ी,उसने लज्जा की वजह से दोनों हाथों से अपनी योनि को धक दिया और मुड़कर वो जल्दी से चलते हुए अंदर की तरफ जा रही थी पर भीगी साड़ी फर्श पर गिरने की वजह से पानी जमीन पर गिरा हुआ था जिसकी वजह से वो गिरने वाली थी पर नीरव ने उसके पीछे से पकड़ लिया।मेघना ने पाया की मर्द की दोनों बाहें उसके पेट से लिपटे हुए है इसके बारे में सोचकर उसका रोम-रोम खड़ा हो गया,नीरव ने एक हाथ मेघना की पीठ पर लाकर उसके ब्लाउज की डोर को खोलकर उतार दिया,अब वो पूरी तरह नग्न खड़ी थी तभी उसे अपनी गांड़ की दरार में लिंग का एहसास हुआ जो पेंट के अंदर था तभी नीरव की गहरी आवाज उसके कानों में पड़ी,"मेघना आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है मैं ऐसी कोई हरकत नहीं करूंगा जिससे आपकी मर्यादा को ठेस पहुंचे।" यह सुनकर वो तुरंत पीछे घूम गई और नीरव को देखने लगी,मेघना के दिल में नीरव प्रति सम्मान उमड़ आया जो एक नग्न स्त्री को सामने पाकर भी संयम के साथ खड़ा था।
"आप यहीं खड़े रहे मैं आपके लिए तौलिया लेकर आती हूँ" इतना कहकर वो अपने कमरे की ओर चली गई।
नीरव जाते हुए मेघना की मादक गांड़ देख रहा था जो एक लय के साथ हिल रही थी साथ ही उन दोनों के उभार से एक गहरी लकीर उत्पन्न होती थी,कमरे में जाने से पहले मेघना पीछे मुड़ी और एक मुस्कान देकर हॉल के पासवाले कमरे में चली गई।

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नीरव ने वह खड़े रहकर अपनी नजर घुमाई,घर छोटा था लेकिन अंदर से देखने में उतना ही आकर्षक था, बाहर के मुकाबले घर में अच्छी गर्मी थी जो अंदर से शरीर को राहत पहुंच रही थी, घर में फर्नीचर की भी अच्छी सुविधा थी,सब चीज़ें साफ और सुसज्जित तरीके से रखी हुई थी और इसके अलावा घर के अंदर की गई फूलों की सजावट उसका मुख्य आकर्षण का केन्द्र था जिसकी खुशबू पूरे घर में फैल रही थी, घर के बीच में ऊपर एक छोटा सा झूमर था जो अपनी पीली रोशनी बाहर तक बिखेर रहा था।नीरव घर की खूबसूरती को निहार रहा था उतने में मेघना नीरव के लिए तौलिया लेकर आ गई,नीरव ने देखा तो मेघना ने लाल साड़ी पहनी हुई थी पर उसने ब्लाउज या पेटीकोट के बिना उसे सिर्फ अपने बदन पर लपेटा हुआ था,उसने नीरव के हाथ में तौलिया दिया और अपने घटादार बालों को अपने साथ लाएं दूसरे तोलिए से पोछने लगी। अपने कंधो के भाग से उभरते स्तन के भाग कितने मनमोहक लग रहे थे,अपनी तरफ इस तरफ देखने की वजह से मेघना हल्का सा मुस्कुराई और बोली, "नीरव,आप तो पूरी तरह भीग गए हैं,मेरे पास अभी भी मेरे पति के कुछ कपड़े हैं और आपको देखकर लगता है कि वे आपको फिट आएंगे।" यह कहकर मेघना नीरव को अपने कमरे की तरफ ले गई।
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जब दोनों कमरे में पहुंचे तो एक मीठी खुशबू भी फैली हुई थी, मेघना ने अलमारी से एक सफ़ेद कुर्ता निकाला और नीरव के पास आकर उसके बदन से नापने लगी लेकिन नीरव तो अभी भी उसके देह उभरी के साथ खूबसूरत चेहरे में खोया हुआ था, जिसकी वजह से उनकी नज़रें मिलीं और मेघना ने शर्माकर अपनी नज़रें नीचे कर लीं। जब वे दोनों एक-दूसरे में खोए हुए थे तभी अचानक ज़ोर से बिजली कड़की और उसकी तेज़ आवाज़ शहर की शांत भूमि में फैल गई।अचानक हुई इस आवाज़ से मेघना डर गई और सीधे जाकर नीरव के सीने में छिप गई,मेघना की गर्म सांसे और उसके शरीर से आती भीनी खुशबू अपने अंदर महसूस कर सकता था,थोड़ी देर खड़े रहने के बाद वो नीरव से अलग हुई और दवाई लेकर कमरे से बाहर चली गई और नीरव ने पास पड़ा कुर्ता उठाया और अपने कपड़े बदलने चला गया।

कपड़े बदलने के बाद नीरव हॉल में आया जहाँ फ़र्श पर एक मुलायम चादर बिछी हुई थी। उसने खिड़की से बाहर देखा तो बरसात अभी भी गिर रही थी जिसे देखकर लग रहा था कि। आज यह पूरी रात नहीं थमेगी।बाहर से गिरती पानी की आवाज़ के अलावा घर में एकदम सन्नाटा छाया था।नीरव ने इधर-उधर देखा लेकिन मेघना के पति की एक भी फ़ोटो नहीं दिखी,यह देखकर वह थोड़ी देर के लिए सोच में पड़ गया लेकिन साथ ही उसका ध्यान गया कि मेघना भी दिखाई नहीं दे रही थी। आखिर में उसकी नज़र दूसरी मंज़िल की पर जानेवाली सीढ़ियों की तरफ गई इसलिए मेघना को ढूंढते हुए वो ऊपर वाली मंज़िल पर पहुँच गया।
जब उसने देखा तो ऊपर सिर्फ़ एक कमरा था लेकिन वह नीचे बने हुए दूसरे कमरों के मुकाबले काफी बड़ा था।इसके साथ ही उसने अंदर देखा तो कमरे के एक कोने में खिलौने पड़े थे जिसे देखकर लग रहा था कि यह कमरा मेघना के बेटे का होगा। उसकी नज़र बिस्तर पर पड़ी जहाँ चार साल का एक बच्चा आँखें बंद करके सो रहा था। मेघना ने उसे दवाई दी थी फिर भी उसका बुखार कम करने के लिए उसने बच्चे के सर पर ठंडे पानी का कपड़ा रख रही थी,वह हर मुमकिन कोशिश कर रही थी पर सर के तेज़ दर्द की वजह से बच्चे के कराहने की आवाज कमरे के बाहर तक सुनाई दे रही थी।

अपने बच्चे की हालत देखकर मेघना के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ़ दिख रही थीं। नीरव के दिल में उस बच्चे के लिए प्यार उमड़ आया और वो जल्दी से आगे बढ़कर बच्चे के पास बैठ गया।नीरव को अपने पास बैठा देखकर मेघना ने उम्मीद भरी नज़रों से उसकी तरफ देखा।बच्चे के शरीर का तापमान देखने के लिए जैसे ही नीरव ने बच्चे के सर पर स्पर्श किया उसने तुरंत अपना हाथ पीछे खींच लिया क्योंकि बच्चे के शरीर का तापमान दूसरों के शरीर के मुक़ाबले बहुत ज़्यादा था। उसने घबराई हुई आवाज़ में मेघना से कहा,"मेघना, तुम्हारे बेटे की तबीयत बहुत खराब है अगर उसे टाइम पर अस्पताल नहीं ले जाया गया तो उसकी तबीयत ओर बिगड़ जाएगी।" नीरव ने हक जताते हुए कहा।

