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Incest भाँजा लगाए तेल, मौसी करे खेल (Completed)

vakharia

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Bhaut hi behtarin shuruat ki hai mitr … jabardast kamukta se bharpur ….

Waiting for next update….
Thanks bhai... Will update soon...
 

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दूसरे ही दिन मैं नासिक के लिये रवाना हो गया. मौसी एक छोटे खूबसूरत बंगले में रहती थी. जब मैं मौसी के घर पहुंचा तो अजय अंकल बाहर जाने की तैयारी कर रहे थे. अजय अंकल, मेरे मौसाजी असल में मौसी से चार पाँच साल छोटे थे. दोनों का प्रेम विवाह हुआ था. मौसी को कोई संतान नहीं हुई थी पर फ़िर भी वे दोनों खुश नजर आते थे.

अजय मौसाजी एक बड़े आकर्षक मजबूत पर छरहरे गठीले बदन के नौजवान थे और काफ़ी हेंडसम थे. उन्हों ने मेरा बड़े प्यार से स्वागत किया और बोले कि मैं एकदम ठीक समय पर आया हूँ क्यों की उन्हें कुछ दिनों के लिये बाहर दौरे पर जाना था. "तेरी मौसी का दिल लगा रहेगा." उन्हों ने कहा.

मैंने नहा धोकर आराम किया. मौसाजी शाम को निकल गये और मैं और मौसी ही घर में बचे.

दरवाजा लगाकर मौसी ने अपनी बाँहें पसार कर मुझे पास बुलाया. "विजय, इधर आ, एक चुंबन दे जल्दी से बेटे, कब से तरस रही हूँ तेरे लिये." मैं दौड कर मौसी से लिपट गया और उसने मेरा खूब देर तक गहरा उत्तेजना पूर्ण चुंबन लिया. मैं तो अब उसपर चढ़ जाना चाहता था पर मौसी ने कहा कि अभी जल्दी करना ठीक नहीं, लोग घर आते जाते रहते हैं. और अब तो सारी रात और आगे के दिन पड़े थे मजा लूटने के लिये.


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आज मौसी एक पारदर्शक काले शिफॉन की साड़ी और बारीक पतला ब्लाउज़ पहने थी, जैसे अपने पति को रिझा रही हो. ब्लाउज़ में से सफ़ेद ब्रेसियर के पट्टे साफ़ दिख रहे थे. खाना खाते खाते ही मेरा बुरा हाल हो गया. मौसी मेरी इस हालत पर हंसने लगी और मुझे प्यार से चिढ़ाने लगी. खाना समाप्त होने पर मुझे जाकर उसके बेडरूम में इंतज़ार करने को कहा. "तू चल और तैयार रह अपनी मौसी के स्वागत के लिये. तब तक मैं साफ़ सफ़ाई करके और दरवाजे लगाकर आते हूँ". मैं मौसी के बड़े डबल बेड पर जाकर बैठ गया. मेरा लंड अब तक तन्ना कर पूरा खड़ा हो गया था.

आधे घंटे बाद मौसी आई. उसने दरवाजा बंद किया और पेन्ट में से मेरे खड़े लंड के उभार को देखकर मुस्कराते हुए बोली. "अरे मूरख, अभी तक नंगा नहीं हुआ? क्या अब बच्चों जैसे तेरे कपड़े मैं उतारूँ?" पास आकर उसने मेरे कपड़े खींच कर उतार दिये और मुझे नंगा कर दिया. मेरे साढ़े पाँच इंच के गोरे कमसिन शिश्न को उसने हाथ में लेकर दबाया और बोली.

"बडा प्यारा है रे, गन्ने जैसा रसीला दिखता है, चूस कर देखती हूँ कि रस कैसा है."

मेरे कुछ कहने के पहले ही मौसी मेरे सामने घुटने टेक कर बैठ गई और मेरे लंड को चूमने और चाटने लगी. उसकी गुलाबी जीभ का मेरे सुपाड़े पर स्पर्श होते ही मेरे मुंह से एक सिसकारी निकल गई.

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"प्रिया मौसी, अब बंद करो नहीं तो आपके मुंह में ही झड जाऊंगा."

