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Romance भंवर (पूर्ण)

aman rathore

Enigma ke pankhe
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Update:-74 (A)




सभी टारगेट नीचे जमीन पर और अपस्यु चैन की श्वास लेते धीरे-धीरे नींद कि गहराइयों में चला गया। अपस्यु की जब आखें खुली वो किसी कमरे में था और उसके पास ऐमी बैठी हुई थी। अपस्यु थोड़ा उठकर टिकते हुए पूछने लगा… "कितने देर से मै सो रहा हूं।"…. "एक घंटे हुए है। अभी कैसा लग रहा है।"..


अपस्यु:- सर बहुत भारी लग रहा है ऐमी। अभी हम कहां है?


मेघा:- अभी तुम मेरी जगह पर हो। वैसे मानना पड़ेगा कमाल का बैकअप है तुम्हारा। यहां तुम बेहोश हुए और उधर ये पहुंच गई।


ऐमी:- जब एक दूसरे के साथ है तो एक दूसरे पर भरोसा जताना ही परता है।


मेघा:- ये लो तुम ये पहले टैबलेट खा लो, तुम्हे अच्छा लगेगा।


अपस्यु टैबलेट लिया और मेघा को बाय बोलकर जाने की इजाज़त लेने लगा… मेघा उसे रोककर ऐमी को कुछ देर के लिए बाहर इंतजार करने के लिए बोली… ऐमी के जाते ही मेघा कहने लगी…. "तुम्हारा आत्मविश्वास काफी कमाल का है। तुम एक विजेता हो, तुम पर 5 मिलियन नहीं 50 मिलियन लगाए जा सकते हैं। मुझे यकीन हो गया कि मै अपना पैसा सही जगह लगा रही हूं।"


अपस्यु:- उसके लिए तो सीधा फाइट रख लेती ना, मुझे नशा का कॉकटेल देने की क्या जरूरत थी।


मेघा:- मिस्टर अपस्यु जितना मै तुमसे मिल रही हूं, तुम उतना ही मेरी जिज्ञासा बढ़ाते जा रहे हो। तुम समझ चुके थे ना ड्रिंक में कुछ मिलाया गया है।


अपस्यु:- तुम्हारी वो वेटर जब दरवाजा खोलने आयी तभी मै समझ गया था।


मेघा:- दरवाजा खोलने से तुम्हे कैसे पता चल गया कि वो तुम्हारे ड्रिंक में कुछ मिला रही है।


अपस्यु:- ये बिजनेस सीक्रेट है, सबके साथ साझा नहीं किया जा सकता।


मेघा:- मै नहीं मानती की तुम्हे तब पता चला होगा। तुम्हे बस इंस्टिंक्ट हुआ होगा आखरी समय पर।


अपस्यु:- तुम्हारा ऐसा सोचना है तो ऐसा ही सही। एक बात याद दिला देना मै जाते-जाते बताऊंगा, फिलहाल तुम्हारी टेस्टिंग पूरी हो गई या और भी कुछ टेस्ट करना बाकी है।


मेघा:- और भी कुछ टेस्ट के लिए अभी तुम तैयार नहीं हो। बहरहाल आज के नतीजों से मै काफी उत्साहित हूं और इसमें कोई दो राय नहीं कि तुम वाकई कोई जादूगर हो। एंगेजमेंट में मिलते है, वहीं फिर आगे की बात होगी।


अपस्यु:- हम्मम ! ठीक है फिर मै चलूं…


मेघा:- हां बिल्कुल, वैसे तुमने वो बात अभी तक नहीं बताई जो तुम जाते-जाते बताने वाले थे।


अपस्यु:- उसके लिए तुम्हे अपना ईगो भूलकर एक अच्छे मेजबान की तरह मुझे कार तक ड्रॉप करना होगा…


मेघा, अपस्यु की बात को हंसकर मान गई और उसे छोड़ने खुद कार तक आयी। अपस्यु कार में बैठा और कहने लगा….……. "कुछ ब्राउन सुगर, उसके साथ ट्स्टलेस और ऑर्डुर लेस नींद की गोलि लगभग 200 मिलीग्राम के डोज में विष्की के साथ मैंने पिया… जिसने भी तुमसे इस कॉकटेल की डील की होगी उसका दावा होगा की यदि बॉडी पचा नहीं पाया तो केस सीरियस होगा शायद जान भी जा सकती है। बॉडी ने यदि एक्सेप्ट कर लिया और कितना भी बड़ा नशेड़ी क्यों ना हो, ड्रिंक लेने के साथ ही वो बेहोश होगा और कम से कम 36 घंटे बाद होश में आएगा।"

"मै उसे पीने के बाद 8 मिनट तक खड़ा रहा और महज 1 घंटा में उठ गया। जाकर सोचते रहना की ये कैसे हो गया और उससे भी जवाब मांगने की कोशिश कीजिए जिसने ये दावा किया था। जाते-जाते अंत में एक आखरी बात, मै काम इंस्टिंक्ट पर नहीं बल्कि फैक्ट्स के साथ करता हूं। बाय-बाय डार्लिंग हैव ए स्वीट नाइट।"


अपस्यु अपनी बात ख़त्म करके ऐमी को इशारा किया और वो कार ड्राइव करने लगी। कुछ दूर ड्राइव करने के बाद… "अपस्यु…"

अपस्यु:- हां ऐमी कहो ना।


ऐमी:- कैरेक्टर से बाहर निकलिए सर उसका घर बहुत पीछे छूट गया।


अपस्यु:- ओह ! मैंने ध्यान नहीं दिया। कैसा रहा आज का परफॉर्मेंस..


ऐमी:- उमाहहहहहहहहहहहहहह… एकदम लाजवाब, बेचारी अभी बैठकर सर खुजा रही होगी। कामिनी बड़ी आयी थी मेरे अपस्यु को चेक करने वाली। साली की ना अक्ल अच्छी थी और शक्ल देख लो तो उल्टी करने का मन कर जाए।


अपस्यु:- हाहहाहाहहाहाहहाहा… बस भी करो कितनी गालियां दोगी उसे…


ऐमी:- हां छोड़ो उसे, वैसे मुझे जरा भी पसंद नहीं आया, तुम इतनी डिटेल उसे दे रहे थे।


अपस्यु:- मै उसे डिटेल थोड़े ना दे रहा ऐमी, बस उसके ईगो को रौंद रहा था। जब उसे मैंने कार के पास खड़ा करवाया ना तो मुझे अलग ही लेवल की संतुष्टि मिल रही है।


ऐमी:- खैर छोड़ो ये, और अभी एंगेजमेंट की तैयारी करते है। कल शाम छछूंदर की एंगेजमेंट है.. वूहू.... वूहू .…. वूहू ….


अपस्यु:- बस भी करो ऐमी, एक्साइटमेंट में आकर किसी को ठोक मत देना।


ऐमी:- खड़ूस कहिंके… अच्छा सुनो कल मै साड़ी पहनना चाहती हूं।


अपस्यु:- हां बाबा ठीक है पहन लेना।


ऐमी:- अपस्यु बात क्या है बताओगे.. वो भी बिना कोई वक़्त लिए..


अपस्यु:- मुझे साची से एक बार मिलना है। क्या अभी एक मीटिंग अरेंज हो सकती है।


ऐमी:- हम्मम ! मै कुंजल से बात करती हूं, वो हमारी मीटिंग फिक्स करवा सकती है।


अपस्यु:- नहीं, हम नहीं.. सिर्फ मै और साची… रूको मै खुद बात करता हूं। ..


अपस्यु साची को कॉल लगाते हुए…. "जी अपस्यु कहिए कैसे याद किया आपने।"..


अपस्यु:- मुझे तुमसे मिलना है, क्या तुम कुछ वक़्त निकालकर मिल सकती हो।


अपस्यु की इस बात से जैसे साची का दिल धड़का हो.. किसी तरह खुद को काबू करती हुई कहने लगी… "सॉरी, कल एंगेजमेंट है और उसी की तैयारियों में लगी हूं।"…


अपस्यु:- मैंने तुम्हारा हर कहा मना है, एक बार बस मेरा कहा मान लो। मै आधे घंटे बाद तुम्हारा होटल कि छत पर इंतजार करूंगा। वहीं बात करता हूं, अभी रास्ते में हूं।


अपस्यु ने अपनी बात कहकर कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया। कॉल कटते ही ऐमी ने अपस्यू का हाथ थाम ली, और उसकी ओर देखती हुई "थैंक्स" कहने लगी। इधर अपस्यु के कॉल कटते ही साची के मन में कई सारे सवाल एक साथ आने लगे… "क्या हुआ दीदी आप अचानक से किस सोच में पर गई।"..


साची:- अपस्यु का कॉल था, मुझसे मिलना चाहता है।


लावणी:- आप क्या सोच रही है?


साची:- वो कुछ सोचने का मौका दे तब ना कुछ सोचूं। बस एक रहस्य ही है वो, जितनी बार सोचा कि इस बार मिलकर हम सब कुछ सुलझा लेंगे, हर बार एक नए ही रहस्य में उलझ गई। बड़ी मुश्किल से तो उबर पाई थी, अब पता नहीं और कहां उलझा रहा है। जानती है जब से उसका कॉल आया है ना मेरी धड़कने बढ़ी। मन के अंदर जो भी चल रहा हो, लेकिन दिल तो सिर्फ इसलिए धड़क रहा है कि किसी भी तरह … बस किसी भी तरह वो बस मेरे साथ हो और मै उसके साथ… क्या करूं ये दिल ही बेईमान है।


लावणी:- जाओ दी, आप को जाना चाहिए.. किसे पता शायद इस बार आप के लिए कुछ अच्छा हो वहां। इस तरह उसके लिए तरप सकती हो, तो क्यों ना एक बार उससे मिलकर देख लो, शायद आज किसी पक्के निष्कर्ष पर पहुंच सके। जाओ दीदी जाओ…


लगभग आधे घंटे बाद अपस्यु होटल की छत पर पहुंचा.. साची उसका पहले से इंतजार कर रही थी। एक नज़र वो अपस्यु को देखी और फिर सामने देखने लगी। अपस्यु उसके पास पहुंचा। साची रेलिंग को पकड़े सामने देख रही थी और अपस्यु पीछे मुड़ कर रेलिंग से खुद को टीका लिया और साची को देखने लगा… "बहुत सुंदर लग रही हो साची, और पहले से काफी सेक्सी भी हो गई हो।"


साची:- ये बताने के लिए मुझे यहां बुलाया है।


अपस्यु:- नहीं बिल्कुल भी नहीं। बस तुम्हारी फीलिंग मुझे यहां खींच लाई।


साची:- जानते हो अपस्यु, एक बात जो मै अच्छे से जान चुकी हूं, मिस्टर अपस्यु मेरी फीलिंग से तो खिंचे आने से रहे। यदि ऐसा होता तो वो कब का आ चुका होता और मुझे इतनी दूर तक ना आना परा होता।


अपस्यु:- शायद हां, तुम्हारी बात सत्य है, लेकिन क्या तुम बता सकती हो, जब मै सच बोलकर गुनहगार हो गया तो सच ना पचा पाने वाली तुम, क्या तुम्हारा कोई दोष नहीं?


साची:- ओह तो तुम मुझसे क्या सुनना चाहते थे कि मै तुम्हारे प्यार में इतनी पागल हूं कि तुम मेरे सामने अपने उस ऐमी के साथ मौज करो, लेकिन मेरा साथ कभी नहीं छोड़ना।


अपस्यु अपनी आंखे बंद करके अपने अंदर तेज श्वांस खिंचा और धीमे-धीमे उसे छोड़ते हुए कहने लगा…. "जी तो करता है, अभी उठा कर यहां से नीचे फेंक दूं।"


साची:- एक यहीं तो तुम्हे आता है, पीना और मारना, रुके क्यों हो फेंक दो मुझे और किस्सा ही खत्म करो।


अपस्यु:- किस्सा ही खत्म करने आया हूं, बस कुछ वक़्त तो दो, मेरा वादा है आज तुम्हारे सर से तुम्हारे स्वार्थ और स्वार्थी चाहत का भूत उतार कर जाऊंगा।


साची:- मै जा रही हूं, तुम यहां रहकर उतरते रहो भूत…


अपस्यु:- अच्छा कहां जाओगी ऑनलाइन होकर अननोन गर्ल की आईडी ओपन करने और अपने उस क्रेज़ी बॉय से बात करने।


साची के बढ़ते कदम अपनी जगह ठहर गए। एक पल के लिए उसे ऐसा लगा जैसे उसकी छिपी दुनिया सबके सामने आ गई हो, वो तेजी से वापस आयी और बिना कुछ कहे अपस्यु को खींच कर एक तमाचा मार दी। लेकिन इस बार अपस्यु भी जवाब देते हुए, साची को भी एक नपा तुला थप्पड उसके गाल पर बिठा दिया… "मंदिर का घंटा समझ रखा है क्या मेरा गाल, जो जब जी में आया थप्पड लगा दिया।"…


साची:- क्रिमिनल हो तुम, ब्लैकमेलर.. मुझपर शक करने वाला इंसान जो मेरे लैपटॉप और फोन को चेक करते रहता था। बहुत ही घटिया हो तुम अपस्यु और अब तो मै भी देखूंगी की लावणी का एंगेजमेंट कैसे होती है तुम्हारे भाई के साथ। तुम्हारी पूरी फैमिली ही क्रिमिनल बैकग्राउंड की है। तुम सबको मै देख लूंगी।


अपस्यु:- क्या बात है एक थप्पड पड़ते ही मेरे पूरे खानदान को ही घसीट दी, मैं भी हर थप्पड के बदले तुम्हारे पूरे खानदान को घसीट लेता तब कैसा मन होता तुम्हारा।


साची:- मै ही पागल थी जो लावणी की बात सुनकर यहां चली अाई, मुझे आना ही नहीं चाहिए था।


अपस्यु:- इतनी देर में एक सही बात कही हो, तुम सच में पागल हो।


साची:- अपस्यु क्या तुम झगड़ा करने के लिए मुझे यहां बुलाए हो, क्यों फुटबॉल बनाकर खेल रहे हो मेरे साथ?