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"नीरव, मैं आपकी बात समझ रही हूँ लेकिन इतनी रात में कोई हॉस्पिटल खुला नहीं है ऊपर से बाहर फिर से भारी बरसात भी शुरू हो गई है अगर हम उसे इस बारिश में बाहर ले गए तो मुझे डर है कि भीगने की वजह से इसकी हालत ओर खराब ना हो जाए।" मेघना की बातें सुनकर नीरव सोचने लगा क्योंकि उसकी बातें कुछ हद तक सच थी,इसके अलावा इस वीरान विस्तार में परिवहन का कोई साधन भी नहीं मिलता था।
हम दोनों अभी बात कर ही रहे थे कि बच्चे ने आँखें खोलीं और नीरव का हाथ पकड़कर बोला, "पापा......पापा आप आ गए!! मैं कितने दिनों से आप ही का इंतज़ार कर रहा था।" यह सुनकर नीरव ने बच्चे का मासूम चेहरा देखा और करुणा से अपना हाथ उसके सर पर रख दिया।

"बेटा आयुष, ये तुम्हारे पापा नहीं हैं आपको बुखार है ना इसीलिए यह अंकल हमारी मदद करने के लिए आए है।"

"नहीं,तुम्हारी आंखे खराब है इसीलिए तुम्हे ठीक से दिख नहीं रहा यह मेरे पापा है,वो हर रात वही कपड़े पहनते हैं, मेरे साथ खेलते हैं, मेरे साथ सोते हैं और मुझे हर दिन नई कहानियाँ सुनाते हैं" यह कहते हुए आयुष की आँखें थोड़ी नम हो गईं और उसने नीरव का हाथ कसकर पकड़ लिया।

नीरव की बच्चे की समझदारी और मासूमियत पर प्यार भर आया,मेघना कुछ कहने ही वाली थी कि उससे पहले नीरव ने मेघना का हाथ पकड़कर सिर हिलाकर बोलने से मना कर दिया क्योंकि नीरव को एहसास हो गया था कि बुखार ज्यादा बढ़ जाने की वजह से आयुष को पहचानने में गलती ही रही होगी और इस वक्त अगर उसकी भावनाओं को ज्यादा ठेस पहुंची तो उसकी हालत ओर खराब हो जाएगी।

"सॉरी बेटा आयुष, तुम्हें मेरी वजह से इतना इंतज़ार करना पड़ा लेकिन अब मैं आ गया हूँ ना तो तुम्हारे साथ रहूँगा और तुम्हें पता है कि हमारे शहर में मेला लगने वाला है, तुम जल्दी ठीक हो जाओ तो मैं, तुम और तुम्हारी मम्मी हम तीनों वहाँ घूमने जायेंगे।" इतना कहते हुए नीरव ने मेघना की तरफ देखा जैसे एक पति अपनी पत्नी को संबोधित कर रहा हो,इस बात पर मेघना ने अपनी आंखे शर्म से झुका ली।

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"सच में पापा?!! तब तो मैं कल ही ठीक हो जाऊंगा,आप वहां जाने के लिए तैयार रहना" नीरव की बातें सुनकर आयुष भी एक्साइटेड हो गया।
"हाँ, क्यों नहीं, हम वहां तुम्हारे लिए बहुत सारे नए खिलौने भी खरीदेंगे लेकिन ठीक होने के लिए तुम्हें मम्मी की बात मानकर टाइम पर दवाई लेनी होगी।"
"हाँ पापा, मैं उनकी हर बात मानूँगा लेकिन आप मेरे साथ रहोगे ना?मुझे फिर कहीं छोड़कर चले तो नहीं जाओगे ना?" इतना कहकर आयुष नीरव के गले से लिपट गया,एक पिता पुत्र के मिलन जैसे पितृवत्सल भावनाएं नीरव के दिल से छलक पड़ी और उसने आयुष को बाहों में समा लिया,मेघना भी आंखों में नमी के साथ चेहरे पर हल्की सी मुस्कान के साथ आयुष को देख रही थी क्योंकि बहुत दिनों बाद उसने आयुष को इतना खुश देखा था।

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कुछ देर आलिंगन में रहने के बाद नीरव ने आयुष को बेड पर लिटाया,तीनों को एक साथ देखकर ऐसा लग रहा था मानो एक परिवार पूरा हो गया हो,नीरव हल्के हाथों से उसका सर दबा रहा था ताकि उसे आराम मिले तभी आयुष ने मेघना की तरफ देखकर कहा,"मम्मी,मुझे पहले की तरह प्यार करते हुए सुलाओ ना" आयुष की इस बात पर मेघना झेप गई इसलिए थोड़ा हिचकाते हुए कहा,"नहीं.....आयु.....अभी नहीं....चलो सो जाओ......जल्दी.......बहुत रात हों गई है।"
"नहीं मुझे पहले की तरह आपकी गोद में सोना है।" आयुष की इस मांग पर मेघना शर्मा रही थी जिसकी वजह नीरव को समझ नहीं आ रही थी पर अपने मासूम बच्चे की जिद के आगे हार मानते हुए एक मां ने अपना फर्ज निभाया,मेघना ने आयुष को उठाकर गोद में सुलाया और बाई तरफ से अपना पल्लू उठाकर अपने स्तन को बाहर निकालकर आयुष के मुंह के पास रख दिया और वो मासूम सा बच्चा उसे अपने मुंह में भरकर मासूमियत के साथ चूसने लगा,एक मां अपनी संतान के लिए हर हद तक जा सकती है ये पल इस बात का उदाहरण था,नीरव यह देखकर बात समझ गया इसलिए तुरंत बेड से उठकर कमरे से बाहर की तरफ मूड गया तभी आयुष ने रुआंसे गले के साथ उसे पुकारा,"पापा,आप कहां जा रहे हो,मेरे पास आओ ना" आयुष की यह बात सुनकर नीरव असमंजस में पड़ गया,उसके सामने धर्म संकट जैसी स्थिति थी क्योंकि एक तरफ स्त्री सहज की मर्यादा थी और दूसरी ओर मासूम बच्चे की जिद।

मन की इस स्थिति को जैसे मेघना समझ गई हो उसने मधुर आवाज के साथ नीरव को पुकारा,"सुनिए,रुक जाइए......मुझे कोई आपत्ति नहीं है।" यह वाक्य सुनकर नीरव हैरानी से उसे देखने लगा जो अपनी नजरे चुराकर अपने बेटे को देख रही थी,नीरव चलते हुए मेघना से थोड़ी दूर बगल में जाकर बैठ गया, मेघना ने पल्लू की मदद से अपने स्तनों को ढंका हुआ था पर बार-बार हिलने की वजह से वो सरक जाता था इसलिए उसने ना चाहते हुए एक तरफ से नीचे की तरफ गिरा दिया जिससे नीरव की आंखों के सामने मांसल,गोल सुड़ोलाकार श्वेत रंग का स्तन था जिसके भूरे निप्पल को आयुष मुंह में भरकर चूस रहा था उसने बीच में रुकते हुए कहा,"पापा मेरे पास बैठिए ना"
आयुष की बात सुनकर मैं उसके बिलकुल पास मेघना से सरकार बैठ गया,मेरे इतने पास होने की वजह से उसके गर्म जिस्म की महक महसूस कर सकता था, नीरव आयुष के सर को सहलाने के लिए अपना हाथ बढ़ाया जिसे आयुष ने कसकर पकड़ लिया जिससे नीरव की ठंडी उंगलियों का स्पर्श मेघना को अपने स्तन पर मेहसूस हो रहा था और उसके हर स्पर्श से वो सिहर उठती थी,मेघना के पल्लू का दूसरा भाग एक तरफ से आयुष के मुंह पर आकर दिक्कत दे रहा था।
यह देखकर नीरव ने हल्के से अपना हाथ मेघना के कंधे पर रखा और नीचे की तरफ उतारकर मेघना के पूरे सीने को खुला कर दिया था जिससे उसके दोनों स्तनों की मृदुमय स्थितिस्थापकता सामने से उभरकर आई, शरीर के दो नाज़ुक रचना पर भूरे निप्पल क्या गजब ढा रहे थे, मेघना ने देखा को नीरव उसके स्तनों को देख रहा है जिससे उसकी सांसे गहरी हो गई और इसका असर उसके उभारों पर हुआ जिसका आकर बढ़ने के साथ आक्रामक हो गया।