मुस्करा कर वह बोली कि यही तो वह चाहती थी. फ़िर और समय न बरबाद करके मेरे पूरे शिश्न को मुंह में ले कर वह गन्ने जैसा चूसने लगी. मौसी के मुंह और जीभ का स्पर्श इतना सुहाना था कि मैं ’ओह मेरी प्यारी प्रिया मौसी’ चिल्लाकर झड गया. मौसी ने बड़े मजे ले ले कर मेरा वीर्य निगला और चूस चूस कर आखरी बूंद तक उसमें से निकाल ली.

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मुझे बडा बुरा लग रहा था कि मुझे तो मजा आ गया पर बिचारी मौसी की मैंने कोई सेवा नहीं की. मेरा उतरा चेहरा देखकर मौसी ने प्यार से मेरे बाल बिखराकर कहा कि जानबूझकर उसने मेरा लंड चूस लिया था. एक तो वह मेरी जवान गाढ़ी मलाई की भूखी थी, दूसरे यह कि उसे मालूम था कि अब एक बार झड जाने पर मैं अब काफ़ी देर लंड खड़ा रखूँगा जिससे उसे मेरे साथ तरह तरह की काम क्रीडा करने का मौका मिलेगा.

मैंने मौसी को लिपटकर वादा किया कि अब मैं तब तक नहीं झड़ूँगा जब तक वह इजाजत न दे. खुश होकर प्रिया मौसी ने मुझे सोफ़े में धकेल कर बिठा दिया और बोली.

"अब चुप-चाप बैठ और देख, तुझे स्ट्रिपटीज़ दिखाती हूँ! देखी है कभी?" मैंने कहा कि एक मित्र के यहाँ वीडीओ पर देखी थी.

मौसी कपड़े निकालने लगी और मैं मंत्रमुग्ध होकर उसके मादक शरीर को देखता रह गया. मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि मेरी सगी मौसी, मेरी माँ की छोटी बहन, मेरे साथ संभोग करने जा रही है. साड़ी और पेटीकोट निकालने में ही मौसी ने पाँच मिनिट लगा दिये. साड़ी को फ़ोल्ड किया और अल्मारी में रखा. उसके पतले ब्लाउज में से उसके भरे पूरे उन्नत उरोजों की झलक मुझे पागल कर रही थी. फ़िर उसने ब्लाउज़ भी निकाल दिया.

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अब मौसी के गोरे गदराये हुए शरीर पर सिर्फ़ ब्रा और पेन्टी बचे थे. उस अर्धनग्न अवस्था में वह इतनी मादक लग रही थी कि मुझे ऐसा लगने लगा कि अभी उस पर चढ़ जाऊँ और चोद डालूँ. मुझे रिझाते हुए प्रिया मौसी ने रंडीयों जैसी भाषा में पूछा. "क्यों मेरे लाडले, पहले ऊपर का माल दिखाऊँ या नीचे का?" प्रिया मौसी के माँसल स्तन उसकी ब्रा एक कपों में से मचल कर बाहर आने को कर रहे थे और पेन्टी में से मौसी की फ़ूली फ़ूली बुर का उभार और बीच की पट्टी के दोनों ओर से झांट के कुछ काले बाल निकले हुए दिख रहे थे. उन दोनों मस्त चीजों में से क्या पसंद करूँ यही मुझे समझ में नहीं आ रहा था इसलिये मैं भूखी ललचाई नज़रों से मौसी के माल को तकता हुआ चुप रहा.

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मौसी कुछ देर मेरी इस दशा को मजे ले लेकर कनखियोम से देखती रही और फ़िर मुझ पर तरस खा कर बोली. "चल पूरी नंगी हो जाती हूँ तेरे लिये." और ऐसा कहते हुए अपने उसने ब्रा के हूक खोले और हाथ ऊपर कर के ब्रेसियर निकाल दी. फ़िर पेन्टी उतार कर मादरजात नंगी मेरे सामने बड़े गर्व से खड़ी हो गयी.