अपस्यु:- बस दिल पर एक बोझ था कि तुम्हारी सच्ची फीलिंग मैंने हर्ट की, यह बात केवल मुझे नहीं ऐमी को भी चुभ रही थी। हम दोनों का तो छोड़ो मेरे भाई, मेरी बहन उनको भी बहुत चुभ रही थी, और उन सबने तुम्हारे दर्द को समझा और कोशिश में लगे रहे की तुम अपना दर्द भूल जाओ, लेकिन नहीं तुम्हे तो मुझ से ही समझना था, इसलिए आज मै तुम्हारे सामने खड़ा हूं। झगड़ा करने नहीं आया, समझी।

साची:- तुम जो कर रहे हो उसे टॉर्चर कहते है अपस्यु …


अपस्यु:- चलो मान लेते है की मै तुम्हे बहुत ही ज्यादा परेशान कर रहा हूं, लेकिन तुमने क्या किया था?


साची:- क्या किया था मैंने?


अपस्यु:- एक लड़का जो 4 साल से तुमसे जुड़ा हुआ था, जिसके साथ तुमने अपनी पूरी फैंटेसी शेयर की। जो तुम्हारे हार सुख में साथ रहा, तुम्हारे हर दुख में तुम्हारे फीलिंग को समझा, तुम्हे हमेशा सही सलाह दिया.. जब उसने अपने लिए एक मौका मांगा की वो भी तुम्हे चाहने लगा है तो तुमने क्या किया.. क्या किया था उसकी फीलिंग के साथ…


साची:- वो वर्चुअल फ्रेंड था, उसे बस गलतफहमी थी और कुछ नहीं। वर्चुअल आईडी के फैंटेसी को वो गलत तरीके से आकलन किया था। मैंने साफ-साफ बता भी दिया था उसे। उसके बाद तो मैंने उससे बात भी बंद कर दी थी, लेकिन वो खुद मेरे पीछे आया था.. तुम एक वर्चुअल की कहानी रियल लाइफ से जोड़ कर कोई भी नतीजा मत ही निकालो तो अच्छा होगा।


अपस्यु:- बेचारा वो क्रेज़ी बॉय, वो भी ठीक वैसे ही हार कर दोबारा मैसेज कर रहा होगा, जैसे तुम हॉस्पिटल अाई थी, अपनी गलती मानकर। दिल के हाथों मजबुर होकर। ठीक वैसे ही जैसे मैंने तुमसे बात करना छोड़ चुका था कुछ आगे की समस्या को सोचकर.. दोनों सिचुएशन में क्या अंतर था साची? आईडी वर्चुअल थी ना क्या फीलिंग भी वर्चुअल होगी?


अपस्यु की बात सुनकर साची कुछ जवाब नहीं दे पाई, वो बस सोच में डूबी रही। तभी अपस्यु चुटकी बजाते हुए… "ओ मैडम, लौट आओ, इस सवाल का जवाब फिर कभी ढूंढ़ लेना, कल तुम्हारी एंगेजमेंट है, जल्दी से सारी बातें खत्म करके आज दोनों साथ खाना खायेंगे..


साची:- अपस्यु तुम ना मेरे दिमाग से खेलना बंद करोगे प्लीज। कितना घुमाते हो, क्यों कंफ्यूज करने पर उतारू हो। सब भूल कर ध्रुव को हां तो कर ही दी हूं, तुम भी भूल जाओ की मेरी फीलिंग हर्ट हुई है, मैं अपने आप निर्मल हो जाऊंगी कुछ दिनों में।
:superb: :good: amazing update hai nain bhai,
behad hi shandaar aur lajawab update hai bhai,
apasyu ne to megha ke ego ko chakna choor kar diya hai,
aur uski drink ka poora detail hi uske saamne khol kar rakh diya hai :D
Aur idhar saanchi bechari ek baar phir apasyu ke shabdon ke jaal mein ulajh gayi hai,
Ab dekhte hain ki aage kya hota hai
 

nain11ster

Prime
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Update:-75 (A)



साची के जिस कन्फ्यूजन के चेप्टर को अपस्यु अभी-अभी क्लोज करके आ रहा था, उससे पार्थ और स्वस्तिका अंदर से काफी चिढ़े हुए थे और दोनों अपस्यु से काफी खफा नजर आ रहे थे।


अचानक से आए प्लान में इस बदलाव से पार्थ और स्वस्तिका इतने नाराज हुए की दोनों ने कुछ घंटे के अंदर आपातकालीन मीटिंग की योजना बनाते हुए सबको संदेश भेज दिया। आरव और ऐमी के बीच थोड़ी सी बातचीत के बाद रात के 12.30 बजे कमरा नंबर 806 में ही बैठक का स्थान तय हुआ।


रात के 12.30 बजे सभी लोग वहां पहुंच चुके थे, वहां का सर्विलेंस और सुरक्षा के सरा इंतजामात ऐमी के जिम्मे था। ऐमी उस जगह को पूरा परखनेंके बाद मीटिंग शुरू करने का इशारा की…


पार्थ ने मीटिंग की सुरवत करते साची और अपस्यु से जुड़े आज रात की बातचीत को लेकर जहां सवाल खड़े किए, वहीं योजना को बीच में ही बदलने के लिए स्वस्तिका ने अपस्यु से अपने गुस्से का इजहार किया।


अपस्यु एक-एक करके सारे सवालों का जवाब देता, उनकी सारी चिंता और गुस्से को दूर करते हुए, नए संभावनाओं कि ओर सबका ध्यान आकर्षित करवाया। इसी दौरान विक्रम सिंह और मयलो ग्रुप की भी पूरी जानकारी साझा की गई। बातों के दौरान यह भी पता चला की इस जिंदल के बेटे के एंगेजमेंट में लगभग सभी मुख्य टारगेट एक साथ इकट्ठा होंगे, जहां विक्रम सिंह के भी आने की पूरी संभावना है।


यहीं एक वजह थी कि, जिसकी सोच के साथ अपस्यु ने आरव का एंगेजमेंट जिंदल के बेटे के साथ नहीं होने दिया, ताकि नंदनी और विक्रम आमने-सामने ना हो। हालांकि अपस्यु ने यह भी साफ कर दिया कि जो खेल विक्रम ने खेला था, उसका पूरा न्याय करने के लिए नंदनी और विक्रम जल्द ही आमने-सामने जरूर होंगे, लेकिन उससे पहले कुछ तैयारियां पूरी होनी जरूरी है।


लगभग 2 घंटे चली इस मीटिंग में नए बदलाव के साथ सभी को अपने-अपने काम मिल चुके थे। स्वस्तिका को 3 महीने का वक्त मिला था, जिसमे वो कुंजल को इतना तो तैयार कर ही दे कि, मुसीबत में वो अपनी और अपने मां कि जान बचा ले। इसी प्रकार उतना ही वक़्त पार्थ को भी मिला था, ताकि वो वीरभद्र को शारीरिक और मानसिक रूप से परिपक्व बना दे।


2 भागों में टीम का विभाजन हो चुका था। स्वस्तिका, आरव, पार्थ और उसके साथ वीरभद्र मिलकर मायलो ग्रुप में सेंध लगाने के साथ-साथ नंदनी और कुंजल को सुरक्षित रखेंगे। वहीं अपस्यु और ऐमी का टारगेट जिंदल था। सभी को तैयारी के लिए 3 महीने के वक़्त दिया जा चुका था और सितंबर के आखिर में सब की दिल्ली वापसी तय हो चुकी थी।


लगभग 2 घंटे चली इस मीटिंग में सारे अहम फैसले लिए जा चुके थे, बस अब जरूरत थी खुद के तैयारियों को परखकर आगे बढ़ने की, जिसके लिए अपस्यु ने सबको 3 महीने का वक्त दिया था, और इसी के साथ उनकी सभा भी समाप्त हो चुकी थी।


मीटिंग के समाप्ति के बाद ही, सभी फिर से एक बार जोर से हूटिंग शुरू करने लगे और आरव को एक बार फिर सबने कल के लिए बधाई देते हुए वहां से निकल गए। रात के 2.30 बज चुके थे सब अपने-अपने कमरे में चल दिए आराम करने।


अगली सुबह, सुबह से ही कौतूहल का माहौल था, ना सिर्फ परिवारों में बल्कि पूरे होटल में भी। सुरक्षा के लिहाज से पूरे होटल के गेस्ट को एक दिन पहले ही शिफ्ट किया जा चुका था। 30 जून की सुबह से ही जैसे वहां का माहौल किसी जंग के माहौल में तब्दील हो चुका था। एंगेजमेंट में हाई प्रोफाइल गेस्ट की लिस्ट इतनी लंबी थी, उसमें भी इतने बड़े-बड़े पॉलिटीशियन आमंत्रित थे कि अमेरिका के कई सारे सुरक्षा एजेंसी के कई सारे प्रशिक्षित जवान वहां के चप्पे चप्पे की निगरानी कर रहे थे। उस होटल में रघुवंशी और मिश्रा फैमिली के लोगों को छोड़ कर केवल होटल के स्टाफ ही बचे थे।


खैर सुरक्षा के इंतजामात अपनी जगह थे और लोगों में एंगेजमेंट की उत्साह अपनी जगह, खासकर वहां मौजूद स्त्रियों में। लेकिन अभी सुबह की सबसे पहली प्रहर चल रही थी, यानी कि सुबह के 5 बज रहे थे और इतनी सुबह ऐमी के दरवाजे पर दस्तक होने लगी। 2.30 बजे सोई ही थी कुंजल ने 5 बजे जगा दिया। ऐमी आधी नींद में दरवाजा खोली और कुंजल कमरे के अंदर चली आयी।


कुंजल:- और कितना सोना है ऐमी, जाओ तुम्हें साची ने बुलाया है।


ऐमी:- कुंजल… सोने दो ना .. बाद में देखती हूं उसे।


कुंजल:- देखना तुम्हे नहीं है, देखेगी वो तुम्हे, जाओ..


ऐमी कुंजल को खींच कर बिस्तर में ले ली और उसके हाथ पाऊं जकड़ कर बोलने लगी…. "चुप चाप सो जाओ, और मुझे भी सोने दो।"


कुंजल:- ऐमी, ये सब क्या है, छोड़ो मुझे प्लीज।


"क्यों, कोई लड़का ऐसे जकड़ कर रखेगा तभी मज़ा आएगा क्या? कुंजल मेरी नींद खराब ना करो…" ऐमी अपनी बात कहती हुई कुंजल को अपने जकड़ से मुक्त कर दी। कुंजल लाख कोशिश करती रही लेकिन ऐमी अपने कानो में रुई डालकर सो गई।


थोड़े ही देर में वहां का माहौल शांत हो गया और ऐमी वापस से नींद की गहराइयों में चली गई। ऐमी नींद की गहराइयों में थी, तभी उसके गाल पर एक जोरदार तमाचा परा। अचानक से नींद में आए खलल से ऐमी चौंककर बैठ गई और अपनी ललाट चढ़ा कर आखें खोली…. "मेरी इतनी सारी नींद हराम करके खुद चैन से सो रहे मिस्टर क्रेज़ी बॉय।" … साची बिस्तर पर बैठी उसे घूरती हुई कहने लगी…


ऐमी:- साची मैं तुमसे हाथ जोड़ती हूं प्लीज़ अभी चली जाओ, सोने दो मुझे। बाद में जब आऊंगी तो जितने जी चाहे थप्पड मार लेना, लेकिन अभी प्लीज सोने दो।


ऐमी नींद के आलम में उसे कहती हुई वहीं बैठे बैठे अपनी आखें मुंदी ही थी कि तभी दूसरे गाल पर भी जोरदार तमाचा परा…. "पागल हो गई हो क्या साची, सुबह-सुबह मुझे गुस्सा मत दिलाओ।'..


"तुम्हारा लवर मुझे ताने देकर कहता है कि, क्या वर्चुअल आईडी थी तो उसका इमोशन भी वर्चुअल होगा? यहां तुम्हारी अननॉन गर्ल तुमसे मिलने आयी है और तुम्हारे ये गुस्से से भड़ा इमोशन देखने मिल रहा। कहां है तुम्हारा वो चाहत वाला इमोशन क्रेज़ी बॉय"…. साची अपनी बात खत्म करके फिर एक जोरदार थप्पड लगा दी ऐमी को…


इस बार वाकई में मज़ाक-मज़ाक में कुछ ज्यादा ही जोड़ का मार गई साची। इसका प्रमाण इस बात से भी लगाया जा सकता था कि ऐमी के दाएं गाल पर पंजे के निशान छप गए थे और मारने के बाद साची की कलाई में झटके के साथ दर्द होने लगा था।


ऐमी झुंझलाकर अपनी आखें खोली… "अरे पागल, कितना जोड़ की चिपका गई। साची स्टॉप इट प्लीज।"


साची फिर से एक थप्पड बाएं गाल में चिपकती…. "यहां साची नहीं बल्कि, अननोन गर्ल है। और इस अननोन गर्ल का क्रेज़ी बॉय कभी उससे गुस्सा नहीं हो सकता।"…


"तेरी तो"….. कहती हुई ऐमी ने साची को दबोचकर बिस्तर पर लिटाया और उसके दोनों हाथ जकड़कर उसके ऊपर चढ़ गई…. "कामिनी रुको तुम्हे अभी क्रेज़ी बॉय की चाहत भी दिखाती हूं।"…


"नहीं नहीं बस इतना ही मिलना था मुझे अपने क्रेज़ी बॉय से तुम अब सो जाओ।"… साची अपनी हालत पर हड़बड़ा कर बोलने लगी…


"तेरा क्रेज़ी बॉय तुझे थप्पड नहीं मार सकता ना, लेकिन जब उसके कमरे में आयी तो ये भी सोच कर ही आयी होगी की क्रेज़ी बॉय के अरमान क्या है।"… ऐमी, अपनी पकड़ और मजबूत बनाती हुई कहने लगी।


"अरे प्लीज, प्लीज, प्लीज, छोड़ो मुझे, अननोन गर्ल का भूत उतर गया मेरे दिमाग से।"… साची लगभग मिन्नतें करती हुई कहने कहीं..