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आयुष स्तन चूसते हुए ज्यादा पैर हिला रहा था जिससे उसके नन्हे पैर उसके दूसरे उरोज से टकरा रहे थे। मेघना ने उसे समझाया पर उसके ध्यान नहीं दिया इसीलिए नीरव ने अपना हाथ हल्के से उसके स्तन पर रख दिया,हाथ में थामते ही नीरव को रेशम से मुलायम बदन पर कोई रुई सी कोमल चीज़ अपने हाथों में भर ली हो ऐसा एहसास होने लगा,यह वास्तविकता है या कोई भ्रम यह जानने के लिए वो बड़े प्यार के साथ उसे दबाने लगा,मर्द के फौलादी हाथ का एहसास होते ही मेघना आहें भरने लगी।जब दोनों की नजरे मिली तो नीरव ने देखा उसकी आंखों में लालसा भरी हुई थी जो पूर्ण सहवास के लिए तरस रही थी,कुछ देर स्तन को मसलने के बाद नीरव ने देखा की स्तनपान का गर्म एहसास लेने के बाद आयुष सो गया है।जिससे दूसरे उरोज को भी उसने अपने हाथ में भर लिया अब नीरव पीछे से उन दोनों उभारों को निचोड़ने में लगा था, मेघना आंखे बंध करके इस आनंद की अनुभूति कर रही थी,"आआहहहह्........हहमममम्म्म्..........ऐसे ही करिए.........ऊउम्म्हहह्........."
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मेघना के सभी बाल पीछे होने की वजह से नीरव ने उसकी सुडौल गर्दन अपने होठ रख दिए,मेघना के जिस्म की गर्माहट, नर्माश और उसके नमकीन पसीने का स्वाद अपने मुंह से लेना चाहता था।कुछ पल तक चलती शरीर की इस गर्मा-गर्मी की वजह से मेघना ने अपना रस छोड़ दिया और अपने मुंह पर हाथ देकर अपनी आवाज को रोकने लगी जिससे आयुष उठ ना जाए।
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मेघना ने उसे बेड पर लिटाया,बदन के निचले हिस्से पर दो उंगलियों घुमाया तो एक चिकनापन अनुभव हुआ,उसने पीछे देखा तो नीरव उसकी तरफ ही देख रहा था इसलिए उसने उंगलियां उसके मुंह में भर दी जिसे वो बड़े चाव के साथ चूस गया,इतना होते ही उसने अपने कपड़े ठीक करके दरवाजे के पास खड़ी हो गई,उसके उठते मैने देखा वहां काफी मात्रा में श्वेत रंग का गाढ़ा रस गिरा हुआ है जिसे मैंने जीभ की मदद से मुंह में भर लिया,उसकी गर्म ऊर्जा मुझे अंदर तक महसूस होने लगी,मेरी इस हरकत पर मेघना ने देखा और मुस्कराकर बाहर चली गई।
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नीरव ने आयुष को स्पर्श करके देखा तो उसका बुखार थोड़ा बहुत कम हो गया था। अपनो का प्यार और अपनापन हर बीमारी में दवा की तरह काम करता है यह बात इस नन्ही जान को देखकर सही लगती है। उसने आयुष के बदन को चादर ओढ़ा दी और दबे कदमों के साथ कमरे के बाहर चला गया। जब नीरव नीचे आया तो देखा मेघना बाहर हॉल में ही बैठी हुई थी। नीरव के कदमों की आवाज़ सुनकर उसने ऊपर देखा।

नीरव नीचे हॉल में मेघना के पास आकर बैठ गया,कुछ देर पहले बिताए लम्हों की वजह से कोई कुछ नहीं बोल रहा था फिर कुछ सोचते हुए नीरव ने पूछा,"वैसे तुम्हारे पति को क्या कोई बीमारी थी जिसकी वजह से तुम्हारे परिवार के साथ यह घटना हो गई।"
मेघना ने नीरव की तरफ देखते हुए कहा,"बीमारी तो नहीं पर शायद किसी की बुरी नजर ही समझो जिसने हमारी खुशियों को छीन लिया,आम लोगों की तरह हमने भी यहां हमारी छोटी सी दुनिया बसाई थी आयुष के पापा एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में काम करते थे इसलिए उन्हें अक्सर काम की वजह से शहर से बाहर जाना पड़ता था लेकिन एक रात घर लौटते समय दुर्घटना में उनकी मौत हो गई। इसका आयुष के मन पर बहुत बुरा असर पड़ा। वह हमेशा अपने पापा को याद करते हुए अकेले बैठे रहता, किसी से बात नहीं करता,अचानक रात में उठकर रोने लगता, जिससे बीतते दिनों के साथ उसकी तबीयत खराब होने लगी।" यह कहते हुए मेघना की आँखों से आँसू बह निकले।
"माफ़ करो, मुझे आपसे यह सवाल नहीं पूछना चाहिए था।"
"नहीं इसमें आपकी कोई गलती नहीं है अब होनी को कौन टाल सकता है।" उसके बाद मेघना ने अपने आंसू पोछते हुए कहा,"आपने कहा था कि आप मेरा एहसान कभी नहीं चुका पाओगे, लेकिन आज आपने आयुष के चेहरे पर मुस्कान लाकर मुझे अपना ऋणी बना दिया है।"उसके बाद मेघना ने नजरे चुराते हुए कहा,"दरअसल आयुष पहले सोता नहीं था तो मैं उसे स्तनपान का सहारा लेती थी,बेशक अब इसमें दूध नहीं आता पर वो शांत होकर सो जाता था।" इस बात पर नीरव ने सिर्फ हां में सर हिलाया।

"बच्चों का मन और दिल साफ़ होता है इसलिए वो आसानी से दूसरों से भावनाओं के बंधन से जुड़ जाते हैं। अगर मेरी वजह से उसके चेहरे पर मुस्कान आई है तो मैं खुदको खुशनसीब मानता हूँ," नीरव ने मेघना के पास बैठते हुए कहा। नीरव की यह विवेकपूर्ण बातें सुनकर वह उसको निहारती रही।आखिरकार मेघना ने चुप्पी तोड़ी और कहा,"अरे, अपने मेरी इतनी मदद की पर मैंने आपसे चाय या नाश्ते के लिए भी नहीं पूछा।आप यहां बैठो, मैं थोड़ी देर में आ रही हूँ।" इतना कहकर वह किचन की तरफ बढ़ी पर तभी अचानक नीरव की नज़र उसके पैरों पर पड़ी,जहां उसने कदम रखे थे वहां खून से सने लाल निशान बनते जा रहे थे यह देखकर नीरव का दिल दहल उठा।




आगे के अपडेट्स में कहानी जारी रहेगी तब तक यह अपडेट कैसा लगा यह Comment करके बताना न भूले।
 
Last edited:

Ajju Landwalia

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अपडेट - 2


नीरव ने छटपटाते हुए बहुत कोशिश की लेकिन उसका पैर निकल ही नहीं रहा था ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने उसका पैर जकड़ रखा हो।उसका पूरा मुंह पसीने से भीग चुका था और चीखते हुए वो अपना सारा जोर लगाते हुए निकलने की कोशिश कर रहा था,"बचाचाओओअ्.........कोई है!!?........ कोई तो मदद करोओओ.........." लेकिन इस चिक्कार सन्नाटे में उसकी गुहार सुनने वाला कोई नहीं था,सामने से पूरी रफ़्तार से ट्रेन धरती को हिलाते हुए उस सन्नाटे और धुंध को चीरते हुए अपनी दिशा में आगे बढ़ रही थी,कई हज़ार किलो सा भारी-भरकम Engine रेल की पटरी को थरथराते हुए नीरव के पास पहुंच रहा था जिसकी कंपन नीरव अपने पूरे बदन में महसूस कर सकता था। ट्रैन अब नीरव से कुछ ही दूरी पर थी और इसके साथ ही नीरव ने भी अपनी मौत को स्वीकार कर लिया था,आज तक के सब हसीन लम्हे उसकी आँखों के सामने दिख रहे थे,मन में अभी कितने अरमान थे जिसे वो पूरा करना चाहता था, भावनाओं का यही सैलाब उसकी आंखों में एक नमी बनकर उभर आया और एक आंसू उसकी आंखों से बह निकला।वो हिम्मत इकट्ठा करके खड़ा हो गया तभी अंधेरे में आशा की किरण की तरह एक औरत ठंडे झोंके की तरह नीरव के पास आई,उसे अपनी बाहों में जकड़ा और पैरों से एक झटका लगाया जिससे उसका पैर आज़ाद हो गया और छलांग लगाते हुए दोनों रेलवे ट्रैक के बाईं ओर गिर पड़े।
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ट्रेन उन दोनों के पास से आवाज़ करते हुए सडसडाट से गुज़र गई,नीरव बिना पलकें झपकाए सदमे में देखता रहा, उसे पता ही नहीं चला कि पलक झपकते ही उसके साथ इतनी जल्दी क्या घटित हो गया। बाई तरफ कूदने की वजह से ढलान होने की वजह से दोनों के शरीर लुढ़कते हुए थोड़ी दूरी पर गिर पड़े,कूदते वक्त उस औरत का पेटीकोट पटरी में फंसकर जांघ तक फट गया था जिससे उसकी पहनी पूरी साड़ी अस्त-व्यस्त हो गई थी।नीरव का शरीर जमीन पर पड़ा था और अपने ठीक ऊपर उसे नाज़ुक से गर्म बदन का एहसास हो रहा था,उसे अपने मुंह पर किसी के गर्म सांसों की ख़ुशबू महसूस हुई और वो औरत उठकर नीरव के जांघों पर बैठ गई,उस औरत ने नीचे अंतर्वस्त्र नहीं पहने थे इसलिए उसके अंगों की पारदर्शिता नीरव को अपने बदन के निचले हिस्से पर महसूस हो रही थी।
सदमे की वजह से नीरव उठा जिसकी सांसे अभी भी तेज चल रही थी,दोनों बिल्कुल करीब थे,वो औरत कुछ कहने जा रही थी पर नीरव सीधा उस औरत के सीने में जाकर छिप गया, उस औरत का ब्लाउस भी सरक कर नीचे आ गया था और उसके बाएं तरफ का उरोज साफ दिख रहा था,नीरव सीधा उसके दोनों स्तनों के बीच में जाकर अपना मुंह छिपा लिया।

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"आपका शुक्रिया.......बहुत.....बहुत शुक्रिया......Sniffff........आपकी वजह से मेरी जान बच गई....." सुबकते हुए नीरव बोले जा रहा था।वो औरत पहले तो हड़बड़ा गई पर परिस्थित की गंभीरता वो समझ गई,अपने शालीन उत्कृष्ट स्तनों पर पुरुष का एहसास होते ही उसने भी दोनों हाथों से नीरव के सर को थाम लिया।
"कोई बात नहीं.......शांत हो जाईए.......अब आप सुरक्षित है.......बससस........कुछ नहीं हुआ......" एक छोटे बच्चे की तरह सहलाकर वो औरत नीरव को शांत पर रही थी और उसकी यह तरकीब काम भी कर रही थी नीरव का सुबकना बंद हो रहा था,नीरव अलग हुआ होकर उसके चेहरे को देखने की कोशिश करने लगा पर उस औरत के मुख की केवल आकृति मिल रही थी,डर से उसका बदन अब भी कांप रहा था जिसे शांत करने के लिए उस औरत ने नीरव के चेहरे को पकड़ा और अपने मधुमित होठों का रसपान कराने लगी,नीरव के लिए यह एहसास बिल्कुल नया था क्योंकि आज से पहले उसने कभी किसी स्त्री के इतने नर्म होठों का स्वाद नहीं लिया था पर उस अधरो का पूर्ण रसपान करने से पहले ही उस औरत ने उसे अलग किया और फिर उसके सर को अपने सीने में दबा दिया।

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इस बार भीगी साड़ी का कोई आवरण बीच में नहीं था जिससे उन कोमल स्तन का एहसास सीधा अपने गालों पर हुआ,नीरव ने अपने होठ हिलाए तो पता चला उसका मुंह बिलकुल निप्पल के पास ही था,नीरव की गर्म सांसे उस औरत के सीने में समा रही थी।ट्रेन गुज़र चुकी थी पर इस काले आसमान के नीचे दोनों किसी प्रेमी युगल की तरह एक दूसरे की बाहों में थे जिसे आसमान अपनी बूंदों से हल्का भिगो रहा था।
कुछ देर बाद नीरव को होश आया तो तुंरत ही उस औरत से अलग होकर खड़ा हो गया,दोनों अपने कपड़े ठीक करने लगे,उस औरत ने अंत वस्त्र पहने बिना अपने स्तन पर ब्लाउज का आवरण चढ़ा दिया और अपना पेटीकोट निकालकर अपनी साफी पहनने लगी, अंधेरा घनघोर होने की वजह से दोनों एक-दूसरे को ठीक से देख तो नहीं सकते थे पर मर्यादा को समझते हुए वो दूसरी तरफ घूम गया,उसके बस उस औरत के चेहरे की हल्के झलके मिल रही थी।

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"आपको कहीं चोट तो नहीं लगी?" सामने खड़ी औरत की आवाज़ सुनकर नीरव का ध्यान उस तरफ गया।उसने देखा तो वो औरत ने अपनी साड़ी ठीक से पहन ली थी।
"मेरी जान बचाने के लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया, मैं आपका यह एहसान जिंदगी भर नहीं चुका पाऊँगा।" नीरव ने हाथ जोड़ते हुए एक सांस में कह दिया।

"अरे,आप हाथ मत जोड़िए" कहते हुए उस औरत ने अपने मृदुल हाथों को मेरे ऊपर रख दिया,"इसमें एहसान की कोई बात नहीं है?पर आप उस जगह पर कैसे फंस गए?"
"वो....वो.......आवाज़...." कहते हुए उसके दिमाग़ में उसी मृतप्राय स्त्री का मंजर घूमने लगा,वो दौड़ते हुए आगे बढ़ने वाला था पर उसके पैर में दर्द की लहर दौड़ गई,पैर निकलते वक्त काफी जोर लगाने से लोहे से घिसकर उसका पैर छिल गया था,जिससे वो गिरने वाला था पर उन कोमल हाथों ने उसे फिर थाम लिया,"अरे आराम से,इतनी जल्दी में कहा जा रहे थे।" उसकी नाज़ुक उंगलियां नीरव से सीने पर स्पर्श कर रही थी,नीरव ने ऊपर रेल ट्रैक की तरफ इशारा किया और वो दोनों वहां पर पहुंच गए पर वहां पहुंचकर उसका दिमाग़ जैसे सुन्न पड़ गया क्योंकि वहां ना ही खून था और ना ही लड़की का कटा हुआ शरीर।इन सब ख्यालों से उसका सर भारी होने लगा।
"आप ऐसा क्या देखने के लिए इतनी जल्दबाजी कर रहे थे?" उस औरत की बात सुनकर वो चुप रहा,"नहीं......कुछ नहीं" आखिर ने उसने इतना कहा और वो नीरव को देखती रही।