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प्रिया मौसी मेकअप या किसी भी तरह के सौन्दर्य प्रसाधन में बिल्कुल विश्वास नहीं करती थी. इसलिये उसकी काँखों में घने काले बाल थे जो ब्रा निकालते समय उठी बाहों के कारण साफ़ मुझे दिखे. मौसी हमेशा स्लीवलेस ब्लाउज़ पहनती थी और बचपन से मैं उसके यह काँख के बाल देखता आया था. छोटी उमर में मुझे वे बड़े अजीब लगते थे पर आज इस मस्त माहौल में तो मेरा मन हुआ कि सीधे उसकी काँखों में मुंह डाल दूँ और चूस लूँ.

नग्न होकर मौसी मुस्कराती हुई जान बूझकर कमर लचकाती हुई एक कैबरे डांसर की मादक चाल से मेरी ओर बढ़ी. उसके मांसल भरे पूरे जरा से लटके उरोज रबर की बड़ी गेंदों जैसे उछल रही थे. निप्पल गहरे भूरे रंग के थे, बड़े मूंगफली के दानों जैसे और उनके चारों ओर तीन चार इंच का भूरा गोल अरोल था. मौसी की फ़ूली गुदाज बुर घनी काली झांटों से आच्छादित थी; ऐसा लगता था कि मौसी ने कभी झांटें नहीं काटी होंगी. कूल्हे काफ़ी चौड़े थे और जांघें तो केले के पेड के तनों जैसी मोटी मोटी थीं. मेरा लंड अब मौसी के इस मस्त जोबन से तन्नाकर फ़िर से जोर से खड़ा हो गया था और मौसी उसे देखकर बड़े प्यार से मुस्कराने लगी. उसे भी बडा गर्व लगा होगा कि एक छोटा कमसिन छोकरा उसकी अधेड उम्र के बावजूद उसपर इतना फ़िदा था और वह भी उसकी सगी बड़ी बहन का बेटा!

मेरे पास बैठकर मुझे पास खींचकर मौसी ने मेरी इच्छा पूछी कि मैं पहले उसके साथ क्या करना चाहता हूँ. अब मैं कई मायनों में अभी भी बच्चा था और बच्चों का स्वाभाविक आकर्षण तो माँ के स्तनों की ओर होता है. इसलिये मैं इन बड़े बड़े उरोजों को ताकता हुआ बोला. "मौसी, तेरे मम्मे चूसने दे ना, दबाने का मन भी हो रहा है."

मौसी ने मुझे गोद में खींच लिया और एक चूचुक मेरे मुंह में घुसेड़ दिया. मैं उस मूंगफली से लंबे निप्पल को चूसने लगा. चूसते चूसते मैंने मौसी की चूची दोनों हाथों में पकड ली और दबाने लगा. मौसी थोड़ी कराही और उसका निप्पल खजूर सा कडा हो गया. अब मैं दूध पीते बच्चे जैसा मौसी का मम्मा दबा दबा कर बुरी तरह से चूस रहा था. मेरा लंड पूरा खड़ा होकर मौसी के पेट के मुलायम माँस में गडा हुआ था. उसे मैं मस्ती में आगे पीछे होता हुआ मौसी के पेट पर ही रगडने लगा.

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कमरे में एक बड़ी मादक सुगंध भर गयी थी. जब मैंने मौसी को कहा कि उसके बदन से इतनी मस्त खुशबू कैसे आ रही है,तो उसने बताया कि वह असल में उसके चूत से निकल रहे पानी की गंध थी क्यों की मौसी की बुर अब पूरी गरम हो चुकी थी. मौसी मुझे चूमते हुए बोली. "देख मेरी चूत कितनी गीली हो कर चू रही है. तेरे मौसाजी होते तो अब तक इसपर मुंह लगाकर चूस रहे होते. वे तो दीवाने हैं मेरी बुर के रस के. तू भी इसे चखेगा बेटे?".

मैं तो मौसी की चूत पास से देखने को आतुर था ही, झट से मुंडी हिलाकर मौसी के सामने फ़र्श पर बैठ गया. मौसी टिक कर आराम से बैठ गई और अपनी जांघें फ़ैला कर मुझे उनके बीच खींच लिया.