"बेबी अब तो तुम्हे बताना ही होगा कि सुबह-सुबह बिना ब्रश के मुंह चबाने में कैसा लगता है।"… इतना कहती हुई ऐमी, साची को जबरदस्ती किस्स करने लगीं। साची नीचे से "उम्म्म, उम्म्म" करती अपने चेहरे को दाएं बाएं हिलाती रही लेकिन ऐमी आज तो पूरा मूड बना कर आयी थी, बिना ब्रश कैसे मुंह कैसे चबाते है वो दिखाने।


साची किसी तरह उसे झटका देकर उठी और गुस्से से लाल होती ऐमी को देखने लगी। साची के बाल बिखरे, आखें लाल और अजीब सा चेहरे का एक्सप्रेशन, उसकी इस हालत पड़ ऐमी जोर-जोर से हसने लगी। उसे हंसते देख साची गुस्से में उसके बाल नोचने के लिए उसपर झपटी… ऐमी पीछे हटती हुई कहने लगी… "ओह माय क्रेज़ी बॉय… आह्हः, उफ्फ.. प्रेस माय"…. "ऐमी की बच्ची चुप हो जाओ वरना।"…

ऐमी:- हीहीहीहीहीही… क्यों अपने क्रेज़ी बॉय के एरोटिक इमोशन संभल नहीं रहे…


साची भी ऐमी की बात सुनकर जोर-जोर से हंसने लगी।… "कामिनी लेस्बो".. साची हंसती हुई ऐमी से कहने लगी।


"और इसका क्रेडिट जाता है मिस साची उर्फ अननोन गर्ल को। वैसे तुझसे चैटिंग के चक्कर में मैंने अपनी उंगली बहुत घीसी है, यहां भी घिस लेंगे, आदत तो तेरी ही दिलाई हुई है।"… ऐमी, साची को आंख मारती हुई बोलने लगी..


साची:- छी, बेशर्म.. वैसे देखा जाए तो तुम दोनों ने पहल करने में इतनी देर कर दी, वरना हम अब तक मिलकर धमाल मचा सकते थे। साथ में मै इतनी परेशान भी नहीं रहती।


ऐमी:- अब तो खुश हो ना साची, या अब भी कोई गिला-शिकवा है।


साची:- नहीं बाबा बिल्कुल नहीं, तुम क्यों अपना मुंह छोटा कर रही।


ऐमी:- नहीं बस ऐसे ही। हमारे वजह से बहुत दर्द तुमने झेले है। अफसोस होता है उन गुजरे वक़्त के लिए।


साची:- कोई बात नहीं है ऐमी, इन बुरे वक़्त ने मुझे इतना तो सीखा दिया है कि आप कितने भी बुरे वक़्त से क्यों ना गुजरे हो, कुछ अच्छा आप के लिए जरूर छोड़ जाता है। मेरी इतनी उम्र में बस लावणी ही थी एक, जिसे दोस्त कह लो, बहन कह लो या पूरा संसार। लेकिन अब देखो, ऐसा लगता है एक पूरी दुनिया है मेरी फ़िक्र के लिए। तुम्हारा और अपस्यु का शुक्रिया। मुझे खुशी है कि मै ही वो बीच की कड़ी थी जो तुम्हारे मिशन के रास्ते में था।


ऐमी:- बस भी करो अब, क्यों अपस्यु बनने पर तुली हो।


साची:- अच्छा सुन ऐमी मेरी एक छोटी सी ख्वाहिश है?


ऐमी:- क्या?


साची:- मै चाहती हूं तुम दोनों आज कि रात ठीक वैसे ही मेरे एंगेजमेंट में आग लगा दो जैसा उस रात वहां डिस्को में लगाया था।


ऐमी:- अरे बुद्भू डिस्को की बात अलग है वहां तो हर कोई नाचता है, लेकिन एंगेजमेंट में वैसा नाचना मुझसे ना हो पाएगा। वैसे भी आज शाम मै शाड़ी पहनने वाली हूं।


साची:- हम्मम ! कोई बात नहीं, लेकिन ऐसा नहीं कि दोनों एंगेजमेंट अलग-अलग हॉल में है तो तुम सब आना ही नहीं।


ऐमी:- कैसी बातें कर रही हो। हम सब वहां होंगे। अब तुम जाओ और अच्छे से सजो सवरो, और प्लीज मुझे नींद पूरी कर लेने दो।


साची:- अच्छा सुन, तुम दोनों उड़ते पंछी, आज जरा कम सज संवर कर आना, वरना कहीं ऐसा ना हो कि पूरे शो का मुख्य आकर्षण तुम दोनों ही हो।


ऐमी:- हीहीहीही.. पागल, ठीक है ऐसा ही करूंगी, खुश।


दोनों कुछ देर और वहां पर बातें करती रही, उसके बाद साची वापस लौट आयी और ऐमी फिर से जाकर सो गई। दिन के करीब 2 बज रहे थे। पहला एंगेजमेंट साची और ध्रुव का था, शाम के 5 बजे से 7 बजे के बीच। कई सारे गेस्ट आने शुरू हो चुके थे, इसी बीच अपस्यु के पास मेघा का संदेश आया।


मेघा का संदेश मिलते ही अपस्यु उससे मिलने उसके स्वीट में गया, जहां सिक्यूरिटी ने उसे दरवाजे पर ही रोक लिया। अपस्यु ने जब उन्हें मेघा का संदेश दिखाया, तब जाकर कहीं उसे अंदर जाने दिया गया…
 
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स्वीट के अंदर धीमी रौशनी जल रही थी और मेघा का कोई पता नहीं था। तभी अंदर के कमरे के बाथरूम से आवाज़ आयी, "यहीं चले आओ"… अपस्यु भी अंदर चल दिया और बाथरूम के दरवाजे पर खड़ा होकर मेघा से कहने लगा… "नहा धो कर बुला लिया होता, अब ऐसे कैसे बात हो पाएगी।"


मेघा:- मैंने कहा अंदर चले आओ, बाहर मत खड़े रहो। वैसे भी जबतक नहा रही हूं तभी तक का वक़्त है मेरे पास, उसके बाद मै एंगेजमेंट के लिए तैयार होने वाली हूं।


अपस्यु भी दरवाजा खोलकर अंदर दाखिल हो गया और वहीं लगी एक छोटे से टेबल पर बैठ गया।… "हां तो शुरू करो।"..


मेघा:- तुम्हे क्या हर बात समझानी पड़ती है अपस्यु, कपड़े उतारो और टब में आ जाओ।


अपस्यु:- माफ़ करना फाइट से 5 दिन पहले मै अपनी एनर्जी वेस्ट नहीं करता। एक इंच दर फासला हार के कगार पर ले जा सकता है।


मेघा:- व्हाट द फक, तुम क्या पागल हो जो मुझे मना कर रहे हो?


अपस्यु:- तुम्हारी अक्ल क्या घुटनों में है। मैं 5 मिलियन की बेटिंग की फाइट लड़ने जा रहा हूं, ना की किसी सड़कछाप को मारने। मैंने कल ही बताया था तुम्हे मै फैक्ट्स पर काम करता हूं।


"व्हाटएवर, 5 मिलियन क्या 10 मिलियन मै गवां दू, फर्क नहीं पड़ता। लेकिन अगर कोई मुझे ना कहे वो मुझे मंजूर नहीं।"… मेघा अपनी बात कहती हुई टब से बाहर निकली और शावर के नीचे खड़ी हो गई।


पहले पीछे से पूर्ण नग्न रूप दिखाने के बाद अपस्यु के सामने खड़ी होकर वो सावर लेने लगी और अपस्यु को टीज करने लगी। लेकिन अपस्यु उसकी हरकतों पर बिना ध्यान दिए वहीं बैठ, उसे नहाते हुए देख रहा था।


मेघा शावर को बंद करके अपस्यु से कहने लगी…. "अपस्यु मेरा ईगो हर्ट करके, तुम कल का सूरज नहीं देख पाओगे।"


अपस्यु अपनी जगह से उठा और तेजी के साथ मेघा के ओर बढ़ते हुए उसका गला पकड़कर उसे दीवाल से पूरा चिपकाते हुए, उसे फ्लोर से 1 फिट ऊपर उठा दिया। इधर अपस्यु अपने अंदर 30 की उल्टी गिनती शुरू कर चुका था और उधर मेघा छटपटाती हुई, अपस्यु के गुस्से से लाल हुई आखों को देख रही थी, जिसमे उसे साक्छातप किसी शैतान के दर्शन हो रहे थे। उसके गले से आवाज़ निकालना बंद हो चुका था और पाऊं छटपटाने लगे थे। भय किसे कहते है उससे मेघा का आज सामना हो चुका था।


30 की उल्टी गिनती खत्म होने के साथ ही वो नीचे फ्लोर पर आयी और तेज-तेज श्वांस लेती वो कांप रही थी। अपस्यु किसी साइको की भांति पूरे पागलपन में बोलना शुरू किया…

"मैंने तुम्हारी डील एक्सेप्ट की है, तुम्हारी गुलामी नहीं। मै फाइट से ठीक 10 मिनट पहले भी किसी के साथ सेक्स कर सकता हूं, वो मेरी मर्जी होगी। ये बार-बार मुझे धमकी देकर मेरे ईगो को भड़काने कि कोशिश मत करो वरना मै सोचने तक का वक़्त नहीं देता।"…


अपनी बात खत्म करके अपस्यु ने मेघा के होंठ से अपने होंठ लगाकर कुछ देर तक उसके पूरे जोश से चूसने के बाद अलग हुआ और सामान्य आवाज़ में कहने लगा….

"तुम्हारा फिगर कमाल की है। और जिस्म आह दिल में आग लगाता हैं। तुम्हारे इस प्रदर्शन का इनाम मैंने तुम्हे दे दिया। आज की अपनी मीटिंग मै यहीं खत्म करता हूं, फाइटर की डिटेल आज रात तक भेज देना। आज भी चलते चलते एक बात कहता जाता हूं… मेरे ईगो के सामने तुम्हारा घमंड मात्र हाथी के आगे चूहे बराबर है, हाथी अपनी मस्ती में जा रहा है, उससे छेड़ने की कोशिश भी मत करना।"


अपस्यु अपनी बात कहता, बिना मुड़े वहां से चलता बना और मेघा अपने आखों के सामने से किसी ऐसे को जाते हुए देख रही थी, जिसने उसे भय से सामना करवा दिया और अपस्यु के सामने उसकी आवाज़ तक नहीं निकली।


अपस्यु वहां से बाहर निकलकर सीधा तैयार होने पहुंच गया और तैयार होकर वो सीधा होटल के बार में बैठा और कॉकटेल का मज़ा लेने लगा। 2 पेग को कॉकटेल का पीने के बाद अपस्यु अाकर हॉल में बैठा ही था कि सामने से बहुत बड़ा हुजूम चला आ रहा था। कई बड़े-बड़े अधिकारी और कुछ बड़े पॉलिटिकल चेहरों के बीच से उसे जाना पहचाना चेहरा नजर आने लगें।


उसके आव-भगत में तो जिंदल भी इतना गुलामों की तरह लगा हुआ था कि मानो उसके आगे जिंदल की कोई हस्ती ही नहीं। वो जिंदल और कुछ अन्य अमेरिकन राजनेताओं के साथ बात करते हुए आगे बढ़ रहे थे, तभी उसके कदम अपस्यु को देखकर रुक गए। होम मिनिस्टर अपने बढ़ते कदम मोड़कर सीधा अपस्यु के पास आकर बैठे…. "मुझे समझना चाहिए था कि तुम यहीं मिलोगे।"..


मंत्री जी को देखकर अपस्यु आदर से उठकर उनका सम्मान किया और उनकी बात पर मुस्कुराते हुए कहने लगा… "सर आप अभी पूरे प्रोटोकॉल के साथ है, अच्छा नहीं लग रहा मुझे आप का यहां रुकना।"


मंत्री जी… अरे जिंदल, हमारा बच्चा भी यहां है। इससे मुलाकात हुई की नहीं तुम्हारी।


जिंदल:- हुई थी सर, लेकिन कभी इसने जिक्र नहीं किया की ये आप को जनता है।


मंत्री जी:- तुम गलत कह गए जिंदल, मुझे जानने वाले तो बहुत है लेकिन अपस्यु उनमें से है जिसे मै जानता हूं।


अपस्यु:- सर अब जब आप यहां आ ही गए है तो आप को मै अपने भाई के एंगेजमेंट के लिए आमंत्रित करता हूं, क्या आप के पास 10 मिनट का वक़्त होगा।


मंत्री जी:- कितने बजे है एंगेजमेंट अपस्यु…


अपस्यु:- 8 बजे शाम से शुरू है सर।


मंत्री जी अपने पीए को देखते हुए पूछे…. "शुक्ला जी क्या 10 मिनट का वक़्त निकला जा सकता है।"

शुक्ला जी:- सर, हमे शाम को 6.40 में ही निकालना होगा।


मंत्री जी वहीं अपस्यु के पास बैठते हुए… "तब 10 मिनट का वक़्त नहीं मिला तो क्या हुआ, अभी तो है ना मेरे पास पूरा समय। अपस्यु मै तुम्हारे भाई और होने वाली भाभी के साथ-साथ तुम्हारे पूरे परिवार से मिलना चाहूंगा। शुक्ला जी राजीव के साथ जाइए और सबको आदर पूर्वक बुला लाइए, जबतक मै अपस्यु से बात करता हूं। और हां जाते जाते कुछ सिटिंग आरेंगेमेट भी यहां करवाते जाइएगा।


मंत्री जी अपनी बात पीए से समाप्त करके, भीड़ से थोड़ा दूर हटकर अपस्यु के साथ खड़े होकर बातें करने लगे। दोनों के बीच ऐसा लगा जैसे कुछ गहन बातें चल रही थी। जबतक इनकी बातें खत्म हुई, परिवार के सभी लोग वहां पहुंच चुके थे।


मंत्री जी आरव और लावणी दोनों से मिले साथ में रघुवंशी के संपूर्ण परिवार से एकएक करके मिलते चले गए। तकरीबन 15 मिनट का वहां वक़्त देने के के बाद सबसे विदा लेकर मंत्री


उनके जाते ही लॉबी से पूरी भीड़ भी हट गई और साथ ने वहां से अपस्यु भी कट लिया। साची के बुलावे पर अपस्यु उसकी एंगेजमेंट में पहुंचने वाला सबसे पहला गेस्ट था, क्योंकि मंत्री जी के 15 मिनट के उस शैडयूल चेंज ने सबका शेड्यूल चेंज कर दिया था।


अपस्यु हॉल में पहुंचकर एक बार फिर बार काउंटर कर पहुंचा और वहीं बैठकर अपने फेवरेट कॉकटेल का मज़ा लेने लगा… "वन एटॉमिक शैम्पेन कॉकटेल"… ऐमी अपस्यु के कंधे पर हाथ रखकर अपस्यु की फेवरेट कॉकटेल का ऑर्डर की।


अपस्यु थोड़ा दूर हटकर ऐमी को देखा और देखने ही लगा। वो वापस से उसके पास आकर बैठा और कमर पर चिकोटी काटते हुए प्यार भड़ा चुम्मा अपने होटों से भेजा। ऐमी भी अपने होटों से वापस चुम्मी भेजती हुई अपना ग्लास टोस्ट के लिए बढ़ाई…


अपस्यु ग्लास से ग्लास टकराते हुए…. "ऐमी आज तुम कमाल कि लग रही हो। तुम साड़ी मत पहना करो मेरे इमोशन कंट्रोल नहीं होते।


"अच्छा मेघा के साथ मीटिंग करके आए फिर भी इमोशन्स जाग रहे है।"… ऐमी ड्रिंक की सिप लेती हुई कहने लगी…


अपस्यु:- अभी हम दोनों है ना फिर ये तीसरे की क्या जरूरत। अभी बात करना है क्या उसके बारे में।


ऐमी:- हीहीहीहीही… सर अपस्यु अपना यहां आपा खोते हुए..