"वैसे आपका नाम क्या है और आप इतनी रात में अकेली यहां क्या कर रही है?" इसके जवाब में उस औरत ने कमर में बंधी एक प्लास्टिक की थैली दिखाई जिसमें कुछ दवाइयां थी।
"मेरा नाम मेघना है,मेरे पति की एक एक्सीडेंट में मौत हो चुकी हैं,मैं पास ही में अपने 4 साल के बच्चे के साथ अकेली रहती हूँ, उनकी अचानक तबीयत खराब होने की वजह से मैं दवाएँ लेने गई थी।"
नीरव : ओह मुझे माफ़ कीजिएगा।
मेघना : कोई बात नहीं इसमें माफी मांगने जैसा कुछ नहीं है।
नीरव : अगर आपको कोई दिक्कत ना हो तो क्या मैं आपके साथ चल सकता हूँ? आपने मेरी जान बचाई है इसलिए अगर मैं आपके कोई काम आ सकूँ तो मुझे बहुत खुशी होगी।" नीरव की बातें सुनकर मेघना कुछ देर सोचने लगी तभी उसका ध्यान नीरव के पैर की तरफ गया,"ठीक है,वैसे भी पैर के इस दर्द के साथ आपका अकेले घर जाना ठीक नहीं,मेरे घर पर आपको कुछ दवाई भी लगा दूंगी।" आखिर में मेघना ने नीरव के साथ चलने पर सहमति दे दी पर चलने से पहले मेघना ने पेटीकोट को फाड़कर एक कपड़ा नीरव के पैर पर बंध दिया जिससे उसे चलने में आसानी हो।

नीरव से घर का पता पूछने पर उसने बताया कि उसका घर पास के स्टेशन की बस्ती के पास ही है। यह सुनकर नीरव को थोड़ी हैरानी हुई क्योंकि बस्ती का इलाका शहर से अलग पड़ता था इसलिए सब लोग समय के साथ एक-एक करके शहर के मुख्य विस्तार की तरफ रहने लगे थे और वो Area वीरान पड़ गया था ऐसे इलाके में एक औरत बच्चे के साथ अभी भी अकेली रहती है ये बात सोचने पर मजबूर कर देती है।मन में कई ख्याल घूमने की वजह से नीरव थोड़ा पीछे रह गया इसलिए मेघना ने पीछे मुड़कर कहा,"अरे क्या सोच रहे है? आप पक्का मेरे साथ चल पायेंगे?"
नीरव : अरे ऐसी कोई बात नहीं है,आप मेरी फिक्र मत कीजिए।

रेलवे स्टेशन से थोड़ी दूर चलकर,घनी झाड़ियों से गुज़रते हुए हम उस बस्ती में पहुँचे।अब हवा के साथ बारिश का ज़ोर धीरे-धीरे तेज़ होने लगा था जिससे हम दोनों भीगने लगे थे।बस्ती के बीच एक ऊबड़-खाबड़ पथरीली सड़क बनी हुई थी जिस पर हम दोनों चलते हुए आगे बढ़ रहे थे।
सड़क के दोनों तरफ़ टूटे-फूटे घरों की कतार लगी थी जिनकी दरारों में घास उगी हुई थी। घरों की दीवारों पर बनी तस्वीरें, दरवाज़े, टूटा हुआ फर्श और लकड़ी की खिड़कियां चमकती बिजली के साथ डरावनी आकृति बना रही थी,उनके बीच से गुज़रती हवा भी कर्कश आवाज़ पैदा करती थी जो दिल में एक अलग ही डर पैदा करता था। इस रात के अंधेरे में सभी घर काले लग रहे थे, जैसे कुदरत ने उनका रंग छीन लिया हो और वो भी उन्हें अपने अंदर समा लेना चाहती हो।

एक हल्की सी आहट भी उसके दिल को दहला देने का काम रही थी इसलिए नीरव ने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया और बस आगे देखकर चलने लगा।बस्ती से आगे बढ़कर हम दोनों अब कच्ची सड़क पर आ गए थे जिसके आसपास कई घने पेड़ थे जिससे उसके पत्तों पर गिरती पानी की बूंदों की आवाज गूंज उठती थी,वो दोनों घने पेड़ो के बीच से गुजरकर वो दोनों सुंदर दो मंजिला घर के सामने आकर खड़े हो गए।घर प्राकृतिक सुंदरता के साथ कलाकृति का उत्तम प्रतीक था,घर के बाहर एक छोटा बाग बना हुआ था जिसके दोनों तरफ सुंदर फूल और पौधें खिले हुए थे,उसके चारों ओर लकड़ी की बाड़ बनी हुई थी। घर के अंदर से आ रही पीली रोशनी उसे और भी सुंदर बना रही थी। मेघना ने दरवाज़ा खोला और एक रास्ते पर चलकर घर के मुख्य दरवाज़े के पास खड़ी हो गई। घर के बाहर एक बल्ब था जिससे हल्की रोशनी आ रही थी। मेघना ने ताला खोला और नीरव को देखा और दोनों घर के अंदर आ गए।

बाहर फिर हवा के साथ मुशलधार बारिश शुरू हो गई थी जिससे बारिश की बूँदें घर के दरवाज़े तक पहुँच रही थीं इसलिए दरवाज़ा बंध करने के लिए नीरव और मेघना दोनों ने एक साथ अपना हाथ आगे बढ़ाया और उसकी वजह से नीरव का हाथ उसके मुलायम हाथ को स्पर्श कर गया।नीरव ने अपना हाथ पीछे खींचा और दरवाजे से पीछे होकर नीरव के सामने आकर खड़ी हो गई,जिसे चेहरे को देखने के लिए नीरव कब से कोशिश कर रहा था वो उसके सामने था और इस चेहरे को देखकर जैसे उसका दिल एक पल के लिए धड़कना भूल गया हो क्योंकि मेघना उसके कल्पनाओं से भी अधिक सुंदर थी।