पहले मैंने मौसी की नरम नरम चिकनी जांघों को चूमा और फ़िर उसकी चूत पर नजर जमाई. औरत के गुप्तांग का यह मेरा पहला दर्शन था और मौसी की उस रसीली बुर को मैं गौर से ऐसे देखने लगा जैसे देवी का दर्शन कर रहा हूँ. बड़े बड़े गुलाबी मुलायम भगोष्ठ, उनके बीच गीला चूता हुआ लाल गुलबी छेद और जरा से मटर के दाने जैसा क्लिटोरिस. यह सब मैं इस लिये देख पाया क्यों की मौसी ने अपनी उंगलियों से अपनी झांटें बाजू में की हुई थीं. मैं उस माल पर टूट पड़ा और जैसा मुंह में आया वैसा चाटने और चूसने लगा. मौसी ने कुछ देर तो मुझे मनमानी करने दी पर फ़िर प्यार से चूत चाटने का ठीक तरीका सिखाया.

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"ऐसे नहीं बेटे, जीभ से चाट चाट कर चूसो. झांटें बाजू में करो और जीभ अंदर डालो. फ़िर जीभ का चम्मच बनाकर अंदर बाहर करते हुए रस निकालो. हाँ ऐसे ही मेरी जान, अब जरा मेरे दाने को जीभ से गुदगुदाओ, हा य य य, बहुत अच्छे मेरे ला ऽ ल! बस ऐसा ही करता रह, देख तुझे कितना रस पिलाती हूँ"

मौसी ने जल्द ही मुझे एक्स्पर्ट जैसा सिखा दिया. मैंने मुंह से उसकी चूत पर ऐसा कर्म किया कि वह पाँच मिनट में स्खलित हो गई और मेरे मुंह को अपनी बुर के पानी से भर दिया. बुर का रस थोडा कसैला और खारा था पर बिल्कुल पिघले घी जैसा चिपचिपा. मैंने उसे पूरा मन लगाकर चाट लिया. तब तक मौसी मेरे चेहरे को अपनी चूत पर दबा कर हौले हौले धक्के मारती रही.

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Raja1239

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जब मेरा यौन जीवन शुरू हुआ तब मैं एक अठारह साल का किशोर था. और वह भी मेरी सगी मौसी के साथ. अब मैं एक बड़ी कंपनी में ऊंचे ओहदे पर हूँ और हर तरह का मनचाहा संभोग कर सकने की स्थिति में हूँ. मुझ में सेक्स के प्रति इतनी आस्था और चाहत जगाने का श्रेय मेरी प्यारी प्रिया मौसी को जाता है और बाद में यह मीठी आग हमारे पूरे परिवार में लगी उसका कारण भी प्रिया मौसी से सेक्स के बाद मैं ही बना.

अपने बारे में कुछ बता दूँ. मैं बचपन में एक दुबला पतला, छरहरा, गोरा चिकना किशोर था. मेरे गोरे चिकने छरहरे रूप को देख कर सभी यह कहते कि गलती से लड़का बन गया, इसे तो लड़की होना चाहिये था!

मुझे बाद में मौसी ने बताया कि मैं ऐसा प्यारा लगता था कि किसी को भी मुझे बाँहों में भर कर चूम लेने की इच्छा होती थी. खास कर औरतों को. इसीलिये शायद मेरे रिश्ते की सब बड़ी औरतें मुझे देखकर ही बड़ी ममता से मुझे पास लेकर अक्सर प्यार से बाँहों में ले ले ती थीं. मुझे तो इस की आदत हो गयी थी. बाद में मौसी से यह भी पता चला कि सिर्फ़ ममता ही नहीं, कुछ वासना का भी उसमें पुट था.

मेरी माँ की छोटी बहन प्रिया मौसी मुझे बचपन से बहुत अच्छी लगती थी. माँ के बजाय मैं उसी से लिपटा रहता था. उसकी शादी के बाद मिलना कम हो गया था. बस साल में एक दो बार मिलते. पर यह बचपन का प्यार बिलकुल भोला भाला था. मौसी थी भी खूबसूरत. गोरी और ऊंची पूरी, काली कजरारी आँखें, लम्बे बाल जिन्हें वह अक्सर उस समय के फ़ैशन में याने दो वेणियो में गूँथती थी, और एक स्वस्थ कसा शरीर.