अपस्यु:- मिस अवनी, आप कृपया करके मेरी कमजोर नब्ज पर वार करने से बाज आएंगी…


"भाई की कमजोर नब्ज.. क्या है प्लीज मुझे भी बताओ ना, आज तक मैंने इन्हे वो गुस्से में कभी नहीं देखा जैसा हमलोग आम तौर पर हो जाते है।"… कुंजल उन दोनों के बीच आती हुई पूछने लगी..


ऐमी:- अपने भैय्या से पूछ लो, मुझे बताने में कोई हर्ज नहीं।


कुंजल:- उनसे क्या पूछना तुम बताओ ऐमी।


अपस्यु:- कुंजल तुझे साची शायद ढूंढ रही है, देखो वहां से तुम्हे ही हाथ दिखा रही।


कुंजल:- मुझे क्यों हाथ दिखाएगी, गौर से देखो वो आप को हाथ दिखा रही है।


कुंजल अपनी बात कहकर हसने लगी, और उसकी बात सुनकर ऐमी भी हंस पड़ी। अपस्यु अपनी ड्रिंक हाथ में लिए ही स्टेज पर चढ़ गया।… "जी मैम कहिए, क्या सेवा की जाए।"..


साची:- कैसी लग रही हूं बताओ…


अपस्यु:- मस्त लग रही हो, और ये नीला रंग तुम पर बहुत अच्छा लगता है।


साची:- अच्छा ऐमी से तुलना करके बताओ की उसके मुकाबले मै कैसी लग रही।


अपस्यु:- अब इसमें तुलना जैसा क्या करना है। मै कुछ समझा नहीं।


साची:- तुम्हे समझना भी नहीं है… ये हम लड़कियों का कुछ सीक्रेट बातें होती है, अब बताओ मुझे।


अपस्यु:- नो डाउट, आज तुम ऐमी को भी मात दे रही हो। 10 में से 9 मार्क तुम्हे मिलते हैं।


साची:- और मेरे एक मार्क कहां काट लिए..


अपस्यु:- आखों पर हल्की काजल होती ना तो बिल्कुल तुम किसी कातिल हसीना से कम नहीं लगती।


साची:- ओह थैंक्स, चल लावणी। ओके बाय अपस्यु मै आयी जल्दी।


अपस्यु उसकी बात पर हंसते हुए वापस आया और अाकर ऐमी के पास बैठ गया और उसे घूरते हुए पूछने लगा… "आज तुमने मेकअप क्यों नहीं किया।"


ऐमी:- जिसके लिए मेकअप करती उसने मुझे देखकर ही उत्साह से जब चिकोटि काट ली तो आगे इतना बनना संवरना क्यों?


अपस्यु:- छोड़ो जाने देते हैं इस बात को। कितनी ड्रिंक पी गई।


ऐमी:- तुम्हारी बकवास कॉकटेल अब तक बस 2 ली है।


अपस्यु:- जब बकवास था तो दूसरा पेग क्यों ली।


ऐमी:- कुछ पागलपन के लिए थोड़ा नशा भी जरूरी है। वो छोड़ो, हम जिसके लिए बैठे हैं वो लोग पहुंच गए क्या?


अपस्यु:- नहीं वो लोग अभी तक नहीं पहुंचे हैं। वैसे लोग तो अपने भी नहीं पहुंचे है। सबको कहां 5.30 बजे बुलाया था, अब 6 बजने को आए हैं।


ऐमी:- सब आते ही होंगे। तुम्ही ने तो सबको बीच तैयारियों से उठवा दिया, वरना अब तक तो आ भी चुके होते।


अपस्यु और ऐमी कुछ देर और बातें करते रहे की तभी वहां पर आरव, स्वस्तिका और पार्थ भी पहुंच गए। तीनों पहुंचते ही बार टेंडर को बोलने लगे… "वन एटॉमिक शैम्पेन कॉकटेल"


अपस्यु उन तीनों के ऑर्डर को सुनते ही हंसने लगा और वापस से अपनी कॉकटेल उठाई। उसके साथ-साथ बाकियों ने भी अपने-अपने जाम उठाया और साची के ओर ग्लास दिखाकर पांचों ने एक साथ टोस्ट किया। टेस्ट करके ग्लास जैसे ही नीचे लाए, सामने से वो लोग भी नजर आने लगे जिसका इतंजार सब कर रहे थे।


जैसा अंदाजा था ठीक वैसा ही हुआ। विक्रम सिंह राठौड़ अपने परिवार समेत जिंदल के साथ महफ़िल में शिरकत करते हुए नजर आने लगा। जिंदल और विक्रम के साथ कुछ और जाने पहचाने से चेहरे.. और हर एक के चेहरे को पांचों जैसे अपने दिमाग के हार्ड डिस्क में पूरे डाउनलोड करना शुरू कर दिया था।
 
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अपस्यु:- अच्छा ऐसी बात है तो बताओ क्या तुमने अब तक ध्रुव को किस्स किया है। एक बार भी..


साची:- ये हमारा पर्सनल मैटर है, तुम्हे क्यों बताऊं।


अपस्यु:- चल झुटी, किस्स की होती तब तो जवाब होता।


साची:- इतना भेजा फ्राई कौन करता है.. इसे मजबूरी का फायदा उठाना कहते है। तुम क्या चाहते हो वो मुझे बताओ…


अपस्यु:- मै चाहता हूं कि तुम समझने की कोशिश करो, जो तुम्हारी फीलिंग है मेरे लिए वो मात्र आकर्षण है जो सिर्फ पाना चाहता है, और ना मिल पाने की स्थिति में तुम्हे दर्द हो रहा है।


साची:- गुरु जी की अब नई कहानी शुरू होगी.. लव और अट्रैक्शन के बारे में.. और फिर मेरे दिमाग के साथ खेलने की तैयारी पूरी हो चुकी है।


अपस्यु:- चलो एक डील करते है…


साची:- कैसी डील..


अपस्यु:- तुमसे कोई सवाल करूं तो सब सच-सच बताना और तुम्हे किसी भी पल ऐसा लगे कि मै तुम्हारे दिमाग के साथ खेल रहा हूं, तो तुम मुझे साफ़ मेरे मुंह पर कह देना मुझे अब कोई जवाब नहीं देना.. मंजूर..


साची:- हां मंजूर…


अपस्यु:- क्या तुम्हे मुझसे प्यार है.. अब भी..


साची:- हां..


अपस्यु:- क्या जब मैंने तुम्हे सच बताया था मेरे और ऐमी के बारे में, तब तुम्हे लगा था कि मुझे तुमसे प्यार है…


साची:- पता नहीं…


अपस्यु:- क्या उस सच को सुनते वक़्त भी तुम्हे मुझसे प्यार था।


साची:- हां..


अपस्यु:- फिर फैसला किसने लिया था कि मै तुमसे दूर रहूं?


साची:- मैंने..


अपस्यु:- तुम्हारे फैसले के बाद क्या मैंने तुम्हे फिर परेशान किया…


साची:- परेशान ना करके भी करते रहे।


अपस्यु:- क्या तुम रोई थी?


साची:- आज तक रोती हूं।


अपस्यु:- क्या तुमने मेरे बारे में सोचा था कि मुझे सच बताने की जो तुमने इतनी बड़ी सजा दी है, उससे मेरी फीलिंग हर्ट नहुई होगी? क्या तुम्हे एक बार भी ख्याल आया कि मिलकर बात ही कर ले की हमारे बीच के रिश्ते में तुम्हे ऐमी खटक रही है?


साची:- लेकिन तुमने तो खुद मुझसे कहा था ना कि तुम दोनों में से किसी को नहीं छोड़ सकते, फिर उस बात के लिए इतने सवाल क्यों?


अपस्यु:- हां मैंने ऐसा कहा था, लेकिन तुम्हे तो सच्चा प्यार था ना, तुम तो एक बार सीधे-सीधे भी तो कह सकती थी ना.. यदि साची चाहिए तो तुम्हे ऐमी को छोड़ना होगा… नहीं तो हम दोबारा कभी नहीं मिलेंगे…


साची:- इतनी बात कह देने से क्या तुम उसे छोड़ देते..


अपस्यु:- बिल्कुल नहीं…


साची:- बस तो फिर बात ही खत्म..


अपस्यु:- हां मै भी बात क्लोज ही कर रहा हूं बस इतनी सी बात के साथ की हमरे बीच के रिश्ते में जितनी भी अब तक डिस्कस हुई है, उसमे केवल तुम्हारी फीलिंग, तुम्हारी इक्छा तुम्हारी चाहते और केवल तुम है तुम हो… अब तुम मुझे बताओ कि हमारे इस रिश्ते में.. मेरी फीलिंग, मेरी चाहत और मेरे लिए कितनी बातें डिस्कस हुई है…


साची:- हां तो इस पूरे घटना का केंद्र बिंदु तो तुम ही हो, और तुम्हारे कारन ही तो मेरे साथ ये सब घटनाएं हुई है…


अपस्यु:- और इसलिए मेरी फीलिंग कोई मायने नहीं रखती… मेरी फीलिंग के साथ जब जी में आया फुटबॉल खेल दिया। तुम्हे जब जी में आया आशु बहा लिए और खुद के लिए सिंपैथी बटोर लिया, क्योंकि लड़कों पर तो धोखेबाज का टैग लगा होता है ना, उसकी कोई फीलिंग ही नहीं होती है। मैंने तुमसे ऐमी के बारे में सच बता दिया उसके बाद से तो मेरी फीलिंग मर गई ना तुम्हारे लिए…..


साची:- सॉरी.. ये सही है कि मैंने अकेले फैसला किया था लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि मैंने तुम्हारी फीलिंग के बारे में नहीं सोचा था… मै रोज इस ख्याल में रोती थी कि मैंने हम दोनों को सजा दी है। हां केवल उस घटना के बाद फिर कभी तुमसे जाता नहीं पाई की मुझे तुम्हारी फीलिंग की कदर है, और तुम दूर रहकर भी बस मुझे मेरे गम से उबारने कि कोशिश में लगे हुए थे। फिर चाहे वो तुम्हारा किसी लड़की के साथ लाइन मारने वाला फ्लॉप सीन ही क्यों ना प्लान किया हो, या फिर कुंजल और लावणी के साथ मिलकर मेरा ब्रेन वाश करना.. की तुम एक बुरे लड़के हो।


अपस्यु:- बुरा लड़का, क्रिमिनल, और ना जाने क्या क्या तुम भी तो मुझे कह चुकी हो..


साची:- "तुम्हे गुस्से और नफरत से मै कुछ भी कहूं लेकिन जो सच है वो सच है। मुझे नहीं पता कि हमारे रिश्ते के बीच तुम्हे कभी प्यार था भी या नहीं था, लेकिन तुमने मुझे हमेशा रेस्पेक्ट दिया। तुमने ही तो समझाया था कि एकतरफा सोचकर फैसला नहीं लेते, जब मै हताश थी कॉफी वाली घटना को लेकर। तुमने ही तो एहसास करवाया था कि मै जितनी गहराइयों से बातों को सोचकर खुद को सजा दे रही थी, उतनी बातें तो तुम्हारे ख्यालों में भी कभी नहीं था। हां बस मेरा दिल तब टूट गया जब मैंने तुम्हे और ऐमी को देखा। पता नहीं तुमने वो कौन से फालतू रिलेशन का जिक्र किया था मेरे साथ, लेकिन मेरा दिल मुझसे एक ही बात कहता रहा.. जो स्थान ऐमी के लिए तुम्हारे दिल में है, वो मेरा नहीं।"

तुम दोनों के रिश्ते के बीच मै तो कभी थी ही नहीं… आज भी दिल धड़क रहा की मेरा अपस्यु मुझे गले लगाकर कह दे कि चलो छोड़ो भूलते हैं पुरानी बातों को, भूल जाओ इस एंगेजमेंट को, सब कुछ मै संभाल लूंगा.. मै बिना सवाल किए साथ आ जाऊंगी.. लेकिन ये मात्र इक्छा जो कभी पूरी नहीं होगी। क्यों अपस्यु क्यों, जब तुम्हारे लाइफ में पहले से ऐमी थी तब क्यों तुम मेरी जिंदगी में आए… ऐसा भी क्या मोह था मुझसे .. या फिर मै ये मान लूं कि, एक लड़का जो ऑन स्क्रीन मेरे फैंटेसी को अपनी भूल समझकर गलत मतलब निकाला बैठा, उसका तुम बदला ले रहे थे।"


कितना उकसाने के बाद पहली बार साची अपनी दिल की पूरी बात जुबान पर ला चुकी थी। वो अपस्यु से पूरी कहानी कहकर वहीं मायूस और खामोश होकर अपस्यु के ओर देखने लगी…


अपस्यु साची का हाथ थामकर उसके आखों में आए कुछ बूंद आशु को पोछने लगा.. साची खुद में इतनी टूटी थी कि वो सामने अपस्यु को देखकर खुद को रोक नहीं पाई, और उससे लिपट कर रोने लगी…. अपस्यु उसे सांत्वना देते हुए उसे चुप कराने की कोशिश करता रहा, लेकिन साची को ऐसा लग रहा था, पहली बार वो किसी सही कंधे पर सुकून से अपना सर रखकर रो रही है।


"साची काफी देर रो ली, और ज्यादा हुआ तो आखों के आगे सिलवटें आ जाएगी.. शांत हो जाओ।"…… "बस कुछ देर और, अच्छा लग रहा है तुमसे लिपट कर रोने में।"…..