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रात के अंधेरे ने जिस बदन को अपने अंधकार से ढक रखा था उसे घर की रोशनी उजागर कर रही थी,रेशम सी लहराती लंबी जुल्फ़े,काजल के तिमिर (कालापन) समान काली आँखें,गुलाब की पंखुड़ियों के समान होठ जिसके पास एक छोटा सा तिल, जो सौंदर्य की इस मूरत को नज़र लगने से बचाने के लिए हो और सुबह की लालिमा जैसे उसके गाल।बारिश में भीगने की वजह से उसकी साड़ी उसके शरीर से चिपक गई थी जिसके नीचे से भीगे ब्लाउज से उसकी उरोज रेखा बाहर झांक रही थी और उसके दोनों निपल्स ब्लाउज से चिपक गए थे जो मेघना के उन्मादक स्तनों के आगाज कर रहे थे।हंस समान कमर के सौष्ठव (Curve) और पेट पर गहरा नाभि केन्द्र श्वेतशरीर को उसको अग्रता प्रदान कर रही थी।
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नीरव तो जैसे ऊपरवाले की इस मोहक रचना में मुग्ध हो गया था तभी भीगी साड़ी का पल्लू नीचे पेटीकोट ना पहनने की वजह से सरक गया जिससे जननांग बालों के साथ उसकी योनि मार्ग के दर्शन हो गए,चिकने रस से युक्त गुलाबी रंग से सज्ज वो काफी आकर्षक लग रहा था,अचानक हुई इस घटना से वो साड़ी को संभाल ना सकी और पूरी साड़ी जमीन पर गिर पड़ी,उसने लज्जा की वजह से दोनों हाथों से अपनी योनि को धक दिया और मुड़कर वो जल्दी से चलते हुए अंदर की तरफ जा रही थी पर भीगी साड़ी फर्श पर गिरने की वजह से पानी जमीन पर गिरा हुआ था जिसकी वजह से वो गिरने वाली थी पर नीरव ने उसके पीछे से पकड़ लिया।मेघना ने पाया की मर्द की दोनों बाहें उसके पेट से लिपटे हुए है इसके बारे में सोचकर उसका रोम-रोम खड़ा हो गया,नीरव ने एक हाथ मेघना की पीठ पर लाकर उसके ब्लाउज की डोर को खोलकर उतार दिया,अब वो पूरी तरह नग्न खड़ी थी तभी उसे अपनी गांड़ की दरार में लिंग का एहसास हुआ जो पेंट के अंदर था तभी नीरव की गहरी आवाज उसके कानों में पड़ी,"मेघना आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है मैं ऐसी कोई हरकत नहीं करूंगा जिससे आपकी मर्यादा को ठेस पहुंचे।" यह सुनकर वो तुरंत पीछे घूम गई और नीरव को देखने लगी,मेघना के दिल में नीरव प्रति सम्मान उमड़ आया जो एक नग्न स्त्री को सामने पाकर भी संयम के साथ खड़ा था।
"आप यहीं खड़े रहे मैं आपके लिए तौलिया लेकर आती हूँ" इतना कहकर वो अपने कमरे की ओर चली गई।
नीरव जाते हुए मेघना की मादक गांड़ देख रहा था जो एक लय के साथ हिल रही थी साथ ही उन दोनों के उभार से एक गहरी लकीर उत्पन्न होती थी,कमरे में जाने से पहले मेघना पीछे मुड़ी और एक मुस्कान देकर हॉल के पासवाले कमरे में चली गई।

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नीरव ने वह खड़े रहकर अपनी नजर घुमाई,घर छोटा था लेकिन अंदर से देखने में उतना ही आकर्षक था, बाहर के मुकाबले घर में अच्छी गर्मी थी जो अंदर से शरीर को राहत पहुंच रही थी, घर में फर्नीचर की भी अच्छी सुविधा थी,सब चीज़ें साफ और सुसज्जित तरीके से रखी हुई थी और इसके अलावा घर के अंदर की गई फूलों की सजावट उसका मुख्य आकर्षण का केन्द्र था जिसकी खुशबू पूरे घर में फैल रही थी, घर के बीच में ऊपर एक छोटा सा झूमर था जो अपनी पीली रोशनी बाहर तक बिखेर रहा था।नीरव घर की खूबसूरती को निहार रहा था उतने में मेघना नीरव के लिए तौलिया लेकर आ गई,नीरव ने देखा तो मेघना ने लाल साड़ी पहनी हुई थी पर उसने ब्लाउज या पेटीकोट के बिना उसे सिर्फ अपने बदन पर लपेटा हुआ था,उसने नीरव के हाथ में तौलिया दिया और अपने घटादार बालों को अपने साथ लाएं दूसरे तोलिए से पोछने लगी। अपने कंधो के भाग से उभरते स्तन के भाग कितने मनमोहक लग रहे थे,अपनी तरफ इस तरफ देखने की वजह से मेघना हल्का सा मुस्कुराई और बोली, "नीरव,आप तो पूरी तरह भीग गए हैं,मेरे पास अभी भी मेरे पति के कुछ कपड़े हैं और आपको देखकर लगता है कि वे आपको फिट आएंगे।" यह कहकर मेघना नीरव को अपने कमरे की तरफ ले गई।
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जब दोनों कमरे में पहुंचे तो एक मीठी खुशबू भी फैली हुई थी, मेघना ने अलमारी से एक सफ़ेद कुर्ता निकाला और नीरव के पास आकर उसके बदन से नापने लगी लेकिन नीरव तो अभी भी उसके देह उभरी के साथ खूबसूरत चेहरे में खोया हुआ था, जिसकी वजह से उनकी नज़रें मिलीं और मेघना ने शर्माकर अपनी नज़रें नीचे कर लीं। जब वे दोनों एक-दूसरे में खोए हुए थे तभी अचानक ज़ोर से बिजली कड़की और उसकी तेज़ आवाज़ शहर की शांत भूमि में फैल गई।अचानक हुई इस आवाज़ से मेघना डर गई और सीधे जाकर नीरव के सीने में छिप गई,मेघना की गर्म सांसे और उसके शरीर से आती भीनी खुशबू अपने अंदर महसूस कर सकता था,थोड़ी देर खड़े रहने के बाद वो नीरव से अलग हुई और दवाई लेकर कमरे से बाहर चली गई और नीरव ने पास पड़ा कुर्ता उठाया और अपने कपड़े बदलने चला गया।

कपड़े बदलने के बाद नीरव हॉल में आया जहाँ फ़र्श पर एक मुलायम चादर बिछी हुई थी। उसने खिड़की से बाहर देखा तो बरसात अभी भी गिर रही थी जिसे देखकर लग रहा था कि। आज यह पूरी रात नहीं थमेगी।बाहर से गिरती पानी की आवाज़ के अलावा घर में एकदम सन्नाटा छाया था।नीरव ने इधर-उधर देखा लेकिन मेघना के पति की एक भी फ़ोटो नहीं दिखी,यह देखकर वह थोड़ी देर के लिए सोच में पड़ गया लेकिन साथ ही उसका ध्यान गया कि मेघना भी दिखाई नहीं दे रही थी। आखिर में उसकी नज़र दूसरी मंज़िल की पर जानेवाली सीढ़ियों की तरफ गई इसलिए मेघना को ढूंढते हुए वो ऊपर वाली मंज़िल पर पहुँच गया।
जब उसने देखा तो ऊपर सिर्फ़ एक कमरा था लेकिन वह नीचे बने हुए दूसरे कमरों के मुकाबले काफी बड़ा था।इसके साथ ही उसने अंदर देखा तो कमरे के एक कोने में खिलौने पड़े थे जिसे देखकर लग रहा था कि यह कमरा मेघना के बेटे का होगा। उसकी नज़र बिस्तर पर पड़ी जहाँ चार साल का एक बच्चा आँखें बंद करके सो रहा था। मेघना ने उसे दवाई दी थी फिर भी उसका बुखार कम करने के लिए उसने बच्चे के सर पर ठंडे पानी का कपड़ा रख रही थी,वह हर मुमकिन कोशिश कर रही थी पर सर के तेज़ दर्द की वजह से बच्चे के कराहने की आवाज कमरे के बाहर तक सुनाई दे रही थी।

अपने बच्चे की हालत देखकर मेघना के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ़ दिख रही थीं। नीरव के दिल में उस बच्चे के लिए प्यार उमड़ आया और वो जल्दी से आगे बढ़कर बच्चे के पास बैठ गया।नीरव को अपने पास बैठा देखकर मेघना ने उम्मीद भरी नज़रों से उसकी तरफ देखा।बच्चे के शरीर का तापमान देखने के लिए जैसे ही नीरव ने बच्चे के सर पर स्पर्श किया उसने तुरंत अपना हाथ पीछे खींच लिया क्योंकि बच्चे के शरीर का तापमान दूसरों के शरीर के मुक़ाबले बहुत ज़्यादा था। उसने घबराई हुई आवाज़ में मेघना से कहा,"मेघना, तुम्हारे बेटे की तबीयत बहुत खराब है अगर उसे टाइम पर अस्पताल नहीं ले जाया गया तो उसकी तबीयत ओर बिगड़ जाएगी।" नीरव ने हक जताते हुए कहा।