अब मैं किशोर हो गया था तो स्त्रियो के प्रति मेरा आकर्षण जाग उठा था. खास कर उम्र में बड़ी नारियों के प्रति. मेरी कुछ टीचर्स और कुछ मित्रों की माँओ के प्रति मैं अब बहुत आकर्षित होने लगा था. अकेले में उनके सपने देखते हुए हस्तमैथुन करने की भी आदत लग गयी थी. प्रिया मौसी के प्रति मेरा यौन आकर्षण अचानक पैदा हुआ.

एक शादी के लिये सारे रिश्तेदार जमा हुए थे. सिर्फ़ अजय अंकल, प्रिया मौसी के पति, मेरे मौसाजी, नहीं आये थे. प्रिया मौसी से एक साल बाद मिल रहा था. वे अब अडतीस उन्तालीस साल की थीं और उसी उम्र के औरतें मुझे अब बहुत अच्छी लगती थीं. शादी के हॉल में बड़ी भीड थी और कपड़े बदलने के लिये एक ही कमरा था. जल्दी तैयार होकर सब चले गये और सिर्फ़ मैं और प्रिया मौसी बचे.

प्रिया मौसी सिर्फ़ पेटीकोट और ब्रा पहने टोवेल लपेटकर बाथरूम में से बाहर आई. मुझे तो वह बेटे जैसा मानती थी इसलिये बेझिझक टोवेल निकालकर कपड़े पहनने लगी. मैंने जब काली ब्रा में लिपटे उनके फ़ूले उरोज और नंगी चिकनी पीठ देखी तो सहसा मुझे महसूस हुआ कि चालीस के करीब की उम्र के बावजूद मौसी बड़ी आकर्षक और जवान लगती थी. टाइट ब्रा के पट्टे उनके गोरे माँसल बदन में चुभ रहे थे और उनके दोनों ओर का माँस बड़े आकर्षक ढंग से फ़ूल गया था.

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मेरे देखने का ढंग ही उसकी इस मादक सुंदरता से बदल गया और सहसा मैंने महसूस किया कि मेरा लंड खड़ा हो गया है. झेंप कर मैं मुड गया जिससे मेरी पेन्ट में से मौसी को लंड का उभार न दिख जाए. मैं भी तैयार हुआ और हम शादी के मंडप की ओर चले.

इसके बाद उन दो दिनों में मैं छुप छुप कर मौसी को घूरता और अपने लंड को सहलाता हुआ उसके शरीर के बारे में सोचता. रात को मैंने हॉल में सोते समय चादर ओढ. कर मौसी के नग्न शरीर की कल्पना करते हुए पहली बार मुठ्ठ मारी. मुझे लगा कि उसे मेरी इस वासना के बारे में पता नहीं चलेगा पर बाद में पता चला कि मौसी ने उसी दिन सब भांप लिया था और इसलिये बाद में खुद ही पहल करके मुझे प्रोत्साहित किया. वह भी मेरी तरफ़ बहुत आकर्षित थी.

शादी के बाद भी रिश्तेदारों की बहुत भीड थी जो अब हमारे घर में आ गयी. सोने का इंतेजाम करना मुश्किल हो गया. एक बिस्तर पर दो को सोना पड़ा. मौसी ने प्यार से कहा कि मैं उसके पास सो जाऊँ. मेरा दिल धडकने लगा. थोड़ा डर भी लगा कि मौसी के पास सोने से उसे मेरे नाजायज आकर्षण के बारे में पता तो नहीं चलेगा.

पर मैं इतना थका हुआ था कि दस बजे ही मच्छरदानी लगाकर रजाई लेकर सो गया. पास ही एक दूसरे पलंग पर भी दो संबंधी सो रहे थे. मौसी आधी रात के बाद गप्पें खतम होने के बाद आई और रजाई में मेरे साथ घुस गई. मच्छरदानी लगी होने से अंधेरे में किसी को कुछ दिखने वाला नहीं था और मौसी ने इस मौके का फ़ायदा उठा लिया.