अपस्यु साची को वहीं नीचे बिठाते हुए उसके आशु साफ किए और पानी बॉटल बढ़ाते हुए कहने लगा…. "मुझे पता था यहां के सीन में तुम्हारा रोना होगा ही इसलिए पानी बॉटल का इंतजाम पहले से कर रखा था"…. साची, अपस्यु की बात सुनकर रोते-रोते हंस दी और अपने दोनों हाथ तेजी से उसपर चलती हुई मारने लगी। पानी पीकर साची कुछ शांत हुई… कुछ पल दोनों खामोश रहे, साची अपने चेहरे पर हल्की मुस्कान लाती हुई कहने लगी…. "मन हल्का हो गया.. ओय मिस्टर तुम कौन हो जो मेरे पास बैठे हो।"…


अपस्यु:- अरे इतनी जल्दी मुझे पहचाने से भी इनकार…


साची:- येस.. अब कोई गिला-शिकवा नहीं बस ऐसा लग रहा है अब सब ठीक है।


अपस्यु:- नहीं अभी कुछ भी सही नहीं हुआ है… तो क्या अब मैं तुम्हे कुछ झटके दे सकता हूं?


साची अपस्यु को घूरती हुई देखने लगी…. "नो नो नो नो.. नहीं अपस्यु कोई पागलपन नहीं… मुझे कैंटीन का वो तुम्हारा साइको रूप अब भी याद है।"


अपस्यु:- भरोसा है मुझ पर..


साची:- बिल्कुल नहीं, मुझे तुम पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है.. चलो हो गया मेरा दर्द चला गया है.. और बताया तो अब कोई गिला-शिकवा नहीं बचा.. जाओ अपनी ऐमी के पास बिना ब्रश के चबाओ एक दूसरे के मुंह..


अपस्यु:- अभी सिर्फ तुम्हारा दिल का बोझ हल्का हुआ है, दिल से मेरी वो छवि नहीं गई है… बस उस छवि को निकालने दो..


साची:- बहुत कर ली तुमने बकवास, चलो यहां से..


अपस्यु:- चुप एकदम.. और ध्यान से सुनो.. क्रेज़ी बॉय की आईडी ऐमी की है जो मेरे कहने पर उसने बनाया था, मैंने कोई तुम्हारा लैपटॉप या फोन नहीं चेक किया था।


ऐसा लग रहा था जैसे अपस्यु की आत्मा साची के अंदर घुसी थी.. क्रेज़ी बॉय की सच्चाई सुनने के बाद भी वो मुस्कुरा रही थी और अपस्यु के ओर देख रही थी। अपस्यु साची की इस हालत को देखकर समझ चुका था कि उसके अंदर का क्या माहौल है। हुआ भी कुछ ऐसा ही, मुस्कुराती हुई साची अपने हाथ इधर-उधर करके कुछ ढूंढ़ रही थी और तभी उसके हाथ पत्थर लगा और उसने अपस्यु के सर पर दे मारा।


अपस्यु ने भी बचने कि कोई कोशिश नहीं किया और नतीजा सिर से खून निकलना शुरू हो चुका था। अपस्यु के सर से जैसे ही खून निकला, तुरंत वो कॉटन लिया और फटाफट उसपर उपचार करके फिलहाल के लिए खून बहने से रोक लिया। साची पर लेकिन जैसे भूत चढ़ रहा हो।


वो हर बात की समीक्षा कर रही थी, उसने सिर फूटने पर अपस्यु की पहले से कि गई व्यवस्था भी देख रही थी। दोनों आमने सामने बैठे थे, साची उसका गला पकड़ कर उसके ऊपर चढ़ गई…. "अपस्यु तुम्हारा खून करके मै जेल आज जाकर रहूंगी। लेकिन खून करके रहूंगी… जब से तुमने क्रेज़ी बॉय का नाम लिया था, मै बस दिल को तसल्ली दे रही थी कि नहीं नहीं ये अपस्यु नहीं है इसके पीछे….. तेरी तो… आज मै तुम्हे नहीं छोड़ने वाली… कमिने कुत्ते.. मां की गली नहीं दे सकती.. आंटी रेस्पेक्टेड है और मै उनकी फैन हूं… वरना अभी तुम्हे मै बताती….. साले चूतीए.. खून पी जाऊंगी मै तुम्हारा।"


अपस्यु जोर-जोर से हंसते हुए उसे अपने ऊपर से हटाया और साची के सर पर पूरी पानी की बॉटल उर्रेल दिया। साची पुतले की तरह बैठी रही और फुह-फूह करके, पानी के ऊपर फुफकार मार रही थी…. "दिमाग कुछ शांत हुआ क्या?"


साची एक फिर उसका गला पकड़ कर उसे लिटा दी और 3-4 बार उसका गला जोर जोर से दबाने के बाद 8-10 थप्पड उसे जल्दी-जल्दी में लगा कर उसी के ऊपर बैठकर अपनी श्वांस सामान्य करने लगी।


अपस्यु:- मै भी कितनी बाजारू हूं जो उन पर थप्पड मारा। वो इतने महान है और मैंने ऐसे किया अपने अपस्यु के साथ।


साची:- कॉमेडी हां… तुम्हारा खून कर दूंगी मै अपस्यु चाकू दो मुझे..


अपस्यु जोर जोर से हंसते हुए… "उसी बैग में तुम्हे चाकू भी मिल जाएगा.."


साची एक हाथ बढ़ाकर वो चाकू निकलती हुई… "तुम्हे पहले से पता था कि मुझे इसकी जरूरत भी पड़ेगी.. तुम्हे क्या लगा तुम इस नकली चाकू से मुझे भ्र्मा दोगे..


इतना बोलते-बोलते साची बड़े विश्वास के साथ, चाकू टेस्ट करने के लिए अपनी हथेली पर चला चुकी थी, तभी अपस्यु तेजी से वो बैग उठाकर चाकू और हथेली के बीच लगाया…. "ओए पागल, वो असली चाकू है, हाथ बचता नहीं रिंग डालने के लिए।"


साची उसके बाल पकड़ कर तीन चार बार वहीं नीचे पटकती हुई उसके ऊपर से हटी। गुस्सा उसका अब भी शांत नहीं हुआ था और वो गुस्से में कहने लगी… "तुम्हे पीटना है, मुझे अभी के अभी रोड चाहिए।"


इतना कहकर जैसे ही साची पीछे मुड़ी अपस्यु रेलिंग पर खड़ा था। उस रेलिंग पर खड़ा देखकर साची कहने लगी… "अब तुम रस्सी लगाकर नीचे कूदोगे यहीं ना.. और इससे मेरा गुस्सा ठंडा हो जायेगा क्या?"


"खुद ही देख लेना की रस्सी है कि नहीं बंधी"… इतना कहकर अपस्यु नीचे छलांग लगा चुका था। उस कूदते देख साची का कलेजा धक से रह गया। उसकी श्वांस ही अटक गई। वो भागकर रेलिंग के पास पहुंची.. 30 मंजिली इमारत के नीचे देखने से ही जहां देहसत पैदा हो जाए वहां से अपस्यु को छलांग लगते देख साची स्तब्ध (shocked) होकर नीचे देखने लगी।


नीचे देखते हुए उसे डर लग रहा था लेकिन किसी तरह हिम्मत बांध कर वो अपस्यु को ढूंढ़ने लगी। आस-पास नजर दौड़ा कर वो देखने लगी कि कहीं कोई रस्सी बांधकर तो नहीं कुदा लेकिन रस्सी के नाम पर कोई साक्ष्य (proof) नहीं था छत पर। साची पागलों की तरह नीचे देखने लगी…. तभी उसके बाएं ओर से लटकते हुए अपस्यु की आवाज़ आयी... "ओ मिस मै कोई सुसाइड नहीं कर रहा था, पीछे हट जाओ वरना यहां से गिरी तो फिर कुछ बचना भी नहीं है।"
:superb: :good: amazing update hai nain bhai,
behad hi shandaar aur lajawab update hai bhai,
aaj to saanchi bechari ko apna gussa nikalne ka bharpoor mauka mila hai :lol1: ,
aur hathiyar bhi apasyu hi uske liye laaya hai :lol: ,
Ab dekhte hain ki aage kya hota hai
 

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अपस्यु जैसे ही ऊपर चढ़ा साची भागकर उसके पास पहुंची और उसे टटोल कर देखने लगी वो सुरक्षित है कि नहीं… बढ़ी धड़कनों को वो शांत करके अपस्यु के ओर देखते हुए कहने लगी…. "मै कुछ भी समीक्षा कि स्तिथि में नहीं हूं, कह दो जो अब कहना है। क्रेज़ी बॉय की आईडी और तुम्हारे इस स्टंट एक बात तो समझ चुकी हूं कि तुमने जो भी किया वो सुनियोजित था, एक सोची समझी रणनीति।"


अपस्यु:- हां बस यही समझाने कि कोशिश कर रहा था..


साची:- जब सबकुछ पहले से तय था तो क्या मेरी फीलिंग मायने भी रखती है.. या फिर कोई नई ट्रिक है मुझे ट्रैप करने की।


अपस्यु:- नहीं कोई ट्रिक नहीं है, बस अब केवल सच्चाई हैं। यूं समझो की हमारे दिल पर बोझ था, हमने अपनी मंजिल पाने के लिए किसी की सच्ची फीलिंग को हर्ट कर दी।


साची:- हमने मतलब तुम्हारे साथ ऐमी भी पचता रही है, क्यों?


अपस्यु:- शायद हम दोनों से ज्यादा, लेकिन कभी जताएगी नहीं।


साची:- तो फिर वो क्यों नहीं आयी तुम्हारे साथ?


अपस्यु:- आना चाहती थी लेकिन मैंने है माना कर दिया। मुझे लगा गुस्से में कहीं तुमने उसे कुछ कह दिया तो वो अपने अंदर सब समेट कर रख लेगी लेकिन बात उसे चुभती रहेगी।


साची:- मै समझ गई तुम 2 नहीं बल्कि 1 हो.. अपस्यु और ऐमी..


अपस्यु:- हां सही समझी तुम.. लेकिन हम दोनों ही मिशन पर है, और उसका एक रास्ता तुमसे होकर जाता था। विश्वास मानो बस वो कड़ी जोड़ने के चक्कर में हमने बहुत ही गलत कदम उठा लिया। तुम्हे इन सबमें सामिल करना हमारी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल थी।


साची:- भूल सुधार ली तुमने अपनी। हां मै अपनी फीलिंग अभी जज नहीं कर पा रही। दिमाग मेरा चींख-चींख कर कह रहा है कि मत भरोसा करो, लेकिन दिल कह रहा है कोई तो मजबूरी रही होगी जो तुमने मेरा इस्तमाल किया। मैंने तुम्हे माफ़ किया और शायद लगता है तुम्हे अब वो रास्ता मिल चुका है इसलिए अब मै तुम्हारी कहानी का हिस्सा भी नहीं रही, बस इस बात का थोड़ा अफसोस हो रहा है। अब ना तो तुमसे मिलना हो पाएगा और ना ही तुम्हे मै देख पाऊंगी…


अपस्यु:- ये प्यार वाली फीलिंग के साथ मिलना होगा या फिर एक जान पहचान वाले रिश्ते के हिसाब से..


साची:- दगाबाज, शुक्र करो इतने बड़े धोखे के बाद भी तुमसे मै बात कर रही हूं। तुम्हे क्या लगता है मै अब भी तुमसे प्यार करूंगी.. नेवर। लेकिन नफरत भी नहीं है तुमसे, क्योंकि मेरे पीछे आने कि जो भी तुम्हारी मनसा रही हो, लेकिन तुमने कभी मेरी फीलिंग हर्ट करने की कोशिश नहीं की, सिवाय एक मोमेंट के.. इसलिए जाओ माफ़ किया अब सवाल जवाब राउंड..


अपस्यु:- जी बिल्कुल…


साची:- क्या अब तुम्हारा काम खत्म हो गया है तो मै तुम्हारी लाइफ से आउट हो गई…


अपस्यु:- तुम्हारी नहीं हमारी कहो… और बिल्कुल नहीं, तुम हमारे लाइफ से चली जाओ उसमे हम कुछ नहीं कर सकते, लेकिन हमारी लाइफ से तुम कभी नहीं जा सकती। यूं समझ लो कि एक सच्चे दोस्त की तरह हम हर वक़्त तुम्हारे साथ रहेंगे, फिर चाहे तुम दूर रहो या पास..


साची:- इस बात का भरोसा था मुझे.. और वो तुम दोनों करते भी आ रहे थे.... शायद मै इमोशनल ना रहती तो तुम आज का ये सेशन भी नहीं लेते..


अपस्यु:- राईट, सही कही..


साची:- दूसरा सवाल… क्या आरव और लावणी का रिलेशन भी एक ट्रैप है..


अपस्यु:- पागल हो क्या? ऐसा सोचना भी मत… दोनों का सच्चा साथ है।


साची:- ओके बाबा, इतना हाइपर क्यों होते हो.. तीसरा सवाल.. क्या तुम गुड साइड हो या बैड साइड..


अपस्यु:- तुम्हे क्या लगता है?


साची:- मेरा लगना छोड़ो, बस जो सवाल किया उसका जवाब दो…


अपस्यु:- गुड साइड..


साची:- चौथा सवाल, मुझे ट्रैप किया मतलब तुम्हारा टारगेट मेरा परिवार था..


अपस्यु:- बिल्कुल नहीं, टारगेट तुम्हारा परिवार नहीं है। हां लेकिन..


साची:- बस आगे नहीं, मुझे पता है मेरे पापा और चाचा के बारे में, घुस लेते है। ये बात तुमने ही मुझे बताया था कैंटीन में। उस वक़्त मैंने डिफेंड किया था अपने परिवार को, लेकिन तुमने सच कहा था.. मतलब उन्हें जेल वेल टाइप होगी इतना ही इन्वॉल्व है ना वो लोग…


अपस्यु:- हां..


साची:- मुझे ध्रुव की रिपोर्ट दो… क्या उसका और मेरा रिश्ता सेफ है..


अपस्यु:- तुम उसे किस्स कर सकती हो… क्लीन है वो.. तुम्हारी बातें बहुत कुछ समझा रही है… कैसे.. तुम आखिर इतने नतीजों पर कैसे पहुंच सकती हो..


साची:- मै इतना नहीं सोचती लेकिन गुरुजी आप ने ही मुझे शार्प किया है। ओवर कॉन्फिडेंस और फटफटी वाली इश्यू एक ऐसी कहानी थी जिसने मुझमें थोड़ी बहुत समझदारी डाल गई। एक मामूली सरकारी मुलाजिम इतने बड़े उद्योगपति और पॉलिटीशियन के यहां मेरा रिश्ता आसानी से तय कर लेता है और दिखाने के लिए उस बड़े आदमी को अपना बचपन का दोस्त बताता है। जबकि दोनों जब मिले तो उनकी बातों में ऐसा था ही नहीं की 2 दोस्त बात कर रहे हैं, ऐसा लगा जैसे 2 बिजनेसमैन आपस में बात कर रहे है। शायद मै इस बात की समीक्षा नहीं कर पाती यदि वो घटना नहीं हुई होती।


अपस्यु:- मतलब मैंने तुम्हे जेनियस बना दिया…


साची:- और साथ में उन बातों को भी सोचने पर मजबुर किया, जिसके बारे में मै कभी सोचती भी नहीं। कमिने हो तुम अपस्यु मेरी नॉर्मल लाइफ को क्राइम थ्रिल और एडवेंचर वाली लाइफ में बदल दिए। और वो ऐमी की बच्ची कहां है उसके तो मै मुंह नोच लूंगी.. क्रेज़ी बॉय बनकर मुझे बहुत घुमाया है…।


अपस्यु:- सवाल जवाब का राउंड खत्म हो गया क्या?