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"नीरव, मैं आपकी बात समझ रही हूँ लेकिन इतनी रात में कोई हॉस्पिटल खुला नहीं है ऊपर से बाहर फिर से भारी बरसात भी शुरू हो गई है अगर हम उसे इस बारिश में बाहर ले गए तो मुझे डर है कि भीगने की वजह से इसकी हालत ओर खराब ना हो जाए।" मेघना की बातें सुनकर नीरव सोचने लगा क्योंकि उसकी बातें कुछ हद तक सच थी,इसके अलावा इस वीरान विस्तार में परिवहन का कोई साधन भी नहीं मिलता था।
हम दोनों अभी बात कर ही रहे थे कि बच्चे ने आँखें खोलीं और नीरव का हाथ पकड़कर बोला, "पापा......पापा आप आ गए!! मैं कितने दिनों से आप ही का इंतज़ार कर रहा था।" यह सुनकर नीरव ने बच्चे का मासूम चेहरा देखा और करुणा से अपना हाथ उसके सर पर रख दिया।

"बेटा आयुष, ये तुम्हारे पापा नहीं हैं आपको बुखार है ना इसीलिए यह अंकल हमारी मदद करने के लिए आए है।"

"नहीं,तुम्हारी आंखे खराब है इसीलिए तुम्हे ठीक से दिख नहीं रहा यह मेरे पापा है,वो हर रात वही कपड़े पहनते हैं, मेरे साथ खेलते हैं, मेरे साथ सोते हैं और मुझे हर दिन नई कहानियाँ सुनाते हैं" यह कहते हुए आयुष की आँखें थोड़ी नम हो गईं और उसने नीरव का हाथ कसकर पकड़ लिया।

नीरव की बच्चे की समझदारी और मासूमियत पर प्यार भर आया,मेघना कुछ कहने ही वाली थी कि उससे पहले नीरव ने मेघना का हाथ पकड़कर सिर हिलाकर बोलने से मना कर दिया क्योंकि नीरव को एहसास हो गया था कि बुखार ज्यादा बढ़ जाने की वजह से आयुष को पहचानने में गलती ही रही होगी और इस वक्त अगर उसकी भावनाओं को ज्यादा ठेस पहुंची तो उसकी हालत ओर खराब हो जाएगी।

"सॉरी बेटा आयुष, तुम्हें मेरी वजह से इतना इंतज़ार करना पड़ा लेकिन अब मैं आ गया हूँ ना तो तुम्हारे साथ रहूँगा और तुम्हें पता है कि हमारे शहर में मेला लगने वाला है, तुम जल्दी ठीक हो जाओ तो मैं, तुम और तुम्हारी मम्मी हम तीनों वहाँ घूमने जायेंगे।" इतना कहते हुए नीरव ने मेघना की तरफ देखा जैसे एक पति अपनी पत्नी को संबोधित कर रहा हो,इस बात पर मेघना ने अपनी आंखे शर्म से झुका ली।

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"सच में पापा?!! तब तो मैं कल ही ठीक हो जाऊंगा,आप वहां जाने के लिए तैयार रहना" नीरव की बातें सुनकर आयुष भी एक्साइटेड हो गया।
"हाँ, क्यों नहीं, हम वहां तुम्हारे लिए बहुत सारे नए खिलौने भी खरीदेंगे लेकिन ठीक होने के लिए तुम्हें मम्मी की बात मानकर टाइम पर दवाई लेनी होगी।"
"हाँ पापा, मैं उनकी हर बात मानूँगा लेकिन आप मेरे साथ रहोगे ना?मुझे फिर कहीं छोड़कर चले तो नहीं जाओगे ना?" इतना कहकर आयुष नीरव के गले से लिपट गया,एक पिता पुत्र के मिलन जैसे पितृवत्सल भावनाएं नीरव के दिल से छलक पड़ी और उसने आयुष को बाहों में समा लिया,मेघना भी आंखों में नमी के साथ चेहरे पर हल्की सी मुस्कान के साथ आयुष को देख रही थी क्योंकि बहुत दिनों बाद उसने आयुष को इतना खुश देखा था।

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कुछ देर आलिंगन में रहने के बाद नीरव ने आयुष को बेड पर लिटाया,तीनों को एक साथ देखकर ऐसा लग रहा था मानो एक परिवार पूरा हो गया हो,नीरव हल्के हाथों से उसका सर दबा रहा था ताकि उसे आराम मिले तभी आयुष ने मेघना की तरफ देखकर कहा,"मम्मी,मुझे पहले की तरह प्यार करते हुए सुलाओ ना" आयुष की इस बात पर मेघना झेप गई इसलिए थोड़ा हिचकाते हुए कहा,"नहीं.....आयु.....अभी नहीं....चलो सो जाओ......जल्दी.......बहुत रात हों गई है।"
"नहीं मुझे पहले की तरह आपकी गोद में सोना है।" आयुष की इस मांग पर मेघना शर्मा रही थी जिसकी वजह नीरव को समझ नहीं आ रही थी पर अपने मासूम बच्चे की जिद के आगे हार मानते हुए एक मां ने अपना फर्ज निभाया,मेघना ने आयुष को उठाकर गोद में सुलाया और बाई तरफ से अपना पल्लू उठाकर अपने स्तन को बाहर निकालकर आयुष के मुंह के पास रख दिया और वो मासूम सा बच्चा उसे अपने मुंह में भरकर मासूमियत के साथ चूसने लगा,एक मां अपनी संतान के लिए हर हद तक जा सकती है ये पल इस बात का उदाहरण था,नीरव यह देखकर बात समझ गया इसलिए तुरंत बेड से उठकर कमरे से बाहर की तरफ मूड गया तभी आयुष ने रुआंसे गले के साथ उसे पुकारा,"पापा,आप कहां जा रहे हो,मेरे पास आओ ना" आयुष की यह बात सुनकर नीरव असमंजस में पड़ गया,उसके सामने धर्म संकट जैसी स्थिति थी क्योंकि एक तरफ स्त्री सहज की मर्यादा थी और दूसरी ओर मासूम बच्चे की जिद।

मन की इस स्थिति को जैसे मेघना समझ गई हो उसने मधुर आवाज के साथ नीरव को पुकारा,"सुनिए,रुक जाइए......मुझे कोई आपत्ति नहीं है।" यह वाक्य सुनकर नीरव हैरानी से उसे देखने लगा जो अपनी नजरे चुराकर अपने बेटे को देख रही थी,नीरव चलते हुए मेघना से थोड़ी दूर बगल में जाकर बैठ गया, मेघना ने पल्लू की मदद से अपने स्तनों को ढंका हुआ था पर बार-बार हिलने की वजह से वो सरक जाता था इसलिए उसने ना चाहते हुए एक तरफ से नीचे की तरफ गिरा दिया जिससे नीरव की आंखों के सामने मांसल,गोल सुड़ोलाकार श्वेत रंग का स्तन था जिसके भूरे निप्पल को आयुष मुंह में भरकर चूस रहा था उसने बीच में रुकते हुए कहा,"पापा मेरे पास बैठिए ना"
आयुष की बात सुनकर मैं उसके बिलकुल पास मेघना से सरकार बैठ गया,मेरे इतने पास होने की वजह से उसके गर्म जिस्म की महक महसूस कर सकता था, नीरव आयुष के सर को सहलाने के लिए अपना हाथ बढ़ाया जिसे आयुष ने कसकर पकड़ लिया जिससे नीरव की ठंडी उंगलियों का स्पर्श मेघना को अपने स्तन पर मेहसूस हो रहा था और उसके हर स्पर्श से वो सिहर उठती थी,मेघना के पल्लू का दूसरा भाग एक तरफ से आयुष के मुंह पर आकर दिक्कत दे रहा था।
यह देखकर नीरव ने हल्के से अपना हाथ मेघना के कंधे पर रखा और नीचे की तरफ उतारकर मेघना के पूरे सीने को खुला कर दिया था जिससे उसके दोनों स्तनों की मृदुमय स्थितिस्थापकता सामने से उभरकर आई, शरीर के दो नाज़ुक रचना पर भूरे निप्पल क्या गजब ढा रहे थे, मेघना ने देखा को नीरव उसके स्तनों को देख रहा है जिससे उसकी सांसे गहरी हो गई और इसका असर उसके उभारों पर हुआ जिसका आकर बढ़ने के साथ आक्रामक हो गया।