किसी के स्पर्श से मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि मौसी ने प्यार से मुझे बाँहों में समेट लिया है. पास से उसके जिस्म की खुशबू और नरम नरम उरोजों के दबाव से मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया. मैंने घबराकर अपने आप को छुड़ाने का प्रयास किया कि करवट बदल लूँ; कहीं पोल न खुल जाए.

पर मौसी भी बड़ी चालू निकली. मेरे खड़े लंड का दबाव अपने शरीर पर महसूस करके उसने मुझे और जोर से भींच लिया और एक टांग उठाकर मेरे शरीर पर रख दी. रजाई पूरी ओढ. ली और फ़िर कान में फ़ुसफ़ुसा कर बोली. "विजय, तू इतना बदमाश होगा मुझे पता नहीं था, अपनी सगी मौसी को देख कर ही एक्साइट हो गया? परसों से देख रही हूँ कि तू मेरी ओर घूर घूर कर देखता रहता है! और यह तेरा शिश्न देख कैसा खड़ा है!"

मैं घबरा कर बोला. "सॉरी मौसी, अब नहीं करूंगा. पर तुम इतनी सुंदर दिखती हो, मेरा बस नहीं रहा अपने आप पर." मेरे आश्चर्य और खुशी का ठिकाना न रहा जब वह प्यार से बोली. "अरे इसमें सॉरी की क्या बात है? इस उम्र में भी मैं तेरे जैसे जवान लडके को इतनी भा गई, मुझे बहुत अच्छा लगा. और तू भी कुछ कम नहीं है. बहुत प्यारा है."

और मौसी ने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिये और मुझे चूमने लगी. उसके मुंह का स्वाद इतना मीठा और नशीला था कि मैं होश खो बैठा और उसे बतहाशा चूमने लगा. चूमते चूमते मौसी ने अपना ब्लाउज़ उतार दिया. मेरा चुम्मा लेते लेते अब मौसी अपनी ब्रा के हुक खोल रही थी. चुंबन तोड कर उसने मेरे सिर को झुका कर अपनी छातियों में दबा लिया. दो मोटे मोटे कोमल मम्मे मेरे चेहरे पर आ टिके और दो कड़े खजूर मेरे गालों में गडने लगे. मैं समझ गया कि ये मौसी के निप्पल हैं और मुंह खोल कर मैंने एक निप्पल मुंह में ले लिया और बच्चे जैसा चूसने लगा.

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मौसी मस्ती से आहें भरने लगी और मुझे डर लगा कि कहीं कोई सुन न ले पर रजाई से पूरा ढका होने से कोई आवाज बाहर नहीं जा रही थी. मौसी अब बहुत कामुक हो गयी थी और उसे अपनी वासनापूर्ति के सिवाय कुछ नहीं सूझ रहा था इसलिये उसने फ़टाफ़ट मेरे पायजामे से मेरा लंड निकाल लिया. मौसी के कोमल हाथ का स्पर्श होते ही मुझे लगा कि मैं झड जाऊंगा पर किसी तरह मैंने अपने आप को संभाला.

मौसी अपने दूसरे हाथ से कुछ कर रही थी जो अंधेरे में दिख नही रहा था. बाद में मैं समझ गया कि वह अपनी चड्डी उतार रही थी. अपनी टांगें खोल कर मौसी ने मेरा लंड अपनी तपी हुई गीली चूत में घुसेड़ लिया. उसकी बुर इतनी गीली थी कि बिना किसी रुकावट के मेरा पूरा शिश्न उसमें एक बार में ही समा गया. प्रिया मौसी ने अपनी टांगों के बीच मेरे बदन को जकड लिया था. फ़िर एकाएक पलट कर उसने मुझे नीचे किया और मेरे ऊपर लेट गई. उसका निप्पल मेरे मुंह में था ही, अब उसने और जोर लगा कर आधी चूची मेरे मुंह में ठूंस दी और फ़िर मुझे चुपचाप बिना कोई आवाज निकाले चोदने लगी. पलंग अब हौले हौले चरमराने लगा पर उसकी परवाह न किये हुए मौसी मुझे मस्ती से चोदती रही.