साची:- एक सवाल है लेकिन उसका जवाब मै तुम्हे तब कहूंगी देने जब तुम कामयाब हो जाओ… तुम्हारे मिशन की हर एक कहानी जिसके जानने की मुझे पूरी जिज्ञासा है, जानती हूं मै कुछ भी कर लूं तुम ये अभी बताने वाले नहीं.. लेकिन वादा करो जब सब खत्म हो जाएगा तब तुम मुझे पूरी बात बताओगे…


अपस्यु:- वादा रहा… और भी कुछ..


साची:- हां .. प्यार में दगाबाजी माफ़ कर दी लेकिन अब दोस्ती में कोई दगाबाजी नहीं चाहिए… मंजूर…


अपस्यु:- पहले खुद तो से पूछ तो लो, दिल में प्यार वाली चाहत है या फिर दोस्त बनाकर पास रखने का इरादा।


साची:- इतना बड़ी डफर नहीं मेरी चाहत, जो एक धोखेबाज की कहानी जानने के बाद उससे प्यार करते रहे.. लकिन मेरी किस्मत, अब तो तुम्हे तो धिकेबाज कहकर रो भी नहीं सकती और ना ही अंधेरे कमरे में बंद होकर, खुद से ये सवाल कर सकती की आखिर क्यों प्यार हुआ तुमसे…


अपस्यु:- लंबे लंबे भाषण हां..


साची:- तुम से ही सीखा है गुरुदेव।


अपस्यु:- अच्छा सुनो क्या तुम प्लीज एक बात अपने तक रख सकती हो..


साची:- कौन सी बात?


अपस्यु:- यही की मै और ऐमी रिलेशन में है, दुनिया में तुम पहली ऐसी हो जिसे मैंने हमारे रिलेशन के बारे में बताया है, वरना इसके बारे में तो आरव भी नहीं जानता।


साची:- क्या बात कर रहे हो? यानी किसी को भी नहीं पता। रूको, रुको, यानी तुम दोनों मिलकर और भी लड़कियों को ट्रैप करने का तो नहीं सोच रहे?


अपस्यु:- जी नहीं, अब किसी मासूम को ट्रैप नहीं किया जाएगा… हां किसी शातिर को फसाने के लिए हमे शातिराना मूव की जरूरत होती है, इसलिए हम एक दूसरे का रिश्ते किसी को जाहिर नहीं होने देना चाहते …


साची:- कमाल की जोड़ी है तुम दोनों की.... एक ट्रैप करने के चक्कर में यहां छत पर सफाई दे रहे, अगली बार कोई भूल हुई तो पैराशूट में जाकर सफाई देते रहना..


अपस्यु:- ऐसा हुआ तो तुम क्यों हो, तुम्हारी कहानी बताकर वक़्त और समझाने दोनों की सरदर्दी से जल्दी छुटकारा पा लूंगा..


साची:- मिस्टर अपस्यु मै बेसब्री से उस वक़्त का इंतजार करूंगी। जितना खेल रचा है ना तुमने मेरे साथ उसका पूरा हिसाब ले लूंगी फिर तो..


अपस्यु:- लेकिन अब तो हमारे बीच दोस्ती हो गई है ना..


साची:- सुना नहीं क्या तुमने वो प्यारी सी कहावत.. हर एक दोस्त कमीना होता है..


अपस्यु:- लेकिन यहां तो कामिनी है..


साची:- ओय बस.. जेंडर क्लैरीफिकेशन कहा क्या देने.. चलो अब चलते है खाना खाने… लेकिन उससे पहले..


अपस्यु:- अब भी कुछ रह गया है सुनने को..


साची:- नहीं एक माफी का छोटा सा सेशन.. तुम तो अपने बोझ को हल्का कर लिए, कुछ बातें मेरे अंदर भी चुभ रही है, कह दूंगी तो दिल हल्का ही जाएगा..


अपस्यु:- हम्मम ! ठीक है, कर लो अपना भी मन हल्का..


साची:- पहले तो तुम्हारा थैंक्स। उस दिन डिस्को में और उससे पहले बैंक्वेट हॉल में मेरे भाई ने बहुत गलत किया था.. फिर भी तुम अपने उठे हाथ रोक लिए.. तुम्हारे जज्बे ने उस रात मुझे रुला ही दिया.. शायद गुस्से में कोई भी इतना नियंत्रित नहीं होता है जितने तुम थे....


अपस्यु:- कोई बात नहीं है.. अब वो भला है या बुरा है, है तो परिवार का हिस्सा ही, उसकी बेवकूफी की वजह से मै तुम दोनों बहन को अफसोस करते नहीं देख सकता।


साची:- मेरी एक इक्छा पूरी करोगे..


अपस्यु:- इतनी मिन्नतें नहीं हक से बोलो..


साची:- मै चाहती हुई कबीर और नीरज को उसके किए की अच्छी सजा मिले, बस जो भी करना मेरी नजरों से थोड़ा दूर…


अपस्यु:- ये तुम क्या कह रही हो, वो दोनों तुम्हारे भाई है..


साची:- हां जानती हूं। कितना फर्क है ना तुम लोगों में और मेरे परिवार में.. सिर्फ मेरी दोस्ती की वजह से कुंजल ने मुझसे कहा तक नहीं की मेरे भाईयों ने उसके साथ बहुत ही गलत किया.. हम दोनों बहन केवल..


अपस्यु:- बात को खींचो मत.. इतनी अच्छाई और बुराई में घुसने की जरूरत नहीं, काम हो जाएगा.. अब चलें या और भी कुछ बचा है..


साची:- हां अभी तो पूरी कहानी बची है.. ये तो साइड मैटर था..


अपस्यु:- तुम भी ना.. चलो झटपट बोल कर दिल हल्का कर लो..


साची:- अरे रुको तो परेशान ना करो आराम से बात कहने दो… जैसे तुमने अभी बताया ना कि तुम्हारा प्यार धोका था, तुमने मुझे ट्रैप किया था। लेकिन तुम्हारी बात भी सही थी, मेरा प्यार स्वार्थ था जो बस तुम्हे मेरे साथ होते देखना चाहता था। तुम वहां भी एक हिसाब से सही ही थे जब मैंने क्रेज़ी बॉय का दिल तोड़ा.. वर्चुअल ही सही लेकिन फीलिंग तो वहां भी थी।"

"और आखरी में.. मै अपने दर्द में रही लेकिन किसी सच्चाई बताने वाले को ऐसे जिंदगी से दरकिनार कर देना यह एक ग़लत काम था.. मैं वहां मै पूरी गलत थी। प्यार होता तो रास्ता निकालना था या साथ नहीं निभा पाते तो प्यार से अलग होना था, क्योंकि सच्चाई बताकर धोखा देना मकसद नहीं था… यहां मेरा एकतरफा फैसला पूरा गलत था… आह.. अब कुछ अच्छा लग रहा है… उस रिश्ते में एक लड़का दोषी नहीं था बल्कि एक लड़की दोषी थी, जिसने अपने लड़की होने का केवल एडवांटेज लिया था… आह सुकून मिला है अब कहीं जाकर..


अपस्यु:- तुम्हे इतना जस्टिफाई करने कि जरूरत नहीं थी, ये सब तो एक ट्रैप था।


साची:- वो तो अभी पता चला ना की ट्रैप था, और तुमने और ऐमी ने मिलकर मुझे कंफ्यूज किया था। लेकिन यदि सोचा जाए, कोई मेरा सच्चा चाहने वाला होता तो मैं अपने स्वार्थ में अंधी होकर, बस अपने इमोशन का एडवांटेज उठा लेती, लेकिन उसका तो दिल मै तोड़ चुकी होती।


अपस्यु:- तुम्हे इतना सोचने कि जरूरत नहीं है। तुम बहुत स्वीट हो.. चलें हम अब खाने…


साची:- हां बिल्कुल.. और हां थैंक्स इतनी मेहनत के लिए.. वरना मै ना जाने कब तक पिस्ते रहती और साथ में कभी ध्रुव से वो लगाव नहीं रख पाती।


आहहह… साची ने जैसे कई दिन बाद खुली हवा में चैन की श्वांस ली हो। चेहरे पर पुरानी मुस्कान और अपस्यु का हाथ थामे किसी पुराने दोस्त की तरह दोनों चल दिए बुफे एरिया में। रघुवंशी परिवार कुछ देर पहले ही बुफे एरिया में पहुंचे थे और अपने अपने खाने की थाली लेकर सब निवाला ले ही रहे थे कि नीचे अपस्यु और साची के साथ की एंट्री ने सबको चौंका दिया।


जिसका निवाला जहां था वहीं पर आकर रुक गया और सब बस घूर-घूर कर दोनों को ही देख रहे थे, कैसे अपस्यु और साची हाथ में हाथ डाले एक दूसरे के साथ हंसी मज़ाक करते अंदर आ रहे थे। … "क्या हुआ तुम सब ऐसे मुंह फाड़ कर हमे ऐसे क्या देख रहे हो।"… साची हंसते हुए सबको देखकर कहने लगी..


कुंजल उसे अपने साथ कोने में खींचकर ले जाते हुए पूछने लगी…. "ये अचानक तेरे हृदय परिवर्तन कैसे ही गया। हम इतने दिनों से समझा रहे थे तब तो तू नहीं मानी। कहीं दोनों का यहां से भागने का इरादा तो नहीं। ऐसा ना हो कि इंडिया ने खबर छपे, बाप के मुंह पर कालिख पोत कर बेटी अपने प्रेमी के साथ फरार।"


"हीहीहीहीही… तू ज्यादा एक्साइटेड ना हो, मुझे तेरी भाभी बनने मै कोई इंट्रेस्ट नहीं। हां बस इतना अच्छा लड़का हाथ से निकल ना जाए, इसलिए छत पर उसे पकड़ने गई थी।".. साची पूरे मज़े से अपनी बातें करती रही…


इन सबके बीच ऐमी सबसे पीछे खड़ी होकर सब देख रही थी। ऐमी का चेहरा उसके अंतरमन कि हालात बयां कर रहा था कि वो कितनी खुश थी। लेकिन 2 लोग वहां और भी थे जिन्हे यहां का माहौल बहुत ही ज्यादा अजीब लग रहा था। साची के जिस कन्फ्यूजन के चेप्टर को अपस्यु अभी-अभी क्लोज करके आ रहा था, उससे पार्थ और स्वस्तिका अंदर से काफी चिढ़े हुए थे और दोनों अपस्यु से काफी खफा नजर आ रहे थे।
:superb: :good: amazing update hai nain bhai,
behad hi shandaar aur lajawab update hai bhai,
chalo bhai saanchi aur apasyu mein dosti ho gayi,
Ab dekhte hain ki aage kya hota hai
 

aman rathore

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Update:-75 (A)



साची के जिस कन्फ्यूजन के चेप्टर को अपस्यु अभी-अभी क्लोज करके आ रहा था, उससे पार्थ और स्वस्तिका अंदर से काफी चिढ़े हुए थे और दोनों अपस्यु से काफी खफा नजर आ रहे थे।


अचानक से आए प्लान में इस बदलाव से पार्थ और स्वस्तिका इतने नाराज हुए की दोनों ने कुछ घंटे के अंदर आपातकालीन मीटिंग की योजना बनाते हुए सबको संदेश भेज दिया। आरव और ऐमी के बीच थोड़ी सी बातचीत के बाद रात के 12.30 बजे कमरा नंबर 806 में ही बैठक का स्थान तय हुआ।


रात के 12.30 बजे सभी लोग वहां पहुंच चुके थे, वहां का सर्विलेंस और सुरक्षा के सरा इंतजामात ऐमी के जिम्मे था। ऐमी उस जगह को पूरा परखनेंके बाद मीटिंग शुरू करने का इशारा की…


पार्थ ने मीटिंग की सुरवत करते साची और अपस्यु से जुड़े आज रात की बातचीत को लेकर जहां सवाल खड़े किए, वहीं योजना को बीच में ही बदलने के लिए स्वस्तिका ने अपस्यु से अपने गुस्से का इजहार किया।


अपस्यु एक-एक करके सारे सवालों का जवाब देता, उनकी सारी चिंता और गुस्से को दूर करते हुए, नए संभावनाओं कि ओर सबका ध्यान आकर्षित करवाया। इसी दौरान विक्रम सिंह और मयलो ग्रुप की भी पूरी जानकारी साझा की गई। बातों के दौरान यह भी पता चला की इस जिंदल के बेटे के एंगेजमेंट में लगभग सभी मुख्य टारगेट एक साथ इकट्ठा होंगे, जहां विक्रम सिंह के भी आने की पूरी संभावना है।


यहीं एक वजह थी कि, जिसकी सोच के साथ अपस्यु ने आरव का एंगेजमेंट जिंदल के बेटे के साथ नहीं होने दिया, ताकि नंदनी और विक्रम आमने-सामने ना हो। हालांकि अपस्यु ने यह भी साफ कर दिया कि जो खेल विक्रम ने खेला था, उसका पूरा न्याय करने के लिए नंदनी और विक्रम जल्द ही आमने-सामने जरूर होंगे, लेकिन उससे पहले कुछ तैयारियां पूरी होनी जरूरी है।


लगभग 2 घंटे चली इस मीटिंग में नए बदलाव के साथ सभी को अपने-अपने काम मिल चुके थे। स्वस्तिका को 3 महीने का वक्त मिला था, जिसमे वो कुंजल को इतना तो तैयार कर ही दे कि, मुसीबत में वो अपनी और अपने मां कि जान बचा ले। इसी प्रकार उतना ही वक़्त पार्थ को भी मिला था, ताकि वो वीरभद्र को शारीरिक और मानसिक रूप से परिपक्व बना दे।