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आयुष स्तन चूसते हुए ज्यादा पैर हिला रहा था जिससे उसके नन्हे पैर उसके दूसरे उरोज से टकरा रहे थे। मेघना ने उसे समझाया पर उसके ध्यान नहीं दिया इसीलिए नीरव ने अपना हाथ हल्के से उसके स्तन पर रख दिया,हाथ में थामते ही नीरव को रेशम से मुलायम बदन पर कोई रुई सी कोमल चीज़ अपने हाथों में भर ली हो ऐसा एहसास होने लगा,यह वास्तविकता है या कोई भ्रम यह जानने के लिए वो बड़े प्यार के साथ उसे दबाने लगा,मर्द के फौलादी हाथ का एहसास होते ही मेघना आहें भरने लगी।जब दोनों की नजरे मिली तो नीरव ने देखा उसकी आंखों में लालसा भरी हुई थी जो पूर्ण सहवास के लिए तरस रही थी,कुछ देर स्तन को मसलने के बाद नीरव ने देखा की स्तनपान का गर्म एहसास लेने के बाद आयुष सो गया है।जिससे दूसरे उरोज को भी उसने अपने हाथ में भर लिया अब नीरव पीछे से उन दोनों उभारों को निचोड़ने में लगा था, मेघना आंखे बंध करके इस आनंद की अनुभूति कर रही थी,"आआहहहह्........हहमममम्म्म्..........ऐसे ही करिए.........ऊउम्म्हहह्........."
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मेघना के सभी बाल पीछे होने की वजह से नीरव ने उसकी सुडौल गर्दन अपने होठ रख दिए,मेघना के जिस्म की गर्माहट, नर्माश और उसके नमकीन पसीने का स्वाद अपने मुंह से लेना चाहता था।कुछ पल तक चलती शरीर की इस गर्मा-गर्मी की वजह से मेघना ने अपना रस छोड़ दिया और अपने मुंह पर हाथ देकर अपनी आवाज को रोकने लगी जिससे आयुष उठ ना जाए।
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मेघना ने उसे बेड पर लिटाया,बदन के निचले हिस्से पर दो उंगलियों घुमाया तो एक चिकनापन अनुभव हुआ,उसने पीछे देखा तो नीरव उसकी तरफ ही देख रहा था इसलिए उसने उंगलियां उसके मुंह में भर दी जिसे वो बड़े चाव के साथ चूस गया,इतना होते ही उसने अपने कपड़े ठीक करके दरवाजे के पास खड़ी हो गई,उसके उठते मैने देखा वहां काफी मात्रा में श्वेत रंग का गाढ़ा रस गिरा हुआ है जिसे मैंने जीभ की मदद से मुंह में भर लिया,उसकी गर्म ऊर्जा मुझे अंदर तक महसूस होने लगी,मेरी इस हरकत पर मेघना ने देखा और मुस्कराकर बाहर चली गई।
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नीरव ने आयुष को स्पर्श करके देखा तो उसका बुखार थोड़ा बहुत कम हो गया था। अपनो का प्यार और अपनापन हर बीमारी में दवा की तरह काम करता है यह बात इस नन्ही जान को देखकर सही लगती है। उसने आयुष के बदन को चादर ओढ़ा दी और दबे कदमों के साथ कमरे के बाहर चला गया। जब नीरव नीचे आया तो देखा मेघना बाहर हॉल में ही बैठी हुई थी। नीरव के कदमों की आवाज़ सुनकर उसने ऊपर देखा।

नीरव नीचे हॉल में मेघना के पास आकर बैठ गया,कुछ देर पहले बिताए लम्हों की वजह से कोई कुछ नहीं बोल रहा था फिर कुछ सोचते हुए नीरव ने पूछा,"वैसे तुम्हारे पति को क्या कोई बीमारी थी जिसकी वजह से तुम्हारे परिवार के साथ यह घटना हो गई।"
मेघना ने नीरव की तरफ देखते हुए कहा,"बीमारी तो नहीं पर शायद किसी की बुरी नजर ही समझो जिसने हमारी खुशियों को छीन लिया,आम लोगों की तरह हमने भी यहां हमारी छोटी सी दुनिया बसाई थी आयुष के पापा एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में काम करते थे इसलिए उन्हें अक्सर काम की वजह से शहर से बाहर जाना पड़ता था लेकिन एक रात घर लौटते समय दुर्घटना में उनकी मौत हो गई। इसका आयुष के मन पर बहुत बुरा असर पड़ा। वह हमेशा अपने पापा को याद करते हुए अकेले बैठे रहता, किसी से बात नहीं करता,अचानक रात में उठकर रोने लगता, जिससे बीतते दिनों के साथ उसकी तबीयत खराब होने लगी।" यह कहते हुए मेघना की आँखों से आँसू बह निकले।
"माफ़ करो, मुझे आपसे यह सवाल नहीं पूछना चाहिए था।"
"नहीं इसमें आपकी कोई गलती नहीं है अब होनी को कौन टाल सकता है।" उसके बाद मेघना ने अपने आंसू पोछते हुए कहा,"आपने कहा था कि आप मेरा एहसान कभी नहीं चुका पाओगे, लेकिन आज आपने आयुष के चेहरे पर मुस्कान लाकर मुझे अपना ऋणी बना दिया है।"उसके बाद मेघना ने नजरे चुराते हुए कहा,"दरअसल आयुष पहले सोता नहीं था तो मैं उसे स्तनपान का सहारा लेती थी,बेशक अब इसमें दूध नहीं आता पर वो शांत होकर सो जाता था।" इस बात पर नीरव ने सिर्फ हां में सर हिलाया।

"बच्चों का मन और दिल साफ़ होता है इसलिए वो आसानी से दूसरों से भावनाओं के बंधन से जुड़ जाते हैं। अगर मेरी वजह से उसके चेहरे पर मुस्कान आई है तो मैं खुदको खुशनसीब मानता हूँ," नीरव ने मेघना के पास बैठते हुए कहा। नीरव की यह विवेकपूर्ण बातें सुनकर वह उसको निहारती रही।आखिरकार मेघना ने चुप्पी तोड़ी और कहा,"अरे, अपने मेरी इतनी मदद की पर मैंने आपसे चाय या नाश्ते के लिए भी नहीं पूछा।आप यहां बैठो, मैं थोड़ी देर में आ रही हूँ।" इतना कहकर वह किचन की तरफ बढ़ी पर तभी अचानक नीरव की नज़र उसके पैरों पर पड़ी,जहां उसने कदम रखे थे वहां खून से सने लाल निशान बनते जा रहे थे यह देखकर नीरव का दिल दहल उठा।




आगे के अपडेट्स में कहानी जारी रहेगी तब तक यह अपडेट कैसा लगा यह Comment करके बताना न भूले।

Bahut hi gazab ki update he p696r Bro,

Meghna.............ek khatarnak aur bhayanak paheli si lag rahi thi pehle to.........

Lekin update ke shuruwati hisso me ek massom si aurat lagi............

Ab jab nirav ne uske khoon se sane pair dekhe to kahani ka rukh hi palat gaya.........

Agle update ki pratiksha rahegi Bro
 
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