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मैं मौसी के बदन के नीचे पूरा दबा हुआ था पर उस नरम तपे चिकने बदन के वजन का मुझे कोई गिला नहीं था. इस पहली मीठी चुपचाप अंधेरे में की जारी चुदाई से मेरा लंड इस कदर मचला कि मैं दो मिनट की चुदाई में ही झड गया. मुंह में मौसी का स्तन भरा होने से मेरी किलकारी नहीं निकली, सिर्फ़ गोम्गिया कर रह गया. मौसी समझ गई कि मैं झड गया हूँ पर बिना ध्यान दिये वह मुझे चोदती रही जैसे उसे कोई फ़रक न पडता हो.

झड कर भी मेरा लंड खड़ा रहा, मेरी कमसिन जवानी का यह जोश था. मौसी को यह मालूम था और उसकी चूत अभी भी प्यासी थी. उसकी सांस अब जोर से चल रही थी और वह बड़ी मस्ती से मुझे खिलौने के गुड्डे की तरह चोद रही थी. पाँच मिनट में मेरा लंड मौसी की चूत के घर्षण से फ़िर तन कर खड़ा हो गया था. इस बार मैंने अपने आप पर काबू रखा और तब तक अपने लंड को झडने नहीं दिया जब तक एक दबी सिसकारी छोड कर मौसी स्खलित नहीं हो गई.

मौसी ने करवट बदली और मुझे प्यार से चूम लिया. वह हाँफ रही थी, ठंड में भी उसे पसीना छूट गया था. उसके पसीने के खुशबू भी बड़ी मादक थी. मेरे कान में धीमी आवाज में उसने पूछा कि चुदाई पसंद आई? मैंने जब शर्मा कर उसे चूम कर उसकी छातियों में अपना सिर छुपा लिया तो उसने मुझे कस कर बाहों में भींच लिया और पूछा. "विजय बेटे, कल मैं चली जाऊँगी, तेरी बहुत याद आयेगी." मैंने उससे प्रार्थना की कि मुझे अपने साथ ले जाये. वह हंस कर मेरे बाल सहलाती हुई बोली कि मैं गर्मी की छुट्टी तक रुकूँ, फ़िर वह माँ से कह कर मुझे अपने यहाँ बुला लेगी.

हम थक गये थे और कुछ ही देर में गहरे सो गए. मौसी ने मेरा लंड अपनी चूत में कैद करके रखा और रात भर मेरे ऊपर ही सोई रही. मौसी के माँसल गदराये शरीर का काफ़ी वजन था पर मैं चुपचाप रात भर उसे सहता रहा. सुबह मौसी ने मुझे एक बार और चोदा और फ़िर मुझे एक चुम्मा दे कर वह उठ गई. थकान और तृप्ति से मैं फ़िर सो गया. मौसी के नग्न बदन की सुंदरता को मैं अंधेरे में नहीं देख पाया, यह मुझे बहुत बुरा लगा.

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दुसरे दिन मौसी ने माँ को मना लिया कि गर्मी की छुट्टी में मुझे उसके यहाँ भेज दे. फ़िर मेरी ओर देखकर मौसी मुस्कराई. उसकी आँखों में एक बड़ी कामुक खुमारी थी और मुझे बहुत अच्छा लगा कि मेरी सगी मौसी को मैं इतना अच्छा लगता हूँ कि वह इस तरह मुझ से संभोग की भूखी है.

पर जाते जाते मौसी मुझे जता गई कि अगर मुझे कम मार्क्स मिले तो वह मुझे नहीं बुलाएगी. मैंने भी जी जान लगा दिया और अपनी क्लास में तीसरा आया. मौसी को फ़ोन पर जब यह बताया तो वह बहुत खुश हुई और मुझे बोली. "तू जल्दी से आजा बेटे, देख तेरे लिये क्या मस्त इनाम तैयार रखा है" और फ़िर फ़ोन पर ही उसने एक चुम्मे की आवाज की. मेरा लंड खड़ा हो गया और माँ से उसे छिपाने के लिये मैं मुड कर मौसी से आगे बातें करने लगा.
Shandar shuruat.
 
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