2 भागों में टीम का विभाजन हो चुका था। स्वस्तिका, आरव, पार्थ और उसके साथ वीरभद्र मिलकर मायलो ग्रुप में सेंध लगाने के साथ-साथ नंदनी और कुंजल को सुरक्षित रखेंगे। वहीं अपस्यु और ऐमी का टारगेट जिंदल था। सभी को तैयारी के लिए 3 महीने के वक़्त दिया जा चुका था और सितंबर के शुरवात में सब की दिल्ली वापसी तय हो चुकी थी।


लगभग 2 घंटे चली इस मीटिंग में सारे अहम फैसले लिए जा चुके थे, बस अब जरूरत थी खुद के तैयारियों को परखकर आगे बढ़ने की, जिसके लिए अपस्यु ने सबको 3 महीने का वक्त दिया था, और इसी के साथ उनकी सभा भी समाप्त हो चुकी थी।


मीटिंग के समाप्ति के बाद ही, सभी फिर से एक बार जोर से हूटिंग शुरू करने लगे और आरव को एक बार फिर सबने कल के लिए बधाई देते हुए वहां से निकल गए। रात के 2.30 बज चुके थे सब अपने-अपने कमरे में चल दिए आराम करने।


अगली सुबह, सुबह से ही कौतूहल का माहौल था, ना सिर्फ परिवारों में बल्कि पूरे होटल में भी। सुरक्षा के लिहाज से पूरे होटल के गेस्ट को एक दिन पहले ही शिफ्ट किया जा चुका था। 30 जून की सुबह से ही जैसे वहां का माहौल किसी जंग के माहौल में तब्दील हो चुका था। एंगेजमेंट में हाई प्रोफाइल गेस्ट की लिस्ट इतनी लंबी थी, उसमें भी इतने बड़े-बड़े पॉलिटीशियन आमंत्रित थे कि अमेरिका के कई सारे सुरक्षा एजेंसी के कई सारे प्रशिक्षित जवान वहां के चप्पे चप्पे की निगरानी कर रहे थे। उस होटल में रघुवंशी और मिश्रा फैमिली के लोगों को छोड़ कर केवल होटल के स्टाफ ही बचे थे।


खैर सुरक्षा के इंतजामात अपनी जगह थे और लोगों में एंगेजमेंट की उत्साह अपनी जगह, खासकर वहां मौजूद स्त्रियों में। लेकिन अभी सुबह की सबसे पहली प्रहर चल रही थी, यानी कि सुबह के 5 बज रहे थे और इतनी सुबह ऐमी के दरवाजे पर दस्तक होने लगी। 2.30 बजे सोई ही थी कुंजल ने 5 बजे जगा दिया। ऐमी आधी नींद में दरवाजा खोली और कुंजल कमरे के अंदर चली आयी।


कुंजल:- और कितना सोना है ऐमी, जाओ तुम्हें साची ने बुलाया है।


ऐमी:- कुंजल… सोने दो ना .. बाद में देखती हूं उसे।


कुंजल:- देखना तुम्हे नहीं है, देखेगी वो तुम्हे, जाओ..


ऐमी कुंजल को खींच कर बिस्तर में ले ली और उसके हाथ पाऊं जकड़ कर बोलने लगी…. "चुप चाप सो जाओ, और मुझे भी सोने दो।"


कुंजल:- ऐमी, ये सब क्या है, छोड़ो मुझे प्लीज।


"क्यों, कोई लड़का ऐसे जकड़ कर रखेगा तभी मज़ा आएगा क्या? कुंजल मेरी नींद खराब ना करो…" ऐमी अपनी बात कहती हुई कुंजल को अपने जकड़ से मुक्त कर दी। कुंजल लाख कोशिश करती रही लेकिन ऐमी अपने कानो में रुई डालकर सो गई।


थोड़े ही देर में वहां का माहौल शांत हो गया और ऐमी वापस से नींद की गहराइयों में चली गई। ऐमी नींद की गहराइयों में थी, तभी उसके गाल पर एक जोरदार तमाचा परा। अचानक से नींद में आए खलल से ऐमी चौंककर बैठ गई और अपनी ललाट चढ़ा कर आखें खोली…. "मेरी इतनी सारी नींद हराम करके खुद चैन से सो रहे मिस्टर क्रेज़ी बॉय।" … साची बिस्तर पर बैठी उसे घूरती हुई कहने लगी…


ऐमी:- साची मैं तुमसे हाथ जोड़ती हूं प्लीज़ अभी चली जाओ, सोने दो मुझे। बाद में जब आऊंगी तो जितने जी चाहे थप्पड मार लेना, लेकिन अभी प्लीज सोने दो।


ऐमी नींद के आलम में उसे कहती हुई वहीं बैठे बैठे अपनी आखें मुंदी ही थी कि तभी दूसरे गाल पर भी जोरदार तमाचा परा…. "पागल हो गई हो क्या साची, सुबह-सुबह मुझे गुस्सा मत दिलाओ।'..


"तुम्हारा लवर मुझे ताने देकर कहता है कि, क्या वर्चुअल आईडी थी तो उसका इमोशन भी वर्चुअल होगा? यहां तुम्हारी अननॉन गर्ल तुमसे मिलने आयी है और तुम्हारे ये गुस्से से भड़ा इमोशन देखने मिल रहा। कहां है तुम्हारा वो चाहत वाला इमोशन क्रेज़ी बॉय"…. साची अपनी बात खत्म करके फिर एक जोरदार थप्पड लगा दी ऐमी को…


इस बार वाकई में मज़ाक-मज़ाक में कुछ ज्यादा ही जोड़ का मार गई साची। इसका प्रमाण इस बात से भी लगाया जा सकता था कि ऐमी के दाएं गाल पर पंजे के निशान छप गए थे और मारने के बाद साची की कलाई में झटके के साथ दर्द होने लगा था।


ऐमी झुंझलाकर अपनी आखें खोली… "अरे पागल, कितना जोड़ की चिपका गई। साची स्टॉप इट प्लीज।"


साची फिर से एक थप्पड बाएं गाल में चिपकती…. "यहां साची नहीं बल्कि, अननोन गर्ल है। और इस अननोन गर्ल का क्रेज़ी बॉय कभी उससे गुस्सा नहीं हो सकता।"…


"तेरी तो"….. कहती हुई ऐमी ने साची को दबोचकर बिस्तर पर लिटाया और उसके दोनों हाथ जकड़कर उसके ऊपर चढ़ गई…. "कामिनी रुको तुम्हे अभी क्रेज़ी बॉय की चाहत भी दिखाती हूं।"…


"नहीं नहीं बस इतना ही मिलना था मुझे अपने क्रेज़ी बॉय से तुम अब सो जाओ।"… साची अपनी हालत पर हड़बड़ा कर बोलने लगी…


"तेरा क्रेज़ी बॉय तुझे थप्पड नहीं मार सकता ना, लेकिन जब उसके कमरे में आयी तो ये भी सोच कर ही आयी होगी की क्रेज़ी बॉय के अरमान क्या है।"… ऐमी, अपनी पकड़ और मजबूत बनाती हुई कहने लगी।


"अरे प्लीज, प्लीज, प्लीज, छोड़ो मुझे, अननोन गर्ल का भूत उतर गया मेरे दिमाग से।"… साची लगभग मिन्नतें करती हुई कहने कहीं..


"बेबी अब तो तुम्हे बताना ही होगा कि सुबह-सुबह बिना ब्रश के मुंह चबाने में कैसा लगता है।"… इतना कहती हुई ऐमी, साची को जबरदस्ती किस्स करने लगीं। साची नीचे से "उम्म्म, उम्म्म" करती अपने चेहरे को दाएं बाएं हिलाती रही लेकिन ऐमी आज तो पूरा मूड बना कर आयी थी, बिना ब्रश कैसे मुंह कैसे चबाते है वो दिखाने।


साची किसी तरह उसे झटका देकर उठी और गुस्से से लाल होती ऐमी को देखने लगी। साची के बाल बिखरे, आखें लाल और अजीब सा चेहरे का एक्सप्रेशन, उसकी इस हालत पड़ ऐमी जोर-जोर से हसने लगी। उसे हंसते देख साची गुस्से में उसके बाल नोचने के लिए उसपर झपटी… ऐमी पीछे हटती हुई कहने लगी… "ओह माय क्रेज़ी बॉय… आह्हः, उफ्फ.. प्रेस माय"…. "ऐमी की बच्ची चुप हो जाओ वरना।"…

ऐमी:- हीहीहीहीहीही… क्यों अपने क्रेज़ी बॉय के एरोटिक इमोशन संभल नहीं रहे…


साची भी ऐमी की बात सुनकर जोर-जोर से हंसने लगी।… "कामिनी लेस्बो".. साची हंसती हुई ऐमी से कहने लगी।


"और इसका क्रेडिट जाता है मिस साची उर्फ अननोन गर्ल को। वैसे तुझसे चैटिंग के चक्कर में मैंने अपनी उंगली बहुत घीसी है, यहां भी घिस लेंगे, आदत तो तेरी ही दिलाई हुई है।"… ऐमी, साची को आंख मारती हुई बोलने लगी..


साची:- छी, बेशर्म.. वैसे देखा जाए तो तुम दोनों ने पहल करने में इतनी देर कर दी, वरना हम अब तक मिलकर धमाल मचा सकते थे। साथ में मै इतनी परेशान भी नहीं रहती।


ऐमी:- अब तो खुश हो ना साची, या अब भी कोई गिला-शिकवा है।


साची:- नहीं बाबा बिल्कुल नहीं, तुम क्यों अपना मुंह छोटा कर रही।


ऐमी:- नहीं बस ऐसे ही। हमारे वजह से बहुत दर्द तुमने झेले है। अफसोस होता है उन गुजरे वक़्त के लिए।


साची:- कोई बात नहीं है ऐमी, इन बुरे वक़्त ने मुझे इतना तो सीखा दिया है कि आप कितने भी बुरे वक़्त से क्यों ना गुजरे हो, कुछ अच्छा आप के लिए जरूर छोड़ जाता है। मेरी इतनी उम्र में बस लावणी ही थी एक, जिसे दोस्त कह लो, बहन कह लो या पूरा संसार। लेकिन अब देखो, ऐसा लगता है एक पूरी दुनिया है मेरी फ़िक्र के लिए। तुम्हारा और अपस्यु का शुक्रिया। मुझे खुशी है कि मै ही वो बीच की कड़ी थी जो तुम्हारे मिशन के रास्ते में था।


ऐमी:- बस भी करो अब, क्यों अपस्यु बनने पर तुली हो।


साची:- अच्छा सुन ऐमी मेरी एक छोटी सी ख्वाहिश है?


ऐमी:- क्या?


साची:- मै चाहती हूं तुम दोनों आज कि रात ठीक वैसे ही मेरे एंगेजमेंट में आग लगा दो जैसा उस रात वहां डिस्को में लगाया था।


ऐमी:- अरे बुद्भू डिस्को की बात अलग है वहां तो हर कोई नाचता है, लेकिन एंगेजमेंट में वैसा नाचना मुझसे ना हो पाएगा। वैसे भी आज शाम मै शाड़ी पहनने वाली हूं।


साची:- हम्मम ! कोई बात नहीं, लेकिन ऐसा नहीं कि दोनों एंगेजमेंट अलग-अलग हॉल में है तो तुम सब आना ही नहीं।


ऐमी:- कैसी बातें कर रही हो। हम सब वहां होंगे। अब तुम जाओ और अच्छे से सजो सवरो, और प्लीज मुझे नींद पूरी कर लेने दो।


साची:- अच्छा सुन, तुम दोनों उड़ते पंछी, आज जरा कम सज संवर कर आना, वरना कहीं ऐसा ना हो कि पूरे शो का मुख्य आकर्षण तुम दोनों ही हो।


ऐमी:- हीहीहीही.. पागल, ठीक है ऐसा ही करूंगी, खुश।


दोनों कुछ देर और वहां पर बातें करती रही, उसके बाद साची वापस लौट आयी और ऐमी फिर से जाकर सो गई। दिन के करीब 2 बज रहे थे। पहला एंगेजमेंट साची और ध्रुव का था, शाम के 5 बजे से 7 बजे के बीच। कई सारे गेस्ट आने शुरू हो चुके थे, इसी बीच अपस्यु के पास मेघा का संदेश आया।


मेघा का संदेश मिलते ही अपस्यु उससे मिलने उसके स्वीट में गया, जहां सिक्यूरिटी ने उसे दरवाजे पर ही रोक लिया। अपस्यु ने जब उन्हें मेघा का संदेश दिखाया, तब जाकर कहीं उसे अंदर जाने दिया गया…
:superb: :good: amazing update hai nain bhai,
behad hi shandaar aur lajawab update hai bhai,
aaj to unknown girl aur crazy boy ka romance bhi dikha diya :lol: ,
Vahin meeting mein do team ban gayi hai aur ab teen mahine ka samay mila hai kunjal aur veere ko trained karne ke liye,
Ab dekhte hain ki aage kya hota hai
 

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स्वीट के अंदर धीमी रौशनी जल रही थी और मेघा का कोई पता नहीं था। तभी अंदर के कमरे के बाथरूम से आवाज़ आयी, "यहीं चले आओ"… अपस्यु भी अंदर चल दिया और बाथरूम के दरवाजे पर खड़ा होकर मेघा से कहने लगा… "नहा धो कर बुला लिया होता, अब ऐसे कैसे बात हो पाएगी।"


मेघा:- मैंने कहा अंदर चले आओ, बाहर मत खड़े रहो। वैसे भी जबतक नहा रही हूं तभी तक का वक़्त है मेरे पास, उसके बाद मै एंगेजमेंट के लिए तैयार होने वाली हूं।


अपस्यु भी दरवाजा खोलकर अंदर दाखिल हो गया और वहीं लगी एक छोटे से टेबल पर बैठ गया।… "हां तो शुरू करो।"..


मेघा:- तुम्हे क्या हर बात समझानी पड़ती है अपस्यु, कपड़े उतारो और टब में आ जाओ।


अपस्यु:- माफ़ करना फाइट से 5 दिन पहले मै अपनी एनर्जी वेस्ट नहीं करता। एक इंच दर फासला हार के कगार पर ले जा सकता है।


मेघा:- व्हाट द फक, तुम क्या पागल हो जो मुझे मना कर रहे हो?


अपस्यु:- तुम्हारी अक्ल क्या घुटनों में है। मैं 5 मिलियन की बेटिंग की फाइट लड़ने जा रहा हूं, ना की किसी सड़कछाप को मारने। मैंने कल ही बताया था तुम्हे मै फैक्ट्स पर काम करता हूं।


"व्हाटएवर, 5 मिलियन क्या 10 मिलियन मै गवां दू, फर्क नहीं पड़ता। लेकिन अगर कोई मुझे ना कहे वो मुझे मंजूर नहीं।"… मेघा अपनी बात कहती हुई टब से बाहर निकली और शावर के नीचे खड़ी हो गई।


पहले पीछे से पूर्ण नग्न रूप दिखाने के बाद अपस्यु के सामने खड़ी होकर वो सावर लेने लगी और अपस्यु को टीज करने लगी। लेकिन अपस्यु उसकी हरकतों पर बिना ध्यान दिए वहीं बैठ, उसे नहाते हुए देख रहा था।


मेघा शावर को बंद करके अपस्यु से कहने लगी…. "अपस्यु मेरा ईगो हर्ट करके, तुम कल का सूरज नहीं देख पाओगे।"


अपस्यु अपनी जगह से उठा और तेजी के साथ मेघा के ओर बढ़ते हुए उसका गला पकड़कर उसे दीवाल से पूरा चिपकाते हुए, उसे फ्लोर से 1 फिट ऊपर उठा दिया। इधर अपस्यु अपने अंदर 30 की उल्टी गिनती शुरू कर चुका था और उधर मेघा छटपटाती हुई, अपस्यु के गुस्से से लाल हुई आखों को देख रही थी, जिसमे उसे साक्छातप किसी शैतान के दर्शन हो रहे थे। उसके गले से आवाज़ निकालना बंद हो चुका था और पाऊं छटपटाने लगे थे। भय किसे कहते है उससे मेघा का आज सामना हो चुका था।


30 की उल्टी गिनती खत्म होने के साथ ही वो नीचे फ्लोर पर आयी और तेज-तेज श्वांस लेती वो कांप रही थी। अपस्यु किसी साइको की भांति पूरे पागलपन में बोलना शुरू किया…

"मैंने तुम्हारी डील एक्सेप्ट की है, तुम्हारी गुलामी नहीं। मै फाइट से ठीक 10 मिनट पहले भी किसी के साथ सेक्स कर सकता हूं, वो मेरी मर्जी होगी। ये बार-बार मुझे धमकी देकर मेरे ईगो को भड़काने कि कोशिश मत करो वरना मै सोचने तक का वक़्त नहीं देता।"…


अपनी बात खत्म करके अपस्यु ने मेघा के होंठ से अपने होंठ लगाकर कुछ देर तक उसके पूरे जोश से चूसने के बाद अलग हुआ और सामान्य आवाज़ में कहने लगा….

"तुम्हारा फिगर कमाल की है। और जिस्म आह दिल में आग लगाता हैं। तुम्हारे इस प्रदर्शन का इनाम मैंने तुम्हे दे दिया। आज की अपनी मीटिंग मै यहीं खत्म करता हूं, फाइटर की डिटेल आज रात तक भेज देना। आज भी चलते चलते एक बात कहता जाता हूं… मेरे ईगो के सामने तुम्हारा घमंड मात्र हाथी के आगे चूहे बराबर है, हाथी अपनी मस्ती में जा रहा है, उससे छेड़ने की कोशिश भी मत करना।"


अपस्यु अपनी बात कहता, बिना मुड़े वहां से चलता बना और मेघा अपने आखों के सामने से किसी ऐसे को जाते हुए देख रही थी, जिसने उसे भय से सामना करवा दिया और अपस्यु के सामने उसकी आवाज़ तक नहीं निकली।


अपस्यु वहां से बाहर निकलकर सीधा तैयार होने पहुंच गया और तैयार होकर वो सीधा होटल के बार में बैठा और कॉकटेल का मज़ा लेने लगा। 2 पेग को कॉकटेल का पीने के बाद अपस्यु अाकर हॉल में बैठा ही था कि सामने से बहुत बड़ा हुजूम चला आ रहा था। कई बड़े-बड़े अधिकारी और कुछ बड़े पॉलिटिकल चेहरों के बीच से उसे जाना पहचाना चेहरा नजर आने लगें।


उसके आव-भगत में तो जिंदल भी इतना गुलामों की तरह लगा हुआ था कि मानो उसके आगे जिंदल की कोई हस्ती ही नहीं। वो जिंदल और कुछ अन्य अमेरिकन राजनेताओं के साथ बात करते हुए आगे बढ़ रहे थे, तभी उसके कदम अपस्यु को देखकर रुक गए। होम मिनिस्टर अपने बढ़ते कदम मोड़कर सीधा अपस्यु के पास आकर बैठे…. "मुझे समझना चाहिए था कि तुम यहीं मिलोगे।"..


मंत्री जी को देखकर अपस्यु आदर से उठकर उनका सम्मान किया और उनकी बात पर मुस्कुराते हुए कहने लगा… "सर आप अभी पूरे प्रोटोकॉल के साथ है, अच्छा नहीं लग रहा मुझे आप का यहां रुकना।"


मंत्री जी… अरे जिंदल, हमारा बच्चा भी यहां है। इससे मुलाकात हुई की नहीं तुम्हारी।


जिंदल:- हुई थी सर, लेकिन कभी इसने जिक्र नहीं किया की ये आप को जनता है।


मंत्री जी:- तुम गलत कह गए जिंदल, मुझे जानने वाले तो बहुत है लेकिन अपस्यु उनमें से है जिसे मै जानता हूं।


अपस्यु:- सर अब जब आप यहां आ ही गए है तो आप को मै अपने भाई के एंगेजमेंट के लिए आमंत्रित करता हूं, क्या आप के पास 10 मिनट का वक़्त होगा।


मंत्री जी:- कितने बजे है एंगेजमेंट अपस्यु…


अपस्यु:- 8 बजे शाम से शुरू है सर।


मंत्री जी अपने पीए को देखते हुए पूछे…. "शुक्ला जी क्या 10 मिनट का वक़्त निकला जा सकता है।"

शुक्ला जी:- सर, हमे शाम को 6.40 में ही निकालना होगा।


मंत्री जी वहीं अपस्यु के पास बैठते हुए… "तब 10 मिनट का वक़्त नहीं मिला तो क्या हुआ, अभी तो है ना मेरे पास पूरा समय। अपस्यु मै तुम्हारे भाई और होने वाली भाभी के साथ-साथ तुम्हारे पूरे परिवार से मिलना चाहूंगा। शुक्ला जी राजीव के साथ जाइए और सबको आदर पूर्वक बुला लाइए, जबतक मै अपस्यु से बात करता हूं। और हां जाते जाते कुछ सिटिंग आरेंगेमेट भी यहां करवाते जाइएगा।


मंत्री जी अपनी बात पीए से समाप्त करके, भीड़ से थोड़ा दूर हटकर अपस्यु के साथ खड़े होकर बातें करने लगे। दोनों के बीच ऐसा लगा जैसे कुछ गहन बातें चल रही थी। जबतक इनकी बातें खत्म हुई, परिवार के सभी लोग वहां पहुंच चुके थे।


मंत्री जी आरव और लावणी दोनों से मिले साथ में रघुवंशी के संपूर्ण परिवार से एकएक करके मिलते चले गए। तकरीबन 15 मिनट का वहां वक़्त देने के के बाद सबसे विदा लेकर मंत्री


उनके जाते ही लॉबी से पूरी भीड़ भी हट गई और साथ ने वहां से अपस्यु भी कट लिया। साची के बुलावे पर अपस्यु उसकी एंगेजमेंट में पहुंचने वाला सबसे पहला गेस्ट था, क्योंकि मंत्री जी के 15 मिनट के उस शैडयूल चेंज ने सबका शेड्यूल चेंज कर दिया था।


अपस्यु हॉल में पहुंचकर एक बार फिर बार काउंटर कर पहुंचा और वहीं बैठकर अपने फेवरेट कॉकटेल का मज़ा लेने लगा… "वन एटॉमिक शैम्पेन कॉकटेल"… ऐमी अपस्यु के कंधे पर हाथ रखकर अपस्यु की फेवरेट कॉकटेल का ऑर्डर की।


अपस्यु थोड़ा दूर हटकर ऐमी को देखा और देखने ही लगा। वो वापस से उसके पास आकर बैठा और कमर पर चिकोटी काटते हुए प्यार भड़ा चुम्मा अपने होटों से भेजा। ऐमी भी अपने होटों से वापस चुम्मी भेजती हुई अपना ग्लास टोस्ट के लिए बढ़ाई…


अपस्यु ग्लास से ग्लास टकराते हुए…. "ऐमी आज तुम कमाल कि लग रही हो। तुम साड़ी मत पहना करो मेरे इमोशन कंट्रोल नहीं होते।


"अच्छा मेघा के साथ मीटिंग करके आए फिर भी इमोशन्स जाग रहे है।"… ऐमी ड्रिंक की सिप लेती हुई कहने लगी…


अपस्यु:- अभी हम दोनों है ना फिर ये तीसरे की क्या जरूरत। अभी बात करना है क्या उसके बारे में।


ऐमी:- हीहीहीहीही… सर अपस्यु अपना यहां आपा खोते हुए..


अपस्यु:- मिस अवनी, आप कृपया करके मेरी कमजोर नब्ज पर वार करने से बाज आएंगी…


"भाई की कमजोर नब्ज.. क्या है प्लीज मुझे भी बताओ ना, आज तक मैंने इन्हे वो गुस्से में कभी नहीं देखा जैसा हमलोग आम तौर पर हो जाते है।"… कुंजल उन दोनों के बीच आती हुई पूछने लगी..


ऐमी:- अपने भैय्या से पूछ लो, मुझे बताने में कोई हर्ज नहीं।


कुंजल:- उनसे क्या पूछना तुम बताओ ऐमी।


अपस्यु:- कुंजल तुझे साची शायद ढूंढ रही है, देखो वहां से तुम्हे ही हाथ दिखा रही।


कुंजल:- मुझे क्यों हाथ दिखाएगी, गौर से देखो वो आप को हाथ दिखा रही है।


कुंजल अपनी बात कहकर हसने लगी, और उसकी बात सुनकर ऐमी भी हंस पड़ी। अपस्यु अपनी ड्रिंक हाथ में लिए ही स्टेज पर चढ़ गया।… "जी मैम कहिए, क्या सेवा की जाए।"..


साची:- कैसी लग रही हूं बताओ…


अपस्यु:- मस्त लग रही हो, और ये नीला रंग तुम पर बहुत अच्छा लगता है।


साची:- अच्छा ऐमी से तुलना करके बताओ की उसके मुकाबले मै कैसी लग रही।


अपस्यु:- अब इसमें तुलना जैसा क्या करना है। मै कुछ समझा नहीं।


साची:- तुम्हे समझना भी नहीं है… ये हम लड़कियों का कुछ सीक्रेट बातें होती है, अब बताओ मुझे।


अपस्यु:- नो डाउट, आज तुम ऐमी को भी मात दे रही हो। 10 में से 9 मार्क तुम्हे मिलते हैं।


साची:- और मेरे एक मार्क कहां काट लिए..


अपस्यु:- आखों पर हल्की काजल होती ना तो बिल्कुल तुम किसी कातिल हसीना से कम नहीं लगती।


साची:- ओह थैंक्स, चल लावणी। ओके बाय अपस्यु मै आयी जल्दी।


अपस्यु उसकी बात पर हंसते हुए वापस आया और अाकर ऐमी के पास बैठ गया और उसे घूरते हुए पूछने लगा… "आज तुमने मेकअप क्यों नहीं किया।"


ऐमी:- जिसके लिए मेकअप करती उसने मुझे देखकर ही उत्साह से जब चिकोटि काट ली तो आगे इतना बनना संवरना क्यों?


अपस्यु:- छोड़ो जाने देते हैं इस बात को। कितनी ड्रिंक पी गई।


ऐमी:- तुम्हारी बकवास कॉकटेल अब तक बस 2 ली है।


अपस्यु:- जब बकवास था तो दूसरा पेग क्यों ली।


ऐमी:- कुछ पागलपन के लिए थोड़ा नशा भी जरूरी है। वो छोड़ो, हम जिसके लिए बैठे हैं वो लोग पहुंच गए क्या?


अपस्यु:- नहीं वो लोग अभी तक नहीं पहुंचे हैं। वैसे लोग तो अपने भी नहीं पहुंचे है। सबको कहां 5.30 बजे बुलाया था, अब 6 बजने को आए हैं।


ऐमी:- सब आते ही होंगे। तुम्ही ने तो सबको बीच तैयारियों से उठवा दिया, वरना अब तक तो आ भी चुके होते।


अपस्यु और ऐमी कुछ देर और बातें करते रहे की तभी वहां पर आरव, स्वस्तिका और पार्थ भी पहुंच गए। तीनों पहुंचते ही बार टेंडर को बोलने लगे… "वन एटॉमिक शैम्पेन कॉकटेल"


अपस्यु उन तीनों के ऑर्डर को सुनते ही हंसने लगा और वापस से अपनी कॉकटेल उठाई। उसके साथ-साथ बाकियों ने भी अपने-अपने जाम उठाया और साची के ओर ग्लास दिखाकर पांचों ने एक साथ टोस्ट किया। टेस्ट करके ग्लास जैसे ही नीचे लाए, सामने से वो लोग भी नजर आने लगे जिसका इतंजार सब कर रहे थे।


जैसा अंदाजा था ठीक वैसा ही हुआ। विक्रम सिंह राठौड़ अपने परिवार समेत जिंदल के साथ महफ़िल में शिरकत करते हुए नजर आने लगा। जिंदल और विक्रम के साथ कुछ और जाने पहचाने से चेहरे.. और हर एक के चेहरे को पांचों जैसे अपने दिमाग के हार्ड डिस्क में पूरे डाउनलोड करना शुरू कर दिया था।
:superb: :good: amazing update hai nain bhai,
behad hi shandaar aur lajawab update hai bhai,
Megha ko ek pal mein hi apasyu ne uski aukat dikha diya hai,
Aur ab aakhir kar Vikram bhi engagement mein pahunch gaya hai,
ab dekhte hain ki aage kya hota hai,
Waiting for next update
 

rgcrazyboy

:dazed:
Prime
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ye party ho rahe hai ya sab villano ke charo pr se dhul hatane ki koshish.
vese bhi sab kuch samne hote huai bhi na dekhe vaha bus jo dikha raha hai usko use ki tarah se dekho to maja aata hai. :D
vese neta ji bhi kuch to game khel ke nikal gai hai :D

vese ye teen maheno ka time kyu maga gaya hai.
kyu ki in ki tayari to shuru se chal rahe hai.
kya ye abhi bhi apne palan ke final stage par nhi pohoche hai kya :D
 
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